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                <title>dilapidated buildings - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>जर्जर भवनों में संचालित हो रहे जीआरपी थाने व चौकियां, समस्याएं बताने के बाद भी नहीं हुआ समाधान</title>
                                    <description><![CDATA[जर्जर भवनों में संचालित जीआरपी थाना और चौकियां अपनी बदहाली पर आंसू बहाने पर मजबूर हो रहे हैं
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/grp-police-stations-and-posts-are-being-run-in-dilapidated-buildings/article-125464"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/1ne1ws-(6)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जर्जर भवनों में संचालित जीआरपी थाना और चौकियां अपनी बदहाली पर आंसू बहाने पर मजबूर हो रहे हैं। बरसात के चलते थानों व चौकियों के कमरों में पानी भरने के बाद भी कामकाज करना परेशानी का सबब बन रहा है। बरसाती पानी के कारण रिकॉर्ड रूम व मालखाना में रखा रिकॉर्ड व बलवा  खराब होने की कगार पर है। जीआरपी ने कई बार रेलवे अधिकारियों और पुलिस अधीक्षक अजमेर को पत्र लिखकर समस्या से अवगत कराया गया है, लेकिन समाधान नहीं हो पाया। थाने और चौकियों की हालत बद से बदतर हो रही है। बरसाती पानी के चलते जवानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>अभी यह है भवनों की स्थिति</strong><br />जानकारी के अनुसार उप-अधीक्षक कोटा वृत कार्यालय रेलवे विभाग द्वारा वर्ष 2020 में मरम्मत करवाकर दिया गया था। वहीं जीआरपी थाना एक पुराने भवन जर्जर भवन में दोनों ट्रैकों के बीच में संचालित हो रहा है। जिसमें कप्यूटर कक्ष, हैड मोहर्रियर कार्यालय, रिकॉर्ड रूम, मालखाना रूम, हवालात, बाथरूम तथा शौचालय व मैस संचालित किया जा रहा है। जो कि पूर्णतया जर्जर हालत में हैं। जर्जर कमरों के नीचे बैठकर जवान कार्य कर रहे हैं। जिससे कमरों में सीलन के चलते प्लास्टर दीवारों से उखड़ रहा है, फर्श पानी के कारण फूल गया है और नीचे स्तर थाना होने से नालियों का पानी भी कमरों में आ रहा है। रेलवे विभाग को कई बार जीरआरपी द्वारा समस्या के लिए पत्र व्यवहार किए जाने के बावजूद अनदेखा  किया जा रहा है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा होने का अंदेशा है। </p>
<p><strong>स्टॉफ को जीव जंतुओं से भी खतरा </strong><br />भरतपुर जीआरपी थाना 1957 में बने भवन में चल रहा है। अब तक भवन का कोई नवीनीकरण नहीं किया गया है। बरसात के दिनों में भवन की छत से पानी टपकता रहता है, जिससे रिकॉर्ड रुम में रखे हथियार, बलवा का सामान, सरकारी सामान सुरक्षित रखने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। दीवारों में सीलन आ रही है और छत से प्लास्टर गिरता रहता है। थाने के मैस में पानी टपकने से खाना बनाना भी मुश्किल हो रहा है। बरसात के मौसम में जलीय जीव जन्तु काटने का भय सताता रहता है। कोटा थाने की हालत भी बहुत खराब है। भवन के कमरे जर्जर हालत में हैं। बरसात के मौसम में नालियों का पानी थाने में भर जाता है। सवाईमाधोपुर थाना एक जर्जर भवन में चल रहा है। जिससे हादसा होने का अंदेशा रहता है। कमरों में बरसात का पानी भर जाता है, जिससे नालियों के पानी के साथ जहरीलें जीव जन्तुओं के   बिलों से काटने का अंदेशा रहता है। </p>
<p><strong>चार थाने और छह चौकियां संचालित  </strong><br />कोटा जीआरपी वृत में चार थाने कोटा, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी, भरतपुर तथा छह चौकियां बारां, झालावाड़ रोड, वनस्थली निवाई, हिंडोनसिटी, बयाना तथा धौलपुर में संचालित हैं। इन सभी चौकियों की हालत जर्जर है। बारां चौकी छोटे भवन में चल रही है, जिससे स्टॉफ बैठने की समस्या से जूझ रहा है। झालावाड रोड पर संचालित चौकी जर्जर हालत में है। जिससे बरसात के समय में सीलन आने से प्लास्टर गिरता रहता है। सवाईमाधोपर चौकी एक जर्जर भवन में संचालित हो रही है, जिसमें मालखाना, बाथरूम, शौचालय तथा मैस कप्यूटर कक्ष, हैड प्रभारी का कक्ष बना हुआ है। यहां बरसात के समय छत से पानी टपकता रहता है। पानी गिरने से रिकॉर्ड खराब हो रहा है।  निवाई, गंगापुरसिटी, हिंडोन सिटी, बयाना, चौकियां भी जर्जर भवनों में संचालित हैं। इन सभी चौकियां की मरम्मत की आवश्यता है। जर्जर भवनों और बरसात के समय में पानी भरने से स्टॉफ को कार्य करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। धौलपुर चौकी को पूर्व में ही रेलवे द्वारा नकारा घोषित किया गया है, इसके बावजूद ध्यान नहीं दिया जा रहा है। </p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />थानों की स्थित को देखते हुए डीआरएम व एसपी जीआरपी को कई बार पत्र  लिखा है। थानों व चौकियों की जर्जर अवस्था के बारे में अवगत करवाया गया है, लेकिन अभी तक कोई प्रोग्रेस नहीं हुई है। <br /><strong>- शंकरलाल, डिप्टी एसपी जीआरपी कोटा वृत </strong></p>
