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                <title>मेडिकल कॉलेज अस्पताल का मामला : ऑपरेशन के बाद बिगड़ी प्रसूताओं की तबीयत, एक की मौत, 4 की हालत गंभीर</title>
                                    <description><![CDATA[सिजेरियन के बाद बिगड़े हालत, बीपी अचानक हुआ लो, किडनी फेल और प्लेटलेट्स गिरने से तड़के टूटा दम।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/case-from-medical-college-hospital--health-of-post-op-patients-worsens--one-dead--4-in-critical-condition/article-152866"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(1)21.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद 5 प्रसूताओं की अचानक तबीयत बिगड़ गई। जिनमें से एक की मंगलवार तड़के मौत हो गई। वहीं, 4 प्रसूताओं की हालत गंभीर होने पर उन्हें सुपर स्पेशलिटी में रैफर किया गया। जहां उनका उपचार चल रहा है। घटना के बाद से अस्पताल में हड़कम्प मचा हुआ है। वहीं, इलाज के दौरान हुई इस अप्रत्याशित मृत्यु ने अस्पताल प्रशासन को भी चौंका दिया। मृतका पायल की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए अस्पताल प्रशासन ने मेडिकल बोर्ड गठित कर जांच शुरू कर दी है। जिसकी रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि ऑपरेशन के बाद अचानक यह जटिल स्थिति क्यों बनी।</p>
<p><strong>पोस्ट गायनी वार्ड-1 में भर्ती थीं सभी प्रसूताएं</strong><br />जानकारी के अनुसार, मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सोमवार को पांच प्रसूताओं की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी। जिनमें पायल, ज्योति, चंद्रकला, धन्नी और रागिनी शामिल हैं। ऑपरेशन के बाद सभी प्रसूताओं को पोस्ट गायनी वार्ड-1 में भर्ती किया गया। जहां रात को पायल की अचानक तबीयत खराब हो गई। इस पर उसे सर्जिकल आईसीयू में शिफ्ट किया गया जहां मंगलवार सुबह 6 बजे उसकी मौत हो गई।</p>
<p><strong>तेजी से गिरा बीपी, किडनी फेल होने से मौत</strong><br />चिकित्सा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मृतका पायल का ब्लड प्रेशर अचानक तेजी से नीचे गिरता चला गया। जिससे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर विपरीत असर पड़ा और किडनी ने काम करना बंद कर दिया। साथ ही प्लेटलेट्स भी लगातार डाउन होती रही, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई और अनंत: महिला की मौत हो गई।इलाज के दौरान प्रसूता की अचानक मृत्यु होने से अस्पताल में भी हलचल तेज हो गई।</p>
<p><strong>4 प्रसूताओं की भी हालत खराब, एसएसबी में किया रैफर</strong><br />नए अस्पताल की सर्जिकल आईसीयू में तैनात कर्मचारी ने बताया कि पोस्ट गायनी वार्ड-1 में 4 सिजेरियन प्रसूताएं भर्ती थी। जिनकी तबीयत खराब होने पर सर्जिकल आईसीयू में शिफ्ट किया गया था। जहां पायल की मौत हो गई। इसके बाद तीन प्रसूताएं ज्योति, चंद्रकला, धन्नी व रागिनी की भी अचानक तबीयत खराब हो गई। हालात गंभीर होने पर सोमवार सुबह 10 बजे प्रसूता रागिनी व शाम 4 बजे ज्योति और चंद्रकला व धन्नी को रात 9 बजे करीब सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के नेफ्रोलॉजी विभाग में रैफर किया गया। वहीं, डॉ. वेद प्रकाश ने बताया कि कुछ महिलाओं की स्थिति गंभीर है, जिनका इलाज चल रहा है।</p>
<p><strong>मौत के कारणों पर उठे सवाल, मेडिकल बोर्ड करेगा जांच</strong><br />घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पांच डॉक्टरों की सदस्यीय मेडिकल बोर्ड का गठन किया है। यह बोर्ड पूरे उपचार क्रम, ऑपरेशन के बाद की स्थिति, दवाओं की प्रतिक्रिया, मेडिकल पैरामीटर और अचानक बिगड़ी शारीरिक स्थिति की विस्तृत जांच करेगा। जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाएगा कि आखिर किस वजह से महिला का ब्लड प्रेशर अचानक गिरा, किडनी फेल हुई और प्लेटलेट्स में तेजी से कमी आई।</p>
<p><strong>प्राचार्य बोले- रिपोर्ट के बाद ही साफ होगी तस्वीर</strong><br />मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नीलेश जैन ने बताया कि सिजेरियन ऑपरेशन के बाद महिला का बीपी लो हो गया था। इसके चलते किडनी फेल हुई और प्लेटलेट्स भी कम हो गए, जो उसकी मौत का कारण बने। यह स्थिति किन कारणों से उत्पन्न हुई, इसका पता लगाने के लिए मेडिकल बोर्ड गठित कर दिया गया है। बोर्ड की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 14:21:53 +0530</pubDate>
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                <title>दवा से मुश्किल ठंडा पानी, रात होने से पहले पानी स्टाक की फिक्र</title>
                                    <description><![CDATA[रीते कंठ इलाज कराने की मजबूरी, दवा खाने के पानी की जुगत में तीमारदार ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/finding-water%E2%80%94especially-cold-water%E2%80%94is-harder-than-finding-medicine--a-race-to-stock-up-before-nightfall/article-152720"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(1)17.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल में इन दिनों तीमारदारों को मरीज की देखभाल से ज्यादा चिंता एक बोतल पानी की है। अस्पताल परिसर में पहले जहां हर जगह शीतल जल उपलब्ध हो जाता था वहां पानी के लिये 100 मीटर तक की दूरी तय करनी पड रही है। कहने को परिसर में 28 वाटर कूलर लगे हैं, लेकिन धरातल पर केवल 18 ही जैसे-तैसे चल रहे हैं। बाकी या तो कबाड़ हो चुके हैं या प्रशासन की लापरवाही के कारण तालों में बंद हैं। एक बार जहां से पानी की सुविधा बंद हुई फिर वो चालू की ही नहीं गयी। ऐसे में परिजनों के लिये के लिये बोतलें हाथ में लेकर घुमने की मजबूरी इलाज का हिस्सा बन चुकी है।</p>
