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                <title>National Health Mission - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>National Health Mission RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>राजस्थान सरकार और गर्ल इफेक्ट ने एचपीवी टीकाकरण को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए ‘टीका टॉक' की शुरुआत की</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान सरकार ने 'गर्ल इफेक्ट इंडिया' के सहयोग से 'टीका टॉक' पहल की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए 14-15 साल की किशोरियों और उनके माता-पिता को एचपीवी टीकाकरण (HPV Vaccine) की सही व भरोसेमंद जानकारी देना है। इसके तहत एक व्हाट्सएप चैटबॉट भी लॉन्च किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rajasthan-government-and-girl-effect-launch-tika-talk-to-raise/article-165382"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)23.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान सरकार ने गर्ल इफेक्ट इंडिया के सहयोग से आज ‘टीका टॉक’ की शुरुआत की। इस पहल का उद्देश्य ह्यूमन  पैपिलोमा विषाणु (एचपीवी) के टीकाकरण को लेकर जागरूकता बढ़ाना और माता-पिता, तथा किशोरियों तक आसान भाषा में भरोसेमंद जानकारी पहुंचाना है। इस पहल की शुरुआत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, राजस्थान सरकार के मिशन निदेशक डॉ. मधु राटेश्वर की अध्यक्षता में आयोजित राज्य स्तरीय बैठक के दौरान की गई। बैठक में राज्य में एचपीवी टीकाकरण को लेकर बेहतर जन-जागरूकता, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल और समुदाय की भागीदारी को मजबूत करने पर चर्चा हुई।</p>
<p>राजस्थान सरकार अपनी बेटियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इसके तहत सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर 14–15 साल की लड़कियों को एचपीवी का टीका निःशुल्क लगाया जा रहा है। एचपीवी टीकाकरण, बचपन और किशोरावस्था में लगाए जाने वाले दूसरे जरूरी टीकों की तरह, उन एचपीवी संक्रमणों से बचाव में मदद कर सकता है, जो भविष्य में सर्वाइकल कैंसर के ज्यादातर मामलों का कारण बनते हैं। भारत में महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर दूसरा सबसे आम कैंसर है। 2024 में 78,499 महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की पहचान हुई और 42,392 महिलाओं की इससे जान गई। लड़कियों को सही उम्र में एचपीवी का टीका लगाना उन्हें आगे चलकर सर्वाइकल कैंसर से बचाने का एक महत्वपूर्ण मौका है।</p>
<p>आज परिवारों तक स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी कई माध्यमों से पहुंचती है। इसके साथ ही गलत और भ्रामक जानकारी भी तेजी से फैलती है। ऐसे में माता-पिता और किशोरियों को एचपीवी, गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर और एचपीवी टीकाकरण से जुड़ी सही, भरोसेमंद और आसानी से समझ आने वाली जानकारी उपलब्ध कराना जरूरी है। ‘टीका टॉक’ इसी जरूरत को पूरा करने की दिशा में एक पहल है। इसके तहत विद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और माता-पिता के साथ बातचीत की जाएगी। इसके अलावा टीका टॉक एक व्हाट्सऐप चैटबॉट  के माध्यम से एचपीवी टीकाकरणऔर गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से जुड़े आम सवालों के सरल और भरोसेमंद जवाब उपलब्ध कराए जाएंगे।</p>
<p>लॉन्च के अवसर पर राजस्थान सरकार के एचपीवी की निदेशक डॉ. मधु राटेश्वर ने कहा, “प्रधानमंत्री ने इस महत्वपूर्ण अभियान की शुरुआत राजस्थान से की है और यह हमारे लिए देश के सामने नेतृत्व करने और एक उदाहरण स्थापित करने का अवसर है। राजस्थान यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि हर पात्र किशोरी और उसके परिवार को एचपीवी वैक्सीनेशन से जुड़े सही और जरूरी जानकारी एवं सहयोग मिले, ताकि वे इस बारे में सही और जागरूक निर्णय ले सकें।” </p>