<p>कोटा वृत के थानों और चौकियों की जर्जर हालत के सम्बंध में डीआरएम से मिलकर अवगत कराया था और जवानों की समस्या भी उनके सामने रखी थी। इसके बाद कई बार लिखित में समस्या को लेकर पत्र व्यवहार किया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है। अब फिर से रेलवे के अधिकारियों को समस्याओं से अवगत करवाया जाएगा।      <br /><strong>- नरेन्द्र सिंह, एसपी जीआरपी अजमेर रेंज </strong></p>
<p>इस मामले में डिप्टी एसपी से वार्ता की गई और मामला डीआरएम के प्रसंज्ञान में हैं। हमने अपने इंजीनियर को बोल रखा है। अभी स्टेशन पर निर्माण कार्य हो रहा है, जिसमें कई विभागों का रिनोवेशन होगा। पता करना पड़ेगा कि जीआरपी को शामिल किया गया है या नहीं, निश्चित रूप से अलग से वर्क कराया जाएगा। <br /><strong>- सौरभ जैन, सीनियर डीसीएम </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Sep 2025 16:25:45 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - कोई जर्जर भवन उपयोग में न आए, यह सुनिश्चित करें</title>
                                    <description><![CDATA[जर्जर भवनों का चिह्नीकरण कर शीघ्र सूची भिजवाएं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---make-sure-that-no-dilapidated-building-is-used/article-122271"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिला कलक्टर पीयूष समारिया ने उपखंड अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कहीं भी जर्जर भवन में कोई मानव गतिविधि संचालित ना हो, यह सुनिश्चित करें। अपने-अपने क्षेत्र में तकनीकी विशेषज्ञ युक्त संयुक्त टीम से जर्जर भवनों का चिह्नीकरण कर सूची शीघ्र भिजवाएं। यदि कहीं जर्जर भवन उपयोग में आ रहे हैं तो उन्हें तुरंत प्रभाव से उपयोग के लिए प्रतिबंधित किया जाए। जिला कलक्टर ने ये निर्देश गुरुवार को कलक्ट्रेट सभागार में आयोजित राजस्व अधिकारियों की बैठक में दिए। जिला कलक्टर ने कहा कि लगातार हो रही वर्षा को देखते हुए जर्जर भवनों के मुद्दे को अतिगंभीरता से लेते हुए प्राथमिकता से इनके चिह्नीकरण का कार्य किया जाए। उपयोग में आ रहे ऐसे भवनों को प्रतिबंधित कर वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएं। </p>
<p><strong>बजट घोषणाओं में शीघ्र करें भूमि चिन्हीकरण</strong><br />जिला कलक्टर ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, पशुपालन विभाग, जेवीवीएनएल, पर्यटन  व अन्य विभागों से संबद्ध बजट घोषणाओं और अन्य योजनाओं-परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटन की समीक्षा की और निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल्दी से जल्दी भूमि का चिह्नीकरण कर प्रस्ताव भिजवाए जाएं। केडीए क्षेत्र में भूमि के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार केडीए को आवेदन किया जाए। बैठक में विभिन्न विभागों को भूमि आवंटन के संबंध में निर्देश दिए गए।</p>
<p><strong>सेवाओं में गुणवत्ता पररखें निगरानी</strong><br />बैठक में एडीएम सीलिंग ने निर्देश दिए कि निरंतर निरीक्षण कर सेवाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाए। पोषाहार की समय-समय पर जांच करते हुए इसकी गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। बैठक में उप निदेशक आईसीडीएस सीता शर्मा  व सीडीपीओ आलोक शर्मा ने विभागीय गतिविधियों और कार्यक्रमों की जानकारी दी।</p>
<p><strong>भूमि अवाप्ति मामले में शीघ्र ही मुआवजे का वितरण</strong><br />उन्होंने विभिन्न परियोजनाओं में  भूमि अवाप्ति संबंधी प्रकरणों की समीक्षा कर निर्देश दिए कि ऐसे प्रकरणों का शीघ्र निपटारा कर मुआवजे का वितरण किया जाए। उन्होंने राजस्व वसूली की समीक्षा कर इस कार्य में गति लाने और लक्ष्य पूरे करने के निर्देश दिए। बैठक में एडीएम प्रशासन मुकेश चौधरी, एडीएम सीलिंग  कृष्णा शुक्ला, एडीएम सिटी अनिल सिंघल, केडीए सचिव कुशल कोठारी  व सभी उपखंड अधिकारी, तहसीलदार और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।</p>
