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                <title>tigress T-114 - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>पिंजरे से निकल जंगल में लगाई आजादी की छलांग</title>
                                    <description><![CDATA[बाघिन 5 हैक्टेयर के एनक्लोजर में रहकर जंगल के तौर-तरीके सीखेंगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/leaped-out-of-the-cage-and-entered-the-jungle-for-freedom/article-97416"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(3)15.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में पल रही बाघिन टी-114 की मादा शावक को आखिरकार 25 महीने बाद पिंजरे से आजादी मिल ही गई। नर शावक के रामगढ़ शिफ्ट होने के 8 दिन बाद बुधवार को मादा शावक को भी मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के दरा रेंज में सॉफ्ट रिलीज कर दिया गया। यहां बाघिन 5 हैक्टेयर के एनक्लोजर में रहकर जंगल के तौर-तरीके सीखेंगी। साथ ही घात लगाकर शिकार करने की कला व जंगल की चुनौतिपूर्ण परिस्थितियों में खुद को ढाल सकेगी। असल में रिवाइल्डिंग बेहतर तरीके से हो सकेगी। </p>
<p><strong>दोपहर 1 बजे लगाई खुले जंगल में छलांग</strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में सुबह 8 बजे से ही शिफ्टिंग को लेकर हलचल तेज हो गई थी। सुबह 9 बजे वन अधिकारी व एनटीसीए द्वारा गठित टीम के सदस्य पिंजरे में पहुंच गए थे। 9 बजकर 15 मिनट पर डॉट लगाकर बाघिन को ट्रैंकुलाइज किया। स्वास्थ्य परीक्षण कर ब्लड व डीएनए सैंपल लिए। साथ ही वजन किया। बाघिन का वजन 160 किलो था। इसके बाद रेडियोकॉर्लर लगाकर 11 बजे मुकुंदरा टाइगर रिजर्व के लिए रवाना कर दिया। दोपहर 1 बजे दरा रेंज पहुंचे और 1.12 मिनट पर बाघिन ने 5 हैक्टेयर के एनक्लोजर में आजादी की छलांग लगाई। </p>
<p><strong>रिवाइल्डिंग केंद्र बनकर उभरेगा मुकुंदरा</strong><br />उन्होंने बताया कि राजस्थान का यह पहला रिवाइल्डिंग का प्रयास है। सफल हुए तो प्रदेश में कोटा रिवाइल्डिंग केंद्र के रूप में उभरकर सामने आएगा।  प्रदेश के अन्य जंगलों में जहां कहीं भी अनाथ शावक होंगे तो भविष्य में उन्हें कोटा में लगाकर रिवाइल्ड किए जा सकेंगे। वनकर्मी व अधिकारी पूरी शिद्दत से सफल रिवाइल्डिंग में जुटे हैं। तत्कालीन सीसीएफ शारदा प्रताप सिंह का विजन शावकों की रिवाइल्डिंग में काफी अहम रहा। </p>
<p><strong>एनक्लोजर में छोड़े 16 चीतल</strong><br />वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सक डॉ. तेजेंद्र सिंह रियाड़ ने बताया कि बाघिन को मुकुंदरा में सॉफ्ट रिलीज कर दिया गया है। बाघिन के आने से पहले ही एनक्लोजर में 16 चीतल छोड़ दिए गए थे। जल्द ही यहां नीलगाय भी छोड़ने की योजना है। वैसे, यह अपने भाई नर बाघ के मुकाबले काफी एक्टिव है। बायोलॉजिकल पार्क में जब इनके सामने शिकार छोड़ते थे तो यही सबसे पहले शिकार तक पहुंचती थी। यदि, बाघिन 50 शिकार सफलतापूर्वक कर लेती है तो हार्ड रिलीज किया जा सकता है। मादा शावक चिकित्सकों की गहन निगरानी में रहेगी। इस दौरान उसके व्यवहार, गतिविधियां, भोजन लेने की मात्रा, घात लगाकर शिकार कर पा रही या नहीं सहित तमाम गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी।  </p>
