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                <title>dap fertilizer - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>dap fertilizer RSS Feed</description>
                
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                <title>हरियाणा में डीएपी खाद के लिए धक्के खा रहा किसान : कालाबाजारी में खाद आसानी से उपलब्ध, सैलजा ने कहा- किसान हित में उचित कदम उठाएं सरकार </title>
                                    <description><![CDATA[कुमारी सैलजा ने मांग की कि किसानों को उनके ही गांव में पैक्स के माध्यम से खाद वितरित की जाए और कालाबाजारी करने वालों पर सख्त अंकुश लगाया जाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/in-haryana-the-farmers-who-are-pushing-for-dap-fertilizer/article-128074"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/selja.png" alt=""></a><br /><p>चंडीगढ़। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव व पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने कहा कि जब मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल के माध्यम से सरकार के पास होने वाली फसलों का पूरा विवरण क्षेत्रफल सहित मौजूद है, तो उसी हिसाब से डीएपी खाद का प्रबंध कर गांव में पैक्स पर ही वितरण करना चाहिए। इससे किसानों को खाद के लिए शहरों में आकर दिन-रात कतार में नहीं लगना पड़ेगा। कुमारी सैलजा ने कहा कि मौजूदा हालात यह हैं कि प्रदेश में किसान गेहूं की बिजाई के लिए डीएपी खाद को लेकर धक्के खा रहा है, जबकि कालाबाजारी में खाद आसानी से उपलब्ध है। सरकारी एजेंसियां आधार कार्ड पर एक किसान को केवल चार बैग खाद दे रही हैं और बाकी ब्लैक में खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को जल्द से जल्द किसान हित में उचित कदम उठाने चाहिए।</p>
<p>सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि हर जिले में डीएपी और यूरिया की कमी को लेकर किसानों में भारी रोष है और वे विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। जबकि कृषि मंत्री स्थिति को सामान्य बताते हुए आपूर्ति सुनिश्चित करने का दावा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को दावों के बजाय धरातल पर उतरकर खाद का वितरण करना चाहिए, ताकि किसानों को समय पर पर्याप्त खाद मिल सके और उनकी फसलें प्रभावित न हों। उन्होंने बताया कि अधिकतर जिलों से कालाबाजारी की शिकायतें आ रही हैं, जिससे किसान महंगी दरों पर खाद खरीदने को मजबूर हैं। कई जगह किसानों को घंटों लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ता है, यहां तक कि महिलाएं भी सुबह से लाइन में लगती हैं। किसान ङ्क्षचता जता रहे हैं कि समय पर खाद न मिलने से बिजाई प्रभावित होगी और फसलें खराब हो सकती हैं।</p>
<p>सांसद ने कहा कि किसानों को उनकी जरूरत के मुताबिक खाद नहीं मिल रही है और कई जगह कूपन न मिलने की वजह से भी परेशानी है। आधार कार्ड पर खाद वितरण से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उस व्यक्ति के नाम पर खेती है या नहीं। सरकार के पास जब किसान की जमीन और फसल का पूरा ब्यौरा है तो उसी के अनुसार खाद का प्रबंध होना चाहिए। कुमारी सैलजा ने मांग की कि किसानों को उनके ही गांव में पैक्स के माध्यम से खाद वितरित की जाए और कालाबाजारी करने वालों पर सख्त अंकुश लगाया जाए। उन्होंने कहा कि गेहूं की बिजाई के लिए इस समय किसानों को सबसे ज्यादा डीएपी खाद की जरूरत है और कांग्रेस इस मुद्दे पर किसानों के साथ खड़ी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Sep 2025 17:28:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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                <title>डीएपी की भारी किल्लत से धरतीपुत्र बेहाल, नैनो बन सकती है सारथी</title>
