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                <title>youth - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>वसुंधरा राजे ने युवाओं को दिया संदेश : पूर्व सीएम ने कहा- युवा ड्रग्स से दूर रहें, इनोवेशन और स्टार्टअप से देश की प्रगति में दें योगदान </title>
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                        <![CDATA[वसुंधरा राजे ने कहा कि राजस्थानियों का प्यार ही उनके लिए सबसे बड़ा पद। ‘सशक्त युवा-सशक्त राष्ट्र’ सम्मेलन में उन्होंने युवाओं से ड्रग्स से दूर रहने, एआई व क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी तकनीकों को अपनाने का आह्वान। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/vasundhara-raje-gave-a-message-to-the-youth-stay-away/article-145637"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px)14.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पूर्व सीएम वसुन्धरा राजे ने कहा है कि राजस्थानियों का प्यार ही मेरे लिए सबसे बड़ा पद है।उन्होंने कहा कि राजनीति में सब लोगों को पद चाहिए।काम अच्छा करों,पद आपके पास खुद चलकर आएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ड्रग्स का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। युवा इससे दूर रहें और इसे रोकने में सरकार का सहयोग करें।</p>
<p>पूर्व सीएम ने कहा कि भारतीय मूल के गूगल सीईओ सुंदर पिचाई जैसे युवा मानव कैपिटल के श्रेष्ठ उदाहरण हो सकते है तो राजस्थान के युवा क्यों नहीं? राजस्थान के युवा विदेशों में जाकर नाम कमा सकते हैं,तो यहाँ रह रहे युवा क्यों नहीं ? राजे शनिवार को युवा शक्ति परिषद राजस्थान द्वारा आयोजित ‘सशक्त युवा-सशक्त राष्ट्र’ सम्मेलन में बोल रही थी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि युवा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत को विश्व गुरु बनाने की दिशा में काम करें।युवा एआई और नई तकनीक क्वांटम कंप्यूटिंग का सदुपयोग करें।इनमें जो आगे होगा,वही दुनिया का नेतृत्व करेगा।डिसीजन मेकिंग में युवाओं की सक्रिय भागेदारी होना चाहिए है।वे बोली स्वीडन,जापान और जर्मनी ने युवाओं में निवेश करके ही प्रगति की है।भारत भी युवाओं को आगे ला रहा है।युवा असंभव को संभव कर सकते हैं।आसमां छू सकते हैं।सितारे तोड़ सकते हैं।दुनिया बदल सकते है।युवा नौकरी करने वाले नहीं,नौकरी देने वाले बनें।विवेकानन्‍द जी भी यही कहते थे कि संसार की संपूर्ण शक्तियाँ अगर किसी में निहित है तो वह भारत के युवाओं के अंदर है।आज भारत में इनोवेशन,इन्क्यूबेशन और स्टार्टअप की नई धारा का नेतृत्‍व युवा ही तो कर रहें है।आज स्टार्टअप इको सिस्टम में भारत दुनियाँ के टॉप थ्री देशों में है।यह युवाओं की मेहनत का ही फल है।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Mar 2026 16:29:35 +0530</pubDate>
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                <title>परीक्षा पर चर्चा-2026: पीएम मोदी ने कहा, परीक्षा में सफलता की गारंटी आत्मविश्वास होता है, हड़बड़ी नहीं </title>
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                        <![CDATA[पीएम मोदी ने परीक्षा पर चर्चा में छात्रों से कहा कि तनाव नहीं, लक्ष्य, धैर्य, आत्मविश्वास और सपने पर ध्यान दें, हड़बड़ी छोड़ समझदारी से पढ़ें, निरंतर मेहनत।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/discussion-on-examination-2026-pm-modi-said-that-the-guarantee-of/article-142131"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(1)5.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि छात्रों को परीक्षा के लिए तनाव पालने और ज्यादा नंबर लाने की होड़ की सोच पर ध्यान देने की बजाय जीवन के लक्ष्य की कसौटी पर खुद को कसते हुए निरंतर और धैर्य तथा आत्मविश्वास के साथ काम करते रहने की जरूरत पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।</p>
<p>पीएम मोदी ने शुक्रवार को यहां अपने आवास पर 'परीक्षा पर चर्चा' को लेकर देश की विभिन्न हिस्सों से आए बच्चों से संवाद के कार्यक्रम में बच्चों से बात करते हुए कहा कि परीक्षा को बोझ नहीं मानना है और उसे आसानी से लेते हुए अपनी पढ़ाई करनी है। उन्होंने पुराने पेपर देखकर तैयारी करने को पुरानी बीमारी बताया और कहा कि नए दौर ने इसका कोई औचित्य नहीं है। यह एक तरह की बीमारी है इसलिए सहज रूप से अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए तैयारी करनी चाहिए और परीक्षा को तनाव की वजह या बोझ नहीं बनाना चाहिए।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी से एक बच्चे ने सवाल किया कि जीवन में सपना पलना जरूरी है, पीएम मोदी ने कहा कि सपना ना देखना जीवन के साथ सबसे बड़ा अपराध है। सपने से ही लक्ष्य बनते हैं और उससे शक्ति के साथ जीवन मे आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिलती है। कठिन से कठिन सपने को पाने के लिए अनुकूल मेहनत कर ही उसे पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बच्चों को खुद का आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए महापुरुषों की जीवनियां पढऩी चाहिए।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा कि किसी भी परीक्षा के लिए आत्मविश्वास जरूरी है और आत्मविश्वास तभी आता है जब सच्चे मन से अपने विषय को अपने लक्ष्य के अनुसार पढ़ते हैं। उनका कहना था कि परीक्षा के समय हड़बड़ी नहीं करनी होती है क्योंकि हड़बड़ी से सब कुछ गड़बड़ हो जाता है इसलिए हड़बड़ी के बजाय आत्मविश्वास और पूरी समझ के साथ ध्यान लगाकर अपने विषय के प्रश्नपत्र को हल करना है। हड़बड़ी के कारण कई बार जो सवाल आते हैं वे भी गड़बड़ा जाते हैं जितनी भी मेहनत की होती है वह सब कुछ बेकार हो जाता है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि अब वह समय नहीं है कि जब कहा जाता था कि सफलता उन्हीं को मिलती है जिनके पास सारी सुविधा होती है लेकिन अब हालात बदल गए है। गरीब से गरीब घर के बच्चे भी सर्वोत्तम अंकों के साथ परीक्षा पास कर रहे हैं। उन्होंने इसकी वजह स्वतंत्र सोच और सुविधा अनुसार पढ़ाई करने को बताया।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने बच्चों से कहा कि हर चीज का एक पैटर्न होता है और अनुभव के आधार पर उसे बदला जा सकता है। उनका कहना था कि परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम उन्होंने जिस पैटर्न पर पहले शुरू किया था उसमें अनुभव के आधार पर धीरे-धीरे बदलाव उंन्होने लाया है। इसी तरह से हर बच्चे को अनुभव के आधार पर अपने कार्यों में बदलाव लाना चाहिए।</p>
<p>बच्चों से संवाद करने के बाद पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें लगता है कि अब देश के विभिन्न हिस्सों में बच्चों से परीक्षा पर चर्चा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कई राज्य में उन्होंने यह कार्यक्रम किए हैं और उन्हें लगता है की और कार्यक्रम अन्य राज्यों में भी किए जाने चाहिए।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 12:00:23 +0530</pubDate>
