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                <title>patients - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>आवारा श्वानों ने  453 को बनाया शिकार, हर दिन औसतन 15 लोग हो रहे डाॅग बाइट के शिकार</title>
                                    <description><![CDATA[ कुत्तों का आतंक: एमबीएस अस्पताल में आए 535 रेबीज केस।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/stray-dogs-have-attacked-453-people--an-average-of-15-dog-bite-cases-reported-daily/article-164138"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/6622-copy116.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर में आवारा जानवरों, विशेषकर कुत्तों का खौफ इस कदर बढ़ गया है कि सड़कें और गलियां आमजन व राहगीरों के लिए सुरक्षित नहीं रही हैं। बीते एक माह में केवल एमबीएस में ही आवारा जानवरों के काटने के 535 से अधिक मामले सामने आए है, जिसके बाद मरीजों को एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाई गई है। शहर की गलियों और मुख्य मार्गों पर आवारा कुत्तों का जमावड़ा इस कदर बढ़ गया है कि अकेले एमबीएस अस्पताल में ही औसतन रोजाना 15 लोग कुत्तों के काटने का शिकार होकर पहुंच रहे हैं।</p>
<p><strong>अस्पताल के ओपीडी आंकड़े (एक नज़र में)</strong><br />-डॉग बाइट (कुत्ते के काटने के मामले): 453 मरीज<br />-मंकी बाइट (बंदरों के हमले): 53 मरीज<br />-कैट बाइट (बिल्लियों के काटने के मामले): 29 मरीज<br />-कुल एंटी-रेबीज टीकाकरण: 535 से अधिक मरीज<br />-रोजाना औसतन 15 लोग हो रहे डॉग बाइट के शिकार</p>
<p><strong>जानवर के काटने या खरोंचने पर तुरंत क्या करें?</strong><br />-घाव की सफाई: घाव को तुरंत बहते पानी और डिटॉल या साधारण साबुन से कम से कम 15 मिनट तक लगातार धोएं।<br />-एंटीसेप्टिक लगाएं: धोने के बाद अल्कोहल युक्त एंटीसेप्टिक या पोविडोन-आयोडीन (जैसे बेटडीन) लगाएं।<br />-तुरंत अस्पताल जाएं: MBS अस्पताल की OPD या नजदीकी सरकारी अस्पताल जाकर 24 घंटे के भीतर पहली वैक्सीन (Day 0) लगवाएं।<br />-एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन शेड्यूल का पुरी तरह पालन करें।<br />-अगर डॉक्टर आपको इंट्रा-डर्मल या इंट्रा-मस्कुलर वैक्सीन की सलाह देते हैं, तो पूरा कोर्स अवश्य लें।<br />-क्या न करें: घाव पर मिर्च, हल्दी, चुना, या पट्टीतुरंत न बांधें जब तक डॉक्टर सलाह न दें।</p>
<p><strong>पालतु हो या आवारा, खराेंच या लार भी घातक</strong><br />शहर में बंदरों का आतंक भी कम नहीं है शहर के हर कोने में बने पार्को व धार्मिक स्थलों पर बंदरों के हमलों के मामले सामने आते रहतेे है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी प्रकार के जानवर से आपके शरीर पर लगा हुआ घाव या उसके द्वारा लगी लार भी खतरनाक है। जानवरों से पर्याप्त दुरी रखनी चाहिए। किसी भी आशंंका पर तुरन्त डॉ. से सलाह लेनी चाहिए।</p>
<p><strong>रेबीज 100% जानलेवा, डॉक्टरी सलाह ही एकमात्र बचाव</strong><br />वरिष्ठ चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार रेबीज एक बेहद खतरनाक व 100% जानलेवा संक्रमण है। एक बार लक्षण दिखने के बाद इसका कोई इलाज संभव नहीं है। समय पर एंटी-रेबीज वैक्सीन और आवश्यकतानुसार 'रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन' (RIG) ही जीवन बचा सकता है।</p>
<p><strong>सुबह टहलने से लेकर देर रात तक घर लौटने वाले सभी बन रहे शिकार</strong><br />फूड डिलीवरी का काम करने वाले महेन्द्र सुमन का कहना है कि देर रात ड्यूटी से लौटने वाले वाहन चालकों, बुजुर्गों और छोटे बच्चों के लिए स्थिति सबसे अधिक घातक साबित हो रही है। आए दिन कुत्तों के झुंड बाइक सवारों को गिरा देते हैं। या मासूमों पर हमला कर देते हैं। करणी नगर निवासी हर्ष ने कहा कि इसके बावजूद नगर निगम का एनिमल बर्थ कंट्रोल प्रोग्राम और नसबंदी अभियान पूरी तरह बेअसर साबित हो रहा है।</p>
<p><strong>प्रशासनिक स्तर पर ठोस कदम उठाने की मांग</strong><br />सोशल इश्यू पर काम करने वाले नितीन नान्ता का कहना है कि महज अस्पताल में मेडिकल तैयारियां करने से इस समस्या का समाधान नहीं होगा। जब तक नगर निगम और जिला प्रशासन आवारा जानवरों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं करेगा, तब तक शहरवासी इस खौफ के साए में जीने को मजबूर रहेंगे।</p>
<p>बाेरखेडा से इलाज कराने आए देशराज ने कहा कि 3 दिन पहले में कुत्तें काे रोटी डाल रहा था तभी उसने अजीब सा बर्ताव किया मै कुछ समझ पाता मेरी ऊंगली चबा ली। अब इन्जेक्शन लगवाने आया हूँ।</p>
<p> आम लोगों काे काटने व हमलावर प्रवृति के आवारा कुत्तों को रखने के लिए स्थाई शेल्टर बनवाने का टेण्डर जारी कर दिया गया है। शहर से पकडे गए जानवरों की शिकायतों के आधार पर इन्हें यहां रखा जाएगा। इसके अलावा वेक्सीनेशन का काम लगातार किया जा रहा है।<br /><strong>- ओमप्रकाश मेहरा आयुक्त नगर निगम कोटा</strong></p>
<p><strong>किसी भी स्थिति में सेल्फ-ट्रीटमेंट न करें</strong><br />कुन्हाडी सीएचसी के प्रभारी डॉ चन्द्रप्रकाश कलवार बताते है कि जानवर के काटने, खरोंचने या दांत लगाने पर घाव पर पट्टी बांधने या ढकने के बजाय उसे तुरंत बहते पानी और साबुन/डिटर्जेंट या एंटीसेप्टिक लोशन से अच्छी तरह साफ करें। घाव पर चूना, मिर्च, हल्दी या कोई अन्य घरेलू चीज बिल्कुल न लगाएं। यह संक्रमण को और अधिक बढ़ा सकता है। किसी भी स्थिति में सेल्फ-ट्रीटमेंट न करें। घटना के तुरंत बाद डॉक्टर से परामर्श लें, टिटनेस का टीका लगवाएं और डॉक्टर की सलाह पर एंटी-रेबीज नोजल/वैक्सीनेशन का पूरा कोर्स करवाएं।</p>
<p> किसी भी प्रकार की चोट खरौच को नजर अंदाज बिल्कूल न करें घाव को तत्काल साफ पानी से धाेने के बाद तत्काल चिकित्सीय सलाह के लिए अस्पताल लेकर जाएं। ध्यान रहें किसी भी प्रकार के वैक्सीनेशन की सलाह को नजरअंदाज बिल्कुल न करें।<br /><strong>-डॉ. राकेश सिंह अधीक्षक एमबीएस अस्पताल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 14:27:24 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता : बिरला</title>
