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                <title>Deepawali - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Deepawali RSS Feed</description>
                
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                <title>दशहरा से दीपावली तक हुआ 2500 करोड़ का व्यापार</title>
                                    <description><![CDATA[वाहन, सोना चांदी, बर्तनों की जमकर हुई बिक्री]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-got-2500-crores-business-from-dussehra-to-deepawali/article-94463"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/6633-copy44.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर में नवरात्रा, दशहरा से लेकर छह दिवसीय दीपोत्सव त्यौहार पर इस बार जमकर बाजारों में धन बरसा।  जिससे व्यापारियों में खासा उत्साह नजर आ रहा है। दीपोत्सव के बाद अब व्यापारियों को देव उठनी एकादशी के अबूझ मुहूर्त पर अच्छे कारोबार की आस लगाई जा रही है। व्यापार महासंघ के महासचिव अशोक माहेश्वरी ने बताया कि जहां पिछले साल  1200 सौ करोड़ का कारोबार हुआ था इस बार अच्छी फसले होने से 2500 करोड़ के लगभग का  कारोबार नवरात्रा, दशहरा, पुष्य नक्षत्र व पांच दिवसीय दीपोत्सव के दौरान हुआ। जिससे व्यापारियों के चेहरे खिले हुए है।  मंदी की मार झेल रहे सर्राफा व्यापारियों के चेहरे पर रौनक लौट आई। दशहरा से लेकर दीपावली तक 2000 करोड़ की कारोबार होने का अनुमान लगाया जा रहा था। लेकिन इसबार  दीपावली तक 2500 करोड़ रुपए के लगभग व्यापार होने का अनुमान है। 500 करोड़ का रियल स्टेट में बरसा धन:  अशोक माहेश्वरी ने बताया कि शहर में धनतेरस के शुभ मुहूर्त में लोगों ने प्लाट, जमीन, फ्लेट, दूकानों के सौदे किए। कोटा में रियल स्टेट में लंबे समय बाद अच्छी बुकिंग देखी गई। जानकारों के अनुसार इस बार दो करोड़ से अधिक कारोबार धन तेरस पर हुआ। वहीं नवरात्रा से लेकर दीपावली तक 500 करोड़ के कारोबार होने का अनुमान है।</p>
<p><strong>100 करोड़ का बरसा सर्राफा बाजार में धन</strong><br />शहरवासियों ने दशहरा, पुष्य नक्षत्र व धनतेरस के विशेष योग में सोना चांदी के सिक्के मुर्तियों की खरीद की। इस बार चांदी के सिक्कों की जगह चांदी की मूर्तियों की खरीद ज्यादा हुई। शहर के सर्राफा बाजार, रामपुरा बाजार, चौथमाता सर्राफा बाजार में लोगों ने ज्वैलेरी, चांदी के सिक्के, चांदी मूर्तियों की खरीदारी की।  ग्राहकों को सोने चांदी की दुकानों में पहुंचने में परेशानी हुई। धनतेरस पर 100 करोड़ का व्यापार होने का अनुमान है। जो पिछले साल से 15 फीसदी ज्यादा है।  इस बार चांदी की हनुमान चालीसा रिद्धि- सिद्धि के साथ गणेश जी, इसके अलावा चांदी के गिलास, कटोरी और अन्य आयटम की भी काफी डिमांड रही। </p>
<p><strong>एक हजार करोड़ के वाहन बिके </strong><br />शहर में आॅटोमोबाइल क्षेत्र में इस बार अच्छी ग्राहकी रही। इसबार सबसे ज्यादा चौपहिया वाहनों की बिक्री हुई। करीब 2 हजार से अधिक कार बिकी। वहीं करीब 150 के आसपास ट्रैक्टर, 100 के लगभग ई रिक्शा व 2500 हजार दुपहिया वाहनों की बिक्री हुई। दुपहिया वाहन के मैनेजर लोकेश जांगिड ने बताया कि पुष्य नक्षत्र, दशहरा, दीपावली तक करीब 2500 हजार दुपहिया वाहन बिके। वहीं चौपहिया वाहनों के मैनेजर रविंद्र मेहरा ने बताया कि नवरात्रा से लेकर दीपावली तक करीब 2 हजार चौपहिया वाहन की बिक्री हुई है। इस बार एक हजार करोड के टर्न ओवर होने की संभावना है। <br /> <br /><strong>फर्नीचर मार्केट में बूम 25 करोड़ का हुआ कारोबार</strong><br />फर्नीचर मार्केट के अध्यक्ष इलियास अंसारी ने बताया कि इस बार नवंबर व दिसंबर में  शादियां बंपर होने से फर्नीचर मार्केट में बूम आया हुआ है। दशहरा के अबुझ मुहूर्त के बाद धनतेरस पर सबसे ज्यादा फर्नीचर की बुकिंग हुई है। शादी वाले जमकर खरीदारी कर रहे हैं। धनतेरस पर 20 से 25 करोड़ के बीच कारोबार हुआ है। </p>
