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                <title>अखिलेश यादव का केंद्र पर कटाक्ष: चुनाव खत्म होते ही सरकार को याद आया ‘संकट’; ऐसी अपीलों से बाजार में भय, घबराहट और मंदी की आशंका </title>
                                    <description><![CDATA[सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार की 'बचत अपीलों' को आर्थिक विफलता बताया है। उन्होंने तंज कसा कि चुनाव खत्म होते ही सरकार को संकट याद आ गया। अखिलेश ने डॉलर के मुकाबले कमजोर रुपये और महंगाई पर घेराव करते हुए सत्तारूढ़ दल को ही देश के लिए सबसे बड़ा संकट करार दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/akhilesh-yadavs-sarcasm-on-the-center-as-soon-as-the/article-153419"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/akhilesh-yadav.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए सोमवार को कहा कि चुनाव खत्म होते ही सरकार को “संकट” याद आ गया। उन्होंने कहा कि देश के लिए सबसे बड़ा संकट सत्तारूढ़ पार्टी ही है और केंद्र सरकार की हालिया अपीलें उसकी आर्थिक व नीतिगत विफलताओं को उजागर करती हैं। सपा प्रमुख ने कहा कि यदि इतनी पाबंदियां लगानी पड़ रही हैं तो पांच ट्रिलियन डॉलर की जुमलाई अर्थव्यवस्था कैसे बनेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ सरकार के हाथ से आर्थिक व्यवस्था की लगाम छूट चुकी है। डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है और रुपया कमजोर होता जा रहा है।</p>
<p>अखिलेश यादव ने सोने की खरीद को लेकर सरकार की अपील पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि जनता तो वैसे भी डेढ़ लाख तोले का सोना खरीदने की स्थिति में नहीं है, बल्कि सत्तापक्ष के लोग ही अपनी काली कमाई का स्वर्णीकरण करने में लगे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इसकी जानकारी “लखनऊ से लेकर गोरखपुर” और “अहमदाबाद से लेकर गुवाहाटी” तक ली जा सकती है। उन्होंने सवाल उठाया कि सारी पाबंदियां चुनाव खत्म होने के बाद ही क्यों याद आईं। अखिलेश ने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान सत्तापक्ष के नेताओं ने हजारों चार्टर विमान यात्राएं कीं, महंगे होटलों में ठहरे और बड़े पैमाने पर संसाधनों का इस्तेमाल किया। ऐसे में जनता पर ही प्रतिबंध और अपीलें थोपना उचित नहीं है।</p>
<p>सपा अध्यक्ष ने कहा कि सरकार की इस तरह की अपीलों से बाजार में भय, घबराहट और मंदी की आशंका पैदा होगी। सरकार का काम संकट से उबारना होता है, न कि अफरातफरी का माहौल बनाना। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ सरकार विदेश नीति और गृह नीति दोनों मोर्चों पर विफल रही है। अखिलेश यादव ने कहा कि सत्तापक्ष ने चुनावी राजनीति को प्रदूषित कर दिया है और समाज में नफरत फैलाकर सौहार्द को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने दावा किया कि सांस्कृतिक, सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक और आर्थिक हर क्षेत्र में सत्ता पक्ष की नीतियों से देश को नुकसान हुआ है। सपा प्रमुख ने कहा कि जनता अब सत्तापक्ष की नीतियों से परेशान हो चुकी है और वोट मिलते ही सत्तापक्ष का खोट सामने आ गया है। उन्होंने कहा कि देश की जनता अब बदलाव चाहती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 17:00:18 +0530</pubDate>
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                <title>अभिषेक बनर्जी का राज्य सरकार पर हमला: ममता के नेतृत्व में बिना डरे अपनी लड़ाई जारी रखेगी टीएमसी, चुनाव आयोग पर लगाया पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी ने बंगाल चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने मतदाता सूची से 30 लाख नाम हटाने और ईवीएम में गड़बड़ी का दावा करते हुए संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। बनर्जी ने कार्यकर्ताओं को सुरक्षा का भरोसा देते हुए दिल्ली से बंगाल तक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाने का संकल्प लिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/abhishek-banerjees-attack-on-the-state-government-tmc-will-continue/article-153250"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/abhishek-banerjeee.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने शनिवार को कहा कि पार्टी सुश्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में ''बिना डरे और बिना किसी समझौते के'' अपनी लड़ाई जारी रखेगी। अभिषेक ने अपने व्हाॅटसऐप चैनल पर एक पोस्ट में पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रक्रिया की तीखी आलोचना करते हुए बड़े पैमाने पर मतदाताओं को वोट देने से रोकने, संवैधानिक अधिकारियों के पक्षपातपूर्ण व्यवहार तथा पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ चुनाव के बाद हिंसा का आरोप लगाया। उन्होंने कहा लगभग ''30 लाख असली मतदाताओं'' को कथित तौर पर मतदाता सूची से हटा दिया गया था, जिसे उन्होंने ''बहुत मुश्किल चुनाव'' बताया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत चुनाव आयोग के साथ-साथ कई सरकारी एजेंसियों ने पूरे चुनाव के दौरान ''बहुत ज़्यादा पक्षपातपूर्ण व्यवहार'' दिखाया।</p>
