<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/cait/tag-51336" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>CAIT - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/51336/rss</link>
                <description>CAIT RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>देश में होली पर 80 हजार करोड़ के कारोबार का अनुमान : राजस्थान में 5 हजार करोड़ के व्यापार की संभावना, जयपुर में बाजारों में उमड़ी भीड़</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[होली पर देश में 80 हजार करोड़ से अधिक के व्यापार का अनुमान। राजस्थान का 5 हजार करोड़ तक पहुंचने की संभावना। जयपुर के बाजारों में उमड़ी भीड़। पहली बार बाजार में आई इलेक्ट्रिक पिचकारी। प्रमुख बाजार रंग-बिरंगे गुलाल, आकर्षक पिचकारियों, होली टी-शर्ट और सजावटी सामान से सजे।
]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/amidst-the-national-business-of-rs-80-thousand-crores-holi/article-144416"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/holi-2026.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। Confederation of All India Traders (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री एवं सांसद Praveen Khandelwal के अनुसार इस वर्ष देशभर में होली पर 80 हजार करोड़ रुपये से अधिक के व्यापार का अनुमान है। इसी कड़ी में राजस्थान का बाजार आकार लगभग 5 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।</p>
<p><strong>जयपुर के थोक–खुदरा बाजारों में उमड़ी भीड़</strong></p>
<p>जयपुर के नाहरगढ़ रोड, जौहरी बाजार, चांदपोल, किशनपोल और बापू बाजार, बड़ी चौपड़, छोटी चौपड़ सहित प्रमुख बाजार रंग-बिरंगे गुलाल, आकर्षक पिचकारियों, होली टी-शर्ट और सजावटी सामान से सजे हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार पिछले वर्ष की तुलना में इस बार बिक्री में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी जा रही है।</p>
<p>कैट के अनुसार “वोकल फॉर लोकल” के प्रभाव से स्वदेशी उत्पादों—हर्बल गुलाल, प्राकृतिक रंग, पूजन सामग्री, परिधान और खिलौनों—की मांग बढ़ी है। खास बात यह है कि इस बार पिचकारियों पर जीएसटी 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किए जाने से कीमतों में कमी आई है, जिसका सीधा लाभ ग्राहकों को मिल रहा है।</p>
<p><strong>पहली बार आई इलेक्ट्रिक पिचकारी, कीमत 220 से 2000 रुपए</strong></p>
<p>महेश टॉयज के डायरेक्टर दिनेश जसोरिया ने बताया कि इस बार बाजार में पहली बार इलेक्ट्रिक पिचकारी आई है, जिसकी कीमत 220 से 2000 रुपए प्रति नग तक है। इसके अलावा सामान्य पिचकारी 20 से 1500 रुपए प्रति नग में उपलब्ध है।</p>
<p>कैप: 10 से 50 रुपए प्रति नग<br />होली टी-शर्ट: 40 से 100 रुपए प्रति नग<br />वाटर पंप: 20 से 150 रुपए प्रति नग<br />बैलून: 5 से 80 रुपए प्रति पैकेट<br />गुलाल (पैकेट): 20 से 100 रुपए</p>
<p><strong>6 लीटर गुलाल सिलेंडर (दस नग पैक): 800 से 900 रुपए</strong></p>
<p>व्यापारियों का कहना है कि जीएसटी में कमी और स्थानीय उत्पादन बढ़ने से इस वर्ष कई उत्पादों की कीमतें पहली बार कम हुई हैं, जिससे ग्राहकों की खरीदारी बढ़ी है।</p>
<p><strong>मिठाइयों और गिफ्ट आइटम की भी जोरदार मांग</strong></p>
<p>होली से जुड़े सामान के अलावा मिठाइयों, ड्राई फ्रूट्स, गिफ्ट पैक, कपड़े, फर्निशिंग, किराना और एफएमसीजी उत्पादों की बिक्री भी तेज है। विशेष रूप से गुजिया की मांग में भारी उछाल देखा जा रहा है। व्यापारिक संगठनों के अनुसार होली मिलन समारोहों की बढ़ती संख्या से होटल, बैंक्वेट हॉल और रेस्टोरेंट्स की बुकिंग भी लगभग पूरी हो चुकी है।</p>
<p><strong>स्वदेशी व्यापार को मिलेगा बल</strong></p>
<p>व्यापार जगत का मानना है कि इस वर्ष की होली राजस्थान के व्यापारियों, खुदरा विक्रेताओं, लघु उद्योगों और एमएसएमई क्षेत्र के लिए लाभकारी सिद्ध होगी। त्योहार केवल सामाजिक उत्सव नहीं, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को गति देने का माध्यम भी है—और इस बार जयपुर सहित पूरे राजस्थान में इसका स्पष्ट प्रभाव दिखाई दे रहा है।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/amidst-the-national-business-of-rs-80-thousand-crores-holi/article-144416</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/amidst-the-national-business-of-rs-80-thousand-crores-holi/article-144416</guid>
                <pubDate>Tue, 24 Feb 2026 18:14:01 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-02/holi-2026.png"                         length="1097896"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेजन और फ्लिपकार्ट के खिलाफ कार्रवाई की मांग</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[पत्र में अमेजन और फ्लिपकार्ट द्वारा भारत के खुदरा इकोसिस्टम पर पड़ रहे गंभीर प्रभावों और नियमों के उल्लंघन का विवरण दिया गया है।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/demand-for-action-against-amazon-and-flipkart/article-92119"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/4427rtrer-(9).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) की हालिया रिपोर्ट के मद्देनजर, कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) और ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (एमरा) ने एक श्वेत पत्र जारी किया है। इस पत्र में अमेजन और फ्लिपकार्ट द्वारा भारत के खुदरा इकोसिस्टम पर पड़ रहे गंभीर प्रभावों और नियमों के उल्लंघन का विवरण दिया गया है।</p>