<p><strong>400 करोड़ रुपए का किराना बाजार में बरसा धन</strong><br />शहर के अग्रसेन बाजार में इस बार लोग जमकर खरीदारी की। नवरात्रि से लेकर दीपावली तक किराना बाजार में 400 करोड़ रुपए धन बरसा है। </p>
<p><strong>अन्य बाजारों में 80 करोड़ का धन</strong><br />शहर के अन्य बाजारों में करीब 80 करोड़ का करोबार हुआ। जिसमें श्रृंगार प्रसाधन, ब्लॉथ मार्केट, जूते सजावट के समान,  मेकअप, पूजन सामाग्री और मिठाई, कार सजावट बाजार  सम्मलित है। </p>
<p><strong>रेडिमेड गारमेंट्स में 50 करोड़ का कारोबार </strong><br />रेडिमेड व्यवसायी अनिल कुमार जैन ने बताया कि अक्टूबर के पहले सप्ताह से रेडिमेड गारमेंट्स बाजार में अच्छी ग्राहकी चल रही है। धनतेरस की पूर्व संध्या पर लोगों ने जमकर खरीदारी की।   धनतेरस 50 करोड़ का कारोबार होने का अनुमान बच्चों से लेकर बुजुर्गो तक इस बार लंबी वेरायटी बाजार में आई है। महिलाओं के परिधान में इस बार कुछ नये डिजायन और कुर्तिया आई हैं जो युवतियों काफी पसंद आ रही है। </p>
<p><strong>इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार को लगा 80 करोड़ का बूस्टर डोज</strong><br />सबसे ज्यादा भीड़ इलेक्ट्रानिक्स बाजार में  देखी गई। मंदी की मार झेल रहे इलेक्ट्रानिक्स बाजार को धनतेरस की बूस्टर डोज लगने से फिर से गति पकड़ ली।  इलेक्ट्रॉनिक्स व्यवसायी सत्यनारायण गुप्ता ने बताया कि इस बार दिवाली काफी अच्छी रहने वाली है। नवरात्रा के बाद से ही अच्छी ग्राहकी चल रही है। धनतेरस से लेकर दिवाली तक 3 दिन में करीब 80 करोड़ का कारोबार होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इस बार एलईडी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन सहित अन्य सामान खूब बिक रहे हैं। कंपनियों ने भी नए उत्पाद के साथ आकर्षक आॅफर लॉन्च किए हैं। धनतेरस पर 50 करोड़ का कारोबार हुआ है। </p>
<p><strong>बर्तन बाजार रहा गुलजार, 50 करोड़ के बिके बर्तन</strong><br />धनतेरस पर शहर के रामपुरा, इंदिरा बाजार, बर्तन बाजार में सबसे ज्यादा भीड़ रही। लोगों ने धनतेरस पर सोना चांदी के बाद सबसे ज्यादा स्टील, पीतल, तांबा कांसा के बर्तनों की खरीदी की। वहीं कई लोगों ने दिसंबर में होने वाली शादियों के लिए बर्तनों की बुकिंग कराई। </p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong><br /><strong>नवरात्रा से दशहरा तक :</strong> 250 करोड़<br /><strong>पुष्य नक्षत्र :</strong> 250 करोड़ का कारोबार<br />धनतेरस, रूप चौदस, दीपावली 2 हजार करोड़ रुपए का कारोबार</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Nov 2024 14:15:56 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>रंगोली और मांडणा में दिखी छात्राओं की रचनात्मकता</title>
