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                <title>vacant post - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>टीनशेड़ के नीचे पढ़ाई, समाज के विभिन्न आयोजन होने पर पढ़ाई की छुट्टी</title>
                                    <description><![CDATA[स्कूल में एक ही टीनशेड के नीचे तीन - तीन कक्षाएं संचालित हो रही है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/studies-under-tin-shed--holidays-on-various-social-events/article-119930"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/untitled-design-(2).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के किशोरपुरा स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विघालय के पास खुद का भवन नहीं होने से स्कूल जेठी समाज के परिसर में किराए पर चलाता है। भवन में कक्षा टीनशेड के नीचे चलती है,और एक ही टीनशेड के नीचे तीन से चार कक्षायें चल रही है। अभी स्कूल प्रवेशोत्सव होने के चलते स्कूल में बच्चों का प्रवेश कम ही हुआ है। वहीं वर्तमान में करीब दौ सौ से ढ़ाई सौ बच्चें अध्ययनरत है। बारिश का समय होने से कक्षाओं की दीवारों में सीलन व बदबू आ रही है। वहीं स्कूल में केवल आर्टस संकाय में हिंदी साहित्य, राजनीति विज्ञान, भूगोल होने से विद्यार्थी कम ही रूचि ले रहे है।  </p>
<p><strong>एक टीनशेड के नीचे दो से तीन कक्षाएं संचालित</strong><br />स्कूल में एक ही टीनशेड के नीचे तीन - तीन कक्षाएं संचालित हो रही है। जिसे विद्यार्थियों को पढ़ाई करने में व्यवधान उत्पन्न होता है साथ ही परेशानी का सामना करना पड़ता है। बच्चें कक्षाएं चलने पर डिस्टर्ब होते हैं। टीचर क्या कह रही है कई बार सुनाई तक नहीं देता।</p>
<p><strong>बारिश आई तो पढ़ाई की छुट्टी</strong><br />स्कूल के हालात देखने पर पता चलता है कि यदि तेज बारिश आती है तो शायद बच्चों को एक जगह पर बैठकर उनको सुरक्षित करना बड़ी चुनौती है। वहीं बारिश के दौरान अधिकतर कक्षा आठवीं,दसवीं, बारहवीं तक की ही कक्षा चलती है। व अन्य कक्षाओं की छुट्टी करनी पड़ती है।</p>
<p><strong>डर के साये में बच्चों की पढ़ाई</strong><br />अभिभावकों ने बताया कि हमारे बच्चें डर के साये में पढ़ाई कर रहे है। स्कूल परिसर खुला होने से कभी बंदर आ जाते है, वहीं बारिश में स्कूल परिसर में झाड़िया ऊगी हुई जिनसे विभिन्न प्रकार के जीवजंतु आ जाते है। साथ ही टीनशेड के नीचे पढ़ाई होती है जिसे भी डर लगा रहता है। </p>
<p><strong>17 में से 7 पद खाली </strong><br />स्कूल में राज्य सरकार द्वारा 17 पद स्वीकृत कर रखें परंतु अभी वर्तमान में 7 पद खाली। जिनमें फर्स्ट ग्रेड टीचर हिन्दी साहित्य, सैंकण्ड ग्रेड वरिष्ठ अध्यापक के तीन पद खाली व तृतीय क्षेणी के तीन पद खाली है </p>
<p><strong>विभिन्न आयोजन पर कई बार करनी पड़ती है पढ़ाई की छुट्टी</strong><br />स्कूल मां सेवा समिति सेठी समाज के परिसर में चलता है। जिसमें कई बार समाज की शादी, पार्टी सहित अन्य विभिन्न आयोजन स्कूल परिसर में होते हैं। जिसे पढ़ाई की छुट्टी रहती है। जिसे पढ़ाई बाधित होती है और बच्चों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।<br /><strong>- रमेश कुमार नागर अभिभावक</strong></p>
