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                <title>बजट की कमी से जूझ रहा कोटा का शाला क्रीड़ा संगम, खिलाड़ियों से शुल्क वसूली पर उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[बैडमिंटन हॉल में 800 रुपये शुल्क को लेकर पारदर्शिता पर सवाल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota%E2%80%99s-shala-krida-sangam--school-sports-centre--grapples-with-budget-crunch--fee-collection-from-players-sparks-debate/article-162178"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/budget-ki.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। खेल प्रतिभाओं के लिए पहचाने जाने वाले शहर का शाला क्रीड़ा संगम महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय (मल्टीपरपज), गुमानपुरा इन दिनों संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। शिक्षा विभाग के अधीन संचालित इस खेल केंद्र में दस खेलों के लिए 18 प्रशिक्षक कार्यरत हैं और सुबह-शाम करीब 330 खिलाड़ी नियमित अभ्यास करने पहुंचते हैं। मैदान हैं, कोच हैं और खिलाड़ियों का जुनून भी है, लेकिन पर्याप्त बजट के अभाव में खेल व्यवस्था लगातार कमजोर होती जा रही है।</p>
<p><strong>बिजली, रखरखाव और सुरक्षा... दो लाख में आखिर कैसे चलेगा काम</strong><br />शाला क्रीड़ा संगम के प्रभारी एवं विद्यालय के उपप्रधानाचार्य का कहना है कि पूरे वर्ष के लिए मात्र दो लाख रुपये का बजट मिलता है। इसी राशि से बिजली बिल, मैदानों का रखरखाव, भवनों की मरम्मत, सफाई, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य खर्च पूरे करने पड़ते हैं। उनका कहना है कि इतनी कम राशि में गुणवत्तापूर्ण खेल सुविधाएं उपलब्ध कराना बेहद कठिन है। कई बार बजट समय पर नहीं मिलने से आवश्यक कार्य भी अटक जाते हैं। उनका कहना है कि खेल गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन बजट वर्षों से लगभग नाममात्र का ही है। ऐसे में खिलाड़ियों को बेहतर माहौल उपलब्ध कराना चुनौती बन गया है।</p>
<p><strong>बैडमिंटन हॉल पर विरोधाभासी दावे, शुल्क वसूली पर उठ रहे सवाल</strong><br />विद्यालय के प्राचार्य आशुतोष मथुरिया का कहना है कि खेल सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार विकास कार्य किए जा रहे हैं। फुटबॉल मैदान का विकास किया जा रहा है, एथलेटिक्स ट्रैक बनाया जा रहा है तथा हॉकी और बैडमिंटन के लिए इंडोर हॉल भी तैयार किए गए हैं। दूसरी ओर प्रभारी का कहना है कि बैडमिंटन के लिए प्रशिक्षक उपलब्ध नहीं होने के कारण हॉल बंद है।</p>
<p>हालांकि स्थानीय निवासियों का दावा इससे बिल्कुल अलग है। उनका कहना है कि बैडमिंटन हॉल नियमित रूप से संचालित हो रहा है और इसकी व्यवस्था प्रभारी सुनील गुप्ता संभालते हैं। खिलाड़ियों से प्रति सदस्य 800 रुपये शुल्क लिया जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यदि शुल्क लिया जा रहा है तो वह राशि किस मद में खर्च हो रही है। जब बजट की कमी का हवाला दिया जा रहा है तो खिलाड़ियों से मिलने वाली इस आय का उपयोग कहां हो रहा है, इसे लेकर पारदर्शिता की मांग उठने लगी है।</p>