                                    <description><![CDATA[दीपावली पर्व के उपलक्ष्य में दैनिक नवज्योति कार्यालय में रंगोली और मांडणा प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/creativity-of-students-was-seen-in-rangoli-and-mandana/article-94116"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/630400-sizee-(15).png" alt=""></a><br /><p>कोटा । रंगोली और मांडणा बनाने की प्रथा सालों से चली आ रही है। रंगोली या मांडना हमारी प्राचीन सभ्यता और संस्कृति की समृद्धि के प्रतीक हैं,  इससे घर परिवार में मंगल रहता है। उत्सव-पर्व के साथ-साथ मांगलिक अवसरों पर रंगोली और मांडणा से घर-आंगन को खूबसूरती के साथ सजाया जाता है। वैसे तो दीवाली को रोशनी के त्योहार के रूप में जाना जाता है और इस  पर्व पर  देवी लक्ष्मी का पूजन किया जाता है  इसलिए जब लक्ष्मी पूजा की जाती है तो ऐसी मान्यता है कि घर के द्वार के सामने जब देवी लक्ष्मी आए तो खूबसूरती और सजावट दिखना चाहिए ऐसे में  विशेषकर दीपावली पर रंगोली और मांडणा बनाए जाते है । दीपावली पर्व के उपलक्ष्य में दैनिक नवज्योति कार्यालय में रंगोली और मांडणा प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। शहर के विभिन्न महाविद्यालयों से आई  छात्राओं ने रंगोली और मांडणा प्रतियोगिता में भाग लेकर अपने रचनात्मक कौशल का परिचय दिया। इसमें राजकीय कला महाविद्यालय, राजकीय कन्या कला महाविद्यालय व राजकीय विधि महाविद्यालय की छात्राओं ने उत्साह से भाग लेकर तरह-तरह की आकर्षक रंगोली व मांडणें बनाए। रंगोली व मांडणा में छात्राओं ने  विभिन्न आकार, रंगों  से कल्पना और भावनाओं के रंग भर कर उन्हें दीपक से सजाया और प्रतियोगिता में अपनी कला का प्रदर्शन किया। रंगोली प्रतियोगिता में राजकीय विधि महाविद्यालय की द्वितीय वर्ष की छात्रा हिमांगी अग्रवाल प्रथम स्थान पर रहीं वहीं मांडणा में राजकीय कला  महाविद्यालय की एमए संस्कृत चतुर्थ सेमेस्टर की छात्रा पूजा लोधा प्रथम स्थान पर रहीं। रंगोली  व मांडणा बनाने के लिए प्रतिभागियों को एक घंटे का समय दिया गया था । विभिन्न रंगों के सामंजस्य और अपनी रचनात्मकता, कल्पनाशीलता और कलात्मक कौशल से आकर्षक रंगोली बनाने में रंगोली के विभिन्न रंगों, चूड़ी, चम्मच, कोनलाइनर, चॉक, छलनी का प्रयोग किया वहीं मांडणा बनाने के लिए मुख्य रूप से खड़िया के घोल और लाल रंग के गेरू का प्रयोग किया। इसको बनाने के लिए कॉटन, ब्रश और उंगलियों का प्रयोग करते हुए खूबसूरत व आकर्षक डिजाइन बनाए । प्रतियोगिता में कुल छह छात्राएं विजेता रही। इस प्रतियोगिता को संपन्न करवाने में राजकीय कला महाविद्यालय कोटा के प्राचार्य प्रो. रोशन भारती, ड्राइंग एवं पेंटिंग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. शालिनी भारती तथा राजकीय कन्या कला महाविद्यालय की प्राचार्या सीमा चौहान का सराहनीय योगदान रहा। </p>
<p><strong>प्रतियोगिता का परिणाम</strong><br /><strong>रंगोली की विजेता छात्राएं</strong></p>
<p><strong>प्रथम पुरस्कार</strong><br />हिमांगी अग्रवाल, द्वितीय वर्ष, राजकीय विधि महाविद्यालय   </p>
<p><strong>द्वितीय पुरस्कार </strong><br />भूमिका वैष्णव,बी ए तृतीय सेमेस्टर, राजकीय कन्या कला महाविद्यालय </p>
<p><strong>तृतीय पुरस्कार</strong><br />अंकिता वर्मा, एमए अंतिम वर्ष ड्राईंग एंड पेंटिंग, राजकीय कला महाविद्यालय</p>
<p><strong>मांडणा की विजेता छात्राएं</strong><br /><strong>प्रथम पुरस्कार</strong><br />पूजा लोधा, एमए संस्कृत चतुर्थ सेमेस्टर, राजकीय कला महाविद्यालय</p>
<p><strong>द्वितीय पुरस्कार </strong><br />द्रोपदी लोधा, एमए लोक प्रशासन चतुर्थ सेमेस्टर,  राजकीय कन्या कला महाविद्यालय </p>
<p><strong>तृतीय पुरस्कार</strong><br />दर्शिता शर्र्मा, एमए चतुर्थ सेमेस्टर ड्राईंग एंड पेंटिंग, राजकीय कला महाविद्यालय</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Oct 2024 12:53:24 +0530</pubDate>
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                <title>दीये जलाएं, परंपरा को जीवंत बनाएं</title>
