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                <title>patients - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>4 साल बाद भी अधूरा 40 करोड़ का मेटरनल एंड चाइल्ड हॉस्पिटल, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[मेडिकल कॉलेज परिसर में एक साल में बनना था 100 बेड का अस्पताल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/40-crore-maternal-and-child-hospital-remains-unfinished-even-after-four-years/article-149691"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-600-px)-(1)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा मेडिकल कॉलेज परिसर में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से स्वीकृत हुआ 40 करोड़ का मेटरनल एंड चाइल्ड हॉस्पिटल 4 साल बाद भी बनकर तैयार नहीं हुआ। अभी भी कई तरह के कार्य अधूरे पड़े हैं। जबकि, हॉस्पिटल का निर्माण कार्य वर्ष 2023 में पूरा होना था। डेट लाइन निकल जाने के बाद भी हॉस्पिटल पूरी तरह से बनकर तैयार नहीं हुआ। जिसकी वजह से यहां गायनी चिकित्सा सुविधाएं शुरू नहीं हो सकी। जिससे मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है और जेकेलोन अस्पताल पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।</p>
<p><strong>2023 में बनकर तैयार करना था हॉस्पिटल</strong><br />चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करने के लिए मेडिकल कॉलेज परिसर में सरकार ने वर्ष 2021 में 100 बेड के मेटरनल एंड चाइल्ड हॉस्पिटल स्वीकृत किया था। जिसके निर्माण के लिए वर्ष 2022 में 40 करोड़ रुपए का बजट भी जारी कर दिया था और इसकी डेडलाइन वर्ष 2023 तय की गई थी। इसके बावजूद निर्माण एजेंसी एनएचएम ने कार्य समय पर पूरा नहीं किया। अब अधिकारियों द्वारा जून तक काम पूरा होने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p><strong>जेकेलोन पर पड़ रहा भार</strong><br />इस अस्पताल के शुरू नहीं होने का सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। हाड़ौती क्षेत्र से आने वाली गायनी और प्रसूता महिलाओं के अधिकांश केस जेकेलोन अस्पताल ही जा रहे हैं। इससे वहां मरीजों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है और व्यवस्थाएं प्रभावित होती हैं।</p>
<p><strong>हॉस्पिटल शुरू हो तो हाड़ौती के मरीजों को मिले लाभ</strong><br />चिकित्सकों का मानना है कि यदि यह मेटरनल एंड चाइल्ड हॉस्पिटल समय पर बनकर शुरू हो जाए तो नए कोटा शहर सहित पूरे संभाग के मरीजों को बड़ी राहत मिल सकती है और जेकेलोन अस्पताल पर भार भी कम होगा। हालांकि, मेडिकल कॉलेज में भी गायनी वार्ड संचालित हैं।</p>
<p><strong>कोविड़ के कारण एक साल देरी से शुरू हुआ काम</strong><br />कोर्डिनेटर डॉ. बीएल पाटीदार ने बताया कि वर्ष 2021 में स्वीकृति मिल गई थी लेकिन कोविड-19 के कारण काम शुरू नहीं हो सका। इसके बाद वर्ष 2022 में शुरू हुआ, जो 2023 में पूरा होना था। लेकिन निर्माण कार्य की गति धीमी रही। इस प्रोजेक्ट की कार्यकारी एजेंसी एनएचएम है।</p>
<p><strong>मार्च में होना था हैंडओवर, अब तक नहीं हुआ</strong><br />चिकित्सकों ने बताया कि मेटरनल एंड चाइल्ड हॉस्पिटल मार्च में मेडिकल कॉलेज को हैंडओवर किया जाना था, लेकिन अप्रैल का पहला सप्ताह गुजरने के बाद भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। एनएचएम अधिकारियों द्वारा काम पूरा होने में 2 से 3 महीने और लगने की बात कही जा रही है।</p>
<p><strong>अस्पताल में मिलेंगी अत्याधुनिक सुविधाएं</strong><br />मेटरनल एंड चाइल्ड हॉस्पिटल में 14 कॉटेज वार्ड बनाए गए हैं और पूरा परिसर एयर कंडीशनिंग से लैस होगा। यहां लेबर रूम एलडीआर कॉन्सेप्ट पर तैयार किया जा रहा है, जो आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा। इसके अलावा ऑपरेशन थिएटर, इमरजेंसी गेट, लाइब्रेरी और सेमिनार हॉल जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।</p>
<p><strong>225 बेड की मिलेगी सुविधा</strong><br />कोर्डिनेटर डॉ. पाटीदार ने बताया कि वर्तमान में यह अस्पताल 100 बेड का है, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे 225 बेड तक विस्तारित किया जा सकता है। इधर, मरीजों का कहना है कि परियोजना में लगातार हो रही देरी का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। अब सभी की नजरें जून पर टिकी हैं कि आखिर कब यह अस्पताल शुरू होगा और कब राहत मिलेगी।</p>
<p>मेडिकल कॉलेज परिसर में 40 करोड़ की लागत से मेटरनल एंड चाइल्ड हॉस्पिटल का निर्माण कार्य चल रहा है। इसकी कार्यकारी एजेंसी एनएचएम है। इस हॉस्पिटल के शुरू होने से न केवल कोटा बल्कि होड़ौतीभर के मरीजों को लाभ मिलेगा।<br /><strong>-आशुतोष शर्मा, अधीक्षक मेडिकल कॉलेज अस्पताल</strong></p>
<p><strong>एनएचएम एक्सईएन ने न फोन उठाया न मैसेज का जवाब दिया</strong><br />नवज्योति ने मेटरनल एंड चाइल्ड हॉस्पिटल का निर्माण कार्य में हो रही देरी के कारणों को लेकर बात करने के लिए एनएचएम एक्सईएन जुगल किशोर सांखला को फोन किया लेकिन उन्होंने अटैंड नहीं किया। इसके बाद उन्हें मैसेज किया लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 15:15:35 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का : नए रंग में नजर आने लगी एमबीएस इमरजेन्सी की ट्रालियां, कांच के कमरे से निकलकर मरीजों की सेवा में पहुंची</title>
