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                <title>असर खबर का - कोई नहीं ढूंढ पाया बैल तो हटानी पड़ी शर्त</title>
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                        <![CDATA[किसानों को तीस हजार की प्रोत्साहन राशि देने का मामला]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---no-one-could-find-the-bull-so-the-condition-had-to-be-removed/article-123914"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(1)47.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।  सरकार की ओर से बैलों से खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लघु एवं सीमांत कृषकों को प्रोत्साहन राशि के रूप में प्रतिवर्ष 30 हजार रुपए देने की योजना शुरू की गई है। इसके लिए पोर्टल पर आवेदन करना होगा। इस योजना की घोषणा को पांच माह हो चुके हैं, लेकिन अभी कोटा जिले में एक भी आवेदन नहीं आया है। इसका कारण योजना की एक शर्त है जो किसानों की राहत में बाधा बन रही थी। इस योजना का लाभ लेने के लिए किसान को बैलों का बीमा करवाना होगा। जबकि कोई भी बीमा कम्पनी दुधारू पशु के अलावा अन्य पशुओं का बीमा नहीं करती है। ऐसे में कोटा जिले सहित पूरे प्रदेश में योजना का दम टूट रहा था। अब सरकार ने किसानों की परेशानी का समाधान करते हुए बैलों का बीमा करवाने की शर्त को हटा दिया है। अब पशु बीमा पॉलिसी के बिना भी किसान इस योजना में आवेदन कर सकेंगे।</p>
<p><strong>गांवों में घट रही बैलों की संख्या</strong><br />किसानों के अनुसार पहले हर गांव में बैलों की दर्जनों जोड़ियां देखने को मिलती थी। मगर अब समय बदल चुका है, और अधिकतर किसानों ने बैलों को त्याग दिया है। सिंचाई के साधनों से वंचित किसानों ने भी आधुनिक उपकरणों का सहारा लेकर बैलों की उपयोगिता को भुला दिया है। यही कारण है कि पशुधन की संख्या में तेजी से गिरावट आई है। पहले कई स्थानों पर बड़े पशु मेले आयोजित किए जाते थे। इन मेलों में लाखों रुपए के बैल खरीदे और बेचे जाते थे, लेकिन जब से खेतों में बैलों का उपयोग कम हुआ, पशु मेलों का अस्तित्व भी संकट में आ गया। ऐसे में सरकार ने बैलों से खेती को बढ़ावा देने के लिए यह योजना शुरू की है।</p>
<p><strong>इस शर्त के लिए काट रहे थे चक्कर</strong><br />राज्य सरकार की ओर से बैलों के सरंक्षण के लिए मुख्यमंत्री बजट घोषणा में नई योजना की घोषणा की गई थी। इसके तहत लघु एवं सीमांत कृषकों को बैलों से खेती किए जाने पर प्रोत्साहन राशि के रूप में 30 हजार रुपए प्रतिवर्ष उपलब्ध कराने का निर्णय किया गया था। यह योजना पूरे प्रदेश के लिए लागू की गई थी और इसके लिए कृषि आयुक्तालय की ओर से सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को दिशा-निर्देश भी जारी किए गए थे। बीमा योजना का लाभ लेने के लिए कई शर्ते रखी गई थी। इनमें बैलों की बीमा पॉलिसी वाली शर्त भी थी, लेकिन बैलों का बीमा कौन और कैसे करेगा इसका किसी के पास कोई जवाब नहीं था। इस कारण कारण काश्तकार कृषि विभाग और पशुपालन विभाग के चक्कर काट रहे थे। बीमा पॉलिसी की शर्त के कारण  कोटा जिले में अभी तक इस योजना के लिए एक भी आवेदन नहीं आया है।