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                <title>Inconvenience - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Inconvenience RSS Feed</description>
                
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                <title>नए वार्ड, पुरानी समस्याएं : 10 से 15 किलोमीटर में फैले वार्ड, सुविधाएं अब भी दूर</title>
                                    <description><![CDATA[चंद्रेसल का मुख्य मार्ग बदहाल व अंधेरा बना परेशानी का कारण।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/new-wards--old-problems--wards-spanning-10-to-15-kilometers--amenities-remain-out-of-reach/article-163317"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/6622-copy49.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम के नए परिसीमन के बाद वार्डों की तस्वीर भले ही बदली हो, लेकिन वार्ड नंबर 9 में कोई खास बदलाव नजर नहीं आता। पहले जितना क्षेत्र वार्ड में शामिल था, लगभग वही क्षेत्र अब भी वार्ड नंबर 9 का हिस्सा है। करीब 15 किलोमीटर के दायरे में फैले इस वार्ड में दूरी के साथ समस्याओं का दायरा भी बड़ा है। कहीं सड़कें जवाब दे रही हैं तो कहीं पानी की समस्या लोगों को परेशान कर रही है। अर्जुनपुरा क्षेत्र में सड़क की हालत खराब है और रात के समय पर्याप्त रोड लाइट नहीं होने से लोगों को आवाजाही में परेशानी होती है। सबसे गंभीर स्थिति श्मशान तक जाने वाले रास्ते की है। रास्ता खराब होने के साथ श्मशान की व्यवस्थाएं भी बदहाल बताई जा रही हैं। ऐसे में अंतिम संस्कार के लिए पहुंचने वाले लोगों को भी परेशानी उठानी पड़ती है।</p>
<p>वार्डवासियों को अब उम्मीद है कि निगम प्रशासन सड़क, पानी, प्रकाश व्यवस्था और अतिक्रमण जैसी मूलभूत समस्याओं को प्राथमिकता से लेकर समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाएगा। लोगों का कहना है कि शहर का हिस्सा होने के बावजूद यदि किसी क्षेत्र में आज भी सड़क, रोशनी और बुनियादी सुविधाओं के लिए इंतजार करना पड़े, तो विकास की तस्वीर अधूरी ही मानी जाएगी।</p>
<p><strong> शिकायतों के बाद भी नहीं बदली तस्वीर</strong><br />अर्जुनपुरा क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं को लेकर लोगों में नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की स्थिति लंबे समय से खराब है। बारिश के दौरान परेशानी और बढ़ जाती है। श्मशान तक पहुंचने वाला मार्ग भी दुरुस्त नहीं होने से बुजुर्गों और महिलाओं को विशेष परेशानी होती है। इसके अलावा अतिक्रमण और सड़क संबंधी शिकायतें भी लगातार सामने आती रहती हैं।</p>
<p><strong>चंद्रेसल का मुख्य मार्ग भी बदहाल, रोड लाइट भी नहीं</strong><br />वार्ड नंबर 10 में आने वाले चंद्रसाल ग्राम की स्थिति भी लोगों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। गांव में जाने वाला मुख्य मार्ग क्षतिग्रस्त हो रहा है। सड़क की खराब हालत के साथ इस मार्ग पर रोड लाइट की सुविधा भी पर्याप्त नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम ढलने के बाद मार्ग पर अंधेरा छा जाता है। ऐसे में वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी होती है। लोगों ने बताया कि अंधेरे का फायदा उठाकर इस मार्ग पर कई बार लूटपाट की वारदातें भी हो चुकी हैं। केवल वार्डों का परिसीमन बदलने से समस्याएं खत्म नहीं होंगी। जरूरत इस बात की है कि नए दायरे के हिसाब से विकास और निगरानी भी मजबूत कि जाए।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर, क्षेत्र व जनसंख्या</strong><br />-वार्ड नंबर 6 जनसंख्या 12,951 क्षेत्र: मीरा बस्ती, मवासा पुलिया क्षेत्र, संजय नगर, भीमपुरा ग्राम, कोर्ट मोहल्ला, सम्मलेश्वर मंदिर, नयाखेड़ा मोहल्ला, वैद्ययनाथ मंदिर, गाड़ीगाल आदि।</p>