                                    <description><![CDATA[नीले रंग की पहचान से खत्म होगी स्ट्रेचर की किल्लत।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--mbs-emergency-department-s-trolleys-now-visible-in-a-new-color/article-149666"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-600-px)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एमबीएस अस्पताल में इमरजेंसी में आने वाले गंभीर मरीजों को अब स्ट्रेचर के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। अस्पताल प्रशासन ने एक अनूठा प्रयोग करते हुए इमरजेंसी की 18 ट्रॉलियों को विशेष नीले रंग से पुतवा दिया है। प्रशासन ने 8 अन्य नई ट्रॉलियां भी इमरजेंसी विभाग को हैंडओवर कर दी हैं, जिससे अब स्ट्रेचरों की कुल उपलब्धता 26 हो गयी है। साथ ही ट्राली मेन और ईचार्ज काे भी इन्हें संभालने और ऑपरेट करने में लगने वाले समय में भी भारी कमी आयेगी।</p>
<p><strong>पहचान और रिकवरी आसान</strong><br />नीले रंग की वजह से अब ये ट्रॉलियां वार्डों में गुम नहीं होंगी। अस्पताल परिसर में कहीं भी नीला स्ट्रेचर दिखने पर ट्रॉली इंचार्ज उसे तुरंत रिकवर कर इमरजेंसी में ला सकेंगे। प्रबधंधन की और से बताया गया है कि पहले मरीज अपनी सुविधा के लिये ले जाते थे जिन्हे कहीं भी छोड़ देते थे ऐसे में इन्हे ढुढ़ंने मे खासी परेशानी होती थी।</p>
<p><strong>स्थान में बदलाव- बेसमेंट के पास बना नया 'ट्रॉली स्टैंड'</strong><br />अधीक्षक डॉ. धर्मराज मीणा ने बताया कि समस्या के समाधान के लिए अब नई बिल्डिंग के मेन गेट के पास, बेसमेंट पार्किंग के बगल में एक स्थाई ट्रॉली स्टैंड बना दिया गया है। अब सभी ट्रॉलियां एक ही स्थान पर मिलेंगी। जिससें आने वाले मरीजों को अब बाहर से ही इन्हे उपलब्धता हो जायेगी।</p>
<p><strong>खबर का असर</strong><br />दैनिक नवज्योति ने 26 मार्च को 25 ट्रॉलियां कांच के कमरे में शीर्षक से प्रकाशित समाचार में अस्पताल प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया गया था कि कैसे एक तरफ मरीज स्ट्रेचर के लिए तड़प रहे हैं और दूसरी तरफ नई ट्रॉलियां तालों में बंद हैं। इस खबर के बाद हरकत में आए अस्पताल प्रशासन ने बुधवार को न केवल ट्रॉलियों को बाहर निकाला, बल्कि उनकी सुचारू उपलब्धता के लिए नई व्यवस्था भी लागू कर दी।</p>
<p>अस्पताल में संसाधनों की कमी नहीं थी, लेकिन उनके मिस-मैनेजमेंट को सुधारने के लिए अब कलर कोडिंग और नया पार्किंग बेसमेंट बनाया गया है ताकि आपातकालीन स्थिति में तुरंत स्ट्रेचर मिल सके। नर्सिंग अधीक्षक की देखरेख में ट्रॉली इंचार्ज इसकी जिम्मेदारी संभालेंगे।<br /><strong>- डाॅ.धर्मराज मीणा, अधीक्षक एमबीएस हॉस्पिटल </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 14:10:22 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का : एमबीएस अस्पताल में सुविधाओं के विकास को लेकर संभागीय आयुक्त ने दिए निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[पुराने भवन के बेसमेंट हॉल में जमा मलबे की सफाई हेतु निरीक्षण दल गठित कर शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--divisional-commissioner-issues-directives-regarding-facility-upgrades-at-mbs-hospital/article-147958"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(1)69.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">कोटा । संभागीय आयुक्त अनिल कुमार अग्रवाल ने निर्देश दिए कि एम.बी.एस. चिकित्सालय से संबंधित समस्याओं का समाधान शीघ्र किया जाए ताकि मरीजों को कोई असुविधा ना हो। उन्होंने ये निर्देश उनकी अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित बैठक में दिए। बैठक में चिकित्सा सुविधाओं के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।संभागीय आयुक्त ने एम.बी.एस व जे.के. लोन चिकित्सालय परिसर की चार दीवारी के संबंध में स्पष्ट निर्देश दिए कि इस काम के लिए दोनों चिकित्सालय 50-50 प्रतिशत की राशि आगामी तीन कार्य दिवस में सार्वजनिक निर्माण विभाग को हस्तांतरित करना सुनिश्चित करें। एम.बी.एस. चिकित्सालय में करीब 49.95 लाख रुपए लागत से इन्टरनल वायरिंग मरम्मत के निर्देश दिए गए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">अनुपयोगी व जर्जर भवनों को गिराएंगे</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">एम.बी.एस. चिकित्सालय परिसर स्थित अनुपयोगी, असुरक्षित व जर्जर और नकारा घोषित भवन, राजकीय आवास व लेक्चर थियेटर को गिराए जाने के संबंध में अधिशाषी अभियंता, सा. नि.वि. प्रोजेक्ट खण्ड ने बताया कि एक दो दिवस में कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en"> </span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">ड्रेनेज सिस्टम सुधारें</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">एम.बी.एस. व जे. के. लोन चिकित्सालय परिसर में ड्रेनेज सिस्टम कार्य के संबंध में एम.बी.एस. अधीक्षक को फोलोअप के लिए निर्देशित किया गया। जे. के. लोन व एम.बी.एस. चिकित्सालय परिसर में एस.टी.पी. निर्माण के संबंध में केडीए मुख्य अभियंता ने कार्य शीघ्र प्रारंभ कराने की बात कही।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">मां योजना के काउंटर बनाएं</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">संभागीय आयुक्त ने एम.बी.एस. चिकित्सालय में पुराने ओ.पी.डी. में कक्षों का रिनोवेशन कर मां योजना काउंटर में परिवर्तित करने, पुराने भवन के भूतल पर स्थित सम्पूर्ण कॉरिडोर में टाइल्स की मरम्मत व पेंटिंग, पुरानी खिडकियों को एल्यूमिनियम की खिड़की में बदलने, विभिन्न वार्ड में टॉयलेटस की मरम्मत, फीमेल सर्जिकल ए, बी, सी व कॉरिडोर की मरम्मत व चिकित्सालय के अन्य कार्य के संबंध में निर्देश दिए। एम.