<p>इस पहल में विद्यालयों और माता-पिता की भागीदारी पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। एचपीवी टीकाकरण को लेकर जागरूकता बढ़ाने और लोगों का भरोसा मजबूत करने में परिवार, शिक्षक और समुदाय महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में टीकाकरण के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. रघुराज सिंह ने कहा, “भारत में सर्वाइकल कैंसर आज भी हजारों महिलाओं की जान ले रहा है। आज हमारे पास एक ऐसा टीका है, जो उन एचपीवी संक्रमणों से बचाव में मदद कर सकता है, जो सर्वाइकल कैंसर के ज्यादातर मामलों का कारण बनते हैं। हम माता-पिता से अपील करते हैं कि अपनी 14 साल की बेटियों को तुरंत एचपीवी का टीका लगवाएं और उन्हें वह सुरक्षा दें, जो एचपीवी टीकाकरण प्रदान कर सकता है। जिस तरह माता-पिता यह सुनिश्चित करते हैं कि उनके बच्चों को दूसरे जरूरी टीके लगें, उसी तरह सही उम्र में एचपीवी का टीका लगवाना भी लड़कियों को भविष्य में सर्वाइकल कैंसर से बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। “</p>
<p>गर्ल इफेक्ट इंडिया की कंट्री डायरेक्टर कविता अय्यागरी ने कहा, “आज माता-पिता ऐसे माहौल में स्वास्थ्य से जुड़े फैसले ले रहे हैं, जहां उनके पास बहुत सारी जानकारी उपलब्ध है, लेकिन हर जानकारी भरोसेमंद नहीं होती। एचपीवी टीकाकरण की बात करें तो परिवारों को केवल जानकारी नहीं, बल्कि ऐसी जानकारी चाहिए जिस पर वे भरोसा कर सकें और जिसे वे अपनी भाषा में आसानी से समझ सकें। ‘टीका टॉक’ का उद्देश्य यही है—लोगों के सवालों के आसान और भरोसेमंद जवाब उनकी पहुंच में लाना।”</p>
<p>राजस्थान में ‘टीका टॉक’ की शुरुआत एचपीवी टीकाकरण को लेकर बेहतर समन्वय और समुदाय की भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राज्य स्तरीय बैठक में स्वास्थ्य, शिक्षा तथा महिला एवं बाल विकास विभागों के प्रतिनिधि शामिल हुए। जयपुर, दौसा और कोटपूतली से मिले जिला स्तर के सुझावों ने आगे की योजना तैयार करने में मदद की। आगे के चरण में विभिन्न विभागों और जिलों के बीच बेहतर समन्वय के साथ इस पहल को लागू करने पर ध्यान दिया जाएगा। साथ ही विद्यालयों और माता-पिता की भागीदारी को मजबूत करने तथा टीके के लिए पात्र किशोरियों और उनके परिवारों तक एचपीवी टीकाकरण से जुड़ी भरोसेमंद जानकारी पहुंचाने पर भी जोर दिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 13:17:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जेपी नड़डा ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर विपक्ष के रूख को गैर जिम्मेदाराना करार दिया, कहा-सरकार संसद को देगी जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली में राज्यसभा में सरकार ने विपक्षी आलोचना को गैर जिम्मेदाराना बताया। जल्द ही मंत्री अमेरिका-व्यापार समझौते की जानकारी संसद को देंगे। स्वास्थ्य योजनाओं से इलाज का खर्च घटा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/jp-nadda-termed-the-oppositions-stand-regarding-the-trade-agreement/article-141786"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(7)1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर संसद में विपक्ष के रूख को गैर जिम्मेदाराना करार देते हुए कहा है कि इस संबंध में जल्द ही संसद में एक वक्तव्य दिया जायेगा और संबंधित मंत्री भी समझौते के बारे में संसद को जानकारी देंगे। राज्यसभा में मंगलवार को विपक्षी सदस्यों ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जतायी कि संसद को इस समझौते की जानकारी नहीं दी गयी और अमेरिका की ओर से सोशल मीडिया पर समझौते की बात कही गयी। विपक्षी सदस्यों ने इस पर सरकार से वक्तव्य देने की मांग की। सदस्यों ने इस मुद्दे को लेकर सदन में शोर शराबा किया। </p>
