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                <title>असर खबर का - कोटा निगम में संभागीय आयुक्त को लगाया प्रशासक, बोर्ड का कार्यकाल 9 नवम्बर को पूरा होने के बाद संभालेंगे कमान</title>
                                    <description><![CDATA[ प्रशासक नियुक्त करने के साथ ही कोटा में अब दो की जगह एक ही नगर निगम हो गया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---divisional-commissioner-appointed-as-administrator-in-kota-municipal-corporation--will-take-charge-after-the-board-s-term-ends-on-november-9th/article-130489"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/y-of-news30.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । राज्य सरकार ने  शुक्रवार को आदेश जारी कर कोटा समेत  राज्य की तीनों नगर निगमों में संभागीय आयुक्त को प्रशासक नियुक्त किया है। प्रशासक वर्तमान निगम बोर्ड का कार्यकाल 9 नवम्बर को पूरा होने के बाद कमान संभालेंगे। स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक एवं विशिष्ट सचिव द्वारा इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। अधिसूचना के अनुसार जयपुर, जोधपुर व कोटा नगर निगमों में बोर्ड का कार्यकाल नवम्बर में पूरा हो रहा है। ऐसे  में बोर्ड का कार्यकाल खत्म होने की तिथि से नए निर्वाचित बोर्ड का गठन होने तक संभागीय आयुक्त को प्रशासक  नियुक्त किया है। प्रशासक नगर निगमों में निर्वाचित बोर्ड के गठन होने तक नगर निगम की शक्तियों का प्रयोग व कर्त्तव्यों का पालन करेंगे। राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना जारी कर नगर निगम कोटा में संभागीय आयुक्त को प्रशासक नियुक्त करने के साथ ही कोटा में अब दो की जगह एक ही नगर निगम हो गया है। </p>
<p><strong>जिला कलक्टर के पास संभागीय आयुक्त का चार्ज</strong><br />राज्य सरकार ने नगर निगम में प्रशासक की कमान संभागीय आयुक्त को दी है। लेकिन कोटा में संभागीय आयुक्त का पद रिक्त होने से उनका अतिरिक्त चार्ज जिला कलक्टर पीयूष समारिया के पास है। वे ही कार्यवाहक संभागीय आयुक्त है। ऐसे में नगर निगम  में प्रशासक का काम संभागीय आयुक्त के रूप में जिला कलक्टर ही संभालेंगे। तत्कालीन संभागीय आयुक्त राजेन्द्र सिंह शेखावत के सेवानिवृत्त होने के बाद कोटा में संभागीय आयुक्त की नियुक्ति नहीं की गई है। जिससे जिला कलक्टर के पास ही संभागीय आयुक्त का अतिरिक्त चार्ज है। </p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था मामला प्रकाशित</strong><br />गौरतलब है कि नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल समाप्त होने के बाद दोनों निगमों में प्रशासक नियुक्त करने का मामला दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। समाचार  पत्र में 24 अक्टूबर के अंक में पेज 3 पर चुनाव होने तक प्रशासक संभालेंगे निगम की कमान शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें बोर्ड भंग होने से नया बोर्ड गठित होने तक की निगम की वैधानिक स्थिति को स्पष्ट किया गया था। इधर समाचार प्रकाशित होते ही उसी दिन शुक्रवार को राज्य सरकार ने प्रशासक नियुक्त करते हुए अधिसूचना ही जारी कर दी। </p>
<p><strong>कलक्टर के पास चार-चार पद</strong><br />कोटा में जिला कलक्टर पीयूष समारिया के पास चार बड़े पदों की जिम्मेदारी है। जिला कलक्टर  के रूप में जिले के मुखिया के साथ ही कार्यवाहक संभागीय आयुक्त, कोटा विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष का चार्ज भी है। वहीं अब चौथी जिम्मेदारी निगम प्रशासक के रूप में दी गई है। </p>
<p><strong>राजनीतिक दखल होगा खत्म</strong><br />बोर्ड का कार्यकाल पूरा होने के साथ ही बोर्ड भंग हो जाएगा। ऐसे में पार्षद, उप महापौर व महापौर का निगम में दखल खत्म हो जाएगा। बोर्ड भंग होने के बाद निगम की कमान अधिकारी संभालेंगे। हालांकि अभी तक दोनों निगमों के आयुक्तों के बारे में सरकार की ओर से कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं किया गया है। सूत्रों के अनुसार कोटा उत्तर व दक्षिण के आयुक्त तो अपनी जगह काम करते रहेंगे लेकिन प्रशासक की कमान संभालने वाले संभागीय आयुक्त के निर्देशन व मार्गदर्शन में काम करेंगे। <br /> <br /><strong>पार्षदों का 2 को और महापौर का 9 को होगा कार्यकाल पूरा</strong><br />नगर निगम के वर्तमान बोर्ड का कार्यकाल महापौर के निर्वाचन से माना जा रहा है। दोनों निगमों उत्तर व दक्षिण में महापौर का चुनाव 10 नवम्बर 2020 को हुआ था। ऐसे में महापौर का कार्यकाल 9 नवम्बर को समाप्त होगा। जबकि पार्षदों का  निर्वाचन 3 नवम्बर को होने से उनका कार्यकाल 2 नवम्बर को पूरा हो जाएगा। ऐसे में प्रशासक नगर निगम में कमान  9 नवम्बर के बाद संभालेंगे। </p>
<p><strong>सरकार के आदेश की करेंगे पालना</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर आयुक्त अशोक कुमार त्यागी व दक्षिण आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा ने बताया कि कोटा नगर निगम में सरकार ने संभागीय आयुक्त को प्रशासक नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति बोर्ड का कार्यकाल समाप्त होने के बाद से नया बोर्ड गठित होने तक रहेगा। इसके अलावा उन्हें अधिक जानकारी नहीं है। सरकार का जो भी आदेश होगा उसकी पालना की जाएगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Oct 2025 14:32:45 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रेगिस्तानी जहाज की संख्या घटी : कोटा में रह गए 1862, अब बीमा बनेगा संबल, अस्तित्व खतरे में </title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व में एक ऊंट का बीमा करने का प्रावधान था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-number-of-desert-ship-decreased--1862-left-in-kota--now-insurance-will-be-the-support/article-127006"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(3)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। रेगिस्तानी