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                <title>petition - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>'छात्रों की गूंज' से सरकार को घेरेंगे राहुल गांधी, छात्रों-युवाओं से जुड़ने की अपील</title>
                                    <description><![CDATA[विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 'छात्रों की गूंज' अभियान की शुरुआत की है। उन्होंने युवाओं से पेपर लीक, महंगी फीस और रोजगार के खिलाफ इस मुहिम से जुड़ने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि छात्र ऑनलाइन याचिका पर हस्ताक्षर कर अपने सपनों को बचाने के लिए आवाज बुलंद करें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/rahul-gandhi-will-surround-the-government-with-the-echo-of/article-157332"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/rahul2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने छात्रों और युवाओं से उनके 'छात्रों की गूंज' अभियान से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा है कि यह पहल सस्ती शिक्षा, निष्पक्ष परीक्षा और सम्मानजनक रोजगार की मांग को सरकार तक पहुंचाने का माध्यम है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक संदेश में गुरुवार को कहा कि यदि किसी छात्र ने पेपर लीक, परीक्षा में धांधली या महंगी फीस का दर्द झेला है और यदि मौजूदा व्यवस्था ने उसके सपनों को तोड़ा है, तो 'छात्रों की गूंज' उसकी आवाज है। उनका कहना है कि यह केवल एक अभियान नहीं, बल्कि छात्रों और युवाओं की मांगों को सरकार तक पहुंचाने का जरिया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि छात्र और युवा अभियान से जुड़कर अपने सुझाव दे सकते हैं तथा ऑनलाइन याचिका पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस अभियान से जुड़ने वाला प्रत्येक हस्ताक्षर इस लड़ाई को ताकत देगा और जितने अधिक लोग इससे जुड़ेंगे, उतनी ही बुलंद आवाज उठेगी। कांग्रेस नेता ने बुधवार को राजस्थान के कोटा से 'छात्रों की गूंज' अभियान की शुरुआत की जिसके जरिए उनकी पार्टी द्वारा शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और रोजगार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 13:20:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>किसी भाषा की जानकारी नहीं होने के आधार पर नार्को टेस्ट से नहीं किया जा सकता इनकार: हाईकोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने भाषा की अज्ञानता के आधार पर नार्को टेस्ट से इनकार करने को गलत बताया है। जस्टिस अनूप कुमार ने कहा कि जरूरत पड़ने पर दुभाषिया (इंटरप्रेटर) की मदद ली जा सकती है। अदालत ने निचली अदालत का आदेश रद्द करते हुए डिप्टी स्तर के अधिकारी से निष्पक्ष अग्रिम जांच कराने के निर्देश दिए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/narco-test-cannot-be-refused-on-the-basis-of-not/article-155540"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/court-22.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने हत्या से जुड़े मामले में कहा है कि यह बड़े आश्चर्य की बात है कि प्राधिकारी ने इस आधार पर नार्को टेस्ट से इनकार कर दिया कि संबंधित व्यक्ति को हिंदी धाराप्रवाह नहीं आती है। इसके साथ ही अदालत ने मामले में पुलिस की ओर से पेश एफआर को स्वीकार करने वाले निचली अदालत के आदेश को निरस्त कर दिया है। अदालत ने कहा कि मामले की जांच डिप्टी स्तर के अधिकारी से कराई जाए और वह जरूरत पड़ने पर नार्को टेस्ट सहित जांच करते हुए रिपोर्ट निचली अदालत में पेश करे। जस्टिस अनूप कुमार ने यह आदेश फेलीराम की ओर से दायर आपराधिक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि नार्को टेस्ट के लिए फॉरेंसिक साइकोलॉजिस्ट, एनेस्थीसियोलॉजिस्ट, सामान्य चिकित्सक और मनोचिकित्सक के साथ जरूरत होने पर </p>
