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                <title>diseases - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>diseases RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>कभी बारिश-कभी सर्दी-गर्मी ने बिगाड़ा सेहत का मिजाज : पैर पसार रही बीमारियां, एसएमएस सहित अन्य अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की संख्या 30 फीसदी तक बढ़ी</title>
                                    <description><![CDATA[बदलते मौसम ने सेहत पर असर डाल दिया है। कभी बारिश, कभी ठंड और अचानक बढ़ती गर्मी से लोग मौसमी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि हर घर में कोई न कोई बीमार है। एसएमएस, जेके लोन सहित अस्पतालों की ओपीडी में 30% से ज्यादा मरीज बढ़े हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/sometimes-rain-sometimes-cold-and-heat-spoiled-the-health-diseases/article-150064"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/6622-copy38.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जयपुर। कभी बारिश, कभी ठंड तो कभी अचानक पड़ रही तेज गर्मी के कारण बार-बार मौसम का मिजाज बदल रहा है। इसके कारण आमजन की सेहत का मिजाज भी बदल रहा है। मौसम में बदलाव ने लोगों की सेहत पर गहरा असर डालना शुरू कर दिया है। हर घर में कोई न कोई सदस्य मौसमी बीमारियों से जूझता नजर आ रहा है। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">चिकित्सकों के अनुसार एसएमएस, जेके लोन, कांवटिया, जयपुरिया समेत राजधानी के सरकारी और निजी अस्पतालों की मेडिसिन ओपीडी में 30 फीसदी से ज्यादा का इजाफा हुआ है। इसमें अधिकांश मरीज मौसमी बीमारियों के लक्षणों के साथ पहुंच रहे है। इनमें बच्चों से लेकर </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हर आयु वर्ग के लोग शामिल हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बचाव के लिए अपनाएं</span></strong></p>
<ul>
<li class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">फ्रिज का ठंडा पानी ना पिएं, हल्का गुनगुना पानी पीएं</span></li>
<li class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिन में 3-4 बार हाथ धोएं</span></li>
<li class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">भीड़भाड़ में मास्क पहनें</span></li>
<li class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">संतुलित और पौष्टिक आहार लें</span></li>
<li class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पर्याप्त नींद लें </span></li>
<li class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ठंडी चीजों से परहेज करें</span></li>
<li class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए विटामिन-सी युक्त फल का सेवन करें</span></li>
<li class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">किसी भी लक्षण पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें</span></li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/sometimes-rain-sometimes-cold-and-heat-spoiled-the-health-diseases/article-150064</link>
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                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 10:08:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खतरा बैठा ग्राउंड वाटर टैंक में...कोई जानवर गिर जाए तो निकालना भी मुश्किल</title>
                                    <description><![CDATA[जलदाय विभाग के पंप हाउस  के पास स्थित  21 लाख लीटर का ग्राउंड वाटर टैंक।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/danger-lurks-in-the-groundwater-tank----even-rescuing-an-animal-that-falls-in-is-difficult/article-143054"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(7)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एमबीएस परिसर मोर्चरी के पास स्थापित जलदाय विभाग का पंप हाउस , इसी के पास में 21 लाख लीटर का ग्राउंड वाटर टैंक बना हुआ है जिसकी जमीन से ऊंचाई मात्र 7 फीट है और यहां पर चारों तरफ मिट्टी  पड़ी हुई है जिससे कोई भी जानवर इस टंकी की छत/ ढकान पर जा सकता है। छत का हाल ऐसा है कि इसमें छोटा जानवर तो क्या पूरा हाथी उतर जाए ऐसे में यदि कोई जानवर इतने बड़े पानी के जल स्रोत/ स्टोरेज टैंक में उतर जाए या गिर जाए तो उसको निकालने की संभावना तो नगण्य है । क्योंकि बाकी जगह यह ढकी हुई है ऐसे में गिरे हुए जानवर का पता चलना लगभग संभव नहीं है । ऐसी अवस्था में पानी के अंदर मरे  हुए और मर जाने की स्थिति में जल प्रदूषण या जल में होने वाली संभावित बीमारियोंसे भारी नुकसान हो सकता है।</p>
<p>खुले टैंक की उपयोगिता और लगातार उसके द्वारा सप्लाई जारी रखने के मामले पर अधिकारी पहले तो बचते नजर आए बाद में अमृत 2.0 का हवाला देते हुए जल्दी ही नया वाटर टैंक और पंप हाउस तैयार करने की बात कहने लगे। जलदाय विभाग का कहना है कि नये प्रोजेक्ट का मामला 2023 से लंबित चल रहा है, खेडली फाटक क्षेत्र में स्थान चिन्हित हो चुका है जैसे ही प्रस्तावित बजट को मंजूरी मिलती है वहां पर नया टैंक बना दिया जाएगा। अभी जो भी स्थिति है उसे हम रिपेयर करवाएंगे</p>
<p><strong>हैजा,रैबीज जेसी गंभीर बीमारियों का खतरा</strong><br />दूषित जल के पीने से काफी ज्यादा गंभीर बीमारियों के फैलने की संभावना बढ़ जाती है ऐसे में एक साथ पूरे क्षेत्र में यदि ऐसे पानी की सप्लाई होती है तो वहां पर महामारी फैलने की प्रबल संभावना है।यही नहीं जल जनित रोगों में से हैजा अंग्रेजी में जिसे कॉलरा भी कहा जाता है टाइफाइड, हेपेटाइटिस ए एंड ई  होती है।<br />डिसेंट्री सामान्य भाषा में पेचिश या डायरिया कहा जाता है परजीवी संक्रमण के कारण अभी हाल ही में कुछ दिनों पूर्व मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में बड़ी भयावह स्थिति हो गई थी ऐसे में अस्पताल परिसर के भीतर ही जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के द्वारा सप्लाई के काम में ली जा रही इस भूतल जल संग्रह की ऐसी स्थिति से अस्पताल सहित क्षेत्र के लोगों के लिए गंभीर समस्या पैदा हो गई है।</p>
<p>खुले पानी के स्रोतों में यदि कोई रैबीज जैसी गंभीर बीमारी से संक्रमित जानवर गिर जाये तो पानी के जरिए भी यह गंभीर बीमारी फैल सकती है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />ऐसे पानी जिसमे यदि कोई संक्रमित जानवर गिरा है जो गंभीर बीमारी से संक्रमित हो तो पानी के जरिये बीमारी आगे तक फैलने की प्रबल संभावना हो सकती है। इस मामले में जलदाय विभाग व जिम्मेदारों को ध्यान देने की जरूरत है।<br /><strong>-सुरेन्द्र सनाढ्य, नया नोहरा निवासी मरीज के परिजन</strong></p>
