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                <title>बारिश में तालाब बन जाता है मेहन्दड़ी-भगवानपुरा मार्ग,मरीजों को चारपाई पर ले जाने की मजबूरी</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रामीणों ने स्थायी समाधान और जल्द कार्रवाई की मांग की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/mehandri-bhagwanpura-road-turns-into-a-pond-during-rains--patients-forced-to-be-carried-on-cots/article-162553"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-(1)5.png" alt=""></a><br /><p>खानपुर। खानपुर के जोलपा ग्राम पंचायत मुख्यालय के अंतर्गत आने वाले मेहन्दड़ी गांव के ग्रामीण लंबे समय से बदहाल सड़क की समस्या से परेशान हैं। मेहन्दडी से भगवानपुरा ग्राम पंचायत मुख्यालय को जोड़ने वाले मार्ग पर करीब दो दशक पुराना खरंजा बना हुआ है। बारिश के दौरान यह रास्ता पानी से लबालब होकर तालाब का रूप ले लेता है, जिससे ग्रामीणों का पंचायत मुख्यालय और आसपास के गांवों से संपर्क प्रभावित हो जाता है। बारिश के दिनों में हालात इतनेखराब हो जाते हैं कि बीमार बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को से चारपाई के सहारे पानी भरे रास्ते निकालना पड़ता है। </p>
<p>वहीं, सड़क किनारे स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय मेहन्दड़ी में मेहन्दड़ी के अलावा सुवालिया, खुजां और भगवानपुरा सहित करीब एक दर्जन गांवों के विद्यार्थी पढ़ने आते हैं। जलभराव के कारण विद्यार्थियों को भी आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने समस्या को लेकर राजस्थान संपर्क पोर्टल, जनसुनवाई तथा ज्ञापन के माध्यम से सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), उपखंड प्रशासन, जिला प्रशासन और जिला कलेक्टर को कई बार अवगत कराया, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 1998 में विधायक कोष से खरंजा स्वीकृत हुआ था। इसके बाद से लंबा समय बीतने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।</p>
<p><strong>एक सप्ताह का अल्टीमेटम</strong><br />ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर उच्च स्तरीय पुलिया निर्माण के लिए बजट आवंटित नहीं किया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने समस्या के स्थायी समाधान की मांग करते हुए प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की अपील की है।</p>
<p><strong>पाइप कंवर्ट के प्रस्ताव से नाराजगी</strong><br />ग्रामीणों के अनुसार पीडब्ल्यूडी ने समस्या के समाधान के लिए दो पाइप कंवर्ट निर्माण का प्रस्ताव दिया है, लेकिन ग्रामीण इसे उचित समाधान नहीं मान रहे। उनका कहना है कि पाइप कंवर्ट बनने से रास्ता और नीचे हो जाएगा तथा जलभराव की समस्या बनी रहेगी। ग्रामीणों ने इसके बजाय उच्च स्तरीय पुलिया निर्माण की मांग की है।</p>
<p>पीडब्ल्यूडी द्वारा केवल दो पाइप कंवर्ट निर्माण का प्रस्ताव दिया जा रहा है, जो इस समस्या को और अधिक बढ़ा देगा। पाइप कंवर्ट बनने से खंरंजा और नीचे हो जाएगा, जिससे वहां से निकलना और भी मुश्किल हो जाएगा इसलिए हम इसकी जगह एक उच्च स्तरीय पुलिया की मांग कर रहे हैं।<br /><strong>- गिरिराज बाई, कस्बेवासी</strong></p>
<p>सड़क किनारे स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में महेंदडी के अलावा सुवालिया, खुजा और भगवानपुरा सहित करीब एक दर्जन गांवों के बच्चे पढ़ने आते हैं। खराब रास्ते के कारण स्कूली बच्चों को रोजाना सबसे ज्यादा मशक्कत और परेशानियों का सामना करना पड़ता है।<br /><strong>- राहुल बैरवा, कस्बेवासी</strong></p>
<p>यदि एक सप्ताह के भीतर उच्च स्तरीय पुलिया निर्माण हेतु बजट का आवंटन नहीं किया गया, तो हम और अधिक कड़ कदम उठाने पर मजबूर होंगे।<br /><strong>-अभिषेक वर्मा, कस्बेवासी</strong></p>
<p>ढाई दशक से ज्यादा समय बीत गया लेकिन महेंदडी से भगवानपुरा मार्ग पर बना यह पुराना खरंजा आज भी जस का तस है। बारिश के दिनों में यह रास्ता पूरी तरह से तालाब का रूप ले लेता है, जिससे गांव का संपर्क पंचायत मुख्यालय और पूरे उपखंड क्षेत्र से पूरी तरह कट जाता है।<br /><strong>- अंकित कस्बेवासी</strong></p>
<p>सड़क मार्ग खराब होने के कारण बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के बीमार पड़ने पर उन्हें एम्बुलेंस या वाहन के बजाय चारपाई के सहारे रास्ता पार करवाना पड़ता है।<br /><strong>- हरलाल बेरता, कस्बेवासी</strong></p>
<p>इस समस्या को लेकर कई बार राजस्थान संपर्क पोर्टल, जनसुनवाई और ज्ञापनों के माध्यम से सूचित किया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।<br /><strong>- दीनदयाल चौबदार, कस्बेवासी</strong></p>
<p>सीडी वर्ग के प्रस्ताव मांगे गए थे, उसमें जेएलजी प्रस्ताव आ गया था वह स्वीकृत हो गया है। दो पाइप हो चुके हैं अभी एन आई दी खोल रखी है जैसे ही एनआईटी मिल जाएगी तो कार्य चालू हो जाएगा। <br /><strong> - प्रदीप चौधरी, सहायक अभियंता, पीडब्लूडी खानपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 17:37:07 +0530</pubDate>