                                    <description><![CDATA[मेडिकल कॉलेज, जेके लोन और रेलवे अस्पताल के मरीजों को मिलेगी निशुल्क परिवहन सेवा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/providing-timely-medical-facilities-to-patients-is-our-priority-%E2%80%93-birla/article-163332"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/6622-copy52.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को कोटा स्थित कैंप कार्यालय से अत्याधुनिक एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट सिस्टम से लैस तीन एम्बुलेंस को जनसेवा के लिए समर्पित की। भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास संस्था लिमिटेड के सीएसआर सहयोग तथा सांसद निधि के माध्यम से इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी द्वारा उपलब्ध कराई गई ये एम्बुलेंस कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल, जेके लोन अस्पताल और रेलवे अस्पताल में मरीजों की निशुल्क आवाजाही के लिए उपलब्ध रहेंगी।</p>
<p>इस अवसर पर बिरला ने कहा कि कोटा-बून्दी में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करना तथा मरीजों को बेहतर उपचार के साथ अधिक से अधिक सुविधाएं निशुल्क उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जरूरत के समय मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाना बेहद महत्वपूर्ण होता है। नई एम्बुलेंस से गंभीर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में सुविधा मिलेगी और जरूरतमंद परिवारों को राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाने के साथ यह भी जरूरी है कि उनका लाभ आमजन को आसानी से मिले। इसी दिशा में कोटा-बून्दी क्षेत्र में चिकित्सा सुविधाओं को लगातार बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।</p>
<p>इस दौरान कोटा मंडल रेल प्रबंधक अनिल कालरा, मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. नीलेश जैन, जेके लोन अस्पताल की अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा सहित रेलवे तथा चिकित्सा विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 15:52:17 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बारिश में तालाब बन जाता है मेहन्दड़ी-भगवानपुरा मार्ग,मरीजों को चारपाई पर ले जाने की मजबूरी</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रामीणों ने स्थायी समाधान और जल्द कार्रवाई की मांग की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/mehandri-bhagwanpura-road-turns-into-a-pond-during-rains--patients-forced-to-be-carried-on-cots/article-162553"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-(1)5.png" alt=""></a><br /><p>खानपुर। खानपुर के जोलपा ग्राम पंचायत मुख्यालय के अंतर्गत आने वाले मेहन्दड़ी गांव के ग्रामीण लंबे समय से बदहाल सड़क की समस्या से परेशान हैं। मेहन्दडी से भगवानपुरा ग्राम पंचायत मुख्यालय को जोड़ने वाले मार्ग पर करीब दो दशक पुराना खरंजा बना हुआ है। बारिश के दौरान यह रास्ता पानी से लबालब होकर तालाब का रूप ले लेता है, जिससे ग्रामीणों का पंचायत मुख्यालय और आसपास के गांवों से संपर्क प्रभावित हो जाता है। बारिश के दिनों में हालात इतनेखराब हो जाते हैं कि बीमार बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को से चारपाई के सहारे पानी भरे रास्ते निकालना पड़ता है। </p>
<p>वहीं, सड़क किनारे स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय मेहन्दड़ी में मेहन्दड़ी के अलावा सुवालिया, खुजां और भगवानपुरा सहित करीब एक दर्जन गांवों के विद्यार्थी पढ़ने आते हैं। जलभराव के कारण विद्यार्थियों को भी आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने समस्या को लेकर राजस्थान संपर्क पोर्टल, जनसुनवाई तथा ज्ञापन के माध्यम से सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), उपखंड प्रशासन, जिला प्रशासन और जिला कलेक्टर को कई बार अवगत कराया, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 1998 में विधायक कोष से खरंजा स्वीकृत हुआ था। इसके बाद से लंबा समय बीतने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।</p>
<p><strong>एक सप्ताह का अल्टीमेटम</strong><br />ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर उच्च स्तरीय पुलिया निर्माण के लिए बजट आवंटित नहीं किया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने समस्या के स्थायी समाधान की मांग करते हुए प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की अपील की है।</p>
<p><strong>पाइप कंवर्ट के प्रस्ताव से नाराजगी</strong><br />ग्रामीणों के अनुसार पीडब्ल्यूडी ने समस्या के समाधान के लिए दो पाइप कंवर्ट निर्माण का प्रस्ताव दिया है, लेकिन ग्रामीण इसे उचित समाधान नहीं मान रहे। उनका कहना है कि पाइप कंवर्ट बनने से रास्ता और नीचे हो जाएगा तथा जलभराव की समस्या बनी रहेगी। ग्रामीणों ने इसके बजाय उच्च स्तरीय पुलिया निर्माण की मांग की है।</p>
<p>पीडब्ल्यूडी द्वारा केवल दो पाइप कंवर्ट निर्माण का प्रस्ताव दिया जा रहा है, जो इस समस्या को और अधिक बढ़ा देगा। पाइप कंवर्ट बनने से खंरंजा और नीचे हो जाएगा, जिससे वहां से निकलना और भी मुश्किल हो जाएगा इसलिए हम इसकी जगह एक उच्च स्तरीय पुलिया की मांग कर रहे हैं।<br /><strong>- गिरिराज बाई, कस्बेवासी</strong></p>
<p>सड़क किनारे स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में महेंदडी के अलावा सुवालिया, खुजा और भगवानपुरा सहित करीब एक दर्जन गांवों के बच्चे पढ़ने आते हैं। खराब रास्ते के कारण स्कूली बच्चों को रोजाना सबसे ज्यादा मशक्कत और परेशानियों का सामना करना पड़ता है।<br /><strong>- राहुल बैरवा, कस्बेवासी</strong></p>
<p>यदि एक सप्ताह के भीतर उच्च स्तरीय पुलिया निर्माण हेतु बजट का आवंटन नहीं किया गया, तो हम और अधिक कड़ कदम उठाने पर मजबूर होंगे।<br /><strong>-अभिषेक वर्मा, कस्बेवासी</strong></p>