<p>किसी प्रकार का खुला जल पीना मानव शरीर के साथ बीमारियों को निमंत्रण देना जैसा है गंभीर बीमारियों को फैलने से नहीं रोका जा सकता यदि पानी में कोई गंभीर संक्रमित वस्तु जानवर या बाहर से कोई पदार्थ मिला दिया जाए!<br /><strong>डॉ. अभिमन्यु शर्मा , वरिष्ठ चिकित्साधिकारी</strong></p>
<p>टैंक बहुत पुराना है नया प्रोजेक्ट प्रपोजल खेडली फाटक जिंद बाबा के प्रस्तावित है अमृत 2.0 में मंजूरी के बाद काम तैयार करवायेंगे।<br /><strong>-श्याम माहेश्वरी, एक्सईएन पीएचईडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Feb 2026 16:29:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कचरे के ढेर से अटी गलियां : ग्राम पंचायतों के ठेकेदारों की मनमानी से बिगड़ी सफाई व्यवस्था, बीमारियों का बढ़ रहा है खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[गांवों की गलियां सटी हुई है कीचड़ से, कहीं सफाई उपकरण टूटे पड़े हैं तो कहीं कचरा वाहन महीनों से खड़े हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/streets-littered-with-garbage--sanitation-system-deteriorated-due-to-the-arbitrary-actions-of-village-panchayat-contractors--increasing-the-risk-of-diseases/article-131978"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/111-(3)8.png" alt=""></a><br /><p>राजपुर। शाहाबाद पंचायत समिति क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में ठेकेदारों की लापरवाही और अधिकारियों की मिलीभगत के कारण सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है। राज्य सरकार की स्वच्छता योजनाओं और करोड़ों रुपए के बजट के बावजूद गांवों में गंदगी का आलम बना हुआ है। ग्राम पंचायत  राजपुर, बेहटा, मूंडियरखांडा, सहरोल, डीकमानी, महोदरा, नोनेरा, शुभघरा, पीपलखेड़ी, खिरिया आदि में सफाई ठेकेदार केवल खानापूर्ति कर रहे हैं। नालियां जाम हैं, सड़कों पर कीचड़ और कचरे के ढेर लगे हुए हैं। इससे डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अनदेखी से सफाई व्यवस्था चौपट हो रही है। लोगों ने पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर से ज्ञापन भेजकर दोषी ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।</p>
<p>गांवों की गलियों में अब सफाई की जगह कचरे के ढेर और गंदे पानी की बदबू ने कब्जा जमा लिया है। नालियां महीनों से साफ नहीं हुईं और जगह-जगह जलभराव से सड़कों पर कीचड़ पसर गया है। कई जगहों पर तो लोग अपने घरों तक पहुंचने के लिए लकड़ी या ईंटों पर चलने को मजबूर हैं। कचरे के ढेर और खुले में फैली गंदगी के कारण मलेरिया, डेंगू और वायरल बुखार जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। कई परिवार बीमार पड़ रहे हैं, पर पंचायत प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।</p>
<p><strong>ग्रामीणों ने उठाई आवाज</strong><br />ग्रामीणों ने शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर को ज्ञापन भेजकर लापरवाह ठेकेदारों और अफसरों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार की स्वच्छता योजनाएं तभी सफल होंगी जब जमीनी स्तर पर जवाबदेही तय हो। ग्रामीणों का कहना है कि स्वच्छ भारत मिशन की तस्वीरें तो अखबारों में चमक रही हैं, लेकिन गांवों की गलियां कीचड़ से सटी हुई है। कहीं सफाई उपकरण टूटे पड़े हैं तो कहीं कचरा वाहन महीनों से खड़े हैं।<br /> <br /><strong>बीमारियों का बढ़ा खतरा </strong><br />सफाई नहीं होने के कारण मलेरिया, डेंगू और त्वचा रोग फैलने लगे हैं। स्थानीय चिकित्सा कर्मियों के अनुसार पिछले एक महीने में बुखार और मच्छरजन्य रोगों के मरीजों की संख्या बढ़ी है। अगर सफाई नहीं सुधरी तो आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं। </p>
<p>सफाई व्यवस्था पूरी तरह गड़बड़ है। ठेकेदारों की मनमानी से आमजन परेशान हैं।<br /><strong>- नवीन झा, राजपुर।    </strong></p>
<p>कागजों में सफाई कार्य दिखाया जा रहा है जबकि जमीन पर कुछ नहीं हो रहा। ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।<br /><strong>- गीताबाई, राजपुर।     </strong></p>
<p>सड़कें कीचड़ और गंदगी से भरी हैं। ठेकेदारों के बिल बिना कार्य के ही पास हो रहे हैं, जांच जरूरी है।<br /><strong>- वैभवी भार्गव, राजपुर।</strong></p>
<p>गांवों में मलेरिया-डेंगू का खतरा बढ़ गया है। मंत्री मदन दिलावर को खुद मॉनिटरिंग कर स्वच्छता व्यवस्था सुधारनी चाहिए।<br /><strong>- हुकुमदत्त मिश्रा, सामाजिक कार्यकर्ता। </strong></p>
<p>ग्राम पंचायतों में सफाई व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो रही है। मैं स्वयं मॉनिटरिंग कर रहा हूं। लोग निराधार आरोप लगा रहे हैं।<br /><strong>- दीपचंद नागर, विकास अधिकारी, शाहाबाद। </strong></p>
<p>ग्राम पंचायतों में यदि सफाई व्यवस्था सुनिश्चित तरीके से नहीं हो रही है तो विकास अधिकारी से वार्ता कर जांच कराई जाएगी।<br /><strong>- जब्बर सिंह सहरिया, परियोजना अधिकारी, शाहाबाद। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Nov 2025 16:32:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बदले मौसम की मार, अस्पतालों में बढ़ी भीड़ : सर्दी, जुकाम, वायरल बुखार का प्रकोप, पैटर्न बदला, अब पांच से सात दिन में ठीक हो रहे मरीज</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर में मौसम के उतार-चढ़ाव से वायरल इंफेक्शन, सर्दी-जुकाम, बुखार और अस्थमा के मरीज बढ़ गए हैं। एसएमएस अस्पताल में ओपीडी 30% तक बढ़ी, जबकि जेकेलोन में मरीजों की संख्या 1500 पार पहुंची। बच्चे-बुजुर्ग अधिक प्रभावित हैं। डॉक्टरों ने गर्म पानी पीने, मास्क पहनने, पौष्टिक आहार लेने और सावधानी बरतने की सलाह दी है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/due-to-changing-weather-crowd-increased-in-hospitals-outbreak-pattern/article-130929"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/111-(7)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजधानी जयपुर में कभी गर्मी तो कभी बारिश के कारण बढ़ी सर्दी ने आमजन को बीमारियों की जद में ले लिया है। वायरल इंफेक्शन, सर्दी-जुकाम-बुखार, गले की खराश और अस्थमा-एलर्जी जैसी बीमारियों के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है।</p>
<p>एसएमएस सहित शहर के प्रमुख सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। एसएमएस की बात करें तो अस्पताल की मेडिसिन ओपीडी में मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या में 25 से 30 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। वहीं बच्चों के अस्पताल जेकेलोन में भी इन दिनों ओपीडी बढ़कर 1500 को पार गई है। वहीं कांवटियां, गणगौरी, सेटेलाइट सहित निजी अस्पतालों में भी मरीजों की अच्छी खासी भीड़ है।</p>