<p><strong>बदहाल सिस्टम से परिजनों की परिक्रमा</strong><br />300 फीट लम्बे गलियारों को पार करने के बाद परिसर में लगे वाटर कूलरों से पानी लेने जाने के बाद भी कई बार पानी नहीं मिल पाता। ऐसे में एमबीएस परिसर की ओल्ड़ बिल्डिंग में पीने के पानी के लिये बाहर आने की मजबूरी से परिजनों की लम्बी परेड़ हाे जाती है। कई बार तो परिजन सड़क पार करके भी पानी लेकर जाते है। सबसे बड़े वार्ड मेडिकल के मरीज पानी के लिए ENT वार्ड की गैलरी तक दौड़ रहे हैं। न्यूरोलॉजी विभाग में लगा कूलर का तो कनेक्शन ही काट कर हटा दिया है हांलाकि कूलर बाहर रखा है। बर्न वार्ड के रिनोवेशन के चलते महीनों से पानी की सुविधा पर ताला लगा है।</p>
<p><strong>पहले कहा मेन्टीनेन्स के बाद, अब जरूरत नहीं</strong><br />परिसर में लगे वाटर कूलरों की 19 अप्रेल को खबर प्रकाशित करने के दौरान अस्पताल प्रशासन ने बताया था कि पुराने वाटर कूलरों को मेन्टीनेन्स के लिये हटाया गया है, जिन्हे वापस चालू कर दिया जायेगा। लेकिन भीषण गर्मी 15 दिन गुजर जाने के बाद भी सुविधायें बहाल नहीं हो पायी तब दैनिक नवज्योति ने जन उपयोगीता के मुद्देज पर अस्पताल प्रशासन से पक्ष लिया तब अस्पतान अधीक्षक ने ऐसी जगहों पर दुबारा से प्याऊ शुरू करने की जरूरत नही बताई। पहले दवा काउँटर नं 9, दवा काउन्टर 121 तथा सर्जीकल वार्ड के भीतर लगे प्याऊ बंद कर दिये गये है।</p>
<p><strong>जहां से हटे फिर नहीं लगे,अधीक्षक बोले हमारे पास एक्स्ट्रा</strong><br />लेखा शाखा के बाहर रखा वाटर कूलर कई महीनों से हटाया गया है। न्यू आईपीड़ी व पुराने कॉटेज वार्ड़ की तरफ से आने वाले परिजनाें व लेखा शाखा के कार्मिकों के लिये यही वाटर कूलर ठण्ड़े पानी के लिये काम आता है। अस्पताल सुत्रों ने बताया कि यह कण्ड़म होने के कारण हटा लिया गया है, वही अधीक्षक महोदय के बताये अनुसार अधीक्षक कार्यालय में वाटर कूलर रिजर्व में रखे हुये है।</p>
<p><strong>रखरखाव तो दूर गेट पर ही ताला</strong><br />मेडिकल यूनिट B व C में 2 साल पहले पानी के लिए बाटर कूलर काम कर रहा था पिछले साल से पार्क की तरफ जाने वाला गेट बंद कर दिया गया हांलाकि कूलर आज भी वहीं लगा हुआ है जाे अब कबाड़ में तब्दील होता जा रहा है। </p>
<p><strong>जहां खाना खाने के साथ ठण्ड़े पानी की थी जगह, अब पीक व गंदगी</strong><br />आर्थोपैड़िक वार्ड़ के बाहर परिजनों के खाना खाने के लिये डाईनिंग हालनुमा केम्पस बनाया गया था यहीं पर एक वाटर कूलर भी लगा हुआ है। सीपेज की समस्या के कारण इसे बन्द कर के पुरे केम्पस पर ही ताला लगा दिया। अब यहां लगा कूलर कबाड़ बन गया वहीं गेट के भीतर गंदगी का ढ़ेर जमा हो गया। बची-खुची कसर यहां लोगो ने गुटके की पीक से पुरी कर दी।</p>
<p><strong>मरीज बोले- दवा से मुश्किल ठंडा पानी</strong><br />भैया के एक्सीडेंट के बाद 5 दिन से यहाँ हूँ। रात में अस्पताल में रोशनी कम रहती है, डर लगता है लेकिन पानी के लिए पूरे अस्पताल की परिक्रमा करनी पड़ती है। कोई मिलने वाला आ जाये तो पानी की पुछने में भी सोचना पड़ता है।<br /><strong>- वंदना, तीमारदार</strong></p>
<p>अभी थोडी देर पहले ही 30 रूपये की पानी की बोतल लेकर आयी हूँ यहां वाटर कूलर तो है लेकिन दूसरे वार्ड के भी यही से भरते है कभी भी पानी ठंडा नहीं मिलता। बाहर भी यही हाल है।<br /><strong>-पूजा ,मरीज की पत्नी</strong></p>
<p>जहां आवश्यकता है वहां के वाटर कूलर चालू है। सभी काे बिना जरूरत चालु करने से क्या फायदा। रिजर्व में रखवा रखें है। वाटर टेंक की सफाई करवाई जाती है। डेट भी रहती है।<br /><strong>-डॉ. धर्मराज मीणा, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 13:30:20 +0530</pubDate>
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                <title>आईपीडी की बिल्डिंग की खिड़कियों के टूटने लगे झरोखे ,कहां चला गया गुणवत्ता का काम</title>
                                    <description><![CDATA[अस्पताल में 24 घंटे मरीज व उनके तीमारदारों की आवाजाही लगी रहती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/decorative-stone-facings-on-ipd-building-windows-begin-to-crumble--where-has-the-quality-work-gone/article-152184"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1111200-x-600-px).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से एमबीएस अस्पताल में करोड़ों रुपए की लागत से आईपीडी की बिल्डिंग बनाई गई है। लेकिन हालत यह है कि इसे अधिक समय नहीं हुआ उससे पहले ही इसकी खिड़कियों के झरोखे टूटने लगे हैं। एमबीएस अस्पताल परिसर में अधीक्षक कार्यालय के पास बहुमंजिला आईपीडी बिल्डिंग बनाई गई है। इस बिल्डिंग को बने अभी अधिक समय भी नहीं हुआ है। कुछ समय पहले अस्पताल के विभिन्न विभागों को यहां शिफ्ट किया जा रहा है।इसी दौरान हाल ही में बिल्डिंग में बनी खिड़कियों के झरोखे के भारी भरकम डिजाइनदार पत्थर टूटकर नीचे गिर चुके हैं। शुरुआत में इसकी संख्या कम थी लेकिन देखरेख के अभाव में और अधिकारियों द्वारा इसकी समय पर मरम्मत नहीं करवाने से इनकी संख्या अधिक हो गई है। इधर अस्पताल आने वाले लोगों का कहना है कि गनीमत रही जिस समय ये पत्थर गिरे उस समय वहां कोई नहीं था। वरना इतने बड़े व ऊंचाई से पत्थर गिरने पर बड़ा हादसा हो सकता था। अस्पताल में जहां 24 घंटे मरीज व उनके तीमारदारों की आवाजाही लगी रहती है।</p>
<p><strong>जे.के. लोन में हो चुका है हादसा</strong><br />गौरतलब है कि गत दिनों जे.के. लोन अस्पताल की नई आईपीडी की बिल्डिंग से भी सुबह के समय भारी भरकर पत्थर गिर गया था। हालांकि उस समय वहां मरीज व उनके तीमार मौजूद थे। उस समय भी गनीमत रही कि किसी के चोट नहीं लगी थी। वरना उस समय बड़ा हादसा हो सकता था।इसी तरह से यदि समय रहते एमबीएस की नई आईपीडी की बिल्डिंग के झरोखों की मरम्मत नहीं की गई तो यहां से अन्य पत्थरों के गिरने से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।</p>
