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                <title>expresses - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>महान संतूर वादक शिव कुमार शर्मा का 84 साल की उम्र में निधन, प्रधानमंत्री ने जताया शोक</title>
                                    <description><![CDATA[उनका 84 वर्ष की आयु में मुंबई में निधन हो गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/legendary-santoor-player-shiv-kumar-sharma-dies-at-the-age-of-84--pm-expresses-grief/article-9480"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/pandit-shivkumar-sharma.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। महान  संतूर वादक  पंडित शिव कुमार शर्मा का मंगलवार को यहां दिल का दौरा पडऩे से निधन हो गया। वह 84 वर्ष के थे। पंडित शर्मा पिछले करीब छह माह से किडनी संबंधी समस्या से पीड़ति थे और डायलिसिस पर थे। डायलिसिस पर होने के बावजूद वह सक्रिय थे।<br /><br />पंडित शर्मा ने वर्ष 1956 में शांताराम की फिल्म 'झनक झनक पायल बाजे' के एक दृश्य के लिए पृष्ठभूमि संगीत की रचना की और  वर्ष 1960 में अपना पहला एकल अलबम  निकाला था। बाद में उन्होंने पंडित हरि प्रसाद चौरसिया के साथ जोड़ी बनाई और सिलसिला (1981), लम्हे (1991), चांदनी (1989), डर (1993), परम्परा (1993) जैसी कई ङ्क्षहदी फिल्मों के लिए संगीत तैयार किये।</p>
<p><br /><strong>मोदी ने शिवकुमार शर्मा के निधन पर शोक व्यक्त किया</strong><br />प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को प्रख्यात संतूर वादक पंडित शिवकुमार शर्मा के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। मोदी ने कहा, ''पंडित शिवकुमार शर्माजी के निधन से हमारे सांस्कृतिक जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। उन्होंने वैश्विक स्तर पर संतूर को लोकप्रिय बनाया। उनका संगीत आने वाली पीढिय़ों को मंत्रमुग्ध करता रहेगा। मुझे उनके साथ अपनी बातचीत याद है। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना। ओम शांति।''<br /><br />लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पंडित शर्मा के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने दुनिया को भारत की समृद्ध संस्कृति एवं गौरवशाली परंपरा से परिचित कराया। हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीतकार और कई बॉलीवुड फिल्म साउंडट्रैक के संगीतकार पंडित शर्मा को संतूर को विश्व स्तर पर लोकप्रिय बनाने का श्रेय दिया जाता है। उनका 84 वर्ष की आयु में मुंबई में निधन हो गया। वह पिछले कुछ महीनों से गुर्दे से संबंधित बीमारियों से पीड़ति थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 May 2022 16:23:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>PM मोदी की सुरक्षा की चूक मामला: मोदी ने राष्ट्रपति कोविंद से की मुलाकात, राष्ट्रपति ने सुरक्षा चूक पर जताई चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[इससे पहले कोविंद ने प्रधानमंत्री को फोन करके भी उनसे बातचीत की थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/61d6ae4451a62/article-3840"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/modi-meet-kovind.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में चूक मामले में सियासी बयानबाजी का दौर जारी है। वहीं सुप्रीम कोर्ट इस मामले में शुक्रवार को सुनवाई कर सकता है। हालांकि ठीक इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरूवार को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की और इस दौरान कोविंद ने प्रधानमंत्री के पंजाब दौरे के समय उनके सुरक्षा बंदोबस्त में हुई गम्भीर चूक पर गहरी चिंता जतायी। इससे पहले कोविंद ने प्रधानमंत्री को फोन करके भी उनसे बातचीत की थी।