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                <title>Election Commission - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Election Commission RSS Feed</description>
                
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                <title>विजयेंद्र येदियुरप्पा ने बोला खड़गे पर हमला : प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ आपत्तीजनक टिप्पणी करने पर की माफी की मांग, राजनीतिक अवसरवाद का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ कथित "आतंकवादी" टिप्पणी को लेकर निर्वाचन आयोग ने मल्लिकार्जुन खरगे को नोटिस जारी किया है। कर्नाटक भाजपा नेताओं, आर. अशोक और विजयेंद्र येदियुरप्पा ने इसे शर्मनाक बताते हुए खरगे से बिना शर्त माफी और इस्तीफे की मांग की है। भाजपा ने चेतावनी दी है कि माफी न मिलने तक उनका विरोध जारी रहेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/vijayendra-yediyurappa-attacks-kharge-demands-apology-for-making-objectionable-remarks/article-151436"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/pm-modi.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ "आतंकवादी" की कथित टिप्पणी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को चुनाव आयोग (ईसीआई) की ओर से जारी नोटिस के मद्देनजर उनसे बिना शर्त माफी मांगने और इस्तीफे की मांग की है। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने इसकी शुरुआत करते हुए खरगे की कथित टिप्पणियों को "कांग्रेस पार्टी के लिए शर्मनाक" बताया और उन पर राजनीतिक अवसरवाद का आरोप लगाया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर पहले से ही बैकफुट पर है और आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर नेतृत्व की महत्वाकांक्षाओं के कारण ही इस तरह के बयान दिए जा रहे हैं। उन्होंने निर्वाचन आयोग के हस्तक्षेप का भी समर्थन करते हुए कहा कि चुनाव के लिहाज़ से संवेदनशील इस दौर में यह नोटिस "पूरी तरह से उचित" था। भाजपा नेताओं की शिकायत के बाद ईसीआई ने खरगे को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।</p>
<p>उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक खरगे माफी नहीं मांग लेते और अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक भाजपा का विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विजयेंद्र येदियुरप्पा , केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने भी खरगे के बयान की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उनका अतीत में भी भड़काऊ बयान देने का एक सिलसिला रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 18:29:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>प्रियांक खरगे का तीखा हमला : विपक्ष के साथ दोहरा बर्ताव कर रहा है चुनाव आयोग, सत्तारूढ़ दल पर दोहरे मानदंड अपनाने का लगाया आरोप </title>
                                    <description><![CDATA[निर्वाचन आयोग के नोटिस पर प्रियांक खरगे ने पलटवार करते हुए इसे भाजपा की "ध्यान भटकाने वाली रणनीति" बताया है। उन्होंने केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग को 'आर्थिक आतंकवाद' करार दिया और आयोग पर विपक्ष के खिलाफ पक्षपाती होने का आरोप लगाया। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वे इस नोटिस का कानूनी और उचित जवाब देंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/priyank-kharges-scathing-attack-is-double-dealing-with-the-opposition-election/article-151437"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/प्रियांक-खरगे.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। चुनाव आयोग द्वारा कांग्रेस को नोटिस दिए जाने के बाद कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने विपक्षी नेताओं को लक्षित रूप से निशाना बनाए जाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। खरगे ने गुरूवार को कहा कि चुनाव आयोग को नोटिस जारी करने का अधिकार है, लेकिन विपक्ष की आवाज़ों के मामले में "चुनिंदा कार्रवाई" की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय जांच ब्यूरो जैसी एजेंसियों का उपयोग विपक्षी दलों पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है, जिसे कांग्रेस "आर्थिक आतंकवाद" करार देती है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि कांग्रेस आयोग के नोटिस का उचित जवाब देगी। खरगे ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयान पर भाजपा के विरोध को लेकर सवाल उठाते हुए सत्तारूढ़ दल पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अतीत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में विवादित टिप्पणी की थी। उन्होंने सवाल किया कि क्या उस मामले में भी भाजपा समान स्तर का विरोध दर्ज कराएगी।</p>
<p>खरगे ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा के पास मुद्दों की कमी हो गई है और वह चुनावी अनियमितताओं तथा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए गए सवालों से ध्यान हटाने के लिए इस विवाद को उछाल रही है। उन्होंने इसे "ध्यान भटकाने की रणनीति" बताया। इस घटनाक्रम के बाद अब राजनीतिक बहस चुनाव आयोग के नोटिस से आगे बढ़कर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं में एकरूपता और विभिन्न दलों के रुख में विरोधाभास के सवालों तक पहुंच गयी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 18:04:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तमिलनाडु विधानसभा की सभी 234 सीटों के लिए मतदान शुरू : सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम ; अभिनेता विजय की साख दांव पर, शाम 5  बजे तक 82.24  प्रतिशत मतदान</title>
                                    <description><![CDATA[तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान जारी है। 1.50 लाख सुरक्षाकर्मी और अर्धसैनिक बलों की तैनाती में 5.67 करोड़ मतदाता 4,023 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे। सत्तारूढ़ DMK और AIADMK-BJP गठबंधन के बीच मुख्य मुकाबला है, जबकि अभिनेता विजय की पार्टी ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/voting-begins-for-all-234-seats-of-tamil-nadu-assembly/article-151393"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(4)16.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा की सभी 234 सीटों पर गुरुवार सुबह सात बजे से मतदान शुरू हो गया और शाम छह बजे तक चलेगा। राज्य में सभी मतदान केन्द्रों पर सुबह से मतदाता अपने मताधिकार को इस्तेमाल करने के लिए पहुंचने शुरू हो गये हैं। चुनाव आयोग ने राज्य में चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से सम्पन्न कराने के लिए सभी आवश्यक प्रबंध किये हैं। राज्य भर में कुल 75,032 मतदान केंद्र बनाए गये हैं। इनमें से 5,938 केंद्रों को संवेदनशील घोषित किया गया है। इन केंद्रों की विशेष निगरानी की जा रही है। मतदान को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की लगभग 300 कंपनियों को भी लगाया गया है और उन्हें पूरे राज्य भर में विभिन्न मतदान केंद्रों पर तैनात किया गया है। कुल मिलाकर सुरक्षा व्यवस्था के तहत राज्य के लगभग 1.50 लाख सुरक्षा कर्मी तैनात किए गये हैं। इनमें 1.18 लाख नियमित पुलिसकर्मी, तथा 20,000 कर्मी रैपिड एक्शन फोर्स, होम गार्ड, सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी शामिल हैं।</p>
