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                <title>nobel prize - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>nobel prize RSS Feed</description>
                
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                <title>मारिया कोरिना मचाडो के अवॉर्ड लेने जाने पर लग सकती है रोक, वेनेजुएला सरकार कर सकती है भगोड़ा घोषित</title>
                                    <description><![CDATA[लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित मारिया कोरिना मचाडो को लेकर वेनेजुएला सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि 10 दिसंबर 2026 को ओस्लो में पुरस्कार ग्रहण करने जाएँगी तो उन्हें भगोड़ा घोषित किया जा सकता है। मचाडो पर आतंकवाद और अमेरिका की सैन्य सहायता से जुड़े कई मामले लंबित हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/maria-corina-machado-may-be-banned-from-going-to-receive/article-133188"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/maria.png" alt=""></a><br /><p>वेनेजुएला। वेनेजुएला सरकार ने लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रचार के लिए मारिया कोरिना मचाडो को नोबेल पुरस्कार से नावाजा जानें की घोषणा की थी, लेकिन मचाडो पुरस्कार लेने के लिए नार्वे जाती है तो उनको सरकार भगोड़ा घोषित कर सकती हैं। बता दें कि, आने वाले 10 दिसंबर 2026 को पुरस्कार वितरण समारोह होने वाला है। बता दें कि, वेनेजुएला सरकार ने ये ठोस कदम इसलिए उठाया है क्योंकि, मचाडो के​ खिलाफ आतंकवाद के कई मामले दर्ज है। एजी ने मचाडो के बारे में कहा है कि, कैरेबियन में सैन्य तैनाती के लिए अमेरिका की सहायता करने के लिए मचाडो के खिलाफ कई मामले लंबित है, जिसकी जांच चल रही है।</p>
<p>इस मामले में सबसे खास बात ये कि, मचाडो ने सैन्य मौजूदगी का पूरी तरह से स्वागत किया है और कहा ​है कि, वह वेनेजुएला में छिपी हुई हैं और पुरस्कार लेने के लिए 10 दिसंबर को ओस्लो जा सकती है। इसके विपरित वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने आरोप लगाते हुए कहा है कि, इसके जरिए उनकी सरकार गिराने की लगातार कोशिश की जा रही है।</p>
<p>इससे पहले अक्टूबर में मचाडो ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर कहा था कि, वेनेजुएला की जनता की संप्रभु इच्छा को सम्मान दिलाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति हमारे मुख्य सहयोगी है और वो इसके लिए हर संभव प्रयास करेंगे। इसके बाद अवॉर्ड विजेता नॉर्वे की नोबेल समिति के अध्यक्ष जॉर्गन वात्ने फ्रिडनेस ने मचाडो की जमकर तारिफ की थी। इस मामले में फ्रिडनेस ने कहा है कि, मचाडो अब अपनी जान को बचाने के लिए छिपकर रहने का मजबूर है और वो इस समय भी अपने ही देश में और लाखों लोगों को प्रेरित करने का काम कर रही है। इसके साथ ही बता दें कि, मारिया के करीबी एडमंडो गोंजालेज को राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष के उम्मीदवार के तौर पर उतारा गया था, लेकिन अब खबर सामने आ रही है कि, मचाडो वेनेजुएला में ही किसी अज्ञात स्थान पर चली गई है और जनवरी के बाद से उनको किसी भी सार्वजनिक मंच पर नहीं देखा गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Nov 2025 15:08:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नोबेल पुरस्कार 2025 : आज से होगा शुरू, भूख नियंत्रक हार्मोन रिसर्च पर जोरदार उम्मीदें</title>
