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                <title>road - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>आजादी के 79 साल बाद भी नहीं मिली सड़क : हाथ में तिरंगा, आंखों में गुस्सा... सड़क के लिए बच्चों संग कलेक्ट्रेट में ग्रामीणों का प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[हमीरपुर में पक्की सड़क की मांग को लेकर चंदूपुर गांव के ग्रामीणों ने बच्चों के साथ करीब 5 किमी तिरंगा यात्रा निकाली और कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि 1.5 किमी कच्ची सड़क बारिश में दलदल बन जाती है, जिससे 1600 लोगों की आवाजाही, बच्चों की पढ़ाई और मरीजों को अस्पताल पहुंचाना मुश्किल है। प्रशासन ने फिलहाल डस्ट बिछाने का काम शुरू कराया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/even-after-79-years-of-independence-the-road-was-not/article-162700"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/gen.png" alt=""></a><br /><p>हमीरपुर। आजादी के बाद से पक्की सड़क की राह देख रहे चंदूपुर गांव और आसपास के डेरों के ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। बदहाल सड़क के निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीण बच्चों के साथ करीब पांच किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा निकालते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। ग्रामीण जिलाधिकारी से मुलाकात कर अपनी समस्या बताना चाहते थे, लेकिन डीएम के नहीं मिलने पर उन्होंने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन शुरू कर दिया।<br />ग्रामीणों ने बताया कि कुरारा विकासखंड के चंदूपुर गांव के बच्ची के डेरा से हमीरपुर तक करीब डेढ़ किलोमीटर सड़क कच्ची है। बारिश के दौरान यह रास्ता दलदल में तब्दील हो जाता है। इससे करीब 1600 की आबादी को आवागमन में परेशानी होती है। बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल हो जाता है, जबकि बीमार और गर्भवती महिलाओं के लिए एंबुलेंस भी गांव तक नहीं पहुंच पाती।</p>
<p>कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने डीएम कार्यालय में जाने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने गेट बंद कर दिया। इसके बाद ग्रामीण मुख्य गेट पर धरने पर बैठ गए और जमकर नारेबाजी की। बच्चों ने हाथों में तिरंगा लेकर सड़क निर्माण की मांग उठाई। करीब चार घंटे तक चले प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट में पुलिस और पीएसी तैनात रही।</p>
<p>डीएम राकेश कुमार, एसडीएम अभिषेक कुमार और सीओ यशपाल सिंह ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शन जारी रहा। दोपहर करीब तीन बजे ग्रामीण वापस लौटे। इसके बाद प्रशासन ने फिलहाल सड़क पर डस्ट बिछाने का काम शुरू कराया, ताकि बारिश में आवागमन की समस्या कुछ कम हो सके।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 11:32:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>विद्युत डीपी बनी बंदरों के लिए काल, करंट की चपेट में आने से हो रहे हादसे</title>
                                    <description><![CDATA[पेड़ों की टहनियां छू रही विद्युत लाइनें , ग्रामीणों ने उठाई सुरक्षा की मांग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/electricity-transformers-turn-deadly-for-monkeys--accidents-caused-by-electric-shocks/article-162618"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(1)44.png" alt=""></a><br /><p>बपावरकलां। कस्बे के ब्रजराज स्टेडियम छबड़ा रोड पर लगी बिजली की डीपी (डिस्ट्रीब्यूशन प्वाइंट) बंदरों के लिए जानलेवा साबित हो रही हैं। डीपी के आसपास लगे पेड़ों की टहनियां विद्युत तारों के संपर्क में आने से आए दिन चपेट में आकर झुलस रहे हैं। कस्बे में विद्युत विभाग की लापरवाही के चलते बंदरों के साथ हादसों का सिलसिला थम नहीं रहा है। ब्रजराज स्टेडियम छपरा रोड पर लगी दोनों डीपी के आसपास बड़े-बड़े पेड़ होने के कारण उनकी टहनियां विद्युत तारों को छू रही हैं। बंदरों के पेड़ों से होकर डीपी के आसपास पहुंचने पर वे करंट की चपेट में आ जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार बंदर करंट लगने से झुलस जाते हैं और घटनास्थल पर ही पड़े रहते हैं। हादसे के बाद उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं होता। जिससे ग्रामीणों में नाराजगी है।</p>
<p><strong>पेड़ों की छंटाई जल्द कराने की मांग</strong><br />ग्रामीणों ने बताया कि पुलिस चौकी बपावर के पास लगी डीपी पर भी इसी तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। बरसात के मौसम में पेड़ों क्री टहनियों और अधिक बढ़ने से खतरा बढ़ गया है। लोगों ने मांग की है कि डीपी के आसपास लगे पेड़ों की छंटाई जल्द कराई जाए और विद्युत उपकरणों को सुरक्षित किया जाए।<br /> <br />बरसात से पहले ही पेड़ों की कटाई कर दी जानी चाहिए थी, लेकिन विभाग की लापरवाही के कारण बंदरों के साथ लगातार हादसे हो रहे हैं।<br /><strong>- लोकेश मीणा, ब्लॉक कांग्रेस,सचिव, बपावरकलां</strong><br /> <br />बंदरों की आए दिन हो रही दुर्घटनाएं चिंता का विषय हैं। विद्युत विभाग को जल्द से जल्द पेड़ों की छंटाई करवानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समस्या का समाधान नहीं किया गया तो धरना प्रदर्शन किया जाएगा।<br /><strong>-मनीष कुमार गौड़, नगर कांग्रेस अध्यक्ष, बपावरकलां</strong><br /> <br />पीपल के पेड़ होने के कारण यहां बार-बार दुर्घटनाएं त हो रही हैं। जल्द ही पेड़ों की टहनियों की कटाई करवाकर स समस्या का समाधान किया जाएगा, ताकि भविष्य में हादसों ए कोरोका जा सके।