<p>ढाई दशक से ज्यादा समय बीत गया लेकिन महेंदडी से भगवानपुरा मार्ग पर बना यह पुराना खरंजा आज भी जस का तस है। बारिश के दिनों में यह रास्ता पूरी तरह से तालाब का रूप ले लेता है, जिससे गांव का संपर्क पंचायत मुख्यालय और पूरे उपखंड क्षेत्र से पूरी तरह कट जाता है।<br /><strong>- अंकित कस्बेवासी</strong></p>
<p>सड़क मार्ग खराब होने के कारण बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के बीमार पड़ने पर उन्हें एम्बुलेंस या वाहन के बजाय चारपाई के सहारे रास्ता पार करवाना पड़ता है।<br /><strong>- हरलाल बेरता, कस्बेवासी</strong></p>
<p>इस समस्या को लेकर कई बार राजस्थान संपर्क पोर्टल, जनसुनवाई और ज्ञापनों के माध्यम से सूचित किया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।<br /><strong>- दीनदयाल चौबदार, कस्बेवासी</strong></p>
<p>सीडी वर्ग के प्रस्ताव मांगे गए थे, उसमें जेएलजी प्रस्ताव आ गया था वह स्वीकृत हो गया है। दो पाइप हो चुके हैं अभी एन आई दी खोल रखी है जैसे ही एनआईटी मिल जाएगी तो कार्य चालू हो जाएगा। <br /><strong> - प्रदीप चौधरी, सहायक अभियंता, पीडब्लूडी खानपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 17:37:07 +0530</pubDate>
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                <title>अस्पताल या तालाब! बारिश में डूबा अटरू चिकित्सालय परिसर</title>
                                    <description><![CDATA[ नगरपालिका निरीक्षण में खुलासा, बंद नालियां और खराब ड्रेनेज बनीं जलभराव की मुख्य वजह।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/hospital-or-pond--atru-hospital-complex-submerged-in-rainwater/article-162363"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)41.png" alt=""></a><br /><p>अटरू। बरसात आते ही अटरू उपजिला चिकित्सालय में मरीजों के  लिए इलाज से पहले पानी से जूझने की  मजबूरी बन जाती है। अस्पताल परिसर में जमा बारिश का पानी व्यवस्था की ऐसी तस्वीर पेश कर रहा है, मानो चिकित्सालय नहीं बल्कि तालाब हो। हर वर्ष सामने आने वाली इस समस्या की पड़ताल में जलभराव की असली वजह सामने आई है। नगरपालिका के निरीक्षण में अस्पताल परिसर की नालियों कचरे, मिट्टी और मलबे से बंद मिलीं, जिसके कारण बारिश का पानी बाहर नहीं निकल पा रहा है। अस्पताल परिसर में पानी भरने से मरीजों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इलाज के लिए आने वाले लोगों को कई बार पानी भरे रास्तों से होकर अस्पताल तक पहुंचना पड़ता है। जलभराव के कारण संक्रमण फैलने और मच्छरों के पनपने का खतरा भी बना रहता है।</p>
<p><strong>हर मानसून में दोहराती है समस्या</strong><br />स्थानीय लोगों के अनुसार अटरू उपजिला चिकित्सालय में जलभराव की समस्या कोई नई नहीं है। कई वर्षों से बारिश के मौसम में यही स्थिति बनती आ रही है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र के प्रमुख सरकारी अस्पताल में जहां मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा  मिलनी चाहिए, वहीं बरसात के दिनों में परिसर में जमा पानी परेशानी का कारण बन जाता है। </p>
<p><strong>निरीक्षण में बंद मिलीं अस्पताल की नालियां</strong><br />जलभराव की शिकायत मिलने पर नगरपालिका के कार्यवाहक अधिशासी अधिकारी योगेन्द्र प्रसाद त्रिवेदी ने स्वास्थ्य निरीक्षक मदनमोहन भार्गव को अस्पताल परिसर का निरीक्षण करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान सामने आया कि अस्पताल परिसर के अंदर बनी कई नालियां कचरे, मिट्टी और मलबे के कारण पूरी तरह बंद पड़ी हैं। इसके चलते बारिश का पानी नालियों के माध्यम से बाहर नहीं निकल पा रहा है और परिसर में जमा हो रहा है। निरीक्षण में यह तथ्य भी सामने आया कि अस्पतालपरिसर का स्तर बाहरी सड़क की तुलना में काफी नीचा है, जबकि बाहर की नालियां ऊंची हो चुकी हैं। इसी वजह से बारिश का पानी बाहर निकलने के बजाय अस्पताल परिसर में ही रुक जाता है और जलभराव की स्थिति बन जाती है।</p>
<p><strong>बीसीएमओ ने बताई वर्षों पुरानी समस्या</strong><br />ब्लॉक चिक्रित्सा अधिकारी डॉ. केशवराज नागर ने बताया कि बरसात के दौरान अस्पताल परिसर में जलभराव की समस्या हर वर्ष सामने आती है। इस संबंध में कई बार नगरपालिका को अवगत कराया है, लेकिन अभी तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने अस्पताल के बाहर स्थित बड़े नालों की सफाई कराने के साथ ही स्थायी ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने की आवश्यकता बताई।</p>
<p><strong>सिर्फ सफाई नहीं, स्थायी समाधान की जरूरत</strong><br />कार्यवाहक अधिशासी अधिकारी योगेन्द्र प्रसाद त्रिवेदी ने बताया कि अस्पताल के बाहर स्थित बड़े नालों की पहले भी सफाई करवाई जा चुकी है। यदि जल निकासी की समस्या फिर भी बनी हुई है तो दोबारा निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य निरीक्षक की रिपोर्ट में अस्पताल परिसर की आंतरिक नालियां बंद होने और बाहरी नालियों के ऊंचे स्तर के कारण जल निकासी प्रभावित होने की बात सामने आई है। समस्या के स्थायी समाधाम के लिए अस्पताल परिसर का स्तर ऊंचा करना होगा। साथ ही अंदर की नालियों का पुनर्निर्माण कर उन्हें बाहरी ड्रेनेज सिस्टम से वैज्ञानिक तरीके से जोड़ना जरूरी है।</p>
<p><strong>नागरिकों ने मांगा स्थायी ड्रेनेज सिस्टम</strong><br />स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और नगरपालिका से मांग की है कि हर वर्ष होने वाली जलभराव की समस्या को केवल नालियों की सफाई तक सीमित न रखा जाए। अस्पताल परिसर में स्थायी जल निकासी व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि मानसून के दौरान मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।</p>