<p><strong>जल्दी ही सही करवा देंगे</strong><br />कोटा विकास प्राधिकरण के अधिशाषी अभियंता महेन्द्र सक्सेना ने बताया कि एमबीएस की नई आईपीडी के पत्थर गिरने की जानकारी नहीं है। यदि ऐसा हो रहा है तो जल्दी ही इन्हें सही करवा दिया जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 14:24:02 +0530</pubDate>
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                <title>एक ऑपरेटर के भरोसे एमबीएस का आरजीएचएस पर्ची काउन्टर, मची अफरा तफरी</title>
                                    <description><![CDATA[काउंटर पर घंटों खड़ा रहने के बाद भी मरीजों की पर्चीयां नही बनी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mbs-hospital-s-rghs-slip-counter-left-dependent-on-a-single-operator--chaos-ensues/article-151944"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/ek-operator-k-bharose-mbs-ka-rghs-parche-caunter-,-mache-aphara-taphare...kota-news-28.04.2026.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजस्थान भर में निजी अस्पतालों और दवा काउंटरों द्वारा आरजीएचएस  के बहिष्कार के चलते अब सरकारी अस्पतालों पर मरीजों का दबाव असहनीय स्तर तक पहुँच गया है। सोमवार सुबह कोटा के एमबीएस अस्पताल में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब आरजीएचएस पर्ची काउंटर पर घंटों खड़ा रहने के बाद भी मरीजों की पर्चीयां नही बनी। इसके अव्यवस्था इतनी बढ़ गई कि काउंटर पर मौजूद एकमात्र कर्मचारी को देख लोगों के सब्र का बांध टूट गया। वह आपस में ही उलझते नजर आये।संविदा कर्मियों के काम छोड़ने और एक साथ छुट्टी पर जाने से व्यवस्था चरमरा गई।</p>
<p><strong>लाभार्थियों के लिये सरकारी इलाज से दवा में परेशानी</strong><br />एमबीएस अस्पताल से सामने आयी तस्वीरे बताती है कि आरजीएचएस को लेकर निजी अस्पतालों के विरोध के चलते सरकारी तंत्र पूरी तरह से बैकअप प्लान के बिना चल रहा है, जिसका खामियाजा आम जनता और बुजुर्ग पेंशनर्स को भुगतना पड़ रहा है। मरीजों की परेशानी है कि वह निजी अस्पताल में इलाज ले नहीं पा रहे यदि सरकारी मे सामान्य पर्ची से इलाज लेते है तो उन्हे पहले से चल रही ब्राण्ड़ेड दवाओं को सरकारी डॉक्टर सरकारी पर्चे पर नहीं लिख सकता।</p>
<p><strong>5 में से 4 ऑपरेटर नदारद: सिस्टम हुआ फेल</strong><br />जानकारी के अनुसार, आरजीएचएस काउंटर के सुचारू संचालन के लिए कुल 5 कंप्यूटर ऑपरेटर नियुक्त हैं, जिनमें से 3 सुबह और 2 शाम की शिफ्ट में रहते हैं। लेकिन सोमवार को बदहाली का आलम यह था कि ऑपरेटर चेतन शर्मा ने काम छोड़ दिया। ऑपरेटर जीतू सहित अन्य कार्मिक छुट्टी पर चले गए। काउंटर पर केवल एक मात्र कर्मचारी योगेंद्र मौजूद था। जिससे लोगों के ओपीड़ी,भर्ती तथा डिस्चार्ज के लिये घंटों लगने लगे।</p>
<p><strong>भर्ती व डस्चार्ज की प्रक्रिया में लगता है समय</strong><br />बाहर खडे मरीजों में भर्ती-डिस्चार्ज की जटिल प्रक्रिया के बीच अकेला कर्मचारी पर्ची नहीं काट पा रहा था। जिससे कतार में खड़े बुजुर्गों और तीमारदारों का गुस्सा फूट पड़ा और पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई। ऐसे में सामान्य ओपीड़ी के लिये आये मरीजों को आरजीएचएस की पर्ची न बनने के कारण बिना इलाज के लौटना पड़ा।</p>
<p><strong>बुआ को लेने जाने की जिद पर अड़ा</strong><br />हैरानी की बात यह रही कि मुख्य नर्सिंग इंचार्ज खुद ड्यूटी से नदारद थे। इंचार्ज का जिम्मा संभाल रहीं वर्षा राठौर ने आनन-फानन में व्यवस्था संभालने के लिए एक लिफ्ट ऑपरेटर को पर्ची काउंटर पर बैठाया। लेकिन तमाशा तब खड़ा हुआ जब वह लिफ्ट ऑपरेटर भी थोड़ी देर बाद अपनी 'बुआ' को लेने जाने की जिद पर अड़ गया। लगभग 40 मिनट तक प्रभारी वर्षा उस ऑपरेटर की मान-मनुहार करती नजर आईं ताकि काउंटर चालू रह सके।</p>
<p><strong>मरीजों का फूटा गुस्सा, इंचार्ज को सुनाई खरी-खोटी</strong><br />निजी अस्पतालों में इलाज बंद होने के कारण मजबूरी में सरकारी अस्पताल पहुंचे मरीजों को यहाँ भी भारी जद्दोजहद करनी पड़ी। घंटों इंतजार से झल्लाए लोगों ने अस्पताल प्रशासन की कुप्रबंधन पर नाराजगी जताई और मौके पर मौजूद प्रभारी को भी खरी-खोटी सुनाई। मरीजों का आरोप है कि जब निजी क्षेत्र में विरोध के चलते सरकारी अस्पतालों में भीड़ बढ़ना तय था, तो प्रशासन ने अतिरिक्त स्टाफ की व्यवस्था क्यों नहीं की?</p>
<p>संविदा पर लगे कार्मिकों के काम छोडने और छुट्टी के समय लिफ्ट पर लगाये गये व्यक्ति को इमरजेन्सी में ऑपरेटर पर लगाया गया था। सभी को मौके पर मौजुद इंचार्ज के निर्देशों के अनुसार काम करना चाहिये।<br /><strong>- नरेन्द्र खींची, नर्सिंग इन्चार्ज</strong></p>
<p>मै सुबह ओपीड़ी की तरफ गया था मुझे किसी ने इस बारें में सूचना नहीं दी। नर्सिंग इंचार्ज से जानकारी जुटाई जा रही है।<br /><strong>- डॉ. धर्मराज मीणा अधीक्षक एमबीएस अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 14:34:35 +0530</pubDate>
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                <title>सीएचसी में मदर लैब शुरू नहीं होने से मरीज परेशान, नहीं मिल रहा उन्नत जांच सुविधाओं का लाभ </title>
