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                <title>petition - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>petition RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर बवाल, छात्रों-अभिभावकों ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा</title>
                                    <description><![CDATA[सीबीएसई की नई भाषा नीति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। इस याचिका में कक्षा 9 और 10 में दूसरी भारतीय भाषा को अनिवार्य करने के फैसले को चुनौती दी गई है। अभिभावकों और छात्रों का तर्क है कि इस अचानक बदलाव के बजाय उन्हें विदेशी भाषाएं चुनने की आजादी मिलनी चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/uproar-over-cbses-three-language-policy-students-parents-knocked-at-the/article-154638"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/cbse.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सीबीएसई की नई भाषा नीति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है, जहां छात्रों और अभिभावकों की ओर से याचिका दाखिल की गई है। याचिका में कक्षा 9 और 10 में दूसरी भारतीय भाषा को अनिवार्य बनाने के फैसले को चुनौती दी गई है।</p>
<p>सीबीएसई ने नई शिक्षा नीति के तहत थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इसके अनुसार छात्रों को दो भारतीय भाषाओं के साथ एक अन्य भाषा पढ़नी होगी। हालांकि अभिभावकों का कहना है कि शुरुआत में यह व्यवस्था कक्षा 6 से लागू होने की बात कही गई थी, लेकिन अब अचानक बड़े छात्रों पर इसे लागू करना उचित नहीं है।</p>
<p>कई छात्रों ने तर्क दिया है कि वे तीसरी भाषा के रूप में जर्मन, फ्रेंच या चाइनीज जैसी विदेशी भाषाएं पढ़ना चाहते हैं। मामले पर अगले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने की संभावना है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 13:15:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पंचायत चुनाव को लेकर हाईकोर्ट की फटकार, 31 जुलाई तक कराएं पंचायत और निकाय चुनाव</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग को 31 जुलाई तक पंचायत और निकाय चुनाव संपन्न कराने का आदेश दिया है। अदालत ने ओबीसी आयोग को 20 जून तक रिपोर्ट सौंपने और चुनाव आयोग को उसके बाद शेड्यूल जारी करने को कहा है। महाधिवक्ता ने 'वन स्टेट-वन इलेक्शन' का हवाला देते हुए समय मांगा था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/high-courts-rebuke-regarding-panchayat-elections-conduct-panchayat-and-civic/article-154645"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/rajasthan-high-court.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग को कहा है कि वह 31 जुलाई तक प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव कराए। इसके साथ ही अदालत ने ओबीसी आयोग को भी कहा है कि वह 20 जून तक अपनी रिपोर्ट पेश कर सकता है। अदालत ने राज्य चुनाव आयोग को कहा है कि वह 20 जून के बाद अपना चुनाव शेड्यूल जारी करे। एक्टिंग सीजे एसपी शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित ने यह आदेश पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिर्राज सिंह देवंदा की याचिका में राज्य सरकार की ओर से दायर प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए दिए। खंडपीठ ने गत 11 मई को सभी पक्षों को सुनकर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।</p>
<p>प्रार्थना पत्र में राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि अक्टूबर-दिसंबर में कई पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। उनके कार्यकाल समाप्ति के बाद चुनाव कराना बेहतर होगा और इससे वन स्टेट-वन इलेक्शन की धारणा को भी बल मिलेगा। इसके अलावा कोर्ट के आदेश की पालना के लिए हर संभव प्रयास किया गया, लेकिन वर्तमान परिस्थितियां ऐसी है कि 15 अप्रैल तक चुनाव कराना संभव नहीं हो सका। चुनाव में शिक्षकों की ड्यूटी, मौसम, कृषि और ओबीसी आयोग की रिपोर्ट सहित अन्य संसाधनों की उपलब्धता का हवाला देकर चुनाव आगे खिसकाने की अनुमति मांगी गई। जिसका विरोध करते हुए अधिवक्ता प्रेमचंद देवदा ने कहा कि प्रदेश की सभी पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो चुका है। </p>