                                    <description><![CDATA[ नैनो डीएपी का इस्तेमाल कर पा सकते हैं अच्छी पैदावार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dhartiputras-are-suffering-due-to-severe-shortage-of-dap--nano-can-become-the-charioteer/article-95335"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/27rtrer-(4)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती में डीएपी की किल्लत विकराल हो गई है। धरतीपुत्र डीएपी  के लिए मारे-मारे फिर रहे हंै। रबी सीजन की फसलों गेहूं, चना, मसूर, सरसों की बुवाई होने का समय निकलता जा रहा है लेकिन डीएपी की कमी होने से काश्तकार परेशान हैं। इसकी वजह डीएपी की मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं होना है। अंतरराष्टÑीय बाजार में डीएपी की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही है। जिससे विदेश से डीएपी को आयात कम किया जा रहा है। कोटा संभाग में रबी की फसल के लिए इस सीजन में 1 लाख 15 हजार मीट्रिक टन की डिमांड है। लेकिन डिमांड की अपेक्षा 16 नवंबर तक महज 17 हजार 545 मीट्रिक टन डीएपी की आपूर्ति हो पाई है। कृषि विभाग के एक्सपर्ट की मानें तो किसानों को लिक्विड नैनो डीएपी का उर्वरक का इस्तेमाल कर अपनी रबी की फसल में उपयोग करनी चाहिए जिससे कम खर्च में अच्छी पैदावार हो सकती है। नैनो डीएपी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध भी है। </p>
<p><strong>डीएपी की किल्लत से बुवाई पर पड़ रहा असर</strong><br />खरीफ फसलों के समय लंबे समय तक बारिश जारी रहने से सभी फसलें बरसाती पानी की वजह से चौपट हो गई। अब रबी फसल की बुवाई का समय आया तो क्षेत्रीय किसानों को रबी फसलों की बुवाई के लिए डीएपी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। धरतीपुत्रों की समस्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। डीएपी खाद की मारामारी हर वर्ष होती आ रही है।  लेकिन इस साल कुछ ज्यादा ही हो रही है। जिससे फसलों की बुवाई में भी लेटलतीफी हो जाती है। समय पर खाद उपलब्ध नहीं होने से फसलों की बुवाई देरी से करने को मजबूर है। इसका असर धरतीपुत्रों की पैदावार पर पड़ता है। उन दिनों धरतीपुत्रों के चेहरों पर मायूसी झलकती है। </p>
<p><strong>डिमांड 1 लाख 15 हजार मीट्रिक  टन, आपूर्ति महज 17 हजार 545 मीट्रिक  टन</strong><br />कोटा संभाग में रबी की फसल के लिए इस सीजन में 1 लाख 15 हजार मीट्रिक टन की डिमांड है। लेकिन डिमांड की अपेक्षा 16 नवंबर तक महज 17 हजार 545 मीट्रिक टन डीएपी की आपूर्ति हो पाई है। इसी प्रकार यूरिया और एसएसपी की भी डिमांग के अनुरूप सप्लाई नहीं हो पा रही है। कोटा संभाग में रबी की फसल के लिए यूरिया की कुल 3 लाख 52 हजार मीट्रिक टन की डिमांड है। लेकिन यूरिया की सप्लाई महज 69 हजार 625 मीट्रिक टन ही हुई हो पाई। इसी प्रकार एसएसपी की डिमांड 1 लाख 22 हजार मीट्रिक टन है लेकिन 37 हजार 659 मीट्रिक टन की ही आपूर्ति हो पाई है। वर्तमान में डीएपी का एक कट्टे की कीमत 2400-2500 तक की है। इसके लिए किसान से 1350 लिए जाते है जबकि सरकार इस पर 1094 सब सीटी डीएपी कंपनी को देती है। लेकिन अंतरराष्टÑीय बाजार में डीएपी की कीमत बढ़ गई है। ऐसे में निर्माता कंपनियों ने भाव भी बढ़ा दिए है लेकिन सरकार डीएपी कंपनियों को सबसिडी1094 ही दे रही है। इस वजह से निर्माता कंपनिया डीएपी का आयात कम कर रही है। </p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />भारत में 80 से 90 प्रतिशत डीएपी सऊदी अरब और मोरक्को से आती है। अंतरराष्टÑीय बाजार में वर्तमान में डीएपी की कीमतें बढ़ गई है। डीएपी निर्माता कंपनियां भारत में कम मात्रा में आयात कर रही है। जिस वजह से भारत में कम मात्रा में डीएपी आ रही है। इस कारण से भारत में डीएपी की मारामारी हो रही है। डीएपी की समस्या का समाधान के लिए विकल्प अपनाए जा सकते है। जिसमें पहला विकल्प नैनो डीएपी है। इसमें बीज को उपचारित करके बुवाई कर सकते है। इसका काम डीएपी के समान है। 