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                <title>question - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>'क्या आप इंटरव्यू के लिए उपलब्ध हैं?' पीएम मोदी से सवाल पूछने वाली नॉर्वे की पत्रकार ने राहुल गांधी से मांगा इंटरव्यू</title>
                                    <description><![CDATA[पीएम मोदी की नॉर्वे यात्रा के दौरान प्रेस स्वतंत्रता को लेकर शुरू हुई बहस अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। राहुल गांधी द्वारा पीएम मोदी पर सवालों से बचने का आरोप लगाने के बाद, नॉर्वेजियन पत्रकार हेली लिंग ने राहुल गांधी को सीधे फोन इंटरव्यू का चैलेंज दे दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/are-you-available-for-an-interview-the-norwegian-journalist-who/article-154384"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi9.png" alt=""></a><br /><p>नार्वे। राहुल गांधी और नॉर्वे की पत्रकार हेली लिंग के बीच सोशल मीडिया पर हुई बातचीत चर्चा का विषय बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नॉर्वे यात्रा के दौरान हेली लिंग ने उनसे सवाल पूछने की कोशिश की थी। इस घटना का वीडियो उन्होंने एक्स पर साझा करते हुए भारत में प्रेस स्वतंत्रता को लेकर टिप्पणी की थी।</p>
<p>इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर सवालों से बचने का आरोप लगाया। इसके बाद हेली लिंग ने राहुल गांधी की पोस्ट पर जवाब देते हुए पूछा कि क्या वे मंगलवार को फोन इंटरव्यू के लिए उपलब्ध होंगे। पत्रकार ने कहा कि वह नॉर्वे यात्रा को लेकर राहुल गांधी का नजरिया जानना चाहती हैं। हेली लिंग ने अपनी पोस्ट में नॉर्वे और भारत की प्रेस फ्रीडम रैंकिंग का भी जिक्र किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 18:32:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>सारी बातें काल्पनिक: रेलवे के निजीकरण का कोई प्रश्न नहीं : वैष्णव</title>
                                    <description><![CDATA[रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया कि रेलवे के निजीकरण का कोई प्रश्न ही नहीं है और इस बारे में कही गई सारी बातें ‘काल्पनिक’ हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/everything-is-fictional--no-question-of-privatization-of-railways--railway-minister-ashwini-vaishnav/article-6285"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/ashvini-veshnav_rail-mantri.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया कि रेलवे के निजीकरण का कोई प्रश्न ही नहीं है और इस बारे में कही गई सारी बातें ‘काल्पनिक’ हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की दृष्टि में रणनीतिक क्षेत्र के रूप में रेलवे की सामाजिक जवाबदेही है जिसे वाणिज्यिक व्यवहार्यता पर ध्यान देते हुए पूरा किया जा रहा है। वैष्णव ने कहा कि रेलवे का निजीकरण नहीं हो सकता है क्योंकि पटरियां रेलवे की हैं, इंजन रेलवे के हैं, स्टेशन और बिजली के तार रेलवे के हैं। इसके अलावा डिब्बे और सिग्नल प्रणाली भी रेलवे की ही हैं।</p>
<p><br />रेल मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए रेल मंत्री ने वैष्णव ने कहा कि उनके पूर्ववर्ती पीयूष गोयल भी पहले स्पष्ट कर चुके हैं कि रेलवे का ढांचा जटिल है और इसका निजीकरण नहीं होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मालगाड़ियों का भी निजीकरण नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी का बचपन रेल से जुड़ाव है, वो रेल को भलीभांति समझते हैं। तकनीकी तौर पर, एक साधारण मानवीय दृष्ठिकोण से, एक पैसेंजर के दृष्टिकोण से देश का भविष्य कैसे बदल सकता है उस