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                <title>भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने केंद्रीय बजट को विकसित भारत की संकल्पना को साकार करने वाला विजन पत्र बताया, पायलट पर किया पलटवार</title>
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                        <![CDATA[उदयपुर में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने केंद्रीय बजट को गरीब, किसान, युवा और महिलाओं के सशक्तिकरण वाला विकसित भारत का मजबूत विजन बताया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/rathods-vision-letter-realizing-the-concept-of-budget-developed-india/article-141758"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/madan-rathore-22.jpg" alt=""></a><br /><p>उदयपुर। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष व राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ ने केंद्र सरकार की ओर से लोकसभा में प्रस्तुत बजट को विकसित भारत के संकल्प को ठोस आधार देने वाला बताते कहा कि यह बजट गरीब, किसान, युवा, महिला, मध्यम वर्ग और उद्यमी-सभी के सशक्तिकरण की स्पष्ट दिशा दिखाता है। इसे केवल बजट कहना न्यायसंगत नहीं होगा, बल्कि यह विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को साकार करने वाला विजन पत्र है। </p>
<p>राठौड़ सोमवार को पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह हर नागरिक के सपनों और आकांक्षाओं की मजबूत नींव रखने वाला है। उन्होंने कहा कि सरकार की पहचान रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म रही है और इस रिफॉर्म एक्सप्रेस का सबसे मजबूत इंजन नारी शक्ति है। बजट में महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और स्वावलंबन को केंद्र में रखा गया है। देशभर के प्रत्येक जिले में एक महिला छात्रावास की स्थापना का प्रस्ताव है, जिसके लिए लगभग 10,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। </p>
<p>सफल लखपति दीदी योजना का विस्तार कर महिलाओं को उद्यमी बनाने पर जोर दिया जाएगा। युवाओं के सपनों को उड़ान देने के लिए, कौशल विकास और रोजगार के व्यापक अवसर सृजित किए गए हैं। इसमें 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 महाविद्यालयों में ए.वी.जी.सी. कंटेंट क्रिएटर लैब की स्थापना शामिल है। किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को आधुनिक बनाने के लिए भारत-विस्तार नामक बहुभाषीय ए.आई. टूल का उपयोग किया जाएगा।  </p>
<p>पायलट को क्या पता आटे-दाल का भाव</p>
<p>पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने केंद्रीय बजट को दिशाहीन एवं भ्रमित बताया था। राठौड़ ने पायलट पर पलटवार करते कहा कि सचिन पायलट को कभी कुछ खरीदने को मिला है क्या, वे स्व. राजेश पायलट के बेटे हैं। उनका आटे-दाल के भाव थोड़ी पता है। इससे एक दिन पूर्व पायलट ने कहा था कि महंगाई नियंत्रण के लिए कोई सशक्त और ठोस उपाय बजट में नहीं है। वहीं पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने केंद्रीय बजट को प्रदेश के साथ हो रहे सौतेलेपन की झलक बताया था। इस पर राठौड़ ने कहा कि गहलोत हमारे बजट की तारीफ करेंगे तो उनकी दुकान खाली हो जाएगी। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>उदयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Feb 2026 13:10:49 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>बांग्लादेश में चोरी के शक में पीछे पड़ी भीड़ : बचने के लिए पानी में कूदा हिंदू युवक, डूबने से मौत </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[पुलिस के अनुसार भीड़ द्वारा पीछा किए जाने पर मिथुन ने जान बचाने के लिए पानी में छलांग लगा दी, लेकिन डूबने से उसकी मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस मामले की जांच कर रही है।]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/bangladesh-some-hindu-youth-died-due-to-drowning-in/article-138731"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)21.png" alt=""></a><br /><p>ढाका। बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला नौगाँव का है, जहां चोरी के आरोप में भीड़ से बचने के लिए भाग रहे एक हिंदू युवक की मौत हो गई। मृतक की पहचान मिथुन सरकार के रूप में हुई है।</p>
<p>पुलिस के अनुसार भीड़ द्वारा पीछा किए जाने पर मिथुन ने जान बचाने के लिए पानी में छलांग लगा दी, लेकिन डूबने से उसकी मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस मामले की जांच कर रही है।</p>
<p> </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Jan 2026 14:37:51 +0530</pubDate>
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                <title>दो साल पूरे: अमर जवान ज्योति से ‘रन फॉर विकसित राजस्थान’, सीएम भी दौड़े युवाओं संग</title>
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                        <![CDATA[राज्य सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अमर जवान ज्योति से ‘रन फॉर विकसित राजस्थान’ को हरी झंडी दिखाई। उन्होंने युवाओं के साथ दौड़ में भाग लिया और खेलो इंडिया पदक विजेताओं को सम्मानित किया।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/run-for-developed-rajasthan-cm-also-ran-with-the-youth/article-136678"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/run-for-devlopment-rajsthan.png" alt=""></a><br /><p>राज्य सरकार के दो वर्ष पूरे होने के मौके पर रविवार सुबह राजधानी में खास नज़ारा दिखा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अमर जवान ज्योति से ‘रन फॉर विकसित राजस्थान’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवाओं, खिलाड़ियों और आम लोगों ने भाग लिया।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने केवल झंडी दिखाकर औपचारिकता नहीं निभाई, बल्कि खुद प्रतिभागियों के साथ दौड़ में शामिल होकर उनका उत्साह बढ़ाया। दौड़ के दौरान मुख्यमंत्री का खिलाड़ियों और युवाओं के साथ संवाद भी हुआ, जिससे माहौल पूरी तरह उत्सवमय नजर आया।</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया। उन्होंने खिलाड़ियों को प्रदेश का गौरव बताते हुए कहा कि खेलों के माध्यम से राजस्थान नई पहचान बना रहा है और सरकार युवाओं को हर स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘विकसित राजस्थान’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि सरकार का संकल्प है, जिसमें युवाओं, खिलाड़ियों और आमजन की भागीदारी सबसे अहम है। दौड़ के माध्यम से फिटनेस, अनुशासन और सकारात्मक सोच का संदेश भी दिया गया।</p>
