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                <title>displeasure - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>चीन ने ताइवान के मामले पर जापान से जताई नाराजगी : ऐतिहासिक अपराधों पर करें विचार, कहा- अपने शब्द ले वापस</title>
                                    <description><![CDATA[ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तकाइची राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रियता हासिल करने के लिये ऐसे बयान दे रही हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/china-expressed-displeasure-with-japan-on-the-issue-of-taiwan/article-134545"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/china-flag1.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन ने ताइवान पर जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची के एक हालिया बयान पर एक बार फिर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि जापान को अपने ऐतिहासिक अपराधों पर विचार करना चाहिए और अपने शब्दों को वापस लेना चाहिए। ताइवान मामलों के राष्ट्रीय परिषद के प्रवक्ता झांग हान ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि जापान को चीन के आंतरिक मामलों में हस्तश्रेप देना बंद कर देना चाहिए। उसे मजबूत कदम उठाते हुए अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धताओं और अखंड-चीन सिद्धांत पर टिके रहना चाहिए। तकाइची ने एक हालिया बयान में कहा था कि ताइवान के खिलाफ चीन की नौसैनिक नाकाबंदी या कोई और कार्रवाई जापान के लिये सैन्य कार्रवाई करने का उचित कारण हो सकती है। इसके बाद से ही दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तकाइची राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रियता हासिल करने के लिये ऐसे बयान दे रही हैं। </p>
<p>दूसरी ओर चीन ने लगातार जापान से अपनी अखंडता का सम्मान करने का अनुरोध किया है। हान ने यहां संवाददाताओं से कहा कि ताइवान पर तकाइची का बयान चीन के अंदरूनी मामलों में हस्तश्रेप है। यह ताइवान के अलगाववादी समूहों को गलत संदेश देता है और ताइवान खाड़ी में शांति और स्थिरता के लिये खतरा है। उन्होंने कहा कि यह जापान का दायित्व है कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इन दस्तावेजों के प्रावधानों को माने। ताइवान चीन का ही है। वह न कभी एक देश था और न कभी होगा। खाड़ी के दोनों ओर लोग चीनी ही हैं और ताइवान का भविष्य संयुक्त रूप से 1.4 अरब लोग मिलकर ही निर्धारित करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Dec 2025 15:05:12 +0530</pubDate>
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                <title> अतिक्रमण को देख महापौर ने जताई नाराजगी</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम ग्रेटर महापौर डॉ. सौम्या गुर्जर ने मंगलवार को मालवीय नगर जोन के वार्ड नंबर 149 का दौरा किया। उन्होंने नालो पर हो रहे अवैध अतिक्रमण को लेकर नाराजगी जताई की ओर तत्काल हटाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बारिश में सड़कों पर जलभराव की स्थिति ना होनी चाहिए। जलभराव के चलते लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है ऐसे में समय रहते ही नालों की सफाई कराए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/seeing-the-encroachment-the-mayor-expressed-displeasure/article-12132"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/mar.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi"><strong>जयपुर।</strong> नगर निगम ग्रेटर महापौर डॉ. सौम्या गुर्जर ने मंगलवार को मालवीय नगर जोन के वार्ड नंबर </span>149<span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi"> का दौरा किया। उन्होंने </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">नालो पर हो रहे अवैध अतिक्रमण को लेकर नाराजगी जताई की ओर तत्काल हटाने के निर्देश दिए</span>। उन्होंने कहा कि बारिश में सड़कों पर जलभराव की स्थिति ना होनी चाहिए। जलभराव के चलते लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है ऐसे में समय रहते ही नालों की सफाई कराए। साथ ही तुरंत कही मलबा हटाया जाए। उन्होंने कहा कि गंदगी फैलाने वाले लोगों पर कार्यवाही की जाए और चालान काटे जाए।