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                <title>Water Resources - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Water Resources RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अजीत पवार जीवन परिचय: कम उम्र में ही किसानों के दर्द को समझना कर दिया था शुरू, जानें कैसे पड़ा ''दादा'' नाम</title>
                                    <description><![CDATA[महाराष्ट्र के दिग्गज नेता अजीत पवार ने सहकार आंदोलन से राजनीति में पहचान बनाई। सांसद, मंत्री और पांच बार उपमुख्यमंत्री रहकर विकास और संगठनकर्ता की मजबूत छवि स्थापित की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/ajit-pawar-biography-started-understanding-the-pain-of-farmers-at/article-141043"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/ajit-pawarr.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। महराष्ट्र के दिग्गज नेता रहे अजीत पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को अहमदनगर जिले के राहुरी तालुका के देवलाली प्रवरा में हुआ था। उन्हें कम उम्र में ही अपने परिवार की देखभाल की जिम्मेदारी उठानी पड़ी, और यही वह वक्त था जब  उन्हें अपने आसपास की सामाजिक समस्याओं के बारे में पहली बार पता चला। जैसे ही उन्होंने किसानों की दुर्दशा को समझा, उनके मन में उनके प्रति सहानुभूति के बीज बोए गए। </p>
<p><img src="https://akm-img-a-in.tosshub.com/indiatoday/images/story/202601/ajit-pawar-281739142-16x9_0.jpeg?VersionId=5BhOIN98B1WzMlGD0Q4QGdTKH4ihHK9Y&amp;size=690:388" alt="Ajit Pawar dies: Mass leader who practised politics with no permanent  friends or enemies - India Today"></img></p>
<p>उनके नेतृत्व की यात्रा दूध संघों, विभिन्न सहकारी समितियों, चीनी मिलों और बैंकों जैसे विभिन्न संस्थानों के साथ शुरू हुई। इस सफर ने साल 1991 में एक नयी दिशा ली। तब से, उन्होंने सांसद, विधायक, विभिन्न महत्वपूर्ण सरकारी विभागों के राज्य मंत्री और महाराष्ट्र के चार बार उपमुख्यमंत्री जैसे कई और पदों को सुशोभित करने में सफल रहे। महाराष्ट्र के लोगों के लिए उनके अथक प्रयास और लोगों और मिट्टी से जुड़े रहने की उनकी क्षमता के कारण, अजीत पवार को कामकाजी लोगों से लेकर बच्चों, माताओं, बहनों और महाराष्ट्र के महत्वाकांक्षी युवाओं तक सभी लोग प्यार से 'दादा' का नाम दिया।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi" xml:lang="hi">महाराष्ट्र में विमान क्रैश में डिप्टी सीएम अजीत पवार का निधन<a href="https://twitter.com/hashtag/planecrash?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#planecrash</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/ajitpanwar?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#ajitpanwar</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/maharshtradeputycm?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#maharshtradeputycm</a> <a href="https://t.co/V32oBuhj9q">pic.twitter.com/V32oBuhj9q</a></p>
— Dainik Navajyoti (@DailyNavajyoti) <a href="https://twitter.com/DailyNavajyoti/status/2016409322146955725?ref_src=twsrc%5Etfw">January 28, 2026</a></blockquote>
<p>

</p>
<p>वर्ष 1982 में मात्र 20 वर्ष की आयु में एक चीनी सहकारी संस्था से अपने चुनावी करियर की शुरुआत करने वाले पवार ने प्रदेश की राजनीति में एक निर्णायक भूमिका निभाई। राज्य में भू-राजनीतिक स्थिति की अपनी गहरी समझ के कारण, वह यह बेहतर ढंग से जानते थे कि कोई भी फैसला मुंबई में मंत्रालय से लेकर मेहनती किसानों तक और महाराष्ट्र के पूर्वी कोने से लेकर पश्चिमी कोने तक सभी स्तरों पर लोगों को कैसे प्रभावित करेगा।</p>
<p><img src="https://img.mathrubhumi.com/view/acePublic/alias/contentid/1osxox54xikalsjuu9i/1/ajit-pawar-jpg.webp?f=1x1&amp;w=1080&amp;q=0.8" alt="Ajit Pawar no more: A look back at India's high-profile aviation deaths"></img></p>
