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                <title>rajkaj - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>जानें राज काज में क्या है खास </title>
                                    <description><![CDATA[सूबे के राज को लेकर चुनावी जंग के तो अभी ढाई साल हैं, लेकिन हाथ वाले भाई लोगों में अभी से खिचड़ी पकनी शुरू हो गई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/know-what-is-special-in-raj-kaj/article-146626"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/rajkaj.png" alt=""></a><br /><p><strong>कुछ तो पक रहा है :</strong></p>
<p>सूबे के राज को लेकर चुनावी जंग के तो अभी ढाई साल हैं, लेकिन हाथ वाले भाई लोगों में अभी से खिचड़ी पकनी शुरू हो गई। दो दिशाओं में चल रहे हाथ वाले लीडर्स को एक राह पर लाने के लिए आलाकमान की टीम उन्हें एक जाजम पर लाने के लिए कोशिश में जुट गई है। इन चर्चों को उस समय जोर मिल गया, जब बीते मंगल को दोनों लीडर्स को दिल्ली में तलब किया गया। इंदिरा गांधी भवन में बने हाथ वालों के ठिकाने पर चर्चा है कि दिल्ली वाले लीडर अगर जोधपुर वाले अशोक जी को मनाने में सफल हो गए, तो सबकुछ ठीक हो जाएगा, वरना सारी मेहनत ढाक के तीन पात होकर रह जाएगी। अब इन भाई लोगों को कौन समझाए कि जोधपुर वाले भाई साहब के मन में क्या है, वह कोई नहीं जानता। वे जब दाएं हाथ से कुछ करते हैं, तो बाएं हाथ तक को पता नहीं लगने देते। लेकिन यह सही है कि हाथ वालों में कुछ तो पक रहा है।</p>
<p><strong>फिर निकला लाल डायरी का भूत :</strong></p>
<p>लाल डायरी का भूत है कि निकलने का नाम ही नहीं लेता। गुजरे जमाने में राज के रत्न रहे तुला राशि वाले बन्नाजी के ढील में आकर खूब ऊधम मचाया तो, अब सामने वाले के शरीर में घुस कर बोलने लगा है। राज का काज करने वालों में चर्चा है कि लाल डायरी की आड़ में गुढ़ा वाले राजेन्द्रजी ने पहले वाले राज की पोल खोलने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। हर कोई लाल डायरी के पन्नों को पढ़ने के लिए आतुर था। सूबे के राज के लिए हुई चुनावी जंग के बाद लाल डायरी के पन्ने बंद हो गए थे, किन्तु बीते हफ्ते खुद ही जोधपुर वाले भाई साहब ने लाल डायरी को अपनी जुबान पर लाकर चर्चा में ला दिया। सगाई समारोह में मिठाई खाकर भाई साहब ने गुढ़ाजी को लाल डायरी वाला के नाम से संबोधित कर बहुत कुछ इशारा कर दिया, जिसको समझने वाले समझ गए, ना समझे वो अनाड़ी है।</p>
<p><strong>चर्चा में खेमों की अदला-बदली :</strong></p>
<p>सूबे में इन दिनों खेमों की अदला-बदली हार्ड कोर वर्कर्स की जुबान पर कुछ ज्यादा ही है। खेमों की अदला-बदली दोनों तरफ है, मगर चर्चा भगवा वाले भाई लोगों में ज्यादा है। हो भी क्यों नहीं, मामला भी कुछ ऐसा ही है। अब देखो न, गुजरे जमाने में जो भाई लोग मैडम को देखकर नजरें चुराते थे, वे आजकल अगल-बगल में खड़े नजर आते हैं। सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के ठिकाने पर भी अब संतुष्ट और असंतुष्टों के कमरे तक बदल गए। कानाफूसी है कि मैडम ने चुप रह कर जो असर दिखाया था, उसमें वे कामयाब हो गई है।</p>
<p><strong>एक जुमला यह भी :</strong></p>
<p>सूबे में भी इन दिनों एक जुमला जोरों पर है। जुमला भी छोटा-मोटा नहीं बल्कि पॉलिटिशियन की अपने बेटों की चिन्ता को लेकर है। जुमले की चर्चा भी दोनों बड़े दलों के ठिकानों पर हार्ड कोर वर्कर्स में हुए बिना नहीं रहती। जुमला है कि एक उम्र के बाद बेटा जो चाहता है, वही पिता करता है। बिहारी नीतीष बाबू ने भी वो किया, जो दूसरे नेता करते हैं। मरु भूमि में भी आधे से ज्यादा नेता पॉलिटिक्स में विरासत से ही आए हैं। यह खेल नया नहीं है, बल्कि पीढी दर पीढी चल रहा है। हमारे सूबे मे ंतो उप चुनाव तो परिवारजनों के लिए रिजर्व हो चुके हैं।</p>
<p><strong>-एल. एल. शर्मा </strong><br /><strong>(यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Mar 2026 11:28:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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                <title>जानें राज काज में क्या है खास </title>
                                    <description><![CDATA[संडे को पिंकसिटी में जो कुछ हुआ, उससे राजनीति में भूचाल आ गया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/know-what-is-special-about-raj-kaj/article-139264"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/rajkaj.png" alt=""></a><br /><p><strong>मैसेज से उड़ी नींद :</strong></p>
<p>संडे को पिंकसिटी में जो कुछ हुआ, उससे राजनीति में भूचाल आ गया। भूचाल आना भी स्वाभविक है। इससे उन भाइयों की नींद उड़ गई, जो बड़े बदलाव के इंतजार में राज की कुर्सी के सपने देख रहे थे और दिल्ली दरबार तक हर छोटी-मोटी गलती को बढ़ा चढ़ा कर परोस रहे थे। राज का काज करने वाले कई साहब लोगों के चेहरे पर चिन्ता लकीरें दिखाई देने लगी है। गुजराती बंधु अमित जी ने खाकी वालों के मंच पर खुले मन से अटारी वाले भजन जी के कामकाज की तारीफ की, तो पहले तो कइयों के समझ में नहीं आई कि आखिर माजरा क्या है और समझ में आई तब तक पूरे सूबे में मैसेज जा चुका था। अब राज की कुर्सी के सपने देखने वालों को कौन समझाए कि सियार के उतावलेपन से बेर नहीं पकते। सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में आने वाले हार्डकोर वर्कर्स में खुसरफुसर है कि शाह जी के मैसेज को समझने वाले समझ गए, ना समझे वो अनाड़ी है।</p>
<p><strong>चर्चा में इंटरव्यू :</strong></p>
<p>सूबे में इन दिनों एक चर्चा जोरों पर है। चर्चा भी छोटी मोटी नहीं बल्कि पिछले दिनों पॉडकास्ट पर हुए इंटरव्यू को लेकर है। इंटरव्यू भी छोटे-मोटे हरकारे ने नहीं बल्कि पीएमओ तक में पैठ रखने वाली मुम्बई और दिल्ली की बड़ी कंपनी की मोहतरमा ने लिया। वो भी अटारी वाले भाई साहब को कोसों दूर रखकर राज के रत्नों में शामिल मोहतराम का लिया हुआ है। राज का काज करने वालों में चर्चा है कि इंटरव्यू के बदले मोटी रकम का भुगतान होने वाला ही था कि प्रसार भारती में हुई कारगुजारी पब्लिक में आ गई और वृष्चिक राषि वाले एक बड़े साहब नप गए। साहब से बडी कुर्सी छिनी, तो सूबे में भी दिलजलों ने मोहतरमा के इंटरव्यू में कई खामियां निकाल दी। अब पेमेंट की फाइल को इधर-उधर घुमाने में ही साहब लोग अपनी भलाई समझ रहे है, चूंकि मामले पर सीएमओ की भी नजरें टिकी है।</p>
