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                <title>बांग्लादेश में खसरे से हाहाकार : एक दिन में 17 लोगों की मौत; तेजी से बढ़ रहे केस, सरकार ने जारी किया अलर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[बांग्लादेश में खसरे (Measles) ने कोहराम मचा रखा है, जहाँ एक ही दिन में 17 लोगों की जान चली गई। 15 मार्च से अब तक संदिग्ध मामलों की संख्या 41,000 के पार पहुंच चुकी है। स्वास्थ्य विभाग ने ढाका में सर्वाधिक मौतों की पुष्टि की है। टीकाकरण और बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के जरिए इस संक्रामक बीमारी को रोकने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/outcry-due-to-measles-in-bangladesh-17-people-died-in/article-152714"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/11.png" alt=""></a><br /><p>ढाका। बांग्लादेश में खसरा और खसरा से संबंधित जटिलताओं के कारण एक ही दिन में 17 लोगों की मौत हो गई। मार्च में इस अत्यधिक संक्रामक लेकिन रोकथाम योग्य बीमारी के प्रकोप की शुरुआत के बाद से एक दिन में दर्ज मौत की यह सबसे अधिक संख्या है। यह जानकारी मीडिया रिपोर्टों से मंगलवार को प्राप्त हुई। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अनुसार, सोमवार सुबह आठ बजे तक दर्ज की गई 17 मौतों में से दो की पुष्टि खसरा से होने जबकि अन्य 15 को संदिग्ध मामलों के रूप में वर्गीकृत किया गया।</p>
<p>ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, संदिग्ध मौतों में से सबसे अधिक 10 मौतें ढाका जिले में दर्ज की गईं। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, देश में खसरा से होने वाली पुष्ट मौतों की कुल संख्या बढ़कर 52 हो गई है। इसके अलावा, 15 मार्च से दर्ज किए जा रहे आंकड़ों के अनुसार इस बीमारी से संबंधित संदिग्ध मौतों की संख्या वर्तमान में 259 है। डीजीएचएस के अधिकारियों ने बताया कि इसी अवधि के दौरान खसरे के लगभग 1,302 संदिग्ध मामले दर्ज किए गए, जिससे 15 मार्च से अब तक संदिग्ध मामलों की कुल संख्या 41,793 हो गयी है।</p>
<p>ढाका ट्रिब्यून ने कहा कि इसी अवधि के दौरान, खसरा के 154 नए पुष्ट मामले सामने आए जिससे पुष्ट संक्रमणों की कुल संख्या 5,467 हो गई। प्राप्त रिपाेर्ट के अनुसार 15 मार्च तक खसरा के संदिग्ध मामलों में से 28,832 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से 25,151 मरीज स्वस्थ हो गये और उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गयी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 12:41:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>क्यूबा में रहस्यमयी वायरस का हाहाकार, मरीजों के मरने से अस्पताल कनाडा ने लगाया 7 दिनों का क्वारंटाइन</title>
                                    <description><![CDATA[क्यूबा में रहस्यमय वायरस से हालात बिगड़े। अस्पतालों में मरीजों की भरमार, मौतों के आंकड़े छिपाने का आरोप। कनाडा ने स्क्रीनिंग, क्वारंटाइन लागू की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/hospital-canada-imposes-7-day-quarantine-as-patients-die-due-to/article-139249"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/cuba.png" alt=""></a><br /><p>हबाना। क्यूबा में एक रहस्यमय वायरस ने तबाही मचा दी है। देश के कई इलाकों में वायरस का खौफ पसर गया है और भारी संख्या में मरीजों के आने से अस्पताल ढहने के कगार पर पहुंच गए हैं। वहीं देश की कम्युनिस्ट सरकार ने वायरस की वजह से हो रही मौत को छिपाना शुरू कर दिया है। द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीज तेज बुखार, लाल धब्बे, त्वचा का छिलना, जोड़ों में सूजन, उल्टी, दस्त जैसे लक्षण से परेशान हैं। हालांकि, अभी तक डॉक्टर पता लगाने में नाकाम रहे हैं कि ये वायरस क्या है और लोग किस बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं। द सन ने कई तस्वीरें जारी की हैं, जिनमें अस्पतालों में जमीन पर लेटे मरीजों को देखा जा रहा है। तस्वीरों में देखा जा रहा है की जमीन पर लेटे मरीजों का डॉक्टर इलाज कर रहे हैं।</p>