दृष्टिकोण से अपना दूरगामी विचार बहुत डिटेल में शेयर किया। सबका साथ सबका विकास उनका मूलमंत्र रहता है और आत्मनिर्भर भारत की कल्पना उनके कार्यक्रम की मूल में रहती है। अंत्योदय और आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना से जुड़ा यह बजट है। उन्होंने कहा कि रेलवे का शेयर लगातार गिरता जा रहा था और उसके कारण देश का भी नुकसान हो रहा था। इकोनॉमी का लॉस बढ़ता जा रहा था, रेलवे में डीजल का बिल बढ़ता जा रहा था। <br /><br />जब नेतृत्व संभाला तो सबसे पहले सफाई पर ध्यान दिया। स्टेशन की, ट्रेन की सबकी सफाई की, एक परिवर्तन आता है, उसके बाद में जितने फील्ड आॅफिस थे हमारे, बहुत सारी पॉवर नीचे डेलीगेट किए गए, आज 90 फीसदी टेंडर्स फील्ड आॅफिस में डिसाइड होते हैं, रेलवे बोर्ड में नहीं आते। उन्होंने कहा कि बजट में भारत की विविधिता को ध्यान में रखते हुए वन नेशन वन प्रोडक्ट का कॉन्सेप्ट अनाउंस किया गया है, बहुत जल्द पायलट प्रोजेक्ट पर काम शुरू होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Mar 2022 10:35:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>तीन साल में  5793  दुष्कर्म के मामले दर्ज, केवल 129 प्रकरणों में हुई 398 आरोपियों को न्यायालय से सजा</title>
                                    <description><![CDATA[नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया की ओर से उठाए गए इस सवाल के जवाब में संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि एक जनवरी 2019 से 31 जनवरी 2022 तक कुल प्रकरण 5793 दर्ज हुए हैं। इनमें 129 मामलों में न्यायालय की ओर से 398 आरोपियों को सजा सुनाई गई है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/5793-rape-cases-registered-in-three-years--in-only-129-cases--398-accused-were-punished-by-the-court--women-and-child-development-minister-mamta-bhupesh-protested-on-this-question-on-women-s-day/article-5686"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/kat.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य विधानसभा में मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान प्रदेश में नाबालिग एवं छोटी बच्चियों के साथ दुष्कर्म/बलात्कार के मामलों को लेकर विपक्ष में सरकार को घेरने की कोशिश की। नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया की ओर से उठाए गए इस सवाल के जवाब में संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि एक जनवरी 2019 से 31 जनवरी 2022 तक कुल प्रकरण 5793 दर्ज हुए हैं। इनमें 129 मामलों में न्यायालय की ओर से 398 आरोपियों को सजा सुनाई गई है।<br /><br />हालांकि महिला एवं बाल विकास मंत्री ममता भूपेश ने सदन की कार्रवाई शुरू होते ही कहा कि आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है, ऐसे में महिलाओं अत्याचार से जुड़े सवाल को स्थगित किया जाए। स्पीकर सीपी जोशी ने उन्हें अनुमति नहीं दी और प्रश्नकाल शुरू कर दिया। पहला सवाल नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने हंसते हुए कहा कि प्रदेश में 3 साल में जो दुष्कर्म के मामले दर्ज हुए हैं उनमें केवल 129 मामलों में ही पोक्सो कोर्ट की ओर से आरोपियों को सजा दी गई है ऐसे में यहां तो पोक्सो कोर्ट में आरोपियों के खिलाफ चालान समय पर पेश नहीं हो पाया या इन औरतों की ओर से निर्धारित समय में आरोपियों को सजा नहीं देगी जवाब में संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि प्रदेश में नाबालिग एवं छोटी बच्चियों के साथ दुष्कर्म/बलात्कार के मामलों में वर्ष 2019 से 31 जनवरी 2022 तक कुल 6628 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें से  कुल 129 प्रकरणों में 398 आरोपियों को न्यायालय से सजा हुई। कुल 4631 प्रकरणों में न्यायालय में चालान पेश किया तथा  283 प्रकरणों में चालान पेश किया जाना शेष है। पुलिस मुख्यालय की ओर से समय-समय पर आदेश निर्देश परिपत्र जारी किये गये हैं। ऐसे अपराधों को रोकने के लिए किए सरकार की ओर से कई कदम उठाए जा रहे है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Mar 2022 13:09:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>प्रश्नकाल समाप्त होते ही सदन में हंगामा</title>
