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                <title>Bollywood Actor - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>जन्मदिन विशेष : 62 साल के हुए राजा बाबू, जानिए फिल्म सेट लेट आने वाले गोविंदा कैसे बने 'हीरो नंबर 1'?</title>
                                    <description><![CDATA[बॉलीवुड में अपनी अनोखी डांसिंग स्टाइल और शानदार कॉमेडी अभिनय से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले अभिनेता गोविंदा आज 62 वर्ष के हो गए। 21 दिसंबर 1963 को जन्मे गोविंदा ने 1986 में फिल्म इल्जाम से करियर की शुरुआत की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/birthday-special-raja-babu-turns-62-know-how-govinda-who/article-136703"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/govinda-birhtday.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। बॉलीवुड में अपनी डांसिग स्टाइल और कॉमेडी अभिनय से दर्शको के दिलों मे खास पहचान बनाने वाले गोविंदा आज 62 वर्ष के हो गये। 21 दिसंबर 1963 में जन्में गोविन्दा फिल्मी परिवार से ताल्लुक रखते थे। उनके पिता अरूण आहूजा अभिनेता जबकि मां निर्मला देवी चालीस के दशक में अभिनेता-अभिनेत्री के तौर पर फिल्मों में काम करते थे। बचपन के दिनो से हीं गोविन्दा भी अभिनेता बनने का ख्वाब देखा करते थे। गोविन्दा ने अपने सिने करियर की शुरूआत वर्ष 1986 में प्रदर्शित फिल्म इल्जाम से की। इस फिल्म में उन पर फिल्माया यह गीत 'स्ट्रीट डांसर' काफी लोकप्रिय हुआ। </p>
<p>इस फिल्म की सफलता के बाद गोविन्दा की छवि एक डांसिग स्टार के रूप में बन गयी और फिल्मकारो ने उनकी इसी छवि को अपनी फिल्मों में जमकर भुनाया। इल्जाम में गोविन्दा की जोड़ी नीलम के साथ काफी पसंद की गयी। इस फिल्म के बाद नीलम और गोविन्दा ने कई फिल्मों में एक साथ काम किया। इन फिल्मों में लव 86, खुदगर्ज, हत्या, सिंदूर, फर्ज की जंग, ताकतवर और दो कैदी शामिल है। वर्ष 1987 में गोविंदा ने सुनीता के साथ शादी कर ली।</p>
<p>गोविन्दा के सिने सफर में उनकी जोड़ी डेविड धवन के साथ काफी पसंद की गयी। वर्ष 1989 में गोविन्दा ने निर्देशक डेविड धवन के साथ पहली बार ताकतवर में काम किया। इस फिल्म को टिकट खिड़की पर औसत सफलता प्राप्त हुई, लेकिन इस फिल्म के बाद डेविड धवन और गोविंदा की जोड़ी बन गयी और दोनो ने कई फिल्मों में एक साथ काम कर दर्शकों का मनोरंजन किया।</p>
<p>वर्ष 1993 में प्रदर्शित फिल्म 'आंखे' गोविन्दा के सिने करियर की सर्वाधिक कामयाब फिल्म में शुमार की जाती है। इस फिल्म में एक बार फिर गोविन्दा ने अपने पसंदीदा निर्देशक डेविड धवन के साथ काम किया। हास्य से परिपूर्ण इस फिल्म में गोविंदा ने दोहरी भूमिका निभाकर दर्शकों को रोमांचित कर दिया। यह फिल्म भारतीय सिनेमा जगत के इतिहास में ब्लॉक बस्टर फिल्मों में शुमार की जाती है। आंखे की ब्लॉक बस्टर सफलता के बाद गोविन्दा-डेविड की जोड़ी ने एक से बढ़कर एक फिल्म बनाकर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।</p>
<p>इन फिल्मों में कुली नंबर वन, हीरो नंबर वन, साजन चले ससुराल, बड़े मियां छोटे मियां, राजा बाबू, दीवाना मस्ताना, दुल्हे राजा, हसीना मान जायेगी, जोड़ी नंबर वन और पार्टनर आदि शामिल है। 2000 के दशक मे गोविन्दा की फिल्मों को अपेक्षित सफलता नही मिल सकी। वर्ष 2000 में प्रदर्शित फिल्म शिकारी ने गोविन्दा ने अपने सिने करियर का पहला नेगेटिव किरदार निभाया जिसके लिये उन्हें सर्वश्रेष्ठ खलनायक का फिल्म फेयर पुरस्कार भी दिया गया।</p>