<p>दुभाषिया को शामिल किया जा सकता है। केवल भाषा नहीं बोलने के चलते नार्को टेस्ट करने से मना नहीं किया जा सकता। याचिका में अधिवक्ता गौरव शर्मा ने बताया की याचिकाकर्ता ने अपने भाई की हत्या को लेकर साल 2015 में दौसा के रामगढ़ पचवाड़ा थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। जिसमें जांच अधिकारी ने लचर जांच करते हुए एफआर पेश कर दी और निचली अदालत ने 23 सितंबर, 2022 को उसे स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ता की ओर से पेश प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया। याचिका में कहा गया कि जांच के दौरान अनुसंधान अधिकारी ने याचिकाकर्ता का नार्को टेस्ट करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था और याचिकाकर्ता ने भी अपनी सहमति दे दी थी। इसके बावजूद संबंधित प्राधिकारी ने यह कहते हुए टेस्ट करने से इनकार कर दिया कि टेस्ट के दौरान यह सामने आया कि याचिकाकर्ता धारा प्रवाह हिंदी नहीं बोल सकता है। याचिका में कहा गया कि वह अभी भी नार्को टेस्ट के लिए तैयार है। </p>
<p>ऐसे में मामले में निष्पक्ष जांच के आदेश दिए जाए। वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि यदि अदालत जांच के आदेश देती है कि नया जांच अधिकारी नियुक्त कर निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत निचली अदालत के आदेश को रद्द करते हुए मामले में अग्रिम जांच के आदेश दिए हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 12:59:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कॉकरोच जनता पार्टी को कोर्ट से बड़ा झटका: एक्स अकाउंट बहाल करने से इनकार, केंद्र और X को नोटिस जारी</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली हाईकोर्ट ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत दीपके के एक्स (X) अकाउंट ब्लॉक करने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने अकाउंट तत्काल बहाल करने से इनकार करते हुए केंद्र सरकार और एक्स को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई अब 6 जुलाई को होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/cockroach-janata-party-gets-a-big-blow-from-sc-refuses/article-155454"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/cockroach2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की टिप्पणी के बाद अचानक चर्चा में आई कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपना एक्स अकाउंट ब्लॉक करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और एक्स को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी के एक्स अकाउंट को तत्काल बहाल करने का आदेश देने से मना कर दिया है। मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को होगी। कोर्ट ने कहा कि वो कोई भी फैसला सरकार का पक्ष सुनने के बाद ही देगी।</p>
<p>कोर्ट ने एक्स अकाउंट को ब्लॉक करने की समीक्षा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि समीक्षा करने वाली कमेटी को हर दो महीने के बाद ब्लॉकिंग आदेश के सभी पहलूओं की पड़ताल करने की जरुरत है। कोर्ट ने समीक्षा कमेटी के फैसले को कोर्ट में दाखिल करने का निर्देश दिया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 12:04:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>सुप्रीम कोर्ट से WFI को बड़ा झटका: विनेश फोगाट को एशियन गेम्स के ट्रायल में हिस्सा लेने की दी इजाजत, अगले हफ्ते होगी सुनवाई </title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने पहलवान विनेश फोगाट को एशियन गेम्स 2026 के सिलेक्शन ट्रायल्स (30-31 मई) में शामिल होने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने उनके खेल योगदान की सराहना की, हालांकि खेल प्रशासन में अदालती दखल पर चिंता भी जताई। दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ डब्लूएफआई की याचिका पर अब अगली सुनवाई होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/big-blow-to-wfi-from-supreme-court-vinesh-phogat-allowed/article-155393"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/vinesh-phogat.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पहलवान विनेश फोगाट को 30 और 31 मई को होने वाले एशियन गेम्स 2026 के सिलेक्शन ट्रायल्स में हिस्सा लेने की इजाज़त दे दी। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने यह आदेश तब दिया, जब वे भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) की उस याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें फोगाट को सिलेक्शन ट्रायल्स में हिस्सा लेने की इजाजत दी गई थी।</p>