<p>-वार्ड नंबर 7 जनसंख्या 12,732 क्षेत्र: न्यू कॉलोनी, हरिजन बस्ती, कृषि उपजमंडी, किशनपुरा बस्ती, बूटा सिंह कॉलोनी, मेला बस स्टैंड, अहिरवाड़ा, आजाद नगर आदि क्षेत्र शामिल है।</p>
<p>-वार्ड नंबर 8 जनसंख्या 12,710 क्षेत्र: धाकड़खेड़ी, चण्डीन्दा, भोजपुरा, आरामपुरा, जालखेड़ा, खेड़ा रसूलपुर, चैनपुरा आदि क्षेत्र शामिल है।</p>
<p>-वार्ड नंबर 9 जनसंख्या 11,284 क्षेत्र: अर्जुनपुरा, दसलाना, झालीपुरा, जगन्नाथपुरा, बोरखंडी छोटी व बड़ी, मण्डानिया, आदि क्षेत्र शामिल है।</p>
<p>-वार्ड नंबर 10 जनसंख्या 11393 क्षेत्र: बड़ा सोगरिया, मधुबन कॉलोनी, रोटेदा ग्राम, चंदेशल ग्राम, मानसिंह बस्ती आदि शामिल है।</p>
<p>पार्षद कार्यकाल में कई क्षेत्रों में सड़क सहित विभिन्न विकास कार्य करवाए गए। निगम प्रशासन ने सीवरेज लाइन डालने के दौरान पहले से बनी सड़कों को तोड़ दिया। सीवरेज लाइन डाले हुए करीब तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक कई जगह कनेक्शन नहीं दिए गए हैं। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।<br /><strong>-मनोज सैनी ,पूर्व पार्षद</strong></p>
<p>वार्ड में लगभग सभी मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया गया है। वार्डवासियों की ओर से समय-समय पर सामने आने वाली समस्याओं का प्राथमिकता से समाधान कराया गया। उनका कहना है कि क्षेत्र के विकास और लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम किया गया है।<br /><strong>- सोनम,पूर्व पार्षद</strong></p>
<p>वार्ड में सामुदायिक भवन की सुविधा नहीं है और सड़क की समस्या सबसे ज्यादा बनी हुई है। कई जगह लोगों को आने-जाने में परेशानी होती है। समस्या को लेकर कई बार लिखित और मौखिक रूप से शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। लोगों को उम्मीद है कि नगर निगम क्षेत्र की समस्याओं को गंभीरता से लेकर सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं में सुधार कराएगा।<br /><strong>-महेंद्र गुर्जर ,वार्डवासी </strong></p>
<p>वार्ड काफी बड़े दायरे में फैला हुआ है, इसलिए यहां समस्याओं का दायरा भी बड़ा है। अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग तरह की परेशानियां सामने आती हैं, लेकिन सबसे बड़ी समस्या पानी की रहती है। कई बार लोगों को पानी की समस्या से जूझना पड़ता है। बड़े वार्ड में रहने वाले लोगों को समय पर सुविधाएं मिलें, इसके लिए प्रशासन को नियमित रूप से क्षेत्रों का निरीक्षण कर समस्याओं का समाधान करना चाहिए।<br /><strong> -विजय शर्मा,वार्डवासी</strong></p>
<p>पहले वार्ड की पार्षद ईना मीणा थीं,आमजन को छोटे-छोटे कामों के लिए भी परेशान होना पड़ा। यहां तक कि एक साइन करवाने के लिए भी लोगों को इधर-उधर दौड़ लगानी पड़ती थी। जनप्रतिनिधि से उम्मीदें थीं, लेकिन वार्ड में समस्याओं का अंबार लगा रहा और लोगों की सुनवाई तक नहीं हुई।<br /><strong>-शरद कुशवाह,वार्डवासी  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 14:27:12 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ईंधन संकट का असर: जयपुर से 7 उड़ानें बंद, मुंबई-दिल्ली रूट सबसे ज्यादा प्रभावित</title>
