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                <title>villages - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>असर खबर का  : पुलिया निर्माण के साथ बायपास बनने से आवागमन हुआ सुगम</title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति में खबर प्रकाशित होने के बाद जागा विभाग, राहगीरों को मिली बड़ी राहत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/impact-of-the-report---construction-of-culvert-and-bypass-eases-commute/article-151438"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(5)19.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेडा। क्षेत्र के बांसी-देई मार्ग पर बांडी खाली नाले पर क्षतिग्रस्त पुलिया के स्थान पर सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा उच्च पुलिया का निर्माण कार्य तेजी से जारी है। निर्माण के साथ ही संवेदक द्वारा पैदल एवं दोपहिया वाहन चालकों के लिए वैकल्पिक बायपास मार्ग भी तैयार कर दिया है, जिससे आवागमन सुगम हो गया है।</p>
<p><strong>उच्च क्षमता की नई पुलिया का निर्माण शुरू </strong></p>
<p>जानकारी के अनुसार गत मानसून सत्र में अतिवृष्टि के कारण दुगारी कनकसागर झील का ओवरफ्लो पानी बांसी तालाब में पहुंचा था। लंबे समय तक तेज बहाव के चलते नाले की छोटी पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिससे मार्ग अवरुद्ध हो गया था। इस समस्या को देखते हुए सार्वजनिक निर्माण विभाग ने यहां उच्च क्षमता की नई पुलिया का निर्माण शुरू कराया। प्रारंभ में निर्माण स्थल पर वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था नहीं होने से राहगीरों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही थी। दोपहिया वाहन चालकों को करीब दो किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती थी, जिससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी हो रही थी।</p>
<p><strong>दैनिक नवज्योति समाचार पत्र में इस समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद विभागीय अधिकारियों ने संज्ञान लिया </strong></p>
<p>दैनिक नवज्योति समाचार पत्र में इस समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद विभागीय अधिकारियों ने संज्ञान लिया और अब निर्माण स्थल के पास ही बायपास मार्ग तैयार कर दिया गया है। इससे पैदल एवं दोपहिया वाहन चालकों को राहत मिली है। वर्तमान में पुलिया निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है और शीघ्र ही पूर्ण होने की संभावना है। इस मार्ग से सीएचसी, विद्यालयों एवं आसपास के दो दर्जन से अधिक गांवों के लोग प्रतिदिन आवागमन करते हैं। बायपास बनने से सभी को सुविधा मिली है और क्षेत्रवासियों ने इस पहल की सराहना की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/impact-of-the-report---construction-of-culvert-and-bypass-eases-commute/article-151438</link>
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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 14:57:29 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ईसाटोरी गांव आज भी पक्की सड़क से वंचित, इस रास्ते से जुड़े  हैं दर्जनों गांव </title>
                                    <description><![CDATA[ग्रामीणों ने दी चुनाव बहिष्कार की चेतावनी, गांव में नहीं पहुंच रही एम्बुलेंस।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/isatori-village-still-lacks-a-paved-road--dozens-of-villages-are-connected-by-this-route/article-141449"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/85641.png" alt=""></a><br /><p>समरानियां। ग्राम पंचायत हाटरी के अंतर्गत आने वाले ग्राम ईसाटोरी सड़क बनी है और न ही ऐसा कोई वैकल्पिक मार्ग है, जिससे बरसात के समस्या से आक्रोशित मौसम में बीमार लोगों को अस्पताल तक सुरक्षित पहुंचाया जा सके। इस ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी समाधान नहीं हुआ तो वे आगामी चुनाव का बहिष्कार करेंगे। ग्रामीणों ने बताया कि हर साल चुनाव के समय नेता गांव में आते हैं, बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही सब वादे हवा हो जाते हैं और गांव की हालत जस की तस बनी रहती है। ग्रामीणों ने बताया कि ईसाटोरी गांव से होकर दर्जनों  गांवों का आवागमन होता है। यह रास्ता रोजमर्रा की जरूरतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन सड़क खराब होने से लोगों का समय भी अधिक लगता है और दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है।</p>
<p><strong>बारिश में हालात बद से बदतर</strong><br />बरसात के मौसम में स्थिति और ज्यादा गंभीर हो जाती है। यदि किसी व्यक्ति की तबीयत खराब हो जाए तो एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। मजबूरी में ग्रामीणों को मरीजों को मध्यप्रदेश के अस्पतालों में ले जाना पड़ता है। ग्राम पंचायत ने गांव के अंदर तक सीसी रोड नहीं बनवाई है। कच्चे रास्तों पर कीचड़ भर जाने से बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>हर चुनाव में वादे, लेकिन जमीन पर काम शून्य</strong><br />ग्रामीणों का कहना है कि हर चुनाव से पहले जनप्रतिनिधि गांव में पहुंचते हैं और सड़क निर्माण के बड़े-बड़े वादे करते लेकिन चुनाव समाप्त होते ही कोई सुध लेने नहीं आता। वर्षों से ग्रामीण कच्चे, कीचड़ भरे रास्तों पर चलने को मजबूर हैं ।</p>
