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                <title>opposition - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>पश्चिम बंगाल मुख्य सचिव नियुक्ति विवाद: बाबूलाल मरांडी का विपक्ष पर तीखा हमला, बोले- नियुक्ति नियमों और प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुरूप</title>
                                    <description><![CDATA[बाबूलाल मरांडी ने बंगाल के मुख्य सचिव की नियुक्ति पर विपक्षी हंगामे को सियासी पाखंड करार दिया। उन्होंने याद दिलाया कि झारखंड में भी चुनाव के बाद अधिकारियों को अहम पद मिले, पर भाजपा ने कभी जनादेश पर सवाल नहीं उठाया। उन्होंने विपक्षी दलों को हार के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करने वाली मानसिकता छोड़ने की सलाह दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/west-bengal-chief-secretary-appointment-controversy-babulal-marandi-made-a/article-153559"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/marandi.png" alt=""></a><br /><p>रांची। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पश्चिम बंगाल में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) रहे अधिकारी को मुख्य सचिव बनाए जाने को लेकर उठे विवाद पर विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है। मरांडी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में सीईओ रहे अधिकारी की मुख्य सचिव पद पर नियुक्ति को लेकर विपक्ष जिस प्रकार अनावश्यक विवाद खड़ा कर रहा है, वह पूरी तरह राजनीतिक मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि किसी भी अधिकारी की नियुक्ति चुनी हुई सरकार के विवेक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होती है। यदि नियुक्ति नियमों और प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुरूप हुई है, तो केवल राजनीतिक आरोप लगाना उचित नहीं कहा जा सकता।</p>
<p>बाबूलाल मरांडी ने झारखंड का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2019 में जब कांग्रेस, झामुमो और राजद गठबंधन की सरकार बनी थी, उस समय विनय चौबे मुख्य निर्वाचन अधिकारी के रूप में चुनाव प्रक्रिया का संचालन कर रहे थे। बाद में मुख्यमंत्री द्वारा उन्हें प्रधान सचिव नियुक्त किया गया, लेकिन तब भाजपा ने कभी यह आरोप नहीं लगाया कि किसी अधिकारी की भूमिका के कारण जनादेश प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि भाजपा ने हमेशा लोकतांत्रिक प्रक्रिया और जनता के जनादेश का सम्मान किया है।</p>
<p>उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव हारने के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना, भ्रष्टाचार मामलों में जांच एजेंसियों पर भेदभाव का आरोप लगाना और हर प्रशासनिक निर्णय को राजनीतिक रंग देना कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, झामुमो, आम आदमी पार्टी और उनके सहयोगी दलों की पुरानी प्रवृत्ति रही है। मरांडी ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का निर्णय सर्वोपरि होता है और उसे स्वीकार करना ही स्वस्थ राजनीतिक परंपरा की पहचान है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 18:33:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अभिषेक बनर्जी का राज्य सरकार पर हमला: ममता के नेतृत्व में बिना डरे अपनी लड़ाई जारी रखेगी टीएमसी, चुनाव आयोग पर लगाया पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी ने बंगाल चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने मतदाता सूची से 30 लाख नाम हटाने और ईवीएम में गड़बड़ी का दावा करते हुए संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। बनर्जी ने कार्यकर्ताओं को सुरक्षा का भरोसा देते हुए दिल्ली से बंगाल तक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाने का संकल्प लिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/abhishek-banerjees-attack-on-the-state-government-tmc-will-continue/article-153250"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/abhishek-banerjeee.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने शनिवार को कहा कि पार्टी सुश्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में ''बिना डरे और बिना किसी समझौते के'' अपनी लड़ाई जारी रखेगी। अभिषेक ने अपने व्हाॅटसऐप चैनल पर एक पोस्ट में पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रक्रिया की तीखी आलोचना करते हुए बड़े पैमाने पर मतदाताओं को वोट देने से रोकने, संवैधानिक अधिकारियों के पक्षपातपूर्ण व्यवहार तथा पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ चुनाव के बाद हिंसा का आरोप लगाया। उन्होंने कहा लगभग ''30 लाख असली मतदाताओं'' को कथित तौर पर मतदाता सूची से हटा दिया गया था, जिसे उन्होंने ''बहुत मुश्किल चुनाव'' बताया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत चुनाव आयोग के साथ-साथ कई सरकारी एजेंसियों ने पूरे चुनाव के दौरान ''बहुत ज़्यादा पक्षपातपूर्ण व्यवहार'' दिखाया।</p>
