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                <title>warfare - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>भारत ऑपरेशन सिंदूर 2.0 के लिए तैयार: सेना प्रमुख बोले- अभी केवल संघर्ष विराम जैसे हालात</title>
                                    <description><![CDATA[सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है, बल्कि संघर्ष विराम की स्थिति है। जरूरत पड़ने पर तीनों सेनाएं ऑपरेशन सिंदूर 2.0 के लिए तैयार हैं। उन्होंने नए सैन्य अधिकारियों को आधुनिक युद्ध के पारदर्शी होने और मल्टी-डोमेन लड़ाइयों के प्रति सतर्क रहने की हिदायत दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/india-is-ready-for-operation-sindoor-20-army-chief-said/article-155531"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/army.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है। फिलहाल संघर्ष विराम जैसी स्थिति है। जरूरत पड़ी तो तीनों सेनाएं ऑपरेशन सिंदूर 2.0 के लिए पूरी तरह तैयार हैं। सेना प्रमुख ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने एक बेंचमार्क सेट कर दिया है कि भारत किसी भी उकसावे पर कैसे जवाब देता है। आज पास होने वाले अफसर अपने करियर की शुरुआत से ही इस बेंचमार्क को बनाए रखें।</p>
<p><strong>आधुनिक युद्ध पारदर्शी हो गए</strong></p>
<p>सेना प्रमुख ने नए अफसरों को मैसेज देते हुए कहा कि आधुनिक युद्ध पारदर्शी हो गया है। 24 घंटे हर गतिविधि पर नजर रखी जाती है। ऐसे में सैनिकों की तैनाती, ऑपरेशन और बॉर्डर के पास बसे नागरिकों की सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क रहने की जरूरत है।</p>
<p><strong>हमेशा दिमाग से जीती जाती है जंग </strong></p>
<p>सेना प्रमुख ने कहा कि जीत हमेशा दिमाग में होती है। यह जमीन पर नहीं होती। इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर तभी सफल होता है जब पूरा देश एक साथ आए और सूचना देने वाले लोगों पर भरोसा करे। जब युद्ध की गति बहुत तेज हो रही होए तब संसाधनों के दायरे में रहकर मदद की जरूरत पड़ती है, ताकि तेजी से फैसले ले सकें। भविष्य की लड़ाइयां केवल पारंपरिक तरीके से नहीं लड़ी जाएंगी, बल्कि ये कई मोर्चों पर होंगी। इनमें जमीन, आकाश, समुद्र, अंतरिक्ष, साइबर, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक, लोगों के दिमाग और सोच पर असर डालना शामिल होंगे।</p>
<p><strong>वर्दी का नजरिया हमेशा राष्ट्रीय ही रहना चाहिए </strong></p>
<p>जनरल द्विवेदी ने कहा है कि भविष्य के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को ऐसे तेजी से जटिल होते सुरक्षा माहौल में काम करने के लिए तैयार रहना होगा जहां प्रतिस्पर्धा और संघर्ष के बीच का अंतर धुंधला होता जा रहा है। यहां जो कुछ भी शुरू होता है, वह हमेशा आपके साथ रहता है उन्होंने कैडेटों  से कहा कि आज, जब मैं वर्दी वाली जिंदगी के अंतिम पड़ाव पर आपके सामने खड़ा हूं और अपनी वर्दी उतारने की तैयारी कर रहा हूं, जबकि आप अपनी वर्दी पहनने की तैयारी कर रहे हैं तो मैं पूरे यकीन के साथ कह सकता हूं कि यहां जो कुछ भी शुरू होता है, वह हमेशा आपके साथ रहता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 11:08:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>गवर्नर अलेक्जेंडर ड्रोज़डेन्को का दावा: बोले लेनिनग्राद क्षेत्र के ऊपर 50 से अधिक ड्रोन नष्ट, ड्रोन हमले को नाकाम करने की कार्रवाई जारी</title>
                                    <description><![CDATA[रूस के दूसरे सबसे बड़े शहर सेंट पीटर्सबर्ग (लेनिनग्राद) पर यूक्रेन के बड़े ड्रोन हमले को नाकाम कर दिया गया है। गवर्नर अलेक्जेंडर ड्रोज़डेन्को के अनुसार, रूसी वायु रक्षा प्रणाली ने अब तक 50 से अधिक ड्रोन मार गिराए हैं। क्षेत्र में सुरक्षा अभियान अभी भी जारी है और स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/governor-alexander-drozdenko-claims-that-more-than-50-drones-were/article-147482"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/russai.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूस के दूसरे सबसे बड़े शहर लेनिनग्राद (अब सेंट पीटर्सबर्ग) के आसमान में नष्ट किए गए यूक्रेनी ड्रोन की संख्या 50 से अधिक हो गई है। गवर्नर अलेक्जेंडर ड्रोज़डेन्को ने यह जानकारी दी।</p>
