<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/stuck/tag-5051" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>stuck - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/5051/rss</link>
                <description>stuck RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>यूएनएससी अब भी 1945 में अटका है, कुछ देश सुरक्षा परिषद में बदलाव नहीं होने देना चाहते : भारत</title>
                                    <description><![CDATA[इससे ये संगठन अब भी 1945 की स्थिति में ही है। हरीश ने नाम लिए बिना चीन पर यूएनएससी का विस्तार रोकने का आरोप लगाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/unsc-is-still-stuck--some-countries-do-not-change-in-security-council/article-95444"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/6633-copy132.jpg" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बदलाव ना होने पर कोलंबिया विश्वविद्यालय में बोलते हुए हरीश ने स्थायी सदस्यों और प्रतिद्वंद्वी देशों के प्रतिरोध की ओर इशारा करते हुए कहा कि कुछ देश यूएनएससी के विस्तार में रोड़ा अटका रहे हैं, इससे ये संगठन अब भी 1945 की स्थिति में ही है। हरीश ने नाम लिए बिना चीन पर यूएनएससी का विस्तार रोकने का आरोप लगाया।</p>
<p><strong>यूनिवर्सिटी में प्रमुख वैश्विक चुनौतियों पर प्रतिक्रिया </strong><br />भारत का तरीका विषय पर छात्रों को संबोधित करते हुए हरीश ने कहा कि सुरक्षा परिषद में बदलाव की रफ्तार धीमी है, क्योंकि कुछ देश यथास्थिति को पसंद करते हैं। वो किसी भी कीमत पर स्थायी श्रेणी में विस्तार का विरोध करते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके पड़ोसी देशों को सदस्य बनने का अवसर मिल सकता है।</p>
<p><strong>हरीश का यूएनएससी विस्तार पर बल</strong><br />हरीश ने कहा कि इस बात पर आम सहमति है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बदलाव किया जाना चाहिए। इसकी आवश्यकता है। हालांकि कई देश यथास्थिति को प्राथमिकता देते हैं, जो पहले से ही स्थायी सदस्य हैं, वे इसे खाली नहीं करना चाहते हैं। जो पहले से ही स्थायी सदस्य हैं, वे वीटो को छोड़ना नहीं चाहते हैं। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/unsc-is-still-stuck--some-countries-do-not-change-in-security-council/article-95444</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/unsc-is-still-stuck--some-countries-do-not-change-in-security-council/article-95444</guid>
                <pubDate>Thu, 21 Nov 2024 11:05:27 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-11/6633-copy132.jpg"                         length="70294"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुलिया के बहते पानी में बंद हुई स्कूल वेन</title>
                                    <description><![CDATA[कस्बेवासियों ने धक्का देकर वाहन को सुरक्षित निकाला।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/the-school-van-got-stuck-in-the-flowing-water-of-the-culvert/article-87099"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/4111u1rer-(9)5.png" alt=""></a><br /><p>सीसवाली। सीसवाली में नौनिहाल स्कूली छात्रों के जीवन के साथ कैसा खिलवाड़ किया जा रहा है। इसकी बानगी का नजारा मंगलवार को सीसवाली खाड़ी नदी की बाइपास पुलिया पर देखने को मिला। जहां पुलिया पर डेढ- दो  फीट पानी होने के बावजूद वेन चालक ने लापरवाही बरतते हुए बच्चों से भरी वेन को पुलिया पर उतार दिया गया लेकिन वेन पानी से भरी पुलिया पर थोड़ी दूर जाकर बीच में बंद हो गई। जिससे स्कूली छात्रों की सांसे मानो थम सी गई हो। बाद में आसपास के युवकों और कस्बेवासियों ने दौड़कर वेन को धक्का लगाते हुए पुलिया से पार कराया गया, तब जाकर बच्चों की जान में जान आई। </p>
<p><strong>पुलिया पर डेढ-दो फिट तक चल रही पानी की चादर</strong><br />रविवार रात्री से खाडी नदी की बाइपास पुलिया पर पानी आने से अन्ता सीसवाली मार्ग का आवागमन बन्द हो गया था। मंगलवार को दो- तीन बजे  पुलिया पर डेढ- दो फिट पानी की चादर चल रही थी। जहां स्कूल की छुट्टी होने के बाद स्कूली बच्चों को छोड़ने जाने वाली स्कूल वेन का चालक बच्चो की जान जोखिम में डालकर वेन को पुलिया पार कराया। इससे एक बडा हादसा भी घटित हो सकता था। पुलिया का नजारा देखने वाले लोगों ने दौड़कर स्कूल वेन को धक्का देकर बाहर निकाला। तब जाकर बच्चो ने राहत की सास ली। अगर कोई बड़ा हादसा हो जाता तो जिसका जिम्मेदार कौन होता!</p>
<p><strong>जान जोखिम में डालकर पानी में से निकाल रहे वाहन</strong><br />कस्बे सहित आसपास के क्षेत्र में इन दिनों झमाझम बरसात होने से खाडी नदी में उफान आने से रविवार रात्री से ही अन्ता सीसवाली मार्ग का आवागमन बन्द हो रहा था। मंगलवार साय तक खाडी नदी की बाइपास पुलिया मे लगभग डेढ- दो फिट के आसपास पानी की चादर चल रही थी। दो पहिया, चार पहिया वाहन अपनी जान जोखिम में डालकर वाहनों को निकालने में नहीं चूक रहे है। </p>
<p><strong>वाहन चालकों की लापरवाही पड़ न जाए भारी</strong><br />वहीं अन्ता की तरफ से आई सवारियों से भरी बस को चालक ने लापरवाही से पुलिया को पार कराया। बस में बैठी सवारिया अपनी सांसें थाम कर सीटों पर बैठी रही। पुलिया पार होने पर सवारियों ने राहत की सांस ली। ऐसे बस चालक की थोडी सी लापरवाही भारी पड़ सकती थी। वही स्कूल के बच्चों से भरी स्कूल वेन पुलिया के बीच में बन्द हो गई। जिससे बच्चों की सासे ऊपर नीचे होने लगी। वहीं पुलिया के पास खडे लोगों ने दौडकर वेन को धक्का देकर पानी से बाहर निकाला तब जाकर बच्चो ने राहत की सांस ली। </p>
<p><strong>हाईलेवल पुलिया का निर्माण कार्य नहीं हुआ पूरा</strong><br />सीसवाली खाडी नदी पर हाईलेवल पुलिया का निर्माण कार्य चल रहा है लेकिन वहीं अभी पुलिया का निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है। हाईलेवल पुलिया के पास वैकल्पिक रास्ते के रूप में एक बाइपास छोटी पुलिया का निर्माण किया गया है  मगर पुलिया की ऊं चाई कम होने के कारण बरसात के दिनों मे आए दिन पुलिया  डूबी रहने से आवागमन बाधित रहने से स्थानीय निवासियों सहित राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड रहा है।</p>
<p>बाहर गांव से पढ़ने आने वाले छात्रों के लिए वाहन की व्यवस्था अभिभावक ही करते है। अगर वाहन चालक द्वारा पुलिया पर पानी होने के बावजूद भी बच्चों से भरी वेन को पुलिया पार करवाई गई है तो घोर लापरवाही है। वेन चालक को पाबन्द किया जाएगा।<br /><strong>- हंसराज मीणा, प्रधानाचार्य, स्वामी विवेकानन्द राजकीय मॉडल स्कूल, सीसवाली। </strong><br /> <br />सीसवाली खाडी नदी पर हाईलेवल पुलिया का निर्माण कार्य लगातार चल रहा है। लगभग एक डेढ़ साल में पुलिया का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। उसके बाद वाहन चालकों, राहगीरों और कस्बेवासियों को इस समस्या से राहत मिल सकेगी। <br /><strong>- बसंत कुमार गुप्ता, एईएन, सार्वजनिक निर्माण विभाग, अंता। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/the-school-van-got-stuck-in-the-flowing-water-of-the-culvert/article-87099</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/the-school-van-got-stuck-in-the-flowing-water-of-the-culvert/article-87099</guid>