                                    <description><![CDATA[मदर लैब के लिए मशीनें सीएचसी पहुंची लेकिन भवन अधूरा होने से  स्थापित नहीं की गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/patients-inconvenienced-as--mother-lab--fails-to-launch-at-chc--denied-access-to-advanced-diagnostic-facilities/article-150420"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(16).png" alt=""></a><br /><p>कैथून। कैथून सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वीकृत बीपीएचयू भवन का निर्माण तय समय पर पूरा नहीं होने से मदर लैब शुरू नहीं हो सकी है, जिससे मरीजों को मुफ्त जांच सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जानकारी के अनुसार कैथून सीएचसी में बीपीएचयू यूनिट वर्ष 2023 में स्वीकृत हुई थी, जिसके लिए 75 लाख रुपए मंजूर किए गए थे। योजना के अनुसार वर्ष 2024 तक भवन निर्माण पूरा कर हैंडओवर होना था, लेकिन अब तक निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। इसके चलते मदर लैब शुरू नहीं हो सकी और क्षेत्र के हजारों मरीज उन्नत जांच सुविधाओं से वंचित हैं। कैथून सीएचसी में आसपास के गांवों से सैकड़ों मरीज रोजाना उपचार के लिए आते हैं। भवन तैयार नहीं होने से कैंसर मार्कर, बायोप्सी और हार्मोनल टेस्ट सहित 145 प्रकार की जटिल जांचें शुरू नहीं हो पा रही हैं।</p>
<p><strong>मशीनें पहुंचीं, लेकिन स्थापना रुकी</strong><br />जानकारी के अनुसार मदर लैब के लिए ऑटोमैटिक बायोकेमिस्ट्री एनालाइजर, कोबास C-801 और इलेक्ट्रोलाइट एनालाइजर जैसी मशीनें सीएचसी पहुंच चुकी हैं, लेकिन भवन अधूरा होने के कारण इन्हें स्थापित नहीं किया जा सका। योजना के तहत पीएचसी और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से सैंपल लेकर मदर लैब भेजे जाने थे और रिपोर्ट ऑनलाइन मरीजों को उपलब्ध कराई जानी थी।</p>
<p><strong>विधायक से लगाई गुहार</strong><br />भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष हरिओम पुरी और देवेंद्र शर्मा ने मदर लैब शुरू कराने को लेकर विधायक कल्पना देवी से चर्चा की। इस पर विधायक ने संबंधित अधिकारियों को जल्द निर्माण कार्य पूरा कर लैब शुरू कराने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p><strong>शिफ्टिंग की चर्चा से बढ़ी चिंता</strong><br />स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि मदर लैब को कैथून के बजाय कोटा में कहीं अन्य स्थान पर शिफ्ट किया जा सकता है। इस पर हरिओम पुरी ने लैब को कैथून में ही संचालित रखने और मशीनों को अन्यत्र नहीं भेजने की मांग की है। साथ ही लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि लैब को कहीं और स्थानांतरित किया गया तो इसका विरोध किया जाएगा।</p>
<p>ठेकेदार द्वारा समय पर कार्य पूरा नहीं करने से परियोजना रुकी हुई है। ठेकेदार को कई बार मौखिक रूप से निर्देश दिए गए हैं और उच्च अधिकारियों को पत्र भी भेजे गए हैं। जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में जिला कलक्टर को भी इस स्थिति से अवगत कराया जा चुका है।<br /><strong>-डॉ. राजेश सामर, चिकित्सा अधिकारी प्रभारी, सीएचसी, कैथून</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 17:43:52 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का : गंदगी हटा बनाए ‘जल मंदिर’, एडीएम सिटी ने किया वाटर कूलरों का उद्घाटन</title>
                                    <description><![CDATA[भीड़ प्रबंधन के लिए भामाशाह काउंटर को बाहर स्थानांतरित करने के निर्देश दिए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news--filth-cleared-to-create-a--jal-mandir---water-shrine---adm-city-inaugurates-water-coolers/article-149970"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-600-px)17.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शिशु एवं मातृ चिकित्सालय जेके लोन अस्पताल में सुविधाओं के विस्तार और नवाचार की दिशा में शुक्रवार को अहम कदम उठाए गए। एडीएम सिटी अनिल कुमार सिंघल ने अस्पताल परिसर में स्थापित किए गए तीन नए वाटर कूलरों का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के लिए ई-वीसी रूम का प्रस्ताव मांगा और ओपीडी में भीड़ कम करने के लिए भामाशाह काउंटर को बाहर स्थानांतरित करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान एडीएम ने ओपीडी और डिस्चार्ज प्रक्रिया को और सरल बनाने के निर्देश दिए ताकि दूर-दराज से आने वाले मरीजों को कम से कम समय में इलाज मिल सके।</p>
<p><strong>आस्था से स्वच्छता का संदेश</strong><br />अस्पताल अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा ने बताया कि परिसर के भीतर 80-80 लीटर क्षमता वाले तीन नए वाटर कूलर लगाए गए हैं। अस्पताल प्रशासन ने इसके लिए उन स्थानों को चिन्हित किया जहां पहले गंदगी रहती थी। अधीक्षक ने बताया कि इन जगहों को पूरी तरह साफ करवाकर 'जल मंदिर' के रूप में विकसित किया गया है। यहाँ एक ऊंचे प्लेटफॉर्म पर कांच के भीतर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई है, ताकि लोग आस्था के कारण पानी पीने वाले स्थान पर गंदगी न फैलाएं।</p>
<p><strong>भामाशाह काउंटर को बाहर बनवाने का सुझाव</strong><br />एडीएम सिटी अनिल कुमार सिंघल ने एनआईसीयू (NICU) और सीआईसीयू (CICU) के निरीक्षण के बाद ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ को देखा। उन्होंने भीड़ प्रबंधन हेतु सुझाव दिया कि ओपीडी ब्लॉक में दबाव कम करने के लिए भामाशाह काउंटर को बाहर डोम के पास खाली पड़े स्थान पर शिफ्ट किया जाए। इससे छुट्टी (डिस्चार्ज) मिलने वाले मरीजों को बाहर से ही लाभ मिल सकेगा और भीतर भीड़ जमा नहीं होगी।</p>
<p><strong>ई-वीसी रूम की जरूरत पर जोर</strong><br />डिजिटल दौर की आवश्यकताओं को देखते हुए एडीएम ने अस्पताल में ई-वीसी (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) रूम तैयार करने के लिए प्रस्ताव मांगा है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन ट्रेनिंग, मेडिकल कोर्स और विशेषज्ञों के साथ टेस्ट रिपोर्ट साझा करने के लिए वीसी रूम की बहुत आवश्यकता है। अधीक्षक शर्मा ने बताया कि हमारे 2-3 डॉक्टर लीगल में ही लगे रहते है। वी सी रूम से हमें समय और कार्य प्रबंध्न में लाभ मिलेगा।</p>
