<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/semester-exams/tag-50393" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>semester exams - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/50393/rss</link>
                <description>semester exams RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>छह दिन की चांदनी फिर दो महीने अंधेरी रात</title>
                                    <description><![CDATA[हाड़ौती के आठ कॉलेजों में एक दर्जन विषयों की नहीं लगती कक्षाएं। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/six-days-of-moonlight-and-then-two-months-of-darkness/article-96453"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(6).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती के आठ राजकीय महाविद्यालय शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। सेमेस्टर परीक्षाएं दिसम्बर माह में होनी हैं लेकिन एक दर्जन से अधिक विषयों की कक्षाएं नियमित नहीं लग रही। महत्वपूर्ण विषयों के 60 प्रतिशत से अधिक कोर्स अधूरे हैं, जिनका परीक्षा से पहले पूरे होने की उम्मीद नहीं है। ऐसे में विद्यार्थी रिजल्ट बिगड़ने के डर से तनाव से जूझ रह हैं। दरअसल, इन कॉलेजों में विषय विशेषज्ञ नहीं होने से अंगे्रजी से ज्योग्राफी तक एक दर्जन विषयों की कक्षाएं नहीं लग पाती। ऐसे में यहां 6-6 दिन के लिए कोटा गवर्नमेंट कॉलेज (रे-सेंटर) से फैकल्टी आती है, तब इन विषयों की कक्षाएं लग पाती है लेकिन 6 दिन बाद वापस कक्षाएं अगला राउंड आने तक खाली रहती हैं। </p>
<p><strong>65% से ज्यादा कोर्स अधूरा</strong><br />नाम न छापने की शर्त पर सहायक आचार्य ने बताया कि कोटा जिले के इटावा, सांगोद व रामगंजमंडी में कॉलेज में अंग्रेजी, ज्योग्राफी, भूगोल विषय के शिक्षक नहीं है। जिसकी वजह से कक्षाएं खाली रहती हैं। ऐसे में इन विषयों को पढ़ाने के लिए रे-सेंटर कोटा से वैकल्पिक तौर पर 6 दिन के लिए शिक्षक भेजे जाते हैं। वर्तमान में 30 से 35 प्रतिशत कोर्स ही पूरा हो पाया है और 65% कोर्स अधूरा है। जबकि, अगले महीने दिसम्बर तक सेमेस्टर एग्जाम होने हैं। ऐसे में परीक्षा से पहले कोर्स पूरा होना संभव प्रतित नहीं होता। </p>
<p><strong>क्या है रे-सेंटर</strong><br />आयुक्तालय ने वर्ष 2019 में रिसोर्स असिस्टेंट एंड कॉलेज विद एक्सीलेंस (रे-सेंटर) का गठन किया था। यह सेंटर  प्रदेशभर में जिले वाइज बनाया गया। कोटा में गवर्नमेंट साइंस कॉलेज रे-सेंटर का नोडल प्रभारी है। इस सेंटर से जिले के सभी सरकारी कॉलेज  जुड़े हुए हैं। सेंटर का मुख्य उद्देश्य महाविद्यालयों को साधन-संसाधन उपलब्ध करवाकर सहायता करना है। ऐसे में जहां फैकल्टी की कमी है, वहां रे-सेंटर की मदद से 6-6 दिन शिक्षक भेज शिक्षण कार्य करवाया जाता है। </p>
<p><strong>यहां इन विषयों की नहीं लगती कक्षाएं</strong><br />इटावा में राजनेतिक विज्ञान, हिन्दी, संस्कृत, सांगोद में राजनेतिक विज्ञान,  भूगोल, राजगंजमंडी में इंग्लिश, अटरू में ज्योग्राफी, अंग्रेजी, बारां गवर्नमेंट कॉलेज में इतिहास, केलवाड़ा में इंग्लिश, शाहबाद में अर्थशास्त्र सहित अन्य विषयों के शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर अन्य जिलों में चले गए। जिसकी वजह से यहां शिक्षकों के पद खाली होने से कक्षाएं नहीं लग पाती।</p>
<p>जिन महाविद्यालयों में शिक्षकों के पद रिक्त हैं, वहां शैक्षणिक व्यवस्था के लिए  प्रत्येक जिले में रे-सेंटर बनाए हुए हैं। जहां से डिमांड के अनुसार संबंधित कॉलेजों को 6-6 दिन के लिए शिक्षक उपलब्ध करवाते हैं। आरपीएससी के माध्यम से सरकार जल्द ही कॉलेजों में शिक्षक लगाएगी। उच्च शिक्षा के प्रति सरकार गंभीर है। <br /><strong>- डॉ. गीताराम शर्मा, क्षेत्रिय सहायक निदेशक, कॉलेज </strong></p>
