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                <title>Ganesh Temple - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Ganesh Temple RSS Feed</description>
                
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                <title>भव्य अभिषेक का नजारा! मोती डूंगरी गणेश मंदिर में 151 किलो दूध से स्नान, 1001 मोदक चढ़ाए गए</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर के प्रसिद्ध मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में रविवार को भव्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। महंत कैलाश शर्मा के सानिध्य में भगवान गणपति का 151 किलो दूध और पंचामृत से अभिषेक किया गया। सहस्त्रनाम पाठ के साथ 1001 मोदकों का भोग लगाया गया, जिसके बाद गजानन नवीन पोशाक में 'फूल बंगले' में विराजमान हुए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/view-of-the-grand-abhishek-bathing-with-151-kg-milk/article-145052"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/moti-dungari.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मोतीडूंगरी स्थित श्री गणेश जी मंदिर में रविवार प्रातः विशेष धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया। सुबह भगवान गणपति महाराज का 151 किलो दूध, 21 किलो दही, 21 किलो बूरा, घी, शहद, केवड़ा जल, गुलाब जल, केवड़ा इत्र एवं गुलाब इत्र से अभिषेक किया गया।</p>
<p>मंदिर के महंत कैलाश शर्मा ने बताया कि सबसे पहले भगवान का गंगाजल, केवड़ा जल और गुलाब जल से पवित्र स्नान कराया गया। इसके पश्चात पंचामृत से विधिवत अभिषेक सम्पन्न हुआ। तत्पश्चात पुनः गंगाजल से शुद्ध स्नान कराकर विशेष पूजा-अर्चना की गई।</p>
<p>प्रातः 11 बजे भगवान श्री गणपति के सहस्त्रनाम पाठ के साथ 1001 मोदकों का अर्पण किया गया। इस दौरान भगवान को नवीन पोशाक धारण कराई गई और विशेष खीर का भोग भी लगाया गया। अनुष्ठान के पश्चात भगवान श्री गणपति फूल बंगले में विराजमान हुए। मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 18:00:00 +0530</pubDate>
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                <title>गणेश मंदिर में प्रतिमा से चांदी का छत्र और दानपात्र से नगदी चोरी; श्रद्धालुओं में भारी रोष, चोरों को गिरफ्तार करने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[अजमेर में चोरों ने गंज स्थित कार्यसिद्ध विनायक गणेश मंदिर को निशाना बनाकर चांदी का छत्र और दान पात्र से बड़ी नकदी पार कर दी। इससे पहले महादेव मंदिर में भी चोरी हुई थी। साल में एक बार खुलने वाले दान पात्र की चोरी से भंडारा आयोजन पर संकट आ गया है। गंज थाना पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/silver-umbrella-from-the-idol-and-cash-from-the-donation/article-144603"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/ajmer-news.png" alt=""></a><br /><p>अजमेर। अजमेर में चोरों के हौसले बुलंद है। चोर इनदिनों मंदिरों को भी अपना निशाना बना रहे हैं। अलखनंदा कॉलोनी स्थित महादेव मंदिर से चांदी के नागराज चोरी करने के बाद अब चोरों ने गंज स्थित कार्यसिद्ध विनायक गणेश मंदिर को भी अपना निशाना बनाया है। चोर गणेश मंदिर में प्रतिमा पर लगे चांदी के छत्र को चोरी कर ले गए। जिससे मंदिर के श्रद्धालुओं में भारी रोष है। </p>
<p>मंदिर के पुजारी केसरीमल ने बताया कि चोर मंदिर से चांदी का छत्र चोरी करने के साथ ही दान पात्र से नगदी भी चुराकर ले गए। उन्होंने बताया कि दान पात्र वर्ष में सिर्फ एक बार गणेश चतुर्थी के मौके पर ही खोला जाता है। जिससे मंदिर में भंडारे का आयोजन किया जाता है। इसलिए उसमें भी बड़ी राशि होने की संभावना है। फिलहाल गंज थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Feb 2026 18:21:01 +0530</pubDate>
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                <title>मोती डूँगरी गणेश मंदिर में होगा फागोत्सव : गुलाल-गोटे एवं पुष्पों से खेलेंगे होली, फूलों के मंडप में सजेंगे गणपति</title>