<p><strong>आंगनबाड़ी भवनों का निरीक्षण कर दें रिपोर्ट</strong><br />इधर समेकित बाल विकास सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए गठित जिला अभिसरण समिति की बैठक एडीएम सीलिंग कृष्णा शुक्ला की अध्यक्षता में हुई। बैठक में निर्देश दिए गए कि सभी आंगनबाड़ी भवनों का निरीक्षण कर जांचें कि वे सुरक्षित हैं या नहीं। एडीएम शुक्ला ने निर्देश दिए कि आंगनबाड़ी के स्वयं के, विद्यालयों या अन्य राजकीय भवनों म व निजी भवनों में संचालित सभी केन्द्रों का संयुक्त दल द्वारा निरीक्षण कराया जाए जिसमें तकनीकी विशेषज्ञ भी शामिल हों। जर्जर पाए जाने वाले भवनों को चिन्हित  व सूचीबद्ध कर अवगत कराया जाए। यह कार्य प्राथमिकता से अतिशीघ्र पूरा किया जाए।</p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था मामला प्रकाशित</strong><br />झालावाड़ के पिपलोदी गांव में सरकारी स्कूल भवन की छत गिरने से 7 बच्चों की मौत के बाद दैनिक नव’योति ने कोटा शहर व आसपास के क्षेत्रों में अन्य निजी व सरकारी कार्यालयों व भवनों में संचालित कार्यालयों की स्थिति के बारे में समाचार प्रकाशित किया था। समाचार पत्र में 27 जुलाई को पेज दो पर‘ सिर पर मंडरा रहा हादसे का खतरा’ शीर्षक स समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें जलदाय विभाग से लेकर  बस स्टैंड और फायर स्टेशन से लेकर स्कूल तक के जर्जर भवनों का उपयोग होने व बरसात में उनके क्षतिग्रस्त होने से खतरे के बारे में अवगत कराया था। इसके बाद से जिला प्रशासन हरकत में आया। प्रशासन की ओर से सभी अधिकारियों व विभागों से जर्जर भवनों की रिपोर्ट मांगी गई थी। वहीं अब जिला कलक्टर ने निर्देश दिए कि जर्जर भवनों का उपयोग ही नहीं किया जाए। उनके स्थान पर वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Aug 2025 15:00:30 +0530</pubDate>
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                <title>हम भी जर्जर हैं... अब तो सुध लो सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[दस साल से सरकारी विभागों में घूम रही फाइल। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/we-are-also-dilapidated----now-take-care-of-us--government/article-122075"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/1ne1ws1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चंबल नदी पर स्थित कोटा बैराज, जवाहर सागर और राणाप्रताप सागर बांध  उम्रदराज होने के साथ जर्जर हो चुके हैं। यह बांध पिछले दस साल से अपने जीर्णोद्धार का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अभी तक इनकी फाइल इधर से उधर ही घूम रही है। चंबल वैली प्रोजेक्ट के तहत राणा प्रताप सागर (आरपीएस), जवाहर सागर (जेएस) बांध और कोटा बैराज के जीर्णोद्धार का काम होना है। इसके लिए वर्ल्ड बैंक से डैम रिहैबिलिटेशन इंप्रूवमेंट प्रोजेक्ट (ड्रिप) के तहत 236.23 करोड़ रुपए की राशि काफी समय पहले स्वीकृत हो चुकी है। इसके बाद गत दिनों सरकार ने संशोधित प्रशासनिक स्वीकृति जारी कर दी है, लेकिन अब भी इसकी तकनीकी और वित्तीय स्वीकृति की प्रक्रिया होनी है। इस प्रक्रिया में कितना समय लगेगा यह कोई नहीं कर सकता है। झालावाड़ के पिपलोदी स्कूल हादसे के बीच सरकार ने जर्जर भवनों की सूची तैयार का कार्य शुरू कर दिया है। ऐसे में अब चंबल नदी के जर्जर बांधों को भी सरकार से आस है कि उनकी जीर्णोद्धार की फाइल तेज गति से चलेगी और जल्द उनको संजीवनी मिल सकेगी।</p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong><br />बांध मरम्मत राशि करोड़ों में<br />कोटा बैराज    72.10 <br />राणाप्रताप सागर    85.45 <br />जवाहर सागर    78.68 </p>
<p><strong>तीन बार निविदा निकाली, फिर भी हाथ रहे खाली</strong><br />जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार तीनों बांधों की मरम्मत के लिए जल संसाधन विभाग ने 14 अगस्त 2023 को निविदा जारी की थी, लेकिन किसी भी संवेदक फर्म ने इसमें टेंडर नहीं डाले। इसके बाद 28 सितंबर 2023 को एक बार फिर निविदा जारी की गई थी, इसमें भी यही हालात रहे। इसके बाद विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लग गई थी, जिसके चलते निविदा जारी नहीं कर पाए। आचार संहिता हटते ही 22 दिसंबर 2023 को दोबारा निविदा जारी कर दी गई थी। हालांकि इसमें हाइड्रो मैकेनिक के लिए कोई नहीं आया, दो फर्म सिविल वर्क के लिए पार्टिसिपेट करने आई, लेकिन इन कार्यों को करने के लिए अनुभव उनके पास नहीं था। साथ ही जिन मापदंड के जरिए बांधों में काम होना है। उसके अनुरूप वो सक्षम नहीं पाए गए थे, ऐसे में वो डिसक्वालीफाई हो गए थे। </p>
