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                <title>medical college - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>medical college RSS Feed</description>
                
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                <title>मेडिकल टीचर्स का 2 घंटे कार्य बहिष्कार : मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में मरीज परेशान, मांगें नहीं मानने तक हर रोज होगा कार्य बहिष्कार</title>
                                    <description><![CDATA[एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. धीरज जैफ ने बताया कि सोमवार को हमारी चिकित्सा शिक्षा सचिव अम्बरीश कुमार के साथ वार्ता हुई, लेकिन कोई सहमति नहीं बन पाई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/2-hours-of-medical-teachers-work-boycott-of-work-will/article-127039"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/k-6.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में लैटरल एंट्री के विरोध में डॉक्टरों का आंदोलन अब तेज हो गया है। राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन के बैनरतले पिछले सात दिनों से जारी आंदोलन के दौरान लगातार दूसरे दिन भी एसएमएस मेडिकल कॉलेज से जुड़े एसएमएस सहित अन्य अस्पतालों में सुबह 8 से 10 बजे तक दो घंटे का कार्य बहिष्कार किया गया। यह बहिष्कार कोटा, अजमेर सहित अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भी किया गया। साथ ही धरना भी जारी रखा गया है। इस दौरान डॉक्टर्स के ओपीडी में नहीं आने से मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।</p>
<p>हालांकि कार्य बहिष्कार से इमरजेंसी सेवाओं को बाहर रखा गया। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. धीरज जैफ ने बताया कि सोमवार को हमारी चिकित्सा शिक्षा सचिव अम्बरीश कुमार के साथ वार्ता हुई, लेकिन कोई सहमति नहीं बन पाई। जब तक हमारी मांगें नहीं मानी जाती तब तक मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में रोजाना दो घंटे के ओपीडी का बहिष्कार किया जाएगा। हालांकि इस कार्य बहिष्कार के दौरान इमरजेंसी, इनडोर और ऑपरेशन थिएटर की सेवाएं प्रभावित नहीं होंगी। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है अगर सरकार और चिकित्सा विभाग ने जल्द कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाए तो आंदोलन को और कड़ा किया जाएगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Sep 2025 18:21:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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                <title>दोपहर 2 बजे बाद मरीज हो रहे चक्कर घिन्नी</title>
                                    <description><![CDATA[जांच रिपोर्ट लेने के लिए भटकते रहे परिजन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/patients-are-getting-dizzy-after-2-pm/article-120803"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/8842roer40.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।  राजकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल दोपहर 2 बजे बाद मरीजों व तीमारदारों के लिए भूलभूलैया  बन जाता है। दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों ने सुबह जिस लैबोरेट्री में जांच के सैंपल दिए या पर्ची कटवाई दोपहर बाद उस लैब, दवा व पर्ची काउंटर तक पहुंचने का रास्ता ढूंढने से भी नहीं मिलता। नतीजन, निर्धारित स्थान पर पहुंंचने के लिए भटकते रहते हैं। अस्पताल प्रशासन की उदासीनता से मरीज व तीमारदार इधर से उधर चक्कर काट परेशान होते रहते हैं और अस्पताल की व्यवस्थाओं को कोसते नजर आते हैं। मरीजों की लगातार मिल रही शिकायत पर नवज्योति ने मौके के हालात देखे तो अजीब स्थिति नजर आई।  दसअसल, मेडिकल कॉलेज में दोपहर 2 बजे बाद गेट नंबर-1 से 3 तक के गेट बंद कर दिए जाते हैं। जबकि, गेट-1 व 2 में सुबह के समय ओपीडी चलती है। जहां रजिस्ट्रेशन करवाने से लेकर डॉक्टर को दिखाने, लेबोरेट्री में जांच तथा ब्लड बैंक में जाने सहित अन्य  कार्य यहीं से होते हैं। लेकिन, दोपहर 2 बजे बाद गेट 1 से 3 तक के सभी गेट बंद कर दिए जाते हैं। ऐसे में मरीजों को लेबोरेट्री से लेकर इमरजेंसी एक्स-रे करवाने तक  कार्यों के लिए अस्पताल से बाहर निकलकर लंबा चक्कर काट गेट-नंबर 4 में जाना पड़ता है। ऐसे में वह परेशान होते रहते हैं। </p>
<p><strong>गेट बंद, अब कैसे जाएं ब्लड बैंक </strong><br />बूंदी जिले के डाबी निवासी रामकरण मीणा, बुद्धिप्रकाश  गेट-1 एक से होते हुए ब्लड बैंक जा रहे थे लेकिन कोरिडोर का गेट बंद होने से मायूस खड़े थे। जब उनसे पूछा तो उन्होंने बताया कि परिजन अस्पताल में भर्ती है। सुबह इसी रास्ते से ब्लड बैंक में खून के सैंपल दिए थे। अब ब्लड लेने जा रहे हैं तो रास्ते का गेट पर ताला लगा हुआ है। ब्लड बैंक कैसे जाएं। यहां कुछ लोगों से पूछा तो वह भी इससे अनजान थे। काफी देर  से सिक्योरिटी गार्ड भी नजर नहीं आए। लैब का रास्ता भी बंद कर दिया। आधे घंटे से परेशान हो रहे हैं। बाद में दवा काउंटर पर ब्लड बैंक तक जाने का रास्ता पूछा तो वह बहुत दूर है। अब अस्पताल से बाहर निकल उपभोक्ता दवा काउंटर की तरफ से गेट नंबर-4 पर जाना पड़ेगा। </p>
<p><strong>जांच रिपोर्ट लेना मरीजों के बनी चुनौती </strong><br />रामगंजमंडी विधानसभा क्षेत्र के सातलखेड़ी से आए रामकिशन व प्रभुदयाल नागर ने बताया कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मरीजों के लिए जांच रिपोर्ट प्राप्त करना किसी चूनौति से कम नहीं है। सेंट्रल लेबोरेट्री गेट-1 से ही सटी हुई है। सुबह की ओपीडी में यहां से ही लैब में सैंपल दिया था। जांच रिपोर्ट मिलने का समय शाम 5 से रात 8 बजे तक का है। ऐसे में शाम को आए तो यहां ताला लगा हुआ है। अब जांच रिपोर्ट लेने के लिए दूसरे रास्ते गेट-4 से होते हुए टोर्मा वार्ड की तरफ से घूमते हुए लैब तक जाना पड़ा। तब जाकर रिपोर्ट मिली। यानी, गेट नंबर 1 से लैब की दूरी मात्र  40 मीटर थी, जहां पहुंचने के लिए 300 से ज्यादा मीटर दूरी तय कर पहुंचना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>मरीज क्यों काटे लंबी दूरी, इमरजेंसी में भीड़</strong><br />चेचट निवासी मुरली प्रसाद मीणा, अंकुर शर्मा का कहना है, जांच रिपोर्ट, दवा, ईसीजी, एक्सरे करवाने से ब्लड बैंक तक जाने के लिए एकमात्र गेट नंबर-4 से ही जाना पड़ता है। यहां दवा,जांच, रजिस्ट्रेशन के काउंटर भी एक-एक ही है, जहां मरीजों की भीड़ लगी रहती है। वहीं, जांच रिपोर्ट लेने के लिए भी लंबा चक्कर काटकर उसी जगह आना पड़ता है। अस्पताल प्रशासन से शिकायत की तो उन्होंने सुरक्षा करणों का हवाला दिया। लेकिन पूरे अस्पताल में जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, फिर किस बात का डर सता रहा है। जांच मिलने का समय शाम 5 से 8 बजे तक का है, ऐसे में इस समय तक तो गेट खोलना चाहिए।</p>