<p>इसलिए सुप्रीम कोर्ट के सुरेश महाजन के मामले में दिए फैसले के तहत ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के बिना भी पंचायत चुनाव हो सकते हैं।<br />अदालत ने राज्य सरकार को 15 अप्रैल तक चुनाव कराने का पर्याप्त समय दिया था, लेकिन इस अवधि तक निकायों के लिए अंतिम मतदाता सूची ही जारी नहीं की गई। इसके अलावा हाईकोर्ट के 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के आदेश को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दी। इसलिए यह आदेश अंतिम हो गया है और इसकी पालना की जानी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 12:46:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राघव चड्ढा की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई: आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा, भ्रामक AI कंटेंट गंभीर विषय</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली हाईकोर्ट ने भाजपा सांसद राघव चड्ढा की डीपफेक वीडियो और आपत्तिजनक पोस्ट हटाने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पार्टी बदलने पर राजनीतिक आलोचना जायज है, लेकिन फर्जी आवाज और भ्रामक एआई (AI) कंटेंट बेहद गंभीर विषय है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/hearing-in-delhi-high-court-on-raghav-chadhas-petition-criticism/article-154601"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/raghav-chadda.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट में बीजेपी में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की उस याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कथित डीपफेक वीडियो, मॉर्फ्ड तस्वीरों और आपत्तिजनक पोस्ट हटाने की मांग की थी। राघव चड्ढा का कहना है कि एआई तकनीक के जरिए उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।</p>
<p>सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि किसी नेता के राजनीतिक फैसले की आलोचना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पार्टी बदलने के फैसले पर व्यंग्य या आलोचना को सीधे पर्सनालिटी राइट्स का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। हालांकि, अदालत ने फर्जी वीडियो,नकली आवाज और भ्रामक एआई कंटेंट को गंभीर विषय बताया। अदालत ने फिलहाल मामले में फैसला सुरक्षित रखा है। इस याचिका में अज्ञात सोशल मीडिया अकाउंट्स और प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 17:48:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एकल पट्टा प्रकरण : धारीवाल के खिलाफ लंबित प्रोटेस्ट पिटिशन की सुनवाई का रास्ता साफ, अदालत ने एसीबी कोर्ट को कहा- वह इस पर नियमानुसार कर सकता है सुनवाई </title>
                                    <description><![CDATA[इन क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ परिवादी की प्रोटेस्ट पिटिशन अभी एसीबी कोर्ट में विचाराधीन है, ऐसे में ट्रायल कोर्ट की न्यायिक प्रक्रिया को जारी रखा जाना चाहिए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/clears-the-way-for-hearing-of-the-pending-protest-petition/article-131214"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/court.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने एकल पट्टा प्रकरण में पूर्व मंत्री शांति धारीवाल सहित अन्य के पक्ष में दी गई एसीबी की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ एसीबी कोर्ट में लंबित प्रोटेस्ट पिटिशन पर सुनवाई का रास्ता साफ कर दिया है। अदालत ने एसीबी कोर्ट को कहा है कि वह इस पर नियमानुसार सुनवाई कर सकता है। इसके अलावा अदालत ने एसीबी को मामले में अग्रिम जांच की छूट दी है। इसके साथ ही अदालत ने मामले की सुनवाई पांच दिसंबर को तय की है। एक्टिंग सीजे एसपी शर्मा ने यह आदेश शांति धारीवाल की याचिका पर दिए। </p>