<p><strong>नवज्योति ने पहले ही चेताया था</strong><br />अस्पताल परिसरों में गर्मी की शुरूआत के साथ ही मरीजाें और तीमरदारों के लिये पीने के पानी की कमीं को लेकर दैनिक नवज्याति ने ''एमबीएस में 3 प्याऊ फिर से शुरू 8 के लिये इंतजार'' प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी जिसके बाद राजकीय एमबीएस चिकित्सालय परिसर मेंं स्थित जे के लोन शिशु एवं मातृ चिकित्सालय में आज एक साथ 3 वाटर कूलरों को जनता को समर्पित कर दिया गया।<br /> <br />गर्मी को देखते हुये मरीजों की सुविधा के लिये जन सहयोग से ठण्ड़े पानी के लिये 3 जगह व्यवस्था की है। एडीएम साहब ने हमें सुझाव दिये है। इनके बारेे में हम काम करेंगे।<br /><strong>- डॉ. निर्मला शर्मा, अधीक्षक जे के लोन</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 13:02:35 +0530</pubDate>
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                <title>4 साल बाद भी अधूरा 40 करोड़ का मेटरनल एंड चाइल्ड हॉस्पिटल, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[मेडिकल कॉलेज परिसर में एक साल में बनना था 100 बेड का अस्पताल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/40-crore-maternal-and-child-hospital-remains-unfinished-even-after-four-years/article-149691"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-600-px)-(1)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा मेडिकल कॉलेज परिसर में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से स्वीकृत हुआ 40 करोड़ का मेटरनल एंड चाइल्ड हॉस्पिटल 4 साल बाद भी बनकर तैयार नहीं हुआ। अभी भी कई तरह के कार्य अधूरे पड़े हैं। जबकि, हॉस्पिटल का निर्माण कार्य वर्ष 2023 में पूरा होना था। डेट लाइन निकल जाने के बाद भी हॉस्पिटल पूरी तरह से बनकर तैयार नहीं हुआ। जिसकी वजह से यहां गायनी चिकित्सा सुविधाएं शुरू नहीं हो सकी। जिससे मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है और जेकेलोन अस्पताल पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।</p>
<p><strong>2023 में बनकर तैयार करना था हॉस्पिटल</strong><br />चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करने के लिए मेडिकल कॉलेज परिसर में सरकार ने वर्ष 2021 में 100 बेड के मेटरनल एंड चाइल्ड हॉस्पिटल स्वीकृत किया था। जिसके निर्माण के लिए वर्ष 2022 में 40 करोड़ रुपए का बजट भी जारी कर दिया था और इसकी डेडलाइन वर्ष 2023 तय की गई थी। इसके बावजूद निर्माण एजेंसी एनएचएम ने कार्य समय पर पूरा नहीं किया। अब अधिकारियों द्वारा जून तक काम पूरा होने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p><strong>जेकेलोन पर पड़ रहा भार</strong><br />इस अस्पताल के शुरू नहीं होने का सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। हाड़ौती क्षेत्र से आने वाली गायनी और प्रसूता महिलाओं के अधिकांश केस जेकेलोन अस्पताल ही जा रहे हैं। इससे वहां मरीजों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है और व्यवस्थाएं प्रभावित होती हैं।</p>
<p><strong>हॉस्पिटल शुरू हो तो हाड़ौती के मरीजों को मिले लाभ</strong><br />चिकित्सकों का मानना है कि यदि यह मेटरनल एंड चाइल्ड हॉस्पिटल समय पर बनकर शुरू हो जाए तो नए कोटा शहर सहित पूरे संभाग के मरीजों को बड़ी राहत मिल सकती है और जेकेलोन अस्पताल पर भार भी कम होगा। हालांकि, मेडिकल कॉलेज में भी गायनी वार्ड संचालित हैं।</p>
<p><strong>कोविड़ के कारण एक साल देरी से शुरू हुआ काम</strong><br />कोर्डिनेटर डॉ. बीएल पाटीदार ने बताया कि वर्ष 2021 में स्वीकृति मिल गई थी लेकिन कोविड-19 के कारण काम शुरू नहीं हो सका। इसके बाद वर्ष 2022 में शुरू हुआ, जो 2023 में पूरा होना था। लेकिन निर्माण कार्य की गति धीमी रही। इस प्रोजेक्ट की कार्यकारी एजेंसी एनएचएम है।</p>
<p><strong>मार्च में होना था हैंडओवर, अब तक नहीं हुआ</strong><br />चिकित्सकों ने बताया कि मेटरनल एंड चाइल्ड हॉस्पिटल मार्च में मेडिकल कॉलेज को हैंडओवर किया जाना था, लेकिन अप्रैल का पहला सप्ताह गुजरने के बाद भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। एनएचएम अधिकारियों द्वारा काम पूरा होने में 2 से 3 महीने और लगने की बात कही जा रही है।</p>
<p><strong>अस्पताल में मिलेंगी अत्याधुनिक सुविधाएं</strong><br />मेटरनल एंड चाइल्ड हॉस्पिटल में 14 कॉटेज वार्ड बनाए गए हैं और पूरा परिसर एयर कंडीशनिंग से लैस होगा। यहां लेबर रूम एलडीआर कॉन्सेप्ट पर तैयार किया जा रहा है, जो आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा। इसके अलावा ऑपरेशन थिएटर, इमरजेंसी गेट, लाइब्रेरी और सेमिनार हॉल जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।</p>
<p><strong>225 बेड की मिलेगी सुविधा</strong><br />कोर्डिनेटर डॉ. पाटीदार ने बताया कि वर्तमान में यह अस्पताल 100 बेड का है, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे 225 बेड तक विस्तारित किया जा सकता है। इधर, मरीजों का कहना है कि परियोजना में लगातार हो रही देरी का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। अब सभी की नजरें जून पर टिकी हैं कि आखिर कब यह अस्पताल शुरू होगा और कब राहत मिलेगी।</p>
<p>मेडिकल कॉलेज परिसर में 40 करोड़ की लागत से मेटरनल एंड चाइल्ड हॉस्पिटल का निर्माण कार्य चल रहा है। इसकी कार्यकारी एजेंसी एनएचएम है। इस हॉस्पिटल के शुरू होने से न केवल कोटा बल्कि होड़ौतीभर के मरीजों को लाभ मिलेगा।<br /><strong>-आशुतोष शर्मा, अधीक्षक मेडिकल कॉलेज अस्पताल</strong></p>
<p><strong>एनएचएम एक्सईएन ने न फोन उठाया न मैसेज का जवाब दिया</strong><br />नवज्योति ने मेटरनल एंड चाइल्ड हॉस्पिटल का निर्माण कार्य में हो रही देरी के कारणों को लेकर बात करने के लिए एनएचएम एक्सईएन जुगल किशोर सांखला को फोन किया लेकिन उन्होंने अटैंड नहीं किया। इसके बाद उन्हें मैसेज किया लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 15:15:35 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का : नए रंग में नजर आने लगी एमबीएस इमरजेन्सी की ट्रालियां, कांच के कमरे से निकलकर मरीजों की सेवा में पहुंची</title>
