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                <title>journey - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>बिहार मंत्रीमंडल का विस्तार: अखबार और तेल बेचकर उठाते थे पढ़ाई का खर्च, आज बने सम्राट कैबिनेट के मंत्री, पहचाना कौन..?</title>
                                    <description><![CDATA[बिहार की सम्राट सरकार में प्रमोद चंद्रवंशी का मंत्री बनना संघर्ष की जीत है। कभी पटना की सड़कों पर अखबार और सरसों तेल बेचने वाले प्रमोद आज युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। अभावों के बीच पले-बढ़े इस साधारण किसान पुत्र की सादगी और समर्पण ने उन्हें शिखर तक पहुँचाया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/expansion-of-bihar-cabinet-used-to-bear-the-expenses-of/article-153104"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/dr-pramod-kumar-minister-1778150879799.webp" alt=""></a><br /><p>जहानाबाद। बिहार की राजनीति में संघर्ष और सादगी की मिसाल माने जाने वाले डॉ. प्रमोद कुमार उर्फ प्रमोद चंद्रवंशी को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने से जहानाबाद समेत पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। बेहद साधारण परिवार से निकलकर मंत्री पद तक पहुंचने वाले डॉ. प्रमोद कुमार की कहानी आज युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। जहानाबाद जिले के काको प्रखंड स्थित नेरथुआमठ गांव निवासी डॉ. प्रमोद कुमार का बचपन आर्थिक अभावों में बीता। उनके पिता अयोध्या प्रसाद खेती-बाड़ी कर परिवार चलाते थे। सीमित आय होने के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी, लेकिन कठिन परिस्थितियों के बावजूद प्रमोद कुमार ने शिक्षा और सामाजिक जीवन में आगे बढ़ने का संकल्प नहीं छोड़ा।</p>
<p>छात्र जीवन में ही वे विद्यार्थी परिषद से जुड़ गए और पढ़ाई जारी रखने के लिए संघर्ष शुरू किया। पटना के पोस्टल पार्क में रहकर उन्होंने अपना खर्च चलाने के लिए अखबार बेचने का काम किया। बाद में घर-घर जाकर सरसों तेल बेचकर भी अपनी पढ़ाई और जीवन-यापन का खर्च उठाया। स्थानीय लोगों के अनुसार संघर्ष के उन्हीं दिनों ने उनके व्यक्तित्व को मजबूत बनाया। बताया जाता है कि तेल व्यवसाय से उनका जुड़ाव आज भी बना हुआ है। हालांकि अब वे स्वयं घर-घर जाकर तेल नहीं बेचते, बल्कि पोस्टल पार्क स्थित उनकी स्थायी दुकान का संचालन कर्मचारी करते हैं।</p>
<p>ग्रामीणों के अनुसार लगभग दो वर्ष पहले तक उनका पैतृक घर झोपड़ीनुमा था, जहां चोरी की घटना भी हो चुकी थी। बाद में उन्होंने अपने भाइयों के साथ मिलकर गांव में छोटा पक्का मकान बनवाया। परिवार की सादगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जाता है कि विधान परिषद सदस्य बनने के बाद भी उनका भाई पटना की एक निजी गैस एजेंसी में सामान्य वेतन पर नौकरी करता रहा। राजनीतिक जीवन में लगातार सक्रिय रहने और संगठन के प्रति समर्पण के कारण डॉ. प्रमोद कुमार को पहले विधान परिषद पहुंचने का अवसर मिला और बाद में मंत्रिमंडल में जगह मिली। वर्ष 2025 में गठित नीतीश सरकार में भी उन्हें वन, पर्यावरण एवं सहकारिता विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की नई कैबिनेट में भी उन्हें मंत्री बनाए जाने से समर्थकों और आम लोगों में उत्साह है।</p>