<p><strong>एक तिहाई से ज्यादा लोग इससे संक्रमित </strong></p>
<p>इस बीच कनाडा सरकार ने इस हफ्ते क्यूबा से लौटने वाले लोगों के लिए हेल्थ स्क्रीनिंग और सात दिनों की क्वारंटाइन की घोषणा कर दी है। वहीं, स्पेन ने दिसंबर में अपने नागरिकों को गंभीर महामारी बताकर क्यूबा से दूर रहने से कहा था। कई लोग इस वायरस को द वायरस के नाम से संबोधित कर रहे हैं। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि क्यूबा में एक तिहाई से ज्यादा लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं। वहीं, ब्रिटिश मेडिकल जर्नल ने इस बढ़ोतरी को हाल के दशकों में देश का सबसे गंभीर संकट बताया है। क्यूबा में 17 दिसंबर तक वायरस से 52 मौतें हुई थीं, जिनमें से ज्यादातर बच्चे थे। अभी तक अधिकारियों ने 38 हजार से ज्यादा लोगों के वायरस से संक्रमित होने की आधिकारिक तौर पर सूचना दी है। </p>
<p><strong>रिपोर्ट में वायरस का जिक्र नहीं</strong></p>
<p>द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, क्यूबा के लोगों का आरोप है कि सरकार असली आंकड़ों को छिपा रही है और वास्तविक आंकड़े इससे कई गुना ज्यादा है। वहीं, हवाना के एक जाने-माने मानवाधिकार कार्यकर्ता मैनुअल कुएस्टा मोरुआ ने कहा है कि यह आउटब्रेक करीब पांच महीने पहले माटांजास में शुरू हुआ था, जहां अचानक लोगों की मौते होने शुरू हो गई थी। उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकार ने मरने वालों के जो डेथ सर्टिफिकेट बांटे हैं, उनमें वायरस का कोई जिक्र नहीं किया गया है।</p>
<p><strong>बीमारी एक तरह का कंबाइंड आबोर्वायरस </strong></p>
<p>स्वास्थ्य अधिकारियों ने पिछले साल अक्टूबर के अंत तक देश भर में एक हफ्ते में बुखार से पीड़ित 13 हजार नए मामलों की जानकारी दी थी। जबकि कैमागुए और होल्गुइन जैसे इलाकों में इतने लोगों की मौत हुई है कि कब्रिस्तान भर गए थे। द्वीप पर बीमारी फैलने के तीन महीने बाद, क्यूबा की सरकार ने इस संकट को पहली बार महामारी माना। </p>
<p>लेकिन सरकार ने फिर भी नेशनल हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने से इनकार कर दिया। इस बीमारी को एक तरह का कंबाइंड आबोर्वायरस कहा गया है। डॉक्टरों का मानना है कि इसमें डेंगू, ओरोपौचे और चिकनगुनिया, साथ ही एच1एन इन्फ्लूएंजा, रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस और कोविड-19 जैसे दूसरे इन्फेक्शियस रेस्पिरेटरी वायरस शामिल हैं। डेंगू से बुखार, तेज सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द या दबाव और रैशेज होते हैं। वहीं ज्यादा गंभीर मामलों में, शॉक, सांस लेने में दिक्कत, गंभीर ब्लीडिंग और अंगों का फेल होना शामिल है। वहीं, माटांजास के एक क्लिनिक की एक नर्स ने बताया कि यह कहना झूठ नहीं होगा कि हम मर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Jan 2026 11:36:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका में 33 वर्षों का रिकॉर्ड टूटा,  साल 1992 के बाद 2025 में खसरे के 2,000 से अधिक मामले दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[सीडीसी के अनुसार, साल 2025 में अमेरिका के 44 राज्यों में खसरे के 2,065 मामले दर्ज किए गए। 