<p>राज्य में कुल 4,023 उम्मीदवार चुनावी मैदान में अपनी किस्मत अजमाने उतरे हैं, जिनमें 443 महिला उम्मीदवार हैं। राज्य में 5.67 करोड़ मतदाताओं में से 2.70 करोड़ से अधिक पुरुष, 2.89 करोड़ महिलाएं और 7,728 उभयङ्क्षलगी मतदाता हैं। राज्य में 18-19 आयु वर्ग में कुल 12.51 लाख तथा 20-29 आयु वर्ग में 1.05 करोड़ मतदाता हैं। मतदान के बाद, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें सील करके मतगणना केंद्रों के 'स्ट्रॉन्ग रूमÓ में ले जाया जाएगा, जहाँ 24 घंटे सुरक्षाकर्मी तैनात रहेंगे।</p>
<p>तमिलनाडु में मुख्य मुकाबला सत्तारूढ द्रविड़ मनेत्र कषगम (द्रमुक) के नेतृत्व वाले गठबंधन और उसके मुख्य प्रतिद्वंदी अन्नाद्रमुक-भारतीय जनता पार्टी गठबंधन के बीच है। इस बार अभिनय की दुनिया से राजनीति के अखाड़े में उतरे अभिनेता सी जोसफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम ने कुछ सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है। मतगणना चार मई को होगी और उसी दिन परिणाम घोषित किये जायेंगे</p>
<p><strong>शाम पांच बजे तक 82.24 प्रतिशत हुआ मतदान</strong></p>
<p>तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में गुरूवार को शाम पांच बजे तक 82.24 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।</p>
<p><strong>दोपहर 3 बजे तक 70 प्रतिशत मतदान</strong></p>
<p>तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में गुरूवार को दोपहर तीन बजे तक 70 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। मतदान प्रतिशत को देखते हुए ऐसा माना जा रहा है कि मतदाताओं में इसको लेकर खासा उत्साह है।</p>
<p><strong>अपराह्न एक बजे तक 56.81 प्रतिशत मतदान</strong></p>
<p>तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में गुरूवार को अपराह्न एक बजे तक 56.81 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। मतदान प्रतिशत को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि मतदाताओं में खासा उत्साह है। </p>
<p><strong>11.00 बजे तक 37.56 प्रतिशत मतदान</strong></p>
<p>तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में पूर्वाह्न 11 बजे तक 37.56 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाले। राज्य की सभी 234 सीटों के लिए मतदान गुरुवार सुबह सात बजे शुरू हुआ और शाम पांच बजे तक चलेगा। सभी मतदान केन्द्रों पर सुबह से ही मतदाता कतार में देखे गये और दिन चढ़ने के साथ साथ मतदान प्रतिशत लगा।</p>
<p><strong>9 बजे तक 17.69 प्रतिशत मतदान</strong></p>
<p>तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में मतदान के शुरुआती दो घंटों में (नौ बजे तक) 17.69 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। राज्य की सभी 234 सीटों के लिए मतदान आज सुबह सात बजे शुरू हुआ और शाम पांच बजे तक चलेगा। सभी मतदान केन्द्रों पर सुबह से ही मतदाता कतार में देखे गये और दिन चढ़ने के साथ साथ मतदान प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है।</p>
<p><strong>पीएम मोदी ने की मतदाताओं से वोट डालने की अपील</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री ने तमिलनाडु के मतदाताओं को संबोधित करते हुए एक अलग पोस्ट में कहा, "जैसे ही तमिलनाडु के लोग विधानसभा चुनावों में मतदान करने की तैयारी कर रहे हैं, मैं सभी मतदाताओं से आग्रह करता हूं कि वे इस पवित्र लोकतांत्रिक कर्तव्य को बड़े उत्साह के साथ पूरा करें। विशेष रूप से, मैं तमिलनाडु के युवाओं और महिलाओं से बड़ी संख्या में बाहर निकलने और रिकॉर्ड मतदान का मार्ग प्रशस्त करने का आह्वान करता हूं।"</p>
<p><strong>चिदंबरम ने की वोट डालने की अपील</strong></p>
<p>कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने गुरुवार को एक स्थिर सरकार के लिए वोट देने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए सत्तारूढ़ द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) के नेतृत्व वाले बहु-दलीय सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (एसपीए) के लगातार दूसरी बार सत्ता में लौटने का भरोसा जताया। उन्होंने शिवगंगा ज़िले में अपने गृह नगर कराईकुडी के एक मतदान केन्द्र पर वोट डालने के बाद मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में युवा मतदाताओं से स्थिरता, विकास और कल्याण का समर्थन करने का आग्रह किया। यहां से वह रिकॉर्ड आठ बार लोकसभा के लिए चुने गये थे।</p>
<p>उन्होंने युवा मतदाताओं के उत्साह की सराहना भी की, साथ ही उन्हें मनगढ़ंत विचारों से सावधान रहने की चेतावनी भी दी। उन्होंने एक स्थिर सरकार के लिए वोट देने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया, जो नतीजे दे। चिदंबरम ने भरोसा जताया कि एसपीए सत्ता में लौटेगा और इस दौरान उन्होंने पिछले पांच वर्षों में लागू किये गये शासन और कल्याणकारी उपायों पर प्रकाश डाला।</p>
<p><strong>सभी मतदाताओं को अपने लोकतांत्रिक कर्तव्य का पालन करना चाहिये: पलानीस्वामी</strong></p>
<p>भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), पीएमके, एएमएमके और टी.एम.सी. वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का नेतृत्व कर रहे अन्नाद्रमुक महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने गुरुवार को चुनाव के बारे में कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि सभी मतदाताओं को अपने मतदान केंद्र पर जाकर अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल करना चाहिये। पलानीस्वामी ने अपने पैतृक सलेम जिले के एडप्पादी निर्वाचन क्षेत्र के एक मतदान केंद्र पर अपना वोट डालने के बाद संवाददाताओं से संक्षिप्त बातचीत में यह कहते हुए चुनाव पर कोई भी टिप्पणी करने से मना कर दिया कि आदर्श आचार संहिता लागू है।</p>
