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                <title>Padmabhushan - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में श्रीजेश और अश्विन को किया सम्मानित, श्रीजेश को पद्म विभूषण और अश्विन को पद्मश्री</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय टीम के पूर्व हॉकी खिलाड़ी पीआर श्रीजेश को पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/president-draupadi-murmu-honored-sreejesh-and-ashwin-in-rashtrapati-bhavan/article-112388"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/rtrer54.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय टीम के पूर्व हॉकी खिलाड़ी पीआर श्रीजेश को पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जबकि भारतीय टीम के पूर्व स्पिनर रविचंद्रन अश्विन को पद्मश्री पुरस्कार दिया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में एक समारोह के दौरान श्रीजेश और अश्विन को सम्मानित किया। इस कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहे।</p>
<p>श्रीजेश और अश्विन को यह सम्मान खेल में उत्कृष्ट योगदान के लिए मिला है। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने 2025 के लिए पद्म पुरस्कारों की घोषणा की थी, जिसमें श्रीजेश और अश्विन का नाम भी शामिल था।</p>
<p>अश्विन ने पिछले साल ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया था। वह भारत के सफल स्पिनरों में शामिल हैं। अश्विन ने टेस्ट में भारत के दूसरे सबसे सफल गेंदबाज के तौर पर अपना करियर समाप्त किया। 106 टेस्ट मैचों में अश्विन ने 537 विकेट झटके और वह बस पूर्व स्पिनर अनिल कुंबले से पीछे थे जिन्होंने अपने टेस्ट करियर में 619 विकेट लिए हैं। अश्विन फिलहाल आईपीएल 2025 में हिस्सा ले रहे हैं और इस सीजन चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Apr 2025 13:15:26 +0530</pubDate>
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                <title>Happy Birthday Naseeruddin Shah: अभिनय के दम पर पद्मश्री और पद्मभूषण पुरस्कार से सम्मानित है शाह</title>
                                    <description><![CDATA[फिल्म मिर्च मसाला ने निर्देशक केतन मेहता को अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिलाई थी। यह फिल्म सामंतवादी व्यवस्था के बीच पिसती औरत की संघर्ष की कहानी बयां करती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/happy-birthday-naseeruddin-shah-shah-is-honored-with-padmashree-and/article-85319"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/111u1rer-(12)3.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। बॉलीवुड के जानेमाने अभिनेता नसीरुद्दीन शाह आज 74 वर्ष के हो गये। 20 जुलाई 1950 को उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में जन्में नसीरुद्दीन शाह ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अजमेर और नैनीताल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने अपनी स्नातक की पढ़ाई अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पूरी की।</p>
<p>वर्ष 1971 में अभिनेता बनने का सपना लिये उन्होंने दिल्ली नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा स्कूल में दाखिला ले लिया। वर्ष 1975 में नसीरुद्दीन शाह की मुलाकात जाने माने निर्माता-निर्देशक श्याम बेनेगल से हुयी। श्याम बेनेगल उन दिनो अपनी फिल्म निशांत बनाने की तैयारी में थे। श्याम बेनेगल ने नसीरूद्दीन शाह में एक उभरता हुआ सितारा दिखाई दिया और अपनी फिल्म में काम करने का अवसर दे दिया।</p>
<p>वर्ष 1976 नसीरूद्दीन शाह के सिने कैरियर में अहम पड़ाव साबित हुआ। इस वर्ष उनकी भूमिका और मंथन जैसी सफल फिल्म प्रदर्शित हुई । दुग्ध क्रांति पर बनी फिल्म मंथन में नसीरुद्दीन शाह के अभिनय ने नए रंग दर्शको को देखने को मिले। इस फिल्म के निर्माण के लिये गुजरात के लगभग पांच लाख किसानों ने अपनी प्रति दिन की मिलने वाली मजदूरी में से (दो-दो) रूपये फिल्म निर्माताओं को दिये और बाद में जब यह फिल्म प्रदर्शित हुई तो यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुयी।</p>