                <pubDate>Wed, 07 Aug 2024 16:08:00 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-08/4111u1rer-%289%295.png"                         length="516584"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुरंग में फंसे मशीन के टुकड़े निकाले, हाथ से खुदाई शुरू </title>
                                    <description><![CDATA[ एनडीएमए के सदस्य एवं सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल सय्यद अता हसनैन तथा सुरंग मामलों के तकनीकी विशेषज्ञ विशाल चौहान ने सोमवार को यहां मीडिया सेंटर में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सुरंग में खुदाई करने वाली आगर मशीन के टूटे टुकड़ों को निकाल दिया गया है ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/parts-of-the-machine-stuck-in-the-tunnel-were-removed/article-63002"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/gan-(4)1.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने कहा है कि उत्तरकाशी की सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 लोगों को बचाने के काम में बाधक बने टू्टी मशीन के टुकड़ों को निकाल लिया गया है और सोमवार शाम से वहां हाथों से खुदाई का काम शुरु हो गई है। एनडीएमए के सदस्य एवं सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल सय्यद अता हसनैन तथा सुरंग मामलों के तकनीकी विशेषज्ञ विशाल चौहान ने सोमवार को यहां मीडिया सेंटर में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सुरंग में खुदाई करने वाली आगर मशीन के टूटे टुकड़ों को निकाल दिया गया है और अब मशीन की जगह हाथों से आगे का काम शुरु कर दिया गया है।<br /><strong>छह लोगों की टीम बनाई</strong><br />उन्होंने कहा कि श्रमिकों की जान बचाना अभियान का मुख्य उद्देश्य है और इस काम में अत्यधिक सावधानी बरती जा रही है इसलिए मशीनों की जगह हाथों से खुदाई का काम शुरु किया गया है। इस काम के लिए छह लोगों की टीम बनाई गई है और 3-3 लोगों एक समय काम करेंगे। इस विकल्प में अब मशीन काम में नहीं लाई जाएगी इसलिए प्रगति की रफ्तार स्वाभाविकरूप से धीमी हो जाएगी।<br /><strong>अगले 48 घंटों में बारिश का अनुमान</strong><br />मौसम के खराब होने के अनुमान को लेकर उन्होंने कहा कि इसका बचाव के काम पर कोई असर नहीं होगा। अगले 48 घंटों में हल्की बारिश होने का अनुमान है लेकिन इससे काम प्रभावित नहीं होगी। सेना के इंजीनियर तथा अन्य इंजीनियर वहां लगातार काम की मॉनिटरिंग कर काम को आगे बढ़ाने में लगे हैं। अंदर फंसे मजूदरों से बात हो रही है और उन्हें जरूरी चीज पहुंचाई जा रही है। उन्होंने कहा कि मौके पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय मंत्री जनरल (सेनि) वीके सिंह, प्रधानमंत्री कार्यालय में प्रमुख सचिव पी के मिश्रा, गृहसचिव अजय भल्ला, उत्तराखंड सरकार के मुख्य सचिव सुखवीरसिंह संधू सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद हैं। बीआरओ के पूर्व प्रमुख डॉ हरपाल सिंह भी वहां अपनी सेवाएं दे रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/parts-of-the-machine-stuck-in-the-tunnel-were-removed/article-63002</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/parts-of-the-machine-stuck-in-the-tunnel-were-removed/article-63002</guid>
                <pubDate>Tue, 28 Nov 2023 10:32:45 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-11/gan-%284%291.jpg"                         length="332435"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बजट के अभाव में अटका अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क का निर्माण कार्य</title>
                                    <description><![CDATA[ अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में द्वितीय चरण के तहत 25 करोड़ की लागत से कई निर्माण कार्य होने हैं, जो बजट के अभाव में शुरू नहीं हो पाए। जबकि, वन्यजीव विभाग प्रशासन सरकार को कई बार प्रस्ताव भेज चुका है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-construction-work-of-abheda-biological-park-stuck-due-to-lack-of-budget/article-19978"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/budget-k-abhaav-mei-atka-abheda-biological-park..kota-news-22.8.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा के रियासतकालीन चिड़ियाघर के पिंजरों में बरसों से बंद वन्यजीव अपनी आजादी का इंतजार कर रहे हैं, जो सरकारी लेटलतीफी के कारण खत्म होता नजर नहीं आ रहा। भीषण गर्मी के बीच छोटे पिंजरों में दिन काटने को मजबूर हैं। दरअसल, अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में द्वितीय चरण के तहत 25 करोड़ की लागत से कई निर्माण कार्य होने हैं, जो बजट के अभाव में शुरू नहीं हो पाए। जबकि, वन्यजीव विभाग प्रशासन सरकार को कई बार प्रस्ताव भेज चुका है। इसके बावजूद बजट स्वीकृत नहीं हुआ। जिसके चलते एक दर्जन से अधिक वन्यजीव चिड़ियाघर से बायोलॉजिक पार्क में शिफ्ट नहीं हो पा रहे। 25 करोड़ से होने हैं द्वितीय चरण में यह कार्य अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में द्वितीय चरण के तहत 25 करोड़ की लागत से कई निर्माण कार्य होने हैं। जिनमें 31 एनक्लोजर, स्टाफ क्वार्टर, कैफेटेरिया, वेटनरी हॉस्पिटल, इंटरपिटेक्शन सेंटर, पर्यटकों के लिए आॅडिटोरियम हॉल, छांव के लिए शेड, कुछ जगहों पर पथ-वे सहित अन्य कार्य शामिल हैं। क्यों पास नहीं हो पा रहा बजट वन्यजीव अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2020-21 में जायका प्रोजेक्ट के तहत बायलोजिकल पार्क में अधूरे निर्माण कार्यों को पूरा करवाने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा था। जिस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद फिर से रिव्यू प्रस्ताव भेजे गए, वह भी स्वीकृत नहीं हुए। हाल ही में वन विभाग के शासन सचिव शिखर अग्रवाल के बायलॉजिकल पार्क निरीक्षण के दौरान समस्या से अवगत कराया था। इस पर उन्होंने जल्द ही बजट पास करवाने का भरोसा दिलाया है। पैसा स्वीकृत न होने का कारण अधिकारियों ने सरकार के पास बजट की कमी होना बताया। पर्यटकों को अखर रहा टिकट का पैसा वर्तमान में बायलॉजिलक पार्क में कुल 64 वन्यजीव हैं, जिनमें 10 मांसाहारी और 54 शाकाहारी हैं। यहां आने वाले पर्यटक 50 रुपए खर्च करने के बावजूद बब्बर शेर, टाइगर, मगरमच्छ, घड़ियाल, अजगर सहित अन्य बडे़ वन्यजीव का दीदार नहीं कर पाने से निराश होकर लौट रहे हैं। इतना ही नहीं, इलेक्ट्रिकल व्हीकल नहीं होने से लंबे ट्रैक पर पर्यटकों का पैदल घूमना मुश्किल हो रहा है। वहीं, कैफेटेरिया सुविधा नहीं होने से लोगों को चाय-नाश्ते के लिए परेशान होना पड़ता है। इसके अलावा र्प्यटकों के बैठने के लिए छायादार शेड व वाटरकूलर भी र्प्याप्त