<p>वह अपने परिवार के सदस्यों के साथ एडप्पादी विधानसभा क्षेत्र के सिलुवमपालयम स्थित नेदुनकुलम पंचायत स्कूल के मतदान केंद्र तक पैदल गये, जो उनके निवास से कुछ ही दूरी पर स्थित है, और अपना वोट डाला।मतदान के बाद श्री पलानीस्वामी ने संवाददाताओं से कहा कि सभी मतदाताओं को अपने मतदान केंद्रों पर जाना चाहिये और अपने लोकतांत्रिक कर्तव्य का पालन करना चाहिये। उनसे जब पूरे तमिलनाडु में और कोयंबटूर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में, जहां से द्रमुक के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री वी. सेंथिल बालाजी चुनाव लड़ रहे हैं, द्रमुक द्वारा कथित तौर पर वोट के लिए नकद़ी बांटे जाने के बारे में पूछा गया, तो श्री पलानीस्वामी ने उत्तर देने से इनकार करते हुए कहा कि चुनाव आदर्श आचार संहिता लागू है।श्री पलानीस्वामी ने मतदान की व्यवस्थाओं के बारे में पूछे जाने पर कहा कि मतदान अभी शुरू हुआ है और लोग वोट डालना शुरू कर रहे हैं।</p>
<p><strong>प्रमुख हस्तियों ने सुबह ही डाले वोट</strong></p>
<p>मतदान केन्द्रों पर सुबह से मतदाताओं की काफी संख्या देखी जा रही है। प्रमुख हस्तियां सबसे पहले वोट डालने वालों में शामिल रहीं। तमिल सुपरस्टार रजनीकांत ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जिन लोगों के पास भी मताधिकार है, उन्हें अनिवार्य रूप से अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल करना चाहिए। कुछ केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में मामूली तकनीकी खराबी के कारण मतदान प्रक्रिया शुरू होने में थोड़ी देरी हुई, जिन्हें बाद में ठीक कर दिया गया या बदल दिया गया। लोग, विशेष रूप से महिलाएं, अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए बड़ी संख्या में कतारों में खड़ी देखी गयीं।</p>
<p>सबसे पहले मतदान करने वालों में अन्नाद्रमुक के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी शामिल थे, जो राज्य में राजग का नेतृत्व कर रहे हैं और गठबंधन के मुख्यमंत्री पद का चेहरा भी हैं। इनके अलावा भाजपा की मायलापुर से उम्मीदवार और पुड्डुचेरी एवं तेलंगाना की पूर्व उपराज्यपाल सुश्री तमिलिसाई सौंदरराजन, प्रसिद्ध फिल्म युगल सुंदर सी. (जो न्यू जस्टिस पार्टी के उम्मीदवार के रूप में मदुरै सेंट्रल से अन्नाद्रमुक के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ रहे हैं), उनकी पत्नी और भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष सुश्री खुशबू सुंदर, केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन, नाम तमिलर काची के संस्थापक और अभिनेता-निर्देशक सीमान, पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता पी. चिदंबरम, मक्कल निधि मय्यम के संस्थापक और राज्यसभा सांसद कमल हासन एवं उनकी पुत्री अभिनेत्री श्रुति हासन, तमिलगा वेत्री कज़गम के संस्थापक और अभिनेता-राजनेता विजय ( जिनकी पार्टी पहली बार अकेले सभी 234 सीटों पर चुनाव लड़ रही है), देमुद्रक की महासचिव सुश्री प्रेमलता विजयकांत, सत्तारूढ़ द्रमुक के मंत्री और पूर्व मंत्री तथा सुपरस्टार रजनीकांत, अभिनेता अजीत कुमार, शिवकार्तिकेयन, निर्देशक मणिरत्नम और उनकी पत्नी अभिनेत्री सुहासिनी मणिरत्नम जैसी फिल्मी हस्तियां मतदान करने वालों में शामिल थीं।</p>
<p>शहर में थाउजेंड लाइट्स निर्वाचन क्षेत्र के एक मतदान केंद्र पर अपना वोट डालने के लिए अपने पोएस गार्डन निवास से निकलते समय संचार माध्यमों के साथ संक्षिप्त बातचीत में रजनीकांत ने कहा, “ जिनके पास भी मताधिकार है, उन्हें अनिवार्य रूप से अपना वोट डालना चाहिए।” पलानीस्वामी ने अपने पैतृक क्षेत्र सलेम जिले के एडप्पादी में आठवीं बार चुनाव लड़ते हुये अपने परिवार के साथ घर के पास स्थित केंद्र पर पैदल जाकर मतदान किया, सुश्री तमिलिसाई ने विरुगंबाक्कम में, सुंदर सी. और खुशबू ने शहर के मंदावेली क्षेत्र में, एल. मुरुगन ने कोयम्बेडु में, सीमान ने नीलांकरई में, चिदंबरम ने कराइकुडी में, कमल और उनकी पुत्री ने अलवरपेट में, विजय ने नीलांकरई के शोलिंगनल्लूर में और प्रेमलता ने विरुगंबाक्कम में आम मतदाताओं के साथ कतार में लगकर अपना वोट डाला।</p>
<p>विजय, जो अपनी पहली चुनावी पारी में दो सीटों- पेरम्बूर और त्रिची ईस्ट से चुनाव लड़ रहे हैं, उन्होंने पिछले चुनावों में एक अभिनेता और साधारण मतदाता के रूप में वोट डालने के बाद पहली बार एक उम्मीदवार के रूप में मतदान किया। मतदान केंद्र की ओर जाते समय उन्होंने सड़क पर गिरा हुआ एक मोबाइल फोन उठाकर संबंधित व्यक्ति को सौंपा। जल्दी मतदान करने वाले वर्तमान मंत्रियों में द्रमुक के अनबिल महेश पोय्यामोझी, के. एन. नेहरू, पी. के. शेखर बाबू, सुश्री गीता जीवन शामिल थे। अन्नाद्रमुक के पूर्व मंत्री डी. जयकुमार ने भी सुबह ही अपना वोट डाला। दिन भर चलने वाले मतदान के दौरान 443 महिलाओं सहित कुल 4,023 उम्मीदवारों की किस्मत वोटिंग मशीनों में लॉक हो जाएगी और मतगणना चार मई को होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 11:30:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम बंगाल का असली चुनावी युद्ध : मतदाता सूची से करीब 91 लाख लोगों के नाम, सड़कों पर बख्तरबंद दौड़ रही गाड़ियाँ </title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में 'विशेष गहन पुनरीक्षण' के तहत 91 लाख नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, जिससे राजनीतिक पारा चढ़ गया है। AI फिल्टर और तकनीकी विसंगतियों के कारण अल्पसंख्यकों, महिलाओं और SC समुदायों पर सबसे ज्यादा मार पड़ी है। ममता बनर्जी ने इसे जनता पर हमला बताया है, जबकि भाजपा ने इसे शुद्धिकरण की प्रक्रिया करार दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-real-electoral-war-of-west-bengal-focused-on-the/article-151319"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(2)28.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल में इस बार 'विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)' के नाम पर मतदाता सूची से लगभग 91 लाख लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। इनमें से करीब 27 लाख लोगों के नाम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जनित फिल्टर द्वारा "तार्किक विसंगतियों" के आधार पर हटाए गए। यह विसंगतियां उपनामों की वर्तनी में मामूली अंतर राय या रे जैसी छोटी बातों पर आधारित थीं। राज्य में चुनाव से पहले ग्रामीण सड़कों पर बख्तरबंद गाड़ियाँ दौड़ रही हैं और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल बाज़ारों में गश्त कर रहे हैं। राजमार्गों पर चेकपॉइंट्स बने हैं जहाँ नकदी और शराब की तलाशी ली जा रही है। चुनाव आयोग की यह अभूतपूर्व तैनाती राजनीतिक झड़पों और "वोट खरीदने" की कोशिशों को रोकने के लिए है।</p>
