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                <title>GDP - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>GDP RSS Feed</description>
                
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                <title>विकसित राजस्थान 2047 के लिए एमएसएमई बनेगा 'ग्रोथ इंजन': जोगाराम पटेल</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर में आयोजित 7वें एमएसएमई समिट में कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने छोटे उद्योगों को अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया। देश की GDP में 30% योगदान देने वाला यह क्षेत्र अब डिजिटल लोन और 35 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों से सशक्त हो रहा है। समिट में नवाचार, वैश्विक ब्रांडिंग और 20 करोड़ रोजगार सृजन पर विशेष मंथन किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/msme-will-become-growth-engine-for-developed-rajasthan-2047-jogaram/article-147076"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/ficci.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) न केवल भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, बल्कि 'विकसित भारत 2047' के विजन को साकार करने वाले प्रमुख स्तंभ भी हैं। यह विचार राजस्थान सरकार के कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने गुरुवार को फिक्की (FICCI) राजस्थान स्टेट काउंसिल द्वारा आयोजित 7वें राजस्थान एमएसएमई समिट के उद्घाटन सत्र में व्यक्त किए। 'एमएसएमई एज द ग्रोथ इंजिन ऑफ विकसित राजस्थान 2047' थीम पर आयोजित इस समिट में राज्य के औद्योगिक परिदृश्य और एमएसएमई की वैश्विक पहुंच पर गहन मंथन किया गया।</p>
<p><strong>देश की जीडीपी में 30% योगदान, तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ते कदम</strong></p>
<p>उद्घाटन संबोधन में मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और अब तीसरी पायदान की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा: "देश की जीडीपी में लगभग 30 प्रतिशत योगदान देने वाला एमएसएमई क्षेत्र समावेशी आर्थिक प्रगति का आधार है। राजस्थान अपने विशाल संसाधनों और सुदृढ़ इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ औद्योगिक विस्तार के लिए तैयार है।" उन्होंने बताया कि 'राइजिंग राजस्थान' समिट के तहत हुए 35 लाख करोड़ रुपये के एमओयू में से 8 लाख करोड़ की परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है, जो राज्य में निवेश अनुकूल माहौल का प्रमाण है।</p>
<p><strong>बैंकिंग सेक्टर का सहयोग और डिजिटल समाधान</strong></p>
<p>बैंक ऑफ बड़ौदा के जोनल हेड और एसएलबीसी संयोजक एम. अनिल ने एमएसएमई के लिए वित्त की सुगमता पर जोर दिया। उन्होंने "बीओबी डिजी उद्यम" जैसी डिजिटल पहलों का जिक्र करते हुए कहा कि पूरी तरह डिजिटल लोन प्रोसेसिंग से व्यापार करने में आसानी (Ease of Doing Business) बढ़ी है। उन्होंने ग्राहकों की बदलती जरूरतों के अनुसार त्वरित और प्रतिस्पर्धी वित्तीय समाधानों की उपलब्धता को अनिवार्य बताया।</p>
<p><strong>20 करोड़ रोजगार और नीतियों का संबल</strong></p>
<p>राजस्थान चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (RCCI) के अध्यक्ष डॉ. के. एल. जैन ने बताया कि एमएसएमई एक्ट के आने से छोटे उद्योगों को कम लागत पर क्रेडिट मिलना आसान हुआ है।</p>
<p>रोजगार: यह क्षेत्र देश में लगभग 20 करोड़ लोगों को आजीविका दे रहा है।<br />नीतिगत ढांचा: राज्य सरकार ने इस क्षेत्र की मजबूती के लिए करीब 27 नीतियां लागू की हैं।<br />डॉ. जैन ने मार्केटिंग, आधुनिक तकनीक और कुशल कारीगरों की कमी को दूर करने के लिए सरकार और संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर बल दिया।</p>
<p><strong>नवाचार और वैश्विक ब्रांडिंग पर जोर</strong></p>
<p>फिक्की राजस्थान के को-चेयरमैन और इन्सोलेशन एनर्जी के चेयरमैन मनीष गुप्ता ने कहा कि एमएसएमई का भविष्य केवल सब्सिडी पर नहीं, बल्कि नवाचार और प्रतिस्पर्धा पर टिका है। उन्होंने उद्यमियों से वैश्विक वैल्यू चेन से जुड़ने और क्लस्टर-आधारित विकास मॉडल अपनाने का आह्वान किया। वहीँ, फिक्की राजस्थान एमएसएमई सब-कमेटी के चेयरमैन एन.के. जैन ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि छोटे उद्योगों को बड़े उद्योगों में परिवर्तित करने की दिशा में भारत उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। कार्यक्रम का संचालन फिक्की राजस्थान के एडवाइजर अजय सिंघा ने किया।</p>
<p><strong>खास सत्रों में हुआ मंथन:</strong></p>
<p>समिट के दौरान दो मुख्य तकनीकी सत्र आयोजित किए गए:<br />वैश्विक पदचिह्न: राजस्थान के एमएसएमई की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और विदेशी बाजारों तक पहुंच पर चर्चा।<br />क्रेडिट से कैपिटल मार्केट तक: एमएसएमई के लिए पारंपरिक लोन के अलावा शेयर बाजार और अन्य वित्तीय माध्यमों से पूंजी जुटाने पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 18:14:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कांग्रेस का हल्ला-बोल, एक तरफ बजट तो दूसरी तरफ आधार वर्ष में बदलाव करना नीतिगत समन्वय में कमी </title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस ने केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले जीडीपी और सीपीआई के बेस ईयर बदलने पर सवाल उठाए। कहा, इससे बजट अनुमानों और नीति-निर्माण में भ्रम पैदा होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congresss-uproar-on-one-side-is-budget-and-on-the/article-141437"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/500-px)-(10)1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट की पूर्व संध्या पर सांख्यिकीय आंकड़ों के जारी होने के समय को लेकर गंभीर चिंताएं जताते हुए कहा है कि बजट के वित्तीय अनुमान पुरानी गणनाओं पर आधारित हो सकते हैं, क्योंकि बजट पेश होने के मात्र कुछ ही दिनों के भीतर देश की विकास दर (जीडीपी) और महंगाई दर (सीपीआई) के गणना आधार (बेस ईयर) में बड़े बदलाव होने जा रहे हैं।</p>