<p>नेता सदन जगत प्रकाश नड्डा ने इसे विपक्ष का गैर जिम्मेदाराना रवैया बताते हुए कहा कि सरकार जल्द ही संसद को इस समझौते के बारे में जानकारी देगी । उन्होंने कहा कि संबंधित मंत्री भी इस बारे में वक्तव्य देंगे। उन्होंने कहा कि विपक्ष को हताशा में गैर जिम्मेदाराना रूख नहीं अपनाना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि अच्छाई में भी बुराई खोजना उसकी आदत बन गयी है। उन्होंने कहा कि इस तरह का तरीका प्रजातंत्र के लिए घातक है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि कल देर रात अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस समझौते के बारे में ट्वीट कर जानकारी दी थी और उसके बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि सरकार संसद को भी सब कुछ बताने के लिए तैयार है और विपक्ष को संयम बरतना चाहिए। </p>
<p>इसके आगे स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने मंगलवार को कहा कि पिछले 10 साल में केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के कारण इलाज पर लोगों का खर्च काफी कम हो गया है। नड्डा ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न के उत्तर में बताया कि लोगों को सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं और दवाइयां मुहैया कराने के लिए सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं। इनके परिणाम स्वरूप पिछले 10 साल में लोगों द्वारा अपनी जेब से इलाज पर किया गया खर्च 62.6 प्रतिशत से घटकर 39.4 प्रतिशत रह गया है। इससे आम लोगों को काफी राहत मिली है।</p>
<p>उन्होंने कहा बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत सरकार जिला स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती है। इसके अलावा, जन औषधि केंद्रों पर जेनरिक दवाएं ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 80 प्रतिशत तक कम कीमत पर उपलब्ध हैं। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत गरीबों को साल में पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिल रही है। सस्ती दवाओं के लिए अमृत फार्मेसी शुरू की गयी है। </p>
<p>स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि इन सभी योजनाओं के कारण इलाज पर आम लोगों के खर्च में कमी आयी है। दवाओं की ऊंची कीमतों के बारे में पूछे गये एक प्रश्न के उत्तर में जे. पी. नड्डा ने कहा कि दवाओं के मूल्य निर्धारण के तीन उद्देश्य हैं-दवाएं लोगों की पहुंच के भीतर हों, फार्मा उद्योग की वृद्धि बनी रहे और लोगों को रोजगार मिलता रहे।</p>
<p>एक अन्य पूरक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि कैंसर की 63 दवाओं की मूल्य सीमा तय है। इसके साथ ही कैंसर के इलाज में काम आने वाले 132 में 131 शिड्यूल फॉर्मूलेशन के लिए भी अधिकतम कीमत तय है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Feb 2026 14:14:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दस्त से हर साल 3900 बच्चों की होती है मौत</title>
                                    <description><![CDATA[एसीएस शुभ्रा सिंह ने स्वास्थ्य भवन में स्टॉप डायरिया अभियान-2024 की पूर्व तैयारियों की समीक्षा कर रही थीं। कहा कि आगामी दो माह मौसमी एवं जलजनित बीमारियों को देखते हुए संबंधित सभी विभाग तैयारियां सुनिश्चित करें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/3900-children-die-every-year-due-to-diarrhea/article-82907"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/u1rer-(5)3.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। डायरिया से होने वाली मौतों को खत्म करने के लिए एक जुलाई से 31 अगस्त तक प्रदेश में स्टॉप डायरिया अभियान चलाया जाएगा। प्रदेश में वर्तमान में हर साल पांच साल से कम उम्र के 3900 बच्चों की मौत डायरिया यानी दस्त लगने से होती है। हालांकि यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत से कम है। देश में हर साल 5.8 फीसदी बच्चे इसके कारण मौत का शिकार बन जाते हैं। </p>