<p>लेकिन इस "युद्ध क्षेत्र" जैसे माहौल के बीच बंगाल की असली चुनावी लड़ाई सड़कों पर नहीं, बल्कि उन न्यायाधिकरणों में लड़ी जा रही है जो यह तय कर रहे हैं कि किसे वोट देने का अधिकार है और कौन भारतीय नागरिक है। बंगाली मुसलमानों के लिए, जिनमें से कई के पास कोई निश्चित उपनाम नहीं होता, इसका मतलब यह हुआ कि पूरे के पूरे गांव मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इन कटौतियों ने अल्पसंख्यकों, महिलाओं और गरीबों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। मुस्लिम और दलित बहुल सीमावर्ती जिलों जैसे मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर और दक्षिण 24 परगना में यह मार सबसे अधिक पड़ी है, जहाँ हटाए गए नामों की संख्या 2.2 लाख (दक्षिण 24 परगना) से लेकर 4.6 लाख (मुर्शिदाबाद) तक है।</p>
<p>यह शुद्धिकरण अभियान केवल गरीबों तक सीमित नहीं रहा है। इसने "विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग" को भी अपनी चपेट में लिया है। कोलकाता के प्रसिद्ध आईआईएम की प्रोफेसर नंदिता रॉय ने पाया कि उनका नाम सूची से गायब है। उन्होंने कहा, "मेरे पिता सेवानिवृत्त वायुसेना अधिकारी हैं और मैं एक शिक्षाविद हूँ, जब मुझे इस संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है, तो कल्पना कीजिए उन गरीब और अर्ध-शिक्षित लोगों की क्या स्थिति होगी जिन्हें अपने मताधिकार के लिए नौकरशाही से लड़ना पड़ रहा है।" इसी तरह, मुर्शिदाबाद के अंतिम नवाब के वंशज सैयद रजा अली मिर्जा, जिन्हें 'छोटा नवाब' भी कहा जाता है, ने भी अपना नाम मतदाता सूची से हटाए जाने पर गहरा रोष व्यक्त किया है।</p>
<p>राजनीतिक रूप से, टीएमसी को मालदा और मुर्शिदाबाद में मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण से लाभ मिलता दिख रहा है, क्योंकि मतदाता "परिचित बुराई" के पक्ष में एकजुट हो रहे हैं। दूसरी ओर, हिंदुओं के बीच वोटों का जवाबी ध्रुवीकरण मुश्किल लग रहा है क्योंकि <br />'एसआईआर' अभियान ने अनुसूचित जातियों को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। बंगाल के 25 से 30 लाख की आबादी वाले मतुआ समुदाय के बड़ी संख्या में नाम काटे गए हैं, जिससे वे काफी आक्रोशित हैं। मतुआ समाज के सचिव दिलीप मतुआ ने बताया कि उनके अकेले गांव से 200 नाम हटाए गए हैं। इसके अतिरिक्त, बिहार जैसे अन्य राज्यों से आकर बंगाल में बसे लोगों को भी पर्याप्त दस्तावेजों के बावजूद सूची से बाहर रखा गया है।</p>
<p>चुनाव आयोग के इस कदम पर पूर्व आईएएस अधिकारी जवाहर सरकार ने सवाल उठाते हुए कहा है कि आयोग के पास नागरिकता के सवाल तय करने का अधिकार नहीं है। वहीं, भाजपा के विचारक और उम्मीदवार स्वपन दासगुप्ता ने इस अभियान का बचाव करते हुए इसे मतदाता सूची से "फर्जी और मृत" वोटरों को निकालने की प्रक्रिया बताया है। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे राज्य के लोगों पर हमला बताते हुए उच्चतम न्यायालय में गुहार लगाई है।</p>
<p>आंकड़ों का विश्लेषण यह भी बताता है कि इस अभियान ने महिलाओं को असमान रूप से प्रभावित किया है। पहले चरण के चुनावों वाले 152 विधानसभा क्षेत्रों में पुरुष-महिला अनुपात 952:1000 से गिरकर 950:1000 हो गया है। साबर संस्थान के विश्लेषण के अनुसार, विशेष रूप से एससी आरक्षित सीटों पर महिलाओं के नाम काटे जाने के मामले 52.4 प्रतिशत हैं, जो औसत से अधिक हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 'एसआईआर' ने इस चुनाव के परिणामों की भविष्यवाणी करना अत्यंत कठिन बना दिया है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि इसका अंतिम लाभ किस राजनीतिक दल को मिलता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 15:36:48 +0530</pubDate>
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                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव : मतदान से 48 घंटे पहले बाइक रैलियों पर प्रतिबंध, आयोग मतदाताओं को डराने-धमकाने की किसी भी कोशिश को नहीं करेगा बर्दाश्त </title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग ने बाइक रैलियों पर रोक लगा दी है। मतदान से 48 घंटे पहले रात में मोटरसाइकिलों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी और पिलियन राइडिंग पर भी पाबंदी होगी। इसका उद्देश्य मतदाताओं को डराने-धमकाने की गतिविधियों को रोकना और शांति व्यवस्था बनाए रखना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/ban-on-bike-rallies-48-hours-before-west-bengal-assembly/article-151172"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/election-commission.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र, निष्पक्ष और भयमुक्त चुनाव सुनिश्चित करने के लिए मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय ने मोटरसाइकिल के उपयोग पर कड़े प्रतिबंध लगाये हैं। आयोग द्वारा 20 अप्रैल को जारी अधिसूचना के अनुसार, मतदान से 48 घंटे पहले किसी भी प्रकार की बाइक रैली की अनुमति नहीं होगी। आयोग के सूत्रों के अनुसार, यह देखा गया है कि चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद भी राजनीतिक दल बाइक रैलियां निकालते हैं, जिनके जरिए कई मामलों में मतदाताओं को डराने-धमकाने की कोशिश की जाती है। एक चुनाव अधिकारी ने कहा, “आयोग मतदाताओं को डराने-धमकाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेगा, इसलिए बाइक रैलियों पर प्रतिबंध लगाया गया है।”</p>
<p>इसके अलावा, इस अवधि में शाम छह बजे से सुबह छह बजे तक मोटरसाइकिलों की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी, सिवाय आपात स्थितियों जैसे चिकित्सा या जरूरी पारिवारिक कारणों के। सुबह छह बजे से शाम छह बजे के बीच भी पिलियन राइडिंग (पीछे बैठकर सफर) पर रोक रहेगी, हालांकि चिकित्सा आपात स्थिति या आवश्यक कार्य जैसे स्कूल बच्चों को ले जाने की स्थिति में छूट दी जा सकती है। मतदान के दिन सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक सीमित छूट दी जाएगी, जिसमें परिवार के सदस्यों को मतदान और आवश्यक कार्यों के लिए दोपहिया वाहन पर यात्रा की अनुमति होगी। अधिकारियों को इन निर्देशों का व्यापक प्रचार करने और जिला पुलिस प्रशासन के साथ समन्वय कर सख्ती से लागू करने के निर्देश दिये गये हैं। यह कदम मतदान से पहले के 48 घंटे के मौन अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की डराने-धमकाने की गतिविधियों, अवैध जुटान और चुनाव प्रक्रिया में बाधा को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 13:07:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम बंगाल चुनाव : पहले चरण में 16 निर्वाचन क्षेत्रों में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक, 23 अप्रैल को होगी वोटिंग</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में पहले चरण के मतदान से पूर्व चुनाव आयोग के आंकड़ों ने सबको चौंका दिया है। 