                                    <description><![CDATA[गणेश मंदिर में फागोत्सव का आयोजन होगा। गणेश जी बसंत की फाल्गुनी नवीन पोशाक करेंगे धारण। जयपुरी साफा से होगा विशेष श्रृंगार। पुष्पों के मंडप में रहेंगे विराजमान। सायं 4:30 बजे भक्तों के साथ होगी गुलाल-गोटे एवं पुष्पों से होली। 

]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/fagotsav-will-be-held-on-wednesday-25th-february-at-moti/article-144408"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/moti-dungari.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मोती डूंगरी गणेश मंदिर में फागोत्सव का आयोजन बुधवार को आयोजित होगा। इस अवसर पर भगवान श्री गणेश जी बसंत की फाल्गुनी नवीन पोशाक धारण करेंगे। साथ ही मोट्यार स्वरूप में जयपुरी साफा से उनका विशेष श्रृंगार किया जाएगा। भगवान पुष्पों से सजे फूलों के मंडप में विराजमान रहेंगे।</p>
<p>सायं 4:30 बजे भगवान भक्तों के साथ गुलाल-गोटे एवं पुष्पों से होली खेलेंगे। इसके पश्चात सायं 6 से 8:30 बजे तक डफ एवं चंग का विशेष आयोजन रहेगा।जिसमें शेखावाटी की पारंपरिक धुनों पर भक्तजन फागोत्सव का आनंद लेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Feb 2026 18:25:28 +0530</pubDate>
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                <title>पाटनपोल भैरूगुदड़ी के मनभावन अब जलेबी वाले गणेश से विख्यात</title>
                                    <description><![CDATA[मूषक पर सवारी मनभावन गणेश के साथ सिद्धी- रिद्धी भी है विराजमान।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/manbhavan-of-patanpol-bhairu-guddi-is-now-famous-as-jalebi-wale-ganesh/article-125418"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/1ne1ws-(4)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। पाटनपोल भैरूगुदड़ी क्षेत्र स्थित मनभावन गणेश मंदिर, जिसे लोग श्रद्धा से जलेबी वाले गणेश जी भी कहते है। वर्तमान में श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यह मंदिर करीब तीन सौ साल पुराना बताया जाता है। इस मंदिर में जलेबी वाले गणेश मूषक पर सवार है। इनके पास दायीं तरफ सिद्धी व रिद्धी खड़े है। सवा चार फीट ऊंची प्रतिमा की सूंड दाहिनी तरफ है। यह मूर्ति दरबार ने यहां स्थापित करवाई थी तब से आज तक इनकी पूजा-अर्चना श्रद्धालु करते आ रहे है।  यह सवा किलो चांदी के आभूषण से सुशोभित हो रहे है। इस गणेश मंदिर में गंगा की मूर्ति भी है। इसमें नंदी की प्रतिमा नहीं है। यहां सूर्यदेव, ब्रह्मा, विष्णु, माता पार्वती, गंगा और शिवलिंग है। इस मंदिर में प्रति वर्ष कार्यक्रम होते रहते है। मनभावन गणेश जी को जलेबी गणेश भी कहा जाता है। मनभावन गणेश की सूंड ऐसी प्रतीत हो रही है जैसे सूंड से लड्डू स्वयं ले रहे है। इनके एक हाथ में फरसा, दूसरे में अंकुश, तीसरे में लड्डू और चौथे हाथ में रुद्राक्ष से सुशोभित है।</p>
<p><strong>जलेबी वाले गणेश मंदिर के विशेष कार्यक्रम</strong><br />- मंदिर सुबह छह बजे खुलता है<br />- हर बुधवार को मंदिर पूरे दिन श्रद्धालुओं के खुला रहता है<br />- मंदिर में आरती सुबह व शाम रोजाना होती है<br />- बुधवार के अलावा अन्य दिनों में शादी की मनोकामना के लिए आते हैं श्रद्धालु</p>
<p><strong>शादी की मनोकामना के लिए आते हैं भक्तजन</strong><br />मंदिर सदस्य रामूजी खारवाल व हरिनारायण दीक्षित ने बताया कि यहां अधिकांश व्यक्ति जिनकी शादी होने में कोई अड़चन आ रही है या कोई सगाई होने के बाद शादी में कोई व्यवधान उत्पन्न हो रहा है। ऐसे में श्रद्धालु यहां आकर अपनी मनोकामना मनभावन गणेश अर्थात जलेबी वाले गणेश से मांगते हैं। जब इच्छी पूर्ण हो जाती है तो अपनी श्रद्धानुसार भेंट भी चढ़ा जाते है। उनके अनुसार अभी डेढ साल के अंदर 85 जोड़ों की मनोकामना मांगने के बाद शादी हो चुकी है। इस मंदिर में हमेशा जलेबी का ही भोग लगाया जाता है तथा प्रसाद में भी यही वितरण किया जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालु बताते है कि जिन युवाओं तथा युवतियों के विवाह में अड़चन या विवाह होने में कोई दिक्कत आ रही है तो मनभावन गणेश मंदिर में धोक लगाने तथा अपनी ईच्छा से मन्नत मांगने से मन की मुराद पूरी हो जाती है।</p>
