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                <title>नामी इलाकों में समस्याओं का अंबार, सुविधाएं बदहाल</title>
                                    <description><![CDATA[वार्डवासियों की शिकायत-चुनाव के समय नजर आते हैं जनप्रतिनिधि, बाद में मिलना मुश्किल ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/heaps-of-problems-and-poor-amenities-in-prominent-areas/article-163138"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(4)23.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर की पहचान केवल कोचिंग और शिक्षा से ही नहीं, बल्कि यहां की विकसित और नामी कॉलोनियों से भी है। श्रीनाथपुरम, आरके पुरम, रंगबाड़ी, महावीर नगर और मेडिकल कॉलेज जैसे इलाके शहर के प्रमुख क्षेत्रों में गिने जाते हैं। लेकिन इन इलाकों में जब जमीनी हकीकत जानने के लिए पड़ताल की गई तो तस्वीर कुछ अलग नजर आई। वार्ड नंबर 50 से 54 तक किए गए दौरे में लोगों ने सफाई, सड़क, पानी, स्ट्रीट लाइट और सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं सामने रखीं। लोगों का कहना है कि शहर के प्रमुख इलाकों में यदि बुनियादी सुविधाओं को लेकर ही परेशानी रहे तो यह चिंता का विषय है।वार्डों का क्षेत्रफल बढ़ने के साथ अब जनप्रतिनिधियों और निगम प्रशासन की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि बड़े क्षेत्र में समस्याओं की नियमित निगरानी के लिए मजबूत व्यवस्था जरूरी है। केवल शिकायत आने के बाद कार्रवाई करने के बजाय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को नियमित निरीक्षण करना चाहिए।</p>
<p><strong>परिसीमन के बाद बड़े हुए वार्ड, लेकिन समस्याओं का दायरा भी बढ़ा</strong><br />-वार्ड नंबर 50 में श्रीनाथपुरम स्टेडियम, जीएडी क्वार्टर्स, श्रीनाथपुरम के विभिन्न सेक्टर, हजीरा बस्ती, श्याम नगर, अकेलगढ़ और आरटीयू क्षेत्र शामिल हैं।<br />-वार्ड नंबर 51 में आरके पुरम ए, बी व ई, बॉम्बे योजना, काला बादल, सामुदायिक भवन और संपूर्ण मेडिकल कॉलेज क्षेत्र आता है।<br />-वार्ड नंबर 52 में हरिओम नगर, कच्ची बस्ती, वीर सावरकर नगर, लुहार बस्ती, पीएचईडी कार्यालय और रंगबाड़ी योजना के सेक्टर 4 व 5 शामिल हैं।<br />-वार्ड नंबर 53 में महावीर नगर तृतीय के सेक्टर 2 से 9 तक का क्षेत्र आता है।<br />-वार्ड नंबर 54 में पारिजात सेक्टर 10 व 11, महावीर नगर द्वितीय का पूरा क्षेत्र तथा महावीर नगर तृतीय का सेक्टर 1 व 4 क्षेत्र शामिल है।</p>
<p><strong>सफाई सड़क व्यवस्था को लेकर सबसे ज्यादा नाराजगी</strong><br />पड़ताल के दौरान कई वार्डों में लोगों ने सफाई व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई। वार्डवासियों का कहना है कि कई जगह नियमित सफाई नहीं होने से गंदगी की समस्या बनी रहती है। खाली जगहों और बस्तियों के आसपास सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। लोगों ने निगम से नियमित मॉनिटरिंग की मांग की है। इन वार्डों में सड़कें भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं। कई जगह सड़कें क्षतिग्रस्त हैं तो कहीं लंबे समय से मरम्मत की जरूरत महसूस की जा रही है। लोगों का कहना है कि सड़कें केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि शहर के विकास की तस्वीर भी होती हैं। नामी कॉलोनियों में सड़कों की स्थिति बेहतर होनी चाहिए। सड़क खराब होने से वाहन चालकों के साथ पैदल चलने वालों को भी परेशानी होती है।</p>