16 विधानसभा क्षेत्रों में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक है। मुर्शिदाबाद के शमशेरगंज में महिलाओं का अनुपात सबसे ज्यादा है। विश्लेषकों का मानना है कि इस बार महिला वोटर ही चुनाव परिणामों में निर्णायक भूमिका निभाएंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/in-the-first-phase-of-west-bengal-elections-the-number/article-151097"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/west-bengal-election.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान से पूर्व चुनाव आयोग की ओर से जारी आंकड़ों में यह तथ्य सामने आया है कि राज्य की 152 में से कम से कम 16 विधानसभाओं में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा है। ये विधानसभाएं दार्जीलिंग, जलपाइगुड़ी, अललिपुरद्वार और मुर्शिदाबाद के बीच फैली हुई हैं। चुनाव आयोग के क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में कुल 3,60,77,171 मतदाता हैं, जिनमें 1,84,99,496 पुरुष और 1,75,77,210 महिलाएं हैं। 465 मतदाता थर्ड जेंडर के हैं। पहले चरण में मतदान करने वाले क्षेत्रों में मुर्शिदाबाद जिले के शमशेरगंज में महिलाओं का अनुपात सबसे ज्यादा है। यहां महिला मतदाताओं की संख्या 83,430 है, जबकि पुरुष मतदाता केवल 78,004 हैं। यानी पुरुषों की तुलना में 5,426 अधिक महिला मतदाता हैं।</p>
<p>दूसरी ओर दार्जिलिंग ज़िले के सिलीगुड़ी में 99,920 पुरुष मतदाताओं के मुकाबले 1,00,844 महिला मतदाता हैं। यानी सिर्फ़ 924 मतदाताओं का मामूली अंतर। जिन निर्वाचन क्षेत्रों में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुष मतदाताओं से अधिक है, उनमें से कई उत्तरी बंगाल और उससे सटे क्षेत्रों के हैं। इनमें कालचीनी (एसटी) भी शामिल है, जहां महिला मतदाताओं (1,11,742) की संख्या पुरुष मतदाताओं (1,09,713) से अधिक है। सूची में मदारीहाट (एसटी) का नाम भी है, जहां 96,262 पुरुष मतदाताओं की तुलना में 97,695 महिला मतदाता हैं।</p>
<p>इसी तरह, नागराकाटा (एसटी) में महिलाओं को स्पष्ट बढ़त हासिल है, जहां 1,07,824 पुरुष मतदाताओं के मुकाबले 1,12,292 महिला मतदाता हैं। दार्जिलिंग ज़िले के विधानसभा क्षेत्रों, जैसे कि दार्जिलिंग, कर्सियांग, मातिगारा-नक्सलबाड़ी (एससी) और सिलीगुड़ी में महिला मतदाताओं की संख्या अधिक है। आयोग के आंकड़ों से पता चलता है कि दार्जिलिंग में 1,03,033 पुरुष मतदाताओं की तुलना में 1,04,681 महिला मतदाता हैं, जबकि कर्सियांग में यह अंतर और भी अधिक है, जहाँ 1,06,014 पुरुष मतदाताओं के मुकाबले 1,10,135 महिला मतदाता हैं। मातिगारा-नक्सलबाड़ी में यह अंतर कम है, लेकिन फिर भी महत्वपूर्ण है। यहां 1,34,906 महिला मतदाताएं 1,33,571 पुरुष मतदाताओं से अधिक हैं।</p>
<p>विश्लेषकों का कहना है कि इन चुनाव क्षेत्रों में अहम भूमिका निभाने की संभावना है, खासकर इसलिए क्योंकि पार्टियां महिला वोटरों को ध्यान में रखकर बनायी गयी कल्याणकारी योजनाएं और संदेश के ज़रिए अपील करने के लिए अपने अभियान को तेज़ी से बदल रही हैं। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से काफी नाम हटाये गये हैं, लेकिन चलन बताता है कि पुरुषों के नाम हटाने की संख्या थोड़ी ज़्यादा रही है।</p>
<p>एक विश्लेषक ने कहा, "ज़ाहिर है, कुछ ऐसे निर्वाचन क्षेत्र हैं जहां आने वाले चुनावों में महिला मतदाता एक निर्णायक कारक के रूप में उभरी हैं। हटाये गये नामों के सटीक आंकड़े अलग-अलग ज़िलों में अलग-अलग हैं, लेकिन व्यापक रुझान चुनावी सूचियों में लिंग अनुपात के धीरे-धीरे संतुलित होने की ओर इशारा करता है।" जैसे-जैसे मतदान के दिन से पहले चुनाव प्रचार तेज़ हो रहा है, पर्यवेक्षकों का मानना है कि जिन निर्वाचन क्षेत्रों में महिला मतदाताओं की संख्या अधिक है, वहां सामाजिक कल्याण, सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा और वित्तीय सहायता योजनाओं जैसे मुद्दों पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 17:57:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>चुनाव आयोग की बड़ी घोषणा : मतदान से 48 घंटे पहले और मतगणना के दिन 'ड्राई डे' रखने का निर्देश, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया हो सके सुनिश्चित</title>
                                    <description><![CDATA[चुनाव आयोग ने तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल चुनावों के मद्देनजर सख्त निर्देश जारी किए हैं। 23 अप्रैल को पहले चरण के मतदान से 48 घंटे पहले और 4 मई को मतगणना के दिन शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए होटल, क्लब और रेस्तरां में 'ड्राई डे' का कड़ाई से पालन होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/election-commissions-big-announcement-instructions-to-keep-dry-day-48/article-151105"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/election-commission.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर मतदान से 48 घंटे पहले और मतगणना के दिन 'ड्राई डे' रखने का निर्देश दिया है। चुनाव आयोग ने आज बताया कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135सी के तहत मतदान क्षेत्र में मतदान समाप्ति से 48 घंटे पहले तक शराब की बिक्री, वितरण और सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। आयोग ने बताया कि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को पहले चरण का मतदान होगा जबकि पश्चिम बंगाल के दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को कराया जाएगा। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतगणना चार मई को होगी।</p>
<p>आयोग के निर्देशों के मुताबिक संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदान से 48 घंटे पहले और मतगणना के दिन 'ड्राई डे' घोषित किया जाएगा। इस दौरान शराब की दुकानें, होटल, रेस्तरां, क्लब और अन्य सभी स्थानों पर शराब की बिक्री और परोसने पर पूरी तरह रोक रहेगी। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि विभिन्न लाइसेंस के तहत संचालित होटल, क्लब और रेस्तरां को भी इन दिनों में शराब परोसने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही, बिना लाइसेंस वाले स्थानों पर शराब के भंडारण पर भी सख्ती से नियंत्रण रखा जाएगा। चुनाव आयोग ने सभी राज्यों और संबंधित एजेंसियों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा है, ताकि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित की जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/election-commissions-big-announcement-instructions-to-keep-dry-day-48/article-151105</link>
