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                <title>painting - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>painting RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>एक माह के प्रशिक्षण शिविर में थिएटर, मीनिएचर पेंटिंग, ब्लॉक प्रिंटिंग और ढूंढाड़ी भाषा सीख रहे प्रतिभागी</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर के सिटी पैलेस में एक दिवसीय सांस्कृतिक विरासत प्रशिक्षण शिविर युवाओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। 18 जून तक चलने वाले इस शिविर में 5 वर्ष से अधिक उम्र के प्रतिभागी मीनिएचर पेंटिंग, थिएटर, ब्लॉक प्रिंटिंग और ढूंढाड़ी भाषा की बारीकियां सीख रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/participants-learning-theater-miniature-painting-block-printing-and-dhunkhadi-language/article-155104"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1200-x-600-px-(1)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सिटी पैलेस में आयोजित एक माह का सांस्कृतिक विरासत प्रशिक्षण शिविर युवाओं और कला प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय संग्रहालय, रंगरीत स्टूडियो और सरस्वती कला केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे इस शिविर में 5 वर्ष से लेकर विभिन्न आयु वर्ग के प्रतिभागी उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। शिविर संयोजक रामू रामदेव ने बताया कि 18 जून तक चलने वाले इस प्रशिक्षण शिविर में राजस्थान की पारंपरिक कला, संगीत, नृत्य और भाषा से जुड़ी विधाओं का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।</p>
<p>इस वर्ष थिएटर, टेक्सटाइल ब्लॉक प्रिंटिंग और ढूंढाड़ी भाषा विशेष आकर्षण हैं। मीनिएचर पेंटिंग कार्यशाला में राधा-कृष्ण, सवाई जय सिंह और श्रीनाथजी विषयों पर कलाकृतियां बनाना सिखाया जा रहा है, वहीं स्कैचिंग एवं पोट्रेट कार्यशाला में प्रतिभागियों को स्केच, कैरिकेचर और चेहरे के भाव उकेरने की बारीकियां सिखाई जा रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 18:00:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पेंटिंग कार्यशाला में महिला कलाकारों ने लिया भाग,  ऐतिहासिक स्थलों को किया चित्रित </title>
                                    <description><![CDATA[एक पेंटिंग कार्यशाला सह प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें 30 महिला कलाकारों ने भाग लिया है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/women-artists-took-part-in-the-painting-workshop-and-painted/article-102072"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/untitled-design-(1)8.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। गणतंत्र दिवस के अवसर पर 'विनीता आर्ट्स' व 'स्काईहॉक' द्वारा पुरातत्व विभाग के सहयोग से "गाँधी वाटिका म्यूजियम" में एक पेंटिंग कार्यशाला सह प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें 30 महिला कलाकारों ने भाग लिया है। </p>
<p>पुरातत्व विभाग के निदेशक पंकज धरेंद्र व अधीक्षक नीरज त्रिपाठी ने इसका उद्घाटन किया। आयोजन के दूसरे दिन कलाकार उन ऐतिहासिक स्थलों को चित्रित कर रहें है , जिनकी भारत के स्वतंत्रता संग्राम काल में महत्वपूर्ण भूमिका रही हो ओर वर्तमान समय मे उन ऐतिहासिक ईमारतो पर तिरंगा झंडा शान से उनकी गाथा बता रहा हो। जैसे लाल किला, जलिया वाला बाग, सेलुलर जेल, जगदीशपुर फ़ोर्ट, इंडिया गेट आदि। वहीं 26 जनवरी को प्रतियोगिता मे विजेताओं की पेंटिंग का चुनाव किया जायेगा। इसमें जज के तौर पर प्रोफेसर चिन्मय मेहता विजेता क्लाकृति का चुनाव करेंगे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Jan 2025 17:03:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आर्टिस्ट कल्याण की कलाकृतियों में दिखी फड़ चित्रकला की झलक</title>
                                    <description><![CDATA[कलाकार मुकेश कुमार सोनी ने मीनाकारी आर्ट का प्रदर्शन किया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/a-glimpse-of-phad-painting-seen-in-the-artworks-of/article-92461"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/630400-size-(1)5.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जेकेके में चल रही शिल्पकार आर्ट और क्राफ्ट प्रदर्शनी में रविवार को केन्द्र की सुरेख आर्ट गैलरी में कलाकार पृथ्वीराज कुमावत, मुकेश कुमार सोनी, रामदयाल शर्मा व कल्याण प्रसाद ने अपनी शिल्प कौशल का प्रदर्शन किया। पृथ्वीराज कुमावत की भगवान गणेश, लक्ष्मी और कृष्ण जैसी देवताओं की कलाकृतियों में टैलेंट देखने को मिला।</p>