<p>कांग्रेस के जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर चिंता का साझा करते हुए कहा कि आधार वर्ष में इस बदलाव से बजट के प्रमुख आंकड़ों, जैसे कि राजकोषीय घाटा और विकास दर के लक्ष्यों में भारी विसंगति पैदा हो सकती है। इसे नीति-निर्माण की प्रक्रिया में समन्वय की कमी आ सकती है, जिससे बजट के वास्तविक प्रभाव का सटीक आकलन करना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।</p>
<p>उन्होंने लिखा कि बजट के कई आँकड़े सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के प्रतिशत के रूप में पेश होंगे लेकिन कुछ दिनों बाद ही 2022-23 को आधार वर्ष मानकर नयी जीडीपी शृंखला जारी होने वाली है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या  रविवार को पेश किए जाने वाले बजट के आँकड़ों में इसके तुरंत बाद संशोधन किया जाएगा? </p>
<p>उन्होंने एक और चिंता प्रकट करते हुए कहा कि 2024 को आधार मानकर नई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) शृंखला 12 फरवरी को जारी होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि इस नई शृंखला में खाद्य कीमतों की हिस्सेदारी में तेज गिरावट दिखाई दे सकती है। अगर ऐसा होता है, तो इसका भी बजट के आँकड़ों पर असर पड़ेगा। थोक मूल्य सूचकांक में भी संशोधन किया जा रहा है और संभवत: इसे आने वाले कुछ महीनों में सार्वजनिक किया जाएगा।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि जो भी स्थिति हो, यह नीति-निर्माण में तालमेल की कमी को ही दर्शाता है। उन्होंने यह भी लिखा कि वित्त वर्ष 2026-27 का बजट कल पेश किया जाएगा। राज्य सरकारें बेसब्री से प्रतीक्षा कर रही होंगी कि उनके लिए इसमें क्या है, क्योंकि वित्त मंत्री 16वें वित्त आयोग की सिफ़ारिशों को लागू करने की घोषणा करने वाली हैं।</p>
<p>गौरतलब है कि वित्त आयोग एक संवैधानिक निकाय है। इसे हर पांच साल में बनाया जाता है। इसका काम केंद्र के एकत्र राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी, पाँच वर्षों की अवधि के लिए विशेष अनुदानों की सिफ़ारिशें करना है। नया 16वां वित्त आयोग 2026-27 से 2030-31 की अवधि से संबंधित है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Jan 2026 15:03:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कांग्रेस ने उठाए आर्थिक मुद्दे, कहा- ''बजट 2026-27'' में होगी निवेश सुस्ती, बढ़ती असमानता जैसी बड़ी चुनौती </title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस ने बजट सत्र से पहले निवेश सुस्ती, घरेलू बचत गिरावट और बढ़ती आर्थिक असमानता को बड़ी चुनौती बताया, कहा कि 2026-27 का बजट इन समस्याओं के समाधान की परीक्षा होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-declared-its-budget-session-program-and-said-investment-slowdown/article-139289"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/budget-2026-27.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने बजट सत्र से पहले अपना कार्यक्रम घोषित कर दिया है और कहा है कि देश में निवेश की सुस्ती, घरेलू बचत में गिरावट और लगातार बढ़ती आर्थिक असमानता जैसी गंभीर समस्याएं हैं जिनसे निपटने के उपाय कर अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की 2026-27 के बजट में बड़ी चुनातियाँ होंगी। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने सोमवार को यहां एक बयान ने कहा कि संसद के बजट सत्र का कार्यक्रम घोषित हो चुका है और 2026-27 का बजट करीब बीस दिन बाद पेश किया जाना है। यह बजट 16वें वित्त आयोग की सिफ़ारिशों को भी प्रतिबिंबित करेगा, जिसकी रिपोर्ट गत 17 नवंबर को सौंपी गई थी। ये सिफ़ारिशें 2026-27 से 2031-32 की अवधि के लिए केंद्र और राज्यों के बीच कर राजस्व के बंटवारे तथा राज्यों के आपसी हिस्से से जुड़ी हैं।</p>
<p>उन्होने कहा, देश आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है और निवेश की सुस्ती, घरेलू बचत में गिरावट और लगातार बढ़ती आर्थिक असमानता जैसी बड़ी चुनौतियाँ सामने हैं और यदि इन मूलभूत समस्याओं से ठोस तरीके से नहीं निपटा गया, तो उच्च जीडीपी वृद्धि और बड़े स्तर पर रोजगार सृजन कठिन हो जाएगा। </p>
<p>कांग्रेस ने मनरेगा से जुड़े नए कानून में 60:40 के फार्मूले पर भी चिंता जताई और कहा कि इससे पहले ही दबाव में चल रही राज्य सरकारों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाएगा। उनका कहना था कि अर्थव्यवस्था के सामने तीन बड़ी चुनौतियां स्पष्ट हैं जिनमें पहली टैक्स में कटौती और बेहतर मुनाफे के बावजूद निजी कॉरपोरेट निवेश की रफ्तार सुस्त बनी हुई है। दूसरी, घरेलू बचत दरों में उल्लेखनीय गिरावट से निवेश क्षमता सीमित हो रही है। तीसरी, आय, संपत्ति और उपभोग से जुड़ी असमानताएं लगातार गहराती जा रही हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि देखना यह है कि आने वाला बजट केवल सांख्यिकीय आंकड़ों के सहारे तस्वीर पेश करता है या इन जमीनी सच्चाइयों को स्वीकार कर उनसे निपटने के लिए ठोस और सार्थक कदम उठाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Jan 2026 14:05:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पीयूष गोयल ने फिक्की के वार्षिक सम्मेलन को किया संबोधित, बोलें-पचास देश के साथ एफटीए पर बात कर रहा है भारत </title>