<p><strong>इनका  कहना है </strong><br /> बरसात के मौसम में अस्पताल परिसर में हर वर्ष जलभराव की समस्या आती है। प्रत्येक वर्ष नगरपालिका को अवगत कराया जाता है, लेकिन अब तक पानी निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी। अस्पताल के बाहर जाम पड़े बड़े नालों की सफाई कराने तथा अस्पताल के लिए स्थायी ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने की आवश्यकता है ताकि हर मानसून में होने वाली इस समस्या का स्थायी समाधान हो सके।<br /><strong>- डॉ. केशवराज नागर, ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी</strong></p>
<p> अस्पताल के बाहर स्थित बड़े नालों की पूर्व में सफाई करवाई जा चुकी है। यदि फिर भी जल निकासी की समस्या बनी हुई है तो दोबारा निरीक्षण कर आवश्यकतानुसार नालों की सफाई करवाई जाएगी। स्वास्थ्य निरीक्षक मदनमोहन भार्गव की रिपोर्ट में अस्पताल परिसर की आंतरिक नालियां बंद होने तथा बाहरी नालियों के ऊंचे स्तर के कारण जल निकासी प्रभावित होने की बात सामने आई है।<br /><strong>- योगेन्द्र प्रसाद त्रिवेदी, कार्यवाहक अधिशासी अधिकारी, नगरपालिका अटरू</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 14:56:53 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का : मरीज लाइन में नहीं लगें, इसलिए टोकन करें जारी</title>
                                    <description><![CDATA[स्वास्थ्य केंद्रों पर पानी रिसाव, सोलर प्लांट और आंगनबाड़ी संचालन से जुड़ी कमियों को जल्द दूर करने के निर्देश दिए ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news--issue-tokens-so-patients-don-t-have-to-stand-in-queues/article-160092"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)68.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।  संभागीय आयुक्त अनिल कुमार अग्रवाल ने गुरुवार को शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सकतपुरा, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कुन्हाडी एवं आंगनबाड़ी केंद्र गोविंदपुरा बावड़ी का औचक निरीक्षण किया। संभागीय आयुक्त ने एमसीएचएन सेशन के तहत हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं की केयर के बारे में चल रहे प्रशिक्षण का भी निरीक्षण किया। संभागीय आयुक्त ने सीएचसी कुन्हाड़ी में निरीक्षण के दौरान निर्देश दिए कि मरीजों को लाइन में लगकर इंतजार नहीं करना पडे इसके लिए टोकन जारी कर उन्हें क्रम के अनुसार बुलाएं।</p>
<p> संभागीय आयुक्त अनिल कुमार अग्रवाल ने शहरी चिकित्सालयों का दौरा करते समय निर्देश देते हुए कहा कि अस्पतालों में लगने वाली भीड़ को कम करने  के लिए पोर्टल के जरिए ऑनलाइन टिकट  और टोकन जारी करने को कहा है।<br />सीएचसी परिसर में सौलर प्लांट इन्स्टोलेशन के लिए गढ्ढे करने के बाद अभी तक प्लांट नहीं लगाने पर उन्होंने संबंधित कम्पनी के प्रतिनिधि को शीघ्र कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सकतपुरा में पीएचईडी के अकेलगढ़ प्लांट का पानी रिसाव होकर आने को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने एसई पीएचईडी को निर्देश दिए कि प्लांट की चारदीवारी की मरम्मत एवं वॉटर हारर्वेस्टिंग स्ट्रक्चर बनाकर वेस्ट वॉटर का सीपेज रोके ताकि स्वास्थ्य केन्द्र पर आने वाले मरीजों को परेशानी नहीं हो।<br /> गोविंदपुरा बावडी आंगनबाडी केन्द्र खुले में टीनशैड़ के नीचे चलता हुआ देखकर संभागीय आयुक्त ने सीडीपीओ तालेडा को निर्देश दिए कि आंगनबाडी केन्द्र को किसी खाली पडे सरकारी भवन में शिफ्ट किया जाए, ताकि केन्द्र के संचालन में परेशानी नहीं हो एवं बारिश के मौसम में छोटे बच्चे परेशान नहीं हो। निरीक्षण के दौरान संयुक्त निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. जगदीश सोनी भी उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 11:40:35 +0530</pubDate>
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                <title>लापरवाही : अस्पताल परिसर में झूलते बिजली के तार</title>
                                    <description><![CDATA[विद्युत विभाग ने समाधान का दिया आश्वासन।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/negligence--dangling-power-lines-in-the-hospital-complex/article-158397"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/12200-x-600-px)13.png" alt=""></a><br /><p>खानपुर । खानपुर क़स्बे के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में इन दिनों अव्यवस्थाओं का आलम है। अस्पताल के प्रवेश द्वार के समीप बिजली के भारी-भरकम तार पूरी तरह से नीचे लटक रहे हैं, जो यहाँ आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए किसी बड़े ख़तरे से कम नहीं हैं। बिजली के तार बेहद नीचे झूल रहे हैं और पास ही में मवेशी घूमते हुए देखे जा सकते हैं। परिसर में वाहनों की आवाजाही भी लगातार बनी रहती है। यह लापरवाही न केवल यहाँ आने वाले लोगों के लिए ख़तरनाक है, बल्कि किसी भी क्षण एक बड़े बिजली हादसे को न्योता दे रही है।  </p>
<p>अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर जहाँ दिन भर सैकड़ों लोगों का आना-जाना रहता है, बिजली के इन खुले और लटकते तारों की ओर न तो अस्पताल प्रशासन ध्यान दे रहा है और न ही विद्युत विभाग। स्थानीय निवासियों नें कई बार इस समस्या को नजरअंदाज करने की शिकायत की है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। अस्पताल परिसर में हमेशा भीड़ रहती है, जिसमें छोटे बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल होते हैं। यदि समय रहते इन लटकते तारों को ठीक नहीं किया गया, तो यहाँ कभी भी बड़ी अनहोनी हो सकती है। क्षेत्र के नागरिकों और जागरूक लोगों ने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बाहर लटक रहे इन बिजली के तारों को तत्काल प्रभाव से ठीक किया जाए, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके।</p>
<p>टीम को भिजवाकर आज दिखवा लिया गया है, कल झूलते बिजली के तारों की समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।<br /><strong>- महेश कुमार नागर,कनिष्ठ अभियंता विद्युत विभाग</strong></p>
