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                <title>vasundhra raje - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>जनता के लिए कांग्रेस राज नहीं, ना-राज है : वसुन्धरा</title>
                                    <description><![CDATA[महिला अत्याचार, भ्रष्टाचार, महंगाई, डीजल-पेट्रोल की कीमतें, महंगी बिजली और पेपर लीक में प्रदेश नम्बर है। और तो और ये लोग झूठे वादे करने में भी नम्बर वन है। बिजली मुफ्त नहीं, बिल डेढ़ गुना कर दिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/congress-is-not-a-raj-for-the-people-it-is/article-26140"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/q-85.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। बीकानेर संभाग की यात्रा के दूसरे दिन पूर्व सीएम वसुन्धरा राजे चूरू जिले के दौरे पर रहीं। वे जिले के बंबू, बींदासर गांव भी गई। बंबू गांव में पूर्व सरपंच स्व. भंवरलाल और समाजसेवी दयालाराम की मूर्ति अनावरण कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि आचार संहिता की समयावधि को निकाल दो तो गहलोत सरकार के अब सिर्फ 350 दिन बचे हैं। भाजपा को 2003 में 120 और 2013 में 163 सीटें मिली थी। हम सब मिलकर आगामी चुनावों में इस आंकड़े को भी पार करेंगे, लेकिन इसके लिए एकजुट होकर मेहनत करनी पड़ेगी। किसानों का 10 दिन में कर्ज माफ करने का वादा 4 साल में भी पूरे नहीं हुआ है। जनता के लिए कांग्रेस राज नहीं, ना-राज है। फिर भी दुश्मन को कमजोर ना समझें। जातियों में नहीं बंटे। एकजुट होकर लड़े तो ऐतिहासिक जीत निश्चित है। पिछले 4 साल से राजस्थान को जैसे कोई नजर लग गई है। किसान पछता रहें हैं। अपराध, अत्याचार, अन्याय और आतंक से लड़ने की जगह सरकार खुद को बचाने को लड़ रही है। इस दौरान पूर्व सांसद रामसिंह कस्वा, सांसद दुष्यंत सिंह, पूर्व मंत्री खेमा राम मेघवाल, जिला प्रमुख वंदना सहित स्थानीय भाजपा नेता भी मौजूद रहे। <br /> </p>
<p><strong>विधायक-मंत्री सीएम बनने की दौड़ में</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि सरकार के मंत्री और विधायक मुख्यमंत्री बनने के लिए दौड़ लगा रहे हैं। अपनी नाकामियों का ठीकरा उस मोदी सरकार पर फोड़ रही है, जिसने देश में विकास के नए कीर्तिमान बनाए हैं। गहलोत सरकार हर क्षेत्र में फेल साबित हुई है। महिला अत्याचार, भ्रष्टाचार, महंगाई, डीजल-पेट्रोल की कीमतें, महंगी बिजली और पेपर लीक में प्रदेश नम्बर है। और तो और ये लोग झूठे वादे करने में भी नम्बर वन है।</p>
<p><strong> बिजली मुफ्त नहीं, बिल डेढ़ गुना कर दिए</strong></p>
<p>राजे ने कहा कि कहने को तो गहलोत सरकार ने 50 यूनिट बिजली मुफ्त कर दी, लेकिन बिजली के बिल हमारे समय के बिलों से डेढ़ गुना कर दिए। वादा किया था 2023 तक सभी लम्बित कृषि कनेक्शन कर देंगे, लेकिन 4 लाख में से मुश्किल से 20,000 हजार भी नहीं दे पाए। कृषि बिजली हम 7 घंटे देते थे, ये 3 घंटे ही दे रहे हैं। गांवों में भी घरेलू बिजली हम 22 घंटे देते थे, ये केवल 8 घंटे ही दे रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Oct 2022 11:38:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>'राजकाज'</title>
                                    <description><![CDATA[पर्दे के पीछे की खबरें जो जानना चाहते है आप....]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/rajkaj/article-12629"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/rajkaj.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>चर्चा में दोस्ती और दुश्मनी</strong><br />सूबे में जब से अपर हाउस के लिए चुनावी जंग हुई है, तब से दोस्ती और दुश्मनी की चर्चाएं जोरों पर हैं। इंदिरा गांधी भवन में बने हाथ वालों के दफ्तर के साथ ही सरदार पटेल मार्ग पर स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के ठिकाने पर हर कोई आना वाला इसकी चर्चा किए बिना नहीं रहता। राज का काज करने वालों में चर्चा है कि अपर हाउस के चुनावों में हाथ वालों के साथ ही भगवा वालों में दोस्ती और दुश्मनी निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई। दोस्ती और दुश्मनी को लेकर दिल्ली तक भी शिकायतें की गई, लेकिन क्रॉस वोटिंग और जानबूझकर वोट को रिजेक्ट कराने वालों के चेहरों पर थोड़ी भी शिकन नहीं है। दिल्ली वालों से ज्यादा कौन जानता है कि राजनीति में दोस्ती और दुश्मनी दोनों ही लंबी नहीं चलती। मतलब के समय दोनों ही बदले बिना नहीं रहती।</p>