<p>स्थानीय लोगों का कहना है कि डॉ. प्रमोद कुमार का मंत्री बनना इस बात का प्रमाण है कि राजनीति में आज भी साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले और संघर्ष के दम पर आगे बढ़ने वाले लोगों के लिए जगह बनी हुई है। धनबल और परिवारवाद के दौर में उनका राजनीतिक सफर आम लोगों के लिए उम्मीद और प्रेरणा का संदेश दे रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 11:52:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ ने पूरे किए 17 साल, टप्पू सेना से लेकर गोकुलधाम के रंग-बिरंगे किरदार कई वर्षों से कर रहे फैंस के दिलों पर राज </title>
                                    <description><![CDATA[सोनी सब के पारिवारिक मनोरंजन शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ ने 17 साल का सफर पूरा कर लिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/soni-sabs-show-tarak-mehta-ka-ooltah-chashma-completed-17/article-121997"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/ne1ws2.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। सोनी सब के पारिवारिक मनोरंजन शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ ने 17 साल का सफर पूरा कर लिया है। नील फिल्म प्रोडक्शन्स के बैनर तले असित कुमार मोदी द्वारा परिकल्पित और निर्मित यह शो 2008 में लॉन्च हुआ था और तब से यह पीढ़ियों के बीच एक जाना-पहचाना नाम बन गया है। गोकुलधाम सोसाइटी की पृष्ठभूमि में स्थापित यह शो भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों में रचा-बसा है, जो रोजमर्रा के जीवन की झलकियों को हल्के-फुल्के हास्य, सामुदायिक भावना और सार्थक कहानी कहने के अंदाज में प्रस्तुत करता है, जो सोनी सब की पहचान बन चुका है। टप्पू सेना की मासूमियत से लेकर गोकुलधाम के रंग-बिरंगे किरदारों जेठालाल, भिड़े, पोपटलाल, बबिता, डॉ. हाथी, सोढ़ी, तारक मेहता और अन्य की विशेषताओं तक, हर एक ने इस शो की कहानी में अहम भूमिका निभाई है।</p>
<p>सोनी सब के बिजनेस हेड अजय भालवनकर ने कहा- सोनी सब पर हम ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ के 17 वर्षों का जश्न मनाते हुए बेहद गर्व महसूस कर रहे हैं। एक ऐसा शो जो समय की कसौटी पर खरा उतरा है और पूरे देश में करोड़ों चेहरों पर मुस्कान लाता रहा है। यह उपलब्धि किसी साधारण बात का प्रतीक नहीं है, बल्कि शो की कहानी, इसके प्यारे पात्रों और इसके मूल्यों की गवाही है। हम असित कुमार मोदी और पूरी टीम के आभारी हैं, जिन्होंने साल-दर-साल शो में अपना दिल लगाया है। जहां बाकी शोज ड्रामे से भरे हैं, वहीं ‘तारक मेहता’ आज भी उम्मीद, हंसी और सकारात्मकता की मिसाल है, जो दर्शकों को साल-दर-साल जोड़े रखती है। ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ हर सोमवार से शनिवार, रात 8:30 बजे सिर्फ सोनी सब पर प्रसारित होता है।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Jul 2025 15:58:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बदहाल व्यवस्था और जानलेवा सफर का सामना कर रहे यात्री </title>
                                    <description><![CDATA[समाजसेवी बने सहारा, पर प्रशासन सोया!]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/passengers-facing-a-bad-system-and-a-life-threatening-journey/article-115508"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/news-(3)31.png" alt=""></a><br /><p>नाहरगढ़।  