1992 के बाद यह सर्वाधिक आंकड़ा है, जिससे देश का उन्मूलन दर्जा खतरे में है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/new-record-in-america-more-than-2000-cases-of-measles/article-138088"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/measles-case-in-us.png" alt=""></a><br /><p>लॉस एंजिल्स। अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में 2025 में खसरे के 2,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए जो 1992 के बाद से सबसे अधिक वार्षिक संख्या है। 30 दिसंबर तक, देश में खसरा के कुल 2,065 पुष्ट मामले सामने आए थे, जिनमें से लगभग 11 प्रतिशत मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता पड़ी।</p>
<p>सीडीसी के अनुसार, ये मामले अमेरिका के 44 राज्यों में दर्ज किए गए, साथ ही अमेरिका आने वाले कुछ अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों में भी मामले सामने आए। यह आंकड़ा 1992 के बाद से सबसे अधिक वार्षिक संख्या है, जब देश में खसरा के 2,126 मामले सामने आए थे।</p>
<p>सीडीसी के अनुसार, 2025 में पांच से 19 वर्ष की आयु के मरीजों की संख्या सबसे अधिक थी, जो कुल मामलों का लगभग 42 प्रतिशत थी। 2025 में अमेरिका में खसरा से तीन मौतें दर्ज की गईं। सीडीसी के अनुसार, 2000 में अमेरिका में खसरा को समाप्त घोषित कर दिया गया था, जिसका मतलब है कि देश में खसरा नहीं फैल रहा है और नए मामले केवल तभी पाए जाते हैं जब कोई व्यक्ति विदेश में खसरा से संक्रमित होता है और स्वदेश लौटता है।</p>
<p>पिछले साल खसरे के मामलों में हुई वृद्धि के साथ, सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अमेरिका जल्द ही अपना उन्मूलन दर्जा खो सकता है, जैसा कि कनाडा नवंबर 2025 में खो चुका है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Jan 2026 12:36:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डेंगू को सिरहाने लेकर सो रहे हॉस्टल</title>
                                    <description><![CDATA[डेंगू का असर पूरे शहर में ही है लेिकन सबसे अधिक असर नए कोटा में है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/hostels-sleeping-with-dengue-at-their-bedside/article-56826"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/dengue-ko-sirhane-lekar-so-rahe-hostel...kota-news..11.9.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मौसमी बीमारियों के चलते कोटा में  डेंगू व स्क्रबटायफस का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। सबसे अधिक नए कोटा क्षेत्र में इसका असर है। वहीं नाले के नाले पर बने हॉस्टल व कोचिंग में रहने वाले विद्यार्थी डेंगू को सिराने लेकर सो रहे हैं। शहर में डेंगू का सबसे अधिक असर नए कोटा क्षेत्र के जवाहर नगर व तलवंडी क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। इसी क्षेत्र में सबसे अधिक कोचिंग व हॉस्टल बने हुए हैं। इन्ही क्षेत्रों से बड़े-बड़े बरसाती नाले भी निकल रहे हैं। जिनमें न केवल कचरा जमा है वरन् पानी की सही निकासी नहीं होने से उनमें गंदा पानी तक जमा हुआ है। जिसमें मच्छरों के पनपने से डेंगू का खतरा अधिक बना हुआ है। साजी देहड़ा से होते हुए दादाबाड़ी, जवाहर गनर, तलवंडी, राजीव गांधी नगर व इंद्र विहार की तरफ निकल रहे नाले के किनारे जितने भी हॉस्टल व मकान बने हुए हैं उनमें डेंगू का खतरा अधिक है। इसका कारण नाले से सटे होने से उनमें रहने वाले लोग व कोचिंग विद्यार्थी तो डेंगू व मच्छरों सो एक तरह से सिराने लेकर ही सो रहे हैं। हॉस्टलों में रहने के दौरान ही नहीं वहां से कोचिंग जाने और वापस आने के दौरान भी लोगों को नाले के किनारे से ही होकर निकलना पड़ रहा है। कई जगह पर तो खाली भूखंड में भी पानी सड़ रहा है। जिससे वहां से निकलने पर लोगों को मुंह पर रूमाल रखकर निकलना पड़ रहा है।  जिससे वहां पनप रहे मच्छरों के सम्पर्क में आने से डेंगू का खतरा अधिक बना हुआ है। </p>