<p><br /><strong>लाइट-पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी</strong><br />स्ट्रीट लाइट और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर भी अपनी समस्याएं बताईं। उनका कहना है कि रात के समय पर्याप्त रोशनी नहीं होने से सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है। वहीं पानी की व्यवस्था में कहीं भी समस्या हो तो उसका सीधा असर परिवारों पर पड़ता है। निगम और संबंधित विभागों को सुनिश्चित करना चाहिए कि पानी, सड़क, सफाई और रोशनी जैसी सुविधाएं नियमित और बेहतर तरीके से उपलब्ध हों।</p>
<p><strong>चुनाव के समय दिखते हैं, बाद में मिलना मुश्किल</strong><br />इन सभी समस्याओं के बीच वार्डवासियों की सबसे बड़ी नाराजगी जनप्रतिनिधियों की नियमित मौजूदगी को लेकर है। लोगों का कहना है कि चुनाव के समय नेता और जनप्रतिनिधि घर-घर पहुंचते हैं, लोगों की समस्याएं सुनते हैं और समाधान का भरोसा देते हैं। लेकिन चुनाव के बाद वही जनप्रतिनिधि नजर नहीं आते और उनसे मिलना मुश्किल हो जाता है।</p>
<p><strong>दिन में एक बार वार्ड का दौरा करें जनप्रतिनिधि</strong><br />जनप्रतिनिधियों को अपने वार्ड में नियमित रूप से दौरा करना चाहिए। कम से कम दिन में एक बार क्षेत्र का चक्कर लगाकर सफाई, सड़क, पानी, बिजली और सुरक्षा की स्थिति देखी जाए तो काफी समस्याएं मौके पर ही सामने आ सकती हैं।<br />लोगों का कहना है कि परिसीमन के बाद वार्ड भले ही बड़े हो गए हों, लेकिन जनता की उम्मीदें भी उतनी ही बड़ी हैं। श्रीनाथपुरम, आरके पुरम, रंगबाड़ी और महावीर नगर जैसे क्षेत्रों की पहचान कोटा शहर से जुड़ी है। ऐसे में इन इलाकों में अव्यवस्थाएं शहर की छवि पर भी असर डालती हैं।</p>
<p>भाजपा सरकार बनने के बाद से कांग्रेस पार्षदों वाले वार्डों के साथ विकास कार्यों में भेदभाव किया जा रहा है। जिन इलाकों में वास्तव में विकास की जरूरत है, वहां काम नहीं करवाए जा रहे, जबकि जहां पहले से सड़कें और पार्क बने हुए हैं, उन्हें बिना जरूरत तोड़कर दोबारा निर्माण कराया जा रहा है। बनी-बनाई सड़कों को उखाड़ने और हाल ही में विकसित पार्कों को फिर से तोड़कर बनाने से जनता के पैसों की बर्बादी हो रही है।<br /><strong>- शालिनी गौतम , पूर्व पार्षद</strong></p>
<p>मेरे कार्यकाल में मेने वार्ड में सड़क और सफाई के कार्यों को प्राथमिकता दी थी। बालाजी नगर में सड़क और नालियों का निर्माण करवाया गया। इसके अलावा वार्ड के अन्य क्षेत्रों में भी जरूरत के अनुसार सड़क और नाली निर्माण सहित कई विकास कार्य करवाए गए।<br /><strong>-रेखा यादव, पूर्व पार्षद</strong></p>
<p>वार्ड में सड़क, नाली और सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने सहित कई विकास कार्य करवाए गए। वार्डवासियों की ओर से समय-समय पर बताई गई समस्याओं का भी अपने स्तर पर समाधान करवाने का प्रयास किया गया।<br /><strong>-नंदकंवर हाड़ा , पूर्व पार्षद</strong></p>
<p>वार्ड में बिजली की समस्या बनी रहती है। वहीं पानी भी कम दबाव से आता है, जिससे लोगों को काफी परेशानी होती है। कई बार पार्षद को समस्या से अवगत करवाया, लेकिन अभी तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो सका है। अब लोगों को इंतजार है कि समस्या का समाधान कब होगा।<br /><strong>-हिमांशु शर्मा, वार्डवासी</strong></p>
<p>वार्ड में सफाई व्यवस्था बिगड़ी हुई है। हालांकि पूर्व पार्षद के कार्यकाल में कई विकास कार्य करवाए गए, लेकिन कार्यकाल समाप्त होने के बाद समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। सफाई व्यवस्था में सुधार के साथ अन्य मूलभूत समस्याओं के समाधान की भी जरूरत है।<br /><strong>-रतन कुमारी,वार्डवासी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 15:42:16 +0530</pubDate>
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                <title> नाम की रह गई समितियां, तीन अध्यक्ष ने पाला बदला</title>