<p><strong>एनक्लोजर में लगे कैमरा ट्रैप </strong><br />दरा रेंज के पांच हैक्टेयर एनक्लोजर को ग्रीन नेट से पूरी तरह से कवर किया गया है। वहीं, जगह-जगह कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं। रेडियोकॉर्लर के सिग्नल व तीन मंजिला वॉच टॉवर से 24 घंटे निगरानी की जा रही है। साथ ही मानव दखल से बिलकुल दूर व जीरो मॉबिलिटी सुनिश्चित की गई है। बाघिन की निगरानी के लिए टीम तैनात कर दी गई है। शिफ्टिंग के दौरान  सीसीएफ रामकरण खैरवा, मुकुंदरा डिसीएफ मूथु एस, आरवीटीआर डीएफओ संजीव शर्मा, डब्ल्यू डब्ल्यूएफ से राजशेखर, वन्यजीव चिकित्सक डॉ, राजीव गर्ग, तेजेंद्र सिंह रियाड़ सहित बायोलॉजिकल पार्क के सहायक वनपाल मनोज शर्मा, सुरेंद्र सैनी, कमल प्रजापति, बुधराम जाट सहित अन्य वनकर्मी मौजूद रहे।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />एनटीसीए से मंजूरी मिलने के बाद मादा शावक को मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में शिफ्ट कर दिया गया है। बाघिन टी-114 की मौत के बाद मादा शावक को फरवरी 2023 को रणथम्भौर से अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क शिफ्ट किया गया था। जहां दो साल से रिवाइल्डिंग  की जा रही थी। अब यह सब एडल्ट की श्रेणी में है। एनटीसीए की गाइड लाइन की पालना करते हुए मुकुंदरा में शिफ्ट किया गया है।  <br /><strong>-मूथू एस, डीएफओ मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Dec 2024 15:43:36 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - आखिरकार 25 महीने बाद पिंजरे से आजाद हुआ शावक</title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति ने लगातार खबरें प्रकाशित कर दोनों शावकों को पिंजरे से खुले जंगल में शिफ्ट करने की आवाज उठाई थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-the-news---finally-the-cub-got-free-from-the-cage-after-25-months/article-96739"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/9930400-sizee-(3)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटावासियों व वन्यजीव पे्रेमियों के लिए बुधवार की सुबह खुशियों से भरी रही। बाघिन टी-114 के नर शावक को आखिरकार 25 महीने बाद पिंजरे से आजादी मिल ही गई। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से नर शावक को रामगढ़ टाइगर रिजर्व में शिफ्ट कर दिया गया है। जहां उसने 5 हैक्टेयर के एनक्लोजर  में आजादी की छलांग लगाई। साथ ही शिकार करने की कला, घात लगाना, जंगल की चुनौतिपूर्ण परिस्थितियों में खुद को ढालना सीख पाएगा। असल में रिवाइल्डिंग बेहतर तरीके से हो सकेगी। दरअसल, दैनिक नवज्योति ने लगातार खबरें प्रकाशित कर दोनों शावकों को पिंजरे से खुले जंगल में शिफ्ट करने की आवाज उठाई थी। साथ ही 2 साल से 3 गुना 3 साइज के नाइट शेल्टर में रहने से रिवाइल्डिंग प्रभावित होना, शारीरिक अंगों में विकार उत्पन्न होना, जंगल की परिस्थतियों के अनुकूल होने में चूनौतियों को लेकर बायोलॉजिस्ट, वन्यजीव विशेषज्ञों की नजर से खबरें प्रकाशित कर तथ्यों से वन अधिकारियों को रुबरू किया। इसी का नतीजा है कि दोनों शावकों में से नर शावक को बुधवार को रामगढ़ शिफ्ट कर दिया गया।</p>
<p><strong>पांच हैक्टेयर के एनक्लोजर में शिफ्ट</strong><br />चिकित्सक रियाड़ ने बताया कि दोपहर 2 बजकर 18 मिनट पर रामगढ़ टाइगर रिजर्व की जैतपुर रैंज में 5 हैक्टेयर के एनक्लोजर में नर शावक को शिफ्ट किया गया है। यहां प्रे-बेस, पानी सहित अन्य जरूरी व्यवस्था की गई है। 7 दिन तक शावक चिकित्सकों की गहन निगरानी में रहेगा।  इस दौरान उसके व्यवहार, गतिविधियां, भोजन लेने की मात्रा, शिकार कर पा रहा है या नहीं सहित तमाम गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी।  </p>
