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                <title>dev narayan yojana - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>खतरनाक हो रहे मवेशी, लोग हो रहे जख्मी : शोभा यात्रा की भीड़ में घुसी गाय, लोगों का बाहर निकलना हो रहा मुश्किल</title>
                                    <description><![CDATA[तेज गति से निकलने वाले वाहनों से आए दिन इनके टकराने पर हादसे होने का खतरा बना हुआ है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/cattle-are-becoming-dangerous--people-are-getting-injured/article-109311"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर की सड़कों से अभी भी मवेशी नहीं हटे हैं। जगह-जगह मेन रोड पर लगे मवेशियों के झुंड लोगों के लिए खतरा बने हुए है। ये भीड़ में घुस रहे हैं और सड़कों पर दौड़ रहे हैं। जिससे हादसों का खतरा बना हुआ है। शहर में सड़कों पर निराक्षित हालत में घूमने वाले मवेशियों को पकड़कर कायन हाउस व गौशाला में बंद करने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। निगम की ओर से इस जिम्मेदारी को सही ढंग से नहीं निभाने के कारण सड़कों पर मवेशियों का झुंड बढ़ता ही जा रहा है। शहर का कोई भी मेन रोड, चौराहा, वीआईपी क्षेत्र, चम्बल पुलिया, फ्लाई ओवर ऐसा नहीं है जहां मवेशियों का जमघट नहीं देखने को मिले। नई धानमंडी के सामने और सब्जीमंडी में तो इतने अधिक मवेशी हैं कि वहां लोगों का जाना ही मुश्किल हो रहा है। इतना ही नहीं जिस निगम की जिम्मेदारी इन मवेशियों को पकड़ने की है उस निगम कार्यालय के आस-पास हौ इनका जमघट देखा जा सकता है। यहां तक की हाइवे पर भी मवेशियों के झुंड घूमते हुए देखे जा सकते है। जिससे तेज गति से निकलने वाले वाहनों से आए दिन इनके टकराने पर हादसे होने का खतरा बना हुआ है। कई बार मवेशी अचानक आने या रात के अंधेरे में नजर नहीं आने से हादसे हो भी रहे हैं। </p>
<p><strong>शोभा यात्रा की भीड़ में घुसी गाय</strong><br />हालत यह है कि सुनसान रोड पर ही नहीं भीड़भाड़ वाले इलाकों तक में पशु घुस रहे है। शहर में एक दिन पहले निकली विशाल शोभा यात्रा जिसमें हजारों महिलाएं और लोग शामिल थे। उस भीड़ तक में एक गाय घृस गई थी। जिससे लोगों के लिए खतरा हो गया था। गनीमत रही कि एक महिला को वह नजर आ गई। उसने गाय से बचाने के लिए महिलाओं को दूर हटाना शुरु कर दिया। जिससे किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ। वरना यदि कोई उस गाय को भगाता या गाय भीड़ में डरकर भागती तो कई महिलाएं चोटिल हो सकती थी।</p>
<p><strong>देव नारायण योजनासे पलायन</strong><br />शहर को कैटल फ्री बनाने व पशुओं को शहर से दूर करने के लिए तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय में नगर विकास न्यास के माध्यम से करीब 300 करोड़ की लागत से बंधा धर्मपुरा में देव नारायण आवासीय योजना बनाई गई थी। जहां पशु पालकों और पालतू पशुओं को उस योजना में शिफ्ट किया गया था। जानकारों के अनुसार योजना में सुविधाओं का अभाव होने से कई पशु पालक फिर से शहर में और पुरानी जगहों पर लौटने लगे है। जिससे फिर से मवेशी सड़कों पर नजर आ रहे है।  जानकारों का कहना है कि पशु पालक दूध निकालने के बाद पशुओं को खुला छोड़ देते हैं। जिससे वे सड़कों पर आकर हादसों का कारण बन रहे हैं। जबकि उनकी जिम्मेदारी है कि वे अपने पशुओं को बांधकर रखें। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण द्वारा तो काफी समय से घेरा डालकर मवेशी कायन हाउस में लाए जा रहे है। नगर निगम कोटा उत्तर ने भी पकड़ना शुरु कर दिया है। हालत यह है कि रोजाना 50 से 60 पशुओं को कायन हाउस लाया जा रहा है। जिससे रोजाना दो से तीन चक्कर वाहनों में इन पशुओं को बंधा गौशाला में भेजा जा रहा है।  