नाहरगढ़ बस स्टैंड का इन दिनों हाल बेहाल है और यात्रियों की परेशानी चरम पर है। कहने को तो यहां समाजसेवियों की बदौलत कुछ सुविधाएं मिली हैं लेकिन रोडवेज प्रबंधन की घोर लापरवाही ने इन प्रयासों पर पानी फेर दिया है। आलम यह है कि यात्रियों को जान जोखिम में डालकर यात्रा करनी पड़ रही है। काफी समय से नाहरगढ़ बस स्टैंड पर यात्री प्रतीक्षालय तक नहीं था। यात्रियों को खुले आसमान के नीचे धूप, बारिश और ठंड झेलनी पड़ती थी। ऐसे में समाजसेवी डॉ. महेंद्र गर्ग देवदूत बनकर सामने आए और उन्होंने अपनी नेक कमाई से एक शानदार यात्री प्रतीक्षालय विश्रामालय का निर्माण करवाया। इतना ही नहीं यात्रियों को शुद्ध और ठंडा पानी मिल सके, इसके लिए कंपाउंडर नवल किशोर विजय ने वाटर कूलर लगवाकर एक और बड़ी राहत दी। इन प्रयासों से लगा कि अब यात्रियों की मुश्किलें कम होंगी लेकिन रोडवेज प्रबंधन की उदासीनता ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।</p>
<p><strong>खटारा बसें, जानलेवा सफर और बेसुध रोडवेज</strong><br />नाहरगढ़ से गुना (मध्यप्रदेश) तक निजी बसें धड़ल्ले से चल रही हैं, लेकिन नाहरगढ़ से बारां-कोटा रूट पर रोडवेज बसों का हाल बद से बदतर होता जा रहा है। एक समय था जब हर घंटे बसें मिला करती थीं, लेकिन अब लापरवाही की हद तो देखिए, धीरे-धीरे बसों को बंद करते-करते सिर्फ दो खटारा, कबाड़ और छोटे डिब्बे जैसी बसें ही बची हैं। ये बसें इतनी जर्जर हैं कि इनमें सफर करना अपनी जान जोखिम में डालने जैसा है। कुछ महीने पहले एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई थी, जब एक रोडवेज बस का अंदरूनी फर्श फट गया और चलती बस से एक छोटी बच्ची नीचे गिर गई। गनीमत रही कि बच्ची को गंभीर चोटें नहीं आईं, लेकिन यह घटना रोडवेज प्रबंधन की लापरवाही का जीता-जागसबूत है। ऐसे में यात्री डर के साए में यात्रा करने को मजबूर हैं।</p>
<p><strong>शिकायतें अनसुनी, आखिर कब जागेगा प्रबंधन?</strong><br />यात्रियों की परेशानी जब हद से ज्यादा बढ़ गई तो उन्होंने रोडवेज प्रबंधन के नंबर  पर शिकायतें करना शुरू किया। ग्रामीण लगातार अपनी आपबीती सुना रहे हैं और सुधार की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन मजाल है कि कोई कार्रवाई हो। लगता है रोडवेज प्रबंधन ने अपनी आंखों पर पट्टी बांध रखी है और यात्रियों की सुरक्षा से उन्हें कोई सरोकार नहीं है। यह लापरवाही साफ तौर पर दर्शाती है कि आम जनता की सुविधाओं और सुरक्षा को ताक पर रखकर बस अपनी मनमानी की जा रही है। स्थानीय प्रशासन और उच्च अधिकारियों को इस गंभीर मामले पर तुरंत ध्यान देना चाहिए और यात्रियों को सुरक्षित और सुगम यात्रा उपलब्ध करानी चाहिए।</p>
<p>हमें रोजगार के लिए या दूसरे कामों से बारां-कोटा जाना पड़ता है लेकिन बसें मिलती ही नहीं। अगर मिल भी जाए, तो वो इतनी खटारा होती हैं कि जान हथेली पर रखकर चलना पड़ता है।<br /><strong>- विजयपाल सिंह बिकावत,  ग्रामवासी</strong></p>
<p>ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए प्रयास जारी है। इस संदर्भ में अधिकारियों से भी बात की है। जल्द ही बस सेवा शुरू होगी। जिससे ग्रामीणों को राहत प्रदान की जा सके। <br /><strong>- ऋषिपाल सिंह बिकावत, भाजपा कार्यकर्ता </strong></p>
<p>इन सभी बसों की पुरानी समय-सारणी को लिखकर मंत्री के पास सूचना दी जाएगी। पहले भी इस संबंध में जानकारी दी जा चुकी है। जनता बेहद परेशान है और जल्द से जल्द इस पर कार्रवाई करना बहुत जरूरी है।<br /><strong>- डॉ. ललित मीणा, विधायक   </strong></p>
<p>मेरी नई पोस्टिंग है, पुरानी बसों की जानकारी नहीं है। बसों की कमी है इसलिए ज्यादा बसें नहीं लगा पा रहे। जल्द ही सुबह 9:30 बजे वाली कस्बाथाना कोटा बस शुरू होगी और नाहरगढ़ से कोटा के लिए भी एक नई बस चलाई जाएगी।<br /><strong>- योगेंद्र सिंह,  रोडवेज मुख्य प्रबन्ध बारां </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 May 2025 17:36:47 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पलाश वास्वानी ने बताया अपने इंजीनियर से निर्देशक बनने तक के सफर के बारे में </title>