<p><strong>बांधों के गेटों पर  लग चुका जंग </strong><br />जानकारी के अनुसार कोटा बैराज, जवाहर सागर और राणा प्रताप सागर बांध करीब 60 से 65 साल पुराने बने हुए हैं। तीनों बांधों के गेटों पर जंग लग चुका है। इन गेटों की काफी समय से मरम्मत नहीं हुई है। ऐसे में इनमें जंग की मात्रा बढ़ती जा रही है। कोटा बैराज की सुरक्षा दीवार भी दरकी चुकी है। हर साल आयलिंग और ग्रिसिंग कर इन बांधों की संजीवनी देने का कार्य किया जा रहा है। वर्ल्ड बैंक से स्वीकृत बजट में इन बांधों पर सिविल और मैकेनिकल के कार्य करवाए जाएंगे। इसके तहत हाइड्रो मैकेनिकल वर्क में पुराने गेट व स्लूज गेट बदलने हैं। पूर्व में इस तरह के काम करने वाले संवेदकों को बुलाकर बातचीत भी की गई और उन्हें पूरे काम के संबंध में समझाया भी गया था।  इसके बावजूद कोई संवेदक नहीं आया था। पुराने बांधों की मेंटेनेंस के काम के लिए काफी दिक्कत आती है, संवेदक इसलिए भी सामने नहीं आ रहे हैं।</p>
<p><strong>रोबोटिक अंडरग्राउंड वॉटर सर्वे  में मिली थी खामियां</strong><br />राज्य सरकार ने जल संसाधन विभाग के चंबल नदी के तीनों बांध का अंडरवाटर सर्वे करवाया था। इसमें रोबोट के जरिए अंडर ग्राउंड वाटर वीडियोग्राफी करवाई गई थी, जिसके अंदर डैम बॉडी की पूरी पिक्चर रोबोट ने ली थी, उनका पूरा एसेसमेंट बनाकर सर्वे करने वाली कंपनी ने रिपोर्ट दी थी। इसमें कोटा बैराज, जवाहर सागर बांध और राणा प्रताप सागर बांध की बॉडी के स्ट्रक्चर में खामियां सामने नहीं आई हैं। जिनके लिए भी अब काम किया जाएगा। इसके अलावा बांधों के दरवाजों का हेल्थ असेसमेंट अल्ट्रासाउंड तकनीक व मशीनरी के जरिए करवाया गया था, जिसमें कई गेट को बदलने और दुरुस्त करने का पैसा पास हुआ था।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />यदि बांधों की तकनीकी स्थिति बेहतर होती है तो नहरों में पानी की उपलब्धता नियमित होगी। इससे सिंचाई समय पर होगी और फसलों का उत्पादन 20 से 25 फीसदी तक बढ़ सकता है। यदि बांधों के गेटस और चैनलों की स्थिति मजबूत होती है तो अनावश्यक जल हानि और कटाव को भी रोका जा सकेगा।<br /><strong>- रमेश कुमार, सेवानिवृत्त कृषि अधिकार</strong></p>
<p>वर्ल्ड बैंक से डैम रिहैबिलिटेशन इंप्रूवमेंट प्रोजेक्ट (ड्रिप) के तहत 236.23 करोड़ रुपए की राशि से तीनों बांधों की मरम्मत कराई जाएगी। गत दिनों सरकार ने तीनों बांधों के लिए संशोधित प्रशासनिक स्वीकृति जारी कर दी है। अब तकनीकी और वित्तीय स्वीकृत की प्रक्रिया शुरू होगी। जैसे ही इसकी स्वीकृति  मिलेगी तो बांधों के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।<br /><strong>- सुनील गुप्ता, अधीक्षण अभियंता, जल संसाधन विभाग कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Jul 2025 15:51:50 +0530</pubDate>
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                <title>बरसात शुरू, अब हो रहा जर्जर भवनों का सर्वे</title>
                                    <description><![CDATA[बरसात के सीजन में पुराने व जर्जर भवनों को नुकसान होने व धराशाही होने का खतरा बना रहता है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rains-have-started--now-the-survey-of-dilapidated-buildings-is-being-done/article-119208"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/rtroer-(2)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की ओर से बरसात से पहले होने वाले काम को बरसात शुरु होने के बाद कराया जा रहा है। हालत यह है कि बरसात शुरु होने के बाद भी अभी तक वह काम पूरा नहीं हुआ है। यह मामला है शहर में जर्जर भवनों के सर्वे का। शहर में बड़ी संख्या में ऐसे पुराने भवन हैं जो जर्जर हालत में है। जिनमें बरसात के समय में कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। हर साल 15 जून के बाद बरसात शुरु होने का समय रहता है। हालांकि अधिकतर समय बरसात देर से ही शुरु होती है। लेकिन इस बार समय से एक सप्ताह पहले ही मानसून ने एंट्री की वह भी धमाकेदार। बरसात के सीजन में जहां पुराने व जर्जर भवनों को नुकसान होने व धराशाही होने का खतरा बना रहता है। जिनसे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। उन्हें रोकने के लिए नगर निगम की ओर से उनका सर्वे करवाकर ऐसे भवनों को खाली करवाने का काम किया जाता है। जिससे बरसात के समय में उनके कारण कोई हादसा न हो सके। हालांकि यह काम नगर निगम को बरसात शुरु होने से पहले करवाना चाहिए था। जबकि हालत यह है कि निगम की ओर से यह काम बरसात शुरु होने के बाद किया जा रहा है। वह भी अभी तक यह काम पूरा नहीं हुआ है। ऐसे में कभी भी ये हादसों का कारण बन सकते हैं। </p>