<p><strong>नमी और तापमान में उतार चढ़ाव से वायरस सक्रिय :</strong></p>
<p>पिछले एक सप्ताह में वायरल बुखार और सर्दी-जुकाम के मरीजों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। अस्थमा और श्वास रोगियों की परेशानी भी काफी बढ़ गई है। खासकर बच्चे और बुजुर्ग तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। कई मरीजों को खांसी, गले में खराश, थकान और हल्के बुखार की शिकायत हो रही है। चिकित्सकों के अनुसार अमूमन वायरल इंफेक्शन तीन दिन में ठीक हो जाता है, लेकिन इस बाद पैटर्न बदला हुआ है और ठीक होने में पांच से सात दिन तक का समय लग रहा है।</p>
<p><strong>बचाव के लिए यह उपाय अपनाएं :</strong></p>
<ul>
<li>गुनगुना पानी पीएं</li>
<li>दिन में 3-4 बार हाथ धोएं</li>
<li>भीड़-भाड़ वाले इलाकों में मास्क पहनें</li>
<li>संतुलित और पौष्टिक आहार लें</li>
<li>पर्याप्त नींद लें </li>
<li>ठंडी चीजों से परहेज करें</li>
<li>इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए विटामिन-सी युक्त फल का सेवन करें</li>
<li>किसी भी लक्षण पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/due-to-changing-weather-crowd-increased-in-hospitals-outbreak-pattern/article-130929</link>
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                <pubDate>Thu, 30 Oct 2025 13:02:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>निगम की हिन्दू धर्मशाला: कम किराए के बावजूद नहीं है रहने लायक, 15 साल से नहीं बदले धर्मशाला के बिस्तर, फैला रहे बीमारियां</title>
                                    <description><![CDATA[धर्मशाला काफी पुरानी बनी हुई है, इसमें लोगों के रहने के लिए करीब 30 कमरे बने हुए हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/corporation-s-hindu-dharamshala--despite-low-rent--it-is-not-fit-for-living--beds-of-dharamshala-have-not-been-changed-for-15-years--spreading-diseases/article-126913"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/_4500-px)-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। पुराने शहर के बीच स्थित नगर निगम की धर्मशाला  जिसका किराया भी बहुत कम है। उसमें बाहर से आने वाले लोग ठहरना चाहते हैं लेकिन उस धर्मशाला के कमरों की ऐसी हालत है कि अधिकतर लोग उन्हें देखकर ही वापस लौट रहे है। धर्मशाला के कमरों में पिछले करीब 15 साल से अधिक समय से बिस्तर तक नहीं बदले गए। जिससे गंदगे व फटे हुए गद्दे बीमारियां फेला रहे हैं। यह हालत है नगर निगम कोटा उत्तर के क्षेत्र में आर्य समाज रोड स्थित हिन्दू धर्मशाला की। रामपुरा क्षेत्र में आने वाली यह धर्मशाला काफी पुरानी बनी हुई है। इसमें लोगों के रहने के लिए करीब 30 कमरे बने हुए हैं। साथ ही पहले अधिकारियों के रहने के लिए भी ऊपर की तरफ गेस्ट हाउस नुमा कमरे बने हुए हैं। लेकिन इस धर्मशाला की तरफ अधिकारियों से लेकर निगम के जनप्रतिनिधियों में से किसी का भी ध्यान नहीं होने से यह बदहाल की स्थिति में पहुंच गई है। धर्मशाला बाहर से आने वाले लोगों के ठहरने के लिए बनाई गई। बाहर से आने वाले जब कोटा में आॅटो वालों से रहने की सस्ती धर्मशाला के  बारे में पूछते हैं तो अधिकतर लोगों को हिन्दू धर्मशाला ही लेकर जाते हैं। लेकिन वहां आने वाले धर्मशाला के कमरों की हालत देखकर ही वापस लौट जाते हैं। धर्मशाला के आंगन में बालाजी का मंदिर बना हुआ है और खाने के लिए अन्नपूर्णा रसोई संचालित हो रही है। </p>
<p><strong>फटे हुए व गंदे गद्दे</strong><br />धर्मशाला में करीब 30 कमरे हैं। जिनमें से अधिकतर की हालत खराब है। उनमें लोहे के पलंग रखे हुए हैं। किसी में एक तो किसी में दो और तीन तक पलंग है। लेकिन वे पलंग बीच से झुके हुए हैं। जिससे उन पर सोने वालों की कमर ही दु:खने लगती है। वहीं उन पलंग पर बिछने वाले गद्दों की हालत देखकर तो लगता ही नहीं कि यह नगर निगम की किसी शहरी धर्मशाला के गद्दे है। इससे अच्छे तो गरीब से गरीब परिवार जो सड़क किनारे रहकर जीवन बिताता है उनके बिस्तर भी अच्छे रहते हैं। फटे व गंदे गद्दों को करीब 15 साल से नहीं बदला गया। गद्दों पर बिछाने के लिए चादर तक या तो हैं नहीं या फटी हुई है। जानकारों के अनुसार धर्मशाला में करीब 20 साल से अधिक समय से पुताई तक नहीं हुई है। बरसात में कमरों में पानी टपकता है। </p>
<p><strong>24 घंटे का मात्र 50 रुपए किराया</strong><br />आमजन को रहने के लिए सस्ती जगह मिल सके उसे ध्यान में रखते हुए निगम की ओर से इसका किराया भी इतना कम रखा हुआ है कि गरीब से गरीब भी उसे वहन कर सके। 24 घंटे के मात्र 50 रुपए किराया है। इतना कम किराया होने के बाद भी धर्मशाला की हालत के कारण लोग वहां रहने को तैयार नहीं है।  अधिकारियों वाले कमरों में भी बरसों से ताले लगे हैं। उनमें भी कोई नहीं ठहरता है।  जानकारी के अनुसार वर्तमान में मात्र 3 कमरों में ही लोग रह रहे हैं। उनमें भी दो कमरों में तो कोटा में होने वाली प्रतियोगी परीक्षा देने आए अभ्यर्थी रह रहे हैं। एक कमरे में पिता पुत्री हैं। युवती की परीक्षा है लेकिन उसकी ट्यूब लाइट ही झप-झप कर रही है। </p>
<p><strong>पंखे गायब, बिजली बोर्ड टूटे हुए</strong><br />धर्मशाला में 30 में से गिनती के ही कमरे ऐसे हैं जो सही हालत में होने से रहने लायक है। जबकि अधिकतर कमरों में या तो पंखे ही नहीं हैं यदि हैं भी तो चलते ही नहीं है। ट्यूब लाइटें लटकी हुई है। बिजली के बोर्ड टूटे हुए व तार खुले पड़े हैं। जिनसे करंट का खतरा बना हुआ है।  मोबाइल के चार्जिंग पाइंट तक काम नहीं कर रहे हैं। कमरों में सीलन आ रही है। प्लास्टर उखड़ा पड़ा है। खिड़कियां टूटी हुई है।  वहीं पीने के पानी के लिए मात्र नल लगा हुआ है। वाटर कूलर है लेकिन वह खराब होने से बंद पड़ा है। इतना ही नहीं महिला शौचालय में दरवाजा तक नहीं है। </p>
<p><strong>दो कर्मचारी, एक होमगार्ड नियुक्त</strong><br />धर्मशाला में नगर निगम की ओर से दो कर्मचारी व रात के समय  में एक होमगार्ड को नियुक्त किया हुआ है।  जानकारों के अनुसार कर्मचारियों व गार्ड के वेतन पर निगम हर महीने करीब डेढ़ से पौने दो लाख रुपए खर्च कर रहा है। जबकि कमाई के नाम पर कमरों में रहने वाले लोगों से  हर महीने मात्र 5 से 6 हजार रुपए किराया ही मिल रहा है। सूत्रों के अनुसार निगम अधिकारियों को इसकी स्थिति से कई बार अवगत करवाने के बाद भी किसी का कोई ध्यान नहीं है। </p>