<p><strong>भटकते रहे परिजन व तीमारदार </strong><br />गेट  नंबर एक में दंत रोग कक्ष-2 के पास चैनल गेट को बंद देख वापस लौट रहे मां-बेटे ने बताया कि हम कैथून से आए हैं। गेट-नंबर दो पर पर्ची कटवाकर डॉक्टर को दिखाया था। उन्होंने एक्सरे लिखा था। वहां भीड़ अधिक होने के कारण मार्केट भोजन करने चले गए। दोपहर 2 बजे बाद आए तो यहां गेट बंद कर दिया। अब एक्सरे रूम तक पहुंचने के लिए करीब 300 मीटर से ज्यादा की दूरी तय करनी पड़ेगी। जब सारा काम यहीं से हो सकता है तो फिर लंबा चक्कर क्यों काटे? अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण रोजाना सैंकड़ों मरीज परेशान होते हैं। </p>
<p><strong>अस्पताल अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा से सीधी बात</strong><br /><strong>सवाल : </strong>दोपहर 2 बजे बाद से अस्पताल के 1 से 3 तक गेट बंद क्यों कर रहे?<br />जवाब :<strong> </strong>गेट-1 व 2 ओपीडी वाले हैं और गेट-3 ब्लड बैंक का है। जिन्हें दोपहर 2.30 बजे सुरक्षा कारणों से  बंद किया जाता है। ऐसे में मरीजों के लिए इमरजेंसी गेट नंबर-4 खोला हुआ है।<br /><strong>सवाल : </strong>अस्पताल में हर जगह सीसीटीवी कैमरा व सुरक्षा गार्ड लगे हैं, फिर चोरी का डर कैसे?<br />जवाब : राजस्थान के सभी मेडिकल कॉलेज में यही व्यवस्था है, फिर अनावश्यक गेट खोलकर क्यों रखें।<br /><strong>सवाल :</strong> मरीज परेशान हो रहे, भटक रहे, लंबा चक्कर काटने को मजबूर हो रहे?<br />जवाब :<strong> </strong>मरीज व तीमारदारों का भटकना जैसा कुछ नहीं है। अस्पताल इतना बड़ा नहीं है कि उन्हें गेट-4 न मिले। गार्ड लगाए हैं, जो रास्ता बताते हैं। <br /><strong>सवाल :</strong> जांच दोपहर 3 बजे तक होती है, मरीज गेट-4 पर जाएगा, कतार में लग पर्ची कटाएगा, तब तक जांच केंद्र बंद हो जाता है?<br />जवाब : नहीं, लैब 3 बजे बंद नहीं होती है। जब भी मरीज आते हैं, राउंड द क्लॉक उनका सैंपल लिया जाता है। <br /><strong>सवाल :</strong> सरकार का उद्देश्य मरीजों को राहत पहुंचाना है, लेकिन गेट बंद होने से वह परेशान हो रहे हैं?<br />जवाब : यहां गेट-1 पर गार्ड बैठा रहता है, जैसे ही कोई मरीज-तीमारदार आता है तो उन्हें गेट-4 का रास्ता बताते हैं। थोड़ा बहुत तो चल ही सकते हैं। <br /><strong>सवाल :</strong> जांच रिपोर्ट देने का समय शाम 5 से रात 8 बजे तक का है तो गेट खोले जाने चाहिए।<br />जवाब :<strong> </strong>दोपहर बाद गेट बंद करने का मुख्य उद्देश्य  सेफ्टी है। पहले आए दिन मोबाइल, सामान चोरी हो रहा था। जिससे निपटने केलिए यह व्यवस्था की है।<br /><strong>सवाल :</strong> सेंट्रल लैब में मरीजों के लिए टायलेट नहीं?<br />जवाब : ओपीडी और लैब के बीच जो टायलेट हैं, वो मरीजों के लिए हैं। नियमित सफाई होती है। गेट नंबर-2 का एक टायलेट लीकेज की वजह से बंद है। <br /><strong>सवाल </strong>: गेट बंद करने का निर्णय जयपुर स्तर पर है या अपने स्तर पर?<br />जवाब : जयपुर स्तर से सुरक्षा व्यवस्था करने के निर्देश हैं, इसलिए हमने दोपहर ढाई बजे बाद गेट-1 से 3 तक बंद कर देते हैं। इमरजेंसी के लिए गेट-4 खोला है। हमारे पास सुरक्षा के यहीं उपाए हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Jul 2025 16:04:51 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>चिकित्सा कॉलेजों को मान्यता देने में जबरदस्त घोटाला : फर्जीवाड़ा जेपी नड्डा की सहमति के बिना संभव नहीं, ओनिका मेहरोत्रा ने कहा- जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से दें इस्तीफा </title>
                                    <description><![CDATA[देश में फर्जी तरीके से मेडिकल कॉलेजों को मान्यता देने के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो-सीबीआई की प्राथमिकियों से साफ हो गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/in-recognition-of-medical-colleges-tremendous-scam-for-fake-fraud/article-119764"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/6622-copy.jpg22.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा कि देश में फर्जी तरीके से मेडिकल कॉलेजों को मान्यता देने के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो-सीबीआई की प्राथमिकियों से साफ हो गया है कि चिकित्सा कॉलेजों को मान्यता देने में जबरदस्त घोटाला हुआ है और यह फर्जीवाड़ा स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की सहमति के बिना संभव ही नहीं है, इसलिए नड्डा को जिम्मेदारी लेते अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। कांग्रेस नेत्री डॉ. ओनिका मेहरोत्रा ने पार्टी के नए मुख्यालय इंदिरा भवन में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से कई मेडिकल कॉलेज को मान्यता प्रदान की गई है। सीबीआई ने 25 जून को प्राथमिकी दर्ज की है, जिसमें कई कॉलेजों के फर्जी होने के प्रमाण मिले हैं। उनका कहना था कि सीबीआई ने दो बड़े घोटाले उजागर किए हैं, जिनमें एक एनएमसी में और दूसरा फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया में हुआ है और ये दोनों घोटाले कुख्यात व्यापम घोटाले से भी बड़े हैं। इस बार यह सिर्फ मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है बल्कि यह घोटाला राजस्थान, हरियाणा, इंदौर, वारंगल और विशाखापत्तनम तक फैला हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य मंत्री को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए और इस्तीफा देना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने भाजपा पर छात्रों का भविष्य बर्बाद करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सबसे पहले मध्य प्रदेश में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर व्यापम घोटाले की योजना बनी और फिर पूरे देश में पेपर लीक और भर्ती घोटाले हुए। अब इस ठगी में फर्जी मेडिकल कॉलेज शामिल कर दिये हैं और एनएमसी फर्जी फैकल्टी, फर्जी मरीज, क्लोन ङ्क्षफगरङ्क्षप्रट और छेड़छाड़ की गई बायोमेट्रिक प्रणाली का इस्तेमाल कर फर्जीवाड़े के जरिए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी जा रही है। इस घोटाले में श्री मोदी और श्री नड्डा जिम्मेदार हैं क्योंकि उनकी नाक के नीचे देशभर में मेडिकल घोटाला हो रहे हैं लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया है।</p>