<p><strong>जर्जर भवनों की संख्या ही पता नहीं</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से जर्जर भवनों के सर्वे का काम पूरा नहीं होने से अभी तक अधिकारियों को इसकी जानकारी ही नहीं है कि उनके क्षेत्र में कितने जर्जर भवन हैं। जिनमें बरसात के दौरान कभी भी हादसा हो सकता है। जर्जर भवनों में मकान से लेकर सरकारी स्कूल, कार्यालय व अन्य इमारतें भी है। हालांकि नगर निगम कोटा उत्तर क्षेत्र में अनंत चतुर्दशी के दौरान करवाए गए जर्जर भवनों के सर्वे के लिए ऐसे भवनों पर क्रॉस के निशान लगाए हुए हैं। पुराने शहर के झाला हाउस, कैथूनीपोल, लाल बुर्ज समेत कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां अधिकतर जर्जर भवन हैं। इसी तरह से नांता व सरायकायस्थान समेत कई जगह पर पुराने भवनों में संचालित सरकारी स्कूलों के भवन भी जर्जर हो रहे हैं। </p>
<p><strong>आयुक्त ने दी अधिकारियों को जिम्मेदारी</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के आयुक्त अनुराग भार्गव ने हाल ही में इस संबंध में आदेश जारी किया है। जिसमें बरसात के दौरान जर्जर भवनों के सर्वे से लेकर अन्य व्यवस्थाओं को सुचारू करने के आदेश दिए हैं। आदेश के अनुसार उपायुक्त व अधीक्षण अभियंता महेश गोयल, अधिशाषी अभियंता ए.क्यू कुरैशी व संजय विजय को अधीनस्थ कनिष्ठ अभियंताओं के क्षेत्राधिकार में आने वाले जर्जर भवनों का सर्वे कर निरीक्षण करवाने को कहा गया है। साथ ही जर्जर भवनों को खाली भी करवाया जाना है। इसके अलावा अधिक बरसात व बाढ़ के हालात बनने पर पुनर्वास के लिए सामुदायिक भवनों की व्यवस्था करने, बाढ़ व आपदा की स्थिति में नियंत्रण कक्ष की व्यवस्था संभालने, पानी की निकासी के लिए जेसीबी व अन्य संसाधनों को उपलब्ध करवाना, बिजली और आश्रय स्थलों की भी व्यवस्था करने की जिम्मेदारी अलग-अलग अधिकारियों को दी गई है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />आयुक्त के आदेश से दक्षिण निगम क्षेत्र में पुराने व जर्जर भवनों के सर्वे का काम किया जा रहा है। संबंधित कनिष्ठ अभियंताओं से यह काम कराया जा रहा है। अभी तक पूरी कम्पाइल रिपोर्ट नहीं आई है। जिससे अभी जर्जर भवनों की पुख्ता जानकारी नहीं दी सकती। <br /><strong>- महेश गोयल, अधीक्षण अभियंता, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Jul 2025 16:30:53 +0530</pubDate>
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                <title>धर्मशाला व स्कूलों में चल रहे कोटा संभाग के 8 कॉलेज</title>
                                    <description><![CDATA[अस्थाई जर्जर भवनों में संचालित हो रहे सरकारी महाविद्यालय । 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/8-colleges-of-kota-division-are-running-in-dharamshala-and-schools/article-90665"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/630400-size-(9).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती के सरकारी महाविद्यालय धर्मशाला व स्कूलों में चल रहे हैं। जहां कॉलेज संचालित करने से पहले स्कूल की छुट्टी होने का इंतजार करना पड़ता है। वहीं, खतस्ताहाल अस्थाई भवनों में सुविधाएं तो न के बराबर हैं लेकिन हादसों का खतरा भरपूर है। हालात यह हैं, संभाग के 8 सरकारी कॉलेज उधार के भवनों में संचालित हो रहे हैं। कई महाविद्यालय 3 तो कोई 5 कमरों में चल रहा है। जहां बारिश में टपकती छतें व दीवारों से उठती सीलन की बदबू और बिजली के तारों से हादसे का खतरा बना रहता है। जबकि, अधिकतर कॉलेजों में विद्यार्थियों की संख्या 600 से ज्यादा है। ऐसे में विद्यार्थियों के बैठने तक की जगह नहीं मिलती। इन्हें आज तक खुद का भवन नसीब नहीं हुआ। इधर, बारां जिले में 4 भवनों में 8 कॉलेज चल रहे हैं।  </p>
<p><strong>सुबह की पारी में स्कूल, शाम को कॉलेज</strong><br />बूंदी जिले के तालेड़ा कस्बे में गत वर्ष राजकीय कला महाविद्यालय खुला था, जो वर्तमान में महात्मा गांधी सी.सै. गर्ल्स स्कूल में चल रहा है। सुबह की पारी में स्कूल चलता है, जिसकी छुट्टी होने के बाद दोपहर 1 से शाम 6 बजे तक कॉलेज शुरू होता है। स्कूल से उधार मिले 3 से 4 कमरों में कक्षाएं संचालित करनी पड़ती है। कॉलेज शुरू करने के लिए शिक्षकों को स्कूल की छुट्टी का इंतजार करना पड़ता है। </p>