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                <title> जमीन के विवाद में अटकी श्मशान घाट की सुविधाएं</title>
                                    <description><![CDATA[बारिश में अंतिम संस्कार के दौरान परिजनों को उठानी पड़ती है परेशानी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/cremation-ground-facilities-stalled-due-to-land-dispute/article-162559"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-(2)2.png" alt=""></a><br /><p>सांगोद। आजादी के 78 वर्ष बाद भी जिले के दूसरे सबसे बड़े उपखंड सांगोद के कई गांव बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। सांगोद पंचायत समिति के काशीपुरा गांव में स्थिति ऐसी है कि ग्रामीणों को अपने परिजनों का अंतिम संस्कार भी सम्मानजनक तरीके से कराने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। गांव के श्मशान घाट पर न टीनशेड है, न बैठने की व्यवस्था और न ही बारिश से बचाव के लिए कोई स्थायी इंतजाम। बरसात के दिनों में अंतिम संस्कार करना ग्रामीणों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।</p>
<p>ग्रामीणों के अनुसार बारिश होने पर श्मशान घाट में रखी लकड़ियां भीग जाती हैं, जिससे चिता जलाने में काफी परेशानी होती है। अंतिम यात्रा में शामिल लोगों को खुले आसमान के नीचे बारिश में खड़े रहना पड़ता है। कई बार ग्रामीण तिरपाल बांधकर किसी तरह अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करते हैं। ऐसे में जीवन के अंतिम पड़ाव पर भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव ग्रामीणों को खल रहा है।</p>
<p><strong>प्रशासन से कई बार लगा चुके हैं गुहार</strong><br />ग्रामीणों का कहना है कि श्मशान घाट पर टीनशेड सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग कई बार ग्राम पंचायत एवं प्रशासन के समक्ष रखी जा चुकी है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ। बारिश के मौसम में हर बार यही स्थिति सामने आती है और किसी परिवार में मृत्यु होने पर परिजनों को दुख की घड़ी में अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>ग्रामीणों ने की स्थायी समाधान की मांग</strong><br />ग्रामीणों ने श्मशान घाट पर टीनशेड, पक्का चबूतरा, पानी की व्यवस्था और पहुंच मार्ग जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि अंतिम संस्कार जैसी जरूरी व्यवस्था के लिए ग्रामीणों को मौसम की मार नहीं झेलनी पड़े, इसके लिए जरूरी है।</p>
<p>काशीपुरा में श्मशान घाट केलिएजिस भूमि का आवंटन किया गया था, वह वर्तमान में विवादित है। भूमि विवाद के चलते वहां विकास कार्य नहीं कराए जा सके हैं। राजस्व विभाग की ओर से वैकल्पिक भूमि आवंटित किए जाने के बाद श्मशान घाट का निर्माण एवं वहां आवश्यक सुविधाएं विकसित करने की कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>- सूरज वर्मा, ग्राम विकास अधिकारी, काशीपुरा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 17:01:39 +0530</pubDate>
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                <title>सुवास पंचायत में स्वच्छता व्यवस्था फेल, गांवों में गंदगी बनी मुसीबत</title>
                                    <description><![CDATA[ नालियों की सफाई और कचरा संग्रहण की व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग तेज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/sanitation-system-fails-in-suvas-panchayat--filth-in-villages-becomes-a-major-issue/article-161428"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/111200-x-600-px)-(6)6.png" alt=""></a><br /><p>किशनगंज। केंद्र एवं  राज्य सरकार द्वारा संचालित स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत भले ही स्वच्छत को लेकर लगातार दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हों, लेकिन किशनगंज पंचायत समिति क्षेत्र की ग्राम पंचायत सुवास में जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। ग्राम ग्राम सुवास, नयागांव सहित पंचायत क्षेत्र के कई गांवों में नियमित सफाई व्यवस्था नहीं होने से जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में नालियां गंदगी से अटी पड़ी हैं, जिससे दुर्गंध फैल रही है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ने से संक्रामक बीमारियों का खतरा बना हुआ है। स्वच्छता अभियान के तहत लाखों रुपए खर्च होने के बावजूद धरातल पर सफाई व्यवस्था प्रभावी दिखाई नहीं दे रही है।</p>
<p><strong>निर्देशों के बाद भी हालात जस के तस</strong><br />ग्रामीणों के अनुसार पंचायत समिति के अधिकारियों द्वारा समय-समय पर निरीक्षण कर सफाई व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए जाते रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। इससे पंचायत क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आ रही है।</p>