                                    <description><![CDATA[वैश्विक ईंधन संकट के चलते एयरलाइंस कंपनियों ने जयपुर एयरपोर्ट से सात नियमित उड़ानें बंद कर दी हैं। इसमें मुंबई-नवी मुंबई की चार, दिल्ली की दो और बेंगलुरु की एक फ्लाइट शामिल है। उड़ानों में इस कटौती से यात्रियों की परेशानी बढ़ सकती है और हवाई किराया महंगा होने के आसार हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/impact-of-fuel-crisis-7-flights-closed-from-jaipur-mumbai-delhi/article-155581"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/airport-jaipur.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। वैश्विक स्तर पर उभर रहे ईंधन संकट का असर अब देश के विमानन क्षेत्र पर भी दिखाई देने लगा है। एयरलाइंस कंपनियों ने परिचालन लागत बढ़ने और ईंधन उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियों के चलते कई उड़ानों में कटौती शुरू कर दी है। इसका प्रभाव जयपुर एयरपोर्ट पर भी पड़ा है, जहां आज से सात नियमित उड़ानों का संचालन बंद किया जा रहा है। सबसे अधिक असर मुंबई रूट पर देखने को मिलेगा। जयपुर से मुंबई और नवी मुंबई के लिए संचालित होने वाली चार उड़ानें बंद रहेंगी। इनमें सुबह 6 बजे की एयर इंडिया फ्लाइट, दोपहर 1:40 बजे की स्पाइसजेट फ्लाइट, दोपहर 3:55 बजे की इंडिगो की नवी मुंबई फ्लाइट तथा शाम 7:40 बजे की एयर इंडिया की मुंबई फ्लाइट शामिल हैं। इसके अलावा दिल्ली के लिए संचालित एयर इंडिया की दो उड़ानें भी प्रभावित होंगी। </p>
<p>दोपहर 1:40 बजे और शाम 5:10 बजे दिल्ली जाने वाली उड़ानों का संचालन बंद रहेगा। वहीं रात 10:55 बजे जयपुर से बेंगलुरु के लिए उड़ान भरने वाली एयर इंडिया एक्सप्रेस की सेवा भी स्थगित कर दी गई है। हवाई यात्रा पर बढ़ते दबाव के बीच इन उड़ानों के बंद होने से यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईंधन संकट की स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो आने वाले दिनों में अन्य रूटों पर भी उड़ानों में कटौती की जा सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 10:25:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिशा सूचक बोर्ड पर नेताओं ने लगा रखे हैं अपने बैनर व पोस्टर</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रामीणों ने बोर्ड पर से नेताओं के बैनर पोस्टर हटाने की मांग की है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/leaders-have-put-their-banners-and-posters-on-the-direction-board/article-90046"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/1rtrer-(4)8.png" alt=""></a><br /><p>कनवास। दरा की नाल में आए दिन लग रहे जाम की वजह से राहगीरों को कनवास होकर निकलना पड़ रहा है। लेकिन इस रोड पर भी दिशा सूचक बोर्ड पर जनप्रतिनिधियों ने बैनर पोस्टर लगा रखे हैं। जिससे वाहन चालकों व राहगीरों को काफी असुविधा हो रही है। कई बार वो इधर-उधर भटक जाते हैं। जिससे समय के साथ ही आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। जानकारी के अनुसार दरा की नाल में आए दिन जाम लगने से वाहन चालक व राहगीर काफी परेशान हैं। वाहन चालकों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। कनवास उपखंड क्षेत्र से निकल रहे देवली से अरनिया स्टेट हाइवे व दरा, कनवास, सांगोद, बपावर, मेगा हाइवे तक रोड पर लगे हुए दिशा सूचक व दूरी बताने वाले बोर्ड पर जनप्रतिनिधियों ने अपनी प्रचार सामग्री लगा रखी है। जिससे राहगीरों व वाहन चालकों को पता नहीं लग पाता कि किधर से जाना है। </p>