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />जिले के किसानों को इस योजना का लाभ नहीं मिलने के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में 28 मई को गले की फांस बना बैलों का बीमा, एक भी नहीं आया आवेदन शीर्षक से प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि इस योजना का लाभ लेने के लिए काश्तकारों को ई-मित्र पर जाकर अथवा स्वयं के स्तर पर राजकिसान साथी पोर्टल पर जनाधार के माध्यम से आवेदन करना होगा। इसमें पशु बीमा पॉलिसी एवं स्वास्थ्य प्रमाण पत्र भी अपलोड करना आवश्यक होगा, लेकिन इसमें बैंलों का बीमा कौनसी एजेंसी करेगी इसका कोई भी उल्लेख नहीं है। प्राइवेट एजेंसी पशुओं का बीमा करती है, लेकिन वह सिर्फ दुधारू पशुओं का बीमा करती है। एजेसियां भी बैलों का बीमा करने से मना कर रही है। इसके चलते किसानों में असमंजस की स्थिति बन गई है। किसान कभी पशुपालन विभाग तो कभी कृषि विभाग के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन उन्हें कहीं से भी संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है।</p>
<p>पशु बीमा पॉलिसी की शर्त के कारण किसानों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा था। इसके लिए किसान सरकारी विभागों में चक्कर लगा रहे थे। अब सरकार की ओर पशु बीमा पॉलिसी  की शर्त को हटवाने से किसानों का इसक प्रति रूझान बढ़ेगा।<br /><strong>- जगदीश कुमार, किसान नेता</strong></p>
<p>सरकार की ओर से बैलों से खेती को प्रोत्साहन देने के लिए योजना में 30 हजार रुपए प्रतिवर्ष दिए जाएंगे। इसमें बैलों का बीमा कराने में परेशानी की बात सामने आई थी। अब इस शर्त को हटा दिया गया है। केवल स्वास्थ्य प्रमाण पत्र देकर भी योजना का लाभ लिया जा सकता है।<br /><strong>-अतिश कुमार शर्मा, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग विभाग</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Aug 2025 16:11:59 +0530</pubDate>
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                <title>शहर में सांडों का उत्पात, लड़ते हुए बाइक सवार पर चढ़े</title>
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                        <![CDATA[पूर्व में भी सांड कई लोगों को घायल कर चुके हैं।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/bulls-creating-havoc-in-the-city--climbed-over-bike-riders-while-fighting/article-112755"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer-(4)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर की सड़कों पर लावारिस मवेशियों का जमघट तो लगा हुआ ही है। साथ ही सांडों का आतंक व उत्पात भी इतना अधिक है कि वे आए दिन लोगों को घायल कर रहे है। गुरुवार को भी सांड  लड़ते हुए आए और बाइक सवार पर चढ़ गए। जिससे वे घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि  गुरुवार  सुबह केशवपुरा में पंचमुखी हनुमान मंदिर  पर महिलाएं पूजन कर रही थी। उसी दौरान वहां 3 से 4 सांड आपस में लड़ते हुए आए। जैसे ही वहां से बाइक सवार गुजरा तो सांड ने उनके टक्कर मारी  जिससे वह नीचे गिर गया। उसके पीछे आ रहा दूसरा  बाइक सवार भी उससे टकराकर नीचे गिर गया। इसके बाद वे सांड उन बाइक सवार के ऊपर से होकर निकल  गए। जिससे वे बुरी तरह से चोटिल हो गए।  यह देख वहां मौजूद लोग दौड़े और सांडों को वहां से भगाया। साथ ही दोनों ने बाइक सवारों को उठाकर प्राथमिक उपचार के लिए भेजा। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस क्षेत्र में कई सांड हैं जो आए दिन उत्पात मचाते रहते हैं। यह पहला मामला नहीं है। इस तरह से पूर्व में भी सांड कई लोगों को घायल कर चुके हैं।  </p>
<p><strong>पूनम कॉलोनी में भी किया था घायल</strong><br />शहर में सांडों का आतंक किसी एक एरिया में ही नहीं है। ये शहर में सभी क्षेत्रों में दिनभर घूमते हुए देखे जा सकते है। मेन रोड पर ही आपस में लड़ते  और दौड़ते रहते हैं। जिससे अचानक सामने से आ रहे बाइक सवार इनसे टकराकर घायल हो रहे हैं। गत दिनों रेलवे कॉलोनी इलाके की पूनम कॉलोनी में भी दो सांड ने एक बुजुर्ग महिला को उठाकर पटक दिया था। जिससे वे चोटिल हो गई थी। </p>
