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                <title>Karnataka High Court - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Karnataka High Court RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>कर्नाटक हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : शिक्षण संस्थान में वंदे मातरम् का गायन अनिवार्य नहीं, जनहित याचिका ख़ारिज</title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक उच्च न्यायालय ने स्कूलों में वंदे मातरम के सभी छह छंदों के गायन के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि केंद्र की सलाह अनिवार्य नहीं है, क्योंकि इसमें 'सकते हैं' (May) शब्द का प्रयोग हुआ है। पीठ ने कहा कि राष्ट्रीय गीत के लिए कोई वैधानिक बाध्यता नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-decision-of-karnataka-high-court-singing-of-vande-mataram/article-149746"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/karnataka.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने गुरुवार को उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें स्कूलों में राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के सभी छह छंदों को गाने की केंद्र सरकार के परामर्श को चुनौती दी गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि केंद्र का यह निर्देश अनिवार्य नहीं है। मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरू और न्यायमूर्ति सीएम पूनाचा की पीठ ने इस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। पीठ ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की सलाह में 'सकते हैं' (मे) शब्द का प्रयोग किया गया है, जो यह दर्शाता है कि शिक्षण संस्थान इसे मानने के लिए बाध्य नहीं हैं। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय गीत के गायन को लेकर कोई वैधानिक अनिवार्यता नहीं है।</p>
<p>पीठ ने राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत के बीच के अंतर को भी स्पष्ट किया। अदालत ने कहा कि जहाँ राष्ट्रगान स्थापित कानूनी और नियामक प्रावधानों के दायरे में आता है, वहीं राष्ट्रीय गीत किसी वैधानिक ढांचे के अधीन नहीं है। इसके अलावा, अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अरविंद कामथ की उन दलीलों पर भी गौर किया, जिसमें बताया गया कि इसी तरह की एक याचिका को उच्चतम न्यायालय द्वारा पहले ही खारिज किया जा चुका है।</p>
<p>अधिवक्ता सोमशेखर राजवंशी द्वारा दायर इस जनहित याचिका में केंद्र के फरवरी 2026 के परामर्श को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि यह सलाह सरकारी स्कूलों के छात्रों को 'वंदे मातरम' के सभी छह छंद गाने के लिए मजबूर करती है, जिसमें हिंदू देवी-देवताओं के संदर्भ वाले हिस्से भी शामिल हैं। याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि गीत के शुरुआती छंद व्यापक रूप से देशभक्ति के रूप में स्वीकार किए जाते हैं, लेकिन विस्तृत संस्करण में देवी दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती के संदर्भ हैं। स्कूलों में इसके दैनिक गायन को अनिवार्य करना धर्मनिरपेक्षता, समानता और अंतरात्मा की स्वतंत्रता के संवैधानिक गारंटियों का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के कार्यकारी निर्देश सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों में छात्रों पर धार्मिक तत्व नहीं थोप सकते।</p>
<p>हालांकि, उच्च न्यायालय ने इन दलीलों पर विचार करने के बाद कहा कि वह इस मामले की विस्तृत जांच करने का इरादा नहीं रखता क्योंकि यह सलाह बाध्यकारी नहीं है। पीठ ने टिप्पणी की कि किसी गैर-अनिवार्य निर्देश पर न्यायिक समय खर्च करना उचित नहीं होगा और इसी के साथ याचिका खारिज कर दी गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 17:28:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बेंगलुरु में मची भगदड़ मामले में राज्य सरकार ने पेश की रिपोर्ट : RCB को बताया भगदड़ का जिम्मेदार, कोहली का नाम भी शामिल  </title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने हाल ही में कर्नाटक हाईकोर्ट में अपनी रिपोर्ट सौंपी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-state-government-presented-the-report-presented-by-rcb-in/article-120776"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/88442roer-(1).png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। सरकार ने हाल ही में कर्नाटक हाईकोर्ट में अपनी रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट के अनुसार RCB ने बिना पुलिस इजाजत के लोगों को विक्ट्री परेड में आने का आमंत्रण दिया था।</p>
<p>विक्ट्री परेड में चल रहे जश्न के दौरान 11 लोगों की मौत हो गई थी और 50 से अधिक लोग घायल हो गए थे। राज्य सरकार ने अदालत से रिपोर्ट को गोपनीय रखने का आग्रह किया था।</p>
<p>राज्य सरकार द्वारा रिपोर्ट में कहा गया है कि आरसीबी मैनेजमेंट ने आईपीएल फाइनल के बाद 3 जून को पुलिस से संपर्क किया था, लेकिन यह बस एक सूचना मात्र थी। मैनेजमेंट द्वारा कानूनी तौर पर कोई इजाजत नहीं मांगी गई थी। कानून के मुताबिक, ऐसे आयोजन  की इजाजत कम से कम सात दिन पहले लेनी होती है।</p>
<p>सरकार द्वारा पेश किए गए रिपोर्ट में कहा गया है कि आरसीबी ने पुलिस से परामर्श किए बिना अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक फोटो पोस्ट की, जिसमें लोगों के लिए निशुल्क प्रवेश की सूचना दी गई और जनता को विजय परेड में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया।</p>
<p>RCB के द्वारा अपने आधिकारिक हैंडल पर RCB टीम के एक प्रमुख खिलाड़ी, विराट कोहली का एक वीडियो क्लिप शेयर किया गया, जिसमें उन्होंने बताया कि उनकी टीम इस जीत का जश्न 04.06.2025 को बेंगलुरु में शहर के लोगों और RCB फैंस के साथ मनाना चाहती है।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Jul 2025 13:05:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>‘भारत माता की जय’ नारा नफरती भाषण नहीं: कर्नाटक उच्च न्यायालय</title>