<p>इसके बाद अजित पवार साल 1991 में पुणे जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष बने और लगातार 16 वर्षों तक इस पद पर रहे। इसी वर्ष वह बारामती से लोकसभा के लिए चुने गए, लेकिन अपने चाचा और कद्दावर नेता शरद पवार के लिए उन्होंने यह सीट छोड़ दी। इसके बाद वह महाराष्ट्र विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए और 1992-93 में कृषि एवं बिजली राज्य मंत्री बने। अजित पवार ने बारामती निर्वाचन क्षेत्र से 1995, 1999, 2004, 2009 और 2014 में लगातार जीत दर्ज की। उन्होंने अपने करियर में कृषि, बागवानी, बिजली और जल संसाधन जैसे महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार संभाला।</p>
<p><img src="https://images.loksattaimg.com/2026/01/ajit-pawar-plane-crash-dead-people-names.jpg?quality=100&amp;w=440" alt="Ajit Pawar Death: अपघातावेळी अजित पवारांबरोबर आणखी कोण होतं? - Marathi News  | Ajit Pawar Death Update Names Of All People On Board With Ajit Pawar  Shambhavi Pathak Sumit Kapoor Vidip Jadhav"></img></p>
<p>अजीत पवार पांच बार राज्य के उपमुख्यमंत्री पद पर रहे। वह पहली बार 10 नवंबर 2010 से 25 सितंबर 2012 तक कांग्रेस की पृथ्वीराज चव्हाण सरकार में इस पद पर रहे। इसके बाद 25 अक्टूबर 2012 से 26 सितंबर 2014 तक वह पुन: उपमुख्यमंत्री बने। इसके बाद अजीत पवार ने 23 नवंबर 2019 को देवेंद्र फडणवीस के साथ एक दिन की सरकार बनाकर इतिहास बना दिया। इसके उपरांत 30 दिसंबर 2019 से 29 जून 2022 तक वह उद्धव ठाकरे सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे। दो जुलाई 2023 से वह वर्तमान सरकार में इस पद की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। दिसंबर 2024 से वह देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में आठवें उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत थे।</p>
<p><img src="https://swarajya.gumlet.io/swarajya/2023-04/95de78a0-5617-4ae4-bf80-55b8e6d317c3/Swarajya_images__45_.png?w=610&amp;q=75&amp;compress=true&amp;format=auto" alt="Another Eventful 21 June In Maharashtra: Ajit Pawar 'Doesn't Want To Be  Leader Of Opposition Anymore'"></img></p>
<p>प्रशासनिक अनुभव और मजबूत संगठनकर्ता के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले अजीत पवार का नाम सिंचाई घोटाले और लवासा लेक सिटी प्रोजेक्ट जैसे विवादों से भी जुड़ा रहा, हालांकि बाद में उन्हें क्लीन चिट मिल गई थी। उन्हें महाराष्ट्र की सत्ता राजनीति के सबसे अहम चेहरों में गिना जाता था जिन्होंने हमेशा खुद को शरद पवार का अनुयायी बताया। अजीत पवार चाहे वह सत्ता में हों या न हों, वह हमेशा अपने जनता दरबार के माध्यम से लोगों से जुड़े रहते थे। लोगों में उनकी लोकप्रियता इस वजह से भी रही क्योंकि वे अपने दृष्टिकोण में स्पष्टवादिता रखते थे। विकास के बारे में उनकी शानदार और स्पष्ट सोच ने पिछले तीन दशकों में महाराष्ट्र के राजनीतिक और सामाजिक जीवन को प्रभावित किया है। महाराष्ट्र के राजनीतिक परिदृश्य में अपनी समय की पाबंदी के लिए मशहूर, वह नए महाराष्ट्र के निर्माता के रूप में देखे गए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 Jan 2026 12:40:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत बोले- राम जल सेतु लिंक परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण लगभग पूरा ; दिसंबर के पहले सप्ताह में करेंगे साइट निरीक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने बताया कि पूर्वी नहर परियोजना, जिसे अब राम जल सेतु लिंक परियोजना कहा जाता है, के लिए भूमि अधिग्रहण लगभग पूरा हो चुका है। तीन में से दो चरणों को वन स्वीकृति मिल चुकी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की साप्ताहिक समीक्षा में यह ड्रीम प्रोजेक्ट 17 जिलों को जलापूर्ति व सिंचाई लाभ देगा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/water-resources-minister-suresh-singh-rawat-said-%E2%80%93-land-acquisition/article-132094"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11118.