<p>बेंच ने डब्ल्यूएफआई की तरफ से पेश वकील से कहा, "आज इस मोड़ पर, जब हाई कोर्ट ने आदेश दे दिया है, तो उम्मीदें और अपेक्षाएं बढ़ गई हैं। उन्हें घर वापस जाने के लिए कहना और यह कहना कि हम कुछ नहीं कर सकते, सही नहीं होगा। हम आपको यह बात बहुत बेबाकी से कह रहे हैं।" सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर अगली सुनवाई अगले हफ़्ते के लिए तय की। सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फोगाट का मामला भारतीय खेलों में उनके योगदान की वजह से एक अलग ही दर्जे का है। कोर्ट ने कहा, "अगर कोई और होता, तो मामला अलग होता। उन्होंने देश को गर्व महसूस कराया है।"</p>
<p>इसके साथ ही, बेंच ने खेलों से जुड़े मामलों में न्यायिक दखल पर चिंता जताई और दिल्ली हाई कोर्ट के इस मामले को संभालने के तरीके की आलोचना की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट ने जिस "तरीके और ढंग" से इस मामले की जांच की, उससे उसे परेशानी हुई है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि खेल प्रशासन में बार-बार और जल्दबाज़ी में किया गया अदालती दखल कार्यक्रमों को बिगाड़ सकता है और पूरे खेल जगत पर बुरा असर डाल सकता है। सुनवाई के दौरान जस्टिस नरसिम्हा ने कहा, "ये मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के मामले नहीं हैं, ये राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेलों से जुड़े मामले हैं। ऐसा नहीं हो सकता कि कोर्ट इस तरह से दखल दे और पूरे कार्यक्रम को ही बिगाड़ दे।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 16:17:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>'कॉकरोच जनता पार्टी' पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर: सीबीआई जांच की मांग; उच्चतम न्यायालय का सुनवाई से इंकार, कहा- इतना भावुकता से न लें</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने "कॉकरोच जनता पार्टी" आंदोलन के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि इसे इतनी भावुकता से न लें। यह व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया आंदोलन अदालत की एक टिप्पणी के बाद फर्जी वकीलों और डिग्रियों के विरोध में शुरू हुआ था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/petition-filed-in-supreme-court-on-cockroach-janata-party-demand/article-154971"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/cockroach1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' से जुड़े व्यक्तियों की गतिविधियों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जांच की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। यह व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया आंदोलन भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की हालिया "कॉकरोच" टिप्पणी के बाद उभरा था। याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए अधिवक्ता एन के गोस्वामी ने सोमवार को तर्क दिया कि "कॉकरोच जनता पार्टी" न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचा रही है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी एम पंचोली की पीठ ने जवाब देते हुए कहा, "इसे इतना भावुकता से न लें।"</p>
<p>एक अन्य अधिवक्ता ने दलील दी कि याचिकाकर्ता फर्जी कानून की डिग्रियों के मामले में सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं, साथ ही यह भी तर्क दिया कि अदालत में होने वाली बातचीत का व्यावसायिक रूप से दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए। इस दलील पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "ऐसी कोई गंभीर आवश्यकता नहीं है। हम देखेंगे।" "कॉकरोच जनता पार्टी" इस महीने की शुरुआत में एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन आंदोलन के रूप में उभरी, जिसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर, विशेष रूप से युवाओं के बीच लोकप्रियता हासिल की। इस आंदोलन की शुरुआत 15 मई को उच्चतम न्यायालय में हुई कार्यवाही से हुई, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने बेरोजगार युवा वकीलों के वकालत छोड़कर सोशल मीडिया और आरटीआई सक्रियता की ओर रुख करने पर चिंता व्यक्त की थी।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की थी, "ऐसे युवा तिलचट्टों की तरह हैं जिन्हें इस पेशे में रोजगार नहीं मिल रहा है। कुछ सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं, कुछ आरटीआई कार्यकर्ता बन गये हैं।" मुख्य न्यायाधीश ने बाद में स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी फर्जी योग्यताओं और फर्जी डिग्रियों के माध्यम से पेशे में प्रवेश करने वाले व्यक्तियों पर लक्षित थी, न कि सामान्य रूप से बेरोजगार युवाओं पर।