<p>कलाकार मुकेश कुमार सोनी ने मीनाकारी आर्ट का प्रदर्शन किया। कल्याण प्रसाद जोशी की कलाकृतियों में फड़ चित्रकला की झलक देखने को मिली। प्रदर्शनी में कलाकार कल्याण प्रसाद जोशी सहित अन्य कलाकारों का कलाकृतियां प्रदर्शित हुई। यह प्रदर्शनी सोमवार को संपन्न होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Oct 2024 10:22:16 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कम्प्यूटर के जमाने से रंग नहीं मिला पा रही कोटा बूंदी शैली की चित्रकला</title>
                                    <description><![CDATA[तकनीक का संयोजन नहीं कर पाना बन रहा बड़ी बाधा। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-bundi-style-of-painting-is-not-able-to-find-color-in-the-computer-age/article-91347"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/427rtrer-(5)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और कम्प्यूटर के जमाने से रंग नहीं मिला पाने के कारण  कभी कोटा बूंदी की संस्कृति, परंपरा और इतिहास को अपने में समेटे रखने वाली चित्रकला शैली अब विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी है। स्थिति यह है कि कोटा बूंदी चित्रकला शैली के अब गिने चुने कलाकार ही बचे हैं। वही इसे जिंदा रखे हुए हैं। साथ ही कोटा सहित प्रदेश में इस शैली का बाजार नहीं होने और मॉर्डन आर्ट के दौर में ये शैली अंतिम सांसे गिन रही है। अपने दौर की प्रसिद्ध कला संस्कृति रही इस शैली को आज खेवनहारों की आवश्यकता है। वहीं इस चित्रकला शैली का कार्य पूरी तरह से पारंपरिक और हाथों से होने के कारण इसे तकनीकी रूप से भी तैयार नहीं कर सकते। जो इसके विस्तार में बड़ी बाधा बन रहा है।</p>
<p><strong>बाजार नहीं होने से लोग नहीं दिखाते रूचि</strong><br />कोटा बूंदी चित्रकला शैली के कलाकार मोहम्मद लुकमान बताते हैं कि कोटा शहर और इसके आस पास के क्षेत्रों में इस चित्रकला शैली का बाजार बिल्कुल खत्म हो गया है। कला संस्कृति को पसंद करने वाले लोग इनकी तारीफ तो करते हैं, लेकिन इस शैली की चित्रकलाओं के लिए एक पूर्ण बाजार उपलब्ध नहीं है। जहां कलाकार अपनी कलाओं का प्रदर्शन करने के साथ साथ उनकी बिक्री भी कर सके। चित्रकला के लिए पूर्ण बाजार नहीं होने से लोग भी इसकी ओर आकर्षित नहीं होते हैं। साथ ही इस कला के जानकार भी कोटा में केवल दो से तीन व्यक्ति मौजूद हैं। अगर इस कला को बेहतर प्लेटफार्म और सरकार की ओर से सहयोग मिले तो इसका वैभव फिर से लौटाया जा सकता है। वहीं इस कला में तकनीक का प्रयोग नहीं किया जा सकता इससे शैली की वो मौलिकता खत्म हो जाएगी, जो इसे बनाने में प्रयुक्त होने वाले कागज और रंगों से आती है। क्योंकि इस चित्रकला को बनाने के लिए स्टोन कलर और हाथ से बने कागज का उपयोग होता है। इस शैली के तहत बनने वाली एक चित्रकला को बनाने में कम से कम तीन दिन का समय लगता है, अगर बडा चित्र हो तो यह समय एक माह का भी हो सकता है।</p>
<p><strong>मॉडर्न आर्ट ने किया नए कलाकारों का मोह भंग किया</strong><br />राजकीय महाविद्यालय कोटा के ड्रॉइंग और पेंटिंग विभाग की प्रोफेसर डॉ. सविता वर्मा के अनुसार कोटा बूंदी चित्रकला शैली में चित्र बनाने में काफी शालीनता और धैर्य की आवश्यकता होती है। इस शैली के तहत चित्र या पेंटिंग बनाने में कम से कम तीन दिन और कई महीनों का समय लग जाता है। इसके साथ ही इस शैली में चित्र को बहुत बारीकी के साथ बनाया जाता है जिसमें एक बाल को भी हाथ से बनाया हुआ होता है, जहां बहुत ही छोटे आकार के ब्रश का उपयोग किया जाता है। इसी के चलते नए कलाकार इस शैली से दूर और मॉडर्न आर्ट की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। क्योंकि मॉडर्न आर्ट में चित्र कुछ घंटों में बन जाते हैं और लोग भी उन्हें खरीदते हैं। </p>
<p><strong>शैली को कम्प्यूटर पर ले जाने की आवश्यकता है</strong><br />आज कम्प्यूटर और एआई का जमाना है। ग्लोबल मार्कट है। लेकिन इस शैली को कम्प्यूटर पर ले जाने की आवश्यकता है। कुछ कलाकार इसकी वास्तविकता के ह्रास का हवाला देकर इसका विरोध करते हैं लेकिन कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है। यदि इस शैली के मूलभाव में कम्प्यूटर का संयोजन किया जाए। ग्लोबल मार्केट की तरफ रुख किया जाए तो ना केवल हमारी कला का विस्तार होगा अपितु उसे एक विश्व के दर्जे का मार्केट मिल सकेगा। कलाकारों के सामने सबसे बड़ा संकट बाजार का नहीं होना है। इसीलिए नये लोग भी इस क्षेत्र में नहीं आ रहे हैं।  आज  नई तकनीकों के आने से कला के क्षेत्र में पिछले कुछ सालों में काफी विस्तार हुआ है जिससे पारंपरिक और प्राचीन शैलियों का दायरा सिकुड़ गया है। इसे फिर से बढ़ाने के लिए विद्यालय स्तर से शुरूआत करनी होगी। साथ ही इसके लिए बाजार और प्लेटफार्म तैयार करना होगा जिससे लोगों में भी रूचि बढ़ सके। इस शैली में तकनीकी रूप से बदलाव नहीं होना भी एक बड़ा कारण है। जहां इस शैली में केवल मिट्टी से बने रंगों और हाथ से बने कागज का उपयोग होता है जो तकनीकी रूप फिलहाल नहीं किया जाता।  माना जाता है कि इससे  शैली की वास्तविकता में कमी आ जाएगी।<br /><strong>- विश्व मोहन जोशी शिक्षाविद और पूर्व प्राचार्य </strong></p>