<p>एसीएस शुभ्रा सिंह ने स्वास्थ्य भवन में स्टॉप डायरिया अभियान-2024 की पूर्व तैयारियों की समीक्षा कर रही थीं। कहा कि आगामी दो माह मौसमी एवं जलजनित बीमारियों को देखते हुए संबंधित सभी विभाग तैयारियां सुनिश्चित करें। हमारा यही लक्ष्य हो कि प्रदेश में एक भी बच्चे की मौत डायरिया से नहीं हो। अधिकांश मौतें आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों, कच्ची बस्ती, पिछडे़ क्षेत्रों, बाढ़ या सूखाग्रस्त आदि इलाकों में सामने आती हैं। ऐसे संवेदनशील वर्गों एवं क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां विशेष फोकस किया जाए। स्कूलों में शैक्षणिक सत्र शुरू होने के साथ ही बच्चों को डायरिया से बचाव को लेकर जागरूक किया जाए।  पेयजल के नमूने लेकर नियमित रूप से जांच की जाए। अस्पतालों में ओआरएस एवं जिंक टेबलेट की समुचित व्यवस्था रहे। आशा एवं एनएनएम के माध्यम से घर-घर तक इनका वितरण करवाया जाए।</p>
<p>बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी, आरएमएससीएल की प्रबंध निदेशक नेहा गिरि, महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव मोहनलाल यादव, अतिरिक्त आयुक्त ईजीएस जुगल किशोर मीणा सहित अन्य अफसर मौजूद रहे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Jun 2024 13:24:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चिकित्सा सेवा में सुधार के सामूहिक प्रयास</title>
                                    <description><![CDATA[जन स्वास्थ्य सुविधाओं में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा का प्रावधान एक महत्वपूर्ण पहलू है,जो रोगी के परिणामों, सुरक्षा और समग्र रोगी संतुष्टि को प्रभावित करता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/collective-efforts-to-improve-medical-care/article-81992"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/uu11rer-(12)5.png" alt=""></a><br /><p>राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एक महत्वपूर्ण पहल रही है,जिसका उद्देश्य व्यापक स्वास्थ्य देखभाल सेवा तक सार्वभौमिक पहुंच हासिल करना है। एनएचएम,स्वास्थ्य सेवा की अवसंरचना को मजबूत करने,मानव संसाधनों को बढ़ाने और आवश्यक चिकित्सा आपूर्ति की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करता है। इसमें मुख्य रूप से जनजातीय समुदाय और स्वास्थ्य सेवा सुविधाओं की कमी झेल रहे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाती है। ये प्रयास, सामूहिक रूप से जन स्वास्थ्य में सुधार और प्रत्येक नागरिक के लिए स्वास्थ्य सेवा सुलभ बनाने के प्रति भारत के समर्पण को दर्शाते हैं। विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से,भारत ने जनसंख्या स्थिरीकरण,मातृ, शिशु व बाल स्वास्थ्य और संचारी रोगों से संबंधित प्रमुख संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार किया है। भारत में ऐसे संकेतकों में गिरावट की औसत दर वैश्विक औसत से अधिक रही है, विशेष रूप से मातृ, शिशु और पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर के मामले में। </p>
<p>योजनाबद्ध कार्यक्रमों के बावजूद, जन स्वास्थ्य सुविधाओं के कम उपयोग, अनुचित और असुरक्षित उपचार, गलत निदान और अपमानजनक तरीके से सेवा देने आदि से संबंधित चुनौतियों के लिए खराब अवसंरचनाएं स्वास्थ्य कर्मियों के रूप में मानव संसाधनों की कमी और देखभाल की कम गुणवत्ता जैसे कारकों को जिम्मेदार ठहराया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने समय पर उपाय करने और चुनौतियों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करने के लिए एक बहुआयामी रणनीति अपनाई। इस दिशा में विभिन्न उपायों में से एक है- संशोधित भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानकों 2022 के माध्यम से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में देखभाल के सभी स्तरों पर सुविधाओं से जुड़े मानकों का उन्नयन करना है, जो सभी जन स्वास्थ्य सुविधा केन्द्रों में स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के घटकों को बेहतर बनाने के लिए एक व्यापक रूपरेखा प्रदान करता है। आईपीएचएस दिशानिदेर्शों का एक महत्वपूर्ण पहलू है, आवश्यक और हासिल करने योग्य सेवाओं पर विशेष जोर।</p>