                                    <description><![CDATA[नीले रंग की पहचान से खत्म होगी स्ट्रेचर की किल्लत।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--mbs-emergency-department-s-trolleys-now-visible-in-a-new-color/article-149666"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-600-px)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एमबीएस अस्पताल में इमरजेंसी में आने वाले गंभीर मरीजों को अब स्ट्रेचर के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। अस्पताल प्रशासन ने एक अनूठा प्रयोग करते हुए इमरजेंसी की 18 ट्रॉलियों को विशेष नीले रंग से पुतवा दिया है। प्रशासन ने 8 अन्य नई ट्रॉलियां भी इमरजेंसी विभाग को हैंडओवर कर दी हैं, जिससे अब स्ट्रेचरों की कुल उपलब्धता 26 हो गयी है। साथ ही ट्राली मेन और ईचार्ज काे भी इन्हें संभालने और ऑपरेट करने में लगने वाले समय में भी भारी कमी आयेगी।</p>
<p><strong>पहचान और रिकवरी आसान</strong><br />नीले रंग की वजह से अब ये ट्रॉलियां वार्डों में गुम नहीं होंगी। अस्पताल परिसर में कहीं भी नीला स्ट्रेचर दिखने पर ट्रॉली इंचार्ज उसे तुरंत रिकवर कर इमरजेंसी में ला सकेंगे। प्रबधंधन की और से बताया गया है कि पहले मरीज अपनी सुविधा के लिये ले जाते थे जिन्हे कहीं भी छोड़ देते थे ऐसे में इन्हे ढुढ़ंने मे खासी परेशानी होती थी।</p>
<p><strong>स्थान में बदलाव- बेसमेंट के पास बना नया 'ट्रॉली स्टैंड'</strong><br />अधीक्षक डॉ. धर्मराज मीणा ने बताया कि समस्या के समाधान के लिए अब नई बिल्डिंग के मेन गेट के पास, बेसमेंट पार्किंग के बगल में एक स्थाई ट्रॉली स्टैंड बना दिया गया है। अब सभी ट्रॉलियां एक ही स्थान पर मिलेंगी। जिससें आने वाले मरीजों को अब बाहर से ही इन्हे उपलब्धता हो जायेगी।</p>
<p><strong>खबर का असर</strong><br />दैनिक नवज्योति ने 26 मार्च को 25 ट्रॉलियां कांच के कमरे में शीर्षक से प्रकाशित समाचार में अस्पताल प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया गया था कि कैसे एक तरफ मरीज स्ट्रेचर के लिए तड़प रहे हैं और दूसरी तरफ नई ट्रॉलियां तालों में बंद हैं। इस खबर के बाद हरकत में आए अस्पताल प्रशासन ने बुधवार को न केवल ट्रॉलियों को बाहर निकाला, बल्कि उनकी सुचारू उपलब्धता के लिए नई व्यवस्था भी लागू कर दी।</p>
<p>अस्पताल में संसाधनों की कमी नहीं थी, लेकिन उनके मिस-मैनेजमेंट को सुधारने के लिए अब कलर कोडिंग और नया पार्किंग बेसमेंट बनाया गया है ताकि आपातकालीन स्थिति में तुरंत स्ट्रेचर मिल सके। नर्सिंग अधीक्षक की देखरेख में ट्रॉली इंचार्ज इसकी जिम्मेदारी संभालेंगे।<br /><strong>- डाॅ.धर्मराज मीणा, अधीक्षक एमबीएस हॉस्पिटल </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 14:10:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का : एमबीएस अस्पताल में सुविधाओं के विकास को लेकर संभागीय आयुक्त ने दिए निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[पुराने भवन के बेसमेंट हॉल में जमा मलबे की सफाई हेतु निरीक्षण दल गठित कर शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--divisional-commissioner-issues-directives-regarding-facility-upgrades-at-mbs-hospital/article-147958"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(1)69.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">कोटा । संभागीय आयुक्त अनिल कुमार अग्रवाल ने निर्देश दिए कि एम.बी.एस. चिकित्सालय से संबंधित समस्याओं का समाधान शीघ्र किया जाए ताकि मरीजों को कोई असुविधा ना हो। उन्होंने ये निर्देश उनकी अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित बैठक में दिए। बैठक में चिकित्सा सुविधाओं के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।संभागीय आयुक्त ने एम.बी.एस व जे.के. लोन चिकित्सालय परिसर की चार दीवारी के संबंध में स्पष्ट निर्देश दिए कि इस काम के लिए दोनों चिकित्सालय 50-50 प्रतिशत की राशि आगामी तीन कार्य दिवस में सार्वजनिक निर्माण विभाग को हस्तांतरित करना सुनिश्चित करें। एम.बी.एस. चिकित्सालय में करीब 49.95 लाख रुपए लागत से इन्टरनल वायरिंग मरम्मत के निर्देश दिए गए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">अनुपयोगी व जर्जर भवनों को गिराएंगे</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">एम.बी.एस. चिकित्सालय परिसर स्थित अनुपयोगी, असुरक्षित व जर्जर और नकारा घोषित भवन, राजकीय आवास व लेक्चर थियेटर को गिराए जाने के संबंध में अधिशाषी अभियंता, सा. नि.वि. प्रोजेक्ट खण्ड ने बताया कि एक दो दिवस में कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en"> </span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">ड्रेनेज सिस्टम सुधारें</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">एम.बी.एस. व जे. के. लोन चिकित्सालय परिसर में ड्रेनेज सिस्टम कार्य के संबंध में एम.बी.एस. अधीक्षक को फोलोअप के लिए निर्देशित किया गया। जे. के. लोन व एम.बी.एस. चिकित्सालय परिसर में एस.टी.पी. निर्माण के संबंध में केडीए मुख्य अभियंता ने कार्य शीघ्र प्रारंभ कराने की बात कही।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">मां योजना के काउंटर बनाएं</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">संभागीय आयुक्त ने एम.बी.एस. चिकित्सालय में पुराने ओ.पी.डी. में कक्षों का रिनोवेशन कर मां योजना काउंटर में परिवर्तित करने, पुराने भवन के भूतल पर स्थित सम्पूर्ण कॉरिडोर में टाइल्स की मरम्मत व पेंटिंग, पुरानी खिडकियों को एल्यूमिनियम की खिड़की में बदलने, विभिन्न वार्ड में टॉयलेटस की मरम्मत, फीमेल सर्जिकल ए, बी, सी व कॉरिडोर की मरम्मत व चिकित्सालय के अन्य कार्य के संबंध में निर्देश दिए। एम.