<p>ड्रोजडेन्को ने मैक्स पर कहा, "ड्रोन हमले को नाकाम करने की कार्रवाई जारी है। कुल मिलाकर, लेनिनग्राद क्षेत्र के ऊपर 50 से अधिक ड्रोन नष्ट किए जा चुके हैं।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 13:25:49 +0530</pubDate>
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                <title>किम जोंग को सत्ता से हटाने के लिए साइबर वारफेयर की तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[दुनिया का सबसे बड़ा साइबर फ्रॉड सेंटर चलाता है। जिसे हैकर्स की एक भारी भरकम टीम अंजाम देती है। इन पैसों का इस्तेमाल किम जोंग उन और उसके परिवार पर किया जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/preparation-for-cyber-warfare-to-remove-kim-jong-from-power/article-89914"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/6633-copy13.jpg" alt=""></a><br /><p>टोक्यो। अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया के खिलाफ साइबर वारफेयर शुरू करने का फैसला किया है। इसमें किम जोंग उन के खिलाफ उत्तर कोरियाई नागरिकों में विद्रोह की भावना भरने का काम भी किया जाएगा। इसके अलावा उत्तर कोरियाई हैकर्स के खिलाफ भी एक मल्टीनेशनल साइबर ऐक्शन प्लान को लागू किया जाएगा। इसका प्राथमिक उद्देश्य उत्तर कोरिया के साइबर फ्रॉड के जरिए कमाई करने के रास्ते को बंद करना है। पश्चिमी देशों का दावा है कि उत्तर कोरिया दुनिया का सबसे बड़ा साइबर फ्रॉड सेंटर चलाता है। जिसे हैकर्स की एक भारी भरकम टीम अंजाम देती है। इन पैसों का इस्तेमाल किम जोंग उन और उसके परिवार पर किया जाता है।</p>
<p>अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि तीनों देशों के राजनयिकों की तीसरी बैठक में साइबर फ्रॉड के जरिए पैसे इकट्ठा करने और उसे सैन्य खर्च में इस्तेमाल करने की उत्तर कोरिया की क्षमता को बाधित करने पर सहमति बनी है। यह बैठक तब हुई है, जब एफबीआई ने अमेरिकी प्रशासन को चेतावनी दी थी कि उत्तर कोरियाई हैकर्स की टीमें पैसे चुराने के लिए मैलवेयर का इस्तेमाल कर रही हैं। इसके लिए वे बैंकों, दूसरे वित्तीय संस्थानों और कंपनियों को निशाना बना रही हैं। वे क्रिप्टोकरेंसी व्यवसायों और प्लेटफार्मों में घुसपैठ करने का आक्रामक प्रयास भी कर रहे हैं। तीनों देशों की इस बैठक का नेतृत्व सियोल के विदेश मंत्रालय में कोरियाई प्रायद्वीप नीति के डायरेक्टर जनरल ली जुन इल, उत्तर कोरिया के लिए अमेरिकी उप विशेष प्रतिनिधि सेठ बेली और साइबर नीति के प्रभारी जापानी राजदूत नाओकी कुमागाई ने किया। कार्य समूह में लगभग 20 अमेरिकी, दक्षिण कोरियाई और जापानी सरकारी विभागों, मंत्रालयों और एजेंसियों के एजेंट शामिल थे।<br />अमेरिकी विदेश विभाग ने बताया कि  वर्किंग ग्रुप के माध्यम से, अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान तीनों देश एक साथ मिलकर कार्रवाइयों की एक लंबी सीरीज पर काम करना जारी रखेंगे। जो कैंप डेविड शिखर सम्मेलन में स्थापित ऐतिहासिक सहयोग को रेखांकित करता है। इसमें डीपीआरके, उत्तर कोरिया के क्रिप्टो करेंसी की चोरी को रोकने, उनके इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी नेटवर्क को जाम करने, उत्तर कोरिया से पैदा होने वाले साइबर खतरे को खत्म करने को लेकर भागीदारों के साथ काम करने और क्षमता निर्माण के प्रयासों को बढ़ाने पर जोर दिया गया।<br />तीनों देश उत्तर कोरियाई लोगों के बीच सूचनाओं की पहुंच को सुगम करने, उन्हें दुनिया में हो रही घटनाओं की जानकारी देने और किम जोंग उन शासन के खिलाफ उकसाने को लेकर भी काम करेंगे। इसका उद्देश्य उत्तर कोरियाई नागरिकों को किम जोंग के शासन के खिलाफ उकसाना है, ताकि वे तानाशाही के खिलाफ आवाज उठा सकें। वर्तमान में एशिया में सिर्फ उत्तर कोरिया ही ऐसा देश है, जहां तानाशाही शासन है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Sep 2024 10:22:54 +0530</pubDate>
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