जहाज के रूप में पहचाने वाले राज्य पशु ऊंट का खेती व दैनिक कामकाज में कम उपयोग से अब इनका अस्तित्व खतरे में है। प्रतिवर्ष इनकी संख्या में कमी हो रही है। इस पर ऊंट संवर्धन को प्रोत्साहन देने के लिए राज्य सरकार ने मंगला पशु बीमा योजना में महत्वपूर्ण निर्णय लिया। योजना में अब प्रत्येक उष्ट्र पालक के 10 ऊंटों का नि:शुल्क बीमा किया जाएगा। इससे बीमारी, हादसे, प्राकृतिक आपदा में इनकी मृत्यु पर पशुपालकों को संबल मिल सके। बीते दो दशक में पूरे प्रदेश में खेती कार्य में ट्रैक्टर का प्रयोग बढ़ने, साधन में दुपहिया, चार पहिया वाहनों के अधिक उपयोग से आम आदमी के दैनिक जीवन में अब ऊंट का महत्व बहुत कम रह गया है। इससे इनकी संख्या हर वर्ष कम हो रही है। कोटा जिले की बात की जाए तो यहां पर ऊंट की संख्या घटकर केवल 1862 ही रह गई है। इसी तरह की स्थिति संभाग के अन्य जिलों की है।</p>
<p><strong>पहले एक ही ऊंट का था प्रावधान</strong><br />पशुपालन विभाग मंगला पशु बीमा योजना में अब पशुपालकों के अधिकतम 10 ऊंटों का नि:शुल्क बीमा करेगा। पूर्व में एक ऊंट का बीमा करने का प्रावधान था। योजना में बीमारी, हादसे, प्राकृतिक आपदा से बीमित ऊंट के मरने पर अधिकतम 40 हजार रुपए बीमा राशि देने का प्रावधान है। पशुपालन विभाग के अधिकारियों के अनुसार ऊंट न केवल राजस्थान की संस्कृति का हिस्सा हैं, बल्कि रेगिस्तानी इलाकों में पर्यावरण संतुलन और जीवनशैली का अहम हिस्सा भी हैं। सरकार द्वारा दिया गया यह बीमा संरक्षण इनकी नस्ल को बचाने में सहायक होगा। ऊंटों का भविष्य सुरक्षित करना राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को संजोने जैसा है। मंगला पशु बीमा योजना में यह बदलाव ऊंट पालकों और प्रदेश दोनों के लिए संजीवनी साबित हो सकता है। </p>
<p><strong>पिछले दो दशक में भारी गिरावट</strong><br />खेती और दैनिक जीवन में इनके उपयोग में लगातार कमी के कारण ऊंटों की संख्या प्रतिवर्ष घट रही है। इस पर चिंतित राज्य सरकार ने मंगला पशु बीमा योजना में अहम बदलाव करते हुए प्रत्येक उष्ट्र पालक के 10 ऊंटों का नि:शुल्क बीमा करने का निर्णय लिया है। सरकारी फैसले के तहत अब ऊंटों की बीमारी, हादसे या प्राकृतिक आपदा से मृत्यु होने की स्थिति में पशुपालकों को आर्थिक संबल मिलेगा। इससे न केवल ऊंट पालकों को राहत मिलेगी बल्कि इस विलुप्तप्राय पशु के संरक्षण की दिशा में भी यह योजना मददगार साबित होगी। जानकारों के अनुसार, पिछले 20 सालों में खेती में ट्रैक्टर और आधुनिक साधनों का प्रयोग बढ़ा है। वहीं, आम जनजीवन में दुपहिया और चारपहिया वाहनों की उपलब्धता के कारण ऊंट की उपयोगिता बहुत कम रह गई। इसी वजह से ग्रामीण इलाकों में ऊंटों की संख्या हर वर्ष घट रही है।</p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong><br />-1992 की पशुगणना में प्रदेश में थे 7.5 लाख ऊंट <br />- 2012 तक यह घटकर 3.25 लाख ही रह गई <br />- 2019 की गणना में संख्या और घटकर 2.1 लाख हुई<br />- 2019 की गणना में कोटा में 1862 ऊंट की संख्या दर्ज</p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />पहले ऊंट खेत जोतने, अनाज ढोने और यात्रा के लिए सबसे जरूरी साथी थे। अब उनकी जरूरत कम हो गई है। सरकार का यह बीमा फैसला हमारे लिए सहारा है। अगर ऊंट की मृत्यु होती है तो हमें नुकसान की भरपाई मिल सकेगी।<br /><strong>-रामलाल, ऊंट पालक</strong><br /> <br /> ऊंट संवर्धन को प्रोत्साहन देने के लिए राज्य सरकार ने मंगला पशु बीमा योजना में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब प्रत्येक उष्ट्र पालक के 10 ऊंटों का नि:शुल्क बीमा किया जाएगा। इससे पशुपालकों को संबल मिल सकेगा।<br /><strong>-डॉ. अनिल कुमार, वरिष्ठ पशु चिकित्सक </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Sep 2025 15:21:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुरानी कारों के टैक्स में बढ़ोतरी के खिलाफ प्रदेशभर के कार डीलर्स ने किया प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान बजट में अन्य राज्यों की पुरानी कारों के ट्रांसफर और पुन: रजिस्ट्रेशन शुल्क में की गई अप्रत्याशित टैक्स बढ़ोतरी के विरोध में प्रदेशभर के कार डीलर्स ने बुधवार को कैलेक्ट्री सर्कल पर विरोध प्रदर्शन किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/car-dealers-across-the-state-protested-against-the-increase-in/article-85779"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/photo-size-(2)19.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान बजट में अन्य राज्यों की पुरानी कारों के ट्रांसफर और पुन: रजिस्ट्रेशन शुल्क में की गई अप्रत्याशित टैक्स बढ़ोतरी के विरोध में प्रदेशभर के कार डीलर्स ने बुधवार को कैलेक्ट्री सर्कल पर विरोध प्रदर्शन किया। ऑल राजस्थान वाहन व्यापार संगठन (पुरानी कारें) ने वित्त मंत्री दिया कुमारी और मुख्य सचिव सुधांशु पंत को मांग पत्र देंगे।</p>
<p>धरना स्थल पर प्रदेश के सैंकड़ों डीलर्स ने एक स्वर में कहा कि पुराने टैक्स को यथावत रखा जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि आगामी 15 दिन में राज्य सरकार ने सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को तेज किया जाएगा। संगठन के संयोजक रजत छाबड़ा ने बताया कि अन्य राज्यों से खरीदी गई गाड़ियों का राजस्थान में रजिस्ट्रेशन करवाने पर वन टाइम टैक्स और ग्रीन टैक्स के रूप में देश के अन्य राज्यों की तुलना में सर्वाधिक पहले ही था। अब इस बजट में यह टैक्स तीन गुना कर दिया गया है, जिससे औसतन एक पुरानी गाड़ी के रजिस्ट्रेशन शुल्क में बेहताशा बढ़ोतरी हो गई है।</p>