<p>ग्रामीणों ने की बैनर पोस्टर हटाने की मांगग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में स्पीकर ओम बिरला के दौरे के समय से ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इन दिशा सूचक बोर्ड को अपनी प्रचार सामग्री से ढक रखा है। ग्रामीणों ने बोर्ड पर से नेताओं के बैनर पोस्टर हटाने की मांग की है। </p>
<p>एक सप्ताह के भीतर लगे अवैधानिक बैनरों, पोस्टरों को तत्काल  प्रभाव से नहीं हटाया जाए तो राजकीय संपत्ति निरूपण अधिनियम में मुकदमा दर्ज कर चालान संबंधित न्यायालय में पेश करें। वरना आंदोलन किया जाएगा।<br /><strong>- रामेश्वर मामोर, पूर्व सरपंच व सोशल एक्टिविस्ट  </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />देवली से अरनिया स्टेट हाइवे पर लगे हुए दिशा सूचक बोर्ड पर अवैध बैनर पोस्टर को संज्ञान में लेकर कार्रवाई की जाएगी। अवैध रूप से लगे बैनर पोस्टर हटवाए जाएंगे। वाहन चालकों, राहगीरों को सुविधा दी जाएगी।<br /><strong>- मुकेश गोचर, लेखा अधिकारी </strong><br /> <br />अवैधानिक तरीके से दिशा सूचक बोर्ड पर लगे हुए अवैध बैनर तुरंत प्रभाव से हटाएंगे। दिशा सूचक बोर्ड को सही करवाएंगे। राहगीर, वाहन चालकों को राहत पहुंचाई जाएगी। <br /><strong>- दीपक दाधीच, जेईएएनपीडब्ल्यूडी विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Sep 2024 17:34:08 +0530</pubDate>
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                <title>लापरवाही से बारिश में जलमग्न होते शहर</title>
                                    <description><![CDATA[शहरी नागरिक बारिश के दौरान प्रशासन की लापरवाही का दंश दशकों से भुगत रहे हैं। आधुनिक दौर में जब तकनीक विकसित है तब भी इस दिशा में ठोस काम नहीं होना प्रशासन की अर्कमण्यता को ही दर्शा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/cities-getting-submerged-in-rain-due-to-negligence/article-84554"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/pak-rain.jpg" alt=""></a><br /><p>देश में प्रशासन की लापरवाही के चलते ही मानसून की बारिश लोगों के लिए मुसीबत का सबब भी बन जाती है। देश की राजधानी में मानसून की पहली बारिश ने ही प्रशासनिक व्यवस्थाओं की पोल खोल कर रख दी। इसी तरह के हालात कमोबेश देश के तमाम बड़े शहरों और कस्बों के इन दिनों हो रहे हैं। राज्य की राजधानी जयपुर में भी थोड़ी सी बारिश ने आधे शहर को जलमग्न की हालात में ला दिया है। इन सबके के पीछे हमारी व्यवस्था ही दोषी है। हर जगह सड़कों का क्षतिग्रस्त होना और जलभराव की स्थिति आम नागरिक को परेशान किये रहती है।  इन व्यवस्थाओं को देखने वाले तंत्र को मालूम है कि बारिश होगी और जलभराव के हालात बनेंगे। हर वर्ष यही हालात देखने को मिलते हैं और हर बार दावे किये जाते हैं कि मानसून से पहले ही नालों की सफाई कर दी गई है पर दावें खोखले साबित होते हैं और जनता को परेशानी उठानी पड़ती है। मानसून मौसम का एक स्वाभाविक चक्र है। तेज बारिश तो अब हर महानगर, शहर और कस्बे में तकलीफ के दौर पर पहचाना जाने लगा है। </p>
<p>बारिश के दौर में जो हालात शहरों के बनने लगे हैं उससे साफ लगता है कि इसमें समूची व्यवस्था का कुप्रबंधन और लापरवाही ही है। कुछ घंटों की बारिश ही कस्बों के साथ ज्यादातर शहरों के हाल बेहाल कर देती है। हालात इतने बिगड़ जाते हैं कि जनजीवन ठप हो जाता है और जाम के हालात बन जाते हैं। इसमें सुधार के लिए सरकारों के स्तर पर हमेशा काम होता है पर जब बारिश होती है तो कहीं भी प्रशासन के प्रयास कारगर नहीं हो पाते हैं। प्रशासन के साथ ही कई स्वयं सेवी संगठन भी इस दिशा में काम कर रहे हैं कि जलभराव के हालात नहीं बनें और नागरिकों को असुविधा का सामना नहीं करना पड़े। </p>