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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 17:34:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सीएम ममता का दावा : सुरक्षा जांच के लिए रोका काफ़िला; चुनाव आयोग से शिकायत दर्ज कराई, टोल-फ्री हेल्पलाइन जारी</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने काफिले को सुरक्षा जांच के लिए रोके जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि 'व्हाट्सऐप निर्देश' के जरिए पार्टी नेताओं को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। पार्टी ने इसे पक्षपातपूर्ण कार्रवाई और लोकतांत्रिक मर्यादा का उल्लंघन बताया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/cm-mamata-claims-convoy-stopped-for-security-check-door-to-door-voting/article-150614"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/mamta-banarji.jpg" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को दावा किया कि सुरक्षा जांच के लिए उनके काफिले को रोका गया। इसी बीच, तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग से औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। यह शिकायत एक व्हाट्सऐप ग्रुप के ज़रिए कथित तौर पर जारी किए गए निर्देशों के बारे में है, जिसमें अधिकारियों को उसके (तृणमूल) नेताओं के वाहनों की तलाशी लेने का निर्देश दिया गया है। ममता बनर्जी ने कहा, "मुझे जांच से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उसका मकसद निष्पक्ष होना चाहिए।"</p>
<p>कोलकाता में तृणमूल ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई और चुनाव निकाय के "व्हाट्सऐप निर्देश" के कथित स्क्रीनशॉट साझा किए, जिसमें उसके नेताओं के वाहनों की तलाशी का आदेश दिया गया है। अपनी लिखित शिकायत में, सत्ताधारी पार्टी ने दावा किया कि यह कथित आदेश विशेष रूप से मुख्यमंत्री को छोड़कर तृणमूल के अन्य सभी नेताओं को निशाना बनाता है। पार्टी ने आरोप लगाया कि सांसद अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी रुजिरा नरूला बनर्जी द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों को भी जांच के लिए नामित किया गया है। इससे पहले, मंगलवार को पार्टी ने कथित व्हाट्सऐप चैट के स्क्रीनशॉट जारी किए थे, जिसमें ये निर्देश शामिल थे।</p>
<p>तृणमूल के अनुसार, इन संदेशों से यह संकेत मिलता है कि आयोग को संदेह है कि अभिषेक बनर्जी की पत्नी के माध्यम से पैसों का लेन-देन हो सकता है, और इसलिए उसने पार्टी नेताओं के वाहनों की "गहन जांच" करने का निर्देश दिया। पार्टी के दावे के अनुसार, स्क्रीनशॉट से पता चलता है कि अधिकारियों को तृणमूल नेताओं और मंत्रियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों की (जिनमें सुरक्षा घेरे वाले वाहन भी शामिल हैं) विभिन्न चौकियों पर दिन भर जांच करने के निर्देश दिए गए है। कथित निर्देश में यह भी उल्लेख किया गया था कि पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) को चुनाव पर्यवेक्षकों की सहायता करनी चाहिए, जबकि एक कंट्रोल रूम ऐसी "अचानक" की जाने वाली जांचों पर नज़र रखेगा।</p>
<p>तृणमूल ने आरोप लगाया कि आयोग ने प्रभावी रूप से उसके नेतृत्व को निशाना बनाया है और जांच का दायरा परिवार के सदस्यों तक भी बढ़ा दिया है। पार्टी ने दावा किया कि चुनावों से पहले उसके जनसंपर्क कार्यक्रमों और चुनाव प्रचार से संबंधित गतिविधियों को निशाना बनाया जा रहा है। हालाँकि, इन स्क्रीनशॉट की प्रामाणिकता और स्पष्टता पर सवाल उठाए गए हैं। इसमें "अभिषेक" नाम अंग्रेजी में अलग-अलग वर्तनी में दिखाई देता है, जिसके साथ कोई उपनाम या पदनाम नहीं जुड़ा है। इससे यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि यह संदर्भ वास्तव में तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव के लिए ही है या नहीं।</p>
<p>इसी तरह, जहाँ कथित तौर पर चैट में उनकी पत्नी का ज़िक्र है, वहीं किसी नाम का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं किया गया है। इन स्क्रीनशॉट में कथित तौर पर चुनाव पर्यवेक्षकों के लिए व्यापक निर्देश भी शामिल हैं, जिनमें यह दावा भी किया गया है कि मेडिकल कैंपों की आड़ में पैसों का वितरण किया जा रहा है। नादिया, बसीरहाट, बनगाँव, कैनिंग, तेहट्टा, रानाघाट, काकद्वीप, मगराहाट-II, डायमंड हार्बर I और II, फलता और लालबाग जैसे विशिष्ट क्षेत्रों को कथित तौर पर जांच के लिए चिह्नित किया गया है।</p>
<p>चुनाव आयोग (ईसीआई) ने बुधवार को कहा कि कोलकाता उत्तर की सभी विधानसभा सीटों पर 85 वर्ष और उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों, और दिव्यांग जनों के लिए घर से वोट डालने की सुविधा 16 अप्रैल से शुरू होगी। इस पहल का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में पहुंच और समावेशिता को बेहतर बनाना है। आयोग के अनुसार 85 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग मतदाता और मतदाता सूची में चिह्नित दिव्यांग व्यक्ति पोस्टल बैलेट के माध्यम से अपना वोट डाल सकेंगे। </p>
<p>अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए ऐसे मतदाताओं को अधिसूचना जारी होने की तारीख से पांच दिनों के भीतर अपने संबंधित रिटर्निंग अधिकारी के पास आवेदन करना होगा। केंद्रीय बलों और पुलिस के साथ मतदान टीमें वोट लेने के लिए घर-घर जाएंगी। वोट जमा करने के लिए ईवीएम का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा, मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने मतदान अवधि के दौरान कानून-व्यवस्था से संबंधित शिकायतों के लिए एक टोल-फ्री हेल्पलाइन जारी की है। नागरिक 1800-345-008 पर कॉल करके अपनी चिंताएं बता सकते हैं। इस कदम से बुजुर्गों और दिव्यांग मतदाताओं की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है, जिससे एक अधिक समावेशी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति प्रतिबद्धता और मजबूत होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 14:51:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>सुप्रीम कोर्ट ने अनिवार्य मतदान की मांग वाली याचिका खारिज की : कहा-मतदान एक संवैधानिक अधिकार और लोकतांत्रिक कर्तव्य, किसी पर थोपा नहीं जा सकता</title>