<p><strong>800 रुपये देकर खेलते हैं', खिलाड़ियों ने सुनाई अपनी बात</strong><br />बैडमिंटन खिलाड़ी रुद्रांश और निश्चित ने बताया कि वे नियमित रूप से यहां अभ्यास करने आते हैं। उनके अनुसार प्रत्येक सदस्य से 800 रुपये लिए जाते हैं और प्रतिदिन करीब एक घंटे का समय खेलने के लिए दिया जाता है। खिलाड़ियों का कहना है कि यदि शुल्क लिया जा रहा है तो उसके अनुरूप सुविधाएं भी मिलनी चाहिए। वहीं कई खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों का कहना है कि विद्यालय प्रशासन यदि खेल परिसरों की देखरेख पर थोड़ा और ध्यान दे तो सीमित संसाधनों में भी काफी सुधार संभव है। उनका मानना है कि सबसे पहले सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए, ताकि खिलाड़ी बिना किसी डर और असुविधा के अभ्यास कर सकें।</p>
<p><strong>तीन साल से जंगल बना कबड्डी मैदान, खिलाड़ी बोले—ऐसे कैसे बनेंगे चैंपियन</strong><br />कबड्डी खिलाड़ियों की पीड़ा भी कम नहीं है। एक खिलाड़ी ने बताया कि पिछले तीन वर्षों से कबड्डी का मैदान उपेक्षा का शिकार है। मैदान में झाड़ियां और घास उग चुकी हैं, जिससे वहां नियमित अभ्यास करना मुश्किल हो गया है। खिलाड़ियों का कहना है कि प्रशिक्षक मैदान ठीक कराने की बात कहते हैं, जबकि प्रभारी बजट की कमी का हवाला देते हैं। इस खींचतान का सबसे ज्यादा नुकसान खिलाड़ियों को उठाना पड़ रहा है।</p>
<p>स्थानीय खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों का कहना है कि शहर से अच्छे खिलाड़ी निकलें, यह हर किसी की इच्छा है। लेकिन इसके लिए केवल बड़े दावे पर्याप्त नहीं हैं। खेल मैदानों का रखरखाव, पर्याप्त बजट, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, प्रशिक्षकों की उपलब्धता और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है। यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो खेल प्रतिभाएं सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ती रहेंगी। वहीं यदि प्रशासन गंभीरता से पहल करे तो यही शाला क्रीड़ा संगम भविष्य में हाड़ौती के खेल मानचित्र पर नई पहचान बना सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 14:57:55 +0530</pubDate>
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                <title>खिलाड़ियों के सपनों पर बदहाल मैदान मार रहे किक : खेल प्रतिभाओं को नहीं मिल रहा 'होम ग्राउंड'</title>
                                    <description><![CDATA[प्रतिभाओं को अवसर नहीं मिला तो सपने भी अधूरे रह जाएंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dilapidated-grounds-are-crushing-players--dreams--sporting-talent-lacks-a--home-ground/article-159101"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)15.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । देश में फुटबॉल के प्रति बढ़ते उत्साह और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन के बावजूद कोटा शहर में फुटबॉल की बुनियादी सुविधाएं आज भी गंभीर संकट से जूझ रही हैं। शहर में खेल मानकों के अनुरूप एक भी ऐसा फुटबॉल मैदान नहीं है, जहां राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं आयोजित कराई जा सकें। मैदानों की बदहाल स्थिति, सीमित संसाधन और खेल सुविधाओं के अभाव का सीधा असर उभरती प्रतिभाओं पर पड़ रहा है। शहर में करीब चार से पांच ऐसे मैदान हैं जहां फुटबॉल खेली जा सकती है, लेकिन अधिकांश मैदान जर्जर अवस्था में हैं। सबसे अधिक चिंता का विषय वोकेशनल ग्राउंड है, जिसकी हालत पिछले करीब दो वर्षों से खराब बनी हुई है। यही वह मैदान है, जहां से कभी अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे खिलाड़ियों ने अपने खेल की शुरुआत की थी। आज उसी मैदान पर गड्ढे, उबड़-खाबड़ सतह और अव्यवस्थाओं के कारण नियमित अभ्यास तक मुश्किल हो गया है।</p>