<p><strong>शादी की मांगी थी मन्नत जो पूरी हुई</strong><br />पाटनपाल भैरूगुदड़ी क्षेत्र में रहने वाले योगेश अग्रवाल ने बताया कि मेरी शादी के लिए कई अड़चन आ रही थी। फिर मैं मनभावन गणेश अर्थात जलेबी वाले गणेश मंदिर आकर मनोकामना की। साल भर के अंदर ही मेरी मनोकामना पूर्ण हो गई है। मेरी शादी लखनऊ में हुई है। शादी के बाद मैं और मेरा परिवार ने जलेबी वाले गणेशजी को धोक लगाई तथा अपनी इच्छानुसार भेंट रखी। जलेबी वाले गणेश सभी भक्तजनों की व्यथा हरते है तथा उनकी मनोकामना पूर्ण करते है।</p>
<p><strong>जलेबी वाले के नाम से हैं प्रसिद्ध</strong><br />श्रद्धालुओं ने बताया कि यहां मुख्य पुजारी पं. सत्यनारायण शर्मा है जो रोजाना जलेबी वाले गणेश की पूजा-अर्चना करते है तथा इनकी सेवाभाव का ध्यान रखते हैं। उनके अनुसार देवस्थान विभाग से भी सेवा के रूप में थोड़ी बहुत राशि मिलती है।  वैसे यह मंदिर सार्वजनिक है। सभी के सहयोग से मंदिर में कार्यक्रम आयोजित होते है। अभी पंडित सत्यनारायण जी बीमार होने के कारण जयपुर है। इनके स्थान पर अभी देखरेख  रामूजी खारवाल (सचिव) तथा हरिनारायण दीक्षित (कोषाध्यक्ष) मंदिर की देखरेख कर रहे है। मंदिर की देखरेख बूड गेपरनाथ महादेव सेवा समिति की ओर से देखरेख की जाती है। इस मंदिर में रात्रि आरती पं. तन्मय शर्मा करते है।  मंदिर में गणेश् चतुर्थी पर गणेश प्रतिमा भी बिठाई है जिसकी श्रद्धालु रोजाना उनकी सेवा-अर्चना में लगे हुए है। मुख्य मुख्य सड़क पर होने के कारण यहां आने जाने वाले सभी श्रद्धालु धोक लगाकर जाते है। रोजाना यहां पांच सौ से भी ज्यादा श्रद्धालु जलेबी वाले गणेश का दर्शनलाभ लेते है। मंदिर समिति के शैलेन्द्र (अध्यक्ष), लीलाधर मेहता (उपाध्यक्ष), अश्विनी खारवाल समेत कई सदस्य व श्रद्धालु मंदिर से जुड़े हुए है। यहां सालाना कार्यक्रम आयोजित होते है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Sep 2025 15:47:47 +0530</pubDate>
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                <title>सिंहद्वार के बाहर बिराजे भूरिया गणेश, विवाह से लेकर जीवन के हर शुभ कार्य में करते हैं याद </title>
                                    <description><![CDATA[शहर के भूरिया गणेश सिंहद्वार पोल के बाहर ही बिराजे है। यहां सैंकड़ों श्रद्धालु आते है। यह मंदिर मुख्य सड़क पर ही स्थित होने के कारण रोजाना दो से पांच हजार श्रद्धालु इनके दर्शन करते हुए जाते है
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/bhuria-ganesh-is-seated-outside-singhdwar/article-125413"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/1ne1ws-(3)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के भूरिया गणेश सिंहद्वार पोल के बाहर ही बिराजे है। यहां सैंकड़ों श्रद्धालु आते है। यह मंदिर मुख्य सड़क पर ही स्थित होने के कारण रोजाना दो से पांच हजार श्रद्धालु इनके दर्शन करते हुए जाते है। श्रद्धालुओं के अनुसार किसी का भी सामान चोरी होने या गुम होने पर भूरिया गणेश स्थान पर आकर सच्चे मन से आराधना करते है तो जल्द ही मिल जाता है। सिंहद्वार पर स्थित भूरिया गणेश मंदिर  श्रद्धालुओं की आस्था व मनोकामना का विशेष केंद्र है। यह मंदिर लगभग 250 साल पुराना है और आज भी अपनी प्राचीनता, मान्यताओं और ऐतिहासिक महत्व के कारण लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। सिंहद्वार पर स्थित यह मंदिर कोटा आने वाले हर व्यक्ति की आस्था का प्रमुख स्थल बन चुका है।</p>
<p><strong>मंदिर की स्थापना और इतिहास</strong><br />मुख्य पुजारी पं. सुशील गौतम ने बताया कि भूरिया गणेश मंदिर का इतिहास लगभग ढाई सौ साल पुराना है। इसे उम्मेदसिंहजी ने स्थापित किया था। शुरूआत में गणेशजी की यह मूर्ति दीनदयाल पार्क के सामने मिली थी। उस समय वहां श्मशान घाट हुआ करता था। किंवदती है कि  गणेशजी की मूर्ति जमीन के नीचे दबे होने के बाद मिली थी, बाद में इसे सिंहद्वार के पास लाकर स्थापित कर दिया गया। मूर्ति भूरे रंग के पत्थर पर विराजमान है, इसी कारण इन्हें भूरा गणेश नाम से जाना जाने लगा। यह मंदिर समय के साथ-साथ न सिर्फ धार्मिक स्थल बना बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी केंद्र बन गया।</p>
