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                <title>Kapil Sibal - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Kapil Sibal RSS Feed</description>
                
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                <title>सुप्रीम कोर्ट का कलकत्ता हाईकोर्ट को निर्देश, TMC कार्यालय से बिलबोर्ड हटाने के मामले पर जल्द सुनवाई करने को कहा</title>
                                    <description><![CDATA[उच्चतम न्यायालय ने कलकत्ता उच्च न्यायालय को निर्देश दिया कि वह तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यालय से कोलकाता नगर निगम द्वारा बिलबोर्ड हटाए जाने के खिलाफ याचिका पर शीघ्रता से फैसला सुनाए। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल बिलबोर्ड हटा दिए जाने से मामला निष्प्रभावी या समाप्त नहीं हो जाता।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-court-directs-calcutta-high-court-to-quickly-hear-the/article-164910"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/supreme-court-of-india.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय से कहा कि वह तृणमूल कांग्रेस की उस याचिका पर जल्द सुनवाई करे जिसमें कोलकाता नगर निगम द्वारा पार्टी के कोलकाता स्थित कार्यालय से एक बिलबोर्ड हटाए जाने को चुनौती दी गई है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की खंडपीठ तृणमूल कांग्रेस की उस विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो उच्च न्यायालय द्वारा इस मामले में अंतरिम राहत देने से इनकार करने के खिलाफ दायर की गई थी।</p>
<p>यह याचिका कोलकाता में कैमक स्ट्रीट पर तृणमूल कांग्रेस के दफ़्तर के ऊपर लगे एक बिलबोर्ड को कथित रूप से ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से हटाए जाने से जुड़ी है। पश्चिम बंगाल की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाए, जबकि तृणमूल के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि बिना किसी नोटिस के बिलबोर्ड को हटा दिया गया था।</p>
<p>खंडपीठ ने कहा कि बिलबोर्ड हटाने से केस निरर्थक नहीं हो जाता और अगर उसे हटाना गैर-कानूनी सिद्ध होता है तो उसे फिर से लगाया जा सकता है। शीर्ष अदालत ने याचिका का निपटारा करते हुए दोनों पक्षों को उच्च न्यायालय के सामने अपनी दलीलें रखने की छूट दी और उच्च न्यायालय से सभी मुद्दों पर जल्द से जल्द फैसला करने का अनुरोध किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 16:48:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एकल पट्टा प्रकरण: पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक शांति धारीवाल को बड़ा झटका, सु्प्रीम कोर्ट ने की याचिका खारिज, गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान के बहुचर्चित एकल पट्टा घोटाले में कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री शांति धारीवाल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा धक्का लगा है। शीर्ष अदालत ने उनकी विशेष अनुमति याचिका सुनने से इंकार करते हुए खारिज कर दी और हाईकोर्ट के 1 नवंबर के आदेश को बरकरार रखा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/single-lease-case-big-blow-to-former-minister-and-congress/article-134301"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/shanti-dhariwal.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान के बहुचर्चित एकल पट्टा घोटाले में पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका मिला है। बता दें कि, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका को सुनने से इंकार करते हुए याचिका खारिज कर दी। शीर्ष अदालत में जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस विजय विश्नोई की बैंच ने उनकी विशेष अनुमति याचिका को सुनने से इंकार करते हुए हाईकोर्ट के 1 नवंबर के आदेश को बरकरार रखा। हांलाकि, शीर्ष अदालत ने जयपुर में एसीबी कोर्ट में लंबित प्रोटेस्ट पिटीशनों के निपटारे से पहले धारीवाल की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।</p>
<p>इसके आगे शीर्ष अदालत की बेंच ने कहा कि, धारीवाल के खिलाफ भ्रष्टाचार मामले में कानूनी प्रक्रिया ट्रांयल कोर्ट ही आगे की कार्रवाई को पूरी करेगा। बताया जा रहा है कि, शीर्ष अदालत में कपिल सिब्बल ने शांति धारीवाल का पक्ष रखा था, जबकि राजस्थान सरकार की तरफ से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिमवंगल शर्मा ने। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, हाईकोर्ट इस मामले में पहले ही निर्देश दे चुका है कि, क्लोजर रिपोर्ट और प्रोटेस्ट पिटशनों का निपटारा ट्रायल कोर्ट करेगा, लेकिन फिर भी धारीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। </p>
<p><strong>क्या है पूरा मामला?</strong></p>