                                    <description><![CDATA[ आधुनिकता की आंधी में हम अपनी पौराणिक परंपरा को छोड़कर दीपावली पर बिजली की लाइटिंग के साथ तेज ध्वनि वाले पटाखे चलाने लगे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/light-lamps-and-bring-tradition-alive/article-94024"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/deepak.jpg" alt=""></a><br /><p>आज की भागती दौड़ती जिन्दगी में लोग अपनी परंपरा को भूलते जा रहे हैं। इसका परिणाम है कि आज देश में पर्यावरण संकट के साथ-साथ कई तरह की समस्या उत्पन्न हो रही है। जिसके चलते सभी लोगों और जीव-जंतुओं के जीवन पर संकट है। इन परंपराओं  में एक दीपावली पर्व पर मिट्टी के दीये जलाना भी है। जिसको आज लोग भूलते जा रहे हैं और उसकी जगह पर इलेक्ट्रिक लाइटों का उपयोग कर रहे हैं। लेकिन जो सुंदरता मिट्टी के दीये जलने पर दिखती है वह इलेक्ट्रिक लाइटों के जलने से नहीं। इस बात को स्वयं लोग भी स्वीकार कर रहे हैं और इस परंपरा को लोगों के भूलने पर चिंता भी व्यक्त कर रहे हैं। मिट्टी के दीये जलाना हमारी परंपरा और संस्कृति है। अपनी संस्कृति को कोई कैसे भूल सकता है। इसका सभी लोगों को ध्यान रखना चाहिए। मिट्टी के दीये जलाने के कई लाभ हैं। जिसका उल्लेख कई जगहों पर देखने और सुनने को मिलता है। इसलिए सभी लोग मिट्टी के दीये जलाएं।</p>
<p>दीपावली का त्यौहार मिट्टी के दीये से जुड़ा हुआ है। यह हमारी संस्कृति में रचा-बसा हुआ है। दीया जलाने की परंपरा आदि काल से रही है। भगवान राम की अयोध्या वापसी की ख़ुशी में अयोध्यावासियों ने घर-घर दीप जलाया था। तब से ही कार्तिक महीने में दीपों का यह त्यौहार मनाए जाने की परंपरा रही है। पिछले दो दशक के दौरान कृत्रिम लाइटों का क्रेज बढ़ा है। आधुनिकता की आंधी में हम अपनी पौराणिक परंपरा को छोड़कर दीपावली पर बिजली की लाइटिंग के साथ तेज ध्वनि वाले पटाखे चलाने लगे हैं। इससे एक तरफ  मिट्टी के कारोबार से जुड़े कुम्हारों के घरों में अंधेरा रहने लगा, तो ध्वनि और वायु प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों को अपना कर अपनी सांसों को ही खतरे में डाल दिया। अपनी परंपराओं से दूर होने की वजह से ही कुम्हार समाज अपने पुश्तैनी धंधे से दूर होता जा रहा है। दूसरे रोजगार पर निर्भर होने लगे हैं। एक समय था जब दीपावली पर्व को लेकर लोग मिट्टी के दीये खरीदने के लिए पहले ही कुम्हार को ऑर्डर कर देते थे। दीपावली पर्व पर कई लोगों के आर्डर को पूरा करने में दिन रात एक कर मेहनत करते थे। हालांकि उस समय उतनी आमदनी नहीं होती थी, लेकिन कुम्हारों को भी एक रुचि रहती थी कि इस परंपरा को जीवंत रखना है। लेकिन आज लोगों ने मिट्टी के दीये जलाना धीरे-धीरे कम कर दिया है, इससे अब कुम्हार भी इसमें रुचि नहीं ले रहे। जिसका नतीजा है कि आज दीपावली पर्व में लोग घर में दो-चार मिट्टी के दीये जला कर सिर्फ एक परंपरा का किसी तरह निर्वहन कर रहे हैं। ज्यादातर लोग इलेक्ट्रिक  लाइटों, झालर और अन्य लाइटों को जला कर ही दीपावली पर्व में अपने घर को रोशनी से जगमग करने की कोशिश कर रहे हैं। हम सभी अब दीपावली के नाम पर पर्यावरण को खराब कर रहे हैं।</p>