<p><strong>नियमित पकड़ रहे, गौशाला में 15 सौ सांड</strong><br />नगर निगम गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि शहर में सांडों की संख्या काफी अधिक है। निगम की ओर से इन्हें पकड़ा जा रहा है। जहां से शिकायत आती है वहां प्राथमिकता से टीम व एम्बूलेंस भेजकर पकड़ा जा रहा है। गौशाला में वर्तमान में करीब 3 हजार गौवंश हैं। जिनमें से आधे करीब 15 सौ तो सांड व बैल ही हैं। </p>
<p><strong>निगम की जिम्मेदारी पकड़े गाय व सांड</strong><br />संतोषी नगर निवासी अरुणा शर्मा ने बताया कि घर से बाहर निकलते ही गायों व सांड का झुंड नजर आया है। जिस तरह से शहर में आए दिन गाय व सांड द्वारा लोगों पर हमले कर घायल करने की सूचनाएं मिल रही हैं उससे तो इन्हें देखकर ही डर लगने लगता है न जाने कब हमला कर दे। निगम की जिम्मेदारी हैं कि वे इन्हें पकड़े। </p>
<p><strong>सब्जीमंडी में जाना हुआ मुश्किल:</strong><br />केशवपुरा सेक्टर 7 निवासी कमलेश वर्मा का कहना है कि गली मौहल्लों में भी इतनी अधिक गाय व सांड हैं कि  वे बच्चों और महिलाओं को निशाना बना रहे है। सब्जीमंडी में तो गाय कम और सांड अषिक होने से वहां जाने में डर लगने लगा है। ये खाने की चीज देखकर महिलाओं के हाथ से थैली छीन लेते हैं। नहीं देने पर हमला कर कर रहे है। निगम अधिकारियों को चाहिए कि वे नियमित रूप से इन्हें पकड़े तभी तो शहर कैटल फ्री बनेगा। अभी तो सिर्फ नाम का कैटल फ्री है। </p>
<p>शहर में कचरा पॉइंट व मेन रोड पर जहां खाने-पीने की सामग्री अधिक रहती है। गाय व सांड का वहां जमावड़ा लगा रहता है। निगम की ओर से समय-समय पर घेरे डालकर गाय और सांड दोनों को पकड़ा जा रहा है। निगम की गौशाला में जगह कम होने के बाद भी लगातार पकड़ रहे हैं। यदि लोग सड़क पर खाद्य पदार्थ डालना बंद कर दें तो गाय व सांड नजर नहीं आएंगे। घास डालकर धर्म करना है तो गौशालाओं या मंदिरों में बनी गौशालाओं में कर सकते हैं। <br /><strong>- राजीव अग्रवाल, महापौर नगर निगम कोटा दक्षिण </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 May 2025 15:59:58 +0530</pubDate>
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                <title>सड़कों पर सांड मचा रहे उधम, गौशाला में जगह नहीं</title>
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                        <![CDATA[कोटा उत्तर आयुक्त ने सभागीय आयुक्त व कलक्टर को लिखा पत्र।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/bulls-are-creating-a-ruckus-on-the-roads--there-is-no-space-in-the-cowshed/article-84052"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/121.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। बरसात का सीजन शुरू होने के साथ ही शहर में मुख्य मार्गों पर जगह-जगह लावारिस पशुओं का जमघट लगा हुआ है। जबकि निगम की गौशालाओं में क्षमता से अधिक गौवंश होने से उन्हें रखने की जगह ही नहीं है। ऐसे में नगर निगम कोटा उत्तर के आयुक्त ने संभागीय आयुक्त व जिला कलक्टर को पत्र लिखकर लावारिस पशुओं को निजी गौशालाओं में रखने के लिए पाबंद करने को कहा है। शहर में वैसे ही सड़कों पर लावारिस मवेशियों का जमघट लगा रहता है। लेकिन बरसात होने पर यह संख्या अधिक दिखने लगी है। लेकिन हालत यह है कि नगर निगम की ओर से घेरा डालकर लावारिस पशुओं को पकड़ना लम्बे समय से बंद किया हुआ है। जिससे यह संख्या अधिक होती जा रही है। </p>