<br /><strong>- पवन मेहरा, जेईएन, विद्युत विभाग,बपावरकलां</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 14:52:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बारिश में तालाब बन जाता है मेहन्दड़ी-भगवानपुरा मार्ग,मरीजों को चारपाई पर ले जाने की मजबूरी</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रामीणों ने स्थायी समाधान और जल्द कार्रवाई की मांग की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/mehandri-bhagwanpura-road-turns-into-a-pond-during-rains--patients-forced-to-be-carried-on-cots/article-162553"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-(1)5.png" alt=""></a><br /><p>खानपुर। खानपुर के जोलपा ग्राम पंचायत मुख्यालय के अंतर्गत आने वाले मेहन्दड़ी गांव के ग्रामीण लंबे समय से बदहाल सड़क की समस्या से परेशान हैं। मेहन्दडी से भगवानपुरा ग्राम पंचायत मुख्यालय को जोड़ने वाले मार्ग पर करीब दो दशक पुराना खरंजा बना हुआ है। बारिश के दौरान यह रास्ता पानी से लबालब होकर तालाब का रूप ले लेता है, जिससे ग्रामीणों का पंचायत मुख्यालय और आसपास के गांवों से संपर्क प्रभावित हो जाता है। बारिश के दिनों में हालात इतनेखराब हो जाते हैं कि बीमार बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को से चारपाई के सहारे पानी भरे रास्ते निकालना पड़ता है। </p>
<p>वहीं, सड़क किनारे स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय मेहन्दड़ी में मेहन्दड़ी के अलावा सुवालिया, खुजां और भगवानपुरा सहित करीब एक दर्जन गांवों के विद्यार्थी पढ़ने आते हैं। जलभराव के कारण विद्यार्थियों को भी आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने समस्या को लेकर राजस्थान संपर्क पोर्टल, जनसुनवाई तथा ज्ञापन के माध्यम से सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), उपखंड प्रशासन, जिला प्रशासन और जिला कलेक्टर को कई बार अवगत कराया, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 1998 में विधायक कोष से खरंजा स्वीकृत हुआ था। इसके बाद से लंबा समय बीतने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।</p>
<p><strong>एक सप्ताह का अल्टीमेटम</strong><br />ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर उच्च स्तरीय पुलिया निर्माण के लिए बजट आवंटित नहीं किया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने समस्या के स्थायी समाधान की मांग करते हुए प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की अपील की है।</p>
<p><strong>पाइप कंवर्ट के प्रस्ताव से नाराजगी</strong><br />ग्रामीणों के अनुसार पीडब्ल्यूडी ने समस्या के समाधान के लिए दो पाइप कंवर्ट निर्माण का प्रस्ताव दिया है, लेकिन ग्रामीण इसे उचित समाधान नहीं मान रहे। उनका कहना है कि पाइप कंवर्ट बनने से रास्ता और नीचे हो जाएगा तथा जलभराव की समस्या बनी रहेगी। ग्रामीणों ने इसके बजाय उच्च स्तरीय पुलिया निर्माण की मांग की है।</p>
<p>पीडब्ल्यूडी द्वारा केवल दो पाइप कंवर्ट निर्माण का प्रस्ताव दिया जा रहा है, जो इस समस्या को और अधिक बढ़ा देगा। पाइप कंवर्ट बनने से खंरंजा और नीचे हो जाएगा, जिससे वहां से निकलना और भी मुश्किल हो जाएगा इसलिए हम इसकी जगह एक उच्च स्तरीय पुलिया की मांग कर रहे हैं।<br /><strong>- गिरिराज बाई, कस्बेवासी</strong></p>
<p>सड़क किनारे स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में महेंदडी के अलावा सुवालिया, खुजा और भगवानपुरा सहित करीब एक दर्जन गांवों के बच्चे पढ़ने आते हैं। खराब रास्ते के कारण स्कूली बच्चों को रोजाना सबसे ज्यादा मशक्कत और परेशानियों का सामना करना पड़ता है।<br /><strong>- राहुल बैरवा, कस्बेवासी</strong></p>
<p>यदि एक सप्ताह के भीतर उच्च स्तरीय पुलिया निर्माण हेतु बजट का आवंटन नहीं किया गया, तो हम और अधिक कड़ कदम उठाने पर मजबूर होंगे।<br /><strong>-अभिषेक वर्मा, कस्बेवासी</strong></p>
<p>ढाई दशक से ज्यादा समय बीत गया लेकिन महेंदडी से भगवानपुरा मार्ग पर बना यह पुराना खरंजा आज भी जस का तस है। बारिश के दिनों में यह रास्ता पूरी तरह से तालाब का रूप ले लेता है, जिससे गांव का संपर्क पंचायत मुख्यालय और पूरे उपखंड क्षेत्र से पूरी तरह कट जाता है।<br /><strong>- अंकित कस्बेवासी</strong></p>
<p>सड़क मार्ग खराब होने के कारण बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के बीमार पड़ने पर उन्हें एम्बुलेंस या वाहन के बजाय चारपाई के सहारे रास्ता पार करवाना पड़ता है।<br /><strong>- हरलाल बेरता, कस्बेवासी</strong></p>
<p>इस समस्या को लेकर कई बार राजस्थान संपर्क पोर्टल, जनसुनवाई और ज्ञापनों के माध्यम से सूचित किया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।<br /><strong>- दीनदयाल चौबदार, कस्बेवासी</strong></p>
<p>सीडी वर्ग के प्रस्ताव मांगे गए थे, उसमें जेएलजी प्रस्ताव आ गया था वह स्वीकृत हो गया है। दो पाइप हो चुके हैं अभी एन आई दी खोल रखी है जैसे ही एनआईटी मिल जाएगी तो कार्य चालू हो जाएगा। <br /><strong> - प्रदीप चौधरी, सहायक अभियंता, पीडब्लूडी खानपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 17:37:07 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title> जमीन के विवाद में अटकी श्मशान घाट की सुविधाएं</title>