बी.एस. चिकित्सालय के बर्न वार्ड का मरम्मत कार्य सी.एस.आर. फण्ड से करवाने के लिए निर्देशित किया गया। पुराने भवन के बेसमेन्ट में बने हॉल में भरे मलबे की सफाई के लिए निरीक्षण दल गठित कर शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">जेके लोन में मेडिसिन आउटडोर शुरू करें</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">जे.के. लोन न्यू आई.पी.डी. के बाहर खाली पड़े हुए हॉल में तुरन्त प्रभाव से शिशु औषध विभाग का आउटडोर प्रारंभ करने के निर्देश दिए। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे इन सभी कार्यों का निरीक्षण करें। बैठक में जिला कलक्टर पीयूष समारिया, अतिरिक्त संभागीय आयुक्त ममता तिवारी, डॉ. निलेश कुमार जैन, प्रधानाचार्य, डॉ. धर्मराज मीणा, अधीक्षक एमबीएस चिकित्सालय, रविन्द्र माथुर निदेशक अभियांत्रिकी केडीए, अशोक सनाढ्य अधिशाषी अभियन्ता प्रोजेक्ट खण्ड, डॉ विधि शर्मा वित्तीय सलाहकार, चिकित्सा महाविद्यालय, महावीर सांवरिया नर्सिंग अधीक्षक एम.बी.एस. व अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 13:01:42 +0530</pubDate>
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                <title>आदर्श प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में नियमों की खुली अनदेखी, पेयजल व जनसुविधाओं की बदहाल स्थिति</title>
                                    <description><![CDATA[पांच माह पूर्व स्थानांतरित हो चुके चिकित्सक की नेमप्लेट व मोबाइल नंबर अब भी प्रदर्शित।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/blatant-disregard-for-rules-at-the-adarsh-primary-health-center/article-143053"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(6)10.png" alt=""></a><br /><p>दबलाना। आदर्श प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दबलाना में विभागीय निदेर्शों और स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के नियमों की खुलेआम अनदेखी सामने आ रही है। चिकित्सक कक्ष पर वर्तमान स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी व चिकित्सक की नेमप्लेट तक नहीं लगी है और न ही मोबाइल नंबर अंकित हैं। पांच माह पूर्व स्थानांतरित हो चुके चिकित्सक की नेमप्लेट व मोबाइल नंबर अब भी प्रदर्शित हैं। रोगी अथवा उनके तीमारदार जब नेमप्लेट पर अंकित नंबरों पर संपर्क करते हैं तो स्थानांतरण हो चुके चिकित्सक से बातचीत होती है और तब ट्रांसफर की जानकारी मिलती है। रेजिडेंस की नेमप्लेट पर भी पुराने चिकित्सक का नाम और मोबाइल नंबर दर्ज होने से लोगों को उपचार की बजाय असुविधा झेलनी पड़ रही है।</p>
<p>कस्बे के मुकुट नागर ने बताया कि कई बार चिकित्सक के अनुपस्थित रहने पर नाम और नंबर उपलब्ध नहीं होने से मरीजों को अलोद या बूंदी जाना पड़ता है। इससे समय और धन दोनों की हानि हो रही है। स्वास्थ्य केंद्र के जनसुविधा घरों के ऊपर पाइप कनेक्शन सहित पानी की टंकियां रखी हैं, लेकिन जल संग्रहण नहीं होने से नलों में पानी नहीं आता और वे शोपीस बने हैं। सीएचसी परिसर में ट्यूबवेल का पानी फ्लोराइड युक्त है। पेयजल के लिए लगाया गया आरओ ऐसे स्थान पर है जहां आमजन की नजर नहीं पड़ती। शुद्ध जल के लिए भटकना पड़ रहा है। यह स्थिति स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण की मंशा पर सवाल खड़े कर रही है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />पर्यावरण को बढ़ावा देने , हरियाली, स्वच्छता का सदेश देने के लिए गार्डन एवं क्यारियां बनी हुई है। सुरक्षा कीदष्टि से तार बाड़ भी 5 माह पहले से ही मौजूद है । जिनमें हरियाली गायब होकर के सूखी जहरीली घास अपनी मौजूदगी बताने के साथ ही मौजूद पेड पौधे अपनी सार संभाल , सिंचाई की कमी वअनदेखी को बता रहे हैं । घास पूस ,बेकार के पौधे, झाड़ झझाड़ डॉक्टर रेजिडेंस के आसपास तथा सीएचसी परिसर में मौजूद होसे से पर्यावरण के नियमों की अनदेखी है ।<br /><strong>-सुरेन्द्र गौतम, उपसरपंच, दबलाना </strong><br /> <br />दबलाना भाजपा मंडल अध्यक्ष हेमराज राठौर ने कहा कि आदर्श पीएचसी में नियमों की अनदेखी, स्टाफ की कमी, डॉक्टर के नदारद रहने के मामले में बीसीएमएचओ हिंडोली को अवगत करायाहआ है ।<br /><strong>-हेमराज राठौर, भाजपा मंडल अध्यक्ष, दबलाना</strong></p>
<p>पीएचसी इंचार्ज एवं नर्सिंग आॅफिसर जयकुमार सोनी ने कहा कि नए- नाम और नंबर लिखवा जाएंगे। टंकी में जल संग्रहण व्यवस्था करवाने के साथ-साथ झाड़  झंझाड़ो की सांफ सफाई कराई जएगी।<br /><strong>-जयकुमार सोनी, इंचार्ज एवं नर्सिंग आॅफिसर, पीएचसी,दबलाना। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Feb 2026 16:28:47 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>लापरवाही : मौसमी बीमारियों का प्रकोप मरीजों पर पड़ रहा भारी,भटक रहे मरीज</title>