<p>6-6 दिन के लिए फैकल्टी मिलना, समस्या का स्थाई समाधान नहीं है। परमानेंट शिक्षक मिलने चाहिए या फिर प्रतिनियुक्ति पर गए शिक्षकों की जगह विद्या संबल पर शिक्षक लगाने का प्रावधान किया जाना चाहिए। फैकल्टी के अभाव में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।<br /><strong>- अनिता वर्मा, प्राचार्य राजकीय सांगोद कॉलेज</strong></p>
<p>यहां शुरू से ही अंगे्रजी के शिक्षक नहीं है। बारां कॉलेज रे-सेंटर नोडल है, जिन्हें पत्र भी लिखे लेकिन वहां भी शिक्षकों की कमी के कारण फैकल्टी नहीं मिल पाती। ऐसे में विद्यार्थियों को सेल्फ स्टडी करनी पड़ती है।  <br /><strong>- बुद्धिप्रकाश मीणा, प्राचार्य राजकीय अटरू कॉलेज</strong></p>
<p>राजकीय महाविद्यालय इटावा में राजनेतिक विज्ञान, हिन्दी, संस्कृत विषय की कक्षाएं नहीं लग पाती। कोटा रे-सेंटर से 6-6 दिन के लिए शिक्षक आते हैं तब ही कक्षाएं लगती हैं। एक साल में 3 बार ही रे सेंटर से फैकल्टी मिल पाती है। ऐसे में इन विषयों की साल में मात्र 20 दिन ही क्लासें लग पाती है। ऐसे में कोर्स पूरा हो ही नहीं पाता। वहीं, बार-बार फैकल्टी न मांगनी पड़े, इसके लिए रे-सेंटर को नियमित शेड्यूल बनाना चाहिए। <br /><strong>- रामदेव मीणा, प्राचार्य राजकीय इटावा कॉलेज</strong></p>
<p>पिछले साल भी राजनेतिक विज्ञान की परीक्षा बिना पढ़े देनी पड़ी थी। यही स्थिति इस बार द्वितीय वर्ष में भी बनी हुई है। 15 से 20 किमी दूर से कॉलेज आते हैं लेकिन यहां पॉलिटीकल साइंस व ज्योग्राफी की कक्षाएं ही नहीं लगती।  दिसम्बर में पेपर होने वाले हैं, परीक्षा की तैयारी कैसे करें।<br /><strong>- हिमांशु नागर द्वितीय वर्ष, सांगोद</strong></p>
<p>कॉलेज में ज्योग्राफी के शिक्षक नहीं होने से क्लासें नहीं लगती। ऐसे में कॉलेज जाने की जगह कोचिंग जाना मजबूरी हो गई। परीक्षा सिर पर है, पेपर पैटर्न क्या रहेगा, यह बताने वाले भी नहीं है। कोर्स पूरा करने के लिए कोचिंग का सहारा लेना पड़ रहा है।<br /><strong>- अंजली रेगर, छात्रा सांगोद </strong></p>
<p>कोटा से 6 दिन के लिए शिक्षक आए तो ज्योग्राफी के प्रेक्टिकल हो सके। सिलेबस पूरा होना तो दूर विद्यार्थियों के लिए परीक्षा में पास होना ही चुनौती बनी हुई है। सरकार को विद्यार्थियों के हित में रिक्त सीटों पर विद्या संबल शिक्षक लगाना चाहिए। <br /><strong>- खुशी मीणा, छात्रा तृतीय वर्ष</strong></p>
<p>ग्रामीण इलाकों के कॉलेजों में शिक्षकों की कमी लंबे समय से चली आ रही है। आयुक्तालय की लापरवाही का खामियाजा पिछले साल बीए के परिणाम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को भुगतना पड़ा। कई विद्यार्थियों के सप्लीमेंट्री आई तो कुछ फेल हो गए। <br /><strong>- आशीष गोचर, अध्यक्ष, ग्रामीण छात्र संगठन सांगोद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/six-days-of-moonlight-and-then-two-months-of-darkness/article-96453</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/six-days-of-moonlight-and-then-two-months-of-darkness/article-96453</guid>
                <pubDate>Mon, 02 Dec 2024 16:00:15 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-12/257rtrer-%286%29.png"                         length="618396"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोटा विवि का मिस मैनेजमेंट : पिछला रिजल्ट तो आया नहीं, अगले सेमेस्टर की परीक्षा आ गई</title>