<br /> <br /> राष्ट्रपति भवन ने प्रधानमंत्री के साथ कोविंद की मुलाकात के बारे में एक बयान में कहा, '' राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने आज राष्ट्रपति भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कल पंजाब में उनके काफिले की सुरक्षा में हुई चूक पर सीधे उनसे जानकारी प्राप्त की। '' ट्विटर पर इस बयान में कहा गया है, '' राष्ट्रपति ने इस गंभीर चूक पर अपनी चिंता व्यक्त की।''<br /> <br /> गौरतलब है कि मोदी बुधवार को भठिंडा से सड़क मार्ग से हुसैनीवाला में राष्ट्रीय शहीद स्मारक जा रहे थे। रास्ते में एक फ्लाईओवर पर प्रधानमंत्री के काफिले को कुछ प्रदर्शनकारियों ने रोक दिया था। मोदी वहां करीब 20 मिनट तक फंसे रहे और अंतत: उनके काफिले को भठिंडा हवाई अड्डे वापस आना पड़ा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Jan 2022 14:56:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विपक्ष ने की नागालैंड की घटना पर उचित मुआवजे की मांग : संसद में गृहमंत्री का बयान, शाह ने जताया दुख, SIT से जांच के आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[SIT 1 महिने में देगी मामले पर रिपोर्ट]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%88%E0%A4%82%E0%A4%A1-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%98%E0%A4%9F%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%89%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%86%E0%A4%B5%E0%A4%9C%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97---%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A4%A6-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%97%E0%A5%83%E0%A4%B9%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8--%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B9-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%9C%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%96--sit-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%9A-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%86%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6/article-2971"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/amit-shah_nagaland.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली।  कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने लोकसभा में सोमवार को शून्यकाल शुरू होने से पहले नागालैंड की घटना को दुखद करार देते हुए पीड़ित परिवारों को समुचित मुआवजा देने और जांच की अपील के साथ गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से सदन में इस मुद्दे पर विस्तृत बयान देने की मांग की।  <br /> <br /> नागालैंड की राष्ट्रवादी लोकतांत्रिक प्रगतिशील पार्टी (एनडीपीपी) के तोखेहो येपथोमी में नागालैंड की घटना पर दु:ख जताते हुए कहा उचित मुआवजा देने की माँग की। उन्होंने कहा कि इस मामले में जांच की जाय तथा दोषियों को सख्त सजा दी जाए। उन्होंने कहा कि सशत्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम ( एएफएसपीए) सुरक्षा बालों को आम नागरिकों को मारने का अधिकार नहीं देता है।<br /> <br /> कांग्रेस के गौरव गोगोई ने कहा की चार और पांच दिसम्बर को जो घटना हुई है वह नागालैंड और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए काला दिन है। उन्होंने इस घटना की ङ्क्षनदा करते हुए इलाक़े में शांति क़ायम करने की अपील की। वहां जिस प्रकार आम नागरिकों की हत्या की गई वह खुफिया तंत्र की विफलता है। पूर्वोत्तर राज्यों लगातार क़ानून व्यवस्था में गिरावट आ रही है। इस मामले में गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ ङ्क्षसह को सदन में वक्तव्य देना चाहिए।<br /> <br /> द्रमुक नेता टी आर बालू ने कहा कि नागालैंड की घटना को निंदनीय करार देते हुए कहा की इसकी जांच होनी चाहिए था यह सुनिश्चित हो कि ऐसी घटना दोबारा ना हो। तृणमूल कांग्रेस के नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने नागालैंड ने जो हुआ वह बहुत गम्भीर है। इसने देश को झकझोर कर रख दिया है। उन्होंने मारे के लोगों के परिजनों को अधिकतम मुआवजा देने की मांग की।