बी.एस. चिकित्सालय के बर्न वार्ड का मरम्मत कार्य सी.एस.आर. फण्ड से करवाने के लिए निर्देशित किया गया। पुराने भवन के बेसमेन्ट में बने हॉल में भरे मलबे की सफाई के लिए निरीक्षण दल गठित कर शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">जेके लोन में मेडिसिन आउटडोर शुरू करें</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">जे.के. लोन न्यू आई.पी.डी. के बाहर खाली पड़े हुए हॉल में तुरन्त प्रभाव से शिशु औषध विभाग का आउटडोर प्रारंभ करने के निर्देश दिए। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे इन सभी कार्यों का निरीक्षण करें। बैठक में जिला कलक्टर पीयूष समारिया, अतिरिक्त संभागीय आयुक्त ममता तिवारी, डॉ. निलेश कुमार जैन, प्रधानाचार्य, डॉ. धर्मराज मीणा, अधीक्षक एमबीएस चिकित्सालय, रविन्द्र माथुर निदेशक अभियांत्रिकी केडीए, अशोक सनाढ्य अधिशाषी अभियन्ता प्रोजेक्ट खण्ड, डॉ विधि शर्मा वित्तीय सलाहकार, चिकित्सा महाविद्यालय, महावीर सांवरिया नर्सिंग अधीक्षक एम.बी.एस. व अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 13:01:42 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>आदर्श प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में नियमों की खुली अनदेखी, पेयजल व जनसुविधाओं की बदहाल स्थिति</title>
                                    <description><![CDATA[पांच माह पूर्व स्थानांतरित हो चुके चिकित्सक की नेमप्लेट व मोबाइल नंबर अब भी प्रदर्शित।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/blatant-disregard-for-rules-at-the-adarsh-primary-health-center/article-143053"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(6)10.png" alt=""></a><br /><p>दबलाना। आदर्श प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दबलाना में विभागीय निदेर्शों और स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के नियमों की खुलेआम अनदेखी सामने आ रही है। चिकित्सक कक्ष पर वर्तमान स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी व चिकित्सक की नेमप्लेट तक नहीं लगी है और न ही मोबाइल नंबर अंकित हैं। पांच माह पूर्व स्थानांतरित हो चुके चिकित्सक की नेमप्लेट व मोबाइल नंबर अब भी प्रदर्शित हैं। रोगी अथवा उनके तीमारदार जब नेमप्लेट पर अंकित नंबरों पर संपर्क करते हैं तो स्थानांतरण हो चुके चिकित्सक से बातचीत होती है और तब ट्रांसफर की जानकारी मिलती है। रेजिडेंस की नेमप्लेट पर भी पुराने चिकित्सक का नाम और मोबाइल नंबर दर्ज होने से लोगों को उपचार की बजाय असुविधा झेलनी पड़ रही है।</p>
<p>कस्बे के मुकुट नागर ने बताया कि कई बार चिकित्सक के अनुपस्थित रहने पर नाम और नंबर उपलब्ध नहीं होने से मरीजों को अलोद या बूंदी जाना पड़ता है। इससे समय और धन दोनों की हानि हो रही है। स्वास्थ्य केंद्र के जनसुविधा घरों के ऊपर पाइप कनेक्शन सहित पानी की टंकियां रखी हैं, लेकिन जल संग्रहण नहीं होने से नलों में पानी नहीं आता और वे शोपीस बने हैं। सीएचसी परिसर में ट्यूबवेल का पानी फ्लोराइड युक्त है। पेयजल के लिए लगाया गया आरओ ऐसे स्थान पर है जहां आमजन की नजर नहीं पड़ती। शुद्ध जल के लिए भटकना पड़ रहा है। यह स्थिति स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण की मंशा पर सवाल खड़े कर रही है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />पर्यावरण को बढ़ावा देने , हरियाली, स्वच्छता का सदेश देने के लिए गार्डन एवं क्यारियां बनी हुई है। सुरक्षा कीदष्टि से तार बाड़ भी 5 माह पहले से ही मौजूद है । जिनमें हरियाली गायब होकर के सूखी जहरीली घास अपनी मौजूदगी बताने के साथ ही मौजूद पेड पौधे अपनी सार संभाल , सिंचाई की कमी वअनदेखी को बता रहे हैं । घास पूस ,बेकार के पौधे, झाड़ झझाड़ डॉक्टर रेजिडेंस के आसपास तथा सीएचसी परिसर में मौजूद होसे से पर्यावरण के नियमों की अनदेखी है ।<br /><strong>-सुरेन्द्र गौतम, उपसरपंच, दबलाना </strong><br /> <br />दबलाना भाजपा मंडल अध्यक्ष हेमराज राठौर ने कहा कि आदर्श पीएचसी में नियमों की अनदेखी, स्टाफ की कमी, डॉक्टर के नदारद रहने के मामले में बीसीएमएचओ हिंडोली को अवगत करायाहआ है ।<br /><strong>-हेमराज राठौर, भाजपा मंडल अध्यक्ष, दबलाना</strong></p>
<p>पीएचसी इंचार्ज एवं नर्सिंग आॅफिसर जयकुमार सोनी ने कहा कि नए- नाम और नंबर लिखवा जाएंगे। टंकी में जल संग्रहण व्यवस्था करवाने के साथ-साथ झाड़  झंझाड़ो की सांफ सफाई कराई जएगी।<br /><strong>-जयकुमार सोनी, इंचार्ज एवं नर्सिंग आॅफिसर, पीएचसी,दबलाना। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Feb 2026 16:28:47 +0530</pubDate>
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                <title>लापरवाही : मौसमी बीमारियों का प्रकोप मरीजों पर पड़ रहा भारी,भटक रहे मरीज</title>
                                    <description><![CDATA[कई बार  चिकित्सक समय पर नहीं आते और आते है तो चले जाते है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/negligence--seasonal-illnesses-are-taking-a-toll-on-patients--leaving-patients-stranded/article-142590"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(10).png" alt=""></a><br /><p>खानपुर। खानपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अव्यवस्थाओं का आलम यह है कि मरीजों को इलाज के लिए दर ब दर भटकना पड़ रहा है। यहां डॉक्टरों की भारी कमी के चलते मरीजों को सही समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है । नियमानुसार एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर फिजिशियन, महिला स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग, सर्जन आदि चिकित्सकों को लगाया जाता है ताकि मरीजों