नहीं हैं। पानी के लिए भी भटकना पड़ता है। चिड़ियाघर से बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्ट नहीं हो पा रहे वन्यजीव बायोलॉजिकल पार्क के निर्माण के दौरान 44 एनक्लोजर बनने थे लेकिन प्रथम चरण में मात्र 13 ही बन पाए। जबकि, 31 एनक्लोजर अभी बनने बाकी हैं। जब तक यह एनक्लोजर नहीं बनेंगे तब तक पुराने चिड़ियाघर में मौजूद अजगर, घड़ियाल, मगरमच्छ, बंदर व कछुए सहित एक दर्जन से अधिक वन्यजीव बायलॉजिकल पार्क में शिफ्ट नहीं हो पाएंगे। हालांकि पिछले दिनों 4 ऐमु पक्षियों को चिड़ियाघर से यहां शिफ्ट किया था, जिसमें से एक नर ऐमू की अगले ही दिन मौत हो गई। प्रथम चरण में ये हुए थे कार्य प्रथम चरण के तहत पार्क में 13 एनक्लोजर बनाए गए। इसके अलावा पाथ-वे, पर्यटकों के लिए सुविधाघर, छायादार शेड, कैफेटेरिया का कार्य, जल व्यवस्था के लिए टैंक सहित फेंसिंग करवाई गई। यहां अभी तक 20 हजार पौधे लगवा चुके हैं। नहीं बना वेटनरी हॉस्पिटल वेटनरी हॉस्पिटल नहीं होने से वन्यजीवों के इलाज में परेशानी होती है। इलाज के संबंधित कुछ उपकरण बायोलॉजिकल पार्क में तो कुछ चिड़ियाघर में हैं। वन्यजीवों को यदि दवाइयां देनी हो तो यहां से दे देते हैं लेकिन आॅपरेशन या पोस्टमार्टम करना हो तो उसे करीब 16 किमी दूर चिड़ियाघर लाना होता है। ऐसे में कई बार वन्यजीवों को समय पर इलाज मुहैया करवाना काफी चुनोतिपूर्ण हो जाता है। 30 करोड़ से बना था बायोलॉजिकल पार्क एसीएफ अनुराग भटनागर ने बताया कि वर्ष 2017 में 30 करोड़ की लागत से बायोलॉजिकल पार्क का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। जिसे 2019 में पूरा किया जाना था लेकिन कोविड के 2 साल के कारण काम समय पर पूरा नहीं हो सका। इसके बाद 21 नवंबर 2021 को काम पूरा हुआ। संसाधन युक्त हॉस्पिटल बेहद जरूरी द्वितीय चरण में बेहद महत्वपूर्ण काम होने थे, जो बजट के अभाव में नहीं हो सके। जब तक साधन-संसाधनयुक्त हॉस्पिटल नहीं होगा तब तक चिड़ियाघर हो या बायलॉजिकल पार्क इनके होने का उद्देशय पूर्ण नहीं होगा। वन्यजीवों के इलाज के लिए अभी कामचलाऊ व्यवस्था कर रखी है लेकिन इमरजेंसी पड़ने पर बड़ी परेशानी हो सकती है। - डॉ. आलोक गुप्ता, पूर्व डीएफओ वन्यजीव विभाग कोटा सरकार को दो-तीन बार प्रस्ताव भेजे हैं लेकिन बजट स्वीकृत नहीं हुआ। पिछले दिनों शासन सचिव के समक्ष भी मामला रखा था, अभी 31 एनक्लोजर बनने शेष हैं। इस कारण चिड़ियाघर से वन्यजीवों को बायोलॉजिक पार्क में शिफ्ट नहीं कर पा रहे। वहीं, स्टाफ क्वार्टर, आॅडिटोरियम, इंटरपिटेक्शन सेंटर बनना पर्यटन की दृष्टि से जरूरी है। - अनुराग भटनागर, सहायक उपवन संरक्षक अभेड़ा बायॉलोजिकल पार्क</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-construction-work-of-abheda-biological-park-stuck-due-to-lack-of-budget/article-19978</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-construction-work-of-abheda-biological-park-stuck-due-to-lack-of-budget/article-19978</guid>
                <pubDate>Mon, 22 Aug 2022 16:44:45 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-08/budget-k-abhaav-mei-atka-abheda-biological-park..kota-news-22.8.2022.jpg"                         length="61516"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दो विभागों के बीच फंसी हजारों यात्रियों की जान</title>
                                    <description><![CDATA[ एनएच-52 पर मुकुंदरा वन्यजीव क्षेत्र में 8 किलोमीटर का सफर मौत का सफर बन चुका है। दो विभागों में उलझे हुए इस आठ किलोमीटर के सफर में तीन ऐसे ब्लैक स्पॉट्स हैं जहां ना सिर्फ आए दिन जाम लगता रहता है बल्कि लगातार दुर्घटनाएं होती रहती हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/thousands-of-passengers-stuck-between-two-departments/article-16777"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/do-vibhago-ke-beech-yatriyo-ki-jaan-...ramganjmandi-news-kota-29.7.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>रामगंजमंडी। एनएच-52 पर मुकुंदरा वन्यजीव क्षेत्र में 8 किलोमीटर का सफर मौत का सफर बन चुका है। दो विभागों में उलझे हुए इस आठ किलोमीटर के सफर में तीन ऐसे ब्लैक स्पॉट्स हैं जहां ना सिर्फ आए दिन जाम लगता रहता है बल्कि लगातार दुर्घटनाएं होती रहती हैं। लेकिन दो विभागों के बीच फंसे इस आठ किलोमीटर के क्षेत्र में अधिकारियों की नजर में इंसानों की जा रही जानों की कोई कीमत नहीं है। दोनों विभाग एक दूसरे पर जिम्मेदारी डाल कर पल्ला झाड़ रहे हैं। रेलवे लाइन के नीचे बने सिंगल लेन मौखे में बरसात के कारण हुए गड्ढों में रविवार को कोटा स्टोन से भरे ट्रक फंस जाने के कारण 3 किलोमीटर लंबा जाम लग गया था। जिसमें एंबुलेंस, लंबी दूरी की सवारी, बसें, कई यात्री और वाहन फंस गए थे। निर्माण विभाग ने सड़क सुधार की जिम्मेदारी नहीं निभाई तो मोड़क पुलिस ने अपने व्यक्तिगत प्रयासों से जेसीबी का इंतजाम कर तुरंत प्रभाव से इन गड्ढों को भरवा कर सुरंग की सड़क को समतल करवाया। जिससे कि उन गड्ढों में अन्य कोई वाहन फंस कर जाम के हालात नहीं बनें। लगातार दुर्घटनाएं एवं जाम की शिकायतें आने के बाद भी निर्माण विभाग अधिकारी सड़क सुधार की जवाबदेही एक दूसरे पर डालते दिखे। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यह 8 किलोमीटर वन क्षेत्र का मार्ग एनएच का बताता है और एनएच विभाग कहता है कि मुकुंदरा वन क्षेत्र में बने इन तीन ब्लैक स्पॉट का समाधान एनएचएआई को ही करना है। दोनों के बीच जनता और वाहन चालक दुर्घटना और जाम से परेशान हैं। <br /><br /><strong>खतरनाक हैं तीन ब्लैक स्पॉट</strong><br />एनएच-52 पर मुकुंदरा वन्यजीव क्षेत्र की 8 किलोमीटर सड़क में अमझार नदी पर संकरी पुलिया,  रेलवे लाइन के नीचे दरा की नाल, जिसे संकड़ी सुरंग भी कहते हैं, दरा वायडक्ट ऊंची पुलिया के नीचे की संकड़ी सिंगल रोड़। यहां 500 मीटर की दूरी पर ही वाहन चालकों को दो बार रेलवे लाइन के नीचे से जहां सिंगल रोड बना हुआ है, निकलना पड़ता है। दोनों स्थानों पर दोनों साइड में सड़क 90 डिग्री पर घूमती है। जिससे सामने से आने वाले वाहन नजर नहीं आते। यह तीन ब्लैक स्पॉट हंै, जहां आए दिन वाहन दुर्घटनाग्रस्त होते हैं। यहां लगने वाले रोज-रोज के जाम से मरीजों यात्रियों एवं वाहन चालकों को भारी मुसीबत का सामना करना पड़ता है।<br /><br /><strong>एनएच के अधिकारियों ने ली जिम्मेदारी</strong><br />अब एनएच के अधिकारियों ने इस सड़क की जिम्मेदारी ली है। देखना है कि वह कब और किस तरह इन तीन ब्लैक स्पॉट का समाधान कर इस सड़क को सुरक्षित बनाकर यात्रियों और वाहन चालकों को राहत प्रदान करते हैं।<br /><br /><strong>स्थायी समाधान का दिया आश्वासन</strong><br />भाजपा प्रदेश कार्य समिति के पूर्व सदस्य वीरेंद्र जैन ने एनएच चीफ इंजीनियर डीआर मेघवाल से समस्या को लेकर बात की। जिस पर चीफ इंजीनियर ने  एनएच के अधीक्षण अभियंता राजीव अग्रवाल को  समस्या के समाधान की दिशा में काम करने के निर्देश जारी किए।