<p><strong>ग्रामीणों की मांग: जल्द मिले स्थायी समाधान</strong><br />ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि फॉरेस्ट विभाग से समन्वय कर जल्द एनओसी दिलवाई जाए और सड़क निर्माण कार्य तुरंत शुरू किया जाए। उनका कहना है कि सड़क केवल सुविधा नहीं बल्कि जीवन और मृत्यु का सवाल बन चुकी है।</p>
<p>इस रास्ते से दर्जनों गांव जुड़े हुए हैं और रोजाना लोग इसी मार्ग से आवागमन करते हैं, लेकिन सड़क न होने के कारण समय भी ज्यादा लगता है और परेशानी भी होती है।<br /><strong>-सुनील शिवहरे, ग्रामीण</strong></p>
<p>बरसात के दिनों में यदि कोई बीमार हो जाए, तो गांव से अस्पताल ले जाना बेहद मुश्किल हो जाता है। मजबूरी में कई बार लोगों को इलाज के लिए मध्यप्रदेश की ओर जाना पड़ता है।<br /><strong>- करण सहरिया, ग्रामीण</strong></p>
<p>ग्राम पंचायत द्वारा गांव के अंदर तक सीसी रोड तक नहीं बनवाई गई है, जिससे आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।<br /><strong>- मुरारी प्रजापति, ग्रामीण</strong></p>
<p>सहरिया बस्ती के रोड का कार्य जल्द ही शुरू किया जाएगा।<br /><strong>- सियाराम, वीडीओ</strong></p>
<p>सड़क निर्माण की स्वीकृति जारी हो चुकी है, लेकिन फॉरेस्ट विभाग की एनओसी अभी तक नहीं मिलने के कारण कार्य शुरू नहीं किया जा सका है।<br /><strong>-बसंत गुप्ता, एएक्सईएन, पीडब्ल्यूडी</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Jan 2026 17:02:08 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का - डुंडी में पेयजल संकट से मिली राहत, नलों में पानी की सप्लाई हुई सुचारू </title>
                                    <description><![CDATA[जल जीवन मिशन योजना के अंतर्गत  नल व्यवस्था की समस्या को लेकर दैनिक नवज्योति विभाग को अवगत करवाया था ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/impact-of-the-news---relief-from-the-drinking-water-crisis-in-dundi--tap-water-supply-restored/article-129621"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/y-of-news-(1)4.png" alt=""></a><br /><p>खानपुर। खानपुर क्षेत्र के डुंडी ग्राम में नल व्यवस्था को लेकर समस्या हो रही थी। इस समस्या को लेकर दैनिक नवज्योति टीम ने मुद्दा उठाया था  कि जल जीवन मिशन योजना के तहत नल लगवाए गए थे लेकिन उन नलों में पानी नहीं आ रहा था तो ग्रामीणों की दैनिक नवज्योति टीम से बात हुई नवज्योति टीम ने सहायक अभियंता मुश्ताक को अवगत कराया। मुस्ताक अली ने तुरंत समस्या का समाधान किया और डुंडी गाडरवाड़ा में नहीं आ रही नल सप्लाई को सुचारू रूप से चालू किया, इसके लिए ग्राम वासियों ने सहायक अभियंता मुश्ताक अली और नवज्योति टीम को धन्यवाद प्रेषित किया।</p>
<p>मुश्ताक अली खानपुर सहायक अभियंता ने बताया कि उपखण्ड खानपुर में 38 ग्राम पंचायत 1 नगर पालिका व 207 ग्राम है। उपखण्ड क्षेत्र में खानपुर कस्बे के अलावा लगभग 50 ग्रामो में  नल के माध्यम जल सप्लाई की जाती है।उपखण्ड क्षेत्र में 2020-21  से पहले  खानपुर कस्वे के अलावा केवल 7 ग्रामों में नल के माध्यम से जल सप्लाई की जाती थी। जल  जीवन मिशन आने बाद उपखण्ड खानपुर से  लगभग 50 ग्राम नल से जुड़े है । जलदाय विभाग में एक सहायक अभियंता दो कनिष्ठ अभियंता के पद स्वीकृत है, लेकिन कनिष्ठ अभियंता के दोनों पद खाली होने के कारण पूरा भार अकेले सहायक अभियन्ता के ऊपर है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Oct 2025 14:40:03 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>एसडीआरएफ ने टोंक के अलग-अलग गांवों से 46 लोगों को सुरक्षित निकाला</title>
                                    <description><![CDATA[टोंक जिले में भारी बारिश के बीच फंसे लोगों को एसडीआरएफ की टीमों ने सुरक्षित निकाल लिया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/sdrf-rescued-46-people-from-different-villages-of-tonk/article-124581"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(12)6.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। टोंक जिले में भारी बारिश के बीच फंसे लोगों को एसडीआरएफ की टीमों ने सुरक्षित निकाल लिया। इसके लिए टीमें अलग-अलग गांवों में तैनात होकर रेस्क्यू आॅपरेशन चला रही हैं। एसडीआरएफ ने उनियारा टोंक के तहत जलमग्न हिस्सों में फंसे 39 और पुलिस थाना अलीगढ़ जिला टोंक के तहत सहादत नगर और खुंडिया गांव में फंसे सात ग्रामीणों को सुरक्षित निकाला। </p>
<p><strong>पहला मामला </strong><br />एसडीआरएफ कमाण्डेंट राजेन्द्र सिसोदिया ने बताया कि 23 अगस्त 2025 को सुबह 8:10 बजे पुलिस कन्ट्रोल रूम टोंक से उनियारा कस्बे में कुछ नागरिकों के फंसे होने की सूचना मिली। इस सूचना पर रेस्क्यू टीम प्रभारी 9 जवानों की टीम तथा आपदा राहत उपकरणों के साथ मौके पर पहुंचे और कस्बे के निचले इलाकों में 4-5 फीट जलभराव में फंसे लोगों को निकालने के लिए मोटर बोट की सहायता ली गई। बोट से उनियारा कस्बे के निचले इलाके में स्थित ढाणी (मोर झालों की ढाणी) में पहुंचे, वहां फंसे 4 परिवारों के 22 ग्रामीणों (8 पुरुष, 5 महिला, 9 बच्चों) को सुरक्षित निकाला। इसके बाद डाबला गांव में फंसे 14, उनियारा कस्बे में स्थित महाविद्यालय में फंसे तीन कॉलेज स्टाफ को बचाया। इस तरह 39 ग्रामीणों और 40 मवेशियों का रेस्क्यू किया। </p>
<p><strong>दूसरा मामला</strong><br />दोपहर एक बजे टोंक के अलीगढ़ में टापू बने सहादत नगर और खुंड़िया गांव में कुछ ग्रामीणों के फंसे होने की सूचना मिली। नौ जवानों की टीम ने मौके पर पहुंचकर खुंड़िया गांव में फंसे 4 ग्रामीणों को रेस्क्यू किया। इस तरह कुल सहादत नगर और खुंड़िया गांव में फंसे कुल सात ग्रामीणों और 20 मवेशियों का रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर  पहुंचाया गया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 Aug 2025 15:02:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कई गांव श्मशान से वंचित, खेतों में अंतिम संस्कार</title>
