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                <title>movement - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>चीता की गति सीमा पार : एमपी के कूनो से भटक कर इटावा क्षेत्र में पहुंचा चीता शावक, वन विभाग सतर्क</title>
                                    <description><![CDATA[मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से भटका चीता शावक राजस्थान के इटावा क्षेत्र में पहुंचा, हड़कंप मचा। बम्बूलिया से सूखनी सायफन तक उसका मूवमेंट बना हुआ। वन विभाग लगातार निगरानी कर रहा। शावक एक माह से सीमा क्षेत्र में सक्रिय और हाल में शिकार के कोई संकेत नहीं मिले।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/cheetahs-speed-crossed-the-border-the-cheetah-cub-strayed-from/article-147279"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(5)16.png" alt=""></a><br /><p>इटावा। मध्यप्रदेश स्थित कूनो सेंचुरी से भटककर एक चीता शावक राजस्थान के इटावा क्षेत्र में पहुंच गया, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। लक्ष्मीपुरा पंचायत के बम्बूलिया गांव में खेतों में चीता नजर आने की सूचना पर वन विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और ट्रैकिंग शुरू की। जानकारी के अनुसार शावक बम्बूलिया से शहनावदा होते इटावा नगर के समीप सूखनी सायफन के पास देखा गया। वर्तमान में उसका मूवमेंट इसी क्षेत्र में बना हुआ है और वन विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। शावक ने लगभग एक किलोमीटर के दायरे में अपना क्षेत्र बना रखा है।</p>
<p><strong>एक माह से बना हुआ है मूवमेंट- </strong>कूनो सेंचुरी की टीम के अनुसार यह शावक करीब एक माह पूर्व भटककर राजस्थान के केलवाड़ा क्षेत्र में पहुंचा था और तब से इसका मूवमेंट राजस्थान-मध्यप्रदेश की सीमा के आसपास बना हुआ है। पिछले दो से तीन दिन में इसने कोई शिकार नहीं किया है और ट्रैकिंग के दौरान शिकार के संकेत भी नहीं मिले हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 11:33:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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                <title>नक्सल आंदोलन के दिन अब गिने-चुने</title>
                                    <description><![CDATA[नक्सल आंदोलन का अस्तित्व अब समाप्त होने के कगार पर है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/the-days-of-naxalite-movement-are-now-few/article-116654"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer37.png" alt=""></a><br /><p>नक्सल आंदोलन का अस्तित्व अब समाप्त होने के कगार पर है। क्रांतिकारी बदलाव लाने के विलुप्त हो चुके अतीत को सिर्फ हिंसा, लूट, आतंक की बदौलत घसीट रहे यह माओवादी खुद को तथाकथित आंदोलन चलानेवाले कहते हैं। मई, 2025 का अंतिम सप्ताह सरकार और समाज की भाषा में नक्सल उग्रवाद के इतिहास का अंतिम अध्याय के रूप में याद किया जाएगा। 58 साल पहले मई महीने के अंतिम सप्ताह में ही पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी से इस आंदोलन की शुरूआत हुई थी। 25 मई, 1967 को पश्चिम बंगाल के हाथीघीसा गांव में आदिवासियों की जमीन हड़प कर उनका शोषण करनेवाले जमीन्दारों के समर्थन में पहुंची, पुलिस टीम पर आदिवासी महिलाओं ने अपनी जीविका बचाने के हमला किया था। उसके जवाब में हुई पुलिस फायरिंग में 11 लोग मारे गए। पुलिस टीम पर पहला तीर शांति मुंडा ने अपने दुधमुंहे बच्चे को पीठ से बांधे रखकर चलाया था। उस घटना को नक्सल आंदोलन का उदय माना जाता है। नक्सल सफाया अभियान के तहत केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशन में चल रहे संयुक्त सुरक्षा बल के ऑपरेशनों से अब यह वाम उग्रवाद अस्त होने की हालत में पहुंच गया है।पुलिस बलों ने बचे-खुचे नक्सलियों की ये नौबत ला दी है कि सरेंडर करने या जान गंवाने के सिवाए दूसरा चारा नहीं रह गया है। 21.4.2025 से ऑपरेशन संकल्प अभियान 21 दिनों का लक्ष्य लेकर चलाया गया। इस दौरान पुलिस बलों ने बिना सुस्ताए और नक्सलियों को संभलने का मौका दिए बिना नक्सली ठिकानों पर हमला जारी रखा। </p>
