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                <title>Javelin Throw - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>National Inter-State Senior Athletics Championship: अन्नू रानी ने भाला फेंक में जीता स्वर्ण पदक</title>
                                    <description><![CDATA[गौरतलब है कि एथलीट या तो प्रवेश मानक को पूरा करके या रैंकिंग के माध्यम से अपने देश के लिए पेरिस 2024 कोटा प्राप्त कर सकते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/annu-rani-won-gold-medal-in-javelin-throw/article-83170"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/annu-rani.png" alt=""></a><br /><p>पंचकुला। एशियाई खेलों की चैंपियन अन्नू रानी ने नेशनल इंटर-स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2024 में यहां महिलाओं की भाला फेंक स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। </p>
<p>राष्ट्रमंडल खेलों की कांस्य पदक विजेता अन्नू रानी ने पोडियम पर शीर्ष स्थान हासिल करने के लिए अपने तीसरे प्रयास में 57.70 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया। 31 वर्षीय खिलाड़ी के नाम 63.82 मीटर का राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी दर्ज है, जिसे उन्होंने साल 2022 में जमशेदपुर में अपने नाम किया था।</p>
<p>इंटर-स्टेट मीट 30 जून को विंडो बंद होने से पहले भारतीय एथलीटों के लिए पेरिस 2024 ओलंपिक के लिए अंतिम क्वालीफाइंग इवेंट है। वहीं, अन्नू रानी क्वालीफाइंग पीरियड में 64 मीटर की महिलाओं की भाला फेंक में ओलंपिक क्वालिफिकेशन मार्क हासिल करने में विफल रही हैं।</p>
<p>हालांकि, अन्नू रोड टू पेरिस रैंकिंग में 19वें स्थान पर हैं। रोड ऑफ पेरिस रैंकिंग में भाला फेंक में शीर्ष 32 योग्य एथलीट ओलंपिक कोटा प्राप्त करेंगे जब क्वलिफिकेशन विंडो और रैंकिंग अवधि 30 जून को समाप्त होगी।</p>
<p>गौरतलब है कि एथलीट या तो प्रवेश मानक को पूरा करके या रैंकिंग के माध्यम से अपने देश के लिए पेरिस 2024 कोटा प्राप्त कर सकते हैं।</p>
<p>महिलाओं की 400 मीटर सेमीफाइनल में 50.92 सेकेंड के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय के साथ पेरिस 2024 ओलंपिक प्रवेश मानक को पूरा करने वाली किरण पहल ने फाइनल मुकाबले में स्वर्ण पदक जीतने के लिए अपने प्रदर्शन की बराबरी की।</p>
<p>उनके बाद पोडियम पर दीपांशी (52.01 सेकेंड) और ज्योतिका श्री दांडी (52.11 सेकंड) रहीं। भारतीय एथलेटिक्स फेडरेशन ने महिलाओं की 400 मीटर में विथ्या रामराज, प्राची, एमआर पूवामा, रूपल और ऐश्वर्या मिश्रा के लिए पांच अलग-अलग ट्रायल आयोजित किए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Jun 2024 16:40:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>Asian Para Games: भाला फेंक में सुमित अंतिल ने गोल्ड, पुष्पेंद्र सिंह ने जीता कांस्य पदक </title>