<p>ग्रामीणों के साथ साथ कभी कोई मवेशी या जानवर इन बिजली के तारों की चपेट में आ सकते है।<br /><strong>- नितिन यादव, छात्र</strong></p>
<p>यह लाइट की केबल जो नीचे झुक रही है यह बाहर से आने वाले मरीजों के लिए लिए हानिकारक है प्रशासन से निवेदन है कि इसे ऊपर कराया जाए या इस खतरे को हटाया जाए।<br /><strong>-मुकेश चौधरी, व्यापारी</strong></p>
<p>सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में व्यक्तियों का आना-जाना लगा रहता है और इस केंद्र पर ऐसा होना उचित नहीं है कभी भी घटना को घटित हो सकती है।<br /><strong>- गोविंद राठौर, कस्बेवासी</strong></p>
<p> खानपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बहुत बड़ा केंद्र है यहां पर से बाहर के क्षेत्र से भी मरीज आते हैं, इस लापरवाही को देखते हुए कभी भी दुर्घटना हो सकती है।<br /><strong>- राजेंद्र कुमार, कस्बेवासी</strong></p>
<p>यह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर यहां पर इस प्रकार लाइट के तारों की ऐसी व्यवस्था से दुर्घटना होने की संभावना है। समस्या का समाधान किया जाना चाहिए।<br /><strong>- राजेंद्र मेरोठा, कस्बेवासी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 16:00:25 +0530</pubDate>
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                <title>8.87 लाख खर्च, फिर भी बंद पड़ा कनवास सीएचसी का सोलर सिस्टम</title>
                                    <description><![CDATA[बिजली गुल होते ही ठप हो जाता है कामकाज, मरीजों को उठानी पड़ रही परेशानी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/solar-system-at-kanwas-chc-remains-non-functional-despite-8-87-lakh-expenditure/article-157738"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1200-x-600-px)-(1)2.png" alt=""></a><br /><p>कनवास। कनवास स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लाखों को रुपए की लागत से स्थापित सोलर  सिस्टम वर्षों बाद भी बंद पड़ा है। विधायक कोष योजना के तहत वर्ष 2022-23 में सोलर पैनल, इन्वर्टर, ने बैटरी एवं अन्य उपकरण लगाने के । लिए 10 लाख रुपए स्वीकृत किए गए थे। सूचना पट्ट के अनुसार इस कार्य पर 8 लाख 87 हजार 640 1 रुपए खर्च किए जा चुके हैं तथा कार्य म पूर्ण भी दर्शाया गया है। लेकिन  वर्तमान में पूरा सोलर सिस्टम निष्क्रिय पड़ा हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि लाखों रुपए खर्च होने के बावजूद सोलर सिस्टम का कोई लाभ अस्पताल को नहीं मिल रहा। उनका कहना है कि बिजली कटौती के दौरान यदि सोलर सिस्टम चालू रहता तो मरीजों और अस्पताल स्टाफ को राहत मिलती।<br /> लेकिन इसके बंद होने से योजना का उद्देश्य अधूरा रह गया है।</p>
<p>जानकारी के अनुसार अस्पताल परिसर में लगे कुछ सोलर पैनल क्षतिग्रस्त होने की स्थिति मंल पहुंच चुके हैं। बिजली आपूर्ति बाधित होते ही अस्पताल का कामकाज प्रभावित हो जाता है। भीषण गर्मी में मरीजों को पंखों एवं अन्य सुविधाओं के अभाव में परेशानी झेलनी पड़ती है। वहीं ऑनलाइन पंजीयन, रिपोर्टिंग और कंप्यूटर आधारित कार्य भी बाधित हो जाते हैं।</p>
<p><strong>ग्रामीणों ने की जांच और कार्रवाई की मांग</strong><br />ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने, सोलर सिस्टम को शीघ्र चालू करवाने तथा योजना पर रखरखाव व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग की है। उनका कहना है कि जनता के पैसे से स्थापित व्यवस्था का लाभअस्पताल और मरीजों को मिलना चाहिए।</p>
<p><strong>इमरजेंसी में बढ़ जाती है समस्या</strong><br />ग्रामीणों का कहना है कि आंधी-तूफान, प्राकृतिक आपदा या अन्य कारणों से बिजली बाधित होने पर अस्पताल में गंभीर स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इमरजेंसी सेवाओं के दौरान बिजली कटते ही मरीजों, चिकित्सकों और कर्मचारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में सोलर सिस्टम महत्वपूर्ण बैकअप साबित हो सकता था, लेकिन इसके बंद रहने से लाखों रुपए की योजना निष्प्रभावी हो गई है।</p>
<p><strong>कई बार की शिकायत, नहीं हुआ समाधान</strong><br />सीएचसी प्रभारी डॉ. लाल सिंह मीणा ने बताया कि खराब पड़े सोलर सिस्टम को लेकर दो-तीन बार एसडीएम कार्यालय में लिखित शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि संबंधित ठेकेदार से भी कई बार संपर्क किया गया। वहीं ठेकेदार का कहना है कि ग्राम पंचायत की ओर से पूरा भुगतान नहीं होने के कारण वह मशीन एवं कुछ उपकरण वापस खोलकर ले गया था।</p>
<p>सीएचसी कनवास में सोलर सिस्टम बंद होने का मामला संज्ञान में आया है। संबंधित विभाग से जानकारी लेकर पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। यदि तकनीकी या रखरखाव संबंधी कोई समस्या है तो उसे दूर कर सोलर सिस्टम को जल्द चालू करवाने के निर्देश दिए जाएंगे। साथ ही योजना के तहत हुए कार्य, भुगतान और उपकरणों की वर्तमान स्थिति की भी समीक्षा की जाएगी।<br /><strong>- बाबूलाल मीणा, एसडीएम, कनवास </strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 15:14:32 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का :  दो घन्टे में ही हुआ चकाचक, लोग बोले अब भी तो हुई सफाई</title>
                                    <description><![CDATA[पांच दिन के 'नर्क' के बाद मरीजों को मिली सीवरेज की गंदगी से मुक्ति।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---area-cleaned-up-in-just-two-hours--people-remark--%22so--cleaning--was--possible-after-all-%22/article-157240"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)32.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल परिसर में आखिरकार पांच दिनों बाद प्रशासनिक सुस्ती टूटी। दरअसल यहां स्थित सेन्ट्रल लैब के बाहर सीवरेज चैम्बरर्स ओवर फ्लो होकर सड़क पर उफन रहे थे। यह हालात पिछले पांच दिनों से बने हुये थे । जिसे मंगलवार को नगर निगम की टीम ने उफन रहा सीवरेज और सेप्टिक टैंक का मलबा साफ कर दिया। जिससे पिछले कई दिनों से नर्क भुगत रहे मरीजों और तीमारदारों ने बड़ी राहत की सांस ली। सवाल यह उठता है कि जब नगर निगम और सुपर सकर मशीन के जरिए यह काम मात्र दो घंटे में मुमकिन था, तो इसके लिए पांच दिनों तक मरीजों को परेशान क्यों किया गया? प्रशासन को अपनी इस 'लेट-लतीफी' की कार्यप्रणाली को बदलना होगा ताकि भविष्य में किसी भी संवेदनशील वार्ड या लैब के बाहर ऐसे हालात दोबारा पैदा न हों।</p>