<p><strong>कैमरों से लैस एनक्लोजर, वॉच टावर से निगरानी</strong><br />जैतपुर रैंज के पांच हैक्टेयर एनक्लोजर को ग्रीन नेट से पूरी तरह से कवर किया गया है। वहीं, सीसीटीवी कैमरों से लैस किया गया है। रेडियोकॉर्लर के सिग्नल व तीन मंजिला वॉच टॉवर से 24 घंटे निगरानी की जा रही है। साथ ही मानव दखल से बिलकुल दूर व जीरो मॉबिलिटी में सुनिश्चित की गई है। </p>
<p><strong>अगले हफ्ते मुकुंदरा में शिफ्ट होगी मादा शावक</strong><br />सीसीएफ रामकरण खैरवा ने बताया कि अगले हफ्ते तक मादा शावक को मुकुंदरा की दरा रैंज में बने 5 हैक्टेयर के एनक्लोजर में शिफ्ट किया जाएगा। अभी नर शावक की गतिविधियों को आॅर्ब्जर किया जा रहा है। </p>
<p><strong>अभेड़ा और रामगढ़ में रिवाइल्डिंग में अंतर</strong><br /><strong>अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क :</strong> यहां पिछले 25 महीने से 3 गुणा 3 मीटर के नाइट शेल्टर में रखा जा रहा था। वहीं, मूवमेंट के लिए 11 गुणा 10 मीटर साइज के कराल में रह रहा था। चलने-फिरने की जगह नहीं मिलने से शारीरिक ग्रोथ, शिकार करने की कला, घात लगाकर शिकार करना, शिकार को बचने के लिए भागने व शिकार के पीछे शावकों को दौड़ने की जगह नहीं मिल पाने रिवाइल्डिंग के उद्देश्य पूरे नहीं हो पा रहे थे। यहां एक ही तरह का भोजन बकरा, पाड़ा व मुर्गा दिया जा रहा था। वहीं, जंगल की वास्तविक चुनौतियों से वाकिफ नहीं हो पाए। </p>
<p><strong>रामगढ़ टाइगर रिजर्व </strong>: यहां जैतपुर रैंज में रामगढ़ महल के पीछे स्थित 5 हैक्टेयर के एनक्लोजर में रखा गया है। शारीरिक विकास के लिए  जितना मूवमेंट होना चाहिए, उतना हो सकेगा। भोजन के लिए उसे खुद शिकार करना पड़ेगा। एनक्लोजर में हिरण, चीतल, नील गाय, सांभर सहित 12 तरह का प्रे-बस है। जिन्हें किल करने के लिए घात लगाकर शिकार करना, छिपना, रास्ता पहचानने के लिए बैंच मार्क बनाना सहित जंगल की वास्तिविक परिदृश्य में खुद को ढाल पाएगा। 2 साल तक बायोलॉजिकल पार्क में कितनी रिवाइल्डिंग हुई, इसकी परख भी हो सकेगी।</p>
<p><strong>ट्रैंकुलाइज कर लगाया रेडियोकॉलर</strong><br />वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सक डॉ. तेजेंद्र सिंह रियाड़ ने बताया कि सुबह 10 बजकर 8 मिनट पर नर शावक को ट्रैंकुलाइज किया गया। इसके बाद स्वास्थ्य परीक्षण कर ब्लड व डीएनए सैंपल लिए। साथ ही वजन किया गया। इसके बाद 11.15 बजे रामगढ़ टाइगर रिजर्व के लिए रवाना कर दिया गया। उन्होंने बताया कि नर बाघ का वजन 160 किलो है। गले में रेडियोकॉलर लगाया गया है। जिससे उसकी मॉनिटरिंग होती रहेगी।</p>
<p><strong>अब यह रहेगी चुनौतियां </strong><br />- शावक दो साल तक अपनी बहन के साथ अभेड़ा बायोलॉजिकल में रहा है, ऐसे में बिछड़ने पर स्ट्रेस में आ सकता है, जिससे उबरना व नए वातावरण में ढलना।<br />- घात लगाकर शिकार कर पाने में सफल होना सबसे बड़ी चुनौती है। क्योंकि, बायोलॉजिकल पार्क में सीमित दायरे में लाइव शिकार छोड़ा जाता था लेकिन यहां शिकार चिंकारा, नील गाय, सांभर व  हिरण हैं, जिन्हें दौड़कर, छिपकर और घात लगाकर  किल करने में सफल होना। <br />- सफल शिकार का परसेंटेज बढ़ना। <br />- जंगल में रास्ता बनाना व पहचानने के लिए पेड़ों पर मार्किंग करने की कला सिखना आवश्यक है। </p>