<br /><br /><strong>पनप रहा है जनाक्रोश</strong><br />यातायात को सुचारू रूप से चलवाना, जाम खुलवाने से लेकर सड़क के गड्ढे भरवाने तक का काम पुलिस कर रही है। जिम्मेदार निर्माण विभाग लंबे समय से इस सड़क की उपेक्षा कर रहे हैं।  आज यह सड़क चार लेन के रूप में विकसित हो चुकी है। इसके पूर्व यह टू लेन और इससे पूर्व एक लेन सड़क हुआ करती थी। चार लेन होने से इस पर वाहनों की रफ्तार और संख्या बढ़ गई है। तेजी से आते वाहन तीन जगह सिंगल रोड होने से फंसते और आपस में टकराते हैं।<br /><br /><strong>इनका कहना है......</strong><br /><br />एक लाइन से फोरलेन तक का सफर पूरा करने के बाद भी मुकुंदरा वन क्षेत्र के यह तीन ब्लैक स्पॉट नहीं सुधारे गए हैं। निर्माण विभाग की लापरवाही से क्षेत्र के लोगों में आक्रोश है।<br /><strong>-वीरेन्द्र जैन, पूर्व सदस्य, प्रदेश कार्यसमिति, भाजपा</strong><br /><br />दरा की नाल, अमझार पुलिया व रेल ब्रिज ये तीन ब्लैक स्पॉट हमारे अधीन हैं। जहां रिपेयरिंग, साइन बोर्ड वगैरह लगाकर सुरक्षित यात्रा के इंतजाम किए हुए हैं। इनमें निर्माण करने में मुकन्दरा वन क्षेत्र की इजाजत नहीं मिल रही है। क्योंकि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने पीडीआर बनाई थी, जिसमें वन क्षेत्र ने अनुमति दी थी। बाद में पुरात्तव विभाग ने सहमति नहीं दी। अब इसका विकल्प तलाश किया जा रहा है।<br /><strong>-राजीव अग्रवाल, अधीक्षण अभियन्ता, एनएच, कोटा</strong><br /><br />8 किलोमीटर वन क्षेत्र का मार्ग एनएच के पास है। इस पर उन्हें ही कार्यवाही करनी है। चार लेन सड़क मार्ग के साथ इस 8 किलोमीटर क्षेत्र की सड़क के प्रस्ताव भी हमने बनाए थे। लेकिन उसमें बहुत सारी बाधाएं हैं। जिससे वह काम आगे नहीं बढ़ पाया। अब हम वैकल्पिक मार्ग पर विचार कर रहे हैं। लेकिन मुकुंदरा वन क्षेत्र में बने इन तीन ब्लैक स्पॉट का समाधान एनएच को ही करना है। <br /><strong>-जेपी गुप्ता, परियोजना निदेशक, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण</strong><br /><br />एनएच-52 पर मकुंदरा वन्य जीव क्षेत्र की 8 किमी की सड़क हमारे पजेशन में है। सुदृढ़ सड़कों से वाहन चालक शीघ्र एवं सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुंचें, यह हमारी जवाबदेही है। इसमें किसी भी स्तर पर कोई कोताही नहीं होनी चाहिए।<br /><strong>-डीआर मेघवाल, चीफ इंजीनियर, एनएच, जयपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/thousands-of-passengers-stuck-between-two-departments/article-16777</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/thousands-of-passengers-stuck-between-two-departments/article-16777</guid>
                <pubDate>Fri, 29 Jul 2022 15:07:44 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-07/do-vibhago-ke-beech-yatriyo-ki-jaan-...ramganjmandi-news-kota-29.7.2022.jpg"                         length="51878"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दो पंचायतों की खींचतान में अटका विकास कार्य</title>
                                    <description><![CDATA[चौमहला कस्बे का वार्ड नम्बर 13 दो पंचायतों के सीमांकन में होने के कारण इसका समुचित विकास नहीं हो पा रहा है। यहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/development-work-stuck-in-the-tussle-of-two-panchayats/article-13659"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/2-panchayato-ki-kheechtaan-mei-atka-vikas-karya.jpg" alt=""></a><br /><p>चौमहला। चौमहला कस्बे का वार्ड नम्बर 13 दो पंचायतों के सीमांकन में होने के कारण इसका समुचित विकास नहीं हो पा रहा है। यहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। यहां कुछ इलाके में जमीन ग्राम पंचायत तलावली की है। यहां के रहवासी चौमहला निवासी कहलाते है तथा लोगों के राशन कार्ड व मतदाता परिचय पत्र भी चौमहला के बने हुए है।  कस्बे का वार्ड 13 नई आबादी,शनि मंदिर रोड, विलावली रोड,सिटी पैलेस क्षेत्र तलावली ग्राम पंचायत की जमीन पर बसा है, जबकि यह क्षेत्र ग्राम पंचायत चौमहला में आता है। <br /><br />ग्राम पंचायत तलावली का गांव विलावली तथा चौमहला दोनो एक हो चुके है। विलावली रोड पर सड़क के दोनों ओर दुकानें व घर बनकर काफी बस्ती हो गई तथा काफी चहल पहल रहने लगी है। कहने को तो यह जमीन तलावली ग्राम पंचायत की है , राजस्व रिकार्ड भी तलावली ग्राम पंचायत का दर्शाता है, लेकिन चौमहला की बढ़ती जनसंख्या व व्यापार व्यवसाय के उद्देश्य से यहां बड़ी संख्या में मकान व दुकानेंं बन गई तथा चौमहला कस्बे का ही हिस्सा माना जाता है। लेकिन इस क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, यहां पेयजल का संकट है। यहां चौमहला जलदाय विभाग ने पाइप लाइन नहीं बिछा रखी है। गलियों में सड़क,नालियों का अभाव है। बरसात में लोगों को काफी परेशानी आती है। वर्तमान में गन्दा पानी रास्तो में बहता रहता है, जिससे बीमारियां होने का भय बना रहता है। साथ ही सड़क व बस्ती में स्ट्रीट लाइट नहीं है। यहां के रहवासियों के राशन कार्ड,मतदाता परिचय पत्र चौमहला के बने हुए है,यह वार्ड ग्राम पंचायत चौमहला का वार्ड 13 कहलाता है। इस क्षेत्र में कोई मकान निर्माण होता है तो उसकी भवन निर्माण की स्वीकृति ग्राम पंचायत तलावली से ली जाती है। जब किसी समस्या या किसी कार्य के लिए कोई नागरिक जाता है तो वह अन्य पंचायत क्षेत्र का मामला कर पल्ला झाड़ लेते है।<br /><br /><strong>प्रशासन गांव के संग फॉलो केम्प में सुनाई पीड़ा</strong><br />वार्ड नम्बर 13 के एक मोहल्ले में नालियां नहीं होने तथा रास्ते में गन्दगी कीचड़ होने से दु:खी मोहल्लेवासियों ने प्रशासन गांव के संग फॉलो शिविर में उपखण्ड अधिकारी को अपनी पीड़ा सुनाई, जिस पर ग्राम पंचायत तलावली से स्वीकृति लेकर ग्राम पंचायत चौमहला द्वारा अतिक्रमण हटाकर नाली निर्माण का कार्य हाल में शुरू हुआ। विलावली रोड पर दोनों ओर बसी नई बस्तियों में सड़क ,स्ट्रीट लाइट व जलदाय विभाग का अभाव है, जिससे यहां के रहवासियों  काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। स्ट्रीट लाइट नहीं होने से पूरी बस्ती अंधेरे में डूबी रहती है।<br /><br />विलावली रोड पर स्ट्रीट लाइट नहीं है तथा इस क्षेत्र में जलदाय विभाग की पाइप लाइन नहीं होने से यहां के रहवासियों को पेयजल का संकट बना रहता है। <strong>-  खुशाल राठौर, पूर्व पंचायत समिति सदस्य</strong><br /><br />शनि मंदिर रोड पर सड़क व नालियों का अभाव है, जिससे लोगों को परेशानी होती है , बरसात में रास्ते में दो- दो फिट पानी भरा रहता है। <strong>- महावीर लोढा, ग्रामीण </strong> <br /><br /> सिटी पैलेस इलाके में सड़क स्ट्रीट लाइट व नालियां नहीं है, जिससे लोगों को परेशानी होती है।<br /><strong>- संजय राठौर, ग्रामीण</strong> <br /><br /> एक गली में इंटरलॉकिंग स्वीकृत हो चुकी है और एक गली में बन चुका है, अन्य जगह के प्रस्ताव भिजवा रखे है, स्वीकृति मिलते ही कार्य होगा।<br /><strong>-सुरेंद्र सिंह, सरपंच ग्राम पंचायत तलावली</strong><br /><br /> इस क्षेत्र में नाली निर्माण सड़क निर्माण व स्ट्रीट लाइट का कार्य प्रस्तावित है, एक गली में नाली का निर्माण कार्य चल रहा है।<br /><strong>-प्रेमलता अशोक भण्डारी, सरपंच ग्राम पंचायत कोलवी उर्फ मंडी राजेंद्रपुर चौमहला</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/development-work-stuck-in-the-tussle-of-two-panchayats/article-13659</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/development-work-stuck-in-the-tussle-of-two-panchayats/article-13659</guid>