                                    <description><![CDATA[बारिश में अंतिम संस्कार के दौरान परिजनों को उठानी पड़ती है परेशानी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/cremation-ground-facilities-stalled-due-to-land-dispute/article-162559"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-(2)2.png" alt=""></a><br /><p>सांगोद। आजादी के 78 वर्ष बाद भी जिले के दूसरे सबसे बड़े उपखंड सांगोद के कई गांव बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। सांगोद पंचायत समिति के काशीपुरा गांव में स्थिति ऐसी है कि ग्रामीणों को अपने परिजनों का अंतिम संस्कार भी सम्मानजनक तरीके से कराने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। गांव के श्मशान घाट पर न टीनशेड है, न बैठने की व्यवस्था और न ही बारिश से बचाव के लिए कोई स्थायी इंतजाम। बरसात के दिनों में अंतिम संस्कार करना ग्रामीणों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।</p>
<p>ग्रामीणों के अनुसार बारिश होने पर श्मशान घाट में रखी लकड़ियां भीग जाती हैं, जिससे चिता जलाने में काफी परेशानी होती है। अंतिम यात्रा में शामिल लोगों को खुले आसमान के नीचे बारिश में खड़े रहना पड़ता है। कई बार ग्रामीण तिरपाल बांधकर किसी तरह अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करते हैं। ऐसे में जीवन के अंतिम पड़ाव पर भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव ग्रामीणों को खल रहा है।</p>
<p><strong>प्रशासन से कई बार लगा चुके हैं गुहार</strong><br />ग्रामीणों का कहना है कि श्मशान घाट पर टीनशेड सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग कई बार ग्राम पंचायत एवं प्रशासन के समक्ष रखी जा चुकी है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ। बारिश के मौसम में हर बार यही स्थिति सामने आती है और किसी परिवार में मृत्यु होने पर परिजनों को दुख की घड़ी में अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>ग्रामीणों ने की स्थायी समाधान की मांग</strong><br />ग्रामीणों ने श्मशान घाट पर टीनशेड, पक्का चबूतरा, पानी की व्यवस्था और पहुंच मार्ग जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि अंतिम संस्कार जैसी जरूरी व्यवस्था के लिए ग्रामीणों को मौसम की मार नहीं झेलनी पड़े, इसके लिए जरूरी है।</p>
<p>काशीपुरा में श्मशान घाट केलिएजिस भूमि का आवंटन किया गया था, वह वर्तमान में विवादित है। भूमि विवाद के चलते वहां विकास कार्य नहीं कराए जा सके हैं। राजस्व विभाग की ओर से वैकल्पिक भूमि आवंटित किए जाने के बाद श्मशान घाट का निर्माण एवं वहां आवश्यक सुविधाएं विकसित करने की कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>- सूरज वर्मा, ग्राम विकास अधिकारी, काशीपुरा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 17:01:39 +0530</pubDate>
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                <title>किसी वाहन की कमानी टूट रही, तो किसी का बिगड़ रहा संतुलन</title>
                                    <description><![CDATA[गड्ढों में तब्दील हुई टिपटा की सड़क, हर कदम पर खतरा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/vehicles-suffering-broken-suspension-springs-and-loss-of-balance/article-162536"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(3)21.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में अभी तो ठीक से बरसात शुरु भी नहीं हुई है। उससे पहले ही सड़कों की हालत खराब होने लगी है। जिससे हादसों का खतरा बना हुआ है। ऐसे ही खतरे से सैकड़ों वाहन चालकों को रोजाना दो चार होना पड़ रहा है।यह मामला वैसे तो एक जगह का है लेकिन इसी तरह की स्थिति शहर में कई जगह पर देखी जा सकती है। टिपटा में गढ़ पैलेस के पास सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढ़े हो रहे हैं। जिससे उस सड़क से रोजाना गुजर रहे सैकड़ों वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं वाहनों का संतुलन बिगडऩे से हादसों का भी खतरा बना हुआ है।</p>
<p>हालत यह है कि एक तो यहां का रास्ता काफी संकरा है। ऐसे में यहां दोनों तरफ से वाहनों की आवाजाही 24 घंटे बनी हुई है। दिन के समय तो इस सड़क पर ट्रैफिक अधिक होने से यहां कई बार जाम के हालात बने रहते हैं। जिससे वाहनों को रैंग-रैंग कर निकलना पड़ रहा है। वाहन चालकों का कहना है कि गढ़ के पास सड़क पर लम्बे समय से बड़े-बड़े गड्ढे हो रहे हैं। ऐसे में किशोरपुरा स्थित एलिवेटेड पुलिया से साई बाबा मंदिर की तरफ जाते समय गड्ढ़ों में वाहनों को दचके लग रहे हैं। साथ ही कई वाहनों को रोजाना नुकसान भी हो रहा है।</p>
<p>लोगों का कहना है कि आए दिन ई रिक् शा हो या ऑटो किसी ने किसी वाहन की या तो कमानी टूट रही है या फिर वाहन का संतुलन बिगडऩे से हादसों का खतरा बना हुआ है। दिन में रोजाना कई बार इस तरह के दृश्य देखे जा सकते हैं।इतना ही नहीं इसके आगे बैराज के समानांतर पुल पर भी दोनों तरफ काफी बड़े गड्ढ़े हो रहे हैं। जिससे वाहनों का संतुलन बिगड़ रहा है।</p>
<p><strong>तीन तरफ से आ रहे वाहन</strong><br />स्थानीय लोगों का कहना है कि गढ़ के सामने से दशहरा मैदान की तरफ जाने का रास्ता काफी संकरा है। ऐसे में यहां तीन तरफ से वाहन निकल रहे हैं। एक सकतपुरा व पाटनपोल की तरफ से दशहरा मैदान की तरफ जाने वाले वाहन, दूसरे दशहरा मैदान व एलिवेटेड पुलिया से आने वाले वाहन उस संकरे रास्ते से निकल रहे हैं। दिन के समय तो यहां से कचरे के डम्पर और स्कूली बच्चों के वाहन ऑटो व वैन तक निकलते हैं। जिससे वहां जाम के साथ ही हादसों का भी खतरा बना हुआ है।</p>
<p><strong>काम जरा सा, हादसों का इंतजार</strong><br />स्थानीय लोगों का कहना है कि गढ़ के पास सड़क का जरा सा हिस्सा खराब हो रहा है। लेकिन गड्ढ़े अधिक गहरे व बड़े हैं। जिससे अचानक आने वाले वाहन झटके से उन गड्ढ़ों में उछल रहे हैं। जिससे वाहनों को नुकसान व हादसों का खतरा बना हुआ है। इसके बावजूद प्रशासन बड़ा हादसा होने का इंतजार कर रहा है। लोगों का कहना है कि प्रशासन तो बड़ा हादसा होने के बाद ही चेेतता रहा है। जबकि छोटा सा काम बहुत कम समय में हो सकता है उसे नहीं कर रहे।</p>