<p>मई समाप्त होने से पहले नक्सलियों के सबसे मजबूत गढ़ बस्तर क्षेत्र के ठिकाने ध्वस्त करने में भारी सफलता मिली। ये जगह थी छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर कर्रेगट्टालू पहाड़ी जहां लगातार हुई गोलीबारी में 31 नक्सली मारे गए। केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल स्टेट पुलिस बल खुफिया एजेंसियां, कोबरा बटालियन, सीमा सुरक्षा बल और भारतीय वायु सेना द्वारा संयुक्त रूप से चलाए गए इस अभियान को सीआरपीएफ डायरेक्टर जनरल ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह ने नक्सलवाद की समाप्ति की शुरूआत बताया। इस 21 दिनों के ऑपरेशन संकल्प काल में नक्सलियों के सबसे संगठित गुट सीपीआई समेत विभिन्न प्रतिबंधित जमातों का पुलिस के सामने सरेंडर का भी सिलसिला जारी रहा। प्रतिबंधित सीपीआई का सबसे बड़ा नेता और शीर्ष कमांडर नम्बाला केशव राव का मारा जाना सुरक्षा बलों की सबसे बड़ी उपलब्धि रही। इससे यह संगठन नेतृत्वविहीन हो गया और सारे नक्सल गुट बिखर गए हैं। तेलंगाना-छत्तीसगढ़ सीमा पर सबसे ज्यादा दबदबा और दबंग हैसियत वाला माओवादी नेता था। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लाल आतंक वाले पहाड़ पर तिरंगा लहराना नक्सल मुक्त भारत की दिशा में बड़ी सफलता बताया। इससे देश का सबसे बड़ा नक्सल गढ़ ध्वस्त हो गया।</p>
<p>सीआरपीएफ डीजी ने नक्सलियों पर काबू पाने के अब तक के अभियानों में इसे सबसे सफल बताया और कहा कि गृह मंत्री अमित शाह के 31 मार्च, 2026 तक नक्सल सफाया डेडलाईन से पहले ही यह लक्ष्य पूरा होते दिख रहा है । 24 हजार जवान इस अभियान में शामिल हैं और मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ के बीजापुर, नारायणपुर तथा उससे सटे तेलंगाना के भद्राद्री-मुलुगू-कोठागुडेम के 800 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले दुर्गम घने जंगल वाले पहाड़ी इलाकों की चारों ओर से घेराबंदी करके नक्सली किले को ठहाया गया। सीआरपीएफ अधिकारी के अनुसार यह बरसात तक बिना ढील दिए चलाया जाएगा। क्योंकि बाढ़ में नदियों के उफनने से दूरदराज के बीहड़ वाले नक्सली ठिकानों तक पहुंचना कठिन हो जाने के कारण सुरक्षा बल लाचार हो जाते हैं। इसका फायदा उठाकर नक्सलियों को नई मोर्चाबंदी का अवसर मिल जाता है। इस बार तकनीकी खुफिया सूचनाओं के आधार पर ऐसा इंतजाम लगाया गया है कि इन्द्रावती नदी के कम जलप्लावन वाले किनारे के आसपास ऊंचे कैंप बनाए जाएं, जहां से नक्सली बीहड़ों को निशना बनाया जा सके। </p>
<p>सीआरपी सूत्रों को अंदेशा है कि माओवादी गुट और पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी के इधर-उधर बिखरे नक्सली अपनी बौखलाहट उतार सकते हैं । इन कैंपों का संचालन एलीट कोबरा बटालियन और सीआरपी के हाथ में होगा। झारखंड-ओडिशा सीमा के निकट मई के अंतिम सप्ताह में ही सुरक्षा बलों को कामयाबी मिली। नक्सल सफाया अभियान छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, तेलंगाना, महाराष्ट्र और बिहार के नक्सल प्रभावित जिलों में एक साथ चलाया जा रहा है। बिहार को छोड़कर बाकी सभी राज्यों के नक्सली गढ़ वाले इलाके से माओवादियों के मारे जाने और सरेंडर की खबरें आ रही हैं। इनमें छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र को सुरक्षा दस्ते ने सबसे कठिन चुनौती के रूप में पहले निशाने पर लिया था। अब तक बस्तर क्षेत्र नक्सलियों के अभेद्य दुर्ग के रूप में जाना जाता था। यहीं से अन्य नक्सल राज्यों की भी नक्सल गतिविधियों का संचालन होता था बस्तर क्षेत्र के नक्सल ऑपरेशन आईजी पी सुदंरराज ने दावा किया कि कई दशकों के बाद बस्तर आज नक्सल मुक्त क्षेत्र है और अब यह क्षेत्र सरकार की लाल सूची से बाहर है। </p>
<p>देश के 30 नक्सल प्रभावित जिलों में कोंडागांव और बस्तर टॉप पर थे। 28 मई को रायपुर में आईजी सुंदरराज ने यह जानकारी दी कि नक्सल हमलों का सबसे बड़ा मास्टरमाइंड सीपीआई माओवादी महासचिव बसवराजू समेत 27 नक्सलियों के मारे जाने के बाद मिशन निर्णायक मोड़ पर है। झारखंड से एक अच्छी खबर उस दौरान आई कि सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित जिले लातेहार और कोडरमा के छात्र-छात्राओं ने इंटर परीक्षा के परिणाम में बाजी मारी। हवा बदली है, लोगों में समाज के बीच से नक्सली खौफ खतम हो रहा है। </p>
<p><strong>-शशिधर खान</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Jun 2025 12:35:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>सफाई कर्मचारियों का आन्दोलन जारी</title>
                                    <description><![CDATA[ संयुक्त वाल्मीकि और सफाई श्रमिक संघ के बैनर तले विभिन्न मांगों को लेकर सम्पूर्ण राजस्थान में किए जा रहे आन्दोलन के आठवें दिन विभिन्न क्षेत्र में रैली व जुलूस निकालकर विरोध जताया गया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/movement-of-sanitation-workers-continues/article-86461"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/4111u1rer-(19).png" alt=""></a><br /><div>जयपुर। संयुक्त वाल्मीकि और सफाई श्रमिक संघ के बैनर तले विभिन्न मांगों को लेकर सम्पूर्ण राजस्थान में किए जा रहे आन्दोलन के आठवें दिन विभिन्न क्षेत्र में रैली व जुलूस निकालकर विरोध जताया गया। इस दौरान वीआईपी क्षेत्र सहित शहर की अन्य कॉलोनियों में कचरे के ढेर लगे रहे।</div>