<p><strong>न रीति और नहीं नीति :</strong></p>
<p>पिछले दिनों सूबे में एक उद्योग जोरों से चला। चलता भी क्यों नहीं, राज के रत्नों के सारे परिजनों के साथ सगे-संमंधियों तक ने जी तोड़ मेहनत जो की है। बेचारों ने दिन रात कोई कसर नहीं छोडी, जब खुद भागादौड़ी करने में थक गए, तो कारिन्दों को लगा दिया। बेचारे कई दिनों से चिन्ता में डूबे हुए थे कि उद्योग चालू हों और तीसरी पीढी तक का बंदोबस्त करने का मौका मिले। राज का काज करने वालों में चर्चा है कि बिना रजिस्ट्रेशन के चलने वाले इस उद्योग में हवाला की तरह सिर्फ कोड नंबर में ही काम हुआ है। मास्टरों से ताल्लुक रखने वाले महकमें में राज के कारिन्दों को इधर-उधर करने वाले इस उद्योग में न तो रीति अपनाई गई और नहीं नीति बनाई गई। गुड गवर्नेंस को कोसों दूर रखा गया। सरदार पटेल मार्ग पर स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के ठिकाने पर चर्चा है कि कुर्सी की लड़ाई में वफादारी दिखाई है, तो उसका फायदा उठाने में भी कोई कसर नहीं छोडेंगे। चाहे भाड़ में जाए पब्लिक और वर्कर।</p>
<p><strong>-एल. एल. शर्मा </strong><br /><strong>(यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Jan 2026 12:14:44 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जानें राज काज में क्या है खास </title>
                                    <description><![CDATA[सूबे में होने वाले उप चुनाव के नतीजे तो पता नहीं क्या होंगे, लेकिन नेताओं की पॉलिसी को लेकर कई तरह की अफवाहें हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/know-what-is-special-in-raj-kaj/article-130645"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/rajkaj.png" alt=""></a><br /><p><strong>उप चुनाव और अफवाहें : </strong></p>
<p>सूबे में होने वाले उप चुनाव के नतीजे तो पता नहीं क्या होंगे, लेकिन नेताओं की पॉलिसी को लेकर कई तरह की अफवाहें हैं। अफवाह फैलाने वाले भी और कोई नहीं बल्कि दोनों दलों के हार्ड कोर वर्कर हैं। अब देखो न, भगवा वालों के ठिकाने के साथ ही भारती भवन में चिंतन-मंथन में चूरू वाले भाई साहब का नाम आए बिना नहीं रहता। भाई साहब भी कम योग्य नहीं हैं, अब तक हुए कई चुनावों में प्रभारी का रोल निभा चुके हैं। लेकिन भाई साहब को इस बार उप चुनावों में कोसों दूर रखा गया है। ठिकाने पर चर्चा है कि बड़े नेता अपनी पार्टी की जीत को पक्का मानकर एक रणनीति के तहत भाई साहब के पैर काटने में कोई कमी नहीं छोड़ रहे।</p>
<p><strong>चर्चा डीप इनसाइड की :</strong></p>
<p>सूबे में इन दिनों डीप इनसाइडर की चर्चा जोरों पर है। इससे सरदार पटेल मार्ग पर बंगला नंबर 51 में बने भगवा के ठिकाने के साथ ही इंदिरा गांधी भवन में पीसीसी चीफ का दफ्तर भी अछूता नहीं है। राज के काम करने वाले भी लंच टाइम में डीप इनसाइडर को लेकर फुसफुसाहट करते हैं। डीप इनसाइडर अटारी वाले भाई साहब से ताल्लुक रखता है। भाई साहब ने सरकार के एक प्रयास के तौर पर जमीनी हकीकत जानने की कोशिश की तो सामने वालों ने भी मीडियाविहीनता में भी नहीं छोड़ा। और तो और राज के काम करने वालों ने भी हल्ला मचा दिया। लांग्स शेखावटी के बाद मेवाड़, मारवाड़ और हाड़ौती में जो ग्राउंड रियलिटी बनी, उसे राज के सामने पेश करने वालों के चेहरे भी शर्म से झुका गए। अब ब्यूरोक्रेट्स की कौन सी समस्या की भजन जी ने ग्राउंड रियलिटी जानने को ठान ही ली, तो कागजी घोड़े दौड़ने से कोई फायदा नहीं है।</p>
<p><strong>असर बुध का :</strong></p>
<p>कभी-कभी शनि के साथ बुध भी अपना खास असर दिखाता है। उसके असर की लपेट में आने वालों को गुरु और मंगल भी नहीं बचा सकते। कुछ ऐसा ही बुध का असर इन दिनों सूबे के खादी और खाकी वालों पर कुछ ज्यादा ही नजर आ रहा है। असर को कम करने के लिए खादी के साथ खाकी वालों ने यज्ञ में आहुतियां देने के साथ ही मंत्र का जाप भी कर लिया, लेकिन पार नहीं पड़ी। आज और भविष्य में बुध से कुर्सी नहीं संभालने की कसमें खा लीं। बुध का असर तीन महीने बाद भी कम नहीं हुआ। अब सलाह यह है कि बुध के असर से खाकी में होने वाले कोल्ड वार को कम करने के लिए पूजा के सिवाय कोई चारा ही नहीं है।</p>
<p><strong>एक जुमला जोरों पर : </strong></p>
<p>सूबे में इन दिनों एक जुमला जोरों पर है। जुमला भी छोटा-मोटा नहीं बल्कि भक्ति को लेकर है। जुमला है कि भक्ति की चर्चा आदिकाल से होती आ रही है, लेकिन कुछ सालों से इसकी चर्चा जोरों पर है। इसकी चर्चा हमारे सूबे में इंदिरा गांधी भवन में बने हाथ वालों के ठिकाने के साथ सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में बन भगवा वालों के दफ्तर में  भी हुए बिना नहीं रहती। चर्चा है कि इन दिनों नेताओं की भक्ति को भी पब्लिक में दिखाने के लिए कई एजेंसियां दिन-रात एक कर रही हैं। राज का काज करने वाले भी लंच केबिनों में खुसरफुसर करते हैं कि राजा की भक्ति सार्वजनिक नहीं, बल्कि गुप्त रहती है, लेकिन मामला उलटा है। इस जुमले को समझने वाले समझ गए, ना समझे वो अनाड़ी है।</p>
<p><strong>-एल. एल. शर्मा </strong><br /><strong>(यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Oct 2025 11:38:52 +0530</pubDate>
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                <title>जानें राज काज में क्या है खास </title>
                                    <description><![CDATA[सूबे में इन दिनों सुई और धागे को लेकर एक बार फिर चर्चा जोरों पर है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/know-what-is-special-in-raj-kaj/article-129494"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/rajkaj.png" alt=""></a><br /><p><strong>चर्चा में फिर सुई और धागा :</strong></p>