<p>हाईकोर्ट ने कहा कि एसीबी की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ प्रोटेस्ट पिटिशन लंबित चल रही हैं और इन पिटिशन पर निर्णय का अधिकार केवल ट्रायल कोर्ट को ही है। राज्य सरकार के एएसजी एसवी राजू व एएजी शिव मंगल शर्मा ने अदालत को बताया कि शांति धारीवाल की याचिका मेंटेनेबल नहीं है, एसीबी की 12 जून को दी क्लोजर रिपोर्ट से उन्हें क्लीन चिट दी है और उनके खिलाफ कोई चार्जशीट ही पेश नहीं की थी। </p>
<p>इन क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ परिवादी की प्रोटेस्ट पिटिशन अभी एसीबी कोर्ट में विचाराधीन है, ऐसे में ट्रायल कोर्ट की न्यायिक प्रक्रिया को जारी रखा जाना चाहिए। वहीं धारीवाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वीआर बाजवा ने कहा कि प्रारंभिक शिकायत में धारीवाल का नाम था, जांच अधिकारी के क्लीन चिट देने के बाद ट्रायल कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट अस्वीकार कर दी थी। उन्हें इसे रद्द करने के लिए हाईकोर्ट में आपराधिक याचिका दायर करने का अधिकार है। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Nov 2025 10:28:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Kejriwal Interim Bail को बढ़ाने की याचिका सूचीबद्ध करने से सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री का इनकार</title>
                                    <description><![CDATA[शीर्ष अदालत के एक अधिकारी ने यह भी कहा कि गिरफ्तारी के खिलाफ उनकी याचिका पर फैसला पहले ही सुरक्षित रखने के कारण उनकी वर्तमान याचिका का अदालत के समक्ष विचाराधीन मामले से कोई संबंध नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-registry-refuses-to-list-petition-to-extend-kejriwal/article-79785"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/t21rer-(6)25.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय रजिस्ट्री ने दिल्ली आबकारी नीति से संबंधित धनशोधन के एक मामले के आरोपी मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की एक जून को समाप्त होने वाली अंतरिम जमानत अवधि सात दिन बढ़ाने के लिए दायर उनकी याचिका सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया है। </p>
<p>आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, रजिस्ट्री ने कहा कि न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और दिपांकर दत्ता की पीठ ने मुख्यमंत्री केजरीवाल को अंतरिम जमानत देने के साथ ही नियमित जमानत के लिए निचली अदालत में जाने की भी छूट दी थी, इसलिए उनकी यह याचिका (अंतरिम जमानत बढ़ाने की याचिका) विचार करने के योग्य नहीं है।</p>
<p>शीर्ष अदालत के एक अधिकारी ने यह भी कहा कि गिरफ्तारी के खिलाफ उनकी याचिका पर फैसला पहले ही सुरक्षित रखने के कारण उनकी वर्तमान याचिका का अदालत के समक्ष विचाराधीन मामले से कोई संबंध नहीं है।</p>
<p>न्यायमूर्ति जे के माहेश्वरी और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की अवकाशकालीन पीठ ने मंगलवार को याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ए एम ङ्क्षसघवी से कहा था कि (केजरीवाल के) आवेदन को सूचीबद्ध करने के संबंध मुख्य न्यायाधीश कोई फैसला कर सकते हैं।</p>
<p>न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दिपांकर दत्ता की पीठ ने 10 मई को केजरीवाल को लोकसभा चुनाव के प्रचार अभियानों में भाग लेने के लिए एक जून तक अंतरिम जमानत दी थी और दो जून को उन्हें जेल प्रशासन के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया गया था। दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल तिहाड़ केंद्रीय कारागार में न्यायिक हिरासत में बंद थे। </p>
<p>शीर्ष अदालत ने 21 मार्च को केजरीवाल की गिरफ्तारी और उसके बाद ईडी की हिरासत को चुनौती देने वाली उनकी अपील पर 17 मई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। </p>