                                    <description><![CDATA[निर्देशक पलाश वास्वानी ने इंजीनियर से निर्देशक बनने तक के अपने सफर के बारे में बताया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/palash-vaswani-told-about-the-journey-from-his-engineer-to/article-104163"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(1)39.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। निर्देशक पलाश वास्वानी ने इंजीनियर से निर्देशक बनने तक के अपने सफर के बारे में बताया है। राजश्री प्रोडक्शंस की ओटीटी डेब्यू सीरीज ‘बड़ा नाम करेंगे’ अपनी रिलीज के बाद से ही सोनी लिव पर धूम मचा रही है। यह प्यार, पारिवारिक मूल्यों और संगीत की भावनात्मक धुनों से सजी कहानी  है। ‘गुल्लक’ जैसी पारिवारिक मनोरंजक सीरीज के निर्देशक पलाश वास्वानी ने इसे निर्देशित किया है। मुख्य भूमिकाओं में ऋतिक घनशानी (ऋषभ) और आयशा कादुस्कर (सुरभि) नजर आ रहे हैं। इनके साथ अनुभवी कलाकारों की शानदार टोली है, जिसमें कंवलजीत सिंह, अल्का अमीन, दीपिका अमीन, राजेश तैलंग, अंजना सुखानी, ज़मील खान, चित्राली गुप्ते और राजेश जैस शामिल हैं।</p>
<p>‘बड़ा नाम करेंगे’, जो राजश्री एंटरटेनमेंट का ओटीटी डेब्यू है, इसके निर्देशन के लिए फिल्ममेकर सूरज बडज़ात्या ने पलाश वास्वानी से सम्पर्क किया। पलाश वास्वानी ने कहा, जब मैंने एस. मनस्वी और विदित त्रिपाठी की लिखी इस कहानी को पढ़ा, तो इससे तुरंत जुड़ाव महसूस हुआ। इसमें आर्थिक असमानताएं, विचारधाराओं में अंतर और दो अलग-अलग दुनिया के मिलने की खूबसूरत झलक थी। कहानी के हीरो का ताल्लुक बिजनेस फैमिली से है। वह पूरी तरह से फोकस्ड है, एमबीए करना चाहता है और अपने पारिवारिक बिजनेस को मल्टीनेशनल बनाना चाहता है। वहीं, अभिनेत्री एक टीचर्स फैमिली से ताल्लुक रखती है। उसका सपना माइक्रोबायोलॉजी में ग्रेजुएशन और फिर वायरोलॉजी में पीएचडी करने का है।</p>
<p>पलाश वास्वानी ने आईआईटी बॉम्बे से ग्रेजुएट होने से लेकर स्टोरीटेलिंग में अपने असली जुनून को पहचानने तक के अपने सफर के बारे में बात की। उन्होंने कहा, “अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद, मैंने एक आईटी कंपनी में नौकरी की, लेकिन कुछ ही महीनों में वहां से निकाल दिया गया, जो मेरे लिए बेहद हैरानी की बात थी। तब मुझे अहसास हुआ कि मैं इस दौड़ का हिस्सा नहीं बन सकता। आगे क्या करना है, यह तय नहीं था, लेकिन एक छोटा कैमरा लेकर मैंने शॉर्ट फिल्में बनानी शुरू कर दीं। धीरे-धीरे एक क्रिएटिव कॉपीराइटर की नौकरी मिली, जहां विज्ञापन की दुनिया ने मुझे कहानी कहने का हुनर सिखाया। फिर मैंने वेब सीरीज और फिल्मों का निर्देशन शुरू किया, और बस, जिंदगी ने एक नया मोड़ ले लिया।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Feb 2025 15:07:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>सिद्धारमैया की कहानी: आजादी से पहले जन्मे, वकालत की और सियासत में सीएम तक का सफर</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में शुमार सिद्धारमैया का जन्म देश की आजादी से ठीक पहले तीन अगस्त 1947 को मैसूर में हुआ था। तब ब्रिटिश का राज हुआ करता था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/the-story-of-siddaramaiah-born-before-independence-as-an-advocate/article-45946"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/v-14.