                                    <description><![CDATA[वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि भारत इस समय 14 साझेदार समूहों के माध्यम से 50 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) पर बातचीत कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया, यूएई, मॉरीशस, ब्रिटेन और ईएफटीए के साथ समझौते पहले से लागू हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/piyush-goyal-addressed-ficcis-annual-conference-and-said-india/article-133935"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/piyush-goyal.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि, भारत मौजूदा समय में 14  देशों और देश के समूह के साथ मुक्त व्यापार संधि (एफटीए) पर बात कर रहा है जिसमें कुल 50 देश शामिल हैं। पीयूष गोयल ने यहां उद्योग मंडल फिक्की के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि, पिछले कुछ समय में हमने देखा है कि किस तरह से व्यापार को हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया गया है। इस दौरान हमने दुनिया में विश्वसनीय सहयोगियों की जरूरत को भी महसूस किया है और यह समझा है कि, हमें उन देशों के साथ मिलकर काम करना चाहिए, जो निष्पक्ष व्यापार और समान अवसर में विश्वास करते हैं। </p>
<p>इसके आगे पीयूष गोयल ने कहा, भारत ने ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात, मॉरीशस, ब्रिटेन और चार देशों के यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) समूह के साथ पहले ही एफटीए को मूर्त रूप दे दिया है। भारत इस समय 14 देशों या देशों के समूहों के साथ (एजेंसी) कर रहा है जिसमें कुल 50 देश शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि, भारत उन देशों के साथ एफटीए पर बात कर रहा है जो हमारे व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है और विकसित देश है ताकि हम एक दूसरे के पूरक बन सकें। </p>
<p>पीयूष गोयल ने कहा कि, भारत के साथ दुनिया के सभी देश एफटीए करना चाहते हैं, क्योंकि यहां ऐसी सरकार है जिसकी नीति कारोबार और सार्वजनिक हित को बढ़ावा देती है। यहां कारोबार की आसानी है, हमने प्रासंगिकता खो चुके पुराने नियमों को बदला है। यहां युवा आबादी है जो टेक्नोलॉजी को तेजी से अपनाने में सक्षम है। अनुसंधान एवं विकास ( आरएंडडी) के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि, हमारे युवा आरएंडडी को अपनाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं, लेकिन इसके साथ ही उद्योग जगत से अपील की कि वह भी इसमें अपनी भूमिका निभाये।</p>
<p>इसके आगे उन्होंने कहा कि, यदि सरकार 1.20 करोड डॉलर आरएंडडी के लिए देती है, तो इससे निजी और विदेशी उद्योगों को प्रोत्साहित होकर इसमें और पैसा लगाना चाहिये, और यह अपेक्षा की जाती है कि कम से कम 15 करोड़ डॉलर का आरएंडडी होगा। पीयूष गोयल ने देश की अर्थव्यवस्था के मजबूत संकेतकों का जिक्र करते हुए कहा कि, इस समय देश का विदेशी मुद्रा भंडार ऐतिहासिक स्तर पर है। </p>
<p>मुद्रास्फीति की दर एक दशक में सबसे कम है। ब्याज दर कम बनी हुई है। बैंकों का एनपीए आधा फीसदी से भी कम है। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर ऊंची बनी हुई है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि, पहले यह माना जाता था कि अच्छी अर्थव्यवस्था और अच्छी राजनीति एक साथ नहीं हो सकती, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने इस अवधारणा को खंडित कर दिया है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता हमारे देश के डीएनए में है। आज यह हमारा मिशन बन चुका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Nov 2025 15:16:49 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पहली तिमाही की वृद्धि 7.1 प्रतिशत तक रह सकती है: एसबीआई आर्थिक अनुसंधान प्रभाग</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के आर्थिक अनुसंधान प्रभाग का अनुमान है कि अच्छी वर्षा के बीच कृषि क्षेत्र के मजबूत प्रदर्शन के साथ चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि सालाना आधार पर 7.1 प्रतिशत रहेगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/first-quarter-growth-may-reach-71-percent-sbi-economic-research/article-88720"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/gdp.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के आर्थिक अनुसंधान प्रभाग का अनुमान है कि अच्छी वर्षा के बीच कृषि क्षेत्र के मजबूत प्रदर्शन के साथ चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि सालाना आधार पर 7.1 प्रतिशत रहेगी। </p>
<p> रविवार को जारी इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वृद्धि का आंकड़ा इससे कम भी रह सकता है। रिपोर्ट में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 4.5 से 5.0 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच कंपनियों का मार्जिन प्रभावित हो रहा है लेकिन मुद्रास्फीति के दबाव में कमी से ब्याज नीति में उदारता की गुंजाइश पैदा हुई है। </p>