कायन हाउस व गौशाला दोनों जगह पर क्षमता से अधिक गौवंश हो गए हैं। उन्हें रखने की जगह तक नहीं होने से कई बार नए आने वाले पशुओं की मृत्युदर अधिक हो जाती है।  गौशाला विस्तार के लिए मिली 26 बीघा जमीन की चार दीवारी बनाने का 1.37 करोड़ का टेंडर किया है। जबकि जरूरत गौशाला में पशुओं के बाड़े बनाने की है। <br /><strong>-जितेन्द्र सिंह, अध्यक्ष, गौशाला समिति, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Apr 2025 17:51:32 +0530</pubDate>
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                <title>करोड़ों की आवासीय योजना भी नहीं कर पाई शहर को  कैटल फ्री, देव नारायण योजना से लौटे पशु पालक</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में बड़ी संख्या में मुख्य मार्गों तक पर निराश्रित मवेशियों के जमघट लगे हुए है। जिससे हादसों का खतरा बना हुआ है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/even-the-housing-scheme-worth-crores-could-not-make-the-city-cattle-free/article-105993"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(3)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । पिछली कांग्रेस सरकार के समय में शहर को कैटल फ्री बनाने के तहत तत्कालीन नगर विकास न्यास द्वारा पशु पालकों के लिए करोड़ों रुपए की लागत से आवासीय योजना बनाई थी। लेकिन हालत यह है कि योजना में जाने के बाद फिर से कई पशु पालक वापस शहर में लौट आए। जिससे सड़कों पर मवेशियों का जमघट कम नहीं हो रहा है। कांग्रेस सरकार द्वारा शहर को कैटल फ्री बनाने का प्रयास किया गया। इसके लिए शहर के पशु पालकों और पशुओं का सर्वे कराया गया था। उस सर्वे के आधार पर तत्कालीन नगर विकास न्यास(केडीए) की ओर से बंधा धर्मपुरा में करीब 300 करोड़ रुपए की लागत से देव नारायण आवासीय एकीकृत योजना बनाई थी।  इस योजना में स्वयं की भूमि या अतिक्रमण कर बाड़े बनाकर रहने वाले पशु पालकों व पशुओं को शिफ्ट किया गया था। लेकिन हालत यह है कि कुछ समय बाद ही कई पशु पालक वहां से मकान खाली कर वापस शहर में आ गए हैं। इन जगहों पर देखे जा सकते हैं पशु: नए कोटा शहर के महावीर नगर, रंगबाड़ी, जवाहर नगर, आंवली रोझड़ी,बसंत विहार समेत कई जगहों पर पशु पालकों के पशुओं को देखा जा सकता है।  इनके अलावा शहर में बड़ी संख्या में मुख्य मार्गों तक पर निराश्रित मवेशियों के जमघट लगे हुए है। जिससे हादसों का खतरा बना हुआ है। साथ ही पशु पालकों के बाड़ों से उन क्षेत्रों में गोबर व अन्य कई तरह की गंदगी फेली होने से आस-पास के लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>निगम कर रहा कार्रवाई</strong><br />शहर के मुख्य मार्गों पर निराश्रित हालत में बैठे व घूमने वाले मवेशियों को नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से पकड़कर कायन हाउस व गौशाला में बंद किया जा रहा है। हालांकि पूर्व में इस काम को अभियान चलाकर किया गया था। लेकिन बाद में अभियान को रोककर शिकायत वाले स्थानों से ही मवेशियों को पकड़कर  बंद किया जा रहा है। जिससे गौशाला में गौवंश की संख्या बढ़ रही है। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार पालतू पशु पकड़े जाने पर लोग छुड़वाने भी आ रहे हैं। लेकिन उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित जुर्माना जमा करवाने के बाद ही छोड़ा जा रहा है। </p>