<p>कांग्रेस नेत्री ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार देश भर में 40 से अधिक मेडिकल कॉलेजों ने रिश्वत, फर्जी रिकॉर्ड और हेराफेरी करके मान्यता प्राप्त की है। उनका कहना है कि जांचकर्ताओं के अनुसार है कि मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की परवाह किए बिना निजी संस्थानों से करोड़ों रुपये की रिश्वत ली गई है। उन्होंने इस संबंध में कई मेडिकल कॉलेजों के नाम लिए और कहा कि सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के अनुसार, फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया से जुड़ा एक अलग मामला सामने आया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इस बारे में दर्ज प्राथमिकी में अनियमितताओं का उल्लेख है। इस घोटाले के केंद्र में एनएमसी मेडिकल असेसमेंट एंड रेङ्क्षटग बोर्ड के पूर्णकालिक एक सदस्य का नाम है जिन्होंने कथित तौर पर हवाला चैनलों और बिचौलियों के माध्यम से करोड़ों रुपये की रिश्वत ली थी। सीबीआई द्वारा 30 जून को दर्ज एफआईआर में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, एनएमसी, बिचौलियों, प्रतिनिधियों और एक स्वयंभू बाबा सहित 35 व्यक्तियों के नाम हैं लेकिन इसमें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का नाम नहीं है, जिन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। कांग्रेस नेत्री सवाल किया कि क्या सीबीआई प्राथमिकी में नामजद लोगों के भाजपा नेतृत्व से संबंधों की जांच करेगी और इसमें  नड्डा का नाम लेगी जिनकी संलिप्तता के बिना ये बड़े घोटाले नहीं हो सकते हैं। </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Jul 2025 17:39:00 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दवाइयों का टोटा, मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ रही</title>
                                    <description><![CDATA[मरीज उन एक दो दवाओं को लेने की जगह बाजार से मंहगी दवा खरीदने को मजबूर हो रहें है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/medical-college-hospital-is-short-of-medicines--patients-have-to-buy-them-from-outside/article-119528"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/rt112roer-(5)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दवाओं का अभाव है। अस्पताल में दवाओं की कमी पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। डाक्टर द्वारा मरीजों की पर्ची पर जो दवाएं लिखी जाती है। उनमे से अस्पताल में केवल एक दो दवा ही मिल पाती है। मरीज उन एक दो दवाओं को लेने की जगह बाजार से मंहगी दवा खरीदने को मजबूर हो रहें है। वही जांच में भी देरी हो रही है और अगर कोई बड़ी जांच करवानी हो तो उसके लिए का कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है। अस्पताल में गैस्ट्रो, न्यूरो और बच्चों की जीवन रक्षक दवाएं नहीं मिल रही है जिससे लोगों बाहर से दवाईयां खरीदनी पड़ रही है। </p>
<p><strong>दवा नहीं, जांच करवानें में हफ्तों का इंतजार, इलाज अधूरा</strong><br />मरीजों का कहना है कि अस्पताल में पूरे हाड़ौती संभाग से मरीज इलाज करवाने आते है अस्पताल में जांच में भी समय लगता है वही एमआरआई की जांच के लिए कई हफ्तो बाद की तारीख दी जाती है। मरीजों का कहना है कि डॉक्टर द्वारा लिखी जाने वाली दवाओं में से अस्पताल में कुछ ही दवा मिल पाती है एक मरीज ने बताया कि अस्पताल में मुंह के छालों के इलाज के लिए आया था डॉक्टर ने देखने के बाद दवाईयां लिखी अस्पताल में स्थित दवा काउंटर पर एक घंटे लाइन में लगा जब जाकर मेरा नम्बर आया। लेकिन दवा काउंटर पर मौजूद स्टाफ ने कहा की अभी यह दवा सप्लाई में नही आ रही है। <br /><strong>- राहुल जादोन, तीमारदार</strong></p>
<p><strong>अस्पताल में केवल सस्ती दवा, महंगी दवा बाहर से </strong><br />मरीजों का कहना है कि अस्पताल में केवल वे दवाएं उपलब्ध है। जिनकी कीमत बहुत कम है। जिन दवाओं की कीमत ज्यादा है। वे अस्पताल में नही मिल पा रही है। मरीज मजबूरी में बाहर से महंगी दवा खरीदने पर मजबूर हो रहे है। डॉक्टर ने पांच दवाए लिखी लेकिन मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा काउंटर पर तीन दवाएं ही मिली दो दवाएं बार से लानी पड़ी। अस्पताल में बच्चों सिरप तक नहीं है। गरीब आदमी के लिए बाजार से मंहगी दवाएं खरीदना आसान नहीं है। गरीब आदमी पर दोहरी मार पड़ रही है। <br /><strong>- दिनेश सोलंकी, तीमारदार</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />दवाईयों की सप्लाई समय से हो रही है, कई बार कुछ दवा जल्दी खत्म हो जाती है। जो दवाइयां नही आ रही उसे हम आरएमसीएल से खरीदकर मरीजों को उपलब्ध करवाते है। जिससे मरीजों को परेशानी न हो। <br /><strong>- आशुतोष शर्मा, अधिक्षक मेडिकल कॉलेज</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Jul 2025 16:29:57 +0530</pubDate>
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                <title>मेडिकल कॉलेज के पीजी हॉस्टल में गंदगी का अंबार, नियमित नहीं हो रही सफाई</title>
                                    <description><![CDATA[जिम्मेदार अफसरों की लापरवाही का दंश हर रोज रेजीडेंट्स झेलने को मजबूर हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/heaps-of-garbage-in-the-pg-hostel-of-the-medical-college--regular-cleaning-is-not-being-done/article-95394"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/257rtrer-(4).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा के मेडिकल कॉलेज के पीजी हॉस्टल में नियमित सफाई नहीं होने से चहुंओर गंदगी और कटीली झांडिया उग आई है। कमरों के बाहर उगी झांडियों में जहरीले जीव जंतु विचरण कर रहे है। अस्पतालों की तीमारदारी में जुटे रेजिटेंड डॉक्टरों के हॉस्टल में ही सफाई नहीं है तो अस्पताल परिसर का क्या हाल होगा। हॉस्टल में सारा दिन श्वान और सुअर विचरण करते है। वहीं बंदरों का आंतक इस क्रद है कि हॉस्टल में घूस बंदर डॉक्टरों रूम के बाहर रखे खाने तक खा जाते है। अस्पतालों में 12 से 18 घंटे काम करने के बाद घर पहुंचने पर डॉक्टरों को मूलभूत सुविधाओं के अभाव में अवसाद में है। शिकायत करने पर सीनियर के कोप भाजन के चलते वो गंदगी में रह रहे है। खास बात यह है कि अस्पतालों में मरीजों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाने वाले रेजिडेंट्स डॉक्टर खुद ही गंदगी और कूड़े-कचरे के बीच जीवन काटने को मजबूर हैं। नवीन चिकित्सालय, एमबीएस व जेकेलोन अस्पताल के पीछे स्थित पीजी हॉस्टल बदहाल है। हॉस्टल के चारों ओर कूड़े- कचरे के ढेर लगे हैं। कमरों के पीछे जंगल उगा हुआ है। जिनमें जहरीले जीव-जंतुओं विचरण कर रहे है। कोबरा जैसे जहरीले सांप कमरों की दहलीज पर दस्तक दे चूके हैं। चहुंओर मच्छरों की भरमार है। डेंगू से एक नर्सिंग छात्रा जान भी गंवा चुकी है। वहीं कुछ माह पूर्व जहरीले कीट के काटने से नर्सिंग स्टूडेंट्स की जान पर बन आई थी। वहीं, गंदगी व मच्छरों के प्रकोप से बीमारी का खतरा बना रहता है। रेजीडेंट्स डॉक्टरों के पीजी हॉस्टल 26 साल  से अधिक पुराना है। हाल ही में अस्पताल प्रशासन ने रंग-रोगन व प्लास्टर का काम करवाया है लेकिन हॉस्टल परिसर में फैली गंदगी-कचरे व झाड़ियों का निस्तारण नहीं करवाया। वर्तमान में हॉस्टल में 150 से 200 रेजीडेंट्स रहते हैं, जो जिम्मेदार अफसरों की लापरवाही का दंश हर रोज झेलने को मजबूर हैं।</p>