                                    <description><![CDATA[शव के पास खड़े लोग घंटों भीगते रहे और ग्रामीणों की आंखों के सामने वह मंजर किसी भयावह तस्वीर से कम नहीं था। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/many-villages-deprived-of-crematorium--last-rites-performed-in-fields/article-124503"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/oer-(1)20.png" alt=""></a><br /><p>छीपाबडौद।  छीपाबडौद तहसील क्षेत्र के आसपास आज भी ऐसे गांव हैं। जहां श्मशान घाट तक नहीं है। गगचाना ग्राम पंचायत के नियाना गांव की हकीकत जानकर दिल पसीज जाएगा। गांव में जब कोई गुजर जाता है तो परिजन शव को खेत में ले जाते हैं और वहीं अंतिम संस्कार करते हैं। सोचिए, बारिश हो या धूप  खुले आसमान के नीचे ही चिता सजाई जाती है। न टीन शेड, न चबूतरा, न कोई सुविधा। 21वीं सदी में भी इंसान की आखिरी यात्रा इतनी बेबस हो सकती है  यह किसी को भी झकझोर देगा।</p>
<p><strong>बारिश में बुझती रही चिता</strong><br />हाल ही में गांव के श्रवणलाल मेघवाल का निधन हुआ। परिजन जब अंतिम संस्कार करने पहुंचे तो आसमान से मूसलधार बारिश शुरू हो गई। कई बार चिता में आग लगाने की कोशिश हुई, लेकिन हर बार आग बुझ गई। शव के पास खड़े लोग घंटों भीगते रहे और ग्रामीणों की आंखों के सामने वह मंजर किसी भयावह तस्वीर से कम नहीं था। कई घंटे बाद बड़ी मुश्किल से चिता जली। ग्रामीण कहते हैं कि मौत के बाद इंसान को शांति मिलनी चाहिए, लेकिन हमारे गांव में तो अंतिम संस्कार ही सबसे बड़ी पीड़ा बन गया है। बरसों से यही हाल है, पंचायत को बार-बार बताया गया पर कोई समाधान नहीं हुआ।</p>
<p><strong>पंचायत की चुप्पी और सिस्टम पर सवाल</strong><br />ग्राम पंचायत और प्रशासन की लापरवाही अब सवालों के घेरे में है। आखिर कब तक इस गांव के लोग अपने अपनों को खेतों में जलाने को मजबूर रहेंगे? क्या यह सभ्य समाज के माथे पर कलंक नहीं है?</p>
<p><strong>यह अकेले नियाना की हकीकत नहीं</strong><br />सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आज भी कई गांव ऐसे है। जहां श्मशान घाट तक नहीं बने हैं। अंतिम संस्कार की व्यवस्था के लिए ग्रामीण खेतों, नालों या खुले स्थानों का सहारा लेते हैं। यह तस्वीर सिर्फ नियाना की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की हकीकत बयां करती है।</p>
<p><strong>गांव के बुजुर्गों ने आंसू भरी आंखों से कहा</strong><br />"हमने अपने माता-पिता, रिश्तेदारों सभी का अंतिम संस्कार ऐसे ही खेतों में किया है। बरसात में सबसे ज्यादा तकलीफ होती है। कई बार पंचायत को कहा, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई।"</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />यह बेहद दु:खद है कि आज भी हमारे गांव में श्मशान घाट नहीं है। पंचायत और प्रशासन से कई बार गुहार लगाई, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। <br /><strong>- बृजेश वैष्णव, पूर्व वार्ड पंच </strong></p>
<p>बरसात के दिनों में शव जलाना सबसे बड़ी मुश्किल बन जाता है। कीचड़ में फिसलते हुए खेत तक पहुंचना पड़ता है और चिता जलाना तो और भी कठिन होता है। <br /><strong>- मेघराज नागर, ग्रामीण </strong></p>
<p>सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन हमारे गांव के लोग अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार तक सम्मानपूर्वक नहीं कर पा रहे हैं। यह व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।<br /><strong>- लड्डूलाल, ग्रामीण </strong></p>
<p> श्मशान घाट न होना समस्या है। भूमि चयन नहीं होने के कारण मामला अटका हुआ है। जल्द ही इस दिशा में कदम बढ़ाएंगे।<br /><strong> -द्रौपदी धाकड़, सरंपच प्रशासक </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Aug 2025 16:03:09 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का - गांवों में पहुंचे अधिकारी, किसानों को कर रहे जागरूक</title>
                                    <description><![CDATA[किसानों को भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने और कार्बनिक खाद का अधिकाधिक उपयोग बढ़ाने के सम्बंध में जागरूक किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-the-news---officials-reached-the-villages--making-farmers-aware/article-113959"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/42.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । जिले में खेतों की मिट्टी की सेहत खराब होती जा रही है। पोषक तत्वों की कमी के कारण फसलों के उत्पादन के साथ गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है।  केमिकल तत्व मिट्टी में घुलते जा रहे है। ऐसे में अब सरकार द्वारा वैकल्पिक उर्वरकों का उपयोग बढ़ाकर रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने के लिए पी. एम. प्रणाम योजना शुरू की गई। इसके तहत कोटा जिले में कृषि विभाग की ओर से सोमवार को जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कृषक गोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें किसानों को भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने और कार्बनिक खाद का अधिकाधिक उपयोग बढ़ाने के सम्बंध में जागरूक किया गया। किसानों को बताया गया कि मिट्टी का कार्बनिक स्तर कम हो गया है। इसके शून्य स्तर पर आने पर खेती करना अंसभव हो जाता है और जमीन अनुपजाऊ बन जाती है।</p>