<p>यह तो एक जगह का मामला है। इसी तरह से शहर में अधिकतर सड़कों की भी यही स्थिति है। जिनमें विज्ञान नगर पीएफ कार्यालय के सामने की सड़क हो या मस्जिद रोड,नयापुरा की अंदरूनी सड़कें हो या छावनी की। सभी जगह सड़कों पर अभी से बड़े-बड़े गड्ढ़े हो रहे हैं। बरसात आने पर ये गड्ढ़े और बड़े हो जाएंगे।</p>
<p><strong>24 घंटे ट्रैफिक से परेशानी</strong><br />नगर निगम के अधिशाषी अभियंता ए.क्यू कुरैशी ने बताया कि इस सड़क पर 24 घंटे ट्रैफिक चलता है। दिन ही नहीं रात में भी डम्पर निकलते रहते हैं। जिससे इस सड़क को नुकसान होता है। पूर्व में कई बार इसे सुधारा भी जा चुका है। लेकिन वाहनों के दबाव के कारण यहां फिर से गड्ढ़े हो जाते हैं। लेकिन इन गड्ढ़ों को जल्दी ही सही करवा दिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 16:08:49 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का...मिट्टी और कार्य प्रगति का हटाया बोर्ड, दूर हुई बाधा</title>
                                    <description><![CDATA[मिट्टी के ढेर से निकलते समय वाहनों का संतुलन बिगड़ने से हादसे का खतरा बना था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report----soil-pile-and--work-in-progress--board-removed--obstruction-cleared/article-162533"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(5)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जयपुर गोल्डन रोड स्थित तालाब के किनारे सड़क बनने के बाद लगे मिट्टी के ढेर व कार्य प्रगति के लगे बोर्ड को शनिवार को हटा दिया गया। जिससे बाधा दूर होने के साथ ही रास्ता क्लीयर हो गया। वहीं इस मार्ग से दिनभर वाहन आसानी से निकलते रहे। तालाब किनारे मंदिर के पीछे की तरफ सड़क का काफी हिस्सा क्षतिग्रस्त हो रहा था। जिसे कोटा विकास प्राधिकरण द्वारा मरम्मत कर सही करवाया गया है। लेकिन सड़क मरम्मत के लिए बंद किया गया रास्ता काफी समय तक बंद रहा। जिससे वन वे ट्रैफिक चलने से जाम की स्थिति बन रही थी। वहीं सड़क तैयार होने के बाद सड़क से वाहनों का आवागमन तो शुरू हो गया था लेकिन संवेदक द्वारा एक तरफ से मिट्टी का ढेर और दूसरी तरफ कार्य प्रगति का बोर्ड नहीं हटाया था। जिससे वाहन चालकों को उस मिट्टी के ढेर से निकलने को मजबूर होना पड़ रहा था। ऐसे में कई वाहनों का संतुलन बिगडऩे से हादसों का खतरा बना हुआ था तो कई चार पहिया वाहनों के बोनट मिट्टी के ढेर से अडऩे के कारण खराब हो रहे थे।</p>
<p>इस संबंध में दैनिक नवज्योति ने समाचार प्रकाशित किया था। केडीए अधिकारी हरकत में आए और संवेदक को पाबंद कर मिट्टी के ढेर को हटवाया गया। मिट्टी के ढेर व बोर्ड को फिलहाल तालाब किनारे की तरफ साइड में किया गया है। केडीए सचिव मुकेश कुमार चौधरी ने बताया कि संबंधित अधिकारियों के माध्यम से संवेदक को आदेश दिया गया कि वह मिट्टी के ढेर व बोर्ड को तुरंत हटाए। जिससे लोगों को परेशानी नहीं हो। शनिवार को सड़क के दोनों तरफ की बाधाओं को हटा दिया गया। जिससे वाहन दिनभर सुगमता से निकलते रहे।</p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था मामला प्रकाशित</strong><br />गौरतलब है कि सड़क बनने के बाद भी संवेदक द्वारा मौके से मिट्टी और कार्य प्रगति का बोर्ड नहीं हटाने से वाहन चालकों को होने वाली परेशानी का मामला दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। समाचार पत्र में 8 अगस्त को पेज 11 पर' तालाब किनारे रास्ता चालू हुआ, नहीं हटी बाधा शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें मिट्टी व बोर्ड नहीं हटने से रास्ता चालू होने के बावजूद वाहन चालकों को हो रही परेशानी व हादसों के खतरे के बारे में बताया था। साथ ही बरसात के समय अधिक दुर्घटना होने की आशंका भी जताई थी। इसके बाद कोटा विकास प्राधिकरण के अधिकािरयों ने संवेदक को मिट्टी हटाने के लिए आदेश देते हुए पाबंद किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 16:06:02 +0530</pubDate>
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                <title>अस्पताल या तालाब! बारिश में डूबा अटरू चिकित्सालय परिसर</title>
                                    <description><![CDATA[ नगरपालिका निरीक्षण में खुलासा, बंद नालियां और खराब ड्रेनेज बनीं जलभराव की मुख्य वजह।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/hospital-or-pond--atru-hospital-complex-submerged-in-rainwater/article-162363"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)41.png" alt=""></a><br /><p>अटरू। बरसात आते ही अटरू उपजिला चिकित्सालय में मरीजों के  लिए इलाज से पहले पानी से जूझने की  मजबूरी बन जाती है। अस्पताल परिसर में जमा बारिश का पानी व्यवस्था की ऐसी तस्वीर पेश कर रहा है, मानो चिकित्सालय नहीं बल्कि तालाब हो। हर वर्ष सामने आने वाली इस समस्या की पड़ताल में जलभराव की असली वजह सामने आई है। नगरपालिका के निरीक्षण में अस्पताल परिसर की नालियों कचरे, मिट्टी और मलबे से बंद मिलीं, जिसके कारण बारिश का पानी बाहर नहीं निकल पा रहा है। अस्पताल परिसर में पानी भरने से मरीजों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इलाज के लिए आने वाले लोगों को कई बार पानी भरे रास्तों से होकर अस्पताल तक पहुंचना पड़ता है। जलभराव के कारण संक्रमण फैलने और मच्छरों के पनपने का खतरा भी बना रहता है।</p>