<p><strong>किराया अधिक हो लेकिन सुविधा मिले</strong><br />शनिवार को कोटा में परीक्षा देने आए कई अभ्यर्थी धर्मशाला में रहने के लिए आए लेकिन उसकी हालत देखकर वापस लौट गए। बीकानेर से आए राहुल कहना था कि किराया भले ही दो गुना कर दें लेकिन बिस्तर व पलंग तो कम से कम सही होने चाहिए। सीकर निवासी धर्मराज का कहना है कि आॅटो वाले ने उन्हें इस धर्मशाला के बारे में बताया था। लेकिन यहां आकर देखा तो रहने का मन ही नहीं हुआ। परीक्षा देने आए हैं बीमार होने नहीं। </p>
<p>धर्मशाला काफी पुरानी होने से उसकी हालत खराब है। उसे सुधारने के लिए हुड़को से मिलने वाले लोन से काम करवाने की योजना थी।  लेकिन उच्च स्तर से निर्देश मिले हैं कि इसे किसी एनजीओ के माध्यम से पीपीपी मोड पर संचालित करने का प्रयास किया जाए। यदि ऐसा नहीं होता है तो निगम अपने स्तर पर सही करवाएगा। बिस्तर बदलने से लेकर अन्य आवश्यक काम भी करवाने के प्रयास किए जाएंगे। <br /><strong>- अशोक कुमार त्यागी, आयुक्त नगर निगम कोटा उत्तर </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Sep 2025 16:42:05 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा उत्तर वार्ड 31 में समस्याओं का अंबार, टूटी सड़कें, बंद रोड लाइटें, नहीं हो रही नालियों की सफाई</title>
                                    <description><![CDATA[कई बार शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन  अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-31---residents-troubled-by-broken-roads--garbage-points-and-threat-of-crocodiles/article-126890"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/_4500-px)-(1)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। उत्तर नगर निगम के वार्ड 31 की स्थिति दयनीय हो रही है। वार्डवासियों के सामने रोजमर्रा की समस्याएं इतनी गंभीर हो गई हैं। वार्ड के कई इलाकों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। नालियों की समय पर सफाई न होने से गंदा पानी सड़कों पर फैला रहता है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, सड़कों पर बने चैंबर का लेवल भी सही नहीं है। इसके चलते वाहन चालक व राहगीर चोटिल हो रहे है। वार्ड में बनें तालाब में मगरमच्छ होने से भय का भी माहौल है। वार्ड की कॉलोनियों में रोड़ लाइटें भी बंद रहती हैं। अंधेरे के कारण रात में लोगों का चलना-फिरना मुश्किल हो जाता है और चोरी जैसी घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार इस बारे में शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन  अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया। वार्ड में बने सुलभ कॉम्प्लेक्स की स्थिति भी सही नहीं है तथा पानी की भी व्यवस्था नहीं है, जिससे इसका उपयोग रहवासी बहुत कम करते है। </p>
<p><strong>वार्ड का एरिया</strong><br />पंचशील कॉलोनी, समस्त दुर्गा नगर, सुभाष नगर, सगस जी महाराज, न्यू थर्मल कॉलानी, रिद्धि-सिद्धि प्रोपर्टीज, चूने वाले बाबा, जी-मार्ट, मस्जिद, नेवालाल मैरिज गार्डन, बजरंगपुरा एवं आरएसईबी कार्यालय का क्षेत्र।</p>
<p><strong>तालाब का पानी पूरी तरह दूषित </strong><br />सबसे बड़ी समस्या वार्ड के तालाब में जा रहे नालों का गंदा पानी है। इससे तालाब का पानी पूरी तरह दूषित हो चुका है। तालाब में दो मगरमच्छ भी मौजूद हैं, जो आसपास के लोगों और बच्चों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। कई बार पार्षद ने निगम अधिकारियों को इस बारे में अवगत कराया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।<br /><strong>- चंदÑकला, वार्डवासी</strong></p>
<p><strong>रहवासियों का कहना है</strong><br />सड़कों के टूटे चैंबरों की मरम्मत कराए, नालियों की सफाई नियमित रूप से करवाए, बंद पड़ी रोड लाइटें चालू करवाई जाएं और सुलभ कॉम्प्लेक्स में पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही तालाब में मौजूद मगरमच्छों को हटाकर तालाब की सफाई की जाए, ताकि दूषित जल से फैलने वाली बीमारियों पर रोक लग सके।<br /><strong>- मोहन सिंह नायक</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />वार्ड के लोग कई सालों से तालाब की समस्या से जूझ रहे हैं। तालाब में मौजूद मगरमच्छ किसी बड़े हादसे का कारण भी बन सकते हैं। लोगों में इसको लेकर भय का माहौल है। मैनें कई बार अधिकारियों को इस समस्या से अवगत करवाया है। सफाई रोजाना होती  है। अगर वार्डवासियों को फिर भी समस्या होती है तो उसका समाधान भी करवा दिया जाएगा।<br /><strong>- नवल सिंह हाड़ा, वार्ड पार्षद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Sep 2025 16:19:54 +0530</pubDate>
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                <title>कृत्रिम केमिकल्स गंभीर बीमारियों का कारण</title>
                                    <description><![CDATA[भारत में भोजन की गुणवत्ता पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/artificial-chemicals-cause-serious-diseases/article-126427"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(1)8.png" alt=""></a><br /><p>भारत में भोजन की गुणवत्ता पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। चावल, दूध, दालें, मसाले और सब्जियों में मिलावट और स्टेरॉयड का इस्तेमाल आम हो चला है। यह भोजन धीरे-धीरे लोगों के स्वास्थ्य को खोखला कर रहा है। हड्डियों की कमजोरी, लिवर और किडनी की बीमारियां, हार्मोनल असंतुलन और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां बढ़ रही हैं। ऑनलाइन बिकने वाले खाद्य पदार्थों पर निगरानी बेहद कमजोर है, जबकि मिलावटखोरों पर कार्रवाई धीमी और अधूरी। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में यह मिलावट और स्टेरॉयड भारत के लिए सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन जाएगी।</p>
<p><strong>कृत्रिम केमिकल्स :</strong></p>
<p>आज हमारा भोजन, जो स्वास्थ्य का स्रोत होना चाहिए, वही बीमारियों का कारण बनता जा रहा है। बाजार और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बिकने वाले खाद्य पदार्थों में मिलावट के साथ अब स्टेरॉयड और कृत्रिम केमिकल्स के इस्तेमाल का चलन तेजी से बढ़ रहा है। चावल, दालें, दूध, मसाले और यहां तक कि सब्जियों और फलों तक को जल्दी पकाने, चमकाने और लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए स्टेरॉयड या रसायनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। नतीजा यह है कि उपभोक्ताओं को बिना जाने अनजाने ऐसी चीजें खानी पड़ रही हैं, जो धीरे-धीरे शरीर को भीतर से खोखला कर रही हैं।</p>
<p><strong>शरीर के लिए जहर :</strong></p>