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 18:10:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, रैबीज पीड़ित कुत्ताें को दया मृत्यु देने की अनुमति संबंधी एनजीओ की याचिका पर सुनवाई से इनकार</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को अंधाधुंध मारने के खिलाफ दायर एनजीओ की याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्रियों के बयानों के आधार पर आदेश नहीं बदले जाते। पूर्व आदेश के तहत केवल रैबीज पीड़ित, लाइलाज और अत्यधिक आक्रामक कुत्तों को ही दया मृत्यु देने की अनुमति है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-decision-of-supreme-court-refusal-to-hear-ngos-clarification/article-154951"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/dog.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने एक एनजीओ की ओर से दायर उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया है जिसमें यह स्पष्टीकरण मांगा गया था कि कुछ खास परिस्थितियों में कुत्तों को दया मृत्यु देने की अनुमति देने वाले उसके हालिया आदेश का अर्थ आवारा कुत्तों को अंधाधुंध मारने की मंजूरी देना नहीं निकाला जाना चाहिए। उच्चतम न्यायालय के समक्ष यह याचिका एनजीओ 'एनिमल्स आर पीपल टू' ने दायर की थी। इसमें चिंता जतायी गयी थी कि अधिकारी कुत्तों को गैरकानूनी तरीके से मारने या उन्हें हटाने को सही ठहराने के लिए अदालत के निर्देशों की गलत व्याख्या कर रहे हैं।</p>
<p>इस मामले में पेश हुए अधिवक्ता ने दलील दी कि उच्चतम न्यायालय के आदेश की गलत व्याख्या की जा रही है और इसे कानून के खिलाफ जाकर लागू किया जा रहा है। पंजाब के मुख्यमंत्री के एक सार्वजनिक बयान का जिक्र करते हुए अधिवक्ता ने कहा, "पंजाब के मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया है कि उच्चतम न्यायालय ने सभी स्वानों को मारने की खुली छूट दे दी है।" न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने टिप्पणी की, कि सार्वजनिक पद संभालने वाले लोगों के बयानों के आधार पर अदालत से आदेश में बदलाव की उम्मीद नहीं की जा सकती। न्यायमूर्ति नाथ ने कहा, "अगर मुख्यमंत्री कोई बयान देते हैं, तो क्या इसका मतलब यह है कि हमें अपना आदेश बदलने की जरूरत है।" शीर्ष अदालत ने 19 मई के अपने आदेश में सख्त वैधानिक नियमों के अनुसार रैबीज पीड़ित, लाइलाज और प्रत्यक्ष रूप से खतरनाक या आक्रामक कुत्तों को दया मृत्यु देने की अनुमति दी थी।</p>
<p>आवारा कुत्तों के मुद्दे से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले की कार्यवाही में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने ये निर्देश जारी किये थे। पीठ ने आवारा कुत्तों के काटने की 'अत्यंत परेशान करने वाली' घटनाओं, विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों से जुड़े मामलों की रिपोर्टों पर गौर करने के बाद नवंबर में जारी अपने पिछले निर्देशों में किसी तरह के संशोधन से इनकार कर दिया था। इनमें अधिकारियों को विभिन्न सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया गया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 15:48:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>दुर्भाग्यपूर्ण! नीट पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा पिछली गलतियों से नहीं लिया सबक, केंद्र और एनटीए से मांगा जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[नीट-यूजी 2026 परीक्षा विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और एनटीए को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए मॉनिटरिंग कमेटी की रिपोर्ट पर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ताओं ने स्वतंत्र एजेंसी से दोबारा परीक्षा कराने और डिजिटल सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-court-is-strict-on-the-unfortunate-neet-paper-leak/article-154939"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/supreme-court-of-india.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। नीट-यूजी 2026 परीक्षा को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस मामले में दाखिल विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, शिक्षा मंत्रालय और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से जवाब मांगा है। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि पिछली घटनाओं से अब तक कोई सबक नहीं लिया गया।</p>