<p><strong>एक मैदान पर कई खेल, खिलाड़ियों की तैयारी पर पड़ रहा असर</strong><br />शहर के नयापुरा स्थित उम्मेद सिंह स्टेडियम और श्रीनाथपुरम स्टेडियम में फुटबॉल खिलाड़ी अभ्यास तो करते हैं, लेकिन इन मैदानों पर अन्य खेलों के खिलाड़ी भी अभ्यास करते हैं। इसके अलावा समय-समय पर आयोजित होने वाले सामाजिक एवं सरकारी कार्यक्रमों के कारण मैदान कई दिनों तक खिलाड़ियों के लिए उपलब्ध नहीं रह पाते। ऐसे में फुटबॉल खिलाड़ियों को नियमित अभ्यास का अवसर नहीं मिल पाता। शहर में सरकारी स्तर पर महिला वर्ग के दो और पुरुष वर्ग के सात से आठ फुटबॉल कोच कार्यरत हैं, जबकि निजी स्तर पर भी आठ से दस कोच खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। बावजूद इसके खिलाड़ियों के लिए समुचित खेल मैदान और आधुनिक सुविधाओं वाली सरकारी फुटबॉल अकादमी का अभाव दिखाई देता है।</p>
<p><strong>सुविधाओं के अभाव में घट रहा रुझान, राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का सपना अधूरा</strong><br />खेल विशेषज्ञों का मानना है कि फुटबॉल ऐसा खेल है जो बच्चों में टीम भावना, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और शारीरिक फिटनेस विकसित करता है। लेकिन शहर में सुविधाओं के अभाव के कारण बच्चों का रुझान धीरे-धीरे व्यक्तिगत खेलों की ओर बढ़ने लगता है। कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी बेहतर सुविधाओं की तलाश में दूसरे शहरों का रुख करने को मजबूर हो रहे हैं। वर्तमान में कोटा में ऐसा कोई मैदान उपलब्ध नहीं है, जहां राष्ट्रीय स्तर की फुटबॉल प्रतियोगिता आयोजित कराई जा सके। यदि खेल अवसंरचना को समय रहते विकसित नहीं किया गया तो शहर की प्रतिभाएं आगे बढ़ने से पहले ही संसाधनों के अभाव में दम तोड़ देंगी।</p>
<p><strong>खेल मानकों के अनुरूप एक भी फुटबॉल मैदान नहीं</strong><br />-4–5 मैदान हैं, लेकिन अधिकांश जर्जर हालत में।<br />-वोकेशनल ग्राउंड करीब 2 साल से बदहाल।<br />-राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता कराने लायक मैदान का अभाव।<br />-सरकारी फुटबॉल अकादमी नहीं।<br />-लड़कों के लिए केवल हॉस्टल, सुविधाएं सीमित।<br />-महिला वर्ग के 2 और पुरुष वर्ग के 7–8 सरकारी कोच।<br />-8–10 निजी कोच खिलाड़ियों को दे रहे प्रशिक्षण।<br />-एक ही मैदान पर कई खेल और अन्य कार्यक्रम होने से अभ्यास प्रभावित।</p>
<p><strong>खिलाड़ी बोले...</strong><br />बारिश के बाद मैदानों की स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि कई दिनों तक अभ्यास नहीं हो पाता। अच्छी सुविधाएं मिलें तो हम भी बड़े स्तर पर शहर का नाम रोशन कर सकते हैं।<br /><strong>- हर्षित शर्मा, युवा फुटबॉल खिलाड़ी</strong></p>
<p>प्रतियोगिताओं से पहले नियमित अभ्यास सबसे जरूरी होता है, लेकिन मैदान उपलब्ध नहीं होने से हमारी तैयारी प्रभावित होती है।<br /><strong>-आदित्य मीणा, खिलाड़ी</strong></p>
