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                <title>Reserve Bank - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Reserve Bank RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>संरक्षणवाद और अनिश्चितता से निटपने के लिए नीतिगत दरों में हो आधी फीसदी की कमी, 4 जून को शुरू होगी रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति की बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) से नीतिगत दरों में आधी फीसदी की कटौती करने की उम्मीद की जा रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/protection-of-protectionism-and-uncertainty-should-be-half-a-percent/article-116212"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer-(2)5.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। बढ़ते संरक्षणवाद और भू-राजनीतिक तनाव से उत्पन्न चुनौतियों के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में आ रही सुस्ती को ध्यान में रखते हुए घेरलू स्तर पर आर्थिक गतिविधियों और निर्यात को गति देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) से नीतिगत दरों में आधी फीसदी की कटौती करने की उम्मीद की जा रही है। </p>
<p>उल्लेखनीय है कि मई 2022 के बाद फरवरी 2025 में नीतिगत दरों में 0.25 प्रतिशत और अप्रैल 2025 में फिर से 0.25 प्रतिशत की कमी की गयी है। इन दो कटौतियों से आम लोगों विशेषकर आवास ऋण और नए व्यक्तिगत ऋण, वाहन ऋण लेने वालों को राहत मिली है क्योंकि बैंकों ने कटौतियों के लाभ को ग्राहकों तक पहुंचाना शुरू कर दिया है। यदि जून की बैक में भी आधी फीसद की कमी की जाती है तो कुल मिलाकर नीतिगत दरों में एक प्रतिशत की कटौती हो जायेगी, जिससे आवासऋण आदि की मांग में तेजी आ सकती है।  </p>
<p><strong>प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में गिरावट :</strong></p>
<p>अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अनुसार वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में बढ़ते व्यापार संरक्षणवाद और अनिश्चितता के कारण 50 आधार अंकों की गिरावट का अनुमान है। सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में गिरावट का अनुमान है। 2025 में चीन की वृद्धि 130 आधार अंकों और भारत की 20-30 आधार अंकों की गिरावट का अनुमान है। </p>
<p><strong>चीन की रीडिंग नकारात्मक :</strong></p>
<p>वैश्विक प्रमुख मुद्रास्फीति में अपेक्षा से कम गति से कमी आने की उम्मीद है। उभरती अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति में नरमी आने की उम्मीद है, चीन के लिए नवीनतम रीडिंग नकारात्मक मुद्रास्फीति का संकेत दे रही है। व्यापार युद्धों ने अमेरिकी राजकोषीय घाटे पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं डाला है।</p>
<p><strong>सामान्य से अधिक मॉनसून की भविष्यवाणी :</strong></p>
<p>घरेलू स्तर पर भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में 7.4 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में 8.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। मौसम विभाग द्वारा सामान्य से अधिक मॉनसून की भविष्यवाणी, फसलों की मजबूत आवक और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित खुदरा महंगाई अनुमान को वित्त वर्ष 2026 में 3.5 प्रतिशत तक आने का अनुमान जताया गया है लेकिन अभी इसमें और कमी आने की उम्मीद की जा रही है।  </p>
<p><strong>भू-राजनीतिक जोखिम उच्च बना : घोष</strong></p>
<p>16वें वित्त आयोग के सदस्य एवं भारतीय स्टेट बैंक के ग्रुप मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. सौम्य कांति घोष ने यह उम्मीद जातते हुये सोमवार को जारी अपनी रिपोर्ट में कहा कि 2025 में वैश्विक वृद्धि में 50 आधार अंकों की कमी आने का अनुमान है। व्यापार की मात्रा में वृद्धि 2024 के स्तर से आधी होकर 1.7 प्रतिशत तक रह सकती है। वैश्विक मुद्रास्फीति जोखिम नियंत्रित रहेगा। भू-राजनीतिक जोखिम उच्च बना हुआ है। उभरते बाजारों में, धीमी वृद्धि केंद्रीय बैंकों को समायोजन में तेजी लाने के लिए प्रेरित कर सकती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Jun 2025 11:04:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Monetary Policy Meeting: रिजर्व बैंक ने आधी फीसद बढ़ाया विकास अनुमान, दरें यथावत</title>
