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                <title>Teacher's Day - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>शिक्षक दिवस - समाज के रियल हीरो तराश रहे भविष्य</title>
                                    <description><![CDATA[अशिक्षा के भंवर में फंसी जिंदगी में शिक्षा की रोशनी बिखेर रहे गुरुजी। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/teacher-s-day-today---real-heroes-of-society-are-carving-the-future/article-125941"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/(630-x-400-px)-(2)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अज्ञानता के अंधेरे से ज्ञान की रोशनी की ओर ले जाने वाले गुरु को भारतीय संस्कृति में जो स्थान प्राप्त है, वह माता-पिता और ईश्वर को भी नहीं है। लेकिन, बदलते समय के साथ गुरु-शिष्य के संबंधों का आधार भी बदल गया। त्याग और समर्पण का भाव अब व्यापारिक हो गया। जिससे शिष्य और गुरु के बीच निष्ठा की जमीन दरकने लगी तो पैसों के तराजु पर ज्ञान तोला जाने लगा।  ऐसे माहौल में भी समाज में कुछ लोग ऐसे हैं, जो आज भी विश्वास, त्याग, समर्पण की परंपरा को अपने संघर्ष से सींच रहे हैं। उनके लिए शिक्षक दिवस है। पेश है खबर के प्रमुख अंश......</p>
<p><strong>छात्राओं को ग्रेजुएशन से बीएड करवाई</strong><br />सेवानिवृत व्याख्याता अश्वनी गौतम ने दो छात्राओं को गोद लेकर न केवल पढ़ा रहे हैं बल्कि स्वयं के खर्चे पर एमएसी बीएड व बीए-बीएड भी करवाई है। वर्तमान में दोनों छात्राओं को अध्यापक ग्रेड-1 भर्ती परीक्षा की कोचिंग भी स्वयं के खर्चें पर करवा रहे हैं। गौतम कहते हैं, वर्ष 2007 से 2012 तक अर्जुनपुरा राजकीय विद्यालय में पदस्थापित थे। वहां 9वीं कक्षा की छात्रा अर्चना (परिवर्तित नाम) अध्ययनरत थी, घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने से उनके पिता आगे पढ़ाना नहीं चाहते थे। मैंने उसके पिता से बात कर गीता को गोद लिया और एमएससी बीएड करवाई। इसी तरह वर्ष 2015 में गुमानपुरा स्कूल में ट्रांसफर हुआ तो यहां भी 9वीं कक्षा की छात्रा सीमा (परिवर्तित नाम) के पिता व भाई नहीं थे। घर की जिम्मेदारी मां पर थी। ऐसे में सीमा को गोद लेकर बीए-बीएड करवाई।  </p>
<p><strong>2000 बच्चों को किया शिक्षित, खोली नि:शुल्क कोचिंग</strong><br />बच्चों को कूड़ा-कचरा बीनते देख इंजीनियर अक्षय वैष्णव का दिल पसीज गया। उन्होंने मल्टीनेशनल कम्पनी की नौकरी छोड़ नि:शुल्क कोचिंग की नींव डाली और असहाय-अनाथ बच्चों को शिक्षित करना ही अपनी जिदंगी का मकसद बना लिया। संस्था के फाउंडर अक्षय कहते हैं, 5 जनवरी 2022 को रंगबाड़ी सर्कल के पास एवी निशुल्क कोचिंग की शुरुआत की थी। दोस्तों के साथ  बस्तियों में जाकर स्कूल न जाने वाले बच्चों को चिन्हित किया। वर्तमान में कोचिंग की दो ब्रांच हैं। जहां कक्षा 1 से 10वीं तक के बच्चों को नि:शुल्क कोचिंग देते हैं। अब तक 2000 बच्चों को शिक्षित कर चुके हैं। हाल ही में उनके कोचिंग से एक छात्र ने ईरान में आयोजित इंटरनेशनल ओलम्पियाड सिलवर मेडल प्राप्त किया। उल्लेखनीय कार्यों के लिए जिला कलक्टर द्वारा अक्षय को दो बार जिला स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है।</p>