3 एमएल प्रति किलो बीज को उपचारित करके बुवाई कर सकते है। दूसरा विकल्प तीन बैग एसएसपी और एक बैग यूरिया काम में लिया जा सकता है। जिसमें डीएपी की तुलना में ज्यादा पौषक तत्व मिलते है। साथ ही कैल्शियम और सल्फर भी पौधों को मिलता है। जो कि डीएपी में नहीं मिलता है। तीसरा विकल्प एनपीके गेड्स इसमें 20-20-13, 12-32-16, 16-16-16 ये ग्रेड बाजार में उपलब्ध है। डीएपी में केवल नाइट्रोजन व फास्फोरस मिलता है जबकि एनपीके ग्रेड्स में नाइट्रोजन, फास्फोरस के साथ पोटास तीनों मिलते है। जो मिट्टी के लिए  बहुत फायदेमंद है। इससे फसल का उत्पादन भी बढ़ता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढती है। मिट्टी कम पानी भी नुकसान नहीं होता। तेज हवा और आंधी से बचने की भी क्षमता बढ़ती है। <br /><strong>-डॉ. नरेश कुमार शर्मा, सहायक निदेशक, कृषि विभाग, कोटा</strong></p>
<p>यह सही है कि इस बार डीएसपी की अधिक किल्लत आ रही है। इसका प्रमुख कारण डिमांड की अपेक्षा डीएपी की आपूर्ति कम होती है। ऐसे में कृषि विभाग को चाहिए कि कृषि विभाग को पूरे क्षेत्र का सर्वे करवा कर डीएपी की अतिरिक्त मंगवाना चाहिए। किसानों का डीएपी पर ज्यादा विश्वास रहता है। काश्तकार नैनो डीएपी लेते नहीं है।<br /><strong>-लोकेश मीणा, प्रोफेसर,कृषि महाविद्यालय, कोटा</strong></p>
<p><strong>किसानों की पीड़ा</strong><br /> रबी की बुवाई के समय डीएपी खाद के लिए इस वर्ष मारामारी आगामी वर्ष ओर अधिक मारामारी बढ़ती जा रही है। किसानों को नैनो डीएपी के बारे में जानकारी का अभाव है। ऐसे में कृषि विभाग को समय-समय पर गांव-ढाणी में नैनो डीएपी का उपयोग करने के बारे में जागरूक करने की जरूरत है। <br /><strong>-नीरूशंकर शर्मा, किसान निवासी बांसी </strong></p>
<p>डीएपी खाद के लिए ज्यो-ज्यो समय गुजरता जा रहा है। वैसे-ही मांग बढती जा रही है। संबंधित विभाग की कमी है या सरकार से जिलेभर में मांग अनुरूप डीएपी खाद की आपूर्ति ही नही होती है। काश्तकारों का डीएपी पर अधिक भरोसा है। ऐसे में किसानों को जब तक कृषि विभाग नैनो डीएपी के बारे में प्रचार-प्रसार नहीं किया जाएगा तब तक कैसे उपयोग करेंगे।  अभी किसानों को नैनो डीएपी के बारे में पूरी जानकारी नहीं है। <br /><strong>-मुकुट बिहारी दाधीच, किसान निवासी दुगारी </strong></p>
<p>केन्द्र सरकार की नीतियां ही मुख्यरूप से जिम्मेदार है। इस सरकार द्वारा पिछले सालों में खाद पर सब्सिडी में भारी कटौती करने के कारण विदेशों से खाद के आयात पर शिकंजा कस दिया है। इससे खाद की कमी आ गई है। अत: कालाबाजारी पर सख़्ती से रोक लगाकर सभी गरीब व मध्यम किसानों को सहकारी समितियों के माध्यम से डीएपी उपलब्ध करवाना चाहिए।                    <br /><strong>  -दुलीचंद बोरदा, राज्य उपाध्यक्ष, अखिल भारतीय किसान सभा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Nov 2024 15:01:32 +0530</pubDate>
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                <title>डीएपी खाद की भारी किल्लत, फसल बुवाई में आ रही बाधा </title>