<p> हमने रिवाइल्डिंग की तरफ पहला कदम बढ़ा दिया है। शिकार कर पाता है या नहीं, करता है तो सफल किल परसेंटेज, कितना भोजन करता है, बिहेवियर में बदलाव सहित कई गतिविधियों पर विशेषज्ञों की निगरानी रहेगी। एनक्लोजर को ग्रीन नेट से कवर कर इंसानी दखल से दूर रखा है। सीसीटीवी कैमरे व टॉच टावर से निगरानी और रेडियोकॉर्लर सिग्नल से मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।<br /><strong>- रामकरण खैरवा, संभागीय वनसंरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक, वन विभाग</strong></p>
<p>नर शावक को रामगढ़ में रिलीज कर दिया है। रणथम्भौर में बाघिन टी 114 की मृत्यु के बाद उसके दो शावकों को गत वर्ष 31 जनवरी को  बायोलॉजिकल पार्क कोटा में शिफ्ट किया गया था। तब उनकी उम्र लगभग ढाई महीने थी। मादा शावक को भी करीब एक सप्ताह बाद मुकुंदरा में शिफ्ट किए जाने की संभावना है। <br /><strong>- अनुराग भटनागर, डीसीएफ वन्यजीव विभाग कोटा </strong></p>
<p>पांच हैक्टेयर के एनक्लोजर में शिफ्ट करने के दौरान वह थोड़ा चला फिर रुका, इधर-उधर देखा और लंबी लंबी दौड़ लगाई। यहां 7 दिन विशेषज्ञों की निगरानी में रहेगा। रिलीज के दौरान व्यवहार समान्य था। यहां प्रे-बेस के रूप में 12 तरह के एनिमल है। यह शत-प्रतिशत रिवाइल्ड होगा और जंगल में आसानी से सरवाइव करेगा। <br /><strong>- दौलत सिंह शक्तावत, टाइगर विशेषज्ञ</strong></p>
<p>नर शावक की अब पांच हैक्टेयर के एनक्लोजर में रिवाइल्डिंग की जा रही है। यहां पर्याप्त मात्रा में प्रे-बेस की व्यवस्था की है। करीब एक साल तक  यहां रखा जाने की प्लानिंग है। जब यह सफलतापूर्वक 50 से ज्यादा घात लगाकर शिकार करने तथा पूरी तरह से मेच्योर हो जाएगा तब उच्चाधिकारियों के निर्देश पर हार्ड रिलीज किया जाएगा। हमारी कोशिश यही है कि इसे पूरी तरह से जंगल में सरवाइव करने लायक बनाना है। <br /><strong>- संजीव शर्मा, डीएफओ रामगढ़ टाइगर रिजर्व बूंदी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Dec 2024 13:30:35 +0530</pubDate>
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                <title>मादा शावक रिवाइल्डिंग की तैयारियां जारी</title>
                                    <description><![CDATA[अभेड़ा बायोलॉजिक पार्क में रह रहे शावकों में से मादा शावक को शिफ्ट कर रिवाइल्डिंग की जाएगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/preparations-for-rewilding-of-female-cub-continue/article-92880"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/6633-copy25.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में पल रही बाघिन टी-114 की मादा शावक की रिवाइल्डिंग अब प्रदेश के तीसरे पोर्टेबल एनक्लोजर में होगी। 60 लाख रुपए की लागत से मुकुंदरा के दरा अभयारणय में पोर्टेबल एनक्लोजर का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। यहां नींव खोदना, साफ-सफाई तथा स्ट्रेक्चर तैयार किए जाने सहित अन्य कार्य तेजी से चल रहे हैं। एनक्लोजर बनने के बाद अभेड़ा से मादा शावक को यहां शिफ्ट किया जाएगा।  हालांकि, एनक्लोजर का निर्माण कार्य अगस्त माह में होना था लेकिन बारिश के कारण कार्य शुरू नहीं हो पाया था। यह एनक्लोजर दरा अभयारणय में 5 हैक्टेयर में बनाया जाएगा। बता दे, मुकुंदरा में बनने वाला पोर्टेबल एनक्लोजर प्रदेश का तीसरा एनक्लोजर होगा। इससे पहले अलवर के सरिस्का और बूंदी के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में बनाया गया है। </p>