<p>संगठन के प्रदेश प्रवक्ता महेश पारीक ने बताया कि प्रदेश में अन्य राज्यों से खरीदी गई लगभग 300 कारों का प्रतिदिन रजिस्ट्रेशन होता है, जिससे राज्य सरकार को प्रतिदिन लगभग अढ़ाई करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। महीने में यह आंकड़ा करीब 50 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। नए बजट में टैक्स में बढ़ोतरी करने के निर्णय से प्रदेश के 30 हजार कार डीलर्स प्रभावित होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jul 2024 16:17:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने किया पदभार ग्रहण </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में ऊर्जा विभाग में सुधार के लिए समीक्षा बैठक की जाएगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/energy-minister-hiralal-nagar-took-charge/article-66328"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/heeralal-nagar.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। राज्य की भजनलाल सरकार में ऊर्जा मंत्री सांगोद विधायक हीरालाल नागर ने सोमवार को जयपुर स्थित कार्यालय में अधिकारियों की मौजूदगी में विधि विधान पूर्वक पूजा-अर्चना करने के बाद पदभार ग्रहण किया। सांगोद विधायक हीरालाल नागर को गत दिनों राज्य सरकार में राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार दिया गया है उसके बाद उन्हें ऊर्जा विभाग का मंत्री बनाया गया। पदभार ग्रहण करने के बाद मीडिया से बातचीत में नागर ने कहा कि ऊर्जा विभाग बहुत महत्वपूर्ण विभाग है और आमजन से जुड़ा हुआ है। गरीब से लेकर उद्योगपति तक बिना ऊर्जा के चल नहीं सकता वर्तमान में जिस तरह से हर व्यक्ति आधुनिकता से जुड़ता जा रहा है उसमें ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्थान है। हर चीज ऊर्जा से ही चल रही है ऐसे में उन्होंने कहा कि ऊर्जा विभाग में जहां भी सुधार की आवश्यकता होगी वहां समीक्षा कर उसमें सुधार किया जाएगा। राजस्थान में ऊर्जा विभाग में सुधार के लिए समीक्षा बैठक की जाएगी। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार में ऊर्जा विभाग काफी कर्ज में डूबा हुआ है औरइसमें सुधार की आवश्यकता है। हालांकि उन्होंने कहा कि ऊर्जा विभाग में काम करने के लिए बहुत कुछ है राजस्थान में ऊर्जा की अपार संभावनाएं भी है उन्हें तलाश किया जाएगा और आमजन को इससे राहत देने का प्रयास किया जाएगा। मंत्री पद ग्रहण करने के बाद विभाग के अधिकारियों ने उनका स्वागत किया और संबंधित जानकारी भी उपलब्ध कराई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jan 2024 16:46:30 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>राज्यपाल ने की प्रदेश की कानून और शांति व्यवस्था की समीक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[आम जन से शांति और सुरक्षा में सहयोग की अपील की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/governor-reviewed-the-law-and-order-situation-of-the-state/article-63543"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/kalraj-mishra.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्यपाल कलराज मिश्र ने बुधवार को मुख्य सचिव, गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक और पुलिस आयुक्त, जयपुर को राजभवन बुलाकर प्रदेश की कानून एवं शांति व्यवस्था की विशेष समीक्षा की। मिश्र ने कहा कि प्रदेश में शूटरों द्वारा दिन दहाड़े हत्या गंभीर मामला है। उन्होंने इस संगठित अपराध से उपजे हालात पर निरंतर निगरानी रखे जाने की हिदायत दी। विशेष रूप से उन्होंने अपराधियों को पकड़े जाने के लिए पुख्ता कार्यवाही सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून एवं शांति व्यवस्था किसी भी स्तर पर नहीं बिगड़े, इसके लिए पुलिस और प्रशासन सभी स्तरों पर प्रभावी कदम उठाए।</p>
<p>राज्यपाल ने पुलिस और प्रशासन के स्तर पर निरंतर सभी स्थानों पर अलर्ट रहते हुए कार्य करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में किसी भी स्तर पर कोताही और लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।</p>
<p>राज्यपाल ने कहा कि कानून व्यवस्था सर्वोपरि है। सभी स्तरों पर यह सुनिश्चित किया जाए कि आम जन को प्रदेश में किसी भी स्थान पर परेशानी की स्थिति नहीं पैदा हो।  उन्होंने इस संबंध में उत्पन्न स्थितियों की निरंतर मॉनिटरिंग किए जाने की भी हिदायत दी। उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा शांति और सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। संगठित अपराधों पर कड़ी निगरानी रखी जाए और अपराध से जुड़ी किसी भी घटन पर सख्त और प्रभावी कार्यवाही की जाए।</p>
<p>बैठक में मुख्य सचिव उषा शर्मा ने बताया कि प्रदेश भर में जिला कलेक्टर स्तर पर हालात की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। केंद्र सरकार के स्तर पर भी तीन कंपनियां तैनात की गयी है। उन्होंने बताया कि प्रकरण में पोस्टमार्टम और एफआईआर दर्ज कर अपराधियों को पकड़े जाने के लिए निरंतर कार्यवाही की जा रही है। पुलिस महानिदेशक उमेश मिश्रा और गृह सचिव आनंद कुमार ने घटनाक्रम के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि अपराधियों को गिरफ्तार करने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।</p>
<p>बैठक में पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था राजीव शर्मा, राज्यपाल के प्रमुख सचिव सुबीर कुमार, प्रमुख विशेषाधिकारी गोविंद राम जायसवाल एवं पुलिस आयुक्त, जयपुर बीजू जॉर्ज जोसफ सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।</p>
<p><strong>राज्यपाल की अपील</strong><br />राज्यपाल मिश्र ने आम जन से  शांति और कानून व्यवस्था में सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा है कि अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने कानून एवं शांति व्यवस्था में सभी के सहयोग का आह्वान करते हुए कहा कि हालात पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Dec 2023 14:27:43 +0530</pubDate>