<p><strong>मंत्री के निर्देशों की नहीं हो रही पालना</strong><br />स्वच्छता को लेकर दिए जा रहे उच्च अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के निर्देशों की प्रभावी पालना नहीं हो रही है। उन्होंने मांग की है कि गांवों में नियमित सफाई कर्मियों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, नालियों की समय पर सफाई कराई जाए और स्वच्छ भारत मिशन के नियमों का सख्ती से पालन करवाया जाए।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />सुवास गांव के मुख्य सड़क पर नालिया निर्माण नहीं होने से पानी सड़क पर बहता रहता है। गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है। कई बार शिकायत करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती।<br /><strong>-लेखराज, ग्रामीण</strong></p>
<p>बरसात में हालात और खराब हो जाते हैं। घरों के सामने गंदगी और पानी भरने से मच्छर, मक्खी पैदा होने से बच्चो और बुजुर्गों के बीमार होने का डर बना रहता है।<br /><strong>-सुनील, ग्रामीण</strong></p>
<p>स्वच्छ भारत अभियान सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आता है। गांव में नियमित सफाई हो और कचरा उठाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।<br /><strong>- गौरव, ग्रामीण</strong></p>
<p>गांव का निरीक्षण कर नाली निर्माण, कचरा संग्रहण, नियमित सफाई को लेकर ग्राम विकास अधिकारी को निर्देशित किया गया है।<br /><strong>- नवल किशोर मीणा,कार्यवाहक विकास अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 15:11:28 +0530</pubDate>
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                <title>दो वर्ष में उखड़ी सड़क, निर्माण गुणवत्ता पर ग्रामीणों का सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[निमोद-बड़गांव जर्जर सड़क: गड्ढों और बबूल की झाड़यों से बढ़ा हादसों का खतरा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/road-surface-disintegrated-within-two-years--villagers-question-construction-quality/article-158843"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)2.png" alt=""></a><br /><p>सांवतगढ़। निमोद से बड़गांव को जोड़ने वाली मुख्य सड़क बदहाल स्थिति के कारण क्षेत्रवासियों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे होने से वाहन चालकों, राहगीरों और किसानों को प्रतिदिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। <br />सबसे अधिक परेशानी दोपहिया वाहन चालकों, स्कूली विद्यार्थियों, महिलाओं और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है। बारिश के दौरान गड्डों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है।</p>
<p>ग्रामीणों ने बताया कि यह सड़क निमोद, बड़गांव सहित आसपास के कई गांवों का प्रमुख संपर्क मार्ग है। इसी रास्ते से किसान कृषि उपज मंडी तक पहुंचाते हैं तथा विद्यार्थी स्कूल-कॉलेज आते-जाते हैं। सड़क की जर्जर स्थिति के कारण आवागमन जोखिमभरा हो गया है। <br />उपसरपंच लटूरलाल बेरवा एवं आशाराम मीपणा ने बताया कि सड़क किनारे बबूल की घनी झाड़ियां उग आने से मार्ग संकरा दिखाई देता है।</p>
<p>कई स्थानों पर शाखाएं सड़क तक फैल चुकी हैं, जिससे सामने से आने वाले वाहन दिखाई नहीं देते और दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया। निर्माण के दो वर्ष पूरे होने से पहले ही डामर उखड़ गया और सड़क गड्डों में तब्दील हो गई। ग्रामीणों ने सड़क की तत्काल क्षतिग्रस्त हिस्सों के मरम्मत, पुनर्निर्माण तथा सड़क किनारे उगी झाड़ियों की शीघ्र कटाई कराने की मांग की है।</p>
<p><strong>यह कहा अधिकारी ने</strong><br />मैं स्वयं मौके का निरीक्षण करूंगा। जहां-जहां सड़क की मरम्मत की आवश्यकता होगी, वहां शीघ्र मरम्मत करवाई जाएगी। साथ ही सड़क के दोनों ओर उगे बबूल के पेड़ों एवं झाड़ियों की कटाई भी जल्द करवाई जाएगी, जिससे आवागमन सुरक्षित हो सके।<br /><strong>- सोनू नागर, एईएन सार्वजनिक निर्माण विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 14:32:08 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का : विद्युत निगम ने समय रहते खतरा हटाकर उपभोक्ताओं को राहत पहुंचाई</title>
                                    <description><![CDATA[यह झुकाव पिछले बारिश के समय से बना हुआ था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/impact-of-the-report--electricity-corporation-provides-relief-to-consumers-by-timely-eliminating-hazard/article-153795"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(3)30.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। क्षेत्र के मानपुरा मार्ग स्थित बांसी जीएसएस पर पहुंच रही 33 केवी विद्युत लाइन के झुकाव की समस्या समाचार प्रकाशित होने के बाद दूर कर दी गई। संबंधित निगम के अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बुधवार दोपहर झुके हुए पोल को बदलकर लाइन को सुरक्षित दूरी पर स्थापित कराया।</p>