<div> </div>
<div>संयुक्त वाल्मीकि और सफाई श्रमिक संघ के अध्यक्ष नंद किशोर डंडोरिया ने बताया कि जयपुर शहर में आदर्श नगर जोन में गलता गेट से रामगंज चौपड तक, सिविल लाईन जोन में पीडब्ल्यूडी चौराहा हसनपुरा से चार दरवाजा तक और मुरलीपुरा व विद्याधर नगर जोन में चौमूं पुलिया से रोड नम्बर-1 सीकर रोड तक प्रभात फेरी निकाली गई। यूनियन प्रतिनिधि मंडल की डीएलबी के निदेशक सुरेश ओला से वार्ता हुई, जो विफल रही। इस हड़तालन के कारण सिविल लाइन, विद्याधर नगर, मुरलीपुरा, झोटवाड़ा, चारदीवारी क्षेत्र, आमेर रोड सहित अन्य क्षेत्रों में कचरे के ढ़ेर लगे रहे। </div>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Aug 2024 10:34:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बूंदी में टाइगर रिजर्व से सटे इलाकों में पैंथर का मुवमेंट बढ़ा</title>
                                    <description><![CDATA[बूंदी के जंगलों की आबोहवा वन्यजीवों को रास आ रही हैं, जिसका प्रमाण वन्यजीवों की बढ़ती संख्या हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/panther-movement-increased-in-the-areas-adjacent-to-the-tiger-reserve-in-bundi/article-64728"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/bundi-k-tiger-reserve-s-sate-ilako-me-pather-ka-movement-bdha...bundi-news-21-12-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>बूंदी। एक ओर जहां बूंदी के जंगल बाघ बघेरों की दहाड से गुंजायमान हैं, वहीं दूसरी ओर रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व क्षेत्र से लगे बूंदी में पैंथर की मुवमेंट बढ़ गई है।  तीन दिन पहले रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व क्षेत्र से लगे बूंदी टनल के बाहर हाइवे पर एक पैंथर बीच ओवरब्रीज के लिंक रोड पर बैठा हुआ दिखाई दिया। जो कि जोर-जोर से दहाड़ की गूंज रही थी। जिसे देख कर वाहन चालक अचंभित होकर वहीं ठहर गए। इनमें से कुछ ने जिस पैंथर की वीडियो भी अपने मोबाइल में कैद कर ली। एक वाहन चालक द्वारा बनाई गई वीडियों में पैंथर बीच सड़क पर बैठे दहाड़ता हुआ दिखाई दे रहा हैं। साइड से एक कार और एक यात्री बस निकलती हुई और सामने से बाइक चालक भी आता नजर आ रहा हैं। जो पैंथर को देख कर कुछ देर रूकता हैं और वापस गाड़ी को घुमाता हुआ दिख रहा हैं। हालांकि जिले में पैंथर के द्वारा किसी प्रकार की जन हानि नहीं हुई हैं, लेकिन जंगलों के समीप के गांवों और क्षेत्रों में भेड़ बकरियों के शिकार की घटनाएं अमूमन होती रही है। </p>
<p><strong>बकरियों का किया था शिकार</strong><br />पिछलें दिनों भी कालदां के जंगलों में चरवाहों के डेरे में बकरी और गधे का शिकार पैंथर के द्वारा किया गया। वहीं दबलाना के पास बडगांव में पैंथर ने बकरियों का शिकार किया था। वन्य जीव प्रेमी विट्ठल सनाढ्य ने बताया कि रामगढ़ टाइगर रिजर्व बफर जोन में सुरक्षा दीवार का कार्य पूर्ण नहीं होने और अवैध गतिविधियों के चलते भी वन्यजीव बाहर आ जाते हैं। सनाढ्य ने टनल क्षेत्र में हाइवे किनारे मृत मवेशियों के डालने पर रोष जताते हुए कहा कि मृत मवेशियों की गंध भी वन्यजीवों को आकर्षित करती हैं। हमारी मांग हैं कि सुरक्षा दीवार का कार्य जल्द पूर्ण हो, ताकि वन्य जीवों को सुरक्षा मिल सके और वन विभाग को प्रशासन के साथ मिल कर हाइवे किनारे और रिजर्व क्षेत्र में मृत मवेशियों के डालने पर रोक लगवाने के प्रयास करने चाहिए।</p>
<p><strong>शुरू हुए ग्रासलैंड विकसित करने के काम</strong><br />वन्य जीवों के अनुकूल बनाने के लिए वन विभाग ने जंगल से विलायती बम्बूलों को हटाकर ग्रासलैंड विकसित करने के काम शुरू कर दिया है। विभाग ने कालदां माताजी के पास 300 बीघा में शाकाहारी वन्यजीवों के लिए ग्रासलैंड तैयार करवा रहा है। जिससमें हरिण प्रजाति के संवर्धन के लिए ग्रासलैंड विकसित होगा, साथ ही शाकाहारी वन्यजीवों के भोजन में काम आने वाली फल व पत्तियों वाले 5 हजार ऐसे पेड़ पौधे भी लगाएं जाएंगे। वहीं विभाग यहां गश्त को प्रभावी बनाने के लिए रास्ते का काम भी कर रहा है, ताकि अवैध गतिविधिये ंपर प्रतिबंध लगाया जा सकेगा।</p>