<p>उन्होंने कहा, "लोकतांत्रिक संस्थाएं जो निष्पक्ष रूप से काम करने के लिए हैं, वे समझौता करती हुई दिखीं, जिससे पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता, विश्वसनीयता और पारदर्शिता के बारे में गंभीर चिंताएं पैदा हुईं।" उन्होंने मतगणना प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए ईवीएम को संभालने और उनकी मूवमेंट और जिसे उन्होंने "कंट्रोल यूनिट्स का मिसमैच" कहा, उससे जुड़े आरोपों का ज़िक्र किया। उन्होंने मतगणना केन्द्रों से सीसीटीवी फुटेज तुरंत जारी करने तथा लोगों के सामने सच्चाई लाने के लिए वीवीपेट पर्चियों की पारदर्शी गिनती की मांग की।</p>
<p>उन्होंने कहा, "कई परेशान करने वाली घटनाओं ने लाखों लोगों को यह सवाल करने पर मजबूर कर दिया है कि क्या लोगों के असली जनादेश का सम्मान किया गया है। लोकतंत्र तभी बच सकता है जब चुनावी संस्थाएं नागरिकों के बीच भरोसा और विश्वास पैदा करें।" उन्होंने चुनाव के बाद हिंसा और टीएमसी के कार्यालयों और कार्यकर्ताओं पर कथित हमलों की खबरों पर भी चिंता जताई। इन घटनाओं को "बहुत चिंताजनक और एक लोकतांत्रिक समाज में मंज़ूर नहीं" बताते हुए उन्होंने दावा किया कि कई पार्टी कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर धमकाया गया और उन्हें अपने घर छोड़ने पर मजबूर किया गया।</p>
<p>उन्होंने कहा, "लोकतंत्र में किसी भी राजनीतिक कार्यकर्ता को कभी भी अपनी सुरक्षा और अपनी राजनीतिक सोच के बीच चुनना नहीं चाहिए।" उन्होंने चुनावी हार के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की कोशिश करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल के लोगों के साथ मज़बूती से खड़ी रहेगी और "दिल्ली और पश्चिम बंगाल दोनों में एक मज़बूत, मुखर और बिना किसी समझौते वाला विपक्ष" बनी रहेगी।</p>
<p>उन्होंने दोहराया कि "लाेकतंत्र , संवैधानिक मूल्यों और लोगों के अधिकारों और सम्मान" के लिए पार्टी की लड़ाई लगातार जारी रहेगी। उन्होंने पार्टी समर्थकों और कार्यकर्ताओं से भी अपील की कि वे धमकी या हिंसा का सामना करते हुए सीधे उनसे संपर्क करें और किसी भी धमकी या हमले की जानकारी साझा करें। उन्होंने कहा, "मैं उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनी क्षमता के अनुसार सब कुछ करूँगा और हर उपलब्ध कानूनी और लोकतांत्रिक उपाय अपनाऊँगा।" उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि वह आगे की राजनीतिक लड़ाई में उनके साथ "कंधे से कंधा मिलाकर" खड़े रहेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 15:41:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>2027 विधानसभा चुनाव से पहले यूपी में बड़े बदलाव की तैयारी: योगी सरकार कैबिनेट विस्तार और संगठन में जल्द होगा फेरबदल, इन दिग्गजों के नामों को लेकर चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[बंगाल के बाद अब भाजपा का पूरा फोकस उत्तर प्रदेश पर है। योगी सरकार में 10 से 15 मई के बीच कैबिनेट विस्तार और बड़े संगठनात्मक बदलाव संभावित हैं। जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने के लिए पिछड़ा वर्ग, दलित और महिलाओं को विशेष प्रतिनिधित्व देकर 2027 की चुनावी बिसात बिछाई जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/yogi-government-is-preparing-for-big-changes-in-up-before/article-153231"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/yogi-cabinet.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। पश्चिम बंगाल में नई सरकार के शपथ ग्रहण के बाद अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का केंद्रीय नेतृत्व उत्तर प्रदेश पर फोकस करने जा रहा है। ऐसे में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले यूपी भाजपा में बड़े राजनीतिक और संगठनात्मक बदलावों की तैयारी तेज हो गई है। दरअसल पार्टी और सरकार स्तर पर होने वाले ये बदलाव भाजपा के लिए सामाजिक, क्षेत्रीय समीकरणों को साधने का अहम अवसर माने जा रहे हैं। भाजपा सूत्रों के मुताबिक, संगठन में फेरबदल, योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट विस्तार तथा विभिन्न आयोगों, निगमों और बोर्डों में खाली पदों पर नियुक्तियां जल्द हो सकती हैं।</p>
<p>पार्टी का मानना है कि 2027 के चुनाव से पहले यह आखिरी बड़ा मौका होगा, जब विभिन्न जातीय और क्षेत्रीय समूहों को संतुलित तरीके से प्रतिनिधित्व दिया जा सके। भाजपा के एक वरिष्ठ सांसद के अनुसार, “पश्चिम बंगाल में सरकार गठन की प्रक्रिया पूरी होते ही केंद्रीय नेतृत्व उत्तर प्रदेश की ओर ध्यान देगा। संगठनात्मक बदलाव, कैबिनेट विस्तार और विभिन्न निगमों-बोर्डों में नियुक्तियों को लेकर व्यापक स्तर पर तैयारी पहले ही हो चुकी है।”</p>
<p>सूत्रों का कहना है कि योगी सरकार में बहुप्रतीक्षित कैबिनेट फेरबदल 10 से 15 मई के बीच कभी भी हो सकता है। करीब आधा दर्जन नेताओं के नाम संभावित मंत्रिमंडल विस्तार या विभागीय बदलाव को लेकर चर्चा में हैं। हालांकि अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा। भाजपा सांसद ने बताया कि भाजपा इस फेरबदल को केवल प्रशासनिक बदलाव तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसके जरिए स्पष्ट राजनीतिक संदेश देने की भी तैयारी है। लोकसभा चुनाव के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों और भाजपा के सामाजिक गठबंधन में आई चुनौतियों को देखते हुए पार्टी विभिन्न जातीय समूहों, क्षेत्रों और समुदायों के प्रतिनिधित्व का नए सिरे से आकलन कर रही है।</p>