<p><strong>वर्कशॉप और प्रदर्शनियां आयोजित हो तो जागरूकता बढ़े</strong><br />महात्मा गांधी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय रामपुरा के चित्रकला विषय के व्याख्याता डॉ. राजेंद्र बैरागी बताते हैं कि कोटा के लोगों में चित्रकला क्षेत्र के बारे में जागरूकता लाने की आवश्यकता है क्योंकि यहां की चित्रकला शैली होने के बावजूद कोटा के लोग ही इसे पहचान नहीं सकते हैं। जो इसके विलुप्त होने में एक बहुत बड़ा कारण बन रही है। इस शैली को जीवित रखने के लिए हमें प्रदर्शनियों और कार्याशालाओं पर जोर देने की आवश्यकता है। क्योंकि जब तक लोगों को शैली के बारे में जानकारी नहीं होगी इसके विलुप्त होने को नहीं रोका जा सकता है। साथ ही वर्तमान में नए छात्र मॉडर्न आर्ट की ओर आकर्षित हो रहे हैं जो बहुता आसानी से बन जाती है। जो इस चित्रकला शैली को कमजोर कर रही है। वहीं इस शैली में तकनीकी रूप से बदलाव नहीं होना भी एक कारण है। जहां इस शैली में केवल मिट्टी से बने रंगों और हाथ से बने कागज का उपयोग होता है जो तकनीकी रूप से नहीं किया जा सकता है। वहां इस शैली की वास्तविकता में कमी आ जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Sep 2024 16:36:34 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कैमरे में कैद किया सूर्याेदय का सौन्दर्य, फिर कैनवास पर उतार दिया पेन्टिंग की तरह</title>
                                    <description><![CDATA[सूर्योदय से सूर्यास्त तक के नजारे हैं इन पेन्टिंग नुमा फोटोग्राफस के केन्द्र में]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/captured-the-beauty-of-sunrise-on-camera-and-then-put/article-87972"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/photo-size-(4)15.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर के पेशे से कॉन्ट्रेक्टर पुष्पेन्द्र उपाध्याय के 31 पेन्टिंगनुमा फोटोग्राफ्स की एक दस दिवसीय एग्जीबिशन शनिवार को जवाहर कला केन्द्र की पारिजात कला दीर्घा में शुरू हुई। इस एग्जीबिशन की खासियत ये है कि यहां प्रदर्शित सभी कलाकृतियां मूल रूप से पुष्पेन्द्र के कैमरे से खींचे हुए फोटोग्राफ्स हैं लेकिन छायाकार ने इन्हें कैनवास पर इस तरह ट्रांसफार्म किया है कि देखने वाले को ये सभी छाया चित्र पेन्टिंग्स की तरह नजर आते हैं। पुष्पेन्द्र पिछले सात साल से शौकिया छाया चित्रकारी कर रहे हैं। पिछले साल उन्होंने अपनी कला की पहली प्रदर्शनी जवाहर कला केन्द्र में आयोजित की थी जिसमें उन्होंने पहाड़ों के सौन्दर्य के प्रदर्शित किया था, यह प्रदर्शनी उन्होंने विश्व फोटोग्राफी दिवस (19 अगस्त) के मौके पर की थी।</p>
<p><strong>दिखे सूर्योदय से सूर्यास्त तक के नजारे</strong></p>
<p>पुष्पेन्द्र ने इस बार अपनी छाया चित्रकला को फोटो पेपर के स्थान पर कैनवास पर जीवंत किया है जिसके केन्द्र में सूर्योदय से सूर्यास्त तक के नजारे हैं। पहले चित्र में पूर्व दिशा पर सुबह की लालिमा नजर आती है, दूसरे में बादलों के पीछे से उदय होता सूर्य, तीसरे में धीरे धीरे आसमान पर चमकने की प्रक्रिया में किरणें हैं तो चौथे चरण में फलक पर चमकते सूर्य का सौन्दर्य देखने योग्य है। एक फोटोग्राफ का एंगल ऐसा मानों सूर्य एक पेड़ पर बैठकर विश्राम कर रहा है तो अगले ही चित्र में वो बादलों की ओट से झांक कर पृथ्वी की हलचल को निहारता प्रतीत हो रहा है।</p>
<p><strong>भरतपुर के घना पक्षी अभ्यारण का मनोरम दृश्य</strong></p>
<p>पुष्पेन्द्र की एक अन्य कलाकृति में भरतपुर के घना पक्षी अभ्यारण्य का मनोरम दृश्य देखने योग्य है। इस चित्र में उन्होंने एक तलाब के पास लगे पेड़़ पर बैठे दर्जनों पक्षियों का फोटो इस अंदाज में खींचा है कि नीचे पानी में सभी की प्रतिबिंब स्पष्ट नजर आ रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने यहां अपने गुरू फोटो आर्टिस्ट महेश स्वामी का खींचा एक 40 गुणा 60 इंच आकार का चित्र भी प्रदर्शित किया है, इसमें महेश ने सुबह के समय समुद्र के किनारे की हलचल को बहुत ही कलात्मक अंदाज में क्लिक किया है।</p>