<p> बैंक के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ सौम्य कांति घोष द्वारा लिखी गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि विनिर्माण क्षेत्र में सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) कम होगा, कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर में उछाल आएगा। जीडीपी की गणना करते समय वस्तु और सेवाओं पर कर को जोड़ दिया जाता है और सरकारी सब्सिडी घटा दी जाती है।</p>
<p>एसबीआई नाउकाङ्क्षस्टग मॉडल (अब तक प्रकाशित नियमित आर्थिक आंकड़ों पर आधारित मॉडल) के आधार पर वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून , 2024) में जीडीपी वृद्धि 7.0-7.1 प्रतिशत के दायरे में रह सकती है, साथ ही संभावना इसके इससे नीचे रहने की भी है।</p>
<p>  रिपोर्ट में कहा गया है कि पहली तिमाही में जीवीए नीचे खिसक कर 6.7-6.8 प्रतिशत के दायरे में रह है। इसमें कहा गया है कि वैश्विक आर्थिक विकास का ²ष्टिकोण अनिश्चित बना हुआ है, लेकिन नरम होती मुद्रास्फीति ने ब्याज नीति को दार किये जाने की गुंजाइश बनाई है।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि विनिर्माण क्षेत्र में कर्मचारियों की लागत में मामूली वृद्धि हुई है, लेकिन कंपनियों की ऋण की किस्तें चुकाने की क्षमता मजबूत बनी हुई है। इस पृष्ठभूमि में कंपनियों का लाभ मार्जिन घटा है जिससे  विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर पर प्रतिकूल प्रभाव हो रहा है।      </p>
<p>रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख है कि देश की लगभग 4000 सूचीबद्ध कंपनियों ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में अपनी परिचालन आय और शुद्ध लाभ में करीब करीब नौ प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी । हालांकि, रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख है कि बैंकिंग, वित्तीय सेवा और बीमा क्षेत्र की कंपनियों को निकाल दें तो बाकी क्षेत्र की कंपनियों का एबिडटा (ब्याज, मूल्य ह्रास, कर तथा कर्ज परिसमापन के प्रावधानों के पहले का लाभ एक साल पहले की इसी अवधि से एक प्रतिशत गिरा है जबकि एक साल पहले इसमें  23 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार कंपनियों के जीवीए में पहली तिमाही में लगभग 10.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि पिछले साल इसी दौरान उनका जीवीए पिछले वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही में आधार पर 17 प्रतिशत और तीसरी तिमाही में 26 प्रतिशत बढ़ा था।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 26 Aug 2024 19:17:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>2047 तक जीडीपी में रियल एस्टेट का योगदान 5.17 लाख करोड़ डॉलर होने का अनुमान</title>
                                    <description><![CDATA[क्रेडाई के निर्वाचित अध्यक्ष शेखर पटेल ने कहा कि वर्तमान में, वैश्विक प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद भारत में महत्वपूर्ण सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि देखी जा रही है जो हमारे आर्थिक और क्षेत्रीय लचीलेपन का प्रमाण है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/real-estate-s-contribution-to-gdp-is-estimated-to-be-5-17-trillion-by-2047/article-72888"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/ph-(9).jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (क्रेडाई) ने विकसित भारत के लिए आज अपना रोडमैप जारी किया जिसमें 2047 तक सकल घेरलू उत्पाद (जीडीपी) में रियल एस्टेट का योगदान 5.17 लाख करोड़ डॉलर का होने का अनुमान है और यह अनुमानित जीडीपी का 17.5 प्रतिशत रह सकता है। </p>
<p>क्रेडाई ने आज अपने युवा इकाई द्वारा आयोजित वार्षिक सम्मेलन यूथकॉन में विकसित भारत के लिए भारतीय रियल एस्टेट के योगदान पर एक रिपोर्ट जारी किया जिसमें यह बात कही गयी है। इस कार्यक्रम के दौरान क्रेडाई ने एक रिपोर्ट बिल्डिंग विकसित भारत - भारत में रियल एस्टेट क्षेत्र की परिवर्तनकारी भूमिका के बारे में एक रिपोर्ट जारी किया। क्रेडाई के अनुसार रियल एस्टेट का भारतीय अर्थव्यवस्था पर निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा। वित्त वर्ष 2034 तक इस क्षेत्र के जीडीपी में 1.3 लाख करोड़ डॉलर अर्थात अनुमानित जीडीपी का 13.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है।  </p>
<p>भारतीय रियल एस्टेट का वर्तमान बाजार का साइज 24 लाख करोड़ रुपये है, जो क्रमश: 80 और 20 के अनुपात में आवासीय और वाणिज्यिक के बीच बंटा है।</p>
<p>क्रेडाई के अध्यक्ष बोमन आर ईरानी ने कहा, ''2047 तक भारत की एक विकसित अर्थव्यवस्था बनने की यात्रा के बीच भारतीय रियल एस्टेट आज एक बेहद महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। यह क्षेत्र जीडीपी मूल्य को बढ़ाने और राजस्व, प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए बाध्य है जो लगातार बढ़ती खपत के कारण आत्मनिर्भर चक्र के एक हिस्से के रूप में आगे विकास में सहायता करेगा। भारत के अग्रणी रियल एस्टेट निकाय के रूप में,  हम पूरी तरह से विकसित अर्थव्यवस्था बनने के हमारे सामूहिक मिशन को प्राप्त करने की दिशा में एक सहज मार्ग सुनिश्चित करने के लिए इसमें शामिल सभी हितधारकों के साथ मिलकर काम करने के लिए तत्पर हैं।"</p>
