<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/professional-courses/tag-48837" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>professional courses - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/48837/rss</link>
                <description>professional courses RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>50 हजार की डिग्री अब 19 हजार में मिलेगी </title>
                                    <description><![CDATA[गवर्नमेंट साइंस में बीसीए व कॉमर्स कॉलेज में बीबीए की मिली सौगात]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/50-thousand-degree-will-now-be-available-for-19-thousand/article-95018"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/6630400-sizee-(4)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए सरकार ने शहर के सरकारी कॉलेजों में प्रोफेशनल कोर्सेज शुरू कर दिए हैं। ताकि, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थी महंगी फीस के कारण व्यवसायिक शिक्षा से वंचित न रहे और इंडस्ट्री की डिमांड के अनुरूप अपनी कार्य क्षमता को निखार सके। साथ ही वर्तमान समय की आवश्यकता के अनुरूप प्रोफेशनल एम्पलोइज बन आजीविका चलाने में सक्षम बन सके।  सरकार की इस पहल से मध्यम व आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को संबल मिलेगा। दरअसल, प्राइवेट कॉलेजों में प्रोफेशनल कोर्सेज की महंगी फीस को देखते हुए सरकार ने राजकीय महाविद्यालयों में रोजगारोन्नमुखी कोर्सेज शुरू किए हैं। गवर्नमेंट कॉलेज कोटा में बैचलर आॅफ कम्प्यूटर एप्लीकेशन (बीसीए) व   राजकीय वाणिज्य महाविद्यालय में बैचलर आॅफ बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन (बीबीए) की सौगात दी है। </p>
<p><strong>सरकारी में 6 तो निजी कॉलेज में 17 हजार सालाना फीस</strong><br />गवर्नमेंट कॉलेज कोटा की प्राचार्य प्रो. प्रतिमा श्रीवास्तव कहतीं हैं, सरकार ने बैचलर आॅफ कम्प्यूटर एप्लीकेशन (बीसीए) डिग्री कोर्स की सौगात दी है। सरकारी कॉलेज में बीसीए की सालाना फीस साढ़े 6 हजार है, जबकि प्राइवेट कॉलेज में 17 हजार है। ऐसे में निजी इंस्टीट्यूड में तीन साल की फीस 50 हजार से ऊपर पहुंच जाती है और सरकारी में 17 हजार में ही डिग्री पूरी हो जाएगी। इसके अलावा यहां इंडस्ट्री विजिट, एक्सपर्ट गेस्ट लेक्चर, विषय-विषयज्ञों से सेमिनार सहित पर्सनालटी व स्किल डवलपमेंट एक्टिविटी भी कैरिकुलम में शामिल की गई है। ताकि, कोर्स पूरा होने तक विद्यार्थी मार्केट की आवश्यकता के अनुसार प्रोफेशनल एम्पलोइज के रूप में तैयार हो सके।  </p>
<p><strong>व्यवसायिक शिक्षा से निखरेगा कौशल</strong><br />शिक्षाविदें का कहना है, निजी कॉलेजों में व्यवसायिक प्रोफेशनल कोर्सेज की फीस काफी महंगी होती है, जिसकी वजह से आर्थिक रूप से कमजोर तथा मध्यम वर्ग के विद्यार्थी बीसीए व बीबीए जैसे प्रोफेशन कोर्स नहीं कर पाते और रोजगार की दौड़ में पिछड़ जाते हैं। सरकार द्वारा सरकारी कॉलेजों में इन कोर्सेज को शुरू करना उच्च शिक्षा की दिशा में सहरानीय कदम है। यहां मामूली फीस में बेहतर साधन-संसाधनों व क्वालीफाइड फैकल्टी के साथ प्रोफेशनल कोर्स कर मल्टीनेशनल कम्पनियों में जॉब पा सकेंगे। सरकार के इस प्रयास से न केवल छात्रों का कौशल निखरेगा बल्कि रोजगार की दिशा में भी आगे बढ़ेंगे। विद्यार्थी खुद का व्यवसाय भी शुरू कर सकेंगे। </p>