<p>‘रन फॉर विकसित राजस्थान’ में उत्साह, ऊर्जा और संकल्प की झलक साफ दिखाई दी, जिसने राजधानी की सड़कों को कुछ देर के लिए जश्न में बदल दिया।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Dec 2025 12:24:10 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>युवाओं को भा रहे मॉडर्न और राजस्थानी थीम वाले आर्ट वर्क, कैफे कल्चर में कला का नया रंग</title>
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                        <![CDATA[गुलाबी नगरी के कैफे कल्चर में इन दिनों कला की एक नई चमक देखने को मिल रही है। शहर के कई कैफेज अपनी दीवारों पर अनोखे और आकर्षक आर्ट वर्क बनवाकर युवाओं का ध्यान खींच रहे हैं। इन खूबसूरत आर्ट वॉल्स का ट्रेंड इतना बढ़ गया है कि कैफे में एक फोटो-फ्रेंडली स्पेस का आनंद लेने जैसा हो गया है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/modern-and-rajasthani-themed-art-work-is-appealing-to-the/article-134769"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/111-(1200-x-600-px)-(1).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। गुलाबी नगरी के कैफे कल्चर में इन दिनों कला की एक नई चमक देखने को मिल रही है। शहर के कई कैफेज अपनी दीवारों पर अनोखे और आकर्षक आर्ट वर्क बनवाकर युवाओं का ध्यान खींच रहे हैं। इन खूबसूरत आर्ट वॉल्स का ट्रेंड इतना बढ़ गया है कि कैफे में एक फोटो-फ्रेंडली स्पेस का आनंद लेने जैसा हो गया है।</p>
<p><strong>मॉडर्न ग्रैफिटी और कलर्स का क्रिएटिव उपयोग</strong><br />शहर के कलाकार बताते हैं कि हर कैफे अपने कॉन्सेप्ट के अनुसार आर्ट डिजाइन तैयार करवाता है। कहीं सॉफ्ट पेस्टल शेड्स और मॉडर्न ग्रैफिटी का मेल नजर आता है, तो कहीं बोल्ड स्ट्रोक्स और डार्क टोन एक अलग ही माहौल बना देते हैं।</p>
<p><strong>युवाओं में 3डी आर्ट का क्रेज</strong><br />सुनील शर्मा ने बताया कि हाल ही में 3डी वॉल पेंटिंग्स कैफे की खास पहचान बनती जा रही हैं। उड़ती कॉफी, दीवार से बाहर निकलती आकृतियां, गली जैसे रियलिस्टिक सीन, ये सभी पेंटिंग्स युवाओं को खूब लुभा रही हैं।</p>
<p><strong>राजस्थानी कला का पारंपरिक सौंदर्य भी आकर्षण का केंद्र</strong><br />कैफेज में पधारो म्हारे देश थीम, हवेलियों के झरोखे, घूमर आर्ट जैसे पारंपरिक राजस्थानी पेंटिंग्स भी बड़ी संख्या में बनाई जा रही हैं। मॉडर्न और ट्रेडिशनल आर्ट का यह मेल कैफेज को एक अलग पहचान दे रहा है। युवाओं के मुताबिक, ये आर्ट वॉल्स कैफे के माहौल को न सिर्फ खूबसूरत बनाते हैं ।</p>
<p>कैफेज में युवाओं को लुभाने के लिए कैफे मालिक कैफेज में पधारो म्हारे देश थीम, हवेलियों के झरोखे, घूमर, लोक जीवन, मिनिएचर आर्ट जैसे पारंपरिक राजस्थानी पेंटिंग्स ज्यादा बनवा रहे है।<br />चंद्रशेखर सैन (कलाकार)</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Dec 2025 11:36:52 +0530</pubDate>
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                <title>युवाओं में बढ़ता एकांत कितना खतरनाक</title>
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                        <![CDATA[वर्तमान दौर में भारत तेजी से आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/how-dangerous-is-increasing-loneliness-among-youth/article-133544"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/1200-x-600-px--(3)2.png" alt=""></a><br /><p>वर्तमान दौर में भारत तेजी से आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है। तकनीक, अर्थव्यवस्था, शिक्षा, रोजगार और जीवनशैली में हो रहे परिवर्तनों ने हमारे समाज को अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ाया है। इस विकास यात्रा में युवा वर्ग सबसे अधिक ऊर्जावान, रचनात्मक और बदलाव का वाहक माना जाता है। युवा सपनों, साहस और संभावनाओं से भरे होते हैं। परंतु इसी चमकदार परिदृश्य के भीतर एक गहरा और लगातार बढ़ता संकट जन्म ले चुका है-एकांत, अकेलापन और भावनात्मक विखंडन। आज यह अकेलापन केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि एक मौन मानसिक महामारी का रूप लेने लगा है। प्रश्न यह है कि इतनी आधुनिकता, इतनी सुविधा और इतनी तकनीक के बीच भी युवा कहां और क्यों अकेले पड़ते जा रहे हैं। स्मार्टफोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया ने दावा किया था कि वे लोगों को दुनिया से जोड़ देंगे। पर विडम्बना यह है कि यही तकनीक युवाओं को अपने भीतर कैद करने लगी है।</p>
<p><strong>संवाद का अभाव : </strong></p>
<p>दिन-रात ऑनलाइन रहने के बावजूद युवाओं में असली संवाद का अभाव बढ़ता गया है। बातचीत शब्दों से सिमटकर इमोजी में बदल गई है और दोस्ती गहरे रिश्तों से हटकर फॉलोअर्स और लाइक्स की गिनती बनकर रह गई है। युवा घंटों ऑनलाइन रहते हैं, लेकिन दिल का बोझ साझा करने के लिए एक भरोसेमंद व्यक्ति ढूंढ़ना उनके लिए कठिन हो गया है। आज का युवा अपने भविष्य को लेकर अत्यधिक सजग है। करियर, नौकरी, प्रतियोगी परीक्षाएं, आर्थिक सुरक्षा और जीवन में कुछ बड़ा कर दिखाने की चाह उसे लगातार दौड़ने पर मजबूर करती है। इस निरंतर दबाव में वह अक्सर यह महसूस करने लगता है कि वह अकेला है, पीछे छूट रहा है, और यदि वह सफल नहीं हुआ, तो जीवन का मूल्य कम हो जाएगा। समाज की अपेक्षाएं, प्रतिस्पर्धा की अंधी होड़ और असफलता का भय युवा मन में एक ऐसी बेचैनी पैदा करते हैं, जो धीरे-धीरे उसे भीतर ही भीतर तोड़ने लगती है। वे खुद को परफॉर्मर समझने लगते हैं, इंसान होने की सादगी और भावनाओं से दूर हो जाते हैं।</p>
<p><strong>एकाकी बना देता है :</strong></p>
<p>असफलता की स्थिति में यह अकेलापन अत्यधिक बढ़ जाता है। ऐसे में उन्हें लगता है कि कोई उनकी स्थिति समझ भी नहीं सकता, और यही विचार उन्हें मानसिक रूप से और अधिक एकाकी बना देता है। भारतीय परिवार पारंपरिक रूप से भावनात्मक सहारा और सुरक्षा का सबसे मजबूत स्तंभ माना जाता रहा है। लेकिन आधुनिक जीवनशैली ने इस नींव को भी हिला दिया है। व्यस्त माता-पिता, ऑफिस के लंबे घंटे, मोबाइल स्क्रीन पर बढ़ता समय, अलग-अलग कमरों में रहने की आदत, और साझा समय का कम होना,इन सबने युवाओं को परिवार से दूरी की ओर धकेल दिया है। जिस उम्र में उन्हें सबसे अधिक मार्गदर्शन, संवाद और समझ की आवश्यकता होती है, उसी उम्र में उनके पास सुनने वाला कोई नहीं होता। परिणामस्वरूप वे अपनी भावनाएं भीतर दबाते रहते हैं, और धीरे-धीरे भावनात्मक खालीपन बढ़ने लगता है। सोशल मीडिया ने सफलता की एक ऐसी कृत्रिम दुनिया निर्माण कर दी है, जिसमें हर कोई खुश, सफल, धनी और संतुष्ट दिखता है।</p>
<p><strong>जीवन की तुलना :</strong></p>