<p><strong>हर मानसून में दोहराती है समस्या</strong><br />स्थानीय लोगों के अनुसार अटरू उपजिला चिकित्सालय में जलभराव की समस्या कोई नई नहीं है। कई वर्षों से बारिश के मौसम में यही स्थिति बनती आ रही है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र के प्रमुख सरकारी अस्पताल में जहां मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा  मिलनी चाहिए, वहीं बरसात के दिनों में परिसर में जमा पानी परेशानी का कारण बन जाता है। </p>
<p><strong>निरीक्षण में बंद मिलीं अस्पताल की नालियां</strong><br />जलभराव की शिकायत मिलने पर नगरपालिका के कार्यवाहक अधिशासी अधिकारी योगेन्द्र प्रसाद त्रिवेदी ने स्वास्थ्य निरीक्षक मदनमोहन भार्गव को अस्पताल परिसर का निरीक्षण करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान सामने आया कि अस्पताल परिसर के अंदर बनी कई नालियां कचरे, मिट्टी और मलबे के कारण पूरी तरह बंद पड़ी हैं। इसके चलते बारिश का पानी नालियों के माध्यम से बाहर नहीं निकल पा रहा है और परिसर में जमा हो रहा है। निरीक्षण में यह तथ्य भी सामने आया कि अस्पतालपरिसर का स्तर बाहरी सड़क की तुलना में काफी नीचा है, जबकि बाहर की नालियां ऊंची हो चुकी हैं। इसी वजह से बारिश का पानी बाहर निकलने के बजाय अस्पताल परिसर में ही रुक जाता है और जलभराव की स्थिति बन जाती है।</p>
<p><strong>बीसीएमओ ने बताई वर्षों पुरानी समस्या</strong><br />ब्लॉक चिक्रित्सा अधिकारी डॉ. केशवराज नागर ने बताया कि बरसात के दौरान अस्पताल परिसर में जलभराव की समस्या हर वर्ष सामने आती है। इस संबंध में कई बार नगरपालिका को अवगत कराया है, लेकिन अभी तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने अस्पताल के बाहर स्थित बड़े नालों की सफाई कराने के साथ ही स्थायी ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने की आवश्यकता बताई।</p>
<p><strong>सिर्फ सफाई नहीं, स्थायी समाधान की जरूरत</strong><br />कार्यवाहक अधिशासी अधिकारी योगेन्द्र प्रसाद त्रिवेदी ने बताया कि अस्पताल के बाहर स्थित बड़े नालों की पहले भी सफाई करवाई जा चुकी है। यदि जल निकासी की समस्या फिर भी बनी हुई है तो दोबारा निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य निरीक्षक की रिपोर्ट में अस्पताल परिसर की आंतरिक नालियां बंद होने और बाहरी नालियों के ऊंचे स्तर के कारण जल निकासी प्रभावित होने की बात सामने आई है। समस्या के स्थायी समाधाम के लिए अस्पताल परिसर का स्तर ऊंचा करना होगा। साथ ही अंदर की नालियों का पुनर्निर्माण कर उन्हें बाहरी ड्रेनेज सिस्टम से वैज्ञानिक तरीके से जोड़ना जरूरी है।</p>
<p><strong>नागरिकों ने मांगा स्थायी ड्रेनेज सिस्टम</strong><br />स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और नगरपालिका से मांग की है कि हर वर्ष होने वाली जलभराव की समस्या को केवल नालियों की सफाई तक सीमित न रखा जाए। अस्पताल परिसर में स्थायी जल निकासी व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि मानसून के दौरान मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।</p>
<p><strong>इनका  कहना है </strong><br /> बरसात के मौसम में अस्पताल परिसर में हर वर्ष जलभराव की समस्या आती है। प्रत्येक वर्ष नगरपालिका को अवगत कराया जाता है, लेकिन अब तक पानी निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी। अस्पताल के बाहर जाम पड़े बड़े नालों की सफाई कराने तथा अस्पताल के लिए स्थायी ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने की आवश्यकता है ताकि हर मानसून में होने वाली इस समस्या का स्थायी समाधान हो सके।<br /><strong>- डॉ. केशवराज नागर, ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी</strong></p>
<p> अस्पताल के बाहर स्थित बड़े नालों की पूर्व में सफाई करवाई जा चुकी है। यदि फिर भी जल निकासी की समस्या बनी हुई है तो दोबारा निरीक्षण कर आवश्यकतानुसार नालों की सफाई करवाई जाएगी। स्वास्थ्य निरीक्षक मदनमोहन भार्गव की रिपोर्ट में अस्पताल परिसर की आंतरिक नालियां बंद होने तथा बाहरी नालियों के ऊंचे स्तर के कारण जल निकासी प्रभावित होने की बात सामने आई है।<br /><strong>- योगेन्द्र प्रसाद त्रिवेदी, कार्यवाहक अधिशासी अधिकारी, नगरपालिका अटरू</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 14:56:53 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>तालाब किनारे रास्ता चालू हुआ : नहीं हटी बाधा, बरसात में दुर्घटना का  खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[रास्ता बंद करने वाली बैरिकेडिंग व मिट्टी के ढेर नहीं हटाए गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/road-near-the-pond-reopened--but-obstructions-remain--risk-of-accidents-during-rains/article-162357"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(1)34.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जयपुर गोल्डन रोड स्थित सरोवर टॉकीज के सामने मंदिर के पास बदहाल हो चुकी सड़क को तो कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से सही कर दिया गया। जिससे वहां से रास्ता तो चालू हो गया लेकिन अभी तक भी दोनों तरफ की बाधाएं नहीं हटी हैं। जिससे वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं बरसात में वाहनों के फिसलने से दुर्घटना का खतरा भी बना हुआ है। तालाब किनारे मंदिर के पास की सड़क का एक बड़ा हिस्सा पिछले काफी समय से खस्ताहाल हो रहा था। जिससे वाहन चालकों को उन गड्ढ़ों से हिचकोले खाते हुए निकलना पड़ रहा था। उससे भी वाहनों का संतुलन बिगड़कर दुर्घटना का खतरा बना हुआ था।आमजन की इस समस्या को देखते हुए कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से सड़क की मरम्मत तो करवा दी गई। मरम्मत के दौरान जयपुर गोल्डन के सामने मल्टी स्टोरी पार्किंग से ही वाहनों को डायवर्ट कर वनवे रास्ते से निकाला गया था। जिससे गीता भवन से नयापुरा की तरफ और नयापुरा से गीता भवन की तरफ जाने का एक ही सड़क से रास्ता था। जिससे वाहनों के जाम की समस्या बनी हुई थी।</p>
