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                <title>vishwakarma jayanti - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>vishwakarma jayanti RSS Feed</description>
                
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                <title>सीएम योगी ने दी प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन पर बधाई, वाराणसी से 'सेवा संकल्प अभियान' के शुभारंभ की घोषणा</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन की सराहना की। इस अवसर पर वाराणसी से 'सेवा संकल्प अभियान' तथा लखनऊ में 'विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला 2026' और मार्जिन मनी ऋण पोर्टल की शुरुआत की गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/cm-yogi-congratulated-prime-minister-modi-on-his-birthday-and/article-165823"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)30.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके जन्मदिन पर बधाई देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन में सेवा को साधना, सुशासन को संकल्प और राष्ट्र निर्माण को सर्वोच्च ध्येय बनाकर जन-जन के जीवन में परिवर्तन की नई चेतना जगाई है। मुख्यमंत्री ने गुरुवार को एक्स पर एक पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर गुरुवार को बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी से 'सेवा संकल्प अभियान' का शुभारंभ होगा। उन्होंने कहा कि यह अभियान सेवा और जनकल्याण की भावना को आगे बढ़ाने का माध्यम बनेगा।</p>
<p>योगी ने बताया कि सृजन और श्रम के आराध्य भगवान विश्वकर्मा की जयंती के अवसर पर लखनऊ में 'विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0' के तहत 'विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला 2026' आधारित प्रदर्शनी का शुभारंभ किया जाएगा। इसके साथ ही मार्जिन मनी ऋण पोर्टल भी शुरू किया जाएगा।</p>
<p>मुख्यमंत्री के अनुसार इस अवसर पर विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को चेक और टूलकिट का वितरण भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सेवा से संकल्प, श्रम से स्वावलंबन और स्वदेशी से समृद्धि की यह यात्रा 'विकसित भारत' के लक्ष्य को नई गति प्रदान करेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के दीर्घ सार्वजनिक जीवन और राष्ट्र निर्माण के प्रति उनके योगदान का उल्लेख करते हुए जन्मदिन पर शुभकामनाएं प्रेषित कीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 12:21:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>महान वास्तुकार थे भगवान विश्वकर्मा</title>
                                    <description><![CDATA[हर वर्ष 17 सितम्बर को विश्वकर्मा जयंती मनाई जाती है। यह वह दिन है जब सूर्य, सिंह राशि से कन्या राशि में प्रवेश करता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/lord-vishwakarma-was-a-great-architect/article-90755"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/vishwakra.png" alt=""></a><br /><p>हर वर्ष 17 सितम्बर को विश्वकर्मा जयंती मनाई जाती है। यह वह दिन है जब सूर्य, सिंह राशि से कन्या राशि में प्रवेश करता है। विश्वकर्मा जयन्ती भारत के जम्मू कश्मीर, पंजाब, हिमाचल, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, असम, ओडिशा, त्रिपुरा, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में मनाई जाती है। नेपाल में भी विश्वकर्मा पूजा को बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। विश्वकर्मा के पूजन और उनके बताए वास्तुशास्त्र के नियमों का अनुपालन कर बनवाए गए मकान और दुकान शुभ फल देने वाले माने जाते हैं। विश्वकर्मा पूजा एक ऐसा त्योहार है जहां शिल्पकार, कारीगर, श्रमिक भगवान विश्वकर्मा का त्योहार मनाते हैं। कहा जाता है कि भगवान ब्रह्मा के पुत्र विश्वकर्मा ने पूरे ब्रह्मांड का निर्माण किया था। विश्वकर्मा को देवताओं के महलों का वास्तुकार भी कहा जाता है। इसलिए भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का सबसे पहला इंजीनियर और वास्तुकार माना जाता है। विश्वकर्मा दो शब्दों से विश्व और कर्म से मिलकर बना है। इसलिए विश्वकर्मा शब्द का अर्थ है। दुनिया का निर्माता यानी