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने सचिवालय में पूर्वी नहर परियोजना (ईस्टर्न कैनाल प्रोजेक्ट), जिसे अब राम जल सेतु लिंक परियोजना के नाम से जाना जाता है, की समीक्षा बैठक के बाद कहा कि इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। उन्होंने बताया कि परियोजना के तीन चरणों में से दो चरणों को वन स्वीकृति (फॉरेस्ट क्लीयरेंस) भी प्राप्त हो चुकी है।</p>
<p>मंत्री रावत ने कहा कि दिसंबर के पहले सप्ताह में वे स्वयं आरसीपी के मार्ग का निरीक्षण करेंगे। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार इस परियोजना की प्रगति की साप्ताहिक समीक्षा की जा रही है। उन्होंने बताया कि यह मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट है, जिससे प्रदेश के 17 जिलों को जलापूर्ति और सिंचाई का लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि “राजस्थान जो कभी मारु प्रदेश के रूप में जाना जाता था, अब राम जल सेतु लिंक और यमुना जल समझौते के बाद हरित प्रदेश के रूप में पहचान बनाएगा।” इस योजना से पहले लोगों को पेयजल और बाद में सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध होगा।</p>
<p>मंत्री ने कहा कि यह बहुत बड़ी परियोजना है, ऐसे में कार्यान्वयन के दौरान कुछ चुनौतियाँ आती हैं, परंतु विभाग उनका समाधान कर रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि तय समयसीमा में ही यह ड्रीम प्रोजेक्ट पूर्ण होगा और राजस्थान के जल संसाधनों में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Nov 2025 17:55:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अटरू क्षेत्र की माइनरें बदहाल, किसानों की बढ़ी चिंता, शेरगढ़ बांध की रीछन्दा माइनर दो साल से क्षतिग्रस्त</title>
                                    <description><![CDATA[ किसानों ने जल संसाधन विभाग से स्थायी समाधान की मांग की है ताकि सिंचाई कार्य सुचारू रूप से जारी रह सके।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/minor-canals-in-atru-area-in-dilapidated-condition--farmers--concerns-increase--richhanda-minor-canal-of-shergarh-dam-damaged-for-two-years/article-131065"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/_4500-px)-(1)7.png" alt=""></a><br /><p>अटरू। अटरू क्षेत्र के शेरगढ़ परवन पिकअप वियर बांध से निकलने वाली विभिन्न माइनरों की मरम्मत लंबे समय से नहीं होने के कारण किसानों की परेशानी बढ़ गई है। खासतौर पर रीछन्दा माइनर की हालत बेहद खराब है, जिससे सिंचाई कार्य प्रभावित हो रहा है। किसान लक्ष्मी नारायण बैरवा, रामकरण नागर, जगदीश प्रसाद गुर्जर, प्रमोद कुमार बैरवा, कृष्ण मुरारी, जगन्नाथ बैरवा, लक्ष्मी चंद सहित कई किसानों ने बताया कि शेरगढ़ बांध से निकलने वाली आमली-रीछन्दा माइनर पर डूब के बंधे के पास नहर दो वर्षों से क्षतिग्रस्त है। इस संबंध में कई बार जल संसाधन विभाग को अवगत कराने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। किसानों का कहना है कि हर बार मरम्मत का आश्वासन तो दिया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कार्य नहीं होता। </p>
<p>किसानों ने बताया कि बरसात के मौसम में नहरों से पानी का बहाव बढ़ जाने पर खेतों में पानी भर जाता है, जिससे फसलों को भारी नुकसान होता है। अब फिर से नहरों में पानी छोड़े जाने की संभावना को देखते हुए किसानों में चिंता का माहौल है। उनका कहना है कि यदि शीघ्र ही क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत नहीं करवाई गई तो सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो जाएगी और फसलों को नुकसान झेलना पड़ेगा। किसानों ने जल संसाधन विभाग से नहर की पक्की मरम्मत कराकर स्थायी समाधान की मांग की है ताकि सिंचाई कार्य सुचारू रूप से जारी रह सके।</p>