<p><strong>भूरिया गणेशजी को देते हैं न्योता</strong><br />कोटा शहर में जब भी शादी-ब्याह का समय आता है, तो दूल्हा-दुल्हन परिवार के लोग  भूरिया गणेशजी को न्योता देने जरूर आते हैं। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। लोग मानते हैं कि यहां आकर मन्नत मांगने पर इच्छाएं पूरी होती हैं और जब कामना पूरी हो जाती है, तो भक्त गणेशजी को भेंट चढ़ाकर धोक लगाते है। भूरिया गणेशजी  रिद्धि-सिद्धि के साथ विराजमान हैं। भक्तगण मानते हैं कि इस मंदिर में दर्शन करने मात्र से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और बाधाएं दूर होती हैं।</p>
<p><strong>मंदिर के विशेष कार्यक्रम</strong><br />-  रोजाना खुला रहता है मंदिर<br />- दोपहर 12 बजे व शाम 7 बजे होती है महाआरती<br />- रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु लगाते हैं धोक</p>
<p><strong>धार्मिक आयोजन और भीड़ का उत्साह</strong><br />हर साल गणेश चतुर्थी पर भूरिया गणेश मंदिर में विशेष आयोजन होता है। इस दिन गणेशजी का स्वर्ण शृंगार किया जाता है, जिसे देखने के लिए हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़ते हैं। अनुमान है कि इस दिन 15 से 20 हजार श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं। न केवल आम लोग बल्कि कई वीआईपी मेहमान और गणमान्य व्यक्ति भी इस आयोजन में शामिल होते हैं। इसके अलावा मंदिर में साल भर भजन संध्याएं, कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं। खासतौर पर बुधवार को यहां विशेष भीड़ रहती है क्योंकि यह दिन गणेशजी को समर्पित है।</p>
<p><strong>मिलती है सकारात्मक ऊर्जा</strong><br />गणेशजी को विघ्नहर्ता कहा जाता है और भूरिया गणेश मंदिर में यह विश्वास और भी गहरा दिखाई देता है। यहां आकर लोगों को मानसिक शांति, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। यही कारण है कि यहां श्रद्धालु केवल धार्मिक कार्यों के लिए ही नहीं बल्कि आस्था और आत्मबल प्राप्त करने के लिए भी आते हैं। किंवदती के अनुसार स्थानीय लोग बताते हैं कि गणेशजी की मूर्ति जब जमीन के नीचे से प्राप्त हुई थी, तो आसपास कई चमत्कारी घटनाएं घटीं। धीरे-धीरे लोगों का विश्वास बढ़ा और मंदिर की नींव रखी गई। तब से लेकर आज तक यह स्थान चमत्कारी स्थल भी कहा जाता है। 250 साल पुराना यह मंदिर समय के साथ और भी भव्य और प्रसिद्ध होता जा रहा है। मंदिर में भजन, शृंगार और श्रद्धा का जो अद्भुत संगम यहां देखने को मिलता है, वह भूरा गणेश मंदिर को कोटा शहर की अलग ही पहचान रखता है।</p>
<p><strong>सांस्कृतिक गतिविधियां और युवाओं की भागीदारी</strong><br />मंदिर केवल पूजा-पाठ का स्थान ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों का भी केंद्र है। नंदग्राम नवयुवक मंडल  हर साल गणेश बिठाते है। गणेश उत्सव के दौरान यहां विशेष आयोजन होते हैं और अनंत चतुर्दशी के दिन यहीं से भव्य विसर्जन यात्रा निकाली जाती है। इस अवसर पर न केवल स्थानीय लोग बल्कि बाहर से आने वाले श्रद्धालु भी शामिल होते हैं। मंदिर प्रांगण संगीत, नृत्य और भजन-कीर्तन से गूंज उठता है। नंदग्राम नवयुवक समिति के अध्यक्ष अनूप कुमार ने बताया कि यहां हर वर्ष गणेश प्रतिमा बिठाते है तथा दस दिनों रोजाना पूजा-अर्चना करते है, श्रद्धालु भी यहां कर पूजा-अर्चना कर धोक लगाते है। विसर्जन के दिन यहां मेले सा माहौल हो जाता है। पूरा शहर गणपति के जयकारे से गुंजायमान हो जाता है।</p>