<p>उन्होंने कहा, "लोकतांत्रिक संस्थाएं जो निष्पक्ष रूप से काम करने के लिए हैं, वे समझौता करती हुई दिखीं, जिससे पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता, विश्वसनीयता और पारदर्शिता के बारे में गंभीर चिंताएं पैदा हुईं।" उन्होंने मतगणना प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए ईवीएम को संभालने और उनकी मूवमेंट और जिसे उन्होंने "कंट्रोल यूनिट्स का मिसमैच" कहा, उससे जुड़े आरोपों का ज़िक्र किया। उन्होंने मतगणना केन्द्रों से सीसीटीवी फुटेज तुरंत जारी करने तथा लोगों के सामने सच्चाई लाने के लिए वीवीपेट पर्चियों की पारदर्शी गिनती की मांग की।</p>
<p>उन्होंने कहा, "कई परेशान करने वाली घटनाओं ने लाखों लोगों को यह सवाल करने पर मजबूर कर दिया है कि क्या लोगों के असली जनादेश का सम्मान किया गया है। लोकतंत्र तभी बच सकता है जब चुनावी संस्थाएं नागरिकों के बीच भरोसा और विश्वास पैदा करें।" उन्होंने चुनाव के बाद हिंसा और टीएमसी के कार्यालयों और कार्यकर्ताओं पर कथित हमलों की खबरों पर भी चिंता जताई। इन घटनाओं को "बहुत चिंताजनक और एक लोकतांत्रिक समाज में मंज़ूर नहीं" बताते हुए उन्होंने दावा किया कि कई पार्टी कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर धमकाया गया और उन्हें अपने घर छोड़ने पर मजबूर किया गया।</p>
<p>उन्होंने कहा, "लोकतंत्र में किसी भी राजनीतिक कार्यकर्ता को कभी भी अपनी सुरक्षा और अपनी राजनीतिक सोच के बीच चुनना नहीं चाहिए।" उन्होंने चुनावी हार के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की कोशिश करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल के लोगों के साथ मज़बूती से खड़ी रहेगी और "दिल्ली और पश्चिम बंगाल दोनों में एक मज़बूत, मुखर और बिना किसी समझौते वाला विपक्ष" बनी रहेगी।</p>
<p>उन्होंने दोहराया कि "लाेकतंत्र , संवैधानिक मूल्यों और लोगों के अधिकारों और सम्मान" के लिए पार्टी की लड़ाई लगातार जारी रहेगी। उन्होंने पार्टी समर्थकों और कार्यकर्ताओं से भी अपील की कि वे धमकी या हिंसा का सामना करते हुए सीधे उनसे संपर्क करें और किसी भी धमकी या हमले की जानकारी साझा करें। उन्होंने कहा, "मैं उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनी क्षमता के अनुसार सब कुछ करूँगा और हर उपलब्ध कानूनी और लोकतांत्रिक उपाय अपनाऊँगा।" उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि वह आगे की राजनीतिक लड़ाई में उनके साथ "कंधे से कंधा मिलाकर" खड़े रहेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 15:41:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>टालमटोल के बाद जातिगत जनगणना कराने पर सहमत भाजपा सरकार : जातिगत जनगणना की रूपरेखा अब तक अस्पष्ट, जयराम ने सरकार के रख में आए बदलाव को बताया 'नाटकीय यू-टर्न'</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर जातिगत जनगणना को लेकर टालमटोल का आरोप लगाया है। उन्होंने इसे सरकार का 'नाटकीय यू-टर्न' बताते हुए कहा कि घोषणा के एक साल बाद भी कोई स्पष्ट रूपरेखा सामने नहीं आई है। कांग्रेस ने प्रक्रिया में पारदर्शिता और विपक्ष के साथ सार्थक संवाद की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/after-procrastination-bjp-government-agreed-to-conduct-caste-census-outline/article-152163"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/jairam-ramesh1.png" alt=""></a><br /><p>धर्मशाला। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार टालमटोल के बाद भले ही जातिगत जनगणना कराने पर सहमत हुई है लेकिन जनगणना कैसे होगी इसकी रूपरेखा को लेकर अब तक कोई स्पष्ट नीति सामने नहीं आई है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने गुरुवार को सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि आज से ठीक एक वर्ष पहले सरकार ने जनगणना में जातिगत गणना शामिल करने की घोषणा की थी लेकिन एक साल बीतने के बावजूद इसके क्रियान्वयन को लेकर स्थिति अब भी अस्पष्ट बनी हुई है।</p>