<p><strong>पहले दिन यहां पर हुई गोष्ठियां</strong><br />कृषि विभाग के अनुसार बुवाई के समय किसानों द्वारा फॉस्फेटिक उर्वरक के रूप में डीएपी के उपयोग का प्रचलन अधिक है। कृषकों का फॉरपोटिक उर्वरक के रूप में केवल डीएपी पर अधिक निर्भर होने के कारण इसे उपलब्ध कराने में कठिनाई आती है एवं भूमि में संतुलित पोषक तत्वों की भी आपूर्ति नहीं होती है। इस कारण किसानों को जागरूक करने के लिए समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन के तहत जिले में कृषक गोष्ठियों का आयोजन शुरू किया गया है। सोमवार को जिले के चेचट, पीपल्दा, काल्याखेड़ी व देवलीखुर्द में गोष्ठी आयोजित की गई। इसमें एसएसपी के अधिक से अधिक उपयोग करने के बारे में किसानों को प्रोत्साहित किया गया। अब नैनो उर्वरको के उपयोग को बढ़ावा दिया जाकर परम्परागत उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के प्रयास किए जा रहे है। </p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />जिले के खेतों में मिट्टी में सूक्ष्म पोषक तत्वों का प्रयोग नहीं के कारण फसलों में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी के लक्षण मिले हैं। इस सम्बंध में दैनिक नवज्योति में 11 मई को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि उर्वरा शक्ति कमजोर होने से भी मिट्टी से पैदा हो रही उपज में पोषक तत्वों की कमी होने लगी है। केमिकल तत्व मिट्टी में घुलते जा रहे है। इसमें पीलापन, शिराओं का सफेद होना, बौनापन, फल फटना आदि लक्षण प्रमुख हैं। इससे फसलोत्पादन में गिरावट आती है। इसलिए यह आवश्यक है कि मुख्य पोषक तत्वों के साथ-साथ सूक्ष्म पोषक तत्वों का भी प्रयोग किया जाना चाहिए। अब विभाग द्वारा सोमवार से कृषक गोष्ठियों के माध्यम से  किसानों को फसलों में सूक्ष्म पोषक तत्वों के उपयोग की सलाह दी जा रही है, ताकि अधिक उत्पादन हो सके। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />किसानों को पोषक तत्वों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होने से वह रासायनिक खाद का उपयोग अधिक करते हैं। इस सम्बंध में कृषि विभाग का यह अभियान किसानों के लिए काफी फायदेमंद होगा। विभाग को यह अभियान निरन्तर चलाना चाहिए।<br /><strong>- राजेन्द्र धाकड़, किसान</strong></p>
<p>कृषि विभाग की ओर से सोमवार को जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कृषक गोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें किसानों को भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने और कार्बनिक खाद का अधिकाधिक उपयोग बढ़ाने के सम्बंध में जागरूक किया गया। यह आयोजन आगामी दिनों में भी जारी रहेगा।<br /><strong>- अतीश कुमार शर्मा, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 May 2025 15:50:24 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>किसानों की फसले तैयार, सता रही मौसम की मार </title>
                                    <description><![CDATA[मौसम के इस चक्र से किसानों को निराश कर मौसम की इस मार से बचाने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/farmers--crops-are-ready--but-the-weather-is-bothering-them/article-93297"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/4427rtrer-(3)13.png" alt=""></a><br /><p>राजपुर।  पिछले तीन चार दिनों से खराब मौसम और बारिश की आशंका से क्षेत्र के किसान परेशान हैं।  क्षेत्र में बारिश के बाद बादलों व बेमौसम मध्यम दर्जे की बारिश होने से किसान मक्का, उड़द, तिल्ली की फसल में नुकसान की आशंका जता रहे हैं। मक्का किसानों की मुख्य फसल है और उसकी यहां बड़े पैमाने पर खेती भी की गईं है। इस समय मक्का की फसलों को खेतों से बाजार तक ले जाने की तैयारी में किसान दिन रात एक किए हुए हैं। मगर, मौसम के इस चक्र से किसानों को निराश कर मौसम की इस मार से बचाने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। </p>
<p><strong> फसलों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की जुगत में किसान</strong><br />किसानों की परेशानी यह है कि पूरा मक्का, सोयाबीन, उड्द सुरक्षित स्थानों तक नहीं पहुंच सका है। कहीं जगह तो कहीं व्यवस्था के अभाव के कारण मक्का खुले आसमान के नीचे रखा हुआ है। पिछले तीन दिन से लगातार मौसम खराब रहने से किसान की चिंताएं बढ़ गई हैं। गत शुक्रवार रात्रि हुई बारिश से खेतों में रखी फसल भीग गई है। वहीं गत शनिवार सुबह मध्यम दर्जे की उपखंड क्षेत्र में बारिश दोपहर 1 बजे तक होती रही । बादल छाने से किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें नजर आ रही हैं।</p>
<p><strong>गुणवत्ता खराब होने से बाजार में मिलेंगे कम दाम</strong><br /> किसान  नंदकुमार भार्गव, मानसिंह, अनिल भार्गव, राहुल शिवहरे, और अन्य किसानों का कहना है कि अगर अभी खलिहानों में पड़ी उड़द, सोयाबीन, मक्का भींग जाता है तो न केवल उसकी गुणवत्ता खराब होगी बल्कि मात्रा में भी गिरावट हो सकती है। क्षेत्र के किसान प्रेमचंद ने बताया कि फैसले खलिहान में पड़ी है जो  बारिश में  भी गई थी, जो खलिहान में सूख रही थी। जो बुधवार को हुई बारिश में फिर भीग गई। गुणवत्ता खराब होने से बाजार में दाम कम मिलेंगे। मुन्नालाल भील ने बताया कि चार दिन पहले तकरीबन 50 क्विंटल मक्का निकाली थी। दो दिन पहले बारिश में भीग गई। सुबह से मौसम खराब था बारिश से किसानों की चिंता बढ़ गई है। मक्का, सोयाबीन, उड़द की फसल में फफूंद पड़ सकता है और अंकुरण भी हो सकता है।</p>