<p>कोटा शिक्षा नगरी के साथ खेल नगरी भी बन सकता है, लेकिन इसके लिए आधुनिक फुटबॉल मैदान और खेल सुविधाओं का विकास जरूरी है। जब तक खिलाड़ियों को बेहतर मैदान और सुविधाएं नहीं मिलेंगी, तब तक शहर से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के फुटबॉलर तैयार करना मुश्किल होगा। खेलों में निवेश भविष्य की पीढ़ी में निवेश है। जरूरत इस बात की है कि खेल मैदानों को केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि प्रतिभाओं की प्रयोगशाला माना जाए। यदि प्रशासन और सरकार समय रहते फुटबॉल मैदानों का विकास, आधुनिक सुविधाएं और समर्पित अकादमी उपलब्ध कराएं तो कोटा की धरती एक बार फिर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के बहतरिन फुटबॉल खिलाड़ी तैयार कर सकती है।<br /><strong>-राहुल शर्मा, खेल प्रेमी</strong></p>
<p>लड़कों के लिए केवल हॉस्टल की व्यवस्था है, लेकिन सरकारी फुटबॉल अकादमी नहीं है। हॉस्टल परिसर में बना फुटबॉल मैदान भी पिछले दो वर्षों से खराब स्थिति में है। कई बार संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यदि मैदान विकसित हो जाए तो शहर से राष्ट्रीय स्तर के और अधिक खिलाड़ी तैयार हो सकते हैं।<br /><strong>-तीरथ सांगा, जिला फुटबॉल संघ सचिव</strong></p>
<p>शहर में मैदान तो हैं, लेकिन किसी की भी स्थिति खेल योग्य नहीं है। बड़े मैदानों पर कई खेल एक साथ संचालित होते हैं, जिससे फुटबॉल का नियमित अभ्यास प्रभावित होता है। फुटबॉल टीम गेम है और इसके लिए समर्पित मैदान की आवश्यकता होती है।<br /><strong>-मीनू सोलंकी, सरकारी फुटबॉल कोच</strong></p>
<p>शहर में फुटबॉल खिलाड़ियों के लिए खेल मानकों के अनुरूप मैदान उपलब्ध नहीं है। खेल विभाग के अधीन एक भी खेल मैदान नहीं है। शहर के अधिकांश मैदान या तो यूआईटी (नगर विकास न्यास) अथवा नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इस समस्या को लेकर संबंधित अधिकारियों से कई बार आग्रह किया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। मैदानों के अभाव में खिलाड़ियों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, हालांकि विभाग इस दिशा में लगातार प्रयासरत है।<br /><strong>-वाई बी सिंह, जिला खेल अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 14:18:53 +0530</pubDate>
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                <title>तपन ने की खिलाड़ियों की प्रैक्टिस किक आउट : स्कूल टाइम बदले, मैदान सूने, गर्मी ने थाम दी रफ़्तार </title>
                                    <description><![CDATA[भीषण गर्मी का कहर: बदली कोटा की रफ़्तार, दिनचर्या से खेल तक सब प्रभावित।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/scorching-heat-knocks-out-athletes--practice-sessions/article-152191"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/tapan-ne-ki--khiladiyon-ki-praiktis-kik-aaut...kota-news-30.04.2026.jpg-(1).jpeg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है। तापमान ने पिछले 25 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जिससे जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। सुबह 10 बजे के बाद ही तेज धूप और लू के थपेड़े महसूस होने लगते हैं। दोपहर