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                <title>  शादी से बचने के लिए 50 फीट गहरे कुएं में कूदा</title>
                                    <description><![CDATA[एक दिन पहले घर पर बिना बताए लापता हुआ युवक शुक्रवार शाम को अपने ही गांव के 50 फीट गहरे सूखे कुएं में जख्मी हालत में पड़ा मिला।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/ajmer-news--jumped-into-a-50-feet-deep-well-to-avoid-marriage/article-9247"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/dead-body.jpg" alt=""></a><br /><p>  पुष्कर। एक दिन पहले घर पर बिना बताए लापता हुआ युवक शुक्रवार शाम को अपने ही गांव के 50 फीट गहरे सूखे कुएं में जख्मी हालत में पड़ा मिला। पुलिस ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे परिजनों के सुपुर्द कर दिया। युवक की 16 मई को शादी होनी है। बताया जाता है कि शादी के कारण वह तनाव में था। ग्राम चावंड़िया निवासी राजू पुत्र गोपाल भाटी गुरुवार सुबह बिना बताए घर से लापता हो गया। परिजनों ने उसकी तलाश की। मगर वह नहीं मिला। इस पर पुलिस थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई गई। थानाप्रभारी महावीर शर्मा ने उसकी तलाश के लिए टीम गठित की। पुलिस टीम परिजनों के साथ युवक को ढ़ूंढ़ रही थी। इसी बीच पुलिस को युवक के गांव में ही स्थित सूखे कुएं में होने की जानकारी मिली। पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। पुलिस को देख कर युवक ने कुएं में छिपने की कोशिश की। बाद में पुलिस ने परिजनों व ग्रामीणों के सहयोग से उसे कुएं से बाहर निकाला। कुएं में कूदने की वजह से उसके शरीर पर हल्की चोट लगी। जिससे उसे उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। उपचार के बाद उसे परिजनों के हवाले कर दिया।  </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 May 2022 12:45:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Ajmer]]></dc:creator>
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                <title>100 फीट से अधिक गहरे कुएं से पैंथर को किया रेस्क्यू</title>
                                    <description><![CDATA[स्वास्थ्य परीक्षण के बाद छोड़ा वन क्षेत्र में]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/100-%E0%A4%AB%E0%A5%80%E0%A4%9F-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%97%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%8F%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A5%88%E0%A4%82%E0%A4%A5%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%82/article-2568"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/painthor.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> जयपुर।</strong> नायला के राहोरी गांव के ग्रामीणों ने शुक्रवार को कुएं में पैंथर गिरने की सूचना वन विभाग को दी। सूचना मिलने पर जयपुर जू से रेस्क्यू टीम दोपहर करीब 3.30 बजे मौके पर पहुंची। टीम ने करीब 2 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद शाम करीब 5.30 बजे पैंथर को ट्रेंकुलाइज कर रेस्क्यू किया। वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ.अशोक तंवर ने बताया कि पैंथर तकरीबन 100 फीट से अधिक गहरे कुएं में गिर गया था। जिसे रेस्क्यू करने के लिए वन विभाग के स्टाफ सुरेश चौधरी को पिंजरे में बंद कर रस्सी के सहारे कुएं के अंदर उतारा। कुएं के सूख जाने के कारण अंदर छोटी-छोटी गुफाओं के कारण ट्रेंकुलाइज करने में थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद चौधरी ने कुएं के पैंदे में बैठे पैंथर को सफल ट्रेंकुलाइज किया। डॉ.तंवर ने बताया कि ये नर पैंथर था, जिसकी उम्र करीब साढ़े तीन साल है। इसका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। जिसमें पैंथर स्वस्थ पाया गया। इसके बाद देर रात पैंथर को वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया। रेस्क्यू कार्य के दौरान टीम के राजेन्द्र सिंह, सागर चौधरी का भी सराहनीय सहयोग रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>दौसा</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Nov 2021 14:21:41 +0530</pubDate>
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                <title>लखीमपुर हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अन्य अभियुक्तों के मोबाइल फोन जब्त नहीं किए जाने पर गहरी नाराजगी जताई</title>