<p>स्कूल की जमीन आवंटन के लिए हम अक्टूबर 2024 से प्रयासरत है। वहंी कई बार उच्च आधिकारियों को इस समस्या के लिए अवगत करा रखा है। साथ ही अध्यापकों के खाली पदों के लिए भी हमने अधिकारियों को लिखित में दिया हुआ है। <br /><strong>- प्रमोद कनेरिया, प्रिंसिपल राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय  किशोरपुरा  कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Jul 2025 15:07:05 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा में प्रिंसिपल से लेकर शिक्षकों के एक हजार से ज्यादा पद खाली, जिले के 343 सरकारी स्कूलों में नहीं विषय-विशेषज्ञ</title>
                                    <description><![CDATA[ माध्यमिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में लंबे समय से शिक्षकों के रिक्त पद भरे नहीं जा सके। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/more-than-one-thousand-posts-of-teachers-from-principal-to-teacher-are-vacant-in-kota/article-106199"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/2257rtrer-(2).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिले के सरकारी स्कूलों में एक हजार से ज्यादा शिक्षकों के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। जिसकी वजह से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। गुरुजी के इंतजार में बोर्ड परीक्षा ही सर पर आ गई लेकिन शिक्षकों की कमी पूरी नहीं हो सकी। नतीजन, स्कूलों से गुणवत्ता की दूरी बढ़ गई।  जिसका असर परीक्षा परिणामों के रूप में पड़ सकता है। दरअसल, विभाग शिक्षा विभाग न तो समय पर पदोन्नति करवा पा रहा है और न ही राज्य सरकार सीधी भर्ती करवा प रही। जिसके कारण माध्यमिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में लंबे समय से शिक्षकों के रिक्त पद भरे नहीं जा सके। </p>
<p><strong>स्कूलों में 1129 शिक्षक पद रिक्त</strong><br />जिले में माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधीन 343 सरकारी स्कूलों में प्रिंसिपल से लेकर तृतीय श्रेणी लेवल-2 तक के 1129 शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। इनमें अधिकतर फर्स्ट व सेकंड ग्रेड के पद  रिक्त हैं। जिसकी वजह से विद्यार्थियों को सब्जेक्ट टीचर नहीं मिल पाया। हालात यह हैं, सालभर इंतजार के बावजूद स्कूलों में शिक्षक तो नहीं मिले  लेकिन परीक्षा जरूर सिर पर आ गई। शिक्षकों के रिक्त पदों का असर 6 मार्च से होने वाली दसवीं व बारहवी बोर्ड परीक्षाओं में नजर आएगा। </p>
<p><strong>स्मार्ट टीवी तो दी लेकिन पढ़ाने को गुरुजी नहीं </strong><br />जानकारी के अनुसार, शिक्षा विभाग ने जिन स्कूलों में सब्जेक्ट टीचर के पद रिक्त हैं, वहां स्मार्ट टीवी के साथ सब्जेक्ट लेक्चर के वीडियो ट्यूटोरियल भी उपलब्ध करवा रखे हैं। लेकिन, समस्या यह है, विषय विशेषज्ञ अध्यापक नहीं होने से वीडियो लेक्चर  को समझाने वाला ही नहीं है।  ऐसे में विद्यार्थियों के डाउट क्लियर नहीं हो पा रहे। विभाग ने एलइडी देकर महज, खानापूर्ति कर दी। </p>
<p><strong>कोटा में माध्यमिक शिक्षा विभाग में पदों की स्थिति </strong><br /><strong>जिले में कुल स्कूल     343 </strong><br /><strong>पद                                                     स्वीकृत             कार्यरत              रिक्त</strong><br />प्रिंसिपल                                                 333                 240                 093<br />ग्रेड-1 टीचर                                           1145                 737                 408<br />ग्रेड-द्वितीय टीचर                                    1731               1443                 288<br />ग्रेड-तृतीय एल-2 व समकक्ष                      946                 804                 142<br />गे्रड-तृतीय एल-1 व समकक्ष                   1050                908                 142<br />प्रारंभिक माध्यमिक ग्रेड-फर्स्ट                    344                288                   56<br />सेकंड, 3 ग्रेड व समकक्ष </p>
