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                <title>स्कूली बच्चों को नमाज पढ़ाने के आरोप में प्रधानाध्यापक निलंबित, बच्चों का ब्रेनवॉश करने का आरोप</title>
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                        <![CDATA[मथुरा के प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक पर छात्रों को जबरन नमाज पढ़ाने और धार्मिक प्रचार का आरोप लगा। बीएसए ने निलंबन किया, मामले की जांच समिति गठित की आदेश दिए।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/principal-suspended-for-teaching-namaz-to-school-children-accused-of/article-141697"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(11)1.png" alt=""></a><br /><p>मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के प्राथमिक विद्यालय नौहझील में तैनात प्रधानाध्यापक पर छात्रों को जबरन नमाज पढ़ाने और धर्म विशेष के प्रचार-प्रसार के आरोप में निलंबन की कार्रवाई की गई है। बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) मथुरा ने प्रथम दृष्टया आरोपों को गंभीर मानते हुए संबंधित प्रधानाध्यापक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।</p>
<p>भाजपा बाजना मंडल अध्यक्ष दुर्गेश प्रधान द्वारा बीएसए को दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया कि प्रधानाध्यापक जान मोहम्मद बच्चों को बहला-फुसलाकर इस्लाम धर्म के प्रति प्रेरित करते थे तथा विद्यालय परिसर में नमाज पढ़वाते थे। शिकायत में हिंदू देवी-देवताओं के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणियां करने तथा विद्यालय में राष्ट्रगान न कराने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं। साथ ही विद्यालय परिसर में बाहरी व्यक्तियों के आने और बच्चों पर धार्मिक प्रभाव डालने की बात भी कही गई है।</p>
<p>बीएसए कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार खंड शिक्षा अधिकारी की आख्या के आधार पर प्रधानाध्यापक को निलंबित कर प्राथमिक विद्यालय नगला हुमायूं, मांट से संबद्ध किया गया है। मामले की विस्तृत जांच के लिए बीईओ छाता और बीईओ मांट की द्विसदस्यीय समिति गठित कर शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने कहा है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Feb 2026 17:10:32 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>नया कानून लागू: धाराएं याद नहीं होने से एफआईआर दर्ज होने में लग रहा समय, ई-साक्ष्य नहीं हो पा रहे अपलोड</title>
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                        <![CDATA[इंटरनेट स्पीड कम होने के कारण वीडियो अपलोड होने में भी आ रही दिक्कत]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/due-to-not-remembering-the-applicable-sections-of-the-new/article-84702"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/111u1rer2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में एक जुलाई, 2024 से नए कानून भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) लागू होने के बाद पुलिसकर्मियों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा है। नए कानून में सभी धाराएं बदलने के कारण पुलिसकर्मियों को ये धाराएं याद नहीं हो पा रही हैं, ऐसे में रिपोर्ट दर्ज होने में समय लग रहा है। </p>
<p>इसके अलावा मौके से साक्ष्य इकट्ठे कर वीडियोग्राफी कर उन्हें अपलोड करने में जांच अधिकारियों को परेशानी आ रही है। अर्थात इंटरनेट की धीमी स्पीड के कारण किसी भी अपराध में ई-साक्ष्य तुरंत अपलोड करने में खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं पुलिसकर्मियों को खुद का इंटरनेट उपयोग कर जांच के लिए साक्ष्य जुटाने पड़ रहे हैं। </p>