<p>सांसद ने कहा, “ पार्टी विशेष रूप से उन वर्गों में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति बना रही है, जहां उसे समर्थन में कमी महसूस हुई है या जहां विपक्ष अपनी सामाजिक पैठ बढ़ाने में जुटा है। इसी को ध्यान में रखते हुए एक-दो महिलाओं को मंत्रिमंडल में जगह दिए जाने की चर्चा है। साथ ही ब्राह्मण, जाट, गुर्जर, कुर्मी, पासी, पाल और वाल्मीकि समुदायों को साधने पर विशेष फोकस किया जा रहा है।”<br />सूत्रों की मानें तो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का मंत्रिमंडल में शामिल होना लगभग तय माना जा रहा है। इसके अलावा मनोज पांडेय, अशोक कटारिया, कृष्णा पासवान और पूजा पाल के नाम भी चर्चा में हैं।</p>
<p>सरकार के अलावा संगठनात्मक स्तर पर भी बड़े बदलाव संभावित हैं। पार्टी संगठन में कई पद लंबे समय से लंबित हैं, जबकि अनेक आयोगों, बोर्डों और निगमों में नियुक्तियां अभी बाकी हैं। माना जा रहा है कि इन नियुक्तियों के जरिए भाजपा विभिन्न सामाजिक और क्षेत्रीय समूहों के नेताओं को समायोजित करने के साथ-साथ आंतरिक संतुलन साधने की कोशिश करेगी। भाजपा सांसद का मानना है कि भाजपा का पूरा फोकस पिछड़ा वर्ग, दलित और गैर-प्रभावशाली जातियों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने पर रहेगा। साथ ही उन क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश होगी, जहां पार्टी को पर्याप्त राजनीतिक भागीदारी नहीं मिल सकी है।</p>
<p>सूत्रों की मानें तो महिला प्रतिनिधित्व को भी भाजपा विशेष महत्व दे सकती है। केंद्र और राज्य सरकार की महिला केंद्रित योजनाओं और लाभार्थी राजनीति को देखते हुए पार्टी महिला वोटरों के बीच अपना संदेश और मजबूत करना चाहती है। भाजपा सूत्रों का मानना है कि हिंदुत्व के मुद्दे पर पार्टी को कोई बड़ी चुनौती नहीं है, लेकिन 2027 के चुनाव से पहले जातीय, क्षेत्रीय और लैंगिक संतुलन साधना बेहद जरूरी होगा। उन्होंने कहा कि कैबिनेट विस्तार, संगठनात्मक बदलाव और निगमों-बोर्डों में नियुक्तियों को भाजपा राजनीतिक संदेश और सामाजिक संतुलन के बड़े अभियान के रूप में इस्तेमाल कर सकती है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अवनीश त्यागी ने कहा कि जहां तक पार्टी में बदलाव और मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा का सवाल है तो पार्टी नेतृत्व को जो उचित लगेगा वो कदम उठाएगी । भाजपा का कार्यकर्ता 2027 चुनाव को लेकर पूरी तरह से तैयार है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 13:27:45 +0530</pubDate>
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                <title>तमिलनाडु सरकार गठन पर सियासी घमासान: मणिकम टैगोर का पलटवार ; बोले-कांग्रेस ने टीवीके को दिया था समर्थन, विपक्ष कर रहा गठबंधन तोड़ने और एकता कमज़ोर करने की कोशिश</title>
                                    <description><![CDATA[तमिलनाडु की राजनीति में कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने द्रमुक (DMK) के आरोपों को खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने जनमत का सम्मान करते हुए विजय की पार्टी (TVK) को समर्थन दिया है। टैगोर ने इसे केंद्र विरोधी ताकतों की एकजुटता और स्थिर सरकार के लिए जरूरी कदम बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/political-tussle-over-tamil-nadu-government-formation-manickam-tagore-countered/article-153155"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/congress1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच कांग्रेस पर लगाये जा रहे आरोपों का सांसद मणिकम टैगोर ने पलटवार करते हुए कहा कि द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) और कुछ मीडिया समूह कांग्रेस पर गठबंधन तोड़ने और विपक्षी एकता कमजोर करने का गलत आरोप लगा रहे हैं। टैगोर ने कहा कि अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन वह बहुमत के जादुई आंकड़े 118 से दूर है और कांग्रेस ने उसे समर्थन देने की घोषणा की है। उन्होंने कांग्रेस के इस फैसले का बचाव किया और कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से बातचीत की थी और सार्वजनिक रूप से उनका समर्थन भी किया था।</p>
<p>उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने टीवीके का समर्थन जनता के जनादेश का सम्मान करने और स्थिर सरकार देने के लिए किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर "मीडिया" कांग्रेस को दोष दे रहा है, वहीं दूसरी ओर द्रमुक समर्थक मीडिया भी कांग्रेस पर निशाना साध रहा है। टैगोर कहा कि द्रमुक खुद अन्नाद्रमुक के साथ बातचीत कर रही है और यह सब केंद्र की शह पर हो रहा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या कांग्रेस राजग को सत्ता में आने में मदद करती?" उन्होंने यह भी कहा कि विजय की टीवीके शुरू से केंद्र सरकार विरोधी रही है और कांग्रेस ने उसी राजनीतिक सोच के साथ उसका समर्थन किया है। कांग्रेस को अपने फैसले पर कोई पछतावा नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 18:35:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विधानसभा चुनाव 2026: आचार संहिता के दौरान चुनाव आयोग की रिकॉर्ड कार्रवाई, 1440 करोड़ की नकदी, नशीले द्रव्य, उपहार जब्त  </title>