<p><strong>मक्का, सोयाबीन, उड़द की फसल है तैयार</strong><br /> खेतों में मक्का, सोयाबीन, उड़द की फसल पककर तैयार है, गांवों में कहीं कटाई की जा रही है तो कहीं उसे खुले आसमान में खलिहान में सूखने के लिए छोड़ा गया है। मक्का से दाना छुड़ाने का काम भी अभी अधूरा पड़ा है। बीच के दिनों की कड़क धूप देख वह उम्मीद भी कर रहे थे कि जल्द ही मक्का को तैयार कर बाजार तक पहुंचा सकेंगे। मगर, इधर अचानक मौसम ने करवट बदल ली और बादल और बूंदाबांदी होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों का मक्का कहीं खेत किनारे कट कर रखा है तो कहीं खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ है।</p>
<p>क्षेत्र में बुधवार को हुई बारिश से फिर फसल भीग गई है। जिससे गुणवत्ता खराब होने से फसल का बाजार में कम दाम मिलेगा। जिससे आर्थिक नुकसान होगा। <br /><strong>- बबलू, किसान। </strong></p>
<p>खराब मौसम और बारिश से फसल के सूखे दाने को बचाने के लिए उन्हे तिरपाल या अन्य तरीकों से बचाने का जतन कर रहे है। <br /><strong>- कल्याण सिंह मेहता, किसान। </strong></p>
<p>बारिश की संभावना को लेकर किसानों को चिंता सता रही है। कहीं किसानों की मेहनत पर पानी नहीं फिर जाए। <br /><strong>- रामदयाल मेहता, कस्बेवासी।  </strong><br />    <br />किसानों की फसलें पककर तैयार है। बेमौसम बारिश से फसलों की गुणवत्ता में असर पड़ सकता है। वैसे नुकसान फसलों में और किसी प्रकार का नही है।<br /><strong>- नीरज शर्मा, सहायक कृषि अधिकारी, शाहाबाद।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Oct 2024 16:05:20 +0530</pubDate>
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                <title>आजादी के 77 साल बाद भी गांवों में सफाई व्यवस्था बदहाल</title>
                                    <description><![CDATA[जिला प्रशासन को चाहिए कि सफाई व्यवस्था में सुधार कर समय पर कचरा उठाने का कुशल प्रबंध करावें। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/even-after-77-years-of-independence--the-sanitation-system-in-villages-is-in-a-bad-state/article-93294"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/4427rtrer-(4)12.png" alt=""></a><br /><p>अरनेठा। उपखंड क्षेत्र के गांव में जगह-जगह कचरों के ढेर लग रहे है। आजादी के 77 सालों के बाद भी गांव की सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है। ऐसा नहीं है कि सरकारे इस बारे में कार्य कर नहीं रही है। लाखों रूपए का बजट सरकार सफाई के लिए लगा रही है लेकिन स्थितियां नहीं बदल रही। अरनेठा के नरेंद्र गौतम का कहना है गांव में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे है। समय पर कचरा न उठाने से बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है। आजादी को 77 सालों के बाद सफाई व्यवस्था बेपटरी है।  जलोदा के कंहैयालाल मीणा ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन योजना की अनदेखी हो रही है। लाखों रुपए खर्च करने के बावजूद सफाई व्यवस्था बिगड़ी हुई है। जिला प्रशासन को चाहिए कि सफाई व्यवस्था में सुधार कर समय पर कचरा उठाने का कुशल प्रबंध करावें। </p>
<p><strong>कचरे से पर्यावरण हो रहा प्रदूषित</strong><br />कूड़ा कचरा अनेक प्रकार के होते हैं फूड वेस्ट, प्लास्टिक, कागज, कपड़े, रासायनिक अवशेष ,कार्यालय कूड़ा ,होटल से बचा अपशिष्ट ,कूड़ा ,पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण , पशु अवशेष ,खराब बैटरी ,सभी कचरा घरों से निकलने वाला कचरा यहां वहां फैला रहता है।औद्योगिक इकाइयों, व्यावसायिक संस्थानों ,निर्माण स्थलों ,सार्वजनिक स्थान, पार्क, उद्यान, जल स्रोत आदि के पास भी कचरे के ढेर लगे रहते है । ग्रामीणों ने बताया अनेक प्रकार की हानियां होती है पर्यावरण प्रदूषण ,स्वास्थ्य समस्याएं ,जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, मिट्टी प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन ,जानवरों की मृत्यु आदि समस्याएं उत्पन्न हो जाती है। सरकारों को चाहिए रीसाइक्लिंग ,वैज्ञानिक निपटान जागरूकता फैलाये ,समुदाय की भागीदारी, उपयोग की गई वस्तुओं का पुनरुपयोग करके,आदि उपायों द्वारा कूड़ा कचरा कमी ला सकते हैं जिससे हम पर्यावरण को सुरक्षित बना सकते हैं और स्वास्थ्य में सुधार कर सकते हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />प्रत्येक गांव में कचरे की भरमार है । जिसके पास जगह है वह अपनी जगह पर डाल देता है । लेकिन जिसके पास जगह नहीं है वह कचरा गली मोहल्ले आदि अन्यत्र स्थान पर पड़ा रहता है एवं अनेक प्रकार की समस्याओं को न्यौता देता रहता हैं । इसका उचित समाधान होना चाहिए । समय समय पर इस मामले को पंचायत समिति की बैठक में भी उठा रहा हूं।  <br /><strong>-देवकिशन मीणा, पंचायत समिति सदस्य केशोरायपाटन </strong></p>
<p>कचरे को लेकर हर पंचायत  उसका उचित निस्तारण के लिए कार्य कर रही है । समस्या के समाधान को लेकर प्रयास जारी हैं । सरकार की तरफ से गाड़ी भी दी जा रही है । जगह-जगह कचरा पात्र रखवा रहे हैं फिर भी समस्याओं को और ठीक प्रकार से दिखाएंगे और समाधान का प्रयास करेंगे।<br /><strong>-वीरेंद्र सिंह हाड़ा, प्रधान पंचायत समिति केशोरायपाटन </strong></p>
<p>गांव में कचरे की गंभीर समस्या हैं। पंचायत में कचरा निस्तारण के लिए एक स्थाई कर्मचारियों के विषय में बात करेंगे । जब मीटिंग होगी इस मुद्दे पर जरूर विस्तृत चर्चा करेंगे । प्रयास करेंगे शहरों की तरह गांव में भी कचरा का उचित निस्तारण हो।<br /><strong> - चंद्रावती कंवर, जिला प्रमुख जिला परिषद बूंदी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Oct 2024 15:10:17 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>80 शहरों और 15 हजार गांव-ढाणियों में पानी का संकट, टैंकरों से बुझ रही प्यास</title>