<p><strong>टूटती शिक्षा की डोर जोड़ रहे भारत </strong><br />शिक्षा विभाग में कार्यरत सहायक प्रशासनिक अधिकारी भारत पाराशर टूटती शिक्षा की डोर जोड़ रहे हैं। वे स्वयं के खर्चे पर एक दर्जन से अधिक बच्चों को सरकारी व प्राइवेट स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। जिन बच्चों को प्राइवेट स्कूलों ने आरटीई के दायरे से बाहर कर एडमिशन देने से इंकार कर दिया, भारत ने उन्हीं बच्चों का उसी स्कूल में खुद की जेब से फीस भरकर एडमिशन कराया। वहीं, कई बच्चों की पढ़ाई-लिखाई से लेकर स्टेशनरी का खर्चा भी उठा रहे हैं। आॅफिस के बाहर मोबाइल, मैकेनिक व चाय की थड़ियों पर काम करते बच्चों को देख दिल पसीज गया। उनके अभिभावकों से बात कर स्कूल भेजने को राजी किया। जहां पैसा रूकावट बना वहां पाराशर ढाल बनकर खड़े हो गए।  </p>
<p><strong>नीट की नि:शुल्क कोचिंग दे रही अनुभूति</strong><br />कोचिंग इंस्टीटयूट में नीट-यूजी की फैकल्टी प्रोफेसर अनुभूति दीक्षित महावीर नगर विस्तार योजना में अपने आवास पर बच्चों को नि:शुल्क नीट की कोचिंग दे रही हैं। अनुभूति बच्चों को स्कूली शिक्षा के साथ गणित, बॉडी लैंग्वेज, जिंदगी जीने की कला, बातचीत करने का लहजा, कम्प्यूटर टेक्नोलॉजी और संस्कार के अलावा नैतिक शिक्षा का भी ज्ञान दे रहीं हैं। इसके अलावा बीमार बच्चों का भी खुद अपने खर्चे पर इलाज करवातीं है। अनुभूति कहतीं हैं, हर दिन हर पल, कहीं न कहीं, अशिक्षा टकरा ही जाती है। इनके जीवन में रोशनी सिर्फ शिक्षा के जरिए ही आ सकती है। </p>
<p><strong>30 बच्चों को भिक्षावृति से दूर कर पढ़ा रहीं बीना </strong><br />जिन बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए थीं, वे भिक्षा मांग रहे थे। जिसे देख शिक्षिका बीना केदावत की आंखें नम हो गई। उन्होंने इन बच्चों का जीवन संवारने को जिम्मा उठाया और अन्त्योदय फाउंडेशन मुम्बई के सहयोग से बाल मुस्कान पाठशाला की नींव डाली। शिक्षिका बीना बताती हैं, यह पाठशाला उन बच्चों के लिए है जिनके परिवार भिक्षावृत्ति और कचरा बीनने पर निर्भर हैं। यहां बच्चों को न सिर्फ पढ़ाई करवाई जाती है, बल्कि उन्हें किताबें, बैग, चप्पलें, स्टेशनरी और खेल-खिलौनों की सुविधा भी दी जाती है।</p>
<p><strong>28 साल से विद्यार्थियों की हर मोड़ पर कर रहे मदद</strong><br />राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बड़गांव के व्याख्याता मनोज भारद्वाज 28 साल से जरूरतमंद बच्चों को स्टेशनरी, गणवेश, स्वेटर, जर्सी सहित जरूरत की सभी चीजें उपलब्ध करवा रहे हैं। वहीं, बोर्ड परीक्षाओं में आने वाले टॉपर्स छात्र-छात्राओं व बोर्ड फीस समेत हर वर्ष बच्चों के विकास पर 70 से 80 हजार की राशि स्वयं खर्च करते हैं। सेवाभावी कार्यों के लिए भारद्वाज को राज्य स्तरीय पुरस्कार, भामाशाह सहित कई पुरस्कार मिल चुके हैं। भारद्वाज द्वारा बोर्ड परीक्षा में अव्वल रहे छात्र-छात्राओं का अभिभावकों के साथ सम्मान करते हैं। टॉपर विद्यार्थियों को प्रोत्साहन स्वरूप राशि भेंट करते हैं। निर्धन छात्र-छात्राओं की 12वीं बोर्ड फीस भी स्वयं जमा करवाते हैं।  </p>
<p><strong>कहानियों व संगीत से गणित को रोचक बनाया</strong><br />राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय गिरधरपुरा के शिक्षक नवाचार के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने गणित जैसे कठिन  विषयों में जटिल गणनाओं को कहानियों व संगीत के माध्यम से रोचक बनाया। जिसका फायदा बोर्ड परीक्षाओें में विद्यार्थियों को मिले 98% के रूप में देखने को मिला। उनके प्रयासों से विद्यालय में पहली बार नेशनल मीम्स मेरिट स्कोलरशिप में कक्षा 8वीं के 4 बच्चों का चयन हुआ है। दिनेश स्वयं कई शिक्षण प्रतियोगिताओं में भी अव्वल रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Sep 2025 14:51:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कियारा फिल्म इंडस्ट्री में आने से पहले प्लेस्कूल में शिक्षिका के रूप में करती थीं काम</title>