                                    <description><![CDATA[चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनावों के दौरान ₹1444 करोड़ से अधिक की अवैध नकदी, शराब और ड्रग्स जब्त कर नया रिकॉर्ड बनाया। यह 2021 की तुलना में 40% अधिक है। डिजिटल ईएसएमएस (ESMS) प्रणाली और कड़ी निगरानी के कारण तमिलनाडु और बंगाल में सबसे बड़ी कार्रवाई हुई, जिससे चुनाव प्रलोभन मुक्त और निष्पक्ष रहे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/record-action-of-election-commission-during-assembly-elections-2026-code/article-153070"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/ec.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने गुरुवार को बताया कि हाल के विधानसभा चुनावों और उपचुनावों को धारा 144 और प्रलोभन से मुक्त रखने की उसकी सतर्कता और कार्रवाई में कुल 1444 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी, शराब, नशीले द्रव्य, कीमती सामान और उपहार की स्तुएं जब्त की गयी। आयोग के अनुसार इस बार जब्त धन और अन्य संदिग्ध सामान इन राज्यों में 2021 चुनावों के दौरान की गयी जब्ती की तुलना में 40.14 प्रतिशत अधिक है। पिछले चुनावों में 1029.93 करोड़ रुपये की जब्ती की गयी थी। पश्चिम बंगाल में ज़ब्ती में सबसे ज़्यादा 68.92 प्रतिशतकी बढ़ोतरी देखी गई और तमिलनाडु में 2021 के विधानसभा चुनावों के दौरान की तुलना में जब्त नकद और सामान 48.40 प्रतिशत अधिक है।</p>
<p>आयोग की गुरुवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार तमिलनाडु में इस बार कुल 662.28 करोड़ रुपये की जब्ती की गयी है इनमें 105.22 करोड़ नकद, 4.94 करोड़ रुपये की 137248.53 लीटर शराब, 78.61 करोड़ रुपये नशीले द्रव्य, 165.86 करोड़ रुपये की कीमती धातुएं और 307.65 रुपये के उपहार के सामान हैैं। पश्चिम बंगाल में कुल जब्ती 573.41 करोड़ रुपये की है जिसमें 31.14 करोड़ रुपये की नकदी , 151.86 करोड़ रुपये मूल्य की 5858648.98 लीटर शराब, 130.28 करोड़ रुपये के नशीले द्रव्य, 69.36 करोड़ रुपये की महंगी घातुएं और 190.77 करोड़ रुपये मूल्य के उपहार के सामान हैं।</p>
<p>असम में कुल जब्ती 117.24 करोड़ रुपये की है। इसमें 6.07 करोड़ रुपये की नकदी, 22.71 करोड़ रुपये की 8.28 लाख लीटर शराब, 70.08 करोड़ रुपये के नशीले द्रव्य, 3.68 करोड़ रुपये की महंगी धातुएं और 14.7 करोड़ रुपये के उपहार के सामान हैं। केरल में कुल जब्ती 80.67 करोड़ रुपये की रही जिसमें 12.12 करोड़ रुपये नकद, 2.51 करोड़ रुपये मूल्य की 78.22 हजार लीटर शराब, 58.47 करोड़ रुपये के नशीले दव्य, 2.25 करोड़ रुपये की महंगी धातुएं और 5.33 करोड़ रुपये के उपहार के सामान शामिल हैं।</p>
<p>पुड्डुचेरी में कुल 9.72 कोड़ रुपये की जब्ती में 33 लाख रुपये नकद, 39 लाख रुपये की शराब, करीब नौ करोड़ रुपये की महंगी धातुएं और दो लाख रुपये के उपहार के सामान शामिल हैं। आयोग ने असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के आम चुनावों और 5 राज्यों के 7 रिक्त विधानसभा क्षेत्रों में 15 मार्च को चुनाव कराने की घोषणा करते हुए आदर्श आचार संहिता लागू कर दी थीं। आदर्श चुनाव संहिता परिणामों की घोषणा के बाद आज से हटा ली गयी है।</p>
<p>आयोग ने चुनाव को शांतिपूर्वक और निष्पक्ष तरीके से कराने के ठोस प्रबंध किये थे। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों और उनके सीमावर्ती प्रदेशों के मुख्य सचिवों और अन्य अधिकारियों के साथ-साथ प्रवर्तन एजेंसियों के प्रमुखों के साथ कई समीक्षा बैठकें कीं गयी थी।आयाेग ने 376 व्यय पर्यवेक्षकों, 7,470 फ्लाइंग स्क्वाड टीमों ) और 7,470 स्टैटिक सर्विलांस टीमों को भी तैनात किया गया था। आयोग ने कहा है कि ये ज़ब्तियां डिजिटल प्लेटफॉर्म - चुनाव जब्ती प्रबंधन प्रणाली (ईएसएमएस) - की मदद से संभव हो पाईं है जिनके माध्यम से सूचनाओं का आदान प्रदान आसान हुआ है। गत 26 फरवरी को इस प्रणाली के चालू किये जाने के बाद से 06 मई तक ज़ब्त की गई कुल सामानों का मूल्य 1444 करोड़ रुपये से अधिक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 18:09:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>तमिलनाडु में सत्ता बनने पर संशय: टीवीके बहुमत के लिए प्रयासरत, कांग्रेस के समर्थन से टीवीके को मिला बूस्टर</title>
                                    <description><![CDATA[अभिनेता विजय की पार्टी TVK ने तमिलनाडु की राजनीति में धमाकेदार दस्तक दी है। बहुमत से कुछ कदम दूर विजय का 'पावर शेयरिंग' फॉर्मूला मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ, जिससे कांग्रेस ने 10 साल पुराना द्रमुक का साथ छोड़ TVK से हाथ मिला लिया। 60 साल बाद राज्य में पहली बार गठबंधन सरकार बनने जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/doubt-over-coming-to-power-in-tamil-nadu-for-the/article-152993"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/tvk-3.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। नवगठित पार्टी 'तमिलगा वेत्री कषगम' (टीवीके) के संस्थापक विजय ने जब तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले यह दांव चला था कि उनकी पार्टी गठबंधन और सत्ता में हिस्सेदारी के लिए तैयार है, तो किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और उन्हें अनुभवहीन राजनीतिज्ञ मानकर खारिज कर दिया था। लेकिन चुनावी नतीजों ने सभी एग्जिट पोल के अनुमानों को गलत साबित कर दिया और उन्होंने राजनीतिक पटल पर धमाकेदार दस्तक दी। अभिनेता विजय की पार्टी ने हालांकि अपने दम पर सरकार बनाने के लिए साधारण बहुमत हासिल करने में विफल रही, जिससे तमिलनाडु के इतिहास में पहली बार गठबंधन सरकार बनने की उम्मीदें जग गयी हैं।</p>