                                    <description><![CDATA[ प्रदेश में 30 जून के बाद मानसून की बारिश आने की संभावना है। ऐसे में राज्य के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पीने के पानी संकट बना हुआ है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/water-crisis-in-80-cities-and-15-thousand-villages-thirst/article-81809"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-01/tute-foote-chalakte-tanker-ban-rahe-ji-ka-janjaal...kota-news..25.1.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में 30 जून के बाद मानसून की बारिश आने की संभावना है। ऐसे में राज्य के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पीने के पानी संकट बना हुआ है। राज्य के 40 जिलों के 15 हजार ग्रामीण क्षेत्रों और 80 शहरों में  टैंकरों के जरिए प्यास बुझाने का प्रयास किया जा रहा है। विभाग के अधिकारियों के मुताबिक आने वाले 20 दिन में प्रभावित गांवों और शहरों की संख्या में बढ़ोतरी होने की पूरी उम्मीद है। वहीं दूसरी ओर पानी के संकट को लेकर जिला स्तर पर मॉनिटरिंग के मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद भी व्यवस्थाओं में सुधार नहीं आ रहा है। राजधानी जयपुर सहित प्रदेश के बड़े शहरों में भी पानी का संकट चरम पर पहुंच गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/water-crisis-in-80-cities-and-15-thousand-villages-thirst/article-81809</link>
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                <pubDate>Mon, 17 Jun 2024 19:04:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हाईटेंशन लाइन में फाल्ट आने से 30 गांव अंधेरे में डूबे</title>
                                    <description><![CDATA[कस्बे में जलापूर्ति की व्यवस्था पर्याप्त मात्रा में बिजली नहीं मिलने पर बिगड़ने लगी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/30-villages-plunged-into-darkness-due-to-fault-in-high-tension-line/article-60120"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/high-tension-line-main-fault-aane-se-30-gaanv-andhere-mein-doobe...bundi-karwar-news...21-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p> करवर। लाखेरी से आ रही 33 केवी बिजली की लाइन में गुरुवार रात अचानक फाल्ट आ गया। इस वजह से रात 10 बजे बिजली बाधित होकर कस्बे को छोड़कर करवर, तलवास व जरखोदा, ग्रिड से जुड़े फीडरों के करीब 30 गांवों की बिजली आपूर्ति करीब 15 घण्टे तक ठप रही। रातभर ग्रामीण अंधेरे में रहे। जिससे शुक्रवार को ग्रामीणों की दिनचर्या बिगड़ गई। गांवों में जलसकंट गहरा गया। काफी परेशानी झेलने के बाद 15 घंटे पश्चात शुक्रवार सुबह 12 बजे बिजली आपूर्ति सुचारू हुई तब जाकर ग्रामीणों को राहत मिली। इसके बाद 132 जीएसएस में आयल चेंज के लिए 1 घण्टे का शट डाउन हुआ। </p>
<p><strong>पूरी रात अंधेरे में गुजारनी पड़ी, रेलनी हुई प्रभावित</strong><br />बिजली आपूर्ति की वजह से कई फीडर की लाइनों में फाल्ट और अन्य व्यवधान के चलते शाम तक आंख मिचौनी बनी रही। बिजली गुल रहने से ग्रामीणों को पूरी रात अंधेरे में रहना पड़ा। काश्तकारों को बड़ी परेशानी हुई। खेतों में रेलनी कार्य प्रभावित हो गया। नलकूप बन्द रहने से लोगों को दूरदराज से आवश्यक पानी जुटाना पड़ा। गुरुवार रात 10 बजे लाखेरी से आ रही 33 केवी विद्युत लाइन में करवर व इंद्रगढ़ के बीच फाल्ट होने से करवर, जरखोदा, तलवास ग्रिड से जुड़े 30 गांवों की बिजली ठप हो गई। जो सुबह 12 बजे सुचारू हो पाई।</p>
<p><strong> गड़बड़ाई पेयजल आपूर्ति </strong><br />बिजली कटौती का असर कस्बे सहित जलापूर्ति पर भी पड़ रहा है। कस्बे में जलापूर्ति की व्यवस्था पर्याप्त मात्रा में बिजली नहीं मिलने पर बिगड़ने लगी है। बिजली कटौती का असर कस्बे के उद्योग धंधे के साथ - साथ जलापूर्ति पर भी पड़ रहा है। कस्बे में जलापूर्ति की व्यवस्था पर्याप्त मात्रा में बिजली नहीं मिलने पर बिगड़ने लगी है। ऐसे में लोगों के कंठ तर करने मुश्किल हो गए हैं।  जलदाय विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जलदाय विभाग की बिजली बुधवार रात 10 बजे से गुल हो गई थी जो शुक्रवार को दोपहर 1 बजे के बाद मिली है। इससे जलदाय विभाग और बासला बांध से करवर कस्बे की पेयजल परियोजना की लाइनों पर भी असर पड़ रहा है। जिससे पानी की भंडारण नहीं हो पाया। वहीं जलापूर्ति सप्लाई छोड़ने के समय भी दिक्कत आ रही है।</p>
<p><strong>ग्रामीणों की परेशानी उन्हीं की जबानी</strong><br />बिजली और पानी की समस्या से ग्रसित हैं। कस्बे में कभी भी बिजली गुल होने से बिजली और फिर पानी की समस्या हो आ जाती है। जलदाय विभाग की लापरवाही से आए दिन पानी की मोटरें जल जाती है जिससे पेयजल आपूर्ति बाधित हो जाती है। कस्बे की पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को सुधारने की जरूरत है। पर्याप्त पानी होने के बावजूद भी समय पर सप्लाई नहीं होती है। कस्बे में दोनों विभागों के अधिकारी व जनप्रतिनिधि भी इस समस्या की ओर ध्यान देते जिससे बिजली व पानी की समस्या से निजात मिल सकी।<br /><strong>- पवन तिवारी, करवर</strong></p>