<p><strong>तीनों पीजी हॉस्टल की सफाई, व्यवस्था चरमराई</strong><br />एमबीएस अस्पताल  के पीछे तीन  पीजी हॉस्टल है वहां चारों तरफ गंदगी के ढेर लगे है।  पीजी-1 से पीजी-3 तक बीच चहुंओर गंदगी के ढेर और कटीली झांडिया उगी हुई है। हॉस्टल में रात के समय अंधेरा रहता है।  तीनों हॉस्टल में कमरों के पीछे बड़ी-बड़ी झाड़ियां उगी हुई है। जिनमें सांप, बिच्छु सहित जहरीले जीव जंतुओं का बसेरा बना हुआ है। पिछले साल  पीजी-3 हॉस्टल में कमरों की दहलीज पर कोबरा की दस्तक से हड़कम्प मच गया था। इसके अलावा हॉस्टल परिसर में स्थित औषधीय भंडार के पीछे नाला है, जिसकी लंबे समय से सफाई नहीं होने से मच्छर पनप रहे हैं। वहीं, गंदगी से उठती बदबू से सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है। पीजी-2 हॉस्टल में  बिजली का पैनल खुला पड़ा है। नालियों गंदगी से अटी पड़ी है। पीजी हॉस्टल के बाहर नालियां गंदगी से अटी पड़ी है। यही हाल मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल का भी वहां भी घास झाडिया उगी है। नियमित सफाई नहीं हो रही है। </p>
<p><strong>श्वान व सुअरों का आतंक</strong><br />पीजी हॉस्टल के रेजिडेंट डॉक्टरों ने बताया कि हॉस्टल परिसर में दिनरात लावारिस मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है। सबसे ज्यादा परेशानी श्वान और सुअरों की है। भोजन की तलाश में यह कमरों तक पहुंच जाते हैं। वहीं, रात में हॉस्टल आने-जाने के दौरान काटने को दौड़ते हैं। पूर्व में कई रेजिडेंट डॉग बाइट का शिकार हो चुके हैं। पीजी-3 हॉस्टल के पास सुरक्षा दीवार टूट रही है, जिसमें से श्वान व सूअरों का झुंड हॉस्टल परिसर में घुस जाता है। कमरों के बाहर बर्तनों में मुंह मारते हैं। श्वानों को भगाने पर काटने को दौड़ते हैं। इसके अलावा बंदरों की भी बड़ी समस्या है।</p>
<p><strong>नालियां टूटी, फर्श उखड़ा पड़ा</strong><br />हॉस्टल में जगह जगह से फर्श उखड़ गया है। वहीं नालियों टूटी होने से जगह जगह पानी जमा हो रहा है। हॉस्टल के मुख्य गेट यहां लाइट खराब पड़ी है। मुख्य नाली ढक्कन नहीं होने से चहुुंओर बदबू फैली है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />हॉस्टल में गंदगी और सफाई नहीं हो रही ऐसी शिकायत किसी ने अभी तक नहीं की है। रेजिडेंट को किसी प्रकार की परेशानी हो रही है तो संबंधित से अवगत कराना चाहिए। परिसर में सफाई के लिए कर्मचारी लगाए हुए है। गंदगी है तो इसकी जांच कराकर सफाई कराई जाएगी।<br /><strong>- डॉ. निलेश जैन,चीफ वार्डन व अधीक्षक स्पेशलिस्ट अस्पताल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Nov 2024 17:05:22 +0530</pubDate>
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                <title>कई महीनों से बंद पड़े ऑक्सीजन प्लांट</title>
                                    <description><![CDATA[सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इन प्लांटों के भुगतान की फाइल मेडिकल कॉलेज और राज्य सरकार के बीच घूम रही है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/oxygen-plants-closed-for-many-months/article-91524"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/630400-size-(13)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिले के अस्पतालों में कोरोना महामारी के समय दर्जन भर ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए थे। लेकिन समय के साथ रखरखाव और मरम्मत की कमी के चलते ये प्लांट बंद होते गए और हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि अस्पतालों में प्लांट होने के बावजूद बाहर से ऑक्सीजन के सिलेंडर मंगाने पड़ रहे हैं। जिले के लगभग सभी अस्पतालों मात्र एक से दो प्लांट ही संचालन की अवस्था में हैं बाकि प्लांट या तो खराब पड़े हैं या उन्हें चलाने की स्वीकृति नहीं मिल पाई है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन हर रोज 100 से 150 सिलेंडर बाहर से मंगा रहे हैं। वहीं अस्पतालों के अधीक्षकों का दावा है कि प्लांटों के संचालन के लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया हुआ है।</p>
<p><strong>मेडिकल कॉलेज और एमबीएस में दो-दो प्लांट चालू</strong><br />कोटा संभाग में एमबीएस और मेडिकल कॉलेज अस्पताल दो सबसे बड़े अस्पताल हैं। जहां दोनों की कुल क्षमता करीब 1100 बेड की है। जिसके चलते दोनों अस्पतालों में ऑक्सीजन की खपत भी हर रोज करीब 400-500 सिलेंडर की होती है। जबकि इससे ज्यादा क्षमता के प्लांट दोनों अस्पतालों में मौजूद हैं। इसके बाद भी अस्पताल प्रशासन बाहर से महंगे दामों पर सिलेंडर मंगा रहा है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रतिदिन 100 से 120 सिलेंडर और एमबीएस अस्पताल में 200 से 250 सिलेंडर बाहर से मंगाए जा रहे हैं। वहीं देखा जाए तो मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पांच ऑक्सीजन प्लांट और एमबीएस अस्पताल में 9 ऑक्सीजन प्लांट मौजूद हैं। इनमें से मेडिकल कॉलेज के केवल दो चालू हैं और एमबीएस में एक भी प्लांट चालू अवस्था में नहीं हैं। जिनकी भरपाई के लिए बाहर से सिलेंडर मंगाए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>जेके लोन और एसएसएच में भी यही स्थिति</strong><br />मेडिकल कॉलेज और एमबीएस अस्पताल के अलावा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और जे के लोन अस्पताल में भी यही स्थिति है। यहां भी जेके लोन में एक और एसएसएच में दो प्लांट ही संचालित हो रहे हैं। जबकि जे के लोन में 4 और एसएसएच में 6 प्लांट मौजूद हैं। वहीं सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में हर महीने करीब 150 सिलेंडर और जेके लोन अस्पताल में हर दिन 125 से 135 सिलेंडर बाहर से मंगाए जा रहे हैं। </p>
<p><strong>मेडिकल कॉलेज और सरकार के बीच फंसे प्लांट</strong><br />जिला अस्पतालों में मौजूद ऑक्सीजन प्लांटों के निर्माण और संचालन से संबंधित भुगतान को लेकर मामला मेडिकल कॉलेज और राज्य सरकार के बीच फंसा हुआ है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इन प्लांटों के भुगतान की फाइल मेडिकल कॉलेज और राज्य सरकार के बीच घूम रही है। जिसके चलते प्लांटों के संचालन की स्वीकृति नहीं मिलने के कारण बाहर से सिलेंडर मंगाने पड़ रहे हैं।</p>