                                    <description><![CDATA[चीन में चल रहे चौथे एशियाई पैरा खेलों में भारत के सुमित अंतिल ने भाला फेंक में स्वर्ण, पुष्पेंद्र सिंह ने इस स्पर्धा में कांस्य पदक तथा नारायण ने पुरुषों की 200 मीटर टी35 स्पर्धा में कांस्य तथा श्रेयांश त्रिवेदी ने टी-37 200 मीटर स्पर्धा में कांस्य पदक जीते है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/asian-para-games-sumit-antil-won-gold-in-javelin-throw/article-60436"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/asian-para-games.png" alt=""></a><br /><p>हांगझोउ। चीन में चल रहे चौथे एशियाई पैरा खेलों में भारत के सुमित अंतिल ने भाला फेंक में स्वर्ण, पुष्पेंद्र सिंह ने इस स्पर्धा में कांस्य पदक तथा नारायण ने पुरुषों की 200 मीटर टी35 स्पर्धा में कांस्य तथा श्रेयांश त्रिवेदी ने टी-37 200 मीटर स्पर्धा में कांस्य पदक जीते है।</p>
<p>आज यहां हुए मुकाबले में समुति अंतिल ने पैरा भाला फेंक असाधारण उपलब्धि हासिल करते हुए एफ 64 स्पर्धा में 73.29 मीटर भाला फेंक कर स्वर्ण पदक जीता।</p>
<p>इसी स्पर्धा में पुष्पेंद्र सिंह ने पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा में 62.06 मीटर के भाला फेंक कर कांस्य पदक जीता।</p>
<p>एथलीट सुमित ने भाला फेंक ने 73.29 मीटर के उल्लेखनीय थ्रो के साथ नए विश्व, पैरा एशियाई और खेलों के रिकॉर्ड स्थापित करते हुए स्वर्ण पदक जीता।</p>
<p>एक अन्य मुकाबले में नारायण ने एशियाई पैरा गेम्स 2022 में पुरुषों की 200 मीटर टी35 स्पर्धा में प्रभावशाली 29.83 सेकंड का समय लेते हुए भारत के लिए कांस्य पदक जीता।</p>
<p>   वहीं श्रेयांश त्रिवेदी ने टी-37 200 मीटर स्पर्धा में 25.26 सेकंड के समय के साथ कांस्य पदक जीता।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Oct 2023 13:06:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>खेलों के महानायक बन नीरज ने लिखा स्वर्णिम इतिहास </title>
                                    <description><![CDATA[नीरज की एक खिलाड़ी होने की यात्रा अनेक संघर्षों, झंझावातों एवं चुनौतियों से होकर गुजरी है। चंद बरस पहले वह बढ़ते वजन से परेशान एक युवा थे। 13 साल की उम्र में उनका वजन 80 किलोग्राम हो गया था जिसकी वजह से उनकी उम्र के दूसरे बच्चे उन्हें चिढ़ाते थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/neeraj-wrote-a-golden-history-by-becoming-a-sports-legend/article-55914"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/neeraj-chopra1.png" alt=""></a><br /><p>देश को लगातार मिल रही खुशी भरी खबरों एवं कीर्तिमानों के बीच एक और कीर्तिमान नीरज चोपड़ा ने जड़ दिया। चार दशक में पहली बार विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में किसी भारतीय का देश की झोली में एक दुर्लभ स्वर्ण पदक डालना वाकई नया इतिहास रचने से कम नहीं है। नीरज चोपड़ा का जेवलिन थ्रो प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतना सूखे में बरसात की बूंदों के समान ही माना जाएगा। इस रोशनी के एक टुकड़े ने देशवासियों को प्रसन्नता का प्रकाश दे दिया है, संदेश दिया है कि देश का एक भी व्यक्ति अगर दृढ़ संकल्प से आगे बढ़ने की ठान ले तो वह शिखर पर पहुंच सकता है। विश्व को बौना बना सकता है। पूरे देश के निवासियों का सिर ऊंचा कर सकता है। इस ऐतिहासिक एवं यादगार उपलब्धि की खबर जब अखबारों में छपी तो सबको लगा कि शब्द उन पृष्ठों से बाहर निकलकर नाच रहे हैं।<br /><br />नीरज की एक खिलाड़ी होने की यात्रा अनेक संघर्षों, झंझावातों एवं चुनौतियों से होकर गुजरी है। चंद बरस पहले वह बढ़ते वजन से परेशान एक युवा थे। 