<p><strong>योजना में बनाई ये सुविधाएं</strong><br />योजना मेंं पशु पालकों के रहने के लिए मकान, पशुओं के लिए बाड़े और भूसा व चारा रखने के लिए गोदाम का प्रावधान किया गया था।  साथ ही पशुओं के गोबर का उपयोग करने के लिए बायो गैस प्लांट बनाया। दूध का उपयोग करने के लिए डेयरी बनाई। बच्चों की शिक्षा के लिए स्कूल, पशुओं व लोगों के उपचार के लिए स्वास्थ्य केन्द्र और वहां रहने वालों की सुरक्षा के लिए पुलिस चौकी तक का प्रावधान किया गया था। </p>
<p><strong>सुविधाएं नहीं होने से लौटना पड़ा</strong><br />पशु पालक कालूलाल गुर्जर का कहना है कि देव नारायण योजना शहर से दूर है। साथ ही वहां कई सुविधाओं का अभाव है। जिससे पशु पालकों को दूध बेचने से लेकर बच्चों को पढ़ाने और अन्य सामान खरीदने के लिए शहर में आना पड़ रहा है। जिससे आने-जाने में समय व पेट्रोल अधिक खर्च हो रहा है। इस कारण से कुछ समय पहले वापस शहर में आ गए।  मोहन गुर्जर का कहना है कि शहर में सुविधाएं अधिक हैं। देव नारायण योजना में बच्चों का मन नहीं लगा। इस कारण से वापस आ गए है। पशुओं को बाड़े में ही रखते हैं। </p>
<p><strong>गौशाला विस्तार जमीन पर बनेगी चार दीवारी</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के अधीक्षण अभियंता व गौशाला प्रभारी महेश गोयल ने बताया कि बंधा धर्मपुरा में निगम की गौशाला विस्तार के लिए जमीन का आवंटन हो गया है। उस जमीन  पर चार दीवारी बनाने का काम किया जाएगा। जिसके लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। गौशाला का विस्तार होने से यहां अधिक संख्या में पशुओं को रखने में सुविधा होगी। जबकि पूर्व में गौशाला में जगह कम होने से समस्या बनी हुई थी। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />देव नारायण योजना बनने के बाद भी पशु पालक शहर में रह रहे हैं या वहां से वापस शहर में आ गए हैं। ऐसे पशु पालकों का केडीए की ओर से सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे होने के बाद शीघ्र ही केडीए व नगर निगम मिलकर संयुक्त रूप से ऐसे पशु पालकों के खिलाफ कार्रवाई कर पशुओं को शहर से वापस खदेड़ा जाएगा। निराश्रित को गौशाला में बंद किया जाएगा। जिससे शहर को कैटल फ्री बनाने की जो योजना है उसे मूर्त रूप दिया जा सके।  <br /><strong>-अशोक त्यागी, आयुक्त नगर निगम कोटा उत्तर </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Mar 2025 15:15:05 +0530</pubDate>
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                <title>देव नारायण योजना में पशुओं का उपचार हो रहा, इंसानों का नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[देव नारायण योजना के लोगों को उनके यहां उपचार की कोई सुविधा नहीं है। केडीए की ओर से योजना में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का भवन तो बना दिया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/in-dev-narayan-yojana--animals-are-being-treated--not-humans/article-97415"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(2)18.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से करोड़ों रुपए की लागत से से बंधा धर्मपुरा में देव नारायण आवासीय योजना में पशु पालकों के साथ ही पशुओं रहने की सुविधा की गई। लेकिन हालत यह है कि योजना में पशुओं का तो उपचार हो  रहा है लेकिन इंसानों का नहीं।  शहर के लोग तो संभाग के सबसे बड़े एमबीएस व न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल जाकर इलाज करवा रहे है। जबकि देव नारायण योजना के लोगों को उनके यहां उपचार की कोई सुविधा नहीं है। केडीए की ओर से योजना में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का भवन तो बना दिया गया है। उसी केन्द्र में पशु उपचार केन्द्र भी खोला गया है। हालत यह हैकि पशु उपचार केन्द्र में तो डॉक्टर जा रहे है। जिससे पशु पालकों का उपचार किया जा रहा है। लेकिन विडम्बना हैकि वहां डिस्पेंसरी में डॉक्टर नहीं लगाया गया है। जिससे योजना के लोगों को करेब 12 से 15 कि.मी. की दृूरी तय कर कोटा शहर में आकर उपचार करवाना पड़ रहा  है। </p>