<p>उन्होंने इस मुद्दे पर सरकार के रुख में आए बदलाव को 'नाटकीय यू-टर्न' बताते हुए घटनाक्रम का क्रमवार उल्लेख किया और कहा कि 21 जुलाई 2021 को केंद्रीय गृह मंत्री ने लोकसभा में कहा था कि सरकार ने नीति के तौर पर जाति आधारित जनगणना नहीं कराने का निर्णय लिया है। फिर 21 सितंबर 2021 को केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय दायर हलफनामे में भी इसी रुख को दोहराया।</p>
<p>जयराम रमेश के अनुसार 16 अप्रैल 2023 को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर नियमित जनगणना के साथ अद्यतन जाति जनगणना कराने की मांग की थी। इसके बावजूद 28 अप्रैल 2024 को एक साक्षात्कार में इस मांग को 'अर्बन नक्सल' सोच से प्रेरित बताया था। रमेश ने कहा कि इसके ठीक एक वर्ष बाद 30 अप्रैल 2025 को सरकार ने जातिगत जनगणना की घोषणा कर दी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार का रुख लगातार बदलता रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस बयान पर माफी मांगने और देश की जनता को इस बदलाव के कारण स्पष्ट करने की मांग की।</p>
<p>उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जातिगत जनगणना की प्रक्रिया को लेकर अब तक न तो विपक्षी दलों, न राज्य सरकारों और न ही विषय विशेषज्ञों के साथ कोई सार्थक संवाद किया गया है। उन्होंने कहा कि पांच मई 2025 को खरगे द्वारा लिखे गए पत्र का भी कोई जवाब नहीं दिया गया, जबकि उसमें उठाए गए मुद्दे आज भी प्रासंगिक हैं। हाल ही में, संपन्न संसद के विशेष सत्र का हवाला देते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार इस महत्वपूर्ण मुद्दे को टालने की मंशा रखती है और अभी तक इसकी स्पष्ट रूपरेखा सामने न आना इसी का संकेत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 15:20:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग तेज : विपक्ष के 73 सांसदों ने दिया प्रस्ताव नोटिस, आयुक्त के खिलाफ लगाए 9 गंभीर आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग तेज हो गई है। विपक्ष के 73 राज्यसभा सांसदों ने उनके खिलाफ प्रस्ताव नोटिस सौंपा। जयराम रमेश ने 9 गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ये संवैधानिक कदाचार की श्रेणी में आते हैं। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयुक्त सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं, जिससे लोकतंत्र की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/demand-to-remove-chief-election-commissioner-intensifies-73-opposition-mps/article-151626"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/6622-copy88.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">नई दिल्ली। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर एक बार फिर राज्यसभा में औपचारिक पहल की है। विपक्ष के 73 सांसदों ने राज्यसभा के महासचिव को प्रस्ताव (रेजोल्यूशन) का नोटिस सौंपा है, जिसमें भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग की गई है। यह नोटिस कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं संचार विभाग प्रभारी जयराम रमेश और तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष ने प्रस्तुत किया है। फिलहाल यह प्रस्ताव केवल राज्यसभा में ही दाखिल किया गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">रमेश ने जानकारी देते हुए कहा कि इस प्रस्ताव में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कुल 9 गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उनके अनुसार, ये आरोप 15 मार्च 2026 के बाद किए गए कार्यों और चूकों से जुड़े हैं, जिन्हें संविधान के अनुच्छेद 324(5) और अनुच्छेद 124(4) के तहत सिद्ध कदाचार माना जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रस्ताव मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023Þ तथा Þन्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968Þ के प्रावधानों के तहत लाया गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">रमेश ने मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर बने रहने को संविधान पर हमला बताते हुए कहा कि यह स्थिति लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं, जो बेहद चिंताजनक है। </span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 17:13:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>बंगाल और तमिलनाडु में भाजपा की होगी एतिहासिक हार, जनगणना के साथ जातीय जनगणना भी कराई जाए : अखिलेश यादव</title>