<p>क्रेडाई के चेयरमैन मनोज गौड़ ने कहा, ''भारतीय रियल एस्टेट के प्रमुख निकाय के रूप में हमने एक उद्योग के रूप में जो हासिल किया है उस पर हमें बेहद गर्व महसूस होता है और हम उस क्षमता से भी अधिक उत्साहित हैं जो वर्तमान में इस क्षेत्र को देश के प्राथमिक आर्थिक इंजन के रूप में रखता है। विकसित भारत को प्राप्त करने के लिए रियल एस्टेट विकास के केंद्र में रहने जा रहा है जो कि हाल ही में हुई भारी मात्रा से भी मान्य है, जो मजबूत क्यूओक्यू जीडीपी संख्याओं के साथ मेल खाता है। रियल एस्टेट फिर से एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रहा है, क्योंकि भारत अपनी अर्थव्यवस्था को बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।"</p>
<p>क्रेडाई के निर्वाचित अध्यक्ष शेखर जी पटेल ने कहा ''वर्तमान में, वैश्विक प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद भारत में महत्वपूर्ण सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि देखी जा रही है जो हमारे आर्थिक और क्षेत्रीय लचीलेपन का प्रमाण है। संपूर्ण रियल एस्टेट उद्योग इस मजबूत मंच पर निर्माण करने के लिए बेहद उत्साहित है और एक सुविधाजनक इको-सिस्टम के महत्व पर फिर से जोर देता है जो न केवल उद्योग के निरंतर और टिकाऊ विकास के लिए, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था के लिए सभी संबंधित हितधारकों का समर्थन करता है। अपने निष्कर्षों के माध्यम से, हमने विकसित भारत में भारतीय रियल एस्टेट के योगदान का एक रोडमैप तैयार किया है क्योंकि हम इस उपलब्धि को हासिल करने की दिशा में संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Mar 2024 18:54:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Interim Budget: टैक्स स्लॉट में कोई छूट नहीं, राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 5.1 प्रतिशत तक सीमित रखने का लक्ष्य </title>
                                    <description><![CDATA[वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अंतारिम बजट में कराधान व्यवस्था को यथावत बनाये रखने की परंपरा का पालन करते हुए वित्त वर्ष 2024-25 के बजट में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 5.1 प्रतिशत तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/interim-budget-no-relaxation-in-tax-slots-target-to-limit/article-68869"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/fiscal-deficit.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अंतारिम बजट में कराधान व्यवस्था को यथावत बनाये रखने की परंपरा का पालन करते हुये गुरुवार को वित्त वर्ष 2024-25 के बजट में राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 5.1 प्रतिशत तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा है, लेकिन उन्होंने 25 हजार करोड़ रुपये की कुछ पूर्व की बकाया कर मांग को माफ करने की घोषणा की जिससे एक करोड़ करदाताओं को लाभ होगा।</p>
<p>सीतारमण ने लोकसभा में अपने छठे बजट भाषण में कहा कि चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि की तेजी और राजस्व प्राप्तियों में सुधार से राजकोषीय घाटा का पुनरीक्षित अनुमान 5.8 प्रतिशत है जबकि बजट अनुमान 5.9 प्रतिशत था। उन्होंने कहा कि मैं पहले घोषित अपनी राजकोषीय सुदृढ़ीकरण योजना के अनुसार 2025-26 तक इस घाटे को जीडीपी के 4.5 प्रतिशत तक सीमित करने के रास्ते पर कायम हूं।</p>
<p>सीतारमण ने बजट भाषण में सरकार के कामों और उसके प्रति मजबूत जनविश्वास को रेखांकित करते हुए कहा कि आम चुनाव के बाद नई सरकार द्वारा जुलाई में पेश किये जाने वाला बजट विकसित भारत का रोडमैप होगा। उल्लेखनीय है कि सरकार ने 2047 में आजादी के अमृतकाल के पूर्ण होने तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है।       </p>
<p>उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष के व्यय का संशोधित अनुमान 44.90 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इस वित्त वर्ष में राजस्व प्राप्तियां 30.30 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है जो बजट अनुमान से अधिक है। उधारी को छोड़कर सरकार की कुल प्राप्तियां 27.56 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है जिसमें कर प्राप्तियां 23.24 लाख करोड़ रुपए होंगे।</p>
<p>वित्त मंत्री ने कहा कि अगले वित्त वर्ष में कुल व्यय 47.66 लाख करोड़ रुपये रहने और उधारी को छोड़कर कुल प्राप्तियां 30.80 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में कर प्राप्तियां 26.02 लाख करोड़ रुपये रहने और राजकोषीय घाटा जीडीपी के 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि राज्यों को पूंजीगत व्यय के लिए 50 साल के ब्याज मुक्त ऋण योजना अप्रैल से शुरू होने वाले अगले वित्त वर्ष में जारी रखी जायेगी और इसके लिए 1.3 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया जायेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Feb 2024 14:43:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कांग्रेस ने मोदी सरकार पर लगाया अर्थव्यवस्था के प्रबंध में विफल रहने का आरोप, 3 फीसदी बढ़ी जीडीपी</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस प्रवक्ता वल्लभ ने पार्टी मुख्यालय में कहा कि 3 साल के दौरान देश की अर्थव्यवस्था में कोई वृद्धि मान भी ले, तो भी इस दौरान जीडीपी में कुल सिर्फ 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-accused-at-modi-government-of-failing-to-economy-gdp/article-21421"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/congress1.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने मोदी सरकार पर अर्थव्यवस्था के प्रबंध में विफल रहने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार जो भी प्रचार कर ले। पिछले 3 साल के दौरान देश की अर्थव्यवस्था की वृद्धि 3 फीसदी से भी कम रही है। कांग्रेस प्रवक्ता वल्लभ ने पार्टी मुख्यालय में कहा कि 3 साल के दौरान देश की अर्थव्यवस्था में कोई वृद्धि मान भी ले, तो भी इस दौरान जीडीपी में कुल सिर्फ 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। सरकार ने चालू वित्त वर्ष की जीडीपी के जो आंकड़े जारी किये है, उनसे साफ होता है कि सरकार अर्थव्यवस्था के आंकड़ों के फेरबदल में लगी है। </p>