                                    <description><![CDATA[दास ने यह घोषणा करते हुये कहा कि फिलहाल नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं की जा रही है लेकिन नीतिगत दरों को यथावत बनाये रखने के बीच समिति ने समायोजन वाले रूख  से पीछे हटने का निर्णय लिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/monetary-policy-meeting-reserve-bank-increased-growth-forecast-rates-by/article-63672"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/shaktikant-das.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में देश के आर्थिक विकास के सभी अनुमानों को पीछे छोड़ते हुये 7.6 प्रतिशत की दर से बढऩे से उत्साहित भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आज चालू वित्त वर्ष के विकास अनुमान में आधी फीसदी की बढोतरी करने के साथ ही खुदरा महंगाई बढऩे के जोखिम को ध्यान में रखते हुये नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं करने का निर्णय लिया, जिससे घर, वाहन आदि ऋण की किश्तों में कोई वृद्धि नहीं होगी। </p>
<p>रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की चालू वित्त वर्ष की पांचवीं द्विमासिक तीन दिवसीय बैठक में आज लिए गये निर्णयों की जानकारी देते हुये गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था बेहतर गति से आगे बढ़ रही है और वह सभी अनुमानों को पीछे छोड़ते हुये दूसरी तिमाही में 7.6 प्रतिशत की गति से आगे बढ़ा  है। इसके मद्देनजर चालू वित्त वर्ष में विकास अनुमान को पहले के 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर अब 7.0 प्रतिशत कर दिया गया है।  उन्होंने कहा के समिति ने सर्वसम्मति से रेपो दर को 6.5 प्रतिशत पर यथावत रखने का निर्णय लिया है। </p>
<p>दास ने यह घोषणा करते हुये कहा कि फिलहाल नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं की जा रही है लेकिन नीतिगत दरों को यथावत बनाये रखने के बीच समिति ने समायोजन वाले रूख  से पीछे हटने का निर्णय लिया है।</p>
<p>समिति के इस निर्णय के बाद फिलहाल नीतिगत दरों में बढोतरी नहीं होगी। रेपो दर 6.5 प्रतिशत, स्टैंडर्ड जमा सुविधा दर (एसडीएफआर) 6.25 प्रतिशत, मार्जिनल स्टैंडिंग सुविधा दर (एमएसएफआर) 6.75 प्रतिशत, बैंक दर 6.75 प्रतिशत, फिक्स्ड रिजर्व रेपो दर 3.35 प्रतिशत, नकद आरक्षित अनुपात 4.50 प्रतिशत, वैधानिक तरलता अनुपात 18 प्रतिशत पर यथावत है।</p>
<p>दास ने कहा कि वैश्विक आर्थिक गतिविधियों में आयी सुस्ती के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था और वित्तीय क्षेत्र सशक्त और मजबूत बना हुआ और यह महंगाई को काबू में करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष में विकास अनुमान को 7.0 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके आधार पर चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में विकास अनुमान को बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत और चौथी तिमाही के अनुमान को 6.0 प्रतिशत कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में विकास दर के 6.7 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 6.5 प्रतिशत और तीसरी तिमाही में इसके 6.4 प्रतिशत पर रहने का अनुमान जताया गया है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक का पूरा ध्यान महंगाई को चार प्रतिशत के लक्षित दायरे में लाने का है। उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष में खुदरा महंगाई के अनुमान को 5.4 प्रतिशत पर यथावत रखा गया है। तीसरी तिमाही में 5.6 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह 5.2 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 4.0 प्रतिशत और तीसरी तिमाही 4.7 प्रतिशत रह सकती है।      </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
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                <pubDate>Fri, 08 Dec 2023 11:16:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रिजर्व बैंक ने विलफुल डिफॉल्टर्स की नीति किया बदलाव, कांग्रेस बोली- जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों के लिए खोला चोर दरवाजा</title>
                                    <description><![CDATA[ कांग्रेस ने कहा है कि रिजर्व बैंक ने जानबूझकर बैंकों का कर्ज न चुकाने वाले लोगों को सुरक्षित रास्ता देने के वास्ते नीतियों में बदलाव करते हुए बैंकों से धोखाधड़ी करने वालों के लिए चोर दरवाजा खोला है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/reserve-bank-changed-the-policy-of-willful-defaulters-congress-bid/article-48820"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/630-400-size-(14)2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि रिजर्व बैंक ने जानबूझकर बैंकों का कर्ज न चुकाने वाले लोगों को सुरक्षित रास्ता देने के वास्ते नीतियों में बदलाव करते हुए बैंकों से धोखाधड़ी करने वालों के लिए चोर दरवाजा