को सही समय पर सही इलाज मिल सके लेकिन यहां पर चिकित्सकों के अभाव के कारण मरीजों को कई घंटों लाइन में लगना पड़ता है वहीं कई बार तो चिकित्सक समय पर नहीं आते और आते है तो चले जाते है। अभी सर्दी का असर धीरे धीरे जाने लगा है तो मौसमी बीमारियों का प्रकोप चल रहा है , जिस कारण सर्दी जुखाम, खांसी बुखार, वायरल के मरीजों की संख्या ज्यादा है लेकिन मरीजों को इलाज चिकित्सक के अभाव में उपचार नहीं मिल पा रहा है जिस कारण मरीज उपचार के लिए भटक रहे है। वहीं अस्पताल में एक्स रे, दवाईयां काउंटर, बीमारियों की जांचों के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। अस्पताल में सफाई व्यवस्था भी चरमराई हुई है , संक्रमित कचरा ज्यादा खतरनाक होता है जिसे सही समय पर उचित स्थान पर डालना चाहिए लेकिन सफाई व्यवस्था सुचारू रूप से नहीं हो रही है, डस्टबिन में कचरा बाहर आ रहा है वहीं दीवारों पर गुटखें के निशान आदि से गंदगी के आसार बने हुए है । ग्रामीणों ने मांग की है कि जल्द से जल्द अस्पताल में अव्यवस्थाओं को सुधारा जाए।</p>
<p>खानपुर अब नगर पालिका बन चुकी है और नगर पालिका बनने के बाद अब आसपास के गांव के मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है इधर तो मरीजों की संख्या बढ़ रही है और उधर डॉक्टरों की संख्या कम हो रही है । मजबूरन मरीजों को प्राइवेट अस्पताल का सहारा लेना पड़ता है ।<br /><strong>- अभिषेक वर्मा, कस्बेवासी</strong></p>
<p>अस्पताल में कई बार लम्बी लाइनें लगाकर मरीज अपना इंतजार करता है लेकिन तब तक चिकित्सक से नहीं मिल पाता ।<br /><strong>- मुकेश मालव, कस्बेवासी</strong></p>
<p>चिकित्सकों की कमी की समस्या का जल्द से जल्द समाधान किया जाए।<br /><strong>- टोनी मीणा, कस्बेवासी</strong></p>
<p>खानपुर सीएचसी पर आज तो केवल दो ही डॉक्टर थे और तादाद की संख्या में मरीजों की भीड़ लगी हुई थी ओपीडी में ज्यादा मरीज आते हैं, सही समय पर उपचार मिलना चाहिए।<br /><strong>- उग्रसेन नागर, कस्बेवासी</strong></p>
<p>यहां खानपुर सीएचसी में चार डॉक्टरों में से भी एक डॉक्टर सिजेरियन व एक गाइनेकोलॉजिस्ट व एक सीएचसी प्रभारी है वह भी अपना कार्य करेंगे उन्हें भी अपने ड्यूटी टाइम से लेकर लगातार कार्य करना पड़ता है लगातार ड्यूटी पर बैठते हैं लेकिन क्या करें इतने मरीजों को कैसे संभाले यह भारी विडंबना है डॉक्टरों की कमी है।<br /><strong>- राजाराम गुर्जर, कस्बेवासी</strong></p>
<p>अभी नई नियुक्तियां हुई है जयपुर निदेशालय द्वारा खानपुर में इसी सप्ताह में डॉक्टर लगा दिए जाएंगे ।<br /><strong>-डॉ. साजिद खान सीएमएचओ, झालावाड़</strong></p>
<p>यहां पहले ही चिकित्सकों की कमी चल रही है और जैसे गर्मी बढ़ती हुई जाएगी मरीजों की संख्या बढ़ेगी अब केवल मात्र चार डॉक्टर ही रह जाएंगे, जिसके ऊपर खानपुर सीएचसी निर्भर रहेगी ।<br /><strong>-डॉ. धीरेंद्र गोपाल मिश्रा सीएचसी इंचार्ज, खानपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 14:56:31 +0530</pubDate>
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                <title>डॉक्टर नदारद, स्टाफ की कमी से मरीज हो रहे परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[५ स्टेट हाईवे पर रात की दुर्घटनाओं में अस्पताल बंद होने से इलाज नहीं मिल पाता।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/doctors-absent--patients-suffering-due-to-staff-shortage/article-142475"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/kota.png" alt=""></a><br /><p>दबलाना।कस्बे का आदर्श प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अव्यवस्थाओं का शिकार बना हुआ है। हालात यह हैं कि अस्पताल में आने वाले मरीजों को उपचार के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्टेट हाईवे पर स्थित होने के कारण रात के समय दुर्घटनाएं होती रहती हैं, लेकिन अस्पताल बंद रहने से घायलों को प्राथमिक उपचार तक नहीं मिल पाता। मजबूरन मरीजों को निजी क्लीनिकों या बूंदी व हिंडोली रेफर किया जा रहा है।सामान्य दुर्घटना और मारपीट के मामलों में चिकित्सक उपलब्ध होने के बावजूद एमएलसी नहीं बनने से पुलिस को अलोद, हिंडोली या बूंदी के चक्कर काटने पड़ते हैं। प्रसव पीड़ा से कराहती महिलाओं को भी दूर बूंदी रेफर किया जा रहा है, जिससे उनकी पीड़ा और बढ़ जाती है।</p>
<p>रविवार को भी ऐसा ही मामला सामने आया। दबलाना उपसरपंच सुरेंद्र गौतम और भाजपा नेता केसरी लाल नागर ने बताया कि सुबह 9 से 11 बजे तक अस्पताल में डॉक्टर की तलाश की गई, लेकिन वे नहीं मिले। चिकित्सा कर्मियों ने पंचायत में शिविर होने की जानकारी दी, जबकि पंचायत में पूछताछ करने पर पता चला कि डॉक्टर केवल फोटो खिंचवाकर लौट गए।</p>
<p>स्वास्थ्य केंद्र परिसर में जहरीली घास और झाड़-झंझाड़ उगे हुए हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बना हुआ है और स्वच्छता अभियान की अनदेखी हो रही है। जानकारी के अनुसार पीएचसी में दो नर्सिंग आॅफिसर, एक डॉक्टर, एक एलएचवी, एक वार्ड बॉय और एक एएनएम के पद रिक्त हैं।</p>
<p>भाजपा मंडल अध्यक्ष हेमराज राठौर ने कहा कि डॉक्टर की मनमर्जी और स्टाफ की कमी से आमजन को उपचार के बजाय असुविधा झेलनी पड़ रही है। सीएमएचओ बूंदी ओपी सामर से संपर्क नहीं हो सका। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />अस्पताल में डॉक्टर नहीं है, इस मामले में डॉक्टर से चर्चा करूंगा। <br /><strong>-रामसिंह मीणा,ब्लॉक सीएमएचओ, हिंडोली।  </strong></p>
<p>मैं अकेला क्या कर सकता हूं। स्टाफ की कमी से सीएमएचओ बूंदी तथा ब्लॉक तथा ब्लॉक सीएमएचओ हिंडोली को अवगत करवाया हुआ है। <br /><strong>-डॉक्टर संजीत यादव, पीएचसी प्रभारी। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 16:21:11 +0530</pubDate>
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