                                    <description><![CDATA[दो साल में कई समितियों की तो एक बैठक तक नहीं हुई।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/committees-remained-only-in-name--three-chairmen-changed-sides/article-84277"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/photo-size-(1)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा में दो नगर निगम होने के बावजूद पिछली कांग्रेस सरकार में कोटा दक्षिण निगम में ही समितियों का गठन किया गया था। लेकिन वह समितियां भी सिर्फ नाम की ही रह गई हैं। समितियों को गठित हुए दो साल का समय हो गया लेकिन न तो उनकी बैठकें हो रही हैं और न ही जनता की समस्याओं का समाधान। कोटा में पहले एक नगर निगम और वार्डों की संख्या 65 थी। पिछली कांग्रेस सरकार में वार्डों का परिसीमन किया गया। दो नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण बना दिए। वार्डों की संख्या ढाई गुना बढ़ाकर 150 कर दी गई। दोनों निगमों में कांग्रेस के बोर्ड हैं। बोर्ड गठित होने के तीन माह के भीतर निगम स्तर पर समितियों का गठन नहीं किया जा सका। ऐसे में समितियों के गठन का  अधिकार रा’य सरकार के पाले में चला गया। सरकार की ओर से भी सिर्फ कोटा दक्षिण निगम में ही समितियों का गठन किया गया। जबकि कोटा उत्तर निगम में तो समितियां ही नहीं बनी।  राज्य सरकार ने जनता से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए समितियों का गठन किया था। जिससे पार्षद समितियों में जन समस्याओं को रख उनका समाधान करवा सकेें। समितियां बना तो दी लेकिन वह जनता के काम करना तो दूर बैठकें तक नहीं कर पा रही। </p>
<p><strong>22 समितियां, गिनती की बैठकें</strong><br />राज्य सरकार द्वारा जुलाई 2022 में कोटा दक्षिण निगम में 22 समितियों का गठन किया गया था। जिनमें से 21 समितियां तो शुद्ध कोटा दक्षिण की है। जबकि एक मेला समिति दोनों निगमों की संयुक्त बनाई गई है। हालत यह है कि समितियों का गठन हुए दो साल का समय हो गया। अधिकतर समितियों की तो दो-दो बैठकें तक नहीं हुई। कई समितियों की परिचयात्मक बैठक तक नहीं हुई। जिन समितियों की बैठकें हुई भी तो वे नाम मात्र की होकर रह गई। उन समितियों की बैठकों में जो निर्णय हुए उनकी पालना हुई या नहीं यह समिति के अध्यक्षों व सदस्यों को ही पता नहीं है। </p>
<p><strong>इन समितियों का किया था गठन</strong><br />राज्य सरकार ने नगर निगम कोटा दक्षिण में जिन समितियों का गठन किया था। उनमें से हर समिति में एक पार्षद को उसका अध्यक्ष और शेष 9 पार्षदों को समिति में सदस्य मनोनीत किया गया। भवन निर्माण स्वीकृति समिति व कार्यकारी समितियों में तो महापौर को उसका अध्यक्ष मनोनीत किया। जबकि सफाई समिति में उप महापौर को अध्यक्ष मनोनीत किया गया। इनके अलावा वित्त समिति,स्वास्थ्य समिति, नियम उप नियम समिति,गंदी बस्ती सुधार समिति,सार्वजनिक रोशनी व्यवस्था समिति,जल वितरण व्यवस्था समिति,राजस्व कर वसूली समिति,गैराज वाहन समिति,स्वर्ण जयंती रोजगार समिति,गौशाला समिति, अतिक्रमण निरोधक समिति,निर्मण समिति, आपदा प्रबंधन समिति,प्रचार-प्रसार समिति,नगर आयोजन एवं सौन्दर्यीकरण समिति,उद्यान प्रबंध समिति,भूमि भवन सम्पदा समिति बनाई गई थी। </p>
<p><strong>मेला समिति में कोटा उत्तर महापौर अध्यक्ष</strong><br />राज्य सरकार द्वारा गठित समितियों में एक समिति  मेला एवं अन्य उत्सव आयोजन समिति बनाई थी। जिसमें कोटा उत्तर की महापौर को उसका अध्यक्ष मनोनीत किया गया। जबकि कोटा दक्षिण के महापौर व उप महापौर, कोटा उत्तर के उप महापौर, दोनों निगमों के नेता प्रतिपक्ष समेत अन्य पार्षदों को उस समिति में सदस्य मनोनीत किया गया है।  मेला समिति की तो दशहरा मेले के लेकर कई बैठकें हुई थी। लेकिन वह भी मेले से पहले ही होती हैं। उसके बाद समिति की कोई बैठक नहीं हुई।</p>