                                    <description><![CDATA[ नोबेल पुरस्कारों की वार्षिक घोषणा सोमवार, 6 अक्टूबर से शुरू होकर 13 अक्टूबर तक जारी रहेगी। पहला ऐलान चिकित्सा श्रेणी में किया जाएगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/nobel-prize-2025-will-start-from-today-to-hungry-controller/article-128881"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news-(8)4.png" alt=""></a><br /><p>स्कॉटहोम। नोबेल पुरस्कारों की वार्षिक घोषणा सोमवार, 6 अक्टूबर से शुरू होकर 13 अक्टूबर तक जारी रहेगी। पहला ऐलान चिकित्सा श्रेणी में किया जाएगा।</p>
<p>रिपोर्टों के अनुसार इस वर्ष चिकित्सा/शरीरक्रिया विज्ञान के नोबेल के लिए प्रमुख उम्मीद जताई जा रही है उन शोधों पर जो भूख नियंत्रित करने वाले हार्मोनों की पहचान और उनके कार्य‑तंत्र से जुड़ी हैं। इन खोजों को मानव स्वास्थ्य और पोषण के अध्ययन में बड़ा योगदान माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Oct 2025 14:59:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Nobel Prize 2023: कैटालिन कारिको और ड्रू वीसमैन को मिला नोबेल प्राइज, कोरोना वैक्सीन बनाने से जुड़ी खोज की थी</title>
                                    <description><![CDATA[न्यूक्लियोसाइड बेस संशोधनों से संबंधित उनकी खोजों के लिए ये पुरुस्कार दिया गया है। इसी खोज की मदद से covid​​​​-19 से लड़ने के लिए एमआरएनए वैक्सीन को विकसित करने में मदद मिली थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/nobel-prize-2023-physiology-medicine-katalin-karik%C3%B3-and-drew-weissman/article-58569"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/nobel-prize-20231.png" alt=""></a><br /><p>नोबेल प्राइज 2023 की घोषणा हो चुकी है। फिजियोलॉजी या मेडिसिन के लिए कैटालिन कारिको (Katalin Karikó) और ड्रू वीसमैन (Drew Weissman) को नोबेल प्राइज से सम्मानित किया गया है। इन्हें न्यूक्लियोसाइड बेस संशोधनों से संबंधित उनकी खोजों के लिए ये पुरुस्कार दिया गया है। इसी खोज की मदद से covid​​​​-19 से लड़ने के लिए एमआरएनए वैक्सीन को विकसित करने में मदद मिली थी। बता दें कि पुरस्कार जीतने वाले को एक मिलियन अमेरिकी डॉलर का कैश प्राइज दिया जाता है। नोबेल पीस प्राइज की घोषणा 6 अक्टूबर को की जाएगी। वहीं अर्थशास्त्र के क्षेत्र से जुड़े विजेता की घोषणा नौ अक्तूबर होगी।<br /><br /><strong>नवज्योति ने 18 अप्रैल 2021 के अंक में mRNA तकनीक के बारें में विस्तार से बताया था<br /></strong>किसी भी बीमारी की वैक्सीन तैयार होने में कई वर्ष लग जाते है। पूरी दुनिया में कहर ढा रहे कोरोना वायरस का टीका बनाना भी कोई आसान काम नहीं था। लेकिन वैज्ञानिकों के अथक प्रयास के बल पर एक साल से भी कम समय में इसकी वैक्सीन बनकर तैयार हो गई थी। कोरोना के खिलाफ आई फाइजर और मॉडर्ना कंपनी की वैक्सीन ने एक उजाले की किरण दिखाई थी। इन वैक्सीन को बनाने में नई तकनीक का इस्तेमाल किया गया था। यह दोनों एमआरएनए (mRNA) तकनीक पर आधारित वैक्सीन है। <br /><br />एमआरएनए तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे बहुत कम समय में विकसित किया जा सकता है। फाइजर और मॉडर्ना की वैक्सीन 90 से 95 प्रतिशत तक प्रभावी है। इस तकनीक के द्वारा शरीर के अंदर बॉडी सेल प्रोटीन बनाने के लिए प्रोत्साहित करती है। इसके साथ ही तंत्रिका तंत्र को इस तकनीक के जरिए जरूरी प्रोटीन मिलता है। अर्थात् जब हमारे शरीर पर कोई वायरस या बैक्टीरिया हमला करता है तो एमआरएनए तकनीक हमारी सेल्स को उस वायरस या बैक्टीरिया से लड़ने के लिए प्रोटीन बनाने का मैसेज भेजती है। इससे हमारे इम्यून सिस्टन को जो जरूरी प्रोटीन चाहिए, वो मिल जाता है और हमारे शरीर में एंटीबॉडी बन जाती है। एमआरएनए वैक्सीन में असली वायरस की जरूरत नहीं होती इसलिए इसे पारंपरिक वैक्सीन की तुलना में ज्यादा जल्दी बनाया जा सकता है। इससे शरीर की इम्यूनिटी भी बढ़ती है। ये पहली बार है जब दुनिया में इस तकनीक पर आधारित वैक्सीन बनी है।