<p><strong>केडीए से नहीं मिली स्वीकृति </strong><br />कोरोना काल में अस्पतालों में केडीए और अन्य संस्थाओं की ओर से ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए थे। जिनमें लिक्विड और जनरेशन प्लांट शामिल थे। लेकिन बावजूद इसके इन अस्पतालों में प्रशासन की देखरेख में कमी के चलते से सभी प्लांट महीनों से बंद पड़े हैं। जिसमें 500 एलएमपी में 100 सिलेंडर की कैपिसिटी तथा 1000 एलएमपी के प्लांट में 200 सिलेंडर उत्पादन की कैपिसिटी है। कंपनी की आरे से 3 साल की गारंटी पर ये प्लांट लगाए गए थे जिसमें प्लांट में किसी भी प्रकार की तकनीकी खराबी होने पर मरम्मत व देखरेख की जिम्मेदारी कंपनी की थी। कंपनी की समयावधि समाप्त होने के बाद अधिकतर ऑक्सीजन प्लांट तकनीकी खराबी से बन्द पड़ गए। इनमें कुछ प्लांटो में कम्प्रेशर खराब है तो ओर कुछ में ऑयल से सम्बन्धित समस्या आने के कारण बन्द है। इसके अलावा कई प्लांटों में केडीए और चिकित्सा विभाग के बीच मामला फंसा हुआ है। सूत्रों के अनुसार प्लांटों के निर्माण और संचालन से संबंधित बकाया शेष राशि का भुगतान नहीं होने से केडीए की ओर से इनके संचालन की स्वीकृति नहीं मिली है। </p>
<p><strong>लोगों का कहना है</strong><br />कोरोना के समय लगाए गए ये प्लांट अस्पताल और प्रशासन के बीच लटके हैं। कई प्लांटों को बंद हुए सालभर से ज्यादा हो गया है। इमरजेंसी की स्थिति में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा।<br /><strong>- दिनेश सुमन, छावनी</strong></p>
<p>अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट के बंद होने की समस्या के बारे में जानकारी है। लेकिन अभी ऑक्सीजन सप्लाई में कोई दिक्कत नहीं लेकिन अस्पतालों को आपातकालीन स्थिति के लिए प्लांटों को तैयार रखना चाहिए। क्योंकि कभी भी बड़ी दुर्घटना होने पर हाथों हाथ ऑक्सीजन की सप्लाई कैसे मिल पाएगी।<br /><strong>- मोहम्मद खालिद, विज्ञान नगर</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />अस्पतालों में कितने प्लांट बंद हैं कितने संचालित हैं और कितने सिलेंडर बाहर से मंगाए जा रहे हैं, इसकी जानकारी अधीक्षक बेहतर ढंग से बता पाएंगे। फिर भी मामले को दिखाकर समस्या को हल करने का प्रयास करेंगे।<br /><strong>- डॉ. संगीता सक्सेना, प्रधानाचार्य एवं नियंत्रक, मेडिकल कॉलेज, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Sep 2024 17:11:28 +0530</pubDate>
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                <title>आखिर बार-बार खराब क्यों होती हैं सरकारी मशीनें </title>
                                    <description><![CDATA[एमबीएस अस्पताल में मौजूद सिटी स्कैन मशीन पिछले 7 महीनों से बंद पड़ी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/why-do-government-machines-break-down-repeatedly/article-82028"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/akhir-br-br-kharab-kyu-hoti-h-sarkari-machine...kota-news-19-06-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा जिले में संभाग के एमबीएस और मेडिकल कॉलेज दो सबसे बड़े अस्पताल हैं जिनमें से केवल मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ही एमआरआई और सिटी स्कैन की जांच की जा रही है। ऐसे में संभाग के सभी अस्पतालों को का भार एक ही अस्पताल पर पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज स्थित सिटी स्कैन मशीन में भी सोमवार को फॉल्ट हो गया जिसके चलते करीब दो घंटे जांच बंद रही। वहीं वर्तमान में भी अस्पताल में मरीजों की सिटी स्कैन की जांच नहीं हो पा रही है। जिस पर स्टाफ मशीन में खराबी होने के चलते जांच करने से मना कर रहा है। वहीं दूसरी ओर एमबीएस अस्पताल में मौजूद सिटी स्कैन मशीन पिछले 7 महीनों से बंद पड़ी है। जिससे मरीजों पर दोहरी मार पड़ रही है। </p>
<p><strong>बार बार हो रही मशीनें खराब</strong><br />मेडिकल कॉलेज अस्पताल में संचालित सिटी स्कैन और एमआरआई मशीन पिछले कुछ महीनों में कई बार खराबी आ चुकी है जिसका खामियाजा मरीज को उठाना पड़ रहा है। पिछले महीने एमआरआई मशीन की बैटरियां लोड के चलते फ्यूज हो गई थी, जिन्हें अभी तक नहीं बदला जा सका है और एमआरआई जांच तब से धीमी हो रही है। इससे पहले भी एमआरआई मशीन दो बार खराब हो चुकी है। सिटी स्कैन मशीन भी गत 30 और 31 मई को फाल्ट हो जाने के चलते बंद हो गई थी और 15 जून को फाल्ट होने से मशीन 50 दिन में ही दो बार बंद पड़ गई। जिससे नियमित ओपीडी वाले मरीजों को जांच के लिए बाहरी लैब पर जाना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>एमबीएस की सिटी स्कैन 7 माह से बंद</strong><br />संभाग के सबसे बड़े अस्पताल में सबसे जरूरी जांच मशीन पिछले 7 माह से बंद पड़ी है। हालांकि अस्पताल प्रशासन के अनुसार इसके जुलाई में चलने की उम्मीद है। लेकिन वर्तमान में मरीजों को जांच के लिए मेडिकल कॉलेज जाना पड़ रहा है या बाहर निजी लैब में कराना पड़ रहा है। वहीं मेडिकल कॉलेज में जाने पर भी लंबी कतारें और घंटो इंतजार करना पड़ रहा है। इसके अलावा एमबीएस में अस्पताल में आज भी एमआरआई जांच की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है जिसके लिए भी मरीजों को मेडिकल कॉलेज या निजी क्षेत्र पर निर्भर रहना पड़ता है। </p>
<p><strong>प्रधानाचार्य और अधीक्षक दोनों रेडियोलॉजी से फिर भी ये हालात</strong><br />प्रशासनिक स्तर की बात करें तो एमबीएस अस्पताल के अधीक्षक डॉ. धर्मराज मीणा और मेडिकल कॉलेज प्रधानाचार्य डॉ संगीता सक्सेना दोनों ही कॉलेज के रेडियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर हैं। बल्कि डॉ संगीता सक्सेना रेडियोलॉजी की विभागाध्यक्ष रह चुकी हैं और डॉ धर्मराज मीणा वर्तमान में विभागाध्यक्ष हैं। इसके बावजूद भी अस्पतालों में रेडियोलॉजी से जुड़े संसाधनों की निरंतर कमी देखने को मिल रही है। </p>
<p><strong>लोगों का कहना है</strong><br />एमबीएस में सिटी स्कैन जांच नहीं होने से मेडिकल कॉलेज में जाना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज के लोग ही इन्हें जानबूझकर खराब करते हैं ताकि निजी दुकानदारों की दुकान चलती रहे। <br /><strong>- दिपक शर्मा, रायपुरा</strong></p>