                                    <description><![CDATA[कियारा हमेशा से बच्चों की पसंदीदा रही हैं, और उनके साथ गहरा जुड़ाव रखने की क्षमता रही]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/before-coming-into-the-film-industry-kiara-worked-as-a/article-89708"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/kiara-advain.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। बॉलीवुड की जानीमानी अभिनेत्री कियारा आडवाणी फिल्मों में आने से पहले अपनी मां के प्लेस्कूल में शिक्षिका के रूप में काम करती थी। कियारा आडवाणी ने भारतीय सिनेमा में अपनी पहचान बना ली है। कियार ने अपने शानदार प्रदर्शन और करिश्माई ऑन-स्क्रीन उपस्थिति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया है। इस साल कियारा के इंडस्ट्री में 10 शानदार साल पूरे हुए हैं, और अपने बेहतरीन टैलेंट के दम पर उन्होंने अपने लिए एक अलग जगह बनाई है। उनके कुछ बेहतरीन प्रदर्शन ने उन्हें इंडस्ट्री की सबसे पसंदीदा महिला लीड में से एक बना दिया है।</p>
<p>सिनेमा में अपनी प्रसिद्धि से पहले, कियारा आडवाणी ने अपनी देखभाल और पोषण करने की स्वाभाविक क्षमता को अपनी मां के प्लेस्कूल में शिक्षक के रूप में निखारा, जहाँ उन्होंने बच्चों को नर्सरी राइम्स और बेसिक कॉन्सेप्ट्स सिखाए। इस शुरुआती अनुभव ने उनकी सहानुभूति और समर्पण को उजागर किया, जो उनके मनोरंजन उद्योग में भविष्य की सफलता की नींव बना।</p>
<p>कियारा हमेशा से बच्चों की पसंदीदा रही हैं, और उनके साथ गहरा जुड़ाव रखने की क्षमता उनके पोषण और देखभाल करने वाले स्वभाव का परिणाम है, जो उनके शिक्षक के रूप में बिताए समय से विकसित हुआ। यह गुण उनकी एक्टिंग में भी झलकता है। उनकी फिल्मों, जैसे भूल भुलैया 2 और गुड न्यूज़ में निभाए गए किरदारों ने बच्चों के साथ खास संबंध बनाया, जिससे वह युवा दर्शकों के बीच भी बेहद लोकप्रिय हो गईं।</p>
<p>इस बीच, कियारा आडवाणी को पैन-इंडियन फिल्म 'गेम चेंजर' में देखा जाएगा, जिसमें उनके साथ राम चरण और निर्देशक शंकर हैं। इसके अलावा, उनके पास कुछ बड़ी फिल्में भी हैं, जिनमें ऋतिक रोशन और जूनियर एनटीआर के साथ वॉर 2 और रणवीर ङ्क्षसह के साथ डॉन 3 शामिल हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Sep 2024 16:49:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>पीएम मोदी, शिक्षा मंत्री प्रधान ने डॉ. राधाकृष्णन को किया नमन, देशवासियों को दी शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के मौके पर उन्हें नमन किया और श्रद्धा सुमन अर्पित किए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/modi-pradhan-paid-tribute-to-dr-radhakrishnan-and-wished-the/article-89690"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/pze-(3)6.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के मौके पर उन्हें नमन किया और श्रद्धा सुमन अर्पित किए।</p>