<p><strong>कम समय, कैसे कराएं एक्टिवीटी</strong><br />राजकीय कला महाविद्यालय तालेड़ा के प्राचार्य बीके  शर्मा कहते हैं, कॉलेज संचालित करने के लिए लिमिटेड समय मिलता है, ऐसे में स्पोर्ट्स व कल्चर एक्टिीवीटी नहीं करवा पाते। सिर्फ पढ़ाई पर ही फोकस रखते हैं।  वर्तमान में कॉलेज में 300 से ज्यादा विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। हालांकि अकतासा में कॉलेज की नई बिल्डिंग बन रही है।</p>
<p><strong>7 साल से धर्मशाला में चल रहा कॉलेज</strong><br />राजकीय इटावा महाविद्यालय की स्थापना वर्ष 2018 में हुई थी, तब से यह करीब 51 साल पुरानी त्यागी धर्मशाला में चल रहा है। भवन जितना पुराना है, उतना ही जर्जर अवस्था में है। बरसात में कक्षा-कक्षों में पानी टपकता है। छतों का पलास्टर जगह-जगह उखड़ा है। हालांकि, 6 करोड़ की लागत से महाविद्यालय का नया भवन का निर्माण लगभग पूरा हो गया है। दीपावली के बाद शिफ्ट होने की उम्मीद है। </p>
<p><strong>एक प्रिंसिपल चला रहे 3 कॉलेज</strong><br />बारां जिले के राजकीय कला महाविद्यालय छबड़ा के  प्राचार्य अरविंद प्रताप वर्तमान में तीन कॉलेजों का संचालन कर रहे हैं। उनके जिम्मे बयॉज अटरू, गर्ल्स अटरू और राजकीय प्रेम सिंह सिंघवी कॉलेज हैं। इसी तरह अटरू राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य बुद्धिप्रकाश मीणा खुद के कॉलेज के अलावा राजकीय कला कन्या महाविद्यालय अटरू का भी संचालन कर रहे हैं।  </p>
<p><strong>पेड़ के नीचे लगती क्लासें</strong><br />प्राचार्य रामदेव मीणा ने बताया कि इटावा कॉलेज में वर्तमान में 800 से 900 के बीच विद्यार्थी अध्यनरत हैं, जबकि, धर्मशाला में 5 कमरे मिले हैं, जिनमें से एक प्राचार्य आॅफिस है। ऐसे में 4 कमरों में ही कॉलेज चलाना पड़ रहा है। विद्यार्थियों को बिठाने की जगह नहीं होने से बीए की दो कक्षाएं टीन शेड व पेड़ के नीचे लगानी पड़ती है।  वहीं, कॉलेज में 7 विषय स्वीकृत हैं, जिसमें से अंग्रेजी, संस्कृत, हिन्दी और राजनेतिक विज्ञान के शिक्षक नहीं हैं।  </p>
<p><strong>यह कॉलेज भी स्कूल-पंचायत भवनों में संचालित</strong><br />गवर्नमेंट कॉलेज बारां के सहायक आचार्य राजेंद्र मीणा ने बताया कि जिले में राजकीय कला गर्ल्स महाविद्यालय शाहबाद कॉलेज कस्बे के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मुंडियर में संचालित हो रहा है। यह स्कूल खस्ताहाल है। यहां 130 विद्यार्थियों का नामांकन है। इसी तरह राजकीय महाविद्यालय नाहरगढ़ वर्ष 2022-23 से पुलिस थाने के पीछे पंचायत समिति के भवन में चल रहा है। वहीं, सीसवाली कॉलेज राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, केलवाड़ा गर्ल्स कॉलेज पिछले साल से ही सीताबाड़ी स्थित सरकारी स्कूल के पुराने भवन में चल रहा है। यहां 300 छात्राओं का नामांकन है। इधर, आयुक्तालय से मिली जानकारी के अनुसार, झालावाड़ के असनावर व खानपुर राजकीय महाविद्यालय भी स्कूलों के पुराने भवनों में संचालित हो रहे हैं। </p>
<p><strong>4 भवनों में 8 कॉलेज</strong> <br />बारां जिले में एक बिल्डिंग में दो-दो कॉलेज संचालित हो रहे हैं। इनमें राजकीय महाविद्यालय छबड़ा की बिल्डिंग में गवर्नमेंट आर्ट्स गर्ल्स कॉलेज, राजकीय अटरू महाविद्यालय में कन्या कला अटरू, गवर्नमेंट केलवाड़ा कॉलेज में शाहबाद कृषि महाविद्यालय तथा  राजकीय महाविद्यालय बारां में गवर्नमेंट एग्रीकल्चर कॉलेज बारां संचालित हो रहा है। इन कॉलेजों में कक्षा कक्ष सीमित हैं और विद्यार्थियों की संख्या कई गुना अधिक है। कॉलेज प्राचार्यों को संचालन संबंधित कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी</strong><br />कॉलेज में न तो पढ़ाने के लिए शिक्षक हैं और न ही बैठने के लिए जगह। कॉलेज जाने में समय की बर्बादी होती है। ऐसे में घर पर ही सेल्फ स्टडीज करनी पड़ती है। मिड टर्म के दौरान सभी विद्यार्थी एक साथ आ गए तो बैठने की जगह तक नहीं मिली।  <br /><strong>- दीपेंद्र कुमार, छात्र द्वितीय वर्ष, राजकीय इटावा महाविद्यालय</strong></p>