<p>देश की अर्थव्यवस्था 3 साल में 3 प्रतिशत से कम बढ़ी है। इसके बावजूद उनका प्रचार विभाग देश के आर्थिक परिदृश्य को लेकर अछ्वुत आंकड़े प्रस्तुत कर रहा है। जीडीपी में बढ़ोतरी को लेकर चल रहे प्रचार-प्रसार के बीच भारत की अर्थव्यवस्था पिछले 3 साल से औसतन वार्षिक 1.26 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ रही है। प्रवक्ता ने कहा कि इसे देखते हुए भारतीय स्टेट बैंक की एक रिपोर्ट में मौजूदा वित्त वर्ष की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को पहले की तुलना में कम कर दिया गया है। वित्त वर्ष के जीडीपी के आंकड़े की तुलना 2019-20 की इसी अवधि के आंकड़ों से की जाए, तो जीडीपी 3 प्रतिशत ऊंचा हुआ है। इससे साफ है कि भारत का जीडीपी 3 साल में केवल 3 प्रतिशत बढ़ी है। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-accused-at-modi-government-of-failing-to-economy-gdp/article-21421</link>
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                <pubDate>Fri, 02 Sep 2022 15:44:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रफ्तार धीमी: जीडीपी आंकड़ों पर रहेगी निवेशकों की नजर</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल की दो दिन पूर्व हुई जैक्सन हॉल बैक के दौरान उनके वक्तव्य में महंगाई को दो प्रतिशत के लक्ष्य के दायरे में लाने के लिए सभी आवश्यक कदम तेजी से उठाए जाने के संकेत पर अगले सप्ताह वैश्विक बाजार की प्रतिक्रिया सामने आएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/the-pace-slows-down-investors-will-keep-an-eye-on/article-20826"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/q-42.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ने की आशंका और फेड रिजर्व के ब्याज दरों में बढ़ोतरी की अटकलों से विदेशी बाजारों में आई गिरावट के दबाव में बीते सप्ताह 1.36 प्रतिशत तक गिरे घरेलू शेयर बाजार की नजर अगले सप्ताह जारी होने वाले आर्थिक विकास, कार बिक्री और औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों पर रहेगी। बीते सप्ताह बीएसई का तीस शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 812.28 अंक टूटकर सप्ताहांत पर 59 हजार अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे 58833.87 अंक और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 199.55 अंक गिरकर 17558.90 अंक पर रहा। वहीं, समीक्षाधीन सप्ताह में बीएसई की दिग्गज कंपनियों के विपरीत छोटी और मझौली कंपनियों में तेजी रही। सप्ताहांत पर मिडकैप 153.43 अंक चढ़कर 25119 अंक और स्मॉलकैप 240.51 अंक की तेजी लेकर 28415.89 अंक पर रहा। विश्लेषकों के अनुसार, अगले सप्ताह 31 अगस्त को चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े जारी होने वाले हैं। इस आंकड़े पर निवेशकों की नजर रहेगी। इसका असर अगले सप्ताह बाजार पर दिखेगा। इसके साथ ही 01 सितंबर को अगस्त में हुई वाहनों की बिक्री तथा अगले सप्ताह ही अगस्त के औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े भी आएंगे।<br /> <br />बाजार की दिशा निर्धारित करने में इन कारकों की भी अहम भूमिका होगी। इनके अलावा अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल की दो दिन पूर्व हुई जैक्सन हॉल बैक के दौरान उनके वक्तव्य में महंगाई को दो प्रतिशत के लक्ष्य के दायरे में लाने के लिए सभी आवश्यक कदम तेजी से उठाए जाने के संकेत पर अगले सप्ताह वैश्विक बाजार की प्रतिक्रिया सामने आएगी। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि ऊंची ब्याज दरें, धीमी विकास दर और श्रम बाजार में नरमी से मुद्रास्फीति में कमी आएगी। हम इसे तब तक जारी रखेंगे जब तक हमें विश्वास नहीं हो जाता कि काम पूरा हो गया है। ऐसे में छोटे निवेशकों को सलाह है कि वह सतर्कता बरतें।<br /> <br />बीते सप्ताह शेयर बाजार दो दिन गिरकर वहीं तीन दिन तेजी पर रहा। वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ने की आशंका और फेड रिजर्व के ब्याज दरों में बढ़ोतरी की अटकलों से विदेशी बाजारों में आई गिरावट से हतोत्साहित निवेशकों की चौतरफा बिकवाली के दबाव में सोमवार को सेंसेक्स 872.28 अंक लुढ़ककर 59 हजार अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे 58773.87 अंक और निफ्टी 267.75 अंक टूटकर 17490.70 अंक पर आ गया। वहीं विदेशी बाजार के कमजोर रुख के बीच स्थानीय स्तर पर धातु, तेल एवं गैस, आॅटो, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और ऊर्जा समेत 17 समूहों में हुई लिवाली से मंगलवार को शेयर बाजार उबरा तथा सेंसेक्स 257.43 अंक उछलकर 59031.30 अंक और निफ्टी 86.80 अंक बढ़कर 17577.50 अंक पर रहा। इसी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजारों की गिरावट के बावजूद स्थानीय स्तर पर रियल्टी, कैपिटल गुड्स, बैंकिंग, दूरसंचार और इंडस्ट्रियल्स समेत चौदह समूहों में हुई लिवाली की बदौलत बुधवार को शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन भी तेजी रही। सेंसेक्स 54.13 अंक की बढ़त लेकर 59085.43 अंक और निफ्टी 27.45 अंक बढ़कर 17604.95 अंक पर रहा।  