<p>इस पृष्ठभूमि में, अभिनेता ने आवश्यक संख्या बल जुटाने के लिए कांग्रेस, विदुथलाई चिरुथैगल काची (वीसीके) और वामपंथी दलों से संपर्क साधा। इस परिदृश्य में, सत्ता के बंटवारे का उनका चुनाव-पूर्व दांव 'मास्टरस्ट्रोक' साबित हुआ। चुनावी नतीजों की घोषणा के मात्र दो दिन बाद ही कांग्रेस ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के साथ अपना 10 साल पुराना गठबंधन अचानक खत्म कर दिया और टीवीके के साथ हाथ मिला लिया। कांग्रेस ने अपने पांच नवनिर्वाचित विधायकों का समर्थन पत्र सौंप दिया है, ताकि सांप्रदायिक ताकतों को दूर रखने के लिए एक धर्मनिरपेक्ष सरकार बनायी जा सके। साथ ही, कांग्रेस ने भविष्य के चुनावों, 2029 के लोकसभा चुनाव और स्थानीय निकाय चुनावों, तक इस रिश्ते को जारी रखने की प्रतिबद्धता जतायी है।</p>
<p>कांग्रेस के पांच विधायकों के समर्थन ने न केवल टीवीके के लिए 'बूस्टर' का काम किया है, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति के इतिहास में पहली बार चुनाव के बाद पुनर्गठन को भी जन्म दिया है। यह अवधारणा 2006 में भी नहीं देखी गयी थी, जब द्रमुक बहुमत पाने में विफल रही थी, लेकिन कांग्रेस और अन्य सहयोगियों के बाहरी समर्थन से पांच साल का कार्यकाल पूरा किया था। उस समय कांग्रेस द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा थी, इसलिए चुनाव बाद गठबंधन का सवाल ही नहीं उठा था।</p>
<p>दो दशक बाद लेकिन अब परिदृश्य अलग है और राष्ट्रीय पार्टी ने पहल करते हुए विजय के साथ गठबंधन किया है, जिससे हार से जूझ रही द्रमुक खेमे में भारी नाराजगी है। इसी राह पर चलते हुए थोल थिरुमावलवन की वीसीके और दो वामपंथी दलों भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के भी ऐसा ही निर्णय लेने की उम्मीद है, जिससे द्रमुक मोर्चे में और अधिक बिखराव हो सकता है। हालांकि, अंतिम फैसला शुक्रवार तक पता चलने की उम्मीद है।</p>
<p>कांग्रेस, जो 2016 के विधानसभा चुनाव से द्रमुक के साथ गठबंधन में थी, उसने इस चुनाव के लिए टीवीके के साथ गठबंधन करने में रुचि दिखायी थी, विशेष रूप से विजय के सत्ता में हिस्सेदारी के खुले प्रस्ताव के संदर्भ में। चीजें तब उम्मीद के मुताबिक नहीं रहीं और राष्ट्रीय पार्टी अधिक सीटों और दो राज्यसभा सीटों की मांग पूरी न होने पर भी अनिच्छा से द्रमुक के साथ ही टिकी रही थी। कड़ी सौदेबाजी के बाद कांग्रेस ने 2021 में लड़ी गई 25 सीटों के मुकाबले 39 की मांग की थी, लेकिन अंत में द्रमुक के 28 सीटों और एक राज्यसभा सीट के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था। द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन ने गठबंधन के अन्य दलों को भी कम सीटों पर राजी करने के लिए काफी दबाव झेला था। स्टालिन ने इस कठिन दौर को कुशलता से संभाला और सहयोगियों को यह कहकर मनाया कि गठबंधन में नये दलों को जगह देनी है।</p>
<p>द्रमुक गठबंधन के इन दलों ने शुरुआत में विजय के सत्ता साझा करने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था और द्रविड़ प्रमुख के साथ चुनाव लड़ा। यह गठबंधन 2017 से लगातार चुनाव जीत रहा था, लेकिन इस बार टीवीके की लहर में उसे अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा।<br />विजय के पक्ष में लहर ऐसी थी कि तमिलनाडु में पहली बार त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति बनी। टीवीके न केवल सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, बल्कि उसने दोनों प्रमुख दलों के वोट बैंक में बड़ी सेंध लगायी। यहां तक कि श्री स्टालिन खुद अपने गढ़ कोलाथुर सीट से हार गये, जहां से वे पिछले तीन बार से लगातार जीत रहे थे।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत है और टीवीके इस आंकड़े से 11 सीटें दूर रह गई। ऐसे में विजय ने कांग्रेस, वीसीके और वामपंथी दलों तक पहुंच बनाई। कांग्रेस ने 'अवसर का लाभ उठाते हुए' तुरंत टीवीके को समर्थन दे दिया, जिससे 1967 के बाद पहली बार उसे राज्य मंत्रिमंडल में जगह मिलना तय हो गया है। वीसीके और वामपंथी दलों के पास कुल छह विधायक हैं, और उनके भी पाला बदलने की प्रबल संभावना है।</p>
<p>तकनीकी रूप से टीवीके के पास 107 विधायक हैं, क्योंकि विजय ने दो सीटों पर जीत हासिल की है। ऐसे में उन्हें 11 और विधायकों की जरूरत है। कांग्रेस के पांच विधायकों के बाद अब सबकी नजरें वीसीके और वामपंथी दलों पर टिकी हैं। इसी बीच, टीवीके द्वारा अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) से संपर्क की खबरें भी आईं, जिसके पास 47 विधायक हैं। अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेता के पी मुनुसामी ने हालांकि इन खबरों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि एडप्पादी के पलानीस्वामी की सहमति से वे यह कह रहे हैं कि पार्टी विजय को कोई समर्थन नहीं देगी। अब देखना यह होगा कि क्या यह पहला चुनाव बाद का पुनर्गठन और गठबंधन शासन तमिलनाडु की राजनीति में एक नया चलन बनेगा और भविष्य के चुनावों में भी कायम रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 15:55:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अभिनेता विजय ने की तमिलनाडु राज्यपाल से मुलाकात : सरकार बनाने का दावा, कल होगा शपथ ग्रहण</title>