होते-होते हालात ऐसे हो जाते हैं कि शहर के प्रमुख मार्गों कोटड़ी सर्किल, घोड़ा वाला बाबा सर्किल और तलवंडी क्षेत्र — पर सन्नाटा छा जाता है। भीषण गर्मी का असर खेल गतिविधियों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। छत्र विलास गार्डन और किशोर सागर तालाब जैसे क्षेत्रों में जहां पहले सुबह-शाम रौनक रहती थी, अब वहां लोगों की आवाजाही कम हो गई है। खेल मैदानों में भी खिलाड़ियों की संख्या घटी है। खिलाड़ी अब सुबह 4:30 से 5 बजे के बीच ही अभ्यास कर लेते हैं या फिर देर शाम का इंतजार करते हैं।</p>
<p>पहले सुबह 6 बजे तक मैदान खिलाड़ियों से भर जाता था, लेकिन अब गर्मी के कारण सभी को जल्दी अभ्यास खत्म करना पड़ रहा है। इससे खिलाड़ियों की स्टैमिना और प्रदर्शन दोनों प्रभावित हो रहे हैं।<br /><strong>-प्रितम सिंह, सचिव बॉक्सिंग संघ</strong></p>
<p>दोपहर में अभ्यास करना अब संभव नहीं है, इसलिए पूरी दिनचर्या बदलनी पड़ी है। बढ़ती गर्मी से थकान जल्दी होती है और अभ्यास का समय भी घट गया है।<br /><strong>-पुष्पेन्द्र गुर्जर, खिलाड़ी</strong></p>
<p><strong>स्वास्थ्य पर भी खतरा</strong><br />लगातार बढ़ती गर्मी के कारण डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक के मामलों में भी इजाफा हो रहा है। गर्मी ने न केवल पारा बढ़ाया है, बल्कि कोटा की जीवनशैली और रफ्तार को भी पूरी तरह बदल दिया है। आने वाले दिनों में राहत नहीं मिली तो हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।<br /><strong>-तिरथ सांगा, सचिव फुटबॉल संघ</strong></p>
<p><strong>डॉक्टर की सलाह: ऐसे रखें खुद को सुरक्षित</strong><br /><strong>डॉ यावर खान</strong> के अनुसार, खिलाड़ियों को इस मौसम में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। अभ्यास से पहले और बाद में पर्याप्त पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स लेना जरूरी है, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। हल्के और ढीले कपड़े पहनें, सीधी धूप में अभ्यास से बचें और संभव हो तो सुबह या शाम के समय ही ट्रेनिंग करें। उन्होंने सलाह दी कि अत्यधिक थकान, चक्कर या सिरदर्द महसूस होने पर तुरंत आराम करें और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सहायता लें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 14:26:40 +0530</pubDate>
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                <title>बदहाल हो रहे पार्क : चोरी हो रहे सामान ; सुरक्षा दीवारों के साथ झूले भी टूटे, मैदान में हो रहे गड्ढ़े</title>
                                    <description><![CDATA[पार्क हरियाली की जगह गंदगी, अव्यवस्था और असामाजिक तत्वों के जमावड़े का केंद्र बना। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/parks-fall-into-disrepair--equipment-stolen--boundary-walls-and-swings-broken--grounds-riddled-with-potholes/article-151434"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(3)28.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। विज्ञान नगर क्षेत्र के पार्क बदहाल हो रहे हैं। न केवल झूले बल्कि सुरक्षा दीवारें भी टूट रही हैं। वहीं, पार्क का मैदान भी गड्ढ़ों से उबड़-खाबड़ हो रहा है। जहां खेलते वक्त बच्चों के पैर मुड़ जाने से चोटिल हो रहे हैं। हालात यह हैं कि पार्क में लगे सामान तक चोरी हो गए। जिम्मेदारों की लापरवाही से पार्क अब हरियाली की जगह गंदगी, अव्यवस्था और असामाजिक तत्वों के जमावड़े का केंद्र बन गए हैं। परेशान क्षेत्रवासियों ने सुरक्षा दीवारें बनवाने व पार्क के विकास को लेकर जिला कलक्टर से गुहार लगाई।</p>