                                    <description><![CDATA[लखीमपुर हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फिर लगाई उप्र सरकार को फटकार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%B2%E0%A4%96%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0-%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A1-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%85%E0%A4%AD%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B2-%E0%A4%AB%E0%A5%8B%E0%A4%A8-%E0%A4%9C%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%A4-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%97%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%88/article-2189"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/sc.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने लखीमपुर खीरी हत्याकांड मामले में सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार को एक बार फिर फटकार लगाते हुए कहा कि वह उसकी अब तक की जांच से संतुष्ट नहीं है तथा आरोप पत्र दाखिल होने तक उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायधीश की देखरेख में जांच करवाना चाहता है। मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन और न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की खंडपीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए सरकार की एसआईटी जांच को 'ढीला ढाला बताते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि मुख्य को अभियुक्त बचाने की कोशिश की जा रही है।<br /> <br /> शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान कई सवाल खड़े किए और कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की जांच अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। इस मामले में मामले सरकार की ओर से प्रस्तुत की गई प्रगति स्टेटस रिपोर्ट में गवाहों के बयान दर्ज करने की जानकारी के अलावा कुछ भी नया नहीं है। खंडपीठ ने पूछा कि मुख्य अभियुक्त आशीष के अलावा अन्य अभियुक्तों के मोबाइल फोन क्यों जब्त नहीं किए गए। उन्होंने अन्य अभियुक्तों के मोबाइल फोन जब्त नहीं किए जाने पर गहरी नाराजगी जताई।<br /> <br /> उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यायालय को बताया कि इस मामले सबूतों से संबंधित लैब की रिपोर्ट 15 नवंबर तक आएगी। इस पर अदालत ने कहा कि 10 दिन का समय दिया गया था। इस दौरान कुछ नहीं किया गया। सरकार ने कहा कि लैब के कामकाज पर उसका नियंत्रण नहीं है। सरकार के जांच से असंतुष्ट खंडपीठ ने कहा कि वह इस मामले की जांच पंजाब हरियाणा उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजीत ङ्क्षसह से कराना चाहती है। इस पर श्री साल्वे ने कहा कि वह इस बारे में शुक्रवार को अगली सुनवाई में सरकार का पक्ष रखेंगे।<br /> <br /> उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में तीन अक्टूबर को किसानों के प्रदर्शन के दौरान तीन आंदोलनकारियों समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी। केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे प्रदर्शनकारी चार किसानों को कार से कुचलकर मारने के आरोप हैं यह आरोप केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के पुत्र आशीष मिश्रा समेत अन्य लोगों पर है। आशीष को मुख्य आरोपी बताया गया है<br /> <br /> गत 26 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई की थी। इस दौरान पीठ ने मामले की जांच में ढीले रवैया पर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ  सरकार को फटकार लगाई थी। न्यायालय ने गवाहों की सुरक्षा का आदेश देते हुए सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराने में तेजी लाने का आदेश दिया था।पीठ ने सुनवाई के दौरान इस घटना को 'जघन्य हत्या' करार दिया था तथा सरकार को गंभीरता से मामले की जांच के आदेश दिये थे।<br /> <br /> पिछली सुनवाई के दौरान सरकार ने पीठ को बताया कि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं की जा रही है। सरकार की ओर से कहा गया था कि 68 गवाहों में 30 के बयान सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज की जा चुकी है।  