वहीं, वैश्विक बाजार की तेजी के बावजूद स्थानीय स्तर पर ऊर्जा, एफएमसीजी, हेल्थकेयर, आईटी और टेक समेत पंद्रह समूहों में हुई बिकवाली से शेयर बाजार पिछले लगातार दो दिन की तेजी गंवाते हुए गुरुवार को आधे प्रतिशत गिर गया।<br /><br />सेंसेक्स 310.71 अंक टूटकर 58774.72 अंक और निफ्टी 82.50 अंक उतरकर 17522.45 अंक पर आ गया। विदेशी बाजारों के मिलेजुले रुख के बीच स्थानीय स्तर पर  पावर, धातु, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, कैपिटल गुड्स, यूटिलिटीज, इंडस्ट्रियल्स  और बेसिक मैटेरियल्स समेत सोलह समूहों में हुई लिवाली की बदौलत शेयर बाजार में शुक्रवार को तेजी लौट आई। सेंसेक्स 59.15 अंक बढ़कर 58833.87 अंक और निफ्टी 36.45 अंक की मामूली बढ़त लेकर 17558.90 अंक पर रहा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Aug 2022 12:23:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> जनवरी-मार्च 2022 की तिमाही में 4.1 प्रतिशत रही भारत की आर्थिक वृद्धि दर (GDP), 8.7 प्रतिशत रही ग्रोथ रेट</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2021-22 की चौथी तिमाही जनवरी-मार्च में भारत की अर्थव्यवस्था 4.1 फीसदी की दर रही है। जबकि ग्रोथ रेट का यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2021-22 की पिछली अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के 5.4 प्रतिशत की तुलना में कम है. राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (NSO) ने मंगलवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/indias-economic-growth-rate-gdp-was-41-percent-in-the/article-10907"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/gdp.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2021-22 की चौथी तिमाही जनवरी-मार्च में भारत की अर्थव्यवस्था 4.1 फीसदी की दर रही है। जबकि ग्रोथ रेट का यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2021-22 की पिछली अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के 5.4 प्रतिशत की तुलना में कम है. राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (NSO) ने मंगलवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी है। NSO द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, इसके पिछले वित्त वर्ष यानी 2020-21 की जनवरी-मार्च तिमाही में यह आंकड़ा 2.5 फीसदी था। वित्त वर्ष अप्रैल-मार्च 2021-22 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 8.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी जबकि वित्त वर्ष 2020-21 में जीडीपी 6.6 प्रतिशत संकुचित हुआ था।<br /><br /><strong>पूरे वित्त वर्ष में 8.7% रही विकास दर</strong><br />आंकड़ों के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2021-22 में 8.7 प्रतिशत की दर से बढ़ी है, जबकि इसके पहले 2020-21 में अर्थव्यवस्था में 6.6 प्रतिशत की गिरावट आई थी। हालांकि मार्च 2022 में समाप्त वित्त वर्ष का वृद्धि आंकड़ा एनएसओ के पूर्वानुमान से कम रहा है। एनएसओ ने अपने सेकंड एडवांस अनुमान में 2021-22 के दौरान 8.9 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान लगाया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 May 2022 18:55:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इंडिया रेटिंग्स ने घटाया भारतीय आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान: जीडीपी वृद्धि के अनुमान को आठ से घटाकर 7.2 प्रतिशत </title>
                                    <description><![CDATA[पहली मान्यता के अनुसार 2022-23 में आर्थिक वृद्धि 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है जबकि दूसरी परिस्थिति में रेटिंग एजेंसी का अनुमान है कि देश की आर्थिक वृद्धि घटकर 7.0 प्रतिशत रह सकती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/india-ratings-slashes-indian-economic-growth-forecast--gdp-growth-forecast-has-been-reduced-from-eight-to-7-2-percent/article-7036"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/gdp.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। यूक्रेन संकट के कारण उत्पन्न समस्यायों के बीच क्रेडिट रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स ने अगले वित्त वर्ष में भारत की वृद्धि के अपने अनुमान को घटाकर 7.0-7.2 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले मंगलवार को रेटिंग इजेंसी इकरा ने भारत के जीडीपी वृद्धि के अनुमान को आठ से घटाकर 7.2 प्रतिशत कर दिया था। इंडिया रेटिंग्स ने दो तरह की परिस्थितियों को सामने रखकर अलग-अलग अनुमान लगाए हैं। <br /><br />इस एजेंसी की बुधवार को जारी रिपोर्ट में एक अनुमान तेल के दामों के तीन माह तक ऊंचा रहने और दूसरे में छह माह तक ऊंचा रहने की मान्यता के आधार पर है। पहली मान्यता के अनुसार 2022-23 में आर्थिक वृद्धि 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है जबकि दूसरी परिस्थिति में रेटिंग एजेंसी का अनुमान है कि देश की आर्थिक वृद्धि घटकर 7.0 प्रतिशत रह सकती है। एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि इन दोनों परिस्थितियों में भारत की अर्थव्यवस्था का आकार दीर्घकालीन प्रवृति की संभावनाओं की तुलना में क्रमश: 10.6 प्रतिशत और 10.8 प्रतिशत कम रहेगा। <br /><br />इंडिया रेटिंग के प्रधान अर्थशास्त्री और निदेशक (लोक वित्त) सुनील कुमार सिन्हा ने कहा कि निजी पूर्ण