<p>पीएम मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर शुभकामना संदेश में लिखा कि शिक्षक दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं। यह युवा मस्तिष्कों को आकार देने वाले सभी शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर है। डॉ. राधाकृष्णन को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि।</p>
<p>वहीं, शिक्षा मंत्री प्रधान ने एक्स पर लिखा कि देश के युवाओं का मार्गदर्शन कर उनके अज्ञान को दूर करने वाले सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं एवं प्रख्यात शिक्षाविद, पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन। शिक्षक केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन के सच्चे अर्थों से हमें परिचित कराकर अपने विपुल ज्ञान से हमारे जीवन को सार्थक दिशा प्रदान करते हैं। आइए, शिक्षक दिवस के अवसर पर अपने शिक्षकों का सम्मान करते हुए हम सभी उनके द्वारा दिखाए गए सतमार्ग पर चलने का संकल्प लें।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि डॉ. राधाकृष्णन का जन्म 05 सितंबर 1888 में तत्कालीन मद्रास प्रेसीडेन्सी के चित्तूर जिले के तिरूत्तनी ग्राम में तेलुगुभाषी ब्राह्मण परिवार हुआ था। डॉ. राधाकृष्णन पहले उपराष्ट्रपति और फिर 1962 में देश के दूसरे राष्ट्रपति बने थे। डॉ. राधाकृष्णन 1962 में जब राष्ट्रपति बने और उनका जन्मदिन आया, तो  इस मौके पर उनके कुछ छात्र उनसे मिलने पहुंचें और उनका जन्मदिन मनाने का अनुरोध किया। इस पर डॉ. राधाकृष्णन ने उन्हें सुझाव दिया कि उनका जन्मदिन मनाने का सबसे अच्छा तरीका इस दिन को शिक्षकों को समर्पित करना है और इस तरह डॉ. राधाकृष्णन के एक विचार से भारत में शिक्षक दिवस की शुरुआत हुई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Sep 2024 14:51:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title> सिल्वर स्क्रीन पर शिक्षक के किरदार को दर्शकों ने दिया भरपूर प्यार और सम्मान</title>
                                    <description><![CDATA[सिल्वर स्क्रीन पर शिक्षक के किरदार को हमेशा से दर्शकों का भरपूर प्यार और सम्मान मिलता रहा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/the-audience-gave-a-lot-of-love-and-respect-to/article-89618"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/1rtrer-(4)4.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। सिल्वर स्क्रीन पर शिक्षक के किरदार को हमेशा से दर्शकों का भरपूर प्यार और सम्मान मिलता रहा है, क्योंकि शिक्षक के बिना राष्ट्र के विकास की परिकल्पना नहीं की जा सकती है। वर्ष 1954 में प्रदर्शित फिल्म जागृति से लेकर हाल में वर्ष प्रदर्शित फिल्म 'सुपर 30' तक में शिक्षक के दमदार किरदार को रूपहले पर्दे पर पेश किया गया है।</p>
<p>व्यक्ति के जीवन में माता पिता के बाद यदि सर्वाधिक प्रभाव किसी अन्य का होता है तो वह निश्चित रूप से शिक्षक ही है जो माता पिता की तरह निस्वार्थ भाव से अपने छात्रों को जीवन की कठिनाइयों से लड़ने की राह दिखाता है। वर्ष 1954 में प्रदर्शित फिल्म 'जागृति' संभवत: पहली फिल्म थी, जिसमें शिक्षक और छात्र के रिश्तों को खूबसूरती के साथ रूपहले परदे पर दिखाया गया था। फिल्म में अभि भट्टाचार्य ने शिक्षक की भूमिका निभाई थी। इस फिल्म में संगीतकार हेमंत कुमार के संगीत निर्देशन में कवि प्रदीप का रचित और उनका ही गाया गीत 'आओ बच्चों तुम्हें दिखाये झांकी हिंदुस्तान की' बेहद लोकप्रिय हुआ था।</p>