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली । पांच दिनों तक मंथन के बाद आखिरकार कांग्रेस ने कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री का नाम फाइनल कर ही लिया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया ही कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री होंगे। उन्होंने सीएम की रेस में कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार को पीछे छोड़ दिया। डीके शिवकुमार भी लगातार कोशिश करते रहे। इसके लिए उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी से लेकर यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी तक से मुलाकात की, लेकिन बात नहीं बनी। सिद्धारमैया डीके शिवकुमार पर भारी पड़े। </p>
<p><strong>बचपन की कहानी </strong><br />कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में शुमार सिद्धारमैया का जन्म देश की आजादी से ठीक पहले तीन अगस्त 1947 को मैसूर में हुआ था। तब ब्रिटिश का राज हुआ करता था। सिद्धारमैया के पिता सिद्धारमे गौड़ा मैसूर जिले के टी. नरसीपुरा के पास वरुणा होबली में खेती करते थे। मां बोरम्मा गृहणी थीं। दस साल की उम्र तक उनकी कोई औपचारिक स्कूली शिक्षा नहीं हुई थी। इसके बाद गांव के ही स्कूल में पढ़े। बाद में उन्होंने बीएससी और फिर एलएलबी की पढ़ाई मैसूर विश्वविद्यालय से की। पांच भाई-बहनों में सिद्धारमैया दूसरे नंबर पर हैं और वह कुरुबा गौड़ा समुदाय से हैं। सिद्धारमैया मैसूर के मशहूर वकील चिक्काबोरैया के अधीन जूनियर थे और बाद में उन्होंने कुछ समय के लिए कानून पढ़ाया।</p>
<p><strong>सियासी सफर </strong><br />सिद्धारमैया साल 1983 में पहली बार निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर कर्नाटक विधानसभा में चुनकर आए। 1994 में जनता दल सरकार में रहते हुए कर्नाटक के उप-मुख्यमंत्री बने। एचडी देवगौड़ा के साथ विवाद होने के बाद जनता दल सेक्युलर का साथ छोड़ा और 2006 में कांग्रेस का हाथ पकड़ा। </p>
<p>वे 2013 से 2018 तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे चुके हैं। उन्होंने अब तक 12 चुनाव लड़े हैं जिसमें से नौ में जीत दर्ज की है। मुख्यमंत्री रहते हुए गरीबों के लिए चलाई गई उनकी कई योजनाओं की काफी तारीफ हुई, जिसमें सात किलो चावल देने वाली वालाअन्न भाग्य योजना, स्कूल जाने वाले छात्रों को 150 ग्राम दूध और इंदिरा कैंटीन शामिल थीं।  सिद्धारमैया का नाम विवादों में भी खूब रहा है। उनके कार्यकाल में मैसूर के शासक टीपू सुल्तान की जयंती धूमधाम से मनाई जाती थी। इसके अलावा उन्होंने पीएफआई और एसडीपीआई के कई कार्यकर्ताओं को रिहा करने का भी आदेश दिया था। </p>
<p><strong>दो बेटे हुए, एक की मौत हो गई </strong><br />सिद्धारमैया की पत्नी का नाम पार्वती है। दोनों के दो बेटे हुए। राजनीति में अपने पिता के उत्तराधिकारी के रूप में देखे जाने वाले उनके बड़े बेटे राकेश की 2016 में 38 साल की उम्र में मौत हो गई थी। बताया जाता है कि मल्टी आॅर्गन फेल्योर के चलते उनकी मौत हुई थी। दूसरे बेटे यतींद्र 2018 में विधायक चुने जा चुके हैं। इस बार यतींद्र को टिकट नहीं मिला। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 May 2023 10:57:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>केसरिया रंग में रंगा खाटू का दरबार</title>