                <pubDate>Tue, 05 Jul 2022 16:21:32 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-07/2-panchayato-ki-kheechtaan-mei-atka-vikas-karya.jpg"                         length="69861"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नल कनेक्शन में गड़बड़झाला, ज्यादा राशि नहीं देने पर अटकी जलापूर्ति </title>
                                    <description><![CDATA[शहर की प्रेमनगर अफोर्डेबल कॉलोनी में नल कनेक्शन के मामले में गड़बड़झाले का मामला सामने आया है। नगर विकास न्यास की ओर से यहां पर नल कनेक्शन किए जा रहे हैं। लोगों का आरोप है कि न्यास के ठेकेदार फर्म कर्मचारी नल कनेक्शन का पूरा शुल्क जमा करवाने के बाद भी ज्यादा राशि की मांग कर रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-was-a-mess-in-the-tap-connection--water-supply-stuck-for-not-giving-more-amount/article-11825"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/20855.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर की प्रेमनगर अफोर्डेबल कॉलोनी में नल कनेक्शन के मामले में गड़बड़झाले का मामला सामने आया है। नगर विकास न्यास की ओर से यहां पर नल कनेक्शन किए जा रहे हैं। लोगों का आरोप है कि न्यास के ठेकेदार फर्म कर्मचारी नल कनेक्शन का पूरा शुल्क जमा करवाने के बाद भी ज्यादा राशि की मांग कर रहे हैं। राशि नहीं देने पर नल कनेक्शन करने में आनाकानी कर रहे हैं। इससे लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। <br /><br />प्रेमनगर अफोर्डेबल कॉलोनी में करीब दो हजार आवास बने हुए हैं। इस कॉलोनी में निर्माण के समय ही नल कनेक्शन कर दिए गए थे। उसके बाद कॉलोनी के निवासियों के लिए जलापूर्ति की जा रही थी। इसका कोई बिल जारी नहीं किया जा रहा था। अब शहर में न्यास की ओर से बनाई गई कॉलोनियों को जलदाय विभाग को हैंडओवर करने की कवायद चल रही है। इसी के तहत इन कॉलोनियों में नए नल कनेक्शन किए जा रहे हैं। पूर्व में इन कॉलोनियों में हो रहे कनेक्शनों को काट कर अब नए कनेक्शन कर रहे हैं। इस समय प्रेमनगर कॉलोनी में न्यास की ओर से नल कनेक्शन जोड़ने करने का कार्य किया जा रहा है।<br /><br /><strong>फाइल शुल्क 1800, फिर भी वसूली</strong><br />नए नल कनेक्शन के लिए फाइल बनानी पड़ती है। इसका शुल्क 1800 निर्धारित कर रखा है। फाइल तैयार होने के बाद नल कनेक्शन करने का कार्य न्यास के ठेकेदार फर्म की ओर से किया जा रहा है। लोगों का आरोप है कि फर्म के कर्मचारी फाइल का शुल्क जमा करवाने के बाद भी नल कनेक्शन करने के लिए 600 रुपए और मांग रहे हैं। स्थानीय निवासी रामफूल धाकड़, श्यामबिहारी नागर, जगदीश नागर, धनराज मेहरा, कृष्णमुरारी मीणा व धनराज मीणा ने बताया कि पहले कर्मचारियों ने 1800 रुपए फाइल चार्ज देने के बाद कुछ घरों में कनेक्शन किए थे। अब हम लोगों से फाइल चार्ज के अलावा 600 रुपए और मांग रहे हैं। मना करने पर कनेक्शन करने से आनाकानी कर रहे हैं। जब कुछ लोगों के 1800 रुपए में कनेक्शन किए हैं तो और अब ज्यादा रुपए क्यों मांग रहे है।<br /><br /><strong>पहले का खोल ले गए वॉल </strong> <br />लोगों ने बताया कि फर्म के कर्मचारियों ने पहले लगे कनेक्शन को काटते समय उसका वॉल खोला था। उस वॉल को खोलकर अपने पास रख लिया और अब नए वॉल को लगाने और कनेक्शन जोड़ने के लिए 600 रुपए मांग कर रहे हैं। जबकि फाइल बनवाते समय अलग से राशि देने के सम्बंध में कोई जानकारी नहीं दी गई थी। अब यहां पर पहले से ही लगे वॉल को लगाने के बजाय नए के नाम से रुपए ऐठनें की कोशिश की जा रही है। इससे लोगों में रोष है। <br /><br /><strong>शिकायत की, लेकिन ध्यान नहीं दिया</strong><br />स्थानीय निवासियों ने बताया कि ठेकेदार फर्म के कर्मचारियों द्वारा फाइल चार्ज के अलावा भी रुपए मांगने की शिकायत न्यास के अधिकारियों से की थी, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया। कर्मचारियों ने कई घरों के कनेक्शन काट दिए और नया कनेक्शन भी नही किया। इस कारण अब लोगों के सामने पानी का संकट उत्पन्न हो गया है। पड़ोसियों के यहां से पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है। वहीं कुछ लोग मजबूरी में ज्यादा रुपए देकर कनेक्शन करवा रहे हैं।   <br /><br />प्रेमनगर अफोर्डेबल कॉलोनी में नए नल कनेक्शन करने का कार्य चल रहा है। इसके लिए एक फर्म को ठेका दिया गया है। फाइल चार्ज के अलावा और राशि मांगने की शिकायत उनके पास नहीं आई है। यदि ठेका कर्मी आनाकानी कर रहा है तो स्थानीय निवासी अन्य कर्मचारी से कनेक्शन करवा सकते हैं। फिर भी इस सम्बंध में ठेकेदार से जानकारी की जाएगी। <br /><strong>- प्रकाशवीर नाथानी, अधिशासी अभियंता नगर विकास न्यास</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-was-a-mess-in-the-tap-connection--water-supply-stuck-for-not-giving-more-amount/article-11825</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-was-a-mess-in-the-tap-connection--water-supply-stuck-for-not-giving-more-amount/article-11825</guid>
                <pubDate>Fri, 10 Jun 2022 16:20:07 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-06/20855.jpg"                         length="140638"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> बजट के अभाव में अटका अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क का निर्माण कार्य</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा के रियासतकालीन चिड़ियाघर के पिंजरों में बरसों से बंद वन्यजीव अपनी आजादी का इंतजार कर रहे हैं। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में द्वितीय चरण के तहत 25 करोड़ की लागत से कई निर्माण कार्य होने हैं, जो बजट के अभाव में शुरू नहीं हो पाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/construction-work-of-abheda-biological-park-stuck-due-to-lack-of-budget/article-11620"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/abheda-biological-park.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा के रियासतकालीन चिड़ियाघर के पिंजरों में बरसों से बंद वन्यजीव अपनी आजादी का इंतजार कर रहे हैं, जो सरकारी लेटलतीफी के कारण खत्म होता नजर नहीं आ रहा। भीषण गर्मी के बीच छोटे पिंजरों में दिन काटने को मजबूर हैं। दरअसल, अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में द्वितीय चरण के तहत 25 करोड़ की लागत से कई निर्माण कार्य होने हैं, जो बजट के अभाव में शुरू नहीं हो पाए। जबकि, वन्यजीव विभाग सरकार को कई बार प्रस्ताव भेज चुका है। इसके बावजूद बजट स्वीकृत नहीं हुआ। जिसके चलते एक दर्जन से अधिक वन्यजीव चिड़ियाघर से बायोलॉजिक पार्क में शिफ्ट नहीं हो पा रहे। <br /><br /><strong>25 करोड़ से द्वितीय चरण में यह होने हैं कार्य</strong> <br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में द्वितीय चरण के तहत 25 करोड़ की लागत से कई निर्माण कार्य होने हैं। जिनमें 31 एनक्लोजर, स्टाफ क्वार्टर, कैफेटेरिया, वेटनरी हॉस्पिटल, इंटरपिटेक्शन सेंटर, पर्यटकों के लिए आॅडिटोरियम, छांव के लिए शेड, कुछ जगहों पर पथ-वे सहित अन्य कार्य शामिल हैं।