<p>सुनवाई के दौरान कोर्ट ने NTA से उस मॉनिटरिंग कमेटी की स्थिति स्पष्ट करने को कहा, जिसे पहले अदालत के निर्देश पर गठित किया गया था। कोर्ट ने पूछा कि समिति की सिफारिशों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई और उसकी रिपोर्ट कहां है।</p>
<p>याचिकाकर्ताओं ने परीक्षा प्रक्रिया में बड़े बदलाव की मांग की है। इसमें NTA को हटाकर नई स्वतंत्र एजेंसी बनाने, परीक्षा को कंप्यूटर आधारित करने और प्रश्नपत्रों की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने जैसे सुझाव शामिल हैं। साथ ही, न्यायिक निगरानी में दोबारा परीक्षा कराने और सेंटरवार रिजल्ट सार्वजनिक करने की भी मांग उठाई गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 14:45:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>त्रिपुरा हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, माता-पिता की मृत्यु के बाद पुत्री का तलाक हुआ, तो वह पारिवारिक पेंशन की हकदार नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी बेटी का तलाक पिता की मृत्यु के बाद हुआ है, तो वह सिविल सेवा नियम 2017 के तहत पारिवारिक पेंशन की हकदार नहीं होगी। कोर्ट के अनुसार, पात्रता निर्धारण के लिए पेंशनभोगी की मृत्यु के समय दावेदार की कानूनी स्थिति ही मान्य होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/tripura-high-courts-historic-decision-if-a-daughter-gets-divorced/article-154839"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/tripura1.png" alt=""></a><br /><p>अगरतला। त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि किसी पुत्री का तलाक उसके पिता की मृत्यु के बाद हुआ है, तो वह त्रिपुरा राज्य सिविल सेवा (संशोधित पेंशन) नियम, 2017 के तहत पारिवारिक पेंशन पाने की पात्र नहीं होगी। उज्जला रानी पॉल बनाम अगरतला नगर निगम मामले में न्यायमूर्ति एस दत्ता पुरकायस्थ ने कहा कि पेंशन नियमों के अनुसार पात्रता तय करने के लिए पेंशनभोगी की मृत्यु के समय दावेदार की कानूनी स्थिति महत्वपूर्ण होती है।</p>
<p>अगरतला निवासी पॉल ने पिछले वर्ष पिता की मृत्यु के बाद पारिवारिक पेंशन की मांग को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। उनके पिता अगरतला नगर निगम में मजदूर के पद पर कार्यरत थे और एक अक्टूबर 2004 को सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन प्राप्त कर रहे थे। दो दिसंबर 2018 को उनकी मृत्यु हो गयी थी। उनकी पत्नी का निधन पहले ही हो चुका था। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उनका विवाह हुआ था, लेकिन विवाह के कुछ समय बाद ही पति ने उनका परित्याग कर दिया था। उन्होंने दावा किया कि वह पिछले 40 वर्षों से अपने पिता के साथ रह रही थीं और उन्हीं पर आश्रित थीं।</p>
<p>अगरतला के पारिवारिक न्यायालय ने हालांकि दोनों पक्षों के बीच समझौते के बाद चार अक्टूबर 2021 को औपचारिक रूप से तलाक की डिक्री जारी की। इसके बाद याचिकाकर्ता ने 23 फरवरी 2022 को पारिवारिक पेंशन के लिए आवेदन किया। अगरतला नगर निगम ने यह कहते हुए उनका आवेदन खारिज कर दिया कि तलाकशुदा पुत्रियों को पेंशन लाभ देने संबंधी संबंधित सरकारी अधिसूचना को निगम ने अपनाया नहीं है। इस निर्णय से असंतुष्ट होकर याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय में न्यायिक पुनर्विचार की मांग की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 12:21:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर बवाल, छात्रों-अभिभावकों ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा</title>