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                <title>कांग्रेस प्रदेश प्रभारी रंधावा को कोर्ट से राहत </title>
                                    <description><![CDATA[कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पुलिस व निचली अदालत से रिकॉर्ड तलब करते हुए 30 मई को पुन: सुनवाई की तारीख मुकर्रर की है। सिटी एसपी की तरफ से एसीजेएम कोर्ट  में  शपथ पत्र इस मामले में पेश किया गया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/relief-from-court-to-congress-state-in-charge-randhawa/article-46432"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/sukhjinder-singh-randhawa.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कांग्रेस प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा द्वारा जयपुर में एक सभा में पीएम मोदी पर दिए बयान पर  निचली अदालत द्वारा मुकदमा दर्ज करने के मामले में कोर्ट ने राहत दी है। इस मामले में 30 मई को आगामी सुनवाई होगी। उधर मामले की गंभीरता को देखते हुए मंगलवार को राज्य सरकार ने रंधावा के बचाव में जयपुर के वकीलों को कोटा कोर्ट में पैरवी के लिए भेजा । इस दौरान सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल व राजस्थान बार कौंसलिंग के चेयरमैन घनश्याम राठौड़ तथा रंधावा की तरफ से वकील कुलदीप सिंह पूनिया ने कोर्ट में अपना पक्ष रखा । कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पुलिस व निचली अदालत से रिकॉर्ड तलब करते हुए 30 मई को पुन: सुनवाई की तारीख मुकर्रर की है। सिटी एसपी की तरफ से एसीजेएम कोर्ट  में  शपथ पत्र इस मामले में पेश किया गया। जिसमें बताया कि इस मामले में डीजे कोर्ट में निगरानी याचिका पेश की गई है। इस कोर्ट ने रिकॉर्ड तलब किया है तथा 24 मई बुधवार की तारीख मुकर्रर की है। अदालत ने 20 मई को 23 तारीख्र तक मामले में एफआईआर दर्ज कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। उधर डीजे कोर्ट में पुलिस द्वारा पेश की गई निगरानी याचिका को एडीजे पांच में सुनवाई के लिए भेज दिया गया।। वही मंगलवार को रंधावा द्वारा पेश की निचली अदालत के आदेश को रोकने के लिए निगरानी याचिका को भी एडीजे पांच को ट्रांसफर कर दिया है। दोनों याचिकाओं पर अब एडीजे  पांंच में 30 मई को सुनवाई होगी। <br /> <br />वही दूसरी तरफ अधीनस्थ अदालत एसीजेएम 6 में विधायक मदन दिलावर के वकील  मनोज पुरी की ओर से एक प्रार्थना पत्र पेश किया गया।  जिसमें ऊपर की अदालत में हुई कार्यवाही  का विवरण देते हुए निवेदन किया कि  पुलिस द्वारा आज भी एफआई आर दर्ज नहीं की गई है और लगातार अदालत के आदेश की अवमानना की जा रही है । अदालत ने आज तक का समय दिया था इसलिए अवमानना की कार्यवाही को आगे बढ़ाया जाए।  पुलिस द्वारा एक शपथ  पत्र पेश किया गया जिसमे कहा गया की हमने जिला अदालत मे निगरानी पेश की थी जिसमे अदालत ने रिकॉर्ड तलब किया है और मामला विचाराधीन है । इस कारण अब कोई कार्यवाही नहीं की जा सकती। मदन दिलावर के वकील मनोज पुरी की ओर से इस पर सख्त आपत्ति की गई। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 May 2023 16:12:37 +0530</pubDate>
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                <title>हाड़ौती के खिलाड़ियों का राज्य में औसत प्रदर्शन, बच्चों का खेलों में नहीं रूझान</title>
                                    <description><![CDATA[ कुछ खेलों में खिलाड़ी काफी अच्छा कर रहे हैं  लेकिन औसत प्रदर्शन काफी निम्न है। इसका एक सबसे महत्वपूर्ण कारण बच्चों का खेलों के प्रति कम रूझान होना और आगे बढ़ने के लिए शोर्टकट का प्रयोग करना है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/average-performance-of-hadoti-players-in-the-state--children-are-not-interested-in-sports/article-44337"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/hadoti-k-khiladiyo-ka-rajya-mei-ausat-pradarshan,-bachcho-ka-khelo-mei-nahi-rujhaan...kota-news..1.5.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती के कई खिलाड़ियों ने कई खेलों में राष्टÑीय और अन्तरराष्टÑीय स्तर पर अपनी पहचान बनाकर शहर और स्वयं का नाम भले ही रोशन किया है, अपना एक अलग मुकाम हासिल किया है लेकिन अभी क्षेत्र के बच्चों और उनके परिजनों का रूझान खेलों की ओर कम ही है। उसका कारण ये है कि आज हर माता-पिता अपने बच्चे को डॉक्टर और इंजीनियर बनाना चाहता है ना कि कोई बड़ा खिलाड़ी और दूसरा खिलाड़ियों को कोई सरकारी प्रोत्साहन और संसाधन नहीं मिलता है।  शायद यहीं कारण है कि हाड़ौती को कई खलों में पदक मिलने के बाद भी क्षेत्र के खिलाड़ियों का राज्य में औसत प्रदर्शन ही है। इसी को लेकर यहां के खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने वालों ने चिंता जताई है।  इन प्रशिक्षकों का कहना है कि प्रदेश में हाड़ौती संभाग के खिलाड़ियों का औसत प्रदर्शन काफी चिंता का विषय है। कुछ खेलों में खिलाड़ी काफी अच्छा कर रहे हैं  लेकिन औसत प्रदर्शन काफी निम्न है। इसका एक सबसे महत्वपूर्ण कारण बच्चों का खेलों के प्रति कम रूझान होना और आगे बढ़ने के लिए शोर्टकट का प्रयोग करना है। इनका कहना है कि ये बात सही है कि सुविधाओं का भी अभाव है लेकिन इसी आधार पर खिलाड़ियों का प्रदर्शन निर्भर नहीं करता है।  प्रशिक्षक बताते हैं कि यदि सकारात्मक सोच के साथ नियमानुसार बच्चों को खेलो में उतारा जाए तो हाड़ौती भी अपने प्रदर्शन को उच्च स्तर तक कर सकता है। अच्छे प्रदर्शन के लिए बच्चों की आधारभूत गतिविधि और नेचुरल ग्रोथ पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। छोटे बच्चों को स्किल सिखाने के लिए ज्यादा से ज्यादा उनकी फिजिकल फिटनेस व मोटर डवलपमेंट पर ध्यान दे। फिटनेस के लिए निचले स्तर से ही कार्यक्रम शुरू किए जाए।  उन्होंने बताया कि बच्चों की फिटनेस के लिए माता-पिता या अभिभावकों को बच्चों के लिए उचित एवं पोष्टिक आहार की जानकारी होनी चाहिए। सरकार की ओर से छोटे बच्चों के लिए मैदान विकसित जाए, जहां पर उनके लिए नेचुरल ग्रोथ के लिए भी गतिविधि हो। इसी प्रकार सरकार की ओर से खेलों में छोटे बच्चों की सहभागिता बढ़ाने के लिए भी कार्यकम शुरू किए जाने चाहिए।  प्रशिक्षकों का कहना हैं कि 7 से 12 साल तक के बच्चों के लिए शिविर आयोजित किए जाए तथा उन शिविर में बच्चों के फिटनेस के सभी घटकों को बढ़ाने लिए एक्टिवीटी कराई जाएं। इसके अलावा क्लासिफाइड कोच व शारीरिक शिक्षक से ही ट्रेनिंग दिलवाई जाए। जिससे बच्चों के निचले स्तर के प्रदर्शन को सुधारा जा सकें। </p>