13 साल की उम्र में उनका वजन 80 किलोग्राम हो गया था जिसकी वजह से उनकी उम्र के दूसरे बच्चे उन्हें चिढ़ाते थे। वहां से शुरू करके नीरज ने न सिर्फ  अपने शरीर को साधा बल्कि अपने मन को अनुशासित कर इस तरह से केंद्रित किया कि लगातार आगे बढ़ते रहे, कीर्तिमान गढ़ते रहे। लेकिन उनके पांव जमीन पर हैं और तभी वह भाला फेंकते हैं तो दूर तक जाता है और एक स्वर्णित इतिहास रचता है। तभी अब तक कोई भी ऐथलीट देश को जो गौरव नहीं दिला पाया था, वह नीरज ने दिलाया है। लेकिन बात सिर्फ इस एक गोल्ड की नहीं है। उनकी इस उपलब्धि के साथ ऐसी कई बातें जुड़ी हैं जो उन्हें खास बनाती हैं। उनको खास बनाने में जहां उनकी लगन, परिश्रम, निष्ठा एवं खेल भावना रही, वही साल 2018 में एशियाई खेल और फिर कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड, 2020 में तोक्यो ओलिंपिक्स में गोल्ड, 2022 में वर्ल्ड चैैंपियनशिप में सिल्वर, 2022 में ही डायमंड लीग में गोल्ड और 2023 में वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड लाने का उनका करिश्मा तो बहुत कुछ कहता ही है, सबसे बड़ी बात यह है कि इस दौरान वह अपने प्रदर्शन में लगातार निखार लाते रहे। उन्होंने भारतीय खेलों को भी दुनिया में शीर्ष पर पहुंचाया है। इस उपलब्धि भरी सुहानी फिजां में सबसे अहम सवाल यह है कि दुनिया में सबसे अधिक आबादी वाला देश खेलों में वह मुकाम हासिल क्यों नहीं कर पाया, जिसका वह हकदार है? क्या हमारे यहां खेल का माहौल नहीं है या फिर सुविधाओं के अभाव में खिलाड़ी आगे नहीं बढ़ पाते। या खेल भी राजनीति के शिकार है? ये सवाल इसलिए उठते हैं क्योंकि विश्व  एथलेटिक्स चैंपियनशिप में अब तक पदक पाने वाले देशों की सूची में भारत बहुत पीछे है। महज पांच करोड़ की आबादी वाला देश केन्या 65 स्वर्ण पदक के साथ दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। वहीं एक करोड़ की आबादी वाला देश क्यूबा विश्व चैंपियनशिप में 22 स्वर्ण पदक अपनी झोली में डाल चुका है। ओलम्पिक खेलों की बात की जाए तो वहां भी भारत का प्रदर्शन निराशाजनक ही रहा है। <br /><br />ओलम्पिक खेलों के 127 साल के इतिहास में हॉकी के अलावा हमें अब तक दो स्वर्ण पदक ही मिले हैं। इनमें एक नीरज चोपड़ा व दूसरा अभिनव बिन्द्रा के नाम ही है। ऐसा नहीं है कि आजादी के बाद देश ने विकास की रफ्तार नहीं पकड़ी हो। हर क्षेत्र में भारत ने प्रगति की नई ऊंचाइयों को छुआ है। विज्ञान हो या अंतरिक्ष, देश ने दुनिया में अलग पहचान बनाई है। इस समय हम दुनिया की पांचवीं आर्थिक महाशक्ति बन गए हैं। छह दिन पहले ही चांद पर तिरंगा लहराया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कारण विश्व में भारत की बात को महत्व दिया जाता है। इन तमाम उपलब्धियों के बीच सवाल यही उठता है कि हम खेलों में पीछे क्यों हैं? क्या इसके लिए खेल संघ जिम्मेदार हैं? खेल संघों पर वर्षों से कब्जा जमाए बैठे राजनेता और नौकरशाह खेल की विकास यात्रा में बाधक तो नहीं बन रहे?<br /><br />ऐसे समय जब चांद के दक्षिण ध्रुव के पास चंद्रयान उतार कर भारतीय वैज्ञानिक स्पेस एक्सप्लोरेशन के क्षेत्र में अपना झंडा बुलंद कर चुके हैं और शतरंज में प्रग्नानंदा जैसे यंग टैलंट नई उम्मीदें दिखा रहे हैं, नीरज चोपड़ा की यह उपलब्धि न केवल देशवासियों के मनोबल को और ऊंचा करती है बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी निरंतर बेहतर करने का विश्वास और प्रेरणा देती है और आजादी के अमृतकाल को अमृतमय करने का हौंसला