<p><strong>26 अगस्त तक दीर्घा में होंगी विभिन्न गतिविधियां</strong></p>
<p>पुष्पेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि 26 अगस्त तक चलने वाली इस एग्जीबिशन के दौरान हर दिन कला दीर्घा में विभिन्न कलात्मक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। रविवार को एच.आई.वी पॉजिटिव बच्चों को एग्जीबिशन की सैर करवाई जाएगी साथ ही उन्हें फोटोग्राफी के बारे में भी बताया जाएगा साथ फोटोग्राफी हमारे जीवन को कैसे एनरिचत करती है इस विषय पर महेश स्वामी के साथ टॉक शो का आयोजन भी किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 Aug 2024 19:05:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>श्री राधा जहां जहां, श्री कृष्णा वहां वहां</title>
                                    <description><![CDATA[आज इस संग्रहालय को  विदशों में प्रचार प्रसार की जरूरत है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/wherever-shri-radha-is--shri-krishna-is-there/article-56592"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/shir-radha-jha-jha,-shri-krishna-vha-vha...kota-news-photo-08-09-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। श्री राधा जहां जहां, श्री कृष्णा वहां वहां, जो ह्रदय में बस जाए फिर वो बिछड़ता कहां, श्याम की बंशी जब भी बजी है, राधा के मन में प्रीत जगी है। राधा कृष्ण की प्रेम गाथाएं वृंदावन में ही नहीं गूंजती, कोटा शहर में भी श्रद्धा से सुनी जाती हैं। कोटा शहर के बीचों बीच स्थित राजकीय संग्रहालय में  18 वीं सदी में बना एक ऐसा चित्र है जो आज भी  लोगों को टकटकी बांधने पर मजबूर कर देता है। राधा कृष्ण की ऐसी बेजोड चित्रकारी है कि जो भी इसे देखता है, मनमोहित हो जाता है। बूंदी शैली में तैयार हस्त निर्मित इस चित्र में कृष्ण रात्रि प्रहर में राधा के बाल संवारते देखे जा सकते हैं।  पास ही एक सेविका राधा को उसे शीशा दिखाती नजर आ रही है। इतनीा ही नहीं संभाग के अनेक स्थनों से पाई गई, कई प्राचीन प्रतिमाओं, पौशाकों, चित्रकारी, शिलालेखों और प्राचीन हथियारों को समेटे हुए .ह संग्रहालय आगंतुकों के इतंजार में है। प्रचार प्रसार की कमी के कारण संग्रहालय आज पर्याप्त आगंतुकों की भी राह देख रहा है। संग्रहालय की देख रेख करने वाले अब्दुल हाफिÞज ने बताया की सामान्य दिनों में संग्रहालय में मुश्किल से 10 आगंतुक ही संग्रहालय को देखने आते हैं वहीं अवकाशीय दिनों में इनकी संख्या जरूर बढ़ जाती है, लेकिन वो भी उम्मीद से कई गुना कम है। </p>
<p><strong>19 करोड़  के विकास कार्य करवाए</strong><br />दर्शकों को बुलाने की उम्मीद से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग और राजस्थान सरकार ने साझेदारी से संग्रहालय में करीब 19 करोड़ रूपए के विकास कार्य करवाए थे। जिनमें संग्रहालय के अंदर सीसीटीवी कैमरा और एलईडी लाइटें लगवाने का कार्य मुख्य रूप से था। अब्दुल हाफिज ने बताया कि संग्रहालय के बाईं तरफ  छत्र विलास उद्यान है जिसका एक दरवाजाÞ हाल ही में संग्रहालय की तरफ खुलना शुरू हुआ है और संग्रहालय के सामने बने नए बस स्टैंड से उम्मीद है कि संग्रहालय के बारे में अघिक लोगों को पता चलेगा और आगंतुकों की संख्या में इजाफा होगा। </p>
<p><strong>ज्ञान विज्ञान का खजाना है</strong><br />5वीं शताब्दी से लेकर 19वीं शताब्दी तक की प्रतिमाएं, संग्रहालय में मौजूद है 5वीं शताब्दी से लेकर 19वीं शताब्दी तक की प्रतिमाएं, चित्र, औजार, शिलालेख, तांब्र पत्र और पौषाकें है। कोटा राजकीय संग्रहालय में 5वीं शताब्दी की झल्लरीवादक की प्रतिमा मौजुद है, जो बांरा के विलास में सन् 1947 में पाई गई थी। संग्रहालय में 10वीं सदी कि चार भुजा वाले शिव की हस्तशिल्प मुर्ति भी शोकेस में रखी हुई है। वहीं संगमरमर से बनी भगवान महावीर की 11 वीं सदी की प्रतिमा जो की अजमेर जिले के बाघेरा प्राप्त कि गई थी। संग्रहालय के अन्दर 1749 ई. का बूंदी शासक उम्मेद सिंह द्वारा लिखा गया ताम्रपत्र लेख भी मौजूद है जो उम्मेद सिंह द्वारा पुरोहित उदयराम के पूर्वजों को भूमि भेंट करने के उपरान्त लिखा गया था। 10वीं सदी में निर्भय राम द्वारा तैयार किया गया समय गणना यंत्र भी संग्रहालय में देखा जा सकता है। संग्रहालय में कोटा के विभिन्न शासकों के समय कि बंदुकें, तलवारें, ढालें, हथियार, शिलालेख, बर्तन और पोशाकें प्रर्दशन के लिए रखी गईं हैं। </p>