<p>युवा इस सजावट को वास्तविकता मान बैठते हैं और अपने जीवन की तुलना दूसरों से करने लगते हैं। धीरे-धीरे उनके भीतर यह भावना घर कर जाती है कि मेरे पास वह सब नहीं है जो दूसरों के पास है। मेरी जिंदगी पीछे चल रही है। तुलना का यह दबाव उन्हें आत्मसंतोष से दूर कर देता है और वे अपने ही भीतर एकांत का महल बना लेते हैं। आज के रिश्ते पहले जैसे गहरे, स्थिर और दीर्घकालिक नहीं रह गए हैं। अवास्तविक अपेक्षाएं, जल्दबाजी में बनने वाले संबंध, भरोसे की कमी, और सोशल मीडिया की सतही नजदीकियां युवाओं को भावनात्मक रूप से कमजोर कर देती हैं। ब्रेकअप, धोखा या रिश्तों में असफलता का दर्द युवा मन के लिए अत्यंत भारी हो जाता है। बड़े शहरों में रहने वाला युवा दिनभर हजारों लोगों को देखता है, भीड़ में चलता है, भीड़ के बीच काम करता है,परंतु उसके पास दिल की बात कहने वाला कोई नहीं होता। उसके पास होता है, एक छोटा-सा कमरा,एक मोबाइल स्क्रीन,किताबों और असाइनमेंट का दबाव,और मन में पलता अनकहा तनाव।</p>
<p><strong>भावनात्मक मजबूती :</strong></p>
<p>परिवार में प्रतिदिन कम से कम कुछ समय ऐसा होना चाहिए, जब न फोन हो, न टीवी, न अन्य व्यवधान सिर्फ एक-दूसरे की बात सुनने का समय। यही संवाद मानसिक सुरक्षा की पहली सीढ़ी है। स्क्रीन से बाहर की दुनिया को फिर से जीवन का हिस्सा बनाना होगा। दोस्तों के साथ वास्तविक बातचीत, समूह गतिविधियां, खेल, सांस्कृतिक आयोजन और सामुदायिक कार्यक्रम युवाओं को पुन: जीवन से जोड़ सकते हैं। युवाओं को यह समझाना अत्यंत आवश्यक है कि हर व्यक्ति का विकास पथ अलग होता,सोशल मीडिया पर दिखने वाली सफलताएं वास्तविकता का पूरा चित्र नहीं होतीं। असफलता को अंत नहीं, बल्कि नए आरंभ का अवसर समझाया जाए। युवाओं को अपनी भावनाओं को पहचानने, उन्हें व्यक्त करने और उन्हें स्वस्थ तरीके से संभालने की कला सिखानी चाहिए। यह कौशल उन्हें जीवन भर मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखेगा।</p>
<p><strong>-डॉ. वीरेन्द्र भाटी मंगल</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Nov 2025 12:49:15 +0530</pubDate>
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                <title>युवा पीढ़ी राष्ट्र की समृद्धि का आधार</title>
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                        <![CDATA[किसी भी देश के निर्माण, सामाजिक-आर्थिक विकास की प्रक्रिया में, युवाओं-युवा पीढ़ी का हमेशा से ही महत्वपूर्ण स्थान रहा है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/young-generation-is-the-basis-of-nations-prosperity/article-132384"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11-(3)1.png" alt=""></a><br /><p>किसी भी देश के निर्माण, सामाजिक-आर्थिक विकास की प्रक्रिया में, युवाओं-युवा पीढ़ी का हमेशा से ही महत्वपूर्ण स्थान रहा है। युवा पीढ़ी को राष्ट्र की समृद्धि का आधार माना जाता है। भारत अपनी आजादी का अमृत काल मना रहा है, आजादी के लिए अपना बलिदान देने वाले क्रांतिकारियों और आजादी को अक्षुण्य बनाए रखने के लिए संघर्षरत रहे लोगों के बारे में युवा पीढ़ी को बताने व जागरूक करने के उद्देश्य से सामूहिक भागीदारी वाले कई नवाचार और पहल की गई हैं। इन नवाचारों को जनता का भरपूर समर्थन और भागीदारी मिली है। इन पहलों में भौतिक उन्नति के साथ नैतिक गहनता और सांस्कृतिक जीवंतता बनाए रखना सुनिश्चित किया गया है। इन नवाचारों में ऐतिहासिक घटनाओं को पुनर्जीवित करना भी शामिल है। बताते चलें कि अमृत काल शब्द भारत की आजादी के 75वें वर्ष से शुरू होकर अगले 25 वर्षों तक की अवधि को दर्शाता है, जिसमें भारत को एक सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने का लक्ष्य है।</p>
<p><strong>वंदे मातरम के 150 वर्ष :</strong></p>
<p>राष्ट्रीय गौरव, साहस और बलिदान के शाश्वत मूल्यों को लिए वंदेमातरम,जिसका प्रभाव भारत की सीमाओं से परे भी फैला,की 150वीं वर्षगांठ पर देश-विदेश में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। संविधान को अंगीकृत करने की 75वीं वर्षगांठ पर एक वर्ष तक चलने वाले कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने 7 नवम्बर को नई दिल्ली में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक वर्ष तक चलने वाले स्मरणोत्सव का उद्घाटन किया। उन्होंने वंदे मातरम के सामूहिक गान की प्रशंसा करते हुए कहा कि इसके सुखद अहसास को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। यह वर्तमान को आत्मविश्वास से भर देता है और भविष्य में एक नए साहस का संचार करता है, जिससे यह विश्वास पैदा होता है कि किसी भी संकल्प और लक्ष्य पूरा किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि 1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने वंदे मातरम गीत की रचना की थी।</p>
<p><strong>भारत की आत्मा :</strong></p>
<p>वंदेमातरम का अर्थ है, हे मां, मैं तुझे प्रणाम करता हूं। यहां मां से अभिप्राय भारत माता से है। गीत में भारत की धरती, नदियों, पर्वत, उर्वरता, समृद्धि का भावपूर्ण और दिव्यरूप से वर्णन किया गया है। यह गीत मात्र शब्दों का संग्रह ही नहीं है, भारत की आत्मा और देशभक्ति का अनुपम प्रतीक बना हुआ है। वंदे मातरम पहली बार साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में 7 नवंबर 1875 को प्रकाशित हुआ था। बाद में, बंकिम चंद्र ने इसे अपने अमर उपन्यास आनंदमठ में शामिल किया, जो 1882 में प्रकाशित हुआ। रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे संगीतबद्ध किया था और 1896 में कांग्रेस के अधिवेशन में इसे गाया था। 1907 में, मैडम भीकाजी कामा ने पहली बार भारत के बाहर स्टटगार्ट, बर्लिन में तिरंगा झंडा फहराया था। उस झंडे पर वंदे मातरम लिखा हुआ था। संविधान को अपनाने की 75वीं वर्षगांठ पर साल भर चलने वाले समारोह का विषय हमारा संविधान, हमारा स्वाभिमान है, जिसका उद्देश्य संविधान में निहित मूल मूल्यों को दोहराना और नागरिकों को इसके आदर्शों को बनाए रखने के लिए प्रेरित करना है।</p>
<p><strong>विकसित भारत :</strong></p>
<p>हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने पर, वर्ष 2047 तक,देश के सामने एक विकसित भारत का लक्ष्य रखा है। इस दृष्टिकोण का उद्देश्य अपनी समृद्ध विरासत का लाभ उठाकर, परंपरा में निहित नवाचार को बढ़ावा देकर और सांस्कृतिक कूटनीति के माध्यम से वैश्विक प्रभाव को बढ़ाकर सांस्कृतिक रूप से गौरवशाली भारत का निर्माण करना है। आर्थिक और सामाजिक विकास की दिशा में इसे प्रमुख स्तंभ के रूप में माना जा रहा है। भारत के उत्तर और दक्षिण के संबंधों को मजबूत करने के लिए वाराणसी में काशी तमिल संगमम के चौथे संस्करण की शुरुआत होने जा रही है। स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित आर्यसमाज, जो सुधार आंदोलन में मील का पत्थर बनाए की 150वीं वर्षगांठ पर नई दिल्ली में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का शामिल होना उनके सार्वभौमिक उत्थान के उद्देश्य को दर्शाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इसी वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती को जीवन में बदलाव लाने वाले कार्यक्रमों के साथ मनाए जाने की घोषणा की है।</p>