<p><strong>अव्वल दर्जे का शिकारी हैं पैंथर</strong><br />पैंथर, पैन्थरा जीनस का जाति की बड़ी बिल्ली है जो अफ्रीका और एशिया में पाया जाता है। यह बिल्ली प्रजातियों जैसे शेर, बाघ और जैगुआर की तुलना में सबसे छोटा होता है। लेकिन इनमें बहुत शक्तिशाली और चतुर जीव पैंथर की एकाग्रता तो लाजवाब होती है। शिकार को पकड़ने की तकनीक और हमला करने की शैली पैंथर को एक अव्वल दर्जे का शिकारी बनाती है। आमतौर पर ये निशाचरी होते हैं। तेंदुए 56 से 60 किमी प्रति घण्टे की रफ़्तार से दौड़ सकते हैं।</p>
<p><strong>जंगल में बढ़ी पैंथर की संख्या</strong><br />बूंदी के जंगलों की आबोहवा वन्यजीवों को रास आ रही हैं, जिसका प्रमाण वन्यजीवों की बढ़ती संख्या हैं। जिले की समृद्ध जैवविविधता व 27 प्रतिशत भूभाग वन क्षेत्र होने से यहां बाघ बघेरों सहित सभी वन्यजीव मौजूद है। अभी रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में 1 बाघ, 2 बाघिन व 3 शावकों सहित 6 बाघ मौजूद हैं, वहीं आरवीटीआर में 25-30 पैंथर व पैराफेरी क्षेत्र में 6 पैंथर मौजूद हैं। रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के सघन एवं दुर्गम जंगलों में बघेरों की संख्या तेजी से बढ़ी है। सदाबहार जलस्रोतों वाले इस जंगल में जंगली सूअर, नीलगाय व सांभर हरिणों की संख्या में भी वृद्धि हुई है लेकिन चिंकारा गायब हो गए हैं। जंगल में चिंकारा की कमी आने व पैंथर के लिए अन्य पर्याप्त प्रेबेस नहीं होने से भी वन्यजीव आए दिन भेड़ बकरियों को शिकार बनाने लगे है।</p>
<p><strong>शिकार की तलाश में आ जाते हैं जंगल से बाहर</strong><br />आरवीटीआर के उपवन संरक्षक कोर संजीव शर्मा ने बताया कि बून्दी में फैली अरावली की पहाड़ियां पैंथर के प्राकृत आवास हैं। यहां पैंथर के प्राकृतिक भोजन खुर वाले जानवर सांभर, नील गाय, कुत्ते, बिल्लियां आदि पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। वहीं भेड़ बकरियां भी इसका पसंदीदा भोजन हैं। कहीं बार पैंथर या अन्य जीव इनके चलते भी जंगल के समीपस्थ क्षेत्रों में आ जाते हैं।</p>
<p><strong>7 पैंथर हो चुके हैं दुर्घटना के शिकार</strong><br />चालू वर्ष में अलग अलग दुर्घटनाओं में 7 पैंथर काल कलवित हो चुके हैं। जिनमें से 4 पैंथर हाल ही में बरड़ क्षेत्र में 11 केवी विद्युत लाईन की चपेट में आकर मौत के शिकर हुए। वहीं डाटून्दा के पास दो नाहर घाटी में 1 पैंथर अज्ञात वाहन की चपेट में आकर मरा हुआ पाया गया। इसी प्रकार 2 पैंथर रेल्वे लाइन पर रेल की चपेट में आ चुके हैं।</p>
<p>टनल के बाहर हाईवे के किनारे शहर के मृत मवेशियों को डाला जा रहा हैं, जिनकी गंध वन्य जीवों को आकर्षित करती हैं। यह मृत मवेशी वन्यजीवों के लिए घातक हो सकते हैं। प्रशासन को चाहिए कि इन मृत मवेशियों को हाइवे किनारे और रिजर्व क्षेत्र के समीप डाले जाने पर प्रतिबंध लगाए।<br /><strong>- विठ्ठल सनाढ्य, वन्यजीव प्रेमी</strong></p>
<p>बून्दी के जंगलों मे प्रे-बेस और ग्रासलैंड की की समस्या हैं, वहीं दूसरी समस्या अवैध चराई की हैं। विभाग को अवैध चराई पर प्रतिबंध लगाने के साथ प्रेबेस और ग्रासलैंड विकसित करवाने के प्रयास किए जाने चाहिए।<br /><strong>- पृथ्वी सिंह राजावत, पूर्व वन्यजीव प्रतिपालक</strong></p>
<p>आमजन को वन एवं वन्यजीवों के संरक्षण से जोड़ने, जागरूकता पैदा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। ताकि उन्हें भी का वातावरण नहीं बने। आमतौर पर पैंथर जैसे वन्यजीव शिकार का पीछा करते हुए या शिकार के लालच में जंगल के बाहर आ जाते हैं। वैस भी पैंथर को जब तक नहीं छेड़ेंगे, वह हमला नहीं करता।<br /><strong>- संजीव शर्मा, उपवन संरक्षक (कोर), आरवीटीआर बून्दी</strong></p>
<p>वन क्षेत्रों में वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक आवास उपलब्ध करवाने हेतु सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं। जंगलों में वन्यजीवों के संरक्षण के साथ अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। वन्यजीवों के लिए प्रेबेस और ग्रासलैंड विकसित की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम भी जल्दी ही मिलेंगे। वन्यजीवों को भोजन, पानी व रहवास की पर्याप्त सुविधा मिलेगी तो यह जंगल से बाहर भी नहीं आएंगे।<br /><strong>- ओपी जांगीड़, उपवन संरक्षक, बून्दी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Dec 2023 16:44:03 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>महेश जोशी के आश्वासन के बाद महापड़ाव स्थगित</title>