<p>गोविन्दा के सिने करियर में उनकी जोड़ी अभिनेत्री करिश्मा कपूर के के साथ काफी पसंद की गयी। उनकी जोड़ी सबसे पहले वर्ष 1993 में प्रदर्शित फिल्म 'मुकाबला' में एक साथ पसंद की गयी। बाद में उनकी जोड़ी को फिल्मकारों ने अपनी फिल्मों में दुबारा लिया। इन फिल्मों में राजा बाबू, दुलारा, खुद्दार, कुली नंबर वन, साजन चले ससुराल, हीरो नंबर वन, हसीना मान जायेगी, शिकारी जैसी फिल्में शामिल है। करिश्मा कपूर के अलावा गोविन्दा की जोड़ी किमी काटकर, रवीना टंडन और शिल्पा शेट्टी के साथ भी काफी पसंद की गयी। फिल्मों में कई भूमिकाएं निभाने के बाद गोविन्दा ने समाज सेवा के लिए राजनीति में प्रवेश किया और वर्ष 2004 में कांग्रेस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर लोकसभा के सदस्य बने।</p>
<p>वर्ष 2007 में प्रदर्शित फिल्म पार्टनर की सफलता के बाद गोविन्दा एक बार फिर से अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो गये, लेकिन इस फिल्म के बाद गोविंदा की 'हनी है तो मनी है','चल चला चल','किल दिल','आ गया हीरो' और 'रंगीला राजा' जैसी फिल्में लगातार फ्लॉप होती रहीं। यशराज फिल्म्स के बैनर तले बनी फिल्म 'किल दिल' में गोविंदा ने खलनायक की भूमिका निभाई थी। गोविन्दा ने अपने चार दशक के करियर में लगभग 150 फिल्मों में काम किया है। गोविंदा की चर्चित फिल्मों में कुछ है लव 86, जीते है शान से, हत्या, घर घर की कहानी, जंगबाज, जैसी करनी वैसी भरनी, घराना, हम, भाभी, गैंबलर, भागमभाम, होली डे आदि।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Dec 2025 15:36:41 +0530</pubDate>
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                <title>Happy Birthday Naseeruddin Shah: अभिनय के दम पर पद्मश्री और पद्मभूषण पुरस्कार से सम्मानित है शाह</title>
                                    <description><![CDATA[फिल्म मिर्च मसाला ने निर्देशक केतन मेहता को अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिलाई थी। यह फिल्म सामंतवादी व्यवस्था के बीच पिसती औरत की संघर्ष की कहानी बयां करती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/happy-birthday-naseeruddin-shah-shah-is-honored-with-padmashree-and/article-85319"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/111u1rer-(12)3.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। बॉलीवुड के जानेमाने अभिनेता नसीरुद्दीन शाह आज 74 वर्ष के हो गये। 20 जुलाई 1950 को उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में जन्में नसीरुद्दीन शाह ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अजमेर और नैनीताल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने अपनी स्नातक की पढ़ाई अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पूरी की।</p>
<p>वर्ष 1971 में अभिनेता बनने का सपना लिये उन्होंने दिल्ली नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा स्कूल में दाखिला ले लिया। वर्ष 1975 में नसीरुद्दीन शाह की मुलाकात जाने माने निर्माता-निर्देशक श्याम बेनेगल से हुयी। श्याम बेनेगल उन दिनो अपनी फिल्म निशांत बनाने की तैयारी में थे। श्याम बेनेगल ने नसीरूद्दीन शाह में एक उभरता हुआ सितारा दिखाई दिया और अपनी फिल्म में काम करने का अवसर दे दिया।</p>
<p>वर्ष 1976 नसीरूद्दीन शाह के सिने कैरियर में अहम पड़ाव साबित हुआ। इस वर्ष उनकी भूमिका और मंथन जैसी सफल फिल्म प्रदर्शित हुई । दुग्ध क्रांति पर बनी फिल्म मंथन में नसीरुद्दीन शाह के अभिनय ने नए रंग दर्शको को देखने को मिले। इस फिल्म के निर्माण के लिये गुजरात के लगभग पांच लाख किसानों ने अपनी प्रति दिन की मिलने वाली मजदूरी में से (दो-दो) रूपये फिल्म निर्माताओं को दिये और बाद में जब यह फिल्म प्रदर्शित हुई तो यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुयी।</p>