</span></p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jun 2022 15:11:51 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सीएम सलाहकार दानिश अबरार का ब्यूरोक्रेसी से नाराजगी पर गहलोत को पत्र: बिजनेस मीट के विरोध में काले झंडे दिखाने की चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[सवाई माधोपुर में 5 जनवरी को रीको के बिजनेस मीट आयोजन के आमंत्रण पत्र में मुख्यमंत्री, उद्योग मंत्री और स्थानीय विधायकों के नाम नहीं लिखने पर सीएम सलाहकार दानिश अबरार ने मुख्यमंत्री को नाराजगी भरा पत्र लिखा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%8F%E0%A4%AE-%E0%A4%B8%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B6-%E0%A4%85%E0%A4%AC%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%97%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0--%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B8-%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%9F-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A7-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%9D%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A5%87-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%9A%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A8%E0%A5%80/article-3754"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सवाई माधोपुर में 5 जनवरी को रीको के बिजनेस मीट आयोजन के आमंत्रण पत्र में मुख्यमंत्री, उद्योग मंत्री और स्थानीय विधायकों के नाम नहीं लिखने पर सीएम सलाहकार दानिश अबरार ने मुख्यमंत्री को नाराजगी भरा पत्र लिखा है। अबरार ने ब्यूरोक्रेसी के हावी होने पर नाराजगी जताते हुए कार्यक्रम को काले झंडे दिखाने की चेतावनी दी है। विधायक दानिश अबरार ने कार्यक्रम के आमंत्रण पत्र के साथ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को एक पत्र लिखा है। पत्र में कहा है कि बिजनेस मीट के आमंत्रण पत्र में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उद्योग मंत्री शकुंतला रावत का नाम नहीं लिखा गया। आमंत्रण पत्र में जिले के किसी प्रतिनिधि का भी नाम नहीं है। इस पत्र से ऐसा लगता है कि ब्यूरोक्रेसी जनप्रतिनिधियों पर हावी होना चाहती है। कार्यक्रम में प्रदेश के मुखिया, मंत्री और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा होने से गलत राजनीतिक संदेश जाता है। इस उपेक्षा के विरोध में हम कार्यक्रम का बहिष्कार करते हुए काले झंडे दिखाएंगे। दानिश अबरार ने कहां है कि यह शिकायती पत्र नहीं केवल सूचना पत्र है कि हम मुख्यमंत्री मंत्री और जनप्रतिनिधियों की विभागीय अधिकारियों के माध्यम से उपेक्षा बर्दाश्त नहीं कर सकते।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Mon, 03 Jan 2022 14:10:45 +0530</pubDate>
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                <title>लखीमपुर हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अन्य अभियुक्तों के मोबाइल फोन जब्त नहीं किए जाने पर गहरी नाराजगी जताई</title>
                                    <description><![CDATA[लखीमपुर हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फिर लगाई उप्र सरकार को फटकार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%B2%E0%A4%96%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0-%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A1-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%85%E0%A4%AD%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B2-%E0%A4%AB%E0%A5%8B%E0%A4%A8-%E0%A4%9C%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%A4-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%97%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%88/article-2189"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/sc.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने लखीमपुर खीरी हत्याकांड मामले में सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार को एक बार फिर फटकार लगाते हुए कहा कि वह उसकी अब तक की जांच से संतुष्ट नहीं है तथा आरोप पत्र दाखिल होने तक उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायधीश की देखरेख में जांच करवाना चाहता है। मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन और न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की खंडपीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए सरकार की एसआईटी जांच को 'ढीला ढाला बताते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि मुख्य को अभियुक्त बचाने की कोशिश की जा रही है।<br /> <br /> शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान कई सवाल खड़े किए और कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की जांच अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। इस मामले में मामले सरकार की ओर से प्रस्तुत की गई प्रगति स्टेटस रिपोर्ट में गवाहों के बयान दर्ज करने की जानकारी के अलावा कुछ भी नया नहीं है। खंडपीठ ने पूछा कि मुख्य अभियुक्त आशीष के अलावा अन्य अभियुक्तों के मोबाइल फोन क्यों जब्त नहीं किए गए। उन्होंने अन्य अभियुक्तों के मोबाइल फोन जब्त नहीं किए जाने पर गहरी नाराजगी जताई।