                                    <description><![CDATA[उच्चतम न्यायालय ने अनिवार्य मतदान लागू करने वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में नागरिकों को वोट के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता और न ही सुविधाएं रोकी जा सकती हैं। पीठ के अनुसार, मतदान एक संवैधानिक अधिकार है, जिसे जागरूकता से बढ़ावा देना चाहिए, दमनकारी नीतियों से नहीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-rejected-the-petition-demanding-compulsory-voting-and-said/article-150650"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/supreme-court1.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को अनिवार्य मतदान लागू करने के निर्देश देने की मांग वाली एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता ने कहा था कि जो लोग मतदान करने से इनकार करते हैं, उन्हें सरकारी सुविधाओं से वंचित कर देना चाहिए और उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। न्यायालय ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि चुनावों में भागीदारी को दमनकारी या बाध्यकारी उपायों से लागू नहीं कर सकते।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों से मताधिकार प्रयोग करने की अपेक्षा होती है, लेकिन राज्य किसी व्यक्ति को वोट देने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। याचिकाकर्ता के वकील ने सुझाव दिया था कि अदालत चुनाव आयोग को अनिवार्य मतदान के लिए दिशानिर्देश बनाने और बिना वैध कारण वोट न देने वालों पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक समिति गठित करने का निर्देश दे। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि मताधिकार के प्रति जन जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए, लेकिन हम इसके लिए मजबूर नहीं कर सकते।</p>
<p>न्यायालय ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि उठाए गए मुद्दे नीतिगत दायरे में आते हैं और इन पर उचित विधायी और कार्यकारी अधिकारियों (संसद और सरकार) द्वारा विचार किया जाना ही सबसे बेहतर है। पीठ ने दोहराया कि मतदान एक संवैधानिक अधिकार और लोकतांत्रिक कर्तव्य है, लेकिन इसे किसी पर थोपा नहीं जा सकता।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 14:35:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तमिलनाडु विधानसभा चुनाव : ईसीआई की बड़ी कार्रवाई ; 727.58 करोड़ रुपये की नकदी जब्त की, 23 अप्रैल को होंगे चुनाव</title>
                                    <description><![CDATA[तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग ने ₹727.58 करोड़ की नकदी, शराब और आभूषण जब्त किए हैं। निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए 326 पर्यवेक्षक तैनात हैं। मुख्य चुनाव अधिकारी अर्चना पटनायक ने स्पष्ट किया कि पारदर्शिता के लिए कड़ी निगरानी जारी है और अवैध प्रलोभनों पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/tamil-nadu-assembly-elections-big-action-by-eci-seized-cash/article-150351"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/tamilnadu--election.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के उड़न दस्ते और सर्विलांस टीम के अधिकारियों ने तमिलनाडु में चुनावी खर्चे पर निगरानी रखते हुए 727.58 करोड़ रुपये की नकदी एवं अन्य सामग्री ज़ब्त की है, जिसमें शराब और ज्वैलरी भी शामिल हैं। तमिलनाडु में 234 सदस्यों वाली 17वीं विधानसभा के लिए 23 अप्रैल को चुनाव होने हैं। मुख्य चुनाव अधिकारी अर्चना पटनायक ने मंगलवार को कहा कि चुनाव कराने में पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने के लिए, ईसीआई ने चुनावों के लिए 326 पर्यवेक्षक तैनात किए हैं। इनमें 136 सामान्य पर्यवेक्षक, 40 पुलिस पर्यवेक्षक और 151 व्यय लेखा पर्यवेक्षक शामिल थे और उन्हें तमिलनाडु के 234 विधानसभा क्षेत्रों में लगाया गया था।</p>
<p>केन्द्रीय पर्यवेक्षक के संपर्क विवरण की जानकारी संबंधित जिला चुनाव अधिकारी के ज़रिए दी गई हैं, ताकि नागरिक, राजनीतिक पार्टियां और उम्मीदवार सीधे चुनाव से जुड़ी शिकायतें दर्ज कर सकें या उल्लंघन की रिपोर्ट कर सकें। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग चुनाव खर्च की कड़ी निगरानी प्रणाली लागू कर रहा है ताकि यह पक्का हो सके कि निगरानी और प्रर्वतन टीमें पूरे राज्य में सक्रिय रूप से तैनात हों ताकि नकदी, शराब, नशीले पदार्थ और दूसरी प्रतिबंधित चीज़ों सहित गैर-कानूनी प्रलोभन सामग्री पर नज़र रखी जा सके और उन्हें रोका जा सके। </p>
<p>इन तेज़ प्रर्वतन उपायों के नतीजे में 13 अप्रैल तक तमिलनाडु में कुल मिलाकर 727.58 करोड़ रुपये की ज़ब्ती हुई है। इसमें 126.64 करोड़ नकद शामिल है। 2.36 करोड़ की शराब, ड्रग्स/नारकोटिक्स 75.48 करोड़ रुपये, कीमती धातु 295.46 करोड़ रुपये और दूसरी चीज़ें और मुफ़्त चीज़ें 226.15 करोड़ रुपये हैं। अर्चना पटनायक ने कहा कि ज़ब्त की गई कुल रकम में से 381 करोड़ रुपये सही दस्तावेज जमा करने पर बिना किसी परेशानी के जारी कर दिए गए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 16:57:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>चुनाव के आंकड़ों में देरी से केरल में मचा विवाद : वी.डी. सतीशान ने लगाया मुख्य चुनाव आयुक्त पर गंभीर आरोप, आंकड़े तुरंत प्रकाशित करने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशान ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर 9 अप्रैल को हुए मतदान के आंकड़ों में देरी पर चिंता जताई है। उन्होंने निर्वाचन क्षेत्रवार प्रतिशत और डाक मतपत्रों की जानकारी सार्वजनिक न होने को पारदर्शिता के खिलाफ बताया। सतीशान ने लोकतांत्रिक विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सटीक डेटा तत्काल जारी करने की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/controversy-created-in-kerala-due-to-delay-in-election-data/article-150154"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/vd-satishnan.png" alt=""></a><br /><p>तिरुवनंतपुरम। केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशान ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता पर गंभीर चिंता जताते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर 9 अप्रैल, 2026 को हुए केरल विधानसभा चुनावों से संबंधित आधिकारिक आंकड़ों के प्रकाशन में हो रही देरी को उजागर किया है। अपने पत्र में सतीशान ने इस तथ्य की ओर ध्यान दिलाया है कि मतदान समाप्त होने के तीन दिन बीत जाने के बावजूद, विस्तृत और प्रामाणिक चुनावी आंकड़े अभी तक भारतीय चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।</p>
<p>उन्होंने इस बात पर विशेष रूप से जोर दिया कि निर्वाचन क्षेत्रवार मतदान आंकड़े, निर्वाचन क्षेत्रवार मतदान प्रतिशत और डाक मतपत्रों के आंकड़े जैसी महत्वपूर्ण जानकारी अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है। पारदर्शिता के महत्व पर बल देते हुए सतीशान ने कहा कि इस तरह के व्यापक आंकड़ों का शीघ्र प्रकाशन लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता का विश्वास सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सत्यापित जानकारी की समय पर उपलब्धता से जनता को जांच-पड़ताल करने में मदद मिलती है और चुनावों की विश्वसनीयता बढ़ती है।</p>