                                    <description><![CDATA[ सदन में प्रश्नकाल के समाप्त होते ही महिला बाल विकास मंत्री ममता भूपेश ने कहा कि विपक्ष के माननीय सदस्य की ओर से महिलाओं को लेकर अशोभनीय बयान दिया गया है, वे सदन से माफी मांगे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/uproar-in-the-house-as-soon-as-question-hour-ends--house-proceedings-adjourned-for-half-an-hour/article-4909"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/vidhan-sabha21.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। विधानसभा में गुरुवार को प्रश्नकाल शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हुआ, लेकिन उसके बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया।  हंगामे के चलते स्पीकर में सदन की कार्रवाई आधा घंटे के लिए स्थगित कर दी। </p>
<p><br />हुआ यूं कि सदन में प्रश्नकाल के समाप्त होते ही महिला बाल विकास मंत्री ममता भूपेश ने कहा कि विपक्ष के माननीय सदस्य की ओर से महिलाओं को लेकर अशोभनीय बयान दिया गया है, वे सदन से माफी मांगे। उसके साथ ही सत्ता पक्ष की सभी महिलाएं हाथों में तख्तियां लेकर अपनी सीटों पर खड़ी हो गई, जवाब में विपक्ष के सदस्य भी रीट की सीबीआई से जांच की मांग को लेकर खड़े हों गए। इसके चलते सदन में दोनों उससे शोर-शराबा शुरू हो गया । ममता भूपेश हाथ में महिलाओं का अपमान नहीं सहेगा राजस्थान लिखी तख्ती  लेकर वेल में आ गई, इसके साथ ही  अन्य सत्ता पक्ष की महिलाएं भी वेल में आ गई, तो विपक्ष के सदस्य भी वेल में आ गए  और  शोर-शराबे और हंगामे के चलते  स्पीकर सीपी जोशी ने सदन की कार्रवाई आधा घंटे के लिए स्थगित कर दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Feb 2022 12:32:34 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title> फिर सवालों के घेरे में पुलिस, पीड़िता को बयान बदलने के लिए पांच लाख का ऑफर</title>
                                    <description><![CDATA[पानरवा थाने की डैया चौकी पर विवाहिता से दुष्कर्म के प्रयास का मामला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/%E0%A4%AB%E0%A4%BF%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%98%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%B8--%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A5%9C%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AC%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%AC%E0%A4%A6%E0%A4%B2%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%9A-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%96-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%91%E0%A4%AB%E0%A4%B0/article-3662"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/29-udi-125.jpg" alt=""></a><br /><p>उदयपुर। जिले के पानरवा थाना क्षेत्र की डैया चौकी पर गत दिनों विवाहिता से दुष्कर्म का प्रयास, उससे जूठे बर्तन मंजवाने और झाडू-पौंछा लगवाने के मामले में उदयपुर पुलिस एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। बताया गया कि मंगलवार रात को बावलवाड़ा थानाधिकारी व तीन कांस्टेबल कार लेकर पीड़िता के परिजनों के घर पहुंचे और पीड़िता की ओर से बुधवार को न्यायालय में होने वाले धारा 164 के बयानों को बदलने का दबाव बनाया। इस दौरान दो से पांच लाख रुपए की पेशकश भी की गई। </p>