<p>वर्ष 1955 में राजकपूर के बैनर तले बनी 'श्री 420' हालांकि प्रेम कथा पर आधारित फिल्म थी लेकिन इसमें अभिनेत्री नरगिस ने ऐसी आदर्श शिक्षिका की भूमिका निभाई थी जो बच्चों को सच्चाई का पाठ पढ़ाती है। इस फिल्म में उनपर फिल्माया यह गीत 'इचक दाना बिचक दाना' श्रोताओं मे आज भी लोकप्रिय है।</p>
<p>वर्ष 1968 में प्रदर्शित फिल्म 'पड़ोसन' में हास्य अभिनेता महमूद संगीत शिक्षक की भूमिका में दिखाई दिये थे जो अभिनेत्री सायरा बानो को संगीत सिखाते हैं। वर्ष 1972 में प्रदर्शित फिल्म 'परिचय' में भी शिक्षक और छात्रों के बीच के संबध को बेहद खूबसूरती के साथ दिखाया गया। फिल्म में जितेन्द्र ऐसे शिक्षक की भूमिका में थे जो एक घर में बच्चों को पढ़ाने के लिये नियुक्त किये जाते है लेकिन बच्चें अपनी शैतानी से उन्हें अक्सर परेशान करते है जितेन्द्र हिम्मत नहीं हारते और वह अंतत: सभी बच्चों को सही राह पर ले आते है।</p>
<p>वर्ष 1974 में प्रदर्शित फिल्म 'इम्तिहान' में शिक्षक और छात्रों के बीच की राजनीति को रूपहले पर्दे पर दिखाया गया। इस फिल्म में विनोद खन्ना ने प्रोफेसर की भूमिका निभायी जो छात्रों को सीधे रास्ते पर चलने के लिये प्रेरित करते है। महानायक अमिताभ बच्चन ने कई फिल्मों में शिक्षक की भूमिका निभाई। इन फिल्मों में संजय लीला भंसाली की फिल्म 'ब्लैक' खास तौर पर उल्लेखनीय है। फिल्म में अमिताभ बच्चन ऐसे सनकी शिक्षक की भूमिका में दिखाई दिये जो मानसिक रूप से विक्षिप्त लड़की को पढ़ाने के लिये नियुक्त किये जाते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Sep 2024 14:38:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दी शिक्षक दिवस पर दी प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री  भजनलाल शर्मा ने शिक्षक दिवस (5 सितम्बर) के अवसर पर प्रदेश के सभी शिक्षकों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/chief-minister-bhajanlal-sharma-extended-best-wishes-to-the-people/article-89608"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/cm-bhajan-lal-sharma.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री  भजनलाल शर्मा ने शिक्षक दिवस (5 सितम्बर) के अवसर पर प्रदेश के सभी शिक्षकों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।</p>
<p>शर्मा ने कहा कि शिक्षक विद्यार्थी के जीवन में ज्ञान का प्रकाश फैलाकर उन्हें अपने उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करने के लिए प्रेरित करते हैं। शिक्षक वह प्रकाश पुंज है जिससे पूरा देश और समाज आलोकित होता है। उन्होंने कहा कि समाज में अच्छे नागरिक तैयार करने का महत्वपूर्ण कार्य शिक्षक ही करते हैं।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर युवाओं का आह्वान किया कि वे अपने गुरुजनों के प्रति श्रद्धा एवं सम्मान की महान भारतीय परंपरा को और अधिक मजबूत बनाएं।</p>
<p><strong>जैवलिन थ्रो स्पर्धा में अजीत सिंह एवं सुंदर गुर्जर को पदक जीतने पर दी बधाई<br /></strong>इसी तरह मुख्यमंत्री ने पेरिस पैरालंपिक-2024 में पुरूष जैवलिन थ्रो (एफ-46) श्रेणी में रजत पदक जीतने पर अजीत सिंह को तथा कांस्य पदक जीतने पर सुंदर गुर्जर को बधाई दी। सीएम ने कहा कि हमारे प्रतिभावान खिलाड़ियों की इस उपलब्धि से देश-प्रदेश का नाम विश्व पटल पर रोशन हुआ है। उनकी इस कामयाबी से युवा खेल प्रतिभाओं को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Sep 2024 18:20:50 +0530</pubDate>