<br /><br />एमआर तकनीक लॉग लास्टिंग है। यह तकनीक भविष्य में काफी प्रभावी रहेगी। इस तकनीक के जो रिजल्ट आए है उनकी एफीकेसी 90 प्लस प्रतिशत है। उनके ज्यादा बेहतर रिजल्ट है।<br />-डॉ. पुनीत रिजवानी, प्रोफेसर एंड हैड, मेडिसिन विभाग, महात्मा गांधी हॉस्पिटल, जयपुर</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Oct 2023 15:38:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका के 3 अर्थशास्त्रियों को अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार</title>
                                    <description><![CDATA[इन विजेताओं में यूएस फेडरल रिजर्व के पूर्व प्रमुख बेन बर्नानके, शिकागो विश्वविद्यालय के डगलस डायमंड और सेंट लुइस, मिसौरी में वाशिंगटन विश्वविद्यालय के फिलिप डाइबविग शामिल हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/nobel-prize-in-economics-awarded-to-3-us-economists/article-26104"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/index9.jpg" alt=""></a><br /><p>स्टॉकहोम। अमेरिका के 3 अर्थशास्त्रियों ने अर्थशास्त्र में 2022 का नोबल पुरस्कार हासिल किया है। रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने यह घोषणा की। इन विजेताओं में यूएस फेडरल रिजर्व के पूर्व प्रमुख बेन बर्नानके, शिकागो विश्वविद्यालय के डगलस डायमंड और सेंट लुइस, मिसौरी में वाशिंगटन विश्वविद्यालय के फिलिप डाइबविग शामिल हैं। एकेडमी के मुताबिक तीनों अमेरिकी अर्थशास्त्रियों को बैंकों और वित्तीय संकटों पर शोध के लिए अर्थशास्त्र  2022 का नोबेल मेमोरियल पुरस्कार प्रदान किया गया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Oct 2022 18:32:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा, रुस और यूक्रेन के संगठनों के नाम शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[नोबेल कमेटी के प्रमुख बेरिट रीज एंडर्सन ने शांति पुरस्कारों की घोषणा नार्वे में की। पिछले साल यह पुरस्कार लोकतंत्र, शांति और फ्रीडम ऑफ स्पीच के लिए रुस के दो पत्रकारों दिमित्री मुरातोव और फिलीपीन्स के मारिया रेसा को मिला था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/jailed-ales-bilyatsky-wins-nobel-peace-prize/article-25752"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/nobel.jpg" alt=""></a><br /><p>नार्वे। बेलारूस के मानवाअधिकार कार्यकर्ता एलेस बियालियात्स्की, रूसी समूह 'मेमोरियल' और यूक्रेन के संगठन 'सेंटर फॉर सिविल लिबर्टीज' को इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा हुई है। एलेस बियालियात्स्की फिलहाल जेल में हैं। नोबेल कमेटी के प्रमुख बेरिट रीज एंडर्सन ने शांति पुरस्कारों की घोषणा नार्वे में की। पिछले साल यह पुरस्कार लोकतंत्र, शांति और फ्रीडम ऑफ स्पीच के लिए रुस के दो पत्रकारों दिमित्री मुरातोव और फिलीपीन्स के मारिया रेसा को मिला था।</p>
<p>चिकित्सा के नोबेल के साथ ही नोबेल पुरस्कारों की घोषणा शुरु हो गई। निएंडरथल डीएनए के रहस्यों को उजागर करने के लिए 3 वैज्ञानिकों कैरोलिन आर बर्टोज्जी, मोर्टन मेल्डल और के बैरी शार्पलेस ने संयुक्त रुप से यह पुरस्कार जीता। अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार की घोषणा 10 अक्टूबर को होगी।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/jailed-ales-bilyatsky-wins-nobel-peace-prize/article-25752</link>
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                <pubDate>Fri, 07 Oct 2022 15:52:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मनाबे, हैसलमैन और पैरिसी को मिला भौतिकी का नोबेल</title>