<p><strong>यूजीसी मापदंडों पर शिक्षकों का चयन</strong><br />कॉलेज शिक्षा के सहायक क्षेत्रिय अधिकारी डॉ. गीताराम शर्मा ने बताया कि गवर्नमेंट कॉलेज में बीसीए की विद्या संबल पर तीन फैकल्टी लगाई गई है। शिक्षकों का चयन यूजीसी के तय मापदंड  पर ही की जाती है। जिसमें पीएचडी, नेट या सलेट क्वालिफाइड अभ्यर्थियों का ही चयन किया जाता है। ऐसे में सरकारी कॉलेज में वेल क्वालिफाइड शिक्षक हैं, जो विद्यार्थियों को कम्प्यूटर पढ़ा रहे हैं। इसके अलावा सरकार के रिसोर्सेज का लाभ भी विद्यार्थियों को रोजगार के रूप में मिलता है।</p>
<p><strong>लैब व कम्प्यूटर की उपलब्धता भी अधिक</strong><br />गवर्नमेंट साइंस कॉलेज के पास बड़ी लैब है, जहां 18 से 20 कम्प्यूटर हैं। इसके अलावा कॉलेज प्रशासन ने नई लैब बनाने व कम्प्यूटर सहित अन्य संसाधनों की उपलब्धता के लिए प्रस्ताव बनाकर आयुक्तालय भेजा है। जहां से स्वीकृति मिलते ही हाईटेक लैब तैयार की जाएगी। इसके अलावा प्लेसमेंट सेल भी आईटी कम्पनियों से समनव्य स्थापित कर रही है। </p>
<p><strong>इधर, बीबीए की सौगात </strong><br />राजकीय वाणिज्य महाविद्यालय में सरकार ने बैचलर आॅफ बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन (बीबीए) कोर्स खोला है। हालांकि, वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति देरी से मिलने के कारण एडमिशन प्रक्रिया में अनावश्यक देरी हो गई। जिसकी वजह से पर्याप्त एडमिशन नहीं मिल पाए। वर्तमान में 9 सीटें भर चुकी हैं और कोर्स चलाने के लिए 10 विद्यार्थियों का एडमिशन होना जरूरी है। ऐसे में कॉलेज प्रशासन आवेदन करने वाले विद्यार्थियों से समम्पर्क कर कन्वेंस कर रहा है। संभव: इसी माह से यहां बीबीए कोर्स शुरू हो जाएगा।  </p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी</strong><br />कम फीस में बेहतर सुविधाओं के साथ प्रोफेशनल बीसीए कोर्स करने का मौका मिला है। सरकार की इस पहल से ग्रामीण परिवेश से आने वाले विद्यार्थियों को संबल मिला है और रोजगार की दिशा में यह प्रयास मिल का पत्थर साबित होगा। गवर्नमेंट साइंस कॉलेज प्रशासन ने क्वालिफाइड शिक्षक लगाए हैं। कम्प्यूटर लैब में भी पर्याप्त कम्प्यूटर हैं। नियमित क्लासें लग रही हैं। फेकल्टी भी थ्योरी के बाद प्रेक्टिकल करवाती है। <br /><strong>-परमेंद्र सिंह, चारू कुमारी, मयंक, छात्र </strong></p>
<p>प्राइवेट कॉलेजों में बीसीए की तीन साल की फीस 50 हजार से ऊपर जाती है। ऐसे में मध्यम वर्ग के विद्यार्थियों के लिए यह कोर्स कर पाना आसान नहीं होता। गवर्नमेंट साइंस कॉलेज में यह कोर्स खुलने से बड़ी संख्या में विद्यार्थी प्रोफेशनल कोर्सेज कर पाएंगे। शिक्षक लैब में हर डाउट का सॉल्यूशन देते हैं। सरकार को इस तरह के अन्य प्रोफेशनल कोर्सेज भी शुरू करना चाहिए। <br /><strong>-रणजीत कुमार, योगेंद्र, आसिफ मंसूरी, छात्र </strong></p>
<p><strong>बढ़ेगा रोजगार, तैयार होंगे प्रोफेशनल्स  </strong><br />प्राइवेट कॉलेजों  व इंस्टीट्यूड्स में बीसीए व बीबीए जैसे प्रोफेशनल कोर्सेज की महंगी फीस होने के चलते कई प्रतिभाशाली विद्यार्थी वंचित रह जाते हैं। जबकि, यह कोर्सेज वर्तमान की आवश्यकता है। सरकारी हो या प्राइवेट सेक्टर हर जगह सभी कार्य आॅनलाइन हो गए हैं। ऐसे में मार्केट में आईटी प्राफेशनल की डिमांड बढ़ गई। वहीं, कई कम्पनियां खुदरा व्यवसाय में कई प्रोजेक्ट चला रही है। जिससे मैनेजमेंट एम्पलोइज की भी आवश्यकता बढ़ी है। ऐसे में सरकार ने सरकारी कॉलेजों में बीसीए व बीबीए जैसे प्रोफेशनल कोर्सेज शुरू किए हैं, ताकि युवाओं को रोजगार मिल सके। <br /><strong>-प्रो. गीताराम शर्मा, क्षेत्रिय सहायक निदेशक, कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/50-thousand-degree-will-now-be-available-for-19-thousand/article-95018</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/50-thousand-degree-will-now-be-available-for-19-thousand/article-95018</guid>