देती है। नीरज ने 88.17 मीटर की दूरी पर भाला फेंक कर कीर्तिमान स्थापित किया और साबित कर दिया कि भारत की मिट्टी में जन्में खेलों को यदि खुद भारतवासी ही इज्जत की नजर से देखें तो यह देश कमाल कर सकता है। यदि सच पूछा जाए तो नीरज चोपड़ा भारतीय मूल के खेलों के ‘महानायक’ बन चुके हैं। उनसे पहले यह रूतबा कुश्ती के पहलवान गुलाम मुहम्मद बख्श उर्फ  ‘गामा’ को ही प्राप्त हुआ है या ओलम्पिक खेलों में शामिल हॉकी के खिलाड़ी मेजर ध्यान चन्द के नाम रहा है। नीरज चोपड़ा का योगदान इसलिए बड़ा एवं महान है कि उन्होंने ग्रामीण एवं देशी खेल को विश्व प्रतिष्ठा प्रदान की है।                      </p>
<p>-ललित गर्ग<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 31 Aug 2023 10:01:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>ना मैदान ना संसाधन, कैसे भाला फेंके  बेटियां</title>
                                    <description><![CDATA[ कोटा की लड़कियां नयापुरा स्थित स्टेडियम के ही एक कोने में अभ्यास करती हैं। प्रशिक्षक बताते हैं कि अगर यहां की लड़कियों को पर्याप्त संसाधन मिले तो क्षेत्र की लड़कियां भी भाला फैंकने में महारत हांसिल कर सकती हैं क्योंकि इन लड़कियों में जोश और जुनून तो है लेकिन संसाधनों के अभाव में वो पीछे हट जाती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/no-ground-no-resources--how-to-throw-javelin-daughters/article-44657"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/99.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा की कई बेटियों ने कई खेलों में ना केवल राष्ट्रीय बल्कि अन्तरराष्टÑीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई है, कोटा का नाम रोशन किया है लेकिन पर्याप्त मैदान के अभाव में यहां की बेटियां भाला फैंकने में कोई कमाल नहीं दिखा पाई है। यहीं कारण है कि कोटा की लड़कियों में भाला फैंकने के प्रचलन से लेकर अब तक केवल एक लड़की नेशनल लेवल तक पहुंच पाई है। यहां तक कि स्टेट लेवल पर भी केवल 5 या 6 लड़कियां ही अपना प्रदर्शन कर सकी हैं। यहां की लड़कियों को भाला फैंकने का गुर सिखाने वालों का कहना हैं कि यहां की कुछ लड़कियां भले ही इस खेल में अपनी रूचि दिखा रही हैं लेकिन यहां अभ्यास करने के लिए कोई पर्याप्त मैदान ही नहीं है, तो लड़कियां अभ्यास ही कहा करें। जिला खेल एसोसिएशन राज्य सरकार को पत्र लिखते -लिखते ही थक गई है लेकिन राज्य सरकार दूसरी सुविधाएं तो दूर की बात भाला फैंकने का अभ्यास करने के लिए मैदान तक उपलब्ध नहीं करवा पाई है। प्रशिक्षकों का कहना हैं कि एक तो सरकार की ओर से कोई मैदान उपलब्ध नहीं है। दूसरा इस खेल में सामान्य वर्ग की ही लड़कियां रूचि लेती है लेकिन भालों की कीमत ही इतनी होती है कि उनके परिजन पीछे हट जाते हैं। साधारण भाले 1500 से 2000 हजार तक के आते हैं जो एक या दो बार के अभ्यास में ही टूट जाते हैं। जबकि ढंग के भाले 10000 से 20000 तक के आते हैं जो लाना सबके वश की बात नहीं है। कोटा की लड़कियां नयापुरा स्थित स्टेडियम के ही एक कोने में अभ्यास करती हैं। प्रशिक्षक बताते हैं कि अगर यहां की लड़कियों को पर्याप्त संसाधन मिले तो क्षेत्र की लड़कियां भी भाला फैंकने में महारत हांसिल कर सकती हैं क्योंकि इन लड़कियों में जोश और जुनून तो है लेकिन संसाधनों के अभाव में वो पीछे हट जाती है। हां, इनके माता-पिता जरुर कुछ हद तक इन लड़कियों को इस खेल में आगे बढ़ते देखना चाहते हैं लेकिन उनकी भी एक सीमा है। </p>