<p>सूबे में इन दिनों सुई और धागे को लेकर एक बार फिर चर्चा जोरों पर है। चर्चा से सरदार पटेल मार्ग पर स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के ठिकाने के साथ इंदिरा गांधी भवन में हाथ वालों का दफ्तर भी अछूता नहीं है। दोनों दलों के लीडर्स के मनों में बडी कुर्सी को लेकर जो गांठ है, वह जगजाहिर है। हाथ वाले भाई लोग साढेÞ चार साल से ऐसी गांठें लगा रहे हैं, जिनको खोलने के लिए पसीना बहाना पड़ रहा है। और भगवा वाले भाई लोग वैसे ही मन में गांठें पाले बैठे हैं। दोनों तरफ के दिल्ली वाले बड़े नेताओं ने एक-दूसरे को गले मिलाने का दावा तो कर रहे हैं, लेकिन यह बात उनके वर्कर्स के गले नहीं उतर रही। दोनों बडेÞ ठिकानों पर आने वाले हार्डकोर वर्कर्स बतियाते हैं कि दिलों में वे ही बसते हैं, जिनका मन साफ हो, क्योंकि सुई में वह ही धागा जा सकता है, जिस धागे में कोई गांठ न हो।</p>
<p><strong>गुगली राधा के मोहन की :</strong></p>
<p>सूबे में इन दिनों गुगली को लेकर काफी कानाफूसी है। गुगली भी और किसी की नहीं बल्कि मैच के रेफरी बने गोरखपुर वाले वैश्य वंशज की तरफ से फेंकी बॉल हैं। इस गुगली से राज की कुर्सी के सपने देखने वाले भाइयों का दिन का चैन और रातों की नींद उड़े बिना नहीं रह सकी। स्टम्प पर खड़े सामने वाली टीम के कप्तान के अंतिम ओवर की लास्ट बॉल तक समझ में नहीं आया कि आखिर माजरा क्या है। सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के ठिकाने पर खुसरफुसर है कि राधा के मोहन वो ही बोलते हैं, जो उनको रटाया जाता है। गुगली का छोटा-मोटा असर बीते दिनों गुलाबी नगरी में दिखाई भी दिया, लेकिन तीन दिन पहले दिल्ली से आए एक मैसेज ने एक और गुगली फेंक दी। राज का काज करने वाले भी लंच केबिनों में बतियाते हैं कि अभी भगवा वाले दल में सबकुछ ठीक तो नहीं है। दो-दो हाथ करने वालों की आंखें भी अभी भी कुछ ज्यादा ही लाल हैं।</p>
<p><strong>अब जुबां पर आई बात :</strong></p>
<p>कई बातों को मन मसोस कर दिल में ही रखा जाता है। लेकिन जब हदें पार हो जाती हैं, तो दिल की बातें भी जुबां पर आए बिना नहीं रहतीं। अब देखो न, भगवा वाले भाई लोगों के राज में कुछ हाथ वालों की चवन्नी भी रुपए में चल रही थी। किसी को हटाने और लगाने के लिए उनका सिर्फ आंख का इशारा ही काफी था। भगवा वाले संगठन को संभाल रहे भाई साहब को कई दिनों से इसका पता भी था, लेकिन पार्टी में चल रहे माहौल की वजह से दिल मसोस कर बैठने के सिवाय उनके पास कोई चारा भी तो नहीं था। जब माहौल भी कुछ बदला-बदला सा नजर आने लगा तो और हदें पार हो गईं, तो बीते दिनों सुमेरपुर वाले भाई साहब की दिल की बातें जुबां पर आ गई। अब राज के सलाहकारों को कौन समझाए कि इशारों को अगर समझो, तो राज को राज ही रहने दो।</p>
<p><strong>याद बीते दिनों की :</strong></p>
<p>आजकल खाकी वालों पर शनि की दशा कुछ ज्यादा ही है। कभी चौराहे पर, तो कभी गली में पिट रहे हैं। और तो और चूड़ियों वाली तक हाथ-पैर चला जाती है। बेचारे खाकी वाले भी क्या करें, उनको अपने उपर वालों पर भरोसा नहीं है। कब इंक्वायारी बिठा दें, सो पिटने में ही अपनी भलाई समझते हैं। करें भी तो क्या, पुलिस का इकबाल जो, खत्म हो गया। अब टाइगर और लॉयन तक दहाड़ मारना भूल गए। पीटर और गामाज के बारे में सोचना तो बेईमानी है। विक्टर की मजबूरी जगजाहिर है, उनके काम में खलल की किसी में दम नजर नहीं आ रहा। अब तो खाकी वाले भाई ऊपर वालों से प्रार्थना कर रहे हैं कि कोई उनके बीते दिन लौटा दे, ताकि खाकी का इकबाल कायम रहे।</p>
<p><strong>-एल. एल. शर्मा </strong><br /><strong>(यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Oct 2025 11:17:32 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जानें राज काज में क्या है खास  </title>
                                    <description><![CDATA[सचिवालय के गलियारों में इन दिनों अर्जी के साथ लड्डुओं की टोकरी बड़ी चर्चा में है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/know-what-is-special-in-raj-kaj/article-128842"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/rajkaj.png" alt=""></a><br /><p><strong>अर्जी के साथ लड्डू :</strong></p>
<p>सचिवालय के गलियारों में इन दिनों अर्जी के साथ लड्डुओं की टोकरी बड़ी चर्चा में है। कोई भी इसकी चर्चा किए बिना नहीं रहता। तीनों मंजिलों में अर्जी के साथ लड्डुओं की टोकरी का बेसब्री से इंतजार रहता है। राज का काज करने वालों में चर्चा है कि सूबे की सबसे बड़ी पंचायत के पंच हवामहल वाले भाई साहब जब भी कोई अर्जी लेकर आते हैं, तो लड्डुओं की टोकरी लाए बिना नहीं रहते। बेचारे कई बार तो अर्जी के साथ लड्डुओं की टोकरी को ऐसे हाथों में सौंप देते हैं, जिनका उनके काम से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं होता। भगवाधारी भाई साहब को भी बड़ी उम्मीद रहती है कि लड्डुओं की टोकरी की करामात से ही उनकी फाइल की स्पीड चार गुणा हुए बिना नहीं रहेगी। अब भोले-भाले संजय जी भाई साहब को कौन समझाए कि लड्डुओं की टोकरी से ही काम होते तो, अब तक अर्जी लेकर घूमने की कतई जरूरत नहीं पड़ती।</p>
<p><strong>...और मुन्नी बदनाम हो गई :</strong></p>
<p>बेचारी मुन्नी 15 सालों से बदनाम हो रही है। सलमान खान की दबंग फिल्म में मलाइका अरोड़ा पर फिल्माया गया यह गाना सबसे हिट गानों में से एक है। फिल्म में मुन्नी सिर्फ एक बार बदनाम हुई थी, लेकिन अब तो कई बार हो रही है। अब देखो न पिंकसिटी में दशहरे के दिन भगवा वाले भाई लोगों ने रावण दहन के बाद मुन्नी को बदनाम कराया, तो बवेला मच गया। बवेला मचाने वाले और कोई नहीं, बल्कि भगवा वाले भाई लोग ही थे। वो तो भला हो कि ठुमका लगाने में माहिर राज के एक रत्न कुछ देर पहले ही निकल लिए, वरना उनको भी भगवा वाले भाई लोग मुन्नी की बदनामी से जोड़े बिना रहते। सीधे-सादे आमेर वाले भाई साहब के साथ दिल्ली दरबार में पिंकसिटी की नुमाइंदगी कर चुके तुला राशि वाले राम के चरण भी लपेटे में आए बिना नहीं रहते।</p>