<p><strong>पटेल की 150वीं जयन्ती :</strong></p>
<p>अभी 31 अक्टूबर को ही भारत के भौगोलिक और राजनीतिक एकीकरण में योगदान देने वाले लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयन्ती मनाई गई। सरकार ने 2014 में उनकी जयन्ती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया था। पीएम ने सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर गुजरात के एकता नगर में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर राष्ट्रीय एकता दिवस परेड को संबोधित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी समारोह में हिस्सा लेकर व्यक्ति निर्माण की सुंदर प्रक्रिया को भी सराहा है और संघ की 100 वर्षों की यात्रा को त्याग, नि:स्वार्थ सेवा और राष्ट्र निर्माण की अद्भुत मिसाल बताया। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार विकसित भारत / 2047 की संकल्पना को साकार करने में जुटी है जहां पूरे समाज में वसुधैव कुटुंबकम के भाव को विकसित करना है। हम भाग्यशाली हैं कि देश में हमारी सांस्कृतिक परंपराओं और सभ्यतागत मूल्यों पर गर्व का पुनरुत्थान हो रहा है।</p>
<p><strong>-प्रकाश श्रीवास्तव</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Nov 2025 12:22:49 +0530</pubDate>
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                <title>एसपी ने एसएचओ सहित 23 पुलिस कर्मियों को किया लाइन हाजिर</title>
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                        <![CDATA[ किशनगंज पुलिस थाना कस्टडी में युवक की संदिग्ध  मौत  हो गई थी। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/sp-suspended-23-police-personnel-including-sho/article-122012"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/212142roer-(3)5.png" alt=""></a><br /><p>किशनगंज। किशनगंज थाने में हत्या के आरोप में एक दिन पूर्व गिरफ्तार किए गए युवक की मौत के मामले में पुलिस अधीक्षक अभिषेक अंडासु ने कार्रवाई करते हुए मंगलवार को थाने के पूरे स्टाफ को लाइन हाजिर कर दिया । किशनगंज पुलिस थाना कस्टडी में  युवक लोकेश सुमन ( 28वर्ष) पुत्र बृजमोहन  की संदिग्ध  मौत हो गई थी।  मृतक के परिजनों को सूचना देने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने किशनगंज चिकित्सालय में धरना प्रदर्शन शुरू किया। परिजनों ने एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी,1 करोड़ मुआवजा, मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम एवं किशनगंज,भवरगढ़ थाना में कार्यरत सभी पुलिस कर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करवाने की मांग रखी । प्रशासन ने मेडिकल बोर्ड से शव का पोस्टमार्टम करवाया तथा दोनों थाना पुलिस कर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया । पुलिस ने मंगलवार को  परिजनों को शव सौंपा और युवक का अंतिम संस्कार किया गया । इससे पहले परिजनों ने शव लेने से मना किया और नगद मुआवजे की मांग रखी थी  जिसके बाद 5 लाख नगद,भाई को संविदा पर सरकारी नौकरी पर सहमति के बाद परिजनों ने शव लिया। इस मामले की जांच न्यायिक मजिस्ट्रेट मोहन कर रहे है।</p>
<p> <strong>पुलिस बल रहा तैनात</strong><br />पुलिस कस्टडी में हुई युवक की मौत के मामले की गंभीरता को देखते हुए। पूरे समय बारां एसपी अभिषेक अंडासु के नेतृत्व में जिले भर के थानों के थानाधिकारी,बारां,कोटा से अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा।</p>
<p><strong>23 पुलिसकर्मी लाइन हाजिर</strong><br />पुलिस कस्टडी में हत्या के आरोप में हुई युवक की मौत के मामले में बारां एसपी अभिषेक अंडासु ने प्राथमिक कार्रवाई करते हुए किशनगंज एसएचओ सहित 23पुलिस कर्मियों को लाइन हाजिर किया। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Jul 2025 18:24:05 +0530</pubDate>
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                <title>बदलती जीवनशैली और तनाव से युवा व बच्चों के दिल दे रहे धोखा</title>
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                        <![CDATA[प्रत्येक स्कूल में कार्डियक किट हो, सीपीआर प्रशिक्षण भी देना चाहिए ।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/due-to-changing-lifestyle-and-stress--hearts-of-youth-and-children-are-betraying/article-121457"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news55.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। भारत में हार्ट के मरीजों की संख्या साल दर साल बढ़ रही है। युवाओं से लेकर बच्चों तक दिल की बीमारी से परेशान हैं। बदलते जीवनशैली के चलते, युवा और बच्चों में दिल की धड़कन असामान्य हो जाती है। मांसपेशियों के सिकुड़ने के कारण ब्लड सर्कुलेट नहीं हो पाता है जिसके कारण असमय मृत्यु हो जाती है।  दैनिक दिनचर्या के बदलाव के कारण हार्ट अटैक के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। यह विचार दैनिक नवज्योति कार्यालय में आयोजित मासिक परिचर्चा में  सामने आए। केस ऑफ साइलेंट अटैक आर इन्क्रीजिंग एमंग चिल्ड्रन एन्ड यूथ, व्हाट इज द रीजन विषय पर दैनिक नवज्योति कार्यालय में आयोजित टॉक शो में शहर के जाने-माने विशेषज्ञ कार्डियोलोजिस्ट, फिजीशियन, डायटीशियन, साइकेटिंस्ट, आयुर्वेद , योग टीचर, जिम ट्रेनर, पैरेंट्स व स्ट्रेस मैनेजमेंट से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया।  विशेषज्ञों ने कोरोनाकाल के बाद जीवनशैली में आए बदलाव के कारण लोगों में तनाव, अनियमित खान-पान तथा फिजिकल एक्टिविटी कम होने को मुख्य कारण माना है। प्रस्तुत हैं परिचर्चा के मुख्य अंश:-</p>
<p><strong>स्कूलों में बच्चों की स्क्रीनिंग हो</strong><br />वर्तमान में लाइफ स्टाइल में काफी बदलाव आया है, जिसके चलते युवाओं में तनाव बढ़ने से डायबिटीज, बीपी सहित कई बीमारियों ने घेर लिया है। हार्टअटैक का प्रमुख कारण हार्ट सही तरीके से पंम्पिग नहीं कर पाने से मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है, जिसके कारण शरीर में ब्लड सर्कुलर सही तरीके से नहीं हो पाता है। साइलेंट अटैक का प्रमुख कारण भी बिगड़ी दिनचर्या तथा खानपान है। अगर अटैक आने वाले व्यक्ति को सही समय पर सीपीआर देकर जीवन बचाया जा सकता है। सीपीआर की जानकारी सभी को जानकारी होनी चाहिए। स्कूली बच्चों में आ रहे अटैक भी स्ट्रैस ही है। शहर की कई स्कूलों में जांच के नाम पर खानापूर्ति की जाती है तथा पैरेंट्स भी इस ओर ध्यान नहीं दे पाते है।<br /><strong>-डॉ. संजय शायर, सीनियर मेडिकल ऑफिसर </strong></p>