<p><strong>विदेशों में प्रचार की दरकार</strong><br />संग्रहालय देखने आए आशुतोष दिनकर कहते हैं कि आज इस संग्रहालय को  विदशों में प्रचार प्रसार की जरूरत है। सरकार जिस प्रकार चंबल रिवर, फ्रंट, सिटी पार्क, और अन्य निर्माणाधीन पर्यटक स्थलों का प्रचार प्रसार कर रही है अगर उसी प्रकार इस संग्रहालय का भी करे तो काफी मदद मिल सकती है। इस संग्रहालय की स्थापना साल 1935 में कोटा में एक अलग राज्य की द्ृष्टि अलग पुरातत्व विभाग के गठन के साथ हुई। उसके बाद संग्रहालय में सन् 1945 में राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में बिखरे पडे शिलालेखों और मुर्तियों को लाकर बृजविलास पैलेस में स्थापना की गई। साल 1951 में राजस्थान सरकार के पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग ने इस संग्रहालय को बृजविलास पैलेस से कोटा गढ़ पैलेस में स्थानान्तरित कर दिया। पुन: वर्ष 1995 में गढ़ पैलेस में स्थान कि कमी को देखते हुए इसे बृजविलास पैलेस में स्थानान्तरित कर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Sep 2023 16:34:01 +0530</pubDate>
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                <title>वरिष्ठ कलाकारों को देखकर युवा कलाकारों ने सीखी रंग और रूपाकार रचने की रीति</title>
                                    <description><![CDATA[कलाकार संदीप मेघवाल ने कैनवास पर फोक फ्यूजन तैयार किया है। इस पेन्टिंग में संदीप को जो ट्रायबल एलीमेंट प्रभावित करते हैं उनको अपने सृजन का माध्यम बनाया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/seeing-senior-artists-young-artists-learned-how-to-create-color/article-40267"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/site-photo-size-(1)3.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान यूनिवर्सिटी के वीजुअल आर्ट डिपार्टमेंट और ललित कला अकादमी, नई दिल्ली के तत्वावधान में कैम्पस में चल रहे नेशनल आर्टिस्ट कैंप में शनिवार को कला के सीखन और सिखाने का दौर चला। इस मौके पर तीन वरिष्ठ कलाकारों आंध्रप्रदेश के एस. विजय कुमार, उदयपुर के संदीप कुमार मेघवाल और लखनउ के उमेन्द्र प्रताप सिंह ने कैंप में आए युवा कलाकारों और विजुअल आर्ट के स्टूडेंट्स को कैनवास पर पेन्टिंग बनाने की सही रीति के साथ रंग और रूपाकारों को सुनियोजित कैसे किया जाए जैसी बातें समझाईं जिसे देख सुनकर प्रतिभागियों ने भी कैनवास पर अपनी अपनी कल्पनाओं के रंग भरे। शाम को भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी और चाइल्ड राइट्स डिपार्टमेंट की कमिश्नर अनुप्रेरणा सिंह कुंतल ने कैंप में आए कलाकारों को प्रमाण पत्र प्रदान किए साथ ही कैंप में बनी कलाकृतियों का अवलोकन भी किया। डिपार्टमेंट ऑफ वीजुअल आर्ट के हैड रजत पंडेल और कैंप के समन्वयक सुमित सेन ने अनुप्रेरणा कुन्तल का डिपार्टमेंट की ओर से अभिनंदन किया।</p>
<p><strong>15 कलाकार मशगूल हैं रंगों को कैनवास पर सजाने में</strong><br />कैंप के मीडिया प्रभारी कमलेश व्यास ने बताया कि कैंप में जयपुर सहित देश के 15 वरिष्ठ और युवा कलाकार इन दिनों अपनी अपनी अनुभूतियों के रंगों को कैनवास पर सजाने में मशगूल हैं। कैंप का समापन रविवार को होगा। ये कलाकार पिछले पांच दिन से यहां एक्रेलिक, ऑयल, चारकोल से लेकर मिक्स्ड मीडिया में तरह तरह की की पेन्टिंग्स के माध्यम से अपने कलात्मक हुनर का प्रदर्शन कर रहे हैं जिसे बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स और कला प्रेमी लुत्फ उठा रहे हैं। कहीं कैनवास पर म्यूरल के भाव नजर आ रहे हैं, किसी कलाकार ने कोरोना में व्याप्त भय और उसके बाद छा रही खुशहाली को अपने सृजन का माध्यम बनाया है तो किसी ने प्रकृति की उर्जा और उसके प्रवाह को कैनवास पर जीवंत किया है। कैंप के मीडिया प्रभारी कमलेश व्यास ने बताया कि इस कैम्प में राजस्थान के जयपुर सहित दिल्ली, उड़ीसा, कोलकता, लखनउ और तेलंगाना के आर्टिस्ट आए हुए हैं। कमलेश ने बताया कि युवा कलाकारों को देश के विभिन्न हिस्सों से आए वरिष्ठ कलाकारों की कला के भिन्न भिन्न आयामों को देखकर बारीकियां सीखने का मौका मिले, इसी उद्देश्य से कैंप का आयोजन किया जा रहा है।<br /> <br /><strong>कोरोना की भयावहता का प्रतीक हैं ‘टीथ ऑफ गॉड’<br /></strong>सीनियर आर्टिस्ट सुमित सेन ने कोरोना में परिवेश में छायी भयावहता और उसके बाद धीरे धीरे नॉर्मल होती जा रही ज़िंदगी के रंगों को अपने सृजन का माध्यम बनाया है। इस क्रिएशन को सुमित ने ‘टीथ ऑफ गॉड’ नाम दिया है। कैनवास के मध्यम में उन्होंने कोरोना को प्रकृति का कहर मानते हुए दांत निकालकर क्रूर हंसी हंस रही आकृति को बनाया और उसके ठीक नीचे मास्क को रखा है। सुमित का मानना है कि इतने विध्वंस के बाद भी मनुष्य ने अपनी कुशलता से इसका सामना किया। उन्होंने इस पेन्टिंग के बॉर्डर पर फिर से नॉर्मल होती जा रही दुनिया की हलचल के छोटे छोटे रूपाकार बनाकर इसे अनूठा रूप दिया है।