<p>स्टेरॉयड का चिकित्सकीय उपयोग सीमित और विशेषज्ञ निगरानी में होता है। डॉक्टर इसे केवल तब लिखते हैं, जब जरूरी हो, जैसे किसी गंभीर संक्रमण, हार्मोन की गड़बड़ी या एलर्जी के मामलों में। लेकिन यही स्टेरॉयड जब सब्जियों, दूध या मांस उत्पादों में मिलाकर उपयोग किया जाता है, तो यह शरीर के लिए जहर बन जाता है। यह सीधे गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं। स्टेरॉयड के नियमित सेवन से हड्डियों की मजबूती खत्म हो जाती है, लिवर और किडनी पर दबाव बढ़ता है, हार्मोनल असंतुलन हो जाता है और लंबे समय में कैंसर जैसी बीमारियां जन्म ले लेती हैं। कई शोध बताते हैं कि बच्चों और किशोरों में यह असर और भी खतरनाक होता है, क्योंकि उनका शरीर विकास की अवस्था में होता है और स्टेरॉयड उनकी ग्रोथ को असामान्य बना देता है।</p>
<p><strong>असुरक्षित भोजन :</strong></p>
<p>स्टेरॉयड के साथ मिलावट की समस्या भी उतनी ही गहरी है। दूध में डिटर्जेंट और यूरिया, चावल में प्लास्टिक जैसी चीजें, मसालों में रंग और पाउडर, मिठाइयों में खतरनाक कैमिकल ये सब मिलकर धीरे-धीरे हमारी इम्युनिटी को खत्म कर रहे हैं। भारत में हर साल लाखों लोग केवल असुरक्षित भोजन की वजह से बीमार पड़ते हैं। डिजिटल युग में लोग सुविधा के लिए ऑनलाइन खाद्य सामग्री मंगवाते हैं। अनाज, दाल, मसाले, दूध पाउडर सब कुछ ऑनलाइन उपलब्ध है। लेकिन यह बाजार निगरानी के लिहाज से बेहद ढीला है। छोटे सप्लायर बिना किसी प्रमाणन के प्रोडक्ट बेच रहे हैं।</p>
<p><strong>भोजन की गुणवत्ता :</strong></p>
<p>फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पास भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है। इस संस्था ने कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं, लेकिन इनका पालन जमीनी स्तर पर अधूरा रहता है। ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में जांच नाममात्र की होती है। फास्ट फूड और पैक्ड आइटम्स पर नियंत्रण लगभग शून्य है। सजा के प्रावधान कमजोर हैं, इसलिए मिलावटखोर आसानी से बच निकलते हैं। कई बार यह देखा गया है कि जब तक जांच रिपोर्ट आती है, तब तक उत्पाद बाजार में बिक चुका होता है और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा चुका होता है।</p>
<p><strong>संकट से निपटें :</strong></p>
<p>स्थिति को समझने के लिए हमें यह भी देखना होगा कि मिलावट और स्टेरॉयड का असर केवल स्वास्थ्य पर नहीं, बल्कि समाज और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। जब लाखों लोग बीमार पड़ते हैं, तो परिवारों की आय का बड़ा हिस्सा इलाज में खर्च होता है। अस्पतालों पर दबाव बढ़ता है, दवाइयों की खपत बढ़ती है और कार्यक्षमता कम होती है। इससे देश की उत्पादकता पर सीधा असर पड़ता है। यह समस्या केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अर्थव्यवस्था और विकास की राह में बाधा है। जरूरत है कि सरकार, उपभोक्ता और उद्योग मिलकर इस संकट से निपटें। स्टेरॉयड मिलाने वालों को अपराधी की तरह कड़ी सजा मिले। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को केवल प्रमाणित सप्लायर को ही जगह देने के लिए बाध्य किया जाए। जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को सिखाया जाए कि नकली और मिलावटी चीजों की पहचान कैसे करें।</p>
<p><strong>फूड टेस्टिंग लैब्स :</strong></p>
<p>हर जिले में फूड टेस्टिंग लैब्स उपलब्ध हों और उपभोक्ता को अधिकार मिले कि वह आसानी से किसी भी संदिग्ध उत्पाद की जांच करवा सके। इसके साथ यह भी जरूरी है कि उपभोक्ता स्वयं सतर्क रहें। आकर्षक पैकेजिंग या सस्ते दाम देखकर तुरंत प्रभावित न हों। भरोसेमंद ब्रांड्स और स्थानीय विश्वसनीय दुकानदार से ही खरीदारी करें। सब्जियों और फलों को घर लाने के बाद अच्छे से धोकर ही इस्तेमाल करें और अगर किसी उत्पाद की गंध या रंग असामान्य लगे तो उसका सेवन बिल्कुल न करें। भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं है, बल्कि जीवन और सेहत का आधार है। अगर इसी आधार में जहर मिलना शुरू हो जाए, तो समाज की नींव ही कमजोर हो जाएगी। आज सबसे बड़ी जरूरत है कि इस खतरे को समय रहते पहचाना जाए और ठोस कदम उठाए जाएं। यह एक ऐसा संकट है, जिसे केवल नीतियों से नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और सामूहिक प्रयास से ही टाला जा सकता है।</p>
<p><strong>-डॉ. सत्यवान सौरभ</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/opinion/artificial-chemicals-cause-serious-diseases/article-126427</link>
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                <pubDate>Wed, 10 Sep 2025 12:19:54 +0530</pubDate>
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                <title>लापरवाही: नाला अवरुद्ध होने से यादव मोहल्ला बना तालाब</title>
                                    <description><![CDATA[समस्या के निराकरण के लिए कोई पुख्ताप्रबंध नहीं किया गया।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/negligence--yadav-mohalla-became-a-pond-due-to-blockage-of-drain/article-126225"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/untitled-design9.png" alt=""></a><br /><p>खानपुर। खानपुर क्षेत्र में यादव मोहल्ला वार्ड नंबर 1 में जल भराव की स्थिति से मोहल्ले एवं ग्रामवासियों का जनजीवन प्रभावित हो गया है। यह परेशानी यादव मोहल्ले में नाला अवरूद्ध होने से आई है। यदि समय रहते नाले की समस्या का निराकरण कर दिया जाए तो कस्बेवासियों को परेशानी नहीं उठानी पड़े। मोहल्ले निवासी मथुरालाल यादव , किशन यादव, इंद्रजीत यादव आदि ने बताया कि खानपुर वर्तमान नगर पालिका द्वारा मोहल्ले में पानी के अत्यधिक जमाव एवं निकासी नहीं होने के कारण होने वाली समस्या के निराकरण के लिए समय रहते कोई पुख्ताप्रबंध नहीं किया गया है, जिसके कारण राहगीरों,स्कूल जाते हुए छोटे-छोटे बच्चों, बुजुर्गों, पशु-पालकों आदि को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। गंदे एवं मटमैले पानी के अत्यधिक जमाव के कारण नलों में भी दूषित पेयजल की आपूर्ति होने की संभावना बनी रहती है जो कि कस्बेवासियों को बीमार कर सकती है और अभी मौसम के अनुसार डेंगू मलेरिया का प्रकोप चल रहा है। </p>
<p>नाले के अवरूद्ध होने के कारण पानी जमाव की स्थिति बन जाती है। जिस कारण राहगीर व कस्बेवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। <br /><strong>- सागर यादव, कस्बेवासी</strong></p>
<p>नाले के कारण जमाव पानी से गंभीर बीमारियों को खतरा मंडरा रहा है। <br />- राम सिंह यादव, कस्बेवासी</p>