<p><br /><strong>असर काले और खाकी का</strong><br /> इन दिनों सूबे में कोट के रंगों को लेकर गरमाहट है। राज के साथ काज करने वाले भी कोट के रंगों में इतने डूबे हैं कि आसपास वालों तक को भूल गए। कोट के रंगों की चर्चा भी क्यों ना, उनका दर्जा ही कुछ विशेष है। सूबे में इन दिनों तीन रंगों के कोट हर आम की जुबान पर है। एक है सफेद रंग का कोट, जिसे पहनने वालों को धरती का भगवान मान कर पूजा जाता है। दूसरा है काले रंग का कोट, जिसे न्याय के देवता ही पहन सकते हैं। तीसरे कोट का रंग खाकी है, जिसे केवल डण्डे वाले ही पहन सकते हैं। तीनों रंग वाले कोट अपनी मर्जी से चलते हैं। इन पर किसी का राज नहीं चलता। अब देखो ना काले और खादी कोट वालों के बीच पिछले दिनों जो कुछ हुआ, उसे देख और सुनकर ही जायका बिगड़ जाता है। सफेद कोट वालों ने गुजरे जमाने में जो कुछ किया था, उससे तो भगवान तक घबरा गए थे। पिछले पांच महीने से काले और खाकी रंगों ने असर दिखा रखा है। चर्चा है कि काला रंग तो काला ही होता है, उसके तार सीधे शनि से जुड़े हैं, सो उस पर किसी भी दाग का असर नहीं होता।</p>
<p><br /><strong>परेशानी में साहब</strong><br />राज का काज करने वाले कुछ ब्यूरोेके्रट्स इन दिनों अजीब स्थिति में हैं। वो समझ नहीं पा रहे कि आखिर क्या रास्ता निकाला जाए। लंच केबिनों में भी जमकर माथापच्ची कर ली, पर पार नहीं पड़ी। कुछ साहब लोग भगवा वाली मैडम के साथ ही भाईसाहबों से मिलने के लिए बेताब हैं, पर जोधपुर वाले अशोक जी भाईसाहब के जासूसों से डरे हुए हैं। भगवा वाली मैडम का खुफिया तंत्र मजबूत जो ठहरा। जो काफी समझदार थे, वो पहले ही डेपुटेशन पर हैं, जो मन में आए, तब ही हाजरी भर आते हैं। अब कुछ और ब्यूरोक्रेट्स डेपुटेशन की लाइन में हैं, मगर यूपी वाली मैम खुद ही फाइल पर नोटिंग करने  में चूक नहीं करतीं, जिससे फाइल ऊपर के बजाय नीचे ही लौट आती है।</p>
<p><br /><strong>एक जुमला यह भी</strong><br />इंदिरा गांधी भवन में हाथ वालों के ठिकाने पर एक जुमला जोरों पर है। जुमला भी पंडितों के फेर को लेकर है। जब-जब भूचाल आता है, तो पंडित भी सक्रिय हो जाते हैं। नया काम छेड़ने से पहले पंडित पचांग खोलकर बिन मांगे सलाह देने में कोई कंजूसी नहीं करते। पीसीसी के ठिकाने की कुर्सी भी पंडितों के फेर में है। जब से सूबे में यात्रा के लिए जुबान खुली है, तभी से पंडितों में होड़ मची हुई। एक पंडितजी ने 31 अगस्त तो दूसरे ने दो नवम्बर का मुहूर्त शुभ बताया है। दोनों ने चौघड़िया और दिशा भी अलग-बताई है। अब फैसला तो पंचोें के हाथों में है, मगर पंडितों ने अपनी चलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। शनि को 69 पार करने वाले तीसरे पंडितजी तो दिल्ली की आड़ में मैसेज देने के लिए कमर कसे बैठे हैं।</p>
<p><strong>एल. एल. शर्मा, पत्रकार</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Jun 2022 12:09:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>'इंडिया गेट'</title>
                                    <description><![CDATA[पर्दे के पीछे की खबरें जो जानना चाहते है आप....]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/india-gate/know-what-is-special-in-india-gate/article-10304"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/india-gate021.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>अभी नहीं तो...</strong><br />तो कांग्रेस मान चुकी। साल 2024 का आम चुनाव उसके लिए जीवन मरण का। सो, उदयपुर में लिए गए फैसलों पर तेजी से आगे बढ़ रही। इसके लिए दिल्ली में ताबडतोड बैठकें हुईं। प्रियंका गांधी ने भी मौजूदगी दर्ज करवाई। अब तो पार्टी नेता भी कहने लग गए। अभी नहीं तो कभी नहीं। उदयपुर में तय किए गए रोडमैप से पीछे हटे तो मानो खत्म हो जाएंगे। आगे के रास्ते खत्म हो जाएंगे। वैसे भी पार्टी के लिए इन दिनों सिर मुंडाते ही ओले पड़ने जैसे हालात। चिंतन शिविर के दौरान ही जहां सुनील जाखड़ ने पार्टी को बाय-बाय कहा। जले पर नमक छिड़कने वाली बात तो यह कि वह भाजपा में शामिल हो गए। फिर गुजरात में चुनाव आ रहे। वहां के कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल भी कांग्रेस छोड़ गए। उसी दिन शाम होते-होते डूंगरपुर से पार्टी विधायक गणेश गोगरा ने भी विधायक पद छोड़ा। मतलब कोढ़ में खाज जैसे हालात। अभी शिविर खत्म हुए एक हफ्ता ही बीता। फिर यह सब क्या?</p>