<p><strong>इंटरनेट की स्पीड बड़ी समस्या </strong><br />एक केस के जांच अधिकारी ने बताया कि नए कानून के तहत मौके से ही गिरफ्तारी, जब्ती, सर्च समेत अन्य कार्रवाई के वीडियो बनाकर ई-साक्ष्य के तौर पर तैयार किए जाएंगे, लेकिन कई घटना स्थल ऐसे होते हैं, जहां इंटरनेट की स्पीड काफी कम आती है। ऐसे में जांच अधिकारी को वीडियो बनाकर अपलोड करने में परेशानी हो रही है। </p>
<p><strong>चार मिनट से ज्यादा का वीडियो नहीं हो रहा अपलोड</strong><br />एक जांच अधिकारी ने बताया कि नए कानून के तहत कोई ज्यादा बड़ी परेशानी नहीं आ रही है। धाराएं याद नहीं होने के कारण एफआईआर दर्ज होने में थोड़ा समय ज्यादा लग रहा है। समय के साथ ये समय घट जाएगा, लेकिन ई-साक्ष्य को तैयार करने में खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मौके से बनाए गए वीडियो अपलोड हो ही नहीं पाते हैं। यदि चार मिनट से ज्यादा का वीडियो बना दिया तो वो अपलोड होता ही नहीं है। </p>
<p><strong>थ्रीजी सिम और खुद का डाटा कर रहे उपयोग</strong><br />हाल में नए कानून के तहत पुलिसकर्मी मौके से वीडियो तैयार कर ई-साक्ष्य तैयार कर रहे हैं। इसमें पुलिसकर्मी खुद का इंटरनेट उपयोग में ले रहे हैं। वहीं पुलिस को थ्रीजी सिम जारी की हुई हैं, जिनमें थ्री जी डाटा ही आता है। ऐसे में इस सिम के नेट के उपयोग से कोई वीडियो साक्ष्य के लिए नहीं जुटाया जा सकता है। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jul 2024 10:43:33 +0530</pubDate>
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                <title>आज से लागू होंगे तीन नए कानून</title>
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                        <![CDATA[कानून भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और साक्ष्य अधिनियम एक जुलाई से लागू हो रहे हैं, जो भारतीय दंड सहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) व भारतीय साक्ष्य अधिनियम का स्थान लेंगे।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/three-new-laws-will-come-into-effect-from-today/article-83269"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/law.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। तीन नए कानून भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और साक्ष्य अधिनियम एक जुलाई से लागू हो रहे हैं, जो भारतीय दंड सहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) व भारतीय साक्ष्य अधिनियम का स्थान लेंगे। एफआईआर दर्ज करने के बाद पीड़ित को मुकदमे की प्रगति बारे एसएमएस या अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स माध्यमों द्वारा 90 दिनों के अंदर-अंदर जानकारी प्रदान की जाएगी। नए कानूनों के लागू होने पर ट्रायल कोर्ट को हर फैसला अधिक से अधिक तीन साल में देना होगा। महिला विरूद्ध अपराध से संबंधित मामलों में 60 दिन के अंदर-अंदर जांच पूरी कर न्यायालय में चालान पेश करना होगा। दोषी द्वारा चालान की प्रति प्राप्त करने उपरांत 60 दिन के अंदर अंदर माननीय न्यायालय में चार्जशीट करना अनिवार्य होगा। नए कानून के अनुसार इलेक्ट्रोनिक्स माध्यम/वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गवाही रिकार्ड की जा सकेगी। </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jul 2024 10:12:44 +0530</pubDate>
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                <title>New Law: विदेश में बैठे अपराधी के खिलाफ भी चलेगा ट्रायल और सुनाई जाएगी सजा</title>