<br /><br /><strong>संसाधनयुक्त हॉस्पिटल बेहद जरूरी</strong><br />डीएफओ डॉ. आलोक गुप्ता ने बताया कि 2017 में बायोलॉजिकल पार्क का निर्माण कार्य शुरू हुआ था, जो नवंबर 2021 में बनकर पूरा हुआ। लेकिन, द्वितीय चरण में बेहद महत्वपूर्ण काम होने थें, जो बजट के अभाव में नहीं हो सके। जब तक साधन-संसाधनयुक्त हॉस्पिटल नहीं होगा तब तक चिड़ियाघर हो या बायलॉजिकल पार्क इनके होने का उददेशय पूर्ण नहीं होगा। वन्यजीवों के इलाज के लिए अभी कामचलाउ व्यवस्था कर रखी है लेकिन इमरजेंसी पड़ने पर परेशानी होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/construction-work-of-abheda-biological-park-stuck-due-to-lack-of-budget/article-11620</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/construction-work-of-abheda-biological-park-stuck-due-to-lack-of-budget/article-11620</guid>
                <pubDate>Wed, 08 Jun 2022 14:29:15 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-06/abheda-biological-park.jpg"                         length="70830"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तूफान बना आफत : स्टेडियम की दर्शक दीर्घा की उड़ी छत, एचटी लाइन के तारों में अटकी, डिस्कॉम को हुआ लाखों का नुकसान</title>
                                    <description><![CDATA[भोड़की गांव में जन सहयोग से बनाए स्टेडियम में भामाशाहओं के सहयोग से बने दर्शक स्टैंड व मंच की छत की लोहे की चद्दरे उड़ गई। कुछ चद्दरें पास से गुजर रही एचटी लाइन सितारों पर अटक गई तथा कुछ स्टेडियम की चारदीवारी की रेलिंग में फंस गई, पिलानी सहित ग्रामीण क्षेत्र में काफी नुकसान हुआ है। तेज अंधड़ 60-70 किमी प्रति घंटा की रफ्Þतार से करीब 30-40 मिनट तक चला जिसके बाद बारिश भी हुई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhunjhunu/hurricane-havoc--roof---stadium-s---spectator--gallery--stuck---wires-of-ht-line--loss---lakhs-to-discom/article-10409"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/qqqqq.jpg" alt=""></a><br /><p>झुंझुनूं। जिले के ग्राम भोड़की में सोमवार रात्रि में रात्रि को आए चक्रवाती तूफान से लाखों रुपए संपत्ति का नुकसान हुआ है। भोड़की गांव में जन सहयोग से बनाए स्टेडियम में भामाशाहओं के सहयोग से बने दर्शक स्टैंड व मंच की छत की लोहे की चद्दरे उड़ गई। कुछ चद्दरें पास से गुजर रही एचटी लाइन सितारों पर अटक गई तथा कुछ स्टेडियम की चारदीवारी की रेलिंग में फंस गई, जिससे काफी दूर में लोहे की रैलिंग धराशायी हो गई। हवा का वेग इतना तेज था कि कई लोहे की चद्दरें 500 मीटर दूर तक उड़ कर चली गई। तूफान रात्रि में आने से किसी प्रकार के जान माल का नुकसान नहीं हुआ। प्रात: सरपंच नेमीचंद जांगिड़, स्टेडियम समिति अध्यक्ष हरलाल सिंह गढ़वाल, सचिव राजकुमार सैनी ने मौके पर पहुंचकर नुकसान का जायजा लिया। तूफान से बिजली के पोल तथा ट्रांसफार्मर धराशायी हो गए, जिससे रात्रि को गुल हुई बिजली दूसरे दिन मंगलवार की दोपहर तक सुचारू नहीं हुयी। <br /><br /><strong>तेज आंधी से डिस्कॉम को हुआ लाखों का नुकसान</strong></p>
<p>बीती रात को मौसम में हुए जबरदस्त बदलाव के चलते तेज आंधी और बारिश के कारण कस्बे पिलानी सहित ग्रामीण क्षेत्र में काफी नुकसान हुआ है। तेज अंधड़ 60-70 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से करीब 30-40 मिनट तक चला जिसके बाद बारिश भी हुई। साथ ही बारिश के साथ कुछ जगह पर ओले भी गिरे। इस दौरान बिजली के पोल गिर जाने से कस्बे सहित कई गांवों में बिजली गुल रही।</p>
<p><br /><strong>6 लाख रुपए से अधिक का हुआ नुकसान</strong> :  डिस्कॉम के अधिकारी ने बताया कि पिलानी कस्बे के अलावा पीपली, बेरी, बनगोठड़ी, केहरपुरा, रायला, लीखवा, घूमनसर, खुडानिया, जवाहरपुरा, सूजड़ोला आदि गांवों में कई जगह ट्रांसफार्मर व बिजली के पोल अंधड़ की वजह से धराशाई हो गए। अधिकारी ने बताया कि सोमवार को आए अंधड़ की वजह से 50 पोल गिरे हैं जिससे डिस्कॉम को अनुमानित 6 लाख रुपए से अधिक का नुकसान हुआ है। बिजली आपूर्ति भी बुरी तरह बाधित हो गयी। खंभों व बिजली लाइन की मरम्मत करने तथा उपकरणों के रख-रखाव के लिए मंगलवार को कई फीडर्स पर बिजली बंद रखी गई।</p>
<p><br /><strong>तेज तूफान से गिरे पेड़</strong> : आंधी की वजह से अनेक पेड़ भी गिर गए। इसके अलावा कई जगह टीन शेड, बैनर्स, होर्डिंग आदि भी तेज हवा की वजह से उड़ गए। कस्बे के खेड़ला रोड़, बाइपास आदि बाहरी इलाकों में क ची बस्तियों तथा तम्बू-टेंट लगा कर रहने वाले खानाबदोशों को भी तूफानी हवाओं के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झुंझुनूं</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhunjhunu/hurricane-havoc--roof---stadium-s---spectator--gallery--stuck---wires-of-ht-line--loss---lakhs-to-discom/article-10409</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhunjhunu/hurricane-havoc--roof---stadium-s---spectator--gallery--stuck---wires-of-ht-line--loss---lakhs-to-discom/article-10409</guid>
                <pubDate>Wed, 25 May 2022 14:59:27 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-05/qqqqq.jpg"                         length="91979"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महिला ने सिलाई करते वक्त दांतों के बीच फंसाई सुई, सांस लेने से पेट में गई</title>
                                    <description><![CDATA[हली बार ऐसा हुआ है जब कोई सुई या पिन जैसी चीज दूरबीन के जरिए लीवर से निकाली गई हो।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/doctors-at-sms-hospital-have-removed-a-needle-stuck-in-the-intestine-and-liver-of-a-woman-with-a-telescopic-method--woman-stuck-needle-between-teeth-while-sewing--went-into-stomach-due-to-breathing/article-6295"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/27.