                                    <description><![CDATA[सीबीएसई की नई भाषा नीति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। इस याचिका में कक्षा 9 और 10 में दूसरी भारतीय भाषा को अनिवार्य करने के फैसले को चुनौती दी गई है। अभिभावकों और छात्रों का तर्क है कि इस अचानक बदलाव के बजाय उन्हें विदेशी भाषाएं चुनने की आजादी मिलनी चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/uproar-over-cbses-three-language-policy-students-parents-knocked-at-the/article-154638"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/cbse.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सीबीएसई की नई भाषा नीति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है, जहां छात्रों और अभिभावकों की ओर से याचिका दाखिल की गई है। याचिका में कक्षा 9 और 10 में दूसरी भारतीय भाषा को अनिवार्य बनाने के फैसले को चुनौती दी गई है।</p>
<p>सीबीएसई ने नई शिक्षा नीति के तहत थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इसके अनुसार छात्रों को दो भारतीय भाषाओं के साथ एक अन्य भाषा पढ़नी होगी। हालांकि अभिभावकों का कहना है कि शुरुआत में यह व्यवस्था कक्षा 6 से लागू होने की बात कही गई थी, लेकिन अब अचानक बड़े छात्रों पर इसे लागू करना उचित नहीं है।</p>
<p>कई छात्रों ने तर्क दिया है कि वे तीसरी भाषा के रूप में जर्मन, फ्रेंच या चाइनीज जैसी विदेशी भाषाएं पढ़ना चाहते हैं। मामले पर अगले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने की संभावना है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 13:15:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पंचायत चुनाव को लेकर हाईकोर्ट की फटकार, 31 जुलाई तक कराएं पंचायत और निकाय चुनाव</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग को 31 जुलाई तक पंचायत और निकाय चुनाव संपन्न कराने का आदेश दिया है। अदालत ने ओबीसी आयोग को 20 जून तक रिपोर्ट सौंपने और चुनाव आयोग को उसके बाद शेड्यूल जारी करने को कहा है। महाधिवक्ता ने 'वन स्टेट-वन इलेक्शन' का हवाला देते हुए समय मांगा था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/high-courts-rebuke-regarding-panchayat-elections-conduct-panchayat-and-civic/article-154645"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/rajasthan-high-court.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग को कहा है कि वह 31 जुलाई तक प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव कराए। इसके साथ ही अदालत ने ओबीसी आयोग को भी कहा है कि वह 20 जून तक अपनी रिपोर्ट पेश कर सकता है। अदालत ने राज्य चुनाव आयोग को कहा है कि वह 20 जून के बाद अपना चुनाव शेड्यूल जारी करे। एक्टिंग सीजे एसपी शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित ने यह आदेश पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिर्राज सिंह देवंदा की याचिका में राज्य सरकार की ओर से दायर प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए दिए। खंडपीठ ने गत 11 मई को सभी पक्षों को सुनकर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।</p>
<p>प्रार्थना पत्र में राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि अक्टूबर-दिसंबर में कई पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। उनके कार्यकाल समाप्ति के बाद चुनाव कराना बेहतर होगा और इससे वन स्टेट-वन इलेक्शन की धारणा को भी बल मिलेगा। इसके अलावा कोर्ट के आदेश की पालना के लिए हर संभव प्रयास किया गया, लेकिन वर्तमान परिस्थितियां ऐसी है कि 15 अप्रैल तक चुनाव कराना संभव नहीं हो सका। चुनाव में शिक्षकों की ड्यूटी, मौसम, कृषि और ओबीसी आयोग की रिपोर्ट सहित अन्य संसाधनों की उपलब्धता का हवाला देकर चुनाव आगे खिसकाने की अनुमति मांगी गई। जिसका विरोध करते हुए अधिवक्ता प्रेमचंद देवदा ने कहा कि प्रदेश की सभी पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो चुका है। </p>
<p>इसलिए सुप्रीम कोर्ट के सुरेश महाजन के मामले में दिए फैसले के तहत ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के बिना भी पंचायत चुनाव हो सकते हैं।