<p>दो साल से नहर टूटी हुई है। कई बार विभाग को जानकारी देने के बावजूद मरम्मत नहीं हुई। बरसात में पानी खेतों में भर जाता है और फसलें खराब हो जाती हैं। हम चाहते हैं कि जल्द से जल्द पक्का निर्माण कराकर स्थायी समाधान किया जाए।<br /><strong>- लक्ष्मी नारायण बैरवा, रीछन्दा। </strong></p>
<p>हर बार विभाग आश्वासन देता है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती। अगर अब भी मरम्मत नहीं हुई तो सिंचाई पूरी तरह ठप हो जाएगी। सरकार को किसानों की परेशानी समझते हुए तुरंत काम शुरू करना चाहिए।<br /><strong>- रामकरण नागर, शेरगढ़। </strong></p>
<p>माइनर की मरम्मत को लेकर कुछ किसान विभाग से मिले थे। मामला उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। पक्के निर्माण का प्रपोजल बनाकर भेजा गया है। जैसे ही बजट आवंटित होगा, माइनर की मरम्मत कार्य शुरू कर दिया जाएगा। <br /><strong>- दीपेन्द्र कुमार वर्मा, कनिष्ठ अभियंता, जल संसाधन विभाग अटरू। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Oct 2025 15:35:31 +0530</pubDate>
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                <title>मॉनसून की मेहरबानी : बीसलपुर और माही बांध में जलस्तर बढ़ा, जल संसाधन विभाग के अधिकारियों में उत्साह </title>
                                    <description><![CDATA[बीसलपुर बांध पर पिछले पांच दिनों में 118 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जिससे बांध का जल स्तर 312.45 आरएल मीटर पर स्थिर बना हुआ है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/monsoon-is-enthusiastic-among-officials-of-water-resources-department-in/article-117977"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news-(2)28.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में मानसून की पहली झमाझम बारिश ने जलाशयों को राहत दी है। बीसलपुर बांध पर पिछले पांच दिनों में 118 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जिससे बांध का जल स्तर 312.45 आरएल मीटर पर स्थिर बना हुआ है। आज सुबह भी बांध क्षेत्र में 20 मिमी बारिश दर्ज की गई। हल्की बारिश का सिलसिला बांध क्षेत्र में अब भी जारी है, जिससे जल संसाधन विभाग के अधिकारियों में उत्साह है।</p>
<p>माही बांध में भी मानसून की मेहरबानी देखने को मिली है। बीते दिनों हुई बारिश से बांध में 5.0 टीएमसी पानी की आवक हुई, और इसका जल स्तर 270.30 आरएल मीटर तक पहुंच गया है। यह स्तर पिछले साल के 268.20 आरएल मीटर से दो मीटर अधिक है। माही बांध की कुल भराव क्षमता का 34.282 टीएमसी पानी वर्तमान में उपलब्ध है।</p>
<p>जल संसाधन विभाग के अनुसार, मानसून के इस सकारात्मक प्रभाव से राजस्थान के विभिन्न इलाकों में पेयजल और सिंचाई की समस्या को काफी हद तक कम करने की उम्मीद है। बांधों के जलस्तर में यह बढ़ोतरी राज्य की जल सुरक्षा के लिए शुभ संकेत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Jun 2025 12:50:36 +0530</pubDate>
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                <title>जल संसाधन की मंथली प्रोग्रेस रिपोर्ट, 10 माह बाद भी 60 फीसदी बजट ही हो सका खर्च</title>
                                    <description><![CDATA[जल संसाधन की परियोजनाओं के लिए 580574, 73 लाख रुपए का बजट प्रावधान किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/monthly-progress-report-of-water-resources-could-be-spent-60/article-104583"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/jal-sansadhan-department.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जल संसाधन की परियोजनाओं के लिए 580574, 73 लाख रुपए का बजट प्रावधान किया गया है, लेकिन जनवरी तक अर्थात 10 माह बाद भी महज 60 प्रतिशत बजट ही खर्च हो सका है। ये जानकारी विभाग की मंथली प्रोग्रेस रिपोर्ट द्वारा दी गई है। डब्ल्यूआरडी के मुताबिक बड़े प्रोजेक्ट के लिए लंबी प्रक्रिया होती है। शुरू में तीन-चार माह बारिश से काम प्रभावित रहता हैं।</p>