                                    <description><![CDATA[आधा हिस्सा मनाबे और हैसलमैन को तथा बाकी आधा हिस्सा पैरिसी को प्रदान किए जाने की घोषणा की गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A5%87--%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A4%B2%E0%A4%AE%E0%A5%88%E0%A4%A8-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A5%88%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%AD%E0%A5%8C%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%AC%E0%A5%87%E0%A4%B2/article-1459"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/111.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्टॉकहोम</strong>। स्युकुरो मनाबे, क्लाउस हैसलमैन और जियोर्जियो पैरिसी को 2021 के भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से संयुक्त रूप से सम्मानित किया गया है, जिसका आधा हिस्सा मनाबे और हैसलमैन को तथा बाकी आधा हिस्सा पैरिसी को प्रदान किए जाने की घोषणा की गई है। नोबेल पुस्कार प्रदान करने वाली रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने मंगलवार को यह घोषणा की।</p>
<p><br /> <strong>इस खोज के लिए सम्मान</strong><br /> एकेडमी ने बताया कि मनाबे और  हैसलमैन को पृथ्वी की जलवायु की फिजिकल मॉडलिंग और परिवर्तनशीलता की मात्रा निर्धारित करने एवं ग्लोबल वार्मिंग का विश्वसनीय पूर्वानुमान लगाने के लिए तथा पैरिसी को परमाणु से लेकर ग्रहों तक के पैमाने पर भौतिक प्रणालियों में विकार और उतार-चढ़ाव की  परस्पर क्रिया की खोज के लिए यह पुरस्कार दिया गया है। स्युकुरो मनाबे और क्लाउस हैसलमैन ने पृथ्वी की जलवायु और इस पर मानवता के प्रभाव के बारे में हमारे ज्ञान की नींव रखी। जियोर्जियो पैरिसी को अव्यवस्थित सामग्री और अनियमित प्रक्रियाओं के सिद्धांत में उनके क्रांतिकारी योगदान के लिए पुरस्कृत किया गया है। <br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Oct 2021 12:45:52 +0530</pubDate>
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                <title>डेविड जूलियस और अर्डेम पैटापाउटियन को मिला चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी वैज्ञानिकों डेविड जूलियस और अर्डेम पैटापाउटियन को तापमान और स्पर्श संबंधी रिसेप्टर्स की खोजों के लिए चिकित्सा क्षेत्र के नोबेल पुरस्कार से संयुक्त रूप से नवाजा गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/615b033445ba0/article-1424"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/qw.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्टॉकहोम</strong>। अमेरिकी वैज्ञानिकों डेविड जूलियस और अर्डेम पैटापाउटियन को तापमान और स्पर्श संबंधी रिसेप्टर्स की खोजों के लिए चिकित्सा क्षेत्र के नोबेल पुरस्कार से संयुक्त रूप से नवाजा गया है।कैरोलिंस्का इंस्टिट्यूट स्थित नोबेल असेंबली ने सोमवार को दाेनों वैज्ञानिकों को साझा रूप से पुरस्कार प्रदान करने की घोषणा की।असेंबली ने बताया कि डेविड जूलियस ने मिर्च से मिलने वाले तीखे और जलन उत्पन्न करने वाले यौगिक कैप्साइसिन का उपयोग कर जलन महसूस होने पर प्रतिक्रिया देने वाले त्वचा की तंत्रिका के अंत में पाये जाने वाले एक सेंसर की पहचान की। अर्डेम पैटापाउटियन ने दबाव के प्रति संवेदनशील कोशिकाओं का उपयोग कर त्वचा और आंतरिक अंगों में यांत्रिक उत्तेजनाओं के लिए जिम्मेदार सेंसर के एक नवीन वर्ग की खोज की।असेंबली ने बताया कि इन सफल खोजों ने गहन शोध गतिविधियों को शुरू किया जिससे तंत्रिका तंत्र द्वारा गर्मी, ठंड और यांत्रिक उत्तेजना को महसूस किये जाने संबंधी हमारी समझ में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Oct 2021 19:07:03 +0530</pubDate>
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