<p><strong>इनका कहना हैं</strong><br />लड़कियां मेहनत करने में कोई कसर नहीं छोड़ती है लेकिन किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त संसाधनों का होना आवश्यक है और कुछ नहीं तो कम से कम मैदान तो होना ही चाहिए। <br /><strong>- श्याम बिहारी नाहर, कोच। </strong></p>
<p>यहां की लड़कियों में भाला फैंकने को लेकर काफी उत्सुकता है लेकिन मैदान के अभाव में ये लड़कियां अभ्यास ही नहीं कर पाती है। माता-पिता कुछ हद तक इनको सपोर्ट करते हैं। श्रीनाथपुरम में राष्टÑीय स्तर का स्टेडियम बना है अब उसके संचालन होने के बाद ही पता लगेगा कि वहां की व्यवस्था कैसी रहती है। <br /><strong>- राकेश कुमार, सचिव, जिला एथेलेटिक्स संघ, कोटा।</strong></p>
<p>बीते एक साल से अभ्यास कर रही हंू। रोजाना करीब 5 स 6 घंटे का अभ्यास करती हंू। नेशनल लेवल पर खेल चुकी हंू। परिजनों का पूरा सहयोग मिलता है। अभ्यास का पढ़ाई पर थोड़ा फर्क जरुर पड़ता है लेकिन तालमेल बिठा लेती हंू। भाला फैंकने में अन्तरराष्टÑीय स्तर पर खेलना चाहती हंू। <br /><strong>- महिमा चौधरी, खिलाड़ी। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 May 2023 16:23:53 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अपने लक्ष्य की ओर भाला फेंक रहे खिलाड़ी</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा में भाला फेंक के खिलाड़ी सुविधाओं के अभाव में तैयार हो रहे है और आगे बढ़ रहे है। यह खिलाड़ी नीरज चौपड़ा को अपना रोल मॉडल मानते है। खिलाड़ी उन्ही की तरह भाला फेंकने की तैयारी कर रहे है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/kota-players-throwing-javelin-towards-their-target/article-21348"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/46546545.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। इनके पास न तो जेवलिन है और न ही ढ़ग के जूते। इसके बावजूद भी यह खिलाड़ी 40 से 50 मीटर तक भाला फेंक देते है। अपने इसी जज्बे और कड़ी मेहनत के कारण कोटा के भाला फेंकने वाले नेशनल प्रतियोगिता में जा पहुचें और गोल्ड मेडल में भी जीत लिए। अब यही जुनूनी खिलाड़ी इंडिया के लिए खेलने की तैयारी में जुटे हुए है। ये खिलाड़ी रोजाना जेके पवेलियन अंतरराष्टÑीय खेल मैदान में रोजाना पसीना बहा रहे है। कोटा के यह खिलाड़ी नीरज चौपड़ा को अपना रोल मॉडल आर्दश मानते है। खिलाड़ियों ने नीरज की डीपी भी अपने फोन में लगा रखी है। इसके साथ ही इन खिलाड़ियों ने नीरज की अनेक फोटो से अपना घर सजाया हुआ है। यह खिलाड़ी उन्ही की तरह भाला फेंकने की तैयारी कर रहे है। </p>
<p><strong>सुविधाओं का अभाव,फिर भी तैयार हो रहे खिलाड़ी</strong><br />कोटा में भाला फेंक के खिलाड़ी सुविधाओं के अभाव में तैयार हो रहे है और आगे बढ़ रहे है। खिलाड़ियों के पास जेवलिन तक नहीं है। खिलाड़ियों का कहना है की कोटा में भाला फेंक खेल के लिए कोई मैदान भी नहीं है। खिलाड़ियों को मजबूरी में जेके पवेलियन खेल मैदान के एक कोने में इसका अभ्यास करना पड़ रहा है। इसके साथ ही खिलाड़ियों को किसी भी प्रकार की कोई सुविधा नहीं मिल रही। इसको लेकर खिलाड़ियों में निराशा देखने को मिलती है।</p>