                                    <description><![CDATA[कई बार  चिकित्सक समय पर नहीं आते और आते है तो चले जाते है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/negligence--seasonal-illnesses-are-taking-a-toll-on-patients--leaving-patients-stranded/article-142590"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(10).png" alt=""></a><br /><p>खानपुर। खानपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अव्यवस्थाओं का आलम यह है कि मरीजों को इलाज के लिए दर ब दर भटकना पड़ रहा है। यहां डॉक्टरों की भारी कमी के चलते मरीजों को सही समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है । नियमानुसार एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर फिजिशियन, महिला स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग, सर्जन आदि चिकित्सकों को लगाया जाता है ताकि मरीजों को सही समय पर सही इलाज मिल सके लेकिन यहां पर चिकित्सकों के अभाव के कारण मरीजों को कई घंटों लाइन में लगना पड़ता है वहीं कई बार तो चिकित्सक समय पर नहीं आते और आते है तो चले जाते है। अभी सर्दी का असर धीरे धीरे जाने लगा है तो मौसमी बीमारियों का प्रकोप चल रहा है , जिस कारण सर्दी जुखाम, खांसी बुखार, वायरल के मरीजों की संख्या ज्यादा है लेकिन मरीजों को इलाज चिकित्सक के अभाव में उपचार नहीं मिल पा रहा है जिस कारण मरीज उपचार के लिए भटक रहे है। वहीं अस्पताल में एक्स रे, दवाईयां काउंटर, बीमारियों की जांचों के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। अस्पताल में सफाई व्यवस्था भी चरमराई हुई है , संक्रमित कचरा ज्यादा खतरनाक होता है जिसे सही समय पर उचित स्थान पर डालना चाहिए लेकिन सफाई व्यवस्था सुचारू रूप से नहीं हो रही है, डस्टबिन में कचरा बाहर आ रहा है वहीं दीवारों पर गुटखें के निशान आदि से गंदगी के आसार बने हुए है । ग्रामीणों ने मांग की है कि जल्द से जल्द अस्पताल में अव्यवस्थाओं को सुधारा जाए।</p>
<p>खानपुर अब नगर पालिका बन चुकी है और नगर पालिका बनने के बाद अब आसपास के गांव के मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है इधर तो मरीजों की संख्या बढ़ रही है और उधर डॉक्टरों की संख्या कम हो रही है । मजबूरन मरीजों को प्राइवेट अस्पताल का सहारा लेना पड़ता है ।<br /><strong>- अभिषेक वर्मा, कस्बेवासी</strong></p>
<p>अस्पताल में कई बार लम्बी लाइनें लगाकर मरीज अपना इंतजार करता है लेकिन तब तक चिकित्सक से नहीं मिल पाता ।<br /><strong>- मुकेश मालव, कस्बेवासी</strong></p>
<p>चिकित्सकों की कमी की समस्या का जल्द से जल्द समाधान किया जाए।<br /><strong>- टोनी मीणा, कस्बेवासी</strong></p>
<p>खानपुर सीएचसी पर आज तो केवल दो ही डॉक्टर थे और तादाद की संख्या में मरीजों की भीड़ लगी हुई थी ओपीडी में ज्यादा मरीज आते हैं, सही समय पर उपचार मिलना चाहिए।<br /><strong>- उग्रसेन नागर, कस्बेवासी</strong></p>
<p>यहां खानपुर सीएचसी में चार डॉक्टरों में से भी एक डॉक्टर सिजेरियन व एक गाइनेकोलॉजिस्ट व एक सीएचसी प्रभारी है वह भी अपना कार्य करेंगे उन्हें भी अपने ड्यूटी टाइम से लेकर लगातार कार्य करना पड़ता है लगातार ड्यूटी पर बैठते हैं लेकिन क्या करें इतने मरीजों को कैसे संभाले यह भारी विडंबना है डॉक्टरों की कमी है।<br /><strong>- राजाराम गुर्जर, कस्बेवासी</strong></p>
<p>अभी नई नियुक्तियां हुई है जयपुर निदेशालय द्वारा खानपुर में इसी सप्ताह में डॉक्टर लगा दिए जाएंगे ।<br /><strong>-डॉ. साजिद खान सीएमएचओ, झालावाड़</strong></p>
<p>यहां पहले ही चिकित्सकों की कमी चल रही है और जैसे गर्मी बढ़ती हुई जाएगी मरीजों की संख्या बढ़ेगी अब केवल मात्र चार डॉक्टर ही रह जाएंगे, जिसके ऊपर खानपुर सीएचसी निर्भर रहेगी ।<br /><strong>-डॉ. धीरेंद्र गोपाल मिश्रा सीएचसी इंचार्ज, खानपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 14:56:31 +0530</pubDate>
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                <title>डॉक्टर नदारद, स्टाफ की कमी से मरीज हो रहे परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[५ स्टेट हाईवे पर रात की दुर्घटनाओं में अस्पताल बंद होने से इलाज नहीं मिल पाता।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/doctors-absent--patients-suffering-due-to-staff-shortage/article-142475"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/kota.png" alt=""></a><br /><p>दबलाना।कस्बे का आदर्श प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अव्यवस्थाओं का शिकार बना हुआ है। हालात यह हैं कि अस्पताल में आने वाले मरीजों को उपचार के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्टेट हाईवे पर स्थित होने के कारण रात के समय दुर्घटनाएं होती रहती हैं, लेकिन अस्पताल बंद रहने से घायलों को प्राथमिक उपचार तक नहीं मिल पाता। मजबूरन मरीजों को निजी क्लीनिकों या बूंदी व हिंडोली रेफर किया जा रहा है।सामान्य दुर्घटना और मारपीट के मामलों में चिकित्सक उपलब्ध होने के बावजूद एमएलसी नहीं बनने से पुलिस को अलोद, हिंडोली या बूंदी के चक्कर काटने पड़ते हैं। प्रसव पीड़ा से कराहती महिलाओं को भी दूर बूंदी रेफर किया जा रहा है, जिससे उनकी पीड़ा और बढ़ जाती है।</p>
<p>रविवार को भी ऐसा ही मामला सामने आया। दबलाना उपसरपंच सुरेंद्र गौतम और भाजपा नेता केसरी लाल नागर ने बताया कि सुबह 9 से 11 बजे तक अस्पताल में डॉक्टर की तलाश की गई, लेकिन वे नहीं मिले। चिकित्सा कर्मियों ने पंचायत में शिविर होने की जानकारी दी, जबकि पंचायत में पूछताछ करने पर पता चला कि डॉक्टर केवल फोटो खिंचवाकर लौट गए।</p>
<p>स्वास्थ्य केंद्र परिसर में जहरीली घास और झाड़-झंझाड़ उगे हुए हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बना हुआ है और स्वच्छता अभियान की अनदेखी हो रही है। जानकारी के अनुसार पीएचसी में दो नर्सिंग आॅफिसर, एक डॉक्टर, एक एलएचवी, एक वार्ड बॉय और एक एएनएम के पद रिक्त हैं।</p>
<p>भाजपा मंडल अध्यक्ष हेमराज राठौर ने कहा कि डॉक्टर की मनमर्जी और स्टाफ की कमी से आमजन को उपचार के बजाय असुविधा झेलनी पड़ रही है। सीएमएचओ बूंदी ओपी सामर से संपर्क नहीं हो सका। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />अस्पताल में डॉक्टर नहीं है, इस मामले में डॉक्टर से चर्चा करूंगा। <br /><strong>-रामसिंह मीणा,ब्लॉक सीएमएचओ, हिंडोली।  </strong></p>