<p><strong>खबर पर तत्काल हुआ असर</strong><br />'दैनिक नवज्योति' द्वारा मामले को प्रमुखता से उठाते हुये मंगलवार को ''सेन्ट्रल लैब के मेन एन्ट्री के बाहर फैली सीवरेज की गन्दगी'' शीर्षक से प्रकाशित की थी जिसके बाद हरकत में आये एमबीएस प्रशासन ने सफाई के लिये आनन फानन में नगर निगम की टीम को मौके पर बुलवाकर परिसर में दुर्गंध व बीमारी के कारण बन रही सीवरेज के पानी को साफ करवाया गया करीब 2 घन्टे की मशक्कत के बाद पुरा पानी साफ हो गया। जिसके बाद यहां इलाज कराने आये लोगों ने भी राहत की सांस ली।</p>
<p><strong>'सुपर सकर' से दो घंटे में चोक चेंबर किए दुरुस्त</strong><br />गत शुक्रवार से ही मुख्य सड़क और वहां लगे सीमेंटेड ब्लॉक पूरी तरह बदबूदार पानी में डूबे हुए थे। मंगलवार सुबह जब नगर निगम का सफाई निरीक्षक दस्ता और अस्पताल का अमला हरकत में आया, तो हालात तेजी से बदले। सफाई कर्मियों ने सुपर सकर मशीन की मदद से चोक हो चुके मुख्य चेंबरों की सफाई शुरू की। कड़ी मशक्कत के बाद सड़क पर जमा गंदा पानी और कीचड़ पूरी तरह साफ हो सका।</p>
<p><strong>गंदगी बढ़ा रही थी बीमारी, वहां अब मिली राहत</strong><br />अस्पताल का यह वही मुख्य मार्ग है जहां रोजाना हजारों मरीज और उनके परिजन गंभीर बीमारियों की जांच के लिए सैंपल देने आते हैं। पिछले पांच दिनों से यहां फैली गंदगी न केवल अस्पताल की सुंदरता पर बदनुमा दाग थी, बल्कि वहां उठ रही तीव्र दुर्गंध से मरीजों का दम घुट रहा था। स्वास्थ्य के मंदिर में ही संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ था, लेकिन मंगलवार दोपहर बाद यहां के हालात पूरी तरह बदले नजर आए।</p>
<p><strong>भुक्तभोगियों ने कहा- 'देर आए, दुरुस्त आए'</strong><br />गंदगी साफ होने के बाद अस्पताल आने वाले लोगों के चेहरों पर सुकून दिखाई दिया मरीज मकसूद (60 वर्ष) ने बताया, कल जब मैं यहां सैंपल देने आया था, तो पैर रखने तक की जगह नहीं थी, इसी दूषित पानी के बीच से मजबूरन गुजरना पड़ा था। आज प्रशासन चेता है और सफाई हुई है, यह काम पहले दिन ही हो जाना चाहिए था। तीमारदार राहुल शर्मा ने कहा, यहां फैली गंदगी को देखकर मन खराब हो जाता था। आज जब दोबारा यहां आया तो सफाई देखकर बड़ी राहत मिली कि अब लोगों को इस नर्क से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 14:16:53 +0530</pubDate>
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                <title>मोईकलां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भवन में गहरी दरारों ने बढ़ाई चिंता, ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार</title>
                                    <description><![CDATA[पिलर्स से उखड़कर गिरने लगा सीमेंट और कंक्रीट, स्टाफ व मरीजों को अनहोनी की आशंका।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/deep-cracks-in-moikalan-primary-health-center-building-raise-alarms/article-155028"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(1)91.png" alt=""></a><br /><p>मोईकलां। मोईकलां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भवन की निर्माण गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल भवन के मुख्य कॉलम और दीवारों में गहरी दरारें आने से कभी भी बड़ी अनहोनी होने की आशंका जताई जा रही है। भवन की जज स्थिति के चलते यहां कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों और इलाज के लिए आने वाले मरीजों में भय का माहौल बना हुआ है।जानकारी के अनुसार अस्पताल भवन के मुख्य लोड-बेयरिंग कॉलम में कई स्थानों पर चौड़ी दरारें दिखाई दे रही हैं। पिलर्स से सीमेंट और कंक्रीट उखड़कर गिरने लगा है, जिससे भवन की मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं। इसके अलावा मुख्य प्रवेश द्वार की दीवारों में भी दरारें आ चुकी हैं और प्लास्टर टूटने लगा है। बताया जा रहा है कि भवन के आसपास की जमीन भी कुछ स्थानों पर धंसती नजर आ रही है।</p>
<p><strong>शुरुआत से विवादों में रहा निर्माण कार्य</strong><br />स्थानीय लोगों का कहना है कि भवन निर्माण शुरू होने के समय से ही घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं।तत्कालीन सरकार के दौरान भवन हैंडओवर किए जाने के समय भी स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने गुणवत्ता को लेकर विरोध जताते हुए जांच की मांग की थी, लेकिन उस समय मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अब भवन में आई दरारों ने उन आशंकाओं को फिर से उजागर कर दिया है।</p>
<p><strong>डर के साए में काम कर रहा स्टाफ</strong><br />अस्पताल में तैनात डॉक्टर, नर्स और अन्य कर्मचारी भय के माहौल में काम करने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि भवन की हालत लगातार खराब होती जा रही है और किसी भी समय हादसा हो सकता है। रोजाना सैकड़ों मरीज और उनके परिजन यहां आते हैं, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।</p>
<p><strong>ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार</strong><br />ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पीडब्ल्यूडी के वरिष्ठ अधिकारियों से भवन की तकनीकी जांच करवाई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />पीएचसी भवन की गुणवत्ता को लेकर शिकायत प्राप्त हुई है। मामले की जांच के लिए बीसीएमएचओ को निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। <br /><strong>- दीपक महावर, एसडीएम, सांगोद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 14:17:38 +0530</pubDate>