<p><strong>इनका कहना हैं</strong><br />कम आयु वर्ग के बच्चों को ज्यादा से ज्यादा ग्राउंड पर लाना चाहिए और उनको उनकी रूचि से जुड़ी गतिविधियां करवाई जाए। मैदान में भी इस तरह के संसाधन उपलब्ध करवाए जाए। <br /><strong>- राकेश शर्मा, राष्टÑीय पदक विजेता एवं सचिव जिला एथेलेटिक संघ, कोटा। </strong></p>
<p>हाड़ौती में छोटे बच्चों के लिए कोई खेल नीति नहीं है। इससे यहां कम उम्र में बच्चे तैयार नहीं हो पाते हैं। बच्चों पर पढ़ाई का इतना बोझ होता है कि वे खेल पर ध्यान ही नहीें दे पाते और ना ही उनके माता-पिता उनका ध्यान पढ़ाई से हटाकर खेल की ओर दिलवाते हैं। बच्चा अगर कम उम्र में गाउंड पर आए तो परिणाम बड़े आ सकते हैं लेकिन बड़ी उम्र में कोई अभ्यास के लिए आएगा तो बड़े परिणाम निकलना मुश्किल है। <br /><strong>- अशोक गौतम, सचिव, जिला वुशू संघ।</strong></p>
<p>माता-पिता 8 से 10 साल की उम्र में बच्चों को पूरा सहयोग करें। उनको ग्राउंड तक लाने का प्रास करें। उनकी डाइट का पूरा प्रबन्ध करे। क्योंकि नो फाइट विदाउट डाइट। मैंने स्वंय ने 8 साल की उम्र से खेलना प्रारम्भ किया था। नेशनल में 12 गोल्ड मैडल, एशिया लेवल पर 1 गोल्ड तथा 1 कांस्य तथा आॅल इंडिया रेल्वे के लिए 8 गोल्ड मैडल जीते है। <br /><strong>- रविन्द्र कुमार, अन्तरराष्टÑीय खिलाड़ी, कुश्ती। </strong></p>
<p>किसी भी खेल की पाठशाला कम उम्र से ही प्रारम्भ करवाई जानी चाहिए। छोटे बच्चों के लिए शिविर लगाए जाने चाहिए। उनको सिखाया जाना चाहिए। उनको से बताया जाना चाहिए कि किसने खेल में किस तरह से नाम कमाया है ताकि वो मोटिवेट हो सकें। जहां-जहां एसोसिएशन है वहां उनकी ओर से कैंप लगाया जाना चाहिए। <br /><strong>- देवी सिंह,सचिव जिला बॉक्सिंग संघ। </strong></p>
<p>कुछ खेलों में मैडल मिले है लेकिन अभी भी हम काफी पिछे हैं। व्यक् ितगत प्रतिस्पर्द्धा में बहुत कम मैडल आए है। जबकि खिलाड़ी की पहचान ही उसी से बनती है। स्कूलों के बच्चों को प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। जितने खिलाड़ी होंगे उतनी ही प्रतिसपर्द्धा बढ़ेगी और बच्चे निकलकर सामने आएंगे। हाड़ौती के बच्चों को टूर्नामेंट और कोच की जरुरत हैं।<br /><strong>- गौरव सैन झाला, सचिव, जिला तीरंदाजी संघ। </strong></p>
<p>पहले बच्चों को सुविधाएं नहीं मिलती थी लेकिन अब कुछ सुविधाएं मिलने लगी है लेकिन अभी भी कई चीजों की दरकार है। बच्चों को मोटिवेशन करने की जरुरत है। उनको स्कूली स्तर पर खेलों के बारे में बताया, समझाया जाना चाहिए। <br /><strong>- चचंल कुंथल, खिलाड़ी।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 May 2023 14:34:59 +0530</pubDate>
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                <title>जल जीवन मिशन के नलों में नहीं पहुंच रहा पानी </title>
                                    <description><![CDATA[जल जीवन मिशन योजना के तहत पीएचईडी द्वारा कनेक्शन किए गए थे। लेकिन जलापूर्ति शुरू होते ही कनेक्शनों में लीकेज की शिकायत होने लगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/water-is-not-reaching-the-taps-of-jal-jeevan-mission/article-41700"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/jal-jeevan-mission-k-nalo-mei-nahi-pahuch-raha-paani..budhadeet-news-kota-4.4.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>बूढ़ादीत। कस्बे में जल जीवन मिशन के तहत लगे नलों में लीकेज की शिकायत होना आम बात हो गई है। जिससे लोगों के घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा। लीकेज के कारण पानी व्यर्थ बह रहा है। ग्रामीण मूलचंद मीणा, ललित मीणा आदि ने बताया कि योजना के तहत पीएचईडी द्वारा कनेक्शन किए गए थे। लेकिन जलापूर्ति शुरू होते ही कनेक्शनों में लीकेज की शिकायत होने लगी। नलों में पानी नहीं आने तथा लीकेज की समस्या जब ठेके के कर्मचारियों को बताते हैं तो वह नल कनेक्शन ठीक करने के मनमाने दाम वसूलते हैं। जबकि ठेकेदार ने अभी नवीन कनेक्शन किए हैं। लेकिन आपूर्ति शुरू होते ही मुख्य पाइप लाइन में लीकेज की शिकायत आने लगी है।</p>
<p><strong>दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग</strong><br />उपभोक्ताओं ने नलों के कनेक्शनों में गुणवत्ताहीन सामग्री लगाने की शिकायत की है। साथ ही ठीक करवाने के बदले में राशि की मांग करने वाले कर्मचारियों की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग की है।  <br />नल कनेक्शनों के लीकेज की शिकायत मिल रही है। जिम्मेदार अधिकारियों को ठेकेदार को पाबंद करना चाहिए।<br /><strong>-भैरुलाल सुमन, सरपंच, बूढ़ादीत </strong></p>