                <pubDate>Thu, 14 Nov 2024 14:33:17 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-11/6630400-sizee-%284%296.png"                         length="661042"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शहर के सरकारी कॉलेजों में प्रोफेशनल कोर्सेज का टूटा दम</title>
                                    <description><![CDATA[शहर के दो बड़े कॉलेजों को एमबीए व एमसीए कोर्स शुरू करने की सरकार से वित्तिय व प्रशानिक स्वीकृति मिल चुकी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/professional-courses-in-government-colleges-of-the-city-are-in-shambles/article-92574"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/4427rtrer-(1)12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिले के सरकारी कॉलेजों में प्रोफेशनल कोर्सेज दम तोड़ रहे हैं। नई शिक्षा नीति के तहत शुरू किए बीबीए, एमबीए कोर्स व कम्प्यूटर साइंस सब्जेक्ट सरकारी मशीनरी की उपेक्षा की भेंट चढ़ गए। वहीं, राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय, अब तक एमएससी व एमए कोर्स में एडमिशन प्रोसेज भी शुरू नहीं कर सका। इनमें सबसे ज्यादा खराब स्थिति गवर्नमेंट कॉमर्स की है। यहां बीबीए में 60 सीटों पर मात्र 3 ही एडमिशन हुए हैं। ऐसे में इस वर्ष बीबीए कोर्स शुरू होना मुश्किल है। वहीं, राजकीय कला महाविद्यालय कोटा में मात्र 16 विद्यार्थियों ने कम्प्यूटर विषय लिया है। जबकि, सीट 80 है। ऐसे में स्टूडेंट्स व शिक्षक असमंजस के दोहरे भंवर में फंस गए। जिन पाठ््यक्रमों में विद्यार्थियों ने एडमिशन ले लिया वहां, कक्षाएं सस्पेंड होने का खतरा हो गया। वहीं, कॉलेज प्रशासन के लिए निर्धारित एडमिटेड स्टूडेंट्स संख्या के अभाव में कोर्सेज चलाना व दिसम्बर से पहले सेमेस्टर एग्जाम की तैयारी करवाना समझ से परे है। </p>
<p><strong>इस साल बीबीए कोर्स चलना मुश्किल</strong><br />राजकीय वाणिज्य महाविद्यालय में बीबीए कोर्स का इस वर्ष संचालित होना मुश्किल लग रहा है। यहां 60 सीटों पर मात्र 3 ही एडमिशन हुए हैं। जबकि, आवेदन 16 विद्यार्थियों ने किया था। लेकिन, फीस मात्र तीन ही स्टूडेंट्स ही जमा करवा सके। इधर, कॉलेज प्रशासन फीस जमा करवाने के लिए छात्रों से सम्पर्क कर रहा फिर भी छात्र रुचि नहीं दिखा रहे। कक्षाएं शुरू करने के लिए 10 छात्रों का एडमिशन लेना आवश्यक है। </p>
<p><strong>एमबीए व एमसीए का अता-पता नहीं</strong><br />शहर के दो बड़े कॉलेजों को एमबीए व एमसीए कोर्स शुरू करने की सरकार से वित्तिय व प्रशानिक स्वीकृति मिल चुकी है। लेकिन कॉमर्स कॉलेज को एमबीए एडमिशन पॉलीसी को लेकर कोई गाइड लाइन नहीं मिली। वहीं, एआईसीटी द्वारा पोर्टल नहीं खोले जाने से गवर्नमेंट साइंस कॉलेज एमसीए में प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं कर सका। शिक्षाविदें का तर्क है, सत्र 2024-25 में यह कोर्स शुरू नहीं हो सकते। विद्यार्थियों को एडमिशन के लिए अब अगले वर्ष का इंतजार करना होगा। </p>
<p><strong>आरटीयू शुरू नहीं कर सका एमएससी व एमए </strong><br />राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय अपने कोटा कैम्पस में नॉन इंजीनियरिंग एमएससी व एमए पोस्ट ग्रेजुएशन पाठ्यक्रम अब तक शुरू नहीं कर सका। जबकि, आरटीयू द्वारा सितम्बर माह में ही प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने के दावे किए गए थे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, एडमिशन कोर्डिनेशन कमेटी का समय पर गठित न होना, सिलेबस पूरी तरह से तैयार न होना, बोर्ड आॅफ स्टडीज की दूसरी बैठक अब तक न होना सहित कई प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। </p>