<br /> <br /> शिव सेना के विनायक रावत ने कहा कि शनिवार को नागालैंड में जिस तरह की घटना हुई है वह बहुत दुखद है। आखिर खुफिया विभाग को ऐसी ग़लत जानकारी कैसे मिली जिससे यह दुखद घटना हुई। उन्होंने पीड़ति के परिवार को 25-25 लाख मुआवजा देने की मांग की।<br /> <br /> जदयू के राजीव रंजन ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों में जब शांति की पहल की जा रही है ऐसे में इस प्रकार की घटना बहुत दुखद है। गलत पहचान की वजह से आम लोगों के मारे जाने से लोगों में अविश्वास पैदा होगा। इस मामले में गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ ङ्क्षसह को सदन में वक्तव्य देना चाहिए। एनसीपी की सुप्रिया सुले ने इस मामले में गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सदन में वक्तव्य देने का आग्रह करते हुए प्रत्येक पीड़ति के परिजन को 60 लाख मुआवजा देने की मांग की।<br /> <br /> इसी प्रकार वाईएसआर कांग्रेस के मिथुन रेड्डी, बसपा के रीतेश पाठक, कांग्रेस के प्रद्युत बारदोली, एआईएमआईएम  के असदउद्दीन ओवैसी और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के बदरूद्दीन अजमल ने भी इस घटना को दुखद करार दिया और मुआवजे की मांग की।<br /> <br /> <strong>संसद में नागालैंड फायरिंग के मामले पर गृहमंत्री का  बयान, अमित शाह ने जताया दुख, SIT 1 महिने में देगी मामले पर रिपोर्ट</strong><br /> गृहमंत्री अमित शाह ने नागालैंड में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंंत्रण में बताते हुए सोमावार को इस घटना पर खेद जताया और कहा कि उनकी सरकार इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में मारे गये लोगों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करती है। शाह ने सोमवार को लोकसभा में इस बारे में वक्तव्य देते हुए कहा कि सरकार वहां हालात नियंत्रित कर माहौल को शांत करने का प्रयास कर रही है और इसके लिए वह खुद बराबर राज्य सरकार के संपर्क में हैं। केंद्र सरकार के पूर्वोत्तर मामलों के वरिष्ठ अधिकारी को घटना स्थल पर भेजा गया है। इसके साथ ही इस घटना की जांच के आदेश दिये गये हैं और एक माह में रिपोर्ट देने को कहा गया है। घटना के बारे में विस्तृत विवरण देते हुए उन्होंने कहा कि सेना को एक वाहन से उग्रवादियों की गतिविधि की सूचना मिली थी इसलिए उसके कमांडो संदिग्ध जगह पर पहुंचे और वाहनों की चेङ्क्षकग करने लगे। वहां से गुजर रहे एक वाहन को जब रुकने का इशारा किया गया तो वाहन को रोकने की बजाय चालक उसे भगाने की कोशिश करने लगा।<br /> <br /> उन्होंने कहा कि इस वाहन में उग्रवादियों के होने के संदेह के कारण सुरक्षा बल के जवानों ने वाहन पर गोलीबारी शुरू कर दी। इस वाहन में आठ लोग सवार थे। गोलाबारी की घटना में आठ में से दो लोग घायह हो गये। बाद में वाहन में उग्रवादियों के होने की आशंका गलत पाई गई तो सेना के जवानों ने घायल लोगों को अस्पताल में पहुंचाया और उनका इलाज कराना शुरु किया। गृहमंत्री ने कहा कि घटना की सूचना मिलते ही कुछ स्थानीय लोग वहां एकत्र हो गये और सुरक्षा बल के वाहनों को क्षति पहुंचाने लगे। उन्होंने वहां आगजनी भी की और जवानों पर हमले किये जिसमें कई जवानों घायल हो गये। सुरक्षा बल के जवानों ने अपने बचाव में तथा भीड़ को तितर बितर करने के लिए गोली चलाई जिसमें सात और नागरिकों की मृत्यु हो गई तथा कुछ अन्य घायल हो गये।<br /> <br /> उन्होंने बताया कि राज्य के पुलिस महानिदेशक तथा आयुक्त ने घटना स्थल का दौरा किया। घटना को लेकर प्राथमिकी भी दर्ज कर दी गई। इसकी जांच के लिए एक विशेष जांच दल-एसआईटी का गठन किया गया है और उसे एक माह में रिपोर्ट देने को कहा गया है। शाह ने कहा कि उपरोक्त घटना के बाद रविवार को मोन शहर में असम राइफल के कार्यालय में एक भीड़ ने तोडफ़ोड की और आग लगाई जिसके जवाब में जवानों को गोली चलानी पडी जिसमें एक और व्यक्ति की मृत्यु हो गई तथा एक  अन्य घायल हो गया। गृहमंत्री ने कहा कि सेना ने एक वक्तव्य में इस घटना में निर्दोष नागरिकों की मृत्यु पर गहरा दुख व्यक्त किया है और कहा है कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिये हैं।