<br /> <br /> उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यायालय को बताया कि इस मामले सबूतों से संबंधित लैब की रिपोर्ट 15 नवंबर तक आएगी। इस पर अदालत ने कहा कि 10 दिन का समय दिया गया था। इस दौरान कुछ नहीं किया गया। सरकार ने कहा कि लैब के कामकाज पर उसका नियंत्रण नहीं है। सरकार के जांच से असंतुष्ट खंडपीठ ने कहा कि वह इस मामले की जांच पंजाब हरियाणा उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजीत ङ्क्षसह से कराना चाहती है। इस पर श्री साल्वे ने कहा कि वह इस बारे में शुक्रवार को अगली सुनवाई में सरकार का पक्ष रखेंगे।<br /> <br /> उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में तीन अक्टूबर को किसानों के प्रदर्शन के दौरान तीन आंदोलनकारियों समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी। केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे प्रदर्शनकारी चार किसानों को कार से कुचलकर मारने के आरोप हैं यह आरोप केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के पुत्र आशीष मिश्रा समेत अन्य लोगों पर है। आशीष को मुख्य आरोपी बताया गया है<br /> <br /> गत 26 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई की थी। इस दौरान पीठ ने मामले की जांच में ढीले रवैया पर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ  सरकार को फटकार लगाई थी। न्यायालय ने गवाहों की सुरक्षा का आदेश देते हुए सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराने में तेजी लाने का आदेश दिया था।पीठ ने सुनवाई के दौरान इस घटना को 'जघन्य हत्या' करार दिया था तथा सरकार को गंभीरता से मामले की जांच के आदेश दिये थे।<br /> <br /> पिछली सुनवाई के दौरान सरकार ने पीठ को बताया कि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं की जा रही है। सरकार की ओर से कहा गया था कि 68 गवाहों में 30 के बयान सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज की जा चुकी है।  शीर्ष न्यायालय ने गवाहों की कम संख्या कम बताते हुए कड़ी टिप्पणियां की थीं और कहा था कि सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में हुई घटना में सिर्फ 68 गवाह हैं। उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लिया था, जिसे दो वकीलों के पत्रों के आधार पर जनहित याचिका में तब्दील कर दिया गया था। वकीलों की ओर से इस मामले की न्यायिक जांच और सीबीआई जांच की मांग की गई है।<br /> <br /> गौरतलब है कि कई किसान संगठन केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ देशव्यापी धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। करीब 40 से अधिक किसान संगठन संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले राजधानी दिल्ली की सीमाओं के अलावा देश के अन्य हिस्सों में लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं ।<br /> <br /> किसान संगठनए केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों- कृषक उपज व्यापार (वाणिज्य संवर्धन और सरलीकरण) कानून-2020, कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार कानून-2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून-2020 का विरोध कर रहे हैं। किसानों के विरोध के मद्देनजर शीर्ष अदालत ने जनवरी में इन कानूनों के लागू किए जाने पर रोक लगा दी थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Nov 2021 16:23:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>प्रशासन शहरों के संग अभियान की धीमी गति पर CM गहलोत ने जताई नाराजगी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रशासन शहरों के संग अभियान की मुख्यमंत्री ने की समीक्षा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/6171356cd4fb2/article-1813"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/ashok-gehlot6.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर। </strong>मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार ने प्रशासन शहरों के संग अभियान की धीमी गति पर नाराजगी जताई। गहलोत ने अधिकारियों को आमजन के प्रकरणों का निरस्तारण करने में गति लाने के निर्देश दिए। अब अभियान को गति देने के लिए जिला कलेक्टरों को पाबंद किया है। दीपावली के बाद कलेक्टरों की जयपुर में मुख्यमंत्री ने बैठक बुलाने के भी निर्देश दिए है।</p>