खोला है। कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. विनीत पुनिया तथा अमिताभ दुबे ने बुधवार को यहां पार्टी मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि रिजर्व बैंक के नीति में अचानक बदलाव करने की इस पहल से जानबूझकर ऋण न चुकाकर धोखाधड़ी करने वालों को क्लीन चिट देने की कोशिश की जा रही है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक के इस कदम से नीरव मोदी, मेहुल चोकसी, विजय माल्या जैसे विलफुल डिफॉल्टर्स की धोखाधड़ी को माफ करने के लिए एक चोर दरवाजा खोलने का काम किया गया है। आरबीआई के इस कदम का नुकसान न सिर्फ बैंकों को बल्कि करदाताओं और मध्यमवर्गीय परिवारों को भी उठाना पड़ेगा।</p>
<p>कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मोदी सरकार में विलफुल डिफॉल्टर्स को बढ़ावा दिया जा रहा है और आम जनता के पैसों को सरकार अपने चुनिंदा मित्रों पर न्योछावर कर रही है। उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान के टॉप 50 विलफुल डिफॉल्टर्स का कुल ऋण 95 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा है जिनके लिए सरकार लगातार काम कर रही है। दो साल पहले आरबीआई की पॉलिसी में यह स्पष्ट था कि विलफुल डिफॉल्टर्स को शेयर बाजार में जाने और नए लोन लेने की अनुमति नहीं मिलेगी। अब सरकार ने यह पॉलिसी बदलकर उन्हें खुली छूट दे दी है।</p>
<p>प्रवक्ताओं ने कहा कि पिछले नौ साल में मोदी जी के कार्यकाल में गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) 365 प्रतिशत बढ़ा है और 10 लाख करोड़ से ज्यादा की राशि बट्टे खाते में डाली गई, जिसमें से सिर्फ 13 प्रतिशत कर्ज वसूले गए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 14 Jun 2023 17:14:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>फिलहाल नहीं बदलेगी ब्याज दरें, रिजर्व बैंक ने नीतिगत दरें, रिवर्स रेपो दरें रखी यथावत, रेपो दर 4%, रिवर्स रेपो दर को 3.35%</title>
                                    <description><![CDATA[नकद आरक्षी अनुपात चार प्रतिशत और एसएलआर 18 प्रतिशत पर बना रहेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%AB%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%AC%E0%A4%A6%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%9C-%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%82--%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5-%E0%A4%AC%E0%A5%88%E0%A4%82%E0%A4%95-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%97%E0%A4%A4-%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%82--%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B8-%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%AA%E0%A5%8B-%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B0%E0%A4%96%E0%A5%80-%E0%A4%AF%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A4--%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%AA%E0%A5%8B-%E0%A4%A6%E0%A4%B0-4---%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B8-%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%AA%E0%A5%8B-%E0%A4%A6%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%8B-3-35/article-3009"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/rbi.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। भारतीय रिजर्व की मौद्रिक नीति समिति ने आगे महंगाई के लक्षित दायरे में रहने तथा कोरोना की दूसरी लहर के बाद आर्थिक गतिविधियों के पटरी पर लौटने का हवाला देते हुए नीतिगत दरों (रेपो दर) को यथावत बनाये रखने के साथ ही अपने रूख को समायोजन वाला बनाये रखेगा ताकि आवश्यकता पडऩे पर नीतिगत दरों में जरूरत के अनुरूप बदलाव किया जा सके। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समीति की बुधवार को  तीन दिवसीय पांचवीं द्विमासिक समीक्षा बैठक में सभी नीतिगत दरों को अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया गया। रेपो दर को चार प्रतिशत, रिवर्स रेपो दर को 3.35 प्रतिशत, मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी दर को 4.25 प्रतिशत और बैंक दर को 4.