<p><strong>रेलिंग काटकर पटकी, कहीं सुरक्षा दीवार तोड़ी</strong></p>
<p>महात्मा गांधी पर्यावरण विकास समिति के अध्यक्ष एडवोकेट अमजद खान ने बताया कि पिछले एक साल में पार्कों की स्थिति पूरी तरह बिगड़ गई। कई जगहों पर बाउंड्री वॉल तोड़ दी गई तो कई जगहों पर रेलिंग काटकर पटक दी गई। पार्क खुले मैदान की तरह लावारिस हालत में छोड़ दिए गए हैं। जिससे सरकारी सम्पतियों के चोरी होने का डर बना रहता है।</p>
<p><strong>पार्कों में गंदगी का ढेर, असमाजिक तत्वो का जमावड़ा</strong></p>
<p>स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले पार्कों की देखरेख नगर निगम के अधीन थी, जो अब केडीए के अधीन है। जिम्मेदारों की लापरवाही से चल रहे विकास कार्य भी रुके पड़े हैं। न लेबर आती है और न ही ठेकेदारों का अता-पता है। पार्क पूरी तरह से लावारिस हालत में हैं। जिसकी वजह से पार्कों में असमाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है, जो शोर-शराबा व गाली-गलौच करते हैं। ऐसे में मॉर्निंग वॉक व इवनिंग वॉक पर आने वाले लोगों द्वारा टोकने पर झगड़ा करने पर उतारू हो जाते हैं। पार्क में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हैं। सुरक्षा दीवारें टूटने से मवेशी पार्क में घुस जाते हैं। जिससे हादसे की आशंका बनी रहती है।</p>
<p><strong>लोहे के डस्टबीन हो गए चोरी</strong></p>
<p>क्षेत्रवासियों का कहना है कि माहत्मा गांधी पार्क-(छोटा) में लगाए गए लोहे के डस्टबीन नशेडी चोरी कर ले गए। वहीं, पार्क में लोहे की जालियां पड़ी हुई हैं, ऐस में उसके चोरी होने का खतरा बना रहता है। शिकायत के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई और न ही पार्क की दशा सुधारने पर ध्यान दिया जा रहा।</p>
<p><strong>सफाई कर्मचारी हटाए, सफाई व्यवस्था ठप</strong></p>
<p>पार्क समिति के अध्यक्ष मुकेश मेवाड़ा का कहना है कि पार्क केडीए के अधीन आने के बाद से ठेकेदार ने सफाई कर्मचारियों को हटा दिया, जिससे नियमित सफाई बंद हो गई और पार्क कचरे से भर गए हैं। शिकायत करने पर जिम्मेदार अधिकारी भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। वहीं, क्षेत्रवासी अनीता ने बताया कि पार्क के सामने घर होने के कारण असामाजिक तत्वों की गतिविधियों से परिवार को काफी दिक्कत होती है। नशे का धुआं घरों तक पहुंचता है और विरोध करने पर गाली-गलौज की जाती है।</p>
<p><strong>खुले पड़े बिजली तार, पैनल टूटे</strong></p>