<p><br /> मुख्यमंत्री कार्यालय में वीसी के जरिए गहलोत अभियान की समीक्षा कर रहे थे। हालांकि पहले गांवों के संग अभियान की भी इसी बैठक में समीक्षा होनी थी, लेकिन एनवक्त पर इसकी समीक्षा को स्थगित कर दिया गया, अब इसकी अलग से बैठक होगी। बैठक के बाद यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि प्रशासन शहरों के संग अभियान में कई कानूनी पेचिदगियों की वजह से भी पट्टों में दिक्कत हो रही है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अभियान के 20 दिनों में करीब 11 छुट्टियां आने से भी अभियान गति नहीं पकड़ पाया है। वहीं जिला लेवल पर विभागों में कई पद खाली चल रहे हैं। अब सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी जरूरी खाली पदों को 31 अक्टूबर तक भरा जाए।<br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>सबसे नीचते स्तर के कर्मचारियों को किया जाएगा ट्रेंड</strong></span></span><br />  अभियान में ज्यादा से ज्यादा लोगों को राहत पहुंचाने के लिए सबसे नीचे के स्तर के कर्मचारी को सबसे पहले ट्रेंड किया जाएगा। इसके लिए कलक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि वह नीचे स्तर के कर्मचारी की ट्रेनिंग सुनिश्चित  करें। ताकि अभियान में आने वाली फाइलों में नीचे के लेवल से ही पुख्ता कामकाज हो। अब सरकार कलक्टरों को भी इसके लिए जयपुर बुला रही है। इसके लिए दिवाली बाद जल्द बुलाया जाएगा।<br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong><br /> जोनल प्लान नहीं तो मास्टर प्लान से दे सकते हैं पट्टा</strong></span></span><br />  धारीवाल ने जोधपुर हाईकोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि जिन शहरों के जोनल प्लान नहीं बने हुए हैं, वहां पर मास्टर प्लान तो हैं उनके अनुसार अभियान में राहत देते हुए आमजन से जुड़े प्रकरणों का निस्तारण किया जाएगा। इसके लिए सभी अधिकारियों को निर्देशित कर दिया गया है। मुख्य सचिव निरंजन आर्य सहित अभियान से जुड़े करीब 22 विभागों के उच्चाधिकारी भी बैठक में वीसी के जरिए  शामिल हुए। इसके अलावा यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल और गोविंद सिंह डोटासरा बैठक में शामिल हुए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Oct 2021 15:57:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>आंदोलन पर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने किसान आंदोलन के दौरान रास्ते जाम बनाए रखने के मुद्दे पर गहरी नाराजगी और चिंता व्यक्त की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/%E0%A4%86%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2/article-1426"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/suprim-court.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>सुप्रीम कोर्ट </strong>ने किसान आंदोलन के दौरान रास्ते जाम बनाए रखने के मुद्दे पर गहरी नाराजगी और चिंता व्यक्त की है, जो स्वाभाविक और उचित है। साथ ही अदालत ने केन्द्र व राज्यों की सरकारों के प्रति भी नाराजगी व्यक्त की है। सुप्रीम कोर्ट किसानों के संगठन किसान महापंचायत और उसके अध्यक्ष की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘सत्याग्र्रह’ करने की अनुमति मांगी गई है और इसके बारे में अधिकारियों को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। दो सदस्यीय पीठ के न्यायाधीशों ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि आम लोगों ने पहले से ही पूरे दिल्ली शहर को पंगु बना रखा है और शहर के भीतर आकर क्या करने का इरादा है? अदालत ने कहा कि आपको विरोध का अधिकार है, लेकिन नागरिकों को भी स्वतंत्र रूप से और बिना किसी भय के आने-जाने का समान अधिकार है। रास्तों को अवरुद्ध करने का अधिकार तो किसी को भी नहीं होना चाहिए। कई महीनों से आम नागरिकों को इसका नतीजा भुगतना पड़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र व राज्य सरकारों को रास्ते खुलवाने का निर्देश पहले ही दे चुकी हैं, लेकिन सरकारें कोई प्रयास नहीं कर रही हैं। सरकारें दोष मढ़ने के अलावा कोई सार्थक प्रयास नहीं कर रही है। सरकारें कह रही हैं कि किसान बातचीत करने को तैयार नहीं हैं। सरकारों के इस रुख से भी अदालत खासा नाराज है। ज्ञातव्य है कि किसानों ने पिछले दस महीनों से सीमाओं के रास्ते जाम कर रखे हैं और सड़कों पर अपने ठिकाने बना लिए यह स्थिति लगातार आज तक बनी हुई है। आम नागरिकों, नौकरीपेशा लोगों व राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में स्थित छोटे-बड़े उद्योगों को इसका भारी खामियाजा उठाना पड़ रहा है। काफी लंबे रास्तों को पार पर आवाजाही करनी पड़ रही है। किसान आंदोलन से काफी लोग प्रभावित हैं, लेकिन किसान और सरकारें कोई सकारात्मक रुख दिखाने की जरूरत ही नहीं समझ रहे हैं। दोनों पक्षों ने अड़ियल रुख अपना रखा है। अदालत ने किसान संगठनों से पूछा है कि जब कृषि कानूनों को चुनौती देने के लिए आपने पहले याचिका दायर कर रखी है तो इस आंदोलन को जारी रखने का क्या औचित्य है? किसानों को फैसले का इंतजार करना चाहिए। रास्ते बंद रखने का काफी गंभीर मामला है। किसानों और सरकारों को इस पर गंभीरता से सोचना होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Oct 2021 19:09:38 +0530</pubDate>
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