<br /> <br /><strong>चार दोस्तों का सेलीब्रेशन<br /></strong>सीनियर आर्टिस्ट तीर्थंकर बिस्वास का सृजन भी देखन योग्य है उन्होंने शाम के साये में मस्ती के मूड में बैठे चार मित्रों की आकृतियों को कलात्मक अंदाज में उकेरा है। इस पेन्टिंग में बेपरवाह बैठे चार मित्र हैं और उनके इर्द-गिर्द बेतरतीब पड़े बर्तन और अन्य सामग्री उनके मस्ती के अंदाज में बयां कर रही है।<br /> <br /><strong>इनफ्लक्स ऑफ नेचर यानि प्रकृति का प्रवाह<br /></strong>दिल्ली में रहकर कला साधना कर रहे झारखण्ड के दिनेश कुमार राम ‘इनफ्लक्स ऑफ नेचर’ शीर्षक से पेन्टिंग तैयार की है। उन्होंने बताया कि इस शीर्षक का अर्थ है प्रकृति का प्रवाह। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपनी आकृतियों में मूवमेंट, फोर्स और एनर्जी को दर्शाया है। उनकी बनाई सभी आकृतियां चाहे वो उपर से नीचे की ओर आ रही हों अथवा बांये से दायें और दायें से बाएं जा रही हों सभी में मूवमेंट महसूस होता है।<br /> <br /><strong>संदीप मेघवाल ने तैयार किया फोक फ्यूजन<br /></strong>कलाकार संदीप मेघवाल ने कैनवास पर फोक फ्यूजन तैयार किया है। इस पेन्टिंग में संदीप को जो ट्रायबल एलीमेंट प्रभावित करते हैं उनको अपने सृजन का माध्यम बनाया है। संदीप की पेन्टिंग कैनवास पर किसी म्यूरल जैसा आभास देती है, इस पेन्टिंग थ्रीडी की अनुभूति करवाता रिच टैक्सचर इसकी खासियत है। इस पेन्टिंग में बनी आकृतियां चित्रकला की फड़ शैली का भी आभास करवाती हैं। खास बात ये है कि अगर इस पेन्टिंग को दीवार पर लटका दिया जाए तो दूर से ये किसी म्यूरल यानि भित्ती चित्र जैसी नजर आने लगती है। इसके अलावा युवा चित्रकार निधि पालीवाल प्लांट्स और आर्कीटैक्चरल आकृतियों को मिलाकर लैंड स्कैप बनाने में मशगूल है। ये चित्र अभी प्रारंभिक अवस्था में है जो शुक्रवार तक अपने पूरे रूप में नजर आने लगेगा।<br /> <br /><strong>आर्ट कैंप में ये कलाकार ले रहे हैं भाग<br /></strong>इस कैंप में लखनउ के रासबिहारी साहा और उमेन्द्र प्रताप सिंह, दिल्ली के दिनेश कुमार राम और तीर्थंकर बिस्वास, आंध्रप्रदेश के एस. विजय कुमार, उड़ीसा के गिरीश चंद बेहरा, गर्वनमेंट आर्ट कॉलेज, कोलकाता के पूर्व प्रधानाचार्य तथा ललित कला अकादमी, कोलकाता के पूर्व सचिव के मनोज सरकार, जयपुर के सुमित सेन, शुभांकर बिस्वास, जयंत गुप्ता, निधि पालीवाल, भीमांशु पंडेल, नेहल वर्मा, मेघा हर्षा और संदीप कुमार मेघवाल कलाकार के रूप में भाग ले रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Mar 2023 13:12:04 +0530</pubDate>
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                <title>जयपुर के युवा कलाकार अमित हारित की पेंटिंग्स का चेन्नई की आर्ट वर्ल्ड आर्ट गैलरी में प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[अमित के चित्र हमें एक अनोखी दुनियां से रूबरू कराते हैं जहाँ उनके द्वारा देखे हुए रूपाकार निजी दृष्टिकोण के साथ चित्रित हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/paintings-of-young-artist-amit-harit-from-jaipur-on-display-at-art-world-art-gallery-in-chennai/article-16936"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/photo4.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शहर के यंग आर्टिस्ट अमित हारित के चित्रों की प्रदर्शनी "ड्रीमस्केप्स" का उद्घाटन चेन्नई की प्रसिद्ध आर्ट गैलरी आर्ट वर्ल्ड 'सरला सेंटर फॉर आर्ट' में हुआ। इस प्रदर्शनी में अमित की करीब 30 पेन्टिंग्स डिस्प्ले हैं। अमित ने बताया कि इन पेंटिंग्स में उन्होंने पिछले कई सालों के प्रकृति और मनुष्य के साथ अपने दुनियावी अनुभवों को सहेजा है। अमित के चित्र हमें एक अनोखी दुनियां से रूबरू कराते हैं जहाँ उनके द्वारा देखे हुए रूपाकार निजी दृष्टिकोण के साथ चित्रित हैं। अमित के चित्र देखकर उन चित्रों का यथार्थ जोकि ऐसी कल्पनाओं का संसार है जो स्मृतियों से प्रभावित है, दर्शक को अपने भीतर खींचता चला जाता है। एक्रेलिक रंगों से कैनवस औऱ पेपर पर बने इन चित्रों में मनुष्य और प्रकृति के आपसी अंतर्संबंधों के विविध रूप देखने को मिलते हैं।  शो के उद्घाटन पर चेन्नई के वरिष्ठ कलाकार प्लनिअप्पन और मुरलीधरन ने अमित के चित्रों में जो रहस्यमयी सिम्बल हैं उसके साथ पेंटिंग्स में दिखने वाले कलर और फॉर्म के आश्चर्यजनक प्रभावों को उत्कृष्ट बताया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Jul 2022 14:18:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>जल जीवन मिशन के तोड़े नियम: पानी की गुणवत्ता जांच का पैसा स्लोगन-वॉल पेटिंग पर बहाया</title>