<br />अदालत ने राज्य सरकार को 15 अप्रैल तक चुनाव कराने का पर्याप्त समय दिया था, लेकिन इस अवधि तक निकायों के लिए अंतिम मतदाता सूची ही जारी नहीं की गई। इसके अलावा हाईकोर्ट के 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के आदेश को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दी। इसलिए यह आदेश अंतिम हो गया है और इसकी पालना की जानी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 12:46:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>राघव चड्ढा की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई: आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा, भ्रामक AI कंटेंट गंभीर विषय</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली हाईकोर्ट ने भाजपा सांसद राघव चड्ढा की डीपफेक वीडियो और आपत्तिजनक पोस्ट हटाने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पार्टी बदलने पर राजनीतिक आलोचना जायज है, लेकिन फर्जी आवाज और भ्रामक एआई (AI) कंटेंट बेहद गंभीर विषय है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/hearing-in-delhi-high-court-on-raghav-chadhas-petition-criticism/article-154601"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/raghav-chadda.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट में बीजेपी में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की उस याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कथित डीपफेक वीडियो, मॉर्फ्ड तस्वीरों और आपत्तिजनक पोस्ट हटाने की मांग की थी। राघव चड्ढा का कहना है कि एआई तकनीक के जरिए उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।</p>
<p>सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि किसी नेता के राजनीतिक फैसले की आलोचना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पार्टी बदलने के फैसले पर व्यंग्य या आलोचना को सीधे पर्सनालिटी राइट्स का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। हालांकि, अदालत ने फर्जी वीडियो,नकली आवाज और भ्रामक एआई कंटेंट को गंभीर विषय बताया। अदालत ने फिलहाल मामले में फैसला सुरक्षित रखा है। इस याचिका में अज्ञात सोशल मीडिया अकाउंट्स और प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 17:48:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>एकल पट्टा प्रकरण : धारीवाल के खिलाफ लंबित प्रोटेस्ट पिटिशन की सुनवाई का रास्ता साफ, अदालत ने एसीबी कोर्ट को कहा- वह इस पर नियमानुसार कर सकता है सुनवाई </title>
                                    <description><![CDATA[इन क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ परिवादी की प्रोटेस्ट पिटिशन अभी एसीबी कोर्ट में विचाराधीन है, ऐसे में ट्रायल कोर्ट की न्यायिक प्रक्रिया को जारी रखा जाना चाहिए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/clears-the-way-for-hearing-of-the-pending-protest-petition/article-131214"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/court.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने एकल पट्टा प्रकरण में पूर्व मंत्री शांति धारीवाल सहित अन्य के पक्ष में दी गई एसीबी की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ एसीबी कोर्ट में लंबित प्रोटेस्ट पिटिशन पर सुनवाई का रास्ता साफ कर दिया है। अदालत ने एसीबी कोर्ट को कहा है कि वह इस पर नियमानुसार सुनवाई कर सकता है। इसके अलावा अदालत ने एसीबी को मामले में अग्रिम जांच की छूट दी है। इसके साथ ही अदालत ने मामले की सुनवाई पांच दिसंबर को तय की है। एक्टिंग सीजे एसपी शर्मा ने यह आदेश शांति धारीवाल की याचिका पर दिए। </p>
<p>हाईकोर्ट ने कहा कि एसीबी की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ प्रोटेस्ट पिटिशन लंबित चल रही हैं और इन पिटिशन पर निर्णय का अधिकार केवल ट्रायल कोर्ट को ही है। राज्य सरकार के एएसजी एसवी राजू व एएजी शिव मंगल शर्मा ने अदालत को बताया कि शांति धारीवाल की याचिका मेंटेनेबल नहीं है, एसीबी की 12 जून को दी क्लोजर रिपोर्ट से उन्हें क्लीन चिट दी है और उनके खिलाफ कोई चार्जशीट ही पेश नहीं की थी। </p>
<p>इन क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ परिवादी की प्रोटेस्ट पिटिशन अभी एसीबी कोर्ट में विचाराधीन है, ऐसे में ट्रायल कोर्ट की न्यायिक प्रक्रिया को जारी रखा जाना चाहिए। वहीं धारीवाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वीआर बाजवा ने कहा कि प्रारंभिक शिकायत में धारीवाल का नाम था, जांच अधिकारी के क्लीन चिट देने के बाद ट्रायल कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट अस्वीकार कर दी थी। उन्हें इसे रद्द करने के लिए हाईकोर्ट में आपराधिक याचिका दायर करने का अधिकार है। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Nov 2025 10:28:54 +0530</pubDate>
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