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                <title>मेडिकल कॉलेज अस्पताल का मामला : ऑपरेशन के बाद बिगड़ी प्रसूताओं की तबीयत, एक की मौत, 4 की हालत गंभीर</title>
                                    <description><![CDATA[सिजेरियन के बाद बिगड़े हालत, बीपी अचानक हुआ लो, किडनी फेल और प्लेटलेट्स गिरने से तड़के टूटा दम।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/case-from-medical-college-hospital--health-of-post-op-patients-worsens--one-dead--4-in-critical-condition/article-152866"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(1)21.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद 5 प्रसूताओं की अचानक तबीयत बिगड़ गई। जिनमें से एक की मंगलवार तड़के मौत हो गई। वहीं, 4 प्रसूताओं की हालत गंभीर होने पर उन्हें सुपर स्पेशलिटी में रैफर किया गया। जहां उनका उपचार चल रहा है। घटना के बाद से अस्पताल में हड़कम्प मचा हुआ है। वहीं, इलाज के दौरान हुई इस अप्रत्याशित मृत्यु ने अस्पताल प्रशासन को भी चौंका दिया। मृतका पायल की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए अस्पताल प्रशासन ने मेडिकल बोर्ड गठित कर जांच शुरू कर दी है। जिसकी रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि ऑपरेशन के बाद अचानक यह जटिल स्थिति क्यों बनी।</p>
<p><strong>पोस्ट गायनी वार्ड-1 में भर्ती थीं सभी प्रसूताएं</strong><br />जानकारी के अनुसार, मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सोमवार को पांच प्रसूताओं की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी। जिनमें पायल, ज्योति, चंद्रकला, धन्नी और रागिनी शामिल हैं। ऑपरेशन के बाद सभी प्रसूताओं को पोस्ट गायनी वार्ड-1 में भर्ती किया गया। जहां रात को पायल की अचानक तबीयत खराब हो गई। इस पर उसे सर्जिकल आईसीयू में शिफ्ट किया गया जहां मंगलवार सुबह 6 बजे उसकी मौत हो गई।</p>
<p><strong>तेजी से गिरा बीपी, किडनी फेल होने से मौत</strong><br />चिकित्सा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मृतका पायल का ब्लड प्रेशर अचानक तेजी से नीचे गिरता चला गया। जिससे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर विपरीत असर पड़ा और किडनी ने काम करना बंद कर दिया। साथ ही प्लेटलेट्स भी लगातार डाउन होती रही, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई और अनंत: महिला की मौत हो गई।इलाज के दौरान प्रसूता की अचानक मृत्यु होने से अस्पताल में भी हलचल तेज हो गई।</p>
<p><strong>4 प्रसूताओं की भी हालत खराब, एसएसबी में किया रैफर</strong><br />नए अस्पताल की सर्जिकल आईसीयू में तैनात कर्मचारी ने बताया कि पोस्ट गायनी वार्ड-1 में 4 सिजेरियन प्रसूताएं भर्ती थी। जिनकी तबीयत खराब होने पर सर्जिकल आईसीयू में शिफ्ट किया गया था। जहां पायल की मौत हो गई। इसके बाद तीन प्रसूताएं ज्योति, चंद्रकला, धन्नी व रागिनी की भी अचानक तबीयत खराब हो गई। हालात गंभीर होने पर सोमवार सुबह 10 बजे प्रसूता रागिनी व शाम 4 बजे ज्योति और चंद्रकला व धन्नी को रात 9 बजे करीब सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के नेफ्रोलॉजी विभाग में रैफर किया गया। वहीं, डॉ. वेद प्रकाश ने बताया कि कुछ महिलाओं की स्थिति गंभीर है, जिनका इलाज चल रहा है।</p>
<p><strong>मौत के कारणों पर उठे सवाल, मेडिकल बोर्ड करेगा जांच</strong><br />घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पांच डॉक्टरों की सदस्यीय मेडिकल बोर्ड का गठन किया है। यह बोर्ड पूरे उपचार क्रम, ऑपरेशन के बाद की स्थिति, दवाओं की प्रतिक्रिया, मेडिकल पैरामीटर और अचानक बिगड़ी शारीरिक स्थिति की विस्तृत जांच करेगा। जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाएगा कि आखिर किस वजह से महिला का ब्लड प्रेशर अचानक गिरा, किडनी फेल हुई और प्लेटलेट्स में तेजी से कमी आई।</p>
<p><strong>प्राचार्य बोले- रिपोर्ट के बाद ही साफ होगी तस्वीर</strong><br />मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नीलेश जैन ने बताया कि सिजेरियन ऑपरेशन के बाद महिला का बीपी लो हो गया था। इसके चलते किडनी फेल हुई और प्लेटलेट्स भी कम हो गए, जो उसकी मौत का कारण बने। यह स्थिति किन कारणों से उत्पन्न हुई, इसका पता लगाने के लिए मेडिकल बोर्ड गठित कर दिया गया है। बोर्ड की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 14:21:53 +0530</pubDate>
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                <title>दवा से मुश्किल ठंडा पानी, रात होने से पहले पानी स्टाक की फिक्र</title>
                                    <description><![CDATA[रीते कंठ इलाज कराने की मजबूरी, दवा खाने के पानी की जुगत में तीमारदार ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/finding-water%E2%80%94especially-cold-water%E2%80%94is-harder-than-finding-medicine--a-race-to-stock-up-before-nightfall/article-152720"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(1)17.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल में इन दिनों तीमारदारों को मरीज की देखभाल से ज्यादा चिंता एक बोतल पानी की है। अस्पताल परिसर में पहले जहां हर जगह शीतल जल उपलब्ध हो जाता था वहां पानी के लिये 100 मीटर तक की दूरी तय करनी पड रही है। कहने को परिसर में 28 वाटर कूलर लगे हैं, लेकिन धरातल पर केवल 18 ही जैसे-तैसे चल रहे हैं। बाकी या तो कबाड़ हो चुके हैं या प्रशासन की लापरवाही के कारण तालों में बंद हैं। एक बार जहां से पानी की सुविधा बंद हुई फिर वो चालू की ही नहीं गयी। ऐसे में परिजनों के लिये के लिये बोतलें हाथ में लेकर घुमने की मजबूरी इलाज का हिस्सा बन चुकी है।</p>