<p>मैं अकेला क्या कर सकता हूं। स्टाफ की कमी से सीएमएचओ बूंदी तथा ब्लॉक तथा ब्लॉक सीएमएचओ हिंडोली को अवगत करवाया हुआ है। <br /><strong>-डॉक्टर संजीत यादव, पीएचसी प्रभारी। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/doctors-absent--patients-suffering-due-to-staff-shortage/article-142475</link>
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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 16:21:11 +0530</pubDate>
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                <title>एमबीएस अस्पताल में जलभराव बना खतरा, मरीजों को मुख्य रास्ते पर  फैले गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा</title>
                                    <description><![CDATA[पुराने निकासी मार्गों की मरम्मत नहीं होने से बारिश या सीवरेज का पानी जमा हो जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/waterlogging-at-mbs-hospital-poses-a-threat--patients-have-to-wade-through-dirty-water-on-the-main-pathway/article-142047"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(1)10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाडौती के सबसे बडे एमबीएस परिसर में सीवरेज का गंदा पानी जमा होने से मरीजों और तीमारदारों को काफी परेशानी हो रही है। जानकारी के अनुसार, यह समस्या खराब जल निकासी व्यवस्था, अवरुद्ध नालियों और सीवरेज चैम्बर के ओवर फ्लो के कारण उत्पन्न हुई है। दूषित सीवरेज के पानी में हानिकारक कीटाणु,बैक्टीरिया और औषधीय अवशेष मौजूद होते हैं, जो संक्रमण फैलने का बड़ा कारण बन सकते हैं। अस्पताल में भर्ती कमजोर रोगियों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक मानी जा रही है। लोगों और मरीजों के परिजनों का कहना है कि ओपीडी के बाहर और वार्डों के रास्तों में पानी भरे रहने से स्ट्रेचर और व्हीलचेयर ले जाना मुश्किल हो गया है। मुख्य रास्ते पर ही फैले गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे अस्पताल की स्वच्छता व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।</p>
<p><strong>50 से अधिक बैड संख्या वाले अस्पतालों में प्लांट की जरूरत</strong><br />स्वास्थ्य नियमों के तहत अस्पतालों में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट होना अनिवार्य है, ताकि गंदे पानी को शुद्ध किए बिना खुले में न छोड़ा जाए। फिलहाल अस्पताल प्रशासन की ओर से इस समस्या के स्थायी समाधान को लेकर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। हालांकि मरीजों और नागरिकों ने मांग की है कि जल्द से जल्द जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त की जाए और सीवरेज के पानी से होने वाले संक्रमण के खतरे को रोका जाए।वर्तमान में कोटा एमबीबीएस के नई बिल्डिंग में संचालित लीफटो की क्या स्थिति है अस्पतालों में एसटीपी की अनिवार्यता मुख्य रूप से जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत आती है। उढउइ (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशानिदेर्शों के अनुसार, सभी अस्पतालों को उनके अपशिष्ट जल (सीवरेज) को बाहर छोड़ने से पहले उपचारित करना अनिवार्य है। इसमें बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स का पालन करना भी शामिल है।</p>
<p><strong>बेसमेन्ट में सीवरेज का पानी</strong><br />अभी हाल ही में बने आईपीडी भवन के बेसमेंट पार्किंग के लिफ्ट एरिया में भरा हुआ पानी सडा़ंध मार रहा था। सवाल यह है कि हाल ही में तैयार हुए भवनों में यह हाल है तो जब यह इमारतें पुरानी होगीं तब क्या होगा।जानकारों के अनुसार, एमबीएस में सीवरेज से जुड़ा बुनियादी ढांचा पुराना हो चुका है। ऐसे में परिसर में नये भवन भी बन गये है जिससे इन की क्षमता कम  पड़ती जा रही है । वहीं पुराने निकासी मार्गों की पूरी मरम्मत नहीं की जाती, जिससे बारिश या सीवरेज का पानी जमा हो जाता है।</p>
<p><strong>अटी पडी गंदगी</strong><br />करीब महीने भर से जयपुर फुट और आक्सीजन स्टोर रूम वाली सड़क पर भी सीवरेज का पाईप  टूटा हुआ है जिससे यहां सड़क पर  गंदगी फैल गयी है। बडी बात यह है कि यह रास्ता रेजीडेन्ट हॉस्टल के साथ एएनएम जीएनएम सेन्टर के साथ मॉर्चरी की और जाने वाले एक मात्र रास्ता है ।</p>
<p>ओपीडी और नयी इमरजेन्सी के बाहर बरसात का पानी भरा हुआ है। यह मार्ग जेके लोन व एमबीएस के बीच मुख्य सडक पर होने से समस्या का कारण बना हुआ है। यहां एक और लेबोरेट?री के कारण दिनभर लोगों की भीड़ रहती है ऐसे में वहीं दूसरी और गाड़ियां खड़ी रहने के कारण रास्ता संकरा रहता है उपर से यहां जमा पानी के कारण पैदल चलना भी दुश्वार हो गया है।<br /><strong>- दुष्यंत कुमार सुमन, तीमारदार</strong></p>
<p>आज ही हमने जहां पर भी पानी और गंदगी की जानकारी मिली वहां पर स्टाफ को काम पर लगाया है। बडी़ समस्या पुरानी लाईनोें से है एसटीपी प्लांट लगने तक व्यवस्था निगम को कहकर करवा रहे है।<br /><strong>- डॉ. कर्नेश गोयल, उपअध्यक्ष एमबीएस हॉस्पिटल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 15:34:10 +0530</pubDate>
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                <title>ईसाटोरी गांव आज भी पक्की सड़क से वंचित, इस रास्ते से जुड़े  हैं दर्जनों गांव </title>