<p>पढ़ने से पहले स्कूल की छुट्टी होने का इंतजार करना पड़ता है। संभाग का यह एकमात्र कॉलेज है जो दोपहर को संचालित होता है। यहां दो तीन कमरें हैं। बैठने के लिए जगह तक नहीं है। जबकि, 300 से ज्यादा विद्यार्थियों का नामांकन है। कॉलेज शुरू होने से पहले स्कूल की छुट्टी होने का इंतजार करना पड़ता है। <br /><strong>- तेजाराम नाथावत, छात्र, राजकीय महाविद्यालय तालेड़ा</strong></p>
<p>जो कॉलेज वर्तमान में अस्थाई भवन में चल रहे हैं, उनके नए भवन का निर्माण कार्य लगभग पूरे हो चुके हैं, जो जल्द ही अपने नए भवन में शिफ्ट हो जाएंगे।  सरकार इसके प्रति गंभीर है, प्रति सप्ताह निर्माणाधीन  भवनों की प्रगति की रिपोर्ट भेजने के लिए प्राचार्यों को पाबंद किया है। वहीं, इस वर्ष संभाग में जो नए कॉलेज  खुले हैं, उनमें दो महाविद्यालयों को भूमि आवंटित हो चुकी है और दो की आवंटन प्रक्रिया अंतिम चरण में है। <br /><strong>- डॉ. गीताराम शर्मा, क्षेत्रिय निदेशक, कॉलेज आयुक्तालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Sep 2024 16:24:47 +0530</pubDate>
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                <title>97 लाख की चमक फीकी, जहरीले सांप और बीमारियों के शिकंजे में फंसी खिलाड़ियों की जान</title>
                                    <description><![CDATA[हाड़ौती काएकमात्र फुटबॉल छात्रावास उपेक्षा का शिकार।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/97-lakhs-of-shine-faded--players--lives-trapped-in-the-clutches-of-poisonous-snakes-and-diseases/article-87549"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/4111u1rer-(3)16.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती का एकमात्र फुटबॉल छात्रावास उपेक्षा का शिकार हो रहा है। नयापुरा वोकेशनल स्कूल में फुटबॉल खिलाड़ियों के लिए बना हॉस्टल का मेंटिनेंस कार्य 2 साल बाद भी पूरा नहीं हो सका। जिसकी वजह से प्रदेशभर से कोटा पहुंचे 20 चयनित खिलाड़ियों को जर्जर कमरों में शरण लेनी पड़ रही है। जिसकी छतें टपक रही हैं और दीवारों से उठती सीलन की बदबू से खिलाड़ियों का सांस लेना मुश्किल हो रहा है। वहीं, इन कमरों के पीछे झाड़-झंकाड़ उगे हुए हैं। जिनमें जहरील जीव-जंतुओं के छिपे रहने से जान का खतरा बना रहता है। केडीए की लापरवाही से खिलाड़ियों को हर दिन मुसीबतों से दो-चार होना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>यह है मामला</strong><br />फुटबॉल छात्रावास के मेंटिनेंस के लिए केडीए (पूर्व यूआईटी)द्वारा 97 लाख रुपए बजट स्वीकृत किया था। जिससे हॉस्टल के कुल 11 कमरों में दीवार व छतों का प्लास्टर व दो सुविधाघरों का पुन:निर्माण करवाना था। जिसका निर्माण कार्य फरवरी 2023 को शुरू हुआ और इसी वर्ष नवम्बर में पूरा करना था। लेकिन, ठेकेदार ने 20 माह बाद भी काम पूरा नहीं किया। हालांकि, अधिकतर कार्य पूरे हो चुके हैं लेकिन कमरों  में पहले से लगी लाइट फिटिंग व पंखे मरम्मत कार्य के दौरान क्षतिग्रस्त कर दिए। जिसे लगाने से ठेकेदार ने इंकार कर दिया। जिसकी वजह से सभी कमरों में अंधेरा पसरा है। वहीं, अभी तक केडीए ने हॉस्टल शिक्षा विभाग को हैंडआॅवर तक नहीं किया। जिसकी वजह से प्रदेशभर से कोटा आए फुटबॉल खिलाड़ियों को जर्जर भवनों में रहना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>हॉस्टल पर लटके पड़े ताले </strong><br />फुटबॉल कोच प्रवीण विजय ने बताया कि ठेकेदार ने निर्धारित टाइम लाइन तक कार्य पूरा नहीं किया है। ठेकेदार सभी कमरों पर ताले लगाकर लंबे समय से गायब है। जबकि, केडीए के ठेकेदार को मेंटिनेंस कार्य नवम्बर 2023 तक पूरा करना था। अभी तक न काम पूरा किया और न ही हैंडओवर किया।  यहां हॉस्टल के लिए 20 छात्रों का हर साल चयन होता है। ये खिलाड़ी सालभर यहां रहकर सुबह-शाम अभ्यास करते हैं और स्कूलों में जाकर पढ़ाई करते हैं। जुलाई माह में खिलाड़ियों का ट्रायल पूरा हो चुका है। चयनित सभी खिलाड़ी एक अगस्त को हॉस्टल में आ गए लेकिन नए कमरों पर ताले लटके हुए हैं और चाबी ठेकेदार लेकर गायब है। ऐसे में खिलाड़ियों को ठहराने में बड़ी मुशिकल हुई।  </p>