<p><strong>मंदिर का अलग ही महत्व</strong><br />कोटा शहर शिक्षा नगरी के साथ-साथ पयर्टन नगरी के रूप में उभर रहा है। कोटा के भीतरी शहर में कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, जिनमें भूरिया गणेश मंदिर का अलग ही महत्व है। यह मंदिर मुख्य सड़क पर स्थित है, इसलिए यहां से गुजरने वाले हर व्यक्ति दर्शन करने के लिए रुक जाते है। कहा जाता है कि हर शहरवासी का जुड़ाव इस भूरिया गणेश से जरूर रहता है। अब इस मंदिर कोटा व अन्य राज्यों में इसकी ख्याति फैली हुई है। कोटा शहर के लोग जो देश व विदेश में रहते हैं वो किसी न किसी माध्यम से आॅनलाइन जुड़े रहते है।</p>
<p><strong>सेवाभाव और पुजारियों का योगदान</strong><br />वर्तमान में भूरिया गणेश के मुख्य पुजारी पं. सुशील गौतम ने बताया कि इस मंदिर की खास बात है कि इसकी पूजा पीढी दर पीढी न होकर जो उनकी सेवा से जो जुड़ता है वो ही  इनकी सेवा में लग जाता है। पहले यहां गोकुलप्रसाद सेवा करते थे उससे पहले कोई महिला श्रद्धालु उनकी सेवा करती थी। उससे पहले रियासतकालीन के दौरान श्रद्धालु सेवा करते थे। भूरा गणेश मंदिर में पीढ़ी दर पीढ़ी सेवा का इतिहास भी उतना ही गौरवशाली है। लगभग 150 सालों से इस मंदिर की नियमित सेवा चल रही है। सभी ने इस मंदिर में निस्वार्थ सेवा दी है। वर्तमान में मंदिर का स्वरूप भी काफी निखर चुका है। यहां आने वाले श्रद्धालु मन्नत लेकर आते है तथा मनोकामना पूरी होने पर अपनी इच्छा से भेंट चढ़ाकर जाते है। इसका कोई ट्रस्ट नहीं है। यह सार्वजनिक मंदिर है। यह मंदिर सभी श्रद्धालुओं के लिए खुला है। सच्चे मन से आने वाले भक्तजन की मनोकामना अवश्य पुरी होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Sep 2025 15:30:56 +0530</pubDate>
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                <title>आपणो सिद्धी विनायक अब एसी वाले बप्पा के नाम से प्रसिद्ध</title>
                                    <description><![CDATA[देश-विदेश के श्रद्धालु भी ऑनलाइन करते हैं दर्शन।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/apno-siddhi-vinayak-is-now-famous-as-ac-wale-bappa/article-125123"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws105.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जब भावना सच्ची हो, तो पेड़ भी देवता बन जाते हैं, और तकनीक भी पूजा का हिस्सा हो सकती है। आपणो सिद्धी विनायक गणेश मंदिर वर्तमान में एसी वाले बप्पा के रूप में कोटा शहर की धार्मिक पहचान बन चुके है। क्षेत्र के दादाबाड़ी क्षेत्र में स्थित लाल बाग आपणो सिद्धी विनायक गणेश मंदिर को अब एसी वाले बप्पा के रूप में लोग पहचानते है। इस मंदिर में प्राचीनकाल से धोकड़ा के पेड़ पर आपणों सिद्धी विनायक प्रतिमा अपने आप प्रकट हुई थी। लेकिन इसका ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। प्राचीनकाल में श्रद्धालुओं ने इस धोकड़ा पेड़ पर अपनी मनोकामना के लिए पर्ची बांधते थे। पूरी होने पर श्रद्धालु अपनी इच्छा भेंट चढ़ा जाते थे। अब वर्तमान में मंदिर का स्वरूप विस्तृत होने के साथ डिजिटल युग के चलते अब देश-विदेश में भी इसको एसी वाले बप्पा के रूप में पहचानने लग गए है। तथा विदेश से भी अब ऑनलाइन दर्शन करते हैं।</p>
<p><strong>ट्रस्ट से संचालित होता हैं मंदिर</strong><br />मुख्य पुजारी कमलकांत गौतम ने बताया कि यह मंदिर ट्रस्ट श्रीकृष्ण मुरारी गौशाला एसोसिएशन सोसायटी, कोटा की ओर से संचालित होता है। मंदिर में आयोजित होने वाले विशेष कार्यक्रमों में अध्यक्ष सतीश गोपालानी, सचिव व मंदिर प्रभारी श्याम स्वरूप रोहिड़ा, संयोजक विजय नेभनानी, सह-संयोजक शंकर अरोड़ा, संरक्षक अर्जुन जयसिंघानी व संरक्षक लधाराम ग्वालानी ने प्रमुख भूमिका निभा रहे है।</p>
<p><strong>मन्नतों का धोकड़ा पेड़, जहां बांधी जाती है पर्चियां</strong><br />मंदिर परिसर में आज भी धोकड़ा का पेड़  सुरक्षित है,जिन पर हरी पत्तियां लगी हुई है। जिस पर प्रतिमा प्रकट हुई थी। वहां पर श्रद्धालु अपनी एक पर्ची पर लिखकर बांधते हैं। यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। श्रद्धालुओं की जब मन्नत पूरी हो जाती है तब वापस आकर अपनी ईच्छानुसार भेंट भी चढ़ाते हैं। एसी वाले बप्पा मंदिर में कोटा समेत कई राज्यों के वीआइपी भी आपणो सिद्धी विनायक मंदिर में दर्शन लाभ लेने आते है। श्रद्धालुओं के अनुसार यहां हर मनोकामना पूरी होती है।</p>