<p><strong>इसी क्षेत्र में अधिक प्रकोप</strong><br />शहर में वैसे तो डेंगू का असर पूरे शहर में ही है। लेिकन सबसे अधिक असर नए कोटा में है। जहां बड़ी संख्या में लोग डेंगू पॉजीटिव मिले हैं। अधिकतर घरों में से किसी ने किसी घर में एक दो लोग तो पॉजीटिव मिले ही। हालांकि इन क्षेत्रों में डेंगू के मरीज अधिक मिलने के बाद चिकित्सा विभाग से लेकर नगर निगम तक के अधिकारी सक्रिय हुए व हरकत में आए। जिससे इसका प्रकोप फिलहाल कुछ कम तो होना बताया जा रहा है। </p>
<p><strong>18 डेंगू पॉजीटिव मिले</strong><br />शहर में डेंगू व स्क्रब टायलस के मरीजों के लगातार मिलने का क्रम बना हुआ है। शहर में शनिवार को 18 डेंगू पॉजीटिव मरीज मिले हैं। हालांकि एक दिन पहले मिले 29 पॉजीटिव की तुलना में यह संख्या कुछ कम है। लेकिन उतनी भी कम नहीं है कि जिससे डेंगू का खतरा ही नहीं हो। </p>
<p><strong>बरसात से पहले सफाई, फिर जमा हुआ कचरा व पानी</strong><br />नगर निगम की ओर से हर साल बरसात से पहले करवाई जाने वाली नालों की सफाई इस बार भी करवाई गई। लेकिन वह बरसात से पहले करवाई गई थी। बरसात के दौरान फिर से वहां कचरा व गंदा पानी जमा हो गया। जिससे उनमें मच्छर पनपने लगे हैं। जवाहर नगर डिस्ट्रिक्ट सेंटर के दुकानदार व व्यापारी ओर हॉस्टल संचालक भी यहां नालियों में जमा गंदे व ठहरे हुए पानी से परेशान हैं।</p>
<p>डेंगू का खतरा पहले से कम तो हुआ है। इसका कारण चिकित्सा विभाग की टीमों द्वारा लगातार किए जा रहे प्रयास हैं। जिस जगह भी इनका खतरा बना हुआ है वहां टीमें लगातार साफ सफाई व सर्वे कर रही हैं। लोगों को जागरूक किया जा रहा है। एक दिन पहले की तुलना में शनिवार को डेंगू पॉजीटिव मरीजों की संख्या कुछ कम हुई है। डेंगू का मच्छर व अंडे बड़े नालों में नहीं पनपते। यह छोटी नालियों में ठहरे हुए पानी में ही पनपते हैं। फिर भी यदि कहीं कमी है तो उसे सुधारा जाएगा। जिससे लोगों को इस खतरे से बचाया जा सके। <br /><strong>- डॉ. जगदीश सोनी, सीएमएचओ कोटा  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Sep 2023 18:36:02 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मंकीपॉक्स के प्रकोप से निपटने के लिए तात्कालिक प्रयासों की आवश्यकता, स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[जिनेवा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम (IHR) की आपात समिति ने कहा है कि मौजूदा मंकीपॉक्स के प्रकोप से निपटने के लिए तात्कालिक  प्रयासों की आवश्यकता है, लेकिन वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/tackling-monkeypox-outbreak-requires-immediate-efforts--not-a-state-of-health-emergency/article-13051"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/monkey-p.jpg12.jpg" alt=""></a><br /><p>जिनेवा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम (IHR) की आपात समिति ने कहा है कि मौजूदा मंकीपॉक्स के प्रकोप से निपटने के लिए तात्कालिक  प्रयासों की आवश्यकता है, लेकिन वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति नहीं है।<br /><br />डब्ल्यूएचओ की ओर से जारी बयान के मुताबिक  हालांकि कुछ सदस्यों ने अलग-अलग विचार व्यक्त किये हैं। आईएचआर आपातकालीन समिति की बैठक में  कुछ सदस्यों ने व्यापक आबादी में मंकीपॉक्स वायरस के और फैलने के खतरे की चेतावनी दी थी। समिति ने सर्वसम्मति से घटना की आपातकालीन प्रकृति को स्वीकार किया और प्रकोप के  प्रसार को नियंत्रित करने के लिए गहन प्रतिक्रिया प्रयासों की आवश्यकता जतायी । समिति ने यह भी सलाह दी कि कुछ हफ्तों के बाद घटना की बारीकी से निगरानी और समीक्षा की जानी चाहिए।डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस के अनुसार विश्व के 48 देशों में अब तक 3,200 से अधिक मंकीपॉक्स के मामले सामने आए हैं वहीं इसके संक्रमण से एक पीड़ति की मौत भी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Jun 2022 12:40:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डेंगू का डक रोकने में सरकार नाकाम : राजेंद्र राठौड़</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश का चिकित्सा महकमा भगवान भरोसे हैं, क्योंकि विभाग के मंत्री रघु शर्मा मरीजों को अपने हाल में छोड़कर मुखिया अशोक गहलोत के साथ 'पॉलिटिकल टूरिज्म' में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं- राठौड़]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%A1%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A1%E0%A4%95-%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%AE---%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A0%E0%A5%8C%E0%A4%A1%E0%A4%BC/article-1728"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/rajendra-rathor3.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि राजस्थान में कोरोना कुप्रबंधन के बाद अब डेंगू के बढ़ते प्रकोप को रोकने में राज्य सरकार विफल साबित हो रही है। प्रदेश का चिकित्सा महकमा भगवान भरोसे हैं, क्योंकि विभाग के मंत्री रघु शर्मा मरीजों को अपने हाल में छोड़कर मुखिया अशोक गहलोत के साथ 'पॉलिटिकल टूरिज्म' में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं।<br /> <br /> राठौड़ ने ट्वीट में कहा कि प्रदेश में डेंगू लगातार अपने पांव पसार रहा है तथा सरकारी व निजी अस्पतालों में डेंगू के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी होने से चिकित्सा विभाग का सिस्टम हांफ रहा है। ना तो प्रभावी मॉनिटरिंग की जा रही है और ना ही मरीजों के सही आकंडे़ रखे जा रहे हैं। मंत्री जी महज सामान्य सी अपील करके खानापूर्ति में लगे हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Oct 2021 14:32:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डेंगू की राजधानी बना जयपुर, चिकनगुनिया में भी अव्वल</title>
                                    <description><![CDATA[कोरोना के बाद मौसमी बीमारियों का प्रकोप, प्रदेश में इस साल अब तक डेंगू के जयपुर में सर्वाधिक 600 मरीज : चिकनगुनिया के भी जयपुर में ही सबसे ज्यादा 320 केस आए सामने]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%A1%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0--%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%85%E0%A4%B5%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%B2/article-1430"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/dengue.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। कोरोना संक्रमण के बाद अब बरसाती सीजन में वायरल के साथ ही डेंगू का प्रकोप काफी बढ़ गया है। प्रदेशभर की बात करें तो जनवरी 2021 से सितम्बर अंत तक 2771 डेंगू के मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा राजधानी जयपुर में डेंगू के मरीज मिले हैं। अकेले जयपुर में प्रदेश के सर्वाधिक 600 मरीज अब तक मिल चुके हैं। इनमें से करीब 390 मरीज तो अकेले जुलाई, अगस्त और सितम्बर माह में ही जयपुर के एसएमएस सहित अन्य अस्पतालों में रिकॉर्ड हुए हैं। सबसे ज्यादा सितम्बर महीने में 287 मरीज डेंगू के चिकित्सा विभाग ने दर्ज किए हैं। इन आंकड़ों से जयपुर प्रदेश की राजधानी होने के साथ ही डेंगू और चिकनगुनिया की राजधानी भी बन गया है। डेंगू के साथ ही जयपुर में चिकनगुनिया के भी इस साल सबसे ज्यादा मरीज सामने आए हैं। जयपुर में एक जनवरी से सितम्बर अंत तक चिकनगुनिया के सर्वाधिक 320 केस सामने आ चुके हैं। ऐसे में आमजन के साथ ही चिकित्सा विभाग की माथे पर भी चिंता की लकीरें उभर आई हैं।</p>