                                    <description><![CDATA[हाथ में निशान, मुख पर जय बाबा की, चाहत बाबा श्याम के दरबार में धोक लगाने और मनोकामना मांगने की। ना मीलों के सफर की थकान और ना ही पैरों में पड़े छालों की परवाह।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/sikar/khatu-s-court-painted-in-saffron-color--flood-of-reverence--neither-the-fatigue-of-the-journey-nor-the-care-of-the-ulcers-in-the-feet/article-5977"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/khatushyam-ji.jpg" alt=""></a><br /><p>खाटूश्यामजी। हाथ में निशान, मुख पर जय बाबा की, चाहत बाबा श्याम के दरबार में धोक लगाने और मनोकामना मांगने की। ना मीलों के सफर की थकान और ना ही पैरों में पड़े छालों की परवाह। हर कोई आस्था की डोर के सहारे खाटू दरबार की ओर खिंचा चला आ रहा है। केसरिया रंग में रंगे बाबा के इन भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा है। ऐसे नजारे बाबा श्याम के फाल्गुनी लक्खी मेले के दौरान खाटूधाम की ओर जाने वाले हर रास्ते में पग-पग पर नजर आ रहे हैं। मेले के पांचवें दिन गुरुवार को एक लाख श्रद्धालुओं ने बाबा श्याम के दरबार में मत्था टेककर परिवार की खुशहाली की कामना की। मेले के पांचवें दिन भी हारे के सहारे का अलौकिक शृंगार किया। श्याम भक्तों ने बाबा श्याम के दर पर प्रसाद चढ़ाकर धोक लगायी। रींगस रोड पर पदयात्रियों के जत्थों की रेलमपेल लगी हुई है। स्वयसेवी संस्थाओं की ओर से लगाए भण्डारों में भक्तों को भोजन की मनुहार की जा रही है।</p>
<p><br /><strong> बाबा की मोरछड़ी में है जादू</strong> <br /> बाबा श्याम के लक्खी मेले में लाखों की तादाद में श्याम भक्त खाटूनगरी में पहुंचते हैं। बाबा श्याम के दरबार में श्रद्धालु शीश नवाकर मनौतयां मांगते हैं। बाबा श्याम के दरबार में मोरछड़ी का भी बहुत महत्व है। बाबा के दर पर मोरछड़ी के झाड़े से ना केवल दु:ख दूर होते हैं, वहीे मनोकामना भी पूरी होती है। कहते हैं कि झुक गए बड़े बड़े सरकार तेरी मोरछड़ी के आगे....।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>सीकर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Mar 2022 15:54:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>अंतिम सफ़र पर जांबाज जनरल बिपिन रावत</title>
                                    <description><![CDATA[जनरल रावत को 800 सैन्यकर्मियों की मौजूदगी में दी जाएगी 17 तोपों की सलामी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AE-%E0%A4%B8%E0%A4%AB%E0%A4%BC%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%9C-%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%B0%E0%A4%B2-%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%A8-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A4/article-3052"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/antim-safar-pr-bipin-rawat.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। देश के पहले प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत का अंतिम संस्कार शुक्रवार को दोपहर बाद पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ किया जाएगा और उन्हें 17 तोपों की सलामी दी जाएगी। अंतिम संस्कार के दौरान सशस्त्र सेनाओं के विभिन्न रैंकों के कुल 800 सैन्यकर्मी मौजूद रहेंगे। जनरल रावत और उनकी पत्नी मधुलिका रावत तथा।1 अन्य सैनिकों की बुधवार को तमिलनाडु में कुन्नूर के निकट हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी।</p>