<p><strong>शरीर के प्रति जागरूकता व पौष्टिक आहार जरूरी</strong><br />सुबह जल्दी उठने व रात को जल्दी सोने की आदत को बनाए रखने के साथ ही स्वास्थ्य के प्रति सभी  में जागरूकता होना आवश्यक है। दिनचर्या व खान-पान सही नहीं होने से तनाव  व रोग बढ़ते हैं। विशेष रूप से हार्ट संबंधी बीमारी का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में शरीर के लिए क्या अच्छा है और क्या नहीं इस बारे में जानकारी होनी चाहिए।  पौष्टिक आहार लेना और नियमित योग व प्राणायम ऐसे माध्यम हैं जिनसे इस बीमारी के खतरे को कम किया जा सकता है। <br /><strong>-डॉ. नितिन सोलंकी क्लीनिकल न्यूट्रियनिस्ट </strong></p>
<p><strong>डायबिटीज व स्मोकिंग बन रहे बड़े कारण</strong><br />आज के दौर में डायबिटीज व स्मोकिंग हार्ट अरेस्ट के बड़े कारक सामने आ रहे हैं। कार्डिक अरेस्ट और हार्ट अटैक दोनों अलग अलग स्थितियां हैं।  जीवन की भागदौड़ के चलते हमारी दिनचर्या में काफी बदलाव आया है। नियमित समय में डाइट नहीं लेना, फास्टफूड पर ज्यादा निर्भर रहना भी हार्ट की समस्या को बढावा देता है। ज्यादातर हार्ट अटैक के मामलों में कॉलेस्ट्रोल बढ़ने से खून की आपूर्ति रुक जाती है जिससे असमय मृत्य हो जाती है। समय पर खान-पान लेना नियमित  योग व फिजिकल एक्टिविटी बनाए रखे। जीवन में तनाव (स्ट्रेस) कम रखें। स्कूलों में बच्चों की नियमित ब्लड, शुगर की जांच होनी चाहिए। वहीं प्रत्येक व्यक्ति को सीपीआर की जानकारी होनी चाहिए। हार्टअटैक के दौरान सीपीआर देने से व्यक्ति को नया जीवन मिल सकता है।<br /><strong>-डॉ. पवन सिंघल, कॉर्डियोलोजिस्ट कोटा हार्ट </strong></p>
<p><strong>स्कूलों में कार्डियो किट व डिस्प्रिन होना जरूरी</strong><br />वर्तमान में बच्चों में साइलेंट हार्ट अटैक बढ़ रहे है। इसका प्रमुख कारण बच्चों का हर छोटी बात का स्ट्रेस लेना है। बच्चों द्वारा माता-पिता को अपनी समस्या बताने पर उनको अनदेखा कर देता है। वहीं स्कूल या घर से बाहर भी अपने मन की बात किसी से शेयर नहीं करने पाने की वजह से भी डिप्रेशन का शिकार हो जाता है। नियमित खान-पान या फिजिकल एक्टिविटी नहीं होने से भी दैनिक कार्य प्रभावित हो जाते हैं। स्कूलों में बच्चों की नियमित जांच होनी चाहिए। वहीं प्रत्येक स्कूल में कार्डियेक किट होना चाहिए। उसमें डिस्प्रीन टेबलेट भी होनी चाहिए, आपातकाल स्थिति में संभल सकते हैं। सीपीआर देने के लिए ट्रेनर होना चाहिए ताकि आपातकाल में हार्ट अटैक के दौरान गोल्डन ऑवर में सीपी देकर जान बचाई जा सके। सीपीआर देने संबंधी प्रशिक्षण प्रत्येक स्कूलों के कर्मचारी व बच्चों को मिलना चाहिए। <br /><strong>-डॉ. सुरभी गोयल, फिजियोलॉजिस्ट व स्ट्रेस मैनेजमेन्ट विशेषज्ञ</strong></p>
<p><strong>डाइट प्लानिंग से  लाएं दिनचर्या में बदलाव</strong><br />जीवन में सभी लोगों की बॉडी लेंग्वेज अलग-अलग होती है। नियमित आहार-विहार नहीं लेने से भी दिनचर्या बिगड़ जाती है। बाजार में मिल रहे फास्टफूड भी कॉलेस्ट्रोल को बढ़ाती है। कई लोग पर्याप्त नींद नहीं ले पाते है तथा अपने कामकाज को लेकर तनावग्रस्त रहते हैं। देर रात खाना खाने या खाना खाने के बाद तुरंत सो जाना भी बीमारियों को दावत देना है। शुरूआत में अगर शरीर में थकान, चक्कर आने जैसी समस्या आने तुरंत डॉ. को दिखाना चाहिए। लोगों को अपनी डाइट प्लानिंग को नियमित दिनचर्या में शामिल करके तथा नियमित व्यायाम और योग से भी अपने आपको स्वस्थ रख सकते हैं।<br /><strong>-सलोनी सेठी, डायटीशियन,एन्ड न्यूट्रियनिस्ट</strong></p>
<p><strong>स्वस्थ जीवन के लिए योग जरूरी</strong><br />वर्तमान में लोगों की फिजिकल एक्टिविटी न होने से कई बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं। अनियमित दिनचर्या के चलते डायबिटीज, दिल की बीमारी व बीपी, शुगर सहित कई बिमारियां जकड़ लेती है। स्वस्थ शरीर के लिए योग करना भी जरूरी है। रोजाना अनुलोम-व्योलोम में श्वांस अंदर लेने तथा बाहर छोड़ने से भी शरीर स्वस्थ रहता है। योग गुरु रामदेव बाबा के सिखाए योग को भी घर पर ही करके स्वस्थ रह सकते है। समयभाव के कारण हमने अपनी जिंदगी को मशीन की तरह बना लिया है। जिसके कारण हम अपने परिवार के प्रति भी ध्यान नहीं दे पाते है। स्वस्थ शरीर के लिए पर्याप्त नींद जरूरी है।<br /><strong>-रचना शर्मा, व्याख्याता शारीरिक शिक्षा</strong></p>
<p><strong>स्कूलों में ही सीपीआर प्रशिक्षण</strong><br />बच्चों में जिस तरह से छोटी उम्र में ही पढ़ाई के साथ ही माता पिता की अपेक्षाओं को पूरा करने का तनाव बढ़ता जा रहा है। उस कारण से हार्ट अटैक कम उम्र में भी होने लगा है। इससे बचने के लिए बच्चों को उनकी रूचि के अनुसार काम करने दिया जाए। यदि स्कूल में कभी इस घटना का कोई मामला हो तो उसे कंट्रोल करने के लिए  स्कूलों में सीपीआर प्रशिक्षण दिया जाए। साथ ही बच्चों के खान-पान पर शिक्षकों द्वारा ध्यान दिया जाए। कम उम्र में ही सावधानी रखी गई तो आने वाले खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। <br /><strong>- मोइनुद्दीन पैरेन्ट्स </strong></p>
<p><strong>प्रकृूति से जुड़ना जरूरी</strong><br />पहले लोग सुबह जल्दी उठकर बाग बगीचों में घूमने जाते थे। पेड़ पौधों के बीच रहने से प्राकृति से जुड़े रहते थे। शुद्ध हवा व ऑक्सीजन मिलने के साथ  ही खान-पान में शुद्धता थी। लेकिन वर्तमान में अधिकतर लोग प्रकृति से दूर होने के साथ ही खान-पान भी शुद्ध नहीं होने से साइलेंट अटैक का खतरा अधिक बढ़ा है। जिम में शरीर को स्वस्थ बनाने के तरीके बताए जाते हैं। उसके लिए उसी तरह की डाइट का सेवन किया जाता है। साथ ही शरीर को स्वस्थ रखने व बीमारियों से दूर रहने का एक ही उपाय है प्रकृति से जुड़ना या उसके नजदीक रहना। <br /><strong>- अशोक औदिच्य सचिव बॉडी बिल्डिंग संघ </strong></p>
<p><strong>फिजिकल एक्टिविटी बढ़ानी होगी</strong><br />शरीर को स्वस्थ रखने के लिए फिजिकल एक्टिविटी जितनी अधिक होगी उतना बेहतर रहता है। साथ ही लोगों को अपनी लाइफ स्टाइल को भी बदलना होगा। लाइफ स्टाइल सही नहीं होने से ही अटैक ही नहीं सभी तरह की बीमारियां जन्म लेती है।  शरीर के प्रति जागरूक लोग जिम में जाते है। लेकिन वहां जिस तरह की गतिविधि करवाई जाती है उसका नियमित अभ्यास व उसी अनुसार डाइट लेना आवश्यक है। जिम का मतलब शरीर के साथ ज्यादती करना नहीं है। स्वस्थ रहने के लिए  जागरूकता भी जरूरी है। <br /><strong>- पूजा यादव, जिम ट्रेनर</strong></p>
<p><strong>बदलते लाइफ स्टाइल का प्रभाव</strong><br />हार्ट अटैक का एक प्रमुख कारण लाइफ स्टाइल का प्रभाव भी है। इसके चलते युवा में स्मॉकिंग, शराब का सेवन तथा फिजिकल एक्टिविटी का भी अभाव है। जिम में आने वाले सभी को पहले दिनचर्या को सही करने, डाइट संबंधी नियमों का पालन करना तथा शारीरिक व्यायाम तथा जीवन में स्ट्रेस नहीं लेने की सलाह देता हूं।  जो युवा अपने आहार-विहार का पालन नहीं करते तथा फास्टफुड पर निर्भर रहते है, आने वाले दिनों में कॉलेस्ट्रोल की मात्रा बढ़ने से  हार्ट पर जोर पड़ता है वहीं इम्युनिटी पॉवर कम होने से भी अचानक थकान, चक्कर आना भी हार्ट अटैक् को इंगित करता है।<br /><strong>- नरेन्द्र यादव, जिम ट्रेनर</strong></p>