<p>जलदाय विभाग को बिजली आपूर्ति समय पर मिलनी चाहिए, जिससे पेयजल आपूर्ति प्रतिदिन सुचारू हो सके। पानी व भंडारण व्यवस्था पर्याप्त होनी पर भी दोनों विभागों की आपसी तालमेल के अभाव में कस्बे वासियों को खामियाजा भुगतना पड़ा रहा है।<br /><strong>- बालमुकुंद जैन, करवर</strong></p>
<p>लाखेरी 132 जीएसएस से आ रही 33 केवी बिजली लाइन में फाल्ट आ गया था। रात को अंधेरे के चलते कार्य में देरी हुई है। सुबह खराबी ठीक कर आपूर्ति सुचारू की जा चुकी है।<br /><strong> - कमलेश मीना,डिस्कॉम एईएन </strong></p>
<p>बिजली व्यवधान से कस्बे में एक दिन छोड़कर दूसरे दिन पानी की सप्लाई की जा रही है जैसे ही बिजली सुचारू रूप से मिलेंगी कस्बे को पेयजलापूर्ति सुचारू हो जायेगी।<br /><strong>- रामखिलाड़ी मीणा ,सहायक अभियंता पीएचईडी नैनवां </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Oct 2023 20:48:50 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>हर पांचवां व्यक्ति मधुमेह का शिकार, गांवों में भी रहा पांव पसार</title>
                                    <description><![CDATA[अब यह बीमारी शहरी लोगों के साथ साथ ग्रामीणों में भी बड़ी तेजी से बढ़ रही है। महानगरों में रहने वाले 12 से 14 प्रतिशत लोग इससे ग्रसित हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/every-fifth-person-suffering-of-diabetes-was-widespread-in-villages-too/article-39105"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/s-9.png" alt=""></a><br /><p>अजमेर। आधुनिकखानपान एवं मेहनत कम करने की प्रवृति केकारण ही विश्वभर में चीन के बाद सबसे ज्यादा मधुमेह रोगी भारत में हैं। हमारे देश का प्रत्येक पांचवां व्यक्ति इस रोग से ग्रसित है और विश्वभर में प्रत्येक दस सैकंड में एक व्यक्ति की मौत हो जाती है। यही हाल रहे तो आने वाले समय में हर तीसरा व्यक्ति इससे पीड़ित होगा और 2025 तक भारत में 69.8 करोड़ लोग इससे ग्रसित हो जाएंगे। </p>
<p>अब यह बीमारी शहरी लोगों के साथ साथ ग्रामीणों में भी बड़ी तेजी से बढ़ रही है। महानगरों में रहने वाले 12 से 14 प्रतिशत लोग इससे ग्रसित हैं। इससे बचने के लिए तीस से चालीस या उससे अधिक आयु में अपने भोजन में मीठे पदार्थ, बाजार के डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ, फास्ट फूड, आइसक्रीम आदि से परहेज करना चाहिए। इसके साथ ही उन्हें नियमित रूप से प्रति वर्ष चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। यह सार निकल कर आया है रिसर्च सोसायटी फोर दा स्टडी आफ डायबिटीज इन इंडिया (आरएसएसडीआई) राजस्थान चैप्टर की ओर से पुष्कर में आयोजित दो दिवसीय 10वें राज्य स्तरीय अधिवेशन में।</p>
<p>तेजी से बदलती जीवन शैली, शारीरिक श्रम का अभाव, आनुवांशिक कारण, बदलता खान-पान डायबिटीज को न्यौता देता है। यही नहीं हमारे प्रत्येक सामाजिक एवं धार्मिक उत्सव में मीठे की उपस्थिति ने भी इस बीमारी को बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभाई है। साथ ही मधुमेह की बढ़ती संख्या का मुख्य कारण पाश्चात्य संस्कृति की ओर झुकाव, दिनचर्या एवं खानपान में बदलाव, शारीरिक व्यायाम का अभाव है। रक्त में शर्करा की मात्रा अनियमित रहने पर रोगी को भयंकर दीर्घकालीन परिणाम भुगतने पड़ते हैैं जैसे अंधता, पक्षाघात, दिल का दौरा, गुर्दों की बीमारी, पांव में गेंगरीन आदि है।</p>
<p><strong>कांफ्रेस में आए विशेषज्ञों ने नवज्योति से अपनी बात कुछ इस तरह बयां की</strong><br /><strong>विद्यार्थी भी जांचें कराएं: डॉ.पारीक</strong><br />कोटा से आए वरिष्ठ डायबिटोलॉजिस्ट डॉ. केके पारीक ने बताया कि कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों के बीपी, शुगर, कॉलेस्ट्रॉल सहित सभी तरह की आवश्यक जांचें करानी चाहिए। उन्होंने बताया कि 75 फीसदी में डायबिटीज एवं बीपी होता है। ओपीडी में आने वाले मरीजों की बीपी और डायबिटीज की जांच अवश्य करानी चाहिए, क्योंकि ये दोनों ही साइलेंट बीमारियां हैं और एक दूसरे के साथ मिलकर एक और एक ग्यारह हो जाते हैं। वर्तमान में हमारे पास बहुत अच्छी दवाएं उपलब्ध हैं। जिनसे डायबिटीज को दूर किया जा सकता है। </p>
<p><strong>भारतीयों में रोग ज्यादा: डॉ.गुप्ता </strong><br />ग्लास्गो के डॉ.अरविंद गुप्ता ने बताया कि भारतीय जीवन शैली में पर्व, त्योहार, विवाह, जन्मोत्सव सहित अनेक आयोजन होते रहते हैं। जिनमें मिठाइयां और वसायुक्त भोजन की अधिकता होती है। यही कारण है कि हमारे यहां बाल्यावस्था से ही मिठाई की ओर झुकाव बढ़ जाता हैै। नतीजन हमारे देश में मधुमेह रोगियों की संख्या में लगातार प्रतिवर्ष इजाफा हो रहा है। मधुमेह के रोगी को अपनी आयु, व्यवसाय, जीवन शैली के अनुरूप भोजन लेना चाहिए और उसमें अधिक से अधिक अंकुरित दालें, अनाज, हरी सब्जियां, वसा रहित दूध, छाछ, सूप एवं रेशेदार फल, मेवे का सेवन करना चाहिए।</p>
<p><strong>जीवन शैली बदलकर रोकें: डॉ.सामरिया</strong><br />संयोजक एवं मधुमेह रोग विशेषज्ञ डॉ.अनिल सामरिया ने बताया कि डीपीपी शोध के निष्कर्ष के अनुसार आनुंवाशिकता के आधार पर हाइरिस्क व्यक्ति जिन्हें इम्पेनन्ड ग्लूकोज टॉलरेन्स है यदि समय रहते जीवन शैली में परिवर्तन कर शरीर के वजन को सामान्य रखे तो इस रोग को काफी समय तक रोका जा सकता है। </p>
<p><strong>ज्यादा सीखने को मिला: डॉ.लालवानी</strong><br />नई दिल्ली से आए राजकुमार लालवानी ने बताया कि इस कॉन्फ्रेंस में मधुमेह मरीजों से जुडेÞ सब्जेक्ट और टॉपिक को ज्यादा महत्व दिया गया है। कॉन्फ्रेंस से पैराफेरी में कार्यरत चिकित्सकों को अपने मरीजों के उपचार के लिए नवीनतम जानकारी मिली है, जो बहुत महत्वपूर्ण है और मरीजों के उपचार में सहायक  होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Mar 2023 10:19:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>ओवरलोड वाहनों के कारण जर्जर हुईं संपर्क सड़कें</title>