<p><strong>एक तरफ बोर्ड तो दूसरी तरफ मिट्टी के ढेर</strong><br />वहीं सड़क मरम्मत के बाद भी संवेदक की ओर से सड़क के दोनों तरफ रास्ता बंद करने के लिए लगाई गई बेरीकेडिंग व लगाए मिट्टी के ढेर को नहीं हटाया गया। जिससे वाहन चालकों ने परेशान होकर खुद ही सड़क मरम्मत के बाद वहां से वाहनों को निकालना शुरु कर दिया। जबकि अभी भी सड़क के दोनों तरफ की बाधाओं को नहीं हटाया गया है। ऐसे में हालत यह है कि मल्टी स्टोरी पाकिंग के सामने तो कार्य प्रगति पर होने का बोर्ड लगा हुआ है। जहां साइड से थोड़ी सी जगह से वाहन निकल रहे हैं। वहीं आगे मंदिर के पास व उसके आगे दो जगह पर मिट्टी के ढेर से वाहनों को निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>बरसात होने पर अधिक खतरा</strong><br />वाहन चालकों ने बताया कि जैसे-तैसे दो पहिया वाहन तो निकल रहे हैं। जबकि चार पहिया वाहनों को मिट्टी के ढेर से निकलने में परेशानी हो रही है। कई बार वाहन का पिछला हिस्सा तो कभी बोनट का हिस्सा मिट्टी के ढेर से अडऩे पर वाहनों को नुकसान हो रहा है। वहीं दो पहिया वाहनों का भी संतुलन बिगडऩे का खतरा बना हुआ है। बरसात के समय में यह खतरा अधिक बढ़ जाएगा। ऐसे में वाहनों के फिसलने पर लोगों के चोटिल होने तक का खतरा बना हुआ है। शुक्रवार को भी दिनभर वाहन तो निकले लेकिन लोग परेशान होते रहे।</p>
<p><strong>वनवे वाले रास्ते पर जाम</strong><br />वहीं जो वाहन इस रास्ते से नहीं निकले तो दूसरी तरफ वनवे वाली साइड पर लोगों को ट्रैफिक जाम की समस्या का सामना करना पड़ा। इस रास्ते से निकलने वाले वाहन चालक प्रशासन को कोसते रहे।</p>
<p><strong>मिट्टी का ढेर जल्दी हटवा देंगे</strong><br />सीसी रोड बनने के बाद उसे सैट होने में समय लगता है। इस कारण से रास्ता बंद रखना पड़ता है। लेकिन अब रास्ता चालू हो गया है तो मिट्टी के ढेर व बोर्ड को भी जल्दी ही हटवा देंगे।<br /><strong>-मुकेश कुमार चौधरी, सचिव, कोटा विकास प्राधिकरण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 14:24:14 +0530</pubDate>
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                <title>करोड़ों की आधुनिक मोटर मार्केट गंदगी की चपेट में, कचरे से बढ़ा बीमारियों का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[ पेट्रोल पंप के पास कई बार लग चुकी आग, सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/state-of-the-art-motor-market--built-at-a-cost-of-crores--plagued-by-filth--garbage-increases-disease-risk/article-162182"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/motor.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। डीसीएम रोड पर संजय नगर आरओबी के पास बने आधुनिक मोटर मार्केट में लगा गंदगी का अम्बार बीमारियों का घर बन रहा है। यहां रोजाना हजारों लोग अपनी गाडिय़ां ठीक करवाने आ रहे हैं। वहीं  कचरे व गंदगी के कारण अपने साथ बीमारियां लेकर जा रहे हैं। तत्कालीन नगर विकास न्यास की ओर से एरोड्राम स्थित मोटर मार्केट के मैकेनिकों को यहां से शिफ्ट करने के लिए डीसीएम रोड पर नया मोटर मार्केट बनाया था। इस मार्केट में करीब 400 से अधिक दुकानें बनाकर मैकेनिकों को यहां पुनर्वास किया गया।</p>
<p>करोड़ों रुपए की लागत से बने इस मोटर मार्केट को आधुनिक मोटर मार्केट का नाम दिया गया था। यहां चौड़ी सड़क से लेकर रोशनी और जन सुविधा से लेकर सभी तरह की सुविधाएं विकसित की गई थी। लेकिन वर्तमान में देखरेख व नियमित सफाई नहीं होने से यह कचरे से अटा पड़ा है।</p>
<p><strong>मुख्य द्वार से लेकर नालियां तक जाम</strong><br />स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि मोटर मार्केट बना था उस समय तो अच्छा था। लेकिन वर्तमान में यहां न तो केडीए की ओर से ध्यान दिया जा रहा है और न ही नगर निगम की ओर से सफाई करवाई जा रही है। जिससे मुख्य द्वार से प्रवेश करते ही कचरे का ढेर देखा जा सकता है। उसके बाद अंदर जगह-जगह पर हर थोड़ी दूरी पर कचरे के ढेर लगे हुए हैं। दुकानदार दुकानों में सफाई करके कचरा बाहर निकाल रहे हैं। साथ ही गाडिय़ां सही होने से भी कचरा निकल रहा है। लेकिन उस कचरे को उठाने के लिए यहां टिपर तक नहीं आ रहे हैं।</p>
<p>इतना ही नहीं मार्केट की सभी नालियां तक कचरे से जाम हो रही हैं। अभी बरसात का सीजन है। ऐसे में बरसात अधिक होने पर नालियों से पानी की निकासी नहीं होने पर सारा गंदा पानी मार्केट में जमा होगा। जिससे पहले से ही कचरे की गंदगी से दुर्गंध का सामना करना पड़ रहा है। वहीं आने वाले समय में बदबू से बीमारियां अधिक होने का खतरा बढ़ गया है।</p>
<p><strong>पास में पेट्रोल पम्म, गर्मी में लग चुकी आग</strong><br />स्थानीय दुकानदार मोहम्मद एजाज ने बताया कि मार्केट में करीब तीन सौ से अधिक दुकानें हैं। जहां दुकानदारों के अलावा वहां काम करने वाले मैकैनिक भी हैं। वहीं रोजाना गाडिय़ां ठीक करवाने के लिए आठ सौ से हजार लोग आ रहे हैं। ऐसे में सभी को कचरे व दुर्गंध का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि मार्केट के पास ही पेट्रोल पम्प है। गर्मी के समय मार्केट में लगे कचरे के ढेर में कई बार आग लग चुकी है। जिससे पेट्रोल पम्प पर भी आग पहुंचने का खतरा बन गया था। ऐसे में वहां के कर्मचारी भी मार्केट में सफाई करवाने के बारे में कह चुके हैं। लेकिन अभी तक भी कुछ नहीं हुआ है। दुकानदारों का कहना है कि केडीए ने तो मार्केट बनाकर दिया है। लेकिन यहां साफ सफाई करवाने की जिम्मेदारी नगर निगम की है।</p>