शीर्ष न्यायालय ने गवाहों की कम संख्या कम बताते हुए कड़ी टिप्पणियां की थीं और कहा था कि सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में हुई घटना में सिर्फ 68 गवाह हैं। उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लिया था, जिसे दो वकीलों के पत्रों के आधार पर जनहित याचिका में तब्दील कर दिया गया था। वकीलों की ओर से इस मामले की न्यायिक जांच और सीबीआई जांच की मांग की गई है।<br /> <br /> गौरतलब है कि कई किसान संगठन केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ देशव्यापी धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। करीब 40 से अधिक किसान संगठन संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले राजधानी दिल्ली की सीमाओं के अलावा देश के अन्य हिस्सों में लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं ।<br /> <br /> किसान संगठनए केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों- कृषक उपज व्यापार (वाणिज्य संवर्धन और सरलीकरण) कानून-2020, कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार कानून-2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून-2020 का विरोध कर रहे हैं। किसानों के विरोध के मद्देनजर शीर्ष अदालत ने जनवरी में इन कानूनों के लागू किए जाने पर रोक लगा दी थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Nov 2021 16:23:37 +0530</pubDate>
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                <title>आंदोलन पर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने किसान आंदोलन के दौरान रास्ते जाम बनाए रखने के मुद्दे पर गहरी नाराजगी और चिंता व्यक्त की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/%E0%A4%86%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2/article-1426"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/suprim-court.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>सुप्रीम कोर्ट </strong>ने किसान आंदोलन के दौरान रास्ते जाम बनाए रखने के मुद्दे पर गहरी नाराजगी और चिंता व्यक्त की है, जो स्वाभाविक और उचित है। साथ ही अदालत ने केन्द्र व राज्यों की सरकारों के प्रति भी नाराजगी व्यक्त की है। सुप्रीम कोर्ट किसानों के संगठन किसान महापंचायत और उसके अध्यक्ष की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘सत्याग्र्रह’ करने की अनुमति मांगी गई है और इसके बारे में अधिकारियों को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। दो सदस्यीय पीठ के न्यायाधीशों ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि आम लोगों ने पहले से ही पूरे दिल्ली शहर को पंगु बना रखा है और शहर के भीतर आकर क्या करने का इरादा है? अदालत ने कहा कि आपको विरोध का अधिकार है, लेकिन नागरिकों को भी स्वतंत्र रूप से और बिना किसी भय के आने-जाने का समान अधिकार है। रास्तों को अवरुद्ध करने का अधिकार तो किसी को भी नहीं होना चाहिए। कई महीनों से आम नागरिकों को इसका नतीजा भुगतना पड़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र व राज्य सरकारों को रास्ते खुलवाने का निर्देश पहले ही दे चुकी हैं, लेकिन सरकारें कोई प्रयास नहीं कर रही हैं। सरकारें दोष मढ़ने के अलावा कोई सार्थक प्रयास नहीं कर रही है। सरकारें कह रही हैं कि किसान बातचीत करने को तैयार नहीं हैं। सरकारों के इस रुख से भी अदालत खासा नाराज है। ज्ञातव्य है कि किसानों ने पिछले दस महीनों से सीमाओं के रास्ते जाम कर रखे हैं और सड़कों पर अपने ठिकाने बना लिए यह स्थिति लगातार आज तक बनी हुई है। आम नागरिकों, नौकरीपेशा लोगों व राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में स्थित छोटे-बड़े उद्योगों को इसका भारी खामियाजा उठाना पड़ रहा है। काफी लंबे रास्तों को पार पर आवाजाही करनी पड़ रही है। किसान आंदोलन से काफी लोग प्रभावित हैं, लेकिन किसान और सरकारें कोई सकारात्मक रुख दिखाने की जरूरत ही नहीं समझ रहे हैं। दोनों पक्षों ने अड़ियल रुख अपना रखा है। अदालत ने किसान संगठनों से पूछा है कि जब कृषि कानूनों को चुनौती देने के लिए आपने पहले याचिका दायर कर रखी है तो इस आंदोलन को जारी रखने का क्या औचित्य है? किसानों को फैसले का इंतजार करना चाहिए। रास्ते बंद रखने का काफी गंभीर मामला है। किसानों और सरकारों को इस पर गंभीरता से सोचना होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Oct 2021 19:09:38 +0530</pubDate>
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