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। एसएमएस अस्पताल के चिकित्सकों ने एक महिला की आंत और लिवर में फंसी सुई को दूरबीन पद्धति से निकाला है। एक 25 वर्षीय महिला को सिलाई करते समय मुंह में दांतों के बीच सुई फंसाना महंगा पड़ गया। सांस लेने के दौरान सुई महिला के पेट में चली गई। दो-तीन दिन इंतजार करने और पेट दर्द सहने के बाद आखिर में महिला ने एसएमएस में आकर डॉक्टर को दिखाया, जहां महिला का दूरबीन पद्धति से ऑपरेशन करके सुई को लीवर से निकाला गया। पहली बार ऐसा हुआ है जब कोई सुई या पिन जैसी चीज दूरबीन के जरिए लीवर से निकाली गई हो। इसमें बड़ी बात ये है कि सुई इस कदर फंसी हुई थी कि एक बार तो वह निकलते समय टूट गई और उसका बड़ा हिस्सा फंस गया, लेकिन कुछ देर बाद दोबारा उसे निकाला गया। <br /><br /><strong>ऐसे चली प्रक्रिया</strong><br />एसएमएस हॉस्पिटल में जनरल सर्जन और सीनियर प्रोफेसर डॉ. ऋचा जैन ने बताया कि गंगानगर की रहने वाली 25 साल की महिला सिलाई का काम कर रही थी। उसने मुंह में दांतों के बीच सुई फंसा रखी थी। जब उसने सांस ली तो अचानक सुई पेट में चली गई। अस्पताल आने के बाद जब एक्सरे कराया गया तो सुई पहले आंतों में दिखी। मरीज को भर्ती किए 10 दिन हो गए थे। इस दौरान सोनोग्राफी, एंडोस्कॉपी, एक्सरे, सीटी स्कैन समेत कई जांचे बार-बार करवानी पड़ी। हमने एक बार तो मरीज को वापस घर भेजने का फैसला किया, लेकिन आखिरी बार जब सोनोग्राफी की तो लीवर के अंदर सुई डिटेक्ट हुई।<br /><br /><strong>आंत में छेद करते हुए लीवर में गई</strong><br />दो दिन प्रोसेस किया तो देखा महिला के आंतों में फंसी सुई आंतों में छेद करके लीवर में बुरी तरह फंस गई थी। कई जांचे और गेस्ट्रो सर्जरी विभाग के डॉक्टर्स से सलाह लेने के बाद महिला का ऑपरेशन किया गया। उसके बाद सुई को बाहर निकाला गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/doctors-at-sms-hospital-have-removed-a-needle-stuck-in-the-intestine-and-liver-of-a-woman-with-a-telescopic-method--woman-stuck-needle-between-teeth-while-sewing--went-into-stomach-due-to-breathing/article-6295</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/doctors-at-sms-hospital-have-removed-a-needle-stuck-in-the-intestine-and-liver-of-a-woman-with-a-telescopic-method--woman-stuck-needle-between-teeth-while-sewing--went-into-stomach-due-to-breathing/article-6295</guid>
                <pubDate>Thu, 17 Mar 2022 12:31:40 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-03/27.jpg"                         length="51487"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विधानसभा में विधायकों के सवालों में जवाब में अटके कई मंत्री, स्पीकर ने दो सवालों को किया स्थगित</title>
                                    <description><![CDATA[ प्रश्नकाल में विधायकों की ओर से कुल 15 सवाल पूछे गए, जिनके जवाब में मंत्री लालचंद कटारिया, महेश जोशी, ममता भूपेश संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/many-ministers-stuck-in-the-answers-to-the-questions-of-the-mlas-in-the-assembly--the-speaker-adjourned-two-questions/article-5326"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/mahesh-joshi.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। चार दिन के अवकाश के बाद बुधवार को विधानसभा की कार्यवाही फिर से शुरू हुई। प्रश्नकाल में विधायकों की ओर से कुल 15 सवाल पूछे गए, जिनके जवाब में मंत्री लालचंद कटारिया, महेश जोशी, ममता भूपेश संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। इस पर माकपा विधायक बलवान पुनिया ने विरोध स्वरूप वेल में धरना दिया। वहीं स्पीकर सीपी जोशी ने भाजपा विधायक वासुदेव देवनानी और ज्ञानचंद पारख का सवाल स्थगित कर दिया।</p>
<p><br />सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई। प्रश्नकाल में कुल 38 सवाल लगे, जिसमें 22 तारांकित और 16 अतारांकित। समय के अभाव के चलते केवल 15 सवाल ही विधायक पूछ सके। ये सवाल  चिकित्सा, कृषि, सार्वजनिक निर्माण, जनजाति, क्षेत्रीय विकास, महिला बाल विकास, खाद्य आपूर्ति और उद्योग विभाग से संबंधित रहे। <br /><br /><strong>किसानों को नहीं हुआ 164 करोड़ का किसानों को फसल बीमा क्लेम का भुगतान</strong><br />माकपा विधायक बलवान पूनिया ने भादरा विधानसभा क्षेत्र के किसानों को फसल बीमा क्लेम का भुगतान नहीं होने का मामला उठाया जवाब में कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनान्‍तर्गत वर्ष 2020-21 से हनुमानगढ जिले का फसल बीमा व्‍यवसाय एग्रीकल्‍चर इन्‍श्‍योरेन्‍स कम्‍पनी ऑफ इण्डिया लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। रबी 2020-21 के लिये उक्‍त बीमा कम्‍पनी की ओर से भादरा विधानसभा क्षेत्र में अब तक 161 करोड़ 78 लाख के बीमा क्‍लेम का भुगतान 58 हजार 901 फसल बीमा पॉलिसी धारक पात्र किसानों को किया गया है। शेष बीमा दावों का भुगतान बीमा कम्‍पनी द्वारा फसल कटाई प्रयोगों से प्राप्‍त उपज परिणामों में विसंगति बताते हुए अभी तक नहीं किया गया है । विभाग बीमा कम्‍पनी से शेष बीमा क्‍लेम का भुगतान करवाने के लिए लगातार प्रयासरत है। विभागीय अनुमान के अनुसार रबी 2020-21 के लिये भादरा विधानसभा क्षेत्र के लिये लगभग 505 करोड 62 लाख रुपए की बीमित राशि एवं 323 करोड 34 लाख रुपए का बीमा क्‍लेम फसल कटाई प्रयोगों अनुसार  प्राप्‍त उपज के आधार पर योजना प्रावधानों के अंतर्गत्‍ तय हुआ है । कटारिया के जवाब से असंतुष्ट पूनिया वेल में आ गए , उनके साथ विधायक गिरधारी भी वेल में आकर बैठ गए। कुछ समय बाद मंत्री प्रताप सिंह ने समझाइस कार उनकी सीट पर भेजा।</p>
<p><br /><strong>शुद्ध पानी नहीं मिलने पर थाने में मामला दर्ज कराया लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ</strong><br />भाजपा विधायक प्रताप सिंह सिंघवी ने ल्हास सिंचाई परियोजना से छबड़ा व  छिपा बड़ोद को पेयजल उपलब्ध कराने का सवाल पूछा, लेकिन जलदाय मंत्री महेश जोशी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। जोशी ने कहा कि बारां जिले की ल्‍हासी सिंचाई परियोजना अंतर्गत निर्मित बांध आधारित ल्‍हासी पेयजल परियोजना पूर्ण की जाकर, छबड़ा एवं छीपाबड़ौद कस्‍बों में स्‍वच्‍छ पेयजल आपूर्ति की जा रही है ।  छबड़ा द्वारा ल्‍हासी पेयजल परियोजना से कस्‍बा छबड़ा व कस्‍बा छीपाबड़ौद में अनुबंधक फर्म डारा कंस्‍ट्रक्‍शन एवं वितरण कम्‍पनी, राईबाग जोधपुर द्वारा निर्धारित मानक गुणवत्‍ता अनुरूप पेयजल आपूर्ति नहीं करने तथा लापरवाही करने बाबत पुलिस थाना छबड़ा में  30 जून .2021 को प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी । थानाधिकारी, पुलिस थाना छबड़ा से प्राप्‍त सूचना के अनुसार उक्‍त प्रकरण वर्तमान में अनुसंधान में है । इस जवाब से सिंघवी ने नाराजगी जताई, लेकिन स्पीकर ने बोलने की अनुमति नहीं दी।</p>
<p><br /><strong>राज्य आर्थिक पिछड़ा वर्ग बोर्ड गठन होने के 3 साल बाद भी योजनाओं पर एक नया पैसा खर्च नहीं हुआ</strong><br />  उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने प्रदेश में राजस्थान राज्य आर्थिक पिछड़ा वर्ग बोर्ड गठन को लेकर सवाल पूछते हुए कहा कि बोर्ड को बटन हुए 3 साल का समय हो गया है लेकिन इसकी योजनाओं के लिए एक नया पैसे का प्रावधान कर खर्च नहीं किया गया अगर खर्च किया तो सरकार बताएं जवाब में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री टीकाराम जूली ने कहा कि वर्ष 2020-2021 के बजट में  आर्थिक रूप से पिछडे सामान्य वर्ग (Economically Backward class) के उत्थान एवं कल्याण के सुझाव देने के।लिए राजस्थान राज्य आर्थिक पिछडा वर्ग बोर्ड के गठन की घोषणा)  के अनुक्रम में राज्य सरकार ने 22 मई.2020 को  राजस्थान राज्य आर्थिक पिछडा वर्ग बोर्ड का गठन किया गया है। अभी वर्तमान में उक्त बोर्ड से कोई सुझाव प्राप्त नहीं हुआ है। जुली के बाद राठौड़ बोलने लगे, लेकिन स्पीकर ने अनुमति नहीं दी।</p>