<p>नल कनेक्शन ठीक करने के बदले कर्मचारियों के राशि की मांग करने की शिकायत मिली है। शीघ्र मामले की जांच करवाई जाएगी। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ उचित कार्यवाही की जाएगी। <br /><strong>-मुकुट बिहारी मीणा, सहायक अभियंता, जलदाय विभाग, सुल्तानपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Apr 2023 15:51:34 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>गर्मी आने से पहले ही प्रदेश में प्रारम्भ हुई बिजली कटौती</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य में अभी से ही ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में एक से दो घंटों की कटौती के साथ-साथ अघोषित कटौती भी प्रारम्भ हो गई है तथा संभव है कि यदि हालात ना सुधरे तो इस कटौती का समय बढाया जावे अथवा व्यवसायिक एवं औद्योगिक बिजली कटौती भी की जाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/power-cut-started-in-the-state-before-the-summer-set/article-38608"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/electricity-3.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। आल राज. ट्रेड एंड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आरतिया) ने बताया कि गर्मी की अभी पूर्ण रूप से शुरुआत भी नहीं हुई है और राज्य में बिजली संकट मंडराने लगा है। गत वर्ष भी कोयले की कमी एवं ग्रीड्स में तकनीकी खराबी के चलते बिजली संकट ने विकराल रूप ले लिया था तथा घरेलू व व्यवसायिक बिजली कटौती के साथ-साथ उद्योगों पर कटौती की गई, जिससे विभिन्न उत्पादों के उत्पादन में भारी कमी का सामना करना पडा। राज्य में अभी से ही ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में एक से दो घंटों की कटौती के साथ-साथ अघोषित कटौती भी प्रारम्भ हो गई है तथा संभव है कि यदि हालात ना सुधरे तो इस कटौती का समय बढाया जावे अथवा व्यवसायिक एवं औद्योगिक बिजली कटौती भी की जाए।</p>
<p>आरतिया के मुख्य सलाहकार  कमल कन्दोई ने बताया कि देश में सौलर पैनलों की कमी के कारण हर घर सौलर के लक्ष्य को हांसिल करना बहुत बडी चुनौती है, और इस बिजली संकट को तब तक समाप्त नहीं किया जा सकता है, जब तक कि हर घर अपनी आवष्यकता की बिजली का उत्पादन सौलर के माध्यम से स्वयं ना करे। आरतिया के मुख्य संरक्षक आषीष सराफ ने मांग रखी कि छतों पर सोलर पैनलों के लिये रियायतों के दायरे को बढाया जाना चाहिये तथा नकद सब्सिडी, ऋण व्यवस्था व अन्य उपायों द्वारा लोगों को सोलर लगाने हेतु प्रेरित किया जाना चाहिये।</p>
<p>आरतिया के कार्यकारी अध्यक्ष प्रेम बियानी ने राज्य सरकार के समक्ष मांग रखी की लोगों को बिजली की बचत एवं सौर ऊर्जा को अपनाने के लिये प्रोत्साहित किये जाने के साथ साथ आवष्यक है कि देष में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढावा देने के लिये पैनल भारतीय निर्माताओं से क्रय किये जावे, राजस्थान में पैनल निर्माता निर्माण के कारखानों को विषेष छूट प्रदान की जावे, जिससे इनके उत्पादन को बल मिलेगा एवं नये निये निवेषक आगे आकर सौलर पैनलों के निर्माण के क्षेत्र में कदम बढायेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Feb 2023 15:29:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लैपटॉप मिला न टेबलेट, 4 साल से इंतजार कर रहा टैलेंट </title>
                                    <description><![CDATA[कोटा जिले के प्रतिभाशाली विद्यार्थी पिछले चार सालों से योजना को लेकर शिक्षा विभाग के चक्कर काट रहे हैं लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा। कई अभिभावक लेपटॉप  या टेबलेट वितरण को लेकर अधिकारियों के पास पहुंच रहे हैं लेकिन अधिकारियों द्वारा निदेशालय से इस संबंध में कोई सूचना प्राप्त नहीं होने का हवाला देकर पल्ला झाड़ रहे हैं। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/did-not-get-laptop-nor-tablet--waiting-for-4-years-for-talent/article-37085"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/laptop-mila-na-tablet,-4-saal-se-intazar-kar-raha-talent...kota-news..11.2.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । बोर्ड परीक्षाओं में प्रतिभा दिखाने वाले हजारों विद्यार्थी लंबे समय से लैपटॉप  व टेबलेट मिलने का सपना देख रहे हैं, जो पूरा होता नजर नहीं आ रहा। पिछले 4 साल से मेधावी छात्र-छात्राएं लैप टॉप  मिलने का इंतजार कर रहे हैं।  लेकिन, शिक्षा विभाग विद्यार्थियों को सरकार की योजना का लाभ नहीं दिला पा रहा। सरकारी तंत्र की लेटलतीफी के चलते प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा। दरअसल, मेधावी छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार की ओर से योजना के तहत 10 व 12वीं बोर्ड परीक्षा में 75 प्रतिशत या इससे अधिक अंक हासिल करने वालों को लैपटॉप  व 8वीं के विद्यार्थियों को मेरिट में आने पर टेबलेट दिए जाते हैं। लेकिन वर्ष 2019 से 2022 तक के मेधावी बच्चों को न तो लैपटॉप मिला और न ही टेबलेट। जबकि, शैक्षणिक सत्र 2022-2023 भी समाप्ती की ओर अग्रसर है। </p>
<p><strong>शिक्षा विभाग के चक्कर काट रही प्रतिभा</strong><br />कोटा जिले के प्रतिभाशाली विद्यार्थी पिछले चार सालों से योजना को लेकर शिक्षा विभाग के चक्कर काट रहे हैं लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा। कई अभिभावक लेपटॉप  या टेबलेट वितरण को लेकर अधिकारियों के पास पहुंच रहे हैं लेकिन अधिकारियों द्वारा निदेशालय से इस संबंध में कोई सूचना प्राप्त नहीं होने का हवाला देकर पल्ला झाड़ रहे हैं। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने से अभिभावकों को मायूस लौटना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>लैेपटॉप मिलेगा या टेबलेट स्पष्ट नहीं</strong><br />शिक्षा सत्र 2019 से पहले कक्षा 10वी व 12वीं बोर्ड के मेधावी छात्र-छात्राओं को लेपटॉप व 8वीं के बच्चों को टेबलेट देती थी। हालांकि 4 साल से दोनों में से कुछ भी नहीं मिला। वर्ष 2022 में सरकार ने लेपटॉप की जगह पात्र अभ्यर्थियों को टेबलेट देने की बात कहीं थी। ऐसे में विद्यार्थियों में इसको लेकर असमंजस  बना हुआ है। वहीं, इस संबंध में शिक्षा विभाग के अधिकारी भी जवाब नहीं दे पा रहे। साथ ही लेपटॉप या टेबलेट कब मिलेंगे, इसकी भी कोई पुख्ता जानकारी भी नहीं है। 2019 में 12वीं करने वाले अनेक अभ्यर्थियों ने वर्तमान में कॉलेजों में फाइनल इयर की परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली है। लेकिन उन्हें अभी तक कुछ भी नहीं मिला। पात्र विद्यार्थी लेपटॉप के लिए शिक्षा विभाग के चक्कर काटने को मजबूर हैं।  </p>