<p><strong>माला पहनने की होड़ :</strong></p>
<p>सूबे में इन दिनों माला पहनने की होड़ मची हुई है। माला पहनने के लिए कइयों को पापड़ तक बेलने पड़ रहे हैं। सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वाले ठिकाने पर इसकी चर्चा हुए बिना नहीं रहती। चर्चा होनी भी लाजिमी है, चूंकि इन दिनों जमीन से जुड़े भगवा वाले भाई लोगों में ही माला पहनने की होड़ कुछ ज्यादा ही मची हुई है। वे एक दूसरे को नीचा दिखाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ रहे। और तो और बेचारे माला के साथ उनको पहनाने वालों का इंतजाम भी खुद ही करते हैं। चाल-ढाल और हाव-भाव बदलने की ट्रेनिंग के लिए ट्रेनर तक का जुगाड़ कर रहे हैं। माला पहनने में कई बार तो उनके आगे मुखिया जी भी पीछे रह जाते हैं। अब उनकी मालाओं से लदे होने की मंशा को समझने वाले समझ गए, ना समझे वो अनाड़ी है।</p>
<p><strong>एक जुमला यह भी :</strong></p>
<p>सूबे में इन दिनों एक जुमला जोरों पर है। जुमला भी छोटा-मोटा नहीं बल्कि फाइलों की स्पीड को लेकर है। इंदिरा गांधी भवन में बने हाथ वालों के ठिकाने पर जुमले की चर्चा कुछ ज्यादा ही है। ठिकाने पर सालों आने वाले बुजुर्गवार ने जुमले के बारे में हमें भी बताया, हम आपको बताय देते हैं। जुमला है कि सचिवालय में आज फिर फाइलों ने अपनी रोज की यात्रा पूरी की। सुबह दफ्तर पहुंची, दोपहर तक तीन  टेबिलों पर घूमी और शाम होते-होते वापस वहीं लौट आई। राज का काज करने वालों ने भी संतोष जताया कि प्रगति हो रही है, कम से कम फाइलें तो घूम रही हैं। राजकाज अब योजनाओं से नहीं, घोषणाओं की गति से मापा जा रहा है।</p>
<p><strong>-एल.एल. शर्मा </strong><br /><strong>(यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Oct 2025 11:42:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>जानें राज काज में क्या है खास </title>
                                    <description><![CDATA[सूबे में तीन दिन से मोटा-पतला और पर्ची को लेकर चर्चा जोरों पर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/know-what-is-special-in-raj-kaj/article-128201"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/rajkaj.png" alt=""></a><br /><p><strong>मोटा-पतला और पर्ची :</strong></p>
<p>सूबे में तीन दिन से मोटा-पतला और पर्ची को लेकर चर्चा जोरों पर है। चर्चा भी सोमनाथ की नगरी से शुरू होकर सचिवालय तक पहुंच गई। पर्ची को लेकर और कोई अपना मुंह खोलता तो इतनी चर्चा नहीं होती, लेकिन मीनेश वंशज डॉक्टर साहब ने बेधड़क होकर अपने मन की बात बोली, तो चर्चा होना लाजिमी है। राज का काज करने वाले भी लंच केबिन में बतियाते हैं कि डॉक्टर साहब के मुंह से सच ही बाहर आया है, चूंकि कई धुरंधरों को पर्ची ने दौड़ से बाहर कर दिया, जो बेचारे दुबले हो गए। उनके चेहरों पर झुर्रियां साफ दिखाई देने लगी हैं। और तो और अंधेरे में आंसू भी बहाते हैं। उनका वजन भी 20 किलो तक कम हो गया। चौड़ी छाती वाले डॉक्टर साहब की मन की बात को समझने वाले समझ गए, ना समझे वो अनाड़ी है।</p>
<p><strong>मेवा को लेकर फिर हलचल :</strong></p>
<p>सूबे में बॉर्डर डिस्ट्रिक्क से ताल्लुक रखने वाले सिंह राशि वाले साहब को लेकर सूबे में एक बार फिर हलचल मची हुई है। हलचल मचे भी क्यों नहीं, शिलाजीत और मेवा खाने वाले राम जी भाई साहब की पर्सनलिटी ही ऐसी है। हलचल भी और किसी में नहीं बल्कि उनकी ही हाथ वाली पार्टी के लोगों में मची हुई है। भाई साहब भी छुपे हुए नहीं है, बल्कि बोर्डर डिस्ट्रिक्ट का बच्चे-बच्चे की जुबान पर है। राज का काज करने वालों में चर्चा है कि विरोध कर रहे हाथ वाले भाई लोग उनकी पर्सनलिटी के पासंग में भी नहीं हैं, सो होर्डिंग एंड बैनर का सहारा लेकर ही अपनी भड़ास निकालने के अलावा उनके पास कोई चारा भी तो नहीं है। अब भाई साहब भी उन बेचारों को देख कर मंद मंद मुस्कराते हैं और चुपचाप रास्ता बदल कर निकलने में ही अपनी भलाई समझते हैं।</p>
<p><strong>नजरें पांच बत्ती की ओर :</strong></p>
<p>सूबे में भगवा वाले कई भाई लोगों की इन दिनों पांच बत्ती के पास बने बड़े ठिकाने की ओर नजरें कुछ ज्यादा ही टिकी हैं। बेचारों को दिन-रात यह ठिकाना ही दिखता है। वैसे तो ठिकाने को देखने का उनको शौक नहीं है, बल्कि उनकी मजबूरी बन गई है। सरदार पटेल मार्ग पर स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वाले ठिकाने पर भी इस बंगले की चर्चा हुए बिना नहीं रहती। चूंकि इस ठिकाने से निकलने वाली पर्ची ही काम की होती है, बाकी सारी मेहनत बेकार ही निकलती है। जब से भर्ती वाले महकमें में अपॉइंटमेंट हुए हैं, तब से लाइन में लगे भाई लोगों का इस ठिकाने पर भरोसा भी बढ़ गया है। लेकिन ठिकाने के ठिकानेदार भी कम नहीं हैं, तीन दशक तक वंशावली खंगालने के बाद ही पर्ची बनाते हैं, बाकी तो चिंतन-मंथन और बैठक में ही टाइम पास करते हैं।</p>
<p><strong>एक जुमला यह भी :</strong></p>
<p>सूबे में इन दिनों एक जुमला जोरों पर है। जुमला भी छोटा-मोटा नहीं बल्कि रैफरी को लेकर है। रैफरी भी और किसी दल का नहीं बल्कि 140 साल पुरानी हाथ वाली पार्टी का है। इंदिरा गांधी भवन में बने हाथ वालों के ठिकाने पर भी हार्डकोर वर्कर्स में रोजाना इस जुमले की चर्चा हुए बिना नहीं रहती। जुमला है कि इस पार्टी में रैफरी बनने के लिए कई भाई लोग हाथ-पैर मार रहे हैं, लेकिन उनकी पार पडते नजर नहीं आ रही। चूंकि जब तक जोधपुर वाले भाई साहब रैफरी बने हुए है, तब तक सपने देखना बेकार है। भाई साहब अपनी जादूगरी से फैसला बदलने की सोचने वालों का मन ही बदलने में माहिर हैं, नहीं मानों तो अब तक का पिछला इतिहास खंगाल कर देख लो।</p>
<p><strong>-एल. एल. शर्मा</strong><br /><strong>(यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Sep 2025 11:27:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जानें राज काज में क्या है खास </title>