<p>जानकारी के अनुसार जयपुर विद्युत वितरण निगम की नैनवां से बांसी जीएसएस तक पहुंचने  वाली 33 केवी लाइन का एक पोल डोडी फीडर की 11 केवी लाइन की ओर झुक गया था। दोनों लाइनों  के बीच दूरी कम होने से क्षेत्र में हादसे की आशंका बनी हुई थी। यह झुकाव पिछले बारिश के समय से बना हुआ था। मानपुरा-उंरासी सहित आसपास के आधा दर्जन गांवों के ग्रामीण एवं  राहगीर इसी मार्ग से आवागमन करते हैं। स्थानीय लोगों का कहना था कि लाइन का झुकाव कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता था। इस समस्या को लेकर दैनिक नवज्योति पत्र ने 13 मई,  बुधवार को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। समाचार प्रकाशित होने के बाद निगम के जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया और तुरंत कार्रवाई करते हुए झुकी हुई लाइन को बदलवाया। लाइन दुरुस्त होने से क्षेत्रीय उपभोक्ताओं एवं बांसी जीएसएस कर्मचारियों को राहत मिली है। ग्रामीणों ने त्वरित समाधान के लिए विद्युत निगम एवं समाचार पत्र की सराहना करते हुए आभार जताया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 14:25:11 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का  : पुलिया निर्माण के साथ बायपास बनने से आवागमन हुआ सुगम</title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति में खबर प्रकाशित होने के बाद जागा विभाग, राहगीरों को मिली बड़ी राहत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/impact-of-the-report---construction-of-culvert-and-bypass-eases-commute/article-151438"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(2)35.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेडा। क्षेत्र के बांसी-देई मार्ग पर बांडी खाली नाले पर क्षतिग्रस्त पुलिया के स्थान पर सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा उच्च पुलिया का निर्माण कार्य तेजी से जारी है। निर्माण के साथ ही संवेदक द्वारा पैदल एवं दोपहिया वाहन चालकों के लिए वैकल्पिक बायपास मार्ग भी तैयार कर दिया है, जिससे आवागमन सुगम हो गया है।</p>
<p><strong>उच्च क्षमता की नई पुलिया का निर्माण शुरू </strong></p>
<p>जानकारी के अनुसार गत मानसून सत्र में अतिवृष्टि के कारण दुगारी कनकसागर झील का ओवरफ्लो पानी बांसी तालाब में पहुंचा था। लंबे समय तक तेज बहाव के चलते नाले की छोटी पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिससे मार्ग अवरुद्ध हो गया था। इस समस्या को देखते हुए सार्वजनिक निर्माण विभाग ने यहां उच्च क्षमता की नई पुलिया का निर्माण शुरू कराया। प्रारंभ में निर्माण स्थल पर वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था नहीं होने से राहगीरों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही थी। दोपहिया वाहन चालकों को करीब दो किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती थी, जिससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी हो रही थी।</p>
<p><strong>दैनिक नवज्योति समाचार पत्र में इस समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद विभागीय अधिकारियों ने संज्ञान लिया </strong></p>
<p>दैनिक नवज्योति समाचार पत्र में इस समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद विभागीय अधिकारियों ने संज्ञान लिया और अब निर्माण स्थल के पास ही बायपास मार्ग तैयार कर दिया गया है। इससे पैदल एवं दोपहिया वाहन चालकों को राहत मिली है। वर्तमान में पुलिया निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है और शीघ्र ही पूर्ण होने की संभावना है। इस मार्ग से सीएचसी, विद्यालयों एवं आसपास के दो दर्जन से अधिक गांवों के लोग प्रतिदिन आवागमन करते हैं। बायपास बनने से सभी को सुविधा मिली है और क्षेत्रवासियों ने इस पहल की सराहना की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 14:57:29 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ईसाटोरी गांव आज भी पक्की सड़क से वंचित, इस रास्ते से जुड़े  हैं दर्जनों गांव </title>
                                    <description><![CDATA[ग्रामीणों ने दी चुनाव बहिष्कार की चेतावनी, गांव में नहीं पहुंच रही एम्बुलेंस।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/isatori-village-still-lacks-a-paved-road--dozens-of-villages-are-connected-by-this-route/article-141449"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/85641.png" alt=""></a><br /><p>समरानियां। ग्राम पंचायत हाटरी के अंतर्गत आने वाले ग्राम ईसाटोरी सड़क बनी है और न ही ऐसा कोई वैकल्पिक मार्ग है, जिससे बरसात के समस्या से आक्रोशित मौसम में बीमार लोगों को अस्पताल तक सुरक्षित पहुंचाया जा सके। इस ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी समाधान नहीं हुआ तो वे आगामी चुनाव का बहिष्कार करेंगे। ग्रामीणों ने बताया कि हर साल चुनाव के समय नेता गांव में आते हैं, बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही सब वादे हवा हो जाते हैं और गांव की हालत जस की तस बनी रहती है। ग्रामीणों ने बताया कि ईसाटोरी गांव से होकर दर्जनों  गांवों का आवागमन होता है। यह रास्ता रोजमर्रा की जरूरतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन सड़क खराब होने से लोगों का समय भी अधिक लगता है और दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है।</p>