                                    <description><![CDATA[विद्यार्थियों में परिणाम को लेकर असमंजस्य की स्थिति बनी हुई है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mismanagement-of-kota-university--previous-result-has-not-come--next-semester-s-exam-has-come/article-89586"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/kota-vivi-ka-mismanagement---pichla-result-to-aya-nhi,-agle-semester-ki-priksha-agyi...kota-news-04-09-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा विश्वविद्यालय द्वारा पीजी-प्रथम व थर्ड सेमेस्टर का परीक्षा परिणाम 4 माह बाद भी जारी नहीं किया गया। जबकि, पीजी-सैकंड और फोर्थ सेमेस्टर की परीक्षाएं बुधवार से शुरू हो गए हैं। ऐसे में विद्यार्थी असमंजस्य की स्थिति में हैं कि पहले सेमेस्टर का परिणाम जाने बिना अगली परीक्षा की तैयारी कैसे करें। वहीं, ओल्ड स्कीम में पीजी-प्रथम और थर्ड सेमेस्टर में जिन विद्यार्थियों के बैक आई, उनके भी रिजल्ट जारी नहीं किए गए। जिसकी वजह से वह प्रदेश की अन्य यूनिवर्सिटी व कॉलेजों में एडमिशन नहीं ले पा रहे। क्योंकि, वहां टीसी व चरित्र प्रमाण पत्र मांगे जा रहे हैं। इसी तरह बीएड फाइनल ईयर के रिजल्ट भी रुके हुए हैं।</p>
<p><strong>बीएड वाले पीजी में नहीं भर पा रहे फॉर्म</strong><br />बीएड फाइनल के पेपर भी मई-अप्रेल माह में हो चुके हैं। उनके परिणाम भी जारी नहीं हुए। ऐसे में बीएड स्टूडेंट्स कॉलेजों में आयुक्तालय द्वारा चल रही पीजी प्रवेश प्रक्रिया में फॉर्म नहीं भर पा रहे। इसके अलावा ओल्ड स्कीम में जिन विद्यार्थियों के एमए, एमएससी व एमकॉम के प्रथम व थर्ड सेमेस्टर में बैक आई है, उनके भी रिजल्ट घोषित नहीं किए गए। जिसकी वजह से वह प्रदेश की अन्य यूनिवर्सिटी व कॉलेजों में एडमिशन नहीं ले पा रहे। क्योंकि, वहां टीसी व सीसी मांगा जा रहा है। जब तक रिजल्ट पूरी तरह से कम्पलीट नहीं होता तब तक कॉलेज द्वारा टीसी व चरित्र प्रमाण पत्र नहीं दिया जाता। ऐसे में विद्यार्थी परेशानियों से जूझ रहे हैं। </p>
<p><strong>पहले का पता नहीं और कल से दूसरी परीक्षा   </strong><br />गवर्नमेंट साइंस कॉलेज के  छात्रसंघ अध्यक्ष आशीष मीणा ने बताया कि एमए, एमएससी व एमकॉम प्रथम व थर्ड सेमेस्टर की परीक्षाएं 24 अप्रेल को समाप्त हुई थी। जिसके 4 माह बाद भी परिणाम जारी नहीं हुए और 4 सितम्बर से फोर्थ व 5 सितम्बर से सैकंड सेमेस्टर की परीक्षाएं शुरू हो रही है। इससे विद्यार्थी अगली परीक्षा तैयारी में रुची नहीं ले पा रहे। क्योंकि, मानसिक रूप से पहले सेमेस्टर के रिजल्ट के आधार पर ही दूसरे सेमेस्टर की तैयारी करते हैं। ऐसे में विद्यार्थियों में परिणाम को लेकर असमंजस्य की स्थिति बनी हुई है।  </p>
<p>पीजी प्रथम व थर्ड सेमेस्टर में विभिन्न विषयों के अधिकतर परिणाम जारी किए जा चुके हैं। शेष रहे सब्जेक्ट के पेपर भी जल्द जारी कर दिए जाएंगे। <br /><strong>- प्रवीण भार्गव, परीक्षा नियंत्रक, कोटा विवि</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी</strong><br />कोटा विश्वविद्यालय द्वारा पीजी प्रथम व चतुर्थ सेमेस्टर और बीए प्रथम सेमेस्टर का परिणाम जारी नहीं किया गया। जिसकी वजह से स्टूडेंट्स अगले सेमेस्टर की तैयारी ठीक से नहीं कर पा रहे। परिणाम को लेकर असमंजस्य की स्थिति में है। 18 सितंबर को एसएससी सीजीएल व सेमेस्टर कक्षाओं के पेपर टकरा रहे हैं,ज्यादातर विद्यार्थियों का सेंटर दिल्ली आया है, विद्यार्थियों में असमंजस में हैं कि वे कौनसी परीक्षा दें। विवि की लेटलतीफी से विद्यार्थी मानसिक तनाव झेल रहे हैं।  <br /><strong>- आशीष मीणा, छात्रसंघ अध्यक्ष, गवर्नमेंट कॉलेज कोटा</strong></p>