                                    <description><![CDATA[यह फैसला धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले भाषण की परिभाषा को स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/bharat-mata-ki-jai-slogan-is-not-hate-speech-karnataka/article-91790"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/court-hammer04.jpg" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच शत्रुता को रोकने के लिए दंडात्मक प्रावधानों का दुरुपयोग करने की निंदा करते हुए भारत माता की जय नारा लगाने के आरोप में पांच लोगों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को भी रद्द कर दिया है। कर्नाटक के उल्लाल तालुक के निवासियों पर भारत माता की जय के नारे लगाने के आरोप में भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए के तहत मामला दर्ज किया गया था। अदालत ने इस नारे को घृणा भाषण या धार्मिक वैमनस्य को बढ़ावा देने के लिए उपयुक्त नहीं माना। यह फैसला धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले भाषण की परिभाषा को स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण है।</p>
<p><strong>यह मामला धारा 153ए का क्लासिक दुरुपयोग </strong><br />न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना ने अपने फैसले में कहा कि यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए का अभूतपूर्व दुरुपयोग है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि धारा 153ए के तहत आरोप साबित करने के लिए आवश्यक कोई भी तत्व इस मामले में मौजूद नहीं थे। यह मामला धारा 153ए का क्लासिक दुरुपयोग है, और यह केवल एक प्रतिकार के रूप में दर्ज किया गया था।</p>
<p><strong>यह तो राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देता है</strong><br />उन्होंने कहा कि ‘भारत माता की जय’ का नारा लगाना किसी भी तरह से धार्मिक वैमनस्य को बढ़ावा नहीं देता है, बल्कि यह राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देता है। उन्होंने कहा है ,‘भारत माता की जय के नारे की जांच की अनुमति देना यह गलत धारणा को बढ़ावा देने के समान होगा कि ऐसे नारे धार्मिक समूहों के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देते हैं।</p>
<p><strong>यह था मामला</strong><br />यह बयान एक महत्वपूर्ण मामले में आया है जहां पांच लोगों पर आरोप था कि उन्होंने भारत माता की जय का नारा लगाया था, जिसे अदालत ने घृणा भाषण या धार्मिक वैमनस्य को बढ़ावा देने के लिए उपयुक्त नहीं माना। वरिष्ठ अधिवक्ता एम अरुणा श्याम और अधिवक्ता ई सुयोग हेराले याचिकाकर्ताओं की ओर से जबकि अतिरिक्त राज्य लोक अभियोजक बी एन जगदीश राज्य की ओर से पेश हुए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Sep 2024 14:31:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कर्नाटक सीएम सिद्दारमैया पर चलेगा केस, हाईकोर्ट ने राज्यपाल के फैसले को बरकरार रखा</title>
                                    <description><![CDATA[एमयूडीए की 14 साइटों के आवंटन में कथित अनियमितताओं का मामला ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/case-will-be-filed-against-karnataka-cm-siddaramaiah/article-91487"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/siddaramaiah.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने राज्य के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के खिलाफ मैसूर शहरी  विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) की 14 साइटों के आवंटन में कथित अनियमितताओं की जांच की मंजूरी देने के फैसले को बरकरार रखा।  न्यायालय ने सिद्दारमैया की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने  राज्यपाल थावरचंद गहलोत के सिद्दारमैया की पत्नी को एमयूडीए की 14 साइटों के आवंटन में कथित अनियमितताओं की जांच की मंजूरी देने के फैसले को चुनौती दी थी। इस बीच, सिद्दारमैया ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय जाने का फैसला किया है।</p>
<p><strong>कोर्ट ने कहा राज्यपाल के फैसले में कोई दोष नहीं </strong><br />न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना ने कहा कि इस मामले में राज्यपाल के फैसले में कोई दोष नहीं हैं, क्योंकि उन्होंने ‘विचार-विमर्श’ के बाद अपने विवेक का इस्तेमाल करके आदेश पारित किया था। न्यायालय ने कहा कि शिकायतकर्ताओं द्वारा शिकायत दर्ज कराना और राज्यपाल से मंजूरी मांगना उचित था और इस संदर्भ में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत मंजूरी अनिवार्य है।</p>
<p><strong>असाधारण हालात में राज्यपाल ले सकते हैं स्वतंत्र फैसला</strong><br />न्यायमूर्ति नागप्रसन्ना ने स्पष्ट किया कि धारा 17 ए में कहा गया है कि किसी पुलिस अधिकारी को अधिनियम के तहत दंडनीय अपराधों के लिए किसी लोक सेवक के खिलाफ धारा 200 या 203 के तहत दर्ज निजी शिकायत के लिए अनुमोदन लेने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह की स्वीकृति लेना शिकायतकर्ता का कर्तव्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्यपाल आमतौर पर संविधान के अनुच्छेद 163 में उल्लेखित प्रावधानों के तहत मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह पर कार्य करते हैं, लेकिन वे असाधारण परिस्थितियों में स्वतंत्र निर्णय ले सकते हैं। वर्तमान मामला ऐसे अपवाद का उदाहरण है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/case-will-be-filed-against-karnataka-cm-siddaramaiah/article-91487</link>
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                <pubDate>Wed, 25 Sep 2024 10:17:08 +0530</pubDate>
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