<p><strong>खाद्य सुरक्षा योजना में पात्रता धारियों की सीमा में बढ़ोतरी को लेकर सवाल</strong> <br />विधायक कालीचरण सराफ में खाद्य सुरक्षा योजना में पात्रता धारियों की सीमा में बढ़ोतरी को लेकर सवाल पूछा जवाब में खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि खाद्य सुरक्षा योजनान्तर्गत प्रदेश में  23.फरवरी 2022 को शहरी क्षेत्र में 35.36 प्रतिशत एवं ग्रामीण क्षेत्र में 72.68 प्रतिशत लाभार्थी चयनित है। योजना के लाभार्थियों की संख्‍या शहरी क्षेत्र 6028017 (साठ लाख अठ्ठाईस हजार सतरह) एवं ग्रामीण क्षेत्र 37432670 (तीन करोड चौहत्‍तर लाख बत्‍तीस हजार छ सौ सत्‍तर) है।  सुरक्षा योजनान्तर्गत लाभ प्राप्‍त कर रहे राजकीय कार्मिकों के नामों को हटाकर उनसे वसूली की कार्यवाही करने के लिए विभाग की ओर से 24 फरवरी .2020 को आदेश जारी कर वसूली की कार्यवाही प्रारम्‍भ की गई है। फरवरी 2020 से 1 जनवरी 2021 तक अपात्र सरकारी कार्मिकों के 322178 (तीन लाख बाईस हजार एक सौ अठहत्‍तर) परिवार सदस्‍यों के नाम हटे है। प्रदेश में इस अवधि में नये पात्र व्‍यक्तियों के 747546 (सात लाख सैतालीस हजार पांच सौ छियालीस) नाम जोडे गए है। भारत सरकार की ओर से प्रदेश की वर्ष 2011 की जनसंख्‍या के अनुसार राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजनान्‍तर्गत 4.46  करोड लाभार्थियों को चयनित किये जाने की सीलिंग निर्धारित की गई थी।  भारत सरकार द्वारा कवरेज में कोई भी संशोधन अगली जनगणना के जनसंख्‍या अनुमान आंकडे प्रकाशित होने के बाद संभव होने के कारण वर्तमान में दिनांक 18 मई 2020 से खाद्य सुरक्षा योजना में नाम नहीं जोडे जा रहे है। भारत सरकार को राजस्‍थान में वर्ष 2021 की अनुमानित जनसंख्‍या के आधार पर सीलिंग पुन: निर्धारित करने के लिए मुख्‍यमंत्री ने कई बार प्रधानमंत्री को पत्र लिखे गए है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/many-ministers-stuck-in-the-answers-to-the-questions-of-the-mlas-in-the-assembly--the-speaker-adjourned-two-questions/article-5326</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/many-ministers-stuck-in-the-answers-to-the-questions-of-the-mlas-in-the-assembly--the-speaker-adjourned-two-questions/article-5326</guid>
                <pubDate>Wed, 02 Mar 2022 13:27:04 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-03/mahesh-joshi.jpg"                         length="146670"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देवनारायण बोर्ड के अध्यक्ष का पद कानूनी पेंच में फंसा</title>
                                    <description><![CDATA[ अवाना को नौ फरवरी को नियुक्त किया गया था। उस दिन 44 निगमों, बोर्डों और आयोगों में 58 लोगों को राजनीतिक नियुक्तियां दी गई थी। उनमें से अवाना को छोड़कर सभी लोगों ने कार्यभार संभाल लिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/post-of-the-chairman-of-devnarayan-board-in-the-state-is-stuck-in-a-legal-wrangle--due-to-this--nadbai-mla-jogendra-singh-awana--appointed-on-this-post--has-not-yet-taken-charge/article-5300"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/joginder-singh-awana.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में देवनारायण बोर्ड के अध्यक्ष का पद कानूनी  पेंच में फंस गया है। इसके चलते इस पद पर नियुक्त नदबई के विधायक जोगेन्द्र सिंह अवाना ने अभी तक कार्यभार नहीं संभाला है। अवाना को नौ फरवरी को नियुक्त किया गया था। उस दिन 44 निगमों, बोर्डों और आयोगों में 58 लोगों को राजनीतिक नियुक्तियां दी गई थी। उनमें से अवाना को छोड़कर सभी लोगों ने कार्यभार संभाल लिया।<br /><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>ये फंसा पेंच</strong> </span><br />चूंकि अवाना अभी विधायक है और राजस्थान देवनारायण बोर्ड के अध्यक्ष को केबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त है। पहले इस पद को राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त था, किन्तु वसुंधरा राजे की सरकार ने गत 22 अगस्त, 2008 को इसका दर्जा बढ़ाकर केबिनेट स्तर का कर दिया था। इस संबंध में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की प्रमुख शासन सचिव डॉ. मालोविका पवार की ओर से अधिसूचना जारी की गई थी। इसी अधिसूचना में बोर्ड में अशंकालिक सदस्यों की संख्या दो से बढ़ाकर चार की गई थी। चूंकि राज्य मंत्रिमंडल में मंत्रियों की संख्या 30 से ज्यादा नहीं हो सकती है, जो इस समय पूरी है। अवाना भरतपुर जिले की नदबई विधानसभा सीट से विधायक है, अगर देवनारायण बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में उनको केबिनेट मंत्री का दर्जा दिया जाता है, तो उनकी विधायकी भी खतरे में पड़ती है। उच्चतम न्यायालय के आदेश की वजह से मुख्यमंत्री के छह सलाहकारों को भी मंत्री का दर्जा नहीं दिया जा सका। ये सभी विधायक राजनीतिक सलाहकार है। अवाना ने राजस्थान विधानसभा का चुनावा बसपा के टिकट पर जीता था। बाद में बसपा के सभी छह विधायकों ने कांग्रेस की सदस्यता ले ली।</p>
<p><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>निकाली जा रही है गली</strong></span><br />अवाना को इस पद पर कार्यभार संभालने से पहले राज्य सरकार कोई न कोई रास्ता निकाल रही है। सूत्रों के अनुसार पूर्व की अधिसूचना में संशोधन किया जा रहा है। संशोधन के बाद ही अवाना को कार्यभार संभलवाया जाएगा। अगर अधिसूचना में संशोधन नहीं हो पाता है तो किसी अन्य गैर विधायक को इस पद की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है और अवाना को अन्य महत्वपूर्ण पद से नवाजा जा सकता है। <br /><br />मुझे जनता की सेवा करनी है। अभी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कानूनी राय लेकर कोई न कोई रास्ता निकालने में लगे हुए हैं। जो भी होगा, वह कानूनी दायरे में ही किया जाएगा। -<strong>जोगेन्द्र सिंह अवाना, विधायक नदबई</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/post-of-the-chairman-of-devnarayan-board-in-the-state-is-stuck-in-a-legal-wrangle--due-to-this--nadbai-mla-jogendra-singh-awana--appointed-on-this-post--has-not-yet-taken-charge/article-5300</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/post-of-the-chairman-of-devnarayan-board-in-the-state-is-stuck-in-a-legal-wrangle--due-to-this--nadbai-mla-jogendra-singh-awana--appointed-on-this-post--has-not-yet-taken-charge/article-5300</guid>
                <pubDate>Wed, 02 Mar 2022 10:40:10 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-03/joginder-singh-awana.jpg"                         length="87116"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        