<p><strong>यूं बने एसी वाले बप्पा</strong><br />दादाबाड़ी क्षेत्र में स्थित एक अनोखा मंदिर कोटा के अलावा अन्य राज्यों में भी भक्तों और पर्यटकों के बीच आस्था की कड़ी के रूप में जुड़ा हुआ है।  ज्यों-ज्यों समय बदला तब-तब इसके विकास कार्य भी खूब करवाए गए। वर्तमान में लाखों श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र बन चुका है। कहा जाता है अत्यंत गर्मी पड़ने पर किसी भक्त मनोकामना पूरी होने उन्होंने आपणों सिद्धी विनायक मंदिर में एसी लगवा दिया। यहां आने वाले हर भक्त ठंडी हवा में शुकून से दर्शनलाभ लेते हैं। उस समय के बाद से सिद्धी विनायक गणेश अब एसी वाले बप्पा के रूप में प्रसिद्ध हो गए। आज भी यहां आने वाले भक्त यहां लगे पेड़ पर अपनी मनोकामना की पर्चिया बांध जाते है। श्रद्धालुओं के अनुसार आपणों सिद्धी विनायक मंदिर में दर्शन के साथ-साथ ठंडी हवा में भी बप्पा की कृपा बरसती है। धोकड़ा पेड़ की पत्तियां आज भी हरी भरी है।</p>
<p><strong>धोकड़ा के पेड़ से प्रकट हुए बप्पा</strong><br />पुजारी ने बताया कि यह गणेश जी की प्रतिमा किसी मूर्तिकार ने नहीं बनाई, बल्कि वह एक पुराने धोकड़ा के पेड़ पर अपने आप उभरी। वर्षों पहले इस छाल पर भगवान गणेश की आकृति नजर आई थी, इसको देखकर स्थानीय लोगों ने विधि-विधान पूजा-अर्चना कर यहीं मंदिर का निर्माण करवाया। प्राचीनकाल से लेकर आज तक लाखों श्रदलु दर्शन करते आते हैं। उन्होंने बताया कि  यह आपणो सिद्धी विनायक गणेश मंदिर 100 वर्षों से भी अधिक पुराना है, इस मंदिर को अब वर्तमान में एसी वाले गणेश मंदिर के नाम से जाने जाते है।</p>
<p><strong>ये होंगे कार्यक्रम</strong><br />- 31 को रक्तदान शिविर प्रात: 11 बजे से<br />- 31 को आम भंडारा, सायं 5 बजे से<br />- 1 सितंबर को शाम को संदरकांड पाठ<br />- 3 सितंबर रात्रि 9.30 बजे महाआरती<br />- 4 सितंबर को रात्रि 9.30 बजे छप्पन भोग का आयोजन<br />- 5 सितंबर को दोपहर 2 बजे शोभायात्रा<br />- 6 सितंबर को शाम 8 बजे आरती व प्रसाद वितरण <br />- 6 सितंबर को रात्रि 9 बजे विसर्जन कार्यक्रम</p>
<p><strong>मुंबई के सिद्धी विनायक की तरह ही होती है पूजा</strong><br />मंदिर के मुख्य पुजारी कमलकांत गौतम ने बताया कि आपणो सिद्धी विनायक मंदिर में गणेश चतुर्थी से लेकर दस दिन तक विधिवत पूजा-अर्चना के साथ विभिन्न कार्यक्रम आयोजित हो रहे है। आपणो सिद्धी विनायक की सूंड दायीं तरफ है। यहां मुंबई के लाल बाग के राजा सिद्धी विनायक की तर्ज पर ही यहां कार्यक्रम आयोजित होते है। उन्होंने बताया कि प्राचीन काल में धोकड़ा पेड़ के पास छतरी में इनकी पूजा-अर्चना होती थी। धोकड़ा पेड़ की हरी पत्तियां शमी के पेड़ की तरह ही है। उन्होंने बताया कि मंदिर में बुधवार के अलावा भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते है। यहां खाटूश्याम का जागरण, सुंदरकांड पाठ समेत कई धार्मिक कार्यक्रम श्रद्धालुओं की ओर से आयोजित किए जाते है। 31 अगस्त को भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Aug 2025 14:39:19 +0530</pubDate>
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                <title>101 किलो पंचामृत से परकोटा गणेशजी का किया अभिषेक</title>
                                    <description><![CDATA[चांदपोल स्थित परकोटा गणेश मंदिर में पुष्य नक्षत्र पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान हुए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/101-kg-panchamrit-to-parkota-ganeshji-abhishek/article-109909"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer-(1)13.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। चांदपोल स्थित परकोटा गणेश मंदिर में पुष्य नक्षत्र पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान हुए। प्रथम पूज्य का 101 किलो पंचामृत से अभिषेक किया गया। महंत अमित शर्मा ने अभिषेक के बाद गणेशजी को सिंदूर का चोला चढ़ा कर नवीन पोशाक धारण कराई। गणपति अथर्वशीर्ष और गणपति अष्टोत्तर नामावली के मंत्रों के साथ मावे के मोदक अर्पित किए गए। भक्तों को लक्ष्मी व गणेश स्वरूप हल्दी की गांठ एवं सुपारी का वितरण किया। </p>