<p><br />पीड़िता सहित परिजनों की ओर से मामले को लेकर प्रदेश के डीजीपी को पत्र लिखा गया है। इसमें बताया कि पुलिसकर्मी के खिलाफ मामला दर्ज करवाने और शिकायत करवाने के बाद से स्थानीय पुलिस लगातार परेशान कर रही है। मंगलवार शाम को पानरवा के पूर्व थानाधिकारी सकाराम अपने थाने के तीन कांस्टेबल के साथ झेर गांव पहुंचे और बयान बदलने का दबाव बनाया। इस दौरान उन्होंने एसपी और एएसपी की नौकरी बचाने का हवाला दिया और समझौते की एवज में 2 से 5 लाख रुपए देने की भी बात कही। उन्होंने बताया कि एसआई सकाराम के साथ पानरवा थाने के हेड कांस्टेबल मोटाराम, मुकेश कुमार और मगललाल मौजूद थे। सभी लोग गुजरात नंबर की एक गाड़ी लेकर उनके गांव आए और उसके बाद कांस्टेबल के पक्ष में बयान देने की बात कही। पीड़ित परिवार का यह भी आरोप है कि आरोपी कांस्टेबल जितेंद्र कुमार मीडिया सहित कई लोगों को वीडियो दिखाकर उनकी पहचान को सार्वजनिक कर उसकी बदनामी कर रहा है।इस मामले पर एसआई सकराम से पूछे जाने पर कहा कि वे मंगलवार को छुट्टी पर था। मैंने किसी परिवार से मुलाकाम नहीं की। वे झेर गांव में अपने रिश्तेदारों से मिलने गए थे। डैया चौकी में कांस्टेबल जितेंद्र कुमार पर दुष्कर्म के प्रयास आरोप में पहले दिन से पुलिस आरोपों के घेरे में रही है। <br /><br />बुधवार को ट्यूर पर था। पीड़ित पक्ष की ओर से परिवाद मेरे कार्यालय में पेश किया गया है। गुरुवार को परिवाद की जांच कर अगली कार्रवाई की जाएगी। - <strong>हिंगलाज दान, आईजी उदयपुर रेंज</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>उदयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Dec 2021 15:46:20 +0530</pubDate>
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                <title>रीट : लेवल-2 के संशोधित परिणाम से बहुत कम परीक्षार्थी होंगे प्रभावित</title>
                                    <description><![CDATA[बोर्ड अध्यक्ष का दावा, परीक्षा पूरी पारदर्शिता से हुई थी, एक प्रश्न का ही विकल्प बदलेगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/61a5dabba8e24/article-2844"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/dp-jaroli_reet.jpg" alt=""></a><br /><p>अजमेर। रीट के मुख्य समन्वयक और राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. डी.पी. जारोली ने कहा है कि हमने रीट का आयोजन पूरी पारदर्शिता के साथ किया है। डॉ. जारोली सोमवार को पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 26 सितम्बर को सम्पन्न हुई रीट परीक्षा लेवल-2 की अंग्रेजी विषय के प्रश्न पत्र की ख सीरीज के केवल एक प्रश्न संख्या 74 के संबंध में विषय विशेषज्ञों ने दो विकल्पों को सही माना। इसके आधार पर पूर्व के सही उत्तर ए और सी के स्थान पर बी व सी को सही माना गया है। संशोधित परिणाम इसी के आधार पर जारी किया गया है। उन्होंने बताया प्रश्न पुस्तिका की ख सीरीज का प्रश्न संख्या 74,  ‘सीरीज का प्रश्न संख्या 81, छ सीरीज का प्रश्न संख्या 72 तथा ट सीरीज का प्रश्न संख्या 65 समान था।</p>