<p><strong>डिस्पेंसरी में डॉक्टर लगे तो मिले राहत</strong><br />देव नारायण आवासीय पशु पालक विकास समिति के अध्यक्ष किरण लांगड़ी का कहना है कि केडीए ने यहां शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र(डिस्पेंसरी) तो बना दी है। लेकिन यहां अभी तक भीडॉक्टर नहीं लगाए हैं। जिससे योजना के लोगों के बीमार होने पर सुविधा के अभाव में 12 से 15 कि.मी. दूर कोटा जाना पड़ रहा है। जिसमें समय अधिक लग रहा है। इस दौरान कई लोगों की तबीयत तो अधिक खराब हो गई।  उन्होंने बताया कि केडीए अधिकारियों क पूर्व में कई बार अवगत कराया जा चुका है कि यहां डिस्पेंसरी में डॉक्टर लगाए जाएंजिससे लोगोंको राहत मिल सके। लेकिन अभी तक तो किसीको नहीं लगाया है। किरण लांगड़ी ने बताया कि योजना में कई सुविधाओं का अभाव होने से पशु पालक पलायन कर रहे है। पशु पालकों को घर व बाड़े तो बना कर दे दिए लेकिन उनके लिए मूलभूत सुविधाएं तक नहीं दी गई है। जिससे लोग यहां से पलायन कर रहे है। वर्तमान में योजना में मात्र 400 परिवार  और  करीब 8 से 10 हजार पशु हैं। इधर केडीए अधिकारियों का कहना है कि  देव नारायण योजना की डिस्पेंसरी में डॉक्टर व स्टाफ लगाने की प्रक्रिया चल रही है। जल्दी ही यहां सुविधा कर दी जाएगी। </p>
<p><strong>सफाई नहीं होने से नालियां जाम</strong><br />स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर से इतनी दूर होने से यहां न तो कोई अधिकारी आते हैं और न ही सफाई की नियमित व्यवस्था है। पिछले कई दिन से यहां नालियों की सफाई तक नहीं हुई है। जिससे उनके जाम होने से मच्छर पनप रहे है। एक तरफ मौसमी बीमारियां फेल रही है। वहीं दूसरी तरफ सफाई नहीं होने से बीमारियां अधिक बढ़ रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Dec 2024 16:06:48 +0530</pubDate>
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                <title>देव नारायण योजना के पशु पालकों को शहर में लाकर बेचना पड़ रहा दूध </title>
                                    <description><![CDATA[जिससे पशु पालक अपना जीवन स्तर सुधार सके। इसके साथ ही यहां पशु पालकों के दूध क्रय करने के लिए डेयरी प्लांट भी लगाया गया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-animal-breeders-of-dev-narayan-yojana-have-to-bring-milk-to-the-city-and-sell-it/article-91165"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/427rtrer-(1)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर विकास न्यास की ओर से बंधा धर्मपुरा में पशु पालकों के लिए विकसित की गई देव नारायण आवासीय योजना में लगाए गए डेयरी प्लांट का स्थानीय पशु पालकों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। डेयरी में बाहर से दूर लिया जा रहा है और योजना के पशु पालकों को शहर में लाकर दूध बेचना पड़ रहा है। कांग्रेस सरकार के समय में तत्कालीन स्वायत्त शासन मंत्री  शांति धारीवाल के प्रयासों से बंधा धर्मपुरा में देव नारायण आवासीय योजना विकसित की गई थी। जिसमें शहर में बाड़े बनाकर व सरकारी भूमि पर अतिक्रमण कर रह रहे पशु पालकों को शिफ्ट किया गया है। यहां सभी को मकान व पशुओं के लिए बाड़े बनाकर दिए गए हैं। जिससे पशु पालक अपना जीवन स्तर सुधार सके। इसके साथ ही यहां पशु पालकों के दूध क्रय करने के लिए डेयरी प्लांट भी लगाया गया है। जिससे स्थानीय पशु पालकों द्वारा योजना में ही अपना दूध डेयरी में दिया जा सके। जिससे उन्हें दूध बेचने के लिए परेशान नहीं होना पड़े। लेकिन जिस मकसद से डेयरी प्लांट लगाया गया था उसका स्थानीय पशु पालकों को लाभ नहीं मिल रहा है। </p>