<p><strong>समिति कांग्रेस पार्षदों की, अध्यक्षों ने बदला पाला</strong><br />राज्य की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने कोटा दक्षिण के कांग्रेस बोर्ड में कांग्रेस पार्षदों की समितियों का गठन किया था। लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान कई समितियों के अध्यक्षों ने ही पाला बदल लिया और वे भाजपा में शामिल हो गए। भवन निर्माण स्वीकृति व कार्यकारी समिति के अध्यक्ष व महापौर राजीव अग्रवाल, गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह, अतिक्रमण निरोधक समिति के अध्यक्ष पी.डी. गुप्ता के अलावा समितियों के कई सदस्य कांग्रेस पार्षद भी भाजपा में शामिल हो गए हैं। ऐसे में समितियां काम ही नहीं कर पा रही। हालांकि गौशाला समिति के अध्यक्ष ही एक मात्र ऐसे हैं जो नियमित रूप से गौशाला जाकर  उसमें सुधार के प्रयास में जुटे हैं। जबकि कई समिति अध्यक्षों को तो निगम में आए हुए ही काफी समय हो गया। </p>
<p><strong>समिति अध्यक्षों की पीड़ा</strong><br />वित्त समिति की दो बैठकें हुई। उन समितियों में जो निर्णय किए अधिकारियों ने उनकी पालना ही नहीं की। बजट से पहले दो बार बैठकें करने का प्रयास किया लेकिन नहीं हो सकी। वित्त से संबंधित जो निर्णय व काम हो रहे हैं उसके बारे में अधिकारी जानकारी ही नहीं दे रहे। ऐसे में समिति की बैठकें करने का कोई औचित्य ही नहीं रह जाता। अधिकारी जब बोर्ड के निर्णयों की ही पालना नहीं कर पा रहे हैं तो समितियों की बैठकों के निर्णयों की पालना करना तो दूर की बात है। <br /><strong>- देवेश तिवारी, अध्यक्ष, वित्त समिति </strong></p>
<p>राज्य सरकार ने समितियों का गठन जनता के कामों को करवाने के लिए किया है। समिति की बैठकें कर उसमें जो निर्णय लिए उन निर्णयों की  पालना हुई या नहीं इस बारे में अधिकारियों ने जानकारी ही नहीं दी। नियमानुसार निर्माण से संबंधित जो भी काम होने हैं उनका अनुमोदन समिति में करवाना आवश्यक है। लेकिन अधिकारी मनमानी चला रहे हैं। ऐसे में समिति का होना न होना बराबर है। <br /><strong>- इसरार मोहम्मद, अध्यक्ष, निर्माण समिति </strong></p>
<p>शुरुआत में समिति की बैठकें की। उसमें शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार से संबंधित निर्णय लिए गए। लेकिन अधिकारियों द्वारा उन निर्णयों की पालना ही नहीं की गई। उसके बाद अधिकारियों ने बैठकों में रुचि नहीं ली। जिससे बाद में न तो बैठक हुई और न ही अधिकारियों द्वारा सफाई से संबंधित निर्णयों के बारे में समिति को कोई जानकारी दी जा रही है। ऐसे में समिति नाम की रह गई है। <br /><strong>- पवन मीणा, उप महापौर व अध्यक्ष सफाई समिति</strong></p>
<p>राज्य सरकार द्वारा गठित समितियों में से अधिकर की तो बैठकें हुई हैं। हर समिति के अपने अधिकारी नियुक्त किए हुए हैं। समिति अध्यक्ष बैठकें बुला सकते हैं। लेकिन अधिकारी बैठकों के निर्णयों की पालना ही नहीं कर रहे हैं। ऐसे में बैठकें करने का कोई मलतब नहीं निकल रहा। हालांकि पिछले 9 माह से तो पहले विधानसभा और फिर लोकसभा चुनाव के कारण ही अधिकतर समय आचार संहिता में निकल गया। भवन निर्माण स्वीकृति से सबंधित कुछ पत्रावलियां आई हैं। अब शीघ्र ही बैठक कर उन पर निर्णय किया जाएगा। <br /><strong>- राजीव अग्रवाल, महापौर, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Wed, 10 Jul 2024 16:07:44 +0530</pubDate>
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