<p><strong>लैब अस्टिेंट ग्रेड फर्स्ट, सेकंड व तृतीय ग्रेड पदों की स्थिति</strong><br /><strong>स्वीकृत    कार्यरत    रिक्त  </strong>  <br />89    76    13</p>
<p><strong>पदोन्नति नहीं होने से विद्यार्थियों को नहीं मिले गुरुजी</strong><br />शिक्षक संघ रेस्टा के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने बताया कि वरिष्ठ अध्यापक व व्याख्याता के 50 प्रतिशत पदों पर सीधी भर्ती व 50 प्रतिशत पदों पर पदोन्नति से भरने का नियम हैं। इनकी भी समय पर पदोन्नति नहीं होने से बोर्ड परीक्षाओं के विद्यार्थियों को भी समय पर विषय अध्यापक नहीं मिल पा रहे।  राज्य के सभी सेकेंडरी स्कूलों को उच्च माध्यमिक स्कूलों में क्रमोन्नत करने से सरकारी स्कूलों में पहले से ही शिक्षकों का टोटा है, जिसकी पूर्ति पदोन्नति के अभाव में नहीं हो सकी। </p>
<p><strong>लाखो विद्यार्थियों को उठाना पड़ रहा खामियाजा</strong><br />शाला दर्पण के 1 फरवरी के आंकड़ों के अनुसार स्कूलों  में शिक्षकों से लेकर प्राचार्यों तक स्वीकृत 3 लाख 71 हजार 126 पदों में से वर्तमान में 2 लाख 54 हजार 684 कार्यरत हंै और 1 लाख 16 हजार 442 पद रिक्त पड़े हैं। इतनी बड़ी संख्या में पद रिक्त होने से राज्य के हजारों स्कूलों में व्यवस्था गड़बड़ाई हुई है। लेकिन सरकार व शिक्षा विभाग द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिसका खामियाजा सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे लाखों विद्यार्थियों को उठाना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>इनका अब तक नहीं हुआ पदस्थापन </strong><br />वरिष्ट अध्यापक से व्याख्याता की चार सत्रों की बकाया चल रही पदोन्नति में से केवल दो सत्रों की पदोन्नति हुई है । लेकिन, इन्हें यथावत स्कूलों में ही कार्यग्रहण करवा दिया गया ओर पदस्थापन के लिए दो बार जारी हुए काउंसलिंग कार्यक्रम को स्थगित किया जा चुका है। एक अप्रैल को तीसरे सत्र की पदोन्नति और बकाया जो जाएगी। ऐसे में दो सत्रों के  पदस्थापन आदेश और दो सत्रों की पदोन्नति बकाया है, जिसे छात्र हित में जल्द से जल्द पूरा किया जाना चाहिए। </p>
<p><strong>स्कूलों में लाखों पद रिक्त होना चिंताजनक</strong><br />राज्य के सबसे बड़े विभाग शिक्षा विभाग में बोर्ड परीक्षाएं से 6 मार्च से शुरू होने जा रही है। दूसरी ओर माध्यमिक शिक्षा विभाग में एक लाख 16 हजार 442 पद रिक्त होना गंभीर विषय है। राज्य सरकार व शिक्षा विभाग को नई भर्तियों में पदों की संख्या बढ़ानी चाहिए। साथ ही लंबे समय से लंबित सभी पदोन्नतियों को समय पर करके रिक्त पदों को भरा जाएं, जिससे राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे लाखों विद्यार्थियों को नए सत्र से पहले शिक्षक मिल सकें।<br /><strong>- मोहर सिंह सलावद, प्रदेशाध्यक्ष, शिक्षक संघ रेसटा </strong></p>
<p>विभाग में कर्मचारियों की डीपीसी किए जाने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। जल्द ही शिक्षकों व प्रिंसिपलों के रिक्त पदों को भर दिया जाएगा।<br /><strong>- केके शर्मा, जिला मुख्य शिक्षाधिकारी कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Mar 2025 15:36:16 +0530</pubDate>