                                    <description><![CDATA[ग्रामीणों ने दी चुनाव बहिष्कार की चेतावनी, गांव में नहीं पहुंच रही एम्बुलेंस।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/isatori-village-still-lacks-a-paved-road--dozens-of-villages-are-connected-by-this-route/article-141449"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/85641.png" alt=""></a><br /><p>समरानियां। ग्राम पंचायत हाटरी के अंतर्गत आने वाले ग्राम ईसाटोरी सड़क बनी है और न ही ऐसा कोई वैकल्पिक मार्ग है, जिससे बरसात के समस्या से आक्रोशित मौसम में बीमार लोगों को अस्पताल तक सुरक्षित पहुंचाया जा सके। इस ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी समाधान नहीं हुआ तो वे आगामी चुनाव का बहिष्कार करेंगे। ग्रामीणों ने बताया कि हर साल चुनाव के समय नेता गांव में आते हैं, बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही सब वादे हवा हो जाते हैं और गांव की हालत जस की तस बनी रहती है। ग्रामीणों ने बताया कि ईसाटोरी गांव से होकर दर्जनों  गांवों का आवागमन होता है। यह रास्ता रोजमर्रा की जरूरतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन सड़क खराब होने से लोगों का समय भी अधिक लगता है और दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है।</p>
<p><strong>बारिश में हालात बद से बदतर</strong><br />बरसात के मौसम में स्थिति और ज्यादा गंभीर हो जाती है। यदि किसी व्यक्ति की तबीयत खराब हो जाए तो एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। मजबूरी में ग्रामीणों को मरीजों को मध्यप्रदेश के अस्पतालों में ले जाना पड़ता है। ग्राम पंचायत ने गांव के अंदर तक सीसी रोड नहीं बनवाई है। कच्चे रास्तों पर कीचड़ भर जाने से बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>हर चुनाव में वादे, लेकिन जमीन पर काम शून्य</strong><br />ग्रामीणों का कहना है कि हर चुनाव से पहले जनप्रतिनिधि गांव में पहुंचते हैं और सड़क निर्माण के बड़े-बड़े वादे करते लेकिन चुनाव समाप्त होते ही कोई सुध लेने नहीं आता। वर्षों से ग्रामीण कच्चे, कीचड़ भरे रास्तों पर चलने को मजबूर हैं ।</p>
<p><strong>ग्रामीणों की मांग: जल्द मिले स्थायी समाधान</strong><br />ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि फॉरेस्ट विभाग से समन्वय कर जल्द एनओसी दिलवाई जाए और सड़क निर्माण कार्य तुरंत शुरू किया जाए। उनका कहना है कि सड़क केवल सुविधा नहीं बल्कि जीवन और मृत्यु का सवाल बन चुकी है।</p>
<p>इस रास्ते से दर्जनों गांव जुड़े हुए हैं और रोजाना लोग इसी मार्ग से आवागमन करते हैं, लेकिन सड़क न होने के कारण समय भी ज्यादा लगता है और परेशानी भी होती है।<br /><strong>-सुनील शिवहरे, ग्रामीण</strong></p>
<p>बरसात के दिनों में यदि कोई बीमार हो जाए, तो गांव से अस्पताल ले जाना बेहद मुश्किल हो जाता है। मजबूरी में कई बार लोगों को इलाज के लिए मध्यप्रदेश की ओर जाना पड़ता है।<br /><strong>- करण सहरिया, ग्रामीण</strong></p>
<p>ग्राम पंचायत द्वारा गांव के अंदर तक सीसी रोड तक नहीं बनवाई गई है, जिससे आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।<br /><strong>- मुरारी प्रजापति, ग्रामीण</strong></p>
<p>सहरिया बस्ती के रोड का कार्य जल्द ही शुरू किया जाएगा।<br /><strong>- सियाराम, वीडीओ</strong></p>
<p>सड़क निर्माण की स्वीकृति जारी हो चुकी है, लेकिन फॉरेस्ट विभाग की एनओसी अभी तक नहीं मिलने के कारण कार्य शुरू नहीं किया जा सका है।<br /><strong>-बसंत गुप्ता, एएक्सईएन, पीडब्ल्यूडी</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Jan 2026 17:02:08 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एमआरआई करवाना जंग जीतने जैसा, मरीज हो रहे परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[एमबीएस , जेके लोन और रामपुरा जैसे बड़े सरकारी अस्पतालों में भी एमआरआई सुविधा नहीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/getting-an-mri-at-kota-medical-college-hospital-is-like-winning-a-battle/article-140714"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/ेलल्े्.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मरीजों को एमआरआई जांच के लिए एक से 2 महीने तक का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। स्थिति तब और बदतर हो जाती है, जब मरीजों को शहर के प्रमुख एमबीएस अस्पताल से करीब 10 किलोमीटर का सफर तय कर मेडिकल कॉलेज पहुंचना पड़ता है, लेकिन वहां भी तारीख एक महीने बाद की मिल रही है। शहर के सरकारी स्वास्थ्य क्षेत्र में केवल एक एमआरआई मशीन मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ही उपलब्ध है, जबकि एमबीएस अस्पताल में यह सुविधा ही नहीं है। नतीजतन, मरीजों को निजी डायग्नोस्टिक केंद्रों पर 2000 से 4,000 रुपये खर्च कर एमआरआई करवानी पड़ रही है। ग्रामीण और गरीब तबके के मरीजों की इस पीड़ा को सुनने वाला कोई नहीं है।</p>
<p><strong>हाड़ौतीभर से आते मरीज, हो रहे परेशान</strong><br />मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एमआरआई मशीन की कमी और लंबी प्रतीक्षा सूची ने मरीजों को निजी केंद्रों की ओर धकेल दिया है। लंबी प्रतीक्षा और और अत्यधिक भीड़ के चलते मरीजो को मजबूरन निजी केंद्रो की ओर रुख करना पड़ रहा है, जहां 4 से 5 हजार की चपत लग रही है।</p>
<p><strong>प्रतिदिन 90 से ज्यादा होती है एमआरआई</strong><br />मेडिकल कॉलेज अस्पताल से बाली जानकारी के अनुसार यहां प्रतिदिन 90 से ज्यादा मरी जांच की जाती है गत वर्ष 23 हजार 62 एमआरआई जांचे की गई है। हाडोतीभर से यहां बड़ी संख्या में मरीज आते हैं। निजी केन्द्रों पर महंगे दमों पर यह जांच होने से मरीजों का अत्यधिक भार मेडिकल कॉलेज अस्पताल पर पड़ता है। ऐसे में यहां एमआरआई करवाना चुनौती बना हुआ है।</p>