<p>दरअसल, जयपुर विकास प्राधिकरण ने 29 जून 2011 को गणपति कंस्ट्रक्शन के मालिक शैलेंद्र गर्ग के नाम से पट्टा जारी किया था। सरकार का आरोप है कि, जेडीए ने पिछले रिजेक्शन की जानकारी को इक्ट्टा किए बिना ही शैलेंद्र गर्ग के नाम से नया पट्टा जारी किया जिसमें काफी बड़ा भ्रष्टाचार हुआ और करोड़ों रूपए का लेन देन हुआ। इसके बाद, साल 2013 में रामशरण सिंह (परिवादी) ने जयपुर एसीबी में शिकायत दर्ज करवाई थी, जिसके बाद इस मामले में तत्त्कालीन गहलोत सरकार ने पट्टा रद्द किया था और जांच के आदेश जारी किए ​थे। बता दें कि, उस समय इस मामले में करीब 6 लोगों की ​गिरफ्तारी भी हुई थी और तत्कालीन यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल भी जांच के घेरे में आ गए ​थे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Dec 2025 16:34:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पेगासस जासूसी मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, CJI बोले- मीडिया रिपोर्ट्स सही हैं तो आरोप काफी गंभीर</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने पेगासस जासूसी मामले में याचिकाओं की प्रतियां केंद्र सरकार को सौंपने का निर्देश देते हुए गुरुवार को कहा कि यदि मीडिया में आई खबरें सही हैं, तो आरोप काफी गंभीर हैं। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए अगले मंगलवार की तारीख मुकर्रर की, लेकिन केंद्र सरकार को कोई औपचारिक नोटिस जारी नहीं किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%AA%E0%A5%87%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%B8-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%88--cji-%E0%A4%AC%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A5%87--%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%A1%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B8-%E0%A4%B8%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%A4%E0%A5%8B-%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%AA-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%AB%E0%A5%80-%E0%A4%97%E0%A4%82%E0%A4%AD%E0%A5%80%E0%A4%B0/article-1355"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-06/supreme_court.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पेगासस जासूसी मामले में याचिकाओं की प्रतियां केंद्र सरकार को सौंपने का निर्देश देते हुए गुरुवार को कहा कि यदि मीडिया में आई खबरें सही हैं, तो आरोप काफी गंभीर हैं। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए अगले मंगलवार की तारीख मुकर्रर की, लेकिन केंद्र सरकार को कोई औपचारिक नोटिस जारी नहीं किया। मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की खंडपीठ ने सभी याचिकाकर्ताओं के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद उन्हें निर्देश दिया कि वे याचिकाओं की प्रति केंद्र सरकार को सौंपे। <br /> <br /> सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले में केंद्र सरकार की मौजूदगी के बिना खंडपीठ आगे की सुनवाई नहीं कर सकती। हालांकि कोर्ट ने मामले में फिलहाल औपचारिक नोटिस जारी नहीं किया। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पत्रकारों, विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की जासूसी का मुद्दा अहम है। उन्होंने कहा कि अगर मीडिया रिपोर्ट्स सही है, तो यह आरोप काफी गंभीर है। शीर्ष अदालत की यह टिप्पणी उस वक्त आई जब जाने-माने पत्रकार एन रवि की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि पेगासस के जरिए आम आदमी के जीवन में सेंध लगाई गई है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने सिब्बल से सवाल किया कि आखिर दो साल बाद यह मुद्दा कैसे उछल गया। सिब्बल ने जवाब दिया कि पेगासस जासूसी मामले के व्यापक प्रभाव के बारे में उन्हें पहले जानकारी नहीं थी। <br /> <br /> उन्होंने कहा कि सरकार यदि जासूसी मामले के बारे में जानती है तो उसने कार्रवाई क्यों नहीं की। सिब्बल ने कहा कि पेगासस स्पाइवेयर केवल सरकार को ही बेचा जा सकता है, ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या उसने इसके लिए धन खर्च किया। एक अन्य याचिकाकर्ता जगदीप छोकर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने दलील दी कि उन्होंने प्राथमिकी इसलिए नहीं दर्ज कराई क्योंकि मामले की स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है। विभिन्न याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार और राकेश द्विवेदी ने भी पक्ष रखा। कोर्ट ने सबसे पहले याचिका दायर करने वाले मनोहर लाल शर्मा को सुनने के बाद कहा कि वह किसी भी याचिका में प्रतिवादी बनाए गए व्यक्तियों को फिलहाल नोटिस जारी नहीं करेगा। कोर्ट ने कहा कि वह केंद्र सरकार के विधि अधिकारियों की गैर-मौजूदगी में नोटिस जारी नहीं करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Aug 2021 17:43:21 +0530</pubDate>
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