उपभोग व्यय (पीएफसीसी) के अनुसार वित्त वर्ष 2021-22 में उपभोग की मांग धीमी रही। यद्यपि वर्ष के दौरान त्योहारी सीजन में कुछ चुनिंदा टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं की मांग में तेजी देखी गयी। उन्होंने कहा,'' उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक के उपभोक्ता आत्मविश्वास सर्वेक्षण के जनवरी 2022 के चक्र में वर्तमान स्थिति सूचकांक में हल्का सुधार दिखा, लेकिन अब भी यह निराशा के क्षेत्र में बना हुआ है। जनवरी 2022 में कोविड-19 के संक्रमण के फिर बढऩे से प्रत्याशा सूचकांक में भी नरमी आयी।'' </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Mar 2022 18:42:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>RBI मौद्रिक नीति समिति की बैठक: नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं, GDP ग्रोथ 9.5% रहने का अनुमान</title>
                                    <description><![CDATA[महंगाई बढ़ने और कोरोना की दूसरी लहर के बाद आर्थिक गतिविधियों के पटरी पर लौटने का हवाला देते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो दर तथा अन्य नीतिगत दरों को यथावत रखने का फैसला किया है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि वित्त वर्ष 2021-22 में वास्तविक जीडीपी की विकास दर 9.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/rbi-%E0%A4%AE%E0%A5%8C%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A5%88%E0%A4%A0%E0%A4%95--%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%97%E0%A4%A4-%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%88-%E0%A4%AC%E0%A4%A6%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B5-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82--gdp-%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A5-9-5--%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8/article-1365"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-08/e8fpqqkvoamlkza.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। महंगाई बढ़ने और कोरोना की तीसरी लहर की आशंकाओं के बीच आर्थिक गतिविधियों के पटरी पर लाने के उद्देश्य से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रेपो दर तथा अन्य नीतिगत दरों को 7वीं बार यथावत रखने का फैसला किया है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समीति की शुक्रवार को समाप्त हुई 3 दिवसीय बैठक में सभी नीतिगत दरों को अपरिवर्तित रखने का निर्णय किया गया। रेपो दर को 4 प्रतिशत, रिवर्स रेपो दर को 3.35 प्रतिशत, मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी दर को 4.25 प्रतिशत और बैंक दर को 4.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है। नकद आरक्षी अनुपात 4 प्रतिशत और एसएलआर 18 प्रतिशत पर बना रहेगा। बैठक के बाद दास ने बताया कि वित्त वर्ष 2021-22 में वास्तविक जीडीपी की विकास दर 9.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे पटरी पर आ रही है। साथ ही इस साल कुछ विलंब के बाद मानसून में सुधार होने से खरीफ की बुआई में तेजी आई है। आने वाले दिनों में कोविड-19 टीकाकरण भी गति पकड़ेगा। ये सभी कारक अर्थव्यवस्था को गति देंगे। <br /> <br /> कोरोना की दूसरी लहर के चलते अप्रैल-मई के दौरान देश के कई हिस्सों में लगाई गई सख्त पाबंदियों से भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है, ऐसे में तीसरी लहर की आशंकाओं के बीच यह बैठक बेहद अहम है। हर दो महीने में भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक होती है। इस बैठक में अर्थव्यवस्था में सुधार पर चर्चा की जाती है और साथ ही ब्याज दरों का फैसला लिया जाता है। रिजर्व बैंक ने आखिरी बार 22 मई 2020 को नीतिगत दरों में बदलाव किया था। दास ने कहा कि केन्द्रीय बैंक के मौद्रिक रुख को उदार बनाए रखा गया है। उदार रुख पर 6 में से 5 सदस्य सहमत थे। रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2021-22 में देश की वास्तविक जीडीपी में 9.5 फीसदी की तेजी का अनुमान लगाया है। इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह 21.4 फीसदी होगी, दूसरी तिमाही में 7.3 फीसदी, तीसरी तिमाही में 6.3 फीसदी और चौथी तिमाही में 6.1 फीसदी। वित्त वर्ष 2022-23 में देश की वास्तविक जीडीपी 17.2 फीसदी रह सकती है। <br /> <br /> महंगाई पर उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2021-2022 में खुदरा महंगाई 5.7 फीसदी रह सकती है। पिछली बैठक में 5.1 फीसदी का अनुमान लगाया गया था। दूसरी तिमाही में महंगाई दर 5.9 फीसदी रह सकती है, तीसरी तिमाही में 5.3 और चौथी तिमाही में यह 5.8 फीसदी हो सकती है। वित्त वर्ष 2022-2023 की पहली तिमाही में यह 5.1 फीसदी रह सकती है। उन्होंने कहा कि वृद्धि के लिए नीतिगत समर्थन की जरूरी है। केंद्रीय बैंक का ध्यान सप्लाई और डिमांड को बेहतर करने पर है। उन्होंने कहा कि टीकाकरण से अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलने की उम्मीद है। कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर से अब अर्थव्यवस्था उबर रही है। टीकाकरण बढ़ने से आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ी है और जून के मुकाबले जुलाई में आर्थिक सुधार बेहतर रहा लेकिन कोरोना की तीसरी लहर के प्रति चौकन्ना रहने की जरूरत है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Fri, 06 Aug 2021 17:26:22 +0530</pubDate>
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