<p><strong>कमरों में सीलन पीछे जंगल</strong><br />कोचि विजय का कहना है कि हॉस्टल के नए कमरें हैंडओवर नहीं किए जाने से खिलाड़ियों को मजबूरी में परिसर में बने पुराने जर्जर दो कमरों में ठहराना पड़ा। यह कमरे पूरी तरह से जर्जर हो रहे हैं। जगह-जगह से प्लास्टर उखड़े पड़े हैं। दीवारों  में सीलन व गड्ढ़े हो रहे हैं। सीलन की दुगंध से बच्चे परेशान हैं। कमरों के पीछे जंगल हो रहा है। जिनमें जहरीले जीव-जंतुओं की उपस्थिति होने से हादसे का खतरा बना रहता है।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं नेशनल खिलाड़ी </strong><br />वोकेशनल स्कूल फुटबॉल हॉस्टल की स्थिति चिंताजनक है। इस हॉस्टल से कोटा सहित प्रदेशभर के कई राष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी निकले हैं। इस तरह की व्यवस्था में खिलाड़ी कैसे रहेगा, यह सोचने का विषय है। जब तक खिलाड़ी को प्रॉपर रेस्ट, डाइट व अच्छा खेलने का ग्राउंड नहीं मिलेगा तब तक हम खिलाड़ी से अच्छी परफॉर्मेंस की आशा नहीं कर सकते। जिला प्रशासन से आग्रह है कि खिलाड़ियों के भविष्य के मध्यनजर असुविधाओं को दुरुस्त किया जाए।<br /><strong>- डॉ. तीरथ सांगा, सचिव जिला फुटबाल संघ कोटा  </strong></p>
<p>फुटबॉल हॉस्टल के हालात देखकर दुख होता है मैं भी फुटबॉल हॉस्टल टीम का हिस्सा रहा हूं इसी हॉस्टल के कारण स्कूल नेशनल तक खेला हूं. आवश्यक सुविधाएं तुरंत उपलब्ध होनी चाहिए।<br /><strong>- आफताब अहमद, पूर्व राष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी</strong></p>
<p>वोकेशनल फुटबॉल हॉस्टल हमेशा प्रशासन के उदासीनता का शिकार रहा है मैंने ही मैं भी इसी फुटबॉल हॉस्टल से स्कूल नेशनल खेला है इसी  खेल की बदौलत राजस्थान की तरफ से दो बार सीनियर नेशनल खेला है. खिलाड़ियों को अच्छी सुविधा मिलनी चाहिए।<br /><strong>- धर्मप्रकाश शर्मा, पूर्व राष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी </strong></p>
<p><strong>यह बोले जिम्मेदार</strong><br />अभी मैं छुट्टी पर हूं, कल सुबह स्कूल आकर इस संबंध में बात की जा सकती है।   <br /><strong>- सपना चतुर्वेदी, प्राचार्य राजकीय वोकेशनल स्कूल </strong></p>
<p>खिलाड़ियों को इस तरह से जर्जर सीलनभरे कमरों में ठहराया जाना उचित नहीं है। प्रदेशभर से कोटा आए बच्चे हमारे खिलाड़ी हैं। यह सुरक्षित रहें, खेल प्रतिभाएं निखरें इसलिए बेहतर जगह उपलब्ध करवाना बेहद जरूरी है। इसके लिए संस्था प्रधान व जिला शिक्षाधिकारी माध्यमिक से बात कर उचित व्यवस्था करवाते हैं।  <br /><strong>- तेज कंवर, संयुक्त निदेशक, शिक्षा विभाग कोटा संभाग</strong></p>
<p>बच्चों को किसी भी तरह की परेशानी न हो इसके लिए हॉस्टल में जो नए कमरें तैयार हुए हैं उनमें वैकल्पिक रूप से लाइट व पंखे लगवाकर बच्चों को तुरंत शिफ्ट करवाने के निर्देश दे दिए हैं। वहीं, भारी बरसात के कारण नए कमरों में सीलन आने का जो इश्यू आया है, उसकी हमारे सहायक अभियंता से जांच करवा लेंगे। यदि, कोई तकनीकी कमी होगी तो उससे केडीए को अवगत करवाकर दुरुस्त करवा लिया जाएगा। <br /><strong>- केके शर्मा, जिला शिक्षाधिकारी माध्यमिक</strong></p>
<p>आपके द्वारा मामला संज्ञान में आया है। यदि, ऐसा हो रहा है तो गलत है। बच्चों को सुरक्षित व व्यवस्थित माहौल उपलब्ध करवाना शिक्षा विभाग का दायित्व है। मामले की जानकारी करवा रहे हैं, इसमें चाहे केडीए हो या शिक्षा विभाग, जिसकी भी लापरवाही होगी उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। <br /><strong>- सतीश गुप्ता, विशेषाधिकारी शिक्षा मंत्री </strong></p>
<p><strong>एक्सपर्ट व्यू - सीलन से अस्थमा अटैक तक का खतरा </strong><br />सीलन में फंगस के बारीक कण होते हैं। जो श्वास के साथ शरीर में जाकर सांस की नली में सूजन पैदा कर देता है। जिससे नली सिकुड़ जाती है। इससे अस्थमा अटैक का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन, यह समस्या एलर्जिक लोगों को होती है। सीलन से सांस फूलना, दम घुटना, खांसी चलना आदि समस्याएं हो जाती है। जब इसकी तीव्रता बढ़ जाती है तो एबीपीए नामक बीमारी का खतरा और बढ़ जाता है। इससे फेफड़े भी डेमेज हो सकते हैं। हालांकि, यह बीमारी अस्थमा के गंभीर रोगियों को होती है।  <br /><strong>- डॉ. विनोद जांगिड, श्वांस रोग विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज</strong></p>
<p>आपके द्वारा ही मामले की जानकारी लगी है। ठेकेदार को जल्द काम पूरा करने को पाबंद किया जाएगा। वहीं, हमारे इंजीनियर को भेज कार्य की गुणवत्ता को परखेंगे। यदि, कार्य में लापरवाही मिली तो ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।  शिक्षा विभाग या स्कूल से कोई भी आकर समस्याएं बताएं, तुरंत समाधान करवाएंगे। <br /><strong>- कुशल कोठारी, सचिव केडीए</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Aug 2024 16:05:55 +0530</pubDate>
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