<p><br /><strong>नजरें इनायत... !</strong><br />आजकल भाजपा और कांग्रेस की मरुभूमि पर नजरें इनायत हो रहीं। जहां कांग्रेस ने उदयुपर में चिंतन शिविर किया। तो भाजपा ने भी राष्ट्रीय पदाधिकारियों की तीन दिनी बैठक कर डाली। अब दोनों ही दलों में आरोप प्रत्यारोप भी। सीएम गहलोत बोले, यह सब उदयपुर के जवाब में। भाजपा ने कहा, यह महज संयोग। योजना बहुत पहले ही बन गई थी। फिर आखिर ऐसी क्या बात जो राजस्थान पर कांग्रेस-भाजपा पर इतना फोकस। असल में, दोनों ही दलों में गुटबजी और मतभेद का आलम सार्वजनिक। कांग्रेस में गहलोत एवं पायलट की अदावत जगजाहिर। तो इधर, वसुंधरा राजे और सतीश पूनिया के बीच रस्साकशी के खेल की खबरें। सीएम अशोक गहलोत ने उदयपुर में सफल बैठक का आयोजन करवाकर खुद को साबित करने की कोशिश की। तो भाजपा की बैठक भी शांतिपूर्ण संपन्न हो गई। अब गुजरात के विधानसभा चुनाव की प्रतिक्षा। जैसे यूपी, वैसे ही गुजरात के नतीजे पर बहुत कुछ निर्भर। खासकर भाजपा, राजस्थान को लेकर बड़ा फैसला लेने जा रही।</p>
<p><br /><strong>हम पर ही बरस पड़े...</strong><br />तो पूर्व सीएम वसुंधरा राजे का दर्द बाहर आ गया और वह छलक ही पड़ा। उन्होंने इसके लिए दिग्गज नेता भैंरांसिंह शेखावत से संबंधित एक कार्यक्रम को चुना। शायरना अंदाज में उन्होंने अल्फाज जाहिर किए। कहा, जिनको सांसें दी, उनकी जुबां खुली तो हम पर ही बरस पड़े। मतलब सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। लेकिन कहां? पार्टी के भीतर या संगठन के कामकाज के स्तर पर? या फिर इससे भी इतर कोई और बात? राजे गुट की लगातार मांग कर रहा। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजे को सीएम चेहरा बनाया जाए। लेकिन पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया। कमल का फूल और पीएम मोदी का चेहरा ही काफी। लेकिन अभी भी अंतिम फैसला होना बाकी। तब तक चीजें ठहरी हुईं। जो दावेदार। वह भी इंतजार कर रहे। लेकिन राजे गुट इसके मूड में नहीं। क्योंकि फिर चुनावी तैयारियों का समय कम बचेगा। लेकिन यह तो नेतृत्व भी सोच रहा होगा। फिर फैसला कहां अटका हुआ?</p>
<p><br /><strong>नकल या रोडमैप?</strong><br />कांग्रेस भी अब जमीनी स्तर पर वही करने का प्रयास कर रही। जो बरसों से भाजपा करती रही। वैसे भी भाजपा ने बूथ पर काम करके कांग्रेस को भी सोचने को मजबूर किया। अब कांग्रेस में भी पूर्णकालीन कायकर्ता का फंडा। करीब 6500 पार्टी कार्यकतार्ओं की देशभर में नियुक्ति का संकल्प। यह लोग जमीन पर बिल्कुल वैसे ही काम करेंगे। जैसे भाजपा में ग्रास रूट का कार्यकर्ता करता है। योजना के अनुसार यह होल टाइम वर्कर लोकसभा एवं विधानसभावार काम करेंगे।यह लोग अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को किनारे रखेंगे। किसी को टिकट देने की पैरवी भी नहीं करेंगे। क्षेत्र के मंदिरों एवं पुजारियों, पान, नाई एवं चाय की दुकान की सूचियां बनाएगें। क्षेत्र में सामाजिक समीकरणों का बारीकी से अध्ययन करेंगे। लेकिन इतनी जमीनी बातें क्या कांग्रेस में संभव? क्या पार्टी इन सब फैसलों को जमीन पर उतार पाएगी? क्या कांग्रेस में कार्यकतार्ओं एवं नेताओं की वैचारिक ट्रेनिंग का तौर तरीका ऐसा ही? क्या इसके लिए वह तैयार रहते हैं? यह सब कौन देखेगा?</p>
<p><br /><strong>सतह पर हलचल!</strong><br />बिहार में भाजपा-जदयू गठबंधन की राजनीतिक हलचल सतह पर। केन्द्रीय मंत्री आरसीपी सिंह को नितिश कुमार ने राज्यसभा के लिए नामित नहीं किया। बल्कि उन्होंने जार्ज फर्नाडिस के लंबे समय तक सहयोगी रहे अनिल हेगड़े को आगे किया। इससे कई तरह के कयास। फिर आरसीपी सिंह मंत्री कैसे रहेंगे? असल में, आरसीपी सिंह के बजाए लल्लन सिंह को ही जदयू कोटे से मंत्री बनना था। लेकिन मौका आरसीपी सिंह पा गए। बाद में आरसीपी भाजपा नेतृत्व के करीब चले गए। वहीं, लल्लन सिंह ने पार्टी अध्यक्ष के नाते आरसीपी को अलग थलग करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। कहा तो यहां तक जा रहा। नितिश को लाइन पर लाने के लिए भाजपा आरसीपी को प्रवोक कर रही। ताकि जदयू में झगड़े का लाभ भाजपा उठा सके। हालांकि भाजपा अपनी ओर से नितिश को छोड़ने के मूड में नहीं। जबकि नितिश इस बार भाजपा के मुकाबले विधायकों का संख्या बल कम होने से सहज नहीं। अब राज्यसभा चुनाव के बहाने ही हलचल।</p>