                                    <description><![CDATA[ जलदाय मंत्री डॉ. महेश जोशी भी पड़ाव स्थल पर पहुंचे और कर्मियों की मांगों पर सुनवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद कर्मचारियों ने महापड़ाव स्थगित करने की घोषणा की। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/movement-postponed-after-assurance-of-mahesh-joshi/article-57467"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/untitled-1-copy26.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में पिछले 2 दिन से भारी बारिश के बावजूद जनता जल योजना के हजारों कर्मचारी अपने स्थाईकरण की मांग को लेकर जयपुर में शहीद स्मारक पर वह महापड़ाव डाले हुए थे। जलदाय मंत्री डॉ. महेश जोशी भी पड़ाव स्थल पर पहुंचे और कर्मियों की मांगों पर सुनवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद कर्मचारियों ने महापड़ाव स्थगित करने की घोषणा की। प्रदेश जनता जल योजना श्रमिक यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष प्रहलाद राय अग्रवाल ने कहा कि जनता जल योजना के कर्मचारी पिछले 10 वर्षों से नियमित करने के लिए आंदोलन करते आ रहे हैं, लेकिन जो भी सरकार रही वह सिर्फ कर्मचारियों को आश्वासन देती रही।</p>
<p>कर्मचारी नेता गजेंद्र सिंह राठौड़ व कुलदीप यादव ने कहा कि जलदाय मंत्री के आश्वासन देने और सरकार तक बात पहुंचाकर मांगें माने जाने की बात कही है। इस पर जनता जल कर्मियों ने महापड़ाव स्थगित करने का फैसला किया है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Sep 2023 09:55:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाराष्ट्र में शिवसेना ने किया चक्काजाम आंदोलन</title>
                                    <description><![CDATA[ विधान परिषद में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे ने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ गंगापुर तालुका में औरंगाबाद-पुणे मार्ग पर इस आंदोलन का नेतृत्व किया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/thackeray-movement-in-maharashtra/article-31238"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/a-1-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>औरंगाबाद। महाराष्ट्र के औरंगाबाद में किसानों से बिजली बिल वसूलने और फसल बीमा कंपनियों में व्याप्त कुप्रबंधन का विरोध करने के लिए शिवसेना (ठाकरे समूह) कार्यकर्ताओं और पार्टी पदाधिकारियों ने चक्काजाम आंदोलन किया। विधान परिषद में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे ने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ गंगापुर तालुका में औरंगाबाद-पुणे मार्ग पर इस आंदोलन का नेतृत्व किया। दानवे और पार्टी कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया।</p>
<p>दानवे ने कहा कि किसानों को इस बार अतिवृष्टि के कारण नुकसान हुआ है। इसके कारण वह वित्तीय संकट में हैं और पूरे किसानों से बिजली बिल की वसूली की जा रही है। बिना पूर्व सूचना के बिजली काटी जा रही है और फसल बीमा कंपनियों में कुप्रबंधन व्याप्त है। शिवसेना के नेता चंद्रकांत खैरे और अन्य शिव सैनिकों ने वैजापुर तालुका के शिवुर बंगलो में चक्काजाम आंदोलन का नेतृत्व किया। पुलिस ने आंदोलन को देखते हुए सुरक्षा की व्यवस्था की है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Dec 2022 14:21:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आजादी के आंदोलन को किसानों से मिला अधिक बल</title>
                                    <description><![CDATA[ इसका पहला विस्फोट हुआ 1857 में। यह मेवाड़ के जागीर क्षेत्र का बिजौलिया इलाका था। इस जागीर में बाहरी लगान के साथ साथ 84 तरह की लाग यानी कर और उपकर लिये जाते थे। बेगार का बड़ा बोलबाला था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/movement-got-more-force--from-the-farmers/article-19024"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/46546546552.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में क्रांतिकारियों ने सभी रियासतों को राष्ट्र की मुक्ति का आंदोलन तेज कर रखा था, लेकिन इस आंदोलन को सबसे अधिक बल मिला किसानों से। इस मामले में जनजाग्रति का एक बेमिसाल नाम है। बिजौलिया किसान आंदोलन। 19वीं सदी के शुरू में अंगेजों से एक संधि हुई थी, जिसकी वजह से राजस्थान के शासक बाहरी आक्रमणों और मराठों तथा पिंडारियों के भय से मुक्ति पा सके। इनके आतंक से मुक्त होने के बाद शासकों ने ऐशोआराम करना शुरू कर दिया और आम लोगों पर करों के बोझ बढ़ा दिए। इससे लोगों में असंतोष का लावा फूट पड़ा। इसका पहला विस्फोट हुआ 1857 में। यह मेवाड़ के जागीर क्षेत्र का बिजौलिया इलाका था। इस जागीर में बाहरी लगान के साथ साथ 84 तरह की लाग यानी कर और उपकर लिये जाते थे। बेगार का बड़ा बोलबाला था। लोग परेशान थे। आखिर किसानों ने 1916 में विजय सिंह पथिक को अपने यहां बुलाया और आंदोलन दिया। इलाके में आंदोलन तेजी से फैलने लगा। पथिक ने साधु सीताराम दास और माणिक्य लाल वर्मा को साथ लेकर आंदोलन को तेज कर दिया। </p>