दुनिया का निर्माण करने वाला। औद्योगिक श्रमिकों द्वारा इस दिन बेहतर भविष्य, सुरक्षित कामकाजी परिस्थितियों और अपने-अपने क्षेत्र में सफलता के लिए प्रार्थना की जाती हैं। विश्वकर्मा जयन्ती के दिन देश के कई हिस्सों में काम बंद रखा जाता है और खूब पंतगबाजी की जाती है। विभिन्न प्रदेशों की सरकार विश्वकर्मा जयन्ती पर अपने कर्मचारियों को सवैतनिक अवकाश प्रदान करती है। यह त्योहार मुख्य रूप से दुकानों, कारखानों और उद्योगों द्वारा मनाया जाता है। इस अवसर पर कारखानों और औद्योगिक क्षेत्रों के श्रमिक अपने औजारों की पूजा करते हैं और भगवान विश्वकर्मा से उनकी आजीविका सुरक्षित रखने के लिए प्रार्थना करते हैं। वे मशीनों के सुचारू संचालन के लिए प्रार्थना करते हैं और विश्वकर्मा पूजा के दिन अपने उपकरणों का उपयोग करने से परहेज करते हैं।<br />विश्वकर्मा शिल्पशास्त्र के आविष्कारक और सर्वश्रेठ ज्ञाता माने जाते हैं। जिन्होने विश्व के प्राचीनतम तकनीकी ग्रंथों की रचना की थी। इन ग्रंथों में न केवल भवन वास्तु विद्या, रथ आदि वाहनों के निर्माण बल्कि विभिन्न रत्नों के प्रभाव व उपयोग का भी विवरण है। माना जाता है कि उन्होनें ही देवताओं के विमानों की रचना की थी। भगवान विश्वकर्मा की उत्पत्ति ऋग्वेद में हुई है। जिसमें उन्हें ब्रह्मांड के निर्माता के रूप में वर्णित किया गया है। भगवान विष्णु और शिव लिंगम की नाभि से उत्पन्न भगवान ब्रह्मा की अवधारणाएं विश्वकर्मण सूक्त पर आधारित हैं। </p>
<p>विश्वकर्मा प्रकाश को वास्तु तंत्र का अपूर्व ग्रंथ माना जाता है। इसमें अनुपम वास्तु विद्या को गणितीय सूत्रों के आधार पर प्रमाणित किया गया है। ऐसा माना जाता है कि सभी पौराणिक संरचनाएं भगवान विश्वकर्मा द्वारा निर्मित हैं। भगवान विश्वकर्मा के जन्म को देवताओं और राक्षसों के बीच हुए समुद्र मंथन से माना जाता है। पौराणिक युग के अस्त्र और शस्त्र भगवान विश्वकर्मा द्वारा ही निर्मित हैं।  </p>
<p>विश्वकर्मा वैदिक देवता के रूप में सर्वमान्य हैं। इनको गृहस्थ आश्रम के लिए आवश्यक सुविधाओं का निर्माता और प्रवर्तक भी कहा गया है। भगवान विश्वकर्मा के पूजन-अर्चन किए बिना कोई भी तकनीकी कार्य शुभ नहीं माना जाता। इसी कारण विभिन्न कार्यों में प्रयुक्त होने वाले औजारों, कल-कारखानों और विभिन्न उद्योगों में लगी मशीनों का पूजन विश्वकर्मा जयंती पर किया जाता है। </p>
<p>धर्मग्रंथों में विश्वकर्मा को सृष्टि के रचयिता ब्रह्माजी का वंशज माना गया है। ब्रह्माजी के पुत्र धर्म तथा धर्म के पुत्र वास्तुदेव थे। जिन्हें शिल्प शास्त्र का आदि पुरुष माना जाता है। इन्हीं वास्तुदेव की अंगिरसी नामक पत्नी से विश्वकर्मा का जन्म हुआ। अपने पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए विश्वकर्मा भी वास्तुकला के महान आचार्य बने। पौराणिक साक्ष्यों के मुताबिक स्वर्गलोक की इन्द्रपुरी, यमपुरी, वरुणपुरी, कुबेरपुरी, असुरराज रावण की स्वर्ण नगरी लंका, भगवान श्रीकृष्ण की समुद्र नगरी द्वारिका और पांडवों की राजधानी हस्तिनापुर के निर्माण का श्रेय भी विश्वकर्मा को ही जाता है। पौराणिक कथाओं में इन उत्कृष्ट नगरियों के निर्माण के रोचक विवरण मिलते हैं। उड़ीसा का विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर तो विश्वकर्मा के शिल्प कौशल का अप्रतिम उदाहरण माना जाता है। विष्णु पुराण में उल्लेख है कि जगन्नाथ मंदिर की अनुपम शिल्प रचना से खुश होकर भगवान विष्णु ने उन्हे शिल्पावतार के रूप में सम्मानित किया था। महाभारत में पांडव जहां रहते थे उस स्थान को इंद्रप्रस्थ के नाम से जाना जाता था। इसका निर्माण भी विश्ववकर्मा ने किया था। कौरव वंश के हस्तिनापुर और भगवान कृष्ण के द्वारका का निर्माण भी विश्वणकर्मा ने ही किया था।  सृष्टि के प्रथम सूत्रधार, शिल्पकार और विश्व के पहले तकनीकी ग्रन्थ के रचयिता भगवान विश्वकर्मा ने देवताओं की रक्षा के लिये अस्त्र-शस्त्रों का निर्माण किया था।  सीता स्वयंवर में जिस धनुष को श्रीराम ने तोड़ा था वह भी विश्वकर्मा के हाथों बना था। जिस रथ पर निर्भर रह कर श्रेष्ठ धनुर्धर अर्जुन संसार को भस्म करने की शक्ति रखते थे उसके निर्माता विश्वकर्मा ही थे। </p>
<p><strong>-रमेश सर्राफ  धमोरा</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Sep 2024 12:20:37 +0530</pubDate>
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