                                    <description><![CDATA[इटावा में अखिलेश यादव ने भाजपा की ऐतिहासिक हार की भविष्यवाणी करते हुए जातीय जनगणना की मांग दोहराई। उन्होंने सरकार पर विपक्ष के साथ भेदभाव और भू-माफियाओं को संरक्षण देने का आरोप लगाया। सपा प्रमुख ने पिछड़ों और दलितों के हक के लिए आवाज उठाते हुए प्रदेश में महिला सुरक्षा के मुद्दे पर भी तीखा प्रहार किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/bjp-will-face-historic-defeat-in-bengal-and-tamil-nadu/article-151466"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/akhilesh-yadav.png" alt=""></a><br /><p>इटावा। समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दावा किया है कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को ऐतिहासिक हार का सामना करना पड़ेगा। अखिलेश यादव चंबल क्षेत्र के अहेरिया गांव में आयोजित 108 कुंडीय विष्णु यज्ञ में शामिल होने के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि धर्म का मार्ग न्याय और खुशहाली का मार्ग है, जिसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होता और इसी उद्देश्य से वे संतों का आशीर्वाद लेने आए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सोशल मीडिया पर वायरल एक बयान पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” जैसे नारे का संदर्भ समझ से परे है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भाजपा ऐतिहासिक हार की ओर बढ़ रही है और समाजवादी पार्टी की मांग है कि जनगणना के साथ जातीय जनगणना भी कराई जाए, जिससे शोषित और वंचित वर्गों को नीतिगत स्तर पर उनका अधिकार और सम्मान मिल सके। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष के साथ भेदभावपूर्ण कार्रवाई कर रही है और समाजवादी पार्टी को निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वह पिछड़ों और दलितों के पक्ष में खड़ी है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं और भाजपा महिलाओं के हितों के प्रति गंभीर नहीं है।</p>
<p>इटावा के संदर्भ में उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार जिले के साथ भेदभाव कर रही है तथा भूमि पर माफियाओं का कब्जा बढ़ा है। उन्होंने कहा कि सपा सरकार बनने पर भू-माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। गाजीपुर की घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस ने मिलकर समाजवादी पार्टी के लोगों के साथ दुर्व्यवहार किया, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गयी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 17:23:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>महिला आरक्षण पर उत्तर प्रदेश में सियासी घमासान : 30 अप्रैल को विधानमंडल का विशेष सत्र बुलाने का फैसला, सीएम योगी ने विपक्ष पर बोला हमला</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर 30 अप्रैल को विधानमंडल का विशेष सत्र बुलाने का निर्णय लिया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद, सरकार इस सत्र में विपक्ष के 'महिला विरोधी' रुख के खिलाफ निंदा प्रस्ताव ला सकती है। 2027 के चुनावों से पहले यह कदम यूपी की राजनीति में महिला सशक्तिकरण पर आर-पार की जंग छेड़ेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/political-turmoil-in-uttar-pradesh-over-womens-reservation-decision-to/article-151038"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/cm-yogi.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए महिला आरक्षण के मुद्दे पर अपनी राजनीतिक रणनीति तेज कर दी है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश सरकार ने 30 अप्रैल को विधानमंडल का विशेष सत्र बुलाने के प्रस्ताव को रविवार रात कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के जरिए मंजूरी दे दी। संसद में नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक के पारित न हो पाने के बाद इस मुद्दे पर सियासत गरमा गई है। विपक्ष जहां विधेयक की खामियों को गिनाकर अपने विरोध को सही ठहरा रहा है, वहीं भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे को लेकर विपक्ष पर हमलावर है और इसे चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बना रही है।</p>
<p>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही इस मामले में विपक्ष पर तीखा हमला बोल चुके हैं। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्ष के रवैये की तुलना ‘द्रौपदी चीरहरण’ से करते हुए इसे महिला सम्मान और लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया था। सरकारी सूत्रों के अनुसार, 30 अप्रैल को होने वाले इस विशेष सत्र में सरकार महिला आरक्षण पर अपनी स्थिति स्पष्ट करेगी और विपक्ष के रुख को लेकर उसे घेरने की रणनीति अपनाएगी। सत्र के दौरान विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की भी चर्चा है।</p>