                                    <description><![CDATA[तमिलनाडु की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव! TVK सुप्रीमो विजय गुरुवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। राज्यपाल से मिलकर उन्होंने सरकार बनाने का दावा पेश किया है। कांग्रेस के समर्थन से विजय ने द्रविड़ पार्टियों का दशक पुराना दबदबा खत्म कर दिया है। चेन्नई का नेहरू स्टेडियम इस भव्य शपथ ग्रहण समारोह के लिए तैयार है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/actor-vijay-meets-tamil-nadu-governor-claims-to-form-government/article-152939"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/cbi-vijay.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (टीवीके) विधायक दल का सर्वसम्मति से नेता चुने जाने के एक दिन बाद पार्टी सुप्रीमो और संस्थापक सी जोसेफ विजय ने बुधवार को तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात कर राज्य में सरकार बनाने का दावा पेश किया। सबसे बड़ी पार्टी होने के कारण राज्यपाल ने उनका दावा स्वीकार लिया है। श्री विजय कल यानी गुरुवार सुबह मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। शपथ ग्रहण समारोह के लिए शहर का जवाहरलाल नेहरू बहुउद्देशीय इंडोर स्टेडियम पूरी तरह तैयार है, जहां तैयारियां जोरों पर हैं।</p>
<p>राज्यपाल के केरल से चेन्नई पहुंचने के बाद श्री विजय टीवीके के नवनिर्वाचित विधायकों और कांग्रेस विधायकों का समर्थन पत्र लेकर राजभवन पहुंचे। कांग्रेस ने विजय का समर्थन करने का निर्णय लिया है। उसने दिन की शुरुआत में ही द्रमुक से नाता तोड़कर टीवीके के साथ गठबंधन कर लिया है। राज्यपाल ने विजय का स्वागत हाथ मिलाकर, शॉल और फूलों का गुलदस्ता भेंट कर किया। इसके साथ ही उन्हें एक स्मृति चिह्न भी प्रदान किया। इस दौरान उनके साथ वरिष्ठ नेता केए सेंगोट्टैयन, टीवीके सचिव बुस्सी एन आनंद, चुनाव अभियान प्रबंधन महासचिव आधव अर्जुना और अन्य नेता मौजूद थे।</p>
<p>राज्यपाल के साथ चली 30 मिनट तक की बैठक के दौरान श्री विजय ने शपथ ग्रहण समारोह पर चर्चा की और सदन में अपना बहुमत साबित करने के लिए समय भी मांगा। गौरतलब है कि 234 सदस्यीय विधानसभा में 118 के जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए श्री विजय को अभी भी छह विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है।</p>
<p>करिश्माई नेता श्री विजय ने अपनी युवा और महिला शक्ति के अभूतपूर्व प्रदर्शन के दम पर चुनावों में शानदार जीत हासिल की। उन्होंने चुनाव बाद के सभी अनुमानों को गलत साबित करते हुए अपनी पहली चुनावी पारी में 108 सीटें जीतीं और छह दशक पुराने द्रविड़ पार्टियों के वर्चस्व को खत्म कर दिया। चूंकि विजय ने खुद दो सीटों चेन्नई शहर की पेरम्बूर और त्रिची ईस्ट से जीत हासिल की है, इसलिए तकनीकी रूप से टीवीके के पास 107 विधायक हैं और कांग्रेस के पांच विधायकों के साथ वह कुल 112 की संख्या तक पहुंच चुकी है , लेकिन 118 के जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए उसे अभी छह और विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है।</p>
<p>बता दें कि द्रमुक के साथ कांग्रेस का गठबंधन इस विधानसभा चुनाव में भी था, लेकिन लगातार दूसरी बार सत्ता में आने का सपना देख रही द्रमुक के विजय के 'राजनीतिक तूफान' में उड़ जाने के बाद कांग्रेस ने पाला बदल लिया है। कांग्रेस ने द्रमुक के साथ कड़ी सौदेबाजी के बाद ली 28 में से महज पांच सीट जीत सकी है। विजय के कांग्रेस से औपचारिक रूप से समर्थन मांगे जाने के बाद कांग्रेस आलाकमान ने विस्तृत चर्चा के बाद मंजूरी दे दी। इसके बाद अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (एआईसीसी) के तमिलनाडु प्रभारी गिरीश चोडनकर और टीएनसीसी अध्यक्ष के. सेल्वापेरुन्थागाई के नेतृत्व में एक कांग्रेसी प्रतिनिधिमंडल ने श्री विजय से मुलाकात की। उन्होंने एक धर्मनिरपेक्ष सरकार के गठन और भाजपा जैसी सांप्रदायिक ताकतों को दूर रखने के लिए गठबंधन को अंतिम रूप दिया और समर्थन पत्र सौंपा। रिपोर्टों के अनुसार, विजय ने कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी को शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए औपचारिक निमंत्रण भेजा है। कांग्रेस पार्टी के सूत्रों का कहना है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के इस समारोह में शामिल होने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 18:34:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>केरल में नई सरकार के गठन को लेकर गतिविधियां तेज: गुरूवार को होगी कांग्रेस विधायक दल की अहम बैठक, मुख्यमंत्री के नाम पर होगा फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[केरल में UDF की प्रचंड जीत के बाद सरकार गठन की हलचल तेज है। कांग्रेस आलाकमान ने अजय माकन और मुकुल वासनिक को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। गुरुवार को विधायक दल की बैठक में शशि थरूर और केसी वेणुगोपाल जैसे दिग्गजों के बीच मुख्यमंत्री पद पर अंतिम फैसला होगा, जो राज्य की नई दिशा तय करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/activities-intensify-regarding-formation-of-new-government-in-kerala-important/article-152867"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/congress.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केरल में नई सरकार के गठन को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं और मुख्यमंत्री पद के चयन पर मंथन अंतिम चरण में पहुंच गया है। कांग्रेस आलाकमान ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए वरिष्ठ नेताओं अजय माकन और मुकुल वासनिक को पर्यवेक्षक के रूप में राज्य भेजा है। दोनों नेता बुधवार शाम केरल पहुंचेंगे। दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात के बाद वे रवाना होंगे। केरल कांग्रेस विधायक दल की बैठक गुरुवार सुबह आयोजित की जाएगी, जिसमें विधायक अपनी राय रखेंगे।</p>