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है। नकद आरक्षी अनुपात चार प्रतिशत और एसएलआर 18 प्रतिशत पर बना रहेगा। पिछले वर्ष कोरोना के शुरू होने के बाद से यह मौद्रिक नीति की 13वीं घोषणा थी। <br /> <br /> इसके साथ ही रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 9.5 प्रतिशत की दर से बढऩे के अपने अनुमान को यथावत रखने के साथ ही मार्च 2022 में समाप्त हो रहे वित्त वर्ष में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित खुदरा महंगाई के 5.3 प्रतिशत पर रहने का अनुमान जताया गया है। महंगाई के जोखिम को संतुलित बताते हुये समिति ने दिसंबर में समाप्त होने वाली तीसरी तिमाही में खुदरा महंगाई के 5.1 प्रतिशत और चौथी तिमाही में इसके बढ़कर 5.4 प्रतिशत पर पहुंचने का अनुमान जताया है। अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में इसमें कुछ सुधार होने की उम्मीद जताते हुये कहा गया है कि यह उतर कर पांच प्रतिशत पर आ सकती है और इसके बाद दूसरी तिमाही में भी इसी स्तर पर रह सकती है। <br /> <br /> रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक के बाद जारी बयान में यह अनुमान जताया है। उन्होंने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर का प्रभाव कम होने और टीकाकरण में तेजी से घरेलू आर्थिक गतिविधिया कोरोना के पहले के स्तर पर पहुंच रही है। हालांकि कोरोना के नये वेरिएंट का उल्लेख करते हुये उन्होंने कहा कि इसके कारण नये मामलों में बढोतरी हुयी है जो ङ्क्षचता की बात है। उन्होंने कहा कि जो सूचनायें मिल रही हैं उसके अनुसार उपभोग की मांग बढ़ रही है। ग्रामीण मांग के साथ ही शहरी मांग में भी बढोतरी हुयी है और लोग यात्री और पर्यटन आदि पर व्यय करने लगे हैं। अक्टूबर नंबवर के दौरान रेलवे माल ढुलाई , बंरगाह पर माल परिवहन, जीएसटी राजस्व संग्रह, टॉल संग्रह, पेट्रोलयिम उपयोग और  हवाई यात्रियों की संख्या में बढोतरी हुयी है। हाल ही में पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क और वैट में कमी किये जाने के कारण क्रय शक्ति बढऩे से उपभोग की मांग में बढोतरी होगी। अगस्त से सरकारी उपभोग में बढोतरी हुयी है जिससे कुल मिलाकर मांग बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि पूंजीगत वस्तओं का उत्पादन कोरोना से पहले स्तर पर बना हुआ। अक्टूूबर में इन उत्पादों के आयात में भी दहाई अंकों में बढोतरी हुयी है। उन्होंने हालांकि कहा कि कोरोना की दूसरी लहर से प्रभावित अर्थव्यवस्था अब फिर से तीव्रता से बढ़ रही है लेकिन अर्थव्यवस्था अभी इतनी भी मजबूत नहीं हुयी है कि वह बाहरी झटकों को झेल सके और दीर्घकाल तक मजबूत रह सके। इसके मद्देनजर नीतिगत सहयोग का जारी रखने का निर्णय लिया गया है। <br /> <br /> उन्होंने कहा कि इनसभी बातों को ध्यान में रखते हुये चालू वित्त वर्ष में जीडीपी वृद्धि के अनुमान को 9.5 प्रतिशत पर यथावत रखा गया है। इसके साथ ही तीसरी तिमाही में इसके 6.6 प्रतिशत और चौथी तिमाही में इसके 6.0 प्रतिशत पर रहने की उम्मीद है। अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में इसके 17.2 प्रतिशत पर और दूसरी तिमाही में 7.8 प्रतिशत पर रहने की संभावना है। <br /> <br /> <strong>मौद्रिक नीति की मुख्य बातें</strong><br /> भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार को  मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय पांचवीं द्विमासिक बैठक में लिए गये निणर्याें की घोषणा की जिसकी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं<br /> <br /> 1. मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने लगातार नौंवी बार प्रमुख नीतिगत दर (रेपो) को 4 प्रतिशत पर बरकरार रखा।<br /> 2. इसके परिणामस्वरूप रिवर्स रेपो भी 3.35 प्रतिशत पर कायम।<br /> 3. बैंक दर 4.25 प्रतिशत पर बरकरार।<br /> 4.  रिजर्व बैंक आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिये मौद्रिक नीति के रुख को समायोजन वाला बनाये रखेगा।<br /> 5.चालू वित्त वर्ष में खुदरा मुद्रास्फीति 2021-22 में 5.3 प्रतिशत पर रहने का अनुमान, अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में घटकर 5 प्रतिशत पर आने की संभावना।<br /> 6. रिजर्व बैंक ने जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि दर 9.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा।<br /> 7. बैंकों को विदेशी शाखाओं में निवेश की मिलेगी अनुमति, विदेशी लाभ को बगैर पूर्व अनुमति के स्वदेश लाने की होगी अनुमति <br /> 8. सरकारी प्रतिभूतियों और सार्वजनिक प्रारंभिक निगर्म (आईपीओ) के आवेदन के लिए यूपीआई से भुगतान की सीमा दो लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने को मंजूरी<br /> 9. फीचर फोन से यूपीआई भुगतान की मिलेगी सुविधा <br /> 10. मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक 7 से 9 फरवरी 2022 को होगी।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 08 Dec 2021 13:25:40 +0530</pubDate>
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                <title>RBI मौद्रिक नीति समिति की बैठक: नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं, GDP ग्रोथ 9.5% रहने का अनुमान</title>