<p>परीक्षा परिणामों में गड़बड़ियां व पीजी सेमेस्टर के रिजल्ट समय पर  जारी न करना कोटा विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है। विवि प्रशासन की लेटलतीफी व लापरवाही से कई छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं के फॉर्म भरने से वंचित हो गए तो कई अन्य कॉलेजों में एडमिशन नहीं ले पा रहे। पहले सेमेस्टर का परिणाम जारी होने से पहले ही दूसरे सेमेस्टर की परीक्षा करवाना छात्रों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना है। विवि प्रशासन को अपनी कार्यशैली में सुधार करना चाहिए। <br /><strong>- रोहिताश मीणा, छात्रसंघ महासचिव, कोटा विवि </strong></p>
<p>एमएससी थर्ड सेमेस्टर बैक का रिजल्ट जारी नहीं होने से मेरा बीएड में एडमिशन नहीं हो पा रहा है। क्योंकि बीएड कॉलेज वाले माइग्रेशन व टीसी मांग रहे जो रिजल्ट जारी होने के बाद मिल पाएगा। ऐसे में साल बर्बाद होने का अंदेशा बना हुआ है। विवि को सभी रुके हुए परिणाम जल्द से जल्द जारी किए जाने चाहिए। <br /><strong>- रोहित मेरोठा, छात्र गवर्नमेंट कॉलेज कोटा </strong></p>
<p>मैं, बीएससी बीएड चतुर्थ वर्ष की एक्स छात्रा हूं।  मेरा चतुर्थ वर्ष का परिणाम जारी नहीं होने के कारण मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में एमएससी प्रथम वर्ष में प्रवेश नहीं ले पा रही हूं। यदि, समय पर परिणाम जारी नहीं हुआ तो मेरा एडमिशन नहीं हो पाएगा और साल बर्बाद हो जाएगा। विवि की लेटलतीफी के कारण परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। <br /><strong>- रोशनी मीना, छात्रा गवर्नमेंट कॉलेज </strong></p>
<p>एमए चित्रकला थर्ड सेमेस्टर का रिजल्ट जारी नहीं होने से मैं यूजीसी नेट का एग्जाम फॉर्म नहीं भर पा रहा। दिसम्बर 2022 में फर्स्ट सेमेस्टर का पेपर दिया था। जिसमें बैक आई। जून 2023 में सैकंड सेमेस्टर का एग्जाम देने के बाद दिसम्बर में हुए थर्ड सेमेस्टर के साथ पहले सेमेस्टर के बैक का पेपर दिया था। अब तक न तो बैक का परिणाम आया और न ही थर्ड सेमेस्टर का। नतीजन, यूजीसी नेट का फॉर्म भरने से वंचित रह गया। <strong>- दीपक गौड़, छात्र कोटा विवि </strong></p>
<p>मैंने एमए लोकप्रशासन प्रथम सेमेस्टर का पेपर दिया था, जिसका परिणाम तो अब तक नहीं आया लेकिन 4 सितम्बर से सैकंड सेमेस्टर की परीक्षाएं आ गई। असमंजस्य की स्थिति बनी हुई है कि प्रथम सेमेस्टर का परिणाम क्या रहेगा। पढ़ाई पर फोकस नहीं कर पा रहा हूं। <br /><strong>- आशिक मंसूरी, छात्र, कोटा विवि </strong></p>
<p>परीक्षा परिणाम में देरी के कई कारण हो सकते हैं। सेमेस्टर प्रणाली में इसका कोई फर्क नहीं पड़ता। विद्यार्थियों को पिछले परिणाम के बारे में न सोचते हुए अगले सेमेस्टर के एग्जाम की तैयारी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।<br /><strong>- प्रो. अजय विक्रम, प्राचार्य जेडीबी साइंस कॉलेज </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mismanagement-of-kota-university--previous-result-has-not-come--next-semester-s-exam-has-come/article-89586</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mismanagement-of-kota-university--previous-result-has-not-come--next-semester-s-exam-has-come/article-89586</guid>
                <pubDate>Wed, 04 Sep 2024 16:14:08 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-09/kota-vivi-ka-mismanagement---pichla-result-to-aya-nhi%2C-agle-semester-ki-priksha-agyi...kota-news-04-09-2024.jpg"                         length="644699"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        