<p><strong>भाला फेंक पसंदीदा खेल</strong><br />भाला फेंक कोटा के युवाओं का पसंंदीदा खेल बन रहा। खिलाड़ियों का कहना है की पहले भाला फेंक को कोई नहीं जानता था। लेकिन जब से नीरज चौपड़ा ने गोल्ड मेडल जीता है तब से युवाओं में इसको लेकर रुझान देखने को मिल रहा है। कोटा में भाला फेंक के करीब एक सौ से अधिक खिलाड़ी इसकी ट्रेनिग ले रहे है। इसके साथ ही इस खेल में कोटा की युवतियां भी आगे निकलकर आ रही है। भाला फेंक में कोटा के दलजीत सिंह ने 60 मिटर तक भाला फेंककर नेशनल लेवल पर अपनी पहचान बनाई है। इसके साथ ही भुवनेश कुमावत, राधे मीणा, शिवम भी नेशनल लेवल पर खेल चुके है। </p>
<p>कोटा के खिलाड़ियों को अगर दूसरे खेलों की तरह सुविधाएं मिले तो यह खिलाड़ी देश के लिए गोल्ड मेडल ला सकते है। पर विडबंना यह है की सुविधाएं तो बाद में लेकिन अभी खिलाड़ियों के पास अभ्यास करने के लिए मैदान तक नहीं है। ऐसे में इन खिलाड़ियों को दूसरे खेल के मैदानों में जाकर अभ्यास करना पड़ता है। सरकार को व खेल विभाग को इसकी ओर ध्यान देना चाहिए।         <br /><strong>-श्याम बिहारी नाहर, कोच</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Sep 2022 13:01:02 +0530</pubDate>
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                <title>पावो नुर्मी खेलों में नीरज ने बनाया नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड, जीता रजत पदक</title>
                                    <description><![CDATA[तुरकू। टोक्यो ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा ने मंगलवार को पावो नुर्मी खेलों में रजत पदक जीतते हुए जैवलीन थ्रो का नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित किया। नीरज ने 89.3 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ पिछले साल मार्च में आयोजित इंडियन ग्रां प्री में बनाया अपना 88.07 मीटर का रिकॉर्ड तोड़ा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/new-national-record-of-pavo-nurmi-games-neeraj-won-silver-medal/article-12321"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/neeraj-chopra.jpg" alt=""></a><br /><p>तुरकू। टोक्यो ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा ने मंगलवार को पावो नुर्मी खेलों में रजत पदक जीतते हुए जैवलीन थ्रो का नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित किया। नीरज ने 89.3 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ पिछले साल मार्च में आयोजित इंडियन ग्रां प्री में बनाया अपना 88.07 मीटर का रिकॉर्ड तोड़ा।  यह उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन होने के साथ-साथ इस वर्ष का अब तक का पांचवां सर्वश्रेष्ठ थ्रो है। फिनलैंड के ओलिवर हेलेंडर ने 89.83 मीटर के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता।</p>
<p>ग्रेनाडा के मौजूदा विश्व चैंपियन एंडरसन पीटर्स ने 86.60 मीटर के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया। पिछले साल अगस्त में हुए टोक्यो ओलंपिक के बाद नीरज पहली बार किसी प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे थे।  