<p><br /><strong>काशी के बहाने ...</strong><br />यूपी एक बार फिर चर्चा में। बिल्कुल अयोध्या की तर्ज पर। बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर का विवाद सुप्रीम कोर्ट होते हुए निचली अदालत में पहुंच गया। इससे पहले मंदिर परिसर में हुुए सर्वे के बाद वहां बाबा के मिलने का दावा। तो दूसरा पक्ष इसे खारिज कर रहा। अब इसे लेकर बयानबाजी, दावे-प्रतिदावे और विवाद की स्थिति। साथ में, तर्क और कुतर्क भी। इसी चक्कर में एक डीयू के पढ़े लिखे महाशय लपेटे में आ गए। यूपी में विधानसभा चुनाव निपट चुके। हां, अगले ही साल से लोकसभा चुनाव। चूंकि यूपी देश का सबसे बड़ा सूबा। जहां 80 लोकसभा सीटें। स्वाभाविक है कि यहां भाजपा का फोकस रहेगा। भाजपा का लक्ष्य 75 पार का। तो सपा के भी इस बार लगभग दो गुने से ज्यादा विधायक। ऐसे में कड़ी टक्कर की नौबत तो रहेगी। लेकिन इन सबमें बाबा विश्वनाथ बीच में कहां? इसी बीच, अब तो मथुरा की भी चर्चा। अलग-अलग विषयों को लेकर कई लोग कोर्ट की शरण में जा रहे।<br /><strong>-दिल्ली डेस्क</strong> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>इंडिया गेट</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 May 2022 16:56:08 +0530</pubDate>
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                <title>जानें राज-काज में क्या है खास</title>
                                    <description><![CDATA[राजकाज में जाने वो सच्चाई जो ना देखी, ना सुनी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%9C-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%B8/article-2816"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/rajkal1.jpg" alt=""></a><br /><p>मगर हम चुप नहीं रहेंगे<br /> सूबे में बड़बोले मंत्रियों का कोई सानी नहीं है। एक-दूसरे का पछाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। वे न रात देखते हैं और न ही दिन, न स्थान देखते और न ही माहौल। वे कब क्या मुंह खोल दे, ऊपर वाला भी नहीं जानता। अब देखो ना, अलवर वाले एक नेताजी को प्रमोशन से राज में रत्न का तमगा मिलते है, उन्हीं के जिले वाले दूसरे भाई साहब ने उनकी तुलना चोर और खजाने की चाबी से कर दी। झुंझुनूं वाले भाई साहब तो अलवर वाले से एक कदम आगे निकले और सड़कों की तुलना हेमा और कैटरिना के गालों से कर दी। राज का काज करने वाले में चर्चा है कि जोधपुर वाले अशोक जी भाई साहब बड़बोलों को नसीहत देने में भी कोई कसर नहीं छोड़ते, मगर भाई लोग हैं कि मानते ही नहीं, और तो और कुछ न कुछ बोल कर मैसेज दे देते है कि मगर हम चुप नहीं रहेंगे।</p>
<p><br /> नजरें मेवाड़ की ओर<br /> सूबे में इन दिनों भगवा वाले कुछ भाई लोगों की नजरें मेवाड़ की तरफ टिकी हुई हैं। टिके भी क्यों नहीं राज की दो बार कुर्सी संभाल चुकी मैडम का मेवाड़ की धरा पर पगफेरा जो हुआ है। मैडम के पगफेरे के बाद कई भाई लोगों की रातों की नींद और दिन का चैन उड़ गया। उनके चेहरों पर चिन्ता की लकीरें साफ दिखाई देने लगी हैं। भारती भवन वाले भाई साहब भी चिंतन-मंथन में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के ठिकाने पर आने वाले वर्कर्स में खुसरफुसर है कि अपनी कुर्सी को बचाने के फेर में छोटा भाई और मोटा भाई को रिपोर्ट कार्ड चाहे कुछ भी भेजे, मगर सौ फीसदी सत्य है कि आने वाले राज को लेकर कमल वाली पार्टी के वर्कर्स को वसुंधराजी से कई उम्मीदें हैं।</p>
<p><br /> याद बीते दिनों की <br /> आजकल खाकी वालों पर शनि की दशा है। कभी चौराहे पर तो कभी गली में पिट रहे हैं। और तो और चूड़ियों वाली तक हाथ पैर चला जाती है। बेचारे खाकी वाले भी क्या करे, उनको अपने ऊपर वालों पर भरोसा नहीं है, कब इंक्वायरी बिठा दे। सो पिटने में ही अपनी भलाई समझते हैं। करे भी तो क्या पुलिस का इकबाल जो खत्म हो गया। अब टाइगर और लॉयन तक दहाड़ मारना भूल गए। पीटर और गामाज के बारे में सोचना तो बेईमानी होगी। विक्टर की मजबूरी जगजाहिर है। उनके काम में खलल की किसी में दम नजर नहीं आ रहा। अब तो खाकी वाले भाई लोग ऊपर वालों से प्रार्थना कर रहे हैं कि कोई उनके बीते दिन लौटा दे ताकि खाकी का इकबाल कायम रहे।</p>
<p><br /> अनचेलेंज नेता<br /> सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वाले के दफ्तर में अनचेलेंज नेता को लेकर जोरदार बहस छिड़ी हुई है। बहस भी खुद के नेता की बजाय हाथ वाले अशोक जी भाई साहब को लेकर है। कई सालों से भगवा धारण किए भाई साहब भी कहने लग गए कि सामने वालों में तो जोधपुर वाले भाई साहब ही अनचेलेंज नेता है। चेलेंज करने वाले छोटे पायलट साहब तो अब कबड्डी के ग्राउण्ड में कइयों को आउट करने में लग गए। और बाकी बचे लोगों से खुद की ही नहीं सिमट पा रही।</p>