<p>मैं एक छात्र हूं और स्कूल आने जाने में परेशानी उठानी पड़ती है। समस्या का समाधान किया जाए। <br /><strong>- नकुल यादव, छात्र</strong></p>
<p>रास्ते में कीचड़ होने से कई बार फिसल जाते है वहीं कीचड की दुर्गंध से परेशानी उठानी पड़ती है। <br /><strong>- ध्रुव यादव, छात्र</strong></p>
<p>नाला अवरूद्ध होने से इस परेशानी का सामना करना पड़ता है। नाले की समस्या का समाधान करना चाहिए। <br /><strong>- सुनील तेजी, कस्बेवासी</strong></p>
<p>रास्ते कीचड़ व गंदगी से बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है , कई राहगीर कीचड़ में फिसलकर गिर जाते है समस्या का समाधान किया जाए। <br /><strong>- नितिन यादव, छात्र </strong></p>
<p>यादव मोहल्ले को दिखावाकर तुरंत सफाई करवा दी जाएगी, नाले में पानी कहां अवरुद्ध हो रहा है, उस समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।  <br /><strong>- पुखराज मीणा, नगर पालिका आयुक्त खानपुर</strong></p>
<p>अवरुद्ध पानी को दिखाकर जहां से पानी अवरुद्ध हो रहा है उसे नाले को तुरंत साफ करवा दिया जाएगा और इस पर एक्शन लिया जाएगा।         <br /><strong>- रजत विजय वर्गीय, उपखंड अधिकारी खानपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Sep 2025 17:00:15 +0530</pubDate>
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                <title>पाठशाला के बाहर गंदगी: शिक्षा की राह में रोड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[कस्बेवासियों ने प्रशासन से जल्द से जल्द सफाई व्यवस्था और समस्या का समाधान करने की मांग की है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/dirt-outside-the-school--a-hindrance-in-the-way-of-education/article-125461"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/1ne1ws-(9)2.png" alt=""></a><br /><p>खानपुर। सुबह सुबह स्कूल का बैग व किताबें थामें, ये कहां आ गए हम यूं चलते चलते...यह पंक्ति खानपुर राजकीय उच्च बालिका माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने आने वाले बच्चों के मन में स्कूल के बाहर गंदगी व कचरे के ढेरों को देखकर आ जाती है। जानकारी अनुसार खानपुर कस्बे के अंदर राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय बी ब्लॉक में स्थित है, उसकी स्थिति इतनी दयनीय बनी हुई है कि बच्चों को बैठाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्कूल के आसपास कचरे के ढेर लगे हुए हैं, जिससे विद्यालय में आने वाले विद्यार्थियों को परेशानी उठानी पड़ रही है। साथ ही जब स्कूल में कक्षाएं संचालित होती है तो बच्चें व शिक्षक शिक्षण कार्य पूर्णरूप से नहीं कर पाते है क्योंकि गंदगी की वजह से वहां ठहरना मुश्किल हो रहा है। अभी बरसात के मौसम में मौसमी बीमारियां अपना पैर पसार रही है, जैसे डेंगू, मलेरिया इन बीमारियों से छोटे बच्चे ग्रसित हो सकते हैं। </p>
<p>यह स्कूल बहुत पुराना स्कूल है जो की सभी बालक बालिकाओं के पास में पड़ता है और आवागमन करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस स्कूल के पास में एक सुलभ शौचालय बना हुआ है, जहां पर अव्यवस्थाओं का आलम है। इस शौचालय में इतनी गंदगी फैली हुई है जिससे कस्बेवासी व स्कूल में पढ़ने आने वाले बच्चों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यदि समय रहते सफाई व्यवस्था दुरूस्त करके इन गंदगी की समस्या का निस्तारण नहीं किया तो गंभीर बीमारियों के परिणाम भुगतने पड़ सकते है। कस्बेवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द सफाई व्यवस्था दुरूस्त की जाए और समस्या का समाधान किया जाए।</p>
<p>यह स्कूल खानपुर कस्बे के अंदर है और बालक बालिकाओं के लिए एक सुविधाजनक स्कूल है, जहां पर आने जाने पर गंदगी की वजह से परेशानी का सामना करना पड़ता है, इसलिए इस गंदगी को तुरंत हटाया जाए। <br /><strong>- चिंटू लक्षकार, ग्रामीण  </strong></p>
<p>राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय ब्लॉक बी जो बाहर से दिखने में सुंदर लगता है लेकिन आसपास से पूरा गंदगी के ढेर से घिरा हुआ है। गंभीर बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। <br /><strong>- बनवारी मेहर , ग्रामीण  </strong></p>
<p>बालक बालिकाएं ऐसे दुर्गंध में पढ़ाई कर रहे हैं जहां पर उनको सांस लेने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, इस समस्या का तुरंत निराकरण करें। <br /><strong>- राजाराम गुर्जर, ग्रामीण  </strong></p>
<p>अभी बरसात का मौसम चल रहा है और कभी तपती गर्मी पड़ती है तो कभी पानी आ जाता है, इस प्रकार से ग्रामीण व स्कूल के बच्चें बीमारी से ग्रसित हो सकते हैं। <br /><strong>- नितिन मीणा, ग्रामीण</strong></p>
<p>जब इस स्कूल के बाहर कचरे व गंदगी के ढेर लगे हुए है जिसकी गंध से विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है। <br /><strong>- आशिक वर्मा , ग्रामीण </strong></p>
<p>सफाई व्यवस्था दुरूस्त कर गंदगी व कचरे के ढेर हटाये जाए ताकि कस्बेवासियों को राहत मिल सके। <br /><strong>-अमित सैनी, ग्रामीण  </strong></p>
<p>प्रिंसिपल को आदेशित कर दिया गया है कि ताकि वह संबंधित कार्यकर्ता को लेटर भेजिए जो सफाई को देखते हैं।<br /><strong>- सियाराम नागर, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी खानपुर</strong></p>
<p>स्कूल की तरफ कर्मचारियों को दिखाकर तुरंत सफाई करवा दी जाएगी और तुरंत एक्शन लिया जाएगा। <br /><strong>- पुखराज मीणा नगर पालिका आयुक्त खानपुर।</strong></p>
<p>इसका हमने नगर पालिका को सफाई करने के लिए लेटर दे दिया है, इसके पहले भी कई बार लेटर प्रेषित कर चुके हैं। <br /><strong>- भावना डेहरा, प्रधानाध्यापिका राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय बी ब्लॉक। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Sep 2025 16:09:24 +0530</pubDate>
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                <title>अब भूखंड मालिकों को होंगे नोटिस जारी </title>