<br /> <br />  शाह ने कहा कि वह खुद घटना को लेकर प्रदेश सरकार के संपर्क में है और उन्होंने राज्यपाल तथा मुख्यमंत्री से बात की है। गृहमंत्रालय ने भी राज्य के मुख्य सचिव तथा पुलिस महानिदेशक से बात की है। गृहमंत्रालय ने राज्य के पूर्वोत्तर मामलों के अपर सचिव को कोहिमा भेजा है जहां उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की और सामान्य स्थिति बहाल करने पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि नागालैंड की स्थिति पर नजर रखी जा रही है और शांति तथा सौहार्द बनाए रखने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा ''केंद्र सरकार ने इस घटना पर खेद व्यक्त करती है और मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करती है।'' इससे पहले सुबह प्रश्नकाल के दौरान लोकसभा में विपक्ष के सदस्यों ने यह मामला उठाया और गृहमंत्री से इस संबंध में वक्तव्य देने की मांग की थी।<br /> <br /> <br /> <strong>नागालैंड गोलीबारी की घटना में मृतकों की संख्या बढ़कर 15 हुई</strong><br />  नागालैंड में मोन जिले के ओटिंग में शनिवार को हुयी गोलीबारी में मृतकों की संख्या बढ़कर 15 हो गयी है। ओटिंग में शनिवार की घटना के बाद स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी हुयी है। इस घटना में दो और लोगों की मौत हो गयी, जिसमें एक सुरक्षाकर्मी भी शामिल है।  रक्षा विभाग ने बताया कि विद्रोहियों के संभावित आंदोलन की विश्वस्त खुफिया जानकारी के आधार पर यह अभियान चलाया गया था। नागालैंड में मोन के तिरु में एक विशेष ऑपरेशन चलाने की योजना थी। उन्होंने कहा कि इस घटना के परिणाम पर खेद है। इस घटना की उच्च स्तरीय जांच की जा रही है, जांच के बाद कार्रवाई की जायेगी। उन्होंने जानकारी दी कि इस घटना में सुरक्षा बल भी गंभीर रूप से जख्मी हैं जिनमें एक सैनिक की मौत हुयी है। <br /> <br /> इस घटना के बाद गुस्साये लोगों ने मोन शहर में इकट्ठा होकर भीड़ ने असम राइफल्स के शिविर पर हमला कर दिया, जिसमें शिविर के कुछ हिस्से क्षतिग्रस्त हो गया, जिसके बाद असम राइफल्स ने अपनी सुरक्षा के लिये गोलीबारी की, जिसमें एक नागरिक की मौत हो गयी और कई लोग घायल बताये जा रहे हैं। इस दौरान इलाके में धारा 144 लागू कर दी गयी है। जिला प्रशासन सभी गतिविधियों पर नजर रख रही है और लोगों से शांति बनाये रखने की अपील की है। राज्य प्राधिकरण ने एहतियात के तौर पर राज्य में इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Dec 2021 18:17:58 +0530</pubDate>
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                <title>लखीमपुर हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अन्य अभियुक्तों के मोबाइल फोन जब्त नहीं किए जाने पर गहरी नाराजगी जताई</title>
                                    <description><![CDATA[लखीमपुर हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फिर लगाई उप्र सरकार को फटकार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%B2%E0%A4%96%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0-%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A1-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%85%E0%A4%AD%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B2-%E0%A4%AB%E0%A5%8B%E0%A4%A8-%E0%A4%9C%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%A4-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%97%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%88/article-2189"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/sc.