                                    <description><![CDATA[महंगाई बढ़ने और कोरोना की दूसरी लहर के बाद आर्थिक गतिविधियों के पटरी पर लौटने का हवाला देते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो दर तथा अन्य नीतिगत दरों को यथावत रखने का फैसला किया है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि वित्त वर्ष 2021-22 में वास्तविक जीडीपी की विकास दर 9.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/rbi-%E0%A4%AE%E0%A5%8C%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A5%88%E0%A4%A0%E0%A4%95--%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%97%E0%A4%A4-%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%88-%E0%A4%AC%E0%A4%A6%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B5-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82--gdp-%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A5-9-5--%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8/article-1365"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-08/e8fpqqkvoamlkza.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। महंगाई बढ़ने और कोरोना की तीसरी लहर की आशंकाओं के बीच आर्थिक गतिविधियों के पटरी पर लाने के उद्देश्य से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रेपो दर तथा अन्य नीतिगत दरों को 7वीं बार यथावत रखने का फैसला किया है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समीति की शुक्रवार को समाप्त हुई 3 दिवसीय बैठक में सभी नीतिगत दरों को अपरिवर्तित रखने का निर्णय किया गया। रेपो दर को 4 प्रतिशत, रिवर्स रेपो दर को 3.35 प्रतिशत, मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी दर को 4.25 प्रतिशत और बैंक दर को 4.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है। नकद आरक्षी अनुपात 4 प्रतिशत और एसएलआर 18 प्रतिशत पर बना रहेगा। बैठक के बाद दास ने बताया कि वित्त वर्ष 2021-22 में वास्तविक जीडीपी की विकास दर 9.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे पटरी पर आ रही है। साथ ही इस साल कुछ विलंब के बाद मानसून में सुधार होने से खरीफ की बुआई में तेजी आई है। आने वाले दिनों में कोविड-19 टीकाकरण भी गति पकड़ेगा। ये सभी कारक अर्थव्यवस्था को गति देंगे। <br /> <br /> कोरोना की दूसरी लहर के चलते अप्रैल-मई के दौरान देश के कई हिस्सों में लगाई गई सख्त पाबंदियों से भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है, ऐसे में तीसरी लहर की आशंकाओं के बीच यह बैठक बेहद अहम है। हर दो महीने में भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक होती है। इस बैठक में अर्थव्यवस्था में सुधार पर चर्चा की जाती है और साथ ही ब्याज दरों का फैसला लिया जाता है। रिजर्व बैंक ने आखिरी बार 22 मई 2020 को नीतिगत दरों में बदलाव किया था। दास ने कहा कि केन्द्रीय बैंक के मौद्रिक रुख को उदार बनाए रखा गया है। उदार रुख पर 6 में से 5 सदस्य सहमत थे। रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2021-22 में देश की वास्तविक जीडीपी में 9.5 फीसदी की तेजी का अनुमान लगाया है। इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह 21.4 फीसदी होगी, दूसरी तिमाही में 7.3 फीसदी, तीसरी तिमाही में 6.3 फीसदी और चौथी तिमाही में 6.1 फीसदी। वित्त वर्ष 2022-23 में देश की वास्तविक जीडीपी 17.2 फीसदी रह सकती है। <br /> <br /> महंगाई पर उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2021-2022 में खुदरा महंगाई 5.7 फीसदी रह सकती है। पिछली बैठक में 5.1 फीसदी का अनुमान लगाया गया था। दूसरी तिमाही में महंगाई दर 5.9 फीसदी रह सकती है, तीसरी तिमाही में 5.3 और चौथी तिमाही में यह 5.8 फीसदी हो सकती है। वित्त वर्ष 2022-2023 की पहली तिमाही में यह 5.1 फीसदी रह सकती है। उन्होंने कहा कि वृद्धि के लिए नीतिगत समर्थन की जरूरी है। केंद्रीय बैंक का ध्यान सप्लाई और डिमांड को बेहतर करने पर है। उन्होंने कहा कि टीकाकरण से अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलने की उम्मीद है। कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर से अब अर्थव्यवस्था उबर रही है। टीकाकरण बढ़ने से आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ी है और जून के मुकाबले जुलाई में आर्थिक सुधार बेहतर रहा लेकिन कोरोना की तीसरी लहर के प्रति चौकन्ना रहने की जरूरत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Aug 2021 17:26:22 +0530</pubDate>
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