<p>दिल्ली आबकारी नीति से संबंधित धनशोधन के एक मामले के आरोपियों में शामिल केजरीवाल ने अपनी याचिका में दावा किया था कि गिरफ्तारी के बाद उनका वजन सात किलोग्राम कम हो गया है।उनका कीटोन लेवल बहुत ज्यादा है, जो किसी गंभीर बीमारी का लक्षण हो सकता है। उन्होंने अपनी याचिका में कहा था, वर्तमान में उनका इलाज कर रहे मैक्स अस्पताल के संबंधित डॉक्टरों ने कुछ जांच करने की सलाह दी है, जिसके लिए सात दिनों का समय चाहिए।याचिका में कहा गया था कि के उन्हें पीईटी-सीटी स्कैन और अन्य जांच करने की सलाह दी गई है।</p>
<p>आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक केजरीवाल को दिल्ली आबकारी नीति -2021-22 (जो विवाद के बाद रद्द कर दी गई थी) में कथित घोटाले में ईडी ने गत 21 मार्च को गिरफ्तार किया था।</p>
<p>केजरीवाल को गिरफ्तार करने वाली केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन पर मुख्य साजिशकर्ता होने का आरोप लगाया है। उन पर पूर्व के गोवा विधानसभा चुनाव प्रचार के लिए 100 करोड़ रुपये गलत तरीके से हासिल करने का आरोप है।श्री केजरीवाल ने ईडी की ओर से अपनी गिरफ्तारी की वैधता को चुनौती दी है।इस मामले में उन्हें शीर्ष अदालत की ओर से अंतरिम जमानत दे दी गई थी, लेकिन उन्होंने नियमित  जमानत के लिए अब तक कोई याचिका दायर नहीं की है।</p>
<p>केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 17 अगस्त 22 को अबकारी नीति बनाने और उसके कार्यान्वयन में की गई कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए एक आपराधिक मुकदमा दर्ज किया था।  इसी आधार पर ईडी ने 22 अगस्त 22 को धनशोधन का मामला दर्ज किया था।ईडी का दावा है कि आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री सिसौदिया, राज्य सभा सांसद संजय ङ्क्षसह सहित अन्य ने अवैध कमाई के लिए साजिश रची थी।इस मामले में पूर्व उपमुख्यमंत्री सिसौदिया फिलहाल न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में बंद हैं।</p>
<p>गौरतलब है कि इस मामले में आप सांसद सिंह को उच्चतम न्यायालय ने दो अप्रैल को राहत दी। शीर्ष अदालत के इस आदेश के मद्देनजर राऊज एवेन्यू स्थित एक विशेष अदालत ने तीन अप्रैल को उन्हें सशर्त तिहाड़ जेल से रिहा करने का आदेश पारित किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 May 2024 14:31:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>Jolly LLB-3 : फिल्म विवाद में प्रतिवादियों की याचिका खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[उल्लेखनीय है कि वादी अजमेर जिला बार एसोसिएशन ने फिल्म को  न्यायालय एवं वकीलों की छवि धूमिल करने वाला करार देते हुये वाद दायर किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/petition-of-defendants-in-jolly-llb-3-film-dispute-rejected/article-79533"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/jolly-llb.png" alt=""></a><br /><p>अजमेर। राजस्थान में अजमेर सिविल न्यायालय (उत्तर) ने फिल्म 'जॉली एलएलबी-तीन' से जुड़े वाद में प्रतिवादियों की ओर से वाद खारिज करने के लिये दायर याचिका खारिज कर दी।</p><p>सिविल न्यायाधीश (उत्तर) यश विश्नोई ने अभिनेता अक्षयकुमार, अरशद वारसी, संजय कपूर और रेलवे मंडल प्रबंधक की ओर से उनके वकीलों द्वारा वाद खारिज करने के लिये दायर याचिका पर प्रतिवादियों की दलील सुनने के बाद याचिका खारिज करने के आदेश दिये।</p><p>एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्रभान सिंह राठौड़ ने बताया कि पेशी पर प्रतिवादियों के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता माधव मित्र और डीआरएम के वकील बसंत विजयवर्गीय ने दलील पेश करके वाद खारिज करने का आग्रह किया, जिसे  न्यायाधीश ने खारिज करते हुये वादी के पक्ष में आदेश पारित कर दिया।</p><p>उल्लेखनीय है कि वादी अजमेर जिला बार एसोसिएशन ने फिल्म को  न्यायालय एवं वकीलों की छवि धूमिल करने वाला करार देते हुये वाद दायर किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 May 2024 15:25:43 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मतदान के आंकड़े वेबसाइट पर डालने की याचिका पर विचार करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार</title>