                                    <description><![CDATA[सूबे की सबसे बड़ी पंचायत के सरपंच साहब ने शांंति के लिए इस बार भी कोई कसर नहीं छोड़ी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/know-what-is-special-in-raj-kaj/article-127550"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/rajkaj.png" alt=""></a><br /><p><strong>नहीं दिखा असर :</strong></p>
<p>सूबे की सबसे बड़ी पंचायत के सरपंच साहब ने शांंति के लिए इस बार भी कोई कसर नहीं छोड़ी, मगर शांति है कि आने का नाम ही नहीं लेती। शांति से पंचायत करने और मानसून सत्र में मीटिंग्स के रिकार्ड बनाने के लिए अजयमेरु वाले भाई साहब ने बिल्डिंग के कई वास्तु दोष दूर करने के साथ ही रंग तक भी बदलवाया था, पर मामला उलटा हो गया। और तो और जिन अपनों से उनको ज्यादा उम्मीद थी, वो ही बाईं ओर बैठने वाले विपक्ष से ज्यादा उछल कूद करते नजर आए। परेशान होकर सरपंच साहब ने बात ऊपर तक भी पहुंचाई, पर ऊपरवाले भी बेबस नजर आए। अब भाई साहब को कौन समझाए कि इसमें बेचारों की कोई गलती नहीं है, दिल्ली वालों की नजर में आने के लिए यह सब करना उनकी मजबूरी है। तभी तो आसन की रूलिंग से सबसे पहले पेट में दर्द उन्हीं लोगों को  होता है।</p>
<p><strong>अब आस नवरात्रों से :</strong></p>
<p>सूबे में भगवा वाले भाई लोगों की नजरें अब सोमवार से शुरू होने  वाले नवरात्रों पर टिकी है। टिके भी क्यों नहीं, उन बेचारों को पूरी आस है कि नौ माताओं के आशीर्वाद से स्टेट वर्किंग कमेटी की सही लिस्ट जरूर आएगी। अब तक वायरल हुई फर्जी लिस्ट से बधाइयां ले चुके कुछ भाई लोगों की नींद तो उड़ी हुई है, मगर उनको भी आस है। सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के ठिकाने के ठिकानेदार सुमेरपुर वाले भाई साहब को भी पूरी आस है कि इस बार के नवरात्रों में उनको टीम तो मिल ही जाएगी। तभी तो भाई साहब के हाव-भाव और चाल-ढाल की हार्ड कोर वर्कर्स में चर्चा हुए बिना नहीं रहती, चूंकि कइयों का अभिवादन स्वीकार करते समय उनका मुस्कराने का तरीका तक बदल जाता है।</p>
<p><strong>हुनर हाईजैक का :</strong></p>
<p>किसी भी मंच को कैसे हाइजैक किया जाए, उसका भी एक हुनर होता है और इसे सीखने के लिए पसीने बहाने के साथ कपड़े तक फड़वाने पड़ते हैं। यह हर किसी की बस की बात भी नहीं है। बोतल वाली पार्टी में इस हुनर के लिए झुंझुनूं जिले से ताल्लुक रखने वाले राजेन्द्र जी भाई साहब का कोई मुकाबला नहीं। उनकी इस कला को सीखने के लिए कइयों ने कोशिश भी की, मगर उनकी पार नहीं पड़ी। अब देखो ना, पिछले दिनों पिंकसिटी में राज के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर बारां जिले वाले मीनेश वंशज ने दिन-रात पसीने बहाए। और तो और बकरियां तक भी साथ लाए। कर्टिसी के नाते झुंझुनूं वाले राजेन्द्र जी और नागौर वाले हनुमानजी को फोन भी खुड़काया। दोनों का जवाब सुनकर एक रात तो चैन से भी सोए। लेकिन दूसरे दिन झुंझुनूं वाले भाई साहब अपने हुनर से इस मंच को ऐसे हाईजैक किया कि दिन रात पसीने बहाने वाले बारां वाले मीनेश वंशज बगल में खड़े नजर आए। उनकी समझ में नहीं आ रहा कि जो भाई साहब रात को सैकड़ों मील दूरी का बहाना बना रहे थे, वो अचानक मंच तक कैसे पहुंच गए। अब उनको कौन समझाए कि बैण्डबाजा अच्छा हो तो पैरो को कोई नहीं रोक सकता। इसको समझने वाले समझ गए, ना समझे वो अनाड़ी है।</p>
<p><strong>-एल. एल. शर्मा</strong><br /><strong>(यह लेखक के अपने विचार हैं।)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Sep 2025 11:01:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जानें राज काज में क्या है खास </title>
                                    <description><![CDATA[सूबे में इन दिनों एक बड़े भाई साहब की नाराजगी को लेकर काफी चर्चा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/know-what-is-special-in-raj-kaj/article-126884"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/rajkaj.png" alt=""></a><br /><p><strong>चर्चा में नाराजगी :</strong></p>
<p>सूबे में इन दिनों एक बड़े भाई साहब की नाराजगी को लेकर काफी चर्चा है। चर्चा से दोनों बड़े दलों के ठिकाने भी अछूते नहीं हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के ठिकाने पर है। चूंकि नाराज होने वाले भाई साहब भी भगवा से ताल्लुक रखते हैं। राम मंदिर वाले सूबे के बाशिन्दे भाई साहब की राशि भी तुला है। ठिकाने पर आने वाले हार्ड कोर वर्कर्स में चर्चा है कि भाई साहब का जब भी मरु भूमि पर पगफेरा होता है, तो नाराज हुए बिना नहीं रहने के पीछे कोई न कोई राज है। राज का काज करने वालों की मानें, तो भाई साहब के कान इतने कच्चे हैं कि अटारी वाले भजन जी को पसंद नहीं करने वाले लोग लाग लपेट लगाकर कुछ भी परोसते हैं, तो उन पर भरोसा जताते समय न तो आगा सोचते हैं और नहीं पीछा।</p>
<p><strong>लिफाफे ने उड़ाई नींद :</strong></p>
<p>सूबे में इन दिनों हाथ वाले कई भाई लोग एक बंद लिफाफे को लेकर कई तरह की अटकलें लगा रहे हैं। लिफाफा भी छोटा-मोटा नहीं बल्कि लाल किले वाली नगरी की सैर कर आया है। इस लिफाफे ने कई भाई लोगों की नींद भी उड़ा रखी है और बेचारे दुबले तक हो गए। उनके हाव भाव और चाल ढाल तक बदल गई। इंदिरा गांधी भवन में बने हाथ वालों के ठिकाने पर लिफाफा खुलने ही वाला था कि, ऊपर से आए फरमान ने कइयों के अरमानों पर पानी फेर दिया। सूबे के सदर ने जैसे तैसे करके अपनी नई टीम की लिस्ट फाइनल करवाई थी, लेकिन उनके अगल-बगल वाले ही भारी पड़ गए और उस पर ब्रेक लगवा दिए। अब यह लिफाफा बीस दिनों से आलमारी की शोभा बन कर बंद है।</p>
<p><strong>अब बकरियों का सहारा :</strong></p>
<p>सूबे में गुजरे जमाने में हाथी और घोड़ों का सहारा तो बहुत से लोगों ने लेकर अपनी नेतागीरी चमकाई है, लेकिन इस बार बारां वाले युवा नेता ने बकरियों का सहारा लेकर सबको चौंका दिया। बकरियां भी पिंकसिटी की नहीं बल्कि कोसों दूर आदिवासियों के जिले से लाई गई हैं। कहने वाले तो कहते हैं कि ये बकरियां भी आदिवासियों की तरह भोली-भाली हैं, जो अपने नेता का इशारा मिलने पर ही मिमियाती हैं। राज का काज करने वाले भी लंच केबिनों में बतियाते हैं कि इस बार बकरियों की आड़ लेकर युवा नेता ने राज के रत्नों के पसीने तो ला दिए। अब देखना यह है कि यह बकरियां युवा नेता का ग्राफ बढाती है, या फिर उनको वैसे संघर्ष करना है, जैसे करते आए हैं।</p>