<p>मेरे भाई को एक्सीडेंट के कारण पैर की नस में दर्द रहता है, जिसके लिए डॉक्टर ने एमआरआई क जांच लिखी है। अब मेडिकल कॉलेज आए तो 15 दिन बाद की तारीख दी है। ऐसे में बाहर से जांच कराने के लिए मजबूर होना पड़ता है।<br /><strong>- दिनेश कुमार, नयापुरा</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मेडिकल कॉलेज में लोड होने के कारण सिटी स्कैन मशीन में फाल्ट हुआ है मशीन में कोई खराबी नहीं आई है। वहीं एमबीएस अस्पताल में सिटी स्कैन अगले महीने से शुरू हो जाएगी। जिसके बाद मेडिकल कॉलेज पर से दबाव कम होगा। साथ ही एमबीएस अस्पताल में भी एमआरआई जांच शुरू कराने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा हुआ है।<br /><strong>- संगीता सक्सेना, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज कोटा</strong></p>
<p>एमआरआई मशीन की बैटरी के लिए आॅर्डर दे दिया है जो 10 से 15 दिन में आ जाएंगी। सिटी स्कैन को स्थानीय स्तर पर ठीक कराने की कोशिश लेकिन पार्टस खराब होने से नए लगेंगे जिनके लिए आॅर्डर दे दिया है। अभी एमरजेंसी में आने वाले मरीजों के लिए बायपास कर सुविधा दी हुई है। इसके अलावा एक नई एमआरआई मशीन के लिए भी प्रस्ताव भेजा हुआ है।<br /><strong>- धर्मराज मीणा, अधीक्षक, एमबीएस अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/why-do-government-machines-break-down-repeatedly/article-82028</link>
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                <pubDate>Wed, 19 Jun 2024 16:44:24 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>रिसर्च में फिसड्डी एसएमएस मेडिकल कॉलेज</title>
                                    <description><![CDATA[ केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से मेडिकल शिक्षा में बेहतरीन सेवाओं, रिसर्च सहित अन्य मापदंडों के आधार पर हर साल देश के मेडिकल कॉलेज की नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क(एनआईआरएफ) रैंकिंग दी जाती है। सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज इस 2023 की रैंकिंग में 46 वें नंबर पर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/sms-medical-college-lags-behind-in-research/article-81879"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/sms.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर के सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज में सालों पहले रिटायर हुए प्रोफेसर के भरोसे रिसर्च प्रोजेक्ट मंजूर करने का जिम्मा दे रखा है। ऐसे में उत्तर भारत के बड़े मेडिकल कॉलेजों में शुमार मेडिकल कॉलेज रिसर्च में फिसड्डी हो गया है। मेडिकल रिसर्च में देश के टॉप 10 तो छोड, शुरुआती तीन दर्जन मेडिकल कॉलेजों में भी इसका नाम शामिल नहीं है। यहीं नहीं देश के प्राइवेट मेडिकल कॉलेज भी एसएमएस से कई गुना ज्यादा रिसर्च प्रोजेक्ट लेकर काम कर रहे हैं। एसएमएस मेडिकल कॉलेज में रिसर्च प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देने के लिए रिटायर प्रोफेसर डॉ. शशि सिंघवी को एथिकल कमेटी का चेयरमैन बना रखा है। कमेटी में अन्य अहम पदों पर भी रिटायर मेडिकल प्रोफेसरों को लगा रखा है। जिनमें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के रूप में डॉ. आरके सुरेखा भी हैं। दोनों ही 8-9 साल पहले मेडिकल कॉलेज से रिटायर हो चुके हैं। हर 2-3 सालों में एथिकल कमेटी के 33 फीसदी सदस्य बदले जाते हैं, लेकिन कमेटी में इनकी मौजूदगी बरकरार है। </p>
<p><strong>रिसर्च में देश के तीन दर्जन मेडिकल कॉलेजों में भी नाम शामिल नहीं</strong><br />बेरुखी के चलते एन आई आर एफ में 46 वीं रैंक पर<br />केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से मेडिकल शिक्षा में बेहतरीन सेवाओं, रिसर्च सहित अन्य मापदंडों के आधार पर हर साल देश के मेडिकल कॉलेज की नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क(एनआईआरएफ) रैंकिंग दी जाती है। सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज इस 2023 की रैंकिंग में 46 वें नंबर पर है। जबकि उनसे पहले सीमित संसाधनों के बावजूद आधा दर्जन से ज्यादा प्राइवेट मेडिकल कॉलेज रैंकिंग में इससे पहले हैं।  5 साल में कभी भी टॉप-25 में भी शामिल नहीं हुआ। 2018 में तो कॉलेज रैंकिंग की दौड़ में ही शामिल नहीं था।</p>
<p><strong>तीन साल में जितना काम, प्राइवेट में उससे कई गुना ज्यादा एक साल में हुआ</strong><br />सवाईमानसिंह मेडिकल कॉलेज में पिछले तीन साल 2019-20 में 12, 2020-21 में 19 और 2021-22 में 45 स्पोंसर्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स लिए। यानि कुल 76 रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर काम हुआ। जबकि रैंकिंग में हमसे आगे चल रहे कर्नाटक के कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज (9 वीं रैंक) ने तीन साल में 678, पुणे के डॉ.डीवाई पाटिल विद्यापीठ(15 वीं रैंक) ने 99,  बंगलुरू के सेंट जॉन मेडिकल कॉलेज(19 वीं रैंक) ने 700 , दिल्ली के इंस्टीट्यूट आॅफ लीवर एंड बाइलेरी साइंस (23 वीं रैंक) ने 125, मैसूर के जेएसएस मेडिकल कॉलेज (37 वीं रैंक) ने 166 और बंगलुरू के एमएस रमाह मेडिकल कॉलेज (43 वीं रैंक) ने 122 प्रोजेक्ट्स हाथ में लेकर उन्हें पूरा किया। एसएमएस मेडिकल कॉलेज ने 5 साल में केवल 137 रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर ही काम किया।  </p>
<p>सवाईमानसिंह मेडिकल कॉलेज में पिछले तीन साल 2019-20 में 12, 2020-21 में 19 और 2021-22 में 45 स्पोंसर्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स लिए। यानि कुल 76 रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर काम हुआ। जबकि रैंकिंग में हमसे आगे चल रहे कर्नाटक के कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज (9 वीं रैंक) ने तीन साल में 678, पुणे के डॉ.डीवाई पाटिल विद्यापीठ(15 वीं रैंक) ने 99,  बंगलुरू के सेंट जॉन मेडिकल कॉलेज(19 वीं रैंक) ने 700 , दिल्ली के इंस्टीट्यूट आॅफ लीवर एंड बाइलेरी साइंस (23 वीं रैंक) ने 125, मैसूर के जेएसएस मेडिकल कॉलेज (37 वीं रैंक) ने 166 और बंगलुरू के एमएस रमाह मेडिकल कॉलेज (43 वीं रैंक) ने 122 प्रोजेक्ट्स हाथ में लेकर उन्हें पूरा किया। एसएमएस मेडिकल कॉलेज ने 5 साल में केवल 137 रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर ही काम किया।  </p>
<p><strong>लाइलाज मरीजों के ठीक होने की उम्मीद भी टूटी है, करोड़ों का फंड भी नहीं आ सका</strong><br />केन्द्र के डीसीजीआई यानी ड्रग कंट्रोलर जनरल आॅफ इंडिया के जरिये नई दवाओं पर रिसर्च को बड़ी शोध कंपनियां प्रोजेक्ट्स को रिसर्च के लिए अप्रूवल कराती है। फिर प्रोजेक्ट्स पर काम के लिए मेडिकल कॉलेजों को इन्हें सामान्य दवाइयों से ठीक ना होने वाले मरीजों पर उपयोग के लिए पेशकश करती है। एथिकल कमेटी इसकी मंजूरी के लिए एथोरिटी होती है। मंजूरी पर दवाइयां लाइलाज मरीजों के इलाज में काम आती है। दवा कितनी कारगर रही, उसकी रिपोर्ट तैयार होती है। कंपनी एवज में करोड़ों की इन महंगी दवाइयों के साथ बड़ी राशि कॉलेज को फंडिंग भी करती है। प्रोजेक्ट्स नहीं लेने से  लाइलाज मरीजों के ठीक होने की उम्मीद और करोड़ों का फंड भी कॉलेज को नहीं आ सका है। </p>