<p>शहरों का पानी निकासी का पूरा तंत्र ही गड़बड़ा हुआ दिखाई देता है। हर वर्ष यही हालात बनते है पर इससे कभी सबक लिया ही नहीं जाता है। सड़कों और मौहल्लों में जलजमाव हो ही नहीं, इस दिशा में काम करने की जरूरत है। इसके लिए आम नागरिकों से सुझाव लेकर प्रशासन को ठोस कदम उठाने चाहिए, तभी इस स्थायी समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। नगरीय संस्थाओं को इस तरफ मानसून पूर्व ही ध्यान देना होगा और अपने तंत्र को मजबूत कर लोगों को राहत देने की पहल करनी होगी। इसमें सुधार के लिए नगरीय संस्थाओं को बहुत बड़ा बजट की सरकारों की तरफ से मुहैया कराया जाता है लेकिन हालात सुधरने का नाम ही नहीं लेते हैं। जलभराव वाले इलाकों की पहचान कर वहां से पानी निकासी की व्यवस्था करने से समस्या को काफी हद तक काबू किया जा सकता है। देश में बारिश का दौर तो अभी शुरू ही हुआ है। शुरूआती दौर में ही जो हालात सामने आ रहे हैं उससे लगता है कि शहरों के हाल बेहाल ही होंगे। मौसम विभाग ने भी इस बार अच्छी बारिश की भविष्यवाणी की है। उसे देखते हुए तो प्रशासन और सरकारी तंत्र के पास अभी भी समय है कि वो चिन्हित जगहों की सुध लेकर ठोस उपाय अमल में लाये। शहरों की उन सडकों पर जहां रोजमर्रा के कामकाज के लिए हजारों लोगों की आवाजाही रहती है उन पर पहले ध्यान देने की आवश्यकता है। इन सड़कों पर ही शहरी संस्थाएं ठीक से काम कर ले तो जनता की परेशानी ही आधी हो जाएगी। इसके साथ ही भविष्य में नये बसने वाले इलाकों में पानी निकासी का इंतजाम शुरूआत से ही सुधार ले तो भी लोगों को राहत मिल सकेगी। बरसात के दिनों में तो सड़कों पर जो हालात गड्डों और सीवरेज लाइन के खुले मेनहोलों से होते है उसको तो कोई देखने वाला ही नहीं होता है। पानी से लबालब सड़कों के बीच खुले मैनहोल और नालों में दुर्घटना की कई घटनाएं सामने आती रही हैं। इन्हें सुधारने के लिए हर बार प्रशासन दावे करता है पर हमेशा इनमें दुर्घटना होने की खबरें सामने आती रहती हैं।</p>
<p>शहरी नागरिक बारिश के दौरान प्रशासन की लापरवाही का दंश दशकों से भुगत रहे हैं। आधुनिक दौर में जब तकनीक विकसित है तब भी इस दिशा में ठोस काम नहीं होना प्रशासन की अर्कमण्यता को ही दर्शा रहा है। शहरों में नगर निकायों में जिस दिशा में काम होना चाहिए उसका नितांत अभाव साफ दिखाई देता है। जलजमाव वाले इलाकों में लंबे समय तक पानी भरा रहता है। निकायों की लापरवाही के चलते ही जलभराव इलाके में रिहायशी बस्तियां बस जाती हैं। मानसून के दौरान इन इलाकों में पानी भरना आम बात है। इसकी निकासी नहीं हो पाती है और एक जगह इकट्ठा हुए पानी से बीमारियां भी पनप जाती हैं। इसके चलते ही मानसून के दौरान मलेरिया, डेंगू, बुखार जैसी बीमारियां लंबे समय तक लोगों को परेशान किये रहती हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग का काम भी बढ़ जाता है। ऐसे हालातों के चलते लोगों के रोजगार पर भी असर पड़ता है। इस दौरान आम नागरिकों की जान जोखिम में नहीं पड़े इसके लिए सरकार को भी अपने प्रशासन को सख्त हिदायत देकर जनसमस्या का निदान करना चाहिए।     </p>
<p><strong>-राजीव जैन</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sat, 13 Jul 2024 11:37:51 +0530</pubDate>
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