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                <title>Inconvenience - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Inconvenience RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ईंधन संकट का असर: जयपुर से 7 उड़ानें बंद, मुंबई-दिल्ली रूट सबसे ज्यादा प्रभावित</title>
                                    <description><![CDATA[वैश्विक ईंधन संकट के चलते एयरलाइंस कंपनियों ने जयपुर एयरपोर्ट से सात नियमित उड़ानें बंद कर दी हैं। इसमें मुंबई-नवी मुंबई की चार, दिल्ली की दो और बेंगलुरु की एक फ्लाइट शामिल है। उड़ानों में इस कटौती से यात्रियों की परेशानी बढ़ सकती है और हवाई किराया महंगा होने के आसार हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/impact-of-fuel-crisis-7-flights-closed-from-jaipur-mumbai-delhi/article-155581"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/airport-jaipur.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। वैश्विक स्तर पर उभर रहे ईंधन संकट का असर अब देश के विमानन क्षेत्र पर भी दिखाई देने लगा है। एयरलाइंस कंपनियों ने परिचालन लागत बढ़ने और ईंधन उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियों के चलते कई उड़ानों में कटौती शुरू कर दी है। इसका प्रभाव जयपुर एयरपोर्ट पर भी पड़ा है, जहां आज से सात नियमित उड़ानों का संचालन बंद किया जा रहा है। सबसे अधिक असर मुंबई रूट पर देखने को मिलेगा। जयपुर से मुंबई और नवी मुंबई के लिए संचालित होने वाली चार उड़ानें बंद रहेंगी। इनमें सुबह 6 बजे की एयर इंडिया फ्लाइट, दोपहर 1:40 बजे की स्पाइसजेट फ्लाइट, दोपहर 3:55 बजे की इंडिगो की नवी मुंबई फ्लाइट तथा शाम 7:40 बजे की एयर इंडिया की मुंबई फ्लाइट शामिल हैं। इसके अलावा दिल्ली के लिए संचालित एयर इंडिया की दो उड़ानें भी प्रभावित होंगी। </p>
<p>दोपहर 1:40 बजे और शाम 5:10 बजे दिल्ली जाने वाली उड़ानों का संचालन बंद रहेगा। वहीं रात 10:55 बजे जयपुर से बेंगलुरु के लिए उड़ान भरने वाली एयर इंडिया एक्सप्रेस की सेवा भी स्थगित कर दी गई है। हवाई यात्रा पर बढ़ते दबाव के बीच इन उड़ानों के बंद होने से यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईंधन संकट की स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो आने वाले दिनों में अन्य रूटों पर भी उड़ानों में कटौती की जा सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 10:25:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिशा सूचक बोर्ड पर नेताओं ने लगा रखे हैं अपने बैनर व पोस्टर</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रामीणों ने बोर्ड पर से नेताओं के बैनर पोस्टर हटाने की मांग की है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/leaders-have-put-their-banners-and-posters-on-the-direction-board/article-90046"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/1rtrer-(4)8.png" alt=""></a><br /><p>कनवास। दरा की नाल में आए दिन लग रहे जाम की वजह से राहगीरों को कनवास होकर निकलना पड़ रहा है। लेकिन इस रोड पर भी दिशा सूचक बोर्ड पर जनप्रतिनिधियों ने बैनर पोस्टर लगा रखे हैं। जिससे वाहन चालकों व राहगीरों को काफी असुविधा हो रही है। कई बार वो इधर-उधर भटक जाते हैं। जिससे समय के साथ ही आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। जानकारी के अनुसार दरा की नाल में आए दिन जाम लगने से वाहन चालक व राहगीर काफी परेशान हैं। वाहन चालकों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। कनवास उपखंड क्षेत्र से निकल रहे देवली से अरनिया स्टेट हाइवे व दरा, कनवास, सांगोद, बपावर, मेगा हाइवे तक रोड पर लगे हुए दिशा सूचक व दूरी बताने वाले बोर्ड पर जनप्रतिनिधियों ने अपनी प्रचार सामग्री लगा रखी है। जिससे राहगीरों व वाहन चालकों को पता नहीं लग पाता कि किधर से जाना है। </p>