<p><strong>बदहाल सिस्टम से परिजनों की परिक्रमा</strong><br />300 फीट लम्बे गलियारों को पार करने के बाद परिसर में लगे वाटर कूलरों से पानी लेने जाने के बाद भी कई बार पानी नहीं मिल पाता। ऐसे में एमबीएस परिसर की ओल्ड़ बिल्डिंग में पीने के पानी के लिये बाहर आने की मजबूरी से परिजनों की लम्बी परेड़ हाे जाती है। कई बार तो परिजन सड़क पार करके भी पानी लेकर जाते है। सबसे बड़े वार्ड मेडिकल के मरीज पानी के लिए ENT वार्ड की गैलरी तक दौड़ रहे हैं। न्यूरोलॉजी विभाग में लगा कूलर का तो कनेक्शन ही काट कर हटा दिया है हांलाकि कूलर बाहर रखा है। बर्न वार्ड के रिनोवेशन के चलते महीनों से पानी की सुविधा पर ताला लगा है।</p>
<p><strong>पहले कहा मेन्टीनेन्स के बाद, अब जरूरत नहीं</strong><br />परिसर में लगे वाटर कूलरों की 19 अप्रेल को खबर प्रकाशित करने के दौरान अस्पताल प्रशासन ने बताया था कि पुराने वाटर कूलरों को मेन्टीनेन्स के लिये हटाया गया है, जिन्हे वापस चालू कर दिया जायेगा। लेकिन भीषण गर्मी 15 दिन गुजर जाने के बाद भी सुविधायें बहाल नहीं हो पायी तब दैनिक नवज्योति ने जन उपयोगीता के मुद्देज पर अस्पताल प्रशासन से पक्ष लिया तब अस्पतान अधीक्षक ने ऐसी जगहों पर दुबारा से प्याऊ शुरू करने की जरूरत नही बताई। पहले दवा काउँटर नं 9, दवा काउन्टर 121 तथा सर्जीकल वार्ड के भीतर लगे प्याऊ बंद कर दिये गये है।</p>
<p><strong>जहां से हटे फिर नहीं लगे,अधीक्षक बोले हमारे पास एक्स्ट्रा</strong><br />लेखा शाखा के बाहर रखा वाटर कूलर कई महीनों से हटाया गया है। न्यू आईपीड़ी व पुराने कॉटेज वार्ड़ की तरफ से आने वाले परिजनाें व लेखा शाखा के कार्मिकों के लिये यही वाटर कूलर ठण्ड़े पानी के लिये काम आता है। अस्पताल सुत्रों ने बताया कि यह कण्ड़म होने के कारण हटा लिया गया है, वही अधीक्षक महोदय के बताये अनुसार अधीक्षक कार्यालय में वाटर कूलर रिजर्व में रखे हुये है।</p>
<p><strong>रखरखाव तो दूर गेट पर ही ताला</strong><br />मेडिकल यूनिट B व C में 2 साल पहले पानी के लिए बाटर कूलर काम कर रहा था पिछले साल से पार्क की तरफ जाने वाला गेट बंद कर दिया गया हांलाकि कूलर आज भी वहीं लगा हुआ है जाे अब कबाड़ में तब्दील होता जा रहा है। </p>
<p><strong>जहां खाना खाने के साथ ठण्ड़े पानी की थी जगह, अब पीक व गंदगी</strong><br />आर्थोपैड़िक वार्ड़ के बाहर परिजनों के खाना खाने के लिये डाईनिंग हालनुमा केम्पस बनाया गया था यहीं पर एक वाटर कूलर भी लगा हुआ है। सीपेज की समस्या के कारण इसे बन्द कर के पुरे केम्पस पर ही ताला लगा दिया। अब यहां लगा कूलर कबाड़ बन गया वहीं गेट के भीतर गंदगी का ढ़ेर जमा हो गया। बची-खुची कसर यहां लोगो ने गुटके की पीक से पुरी कर दी।</p>
<p><strong>मरीज बोले- दवा से मुश्किल ठंडा पानी</strong><br />भैया के एक्सीडेंट के बाद 5 दिन से यहाँ हूँ। रात में अस्पताल में रोशनी कम रहती है, डर लगता है लेकिन पानी के लिए पूरे अस्पताल की परिक्रमा करनी पड़ती है। कोई मिलने वाला आ जाये तो पानी की पुछने में भी सोचना पड़ता है।<br /><strong>- वंदना, तीमारदार</strong></p>
<p>अभी थोडी देर पहले ही 30 रूपये की पानी की बोतल लेकर आयी हूँ यहां वाटर कूलर तो है लेकिन दूसरे वार्ड के भी यही से भरते है कभी भी पानी ठंडा नहीं मिलता। बाहर भी यही हाल है।<br /><strong>-पूजा ,मरीज की पत्नी</strong></p>
<p>जहां आवश्यकता है वहां के वाटर कूलर चालू है। सभी काे बिना जरूरत चालु करने से क्या फायदा। रिजर्व में रखवा रखें है। वाटर टेंक की सफाई करवाई जाती है। डेट भी रहती है।<br /><strong>-डॉ. धर्मराज मीणा, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 13:30:20 +0530</pubDate>
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                <title>आईपीडी की बिल्डिंग की खिड़कियों के टूटने लगे झरोखे ,कहां चला गया गुणवत्ता का काम</title>
                                    <description><![CDATA[अस्पताल में 24 घंटे मरीज व उनके तीमारदारों की आवाजाही लगी रहती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/decorative-stone-facings-on-ipd-building-windows-begin-to-crumble--where-has-the-quality-work-gone/article-152184"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1111200-x-600-px).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से एमबीएस अस्पताल में करोड़ों रुपए की लागत से आईपीडी की बिल्डिंग बनाई गई है। लेकिन हालत यह है कि इसे अधिक समय नहीं हुआ उससे पहले ही इसकी खिड़कियों के झरोखे टूटने लगे हैं। एमबीएस अस्पताल परिसर में अधीक्षक कार्यालय के पास बहुमंजिला आईपीडी बिल्डिंग बनाई गई है। इस बिल्डिंग को बने अभी अधिक समय भी नहीं हुआ है। कुछ समय पहले अस्पताल के विभिन्न विभागों को यहां शिफ्ट किया जा रहा है।इसी दौरान हाल ही में बिल्डिंग में बनी खिड़कियों के झरोखे के भारी भरकम डिजाइनदार पत्थर टूटकर नीचे गिर चुके हैं। शुरुआत में इसकी संख्या कम थी लेकिन देखरेख के अभाव में और अधिकारियों द्वारा इसकी समय पर मरम्मत नहीं करवाने से इनकी संख्या अधिक हो गई है। इधर अस्पताल आने वाले लोगों का कहना है कि गनीमत रही जिस समय ये पत्थर गिरे उस समय वहां कोई नहीं था। वरना इतने बड़े व ऊंचाई से पत्थर गिरने पर बड़ा हादसा हो सकता था। अस्पताल में जहां 24 घंटे मरीज व उनके तीमारदारों की आवाजाही लगी रहती है।</p>
<p><strong>जे.के. लोन में हो चुका है हादसा</strong><br />गौरतलब है कि गत दिनों जे.के. लोन अस्पताल की नई आईपीडी की बिल्डिंग से भी सुबह के समय भारी भरकर पत्थर गिर गया था। हालांकि उस समय वहां मरीज व उनके तीमार मौजूद थे। उस समय भी गनीमत रही कि किसी के चोट नहीं लगी थी। वरना उस समय बड़ा हादसा हो सकता था।इसी तरह से यदि समय रहते एमबीएस की नई आईपीडी की बिल्डिंग के झरोखों की मरम्मत नहीं की गई तो यहां से अन्य पत्थरों के गिरने से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।</p>
<p><strong>जल्दी ही सही करवा देंगे</strong><br />कोटा विकास प्राधिकरण के अधिशाषी अभियंता महेन्द्र सक्सेना ने बताया कि एमबीएस की नई आईपीडी के पत्थर गिरने की जानकारी नहीं है। यदि ऐसा हो रहा है तो जल्दी ही इन्हें सही करवा दिया जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 14:24:02 +0530</pubDate>
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