<p>अब हमें पुन: अपनी परंपरा को समझना होगा। हमें मिट्टी के दिये जलाने की परंपरा की पुन शुरुआत करनी होगी। इससे कीड़े मकोड़े मरते हैं। झालर और लाइट से कीड़े नहीं मरते। हमारी संस्कृति सरसों के तेल के दिये जलाना है, अच्छे पकवान बनाना, मिठाइयां खाना और पड़ोसी को भी खिलाना, लोगों को उपहार देना आदि है। लेकिन लोग अब उतने समझदार नहीं हैं इसलिए पटाखे छूटेंगे। लोग मिट्टी के दीये जलाएं। इससे प्रदूषण भी नहीं होगा और परंपरा भी जीवंत रहेगी। दीपावली पर्व पर मिट्टी के दीये जलाना पूर्वजों के द्वारा बनाई गई परंपरा है। इसे हम सभी लोगों को बरकरार रखना चाहिए। दिवाली में मिट्टी के दीये जलाना हमारी संस्कृति और प्रकृति से जुड़ने का बहुत ही सुगम साधन है। यह भारतीय संस्कृति में बहुत ही शुभ और पवित्र माना जाता है। मिट्टी के दीये प्रेम, समरसता और ज्ञान के प्रतीक हैं। सामाजिक व आर्थिक आधार पर भी दीयों की खूबसूरती जगजाहिर है। इस बार दीपावली के दिन मिट्टी के दीये जलाने का संकल्प लेकर संस्कृति का बचाव करना है। सभी लोग मिट्टी के दिये ही जलाएं। आज की युवा पीढ़ी इलेक्ट्रिक लाइटों के प्रति अधिक रुचि रख रही है। घरों को सजाने से लेकर दीये जलाने में इलेक्ट्रिक लाइटों का ही उपयोग कर रही है। जबकि यह सोचना चाहिए कि हमारी संस्कृति और परंपरा का निर्वहन करना युवाओं के कंधे पर ही है। गांव या किसी शहर में जो कुम्हार है वह आज भी मिट्टी  के दीये बनाते हैं। इसमें उन्हें आमदनी का लालच नहीं होता बल्कि उनमें अपनी परंपरा को बरकरार रखने का उत्साह होता है। लेकिन लोग इसे भूलते जा रहे हैं।</p>
<p>पंरपरा व पर्यावरण के संरक्षण के लिए  मिट्टी के दीये जलाना है। इनसे कोई प्रदूषण नहीं होता। कृत्रिम रोशनी आंखों और त्वचा के लिए हानिकारक होती है। मिट्टी के दीये की रोशनी आंखों को आराम पहुंचाती है। दिवाली पर इसे जलाकर हम अपनी परंपराओं को याद रखते हैं। मिट्टी के दीये बनाने वाले कारीगरों को प्रोत्साहित करने का भी यह अच्छा मौका है। इस दीपावली, हम सभी मिलकर मिट्टी के दीये जलाएं और एक स्वच्छ और हरा-भरा पर्यावरण बनाने में अपना योगदान दें। लोगों को इस पर विचार करना चाहिए। वर्तमान में अपनी परंपरा को बरकरार रखने और पर्यावरण बचाने के लिए इस दीपावली मिट्टी की दीये जलाने के प्रति लोगों खास कर बच्चों व युवाओं को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाएं। <br /><strong>-प्रियंका सौरभ </strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Oct 2024 11:34:18 +0530</pubDate>
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                <title>लक्ष्मी मेहरबान, बाजार गुलजार</title>
                                    <description><![CDATA[ऑटोमोबाइल सेक्टर फुल स्पीड पर रहा, नौ सौ से अधिक पैसेंजर व्हीकल बिके]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/lakshmi-meherban-bazaar-gulzar/article-93824"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/630400-sizee-(1)10.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। गुरु पुष्य नक्षत्र के दिन सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त के कारण गुरुवार को दिनभर बाजार में खरीदारों की रौनक रही। ऑटोमोबाइल, होम अप्लायसेंज, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मोबाइल, गैजेट्स, गोल्ड, सिल्वर ज्वैलरी, बर्तन, सिक्के, डेकोरेटिव लाइटिंग आदि की रिकॉर्ड बिक्री हुई। शहर के सभी प्रमुख बाजारों में प्रतिष्ठान जल्द खुले और देर रात तक बिक्री जारी रही। </p>
<p><strong>साढ़े पांच हजार से अधिक टू-व्हीलर्स बिके</strong><br /><strong>बिक्री बढ़ने के मुख्य कारण<br /></strong>गुरु पुष्य नक्षत्र का शुभ अवसर फेस्टिव सीजन की मांग<br />नए मॉडल्स की बहार<br />ऑफर्स और डिस्काउंट<br />ईजी फाइनेंस सुविधा</p>
<p><strong>सेल्स में रही बीस फीसदी की वृद्धि</strong><br />पिछले फेस्टिव सीजन से इस बार बीस फीसदी की ऑटोमोबाइल में ग्रोथ है। गुरुपुष्य नक्षत्र के सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त के कारण पैसेंजर व्हीकल और टू-व्हीलर्स की रिकॉर्ड सेल हुई।<br />साईं गिरधर, <br />राष्ट्रीय उपाध्यक्ष फाडा</p>