<p>लोगों ने लगान, लाग, बाग सहित सभी तरह के कर और उपकर देने बंद कर बेगार बंद कर दी। हजारों किसान दमन के शिकार हुए और जेल और नेता लोगों को निवासित कर दिया और जेल भेज दिया गया। इस आंदोलन का पटापेक्ष 1941 में किसानों की विजय के रूप में हुआ।  भारत में यह पहला अहिंसक सहयोग आंदोलन था जो 44 वर्ष चला। बिजौलिया के किसान आंदोलन की लपटें अन्य इलाकों में भी फैल गई। इसे दबाने के लिए तत्कालीन शासकों ने फौज का उपयोग किया और आम लोगों को गोलियों से भून डाला। इस आंदोलन ने रूपाजी और कर्माजी  नाम के  दो किसान शहीद हुए। किसानों के आंदोलन की यह आग भोमट मेवाड़ और सिरोही के भील इलाके में भी फैल गई। मोतीलाल तेजावत बड़े किसान नेता थे। उन्होंने सभी जगह बगावत का झंडा फैहरा दिया। आंदोलन को कुचलने के लिए गोलियां बरसायी गई, जिससे दो हजार किसानों ने प्राणों की आहूती दी। <br />किसान आंदोलन के इतिहास का यह रक्तरंजित पन्ना है। ऐसे आंदोलन बीकानेर, अलवर, भरतपुर, मारवाड़ में भी हुए। 24 मई,1925 को अलवर राज्य के किसानों ने नीमोचाना में सभा की। राज्य की सेनाएं गांव को घेरकर गोलिया बरसाई और सैकडों स्त्री पुरुष और बच्चे मारे गए। यह भयावह कांड था। महात्मा गांधी ने इसे जलियावाला कांड से भी भयावह बताया। राज्य के सीकर, उदयपुरवाटी और अन्य इलाकों में आंदोलन बहुत विस्मयकारी और चेतना का प्रसार करने वाला रहा। किसान और युवाओं के मिलने से ही आजादी की राह आसान हुई। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Aug 2022 10:48:11 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>किसान आंदोलन के कारण रद्द रहेगी ट्रेने </title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शशि किरण ने बताया कि ट्रेने रद्द रहेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/trains-will-be-canceled-due-to-farmers-movement/article-17081"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/train-copy3.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। बठिंडा स्टेशन पर किसान आंदोलन के कारण तथा दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे पर नॉन इंटरलॉकिंग कारण के कारण उत्तर पश्चिम रेलवे पर संचालित रेल सेवाएं प्रभावित रहेगी। उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शशि किरण ने बताया कि ट्रेने रद्द रहेगी। किसान आंदोलन के कारण गंगानगर-अंबाला, अंबाला-गंगानगर, बिलासपुर- भगत की कोठी 1 अगस्त को और भगत की कोठी-बिलासपुर 4 अगस्त को रद्द रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 Jul 2022 15:41:21 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>विद्यालय के आगे ग्रामीणों का अतिक्रमण, छात्रों को खेलने के लिए भी नहीं है जगह </title>
                                    <description><![CDATA[बच्चों के परिजनों का कहना है कि अब तो विद्यालय में बच्चों में सांप और अन्य जानवरों का भय रहता है। इसे लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/dausa/encroachment-of-villagers-in-front-of-school/article-14634"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/neww-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>सिकराय। ग्राम पंचायत पाटन के बूजोट गांव में स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय भवन के आगे ग्रामीणों ने अतिक्रमण कर लिया है। इसके कारण स्कूल में आने वाले छात्रों को विद्यालय आने में भी भय रहता है। छात्र-छात्राओं को खेलने के लिए भी जगह नहीं है। विद्यालय के आगे गांव के लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है। सरकार भले ही स्कूलों को अच्छे बनाने में लगी हो, लेकिन बूजोट गांव के स्कूल को देखकर बच्चे स्कूल नहीं जाते है। विद्यालय में आने जाने में भी छात्र-छात्राओं को भय रहता है।</p>