<p>चूंकि सत्र बुलाने के लिए सदस्यों को कम से कम सात दिन पहले सूचना देना जरूरी होता है, इसलिए प्रस्ताव को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के जरिए मंजूरी दी गई। अब इसे राज्यपाल की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। सरकार का आरोप है कि विपक्ष महिला सशक्तीकरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर भी राजनीति कर रहा है। वहीं, विपक्ष इस विधेयक को अधूरा और खामियों से भरा बताते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहा है।</p>
<p>ऐसे में 30 अप्रैल को होने वाला यह विशेष सत्र सिर्फ विधायी कार्यवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच सीधी राजनीतिक टकराहट का मंच भी बनेगा, जहां दोनों पक्ष महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर जनता के सामने अपनी-अपनी रणनीति और संदेश रखने की कोशिश करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 13:24:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>महिला आरक्षण बिल गिरने पर विपक्ष ने जश्न मनाकर महिलाओं का अपमान किया: सावित्री ठाकुर </title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर ने महिला आरक्षण बिल न पचने पर विपक्ष के जश्न को स्वर्ण अवसर खोना और महिलाओं का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने राजनीतिक स्वार्थ के कारण ऐतिहासिक विधेयक को रोका। मंत्री ने स्पष्ट किया कि परिसीमन महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए आवश्यक है और देश की नारी शक्ति इसका करारा जवाब देगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/savitri-thakur-opposition-insulted-women-by-celebrating-when-womens-reservation/article-151018"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)23.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि महिला आरक्षण से जुड़ा यह विधेयक पारित हो जाता, तो यह वर्ष इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाता। उन्होंने कहा कि 2023 में विपक्ष ने चुनावी मजबूरी के कारण इसका समर्थन किया, लेकिन बाद में अपने राजनीतिक हितों के चलते इसका विरोध किया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं को हर योजना के केंद्र में रखा है और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए अनेक योजनाएं लागू की हैं। इस बिल से महिलाओं में एक नई उम्मीद जगी थी कि उन्हें राजनीति में उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा। सावित्री ठाकुर ने कहा कि विपक्षी दलों को यह डर था कि इससे उनके राजनीतिक समीकरण प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने स्पष्ट किया था कि किसी भी राज्य के हितों को नुकसान नहीं होगा, इसके बावजूद भ्रम फैलाया गया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि जब यह बिल पारित नहीं हो सका, तो देशभर की महिलाओं में निराशा फैल गई, जबकि विपक्ष ने जश्न मनाया, जो महिलाओं का अपमान है। उन्होंने कहा कि देश की महिला शक्ति इसका जवाब अवश्य देगी। उन्होंने यह भी कहा कि बढ़ती जनसंख्या के मद्देनजर परिसीमन आवश्यक है, जिससे महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिल सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 16:50:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विपक्ष ने महिलाओं को सिर्फ वोट बैंक समझा, महिला सशक्तिकरण उनका सिर्फ नारा: भजनलाल शर्मा</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विपक्ष पर महिलाओं को महज 'वोट बैंक' समझने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नकारात्मक रवैये ने महिला आरक्षण बिल में बाधा डाली, जो लोकतंत्र के लिए एक काला अध्याय है। सीएम ने उज्ज्वला और लखपति दीदी जैसी योजनाओं का जिक्र कर प्रधानमंत्री मोदी के महिला सशक्तिकरण संकल्प को दोहराया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/opposition-considered-women-as-just-vote-bank-women-empowerment-is/article-151017"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/bjp.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विपक्ष पर महिलाओं के मुद्दे पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष ने हमेशा महिलाओं को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया है, जबकि महिला सशक्तिकरण उनके लिए केवल एक नारा भर रहा है। उन्होंने कहा कि समय आने पर महिलाएं इस मानसिकता का जवाब देंगी।