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                        <![CDATA[30 जून से पहले होने वाले हर अपराध में पुराना कानून ही लागू होगा, सीसीटीएनएस में दोनों ही कानून की मौजूद होंगी धाराएं]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/new-law-trial-will-be-conducted-against-criminals-sitting-abroad/article-83012"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/law.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में 30 जून की रात 12 बजे के बाद एक जुलाई को तीन नए कानून लागू हो जाएंगे। एक जुलाई से हर अपराध में नई कानून भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) की धाराओं में कार्रवाई होगी। 30 जून रात 11.59 बजे तक के अपराधों में पुराना कानून ही लगेगा। 28 जून को कोई अपराध हुआ और उसकी रिपोर्ट पांच जुलाई को दी गई तो पुरानी धाराएं लगेंगी। नए कानूनों को लागू करने के लिए हर रोज थाना स्तर से लेकर पुलिस मुख्यालय में तैयारियां चल रही हैं। इस पर मुख्यमंत्री एक जुलाई को बड़ा कार्यक्रम करेंगे। </p>
<p><strong>नए कानून की कुछ बड़ी बातें</strong><br />   </p>
<ul>
<li>बड़े अपराधों के लिए गैंगस्टर नाबालिगों का उपयोग करते हैं। नए कानून में ये भी बराबर के अपराधी हैं।</li>
<li>पहले अपराधी वारदात करके फरार हो जाता था। अब उसे 45 दिन का नोटिस मिलेगा। नहीं आया तो ट्रायल और सजा होगी।</li>
<li>विदेश में बैठा अपराधी यदि अपराध करता है और वह नामजद है तो उसके खिलाफ भी ट्रायल चलेगा और सजा होगी।</li>
<li>महिला अपराध में दो माह में जांच करनी होगी।</li>
<li>केस की जांच चल रही है तो पुलिस को परिवादी को 90 दिन में केस की प्रगति बतानी होगी। 173 (8) के पेंडिंग केसों में कोर्ट से जांच की अनुमति लेनी होगी।</li>
<li>ट्रायल के समय को छोड़कर कोर्ट में हर प्रक्रिया का समय निर्धारित रहेगा।</li>
<li>तीन से सात साल तक की सजा में पुलिस संज्ञेय या असंज्ञेय अपराध की जांच के लिए प्राथमिक  जांच कर सकेगी।</li>
<li>परिवादी ऑनलाइन एफआईआर भेज सकता है, लेकिन उसे तीन दिन में थाने जाकर हस्ताक्षर करने होंगे।</li>
<li>गवाही और मुल्जिम की पेशी वीडियो कॉफ्रेंसिंग से होगी।</li>
<li>नए कानून में महिलाओं एवं बच्चों पर विशेष ध्यान दिया है। 18 साल के कम हर उम्र के नाबालिग को बालक कहा जाएगा। वहीं गैंगरेप समेत अन्य जघन्य अपराधों की सजा भी बढ़ाई गई है। <br /><strong><br /></strong></li>
</ul>
<p><strong>सीसीटीएनएस में रहेंगी दोनों कानून की धाराएं</strong><br />नए कानून लागू होने के बाद भी क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रेकिंग नेटवर्किंग एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) में दोनों ही कानून की धाराएं मौजूद रहेंगी। जांच अधिकारी पुराने केस में पुरानी धाराएं और नए केस में नई धाराएं जोड़ सकेंगे। समय के साथ-साथ पुराने कानून की धाराओं को हटा दिया जाएगा। </p>
<p><strong>50 हजार से ज्यादा को दी ट्रेनिंग</strong><br />प्रदेश में नए कानून को लागू करने के लिए किसी तरह की परेशानी नहीं आए इसके लिए हर जिले के साथ-साथ आठ ट्रेनिंग सेन्टरों में जांच अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया है। अभी तक 50 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी प्रशिक्षित किए जा चुके हैं। आने वाले समय में आरएसी, वायरलैस, इंटेलीजेंस, एसडीआरएफ समेत अन्य जगहों पर तैनात पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। </p>
<p><strong>इनका कहना है...</strong><br />आईजी क्राइम पुलिस मुख्यालय, प्रफुल्ल कुमार का कहना है कि जो नए तीनों आपराधिक कानून आ रहे हैं, वो न्याय की भावना से प्रेरित हैं एवं पीड़ित को केन्द्र बिन्दु में रखकर बनाए गए हैं। इसमें वर्तमान समय के नए अपराधों, डिजिटल एवं इलेक्ट्रॉनिक प्रचलन को समय अनुरूप समाहित किया गया है। </p>]]>
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                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Jun 2024 12:13:03 +0530</pubDate>
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