<p><br /> सपने हुए चूर<br /> लक्ष्मणगढ़ वाले भाई साहब का भी कोई सानी नहीं है। अब केवल पीसीसी चीफ की कुर्सी का बोझ आने के बाद आए बदलाव को पुराने साथी भी नहीं समझ पा रहे हैं। गुजरे जमाने में एक झाड़ी के बेर खाने वाले सखा को उनसे काफी आशा थी। दो चार बार मंशा भी जाहिर की, मगर गोविन्दजी की बात सुनकर सारे सपने चूर हो गए। मास्टरों को संभाल चुके भाई साहब ने धीरे से कान में कह दिया कि आठ नंबर वालों से भी बात कर लेना। गोविन्ददेवजी के हमनाम साहब के इस अचूक बाण से कइयों की गलतफहमी भी दूर हो गई।</p>
<p><br /> एक जुमला यह भी<br /> सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में इन दिनों भगवा वाले भाई लोगों को कोई काम नहीं सूझ रहा। गुजरे जमाने में चर्चा, चिंतन और बैठकों में बिजी रहने वाले भाई लोग भी पौने तीन साल से ठालै बैठे हैं। पूछने पर सच्ची बात उनकी जुबान पर आए बिना नहीं रहती। बेचारे भोले मन से बोल देते है कि जब हमारा काम खुद सामने वाले ही कर रहे हैं, तो हम खामख्वाह पसीने क्यों बहाएं। अभी तो हम यह ढूंढने में पसीना बहा रहे हैं कि हम खुद कितने खेमों में बिखरे पड़े हैं।</p>
<p>         एल. एल. शर्मा<br /> (यह लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Mon, 29 Nov 2021 12:37:29 +0530</pubDate>
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                <title>सतरंगी सियासत</title>
                                    <description><![CDATA[सतरंगी सियासत से जाने अंदर की बात.....]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/india-gate/%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%A4/article-2813"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/qutub-minar,delhi,india3.jpg" alt=""></a><br /><p>कहां लैंड करेंगे?<br /> सचिन पायलट की अगली पॉलिटिकल लैंडिंग कहां होगी? अब यह यक्ष प्रश्न। प्रियंका गांधी ने राजस्थान में जिस तरह से निर्णायक हस्तक्षेप करके पिछले साल की बगावत को सेटल करवाया। उसे देखते हुए फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व पायलट को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में तुरुप के पत्ते के रूप में देख रहा। वैसे भी पायलट कह चुके। पार्टी नेतृत्व ने जो भी जिम्मेदारी दी। वह उसे पूरी गंभीरता से निभाते रहे हैं। लेकिन उनका मन राजस्थान में ही रमता है। हां, मंत्रिमंडल पुनर्गठन के बाद इधर-उधर से बयानबाजी हो रही। जो अपेक्षित भी। लेकिन रायता उतना नहीं फैला। जिसका भाजपा अनुमान लगा रही थी। हां, अगले साल होने वाले पांच रा’यों के चुनाव के बाद कहानी बदल भी सकती है। क्योंकि कांग्रेस को गुजरात चुनाव से पहले सितंबर में नया चुनावित अध्यक्ष मिलने वाला। हां, रा’य सरकार में सबको एडजस्ट कर दिया। लेकिन पायलट नहीं गए। यह अपने आप में संकेत। पार्टी का फोकस 2023 और 2024 के आम चुनाव बताया जा रहा।</p>
<p><br /> अर्थ पर अर्थ!<br /> पीएम मोदी ने तीन कृषि कानून वापस क्या लिए। अभी तक उसके अर्थ लगाए जा रहे। प्रदर्शनकारी किसान अभी तक विश्वास नहीं कर पा रहे। हालांकि कैबिनेट से इसकी मंजूरी के बाद लोकसभा की सोमवार की कार्यसूची में लिस्टेट भी हो गया। हां, पीएम मोदी के इन शब्दों का खास अर्थ लगाया जा रहा। ‘जो किया किसान हित में किया और जो फैसला किया वह देशहित में किया।’ इससे किसान संगठन ही नहीं। विपक्षी दल भी चौकन्ने। फिर रही कसर उन दो तस्वीरों ने कर दी। जिसमें पीएम मोदी एवं सीएम योगी कोई गंभीर मंत्रणा करते हुए दिखाई दे रहे। इसे योगीजी ने अपने व्यक्तिगत ट्वीटर हैंडल से जारी किया। सो, मतलब तो खास ही होगा। इसीलिए अभी तक अर्थ पर अर्थ लग रहे। वहीं, भाजपा नेताओं, सांसदों ने संकेत दिया। तीनों बिल नए फार्मेट में फिर से आ जाएंगे। लेकिन जो हालात विरोध की आड़ में पैदा कर दिए गए। वह देशहित में नहीं था। इसीलिए इतना कठोर निर्णय लेना पड़ा।</p>
<p><br /> कंगाल पाक..<br /> तो अब खुद पाक पीएम इमरान ने ही स्वीकारा। देश चलाने के लिए धन नहीं। पुरानी उधारी चुक नहीं रही और नया कर्ज मिल नहीं रहा। आर्थिक संस्थाओं की नजर में पाक की साख खराब हो गई। दूसरी ओर, पाक सेना आईएसआई चीफ के बहाने ‘ऑपरेशन’ के मूड में। इमरान की कुर्सी खतरे में। भारत का हमेशा से मानना रहा। पड़ोस में शांति जरुरी। वरना इसका खुद पर भी होगा। पाक वैसे भी चीन की विभिन्न विकास परियोजनाओं के चलते उसके शिकंजे में। चीन के इसी रवैये से इसी से श्रीलंका और बांगलादेश भी उससे बिदक गए। खैर, बात पाक के खस्ताहाल होने की। दुनियां में पाक अब तक आंतक ही परोसता रहा। दुनियां की आंखें खुल रहीं। अफगानिस्तान का प्लान फेल हो रहा। तालिबान सरकार की पींगें भारत से बढ़ रहीं। रही सही कसर सउदी अरब ने भारत में बड़ा निवेश प्रस्ताव स्वीकार करके पूरी कर दी। आखिर यह पाक में भी तो हो सकता था। लेकिन वह पाक का स्तर जानता।</p>