<p><strong>एक ही मशीन पर सारा भार</strong><br />सरकारी क्षेत्र में एमआरआई की नए अस्पताल में ही मशीन है। यहां कोटा संभागभर से मरीज इलाज के लिए पहुंचते है। सरकार की ओर से नि:शुल्क जांच की सुविधा देने की घोषणा के साथ ही मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है। इससे एक ही मशीन पर सारा भार आ गया है।</p>
<p><strong>मरीज को झेलनी पड़ रही दोहरी मार</strong><br />मेडिकल कॉलेज अस्पताल में केवल एक एमआरआई मशीन होने के कारण मरीजों को समय पर जांच नहीं हो पा रही। इधर एमबीएस अस्पताल, जो कोटा का प्रमुख सरकारी अस्पताल होने के बावजूद एमआरआई मशीन की अनुपस्थिति मरीजों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को शहर में आने-जाने और निजी केंद्रों पर खर्च करने की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।<br /><strong>- एड. बीटा स्वामी</strong></p>
<p><strong>लंबी प्रतीक्षा और सीमित सुविधाए बनी चुनौती</strong><br />ग्रामीण व आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीज इस स्थिति से सबसे अधिक प्रभावित हैं। कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल शहर में ही है, लेकिन लंबी प्रतीक्षा और सीमित सुविधायें मरीजों के लिए चुनौती बन गई है। स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकतार्ओं ने सरकार से मांग की है कि एमबीएस अस्पताल में एमआरआई मशीन स्थापित की जाए ।<br /><strong>- कुशाल सेन, समाजसेवी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक ही एमआरआई मशीन है, जो काफी पुरानी है। ऐसे में उच्च गुणवत्तायुक्त मशीन स्थापित होनी चाहिए। हालांकि इसके लिए प्रपोजल दिया हुआ है। अस्पताल में मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के लगातार प्रयास किया जा रहे हैं।<br /><strong>- डॉ. आशुतोष शर्मा, अधीक्षक मेडिकल कॉलेज अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Jan 2026 17:22:15 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>एमबीएस में ट्रॉली, स्ट्रेचर और व्हीलचेयर का संकट, मरीज हो रहे परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं बदहाल ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/shortage-of-trolleys--stretchers--and-wheelchairs-at-mbs-hospital--causing-distress-to-patients/article-138578"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px-(2)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमबीएस में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति बिगड़ती जा रही है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में मरीज यहां उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें बड़ी संख्या में शहर के बाहर से आने वाले मरीज भी शामिल हैं, जो बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन अव्यवस्थित व्यवस्थाओं के कारण उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>परिजन खुद करते मशक्कत</strong><br />अस्पताल में ट्रॉली, स्ट्रेचर और व्हीलचेयर जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है। इमरजेंसी और ओपीडी में आने वाले गंभीर मरीजों को एक वार्ड से दूसरे वार्ड तक ले जाने में परिजनों को खुद मशक्कत करनी पड़ती है। कई बार मरीजों को सहारे से या गोद में उठाकर ले जाना पड़ता है, जिससे उनकी तकलीफ और बढ़ जाती है।</p>
<p><strong>स्थानीय लोगों का कहना</strong><br />एमबीएस अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन सुविधाओं में उसी अनुपात में सुधार नहीं किया गया। पहले भी कई बार व्यवस्थाओं की लापरवाही सामने आ चुकी हैं, लेकिन अब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए। शहरवासियों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि एमबीएस अस्पताल में तत्काल पर्याप्त संख्या में ट्रॉली, स्ट्रेचर और व्हीलचेयर उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही अस्पताल प्रबंधन की नियमित निगरानी हो, ताकि संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में मरीजों को सम्मानजनक और सुचारु स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।</p>
<p><strong>घर से लाना पड़ रहा स्ट्रेचर</strong><br />सरकारी अस्पताल अब सिर्फ नाम का रह गया है। समय पर इलाज नहीं मिल पाता और मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि सुविधाओं की कमी के कारण गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है। यहा पर ट्रॉली, स्ट्रेचर की व्यवस्था नही होने के कारण घर से ही लाना पड़ रहा है।<br /><strong>-जीतू ,संजय नगर निवासी</strong></p>
<p><strong>ढूंढने पर भी नहीं मिली व्हीलचेयर</strong><br />मैनें पूरे अस्पताल परिसर में ट्रॉली और व्हीलचेयर ढूंढी, लेकिन कहीं भी उपलब्ध नहीं हुई। में मरीज चलने की हालत में नहीं था, ऐसे में परिजनों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी।  ऐसी स्थिति में मरीज की जान पर भी खतरा बन सकता है।<br /><strong>- रमेश, नया नौहरा</strong></p>