24 वर्षीय नीरज ने 86.92 मीटर के थ्रो के साथ शुरुआत की और दूसरे प्रयास में 89.30 मीटर की दूरी पर भाला फेंका, जो उनके ओलंपिक प्रदर्शन (87.58) से भी बेहतर था। नीरज अब तुरकू के बाद कुओरटाने खेलों में हिस्सा लेंगे, जिसके बाद वह डायमंड लीग के स्टॉकहोम लेग के लिए स्वीडन जाएंगे। पावो नुर्मी खेल विश्व एथलेटिक्स कॉन्टिनेंटल टूर का एक स्वर्ण आयोजन है। यह डायमंड लीग के बाहर सबसे बड़ी ट्रैक एंड फील्ड प्रतियोगिताओं में से एक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jun 2022 12:44:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>टोक्यो ओलंपिक: जेवलिन थ्रो के फाइनल में नीरज चोपड़ा, पहले प्रयास में फेंका 86.65 मीटर का थ्रो</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय भाला फेंक एथलीट नीरज चोपड़ा ने अपने टोक्यो ओलंपिक अभियान का शानदार आगाज किया है। उन्होंने बुधवार को क्वालीफिकेशन राउंड में अपने पहले प्रयास में 86.65 मीटर के थ्रो के साथ सीधे क्वालीफिकेशन से पुरुषों के भाला फेंक फाइनल के लिए क्वालीफाई किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/%E0%A4%9F%E0%A5%8B%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%8B-%E0%A4%93%E0%A4%B2%E0%A4%82%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%95--%E0%A4%9C%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%A8-%E0%A4%A5%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%8B-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AB%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%A8%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%B0%E0%A4%9C-%E0%A4%9A%E0%A5%8B%E0%A4%AA%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE--%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AB%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%BE-86-65-%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%9F%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A5%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%8B/article-1340"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-08/e768iftuuaqmjz6.jpg" alt=""></a><br /><p>टोक्यो। 2018 एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता भारतीय भाला फेंक एथलीट नीरज चोपड़ा ने अपने टोक्यो ओलंपिक अभियान का शानदार आगाज किया है। उन्होंने बुधवार को क्वालीफिकेशन राउंड में अपने पहले प्रयास में 86.65 मीटर के थ्रो के साथ सीधे क्वालीफिकेशन से पुरुषों के भाला फेंक फाइनल के लिए क्वालीफाई किया। उल्लेखनीय है कि फाइनल के लिए सीधे क्वालीफाई करने के लिए योग्यता चिन्ह 83.50 रखा गया।</p>
<p> </p>
<p><strong>शिवपाल सिंह फाइनल में पहुंचने में नाकाम</strong><br /> उधर शिवपाल सिंह क्वालीफिकेशन राउंड में निराशाजनक प्रदर्शन के कारण फाइनल के लिए क्वालीफाई करने में नाकाम रहे और इसके साथ ही उनका टोक्यो ओलंपिक का सफर भी खत्म हो गया। शिवपाल अपने तीनों प्रयासों में 80 के चिन्ह पर भी नहीं पहुंच पाए। उनका सर्वश्रेष्ठ थ्रो 76.40 का रहा, जो क्वालीफाई करने के लिए पर्याप्त साबित नहीं रहा। तीनों प्रयासों में क्रमश: 76.40, 74.80 और 74.81 मीटर के थ्रो के साथ वह ग्रुप बी में 12वें स्थान पर रहे, जबकि पाकिस्तान के भाला फेंक एथलीट अरशद नदीम सर्वश्रेष्ठ 85.16 मीटर के थ्रो के साथ ग्रुप टॉपर रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Aug 2021 16:14:44 +0530</pubDate>
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