                                    <description><![CDATA[ उच्चतम न्यायालय ने लोकसभा चुनाव मतदान के 48 घंटे के बाद प्रत्येक मतदान केंद्र पर डाले गए मतों के आंकड़े से संबंधित फॉर्म 17सी को वेबसाइट पर डालने की मांग संबंधी याचिका पर चुनाव आयोग की कड़ी आपत्ति के बाद विचार करने से शुक्रवार को इनकार कर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-refuses-to-consider-the-petition-to-put-voting/article-79213"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/supreme-court--3.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने लोकसभा चुनाव मतदान के 48 घंटे के बाद प्रत्येक मतदान केंद्र पर डाले गए मतों के आंकड़े से संबंधित फॉर्म 17सी को वेबसाइट पर डालने की मांग संबंधी याचिका पर चुनाव आयोग की कड़ी आपत्ति के बाद विचार करने से शुक्रवार को इनकार कर दिया।</p>
<p>न्यायमूर्ति दिपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने एनजीओ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉम्र्स के आवेदन को प्रथम दृष्ट्या और आशंका पर आधारित बताते हुए विचार करने से इनकार किया।</p>
<p>पीठ ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे और ए एम सिंघवी से कहा कि हम योग्यता के आधार पर कुछ नहीं कह रहे...लेकिन इस समय आपके पास कोई अच्छा मामला नहीं है।</p>
<p>पीठ ने आगे कहा कि इसे लंबित रखते हैं। हम उचित समय पर इसकी जांच करेंगे। संबंधित अधिकारियों (चुनाव आयोग के) पर भरोसा करें।</p>
<p>चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह ने दलील दी कि आवेदन प्रक्रिया के दुरुपयोग का एक उत्कृष्ट मामला है, क्योंकि यह चुनाव प्रक्रिया के दौरान दायर की गई थी।</p>
<p>शीर्ष अदालत के समक्ष उन्होंने कहा कि आवेदन संदेह, आशंका और चुनाव प्रक्रिया की अखंडता पर झूठे आरोपों पर आधारित है। यह भी दलील दी कि उन्होंने (आवेदक) चुनाव आयोग द्वारा जारी की गई प्रेस विज्ञप्तियां संलग्न की हैं, लेकिन 26 अप्रैल के फैसले को संलग्न नहीं किया है। उस दिन अदालत ने ईवीएम के साथ वीवीपैट गिनती के सत्यापन के संबंध में उनकी याचिका पर विचार किया था। उन्होंने आवेदकों पर भारी जुर्माना लगाने की गुहार लगाई।</p>
<p>इस पर अदालत के समक्ष आवेदकों के अधिवक्ताओं ने कहा कि जनहित याचिकाओं में नियमों और प्रक्रिया को सख्ती से लागू नहीं किया जा सकता।</p>
<p>पीठ ने हालांकि कहा कि जनहित याचिकाएं आजकल प्रचार वाली याचिकाएं बन गई हैं।</p>
<p>पीठ ने जब आवेदकों से सवाल पूछा कि वे 16 मार्च से पहले (जब चुनाव की तारीखों की घोषणा की गई थी) क्यों नहीं इस मामले को लेकर अदालत आए। इस पर आवेदकों के अधिवक्ताओं ने कहा कि जानकारी केवल तभी उपलब्ध कराई गई थी, जब चुनाव के पहले दो चरणों में खुलासे किए गए थे।</p>
<p>शीर्ष अदालत ने इस मामले में 17 मई को चुनाव आयोग को 2024 के लोकसभा चुनावों में प्रत्येक चरण के मतदान के 48 घंटे बाद सभी मतदान केंद्रों पर दर्ज किए गए मतों का लेखा-जोखा आयोग कबेवसाइट अपलोड करने के लिए नोटिस जारी किया।</p>
<p>चुनाव आयोग ने 22 मई को शीर्ष अदालत में हलफनामा दाखिल कर बताया था कि वेबसाइट पर फॉर्म 17सी (प्रत्येक मतदान केंद्र पर डाले गए वोटों का हिसाब) अपलोड उचित नहीं होगा। फॉर्म के साथ शरारत की सकती है। फॉर्म के तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ की संभावना है। इस प्रकार इससे 'काफी असुविधा और अविश्वास पैदा होने की आशंका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 May 2024 16:38:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सलमान ने CBI जांच की मांग संबंधित याचिका से नाम हटाने का किया आग्रह</title>
                                    <description><![CDATA[याचिका में दावा किया गया कि सलमान आरोपी की हिरासत में मौत के लिए जिम्मेदार थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/salman-requested-to-remove-his-name-from-the-petition-demanding/article-79090"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/salman-khan-35-year-in-industry.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान ने मुंबई में अपने आवास पर हुई फायरिंग मामले से जुड़े घटनाक्रम में एक आरोपी की हिरासत में मौत की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराये जाने की मांग से संबंधित याचिका में अपना नाम हटाने का आग्रह किया है।