<p>बच्चों के परिजनों का कहना है कि अब तो विद्यालय में बच्चों में सांप और अन्य जानवरों का भय रहता है। इसे लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर स्कूल के आगे मैदान से अतिक्रमण नहीं हटाया, तो आंदोलन करेंगे। विद्यालय में कक्षाओं के क्षतिग्रस्त होने के कारण कक्षा में ताला लगा रहता है। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>दौसा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Jul 2022 12:25:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आरक्षण आंदोलन पर हम बात करने को तैयार, बातचीत से ही हल निकलेगा: सुभाष गर्ग</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर। पीसीसी में सुनवाई कार्यक्रम में पहुंचे मंत्री सुभाष गर्ग ने मीडिया से बात करते हुए नेशनल हाईवे 21 पर आरक्षण आंदोलन पर कहा कि मांग उठाना सबका अधिकार है। हम सबसे बात करने के लिए तैयार है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/we-are-ready-to-talk-on-the-reservation-movement--only-dialogue-will-solve-the-problem-subhash-garg/article-12230"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/gard-1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पीसीसी में सुनवाई कार्यक्रम में पहुंचे मंत्री सुभाष गर्ग ने मीडिया से बात करते हुए नेशनल हाईवे 21 पर आरक्षण आंदोलन पर कहा कि मांग उठाना सबका अधिकार है। हम सबसे बात करने के लिए तैयार है।</p>
<p><br />गर्ग ने कहा कि भरतपुर में सैनी समेत अन्य वर्ग आंदोलन कर रहे। मेरी अपील है, किसी भी समस्या का निदान बातचीत से ही संभव है। सरकार ने बातचीत के लिए मंत्री विश्वेन्द्र सिंह, संभागीय आयुक्त और जिला प्रशासन को बातचीत के लिए अधिकृत किया है। बातचीत में आए प्रस्ताव पर सरकार विधि सम्मत कार्यवाही करेगी। मिलिट्री को लेकर केंद्र के नए निर्णय पर कहा कि केन्द्र सरकार का यह निर्णय खतरनाक है। कारण साफ है मोदी सरकार नौकरियां नही दे पाई। सेना की भर्ती के नए नियमों पर पुनर्विचार हो। आर्मी एक्सपर्ट भी इस पक्ष में नहीं है। राहुल गांधी पर ईडी की कार्यवाही पर कहा कि हम कार्यवाही का विरोध करते है। सीएम गहलोत को मिलने नही दिया जा रहा। ये कैसा लोकतंत्र है। अन्याय के खिलाफ लड़ेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Jun 2022 14:20:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>टोल मुक्ति के लिए भाजपा के आन्दोलन के दावों की निकली हवा</title>
                                    <description><![CDATA[ पूर्व उप जिला प्रमुख व क्षेत्रीय कांगे्रस नेता एडवोकेट अवधेश शर्मा द्वारा टोल के खिलाफ सौश्यल मीडिया पर आन्दोलन की रूपरेखा बनाए जाने की खबर मिलते ही स्थानीय भाजपा ने आनन-फानन में श्रेय लूटने की योजना बनाई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/sawai-madhopur/the-claims-of-the-bjps-movement-for-toll-relief-came/article-12205"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/tol.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> मालपुरा।</strong> क्षेत्र की जनता के लिए व्याप्त समस्याओं में से एक बडी समस्या टोल नाकों पर भारी भरकम टोल राशि वसूला जाना सामने आ रहा है।पूर्व उप जिला प्रमुख व क्षेत्रीय कांगे्रस नेता एडवोकेट अवधेश शर्मा द्वारा टोल के खिलाफ सौश्यल मीडिया पर आन्दोलन की रूपरेखा बनाए जाने की खबर मिलते ही स्थानीय भाजपा ने आनन-फानन में श्रेय लूटने की योजना बनाई। मंडल अध्यक्ष त्रिलोक चंद जैन के नेतृत्व में भाजपाईयों के साथ उपखंड अधिकारी कार्यालय को ना केवल ज्ञापन दिया गया बल्कि सात दिन में समस्या समाधान किए जाने की चेतावनी देते हुए समाधान नहीं होने की दशा में आन्दोलन का अल्टीमेटम दे दिया गया।</p>
<p>लेकिन 10 दिन से अधिक समय गुजरने के बावजूद भाजपा द्वारा इस दिशा में कुछ नहीं किया गया। जिससे जनहित से जुडेÞ मुद्दे पर विपक्ष के दावों की पोल खुल गई तथा ज्ञापन देने वाले भाजपा पदाधिकारी सौश्यल मीडिया पर जमकर ट्रोल किए जा रहे है। सोशल मीडिया पर आने वाले कमेंटस में ताने कसे जा रहे है कि आखिर कुछ करना ही नहीं था तो जबरन बड़े-बड़े दावे करने की क्या जरूरत आन पड़ी थी। क्या शर्मा द्वारा टोल के खिलाफ किए जाने वाले आन्दोलन पर जनता के समर्थन को रोकने के लिए किया गया स्टंट मात्र था। <br />बहरहाल आन्दोलन किसी के भी नेतृत्व में हो क्षेत्र के लोगों को तो राहत की दरकार है। लेकिन आन्दोलन के अगुवा को उसका श्रेय मिलेगा ही। क्षेत्र के जनप्रतिनिधि जनता से जुडे मुद्दों पर आंख, कान बंद कर वोट बैंक को अपनी मुठ्ठी में समझने की जो भूल कर रहे है शायद उन्हें ही इसका कोप झेलना पड़े।</p>
<p>वर्तमान में विधानसभा क्षेत्रवासी जयपुर जाने के लिए महज 90 किमी के सफर के लिए दो टोल चुकाने को विवश है तथा जेब कटवाने को मजबूर है। दुर्भाग्य की बात है कि जिनको इसके खिलाफ आवाज उठाने की जरूरत है वे ना जाने किस दबाव में चुप है। 22 जून को टोल के खिलाफ किए जाने वाले आन्दोलन को लेकर क्षेत्र के लोग एकजुट होते दिखाई दे रहे है।</p>