<p>इधर नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि हर जगह पर टिपर जा रहे हैं। मोटर मार्केट में नियमित टिपर नहीं जाने की जानकारी नहीं है। इसकी जानकारी करके वहां भी सफाई करवा दी जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 14:57:06 +0530</pubDate>
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                <title>सड़क सही हुई, ट्रैफिक नहीं सुधरा</title>
                                    <description><![CDATA[सरोवर टॉकीज के सामने सड़क बनने के बाद भी  दोनों तरफ से रास्ता बंद।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/road-repaired--but-traffic-flow-remains-chaotic/article-162063"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(1)21.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में एक तरफ तो ट्रैफिद्दक का दबाव वैसे ही अधिक है। वहीं दूसरी तरफ सरोवर टॉकीज के सामने बदहाल सड़क को सही करने का काम पृूरा होने के बाद भी अभी तक उस सड़क को चालू नहीं किया गया है। जिससे अभी भी सिंगल रोड से दोनों तरफ का ट्रैफिक निकलने से जाम व वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p>सरोवर टॉकीज के सामने मंदिर के साइड में तालाब किनारे की सड़क पिछले काफी समय से खराब हो रही थी। जिससे वहां से वाहनों को निकलने में हिचकोले खाने पड़ रहे थे। जिससे दो पहिया वाहन ही नहीं चार पहिया वाहनों व ई रिक् शा का संतुलन बिगडऩे से एक्सीडेंट का खतरा बना हुआ था। इस संबंध में दैनिक नवज्योति में समाचार प्रकाशित होने के बाद कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से इस बदहाल सड़क की मरम्मत का काम शुरु किया गया था। 21 जुलाई को काम शुरु किया गया। जिसे पूरा हुए भी कई दिन हो गए हैं। उसके बाद भी अभी तक इस सड़क से वाहनों का आवागमन शुरु नहीं किया गया है।</p>
<p>स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क के दोनों ओर एक तरफ तो सरोवर पार्किंग के सामने से रास्ता बंद किया गया है। जिससे वाहनों को पार्किंग वाली साइड से ही जाना पड़ रहा है। वहीं सरोवर टॉकीज के सामने की तरफ भी मिट्टी का ढेर लगाकर रास्ता बंद किया हुआ है। ऐसे में सिंगल रोड से ही दोनों तरफ का ट्रैफिक निकलने से दिन में कई बार विशेष रूप से शाम के समय यहां ट्रेफिक जाम की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p>लोगों का कहना है कि सीसी सड़क बनने के बाद उसे चालू किया जाना चाहिए। जिससे वाहन चालकों को परेशानी नहीं हो। साथ ही संकरे रोड से दोनों तरफ का ट्रैफिक निकलने से जाम के साथ ही एक्सीडेंट का खतरा भी बना हुआ है। काम चल रहा था तब तक तो रास्ता बंद करना सही था लेकिन काम पूरा होने के बाद भी कई दिन से रास्ता बंद किया हुआ है।<br />इधर केडीए अधिकारियों का कहना है कि सीसी रोड बनने के बाद उस पर पानी का छिड़काव किया जाता है। जिससे सड़क पक्की हो जाए। कच्ची सड़क पर वाहनों के निकलने से कई बार सड़क खराब हो जाती है। जल्दी ही यहां से रास्ता चालू कर दिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 15:39:24 +0530</pubDate>
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                <title>खस्ताहाल सड़क बनी हादसे का सबब, राहगीर परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[बरसात के दौरान गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का सही अनुमान नहीं लग पाता।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/dilapidated-road-causes-accidents--commuters-face-hardship/article-161700"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(2)2.png" alt=""></a><br /><p>चौमहला। राज्य सरकार के गड्डा मुक्त सड़क अभियान के दावों की पोल चौमहला कस्बे की मुख्य बाजार सड़क खोल रही है। झंडा चौक से डॉ. रमेश खटीक तक जाने वाला प्रमुख मार्ग लंबे समय से जर्जर हालत में पड़ा है। सड़क की एक ओर की पूरी परत उखड़ जाने से जगह-जगह बड़े गड्ढे बन गए हैं, जबकि दूसरी ओर सड़क ऊंची-नीची होने से वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आए दिन दोपहिया वाहन चालक संतुलन खोकर गिर रहे हैं और चोटिल हो रहे हैं। </p>
<p>यह मार्ग कस्बे का सबसे व्यस्त व्यापारिक क्षेत्र होने केकारण दिनभर भारी यातायात रहता है। बरसात के दौरान गड्डों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ जाता है। सड़क की बदहाली से स्थानीय व्यापारियों, राहगीरों और वाहन चालकों में भारी नाराजगी है। </p>
<p>स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़क की मरम्मतको लेकर कई बार संबंधित विभाग और प्रशासन को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का आरोप है कि गड्डा मुक्त सड़क अभियान केवल कागजों तक सीमित नजर आ रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर हालात बद से बदतर हैं।</p>
<p><strong>बड़े हादसे की आशंका, शीघ्र मरम्मत की मांग</strong><br />क्षेत्रवासियों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से सड़क की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते गड्डों को भरकर सड़क दुरुस्त नहीं की गई, तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों ने चेतावनी दी कि किसी अप्रिय घटना की स्थिति में इसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और प्रशासन की होगी। </p>