<p><strong>75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले पात्र</strong><br />सरकारी स्कूलों में सभी वर्गों के मेधावी स्टूडेंट्स जिन्होंने 8वीं 10वीं व 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में 75 प्रतिशत या इससे अधिक अंक अर्जित किए हैं। उन्हें वरियता के आधार पर लेपटॉप या टेबलेट वितरण किया जाता है। वर्ष 2019 से 2022 तक के प्रदेशभर के करीब 93 हजार विद्यार्थियों को योजना का लाभ मिलना है, जो अब तक नहीं मिला। इधर, शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, योजना के तहत कोटा जिले में कितने विद्यार्थी लाभांवित होंगे, यह आंकड़ा शाला दर्पण पर नहीं होता है। क्योंकि, शिक्षा निदेशालय द्वारा लेपटॉप व टेबलेट की संख्या के आधार पर पात्र विद्यार्थियों की मेरिट लिस्ट तैयार की जाती है। उसके बाद जिलेवाइज सूची जारी की जाती है। जिसके आधार पर पात्र विद्यार्थियों को लेपटॉप या टेबलेट का वितरण किया जाएगा।</p>
<p><strong>8वीं के दो सत्रों के विद्यार्थियों को लाभ मिलने पर संशय</strong><br />सरकार ने मेधावी विद्यार्थियों को वितरित किए जाने वाले नि:शुल्क टेबलेट वितरण योजना में कटौती की है। जिसके पीछे तर्क दिया है कि शैक्षणिक सत्र 2019-20 और 2020-21 में कोरोना के चलते कक्षा 8वीं की बोर्ड परीक्षा नहीं हुई थी। विद्यार्थियों को प्रमोट किए जाने के कारण अंकों के अभाव में मेरिट बनाना संभव नहीं है। ऐसे में इन दो शैक्षणिक सत्रों के विद्यार्थियों को योजना का लाभ मिलेगा या नहीं, इस पर संशय बना हुआ है। हालांकि 2018-19 व 2021-22 शैक्षणिक सत्र के मेधावी विद्यार्थियों को ही लेपटॉप या टेबलेट मिलेंगे।</p>
<p><strong>इन चार शैक्षणिक सत्रों के लैपटॉप मिलना है बाकी</strong><br />मेधावी विद्यार्थियों को शुरुआती चरणों में तो नियमित रूप से योजना का लाभ दे रही थी। लेकिन चार शैक्षणिक सत्रों में वितरण व्यवस्था गड़बड़ा गई। शैक्षणिक सत्र 2018-19, 2019 20,  2020-21, 2021-22 के विद्यार्थियों को लेपटॉप या टेबलेट का वितरण होना बकाया चल रहा है।</p>
<p>पिछले चार साल से पात्र विद्यार्थियों को लेपटॉप या टेबलेट मिलने का इंतजार हैं। डिजिटल शिक्षा की मजबूती के लिए सरकार को जल्द से जल्द योजना का लाभ देना चाहिए। इस संबंध में उच्चाधिकारियों से बात की जाएगी। <br /><strong>- रामनारायण मीणा, जिलाध्यक्ष राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद</strong></p>
<p>लेपटॉप या टेबलेट को लेकर अभी तक निदेशालय से कोई दिशा निर्देश नहीं मिले हैं। जैसे ही कोई निर्देश मिलेंगे उसी के अनुसार काम किया जाएगा। <br /><strong>-डॉ. मोहन लाल बैरवा, सहायक निदेशक समग्र शिक्षा </strong></p>
<p>निदेशालय से अभी तक इस संबंध में पात्र विद्यार्थियों की संख्या को कोई सूचना नहीं मांगी गई है और न ही कोई सूची जारी हुई है। जैसे ही सूची जारी होगी, विद्यार्थियों को सूचित कर दिया जाएगा। उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार कार्य किया जाएगा।<br /><strong>-राजेश कुमार मीणा, अतिरिक्त जिला शिक्षाधिकारी कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Feb 2023 15:36:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अनदेखी: चार साल से नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे बदहाल, खामियाजा भुगत रही जनता</title>
                                    <description><![CDATA[स्टेट हाईवे पर अग्रसेन मार्केट की रोड पर निकलना मुश्किल हो रहा है। कस्बे के मुख्य चौराहे से मौठपुर चौराहे तक मेन बाजार में रोड जर्जर हो गई है जिसमें  काफी गहरे गहरे गड्ढे हो गए हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/overlooked--national-highway-and-state-highway-in-bad-condition-for-four-years--people-are-suffering/article-36752"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/andekhi--char-saal-se-national-highway-aur-state-highway-badhaal,-khamiyaja-bhugat-rahi-janta...kawai-news-baran..7.2.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कवाई।  कवाई कस्बे के मुख्य बाजार से गुजर रहा नेशनल हाईवे 90 और छबड़ा-कोटा स्टेट हाईवे चार साल से खस्ताहाल है। सड़कों पर बड़े-बड़े गढ्ढे हो रहे है। इन दोनों रोड का पेचवर्क करना भी जिम्मेदार अधिकारियों ने मुनासिब नहीं समझा है जिसका खामियाजा  आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। हर रोज आवाजाही करने वाले दो पहिया वाहन व चार पहिया वाहन चालक खराब रोड से परेशान है। वहीं कस्बे के दुकानदारों और ग्राहकों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>कस्बे के मुख्य चौराहे की सड़कें हुई गड्ढों में तब्दील</strong><br /> धनराज सुमन ने बताया कि स्टेट हाईवे पर अग्रसेन मार्केट की रोड पर निकलना मुश्किल हो रहा है। कस्बे के मुख्य चौराहे से मौठपुर चौराहे तक मेन बाजार में रोड जर्जर हो गई है जिसमें  काफी गहरे गहरे गड्ढे हो गए हैं। कुछ समय पहले इन गड्ढों में मिट्टी डलवाई गई थी जो मावठ की बारिश से गड्ढों में पानी भर जाने से कस्बे के मुख्य सड़क पर कीचड़ ही कीचड़ हो गया। जिस पर दर्जनों बाइक सवार गिरकर चोटिल हो रहे हैं। मुख्य बाजार में  मंडी व्यापारी भूपेश मंगल, वार्ड पंच मुरारी सुमन, सत्यनारायण मेहता,   सहित कई कस्बे वासियों ने बताया कि रोड में गहरे गड्ढे होने के कारण बाजार से गुजरने वाले भारी वाहनों के पहियों से गड्ढों में गिट्टी उछल कर दुकानों में गिरते हैं जिससे व्यापारियों और ग्राहकों के जख्मी होने का खतरा बना रहता है। दुकान में भी नुकसान होने का अंदेशा बना रहता है।</p>