<p><strong>एक जुमला यह भी :</strong></p>
<p>सूबे में इन दिनों एक जुमला जोरों पर है। जुमला भी छोटा-मोटा नहीं बल्कि सत्ता वाली पार्टी के नेताओं की मीटिंगों से बनी दूरियों को लेकर है। जुमला है कि पीएम के बर्थ डे बुधवार से शुरू होने वाले सेवा पखवाड़े को लेकर हुई वर्कशॉप से नेताओं की दूरियों से कइयों की नींद उड़ी हुई है। उनकी नींद उड़ना भी लाजिमी है, चूंकि तीनों धड़े अपने-अपने हिसाब से काम में लगे हुए हैं। और ऐसा फर्स्ट टाइम हुआ है, जब जम्बो टीम में से 40 फीसदी लीडर्स इम्पोर्टेट वर्कशॉप से दूर रहे। इसके मायने निकालने वाले भी जोड़ बाकी और गुणा भाग करने में माथा लगा रहे हैं।</p>
<p><strong>-एल. एल. शर्मा</strong><br /><strong>(यह लेखक के अपने विचार हैं।)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Sep 2025 11:49:42 +0530</pubDate>
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                <title>जानें राज काज में क्या है खास </title>
                                    <description><![CDATA[इन दिनों सूबे की पॉलिटिक्स में सब कुछ ठीक नहीं है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/know-what-is-special-in-raj-kaj/article-125404"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/rajkaj.png" alt=""></a><br /><p><strong>इट इज पॉलिटिक्स :</strong></p>
<p>इन दिनों सूबे की पॉलिटिक्स में सब कुछ ठीक नहीं है। हर तरफ गड़बड़ ही गड़बड़ है। अब देखो न, सात जन्म तक एक साथ जीने और मरने की कसमें खाने वाले मीनेश वंशज डॉक्टर साहब और किसान पुत्र बजरंग बली के हमनाम भाई साहब के बीच पिछले दिनों जो कुछ हुआ, वह किसी से छुपा नहीं है। दोनों में इतना जोश दिखा कि लेन-देन को लेकर एक-दूसरे की पोल खोलते समय न तो आगा देखा और नहीं पीछा। चूंकि मामला श्रेय लेने से ताल्लुक रखता है। एक-दूसरे की उतारने के बाद, जब दूसरे दिन गले मिले, तो पब्लिक भी भौंचक्की हुए बिना नहीं रही। राज का काज करने वाले में चर्चा है कि सुलह कराने वालों का भी दिन का चैन और रातों की नींद उड़ी हुई थी कि कहीं दोनों में से किसी एक की भी जुबान फिसल गई तो, कहीं के भी नहीं रहेंगे। अब इस पॉलिटिक्स के सारे ड्रामे को समझने वाले समझ गए, ना समझे वो अनाड़ी है।</p>
<p><strong>मजाक पड़ा भारी :</strong></p>
<p>मजाक तो मजाक ही होता है, लेकिन कभी-कभी किसी को भारी पड़ जाता है। अब देखो न, राज के तीसरे नंबर के रत्न के बर्थ डे की तैयारियों को लेकर हुई बैठक में एक पंडित जी को किसान पुत्र का नाम लेकर मजाक करना इतना भारी पड़ गया, जिसकी उन्हें कल्पना भी नहीं थी। पिछले दिनों देश के सबसे छोटे जिले को लेकर चर्चा में आई ग्राम पंचायत में हुई बैठक में एक मंडल अध्यक्ष की मजाकिए लहजे में किसान पुत्रों को लेकर जुबान फिसल गई। तो बगल में बैठे किसान पुत्रों की आंखें लाल हुए बिना नहीं रह सकीं। अब दिन में आंखें लाल होती हंै, तो दो-दो हाथ हुए बिना भी नहीं रहते, सो किसान पुत्रों ने पंडित जी पर दो-दो हाथ करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। और तो और बीच बचाव करने आए नेताजी पर भी वर्कर्स ने अपने हाथ साफ करने में कतई कंजूसी नहीं की।  </p>
<p><strong>पैगाम से परेशान :</strong></p>
<p>हाथ वाले राजकुमार और वेटिंग पीएम के एक पैगाम से कई नेताओं की दिन का चैन और रातों की नींद उड़ी हुई है। उनके चेहरों से तो साफ लग रहा है कि इस पैगाम से उनकी नैया पार होती नजर नहीं आ रही। अब बेचारे मजबूरी में चुनाव आयोग की किताबों की तलाश में पसीने बहा रहे हैं। हांफते हुए दिन में दो बार इलेक्शन ऑफिसर की सीढ़िया चढ़ रहे हैं। राजकुमार ने भी उनके साथ ऐसी चोट की है कि सपने में भी नहीं सोच पा रहे। पिछले दिनों राजकुमार का पैगाम आया कि सूबे में शहरों और गांवों की सरकारों के चुनावों में टिकट की चाहत रखने वाले पहले एक पर्चा भरकर भेजें, जिसमें पचास सवाल सवाल भी बडेÞ रोचक है। टिकिट की चाहत में एक महीने से महंगी गाडियों में हजारों का तेल जला चुके नेताओं को राजकुमार के सवालों के जवाब के लिए अपने ही बूथ की जानकारी के लिए कईयों के हाथ-पैर जोड़ने पड रहे है। चूंकि मामला सीधा राजकुमार से ताल्लुक रखता है और जवाब भी गांधी जी की जयंती तक भेजना है।</p>
<p><strong>वे आए और चले गए :</strong></p>
<p>इन दिनों सूबे में चल रहे सियासी संकट को लेकर कई भाई लोगों के एसी कमरों में भी पसीने आ रहे हैं। वे दिन-रात दुबले हो रहे हैं। उनके चेहरों पर चिंता की लकीरे साफ दिखाई देने लगी है। गुटबाजी में फंसे भगवा वाले भाई लोगों के समझ में नहीं आ रहा कि माजरा क्या है। सरदार पटेल मार्ग पर स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के ठिकाने पर षनि को चर्चा थी कि दोनों गुजराती बंधुओं के दोनों संदेषवाहक आए और चले गए। भाई लोगों ने सूंघासांधी भी खूब की, मगर बंद कमरों में क्या हुआ, किसी को पता नहीं चला। पन्द्रह दिन पहले तक उछलकूद कर रहे एक खेमे के लोगों को सांप सूंघ गया। अब वे कानाफूसी कर रहे हैं कि जब वैष्य पुत्र राधा के मोहन को कुछ करना ही नहीं था, तो हवा गरम करने के पीछे कोई ना कोई राज जरूर है। अब उनके अच्छी तरह समझ में आ गया कि राजनीति में जो होता है, वह दिखता नहीं है और जो दिखता है, वह होता नहीं है। इसलिए दोनों वाहक आए और संदेशा देकर चले गए।</p>
<p><strong>-एल. एल. शर्मा</strong><br /><strong>(यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Sep 2025 11:08:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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                <title>जानें राज काज में क्या है खास </title>