<p><strong>बारिश में हालात बद से बदतर</strong><br />बरसात के मौसम में स्थिति और ज्यादा गंभीर हो जाती है। यदि किसी व्यक्ति की तबीयत खराब हो जाए तो एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। मजबूरी में ग्रामीणों को मरीजों को मध्यप्रदेश के अस्पतालों में ले जाना पड़ता है। ग्राम पंचायत ने गांव के अंदर तक सीसी रोड नहीं बनवाई है। कच्चे रास्तों पर कीचड़ भर जाने से बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>हर चुनाव में वादे, लेकिन जमीन पर काम शून्य</strong><br />ग्रामीणों का कहना है कि हर चुनाव से पहले जनप्रतिनिधि गांव में पहुंचते हैं और सड़क निर्माण के बड़े-बड़े वादे करते लेकिन चुनाव समाप्त होते ही कोई सुध लेने नहीं आता। वर्षों से ग्रामीण कच्चे, कीचड़ भरे रास्तों पर चलने को मजबूर हैं ।</p>
<p><strong>ग्रामीणों की मांग: जल्द मिले स्थायी समाधान</strong><br />ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि फॉरेस्ट विभाग से समन्वय कर जल्द एनओसी दिलवाई जाए और सड़क निर्माण कार्य तुरंत शुरू किया जाए। उनका कहना है कि सड़क केवल सुविधा नहीं बल्कि जीवन और मृत्यु का सवाल बन चुकी है।</p>
<p>इस रास्ते से दर्जनों गांव जुड़े हुए हैं और रोजाना लोग इसी मार्ग से आवागमन करते हैं, लेकिन सड़क न होने के कारण समय भी ज्यादा लगता है और परेशानी भी होती है।<br /><strong>-सुनील शिवहरे, ग्रामीण</strong></p>
<p>बरसात के दिनों में यदि कोई बीमार हो जाए, तो गांव से अस्पताल ले जाना बेहद मुश्किल हो जाता है। मजबूरी में कई बार लोगों को इलाज के लिए मध्यप्रदेश की ओर जाना पड़ता है।<br /><strong>- करण सहरिया, ग्रामीण</strong></p>
<p>ग्राम पंचायत द्वारा गांव के अंदर तक सीसी रोड तक नहीं बनवाई गई है, जिससे आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।<br /><strong>- मुरारी प्रजापति, ग्रामीण</strong></p>
<p>सहरिया बस्ती के रोड का कार्य जल्द ही शुरू किया जाएगा।<br /><strong>- सियाराम, वीडीओ</strong></p>
<p>सड़क निर्माण की स्वीकृति जारी हो चुकी है, लेकिन फॉरेस्ट विभाग की एनओसी अभी तक नहीं मिलने के कारण कार्य शुरू नहीं किया जा सका है।<br /><strong>-बसंत गुप्ता, एएक्सईएन, पीडब्ल्यूडी</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Jan 2026 17:02:08 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का - डुंडी में पेयजल संकट से मिली राहत, नलों में पानी की सप्लाई हुई सुचारू </title>
                                    <description><![CDATA[जल जीवन मिशन योजना के अंतर्गत  नल व्यवस्था की समस्या को लेकर दैनिक नवज्योति विभाग को अवगत करवाया था ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/impact-of-the-news---relief-from-the-drinking-water-crisis-in-dundi--tap-water-supply-restored/article-129621"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/y-of-news-(1)4.png" alt=""></a><br /><p>खानपुर। खानपुर क्षेत्र के डुंडी ग्राम में नल व्यवस्था को लेकर समस्या हो रही थी। इस समस्या को लेकर दैनिक नवज्योति टीम ने मुद्दा उठाया था  कि जल जीवन मिशन योजना के तहत नल लगवाए गए थे लेकिन उन नलों में पानी नहीं आ रहा था तो ग्रामीणों की दैनिक नवज्योति टीम से बात हुई नवज्योति टीम ने सहायक अभियंता मुश्ताक को अवगत कराया। मुस्ताक अली ने तुरंत समस्या का समाधान किया और डुंडी गाडरवाड़ा में नहीं आ रही नल सप्लाई को सुचारू रूप से चालू किया, इसके लिए ग्राम वासियों ने सहायक अभियंता मुश्ताक अली और नवज्योति टीम को धन्यवाद प्रेषित किया।</p>
<p>मुश्ताक अली खानपुर सहायक अभियंता ने बताया कि उपखण्ड खानपुर में 38 ग्राम पंचायत 1 नगर पालिका व 207 ग्राम है। उपखण्ड क्षेत्र में खानपुर कस्बे के अलावा लगभग 50 ग्रामो में  नल के माध्यम जल सप्लाई की जाती है।उपखण्ड क्षेत्र में 2020-21  से पहले  खानपुर कस्वे के अलावा केवल 7 ग्रामों में नल के माध्यम से जल सप्लाई की जाती थी। जल  जीवन मिशन आने बाद उपखण्ड खानपुर से  लगभग 50 ग्राम नल से जुड़े है । जलदाय विभाग में एक सहायक अभियंता दो कनिष्ठ अभियंता के पद स्वीकृत है, लेकिन कनिष्ठ अभियंता के दोनों पद खाली होने के कारण पूरा भार अकेले सहायक अभियन्ता के ऊपर है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Oct 2025 14:40:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एसडीआरएफ ने टोंक के अलग-अलग गांवों से 46 लोगों को सुरक्षित निकाला</title>