<p>गुरुवार को कन्नूर से यहां लाए जाने के बाद जनरल रावत के पार्थिव शरीर को उनके निवास स्थान तीन काम राजमार्ग पर लोगों के दर्शनार्थ रखा गया है। सेना और सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और आम लोगों ने जनरल रावत को श्रद्धांजलि दी।<br /> सेना, नौसेना और वायु सेना के ब्रिगेडियर स्तर के  12 अधिकारी जनरल रावत के पार्थिव शरीर के पास निगरानी के लिए तैनात किए गए। <br /> <br /> उनकी अंतिम यात्रा तीन कामराज मार्ग से दिल्ली छावनी स्थित बरार स्क्वायर शमशान के लिए रवाना हुई। अंतिम यात्रा के लिए सेना, नौसेना और वायु सेना के दो दो लेफ्टिनेंट जनरल स्तर के अधिकारी राष्ट्रीय ध्वजवाहक बनाए गए हैं। अंतिम यात्रा के दौरान हर कोई जांबाज जनरल को नम आंखों से अंतिम विदाई दे रहा है।<br />  </p>
<p>जनरल रावत की अंतिम यात्रा में सेना, नौसेना और वायु सेना के सभी रैंक के कुल 99 अधिकारी और तीनों सेनाओं के बैंड के 33 सदस्य आगे-आगे चल रहे हैं।  तीनों सेनाओं के सभी रैंकों के 99 अधिकारी पीछे से एस्कॉर्ट कर रहे हैं। अंतिम संस्कार के दौरान सशस्त्र सेनाओं के कुल 800 अधिकारी और जवान मौजूद रहेंगे। पहले से निश्चित प्रोटोकॉल के तहत जनरल रावत को 17 तोपों की सलामी दी जाएगी। जनरल रावत के परिजन उन्हें मुखाग्नि देंगे। राष्ट्रपति रामनाथ कोंविद भी इस दौरान मौजूद रहेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Dec 2021 15:31:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>‘ हम वचन निभायेंगे’ की टैग लाइन के साथ शुरू हुई प्रियंका की प्रतिज्ञा यात्रा</title>
                                    <description><![CDATA[लोक लुभावन वचनों में लड़कियों को स्मार्ट फोन और स्कूटी, किसानो का पूरा कर्जा माफ, कोरोना काल के दौरान का बिजली का बिल माफ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E2%80%98-%E0%A4%B9%E0%A4%AE-%E0%A4%B5%E0%A4%9A%E0%A4%A8-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87%E2%80%99-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%9F%E0%A5%88%E0%A4%97-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A5-%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%82-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%88-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%9E%E0%A4%BE-%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE/article-1854"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/priyanka-2.jpg" alt=""></a><br /><p>बाराबंकी।  किसान,महिला,युवा और बेरोजगार को अपने एजेंडे के केन्द्र बिंदु में रखकर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने ‘ हम वचन निभायेंगे’ की टैग लाइन के साथ प्रतिज्ञा यात्रा को हरी झंडी दिखाई। जैदपुर विधानसभा क्षेत्र से प्रतिज्ञा यात्रा को हरी झंडी दिखाने से पहले वाड्रा ने अपनी प्रतिज्ञाओं की पोटली खोली जिसमें उन्होने वादा किया है कि कांग्रेस अगर सत्ता में आती है तो लड़कियों को स्मार्ट फोन और स्कूटी दी जायेगी जबकि किसानो का पूरा कर्जा माफ कर दिया जायेगा। कोरोना काल के दौरान का बिजली का बिल माफ कर दिया जायेगा जबकि बाद के बिजली के बिल का आधा पैसा माफ किया जायेगा।</p>
<p><br /> कोरोना के कारण आम आदमी के बिगड़े बजट को सुधारने के लिये हर परिवार को 25 हजार रूपये की आर्थिक मदद दी जायेगी वहीं 20 लाख युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जायेगा। धान और गेहूं का समर्थन मूल्य 2500 रूपये क्विंटल किया जायेगा। इससे पहले श्रीमती वाड्रा लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस कर अपने पहले संकल्प में 2022 के चुनाव में महिलाओं को टिकट बटवारे में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी का वादा किया था।</p>