<p><br /> उन्होंने बताया कि केवल रीट परीक्षा का लेवल-2 की मूल परीक्षा का संशोधित परिणाम जारी किया जाएगा। लेवल-1 का संशोधित परिणाम जारी नहीं किया जाएगा। वहीं 16 अक्टूबर को अलवर में आयोजित लेवल-2 का परीक्षा परिणाम भी यथावत रहेगा। <br /> <br /> <strong>क्या है मामला </strong><br /> 2 नवम्बर को जारी रीट परीक्षा के परिणाम में लेवल-2 के स्तर पर 6 प्रश्नों में बोनस और 7 प्रश्नों में दो विकल्पों को सही मानते हुए परीक्षा परिणााम घोषित किया गया था। कुछ परीक्षार्थियों की आपत्ति के आधार पर अंग्रेजी विषय में एक प्रश्न में दो विकल्पों को सही माना गया। इसके आधार पर संशोधित परीक्षा परिणाम, जिसमें भी 6 प्रश्नों में बोनस यथावत है तथा 7 प्रश्नों में दो विकल्प सही माने है, उसमें एक के दो विकल्प में से एक विकल्प परिवर्तित हुआ है। इसके अनुसार परीक्षा परिणाम जारी करने का निर्णय लिया गया है। इसमें बहुत कम यानि नहीं के बराबर न्यून परीक्षार्थी केवल एक अंक से प्रभावित होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Nov 2021 14:20:17 +0530</pubDate>
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                <title>आंदोलन पर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने किसान आंदोलन के दौरान रास्ते जाम बनाए रखने के मुद्दे पर गहरी नाराजगी और चिंता व्यक्त की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/%E0%A4%86%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2/article-1426"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/suprim-court.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>सुप्रीम कोर्ट </strong>ने किसान आंदोलन के दौरान रास्ते जाम बनाए रखने के मुद्दे पर गहरी नाराजगी और चिंता व्यक्त की है, जो स्वाभाविक और उचित है। साथ ही अदालत ने केन्द्र व राज्यों की सरकारों के प्रति भी नाराजगी व्यक्त की है। सुप्रीम कोर्ट किसानों के संगठन किसान महापंचायत और उसके अध्यक्ष की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘सत्याग्र्रह’ करने की अनुमति मांगी गई है और इसके बारे में अधिकारियों को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। दो सदस्यीय पीठ के न्यायाधीशों ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि आम लोगों ने पहले से ही पूरे दिल्ली शहर को पंगु बना रखा है और शहर के भीतर आकर क्या करने का इरादा है? अदालत ने कहा कि आपको विरोध का अधिकार है, लेकिन नागरिकों को भी स्वतंत्र रूप से और बिना किसी भय के आने-जाने का समान अधिकार है। रास्तों को अवरुद्ध करने का अधिकार तो किसी को भी नहीं होना चाहिए। कई महीनों से आम नागरिकों को इसका नतीजा भुगतना पड़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र व राज्य सरकारों को रास्ते खुलवाने का निर्देश पहले ही दे चुकी हैं, लेकिन सरकारें कोई प्रयास नहीं कर रही हैं। सरकारें दोष मढ़ने के अलावा कोई सार्थक प्रयास नहीं कर रही है। सरकारें कह रही हैं कि किसान बातचीत करने को तैयार नहीं हैं। सरकारों के इस रुख से भी अदालत खासा नाराज है। ज्ञातव्य है कि किसानों ने पिछले दस महीनों से सीमाओं के रास्ते जाम कर रखे हैं और सड़कों पर अपने ठिकाने बना लिए यह स्थिति लगातार आज तक बनी हुई है। आम नागरिकों, नौकरीपेशा लोगों व राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में स्थित छोटे-बड़े उद्योगों को इसका भारी खामियाजा उठाना पड़ रहा है। काफी लंबे रास्तों को पार पर आवाजाही करनी पड़ रही है। किसान आंदोलन से काफी लोग प्रभावित हैं, लेकिन किसान और सरकारें कोई सकारात्मक रुख दिखाने की जरूरत ही नहीं समझ रहे हैं। दोनों पक्षों ने अड़ियल रुख अपना रखा है। अदालत ने किसान संगठनों से पूछा है कि जब कृषि कानूनों को चुनौती देने के लिए आपने पहले याचिका दायर कर रखी है तो इस आंदोलन को जारी रखने का क्या औचित्य है? किसानों को फैसले का इंतजार करना चाहिए। रास्ते बंद रखने का काफी गंभीर मामला है। किसानों और सरकारों को इस पर गंभीरता से सोचना होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Oct 2021 19:09:38 +0530</pubDate>
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