<p>श्वेत पत्र में इन कंपनियों द्वारा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति और अन्य ई-कॉमर्स नियमों का उल्लंघन स्पष्ट रूप से सामने आया है। कैट राजस्थान के अध्यक्ष सुभाष गोयल ने बताया कि छोटे व्यापारियों के हितों को ध्यान रखते हुए केन्द्र सरकार को फैसला करना चाहिए । ऑनलाइन शॉपिंग के अनावश्यक ऑफर्स से खुदरा व्यापार को गहरा धक्का लगा है।</p>
<p><strong>श्वेत पत्र की मुख्य सिफारिशें</strong><br />सांसद और कैट के राष्ट्रीय महामंत्री ने मोबाइल व्यापारियों को संबोधित करते हुए कहा कि ई-कॉमर्स कंपनियों के अनैतिक व्यापारिक तौर-तरीके घरेलू व्यापार के लिए हानिकारक हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण के खिलाफ हैं। उन्होंने सभी व्यापारियों से इन कंपनियों के खिलाफ एकजुट होकर विरोध करने का आह्वान किया।</p>
<p><strong>केंद्रीय मंत्रियों का समर्थन</strong><br />उन्होंने बताया कि केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी इन कंपनियों को अपने निहित स्वार्थ छोड़ने और देश के खुदरा व्यापार में निष्पक्षता बनाए रखने की चेतावनी दी है। सीसीआई की रिपोर्ट ने कैट द्वारा उठाए गए 4 साल पुराने मुद्दों की पुष्टि की है और अब कानून के तहत इन कंपनियों पर कार्रवाई आवश्यक है।</p>
<p><strong>श्वेत पत्र की मुख्य सिफारिशें</strong><br />कैट और एमरा ने अपने श्वेत पत्र में ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए सख्त नियम लागू करने और तत्काल कार्रवाई की मांग की है। इसमें निम्नलिखित सिफारिशें शामिल हैं।</p>
<ol>
<li>ई-कॉमर्स नियमों का लागू होना: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत ई-कॉमर्स नियमों को तुरंत लागू किया जाए।</li>
<li>ऑपरेशनों का निलंबन: अमेजन और फ्लिपकार्ट के व्यापारिक संचालन को निलंबित किया जाए और उन्हें तभी बहाल किया जाए जब वे एफडीआई नियमों और कानूनों का पालन करें।</li>
<li>मजबूत नीतिगत ढांचा: नियामक खामियों को दूर करने के लिए एक मजबूत नीतिगत ढांचे की आवश्यकता है।</li>
<li>फास्ट ट्रैक शिकायत प्रणाली: उपभोक्ता शिकायतों को हल करने के लिए एक लोकपाल द्वारा संचालित फास्ट ट्रैक प्रणाली स्थापित की जाए।</li>
<li>जीएसटी इनपुट क्रेडिट छूट: बी2सी ई-कॉमर्स लेनदेन के लिए जीएसटी इनपुट क्रेडिट पर छूट दी जाए।</li>
<li>अनन्य कैशबैक पर प्रतिबंध: प्रतिस्पर्धा विरोधी कैशबैक और ग्रे मार्केट ऑपरेशनों को रोकने के लिए कैशबैक ऑफर्स पर प्रतिबंध लगाया जाए।</li>
<li>विलासिता कर: ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों के माध्यम से बेचे जाने वाले उच्च श्रेणी के उत्पादों पर विलासिता कर लगाया जाए।</li>
</ol>
<p><strong>खुदरा इकोसिस्टम को गंभीर नुकसान</strong><br />कैट और एमरा ने स्पष्ट किया है कि अमेजन और फ्लिपकार्ट के व्यापारिक तरीकों ने भारत के खुदरा इकोसिस्टम को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने सरकार से अपील की है कि वह जल्द से जल्द हस्तक्षेप करे और भारतीय खुदरा विक्रेताओं के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए।</p>
<p><strong>विकलांग नहीं स्मार्ट बनें!</strong><br />अमेरिका में ऑनलाइन शॉपिंग विकलांगों के लिए शुरू हुई थी और भारत में यह आपको विकलांग बनाने के लिए इसलिए इस दिवाली कृपया घर से निकलें अपने नजदीकी बाजार में जाकर सामान खरीदें।</p>
<p><strong>दिवाली हमारा त्योहार है: अमेजन-फ्लिपकार्ट का नहीं!</strong><br />यह संदेश अखिल राजस्थान व्यापार और उद्योग संघ (आरतिया) की ओर से स्थानीय बाजार को प्रोत्साहित करने और दिवाली के अवसर पर ऑनलाइन शॉपिंग के बजाय स्थानीय बाजारों से खरीदारी करने की अपील के रूप में जारी किया गया है। आपकी नजदीकी बाजार से सामान खरीदना न केवल छोटे व्यापारियों का समर्थन करता है, बल्कि भारत के पारंपरिक उत्सवों की सच्ची भावना को भी बनाए रखता है।<br />  </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/business/demand-for-action-against-amazon-and-flipkart/article-92119</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/business/demand-for-action-against-amazon-and-flipkart/article-92119</guid>
                <pubDate>Wed, 02 Oct 2024 11:46:21 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-10/4427rtrer-%289%29.png"                         length="475518"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur ]]>
                    </dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        