<p><strong>मुहूर्त के हिसाब से देर रात तक डिलीवरी</strong><br />अलसुबह शोरूम खुले और देर रात तक खुले रहे। कस्टमर अपने-अपने मुहूर्त के हिसाब से डिलीवरी शोरूम से ली। हुण्डई क्रेटा की सबसे अधिक मांग बनी हुई है। गुरुवार को कस्टमर्स ने नई बुकिंग भी बड़ी संख्या में करवाई।<br />के.के.रॉय, हिन्दुस्तान हुण्डई</p>
<p><br /><strong>खरीदारी का बना महासंयोग</strong><br />गुरुपुष्य नक्षत्र के दिन मिनी रिकॉर्ड बिक्री हुई। जयपुर में 250 करोड़ पार करोबार हुआ। सोने-चांदी के आभूषण, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक गुड्स, पूजा सामग्री सहित अनेक वस्तुओं की रिकॉर्ड बिक्री हुई।<br />सुभाष गोयल, अध्यक्ष जयपुर व्यापार महासंघ</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Oct 2024 14:05:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान सरकार ने एक साल पहले ही तय कर दिया था दीपावली 31 अक्टूबर की होगी</title>
                                    <description><![CDATA[दीपावली किस दिन मनाई जाएगी, इसको लेकर राज्य सरकार में कोई विवाद नहीं है। एक साल पहले जारी कैलेण्डर में दीपावली 31 अक्टूबर को दर्शा दी गई है और छुट्टी भी घोषित कर दी गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rajasthan-government-had-decided-a-year-ago-that-diwali-would/article-93062"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/630400-size-(1)16.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। हिन्दू पंचांग और पंडित-धर्मशास्त्री दीपावली पर्व मनाने को लेकर चाहे कुछ भी तर्क थे, लेकिन राजस्थान सरकार ने एक साल पहले ही तय कर दिया था कि सन् 2024 में दीपावली 31 अक्टूबर को ही मनाई जाएगी। सामान्य प्रशासन विभाग के सूत्रों के अनुसार दीपावली पर्व की तारीख को लेकर पिछले साल सितम्बर महीने में भी धर्म शास्त्रियों और विद्वानों के अलग-अलग तर्क आए थे। उस समय भी इनके तर्कों पर विचार-विमर्श किया गया था। इसके साथ ही केन्द्र सरकार की ओर से जारी कैलेण्डर का भी अवलोकन किया गया था।</p>
<p>केन्द्र सरकार ने भी दीपावली का अवकाश 31 अक्टूबर को घोषित किया है। उसके बाद राज्य सरकार ने तय किया था कि वर्ष 2024 में दीपावली 31 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इसके साथ ही सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से नौ अक्टूबर 2023 को अगले साल का कैलेण्डर जारी किया गया। उसमें भी दीपावली 31 अक्टूबर की बताई गई है। कैलेण्डर के अनुसार गुरुवार, 31 अक्टूबर को दीपावली, शनिवार, दो नवम्बर को गोवर्धन पूजा और रविवार, तीन नवम्बर को भाई दूज मनाई जाएगी। राज्य सरकार ने इन तीनों तारीखों में ही पर्व को लेकर छुट्टियां घोषित की है। यह दीगर बात है कि एक नवम्बर को शुक्रवार है और और उस दिन राज्य में सरकारी अवकाश नहीं है। जयपुर के आराध्य देव श्री गोविन्ददेव जी मंदिर में भी दीपावली 31 अक्टूबर को मनाई जाएगी।</p>
<p>दीपावली किस दिन मनाई जाएगी, इसको लेकर राज्य सरकार में कोई विवाद नहीं है। एक साल पहले जारी कैलेण्डर में दीपावली 31 अक्टूबर को दर्शा दी गई है और छुट्टी भी घोषित कर दी गई है। पंचांग और धर्मशास्त्री दीपावली की तारीख को लेकर क्या कहते हैं, वह उनका मामला है।<br />डॉ. जोगाराम, शासन सचिव</p>
<p>सामान्य प्रशासन विभाग, राजस्थान</p>