<p>ट्रॉली व स्ट्रेचर की कमी होने पर तुरंत स्टॉक से उपलब्ध कराए जाते हैं, ताकि उपचार के दौरान मरीजों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।<br /><strong>- कुंज बिहारी मीणा, नर्सिंग इंचार्ज एवं इमरजेंसी प्रभारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jan 2026 15:10:01 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>शौचालय, लीकेज, पुलिस चौकी… इंदौर में जहरीले पानी से अब तक 13 लोगों की मौत, ICU में भर्ती 32 मरीज, आज होगी हाईकोर्ट में सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[इंदौर में दूषित पानी पीने से 13 लोगों की जान चली गई और सैकड़ों अस्पताल में भर्ती हैं। मुख्यमंत्री ने लापरवाह अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। आज हाईकोर्ट में सुनवाई होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/toilet-leakage-police-post%E2%80%A6-13-people-died-so-far-due/article-138097"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(1)5.png" alt=""></a><br /><p>इंदौर। मध्यप्रदेश के इंदौर में दूषित पानी का मामला थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। बता दें कि इंदौर स्वचछता के मामले में पूरे देश में सिरमौर है। इंदौर में दूषित पानी के कारण अब तब 13 लोग अपनी जान गवां चुके है और करीब 300 से ज्यादा लोगों की हालत गंभीर बनी हैं, जिनको इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। इस मामले में सीएम मोहन यादव की कुछ अधिकारियों पर गाज गिरी जिसके कारण उनको तुरंत ही उनके पद से सस्पेंड कर दिया गया है। बीते दिन गुरूवार को करीब 338 नए मरीज मिले हैं जिनमें से करीब 32 मरीजों को आईसीयू में भर्ती करवाया गया हैं, जहां उनको प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है। इस मामले में लैब रिपोर्ट में चौकाने वाले खुलासा हुआ है और उसके बाद आज हाईकोर्ट में इस मामले में सुनवाई होगी।</p>
<p>हालांकि, इस मामले में प्रशासन की तरफ से केवल 4 मौतों की ही पुष्टि हुई है, लेकिन कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस मामले में अब तक करीब 1400 से ज्यादा लोगों के बीमार होने की पुष्टि की है। इन मामलों के सामने आने के बाद भागीरथपुरा स्थानियों निवासियों में आक्रोश का माहौल बना हुआ है। </p>
<p>जानकारी के अनुसार, यहां पीने की पानी के लिए टैंकर की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन इन मामलों के सामने आने के बाद स्थानिय लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। इस की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थय विभाग के अधिकारियों ने बताया कि हमने यहां पर करीब 21 टीमें बनाई हुई है, जिसमें डॉक्टर, पैरामेडिकल, एएनएम व आशा कार्यकर्ता शामिल है, जों समय समय पर घर घर जाकर सबको समझाने की कोशिश करते हैं। इसके आगे अधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि, गत दिवस हमने करीब 1714 मकानों का सर्वे किया,​ जिसमें से 8571 लोगों की जांच की गई, जिनमें से करीब 338 लोगों की हालत खराब थी। अब तक इस मामले में 272 लोगों को प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया जा चुका है।</p>
<p>दूषित पानी के मामले में 13 लोगों की मौत होने के बाद एनएचआरसी ने स्वत: सज्ञान लिया है और इस मामले में आज हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Jan 2026 12:33:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>नया अस्पताल तैयार, बिजली अब भी नदारद</title>
                                    <description><![CDATA[वर्तमान में संचालित पुराना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन जर्जर और कम क्षमता का है। 
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/new-hospital-ready--but-electricity-still-missing/article-137622"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(2)10.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। क्षेत्र के बांसी कस्बे में देई रोड स्थित राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए बने नए भवन पर विद्युत निगम की लापरवाही सामने आ रही है। भवन पर 11 केवी लाइन खींचकर परिसर में ट्रांसफार्मर तो रख दिया गया है, लेकिन अब तक विद्युत कनेक्शन नहीं दिया गया। भवन बनकर पूरी तरह तैयार होने के बावजूद बिजली के अभाव में इसका उपयोग शुरू नहीं हो पाया है। वर्तमान में संचालित पुराना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन जर्जर और कम क्षमता का है। यहां आने वाले रोगियों, उनके तीमारदारों और कर्मचारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। भवन की क्षमता केंद्र के ओहदे के अनुरूप नहीं होने पर सरकार ने लाखों रुपए का बजट स्वीकृत किया और ग्राम पंचायत द्वारा भूमि आवंटित कर नवीन भवन का निर्माण कराया गया। </p>
<p>जानकारी के अनुसार लंबे समय से विद्युत कनेक्शन की समस्या बनी हुई थी। समाचार प्रकाशित होने के बाद डिमांड राशि जमा हुई और निगम ने 11 केवी लाइन के पोल लगाकर लाइन भी खींच दी। इसके साथ ही भवन परिसर में ट्रांसफार्मर भी स्थापित कर दिया गया, लेकिन चार दिन बीतने के बाद भी ट्रांसफार्मर से अस्पताल भवन तक बिजली नहीं पहुंचाई गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित विभागों की उदासीनता के कारण नया अस्पताल भवन बेकार पड़ा है। ग्रामीणों ने शीघ्र विद्युत कनेक्शन देकर भवन में चिकित्सा सेवाएं शुरू करने की मांग की है, ताकि रोगियों और कर्मचारियों को राहत मिल सके।<br /> <br /><strong> विभागीय अधिकारी का कहना </strong><br />बांसी राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के नवीन भवन हेतु विद्युत लाइन पहुंच चुकी है। मीटर नही लगवाया, कल मीटर लगवा दिया जाएगा।<br /><strong>-सौरभ गौत्तम, कनिष्ठ अभियंता,जयपुर विद्युत वितरण निगम ग्रामीण देई</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Dec 2025 15:21:55 +0530</pubDate>
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