<p>रिसर्च प्रोजेक्ट्स ज्यादा आएं, इसका प्रयास करेंगे। जल्द एथिकल कमेटी को भी पुर्नगठित करेंगे। एक सेंट्रल कमेटी भी गठित करने की योजना है ताकि रिसर्च वर्क की मोनिटरिंग भी हो सके। रिसर्च प्रोजेक्ट्स से आने वाले पैसे को कॉलेज के वैलफेयर में भी खर्च करेंगे।<br />- डॉ.दीपक माहेश्वरी, प्रिंसिपल, एसएमएस मेडिकल कॉलेज। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Jun 2024 10:07:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मेडिकल कॉलेजों का काम प्राथमिकता से पूरा कराएगी राज्य सरकार: CM भजनलाल शर्मा</title>
                                    <description><![CDATA[सीएम ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के समय में 15 मेडिकल कॉलेजों की स्वीकृति जारी होने के बाद भी कार्य की गति धीमी रही और केन्द्र से प्राप्त राशि भी पूर्ण रूप से खर्च नहीं हो सकी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण के लिए राज्य सरकार गंभीरता से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार सभी स्वीकृत सरकारी मेडिकल कॉलेजों का कार्य प्राथमिकता से पूरा करवाएगी, जिससे आमजन को अपने जिलों में ही गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। </p>
<p>भजनलाल शर्मा गुरुवार को जयपुर स्थित जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल शिलान्यास समारोह को वर्चुअल रूप से सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के समय में 15 मेडिकल कॉलेजों की स्वीकृति जारी होने के बाद भी कार्य की गति धीमी रही और केन्द्र से प्राप्त राशि भी पूर्ण रूप से खर्च नहीं हो सकी। </p>
<p><strong>बजट में किए स्वास्थ्य सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण निर्णय</strong><br />मुख्यमंत्री ने कहा कि आरोग्य राजस्थान की संकल्पना को साकार करने के लिए राज्य सरकार द्वारा बजट में मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना में आईपीडी के साथ डे-केयर पैकेज जोड़ना, कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का ओपीडी में इलाज, हाई-वे पर 25 एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस उपलब्ध करवाना, समस्त मानदेयकर्मियों के मानदेय में 10 प्रतिशत की वृद्धि करना जैसे संवेदनशील निर्णय किए गए हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि देश में साल 2014 के बाद चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में क्रान्तिकारी परिवर्तन आए हैं और आज मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 706 हो गई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा से हमारे देश ने कोविड का टीका विकसित कर 100 से अधिक देशों को वैक्सीन उपलब्ध करवाई। इससे पहले मुख्यमंत्री ने जेईसीआरसी के मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल शिलान्यास पट्टिका का वर्चुअल रूप से लोकार्पण किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Mar 2024 17:09:23 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का - मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पास व्यवस्था फिर शुरु</title>
                                    <description><![CDATA[नवज्योति में खबर प्रकाशित की थी जिसमें अधीक्षक ने पास व्यवस्था को वापस चालू करने का आश्वासन दिया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---pass-system-started-again-in-medical-college-hospital/article-71758"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/asar-khabar-ka---medical-college-aspatal-me-pass-vyavstha-fr-shuru...kota-news-04-03-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मेडिकल कॉलेज अस्पताल के वार्ड में परिजनों के लिए फिर से पास व्यवस्था शुरु कर दी गई है। जहां अब एक मरीज के परिजनों के लिए पास जारी किए जाएंगे, वार्ड में प्रवेश के लिए परिजनों या तीमारदारों को अब पास दिखाना होगा उसके बाद ही वार्ड में जा सकेंगें। गौरतलब है कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पास व्यवस्था नहीं होने से कोई भी व्यक्ति अंदर चल जाता था। साथ ही वार्ड में आने जाने वालों की जानकारी भी नहीं रहती थी। जिससे चोरों को अपने काम को अंजाम देने में आसानी होती थी, और चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ रही थी।</p>
<p><strong>एक मरीज पर होंगे दो पास</strong><br />अस्पताल प्रशासन अब पास की पुरानी व्यवस्था को लागू करते हुए वार्ड में प्रवेश के लिए पास जारी करेगा जिससे भर्ती मरीज के परिजन या परिचित ही वार्ड में प्रवेश कर पाएंगे। अधीक्षक आरपी मीणा ने बताया कि अस्पताल में चोरी की घटनाएं बढ़ रही थी और वार्ड में प्रवेश करने वालों की जानकारी नहीं होने के चलते ये फैसला लिया गया है। जहां अब प्रत्येक मरीज पर दो पास जारी किए जाएंगे ताकी वार्ड में प्रवेश करने वालों की जानकारी हो।</p>
<p><strong>चोरी की घटनाओं पर लगेगी लगाम</strong><br />पास जारी होने से अस्पताल में होने वाली चोरियों पर काफी हद तक लगाम लगेगी। क्योंकि पास नहीं होने की दशा में कोई भी व्यक्ति आसानी से वार्ड में प्रवेश कर जाता था। जहां मरीजों व तीमारदारों की वस्तुओं के चोरी होने का अंदेशा बना रहता था।</p>
<p><strong>नवज्योति ने उठाया था मुदÞ्दा</strong><br />अस्पताल में चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ रही थी ऐसे में नवज्योति ने पड़ताल में पाया था की अस्पताल में वार्डों में प्रवेश पर कोई रोक टोक नहीं थी। इस संबंध में दैनिक नवज्योति ने 28 फरवरी को पेज नं 7 पर तीसरी आंख में धूल झौंक कर चोर ले रहे मौज शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी जिसमें अधीक्षक आरपी मीणा ने पास व्यवस्था को वापस चालू करने का आश्वासन दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Mar 2024 17:24:48 +0530</pubDate>
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                <title>कचरे के बीच रह रहे भविष्य के डॉक्टर, कैंपस में जगह-जगह कचरे के ढेर</title>