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                <title>बजट होते हुए भी खर्च नहीं कर पा रहे महाविद्यालय</title>
                                    <description><![CDATA[कॉलेज विकास के लिए छोटी से बड़ी चीज तक खरीद के लिए दूसरों के भरोसे रहता महाविद्यालय प्रशासन।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/despite-having-budget--colleges-are-unable-to-spend/article-91353"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/427rtrer-(4)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती के अधिकतर सरकारी कॉलेजों में सहायक लेखाधिकारी की पोस्ट लंबे समय से रिक्त है। जिसकी वजह से महाविद्यालय प्रशासन को वित्तिय संबंधित कार्यों के लिए परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। सहायक लेखाधिकारी न होने से महाविद्यालय आवश्यक साधन-संसाधनों की खरीद नहीं कर पा रहे। जिसकी वजह से कॉलेजों में शैक्षणिक व्यवस्थाएं समुचित रूप से सुचारू नहीं हो पा रही। शिक्षाविदें का कहना है, 10 हजार रुपए से अधिक की वस्तु खरीद के लिए महाविद्यालय प्रशासन को टेंडर प्रक्रिया करनी होती है, जो सहायक लेखाधिकारी के अभाव में संभव नहीं हो पाती। चाहे वो फर्नीचर, टेबल-कुर्सियां, कम्प्यूटर क्रय करना हो या फिर विद्या संबल पर लगे शिक्षकों के मानदेय भुगतान बिल, डे-टू-डे कैश बुक मेंटेंन, नोटशीट टिप्पणी, ट्रेजरी संबंधित बिलों सहित अन्य कार्यों के लिए सहायक लेखाधिकारी की आवश्यकता होती है। क्योंकि, इसमें  टेक्निकल आसपेक्ट व उकाउंट्स संबंधी नियमों की समझ शिक्षकों को प्रोपर रूप से नहीं होती। जिसकी वजह से जरूरी संसाधनों का क्रय समय पर नहीं हो पाता। इसका प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से असर विद्यार्थियों की सुविधाओं पर पड़ता है। </p>
<p><strong>कोटा के 11 में से 4 कॉलेजों में ही डबल एओ कार्यरत</strong><br />कोटा जिले के 11 राजकीय महाविद्यालयों में से मात्र 4 में ही सहायक लेखाधिकारी के पद भरे हैं। यहां एक-एक डबल एओ कार्यरत हैं। इनमें गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज,  गवर्नमेंट साइंस कॉलेज, जेडीबी आर्ट्स कॉलेज व गवर्नमेंट संस्कृत कॉलेज शामिल हैं। वहीं, राजकीय कन्या वाणिज्य व जेडीबी साइंस कॉलेज में संविधा पर रिटायर्ड  लेखाधिकारी रखे हैं। इसके अलावा 7 महाविद्यालयों में पद खाली हैं। </p>
<p><strong>600 स्टूडेंट्स पर 100 टेबल-कुर्सी</strong><br />कनवास कॉलेज के सहायक आचार्य डॉ. ललित नामा ने बताया कि महाविद्यालय में सहायक लेखाधिकारी की बहुत आवश्यकता है। इनके अभाव में फाइनेंस से संबंधित  छोटे-छोटे कार्यों के लिए दूसरे कॉलेजों पर निर्भर रहना पड़ता है। यहां कुल 600 विद्यार्थी हैं, जिनके मुकाबले टेबल-कुर्सियां मात्र 100 ही हैं।  इधर, सांगोद कॉलेज की प्राचार्य प्रो. अनिता वर्मा का कहना है, हमारा महाविद्यालय परीक्षा सेंटर है। सेमेस्टर एग्जाम चल रहे हैं, तो अन्य कक्षों में क्लासें भी लगती हैं। ऐसे में टेबल-कुर्सियों की कमी है। जिसकी खरीद प्रक्रिया  के लिए सहायक लेखाधिकारी की जरूरत होती है, जो नहीं होने से वित्तिय संबंधित कार्य प्रभावित होते हैं। </p>