<p><strong>गणपति सहस्रनाम से 1001 मोदक अर्पित :</strong></p>
<p>पुष्य नक्षत्र पर मोतीडूंगरी गणेशजी का पंचामृत अभिषेक किया गया। इस दौरान गणेशजी का 151 किलो दूध, 21 किलो दही, करीब 5 किलो घी, 21 किलो बूरा, शहद एवं केवड़ा जल, गुलाब जल, केवड़ा इत्र एवं गुलाब इत्र से अभिषेक किया गया। सर्वप्रथम गंगाजल, केवड़ा जल, गुलाब जल से अभिषेक हुआ। बाद में पंचामृत अभिषेक हुआ। गंगाजल से शुद्ध स्रान होने के बाद गणपति सहस्त्रनाम से 1001 मोदक अर्पित किए। बाद में फूल बंगले में विराजमान हुए। नवीन पोशाक धारण कराई।</p>
<p><strong>दूर्वा मार्जन से किया पंचामृत अभिषेक :</strong></p>
<p>ब्रह्मपुरी माउंट रोड स्थित नहर के गणेशजी का रवि-पुष्य एवं रामनवमी के मौके पर दूर्वा मार्जन से पंचामृत अभिषेक किया। दोपहर में 21 वेदोक्त मंत्रों से 21 मोदकों का भोग अर्पित कर प्रभु को शयन करवाया गया। सायंकालीन महाआरती 251 दीपकों से की गई एवं दर्शनार्थ आने वाले श्रद्धालुओं को सुख-समृद्धि दायक व विघ्न निवारक अभिमंत्रित रक्षासूत्र वितरित किए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Apr 2025 11:31:06 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मोती डूंगरी मंदिर में गणेशजी का हुआ अभिषेक, फूलों की सजाई झांकी </title>
                                    <description><![CDATA[गणेशजी का पंचामृत अभिषेक कर गणेश को गणपति को 1008 मोदक अर्पित किए गए। नवीन पोशाक धारण करा कर फूलों की झांकी सजाई गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/devotees-worship-of-ganesh-in-temple/article-16738"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/6544652.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मोती डूंगरी गणेश मंदिर में पुष्यनक्षत्र पर महंत कैलाश शर्मा की मौजूदगी में गणेश महाराज का 151 किलो दूध, शहद, केवड़ा एवं गुलाब जल, केवड़ा एवं गुलाब इत्र से अभिषेक किया गया| गणेशजी का पंचामृत अभिषेक कर गणपति को 1008 मोदक अर्पित किए गए। नवीन पोशाक धारण करा कर फूलों की झांकी सजाई गई।</p>
<p>आरती के बाद भोग लगाया गया। भक्तों को हल्दी की गांठ व रक्षा सूत्र वितरित किए गए। दर्शनों के लिए काफी संख्या में भक्त आए। लम्बोदर के दर्शन कर पूजा-अर्चना कर देश में सुख और समृद्धि की कामना की|<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Jul 2022 13:06:09 +0530</pubDate>
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                <title>पाकिस्तान में हिंदू मंदिर में तोडफोड़: देवी-देवताओं की मूर्तियों को खंडित किया, स्थिति तनावपूर्ण</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में उन्मादी भीड़ ने एक हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की और देवी-देवताओं की मूर्तियों को खंडित कर दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में प्रांत के रहीमयार खान जिले के भोंग शहर करीब 50 लोगों की भीड़ मंदिर में घुसती नजर आ रही है। भीड़ में शामिल लोग मंदिर के दरवाजे तोड़ रहे हैं और मंदिर परिसर में तोड़फोड़ कर रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%82-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%A4%E0%A5%8B%E0%A4%A1%E0%A4%AB%E0%A5%8B%E0%A4%A1%E0%A4%BC--%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A5%80-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%93%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%96%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE--%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%A4%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A3/article-1360"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-08/000021.jpg" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में उन्मादी भीड़ ने एक हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की और