<p>सड़क दिखवाकर शीघ्र मरम्मत करवाई जाएगी।<br /><strong>- शंकर सिंह कनिष्ठ अभियंता सार्वजिनक निर्माण विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 16:09:19 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>स्मार्ट सिटी में लापरवाही की तस्वीर! करोड़ों के डिवाइडर हुए बैरंग, टाइलें चोरी और सूखे पौधों ने खोली व्यवस्था की पोल</title>
                                    <description><![CDATA[प्रशासन के साथ नागरिकों की जिम्मेदारी भी बनी अहम।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/a-picture-of-negligence-in-the--smart-city---multi-crore-rupee-dividers-have-lost-their-sheen--stolen-tiles-and-withered-plants-expose-the-state-of-the-system/article-160460"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)82.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित हो रहे कोटा शहर की खूबसूरती बढ़ाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए डिवाइडर आज अपनी ही बदहाली की कहानी बयां कर रहे हैं। कभी आकर्षण का केंद्र रहे ये डिवाइडर अब जगह-जगह से टूटी टाइलों, सूखे पौधों और चोरी हुए लाइट के केबलों के कारण बदरंग नजर आ रहे हैं। शहर को स्मार्ट बनाने के लिए प्रशासन लगातार योजनाएं बना रहा है, लेकिन यदि सार्वजनिक संपत्तियों का संरक्षण नहीं हुआ और नागरिकों में जिम्मेदारी की भावना विकसित नहीं हुई तो स्मार्ट सिटी का सपना केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगा।</p>
<p><strong>करोड़ों खर्च, लेकिन सुंदरता पर ग्रहण</strong><br />शहर की प्रमुख सड़कों पर आकर्षक डिवाइडर बनाकर उन पर महंगी टाइल्स लगाई गई थीं। हरियाली बढ़ाने के लिए पौधारोपण किया गया और आधुनिक लाइटिंग व्यवस्था भी विकसित की गई। उद्देश्य था कि कोटा की पहचान एक आधुनिक और व्यवस्थित शहर के रूप में बने, लेकिन कुछ ही समय में इन विकास कार्यों की चमक फीकी पड़ने लगी। रखरखाव की कमी और चोरी की घटनाओं ने करोड़ों रुपये की इस सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है। शहर के जेडीबी कॉलेज रोड पर लगे विद्युत पोलों से लाइटें चोरी हो चुकि हैं, जिससे रात के समय अंधेरा छाया रहता है। वहीं सर्किट हाउस से रेलवे स्टेशन जाने वाले मार्ग पर बने डिवाइडर अपनी रंगत खो चुके हैं। कई स्थानों पर रंग उखड़ चुका है और रखरखाव के अभाव में वे बदहाल दिखाई देते हैं। दूसरी ओर गुमानपुरा रोड पर डिवाइडरों पर लगी महंगी टाइलें चोरी हो चुकी हैं। कई जगह टाइलें उखड़ी हुई हैं, जिससे पूरे मार्ग की सुंदरता प्रभावित हो रही है। आश्चर्य की बात यह है कि यह सब लंबे समय से हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभागों का ध्यान अब तक इस ओर नहीं गया।</p>
<p><strong>स्मार्ट सिटी से पहले बनना होगा स्मार्ट नागरिक</strong><br />सार्वजनिक संपत्ति केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे शहर की होती है। यदि कुछ लोग टाइलें और केबल चोरी करेंगे तथा पौधों को नुकसान पहुंचाएंगे और बाकी लोग मूकदर्शक बने रहेंगे तो किसी भी शहर को स्मार्ट नहीं बनाया जा सकता। जरूरत इस बात की है कि नागरिक सार्वजनिक संपत्तियों को अपनी संपत्ति समझें और किसी भी प्रकार की चोरी या तोड़फोड़ की सूचना तत्काल प्रशासन और पुलिस को दें। शहर की पहचान को सुरक्षित रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।</p>
<p>शहरवासियों ने कहा कि नगर निगम और संबंधित विभागों को नियमित निरीक्षण कर क्षतिग्रस्त डिवाइडरों की मरम्मत करानी चाहिए। चोरी हुए केबल और टाइलों को तत्काल बदलना चाहिए तथा पौधों का दोबारा रोपण कर उनकी नियमित देखभाल सुनिश्चित करनी चाहिए। साथ ही प्रमुख मार्गों पर सीसीटीवी कैमरे लगाकर निगरानी बढ़ाई जाए और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।</p>
<p><strong>शहरवासियों ने कहा आखिर करोड़ों की संपत्ति की जिम्मेदारी किसकी?</strong><br />स्मार्ट सिटी पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा नहीं हो रही। टाइलें और केबल चोरी होना बेहद गंभीर मामला है। प्रशासन को नियमित निगरानी करनी चाहिए।<br /><strong>- शादाब खान, युवा</strong></p>
<p>डिवाइडरों पर लगे पौधे शहर की खूबसूरती बढ़ाते थे। अब अधिकांश पौधे सूख गए हैं या चोरी हो गए हैं। प्रशासन के साथ हमें भी सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करनी होगी।<br /><strong>- तीरथ सांगा, फुटबॉल कोच</strong></p>
<p>स्मार्ट सिटी का सपना तभी पूरा होगा जब लोग खुद जिम्मेदार बनेंगे। चोरी और तोड़फोड़ करने वालों की सूचना देना हर नागरिक का कर्तव्य है।<br /><strong>- बीटा स्वामी, एडवोकेट</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />सूख चुके और चोरी हुए पौधों की जगह जल्द ही नए पौधे लगाए जाएंगे। इसके लिए विभाग की टीम पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती पौधों और डिवाइडरों पर लगी महंगी टाइलों की लगातार हो रही चोरी है। इस संबंध में कई बार संबंधित थानों को लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया जा चुका है। इतना ही नहीं, कई मामलों में केडीए अधिकारियों ने खुद चोरों का पीछा कर उनके वीडियो बनाए, उन्हें पकड़कर पुलिस के हवाले भी किया, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से चोरी की घटनाएं थम नहीं रही हैं। यदि शहर की सुंदरता और सरकारी संपत्ति को बचाना है तो पुलिस को भी अधिक सतर्क और प्रभावी भूमिका निभानी होगी, तभी करोड़ों रुपये की लागत से किए गए सौंदर्यीकरण कार्यों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।<br /><strong>-रवि माथुर, निदेशक अभियांत्रिकी कोटा विकास प्राधिकरण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 14:16:14 +0530</pubDate>
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