                                    <description><![CDATA[भगवा वाले आधा दर्जन लोगों की फिर से नींद उड़ी हुई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/know-what-is-special-in-raj-kaj/article-124655"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/rajkaj.png" alt=""></a><br /><p><strong>फिर उड़ी नींद :</strong></p>
<p>भगवा वाले आधा दर्जन लोगों की फिर से नींद उड़ी हुई है। वे रात को भी चमक नींद में सोते हैं। जब भी उनके मोबाइल की घंटी बजती है, तो तुरंत भाग कर उठाते हैं। पता नहीं कब ऊपर से फरमान आ जाए। उनकी नींद उड़ाने में सबसे ज्यादा रोल हरकारों का है, जो बिना सिर पैर के भी बड़े-बड़े दावे करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। राज का काज करने वाले भी लंच केबिनों में भाई साहबों के नाम लेकर मजे लेने में कोई कंजूसी नहीं बरतते। सबसे ज्यादा नींद उन लोगों की उड़ी हुई है, जिनका नाम हरकारों ने ड्रॉप होने वाली लिस्ट में डाल रखा है। बेचारे उन भाई लोगों की हालत तो और भी खराब है, जिन्होंने सुनी-सुनाई बात पर भी नए कपड़े सिलवाने के साथ ही बधाइयां भी ले लीं। अब इन भाई लोगों को कौन समझाए कि सपने पूरे करने के लिए सिर्फ दिल्ली तक भागदौड़ ही नहीं बल्कि माया की महारत भी कम्पलसरी है।</p>
<p><strong>परेशानी लोकल लैंग्वेज :</strong></p>
<p>सूबे के कई साहब लोग इन दिनों लोकल लैंग्वेज को लेकर काफी दु:खी हैं। उनका दु:खी होना भी लाजिमी है, चूंकि उन्हें लोकल लैंग्वेज आधी पल्ले पड़ती है, आधी नहीं। बेचारे बाद में अगल-बगल वाले से पूछ कर ही अपना काम चलाते हैं। अब भाई साहब के खास रत्न भी कम नहीं हैं, वे भी साहब लोगों से चार कदम आगे हैं। पहले तो प्रेम से समझाने की कोशिश करते हैं और जब पार नहीं पड़ती दिखती है, तो अपनी लोकल लैंग्वेज का फार्मूला अपना कर काम निकालते हैं। मसखरे भी कम नहीं हैं, भाई साहब की चाल-ढाल और हाव भाव के कई मायने निकाल बाजार में परोस रहे हैं।</p>
<p><strong>पटखनी देने की होड़ :</strong></p>
<p>इन दिनों पिंकसिटी में हाथ वाले भाई लोगों में एक-दूसरे को पटखनी देने की होड़ सी मची हुई है। छुटभैया नेता भी अपने आका की ताकत का दिखावा करने में कोई कसर नही छोड़ रहे। अब देखो न, शेखावाटी वाले भाई साहब का जलवा बरकरार रखने के लिए जयपुर वाले भाई साहब को बेमन से तरजीह दी जा रही है। बीते दिनों धरना-प्रदर्शन प्रोग्राम में इन भाई साहब की सक्रियता को देख हाथ वाले भाई लोगों का हाजमा तक खराब हो गया। राज का काज करने वालों में चर्चा है कि शेखावाटी वालों के खासमखास भाई साहब की आड़ में जोधपुर वाले जादूगरजी का जादू फीका करने की तैयारी में हैं। फिलहाल उनके नजदीकी जयपुर वाले पंडितजी के लिए जाजम का एक कोना ही खाली रखा जाता है।</p>
<p><strong>एक जुमला यह भी :</strong></p>
<p>सूबे में इन दिनों एक जुमला जोरों पर है। जुमला भी छोटा-मोटा नहीं बल्कि नई पीढ़ी के नए कामों को लेकर है। जुमला है कि गुलाबीनगर में भगवा वाली पार्टी के मेष राशि वाले मुखिया लहरिया, रक्षाबंधन और नंदोत्सव के बहाने अपना जलवा दिखाने में दिन-रात एक कर रहे हैं। लेकिन इस जुगाड़ से वे पार्टी के ओल्ड वर्कर्स के गले नहीं उतर रहे। ओल्ड वर्कर भी ढिंढ़ोरा पीट रहे हैं कि अब पार्टी नई पीढी वालों की बन कर रह गई है, जिसमें वर्कर्स को काम नहीं सिर्फ सेल्फी रील और मनोरंजन वालों की जरूरत है।</p>
<p><strong>-एल. एल. शर्मा </strong><br /><strong>(यह लेखक के अपने विचार हैं।)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Aug 2025 11:07:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जानें राज काज में क्या है खास </title>
                                    <description><![CDATA[स्वतंत्रता दिवस के दिन गुलाबीनगर की बड़ी चौपड़ पर जो कुछ हुआ, उससे खाकी वालों के साथ ही हमारे दोनों दलों के नेताओं की नींद उड़े बिना नहीं रही।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/know-what-is-special-in-raj-kaj/article-123903"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/rajkaj.png" alt=""></a><br /><p><strong>परम्परा टूटने से बची :</strong></p>
<p>स्वतंत्रता दिवस के दिन गुलाबीनगर की बड़ी चौपड़ पर जो कुछ हुआ, उससे खाकी वालों के साथ ही हमारे दोनों दलों के नेताओं की नींद उड़े बिना नहीं रही। वो तो ऐनवक्त पर किसी की अक्ल काम आ गई, वरना 72 साल पुरानी परम्परा टूटे बिना नहीं रहती और कई लोग ठीकरा भी एक-दूसरे पर फोड़ने में दिन-रात एक कर देते। राज का काज करने वालों में चर्चा है कि भाई चारा बनाए रखने के लिए गुजरे जमाने में बुजुर्गों ने बड़ी चौपड़ पर दोनों नेशनल फेस्टिवल डे पर झण्डारोहण की परम्परा डाली थी। रामगंज की ओर सत्ता पक्ष तथा जौहरी बाजार के तरफ प्रतिपक्ष के लोग अपना-अपना झण्डा फहराते हैं। इस बार जल्दबाजी में उलटा-पुलटा हो गया। वो तो भला हो तुला राशि वाले नेताजी का ऐन वक्त पर गलती पकड़ कर आनन-फानन में बैकड्रॉप बदलवा दिया। वैसे भी सुमेरपुर वाले भाई साहब ने शहर वाले नेताजी के बड़बोलेपन की वजह से इस प्रोग्राम से दूरियां बना ली थी, सो डिप्टी सीएम से काम चलाना पड़ा।  </p>
<p><strong>कुछ तो गड़बड़ है :</strong></p>
<p>सूबे में भगवा वाले भाई लोगों के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। पिंकसिटी के भगवा वाले लीडर्स पर भी उसका असर दिखाई देने लगा है। पहले तो सब कुछ भीतरखाने ही चल रहा था, मगर मंगलवार को गुलाबीनगर के बिरला सभागार में जो कुछ हुआ, उससे जगजाहिर हुए बिना नहीं रहा। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में लगे बैकड्रॉप पर मेष राशि वाले नेताजी को अपनी फोटो नहीं दिखी तो वे आगबबूला हुए बिना नहीं रहे। उनके प्रतिद्वंद्वी धनु राशि वाले नेताजी ने भी अपनी बांहें चढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मामला इतना बढ गया कि शहर वाले नेताजी ने प्रोग्राम छोड़ कर जाने का ऐलान कर दिया। माजरा बिगड़ता सूबे के पूर्व सदर रहे आदर्शनगर वाले भाई साहब ने बीच बचाव कर डैमेज कंट्रोल किया, वरना सामने वालों को घर बैठे ही मुद्दा मिले बिना नहीं रहता।</p>
<p><strong>घर के भेदी की तलाश :</strong></p>