                                    <description><![CDATA[टोंक जिले में भारी बारिश के बीच फंसे लोगों को एसडीआरएफ की टीमों ने सुरक्षित निकाल लिया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/sdrf-rescued-46-people-from-different-villages-of-tonk/article-124581"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(12)6.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। टोंक जिले में भारी बारिश के बीच फंसे लोगों को एसडीआरएफ की टीमों ने सुरक्षित निकाल लिया। इसके लिए टीमें अलग-अलग गांवों में तैनात होकर रेस्क्यू आॅपरेशन चला रही हैं। एसडीआरएफ ने उनियारा टोंक के तहत जलमग्न हिस्सों में फंसे 39 और पुलिस थाना अलीगढ़ जिला टोंक के तहत सहादत नगर और खुंडिया गांव में फंसे सात ग्रामीणों को सुरक्षित निकाला। </p>
<p><strong>पहला मामला </strong><br />एसडीआरएफ कमाण्डेंट राजेन्द्र सिसोदिया ने बताया कि 23 अगस्त 2025 को सुबह 8:10 बजे पुलिस कन्ट्रोल रूम टोंक से उनियारा कस्बे में कुछ नागरिकों के फंसे होने की सूचना मिली। इस सूचना पर रेस्क्यू टीम प्रभारी 9 जवानों की टीम तथा आपदा राहत उपकरणों के साथ मौके पर पहुंचे और कस्बे के निचले इलाकों में 4-5 फीट जलभराव में फंसे लोगों को निकालने के लिए मोटर बोट की सहायता ली गई। बोट से उनियारा कस्बे के निचले इलाके में स्थित ढाणी (मोर झालों की ढाणी) में पहुंचे, वहां फंसे 4 परिवारों के 22 ग्रामीणों (8 पुरुष, 5 महिला, 9 बच्चों) को सुरक्षित निकाला। इसके बाद डाबला गांव में फंसे 14, उनियारा कस्बे में स्थित महाविद्यालय में फंसे तीन कॉलेज स्टाफ को बचाया। इस तरह 39 ग्रामीणों और 40 मवेशियों का रेस्क्यू किया। </p>
<p><strong>दूसरा मामला</strong><br />दोपहर एक बजे टोंक के अलीगढ़ में टापू बने सहादत नगर और खुंड़िया गांव में कुछ ग्रामीणों के फंसे होने की सूचना मिली। नौ जवानों की टीम ने मौके पर पहुंचकर खुंड़िया गांव में फंसे 4 ग्रामीणों को रेस्क्यू किया। इस तरह कुल सहादत नगर और खुंड़िया गांव में फंसे कुल सात ग्रामीणों और 20 मवेशियों का रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर  पहुंचाया गया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 Aug 2025 15:02:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कई गांव श्मशान से वंचित, खेतों में अंतिम संस्कार</title>
                                    <description><![CDATA[शव के पास खड़े लोग घंटों भीगते रहे और ग्रामीणों की आंखों के सामने वह मंजर किसी भयावह तस्वीर से कम नहीं था। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/many-villages-deprived-of-crematorium--last-rites-performed-in-fields/article-124503"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/oer-(1)20.png" alt=""></a><br /><p>छीपाबडौद।  छीपाबडौद तहसील क्षेत्र के आसपास आज भी ऐसे गांव हैं। जहां श्मशान घाट तक नहीं है। गगचाना ग्राम पंचायत के नियाना गांव की हकीकत जानकर दिल पसीज जाएगा। गांव में जब कोई गुजर जाता है तो परिजन शव को खेत में ले जाते हैं और वहीं अंतिम संस्कार करते हैं। सोचिए, बारिश हो या धूप  खुले आसमान के नीचे ही चिता सजाई जाती है। न टीन शेड, न चबूतरा, न कोई सुविधा। 21वीं सदी में भी इंसान की आखिरी यात्रा इतनी बेबस हो सकती है  यह किसी को भी झकझोर देगा।</p>
<p><strong>बारिश में बुझती रही चिता</strong><br />हाल ही में गांव के श्रवणलाल मेघवाल का निधन हुआ। परिजन जब अंतिम संस्कार करने पहुंचे तो आसमान से मूसलधार बारिश शुरू हो गई। कई बार चिता में आग लगाने की कोशिश हुई, लेकिन हर बार आग बुझ गई। शव के पास खड़े लोग घंटों भीगते रहे और ग्रामीणों की आंखों के सामने वह मंजर किसी भयावह तस्वीर से कम नहीं था। कई घंटे बाद बड़ी मुश्किल से चिता जली। ग्रामीण कहते हैं कि मौत के बाद इंसान को शांति मिलनी चाहिए, लेकिन हमारे गांव में तो अंतिम संस्कार ही सबसे बड़ी पीड़ा बन गया है। बरसों से यही हाल है, पंचायत को बार-बार बताया गया पर कोई समाधान नहीं हुआ।</p>
<p><strong>पंचायत की चुप्पी और सिस्टम पर सवाल</strong><br />ग्राम पंचायत और प्रशासन की लापरवाही अब सवालों के घेरे में है। आखिर कब तक इस गांव के लोग अपने अपनों को खेतों में जलाने को मजबूर रहेंगे? क्या यह सभ्य समाज के माथे पर कलंक नहीं है?</p>
<p><strong>यह अकेले नियाना की हकीकत नहीं</strong><br />सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आज भी कई गांव ऐसे है। जहां श्मशान घाट तक नहीं बने हैं। अंतिम संस्कार की व्यवस्था के लिए ग्रामीण खेतों, नालों या खुले स्थानों का सहारा लेते हैं। यह तस्वीर सिर्फ नियाना की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की हकीकत बयां करती है।</p>