<p><strong>स्कूलों में हो योगा क्लास</strong><br />जिस तरह से वर्तमान में छोटी उम्र के बच्चों में  साइलेंट हार्ट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं। उन्हें देखते हुए आवश्यक है कि बच्चों से  उनकी क्षमता के अनुसार शारीरिक गतिविधि करवाई जाए। स्कूलों में नियमित योगा क्लास लगाई जाए। जिससे बच्चा स्कूल में शिक्षकों की बात को जितना जल्दी अमल में लाता है उतना माता पिता की बात को भी नहीं लाता। बच्चों के खान-पान व उनकी दिनचर्या को भी सही रखकर इस बीमारी से बचाया जा सकता है।<br /><strong>-अंजली जैन सीए, अर्हं सोशल वेलफेयर फाउंडेशन </strong></p>
<p><strong>स्ट्रेस से बचने को मेडिटेशन जरूरी</strong><br />नियमित आहार-विहार तथा फिजिकल एक्टिविटी से अपने आपको स्वस्थ रखें। बदलती लाइफ स्टाइल में मेडिटेशन से भी अपने आपको फिट रख सकते हैं। वहीं व्यस्तता के कारण हम अपने स्वास्थ्य के प्रति अवेयर भी नहीं हो पाते है। अपने परिवार में भी सदस्यों से संवाद नहीं करने से अकेलेपन का शिकार हो जाते है।  स्वस्थ जीवन के लिए डाइट प्लानिंग भी जरूरी है। कोई भी शारीरिक बदलाव महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाए तथा उनके द्वारा दिए गए निर्देशों की पालना करें। स्ट्रेस से बचने के लिए मेडिटेशन का सहारा लें तथा कुछ समय अपने परिवार के साथ बिताएं। <br /><strong>- डॉ.मिथिलश खींची, एसोसिएट प्रोफेसर, मनोचिकित्सक मेडिकल कॉलेज कोटा</strong></p>
<p><strong>बीमारी की जड़ पर पहले हो वार</strong><br />हार्ट अटैक की बात कर रहे हैं लेकिन आयुर्वेद तो बीमारी ही नहीं हो इस पर काम करता है। हेल्दी और संसकारी संतति हो ऐसे प्रयास करने चाहिए। हमें हमारी पुरानी जड़ों पर लौटना होगा। आज परिवार में दूरिया बढ़ जाती है।  छोटे बच्चे भी मोबाइल देखते रहते है।  माता-पिता के काम पर जाने के बाद बच्चे अकेले रह जाते है जिससे नियमित खान-पान नहीं ले पाते है। फिजिकल एक्टिविटी भी नहीं हो पाती है। शहर के अधिकांश स्कूलों में बच्चों के ब्लड व नियमित डाइट की जांच नहीं हो पाती है। उनकी जीवनशैली में भी बदलाव आ जाता है। बच्चों को दादा-दादी का प्यार नहीं मिलने से संस्कारों में भी कमी आ जाती है। बच्चे व युवा अंदर ही अंदर तनावग्रस्त हो जाते है या नशे या बुरी आदतों के शिकार हो जाते है।<br /><strong>-अंजना शर्मा, वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्साधिकारी </strong></p>
<p><strong> स्कूल का रोल महत्वपूर्ण</strong><br />स्वथ शरीर के लिए फीजिकल एक्टिवीटी बहुत जरूरी है। चालीस वर्ष की उम्र के बाद नियमित जांच को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। वहीं बच्चों के जीवन में स्कूल का रोल काफी महत्वपूर्ण है। स्कूलों को भी अपने दैनिक कार्यक्रम में बच्चों के खानपान व बीपी, शुगर या फिर महिने में एक बार रूटिन चैकअप जरूर होना चाहिए। स्कूलों में पढ़ाने वाले क्लास टीचर के पास बच्चे की जानकारी होती है। अगर बच्चों की जीवनशैली में बदलाव आ रहा है तो माता-पिता को बता सकते है। या फिर प्यार से कारण जानकर बच्चों का स्ट्रेस दूर किया जा सकता है। माता-पिता में कामकाजी थकान के चलते बच्चों की तरफ ध्यान नहीं दे पाते है।<br /><strong>-महेन्द्र चौधरी, प्रिसींपल महात्मा गांधी रा.वि. श्रीनाथपुरम </strong></p>]]>
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                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Jul 2025 14:54:26 +0530</pubDate>
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                <title>गड्ढे में डूबे  युवक का शव निकाला : दोस्तों के साथ गया था पशु चराने, पैर फिसला और गहरे पानी में चला गया</title>
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                        <![CDATA[रानपुर थाना क्षेत्र स्थित हाइवे के पास जंगल में एक गहरे गड्ढ़े में 24 घंटे पूर्व डूबे एक युवक का एसडीआरएफ ने शव निकाल कर पुलिस को सौंप दिया
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-body-of-a-young-man-drowned-in-the-pit/article-120699"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news-(4)13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। रानपुर थाना क्षेत्र स्थित हाइवे के पास जंगल में एक गहरे गड्ढ़े में 24 घंटे पूर्व डूबे एक युवक का एसडीआरएफ ने शव निकाल कर पुलिस को सौंप दिया। पुलिस ने बुधवार को परिजनों के समक्ष पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंपा। युवक मंगलवार को गांव के अन्य आठ-दस दोस्तों के साथ दोपहर डेढ़ बजे पशु चराने गया था, जहां पर नहाते समय उसका पैर फिसल गया और गहरे पानी मेंं चला गया और डूब गया। सूचना पर पहुंची पुलिस एवं एसडीआरएफ  टीम ने रात 12 बजे तक रेस्क्यू ऑपरेशन किया, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर रेस्क्यू ऑपरेशन  रोक दिया । <br /> <br />पुलिस निरीक्षक राम विलास मीणा ने बताया कि मंगलवार देर रात करीब आठ बजे सूचना मिली  कि रानपुर के जंगल में हाइवे के पास गहरे गड्ढे में जगपुरा निवासी अर्जुन बंजारा (20)पुत्र परशुराम  बंजारा डूब गया है। इसके बाद एसडीआरएफ रेस्क्यू टीम को बुलाया । जंगल में रास्ता नहीं होने पर टीम को रात को ही ट्रैक्टर की मदद से घटना स्थल पर ले जाया जहां टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, लेकिन रात 12 बजे तक कोई सफलता नहीं मिलने व अंधेरा अधिक होने पर ऑपरेशन रोक दिया। बुधवार फिर रेस्क्यू ऑपरेशन किया। इस दौरान टीम ने उसे बहने के स्थान से थोड़ी दूर से ही निकाला और पुलिस को सौंप दिया। </p>
<p><strong>स्कूल की छुट्टी होने पर पशु चराने गया था </strong><br />सीआई ने बताया कि परिजनों ने पूछताछ के दौरान बताया कि अर्जुन दसवीं क्लास में पढ़ता है। मानसून के दौरान जगह-पानी भरने से स्कूल का अवकाश था। गांव के आठ-दस बच्चों के साथ मंगलवार को दोपहा डेढ़ बजे जंगल में पशु चराने गया था।  पशुओं को चराते-चराते हाइवे के पास 30 से 35 फुट गहरे गड्ढे  के पास चला गया और पानी में स्नान करने के लिए उतरा तो उसका पैर फिसला और गहरे पानी में चला गया। पानी में डूबने के बाद उसके दोस्त घर लौट आए। इसी दौरान रात को एक दोस्त धर्मराज ने उसके डूबने के बारे में अपने परिजनों को बताया । इसके बाद उसके परिजनों ने अर्जुन के परिजनों को बताया और फिर पुलिस को सूचना दी गई । </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Wed, 16 Jul 2025 16:18:11 +0530</pubDate>
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                <title>फादर्स डे पर विशेष - पिता एक उम्मीद है, आस है, परिवार की हिम्मत और विश्वास है</title>