<p><strong>5 हैक्टेयर में बन रहा पोर्टेबल एनक्लोजर</strong><br />मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के उप वन संरक्षक मुथू एस ने बताया कि दरा अभयारणय में 38 हैक्टेयर का एनक्लोजर है। जिसमें 5 हैक्टेयर का अलग से पोर्टेबल एनक्लोजर बनाया जा रहा है। इसके लिए पूर्व में ही टैंडर प्रक्रिया कर दी गई थी। बारिश के कारण कार्य में देरी हुई। अब इससे बनने के बाद अभेड़ा बायोलॉजिक पार्क में रह रहे शावकों में से मादा शावक को शिफ्ट कर रिवाइल्डिंग की जाएगी। </p>
<p><strong>नया एनक्लोजर बनाने की नहीं पड़ेगी जरूरत   </strong><br />पोर्टेबल एनक्लोजर के कई फायदे हैं। रिवाइल्डिंग के बाद जब मादा शावक को हार्ड रिलीज कर दिया जाएगा तो इस एनक्लोजर को एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट कर भविष्य में आने वाले अन्य टाइगर को रखने के काम आ सकेगा। साथ ही सरकार को नया एनक्लोजर बनाने के लिए अतिरिक्त पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा। वहीं, दूसरी रेंजों में आवश्यकतानुसार पोर्टेबल एनक्लोजर को शिफ्ट करने में आसानी होगी।  </p>
<p><strong>मादा शावक की होगी रिवाइल्डिंग </strong><br />दरा सेंचुरी में 5 हैक्टेयर में बनने वाले पोर्टेबल एनक्लोजर में मादा शावक की रिवाइल्डिंग की जाएगी। जिसमें एक्सपर्ट्स की मदद भी ली जाएगी। शावक को लाइव शिकार दिए जाएंगे। शिकारी को शिकार के पीछे दौड़ने, घात लगाने, एक-दो किमी मूवमेंट करने के लिए पर्याप्त जगह मिल सकेगी। जिससे वह शिकार  की कला और बारीकी सीख पाएगी। वर्तमान में शावकों को बायोलॉजिकल पार्क में टाइगर के नाइट शेल्टर में रखा जा रहा है। जहां जगह की तंगी होने के कारण रिवाइल्डिंग के उद्देश्य पूर्ण नहीं हो रहे। </p>
<p><strong>नर शावक होगा रामगढ़ शिफ्ट</strong><br />बायोलॉजिकल पार्क से नर शावक को रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किया जाएगा। उसे जैतपुर रेंज में 5 हैक्टेयर के पोर्टेबल एनक्लोजर में रखा रखा जाएगा। गत 5 मई को मुकुंदरा के दौरे पर आए चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन पीके उपाध्याय द्वारा शावकों की शिफ्टिंग को लेकर निर्णय किया गया था। जिसके तहत मेल शावक को रामगढ़ व फीमेल शावक को मुकुंदरा के दरा में शिफ्ट किए जाने का निर्णय हुआ था। </p>
<p><strong>नवज्योति ने लगातार उठाया था मुद्दा</strong><br />शावकों को टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किए जाने का मामला नवज्योति लगातार उठाती रही है। बायोलॉजिकल पार्क में जगह की तंगी की वजह से रिवाइल्डिंग अपने उद्देश्य से भटक रही है। नवज्योति ने वन्यजीव प्रेमियों व वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट्स के माध्यम से शिफ्टिंग में अनावश्यक देरी से शावकों पर पड़ने वाले असर से वन अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया था। नवज्योति में लगातार खबरें प्रकाशित होने पर सीडब्ल्यूएलडब्ल्यू ने कोटा प्रवास के दौरान शिफ्टिंग को लेकर निर्णय किया था। </p>
<p>मुकुंदरा की दरा रेंज में 5 हैक्टेयर में पोर्टेबल एनक्लोजर का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। पहले बारिश के कारण काम रुक गया था। जल्द ही यह एनक्लोजर बनकर तैयार हो जाएगा। <br /><strong>-मूथू एस, उप वन संरक्षक, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Oct 2024 14:31:34 +0530</pubDate>
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