<p>ग्रामीणों ने की बैनर पोस्टर हटाने की मांगग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में स्पीकर ओम बिरला के दौरे के समय से ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इन दिशा सूचक बोर्ड को अपनी प्रचार सामग्री से ढक रखा है। ग्रामीणों ने बोर्ड पर से नेताओं के बैनर पोस्टर हटाने की मांग की है। </p>
<p>एक सप्ताह के भीतर लगे अवैधानिक बैनरों, पोस्टरों को तत्काल  प्रभाव से नहीं हटाया जाए तो राजकीय संपत्ति निरूपण अधिनियम में मुकदमा दर्ज कर चालान संबंधित न्यायालय में पेश करें। वरना आंदोलन किया जाएगा।<br /><strong>- रामेश्वर मामोर, पूर्व सरपंच व सोशल एक्टिविस्ट  </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />देवली से अरनिया स्टेट हाइवे पर लगे हुए दिशा सूचक बोर्ड पर अवैध बैनर पोस्टर को संज्ञान में लेकर कार्रवाई की जाएगी। अवैध रूप से लगे बैनर पोस्टर हटवाए जाएंगे। वाहन चालकों, राहगीरों को सुविधा दी जाएगी।<br /><strong>- मुकेश गोचर, लेखा अधिकारी </strong><br /> <br />अवैधानिक तरीके से दिशा सूचक बोर्ड पर लगे हुए अवैध बैनर तुरंत प्रभाव से हटाएंगे। दिशा सूचक बोर्ड को सही करवाएंगे। राहगीर, वाहन चालकों को राहत पहुंचाई जाएगी। <br /><strong>- दीपक दाधीच, जेईएएनपीडब्ल्यूडी विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Sep 2024 17:34:08 +0530</pubDate>
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                <title>लापरवाही से बारिश में जलमग्न होते शहर</title>
                                    <description><![CDATA[शहरी नागरिक बारिश के दौरान प्रशासन की लापरवाही का दंश दशकों से भुगत रहे हैं। आधुनिक दौर में जब तकनीक विकसित है तब भी इस दिशा में ठोस काम नहीं होना प्रशासन की अर्कमण्यता को ही दर्शा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/cities-getting-submerged-in-rain-due-to-negligence/article-84554"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/pak-rain.jpg" alt=""></a><br /><p>देश में प्रशासन की लापरवाही के चलते ही मानसून की बारिश लोगों के लिए मुसीबत का सबब भी बन जाती है। देश की राजधानी में मानसून की पहली बारिश ने ही प्रशासनिक व्यवस्थाओं की पोल खोल कर रख दी। इसी तरह के हालात कमोबेश देश के तमाम बड़े शहरों और कस्बों के इन दिनों हो रहे हैं। राज्य की राजधानी जयपुर में भी थोड़ी सी बारिश ने आधे शहर को जलमग्न की हालात में ला दिया है। इन सबके के पीछे हमारी व्यवस्था ही दोषी है। हर जगह सड़कों का क्षतिग्रस्त होना और जलभराव की स्थिति आम नागरिक को परेशान किये रहती है।  इन व्यवस्थाओं को देखने वाले तंत्र को मालूम है कि बारिश होगी और जलभराव के हालात बनेंगे। हर वर्ष यही हालात देखने को मिलते हैं और हर बार दावे किये जाते हैं कि मानसून से पहले ही नालों की सफाई कर दी गई है पर दावें खोखले साबित होते हैं और जनता को परेशानी उठानी पड़ती है। मानसून मौसम का एक स्वाभाविक चक्र है। तेज बारिश तो अब हर महानगर, शहर और कस्बे में तकलीफ के दौर पर पहचाना जाने लगा है। </p>