<p><strong>जर्जर सड़कें बिगाड़ रही सेहत</strong><br />रेस्टोरेंट संचालक पवन बंसल का कहना है कि बदहाल हो चुकी सड़कों से राहगीरों व स्थानीय लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बड़े-बड़े गड्ढों के कारण सड़कें वाहनों की दुर्दशा तो कर ही रही हैं, साथ  ही लोगों के शरीर व स्वास्थ्य पर भी बुरा असर कर रहीं हैं। इन बदहाल सड़कों पर मोटरसाइकिल दौड़ाने वालों में कमर दर्द की बीमारी जन्म लेने लगी है।  बड़े-बड़े व गहरे गड्ढों के कारण लोग दुर्घटनाओं का भी शिकार हो रहे हैं।</p>
<p><strong>धूल का गुबार कर रहा सेहत खराब</strong><br />कपड़ा व्यापारी चिंटू सुमन ने बताया कि कस्बे से गुजर रहे नेशनल हाईवे व स्टेट हाईवे की सड़कों की दयनीय हालत है जिसके चलते आए दिन घटनाएं घटित हो रही है। कस्बे की मुख्य मार्गों पर खस्ताहाल सड़कों से गिट्टी निकल आई है।  रोड के गड्ढों में तब्दील हो जाने के कारण दिनभर वाहनों के पीछे धूल के गुबार उड़ते रहते हैं जिससे दुकानदारों और मुख्य चौराहे से गुजरने वाले यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा हवा में उड़ रहे धूल के कण राहगीरों व स्थानीय लोगों को अस्थमा, श्वांस की बीमारी कर रहे हैं। वाहनों को भी नुकसान पहुंचा रही हैं।</p>
<p><strong>जिम्मेदार जानकर भी हो रहे हैं अनजान</strong><br />कस्बे से जिम्मेदार अधिकारी, विधायक और मंत्री इन खराब सड़कों पर आए दिन निकलते है। लेकिन इसे अनदेखा कर देते है। कवाई से बारां जिला मुख्यालय पहुंचने में 45 किलोमीटर का सफर तीन घंटे से ज्यादा समय लगता है जिला मुख्यालय पर जाने के लिए कई रास्ते बदल करके जिला मुख्यालय पहुंचना पड़ रहा है जिससे आमजन को काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है।<br /><strong>- धनराज सुमन, कस्बा वासी</strong></p>
<p>मेरी जानकारी में नहीं था आज मुझे पता चला है तो शीघ्र ही ठेकेदार को अवगत करवाकर कस्बे के अंदर नेशनल हाईवे पर हो रहे गड्ढों को शीघ्र ही दुरुस्त करवा देंगे ताकि आमजन को आवाजाही में सुगम रास्ता प्रदान हो। <br /><strong>- चंद्रमोहन बैरवा, एक्सईन पीडब्ल्यूडी एनएच बारां</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Feb 2023 14:47:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सहरिया परिवारों के लिए बने 105 आशियाने हुए खंडहर</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य सरकार की ओर से सहरिया परियोजना के तहत यहां 2014 में 105 आवासों का निर्माण करवाया गया था सुविधाओं के अभाव में सहरिया परिवारों के लिए बनाए गए आवासों का उपयोग नही होने से जर्जर हो चुके है। सहरिया परिवारों ने आज तक आवासों की ओर रुख नहीं किया। इन आवासों में अब असामाजिक तत्वों का अड्डा बना हुआ है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/105-houses-built-for-sahariya-families-become-ruins/article-36643"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/22.jpg" alt=""></a><br /><p>किशनगंज। किशनगंज से उपखंड मुख्यालय से  तेजाजी के डांडे पर मॉडल स्कूल के पास जंगल में 9 साल  पूर्व सहरिया परिवारों के रहने के लिए आवास बनाए गए थे लेकिन आवंटन नहीं होने से ये आवास खंडहर में तब्दील हो गए है। इन आवासों की सार संभाल करने वाला कोई नहीं है। दरअसल राज्य सरकार की ओर से सहरिया परियोजना के तहत यहां 2014 में 105 आवासों का निर्माण करवाया गया था लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए सड़क निर्माण एवं आवासों का घटिया निर्माण होने, कस्बे से 3 किमी दूर जंगल में होने के कारण सहरिया परिवारों ने आज तक आवासों की ओर रुख नहीं किया। इन आवासों में अब असामाजिक तत्वों का अड्डा बना हुआ है। </p>
<p><strong>घटिया निर्माण के चलते हो गए जर्जर</strong><br />इन आवासों में घटिया निर्माण का खेल जिम्मेदारों की आंखों के सामने खेला गया। आवासों के निर्माण में संवेदक फार्म के द्वारा घटिया बजरी सीमेंट की मात्रा कम रखने से निम्न स्तरीय निर्माण करने,देखभाल नही होने से यह कुछ वर्षों में ही जर्जर हो गए जिससे परियोजना के करोड़ों रुपए का दुरुपयोग हो रहा है।</p>
<p><strong>पानी, बिजली, सड़क जैसी सुविधाओं का अभाव</strong><br />आबादी क्षेत्र से दूर पानी, बिजली ,सड़क जैसी सुविधाओं के अभाव के चलते,कस्बे से दूर वीरान जंगल में बनाए गए सहरिया परिवारों के लिए 105 आवास बदहाली का दंश झेल रहे है। सुविधाओं के अभाव में सहरिया परिवारों के लिए बनाए गए आवासों का उपयोग नही होने से जर्जर हो चुके है।</p>
<p><strong>खिड़की दरवाजे और फर्श के पत्थर भी हुए चोरी</strong><br />कस्बे से बाहर बने आवास विरान होने से असामाजिक तत्वों की मौज हो रही है। चोर आए दिन आवासों में लगे लोहे के बनी खिड़कियों को चोरी कर रहे हैं। कई आवासों की फर्श के पत्थर को चोर उखाड़कर ले गए। असामाजिक तत्व शराब पार्टियों के साथ यहां कई गैरकानूनी गतिविधियां भी चलाते हैं।</p>
<p>किशनगंज कस्बे के तेजाजी के डांडे पर बने आवासों के आवंटन नहीं होने से आवास जर्जर हो चुके हैं। चोर लोहे के जंगले, खिड़कियों को चुरा कर ले जा रहे हैं जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है<br /><strong>- रामनिवास, वार्डपंच किशनगंज</strong></p>
<p>किशनगंज के तेजाजी के डंडे पर आबादी से दूर सहरिया समुदाय के लिए बनाए गए आवास गरीब सहरिया परिवारों को नहीं मिल पाए जिससे सरकार के लाखों रुपए बर्बाद हो गए। यह कस्बे से 3 किमी दूर है। यहां पर बिजली, पानी की भी सुविधाएं नहीं है। <br /><strong>- ब्रजेश सहरिया, क्षेत्रवासी</strong></p>
<p>किशनगंज तेजाजी के डांडे पर बने सहरिया आवासों में आवंटन के अभाव में उपयोग नही होने के कारण जर्जर हो गए है। इसकी मिली शिकायत के बाद टीम गठित कर सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा उक्त मामलें की जांच की जा रही है।<br /><strong>- राहुल मल्होत्रा, एडीएम शाहबाद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Mon, 06 Feb 2023 14:50:55 +0530</pubDate>
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