<p>केंद्रीय नेतृत्व द्वारा नियुक्त दोनों पर्यवेक्षक विधायकों से बातचीत कर अपनी रिपोर्ट कांग्रेस आलाकमान को सौंपेंगे। इसी रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में कई दिग्गज नेताओं के नाम चर्चा में हैं। इनमें वीडी सतीशन, सनी जोसेफ, रमेश चेन्निथला, केसी वेणुगोपाल और शशि थरूर जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। गौरतलब है कि हालिया विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रचंड बहुमत हासिल किया है, जिसके बाद अब सरकार गठन की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 18:23:35 +0530</pubDate>
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                <title>रामचन्द्र राव का बड़ा हमला: टीएमसी और कांग्रेस पर संविधान-लोकतंत्र का अपमान करने का लगाया आरोप, ममता बनर्जी के समर्थन को लेकर राहुल पर साधा निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने ममता बनर्जी के इस्तीफा न देने को लोकतंत्र का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि प्रतिकूल जनादेश के बाद भी सत्ता में बने रहना असंवैधानिक है। राहुल गांधी पर तंज कसते हुए उन्होंने विपक्ष को 'सीट चोरी' का दोषी ठहराया और जनता से 10 मई को पीएम मोदी की जनसभा में जुड़ने की अपील की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/ramchandra-raos-big-attack-on-tmc-and-congress-accused-of/article-152843"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/n-ramchandra-rao.png" alt=""></a><br /><p>हैदराबाद। तेलंगाना में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने बुधवार को तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमों ममता बनर्जी और कांग्रेस पर संविधान-लोकतंत्र का अपमान करने का आरोप लगाया। राव ने यहां लालपेट में एक दीवार लेखन अभियान में भाग लेते हुए विपक्षी दलों पर यह तीखा हमला बोला। यह अभियान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 10 मई को परेड ग्राउंड में होने वाली जनसभा की तैयारियों के तहत चलाया गया। उन्होंने ममता बनर्जी की आलोचना करते हुए कहा कि चुनाव हारने के बावजूद पद पर बने रहना लोकतंत्र और संविधान का अपमान है। संविधान के अनुच्छेद 172 का हवाला देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का पांच साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद और प्रतिकूल जनादेश के बावजूद सत्ता में बने रहना संवैधानिक भावना के विरुद्ध है।</p>
<p>राव ने दावा किया कि सात मई के बाद सुश्री बनर्जी का मुख्यमंत्री बने रहना असंवैधानिक होगा और उन्होंने कहा कि संवैधानिक मानदंड और जनता का जनमत बहुमत वाली पार्टी द्वारा नई सरकार के गठन के पक्ष में है। भाजपा नेता ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए टिप्पणी की कि कांग्रेस सांसद अक्सर संविधान की एक प्रति अपने साथ रखते हैं लेकिन उन्हें इसकी समझ नहीं है। उन्होंने कांग्रेस की इस बात के लिए आलोचना की कि उसने ममता बनर्जी का समर्थन किया, जबकि पहले कथित तौर पर दूसरों पर "वोट चोरी" का आरोप लगाया था और अब "सीट चोरी" की बात कर रही है जिसे उन्होंने राजनीतिक दिवालियापन बताया। उन्होंने कहा कि किसी को भी जनता के जनादेश या संविधान का अनादर करने का अधिकार नहीं है।</p>
<p>राव ने कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की भारी जीत, साथ ही असम और पुडुचेरी में मिली जीत पूरे देश की जनता के मिजाज को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के मतदाताओं ने उत्तर और दक्षिण भारत के बीच मतभेद उत्पन्न करने की कोशिश करके विभाजनकारी राजनीति को बढ़ावा देने वाली पार्टियों को खारिज कर दिया है और उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि तेलंगाना में भी भाजपा समर्थक भावना बढ़ रही है। उन्होंने लोगों से अपील किया कि वे बड़ी संख्या में प्रधानमंत्री मोदी की परेड ग्राउंड में होने वाली जनसभा में शामिल हों और तेलंगाना में राजनीतिक परिवर्तन का समर्थन करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 16:46:12 +0530</pubDate>
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                <title>असम सीएम सरमा ने राज्यपाल को सौंपा इस्तीफा: कार्यवाहक के रूप में करेंगे काम ; शपथ ग्रहण की तारीख पर सस्पेंस खत्म, जानें कब होगा शपथ ग्रहण ?</title>
                                    <description><![CDATA[असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने नई विधानसभा चुनाव के बाद राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। राज्यपाल ने उन्हें नई सरकार के गठन तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभालने का निर्देश दिया है। राज्य में जल्द ही नई मंत्रिपरिषद के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/assam-cm-sarma-submits-resignation-to-governor-will-work-as/article-152871"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/assam-cm.png" alt=""></a><br /><p>गुवाहाटी। असम में नई विधानसभा के लिए चुनाव संपन्न होने के बाद के बाद मुख्यमंत्री हेमंत बिस्व सरमा ने असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य को बुधवार को अपने मंत्रिपरिषद का इस्तीफा सौंपा। राज्यपाल ने उन्हें नयी सरकार के गठन तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में शासन का दायित्व संभाले रहने को कहा है। मुख्यमंत्री सरमा ने राज्यपाल से मुलाकात से निकलने के बाद संवाददाताओं से कहा," मैंने असम के मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा असम के राज्यपाल को सौंप दिया है और साथ ही उनसे मौजूदा विधानसभा को भंग करने का अनुरोध किया है।</p>