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने लखीमपुर खीरी हत्याकांड मामले में सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार को एक बार फिर फटकार लगाते हुए कहा कि वह उसकी अब तक की जांच से संतुष्ट नहीं है तथा आरोप पत्र दाखिल होने तक उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायधीश की देखरेख में जांच करवाना चाहता है। मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन और न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की खंडपीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए सरकार की एसआईटी जांच को 'ढीला ढाला बताते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि मुख्य को अभियुक्त बचाने की कोशिश की जा रही है।<br /> <br /> शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान कई सवाल खड़े किए और कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की जांच अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। इस मामले में मामले सरकार की ओर से प्रस्तुत की गई प्रगति स्टेटस रिपोर्ट में गवाहों के बयान दर्ज करने की जानकारी के अलावा कुछ भी नया नहीं है। खंडपीठ ने पूछा कि मुख्य अभियुक्त आशीष के अलावा अन्य अभियुक्तों के मोबाइल फोन क्यों जब्त नहीं किए गए। उन्होंने अन्य अभियुक्तों के मोबाइल फोन जब्त नहीं किए जाने पर गहरी नाराजगी जताई।<br /> <br /> उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यायालय को बताया कि इस मामले सबूतों से संबंधित लैब की रिपोर्ट 15 नवंबर तक आएगी। इस पर अदालत ने कहा कि 10 दिन का समय दिया गया था। इस दौरान कुछ नहीं किया गया। सरकार ने कहा कि लैब के कामकाज पर उसका नियंत्रण नहीं है। सरकार के जांच से असंतुष्ट खंडपीठ ने कहा कि वह इस मामले की जांच पंजाब हरियाणा उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजीत ङ्क्षसह से कराना चाहती है। इस पर श्री साल्वे ने कहा कि वह इस बारे में शुक्रवार को अगली सुनवाई में सरकार का पक्ष रखेंगे।<br /> <br /> उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में तीन अक्टूबर को किसानों के प्रदर्शन के दौरान तीन आंदोलनकारियों समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी। केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे प्रदर्शनकारी चार किसानों को कार से कुचलकर मारने के आरोप हैं यह आरोप केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के पुत्र आशीष मिश्रा समेत अन्य लोगों पर है। आशीष को मुख्य आरोपी बताया गया है<br /> <br /> गत 26 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई की थी। इस दौरान पीठ ने मामले की जांच में ढीले रवैया पर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ  सरकार को फटकार लगाई थी। न्यायालय ने गवाहों की सुरक्षा का आदेश देते हुए सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराने में तेजी लाने का आदेश दिया था।पीठ ने सुनवाई के दौरान इस घटना को 'जघन्य हत्या' करार दिया था तथा सरकार को गंभीरता से मामले की जांच के आदेश दिये थे।<br /> <br /> पिछली सुनवाई के दौरान सरकार ने पीठ को बताया कि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं की जा रही है। सरकार की ओर से कहा गया था कि 68 गवाहों में 30 के बयान सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज की जा चुकी है।  शीर्ष न्यायालय ने गवाहों की कम संख्या कम बताते हुए कड़ी टिप्पणियां की थीं और कहा था कि सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में हुई घटना में सिर्फ 68 गवाह हैं। उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लिया था, जिसे दो वकीलों के पत्रों के आधार पर जनहित याचिका में तब्दील कर दिया गया था। वकीलों की ओर से इस मामले की न्यायिक जांच और सीबीआई जांच की मांग की गई है।