                                    <description><![CDATA[जिलों में जांच लैब-किट बनाने के 1815.37 लाख रुपए की कर दी कटौती]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--breaking-rules-of-jal-jeevan-mission--money-for-water-quality-check-was-spent-on-slogan-wall-painting/article-9155"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/water.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में जल जीवन मिशन में एक करोड़ से ज्यादा घरों में हर घर नल का काम चल रहा है। पानी की गुणवत्ता जांच की लैब्स और जागरूकता पर भी पैसे का अलग मद रखा है, लेकिन मिशन का पैसा अफरशाही की भेंट चढ़ रहा है। 2021-22 बजट में 2 फीसदी पैसा आईईसी गतिविधियों और पानी की गुणवत्ता पर खर्च करने का केन्द्र सरकार ने नियम को तोड़कर अफसरों ने 13.93 करोड़ की जगह 32.08 करोड़ रुपए का बजट करवा लिया।  हद तो तब हो गई जब इस पैसे को पानी की गुणवत्ता जांच पर 1815.37 करोड़ रुपए की भी कटौती कर दी। इस पैसे से पानी की जांच को जिलों में लैब्स को अपग्रेडेशन पर खर्च करना था। साथ ही पानी जांच के किट खरीदने थे ताकि गुणवत्ता युक्त पानी पिलाया जा सके। लैब्स अपग्रेडेशन के 1641.37 लाख और जांच किट खरीदने के 174.18 लाख बजट से कम कर दिए। अन्य मदों से भी पैसा काटा गया। 2.10 करोड़ की जगह 20.83 करोड़ तो केवल दीवारों पर स्लोगन-वॉल पेंटिंग में खर्च किए और अधिकारियों ने चहेती फर्मों को स्लोगन लिखने, सनबोर्ड, डिजिटल पेटिंग को ठेके दे दिए।<br /><br /><strong>घर तक जलापूर्ति में नहीं दिखी फुर्ती : 18500 करोड़ हर-घर नल में खर्च नहीं कर पाए</strong> <br />मिशन में अगस्त, 2019 से अब तक जलदाय विभाग को 22 हजार करोड़ रुपए केन्द्र से आवंटित हुए, लेकिन अफसरों ने हर घर नल कनेक्शन कर जलापूर्ति सुनिश्चित करने में फुर्ती नहीं दिखाई। केवल 3500 करोड़ रुपए ही खर्च किए, इसके चलते 18500 करोड़ रुपए का बजट लैप्स हो गया। <br /><br />मिशन के फंड से 2% पैसा इन कामों पर खर्च होने का ही नियम है। जलदाय विभाग की इकाई वॉटर सैनिटेशन सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन के निदेशक स्तर से फाइल चली थी। अफसरों से निर्देश मिला तो बजट बढ़ाया। -<strong>दिनेश गोयल, चीफ इंजीनियर, जलजीवन मिशन, राजस्थान</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 May 2022 13:14:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>मोक्षधाम की दीवारों की पेटिंग बन रही चर्चा का विषय </title>
                                    <description><![CDATA[लोग ले रहे हैं सेल्फी, वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर कर रहे है शेयर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/sawai-madhopur/sawaimadhopur-news---painting-of-the-walls-of-mokshadham-is-becoming-a-matter-of-discussion/article-8601"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/swm.jpg" alt=""></a><br /><p>सवाई माधोपुर। जिला कलेक्टर सुरेश ओला के दिशा-निर्देशन में बदलेगा माधोपुर अभियान दिनोंदिन गति पकड़ रहा है। अभियान के तहत जिले को स्वच्छ बनाए जाने के साथ-साथ सीएसआर के माध्यम से सौंदर्य करण के कार्य को गति दी जा रही है। जिले के खेरदा स्थित मोक्षधाम की दीवारों पर सीएसआर ओबरॉय गु्रप की मदद से सुनहरी पेंटिंग का कार्य करवाया गया है जो यहां से गुजरने वाले राहगीरों और स्थानीय निवासियों के लिए उत्साह था केंद्र बना हुआ है। विश्व विख्यात पेंटर एम डी पाराशर के प्रशिक्षित शिष्यों द्वारा मोक्ष धाम की दीवारों पर बनाई जा रही इस पेंटिंग में खास बात यह है कि इन दीवारों पर चित्रों को इस ढंग से उकेरा गया है कि मानो जंगल के बीच वन्य जीवों की अठखेलियों की जीवंत दशा का ही वर्णन बंया किया जा रहा हो। मोक्ष धाम की एक दीवार पर रणथंभौर अ•यारण में शिकार के लिए बाघ को हिरण के पीछे भागते हुए उकेरा गया है। वहीं दूसरी दीवार पर अभयारण्य में संध्या के समय तालाब के नजदीक मस्तमौला और बेफि क्र बाघों को विचरण करते हुए तथा उस समय की जंगल में प्राकृतिक छटा को उकेरा गया है। दीवारों पर उकेरी गई यह दोनों ही तस्वीर आते-जाते राहगीरों को रुककर निहारने पर विवश कर देती है।</p>
<p> </p>