<p><br />जयपुर-भीलवाड़ा टोल रोड पर अविकानगर टोल नाके के खिलाफ लोगों में गुस्सा है जहां टोल नाके पर तैनात ठेकेदार व उसके कार्मिकों द्वारा मनमानी व महंगी दरों, पास जारी नहीं किए जाने की समस्या तथा क्षेत्रीय लोगों को राहत नहीं दिए जाने के खिलाफ 22 जून को पूर्व उप जिला प्रमुख एडवोकेट अवधेश शर्मा के नेतृत्व में प्रदर्शन किया जाएगा। शर्मा का कहना है कि आन्दोलन की घोषणा को लोगों का समर्थन मिल रहा है तथा प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>सवाई माधोपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Jun 2022 12:28:22 +0530</pubDate>
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                <title> टोल के खिलाफ आन्दोलन को मिल रहा आमजन का समर्थन, प्रचार-प्रसार जारी</title>
                                    <description><![CDATA[ मालपुरा। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की उदासीनता कहे या स्वार्थपरता राजधानी से महज 90 किमी दूरी होने के बावजूद मालपुरा शहर में वो विकास नहीं हो पाया जिसकी जरूरत क्षेत्र को है। जबकि राजधानी के पास इसी दूरी पर स्थित अन्य शहरों की स्थिति व विकास यहां से कई  यादा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/tonk/movement-against-toll-is-getting-public-support-propaganda-continues/article-11896"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/toll.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मालपुरा।</strong> क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की उदासीनता कहे या स्वार्थपरता राजधानी से महज 90 किमी दूरी होने के बावजूद मालपुरा शहर में वो विकास नहीं हो पाया जिसकी जरूरत क्षेत्र को है। जबकि राजधानी के पास इसी दूरी पर स्थित अन्य शहरों की स्थिति व विकास यहां से कई  यादा है।<br /> शिक्षा, चिकित्सा, परिवहन, सड़क मार्ग, रोजगार, औघोगिक क्षेत्र का विकास सहित अन्य तमाम ऐसे मुद्दे है जिनके पूरा होने के दिवास्वप्न को संजोए क्षेत्र का मतदाता हर बार ठगा जा रहा है।</p>
<p><br />जीतने के बाद जनप्रतिनिधि क्षेत्र व जनता को अपने हाल पर छोड़ देते हैं तथा क्षेत्र से ज्यादा खुद के विकास पर ध्यान देते है। क्षेत्र के लोगों से रियासतकालीन रेल सेवा एक झटके में छीन ली गई लेकिन किसी के कान पर जूं तक नहीं रैंगी ना ही क्षेत्र की जनता ने कोई आन्दोलन ही किया। नतीजा यह हुआ कि क्षेत्र के लोगों के पास राजधानी तक पहुंचने का कम खर्चे का माध्यम रेल हमसे छिन गया। कमोबेश यही हाल शिक्षा के क्षेत्र का है जहां मालपुरा-टोडारायसिंह विधानसभा क्षेत्र के विद्यार्थियों के पास आज भी उच्च शिक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है। आज भी अभिभावक अपने बेटे-बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए महंगे खर्चों पर महानगरीय व्यवस्थाओं में झोंक रहे हैं।</p>
<p>बालिका शिक्षा के प्रचार-प्रसार की कहानी भी एकमात्र महाविद्यालय की शिक्षा पर आकर ही रूक जाती है तथा बेटियों को अकेले महानगरों में छोड़ने के मामले में अधिकतर अभिभावकों की ना ही होती है जिससे उनकी स्रातक की शिक्षा ही पूरी हो पाती है। इसके बाद वे महज प्राइवेट विद्यार्थी के रूप में अपने आगे का सफर तय करने को मजबूर है। क्षेत्र में बढ़ते अपराध व साम्प्रदायिक मामलों की एक बड़ी वजह निठगापन मानी जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। आज शहर में औघोगिक क्षेत्र में रोजगार की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। शहर के लोग अब सयाने हो रहे है। इसी दौरान टोल नाके के लिए होने वाले संघर्ष को अपना भरपूर समर्थन दे रहे हैं तथा आगामी दिनों में होने वाले आन्दोलन में अपनी सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं।</p>
<p>इधर आन्दोलन की अगुवाई के लिए भाजपा व कांगे्रस ने भले ही अलग-अलग योजना बनाई हो लेकिन पहली बार शहर की किसी बड़ी समस्या के लिए एकजुटता नई कहानी गढ़ रही है। शहर के लोग विकास को मुद्दा मानकर एकजुट होंगे तो जनप्रतिनिधियों को भी मजबूर होकर लोगों की आवश्यकताओं व सुविधाओं पर ध्यान देने के लिए मजबूर होना पडेÞगा। लोगों की जेब काटने के लिए जबरन थोपे गए टोल नाके के खिलाफ आन्दोलन की सुगबुगाहट तेज हो चली है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>टोंक</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jun 2022 14:14:40 +0530</pubDate>
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