<p><br /> <strong>चिकित्सा विभाग की लापरवाही ने बढ़ाए मौसमी बीमारी के मरीज</strong><br /> जयपुर में बढ़ते डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के मरीजों के बावजूद चिकित्सा विभाग और नगर निगम आंखें मूंद कर बैठा है। घर-घर सर्वे, फोगिंग आदि सिर्फ दावों में भी दिखाई दे रहे हैं और हकीकत से कोसों दूर हैं। शहर में कहीं भी ना तो फोगिंग हो रही है और ना ही बुखार के मरीजों का सर्वे हो रहा है। बरसात के मौसम में जगह-जगह गड्ढ़ों और खाली पड़े भूखंडों में गंदगी और पानी भरा होने से एंटी लार्वा गतिविधियां नहीं हो रही है। ऐसे में मच्छरों की तादाद बढ़ने से घर-घर में बुखार, डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के मरीज देखे जा रहे हैं।</p>
<p><br /> <strong>एसएमएस अस्पताल में मरीजों की भीड़</strong><br /> मौसमी बीमारियों के बीच फैल रहे डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया के कारण अस्पतालों में मरीजों की अच्छी खासी भीड़ उमड़ रही है। एसएमएस अस्पताल में तो मेडिसिन की लगभग दस यूनिट हैं और हर यूनिट में डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया के मरीज देखे जा रहे हैं। ऐसे में अस्पतालों में डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया की जांचों में भी बेतहाशा बढ़ोतरी हो गई है।</p>
<p><br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>डेंगू-चिकनगुनिया के जिलेवार आंकड़ें<br /> (एक जनवरी 2021 से 30 सितम्बर 2021 तक)</strong></span></span><br /> <strong>जिला    डेंगू    चिकनगुनिया </strong><br /> जयपुर    597    320<br /> अलवर    286    52<br /> भीलवाड़ा    259    1<br /> कोटा    233    4<br /> बीकानेर    164    0<br /> उदयपुर    136    2<br /> अजमेर    74    9<br /> बांसवाड़ा    0    0<br /> बारां    17    0<br /> बाड़मेर    77    2<br /> भरतपुर    75    58<br /> बूंदी    37    2<br /> चित्तौड़गढ़    25    1<br /> चूरू    40    8<br /> दौसा    75    51<br /> धौलपुर    80    17<br /> डूंगरपुर    0    0<br /> हनुमानगढ़    16    4<br /> जैसलमेर    74    0<br /> जालौर    0    0<br /> झुंझुनूं    47    24<br /> जोधपुर    78    3<br /> करौली    75    43<br /> नागौर    45    16<br /> पाली    2    1<br /> प्रतापगढ़    43    0<br /> राजसमंद    21    1<br /> सवाई माधोपुर    45    28<br /> श्रीगंगानगर    10    0<br /> सीकर    58    32<br /> सिरोही    0    0<br /> टोंक    41    28</p>
<p><br /> इन दिनों मौसमी बीमारियों के मरीज काफी बढ़ गए हैं। ओपीडी में 30 से 40 प्रतिशत मरीज वायरल के हैं और जांच कराने पर इन्हीं में से डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के मरीज सामने आ रहे हैं। ऐसे में सावधानी बरतें और बुखार आने पर तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें। <br /> <strong>-डॉ. रमन शर्मा, सीनियर प्रोफेसर मेडिसिन, एसएमएस अस्पताल</strong><br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Oct 2021 12:13:28 +0530</pubDate>
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