<p><br /> उल्लेखनिय वाड्रा की ये प्रतिज्ञायें कांग्रेस के चुनाव से पहले जारी किये जाने वाले घोषणा पत्र से अलग होंगी। जनता के बीच अपनी पैठ बनाने के इरादे से आज शुरू हुयी प्रतिज्ञा यात्रा का पहला रूट (वाराणसी अवध) वाराणसी से शुरू होकर रायबरेली में समाप्त होगा, जिसमें चंदौली, सोनभद्र, मिर्जापुर, प्रयागराज, प्रतापगढ, अमेठी जिले शामिल होगें, इस रूट का नेतृत्व पूर्व सांसद प्रमोद तिवारी, पूर्व सांसद राजेश, पूर्व विधायक नदीम जावेद करेगें। बाराबंकी से शुरू होकर झांसी में समाप्त होने वाले दूसरे रूट में लखनऊ, उन्नाव, फतेहपुर, चित्रकूट, बांदा, हमीरपुर, जालौन जिले शामिल होगें। इसका नेतृत्व पूर्व सांसद पीएल पुनिया, पूर्व केन्द्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य और मीडिया विभाग के चेयरमैन व पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी करेगें।<br /> प्रतिज्ञा यात्रा का तीसरा रूट सहारनपुर से शुरू होकर मथुरा में समाप्त होगा, जिसमें मुजफ्फरनगर, विजनैर, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, बदांयु, अलीगढ़, हाथरस, आगरा जिले शामिल होगें। इसका नेतृत्व पूर्व केन्द्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद एवं लखनऊ से कांग्रेस के पूर्व सांसद प्रत्याशी आचार्य प्रमोद कृष्णम् करेंगें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Oct 2021 16:32:32 +0530</pubDate>
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                <title>JKK में महात्मा गांधी पर आधारित प्रदर्शनी का CM गहलोत ने किया उद्घाटन</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदर्शनी की परिकल्पना विधायक, निवाई पीपलू,  प्रशांत बैरवा ने की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jkk-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE-%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%86%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-cm-%E0%A4%97%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%A4-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%89%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%98%E0%A4%BE%E0%A4%9F%E0%A4%A8/article-1425"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/fa1gd9qvcaagso1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>| राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज जवाहर कला केंद्र (जेकेके) की सुदर्शन गैलेरी में 'राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जीवन यात्रा' पर आधारित पेंटिंग प्रदर्शनी 'मोहनदास से महात्मा' का उद्घाटन किया। प्रदर्शनी की परिकल्पना विधायक, निवाई पीपलू,  प्रशांत बैरवा ने की है। प्रदर्शनी के कलाकार देवदास आर्ट्स, जयपुर के चंद्र प्रकाश गुप्ता हैं।<br /> <br /> मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर पेंटिंग्स की प्रशंसा की और कहा कि गांधी जी के जीवन के विभिन्न क्षणों को इस प्रदर्शनी के माध्यम से पहली बार देखने को मिल रहा है। गांधी जी की विशाल पेंटिंग देखकर ऐसा लग रहा है जैसे कि वह हम सभी को देख रहे हों। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक बार गांधीजी की जीवनी पढ़नी चाहिए। यह उनके जीवन जीने का नजरिए को ही बदल देगा।<br /> <br /> प्रदर्शनी में गांधी जी की कैनवस पर बनी विश्व की सबसे बड़ी स्टैंडिंग पेंटिंग भी प्रदर्शित की गई है। यह 6 बाय 11 फीट की पेंटिंग है जिसे तैयार होने में 6 महीने लगे। इस पेंटिंग को कलाकार एवं एसोसिएट प्रोफेसर, वनस्थली विद्यापीठ, अन्नपूर्णा शुक्ला ने बनाया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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