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                <title>वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से शिक्षक दिवस की तैयारी, शिक्षा मंत्री ने दी शिक्षक दिवस की अग्रिम बधाई</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा राज्य स्तर पर शिक्षकों का सम्मान करेंगे ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/preparation-for-teachers-day-through-video-conference-education-minister-congratulated/article-89556"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/1rtrer-(11)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने प्रदेश के शिक्षकों को शिक्षा दिवस की अग्रिम बधाई दी है। दिलावर शिक्षा संकुल में आयोजित वीसी के माध्यम से संयुक्त निदेशक, स्कूल शिक्षा, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी और पदेन जिला परियोजना समन्वयक, समसा, जिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय) माध्यमिक तथा प्रारम्भिक, प्राचार्य, डाईट, अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक, समसा, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी और पदेन ब्लॉक संदर्भ केन्द्र प्रभारी, समसा, पंचायत प्रारम्भिक शिक्षा अधिकारी, शहरी संकुल प्रारम्भिक शिक्षा अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे।</p>
<p>उन्होंने 5 सितम्बर को आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह के लाइव कार्यक्रम में अधिक से अधिक शिक्षकों को जोड़ने के लिए कहा। उन्होंने बताया कि 5 सितम्बर को ही प्रतिभावान विद्यार्थियों को टेबलेट वितरित किए जाएंगे। </p>
<p>उन्होंने एक से 15 सितम्बर तक आयोजित स्वच्छता पखवाडे की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि अच्छे स्वास्थ्य के लिए स्वच्छता जरूरी है। यह कार्यक्रम किसी पखवाड़े तक सीमित न रहकर दिनचर्या का हिस्सा होना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने हरियालो राजस्थान कार्यक्रम के अन्तर्गत 7 जिलों द्वारा निर्धारित लक्ष्य से अधिक पौधारोपण करने की तहे दिल से प्रशंसा की। सवाई माधोपुर में 146.28 प्रतिशत, जयपुर में 123.89 प्रतिशत, झुंझुनू में 120.29 प्रतिशत, कोटा में 114.63 प्रतिशत, करौली में 105.16 प्रतिशत, डूंगरपुर में 103.66 प्रतिशत और दौसा में 101.21 प्रतिशत पौधारोपण हुआ। लगाए गए पौधों की देख भाल के लिए पंचायती राज विभाग का सहयोग लेने तथा प्रखर राजस्थान अभियान 9 सितम्बर से 2 अक्टूबर के दौरान विद्यार्थियों में पठन कौशल के प्रति रूचि जागृत करने के भी निर्देश दिए। जिन विद्यालयों में पेयजल की व्यवस्था नहीं है वहां पर जल जीवन मिशन के अन्तर्गत पेयजल कनेक्शन करावें। विद्यालयों तथा खेल मैदानों में किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाए। </p>
<p>वीसी के दौरान शाला स्वास्थ्य परीक्षण कार्यक्रम, शिक्षक सम्मान समारोह, शाला संबलन-विद्यालय अवलोकन, टिकिट्स समाधान, अकादमिक- उपचारात्मक शिक्षण, वर्कबुक और वर्कशीट मुद्रण और उपयोग की प्रगति की भी समीक्षा कर आवश्यक निर्देश दिए। वीसी में राज्य परियोजना निदेशक और आयुक्त अविचल चतुर्वेदी, निदेशक माध्यमिक शिक्षा  आशीष मोदी, निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा  सीताराम जाट सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Sep 2024 15:07:45 +0530</pubDate>
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