<p>असम के राज्यपाल ने मेरा इस्तीफा और मौजूदा विधानसभा को भंग करने का सुझाव स्वीकार कर लिया है ।" राज्यपाल ने कहा," उन्होंने असम में नयी सरकार सरकार के गठन तक कार्यवाहक मंत्रिपरिषद के रूप में मंत्रालय को काम जारी रखने का निर्देश दिया है।" मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि नयी सरकार जल्द ही बन जाएगी। इस दौरान वह कार्यवाहक सरकार का संचालन करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 14:27:29 +0530</pubDate>
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                <title>अमित शाह बंगाल और नड्डा असम में पर्यवेक्षक, पार्टी ने सौंपी बड़ी जिम्मेदारी</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा ने असम और पश्चिम बंगाल के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिए हैं। गृहमंत्री अमित शाह बंगाल में और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा असम में विधायक दल के नेता का चुनाव कराएंगे। उनके साथ मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और नायब सिंह सैनी सह-पर्यवेक्षक की भूमिका निभाएंगे, जो पार्टी की रणनीतिक मजबूती का संकेत है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/observer-party-handed-over-big-responsibility-to-amit-shah-in/article-152820"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/jp].png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भाजपा ने मंगलवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को बंगाल और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा को  असम के लिए पर्यवेक्षक बनाया । भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह की ओर से मंगलवार को जारी विज्ञप्ति में शाह पश्चिम बंगाल में पार्टी के विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक होंगे। वहीं ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी सह पर्यवेक्षक की भूमिका निभाएंगे।  </p>
<p>सिंह ने बताया कि नड्डा असम में पार्टी के विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक होंगे। वहीं हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सह पर्यवेक्षक की भूमिका निभाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 10:58:20 +0530</pubDate>
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                <title>'मेरे इस्तीफे का सवाल ही नहीं, हम हारे नहीं हराया गया है...',ममता ने चुनाव आयोग को बताया विलेन, बोलीं- मैं नहीं दूंगी इस्तीफा </title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल की निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनावी नतीजों को 'वोटों की चोरी' करार देते हुए इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है। उन्होंने चुनाव आयोग और केंद्र पर धांधली के गंभीर आरोप लगाए। ममता ने स्पष्ट किया कि वह INDIA गठबंधन के साथ मजबूती से खड़ी रहेंगी और इस हार के खिलाफ अपना लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखेंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/there-is-no-question-of-my-resignation-we-have-not/article-152805"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/mamta.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की निवर्तमान मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने कहा है कि विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को जबरन हराया गया है और वह लोकभवन जाकर इस्तीफा नहीं देंगी। ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के एक दिन बाद मंगलवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और केंद्र सरकार ने तृणमूल कांग्रेस को जबरन हराया है। उन्होंने कहा, "हम हारे नहीं हैं, हमें हराया गया है।"</p>
<p>उन्होंने कहा, "इस चुनाव में चुनाव आयोग ने एक 'विलेन' के रूप में काम किया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गलत तरीके से चुनाव जीता है। नैतिक रूप से हमारी जीत हुई है।" ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि उन्हें और उनके चुनाव एजेंटों को मतदान केंद्रों से जबरन बाहर निकाला गया। उन्होंने अपने साथ धक्का-मुक्की होने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि वह लोकभवन जाकर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी।</p>
<p>तृणमूल प्रमुख ने कहा कि वह इंडिया गठबंधन के साथ बनी रहेंगी। उन्होंने बताया कि कांग्रेस नेता सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव तथा कई अन्य दलों के नेताओं ने उनसे फोन पर बात की है और कहा है कि वे तृणमूल कांग्रेस के साथ हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 18:31:47 +0530</pubDate>
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