<p>स्थानीय निवासी रमेशचंद्र नागर ने बताया कि असामाजिक तत्वों ने पार्कों की लाइटें और पैनल तक तोड़ दिए हैं, जिससे पार्क में अंधेरा होने से संदिग्ध गतिविधियां बढ़ रही हैं। पुलिस को शिकायत देने के बावजूद गश्त नहीं बढ़ाई जा रही है। समिति सदस्यों व स्थानीय लोगों ने जिला कलक्टर से बदहाल पार्कों की स्थिति सुधरवाने की मांग की है। छत्रपुरा तालाब व गांधी गृह के पार्कों के हालात बदतर हो रहे हैं। जगह-जगह पार्क की दीवारें टूटी हुई हैं तो कहीं जगहों पर लोहे की जालियां यूं ही पटक रखी है, जबकि जिम्मेदार केडीए अधिकारी को इसे गोदाम में जमा करवाना चाहिए ताकि, सरकारी सम्पति चोरी होने से बच सके। इलाके के 3 वार्डों में करीब 6 से ज्यादा पार्क हैं, जिनमें ठेकेदार द्वारा मात्र 3-4 ही लेबर ही लगा रखी है, जो कभी-कभी आती है। वहीं, ठेकेदार के भी अते पते नहीं है। पार्कों की दशा बिगड़ रही है। संबंधित अधिकारी को कई बार लिखित व मौखिक शिकायत कर चुके हैं, इसके बावजूद सुनवाई नहीं हो रही।</p>
<p><strong>-कपिल शर्मा, पूर्व पार्षद</strong></p>
<p>पार्कों में विकास कार्य करवाए जा रहे हैं। यदि, कहीं कार्य में कोई कमी है तो मौका स्थिति देखकर दुरुस्त करवाया जाएगा।</p>
<p><strong>-सतीश तोमर, एईएन केडीए</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 14:56:07 +0530</pubDate>
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                <title>खेलों में प्रोत्साहन ना  ही सुविधाएं, कैसे लाएं मेडल</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा में कई खेलों के खिलाड़ी ऐसे हैं जिन्हें राज्य स्तर और राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के बाद भी कई तरह की सुविधाओं के लिए मोहताज हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/no-incentives-in-sports--no-facilities--how-to-bring-medals/article-91985"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/4427rtrer-(3)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । खिलाड़ी अपने शहर राज्य ओर देश का नाम रोशन करने के लिए जी जान लगा देते हैं। एक एक प्रतियोगिता जीतने के लिए ये खिलाड़ी दिन रात एक कर देते हैं। लेकिन इन खिलाड़ियों को इनकी मेहनत का ना बराबर सम्मान मिलता है और ना प्रोत्साहन। कोटा में कई खेलों के खिलाड़ी ऐसे हैं जिन्हें राज्य स्तर और राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के बाद भी कई तरह की सुविधाओं के लिए मोहताज हैं। इसके साथ ही इन खिलाड़ियों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि भी पिछले 6 साल से नहीं दी गई है।</p>
<p><strong>ट्रैक एथेलेटिक्स के खिलाड़ियों के पास नहीं साधन और मैदान</strong><br />कोटा जिले में अन्य खेलों की तरह ही ट्रैक एथेलेटिक्स के खिलाड़ी भी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कोटा का नाम रोशन कर रहे हैं। लेकिन ट्रैक एथेलेटिक्स में आने वाले भाला फेंक, गोला फेंक, डिस्कस थ्रो और हेमर थ्रो के खिलाड़ियों के पास आज खुद का मैदान तक नहीं है। ट्रैक एथेलेटिक्स के कोच श्याम बिहारी नाहर ने बताया कि वो अपने दम पर ही एथेलीटों को ट्रेनिंग देते हैं। खिलाड़ियों के पास खेलों के पर्याप्त साधन तक नहीं है। इन खिलाड़ियों को अपने खर्चे पर ही सारी व्यवस्थाएं जुटानी होती हैं। हेमर थ्रो के अंडर 20 के नेशनल खिलाड़ी सत्यम ने बताया कि वो नेशनल में ब्रांज मेडल जीत चुके हैं। लेकिन मेडल जीतने के बाद उनका ना किसी ने सम्मान किया ना प्रोत्साहन दिया। साथ ही क्रिड़ा संगम से खेल के सामान मांगने पर वहां से भी मना कर दिया जाता है। इसी तरह भाला फेंक खिलाड़ी कृतिका मीणा ने बताया कि ट्रैक एथेलीटों के लिए कोटा में कोई स्थान नहीं है हम जहां जाते हैं वहीं से कोई ना कोई भगा देता है। श्री नाथपुरम स्टेडियम में भी ट्रैक बनाया लेकिन वहां भी दौड़ लगाने वाले और अन्य खिलाड़ी विरोध करने लग जाते हैं। </p>