                                    <description><![CDATA[ खाली पड़े भूखंडों पर फैली गंदगी से परेशान थे मोहल्लेवासी ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/now-notices-will-be-issued-to-the-plot-owners/article-125246"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(2)72.png" alt=""></a><br /><p>कवाई। कस्बे के विभिन्न मोहल्लों में लंबे समय से खाली पड़े भूखंड कचरा फैंकने का अड्डा बन चुके हैं। इससे उठने वाली दुर्गंध और मच्छर व अन्य जहरीले जीव-जंतु बीमारियों का खतरा हर समय मंडराता रहता है। मोहल्ले वासियों का कहना है कि जहां सरकार और प्रशासन स्वच्छ भारत अभियान के माध्यम से स्वच्छता का संदेश देते हैं, वहीं कई जिम्मेदार सरकारी कर्मचारी ही भूखंडों में गंदगी का कारण बने हैं। कई भूखंड सरकारी कर्मचारियों के नाम हैं, जो उन्हें खरीद तो लेते हैं, पर रख-रखाव या सफाई पर ध्यान नहीं देते। सूत्रों के अनुसार ये भूखंड भविष्य में दुगना-तिगुना दाम मिलने की आशा में खाली रखे जाते हैं। ग्रामीणों ने कई बार पंचायत और जिम्मेदार अधिकारियों को शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। अब ग्राम पंचायत ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए भूखंड मालिकों को नोटिस जारी करना शुरू कर दिया है। </p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाई थी समस्या </strong><br />कवाई कस्बे के विभिन्न मोहल्लों में लंबे समय से खाली पड़े भूखंडों में कचरा फैंकने से होने वाली समस्या को लेकर नवज्योति ने 19 जुलाई को खबर को निजी भूखंड बीमारियों का बन रहे ठिकाना शीर्षक से खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिसका असर यह हुआ कि ग्राम पंचायत प्रशासन हरकत में आया और अब ग्राम पंचायत ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए भूखंड मालिकों को नोटिस जारी करना शुरू कर दिया है। जिससे अब मौहल्लेवासियों को गदंगी और बीमारियों से राहत मिलने की उम्मीद जगी है। इसके लिए कस्बेवासियों और मोहल्लेवासियों ने नवज्योति का आभार जताया है। </p>
<p>जिन भूखंडों में गंदगी पाई गई है, उनके मालिकों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। उन्हें निर्धारित समय में साफ-सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि समय पर सफाई नहीं कराई गई तो आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।<br /><strong>-  रामप्रताप सिंह, विकास अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Aug 2025 15:50:51 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title> कबूतर कहीं चुग न जाए आपकी सेहत, छतों से सार्वजनिक स्थानों पर कबूतरों का कब्जा</title>
                                    <description><![CDATA[आस्था और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बीच सामजंस्य बनाकर हल निकाले प्रशासन।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/pigeons-should-not-eat-your-health/article-124412"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(2)56.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कबूतरों को दाना डालने की आदत समय के साथ आस्था में तब्दील हो गई और धीरे-धीरे आस्था की जड़े हमारे जहन में इतनी गहरी हो गई की हम वैज्ञानिक दृष्टिकोण को भी अनदेखी करने लगे हैं, जो न केवल प्रकृति के ईको सिस्टम को बर्बाद कर रहा बल्कि मानव जीवन को घातक संक्रमण व बीमारियों की ओर धकेल रहा है। चिकित्सकों व पर्यावरणविदें का तर्क है, दुनिया में 90% पक्षी कीटभक्षी और 10% बीजभक्षी होते हैं, जिसमें कबूतर भी शामिल है।  अनाज, ज्वार व बाजरा किसी भी पक्षी का नेचुरल फूड नहीं है। वहीं, जाने-अनजाने में इंसानी दखल से पक्षियों की खाद्यय शृखंला टूट रही है। वर्तमान में स्थिति यह हो गई कि कबूतर अब अपना मुख्य भोजन बीज खाना भूल गया, अब वह आर्टिफिशल फूड पर निर्भर हो गया। इतना ही नहीं कबूतरों को ज्वार-बाजरा खिलाना इंसान की दिनचर्या में शामिल हो गया। नियमित भोजन मिलने से उनकी संख्या में तेजी से इजाफा हुआ। जबकि, इनके पंखों की फड़फड़ाहट व बीट से हाइपर सेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस, फंग्ल इंफेक्शन हिस्टोप्लासमोसिस और क्रिप्टोकोकोसिस जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ गया। ऐसे में प्रशासन को आस्था और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बीच सामंजस्य बनाकर गंभीर चुनौति का हल निकालने के प्रयास करना चाहिए।</p>
<p><strong>छतों से सार्वजनिक स्थानों पर कबूतरों का कब्जा</strong><br />कबूतरों को दाना डालना अब लोगों की दिनचर्या में शामिल हो चुका है। छतों से लेकर सार्वजनिक स्थानों को ही पक्षी चुग्गा स्थल बना दिया है। कोटा बैराज हो या किशोर सागर तालाब की पाल, हर जगह बड़ी संख्या में कबूतरों का जमावड़ा लगा रहता है। ऐसे में यहां से लोगों के गुजरने के दौरान कबूतर की फड़फड़ाहट से पंखों से निकलने वाले बैक्टेरिया व सूखी बीट के वायरस हवा के साथ शरीर में पहुंचकर फेफड़े डेमेज कर रहे हैं। </p>
<p>- जिम्मेदार विभाग स्कूली स्तर पर बच्चों को करें जागरूक<br />- दान-पुण्य के फेर में फूड चैन और ईको सिस्टम को कर रहे बर्बाद </p>
<p><strong>विशेषज्ञ बोले - आर्टिफिशल फिडिंग बंद हो,  ईको सिस्टम से न करें छेड़छाड़</strong><br />प्रशासन को आस्था और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बीच सामंजस्य बिठाकर सामाजिक परिवर्तन की दिशा में सार्थक जागरूकता अभियान चलाना चाहिए। फेफड़ों के इंफेक्शन से पीड़ित मरीजों में सबसे ज्यादा संख्या उन मरीजों की है जो घरों की छतों पर नियमित दाना डालते हैं और सावर्जनिक स्थानों पर कबूतरों के सम्पर्क में रहते हैं। प्रशासन को आबादी से दूर खुली जगह पर पक्षी चुग्गा विकसित करना चाहिए ताकि कबूतर एक ही जगह इक्कठा हो सके और कॉलोनियों से संख्या घटे। कबूतरों की बीट से घातक बीमरिया बढ़ रही है।<br /><strong>- डॉ. केके डंग, सीनियर चेस्ट फिजिशियन</strong></p>
<p>कबूतर के पंखों की फड़फड़ाहट व बीट के सम्पर्क में आने से  फंग्ल इंफेक्शन हिस्टोप्लासमोसिस और क्रिप्टोकोकोसिस जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा रहता है। ऐसे में घर के आंगन, बालकनी या छत पर दाना डालने से बचें। प्रशासन को दूर कहीं खुले में दाना डालने की व्यवस्था करनी चाहिए। लेकिन यहां भी लोगों को दाना डालने के दौरान फिल्टर मास्क व दस्ताने का उपयोग करना चाहिए। <br /><strong>- डॉ. राजेंद्र ताखर, श्वांस रोग विशेषज्ञ मेडिकल कॉलेज</strong></p>
<p>किसी भी धर्म में यह नहीं लिखा है कि कबूतरों को दाना डाला जाए। प्रकृति ने उन्हें खुद भोजन जुटाने और जीवन जीने के लायक बनाया है। उन्हें दाना डालकर प्रकृति के ईको सिस्टम से खिलवाड़ कर रहे हैं। आर्टिफिशल फिडिंग तुरंत बंद होनी चाहिए। चूंकी, लोगों की आस्था इससे जुड़ी है। ऐसे में जिम्मेदार विभाग की निगरानी में आबादी से दूर ऐसा स्थान डवलप करना चाहिए,जहां पक्षियों को दाना डाला जा सके। ताकि, शहरी लोग प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से गंभीर बीमारियों से बच सके। वहीं, सार्वजनिक स्थानों पर दाना डालने पर प्रशासन को रोक लगानी चाहिए।<br /><strong>- प्रो. अनिल कुमार छंगाणी, पर्यावरण विभागाध्यक्ष, बीकानेर विवि</strong></p>