                                    <description><![CDATA[जिम्मेदार हर बार की तरह इस बार भी धरतीपुत्रों को समय पर खाद उपलब्ध नहीं करवा पाएं है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/there-is-a-huge-shortage-of-dap-fertilizer--hindrance-in-sowing-crops/article-93573"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/27rtrer-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। डीएपी खाद की किल्लत मारा मारी हो रही है। क्षेत्रीय अन्नदाताओं को रबी फसल बुवाई के लिए डीएपी खाद की आवश्यकता हो रही है। यह समय पर उपलब्ध नहीं होने से फसल बुवाई में बाधा आ रही है। अन्नदाताओं ने अपने खेतों की हंकाई-जुताई करके तैयारी पूर्ण कर रखी है। फसल बुवाई का समय निकलता जा रहा है। इस सीजन की बुवाई के लिए डीएपी खाद नही मिल पा रहा है। इसकी वजह से अन्नदाता परेशान हो रहे है। जिम्मेदार क्षेत्र में खाद की किल्लत को दूर नहीं कर पा रहे है। अन्नदाताओ का कहना है कि इस समय सरसों की फसल की बुवाई के लिए खेतों की हंकाई-जुताई कर तैयार कर रखें है। मंहगें दामों में रबी फसलों के लिए बीज तो खरीद लिया। इसके साथ बुवाई के लिए डीएपी खाद उपलब्ध नही हो रहा है। जो सरसों फसल की बुवाई का समय निकलता जा रहा है। समय पर डीएपी उपलब्ध होता तो क्षेत्र में सरसों की फसल का रकबा बढ़ता। मगर खाद उपलब्ध नहीं होने से समय बीत जाएगा जो बाद में मजबूरन जौ, गेहूं, चना, मसूर रबी फसलों की बुवाई करनी पड़ेगी। इस समय भी खाद उपलब्ध होगा तो इसके लिए भी खाद का इंतजार करना पड़ेगा। आखिर करें तो क्या करें। फसल की बुवाई से पहले से परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जो  कटाई तक व उपज को बेचने जाने तक अन्नदाताओ की कड़ी परीक्षा होती है। मगर फिर भी अन्नदाता निराश नही होतें है। उपज भी कभी-कभार तो पूरा खर्च करवाने के बाद भी एक दाना तक हाथ नही लग पाता है। इस समय बुवाई के लिए खाद को लेकर परेशानी चल रही है। जिम्मेदार हर बार की तरह इस बार भी धरतीपुत्रों को समय पर खाद उपलब्ध नहीं करवा पाएं है।</p>
<p><strong>क्षेत्रीय किसानों का यह कहना</strong><br />रबी फसल बुवाई के लिए समय बीतता जा रहा है। मगर फसल बुवाई के लिए डीएपी खाद उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। जो किसानों को खाद के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। जिम्मेदार जल्द इस समस्या को दूर करें।<br /><strong>- फूंदीलाल माली, किसान निवासी सादेड़ा</strong></p>
<p>इस समय सरसों, तारामीरा फसल की बुवाई का समय चल रहा है। मगर डीएपी नही मिलने से खेतों की हंकाई-जुताई कर तैयार कर रखें है। खाद नही मिलने से समय पर बुवाई नही हो पा रही है। मजबूरन किसान परेशान हो रहे है। संबंधित विभाग खाद की किल्लत को जल्द दूर करें।<br /><strong>- कैलाश मीणा, किसान निवासी गुजरियाखेड़ा </strong></p>
<p>सरसों फसल के लिए डीएपी खाद जरूरी होता है। इससे फसल अच्छी ग्रोथ लेती है व पैदावार भी अधिक देती है। मगर डीएपी के लिए भागादौड़ी शुरू हो रही है। समय पर खाद उपलब्ध हो तो फसलों की बुवाई भी समय पर हो सके। तो पैदावार भी अच्छी हो सके। <br /><strong>- देवीशंकर गुर्जर, किसान निवासी रामगंज </strong></p>
<p>पहले से ही हाथ खाली थे। जो खाद नही ले सके हैं। अब कुछ उपज हाथ लगी है, जिसे बेचकर पैसा हाथ में आया है। अब छह बीघा जमीन में रबी फसल की बुवाई के लिए डीएपी खाद उपलब्ध नही हो पा रहा है। जो इधर-उधर भटकने को मजबूर होना पड़ रहा है।<br /><strong>- कालूलाल भील, किसान निवासी कल्याणपुरा</strong></p>
<p>किसान का कहना है कि छह बीघा जमीन हंकाई-जुताई कर तैयार कर रखी है। डीएपी खाद के लिए तीन-चार बार बांसी व अन्य कस्बों में पहुंच गए। पर खाद ही उपलब्ध नही हो रहा है। जो सरसों की बुवाई में देरी हो रही है। अभी तैयार खेत देखें, नही जा रहे है। जल्द खाद उपलब्ध हो तो भागादौड़ी भी खत्म हो।<br /><strong>- हीरालाल बैरवा, किसान निवासी फतेहपुरा </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कल एक गाडी डीएपी की 358 बैग डीएपी कोटा से मगंवाया गया था। जिन्हें एक किसान को 2 बैग देकर वितरण किया गया है। <br /><strong>- नरेन्द्र सिंह, व्यवस्थापक, क्रय विक्रय सहकारी समिति बांसी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Oct 2024 15:02:13 +0530</pubDate>
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