<p><strong>गांव के बुजुर्गों ने आंसू भरी आंखों से कहा</strong><br />"हमने अपने माता-पिता, रिश्तेदारों सभी का अंतिम संस्कार ऐसे ही खेतों में किया है। बरसात में सबसे ज्यादा तकलीफ होती है। कई बार पंचायत को कहा, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई।"</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />यह बेहद दु:खद है कि आज भी हमारे गांव में श्मशान घाट नहीं है। पंचायत और प्रशासन से कई बार गुहार लगाई, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। <br /><strong>- बृजेश वैष्णव, पूर्व वार्ड पंच </strong></p>
<p>बरसात के दिनों में शव जलाना सबसे बड़ी मुश्किल बन जाता है। कीचड़ में फिसलते हुए खेत तक पहुंचना पड़ता है और चिता जलाना तो और भी कठिन होता है। <br /><strong>- मेघराज नागर, ग्रामीण </strong></p>
<p>सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन हमारे गांव के लोग अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार तक सम्मानपूर्वक नहीं कर पा रहे हैं। यह व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।<br /><strong>- लड्डूलाल, ग्रामीण </strong></p>
<p> श्मशान घाट न होना समस्या है। भूमि चयन नहीं होने के कारण मामला अटका हुआ है। जल्द ही इस दिशा में कदम बढ़ाएंगे।<br /><strong> -द्रौपदी धाकड़, सरंपच प्रशासक </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Aug 2025 16:03:09 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - गांवों में पहुंचे अधिकारी, किसानों को कर रहे जागरूक</title>
                                    <description><![CDATA[किसानों को भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने और कार्बनिक खाद का अधिकाधिक उपयोग बढ़ाने के सम्बंध में जागरूक किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-the-news---officials-reached-the-villages--making-farmers-aware/article-113959"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/42.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । जिले में खेतों की मिट्टी की सेहत खराब होती जा रही है। पोषक तत्वों की कमी के कारण फसलों के उत्पादन के साथ गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है।  केमिकल तत्व मिट्टी में घुलते जा रहे है। ऐसे में अब सरकार द्वारा वैकल्पिक उर्वरकों का उपयोग बढ़ाकर रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने के लिए पी. एम. प्रणाम योजना शुरू की गई। इसके तहत कोटा जिले में कृषि विभाग की ओर से सोमवार को जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कृषक गोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें किसानों को भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने और कार्बनिक खाद का अधिकाधिक उपयोग बढ़ाने के सम्बंध में जागरूक किया गया। किसानों को बताया गया कि मिट्टी का कार्बनिक स्तर कम हो गया है। इसके शून्य स्तर पर आने पर खेती करना अंसभव हो जाता है और जमीन अनुपजाऊ बन जाती है।</p>
<p><strong>पहले दिन यहां पर हुई गोष्ठियां</strong><br />कृषि विभाग के अनुसार बुवाई के समय किसानों द्वारा फॉस्फेटिक उर्वरक के रूप में डीएपी के उपयोग का प्रचलन अधिक है। कृषकों का फॉरपोटिक उर्वरक के रूप में केवल डीएपी पर अधिक निर्भर होने के कारण इसे उपलब्ध कराने में कठिनाई आती है एवं भूमि में संतुलित पोषक तत्वों की भी आपूर्ति नहीं होती है। इस कारण किसानों को जागरूक करने के लिए समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन के तहत जिले में कृषक गोष्ठियों का आयोजन शुरू किया गया है। सोमवार को जिले के चेचट, पीपल्दा, काल्याखेड़ी व देवलीखुर्द में गोष्ठी आयोजित की गई। इसमें एसएसपी के अधिक से अधिक उपयोग करने के बारे में किसानों को प्रोत्साहित किया गया। अब नैनो उर्वरको के उपयोग को बढ़ावा दिया जाकर परम्परागत उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के प्रयास किए जा रहे है। </p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />जिले के खेतों में मिट्टी में सूक्ष्म पोषक तत्वों का प्रयोग नहीं के कारण फसलों में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी के लक्षण मिले हैं। इस सम्बंध में दैनिक नवज्योति में 11 मई को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि उर्वरा शक्ति कमजोर होने से भी मिट्टी से पैदा हो रही उपज में पोषक तत्वों की कमी होने लगी है। केमिकल तत्व मिट्टी में घुलते जा रहे है। इसमें पीलापन, शिराओं का सफेद होना, बौनापन, फल फटना आदि लक्षण प्रमुख हैं। इससे फसलोत्पादन में गिरावट आती है। इसलिए यह आवश्यक है कि मुख्य पोषक तत्वों के साथ-साथ सूक्ष्म पोषक तत्वों का भी प्रयोग किया जाना चाहिए। अब विभाग द्वारा सोमवार से कृषक गोष्ठियों के माध्यम से  किसानों को फसलों में सूक्ष्म पोषक तत्वों के उपयोग की सलाह दी जा रही है, ताकि अधिक उत्पादन हो सके। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />किसानों को पोषक तत्वों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होने से वह रासायनिक खाद का उपयोग अधिक करते हैं। इस सम्बंध में कृषि विभाग का यह अभियान किसानों के लिए काफी फायदेमंद होगा। विभाग को यह अभियान निरन्तर चलाना चाहिए।<br /><strong>- राजेन्द्र धाकड़, किसान</strong></p>