</p><p>न्यायमूर्ति एनआर बोरकर और न्यायमूर्ति सोमशेखर सुंदरेसन की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष याचिका की सुनवाई के दौरान अभिनेता के वकील आबाद पोंडा ने आरोपी अनुज थापन की मां रीता देवी की ओर से सीबीआई जांच की मांग को लेकर दायर याचिका में प्रतिवादी के रूप में अभिनेता का नाम हटाने की मांग की। </p><p>थापन का शव मुंबई क्राइम ब्रांच लॉकअप में लटका हुआ पाया गया था जहां उसे रखा गया था। रीता देवी ने अपनी याचिका में दावा किया कि उनके बेटे को हिरासत में प्रताड़ति किया गया, जिससे उसकी मौत हो गई।</p><p>संबंधित मामले में बहस के दौरान पोंडा ने दावा किया कि सलमान के खिलाफ कोई आरोप नहीं था फिर भी याचिका में उनका नाम डालकर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया गया। याचिका में दावा किया गया कि वह (सलमान) आरोपी की हिरासत में मौत के लिए जिम्मेदार थे।</p><p>दूसरी ओर रीता देवी के वकील ने कहा कि वह अभिनेता के खिलाफ कोई निर्देश की मांग नहीं कर रहे हैं और प्रतिवादी के रूप में उनका नाम हटाने पर सहमत हैं। अदालत ने रीता देवी से राज्य सीआईडी को प्रतिवादी के रूप में जोड़ने के लिए कहा क्योंकि वह हिरासत में मौत की जांच कर रही है। </p><p>पुलिस ने कहा कि उच्च न्यायालय के 15 मई के निर्देश के अनुसार उस थाने के सीसीटीवी फुटेज को संरक्षित कर लिया गया है जहां थापन को रखा गया था। इसके साथ ही थाने और संबंधित पुलिस अधिकारियों के कॉल डेटा रिकॉर्ड (सीडीआर) भी संरक्षित किए गए हैं।</p><p>न्यायालय ने थापन की पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर भी राज्य सरकार से सवाल किया था और कहा था कि शव परीक्षण रिपोर्ट में थापन की गर्दन पर चोट के निशान का चित्र शामिल नहीं किया गया। यह भी पूछा कि क्या कोई अन्य चोट के निशान थे। थापन का शव एक मई को क्रॉफर्ड मार्केट में क्राइम ब्रांच के लॉक-अप के शौचालय में लटका हुआ पाया गया था। पुलिस ने दावा किया कि उसने इसके के लिए बेडशीट का इस्तेमाल किया। अदालत ने कहा कि रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि थापन की मृत्यु दम घुटने से हुई। </p><p>न्यायमूर्ति बोरकर ने टिप्पणी की कि यह गला घोंटने के कारण भी हो सकता है। इसके बाद राज्य सरकार के अधिवक्ता जयेश याग्निक ने पीठ को एक पूरक रिपोर्ट दिखाई जिसमें थापन के शरीर पर चोट के निशानों का उल्लेख था। याग्निक ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट अधूरी नहीं थी।</p><p>न्यायाधीशों ने अभियोजन पक्ष से मृतक की मां को रिपोर्ट पढऩे की अनुमति देने को कहा। अदालत के सवाल पर याग्निक ने कहा कि एक मजिस्ट्रेट कथित हिरासत में मौत की जांच कर रहे हैं और अभी जांच जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 May 2024 17:45:58 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मथुरा की शाही मस्जिद को हटाने की याचिका खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[उच्चतम न्यायालय ने मथुरा की विवाद शाही मस्जिद हटाने और वहां भगवान श्री कृष्ण जन्म स्थल घोषित करने का निर्देश देने की मांग वाली एक जनहित याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/petition-to-remove-mathuras-royal-mosque-rejected/article-66042"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/royal-masjid.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने मथुरा की विवाद शाही मस्जिद हटाने और वहां भगवान श्री कृष्ण जन्म स्थल घोषित करने का निर्देश देने की मांग वाली एक जनहित याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी।</p>
<p>न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने वकील महेक माहेश्वरी की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि इसमें दिए गए तथ्यात्मक विवादित सवालों के मद्देनजर इस मामले में अदालत का दखल देना उचित हीं होगा।</p>