<p>बारिश के दौर में जो हालात शहरों के बनने लगे हैं उससे साफ लगता है कि इसमें समूची व्यवस्था का कुप्रबंधन और लापरवाही ही है। कुछ घंटों की बारिश ही कस्बों के साथ ज्यादातर शहरों के हाल बेहाल कर देती है। हालात इतने बिगड़ जाते हैं कि जनजीवन ठप हो जाता है और जाम के हालात बन जाते हैं। इसमें सुधार के लिए सरकारों के स्तर पर हमेशा काम होता है पर जब बारिश होती है तो कहीं भी प्रशासन के प्रयास कारगर नहीं हो पाते हैं। प्रशासन के साथ ही कई स्वयं सेवी संगठन भी इस दिशा में काम कर रहे हैं कि जलभराव के हालात नहीं बनें और नागरिकों को असुविधा का सामना नहीं करना पड़े। </p>
<p>शहरों का पानी निकासी का पूरा तंत्र ही गड़बड़ा हुआ दिखाई देता है। हर वर्ष यही हालात बनते है पर इससे कभी सबक लिया ही नहीं जाता है। सड़कों और मौहल्लों में जलजमाव हो ही नहीं, इस दिशा में काम करने की जरूरत है। इसके लिए आम नागरिकों से सुझाव लेकर प्रशासन को ठोस कदम उठाने चाहिए, तभी इस स्थायी समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। नगरीय संस्थाओं को इस तरफ मानसून पूर्व ही ध्यान देना होगा और अपने तंत्र को मजबूत कर लोगों को राहत देने की पहल करनी होगी। इसमें सुधार के लिए नगरीय संस्थाओं को बहुत बड़ा बजट की सरकारों की तरफ से मुहैया कराया जाता है लेकिन हालात सुधरने का नाम ही नहीं लेते हैं। जलभराव वाले इलाकों की पहचान कर वहां से पानी निकासी की व्यवस्था करने से समस्या को काफी हद तक काबू किया जा सकता है। देश में बारिश का दौर तो अभी शुरू ही हुआ है। शुरूआती दौर में ही जो हालात सामने आ रहे हैं उससे लगता है कि शहरों के हाल बेहाल ही होंगे। मौसम विभाग ने भी इस बार अच्छी बारिश की भविष्यवाणी की है। उसे देखते हुए तो प्रशासन और सरकारी तंत्र के पास अभी भी समय है कि वो चिन्हित जगहों की सुध लेकर ठोस उपाय अमल में लाये। शहरों की उन सडकों पर जहां रोजमर्रा के कामकाज के लिए हजारों लोगों की आवाजाही रहती है उन पर पहले ध्यान देने की आवश्यकता है। इन सड़कों पर ही शहरी संस्थाएं ठीक से काम कर ले तो जनता की परेशानी ही आधी हो जाएगी। इसके साथ ही भविष्य में नये बसने वाले इलाकों में पानी निकासी का इंतजाम शुरूआत से ही सुधार ले तो भी लोगों को राहत मिल सकेगी। बरसात के दिनों में तो सड़कों पर जो हालात गड्डों और सीवरेज लाइन के खुले मेनहोलों से होते है उसको तो कोई देखने वाला ही नहीं होता है। पानी से लबालब सड़कों के बीच खुले मैनहोल और नालों में दुर्घटना की कई घटनाएं सामने आती रही हैं। इन्हें सुधारने के लिए हर बार प्रशासन दावे करता है पर हमेशा इनमें दुर्घटना होने की खबरें सामने आती रहती हैं।</p>
<p>शहरी नागरिक बारिश के दौरान प्रशासन की लापरवाही का दंश दशकों से भुगत रहे हैं। आधुनिक दौर में जब तकनीक विकसित है तब भी इस दिशा में ठोस काम नहीं होना प्रशासन की अर्कमण्यता को ही दर्शा रहा है। शहरों में नगर निकायों में जिस दिशा में काम होना चाहिए उसका नितांत अभाव साफ दिखाई देता है। जलजमाव वाले इलाकों में लंबे समय तक पानी भरा रहता है। निकायों की लापरवाही के चलते ही जलभराव इलाके में रिहायशी बस्तियां बस जाती हैं। मानसून के दौरान इन इलाकों में पानी भरना आम बात है। इसकी निकासी नहीं हो पाती है और एक जगह इकट्ठा हुए पानी से बीमारियां भी पनप जाती हैं। इसके चलते ही मानसून के दौरान मलेरिया, डेंगू, बुखार जैसी बीमारियां लंबे समय तक लोगों को परेशान किये रहती हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग का काम भी बढ़ जाता है। ऐसे हालातों के चलते लोगों के रोजगार पर भी असर पड़ता है। इस दौरान आम नागरिकों की जान जोखिम में नहीं पड़े इसके लिए सरकार को भी अपने प्रशासन को सख्त हिदायत देकर जनसमस्या का निदान करना चाहिए।     </p>
<p><strong>-राजीव जैन</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jul 2024 11:37:51 +0530</pubDate>
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