<p>वर्ष 1977 में अपने मित्र बैंजमिन गिलानी और टॉम आल्टर के साथ मिलकर नसीरुद्दीन शाह ने मोटेले प्रोडक्शन नामक एक थियेटर ग्रुप की स्थापना की जिसके बैनर तले सैमुयल बैकेट के निर्देशन में पहला नाटक वेटिंग फॉर गोडोट पृथ्वी थियेटर में दर्शकों के बीच दिखाया गया। वर्ष 1979 में प्रदर्शित फिल्म स्पर्श में नसीरुद्दीन शाह के अभिनय का नया आयाम दर्शकों को देखने को मिला। इस फिल्म में अंधे व्यक्ति की भूमिका निभाना किसी भी अभिनेता के लिये बहुत बड़ी चुनौती थी। चेहरे के भाव से दर्शकों को सब कुछ बता देना नसीरुद्दीन शाह की अभिनय प्रतिभा का ऐसा उदाहरण था जिसे शायद ही कोई अभिनेता दोहरा पाये। इस फिल्म में उनके लाजवाब अभिनय के लिये उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया। वर्ष 1980 में प्रदर्शित फिल्म आक्रोश नसीरुद्दीन शाह के सिने करियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में एक है। गोविन्द निहलानी निर्देशित इस फिल्म में नसीरूद्दीन शाह एक ऐसे वकील के किरदार में दिखाई दिये जो समाज और राजनीति की परवाह किये बिना एक ऐसे बेकसूर व्यक्ति को फांसी के फंदे से बचाना चाहता है। हालांकि इसके लिये उसे काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। वर्ष 1983 में नसीरुद्दीन शाह को सई परांजपे की फिल्म कथा में काम करने का अवसर मिला। फिल्म की कहानी मे कछुए और खरगोश के बीच दौड़ की लड़ाई को आधुनिक तरीके से दिखाया गया था।</p>
<p>वर्ष 1983 में नसीर के सिने कैरियर की एक और सुपरहिट फिल्म जाने भी दो यारो प्रदर्शित हुई। कुंदन शाह निर्देशित इस फिल्म में नसीरूद्दीन शाह के अभिनय का नया रंग देखने को मिला। इस फिल्म से पहले उनके बारे में यह धारणा थी कि वह केवल संजीदा भूमिकाएं निभाने में ही सक्षम है लेकिन इस फिल्म उन्होंने अपने जबरदस्त हास्य अभिनय से दर्शको को मंत्रमुग्ध कर दिया। वर्ष 1985 में नसीरुद्दीन शाह के सिने करियर की एक और महत्वपूर्ण फिल्म मिर्च मसाला प्रदर्शित हुयी। फिल्म मिर्च मसाला ने निर्देशक केतन मेहता को अंतराष्ट्रीय ख्याति दिलाई थी। यह फिल्म सामंतवादी व्यवस्था के बीच पिसती औरत की संघर्ष की कहानी बयां करती है।</p>
<p>अस्सी के दशक के आखिरी वर्षो में नसीरुद्दीन शाह ने व्यावसायिक सिनेमा की ओर भी अपना रूख कर लिया। इस दौरान उन्हें हीरो हीरा लाल, मालामाल, जलवा और त्रिदेव जैसी फिल्मों में काम करने का अवसर मिला, जिसकी सफलता के बाद नसीरुद्दीन शाह को व्यावसायिक सिनेमा में भी स्थापित कर दिया। नब्बे के दशक में नसीर ने दर्शको की पसंद को देखते हुये छोटे पर्दे का भी रूख किया और वर्ष 1988 में गुलजार निर्देशित धारावाहिक मिर्जा गालिब में अभिनय किया। इसके अलावा वर्ष 1989 में भारत एक खोज धारावाहिक में उन्होंने मराठा राजा शिवाजी की भूमिका को जीवंत कर दर्शको का भरपूर मनोरंजन किया।  </p>
<p>अभिनय में एकरूपता से बचने और स्वयं को चरित्र अभिनेता के रूप मे भी स्थापित करने के लिये नब्बे के दशक में उन्होंने स्वयं को विभिन्न भूमिकाओं में पेश किया। इस क्रम में 1994 में प्रदर्शित फिल्म मोहरा में वह खल चरित्र निभाने से भी नहीं हिचके। इस फिल्म में भी उन्होंने दर्शकों का मन मोहे रखा। इसके बाद उन्होंने टक्कर, हिम्मत, चाहत, राजकुमार, सरफरोश और कृष जैसी फिल्मों में खलनायक की भूमिका निभाकर दर्शको का भरपूर मनोरंजन किया।</p>
<p>नसीरुद्दीन शाह के सिने करियर में उनकी जोड़ी स्मिता पाटिल के साथ काफी पसंद की गयी। नसीरुद्दीन शाह अबतक तीन बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किये जा चुके है। इन सबके साथ ही नसीरूद्दीन शाह तीन बार राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किये गये है। फिल्म के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुये वह भारत सरकार की ओर से पदमश्री और पदमभूषण पुरस्कार से भी सम्मानित किये जा चुके है। नसीरूद्दीन शाह ने करीब चार दशक लंबे सिने करियर में 200 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है। नसीरुद्दीन शाह आज भी उसी जोशोखरोश के साथ फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jul 2024 14:57:39 +0530</pubDate>
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