<p><br /> यूपी में चुनावी बिसात...<br /> यूपी चुनाव को लेकर 2024 के आम चुनाव के मद्देनजर हर दल गंभीर। भाजपा जहां धीरे-धीरे पते खोल रही। तो सपा प्रमुख अखिलेश जल्दबाजी दिखा रहे। जिन्ना पर दिया गया बयान इसकी बानगी। अब तो ओवैसी की एआईएमआईएम तक से सीट बंटवारे की चर्चा। अखिलेश हर भाजपा विरोधी दल को साथ लेने के फिराक में। तो बहनजी चुुपचाप अपनी सोशल इंजीनियरिंग में लगी हुईं। जब विकास का श्रेय लेने में भाजपा एवं सपा आगे दिखे। तो मायावती ने 2007 से 12 का कार्यकाल का जिक्र कर दिया। लेकिन इस बार यूपी में मुख्य मुकाबला भाजपा और सपा के बीच बताया जा रहा। लगभग सभी दल यूपी के परिणाम का इंतजार कर रहे। असल में, 2024 की बिसात भी इसी के बाद बिछेगी। विपक्ष मान रहा। यदि यूपी का परिणाम भाजपा के विपरित रहा। तो पीएम मोदी का अवसान तय। फिर भाजपा में भी अंदरखाने बखेड़े का अंदाजा लगाया जा रहा। लेकिन क्या यह सब इतना आसान? विपक्ष जल्दबाजी में तो नहीं?</p>
<p><br /> चोट पर चोट!<br /> ममता बनर्जी, कांग्रेस को चोट पर चोट दे रहीं। वह प्रमुख विपक्षी दल के लगातार विकेट उड़ा रहीं। पहले सुष्मिता देव, फिर एल. फलेरियो। और अब अशोक तंवर एवं कीर्ति आजाद। मेघालय में 12 विधायकों टीएमसी में मिला लिया। ममता की हर उस रा’य में नजर। जहां कांग्रेस कमजोर हो रही। लेकिन ऐसा हो क्यों रहा? असल में, सोनिया गांधी तो दीदी की सुनने को तैयार। लेकिन राहुल गांधी नहीं मान रहे। इसीलिए बात आगे नहीं बढ़ी। हालांकि दोनों दल बंगाल में साथ चुनाव लड़ चुके। लेकिन अब हालात बिगड़ रहे। अब तो संसद में भी तालमेल, समन्वय नहीं होगा। लगता है दीदी की इच्छा। टीएमसी राष्टÑीय दल बने। इसके लिए कांग्रेस को तोड़ना ही साफ्ट रणनीति। जो राजनीति में आगे बढ़ने के आकांक्षी। जो काम तो करना चाहते। लेकिन गांधी परिवार उनका उपयोग नहीं कर पा रहा। ऐसे में यह नेता करें क्या? अच्छा है टीएमसी का ही दामन थामा जाए। वहीं, दीदी भाजपा और मोदी से राष्ट्रव्यापी मुकाबले को आमादा।</p>
<p><br /> यात्रा का हासिल...<br /> वसुंधरा राजे की तीन दिनी देवदर्शन यात्रा पूरी हुई। राजे ने कहा यह उनकी व्यक्तिगत यात्रा। इसका कोई राजनीतिक अर्थ नहीं लगाएं। इसी बीच, प्रदेश अध्यक्ष ने भी दोहराया। वह राजे की धार्मिक यात्रा पर कोई टिप्प्णी नहीं करेंगे। अब पांच दिसंबर को अमित शाह प्रदेश के दौरे पर आ रहे। भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के बहाने दस हजार नेता-कार्यकर्ता जुटेंगे। जहां कांग्रेस 2023 में सत्ता में वापसी का दंभ भर रही। तो भाजपा भी इस बार सत्ता में वापसी को आतुर। उसी योजना पर काम हो रहा। इसी बीच, राजे की यात्रा ने राजनीतिक निहितार्थ लगवाए। जिससे थोड़ा असमंजस की स्थिति। पार्टी कार्यकर्ता थोड़ा असहज हुए। लेकिन कांग्रेस में भी अभी भले ही शांति हुई हो। लेकिन आगे क्या होगा। कुछ नहीं कहा जा सकता। ऐसे में प्रदेश की राजनीति दिलचस्प मोड़ जाती हुई दिखाई दे रही। आगे के राजनीतिक घटनाक्रम का सभी को इंतजार। हां, भाजपा के एक पोस्टर ने बीते समय हुए पोस्टर वार की याद दिला दी।<br /> -दिल्ली डेस्क</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>इंडिया गेट</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Nov 2021 12:03:52 +0530</pubDate>
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                <title>उपचुनाव के लिए BJP ने 20 नेताओं को बनाया स्टार प्रचारक</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान के बाहर का केवल एक चेहरा प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%89%E0%A4%AA%E0%A4%9A%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B5-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-bjp-%E0%A4%A8%E0%A5%87-20-%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%93%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%95/article-1612"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/bjp-11.