<br /> <br /> गौरतलब है कि कई किसान संगठन केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ देशव्यापी धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। करीब 40 से अधिक किसान संगठन संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले राजधानी दिल्ली की सीमाओं के अलावा देश के अन्य हिस्सों में लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं ।<br /> <br /> किसान संगठनए केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों- कृषक उपज व्यापार (वाणिज्य संवर्धन और सरलीकरण) कानून-2020, कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार कानून-2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून-2020 का विरोध कर रहे हैं। किसानों के विरोध के मद्देनजर शीर्ष अदालत ने जनवरी में इन कानूनों के लागू किए जाने पर रोक लगा दी थी।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 08 Nov 2021 16:23:37 +0530</pubDate>
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                <title>आंदोलन पर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने किसान आंदोलन के दौरान रास्ते जाम बनाए रखने के मुद्दे पर गहरी नाराजगी और चिंता व्यक्त की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/%E0%A4%86%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2/article-1426"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/suprim-court.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>सुप्रीम कोर्ट </strong>ने किसान आंदोलन के दौरान रास्ते जाम बनाए रखने के मुद्दे पर गहरी नाराजगी और चिंता व्यक्त की है, जो स्वाभाविक और उचित है। साथ ही अदालत ने केन्द्र व राज्यों की सरकारों के प्रति भी नाराजगी व्यक्त की है। सुप्रीम कोर्ट किसानों के संगठन किसान महापंचायत और उसके अध्यक्ष की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘सत्याग्र्रह’ करने की अनुमति मांगी गई है और इसके बारे में अधिकारियों को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। दो सदस्यीय पीठ के न्यायाधीशों ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि आम लोगों ने पहले से ही पूरे दिल्ली शहर को पंगु बना रखा है और शहर के भीतर आकर क्या करने का इरादा है? अदालत ने कहा कि आपको विरोध का अधिकार है, लेकिन नागरिकों को भी स्वतंत्र रूप से और बिना किसी भय के आने-जाने का समान अधिकार है। रास्तों को अवरुद्ध करने का अधिकार तो किसी को भी नहीं होना चाहिए। कई महीनों से आम नागरिकों को इसका नतीजा भुगतना पड़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र व राज्य सरकारों को रास्ते खुलवाने का निर्देश पहले ही दे चुकी हैं, लेकिन सरकारें कोई प्रयास नहीं कर रही हैं। सरकारें दोष मढ़ने के अलावा कोई सार्थक प्रयास नहीं कर रही है। सरकारें कह रही हैं कि किसान बातचीत करने को तैयार नहीं हैं। सरकारों के इस रुख से भी अदालत खासा नाराज है। ज्ञातव्य है कि किसानों ने पिछले दस महीनों से सीमाओं के रास्ते जाम कर रखे हैं और सड़कों पर अपने ठिकाने बना लिए यह स्थिति लगातार आज तक बनी हुई है। आम नागरिकों, नौकरीपेशा लोगों व राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में स्थित छोटे-बड़े उद्योगों को इसका भारी खामियाजा उठाना पड़ रहा है। काफी लंबे रास्तों को पार पर आवाजाही करनी पड़ रही है। किसान आंदोलन से काफी लोग प्रभावित हैं, लेकिन किसान और सरकारें कोई सकारात्मक रुख दिखाने की जरूरत ही नहीं समझ रहे हैं। दोनों पक्षों ने अड़ियल रुख अपना रखा है। अदालत ने किसान संगठनों से पूछा है कि जब कृषि कानूनों को चुनौती देने के लिए आपने पहले याचिका दायर कर रखी है तो इस आंदोलन को जारी रखने का क्या औचित्य है? किसानों को फैसले का इंतजार करना चाहिए। रास्ते बंद रखने का काफी गंभीर मामला है। किसानों और सरकारों को इस पर गंभीरता से सोचना होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Oct 2021 19:09:38 +0530</pubDate>
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