<p>पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने पूर्वी राजस्थान के लिए ईआरसीपी के प्रोजेक्ट को गति प्रदान करने के लिए ई आरसीपी निगम लिमिटेड का गठन किया, ताकि परियोजना के कार्य को आगे बढ़ाया जा सके। मौजूदा भाजपा सरकार ने भी ईआरसीपी निगम को बजट आवंटित किया, लेकिन चालू वित्तीय वर्ष के 10 माह बीत जाने के बाद भी बजट खर्च का प्रतिशत 0.88 है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Feb 2025 14:44:19 +0530</pubDate>
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                <title>गंदे जल का ट्रीटमेंट कर अंडर ग्राउंड वाटर रिसोर्सेज तैयार करेगी सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[ग्राम पंचायत प्रशासन घन मीटर में कुल इकट्ठे पानी को जरूरत के अनुसार घरेलू, जानवर, कृषि और उद्योगों के उपयोग के लिए तय करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/government-will-create-underground-water-resources-by-treating-dirty-water/article-83841"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/u1rer-(15)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जल संकट वाले जिलों जैसलमेर-बाड़मेर सहित सभी जिलों में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार हर गांव को जल समृद्ध गांव बनाने की तैयारी कर रही है। ग्राम पंचायतों में गंदे जल का ट्रीटमेंट कर ड्रेनेज सिस्टम से जल संसाधन प्रबंधन की योजना बनाई जा रही है। फिलहाल प्रस्ताव पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर के पास लंबित है।</p>
<p>मंत्री और मुख्यमंत्री स्तर से मंजूरी के बाद इसे ग्राम पंचायतों में जल्दी लागू किया जाएगा। शहरों में गंदे पानी के ट्रीटमेंट व्यवस्था के बाद ग्राम पंचायतों में सतही जल संसाधनों के अलावा अंडर ग्राउंड वाटर रिसोर्सेज तैयार करने के लिए राज्य सरकार ने प्लान तैयार किया है, जिसमें राज्य सरकार हर गांव को पर्याप्त जल उपलब्धता वाले गांव बनाना चाहती है। गांव में पीने के और सिचांई के पानी की व्यवस्था के लिए केन्द्र और राज्य सरकार के सहयोग से पहले से कई योजनाएं चल रही हैं। इसी बीच गंदे पानी का शुद्धिकरण कर उसे घरों, जानवरों, कृषि और उद्योग क्षेत्र में काम लेने के लिए सरकार ने प्रस्ताव तैयार किया है। </p>
<p><strong>कई विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी तय होगी</strong><br />प्रस्ताव में गंदे पानी के ट्रीटमेंट के लिए ग्रामीण विकास, पंचायतीराज, वाटरशेड, नरेगा विभागों की प्रमुख भूमिका रहेगी। ट्रीटमेंट बनाने से लेकर जल उपयोग व्यवस्था तय करने के लिए ग्राम पंचायतों को जिम्मेदारी के नियम भी तय होंगे। ग्राम पंचायतों में जल जीवन मिशन के तहत पीने के पानी और कृषि विपणन विभाग के जरिए सिंचाई के पानी की व्यवस्थाएं चल रही हैं, लेकिन भविष्य में जल संकट से निपटने के लिए ड्रेनेज सिस्टम से जल प्रबंधन की योजना बनाई जा रही है। </p>
<p><strong>ये है ग्राम पंचायतों में ड्रेनेज सिस्टम से जल संसाधन प्रबंधन</strong><br />ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग ने जो प्रस्ताव तैयार किया है। उसमें ग्राम पंचायत में जहां भी अंतिम जल निकासी स्थल है, वहां गंदे जल का ट्रीटमेंट कर उसी के आस पास ईंटों से जालीदार चुणाई में एक या दो स्लम वेल बनाए जाएंगे। इससे अंडर ग्राउंड वाटर रिसोर्सेज तैयार होंगे। स्लम वेल की साइज में करीब दस मीटर गहरा और ऊपर का व्यास दो से तीन मीटर रहेगा। इसी तरह खेतों के आसपास भी नरेगा योजना के तहत खुले कुए बनाए जा सकते हैं। ग्राम पंचायत प्रशासन घन मीटर में कुल इकट्ठे पानी को जरूरत के अनुसार घरेलू, जानवर, कृषि और उद्योगों के उपयोग के लिए तय करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jul 2024 12:27:36 +0530</pubDate>
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