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। भाजपा ने वल्लभनगर और धरियावद विधानसभा उपचुनाव के लिए अपने स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर दी है जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया सहित राजस्थान के 19 बड़े चेहरे शामिल इसके अलावा राजस्थान के बाहर का केवल एक चेहरा प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह का है। <br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>भाजपा ने राजस्थान विधानसभा उपचुनाव हेतु स्टार प्रचारकों की सूची जारी की:-</strong></span></span><br /> <br /> 01. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां<br /> 02. राष्ट्रीय महामंत्री एवं प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह<br /> 03. राष्ट्रीय महामंत्री एवं केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव<br /> 04. प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर<br /> 05. नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया<br /> 06. राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे सिंधिया<br /> 07. केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत<br /> 08. केन्द्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल<br /> 09. केन्द्रीय मंत्री कैलाश चौधरी<br /> 10. उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़<br /> 11. राष्ट्रीय मंत्री अलका गुर्जर<br /> 12. सांसद ओमप्रकाश माथुर<br /> 13. पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी<br /> 14. सांसद दिया कुमारी<br /> 15. सांसद सीपी जोशी<br /> 16. सांसद किरोडीलाल मीणा<br /> 17. सांसद कनकमल कटारा<br /> 18. प्रदेश महामंत्री सुशील कटारा<br /> 19. प्रदेश महामंत्री भजनलाल शर्मा<br /> 20. विधायक जोगेश्वर गर्ग</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Oct 2021 16:15:08 +0530</pubDate>
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                <title>उपचुनाव के लिए BJP ने 20 नेताओं को बनाया स्टार प्रचारक</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान के बाहर का केवल एक चेहरा प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%89%E0%A4%AA%E0%A4%9A%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B5-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-bjp-%E0%A4%A8%E0%A5%87-20-%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%93%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%95/article-1611"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/bjp-1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। भाजपा ने वल्लभनगर और धरियावद विधानसभा उपचुनाव के लिए अपने स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर दी है जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया सहित राजस्थान के 19 बड़े चेहरे शामिल इसके अलावा राजस्थान के बाहर का केवल एक चेहरा प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह का है। <br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>भाजपा ने राजस्थान विधानसभा उपचुनाव हेतु स्टार प्रचारकों की सूची जारी की:-</strong></span></span><br /> <br /> 01. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां<br /> 02. राष्ट्रीय महामंत्री एवं प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह<br /> 03. राष्ट्रीय महामंत्री एवं केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव<br /> 04. प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर<br /> 05. नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया<br /> 06. राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे सिंधिया<br /> 07. केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत<br /> 08. केन्द्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल<br /> 09. केन्द्रीय मंत्री कैलाश चौधरी<br /> 10. उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़<br /> 11. राष्ट्रीय मंत्री अलका गुर्जर<br /> 12. सांसद ओमप्रकाश माथुर<br /> 13. पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी<br /> 14. सांसद दिया कुमारी<br /> 15. सांसद सीपी जोशी<br /> 16. सांसद किरोडीलाल मीणा<br /> 17. सांसद कनकमल कटारा<br /> 18. प्रदेश महामंत्री सुशील कटारा<br /> 19. प्रदेश महामंत्री भजनलाल शर्मा<br /> 20. विधायक जोगेश्वर गर्ग</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Oct 2021 16:13:54 +0530</pubDate>
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                <title> REET पर &quot;रार&quot; : रीट पेपर लीक मामले में बोर्ड अध्यक्ष बोले : किरोड़ी मीणा आरोप साबित करें : ऐसा नहीं कर पाएं, तो त्यागपत्र देकर मांगें माफी : जारोली</title>