                                    <description><![CDATA[कॉलेज प्रशासन भी सबकुछ आंखों के सामने होने के बावजूद भी नजरअंदाज कर रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/future-doctors-living-among-garbage--heaps-of-garbage-everywhere-in-the-campus/article-68730"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/kachre-k-beech-rh-rhe-bhavishya-k-doctor,-campus-me-jgh-jgh-kchre-k-dher...kota-news-31-01-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। इंसान बीमार होने पर इलाज कराने के लिए डॉक्टर के पास जाता है जहां डॉक्टर मरीज का इलाज करने लायक होने के लिए उसे करीब 8 साल का समय लग जाता है जहां वो इन 8 सालों को कॉलेज में ही गुजारते हैं। वहीं कॉलेज में रहने के लिए विद्यालयों द्वारा उनके लिए छात्रावासों की सुविधा दी जाती है। जहां वो रहने के साथ अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें। लेकिन कोटा मेडिकल कॉलेज के हॉस्टलों में रहने वाले छात्रों को कचरे और सीलिंग के साथ रहना पड़ रहा है। क्योंकि कॉलेज के प्रत्येक हॉस्टल के चारों और कचरे के ढेर लगे हैं जिनसे बदबू तो हो ही रही है साथ ही स्टूडेंट्स को बीमारियों का भी खतरा है। कॉलेज प्रशासन भी सबकुछ आंखों के सामने होने के बावजूद भी नजरअंदाज कर रहा है।</p>
<p><strong>कैंपस में चारों और  कचरे के ढेर</strong><br />कॉलेज कैंपस में स्थित हॉस्टलों के आस पास जगह जगह कई सारे कचरे के ढेर हुए पड़े हैं। इन ढेरों में पड़ा कचरा हवा के साथ इधर उधर उड़कर फैल जाता है। जिससे छात्रों को परेशानी होती है। वहीं कई दिनों से कचरा पड़ा होने के कारण आस पास बदबू भी फैली रहती है। जो भी छात्रों के लिए समस्या पैदा कर रही है। छात्रों ने बताया कि हॉस्टल कैंपस में सफाई कभी कभा ही होती है। जिससे गजह जगह कचरे के ढेर हो रहे हैं। वार्डन को इसके लिए बोला हुआ है लेकिन अभी तक कोई सफाई नहीं हुई है। कैंपस में यूजी हॉस्टल नं. 1, 3 व 4 सहित पीजी हॉस्टल नं 2 के आस पास कचरे के ढेर लगे हैं।</p>
<p><strong>गर्ल्स हॉस्टल के बाहर सड़क नहीं</strong><br />बॉयजÞ हॉस्टल में जहां जगह जगह कचरे के ढेर हो रहे हैं वहीं गर्ल्स हॉस्टल के बाहर सड़क तक नहीं है। गर्ल्स हॉस्टल के बाहर अभी भी मिट्टी की सड़क बनी हुई है। छात्राएं उसी सड़क से आती जाती हैं। सड़क पर मिट्टी के साथ साथ छोटे छोटे कंकड पत्थर हो रहे हैं। जिससे वाहनों के भी फिसलने की संभावना बनी रहती है। छात्रा अनुसुइया (परिवर्तित नाम) ने बताया कि इस सड़क पर कई बार गाडियां फिसल चुकी हैं लेकिन बावजूद इसके अभी तक से सड़क नहीं बनी है जबसे आई हूं तब से सड़क को ऐसा ही देखा है। </p>
<p><strong>पानी की लाइन फूटी हुई</strong><br />कॉलेज के यूजी हॉस्टल नं 4 में टंकी पर पानी चढ़ाने वाली पाइप लाइन और छत से पानी नीचे उतारने के लिए लगाई पाइप लाइन भी फूटी हुई है जिससे पानी चढ़ाते समय और छत से पानी नीचे उतरते समय लीकेज के कारण पानी हॉस्टल की दीवारों में चला जाता है। दीवारों में पानी जाने से कमरों में सीलन और बदबू आ रही है। छात्र देवेश शर्मा (परिवर्तित नाम) ने बताया कि हॉस्टल की ये पाइप लाइन कई दिनों से टूटी हुई है जिससे इनसे गुजरने वाला पानी दीवारों के सहारे कमरों में घुस जाता है। कई बार तो पानी इतना आ जाता है कि कमरों से बाहर निकलना पड़ जाता है।</p>
<p>हॉस्टलों में कचरा ना हो इसके लिए निगम से बात करके टिपर की व्यवस्था की गई है। सफाई के लिए हॉस्टल वार्डन को भी निर्देशित किया हुआ है। सड़क बनाने के कलिए पीडब्लूडी को पत्र लिखा हुआ है। अगर समस्या है तो उसे दूर करवाया जाएगा।<br /><strong>- संगीता सक्सेना, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज कोटा</strong></p>
<p>पीजी हॉस्टलों में साफ सफाई नियमित करवाई जाती है, हॉस्टलों के बाहर कचरे को लेकर कारवाई की जा रही है। जहां कचरे के ढेर हैं उन्हें उठवाएंगे।<br /><strong>- विनोद जांगिड़, वार्डन, पीजी हॉस्टल</strong></p>
<p>हॉस्टलों की सफाई नियमित हो रही है समस्या होने पर छात्रों से पूछकर समाधान किया जाता है। कचरे के ढेरों को उठवाया जाएगा। और हॉस्टल में खराब पड़ी पाइप लाइन के लिए पीडब्लूडी को पत्र लिखा हुआ है बजट आने पर ठीक करवा दिया जाएगा।<br /><strong>- राम खिलाड़ी मीणा, वार्डन, यूजी हॉस्टल </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Jan 2024 20:07:40 +0530</pubDate>
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                <title>सुपर स्पेशलिटी विंग अधीक्षक और प्रधानाचार्य  मेडिकल कॉलेज को नोटिस </title>
                                    <description><![CDATA[कोटा शहर में नए अस्पताल परिसर में 5 वर्ष पूर्व केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से डेढ़ सौ करोड़ रुपए की लागत से सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक मरीजों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए  शुरू किया गया था। परंतु विंग में सुविधाएं पूरी तरह से प्रारंभ नहीं हो पाई है ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/notice-to-super-specialty-wing-superintendent-and-principal-medical-college/article-44579"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/court-hammer05.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। सुपर स्पेशलिटी विंग मेडिकल कॉलेज में सुविधाएं नहीं मिलने के मामले में सुनवाई करते हुए स्थाई लोक अदालत ने अधीक्षक सुपर स्पेशलिटी विंग मेडिकल कॉलेज और प्रधानाचार्य व नियंत्रक मेडिकल कॉलेज कोटा को नोटिस जारी करते हुए 24 मई 2023 तक जवाब तलब किया है।  इस मामले में एडवोकेट लोकेश कुमार सैनी ने एक जनहित याचिका दायर करते हुए अदालत को बताया कि कोटा शहर में नए अस्पताल परिसर में 5 वर्ष पूर्व केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से डेढ़ सौ करोड़ रुपए की लागत से सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक मरीजों को सुविधाएं उपलब्ध कराने  के लिए  शुरू किया गया था। साथ ही यह विश्वास दिलाया गया कि इसके प्रारंभ होने से  मरीजों को दिल्ली और जयपुर जैसे महानगर में इलाज के लिए नहीं जाना पड़ेगा। परंतु विंग में सुविधाएं पूरी तरह से प्रारंभ नहीं हो पाई है जिससे मरीजों  और उनके तीमारदारों  को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है ।</p>
<p>याचिका में यह भी बताया  कि स्पेशलिटी विंग से नया अस्पताल परिसर को जोड़ने के लिए कॉरिडोर का निर्माण कार्य होना था वह भी नहीं हुआ । मरीजों को इलाज पर्ची बनवाने के लिए विंग में जाना पड़ता है उसके बाद चिकित्सक को दिखाने के लिए  घंटों लंबी कतार में खड़ा रहना पड़ता है। चिकित्सक के द्वारा अगर कोई जांच लिखी  जाए तो तीमारदारों को ट्रॉली स्ट्रक्चर या व्हीलचेयर पर मरीज को  नए अस्पताल ले जाना पड़ता है। उसके बाद वापस आकर चिकित्सक को  दिखाने के बाद मरीज को भर्ती किया जाता है । अधीक्षक सुपर स्पेशलिटी विंग  तथा प्राचार्य की अनदेखी के कारण मरीजों तथा उनके तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 May 2023 16:30:53 +0530</pubDate>
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