<p><strong>तीरंदाजी में भी नहीं मिलता प्रोत्साहन</strong><br />ट्रैक एथेलेटिक्स की तरह ही कोटा में तीरंदाजी के कई खिलाड़ी ऐसे हैं जो राष्ट्रीय स्तर तक कोटा और प्रदेश का परचम लहरा चुके हैं। लेकिन इसके बावजूद भी ये खिलाड़ी अपने दम पर ही सबकुछ करने को मजबूर हैं। क्योंकि इन्हें न तो प्रशासन और न ही क्रीड़ा परिषद की ओर से किसी प्रकार का प्रोत्साहन मिलता है। तिरंदाज पुष्पेंद्र सिंह बताते हैं कि वो तिरंदाजी में राष्ट्रीय स्तर तक खेल चुके हैं और तिरंदाजी में 30 से ज्यादा पदक हासिल कर चुके हैं। लेकिन आज भी उन्हें अपने अभ्यास का खर्चा खुद उठाना पड़ता है क्योंकि कोटा में तिरंदाजी का अच्छा कोच तक मौजूद नहीं है। पुष्पेंद्र बताते हैं कि तिरंदाजी के साथ ही कोटा में कई खेल ऐसे हैं जिनके खिलाड़ी अपने दम पर ही सब कुछ कर रहे हैं। आज भी उन्हें प्रशासन और क्रीड़ा परिषद की ओर से कोई प्रोत्साहन नहीं मिलता। अन्य तीरंदाज खिलाड़ी हिमांशी राजावत ने बताया कि स्टेट और राष्ट्रीय स्तर में पदक जीत चुकी हैं लेकिन किसी की ओर से सहायता नहीं मिली साथ ही क्रीड़ा परिषद की ओर से मिलने वाली पुरस्कार राशि भी पिछले 6 साल से अटकी हुई है।</p>
<p><strong>पुरस्कार राशि 2017 से अटकी हुई</strong><br />कोटा के कई खिलाड़ी ऐसे हैं जिनकी प्रोत्साहन राशि साल 2018 से नहीं मिली है। कोटा की वुशू खिलाड़ी ईशा गुर्जर के साल 2018 व 2019 में आयोजित स्टेट वुशू चैंपियनशिप में कांस्य व स्वर्ण पदक व राष्ट्रीय वुशू चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने पर राज्य सरकार द्वारा प्रोत्साहन राशि की घोषणा की गई थी जो अभी तक प्राप्त नहीं हुई। ईशा की कुल 3 लाख 50 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि रुकी हुई है। इसी तरह बॉक्सिंग प्लेयर निशा गुर्जर द्वारा भी साल 2021, 2022 व 2023 में आयोजित राज्य स्तरीय महिला बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने पर सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि की घोषणा की गई थी जो अभी तक जारी नहीं हुई है। निशा प्रोत्साहन राशि अभी तक जारी नहीं हुई है। वहीं वुशू खिलाड़ी प्रियांशी गौतम के पिता अशोक गौत्तम ने बताया कि प्रियांशी द्वारा साल 2021 में 20वीं व 2022 में 21वीं नेशनल सब जूनियर वुशू प्रतियोगिता में गोल्ड के साथ साल 2023 में 67वीं स्कूल गेम नेशनल प्रतियोगिता वुशू प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतने पर सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि की घोषणा की गई थी जो अभी तक पेंडिग है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />खिलाड़ियों की ट्रेनिंग के लिए कोच लगाए गए हैं, किसी भी खिलाड़ी के लिए व्यक्तिगत रूप से कोच और संसाधान की व्यवस्था नहीं की जाती है। जिन भी क्षेत्रों में कमी होगी उन्हें दूर करने के लिए प्रयास किए जाएंगे। प्रोत्साहन राशि के लिए सभी खिलाड़ियों की रिपोर्ट तैयार कर जयपुर फाइल भेजी हुई है।<br /><strong>- मधु चौहान, जिला खेल अधिकारी, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Sep 2024 17:05:29 +0530</pubDate>
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