<p><strong>ज्वार-बाजरा व अनाज पक्षियों के फूड में शामिल नहीं</strong><br />दुनिया में 90% पक्षी कीटभक्षी व 10% बीजभक्षी होते हैं। कीटभक्षी-कीड़े-मकोड़े खाकर पर्यावरण को स्वच्छ बनाते हैं और बीज खाने वाले पक्षी एक स्थान से दूसरे स्थान पर बीज फैलाकर पेड़-पौधों का प्रसार करते हैं।  लेकिन, वर्तमान में इंसान से प्राकृतिक खाद्य  शृंखला में दखल कर फूड चैन तोड़ दी। जिसके दुष्परिणाम गंभीर बीमारियों के रूप में सामने आ रहे हैं। यदि, दान पुण्य ही करना है तो शहर में कई गौशाला है, वहां चारा डलवाएं। कैपटेविटी एनिमल स्पोंसरशिप के तहत चिड़ियाघर व बायोलॉजिकल पार्क में मौजूद वन्यजीवों के भोजन, स्वास्थ्य व देखरेख कर आस्था निभा सकते हैं। आस्था के नाम पर पक्षियों को गुलाम बनाना नेचर के खिलाफ है। कबूतरों की संख्या तेजी से बढ़ने के कारण  गौरेया, बुलबुल, नीलकंठ, कटवा सहित अन्य चिड़िया शहरों में लुप्त हो गई। प्रकृति में हर जीव का अपना किरदार है, जिसे छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए। <br /><strong>- अनुराग भटनागर, डीएफओ वन्यजीव विभाग कोटा</strong></p>
<p><strong>यह बोले प्रशासनिक अधिकारी</strong><br />आबादी से दूर चुग्गा स्थल बनाया जा सकता है लेकिन निगम के पास जमीन नहीं है। गायों के लिए कायन हाउस बनाए फिर भी लोग सड़कों पर ही चारा खिला रहे हैं। सामाजिक परिवर्तन के लिए लोगों को ही जागरूक होना होगा।  <br /><strong>- अशोक त्यागी, आयुक्त कोटा उत्तर नगर निगम </strong></p>
<p>धार्मिक व सामाजिक संस्थाएं प्रस्ताव बनाकर सुझाव दें तो केडीए अपना दायित्व निभाएगा। वैसे, यह काम नगर निगम का है। केडीए का काम आधारभूत संरचना विकसित करना है। <br /><strong>- हरफूल यादव, कमिशनर केडीए</strong></p>
<p><strong>कबूतर प्रेमी बोले- दिल को मिलता सुकून</strong><br />बेजुबानों का पेट भरना पुण्य है। कबूतरों को दाना डालने से सुकून मिलता है। यदि, प्रशासन कहीं पक्षी चुग्गा डवलप करता है तो हम वहां पर दाना डाल देंगे। <br /><strong>- श्याम मेवाड़ा, हितेश विजय, पक्षी प्रेमी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Aug 2025 17:24:26 +0530</pubDate>
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                <title>हो सकता है लार्वा विस्फोट, डेंगू का खतरा </title>
                                    <description><![CDATA[अस्तपालों की ओपीडी मौसमी बीमारियों को लेकर डेढ़ गुना बढ़ गई है। 
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-can-be-larva-explosion--risk-of-dengue/article-123463"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(1)30.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा क्षेत्र संक्रमण की दहलीज पर खड़ा है। क्षेत्र की सड़कों से लेकर कॉलोनियों के हर कोनों तक, जहां जमीन खाली है और बारिश की बूंदे जम गई या जलभराव है, वहां डेंगू के लार्वा पनपने का खतरा भी बढ़ने लगा है। क्षेत्र के कई खाली भूखंड लार्वा हॉटस्पॉट बन रहे है। क्षेत्र की महावीर नगर, दक्षिण विहार, बलिता रोड, संगोद रोड, रामनगर, छावनी व कृष्णा नगर, सुन्दर नगर, कैलाश विहार, चंचल विहार समेत क्षेत्र की कई ऐसी कॉलोनियां है जिनमें खाली पड़े भूखंडों में गंदगी व जलभराव हो रखा है। ऐसे भूखंडों में लार्वा बनने के साथ मच्छर भी तेजी से पनप रहे हैं। डॉ. सुधीर उपाध्याय ने बताया कि शहर में खाली पड़े भूखण्डों, क्षतिग्रस्त सड़कों पर बारिश का जमा पानी, छतों पर रखे सामान में इकट्ठा हुआ पानी में भी लार्वा पनप जाता है। जिससे मलेरिया व डेंगू के मच्छर पनपने का खतरा रहता है। यह कम पानी में भी पनप जाता है। समय रहते इन नियंत्रित करना जरूरी है। अस्तपालों की ओपीडी मौसमी बीमारियों को लेकर डेढ़ गुना बढ़ गई है। बता दें कि शहर में मौसमी बीमारियां डेंगू, मलेरिया, चिगनगुनिया, स्क्रबटायफस की रोकथाम के लिए संबंधित कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया गया था।</p>
<p><strong>ऐसे होता है लार्वा विस्फोट</strong><br />बारिश के बाद खाली भूखंडों, गड्ढों या अनुपयोगी वस्तुओं में पानी जमा हो जाता है। जमा हुआ पानी एडीज एजिप्टाई मच्छर पनपने का खतरा बना रहता है। इनसे डेंगू, चिकनगुनिया और जीका वायरस फैलता है। उसके सपंर्क में आने से बीमारी बढ़ने की संभावना ज्यादा रहती है।</p>
<p><strong>संभावित खतरे</strong><br />- लार्वा विस्फोट से मच्छरों की संख्या में तेजी से वृद्धि<br />- एक संक्रमित मच्छर सैकड़ों को कर सकता है संक्रमित<br />- क्षेत्र में डेंगू का प्रकोप बढ़ने का खतरा भी बना रहता है</p>
<p><strong>प्रशासन की आमजन को सलाह</strong><br />- अपने खाली प्लॉट की तुरंत सफाई करें<br />- घर के आसपास पानी न जमने दें<br />- टंकी, कूलर, गमले की नियमित सफाई करें<br />- फुल बाजू कपड़े पहनें, मच्छरदानी का उपयोग करें<br />- बुखार, शरीर दर्द हो तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें</p>
<p><strong>खाली पड़े प्लॉटों की नहीं हो रही सार-संभाल</strong><br />कई कॉलोनियों में कई प्लॉट खाली है तथा बरसात के दिनों में प्लॉटों में जमा गंदगी व बारिश के पानी से जलभराव हो गया है। लोग अपने प्लॉटों की सार-संभाल नहीं करने से वहां जमा पानी व गंदगी से लार्वा पनपने का खतरा भी बढ़ गया है। वहां निवास कर रहे लोगों में डेंगू व मलेरिया होने का डर भी सता रहा है।<br /><strong>- मनीश उपाध्याय निवासी आकाशवाणी कॉलोनी </strong></p>
<p><strong>स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें</strong><br />बरसात रूकने के बाद जहां पानी ठहर गया है या जमा हो गया है वहां लार्वा पनपने का खतरा बना रहता है। डेंगू का मच्छर साफ ठहरने हुए कम पानी में भी पनप जाता है। इसके लिए घरों  में आस-पास एवं कंटेनरों में पानी 5 से 7 दिन से ज्यादा जमा न होने देना चाहिए। कूलर, पक्षियों के परिंडे, फ्रिज के पीछे की ट्रे, गमले की ट्रे एवं अन्य पानी के पात्रों की सप्ताह में एक बार रगड़ कर सफाई अवश्य करें। पानी से भरे बर्तनों को ढक कर रखे, छत पर पड़े कबाड़, टीन, कनस्तर, टायर, मटके डिब्बे बोतल को हटा देना चाहिए।<br /><strong>- डॉ. सुधीर उपाध्याय, चिकित्सक</strong></p>
<p>साउथ और नॉर्थ से संबंधित काम निगम के अधीन है। शहर में अभी फोगिंग का कार्य चल रहा है। सेक्रेटरी व स्टेट के आॅर्डर अनुसार फोगिंग का काम, नालियों में तेल डालना ये सभी कार्य नगर निगम करवाता है। नगर निगम हमें कॉलोनीवाइज प्लान देता है, जिसकी हम मॉनिटरिंग भी करते है। कोई पॉजिटिव मरीज आता है तो उससे संबंधित हम देखते है।<br /><strong>- डॉ. घनश्याम मीणा, डिप्टी सीएमएचओ, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Aug 2025 15:20:14 +0530</pubDate>
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