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                        <![CDATA[दैनिक नवज्योति ने युवाओं से जाना की उनकी नजÞर मे उनके पिता कितने महत्वपूर्ण हैं।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/special-on-father-s-day---father-is-a-hope--expectation--courage-and-faith-of-the-family/article-117527"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer79.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। दो पल की खुशी के लिए क्या क्या कर जाता है, एक पिता बच्चों की खुशियों के लिए अंगारों पर चल जाता है! पिता एक ऐसा संबंध है जिसमें जिंदगी भर का सार छुपा होता है। मां अगर परिवार का दिल है तो पिता उस दिल की धड़कन होते हैं।  पिता की छत्रछाया में बच्चों को दु:खों का एहसास ही नहीं होता है।  पिता नीम के पेड़ जैसा होता है... उसके पत्ते भले ही कड़वे होते हैं... पर वो छाया ठंडी देता है...! आज फादर्स डे है ... इस  अवसर पर  दैनिक नवज्योति शहर के झालावाड़ रोड स्थित सिटी मॉल पहुंचा। सिटी मॉल में शहर के सबसे ज्यादा युवा व बच्चे आते हैं और  अपना बहुत सारा समय व्यतीत करते है। यहां  हमें हर उम्र के बच्चे व युवा मिले जिनसे हमने बात करके जाना कि उनकी नजर में उनके पिता कितने महत्वपूर्ण हैं।  उनके पिता में ऐसी कौनसी खूबी है जो उन्हें बहुत अच्छी लगती है। जब हमने बच्चों व युवाओं से बात की तो कुछ शुरू में हेजीटेट हुए लेकिन फिर बेबाकी से बात करने लगे। कई युवा बोले कि आज तक कभी किसी ने पापा के बारे में नहीं पूछा। अपने पापा के बारे में बात करते हुए युवाओं की आंखों में चमक के साथ मुस्कान खिली हुई थी। वह अपने पिता के बारे में अपनी भावनाओं को दिल से साझा कर रहे थे। बातचीत तो काफी सारे युवाओं से हुई लेकिन यहां चुनिंदा भावनाओं को ही प्रकाशित किया जा रहा है। </p>
<p>पिता वह व्यक्ति है जिसे आप हर दिन आदर्श मानते हैं, चाहे आप कितने भी बड़े हो जाएं। मेरे पापा लविंग और केयरिंग नेचर के हैं। जीवन में कई तरह की समस्याएं आती हैं लेकिन वे सब से बाहर निकलने के लिए मार्गदर्शन करते हैं और प्रेरित करते हैं। पढाई पर उनका फोकस है वह चाहते हैं कि जो भी जीवन में करने का लक्ष्य है उसको हासिल करें और अच्छी जगह पहुंचे।        <br /><strong>- ओजस्वी गुप्ता</strong></p>
<p>परिवार में कैसी भी कंडीशन हो हमारी ख्वाहिशों को कभी मारते नहीं है। हर काम के लिए सपोर्ट करते हैं। कभी मिसगाइड नहीं करते अगर सोचते है कि यह काम करना है या इस क्षेत्र में करियर बनाना है तो समझाते है कभी भी उन्होंने हमारा कॉन्फीडेंस लूज नहीं किया। मुझ पर विश्वास करते हैं।   <br /><strong>- असमां शेख</strong></p>
<p>कई चीजों को समझाने का तरीका कि क्या बेहतर है या नहीं यह बहुत अच्छा है । उनकी टेक्निकल और मैनेजमेंट स्किल मुझे बहुत ज्यादा मोटिवेट करती है। क्या वर्तमान स्थिति चल रही है उसमें सिचुएशन को कैसे और किस तरह संभालना है ये उनमें खूबी है। थोड़े सख्त जरूर हैं पर इमोशनली बहुत जुड़े हुए है। मेरे पापा होने के लिए आपका धन्यवाद। <br /><strong>- कुमार सत्यम</strong></p>
<p>वह हर सिचुएशन में पॉजीटिव एटीट्यूड रखते हैं। कभी उन्हें गुस्सा करते नहीं देखा। मम्मी यदि डांटती है तो हमारी साइड रहते हैं। अगर कभी कोई गलती भी हो जाए समझते हैं, हर कदम पर सपोर्ट करते हैं।      <br /><strong>- आकांक्षा </strong></p>
<p>हम संयुक्त परिवार से है। पापा परिवार में सबसे छोटे है। वह डॉक्टर हैं। परिवार में जब भी जरूरत हुई  किसी भी तरह की नीड आई उन्होंने परिवार को हमेशा सपोर्ट किया। फाइनेंशियल कंडीशन इतनी अच्छी नहीं थी लेकिन परिवार में उन्होंने सबको ऊपर उठाया। अपने प्रोफेशन में भी सबकी मदद करते हैं। इलाज करवाने अगर कोई नीडी पर्सन आता है उसकी हेल्प करते हैं। कई  लोग उनसे सलाह लेते हैं। उनमें परोपकार की भावना, लोगों की मदद करना और हमेश मुस्कुराते रहने का नेचर मुझे बहुत प्रभावित करता है।  <br /><strong>- ईशान मालव </strong></p>
<p>मुझे उनकी एक बात बहुत पसंद है कि जीवन में कभी खाली नहीं बैठना निरंतर कुछ न कुछ करते रहें।  यह बात उनकी मोटीवेट करती है।  किसी भी चीज के लिए वो ना नहीं कहते हैं। वही हमारे कर्ताधर्ता है, फादर्स डे  पर यही कहूंगा हमारे  लिए  आपके द्वारा किए गए हर काम के लिए हमेशा आभारी रहूंगा।     <br /><strong>- अभिषेक खोड़े</strong></p>
<p>बच्चों की खुशी में ही उनकी खुशी है। बच्चों को कमी ना हो इसके लिए खुद की इच्छाओं को मार कर जरूरते पूरी करते हैं। उनसे यही सीखा कि परिस्थितियों को सामना कैसे करना है कभी हिम्मत नहीं हारनी है।     <br /><strong>- प्रियंका राठौड़</strong></p>
<p><strong>ये रहे विजेता </strong><br /><strong>प्रथम पुरस्कार </strong><br />परिवार और बच्चे उनके लिए प्रायोरिटी है। जॉब के बाद भी वह बच्चों को बहुत समय देते हैं।  हमारी छोटी से छोटी ख्वाहिश को पूरा करने के लिए वह बहुत मेहनत करते हैं। उन्हें लगता है कि मेरे बच्चों की कोई ख्वाहिश अधूरी नहीं रह जाए। कैसी भी स्थिति हो वह कहते है घबराओ मत मैं हूं ना, सब संभाल लंूगा। वह चाहते हैं उनकी बेटियां आत्मनिर्भर बने और सभी काम खुद करें। वह यहीं सीख देते हैं कभी किसी  का दिल नहीं दुखाओ व बड़ो की इज्जत केयर करना। सर्दीहो, गर्मी, बरसात हो या तबियत खराब हो काम पर जाते हैं सिर्फ इसलिए कि हमें अच्छी लाइफ  दे सकें।      <br /><strong>- आभा कुमारी</strong></p>
<p><strong>द्वितीय पुरस्कार </strong><br />वो बहुत मेहनती  है। जिंदगी के प्रति उनका नजरिया बहुत सकारात्मक है।  क्या अच्छा है क्या बुरा है इसका उनको बहुत अनुभव है। समय समय पर वो इस बारे में गाइड करते रहते हैं। वह मृदुभाषी है सभी से बहुत अच्छे से बात करते हैं, हर बात का जवाब बहुत प्यार से देते हैं। शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता कि पापा मेरे जीवन में कितना मायने रखते है।      <br /><strong>- हर्षित वर्मा</strong></p>
<p><strong>तृतीय पुरस्कार </strong><br />मेरे पापा में धैर्य बहुत है यही बात  उनकी सबसे अच्छी लगती है। जीवन में जो भी करना है जिस क्षेत्र में जाना है जाओ लेकिन पापा कहते हैं कि धैर्य के साथ आगे कदम बढ़ाओ,  सही गलत को समझो सही रास्ते पर चलो। अब तक सभी ख्वाहिशों को उन्होंने पूरा किया। बहुत सपोर्टिव हैं, मैं एक्टर बनाना चाहता हूं इसके लिए कुछ समय उनको समझाने में लगा, लेकिन फिर मान गए कहा अच्छा डायरेक्शन और धैर्य के साथ आगे बढ़ो। मेरे सपनों को हवा देने और मुझ पर विश्वास करने के लिए थैंक यू  पापा। हैप्पी फादर्स डे!     <br /><strong>- प्रफुल्ल कुमार</strong></p>
<p>पापा हमेश हमारे लिए आइडियल है। वह ऐसी पर्सनेिलटी है जो गाइड और इंस्पायर करती है। कभी किसी बात के लिए फोर्स नहीं करते हैं। हर बात को बहुत शांति से समझाते हैं उनका समझाने व बात कहने का तरीका बहुत अच्छा है। उनकी सबसे बड़ी खूबी है संतुष्ट नेचर। हर चीज में सेटिस्फाइड रहते हैं। बहुत कूल व काम नेचर के हैं। उनका नजरिया पॉजिटिव है। यहीं खूबी उनकी खास है।     <br /><strong>- धरा शर्मा</strong></p>]]>
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                <pubDate>Mon, 16 Jun 2025 13:18:15 +0530</pubDate>
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