<p>स्वास्थ्य सेवा की प्रत्येक सुविधा को न्यूनतम सेवाओं का एक सेट प्रदान करना आवश्यक है, ताकि भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित की जा सके। दिशा- निर्देश अवसंरचना, उपकरण, दवाओ, निदान, मानव संसाधन आदि के लिए मानक निर्दिष्ट  करते हैं । आईपीएचएस के प्रमुख लक्ष्य बहुआयामी हैं और स्वास्थ्य सेवा के राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप हैं।  यह रोगी को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य देखभाल सुविधा केन्द्रों में भेजने के लिए एक निर्बाध प्रणाली स्थापित करने के लिए इनपुट भी प्रदान करता है। आईपीएचएस द्वारा जन स्वास्थ्य सुविधाओं में देखभाल के प्रत्येक स्तर के लिए विनिर्देशों का एक सेट प्रदान करने के साथ, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय अनुचित और असुरक्षित उपचार, छूटे हुए निदान आदि को रोकने तथा जन स्वास्थ्य संस्थानों में सम्मानजनक देखभाल प्रदान करने के लिए देखभाल की गुणवत्ता में सुधार करने की आवश्यकता को प्राथमिकता देता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के प्रमुख कार्यक्रम, राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक को यह सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन और कार्यान्वित किया गया है कि जन स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं में सेवाएं न केवल सुरक्षित और रोगी- केंद्रित हों, बल्कि गुणवत्ता का भरोसेमंद स्तर भी हो। यह पहल,स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं की गुणवत्ता को समझने, मापने और सुधारने से जुड़ी कमियों को दूर करने पर केंद्रित है।</p>
<p>जन स्वास्थ्य सुविधाओं में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा का प्रावधान एक महत्वपूर्ण पहलू है,जो रोगी के परिणामों, सुरक्षा और समग्र रोगी संतुष्टि को प्रभावित करता है। यह समुदाय के समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भी सहायता करता है, रोगी के अनुभवों को बढ़ाता है और देखभाल की लागत को कम करके सेवा प्रदाता के अनुभव में वृद्धि करता है।  स्वास्थ्य सेवा में गुणवत्ता सुनिश्चित करने से असमानताओं का भी समाधान हुआ है और यह सुनिश्चित किया गया है कि सभी रोगियों को, उनकी पृष्ठभूमि या परिस्थितियों की परवाह किए बिनाए समान देखभाल मिले। यह स्वास्थ्य समानता और सामाजिक न्याय हासिल करने के लिए महत्वपूर्ण है और सभी के लिए जीवन को आसान बनाने के सरकार के सिद्धांत के अनुरूप है। हाल की महामारी से सीख लेते हुए और भविष्य की किसी भी सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति की तैयारी करने के क्रम में,भारतीय जन स्वास्थ्य प्रणालियों की अवसंरचना को बड़े पैमाने पर समर्थन देने के लिए अखिल भारतीय मिशन,यानी प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन की शुरूआत हुई। </p>
<p>अवसंरचना और निगरानी गतिविधियों पर मुख्य ध्यान दिया गया। लागत प्रभावी प्रयोगशाला प्रणालियों के माध्यम से सेवाओं की पहुंच, दक्षता, प्रभावशीलता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए पीएम- एबीएचआईएम के तहत एकीकृत जन स्वास्थ्य प्रयोगशाला को एक प्रमुख घटक के रूप में डिजाइन किया गया। ये प्रयोगशालाएं न केवल तेज,विश्वसनीय और सटीक परीक्षण परिणाम प्रदान करेंगी,बल्कि प्रभावी नैदानिक और निगरानी सेवाओं के लिए जिला व उपजिला स्तर पर संपर्क भी स्थापित करेंगी,इस प्रकार एक सुदृढ़ स्वास्थ्य प्रणाली के निर्माण की दिशा में भारत के कदम को आगे बढ़ाएंगी। भारत सरकार ने गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के कार्यान्वयन के माध्यम से सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा प्राप्त करने का प्रयास जारी रखा है, जो सुरक्षित प्रभावी, रोगी केंद्रित, समय पर उपलब्ध, कुशल और न्यायसंगत हैं। आईपीएचएस दिशानिर्देश परिवर्तन के एक प्रकाश स्तंभ के रूप में कार्य करते हैं,  जो भविष्य के मार्ग को रोशन करते हैं, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं प्रत्येक स्तर पर सेवा सुविधा देने के लिए आवश्यक विशिष्टताओं के एक निर्धारित सेट के साथ कार्य कर रहीं हैं। </p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 19 Jun 2024 11:25:32 +0530</pubDate>
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