<p><strong>योजना में रोजाना 8 हजार लीटर दूध उत्पादन</strong><br />स्थानीय पशु पालक मंगला गुंजल का कहना है कि यहां योजना में करीब 400 पशु पालक है। अधिकतर पशु पालकों के पास पशु होने से हर घर में दूध निकल रहा है। रोजाना करीब 200 टंकी यानि करीब 8 हजार लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। ऐसे में उस दूध को खपाने के लिए डेयरी माध्यम है लेकिन वहां दूध नहीं लेने से उसे शहर में लाकर बेचना पड़ रहा है। जिससे पशु पालकों को न तो डेयरी का लाभ मिल रहा है । वरन् पशु पालकों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। </p>
<p><strong>शहर में बेचने पर हो रहा नुकसान</strong><br />देव नारायण योजना निवासी पशु पालक  रंगलाल कटारिया ने बताया कि डेयरी में दूध नहीं लेने से पशु पालकों को कोटा शहर में आकर दूध बेचना पड़ रहा है। अधिक लीटर दूध वालों को तो शहर में आने-जाने पर खर्चा निकलने से अधिक नुकसान नहीं हो रहा है। जबकि 10 से 15 लीटर दूध वालों को शहर में आने पर एक बार में 100 रुपए का पेट्रोल व चाय नाश्ते समेत अन्य खर्चा की करना पड़ रहा है। जिससे जितने का दूध नहीं बिकता उससे ज्यादा तो खर्चा हो रहा है। साथ ही शहर में आने-जाने पर समय भी अधिक लग रहा है। </p>
<p><strong>फैट के हिसाब से नहीं दिया जा रहा अतिरिक्त भुगतान</strong><br />देव नारायण आवासीय योजना विकास समिति के अध्यक्ष किरण लांगड़ी ने बताया कि न्यास की ओर से डेयरी प्लांट लगाते समय कार्यादेश दिया गया था। जिसके तहत स्थानीय पशु पालकों को उनके दूध में फैट के हिसाब से प्रति फैट 50 पैसे का अतिरिक्त भुगतान किया जाएगा। लेकिन हालत यह है कि डेयरी में उस शर्त की पालना नहीं हो रही है। जिससे पशु पालकों को डेयरी में दूध देने पर नुकसान हो रहा है। डेयरी में बाहर से लिए जा रहे सस्ते दाम पर ही भुगतान किया जा रहा है। ऐसे में पशु पालक यहां दूध नहीं दे रहे है। डेयरी में बाहर से ही दूध क्रय किया जा रहा है।  लांगड़ी ने बताया कि एक लीटर दूध में यदि 6 से 8 फैट होते हैं तो प्रति लीटर 3 से चार रुपए का नुकसान हो रहा है।  </p>
<p><strong>पशु चिकित्सा केन्द्र व डिस्पेंसरी में डॉक्टर नहीं</strong><br />देव नारायण आवासीय योजना निवासी पशु पालक  जीवराज काड ने बताया कि योजना में पशुओं के उपचार के लिए पशु चिकित्सा केन्द्र तो बना रखा हैै। उसका भवन भी बना हुआ है लेकिन उस पर ताला लटका है। इसका कारण वहां चिकित्सक ही नहीं है। इसी तरह से बीमार लोगों के उपचार के लिए डिस्पेंसरी तो बनी हुई है लेकिन वहां भी डॉक्टर नहीं होने से उस पर भी ताला लटका हुआ है। ऐसे में न तो पशुओं का उपचार हो पा रहा है और न ही लोगों का। इनके लिए शहर में ही जाना पड़ रहा है।  उन्होंने बताया कि योजना में इंगलिश मीडियम स्कूल का संचालन रोटरी क्लब कोटा द्वारा किया जा रहा है। वह सही ढंग से चल रहा है। </p>
<p><strong>पशु पालकों को करेंगे तैयार</strong><br />डेयरी में स्थानीय पशु पालकों से ही दूध लेने की योजना है लेकिन पशु पालक डेयरी में दूध ही नहीं दे रहे है। अधिकतर पशु पालक शहर में दूध बेचना पसंद कर रहे हैं। ऐसे में बाहर से ही दूध लेना पड़ रहा है। प्रयास करेंगे कि स्थानीय पशु पालकों से बात कर उन्हें डेयरी में दूध देने के लिए तैयार किया जाएगा। <br /><strong>- जगदीश शर्मा, एक्स ईएन केडीए</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Sep 2024 16:29:31 +0530</pubDate>
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