<p><strong>कम्प्यूटर साइंस : 80 सीटों पर 16 विद्यार्थी</strong><br />राजकीय कला महाविद्यालय में विद्यार्थियों को रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से सरकार ने इसी सत्र से कम्प्यूटर विषय खोला है। प्रचार-प्रसार के बावजूद विद्यार्थियों ने कम्प्यूटर विषय चुनने में रुचि नहीं दिखाई। एक सेशन में 80 सीटें हैं और 16 विद्यार्थियों ने ही कम्प्यूटर सब्जेक्ट लिया है। जबकि, यह ऐच्छिक विषय है फिर भी छात्रों ने रुझान नहीं दिखाया। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी</strong><br />बीबीए में एडमिशन तब शुरू हुए जब बीकॉम प्रथम वर्ष की प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। ऐसे में हम बीकॉम छोड़ बीबीए में कैसे दाखिला  लेते। प्रोफेशनल कोर्स के बुरे हाल के लिए जिम्मेदार सरकार की लेटलतीफी है। <br /><strong>-योगेंद्र चंद, ज्ञानदेव कुमार, आशिष शृंगी, छात्र कॉमर्स</strong></p>
<p>आरटीयू से इंग्लिश में एमए करना चाहता हूं। लेकिन, अब तक एडमिशन प्रोसेज ही शुरू नहीं किया। जबकि, पूर्व में सितम्बर से किए जाने की बात कही गई थी। गवर्नमेंट कॉलेज में ही अंग्रेजी में पीजी होती है, जहां सीटे लिमिटेड होने के कारण एडमिशन नहीं मिल पाया।<br /><strong>-सुरेश कहार, हर्षित मेहता, छात्र </strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं प्राचार्य</strong><br />बीबीए में 16 स्टूडेंट्स ने आवेदन किए थे लेकिन 3 ने ही फीस जमा करवाई है। एडमिशन प्रोसेज में देरी बड़ा कारण रही है। जबकि, कोर्स का व्यापक प्रचार-प्रयास भी किया है। लेकिन, अधिकतर विद्यार्थी बीकॉम व अन्य कोर्सेज में एडमिशन ले चुके हैं। ऐसे में रुझान कम दिखा। हालांकि, अगले सत्र में अच्छा रेस्पोंस देखने को मिलेगा।<br /><strong>-हितेंद्र कुमार, प्राचार्य गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेज </strong></p>
<p>विद्यार्थियों को रोजगार से जोड़ने के लिए सरकार ने कम्प्यूटर साइंस विषय खोला है। जिसका व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया। सब्जेक्ट चुनाव के लिए आयुक्तालय द्वारा दो बार अंतिम तिथि बढ़ाकर मौका भी दिया। इसके बावजूद अब तक 16 ही विद्यार्थियों ने कम्प्यूटर विषय का चयन किया है। रुझान कम होने के कई कारण हो सकते हैं।<br /><strong>-प्रो. रोशन भारती, प्राचार्य गवर्नमेंट साइंस कॉलेज</strong></p>
<p>हमारी बेहतर व्यवस्थाएं, प्रचार प्रसार, दृढ़ इच्छा शक्ति का ही परिणाम है, जो बीसीए कोर्स में दाखिले के लिए विद्यार्थियों ने जबरदस्त रुझान दिखाया। यहां 40 सीटों पर 21 स्टूडेंट्स ने दाखिला लिया है। जिनकी कक्षाएं भी शुरू करवा दी गई हैं। इन्हें पढ़ाने के लिए विद्या संबल पर वैल क्वालिफाइड तीन शिक्षक नियुक्त किए हैं। <br /><strong>-प्रो. प्रतिमा श्रीवास्तव, प्राचार्य गवर्नमेंट साइंस कॉलेज</strong></p>
<p><strong>आरटीयू ने नहीं दिया जवाब</strong><br />खबर के संबंध में नवज्योति ने आरटीयू के परीक्षा नियंत्रक प्रो. रंजन माहेश्वरी से सम्पर्क करने के लिए फोन किए, मैसेज किए लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/professional-courses-in-government-colleges-of-the-city-are-in-shambles/article-92574</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/professional-courses-in-government-colleges-of-the-city-are-in-shambles/article-92574</guid>