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जिन दलों की सरकारें लंबे समय तक रहीं, उन्होंने कभी भी महिलाओं को उनका अधिकार देने के लिए ठोस प्रयास नहीं किए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में आरक्षण देने की दिशा में पहल की, लेकिन विपक्ष के नकारात्मक रवैये के कारण यह प्रयास सफल नहीं हो सका।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इस मुद्दे से देश की माताओं-बहनों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है। विपक्ष ने अपनी राजनीति के कारण इसे एक “काला अध्याय” बना दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने सदन में हर सवाल का जवाब दिया और दलगत राजनीति से ऊपर उठकर समर्थन की अपील की, लेकिन विपक्ष ने महिला विरोधी रुख अपनाया।</p>
<p>भजनलाल शर्मा ने कहा कि भारतीय संस्कृति में महिलाओं को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी समाज की प्राथमिकता में महिलाओं को सबसे ऊपर रखा है। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद केंद्र सरकार ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियानों के माध्यम से लिंगानुपात सुधारने और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए काम किया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि शौचालय निर्माण, उज्ज्वला योजना, लखपति दीदी जैसी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। इसके बावजूद विपक्ष ने इन योजनाओं का भी विरोध किया और महिलाओं के अधिकारों के प्रति उदासीनता दिखाई। मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों को परिवारवादी बताते हुए कहा कि ये दल महिलाओं को आगे बढ़ते नहीं देखना चाहते। उन्होंने आरोप लगाया कि नारी शक्ति वंदन बिल को भी सोची-समझी रणनीति के तहत रोका गया और बाद में उसी पर राजनीति की गई।</p>
<p>उन्होंने कहा कि विपक्ष ने हमेशा देशहित के मुद्दों का विरोध किया है, चाहे वह नागरिकता संशोधन कानून (CAA) हो या अन्य राष्ट्रीय पहलें। उन्होंने कहा कि महिलाएं इस विश्वासघात को कभी नहीं भूलेंगी और चुनाव में इसका जवाब देंगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 16:45:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सम्राट चौधरी का कांग्रेस पर हमला : संसद में महिला आरक्षण पर विपक्ष का रवैया देश की आधी आबादी का अपमान, विपक्ष को सुनाई खरी खोटी</title>
                                    <description><![CDATA[बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने महिला आरक्षण बिल गिरने पर विपक्ष के जश्न को 'शर्मनाक' बताया। उन्होंने कांग्रेस और सपा पर परिवारवाद का आरोप लगाते हुए कहा कि ये दल केवल अपने घर की महिलाओं को सत्ता में देखना चाहते हैं। चौधरी ने इसे देश की आधी आबादी के साथ धोखा और लोकतंत्र का काला दिन करार दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/samrat-chaudharys-attack-on-congress-oppositions-attitude-on-womens-reservation/article-151005"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/samrat-choudhary.png" alt=""></a><br /><p>पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के लोकसभा में पारित नहीं होने के बाद विपक्ष खुशियाँ मना रहा है, जो सही मायने में देश की आधी आबादी का अपमान है। मुख्यमंत्री चौधरी ने आज भाजपा प्रदेश कार्यालय में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की महिला नेताओं के साथ आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि संसद के विशेष सत्र में नारी शक्ति के साथ धोखा हुआ। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के इतिहास में यह शर्मनाक घटना थी, जब महिलाओं के अपमान पर कांग्रेस, द्रविण मुनेत्र कड़गम (डीएमके), तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) तथा समाजवादी पार्टी(सपा) जैसे दल खुशियाँ मना रहे है। उन्होंने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है, काफी समय पहले लालू प्रसाद भी बिल फाड़ते नजर आये थे।</p>
<p>सम्राट चौधरी ने कहा कि महिला आरक्षण का विरोध वह पार्टियाँ कर रही हैं, जो चाहती हैं कि उनके घर की महिलाएं और बेटियां सांसद तथा विधायक बनें, लेकिन किसी गरीब की बेटी को यह उपलब्धि हासिल नहीं हों। उन्होंने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी को अपनी बहन की चिंता है, लेकिन देश की दूसरी बेटियों के बारे में वह नहीं सोचते हैं। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव को अपनी पत्नी की चिंता है, लेकिन उत्तरप्रदेश से 40 महिला सांसद चुन कर लोकसभा में जाएँ, यह बात उन्हें मंजूर नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 16:32:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महिला आरक्षण मुद्दे पर सियासत तेज: कांग्रेस ने भाजपा मुख्यालय के समीप किया विरोध प्रदर्शन, महिलाओं के मुद्दे पर गंभीर नहीं होने का लगाया आरोप </title>