                                    <description><![CDATA[भारत माला प्रोजेक्ट के तहत चल रहे आठ लाइन निर्माण कार्य के दौरान गांव को जोड़ने के लिए अंडरपास बनाया गया था। अंडर पास बनाते समय उसमें सुचारू पानी की निकासी नहीं होने से लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dilapidated-contact-roads-due-to-overloaded-vehicles/article-31524"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/overlod-vaahano-ke-kaaran-jarjer-hui-sampark-sadke...sultanpur-news-kota...5.12.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>सुल्तानपुर। क्षेत्र में भारत माला प्रोजेक्ट के तहत चल रहे 8 लाइन के निर्माण कार्य के कारण सुल्तानपुर कस्बे से झोटोली गांव में जा रही मुख्य संपर्क सड़क काफी जर्जर हो चुकी है। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे हो चुके हैं। जिसके चलते लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वाहन चालकों दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। </p>
<p><strong>अंडर पास भी बना परेशानी का सबब</strong><br />जानकारी के अनुसार इस मार्ग से हो कर बाबा मान शाह वली की दरगाह पर श्रद्धालु जाते हैं। उन्हें भी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही इस मार्ग से होकर नैनवां-दूदू हाइवे मार्ग भी जुड़ता है। लोगों को आवाजाही में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>अधिकारियों को कराया था समस्या से अवगत</strong><br />झोटोली गांव के ग्रामीणों ने अंडरपास बनाते समय 8 लाइन के अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया था। लेकिन उन्होंने ग्रामीणों की एक नहीं सुनी। अपने हिसाब से अंडरपास का कार्य किया। जो सड़क से करीब 2 से 3 फीट नीचे होने के कारण उसमें बारिश का पानी भर जाने से लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ा। समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो गांव का संपर्क भी नगर पालिका से कट सकता है। नगर पालिका बनने के बाद झोटोली गांव नगर पालिका क्षेत्र में ही आ रहा है। </p>
<p><strong>ग्रामीणों को करना पड़ा था आंदोलन</strong><br />झोटोली निवासी राजू गुर्जर का कहना है कि भारत माला प्रोजेक्ट के तहत चल रहे आठ लाइन निर्माण कार्य के दौरान गांव को जोड़ने के लिए अंडरपास बनाया गया था। अंडर पास बनाते समय उसमें सुचारू पानी की निकासी नहीं होने से लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जिस समय अंडरपास का निर्माण कार्य शुरू हुआ था, उस समय भी लोगों ने आंदोलन करते हुए पानी भरने की समस्या बताई थी। लेकिन उस समय लोगों को पानी निकासी की सुचारू व्यवस्था करने का आश्वासन दिया गया था। इसके अलावा गांव को सुल्तानपुर नगर से जोड़ने वाली सड़क पर भी जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे होने के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। लेकिन इस ओर किसी का ध्यान भी नहीं है। </p>
<p><strong>सड़क से नीचा है अंडरपास</strong><br />राहगीरों ने बताया कि अंडरपास सड़क से नीचा होने के कारण उसमें बारिश के दिनों में पानी भर गया था। जिससे लोगों को आवाजाही में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। बारिश में पानी भरने से आसपास की मिट्टी भरकर आने से उसमें कीचड़ भी हो गया है।  पानी की सुचारू निकासी नहीं होने के कारण उसमें से पानी नहीं निकल पा रहा है। पानी निकालने की खानापूर्ति के लिए अंडरपास के समय जेसीबी की सहायता से नालों का निर्माण किया गया था। लेकिन उन्हें सुचारू रूप से नहीं बना पाने के कारण पानी नहीं निकलने से अंडरपास में पानी भरा रहता है। जिसके चलते लोगों को पैदल निकलने में एवं बाइक सवारों को भी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। </p>
<p>सर्वाधिक परेशानी पैदल यात्रियों को होती है। उन्हें गड्ढों में हो कर गुजरना पड़ता है। साथ ही गड्ढों में जब पानी भरा होता है तो उन्हें अपने कपड़े गंदे होने का भी डर रहता है।<br /><strong>-रवि शर्मा, श्रद्धालु </strong></p>
<p>बाबा मान शाह वली दरगाह हिंदू मुस्लिम एकता का प्रतीक है। जहां पर गुरुवार को श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहता है। यहां पर हिंदू मुस्लिम सभी लोग दर्शन करने के लिए आते हैं। वाहन चालकों को भी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कई वाहन गड्ढों के कारण खराब हो चुके हैं। गड्ढे में गिरने से उन्हें आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा है। बड़े-बड़े गड्ढों में वाहन पलटने की भी संभावना बनी रहती है।<br /><strong>-अब्दुल जाकिर, सुरेश बैरवा, श्रद्धालु   </strong></p>
<p>दरगाह के रास्ते में अंडर पास से गुजरते हुए कीचड़ के कारण लोगों के कपड़े गंदे हो जाते हैं। जिससे उन्हें परेशानियां होती है। दरगाह तक जाने वाला मार्ग जर्जर हो चुका है। <br /><strong>-मांगीलाल उर्फ मांगू अली, सदर, दरगाह बाबा मानशाह वली </strong></p>
<p>इस मामले में एनएचआई डिपार्टमेंट को कई बार अवगत करा दिया गया है कि भारत माला प्रोजेक्ट के तहत बड़े वाहनों के कारण सड़क क्षतिग्रस्त हुई है, उसकी मरम्मत कराई जाए। सड़क की स्वीकृति हो चुकी है। सड़क की मरम्मत करने के बाद उसे दुरुस्त करा दिया जाएगा।<br /><strong>-हुकुमचंद मीणा, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Dec 2022 17:10:24 +0530</pubDate>
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