<p><strong> जिलों के पंडित भी गुटों में बंटे</strong><br />दीपावली मनाने को लेकर राजस्थान के पंडितों में भी गुटबाजी है। इसके चलते राजस्थान में दीपावली इस बार दो दिन मनाई जा रही है। पंडितों ने कुछ जिलों में 31 अक्टूबर को मनाने को कहा है। अन्य जिलों में एक नवम्बर को मनाने का ऐलान किया है। </p>
<p><strong>इन जिलों में 31 को मनेगी दीपावली</strong><br />जयपुर, दौसा, पाली, जैसलमेर, कोटा, नागौर, चूरू, सीकर, सिरोही, हनुमानगढ़,  गंगापुरसिटी, राजसमंद और झालावाड़। </p>
<p><strong>इन जिलों एक नवम्बर को दिवाली</strong><br />उदयपुर, अजमेर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, बांसवाड़ा, बाड़मेर, जालौर, सवाई माधोपुर, भरतपुर, करौली, धौलपुर, बारां, डूंगरपुर, बूंदी और टोंक।  </p>
<p><strong>इन जिलों में है दो मत <br /></strong>श्रीगंगानगर, जोधपुर, झुंझुनूं,  बीकानेर, अलवर और बीकानेर। </p>
<p><strong>धर्म सभा आज</strong><br />अखिल भारतीय विद्वत परिषद के तत्वावधान में मंगलवार को होने वाली  धर्मसभा में भी दीपावली मनाने का निर्णय लिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Oct 2024 09:42:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>राज्य सरकार की अनदेखी से प्रदेशवासियों की दीपावली होगी फीकी : जूली</title>
                                    <description><![CDATA[स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह सरकार की विफलता है कि वह अपने नागरिकों को उनकी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति कराने में नाकाम साबित हो रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/due-to-the-negligence-of-the-state-government-diwali-of/article-92601"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/tikaram.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्य सरकार पर प्रदेश की जनता की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि दीपावली का यह त्यौहार प्रदेशवासियों के लिए फीका साबित होगा। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं से जैसे तैसे अपना जीवन यापन करने वाली प्रदेश की जनता पेंशन के लिए तरस रही है। विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति समय पर नहीं मिलने से परेशान विद्यार्थी विभाग के चक्कर लगाकर थक गए हैं।</p>
<p>जूली ने कहा कि पालनहार जैसी योजना को भी राज्य सरकार ने वेट एंड वॉच की स्थिति में रखा हुआ है। जनहित की योजनाओं पर राजस्थान सरकार गंभीर नहीं है, सरकार की लापरवाही से 90 लाख पेंशनधारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है जो कि गंभीर विषय है। सरकार को तत्काल प्रभाव से पेंशनधारियों की राशि जारी करनी चाहिए और भविष्य में ऐसी लापरवाही की पुनरावृत्ति ना हो यह भी सुनिश्चित करना चाहिए। राज्य सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे वृद्धजनों, विधवा, दिव्यांगों और कृषक वृद्धजन योजना के लाभार्थियों को उनकी पेंशन के लिए इंतजार नहीं करना पड़े यह सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है।</p>
<p>उन्होंने राजस्थान सरकार से मांग करते हुए कहा कि वह जनहित की इन योजनाओं पर तत्काल ध्यान दें और पेंशनधारियों की राशि जारी करे ताकि उन्हें आर्थिक संबल मिल सके। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह सरकार की विफलता है कि वह अपने नागरिकों को उनकी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति कराने में नाकाम साबित हो रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Oct 2024 18:42:52 +0530</pubDate>
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