<p>यह मोक्ष धाम टोंक रोड हाईवे पर स्थित होने के चलते यहां से गुजरने वाले राहगीरों एवं स्थानीय निवासियों के लिए खास चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग यहां पर रुक कर इन दीवारों की अपने मोबाइल से फोटो या विडियो लेना नहीं भूलते और लोगों द्वारा इसे सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल किया जा रहा है। जिले में रणथंभौर अभयारण स्थित होने के चलते पर्यटन की दृष्टि से इन दीवारों का एक खास महत्व समझा जा सकता है। इस संबंध में नगर परिषद आयुक्त नवीन भारद्वाज ने बताया कि बदलेगा माधोपुर अभियान के तहत कलक्टर सुरेश ओला के निर्देशन में सवाई माधोपुर को स्वच्छ और सुंदर बनाने का कार्य किया जा रहा है। वित्तीय संसाधनों की पूर्ति के लिए कलक्टर द्वारा सीएसआर से बातचीत कर सहयोग के लिए निर्देशित किया जा रहा है। जिले में इस तरह की पेंटिंग का कार्य दूसरे स्थानों पर भी करवाया जाएगा। जिससे शहर की सुंदरता में चार चांद लग सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सवाई माधोपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Apr 2022 19:08:37 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>आर्ट प्रदर्शनी में 25 कलाकारों की पेंटिंग को किया प्रदर्शित </title>
                                    <description><![CDATA[एक होटल में आयोजित आर्ट प्रदर्शनी में स्पलैशेल ऑफ आर्ट ए जर्नी ऑ ऐस्थैटिक्स प्रदर्शनी में देश के 25 कलाकारों का काम प्रदर्शित किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/painting-was-displaye-in-art-exhibition/article-6418"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/congress-copy6.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। एक होटल में आयोजित आर्ट प्रदर्शनी में स्पलैशेल ऑफ आर्ट ए जर्नी ऑ ऐस्थैटिक्स प्रदर्शनी में देश के 25 कलाकारों का काम प्रदर्शित किया गया। ऋषि मट्टू ने बताया कि हमने कलाकारों के लिए आर्ट मंच बनाया है। यहां वह अपने कार्य को प्रदर्शित कर सकते है।</p>
<p>प्रदर्शनी के आयोजक हेम राणा ने कहा कि युवा और कलाकारों को अधिक एक्सपोजर की आवश्यकता है और इस प्रदर्शनी के माध्यम से जयपुर के दर्शकों को अन्य प्रदेशों और शहरों की कलाकृतियों से अवगत करा रहे है। 25 कलाकारों की लगभग 50 पेंटिंग को प्रदर्शित किया गया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 20 Mar 2022 16:33:32 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>JKK में महात्मा गांधी पर आधारित प्रदर्शनी का CM गहलोत ने किया उद्घाटन</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदर्शनी की परिकल्पना विधायक, निवाई पीपलू,  प्रशांत बैरवा ने की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jkk-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE-%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%86%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-cm-%E0%A4%97%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%A4-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%89%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%98%E0%A4%BE%E0%A4%9F%E0%A4%A8/article-1425"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/fa1gd9qvcaagso1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>| राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज जवाहर कला केंद्र (जेकेके) की सुदर्शन गैलेरी में 'राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जीवन यात्रा' पर आधारित पेंटिंग प्रदर्शनी 'मोहनदास से महात्मा' का उद्घाटन किया। प्रदर्शनी की परिकल्पना विधायक, निवाई पीपलू,  प्रशांत बैरवा ने की है। प्रदर्शनी के कलाकार देवदास आर्ट्स, जयपुर के चंद्र प्रकाश गुप्ता हैं।<br /> <br /> मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर पेंटिंग्स की प्रशंसा की और कहा कि गांधी जी के जीवन के विभिन्न क्षणों को इस प्रदर्शनी के माध्यम से पहली बार देखने को मिल रहा है। गांधी जी की विशाल पेंटिंग देखकर ऐसा लग रहा है जैसे कि वह हम सभी को देख रहे हों। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक बार गांधीजी की जीवनी पढ़नी चाहिए। यह उनके जीवन जीने का नजरिए को ही बदल देगा।<br /> <br /> प्रदर्शनी में गांधी जी की कैनवस पर बनी विश्व की सबसे बड़ी स्टैंडिंग पेंटिंग भी प्रदर्शित की गई है। यह 6 बाय 11 फीट की पेंटिंग है जिसे तैयार होने में 6 महीने लगे। इस पेंटिंग को कलाकार एवं एसोसिएट प्रोफेसर, वनस्थली विद्यापीठ, अन्नपूर्णा शुक्ला ने बनाया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Oct 2021 19:08:26 +0530</pubDate>
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