<p>कृषि विभाग की ओर से सोमवार को जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कृषक गोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें किसानों को भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने और कार्बनिक खाद का अधिकाधिक उपयोग बढ़ाने के सम्बंध में जागरूक किया गया। यह आयोजन आगामी दिनों में भी जारी रहेगा।<br /><strong>- अतीश कुमार शर्मा, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 May 2025 15:50:24 +0530</pubDate>
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                <title>किसानों की फसले तैयार, सता रही मौसम की मार </title>
                                    <description><![CDATA[मौसम के इस चक्र से किसानों को निराश कर मौसम की इस मार से बचाने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/farmers--crops-are-ready--but-the-weather-is-bothering-them/article-93297"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/4427rtrer-(3)13.png" alt=""></a><br /><p>राजपुर।  पिछले तीन चार दिनों से खराब मौसम और बारिश की आशंका से क्षेत्र के किसान परेशान हैं।  क्षेत्र में बारिश के बाद बादलों व बेमौसम मध्यम दर्जे की बारिश होने से किसान मक्का, उड़द, तिल्ली की फसल में नुकसान की आशंका जता रहे हैं। मक्का किसानों की मुख्य फसल है और उसकी यहां बड़े पैमाने पर खेती भी की गईं है। इस समय मक्का की फसलों को खेतों से बाजार तक ले जाने की तैयारी में किसान दिन रात एक किए हुए हैं। मगर, मौसम के इस चक्र से किसानों को निराश कर मौसम की इस मार से बचाने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। </p>
<p><strong> फसलों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की जुगत में किसान</strong><br />किसानों की परेशानी यह है कि पूरा मक्का, सोयाबीन, उड्द सुरक्षित स्थानों तक नहीं पहुंच सका है। कहीं जगह तो कहीं व्यवस्था के अभाव के कारण मक्का खुले आसमान के नीचे रखा हुआ है। पिछले तीन दिन से लगातार मौसम खराब रहने से किसान की चिंताएं बढ़ गई हैं। गत शुक्रवार रात्रि हुई बारिश से खेतों में रखी फसल भीग गई है। वहीं गत शनिवार सुबह मध्यम दर्जे की उपखंड क्षेत्र में बारिश दोपहर 1 बजे तक होती रही । बादल छाने से किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें नजर आ रही हैं।</p>
<p><strong>गुणवत्ता खराब होने से बाजार में मिलेंगे कम दाम</strong><br /> किसान  नंदकुमार भार्गव, मानसिंह, अनिल भार्गव, राहुल शिवहरे, और अन्य किसानों का कहना है कि अगर अभी खलिहानों में पड़ी उड़द, सोयाबीन, मक्का भींग जाता है तो न केवल उसकी गुणवत्ता खराब होगी बल्कि मात्रा में भी गिरावट हो सकती है। क्षेत्र के किसान प्रेमचंद ने बताया कि फैसले खलिहान में पड़ी है जो  बारिश में  भी गई थी, जो खलिहान में सूख रही थी। जो बुधवार को हुई बारिश में फिर भीग गई। गुणवत्ता खराब होने से बाजार में दाम कम मिलेंगे। मुन्नालाल भील ने बताया कि चार दिन पहले तकरीबन 50 क्विंटल मक्का निकाली थी। दो दिन पहले बारिश में भीग गई। सुबह से मौसम खराब था बारिश से किसानों की चिंता बढ़ गई है। मक्का, सोयाबीन, उड़द की फसल में फफूंद पड़ सकता है और अंकुरण भी हो सकता है।</p>
<p><strong>मक्का, सोयाबीन, उड़द की फसल है तैयार</strong><br /> खेतों में मक्का, सोयाबीन, उड़द की फसल पककर तैयार है, गांवों में कहीं कटाई की जा रही है तो कहीं उसे खुले आसमान में खलिहान में सूखने के लिए छोड़ा गया है। मक्का से दाना छुड़ाने का काम भी अभी अधूरा पड़ा है। बीच के दिनों की कड़क धूप देख वह उम्मीद भी कर रहे थे कि जल्द ही मक्का को तैयार कर बाजार तक पहुंचा सकेंगे। मगर, इधर अचानक मौसम ने करवट बदल ली और बादल और बूंदाबांदी होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों का मक्का कहीं खेत किनारे कट कर रखा है तो कहीं खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ है।</p>
<p>क्षेत्र में बुधवार को हुई बारिश से फिर फसल भीग गई है। जिससे गुणवत्ता खराब होने से फसल का बाजार में कम दाम मिलेगा। जिससे आर्थिक नुकसान होगा। <br /><strong>- बबलू, किसान। </strong></p>
<p>खराब मौसम और बारिश से फसल के सूखे दाने को बचाने के लिए उन्हे तिरपाल या अन्य तरीकों से बचाने का जतन कर रहे है। <br /><strong>- कल्याण सिंह मेहता, किसान। </strong></p>
<p>बारिश की संभावना को लेकर किसानों को चिंता सता रही है। कहीं किसानों की मेहनत पर पानी नहीं फिर जाए। <br /><strong>- रामदयाल मेहता, कस्बेवासी।  </strong><br />    <br />किसानों की फसलें पककर तैयार है। बेमौसम बारिश से फसलों की गुणवत्ता में असर पड़ सकता है। वैसे नुकसान फसलों में और किसी प्रकार का नही है।<br /><strong>- नीरज शर्मा, सहायक कृषि अधिकारी, शाहाबाद।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Thu, 17 Oct 2024 16:05:20 +0530</pubDate>
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