<p>वर्ष 1977 में अपने मित्र बैंजमिन गिलानी और टॉम आल्टर के साथ मिलकर नसीरुद्दीन शाह ने मोटेले प्रोडक्शन नामक एक थियेटर ग्रुप की स्थापना की जिसके बैनर तले सैमुयल बैकेट के निर्देशन में पहला नाटक वेटिंग फॉर गोडोट पृथ्वी थियेटर में दर्शकों के बीच दिखाया गया। वर्ष 1979 में प्रदर्शित फिल्म स्पर्श में नसीरुद्दीन शाह के अभिनय का नया आयाम दर्शकों को देखने को मिला। इस फिल्म में अंधे व्यक्ति की भूमिका निभाना किसी भी अभिनेता के लिये बहुत बड़ी चुनौती थी। चेहरे के भाव से दर्शकों को सब कुछ बता देना नसीरुद्दीन शाह की अभिनय प्रतिभा का ऐसा उदाहरण था जिसे शायद ही कोई अभिनेता दोहरा पाये। इस फिल्म में उनके लाजवाब अभिनय के लिये उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया। वर्ष 1980 में प्रदर्शित फिल्म आक्रोश नसीरुद्दीन शाह के सिने करियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में एक है। गोविन्द निहलानी निर्देशित इस फिल्म में नसीरूद्दीन शाह एक ऐसे वकील के किरदार में दिखाई दिये जो समाज और राजनीति की परवाह किये बिना एक ऐसे बेकसूर व्यक्ति को फांसी के फंदे से बचाना चाहता है। हालांकि इसके लिये उसे काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। वर्ष 1983 में नसीरुद्दीन शाह को सई परांजपे की फिल्म कथा में काम करने का अवसर मिला। फिल्म की कहानी मे कछुए और खरगोश के बीच दौड़ की लड़ाई को आधुनिक तरीके से दिखाया गया था।</p>
<p>वर्ष 1983 में नसीर के सिने कैरियर की एक और सुपरहिट फिल्म जाने भी दो यारो प्रदर्शित हुई। कुंदन शाह निर्देशित इस फिल्म में नसीरूद्दीन शाह के अभिनय का नया रंग देखने को मिला। इस फिल्म से पहले उनके बारे में यह धारणा थी कि वह केवल संजीदा भूमिकाएं निभाने में ही सक्षम है लेकिन इस फिल्म उन्होंने अपने जबरदस्त हास्य अभिनय से दर्शको को मंत्रमुग्ध कर दिया। वर्ष 1985 में नसीरुद्दीन शाह के सिने करियर की एक और महत्वपूर्ण फिल्म मिर्च मसाला प्रदर्शित हुयी। फिल्म मिर्च मसाला ने निर्देशक केतन मेहता को अंतराष्ट्रीय ख्याति दिलाई थी। यह फिल्म सामंतवादी व्यवस्था के बीच पिसती औरत की संघर्ष की कहानी बयां करती है।</p>
<p>अस्सी के दशक के आखिरी वर्षो में नसीरुद्दीन शाह ने व्यावसायिक सिनेमा की ओर भी अपना रूख कर लिया। इस दौरान उन्हें हीरो हीरा लाल, मालामाल, जलवा और त्रिदेव जैसी फिल्मों में काम करने का अवसर मिला, जिसकी सफलता के बाद नसीरुद्दीन शाह को व्यावसायिक सिनेमा में भी स्थापित कर दिया। नब्बे के दशक में नसीर ने दर्शको की पसंद को देखते हुये छोटे पर्दे का भी रूख किया और वर्ष 1988 में गुलजार निर्देशित धारावाहिक मिर्जा गालिब में अभिनय किया। इसके अलावा वर्ष 1989 में भारत एक खोज धारावाहिक में उन्होंने मराठा राजा शिवाजी की भूमिका को जीवंत कर दर्शको का भरपूर मनोरंजन किया।  </p>
<p>अभिनय में एकरूपता से बचने और स्वयं को चरित्र अभिनेता के रूप मे भी स्थापित करने के लिये नब्बे के दशक में उन्होंने स्वयं को विभिन्न भूमिकाओं में पेश किया। इस क्रम में 1994 में प्रदर्शित फिल्म मोहरा में वह खल चरित्र निभाने से भी नहीं हिचके। इस फिल्म में भी उन्होंने दर्शकों का मन मोहे रखा। इसके बाद उन्होंने टक्कर, हिम्मत, चाहत, राजकुमार, सरफरोश और कृष जैसी फिल्मों में खलनायक की भूमिका निभाकर दर्शको का भरपूर मनोरंजन किया।</p>
<p>नसीरुद्दीन शाह के सिने करियर में उनकी जोड़ी स्मिता पाटिल के साथ काफी पसंद की गयी। नसीरुद्दीन शाह अबतक तीन बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किये जा चुके है। इन सबके साथ ही नसीरूद्दीन शाह तीन बार राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किये गये है। फिल्म के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुये वह भारत सरकार की ओर से पदमश्री और पदमभूषण पुरस्कार से भी सम्मानित किये जा चुके है। नसीरूद्दीन शाह ने करीब चार दशक लंबे सिने करियर में 200 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है। नसीरुद्दीन शाह आज भी उसी जोशोखरोश के साथ फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sat, 20 Jul 2024 14:57:39 +0530</pubDate>
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