<p>सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के ठिकाने पर इन दिनों कोई घर का भेदी है, जो लंका ढहाने में लगा है। भाई लोग उसकी जोरों से तलाश में जुटे हैं, मगर पार नहीं पड़ रही। घर का भेदी भी छोटा-मोटा नहीं, बल्कि ऐसा है कि उसकी हरकतों से पार्टी की एक बार नहीं बल्कि तीन-तीन बार किरकिरी हुए बिना नहीं रही। ठिकाने पर आने वाले हार्ड कोर वर्कर्स में खुसरफुसर है कि घर के भेदी के सिर पर किसी न किसी लीडर का हाथ है, वरना पूरे इतिहास के साथ सोशल मीडिया पर लिस्ट लीक नहीं करता। पहले युवा मोर्चा, फिर जयपुर शहर और अब प्रदेश संगठन की आउट हुई लिस्ट से कइयों का पारा चढ़े बिना नहीं रहा। अब बेचारे सिंह राशि भाई साहब के पास कंफ्यूजन करार देने के सिवाय कोई चारा भी तो नहीं है।</p>
<p><strong>एक जुमला यह भी :</strong></p>
<p>सूबे में इन दिनों एक जुमला जोरों पर है। जुमला भी छोटा-मोटा नहीं बल्कि अटारी वाले भाई के डेढ़ साल के कार्यकाल से ताल्लुक रखता है। जुमला है कि भाई साहब के कार्यकाल को सफल बनाने में जुटे भाई लोगों का भी कोई सानी नहीं है। रात दिन सलाह देने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। सलाहकारों के मुताबिक सूबे में जल्द ही ऐसा पर्चा आ रहा है, जिसका टाइटल ऐसा पहली बार है। इसमें ऐसी बड़ी घटनाओं का जिक्र होगा, जो हाथ वालों के राज में घटी है और पहली बार हुई है। हमें भी भाई लोगों ने बताया के पर्चे में पेपर लीक से घूसखोरी तक की घटनाओं का हवाला होगा।</p>
<p><strong>-एल. एल. शर्मा</strong><br /><strong>(यह लेखक के अपने विचार हैं।)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Aug 2025 11:25:26 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>जानें राज काज में क्या है खास </title>
                                    <description><![CDATA[सूबे में पिछले दस दिनों से डिजायर को लेकर काफी चर्चा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/know-what-is-special-in-raj-kaj/article-123204"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/rajkaj.png" alt=""></a><br /><p><strong>चर्चा में डिजायर :</strong></p>
<p>सूबे में पिछले दस दिनों से डिजायर को लेकर काफी चर्चा है। चर्चा भी सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के ठिकाने से शुरू होकर सचिवालय होते हुए दिल्ली तक पहुंच गई। दिल्ली वाले भी समझ नहीं पा रहे कि आखिर माजरा क्या है। राज का काज करने वाले भी लंच केबिनों में बतियाते हैं कि हार्ड कोर वर्कर्स पर डिजायर भारी पड़े बिना नहीं रहती। सुशासन का दावा हर सरकार और संगठन में गूंजता जरूर है, मगर उसमें डिजायर सिस्टम आड़े आ ही जाती है। चर्चा है कि पिछले दिनों आउट हुई पिंकसिटी की वर्किंग कमेटी की लिस्ट को सही मानें, तो काम के आधार पर केवल चौथाई वर्कर्स को ही तवज्जो मिलती है, बाकी तो डिजायर पर ही टिकते हैं। अब इस डिजायर के पीछे के राज को समझने वाले समझ गए, ना समझे वो अनाड़ी है।</p>
<p><strong>मजा किरकिरा खाकी का :</strong></p>
<p>खाकी वाले बड़े साहब लोगों का मजा आए दिन किरकिरा हुए बिना नहीं रहता। कभी बड़े लोगों की बिना वजह की डांट से तो कभी अपने ही लोगों के कारनामों के कारण बहुत कुछ सुनना पडता है। अब देखो न, एसआई पेपर लीक प्रकरण में सबकुछ सही चल रहा था, मगर गुजरे जमाने के बड़े ठिकाने पर तैनात यदुवंशी राजकुमार की वजह से सारा जायका बिगड़ गया। राज का काज करने वाले लंच केबिनों में बतियाते हैं कि खाकी वाले साहब लोगों की नजरें तो जमीन से जुड़े बड़े मामलों पर टिकी थीं, मगर पिछले दिनों हुई घटनाओं ने उन पर ब्रेक लगा दिया। खाकी वाले साहब लोगों ने भी चुप्पी साधने में ही अपनी भलाई समझी, चूंकि इन दिनों मजा किरकिरा हुए बिना नहीं रहता। पीएचक्यू में भी खुसरफुसर है कि बेचारों को अपनों की वजह से ही अपनी ऐसी हालत से पहली बार सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>शहर भाजपा की तबीयत नासाज :</strong></p>
<p>इन दिनों पिंकसिटी में भगवा की हालत नासाज है। सुधार के लिए सभी तरह के डॉक्टर भी आए, मगर तबीयत है कि ठीक होने का नाम ही नहीं लेती। दिल्ली वाले बड़े डॉक्टरों की राय पर दवा-दारू का इंतजाम भी किया गया, मगर शहर की नुमाइंदी कर रही मोहतरमा हाईडोज का बहाना बना कर आड़े आ गईं, सो सुमेरपुर वाले भाई साहब को भी बैक होना पड़ा। सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के ठिकाने पर आने वाले वर्कर्स में खुसरफुसर है कि बीमारी ज्यादा गंभीर नहीं है, मगर ऐलोपैथिक और होम्योपैथिक डॉक्टरों के बीच आयुर्वेद वाले वैद्यजी बीच में कूद पड़े। यानी कि तीनों गुट अपने-अपने हिसाब से इलाज करना चाहते हैं, इसलिए किसी की भी दवा काम नहीं कर रही।</p>
<p><strong>अब सिर्फ घेवर का सहारा :</strong></p>
<p>यह बात सौ फीसदी सही है कि समय किसी का एक सा नहीं होता, कब बदल जाए, पता नहीं चलता। नेताओं के साथ ही अफसरों का भी समय बदले बिना नहीं रहता। उनकी राज से पटरी बैठ जाए, तो रोजाना मिठाई खाए बिना पार नहीं पड़ती और नहीं बैठे, तो फिर ऊपर वाला ही मालिक है। अब देखो न इन दिनों एक साहब की राज से पटरी नहीं बैठी, तो उनको पॉवरलेस कर दिया। उनसे ज्यादा पॉवर तो सैकण्ड लेवल वाले साहब के पास है। अब साहब भी समझदार हैं, सो आने वालों को घेवर खिलाकर टाइमपास करने में ही अपनी भलाई समझते हैं। साहब के अच्छी तरह समझ में आ गया कि समय बड़ा बलवान है, समय-समय की बात, कोई समय दिन बड़ा तो कोई समय रात।</p>
<p><strong>एक जुमला यह भी :</strong></p>
<p>सूबे में इन दिनों एक जुमला जोरों पर है। जुमला भी छोटा-मोटा नहीं बल्कि एक-दूसरे के कसीदे पढ़ने को लेकर है। जुमला है कि भगवा वालों के साथ ही हाथ वाले भाई लोगों ने ताव-ताव में अपने आकाओं के इतने कसीदे पढ़ दिए कि अब बेचारे अपना मुंह छिपाने के लिए जगह ढूंढते फिर रहे हैं।    </p>
<p><strong>-एल. एल. शर्मा </strong><br /><strong>(यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Aug 2025 11:03:19 +0530</pubDate>
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