देवी-देवताओं की मूर्तियों को खंडित कर दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में प्रांत के रहीमयार खान जिले के भोंग शहर करीब 50 लोगों की भीड़ मंदिर में घुसती नजर आ रही है। भीड़ में शामिल लोग मंदिर के दरवाजे तोड़ रहे हैं और मंदिर परिसर में तोड़फोड़ कर रहे हैं। भारी लकड़ी के लट्ठों और लोहे की छड़ों से लैस भीड़ मूर्तियों, मूर्तियों के चारों ओर लगे कांच और अंदर के फर्नीचर को भी तोड़ती दिखाई दे रही है। मानवाधिकार कार्यकर्ता कपिल देव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि हिंदुओं के लिए एक और बुरा दिन, रहीमयार खान के भोंग शहर में गणेश मंदिर पर बदमाशों ने हमला किया। जानवरों ने इस हमले का फेसबुक पर लाइव टेलीकास्ट करने की भी हिम्मत की।<br /> <br /> पाकिस्तान हिंदू काउंसिल के संरक्षक एवं नेशनल असेंबली के सदस्य डॉ. रमेश वंकवानी ने ट्वीट कर कहा कि रहीमयार खान जिले के भोंग में पंजाब में हिंदू मंदिर पर हमला। कल से तनावपूर्ण स्थिति है। स्थानीय पुलिस की लापरवाही बेहद शर्मनाक है। मुख्य न्यायाधीश से कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है। मानवाधिकार मंत्री शिरीन मजारी ने हमले की निंदा करते हुए ट्वीट किया कि आरवाईके में हिंदू मंदिर पर हमला न केवल निंदनीय है बल्कि हमारे संविधान और हमारे नागरिकों के बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन है। अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय कल से जिले की पुलिस के संपर्क में है, हमें रिपोर्ट मिली है और हमारे संसद सचिव दौरे पर जा रहे हैं। डॉन के अनुसार यह हिंसा तब भड़की, जब एक अदालत ने एक स्थानीय मदरसा में लघुशंका करने वाले 9 वर्षीय हिंदू लड़के को जमानत दे दी। कुछ दिन पहले लड़के को मिली जमानत के विरोध में भीड़ ने सुक्कुर-मुल्तान मोटर मार्ग को भी 3 घंटे के लिए अवरूद्ध कर दिया।<br /> <br /> गौरतलब है कि दारुल उलूम अरब तालीमुल कुरान के मौलवी हाफिज मुहम्मद इब्राहिम की शिकायत पर भोंग पुलिस ने लड़के के खिलाफ मामला दर्ज किया था। बाद में कुछ हिंदू बुजुर्गों ने मदरसा प्रशासन से माफी मांगते हुए कहा था कि लड़का मानसिक रूप से विक्षिप्त था। इसके बाद निचली अदालत ने लड़के को जमानत दे दी लेकिन कुछ लोगों ने इसके विरोध में जनता को उकसाया और इलाके की सभी दुकानों को बंद कर दिया। उपायुक्त डॉ. खुर्रम शहजाद और जिला पुलिस अधिकारी असद सरफराज के शहर का दौरा करने के बाद स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने इलाके में रेंजरों को तैनात कर दिया। जिला पुलिस प्रवक्ता अहमद नवाज चीमा ने कहा कि अशांत इलाके में रेंजरों को तैनात किया गया है और स्थिति नियंत्रण में है। पुलिस द्वारा देर से प्रतिक्रिया देने के आरोपों पर सूत्रों ने डॉन को बताया कि वरिष्ठ अधिकारी पुलिस शहीद दिवस समारोह में व्यस्त थे।<br /> <br /> क्षेत्र में हिंदू और मुस्लिम समूहों के बीच पैसों को लेकर कुछ पुराने विवादों की रिपोर्ट हैं, जिसे अशांति का वास्तविक कारण बताया जा रहा है। सिंधु नदी और सिंध-पंजाब सीमा के करीब छोटे से शहर भोंग में कई सोने के व्यापारी हैं, जो मूल रूप से घोटकी और डेहरकी के रहने वाले हैं। अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व करने वाले पीटीआई के एक सदस्य ने डॉन को बताया कि वह इस मुद्दे के सामने आने के बाद से स्थानीय हिंदू समुदाय और भोंग के प्रभावशाली रईस परिवार के संपर्क में थे। उन्होंने बताया कि लड़के को सुरक्षा कारणों से रहीमयार खान जिला जेल भेजा गया था। उनके अनुसार रईस परिवार ने इस मुद्दे को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझा लिया था, लेकिन सुमरो जनजाति के एक स्थानीय व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ एक अभियान चलाया, जो अंतत: अशांति का कारण बना। उन्होंने बताया कि भोंग बाजार बंद कराने के बाद भीड़ ने हिंदू समुदाय के कुछ लोगों के घरों पर हमला करने की भी कोशिश की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Aug 2021 17:47:20 +0530</pubDate>
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