<p>तत्काल कार्रवाई का आग्रह करते हुए सतीशान ने चुनाव आयोग से बिना किसी देरी के संपूर्ण चुनाव आंकड़ों को प्रकाशित करने के लिए तत्काल कदम उठाने का आह्वान किया। उन्होंने रेखांकित किया कि आम जनता, शोधकर्ताओं और राजनीतिक प्रतिनिधियों सहित सभी हितधारकों के लिए सटीक और प्रामाणिक आंकड़ों तक पहुंच आवश्यक है। यह मुद्दा अब राजनीतिक महत्व का हो गया है, क्योंकि 2026 के केरल विधानसभा चुनावों के संचालन और पारदर्शिता पर चल रही चर्चाओं के बीच इस देरी ने सबका ध्यान आकर्षित किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 14:07:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>तमिलनाडु चुनाव: रिकॉर्ड 4,618 उम्मीदवार मैदान में, टीवीके 234 सीटों पर आजमा रही किस्मत, 23 अप्रैल को होंगे चुनाव</title>
                                    <description><![CDATA[तमिलनाडु की 234 सीटों पर 4,618 उम्मीदवार किस्मत आजमाएंगे। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और विपक्षी नेता पलानीस्वामी के बीच कड़ा मुकाबला है। अभिनेता विजय की नई पार्टी और सीमन की एनटीके ने इस बार चुनाव को पांच कोणीय और रोमांचक बना दिया है, जिससे राज्य का सियासी पारा चढ़ गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/tamil-nadu-election-record-4618-candidates-in-the-fray-tvk/article-149864"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/tvk.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल को होने वाले चुनावों में अब कुल 4,618 उम्मीदवार मैदान में हैं। गुरूवार को नाम वापसी की अंतिम तिथि के बाद यह आंकड़ा सामने आया है। चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को नामांकन वापस लेने की समय सीमा समाप्त होने तक रिकॉर्ड 7,599 नामांकन (6,216 पुरुष और 1,380 महिलाएं) दाखिल किए गए थे। इनमें से 4,618 नामांकन स्वीकार किए गए, 2,640 खारिज कर दिए गए और 521 उम्मीदवारों ने अपने नाम वापस ले लिए हैं। वर्तमान में आयोग द्वारा 911 नामांकनों को 'प्रतिस्पर्धी' के रूप में वर्गीकृत किया गया है और आंकड़ों को अपडेट करने की प्रक्रिया जारी है।</p>
<p>वर्ष 2006 के बाद के पिछले पांच विधानसभा चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि नाम वापसी के बाद मैदान में रहने वाले उम्मीदवारों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। 2006 में 2,586 उम्मीदवार, 2011 में 2,748 उम्मीदवार, 2016 में 3,776 उम्मीदवार और 2021 में 3,998 उम्मीदवार मैदान में थे। इसी प्रवृत्ति के अनुरूप इस बार यह संख्या बढ़कर 4,618 हो गई है, जिनमें अधिकांश निर्दलीय हैं। सीटों के बंटवारे, निर्वाचन क्षेत्रों की पहचान, उम्मीदवारों के नाम तय करने, नामांकन दाखिल करने, जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही अब मंच चार मुख्य मोर्चों के बीच मुकाबले के लिए तैयार है। चारों प्रमुख मोर्चों के नेताओं ने मतदाताओं को लुभाने के लिए राज्य के हर जिले और कोने-कोने में अपना सघन प्रचार अभियान शुरू कर दिया है।</p>
<p>सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के नेतृत्व वाला 'सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस' सत्ता बरकरार रखने और अपनी 'द्रविड़ियन मॉडल 2.0' सरकार बनाने के लिए उत्सुक है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद इस गठबंधन की मजबूती के आधार पर फिर से जीत का दावा कर रहे हैं। दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी के लिए यह उनके 53 साल के राजनीतिक इतिहास की सबसे बड़ी परीक्षा है। पार्टी एम.जी.आर. और जयललिता जैसे करिश्माई नेताओं की कमी महसूस कर रही है, लेकिन एक मजबूत गठबंधन के जरिए वह पिछले चुनावी नुकसान को पीछे छोड़ने की कोशिश में है।</p>
<p>चुनावी मैदान में दो अन्य खिलाड़ी भी हैं। अभिनेता विजय की नवगठित पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके), जो पहली बार सभी 234 सीटों पर किस्मत आजमा रही है तथा सीमन के नेतृत्व वाली नाम तमिलर काच्ची (एनटीके), जो हमेशा की तरह अकेले चुनाव लड़ रही है। इसके अलावा, निष्कासित अन्नाद्रमुक नेता वी.के. शशिकला और पट्टाली मक्कल कच्ची (पीएमके) संस्थापक डॉ. रामदास के नए मोर्चे की मौजूदगी से यह मुकाबला पांच कोणीय हो गया है।</p>
<p>मैदान में मौजूद प्रमुख चेहरों में एम.के. स्टालिन (कोलाथुर), उनके बेटे और उप-मुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन (चेपॉक-तिरुवल्लिकेनी), अन्नाद्रमुक से बाहर किए गए और अब द्रमुक में शामिल हो चुके पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पनीरसेल्वम (बोडिनायक्कनूर), देसिया मुरपोक्कु द्रविड़ कषगम (डीएमडीके) महासचिव प्रेमलता विजयकांत (वृद्धाचलम) और पलानीस्वामी (इडप्पडी) शामिल हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन (सातुर), केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन (अविनाशी आरक्षित), पूर्व राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन (मायलापुर) और वनथी श्रीनिवासन (कोयंबटूर उत्तर) चुनाव लड़ रहे हैं। द्रमुक के दिग्गज नेता दुरईमुरुगन काटपाडी सीट से रिकॉर्ड 13वीं बार मैदान में हैं। अभिनेता विजय दो सीटों चेन्नई की पेरम्बूर और तिरुचि पूर्व से चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि सीमन शिवगंगा जिले की कराईकुडी सीट से मैदान में हैं।</p>
<p>द्रमुक इस बार खुद 164 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि गठबंधन सहयोगियों के 12 उम्मीदवार उसके 'उगते सूरज' के निशान पर चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे कुल संख्या 176 हो गई है। बाकी 58 सीटों पर सहयोगी दल अपने प्रतीकों पर लड़ रहे हैं। अन्नाद्रमुक गठबंधन में मुख्य पार्टी 167 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि भाजपा, पीएमके और एएमएमके सहित अन्य सहयोगियों को 67 सीटें दी गई हैं। एम.के. स्टालिन अपने गढ़ कोलाथुर से लगातार चौथी बार जीत की उम्मीद कर रहे हैं। वह 1984 से लगातार 10वीं बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। चुनावी तस्वीर साफ होने के साथ ही राज्य में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। कई जिलों में बढ़ती गर्मी के बावजूद नेताओं ने अपना प्रचार अभियान और तेज कर दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 18:05:13 +0530</pubDate>
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