                <pubDate>Tue, 08 Oct 2024 16:46:09 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-10/4427rtrer-%281%2912.png"                         length="661244"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिक्षा क्षेत्र में महंगे प्रोफेशनल कोर्सेज के लिए फंडिंग के विकल्प बढ़ाए जाने की जरूरत</title>
                                    <description><![CDATA[स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालयों से लेकर ट्रेनिंग, स्किल डेवलेपमेंट, कोचिंग इंस्टीट्यूट्स और एडुटेक स्टार्टअप्स को भी काफी उम्मीदें है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/there-is-a-need-to-increase-funding-options-for-expensive/article-85599"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/education.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। केन्द्र सरकार से शिक्षा बजट बढ़ाने की मांग की जा रही है। फिलहाल शिक्षा पर सरकार जीडीपी के ढाई से 3 फीसदी के बीच ही रकम आवंटित करती है, जिसे बढ़ाकर कम से कम 5 या 6 परसेंट किए जाने की मांग है। इस बार के बजट से एजुकेशन सेक्टर भी काफी आस लगाए बैठा है। स्कूल, कॉलेज विश्वविद्यालयों से लेकर ट्रेनिंग, स्किल डेवलेपमेंट, कोचिंग इंस्टीट्यूट्स और एडुटेक स्टार्टअप्स को भी इस बजट से काफी उम्मीदें हैं। अगर कुछ मुख्य डिमांड्स की बात करें तो एजुकेशन सेक्टर महंगे प्रोफेशनल कोर्सेस के लिए फंडिंग के विकल्प बढ़ाए जाने की मांग कर रहा है। इसके साथ ही सभी एजुकेशन सर्विसेज पर लगने वाले जीएसटी में छूट, शिक्षा की बुनियादी सुविधाओं का ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और आर्थिक तौर पर पिछड़े स्टूडेंट्स के लिए शैक्षिक खर्चों पर 100 फीसदी जीएसटी की छूट जैसी कई मांगे हैं, जिनके लिए इस सेक्टर के स्टेकहोल्डर्स को काफी उम्मीदें हैं। कुल मिलाकर भी शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरत के लिए 18 फीसदी जीएसटी को जानकार घटाने की मांग कर रहे हैं। </p>
<p><strong>ग्रामीण क्षेत्रों में एजुकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाना होगा</strong><br />एजुकेशन सेक्टर का मानना है कि अगर भारत का लक्ष्य शिक्षा में विश्व गुरु बनना है तो उसे ग्रामीण क्षेत्रों में एजुकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाना होगा। इसके साथ ही टीचर्स ट्रेनिंग, टेक्नोलॉजी और हायर एजुकेशन के लिए निवेश को प्रोत्साहित करना होगा। </p>
<p><strong>देश में 15 लाख स्कूल, 25 करोड़ छात्र</strong><br />डिजिटल एजुकेशन को बढ़ावा दिए जाने की डिमांड भी ये सेक्टर कर रहा है, जिससे 15 लाख से ज्यादा स्कूलों और 25 करोड़ से ज्यादा छात्रों वाले देश का एजुकेशन सिस्टम दुरुस्त किया जा सके। शिक्षा विशेषज्ञ डॉ.आरबी कुमावत ने कहा कि अब आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का भी एजुकेशन सिस्टम में इस्तेमाल बढ़ाने के लिए नीति बनाए जाने की मांग बजट में कर रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/there-is-a-need-to-increase-funding-options-for-expensive/article-85599</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/there-is-a-need-to-increase-funding-options-for-expensive/article-85599</guid>
                <pubDate>Tue, 23 Jul 2024 11:32:48 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-12/education.png"                         length="301208"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        