<p><strong>इन समस्याओं से जूझ रहे कॉलेज प्रशासन  </strong><br />शिक्षकों का कहना है, महाविद्यालयों में फर्नीचर, कम्प्यूटर, इनवर्टर, कूलर-पंखें, टेबल-कुर्सियां खरीद, विद्या संबल व संविदा पर लगे शिक्षकों का वेतन संबंधित,  विद्यार्थियों का फीस स्ट्रेक्चर, स्टेशनरी क्रय, एडमिशन के दौरान आने वाली फीस को विभिन्न मदों में विभाजित करना, कक्षा-कक्ष मेंटिनेंस, अनुमानित बजट बनाना, लाइब्रेरी का सेटअप तैयार करना व किताबें खरीदने सहित सम्पूर्ण वित्तीय कार्य सहायक लेखाधिकारी द्वारा किए जाते हैं। जिनके अभाव में महाविद्यालय प्रशासन आवश्यक साधन-संसाधनों की खरीद नहीं कर पाते।  संभाग में कई महाविद्यालय ऐसे हैं, जहां विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में टेबल-कुर्सियां आधी भी नहीं है। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं प्राचार्य</strong><br /><strong>5 लाख का बजट हो गया लैप्स</strong><br />गत वर्ष फर्नीचर खरीद के लिए सरकार ने 5 लाख का बजट जारी किया था। लेकिन, महाविद्यालय में लंबे समय से सहायक लेखाधिकारी का पद रिक्त है। जिसकी वजह से समय पर टैंडर नहीं हो पाए और नतीजन बजट लैप्स हो गया। वर्तमान में यहां करीब 800 स्टूडेंट्स अध्ययनरत हैं, जिनके मुकाबले टेबल-कुर्सियां आधी भी नहीं है। हर कॉलेज में एक सहायक लेखाधिकारी होना चाहिए। इनके अभाव में वित्तिय संबंधित कई कार्यों में परेशानी होती है। <br /><strong>- डॉ. रामदेव मीणा, प्राचार्य राजकीय इटावा महाविद्यालय\</strong></p>
<p><strong>विद्यार्थियों की सुविधाओं पर पड़ता असर</strong><br />कॉलेज में छात्रहित में आवश्यक साधन-संसाधनों की खरीद आवश्यक होता है। लेकिन लेखाधिकारी के नहीं होने से खरीद नहीं पाते। जिसका असर प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से विद्यार्थियों पर पड़ता है। गत वर्ष फर्नीचर खरीद के लिए 3 लाख का बजट मिला था, लेकिन यहां सहायक लेखाधिकारी का पद रिक्त होने से सयम पर टैंडर नहीं हो पाए और वह बजट भी लैप्स हो गया। फिलहाल अभी नया बजट नहीं मिला। <br /><strong>- डॉ. अरविंद सिंह प्रताप, कार्यवाहक प्राचार्य, राजकीय छबड़ा महाविद्यालय</strong></p>
<p><strong>4 लाख रुपए शिक्षकों का मानदेय अटका</strong><br />सहायक लेखाधिकारी के पद रिक्त होने से फाइनेंस संबंधित कार्यों में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मार्च में विद्या संबल पर 6 शिक्षक लगे थे, जिनका तब से आज तक का करीब 4 लाख रुपए मानदेय नहीं मिला। उनका बिल पास नहीं हो रहा। इसके अलावा 25 से 30 हजार रुपए के स्टेशनरी, स्पोट्स सामग्री, बैनर फलेक्स के बिल भी फरवरी से अटके हुए हैं।  <br /><strong>- बीके शर्मा, प्राचार्य, राजकीय तालेड़ा महाविद्यालय</strong></p>
<p><strong>डबल एओ बिना कैसे खरीदें फर्नीचर</strong><br />फर्नीचर के लिए 5.50 लाख का बजट मिला है। जिसकी खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया की जानी है, जो सहायक लेखाधिकारी के बिना संभव नहीं है। कॉलेज में डबल एओ का पद रिक्त है। हालांकि, नोडल कॉलेज को टैंडर प्रक्रिया करवाने के लिए सहायक लेखाधिकारी की व्यवस्था करवाने की मांग की है। पिछले साल भी बजट मिला था, जो डबल एओ के अभाव में टैंडर प्रक्रिया समय पर नहीं हो पाने से लैप्स हो गया। वित्तिय संबंधी कार्यों के लिए काफी परेशानी होती है। <br /><strong>- डॉ. बुद्धिप्रकाश मीणा, कार्यवाहक प्राचार्य, राजकीय अटरू महाविद्यालय</strong></p>
<p>लेखा नियमों की जानकारी की दृष्टि से महाविद्यालयों में सहायक लेखाधिकारी का होना हितकारी है। बड़े कॉलेजों में डबल एओ हैं। संबंधित कॉलेज के प्राचार्यों द्वारा मांग करने पर दूसरे महाविद्यालयों से व्यवस्था की जाती है। <br /><strong>- प्रो. गीताराम शर्मा, क्षेत्रिय सहायक निदेशक आयुक्तालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Sep 2024 14:50:07 +0530</pubDate>
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