<p>इससे पहले इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अक्टूबर 2023 में माहेश्वरी की इस याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने उच्च न्यायालय के फैसले को शीर्ष अदालत के समक्ष चुनौती दी थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jan 2024 13:21:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महुआ मोइत्रा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की स्थगित </title>
                                    <description><![CDATA[शीर्ष अदालत के समक्ष मोइत्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एएम सिंघवी ने 13 दिसंबर को विशेष उल्लेख के दौरान उनकी रिट याचिका पर तत्काल सुनवाई की गुहार लगाई थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-adjourns-hearing-on-mahua-moitras-petition/article-64237"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/supreme-court--3.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता महुआ मोइत्रा के लोकसभा से निष्कासन के खिलाफ दायर उनकी याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी है। कोर्ट ने यह कहते हुए सुनवाई स्थगित कर दी कि उसे इस मामले से संबंधित दस्तावेजों को पढ़ने का समय नहीं मिला। वह इस मामले में बाद में सुनवाई करेगी। शीर्ष अदालत के समक्ष मोइत्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एएम सिंघवी ने 13 दिसंबर को विशेष उल्लेख के दौरान उनकी रिट याचिका पर तत्काल सुनवाई की गुहार लगाई थी।</p>
<p>पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर लोकसभा क्षेत्र से की सांसद रही मोइत्रा ने याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने लोकसभा से निष्कासित करने के फैसले को अन्यायपूर्ण, अन्यायपूर्ण और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ बताया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद निशिकांत दुबे ने मोइत्रा पर रुपए लेकर लोकसभा में सवाल पूछने का आरोप लगाया था। उनकी शिकायत पर इस मामले में संसद की आचार समिति ने जांच की। इसके बाद लोकसभा में सुश्री मोइत्रा को निष्कासित करने का प्रस्ताव पारित हुआ था। इसके साथ ही उनकी सदस्यता चली गई थी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-adjourns-hearing-on-mahua-moitras-petition/article-64237</link>
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                <pubDate>Fri, 15 Dec 2023 17:00:38 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मुनेश गुर्जर को पुन: निलंबित करने के खिलाफ याचिका पर फैसला सुरक्षित</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से नगर निगम हेरिटेज की मेयर मुनेश गुर्जर को गत 22 सितंबर को पुन: निलंबित करने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/decision-reserved-on-the-petition-against-re-suspending-munesh-gurjar/article-63039"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/munesh-gurjar.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से नगर निगम हेरिटेज की मेयर मुनेश गुर्जर को गत 22 सितंबर को पुन: निलंबित करने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली है। इसके साथ ही अदालत ने प्रकरण में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। जस्टिस अनूप ढंड की एकलपीठ ने यह आदेश निलंबित मेयर मुनेश गुर्जर की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता विज्ञान शाह ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने याचिकाकर्ता का निलंबन नगर पालिका अधिनियम, 2009 की धारा 39 के प्रावधानों व तथ्यों के विपरीत जाकर किया है। उसके खिलाफ जिन तथ्यों पर जांच हुई है, वे एफआईआर से ही साबित नहीं हो पाए थे। इसके अलावा मामले में जांच अधिकारी नियुक्त करने का आदेश डीएलबी निदेशक ने निकाला, जबकि ऐसा आदेश राज्यपाल के निर्देशों के तहत ही जारी हो सकता है। वहीं रूल्स आॅफ बिजनेस के तहत मेयर से संबंधित किसी भी कार्रवाई का मुख्यमंत्री से अनुमोदन जरूरी है, जबकि इस मामले में निलंबन व जांच की कार्रवाई स्वायत्त शासन मंत्री के आदेश पर की गई। मामले की डीएलबी निदेशक और उप निदेशक ने अलग-अलग नोटिस जारी कर जांच कार्रवाई आरंभ की, जबकि एक ही मामले में दो जांच अधिकारी एक साथ जांच नहीं कर सकते। वहीं उप निदेशक की ओर से दी गई जांच रिपोर्ट भेदभावपूर्ण व दुर्भावनापूर्ण है, क्योंकि याचिकाकर्ता को पूर्व में निलंबन करने के खिलाफ हाईकोर्ट में पेश याचिका में उप निदेशक ही ओआईसी के तौर पर विभाग का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता को जांच के बाद निलंबित किया गया है। वहीं रूल्स ऑफ बिजनेस बाध्यकारी नहीं है। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। </p>