<p><strong>गौशाला विस्तार के लिए जमीन का पत्र केडीए को</strong><br />आयुक्त ने पत्र में लिखा कि गौशाला विस्तार के लिए नवीन भूमि आवंटन का पत्र नगर निगम कोटा दक्षिण द्वारा पूर्व में ही नगर विकास न्यास के सचिव को लिखा जा चुका है।  गौरतलब है कि गौशाला विस्तार के लिए उसके पास ही करीब 25 बीघा भूमि आवंटित करने की डिमांड की जा रही है। </p>
<p><strong>अधिक गौवंश होने से मौत का खतरा</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण की गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह का कहना है कि गौशाला में वर्तमान में करीब 25 सौ और कायन हाउस में 300 से अधिक गौवंश है। यह पहले से ही क्षमता से अधिक है। ऐसे में बरसात के समय में यदि गौशाला व कायन हाउस में अधिक मवेशी रखे जाएंगे तो ये एक दूसरे से बचने के लिए भागते हैं। उस दौरान उनके फिसलकर गिरने का खतरा रहता है। जिससे उनके पैर में चोट लगने व बैठक लेने के बाद उनकी मौत होना निश्चित है। पूर्व में भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं। सिंह ने बताया कि शिकायतों पर सांड तो रोजाना पकड़े जा रहे हैं। निगम अधिकारियों को कई बार कहने के बाद भी पहले से कोई व्यवस्था नहीं की गई। 15 बीघा जमीन पर निर्माण कार्य का टेंडर तक नहीं किया गया। जिससे 15 सौ गौवंश को रखा जा सकता था। 25 बीघा जमीन मिले तो गौवंश को रखा जा सकता है। </p>
<p><strong>आयुक्त ने लिखा निजी गौशालाओं को करें पाबंद</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर के आयुक्त अनुराग भार्गव ने दो दिन पहले संभागीय आयुक्त व जिला कलक्टर को पत्र लिखा है। जिसमें बताया कि नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण के लिए किशोरपुरा स्थित कायन हाउस व बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला है। जिनमें लावारिस गौवंश को निरूद्ध कर रखा जा रहा है। कायन हाउस व गौशाला का संचालन व रखरखाव कोटा दक्षिण निगम द्वारा किया जा रहा है। आयुक्त ने पत्र में लिखा कि नगर निगम कोटा दक्षिण की गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह द्वारा गौशाला में क्षमता से अधिक गौवंश होने का हवाला देते हुए सड़कों से गौवंश नहीं पकड़ने दिया जा रहा। ऐसी स्थिति में कोटा जिले की जिन निजी गौशालाअं के संचालन व रखरखाव के लिए सरकार द्वारा अनुदान राशि दी जाती है। उन गौशालाअं में निगम द्वारा अवाप्त गौवंश को छोड़ा जा सकता है। इसके लिए पशु पालन विभाग के संयुक्त निदेशक को पाबंद किया जाए कि निगम द्वारा पकड़े गए गौवंश को निजी गौशालाओं में रखा जाए। </p>
<p><strong>निजी गौशालाओं को सौंपे 1100 गौवंश</strong><br />समिति अध्यक्ष सिंह ने बताया कि गौशाला में पहले काफी अधिक संख्या में गौवंश थे। पूर्व जिला कलक्टर के आदेश से करीेब 11 सौ मवेशियों को जिले की 11 निजी गौशालाओं में शिफ्ट किया गया था। </p>
<p>निगम की गौशाला में पहले से ही क्षमता से अधिक गौवंश है। उसके बाद भी लगातार सडणकों से मवेशी पकड़ रहे हैं। शनिवार को ही शहर से 70 मवेशी पकड़े हैं। कोटा उत्तर आयुक्त का कहना सही है कि गौशाला में जगह की कमी है। निजी गौशालाओं में लावारिस गौवंश को रखा जा सकता है। शीघ्र ही प्रयास करेंगे कि सड़कों से मवेशियों को पकड़कर गौशाला में या अन्य स्थानों पर रखा जाए। <br /><strong>- महावीर सिंह सिसोदिया, उपायुक्त नगर निगम कोटा दक्षिण </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Mon, 08 Jul 2024 17:02:10 +0530</pubDate>
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