                                    <description><![CDATA[बोर्ड अध्यक्ष का सियासी बयान : पीएम की पहचान 10 लाख के सूट वाले से होगी, पूनिया नौसिखिया, वसुंधरा असली नेता]]></description>
                
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<p><br /> <strong>देवनानी से सीखें पूनिया </strong><br /> जारोली ने रीट के आयोजन को लेकर आरोप लगाने वाले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को राजनीति का नौसिखिया खिलाड़ी बताते हुए कहा कि भाजपा में प्रदेश की आवाज बनकर काम करने वाली केवल पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे हैं। उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से अपील की है कि वे रीट परीक्षा के मामले में करोड़ों लोगों की आकांक्षा पर पानी फेरने वाले नेताओं को सीख दें कि झूठे आरोप लगाना बंद करें। प्रो. जारोली ने कहा उनकी कार्यशैली को लेकर पूर्व शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने भी बोर्ड की कार्य प्रणाली पर कभी अंगुली नहीं उठाई। सांसद मीणा को उनसे सीख लेनी चाहिए।<br />  </p>
<p><strong>पर्चा लीक हुआ, वायरल नहीं</strong><br /> प्रो.जारोली ने सवाईमाधोपुर के गंगापुर में रीेट के प्रश्न पत्र के लीक होने को स्वीकार करते हुए कहा कि यह प्रश्न-पत्र केवल चार व्यक्तियों के बीच में था, जो बोर्ड कार्यालय से लीक नहीं हुआ है। परीक्षा केन्द्र से लीक हो सकता है, इसकी भी जांच एसओजी और  पुलिस कर रही है। उसकी रिपोर्ट में सच सामने आ जाएगा। उन्होंने कहा महज चार जनों की बीच लीक हुआ पेपर और कहीं वायरल नहीं हुआ, उसके बावजूद डॉ. मीणा अनर्गल आरोप लगा रहे हैं।</p>
<p><strong><br /> सीएम-सीएस का जताया आभार</strong><br /> प्रो. जारोली ने रीट की परीक्षा के सफल आयोजन के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, सहित मुख्य सचिव निरंजन आर्य और एडीजी लॉ एण्ड आॅर्डर सौरभ श्रीवास्तव का आभार जताया और कहा कि इन्हीं के प्रयासों और सख्ती के कारण रीट की परीक्षा देने पहुंचे कई मुन्नाभाईयों को पकड़ा जा सका है। लेकिन डॉ. किरोड़ी जैसे नेता रातों को जागकर परीक्षा के लिए मेहनत करने वाले 16 लाख अभ्यर्थियों की मेहनत को कलंकित करने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं।<br />  </p>
<p><strong>प्रधानमंत्री को भी लिया आड़े हाथ</strong><br /> प्रो.जारोली ने कहा महात्मा गांधी को व्यक्तित्व और कृतित्व के कारण राष्ट्रपिता और बापू की पदवी मिली। सुभाषचंद्र बोस को नेताजी, तो पंडित जवाहरलाल नेहरू जनता को दिए असीम प्यार व स्नेह के कारण चाचा नेहरू के नाम से जाने जाते हैं। सरदार पटेल को लौहपुरुष, इंदिरा गांधी को आयरन लेडी, राजीव गांधी को संचार क्रांति का जनक कहा जाता है, तो अटल बिहारी वाजपेयी को देश में स्वर्णित चतुर्भुज सड़कों के कारण विशिष्ट व्यक्तित्व की पहचान मिली, लेकिन  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को 10 लाख का सूट, अडाणी, अंबानी का दोस्त, आर्थिक मंदी, नोटबंदी, एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशनों का प्राइवेटाइजेशन के लिए जाना जाएगा।</p>
<p><strong><br /> जयपुर में कॉर्डिनेटर निजी व्यक्ति को क्यों लगाया, पद छोड़ें और घर जाएं: किरोड़ीलाल मीणा</strong><br /> जारोली की सफाई के बाद राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने कहा है कि रीट परीक्षा पेपर लीक से प्रताड़ित अभ्यर्थी आपके इस्तीफे का इंतजार कर रहे हैं। आप पद छोड़ें और घर जाएं। मेरे उनसे सवाल है, वे बताएं कि जयपुर ग्रामीण-शहर में परीक्षा का कॉर्डिनेटर आपने अपने गैर सरकार निजी व्यक्ति  को क्यों लगाया। उनको सरकारी अधिकारियों पर भरोसा नहीं था क्या, यह क्यों ना कहें कि आपकी शह पर पेपर लीक नहीं हुआ। शिक्षा मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा मेरे आंदोलन समाप्त करने पर बयान दे रहे हैं, उन्हें भी कहना चाहता हूं कि मैंने आंदोलन स्थगित किया है, समाप्त नहीं। प्रदेश पदाधिकारियों के निर्देशानुसार जल्द ही पार्टी के विधायक-कार्यकर्ता प्रदेशव्यापी आंदोलन करेंगे। मैं जीवन में आखिरी क्षण तक अभ्यर्थियों के लिए लडूंगा। आपको न्याय दिलाऊंगा, आप धैर्य रखें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Oct 2021 11:53:23 +0530</pubDate>
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