<p><strong>क्या है मामला </strong><br />निलंबित मेयर के पति सुशील गुर्जर की ओर से नगर निगम के पट्टे जारी करने की एवज में रिश्वत मांगने से जुड़े मामले में एसीबी की कार्रवाई के बाद राज्य सरकार ने मुनेश को निलंबित किया था। इस निलंबन आदेश पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। इसके बाद राज्य सरकार ने निलंबन आदेश वापस ले लिया था। वहीं बाद में राज्य सरकार ने जांच के बाद मुनेश गुर्जर को पुन: निलंबित कर दिया था। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Nov 2023 10:09:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव पर राज्य सरकार, चुनाव आयोग की याचिकाएं की खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[उच्च न्यायालय ने 13 जून को आयोग से संवेदनशील इलाकों में केंद्रीय बलों की तैनाती के लिए अनुरोध भेजने को कहा था। इसके बाद 15 जून को उच्च न्यायालय ने 48 घंटे के भीतर सुरक्षाबलों को तैनात करने का निर्देश दिया था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-dismisses-state-government-election-commissions-petitions-on-west/article-49489"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/supreme-court2.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय पश्चिम बंगाल स्थानीय निकाय के चुनाव के मद्देनजर राज्य के सभी संवेदनशील जिलों में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनात करने के उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाएं  मंगलवार को खारिज कर दी। न्यायमूर्ति बी भी नागरत्न और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की अवकाशकालीन पीठ ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के 13 और 15 जून के आदेशों को न्याय संगत बताते हुए उनकी पुष्टि की जबकि राज्य सरकार और पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग की विशेष अनुमति याचिकाएं खारिज कर दी।</p>
<p>पश्चिम बंगाल में  आठ जुलाई, 2023 को पंचायत चुनाव होने वाले हैं। इस चुनाव में हिंसा की खबरों और आशंकाओं के मद्देनजर राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता शुभेंदु अधिकारी के अलावा कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी और अन्य द्वारा दायर जनहित याचिकाओं पर उच्च न्यायालय ने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती का निर्देश दिया था।</p>
<p>उच्च न्यायालय ने 13 जून को आयोग से संवेदनशील इलाकों में केंद्रीय बलों की तैनाती के लिए अनुरोध भेजने को कहा था। इसके बाद 15 जून को उच्च न्यायालय ने 48 घंटे के भीतर सुरक्षाबलों को तैनात करने का निर्देश दिया था। शीर्ष अदालत ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के 13 और 15 जून के आदेशों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर शीघ्र सुनवाई करने की राज्य चुनाव आयोग की गुहार म सोमवार को स्वीकार करते हुए मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की अनुमति दी थी।</p>
<p>न्यायमूर्ति सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली अवकाशकालीन पीठ के समक्ष आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने सोमवार को विशेष उल्लेख के दौरान तत्काल सुनवाई की गुहार लगाई थी। पीठ ने याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई करने की सहमति व्यक्त की थी। पश्चिम बंगाल सरकार और चुनाव आयोग ने उच्च न्यायालय के आदेश को शीर्ष अदालत में अलग-अलग चुनौती दी थी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Jun 2023 15:23:02 +0530</pubDate>
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