                                    <description><![CDATA[महिला आरक्षण विधेयक के मुद्दे पर कांग्रेस ने भाजपा मुख्यालय के समीप जोरदार प्रदर्शन किया। जयराम रमेश और दीपेंद्र हुड्डा जैसे नेताओं ने केंद्र पर महिलाओं को गुमराह करने का आरोप लगाया। विपक्ष का कहना है कि सरकार आरक्षण को परिसीमन से जोड़कर देरी कर रही है, जो महिलाओं के साथ सरासर धोखा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/politics-intensifies-on-womens-reservation-issue-congress-protests-near-bjp/article-150999"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/congress2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय के समीप जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए और केंद्र सरकार पर महिलाओं के मुद्दे पर गंभीर नहीं होने का आरोप लगाया। प्रदर्शन में जयराम रमेश, दीपेंद्र सिंह हुड्डा, देवेंद्र यादव, अलका लांबा समेत कई सांसद और नेता मौजूद रहे।</p>
<p>कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा, "बीजेपी ने जिस तरह महिलाओं को गुमराह करने की कोशिश की है, उससे उनकी महिला विरोधी मानसिकता साफ झलकती है। उनका असली उद्देश्य महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन लागू करना था। कांग्रेस पार्टी तब तक चैन से नहीं बैठेगी जब तक देश में महिला आरक्षण लागू नहीं हो जाता।"</p>
<p>वहीं कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, "2014 से नरेंद्र मोदी देश का नेतृत्व कर रहे हैं, लेकिन 2026 तक महिलाओं के साथ केवल धोखा हुआ है। सरकार महिला आरक्षण को लेकर गंभीर नहीं है। बीजेपी और प्रधानमंत्री केवल यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि वे महिलाओं के पक्ष में हैं, जबकि हकीकत इसके उलट है।" ग़ौरतलब है कि महिला आरक्षण मुद्दे को लेकर राजनीति तेज है सत्ता पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 14:32:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>महिलाओं को आरक्षण के अधिकार से वंचित रखने का उत्सव मना रहे विपक्षी दल : उन्हें परिसीमन की व्यवस्था पर विश्वास नहीं, रविशंकर ने कहा- संविधान को नहीं समझती कांग्रेस</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा ने कांग्रेस पर महिलाओं के 33% आरक्षण का विरोध करने का आरोप लगाया। स्मृति इरानी ने कहा, कांग्रेस की “सामंतवादी सोच” महिलाओं को अधिकार से वंचित करती रही। उन्होंने शौचालय, बैंक खाते और स्वास्थ्य योजनाओं की कमी गिनाई। रविशंकर प्रसाद ने प्रियंका गांधी के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा, महिलाओं को “इस्तेमाल” बताना अपमानजनक है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/opposition-parties-are-celebrating-depriving-women-of-their-right-to/article-150945"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/6622-copy69.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस और उसके समर्थक दलों पर आरोप लगाया है कि वे महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण के अधिकार से वंचित रखने का उत्सव मना रहे हैं और इससे उनका असली चेहरा उजागर हो रहा है। सांसद रविशंकर प्रसाद तथा पार्टी की वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी ने भाजपा मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया। ईरानी ने कहा कि कांग्रेस और उसके समर्थक दल उत्सव मना रहे हैं कि जो महिलाएं 33 फीसदी का आरक्षण मांग रही थीं, उन्हें अधिकार से वंचित रखा गया। उन्होंने कहा कि महिलाएं उनके द्वारा दिये गये हर दर्द को ध्यान रखेंगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस ने यह कटाक्ष किया कि भाजपा के कुछ लोगों ने मसीहा बनने का प्रयास किया। यह सामंतवादी सोच की निशानी है, जिन्हें लगता है कि लोकतंत्र में किसी को संवैधानिक अधिकार दिलाया जाए, तो वह अधिकार दिलाने वाला कोई मसीहा होगा। उन्होंने कहा कि महिलाएं ध्यान रखेंगी कि जब 6 दशक तक कांग्रेस के पास सत्ता थी, तो 11 करोड़ महिलाएं शौचालय से वंचित रहीं। ईरानी ने कहा कि महिलाएं ध्यान रखेंगी कि 25 करोड़ महिलाओं को बैंक का खाता खोलने में कांग्रेस सरकार से कोई मदद नहीं मिली। कांग्रेस के कार्यकाल में 10 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का सहयोग प्राप्त नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि महिलाएं यह भी ध्यान रखेंगी कि 33 फीसदी आरक्षण का विधेयक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार में पारित कराया गया था। उन्होंने कहा, मैं स्तब्ध हूं कि कांग्रेस ने यह कहा कि वे 2023 में पारित विधेयक का वो समर्थन करते हैं, लेकिन उन्हें परिसीमन की व्यवस्था पर विश्वास नहीं है। कांग्रेस ने अपना क्रूर चेहरा देश की जनता के सामने उजागर किया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रसाद ने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस के मंच से उनकी महिला सांसद की तरफ से कहा गया कि महिलाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। क्या महिलाएं इस्तेमाल का विषय हैं? यह कैसी भाषा है? जिस देश की नारी दुर्गा, काली, सरस्वती और मां है, उसे इस्तेमाल की वस्तु बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसी सोच के कारण विधेयकों को संयुक्त प्रगतिशील गठबंध (संप्रग) के समय में फाड़ दिया जाता था। उन्होंने कहा, यह नहीं मानता हूं कि कांग्रेस संविधान को नहीं समझती है। वह संविधान को समझती है, लेकिन जानबूझकर नहीं समझने का नाटक भी करती है। उन्होंने कहा कि विधानसभा या लोकसभा की सीटों का पुनर्गठन परिसीमन के बिना नहीं हो सकता। परिसीमन जनसंख्या के आधार पर होता है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 19:02:12 +0530</pubDate>
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                <title>सरकार परिसीमन की आड़ में देश का निर्वाचक मानचित्र बदलना चाहती है : राहुल गांधी</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने परिसीमन विधेयक का पुरजोर विरोध करते हुए इसे ओबीसी और दलितों के हितों पर हमला बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आरक्षण के नाम पर जनता को भ्रमित कर रही है और चुनावी लाभ के लिए भारत का चुनावी नक्शा बदलना चाहती है। राहुल ने इसे 'मनुवाद' का प्रयास करार दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-government-wants-to-change-the-electoral-map-of-the/article-150845"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/rahul-gandhi-on-mnerga.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। लोक सभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि सरकार परिसीमन की आड़ में भारत का निर्वाचक मानचित्र बदल देना चाहती है लेकिन इससे महिलाओं का सशक्तीकरण नहीं होने वाला है। राहुल गांधी ने संसदीय सीटों के परिसीमन विधेयक का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह 'देश द्रोह' है और विपक्ष इसे किसी कीमत नहीं होने देगा। राहुल गांधी ने परिसीमन विधेयक 2026, संविधान ( एक सौ इकतीसवां संशोधन ) विधेयक 2026 और संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक 2026 पर हो रही चर्चा में शामिल होते हुए यह भी कहा कि सरकार लोक सभा सीटों का परिसीमन और विधायिका में महिलाओं का आरक्षण जिस तरह से देना चाहती है, वह अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) , दलितों और अल्पसंख्यकों के हितों पर हमला है। विपक्षी सदस्य इसका कड़ा विरोध करते हैं।</p>
<p>उन्होंने सत्ता पक्ष से कहा, "आप ओबीसी को, दलितों को हिन्दू तो कहते हैं लेकिन सत्ता में उन्हें स्थान नहीं देते। आप इन्हें हिन्दू तो कहते हैं, लेकिन इन्हें कोई स्थान नहीं देते। कार्पोरेट में ओबीसी, दलित कहां हैं, शिक्षा क्षेत्र में वंचित वर्ग कहां है, निजी क्षेत्र में ओबीसी-दलित कहां हैं। सार्वजनिक क्षेत्र से वंचित वर्गों को हटाया जा रहा है।" राहुल गांधी ने सरकार से कहा कि महिलाओं को विधायिका में आरक्षण देने वाला पुराना विधेयक लाइये, वह उसका समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा कि अतीत में ओबीसी, दलित और अल्पसंख्यकों के लोगों के साथ बहुत क्रूर बर्ताव किया गया। अब यह विधेयक लाकर उनके साथ बिल्कुल वही काम किया जा रहा है। ऐसा काम किया जा रहा है, जिससे पिछड़ों और दलितों के हाथ में सत्ता कभी न आने दी जाये। उन्होंने कहा, " मनुवाद संविधान पर हावी है। "</p>
<p>विपक्ष के नेता ने कहा कि सरकार जनता को भ्रमित करना चाहती है, वह जानती है कि संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं होगा। वह महिलाओं को विधायिका में आरक्षण देने के नाम पर चुनावी लाभ लेना चाहती है। अध्यक्ष ओम बिरला ने राहुल गांधी से कहा कि वह ऐसा कुछ नहीं कहें, जो सदन की गरिमा और मर्यादा के खिलाफ हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 18:06:39 +0530</pubDate>
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